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आइस्ते आइस्ते लड़की ने अपनी कमर हिलाकर मालविका की गांड मारनी शुरू कर दी | धीरे धीरे मालविका की गांड का छल्ला खुलने लगा था और उसकी गांड में होने वाला दर्द भी थमने लगा | लड़की अभी भी आइस्ते आइस्ते ही अपनी कमर हिला रही थी | मालविका अब दर्द बर्दाश्त करने की स्थिति में थी | मालविका ने अपनी दर्द से थरथराई गांड में मोटा बेजान लंड लिए हुए ही लड़की का हाथ थामा और उसे अपनी पीठ पर लाद लिया | खुद बिस्तर पर घुटनों के बल कुतिया की पोजीशन में आ गयी | अब उसकी गाड़ भारी भरकम मांसल सुडौल चुताड़ो के साथ पूरी तरह से ऊपर को उठी हुई थी और उसमे रबर का मोटा लंड धंसा हुआ था | लड़की को पोजीशन एडजस्ट करने में थोडा टाइम लगा लेकिन उसने कमर हिलानी बंद नहीं की | उसने अपने हाथों और पैरो पर खुद को उल्टा टिकाया और जोर लगाकर मालविका की गांड में लंड पेलने लगी | मालविका को इस तरह से अन्दर तक गहराई तक गांड में लंड जाने से दर्द हो रहा था लेकिन मुट्ठी भींचकर वो बर्दाश्त कर रही थी | उसने अपना मुहँ बिस्तर में घुसेड़ रखा था | मालविका की गांड का छेद टाइट था और उसमे रबर का लंड पेलने के लिए लड़की को चूत में लंड पेलने से ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा था, इतना जोर लगाना पड़ रहा था उसके पैर पंजो पर टिक जाते थे लेकिन वो भी कहाँ हार मानने वाली थी | उसने भी मालविका की गांड में हचक हचक के लंड पेल कर उसको दर्द भरी वो सनसनाहट दी जिसको वो भूखी थी | मालविका दर्द भरी कामुक तरंगे अपने बदन में महसूस करने लगी थी | मालविका अपनी गांड की गहराई में उस बेजान लंड को महसूस कर रही थी | मालविका मादकता भरे दर्द से कराह रही थी और लड़की जोर जोर से हांफते हुए बिना रुके मालविका की गांड मार रही थी | इतना आसन नहीं होता लगातर बिना रुके किसी की कसी गांड को इस तरह से चोदना | लड़की का स्टैमिना अच्छा था लेकिन उसकी भी सांसे उखड़ने लगी थी, मुहँ से हांफती उसकी गरम सांसे मालविका की गर्दन को छु रही थी |
मालविका - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ लगता है तुम थक गयी हो, बहुत मेहनत लगती है इसमें | थोड़ा आराम कर लो | गांड में लंड पेलने में दम निकल जाता है इतना जोर लगाना पड़ता है |
मालविका के इशारे पर लड़की ने लंड निकाल लिया और मालविका की गाड़ का खुला हुआ गुलाबी छेद दिखने लगा | गाड़ के चारो तरफ गुलाबी लालिमा लिए हुए घेरा और उसके बाद मोटे बेजान लंड से बुरी तरह फैलाकर कर चौड़ा किया गया मालविका की गांड का सख्त छेद पूरी तरह से खुला हुआ था | छेद इतना खुल गया था की बाहर से ही मालविका की गांड की सुरंग की गुलाबी लालिमा साफ़ दिख रही थी |
मालविका ने लड़की को बांहों में भर कर एक लम्बा किस किया, ये एक तरह से थैंक्यू किस था जो मालविका ने उसकी गांड को इतनी अच्छी तरह चोदने के लिए दिया था | गांड में जाते मोटे बेजान लंड की सनसनाहट से उसकी कमर चूतड़ मन मस्तिष्क दिली दिमाग सब झूम उठे थे | उसकी गांड का दर्द चुताड़ो से लेकर जांघो तक फैला हुआ था | उसके गांड की खुजली भी अब शांत ही थी फिर भी मालविका अपने को पूरी तरह संतुष्ट करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती थी | उसने लड़की को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर आ गयी | उसकी कमर के ऊपर दोनों पैर दोनों तरफ टिकाकर उसके लंड के ठीक सामने खुद को पोजीशन कर लिया | लड़की ने लंड को बिलकुल मालविका की गांड के सामने तान दिया था | मोटा सा बेजान लंड मालविका अपनी चौड़े चुताड़ो के खुले गांड के छेद में लेने लगी | उसने अपने जबड़े सख्त किये और लंड पर बैठने लगी | लंड में बिना किसी दिक्कत के उसकी गुलाबी गांड के चौड़े छेद धसने लगा |
