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नैना मुस्कराते हुए बोली- क्या कानपुर में भी यही सिस्टम था?टीना हँसते हुए बोली- काफी अरसे से यही सिस्टम चल रहा है, आप मुस्करा क्यों रहीं हैं दीदी?नैना बोली- तभी शायद तुम्हारे मित्र घर में आते होंगे तुम दोनों का कल्याण करने.मीना और टीना भी यह सुन कर मुस्कराने लगी.
फिर हम थोड़ी देर यों हीं ही बातें करते रहे और फिर दोनों उठ कर अपने कमरे में चली गई और मौसी भी एक बार सारे घर का क्कर लगा आई.नैना मौसी के जाने के बाद मेरे कमरे में आ आकर बैठ गई.मैंने पूछा- नैना तुमको मालूम था कि मौसी घर का चक्कर लगाएगी?नैना बोली- मालूम तो नहीं था लेकिन ऐसा अंदाजा था कि शायद मौसी घर का चक्कर लगाएगी.
इतने में दोनों बहनें अपनी अपनी अपनी नाइटी पहन कर आ गई मेरे कमरे में और वहाँ नैना को देख कर चकरा गई.मैंने कहा- नैना दीदी से आप लोग घबराओ नहीं, वो हमारे साथ ही रहेंगी और हम सबकी मदद भी करेंगी. पहले कमरे का दरवाज़ा तो बंद कर आओ प्लीज.मीना जा कर दरवाज़ा बंद कर आई.
मैं उठा और सबसे पहले मीना और टीना को होटों पर एक एक किस की और दोनों को बारी बारी से जफ़्फ़ी भी डाली.नैना उठ कर आ गई और मीना की नाइटी उतारने लगी और उसके बाद उसने टीना की भी नाइटी उतार दी.फिर उसने मेरा पजामा और कुरता भी उतार दिया.जब हम तीनो नंगे हो गए तो वो खुद भी अपने कपड़े उतारने लगी.
अब हम सब एक दूसरे को देखने लगे. मीना का जिस्म थोड़ा मोटापा लिए हुए था और टीना का जिस्म एक कच्ची कली की तरह लग रहा था. दोनों की चूतें काले और घने बालों से ढकी हुई थी, मीना के मुम्मे काफी सुन्दर लग रहे थे, एकदम सफ़ेद और मुलायम!टीना के मुम्मे अभी काफी छोटे लेकिन सॉलिड लग रहे थे. ऐसा लगता था कि दोनों बहनों के मुम्मों की चुसाई ज़्यादा नहीं हुई थी.
टीना और मीना ने जब नैना को नग्न देखा तो उनके मुख से अपने आप ही ऊऊह्ह्ह निकल गया.दोनों नैना के पास गईं और उसके शरीर के साथ खेलने लगी, उसके मुम्मों, चूतड़ों से वो बहुत ही प्रभावित हुई थी.नैना ने भी उसके मुम्मों को हाथ लगा कर देखा कि कैसे हैं.
नैना पहले मीना को ले आई मेरे पास, उसने आते ही प्रगाढ़ आलिंगन किया मुझको और फिर मैं उसके लबों को चूसने लगा.मीना से मैंने पूछा- तुम मुझ से बहुत बड़ी हो इसलिए पूछता हूँ कि कैसे मुझसे चुदना पसंद करोगी?मीना ने मेरे लौड़े को देखा और उसको हाथ में लिया और फिर झुक कर उसको मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा और फिर खड़ी हो गई और बोली- लगता तो है कि यह लम्बी दौड़ का घोड़ा है, सबसे पहले मैं इस घोड़े पर खुद सवारी करूंगी.नैना ने कहा- ठीक है आ जाओ मैदान में!
मैं जा कर बेड में लेट गया, मीना आई मेरे दोनों तरफ टांगें रख कर बैठ गई और मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया. मैं बड़े शांत भाव से लेटा रहा और उसको अपने घुड़सवारी के अहंकार को मिटाने के उपाय सोचता रहा.मीना ने लंड अंदर डालने की कारवाई पूरी की और अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसकी चूत काफी टाइट थी और गीली भी कुछ कम थी, तो रगड़ ज्यादा रही थी.मैं उसके मुम्मों को छूने लगा और चूचियों के साथ गोलम गोलाई का खेल खलने लगा.