एक ही बार में मालविका की खुली गांड पूरा का पूरा लंड जड़ तक घोट गयी | मालविका ने एक लम्बी कराह और हुंकार एक साथ भरी, जैसे कोई जंग जीत ली हो | अब उसकी बारी गांड की बची कुची खुजली मिटाने की थी | उसने ऊपर नीचे होना शुरू किया और उसी के साथ वो मोटा बेजान लंड उसकी गांड का मर्दन करने लगा | सब कुछ मालविका के नियंत्रण में था, जीतनी स्पीड में खुद की गांड मारना चाहती थी, जितनी गहराई तक मारना चाहती थी, सब कुछ उसी पर निर्भर था | मालविका भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती थी | उसने फुल स्पीड में लड़की के ऊपर उछलना शुरू किया और मोटा बेजान लंड भी उसी तेजी से मालविका की गुलाबी कसी गांड को चीर कर उसकी गुलाबी सुरंग में सरपट दौड़ने लगा, मालविका की गांड की गुलाबी दीवारों को रौदने लगा | जिस स्पीड में मालविका अपनी कसी गांड में लंड ठुसने में लगी थी, उससे रबर का लंड झुक जा रहा था | नीचे लड़की ने बेजान लंड को कसकर थाम लिया ताकि वो मोटा सा रबर लंड मालविका की गांड की गहराई तक जा सके, और उसकी गांड की सुरंग की दीवारों के हर कोने को रगड़ सके | जिससे मालविका की गांड की खुजली दूर हो सके और उसके जिस्म को एक अनोखा सा वासना का सुखद अनुभव हो सके | मालविका के जिस्म के कोने कोने में आग लगी हुई थी और गांड में जाते मोटे लंड के स्पंदन ही उसे बुझा सकते थे | मालविका भी पूरा जोर लगाये पड़ी थी | जीतनी तेज झटका होगा, उतनी तेज लंड गांड में घुसेगा और उतनी तेज ही गांड में कम्पन उठेगा, जो उसके चुताड़ो जांघो पिंडलियों पेट पीठ कमर छाती सर दिल और दिमाग सबको हिला देगा और गांड से निकलने वाली दर्द भरी उत्तेजना की तरंगे उसके शरीर के कोने कोने की प्यास बुझा देगी, उसके जिस्म की नस नस को कंपा देगी | मालविका बस उत्तेजना से तपते शरीर और वासना से नहाये दिलो दिमाग को ध्यान में रखकर बेतहाशा अपनी गांड में मोटा सा रबर लंड ले रही थी | खुद ही खुद की गांड मार रही थी और वासना में सिसकारियो के साथ कुछ भी बडबडा रही थी | इतनी तेज चुदाई से उसकी सांसे भी धौकनी की तरह चलने लगी थी | वो बुरी तरह हांफने लगी थी, जाहिर सी बात है इसका असर उसके धक्को पर पड़ रहा था, उसके तेज हांफने के कारन उसकी गांड में लंड जाने की स्पीड भी कम हो गयी थी जबकि इस समय तो चरम पाने के लिए बेतहाशा धक्को की जरुरत थी |
इस बार लड़की बोली - मैडम आप थक गयी है, क्या मै आपको अच्छा फील करा सकती हूँ |
लड़की की बात मालविका को सही लगी | मालविका झट से उसके ऊपर से हटकर बिस्तर पर आ गयी और पीठ के बल लेटकर अपनी जांघे हवा में उठा दी | लड़की भी उसी फुर्ती से बिस्तर से उठी और मालविका की जांघो के बीचो बीच अपनी जगह बनाकर उसकी गांड में बेदर्दी से लंड घुसेड दिया | अब दर्द की परवाह न मालविका को थी न उस लड़की को इस बात का ख्याल रखना था | अब तो सारी जद्दोजहद अपने जिस्म की आग बुझाने की थी उसके लिए चाहे मुसल लंड से चुदना पड़े या गांड फड़वानी पड़े | लड़की ने जड़ से बेजान लंड को कसकर थाम रखा था और मालविका की गांड के टाइट छेद में बेतहाशा पेल रही थी | मालविका भी अपनी जांघो को अपने हाथो में फंसाए अपनी चूत को बेतहाशा रगड़ रही थी | दोनों एक दुसरे की आँखों में