मीना ने धीरे से शुरू करके अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और आँखें बंद कर के ऊपर नीचे हो रही थी और उसके हर धक्के का असर उसके मोटे मुम्मों पर पड़ रहा था जो उछल रहे थे बेरोकटोक!मैं और नैना उसके मुम्मों का नाटक देख रहे थे.लेकिन नैना अपने हाथ से टीना की चूत को गर्म कर रही थी और हल्के से उसकी भग को रगड़ रही थी.
मीना 5 मिन्ट ऐसे ही मुझको चोदती रही और फिर उसके मुंह से यह शब्द निकल रहे थे- मार दूंगी साले, तुझ को छोडूंगी नहीं, हर बार बीच में छोड़ जाता है भड़वे.ऐसी बातों के साथ वो पागलों की तरह चोद रही थी मुझको!मैं और नैना थोड़ी हैरानी से उसके इस अजीब रवैये को देख रहे थे..
फुल स्पीड से ऊपर नीचे होते हुए वो एक ज़ोर की चीख मार कर मेरे ऊपर पसर गई और उसका जिस्म ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगा. मैंने उसको एक कस के जफ़्फ़ी भी डाली हुई थी फिर भी वो बेहद कांप रही थी.
नैना टीना को बुला लाई और उससे कहने लगी- यह देख यह क्या हो रहा है तेरी बहन को?टीना बड़े आलखन से बोली- दीदी को ऐसे ही होता है जब इसका छूट जाता है. आप फ़िक्र ना करें, अभी ठीक हो जायेगी.मैं भी उठ कर नैना के पीछे खड़ा हो गया और मेरा मोटा खड़ा लंड नैना की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था.यह देख कर टीना जल्दी से आई और नैना को हटा कर खुद खड़ी हो गई.मेरी नज़र तो मीना के नज़ारे पर लगी हुई थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया.
टीना अब मेरे लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी और उसको अपनी चूत पर भी रगड़ने लगी.मैंने नैना की तरफ देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि मैं टीना के साथ शुरू हो जाऊँ.टीना से पूछा- कैसे चुदवाना है?तो वो बोली- घोड़ी बन कर यार सतीश!
फिर हम थोड़ी देर यों हीं ही बातें करते रहे और फिर दोनों उठ कर अपने कमरे में चली गई और मौसी भी एक बार सारे घर का क्कर लगा आई.नैना मौसी के जाने के बाद मेरे कमरे में आ आकर बैठ गई.मैंने पूछा- नैना तुमको मालूम था कि मौसी घर का चक्कर लगाएगी?नैना बोली- मालूम तो नहीं था लेकिन ऐसा अंदाजा था कि शायद मौसी घर का चक्कर लगाएगी.
इतने में दोनों बहनें अपनी अपनी अपनी नाइटी पहन कर आ गई मेरे कमरे में और वहाँ नैना को देख कर चकरा गई.मैंने कहा- नैना दीदी से आप लोग घबराओ नहीं, वो हमारे साथ ही रहेंगी और हम सबकी मदद भी करेंगी. पहले कमरे का दरवाज़ा तो बंद कर आओ प्लीज.मीना जा कर दरवाज़ा बंद कर आई.
मैं उठा और सबसे पहले मीना और टीना को होटों पर एक एक किस की और दोनों को बारी बारी से जफ़्फ़ी भी डाली.नैना उठ कर आ गई और मीना की नाइटी उतारने लगी और उसके बाद उसने टीना की भी नाइटी उतार दी.फिर उसने मेरा पजामा और कुरता भी उतार दिया.जब हम तीनो नंगे हो गए तो वो खुद भी अपने कपड़े उतारने लगी.
अब हम सब एक दूसरे को देखने लगे. मीना का जिस्म थोड़ा मोटापा लिए हुए था और टीना का जिस्म एक कच्ची कली की तरह लग रहा था. दोनों की चूतें काले और घने बालों से ढकी हुई थी, मीना के मुम्मे काफी सुन्दर लग रहे थे, एकदम सफ़ेद और मुलायम!टीना के मुम्मे अभी काफी छोटे लेकिन सॉलिड लग रहे थे. ऐसा लगता था कि दोनों बहनों के मुम्मों की चुसाई ज़्यादा नहीं हुई थी.
टीना और मीना ने जब नैना को नग्न देखा तो उनके मुख से अपने आप ही ऊऊह्ह्ह निकल गया.दोनों नैना के पास गईं और उसके शरीर के साथ खेलने लगी, उसके मुम्मों, चूतड़ों से वो बहुत ही प्रभावित हुई थी.नैना ने भी उसके मुम्मों को हाथ लगा कर देखा कि कैसे हैं.
नैना पहले मीना को ले आई मेरे पास, उसने आते ही प्रगाढ़ आलिंगन किया मुझको और फिर मैं उसके लबों को चूसने लगा.मीना से मैंने पूछा- तुम मुझ से बहुत बड़ी हो इसलिए पूछता हूँ कि कैसे मुझसे चुदना पसंद करोगी?मीना ने मेरे लौड़े को देखा और उसको हाथ में लिया और फिर झुक कर उसको मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा और फिर खड़ी हो गई और बोली- लगता तो है कि यह लम्बी दौड़ का घोड़ा है, सबसे पहले मैं इस घोड़े पर खुद सवारी करूंगी.नैना ने कहा- ठीक है आ जाओ मैदान में!
मैं जा कर बेड में लेट गया, मीना आई मेरे दोनों तरफ टांगें रख कर बैठ गई और मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया. मैं बड़े शांत भाव से लेटा रहा और उसको अपने घुड़सवारी के अहंकार को मिटाने के उपाय सोचता रहा.मीना ने लंड अंदर डालने की कारवाई पूरी की और अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसकी चूत काफी टाइट थी और गीली भी कुछ कम थी, तो रगड़ ज्यादा रही थी.मैं उसके मुम्मों को छूने लगा और चूचियों के साथ गोलम गोलाई का खेल खलने लगा.
मीना ने धीरे से शुरू करके अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और आँखें बंद कर के ऊपर नीचे हो रही थी और उसके हर धक्के का असर उसके मोटे मुम्मों पर पड़ रहा था जो उछल रहे थे बेरोकटोक!मैं और नैना उसके मुम्मों का नाटक देख रहे थे.लेकिन नैना अपने हाथ से टीना की चूत को गर्म कर रही थी और हल्के से उसकी भग को रगड़ रही थी.
मीना 5 मिन्ट ऐसे ही मुझको चोदती रही और फिर उसके मुंह से यह शब्द निकल रहे थे- मार दूंगी साले, तुझ को छोडूंगी नहीं, हर बार बीच में छोड़ जाता है भड़वे.ऐसी बातों के साथ वो पागलों की तरह चोद रही थी मुझको!मैं और नैना थोड़ी हैरानी से उसके इस अजीब रवैये को देख रहे थे..
फुल स्पीड से ऊपर नीचे होते हुए वो एक ज़ोर की चीख मार कर मेरे ऊपर पसर गई और उसका जिस्म ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगा. मैंने उसको एक कस के जफ़्फ़ी भी डाली हुई थी फिर भी वो बेहद कांप रही थी.
नैना टीना को बुला लाई और उससे कहने लगी- यह देख यह क्या हो रहा है तेरी बहन को?टीना बड़े आलखन से बोली- दीदी को ऐसे ही होता है जब इसका छूट जाता है. आप फ़िक्र ना करें, अभी ठीक हो जायेगी.मैं भी उठ कर नैना के पीछे खड़ा हो गया और मेरा मोटा खड़ा लंड नैना की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था.यह देख कर टीना जल्दी से आई और नैना को हटा कर खुद खड़ी हो गई.मेरी नज़र तो मीना के नज़ारे पर लगी हुई थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया.
टीना अब मेरे लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी और उसको अपनी चूत पर भी रगड़ने लगी.मैंने नैना की तरफ देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि मैं टीना के साथ शुरू हो जाऊँ.टीना से पूछा- कैसे चुदवाना है?तो वो बोली- घोड़ी बन कर यार सतीश!