देख रही थी | मालविका गांड में जाते मोटे लंड के कारन उत्तेजना से लम्बी लम्बी सिसकारियां भर रही थी और मादकता से कराह रही थी | लड़की ने पूरी ताकत लगाकर पूरा लंड मालविका की गांड में घुसेड़ कर चार पांच करारे पुरे पुरे झटके दे मारे | पूरा का पूरा लंड हर झटके के साथ मालविका की गांड में घुस गया और उसके आखिरी छोर पर जोरदार ठोकरे मारी | लंड मालविका की गांड की गुलाबी सुरंग के उपरी हिस्से में जाकर टकराया और दर्द के एक तीखी तरंग उसके चुताड़ो, जांघो और पिंडलियों को हिला गयी | इतनी देर से मालविका अपने जिस्म को कठोर करके अपनी गांड मोटे लंड को ले रही थी लेकिन इन करारे झटको और उसके बाद उठने वाली दर्द भरी तरंग मालविका के हाथ पाँव ढीले कर दिए | मोटे लंड को अपनी जलती गांड में लेने की और ज्यादा सहने की शक्ति मालविका के शरीर में नहीं बची थी | मोटा लंड जैसे ही गांड की सुरंग के उपरी हिस्से से टकराया था मालविका दर्द से बेहाल हो गयी उसके शरीर ने हाथ खड़े कर दिए , उसकी जांघे लंड के झटके से बने कम्पन से थरथराने लगी, उसके चूतड़ अपने आप हिलने लगे | मालविका का उसके शरीर में नियंत्रण समाप्त हो गया | मालविका ने गांड मरवाकर कर भी अपने चरम सुख को पा लिया | मालविका के हाथ पाँव ढीले पड़ने लगे | उसका शरीर निढाल होने लगा | उसके चुताड़ो का दर्द कम होने लगा, मालविका ने अपनी चूत को रगड़ना छोड़ लड़की को अपनी बांहों में भर लिया | उसे बेतहाशा चूमने लगी, अपनी सांसे व्यवस्थित करने लगी |
लड़की को लगा मालविका पूरी तरह तैयार है रबर का लंड घोटने को, उसने हल्का सा कमर को पीछे खीचा और आगे को एक जोरदार धक्का दिया | मालविका की गरम चूत की गीली दीवारों को चीरता हुआ लंड मालविका की मखमली सुरंग में अन्दर तक धंस गया | फिर क्या था, लड़की ने लंड बाहर खीचा फिर से मारा जोर का झटका और लंड फिर सटाक से अन्दर | मालविका की चुदाई शुरू हो गयी थी, एक लड़की नकली रबर का लंड लगाकर उसे चोद रही थी | मालविका जोर जोर से अपने खूबसूरत सुडौल स्तनों को मसलने लगी साथ ही साथ लय में कमर हिला हिलाकर चुदने लगी | लड़की और मालविका दोनों ही कराह रहे थे | हर बार मालविका की चूत में घुसते लंड की ठोकर लड़की को अपने चूत त्रिकोण पर भी महसूस होती और उसका पूरा इलाका इस ठोकर से कम्पन से भर जाता | कई बार उसके रबर के लंड की जड़ , उसके चूत दाने को मसल जाती | इस चुदाई में दोनों ही वासना की आग में तप रही थी | दोनों के बदन उत्तेजित थे और पसीने से तर बतर हो चुके थे | सांसे धौकनी की तरह चल रही थी और दोनों ही मुहँ से मादक कराहे निकाल रही थी | दोनों ही इस चुदाई का जमकर मजा लूट रहे थे | दोनों के जवान जिस्म इस जवानी को भरपूर भोग रहे थे |
मालविका - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ लगता है तुम थक गयी हो, बहुत मेहनत लगती है इसमें | थोड़ा आराम कर लो | गांड में लंड पेलने में दम निकल जाता है इतना जोर लगाना पड़ता है |
मालविका के इशारे पर लड़की ने लंड निकाल लिया और मालविका की गाड़ का खुला हुआ गुलाबी छेद दिखने लगा | गाड़ के चारो तरफ गुलाबी लालिमा लिए हुए घेरा और उसके बाद मोटे बेजान लंड से बुरी तरह फैलाकर कर चौड़ा किया गया मालविका की गांड का सख्त छेद पूरी तरह से खुला हुआ था | छेद इतना खुल गया था की बाहर से ही मालविका की गांड की सुरंग की गुलाबी लालिमा साफ़ दिख रही थी |
मालविका ने लड़की को बांहों में भर कर एक लम्बा किस किया, ये एक तरह से थैंक्यू किस था जो मालविका ने उसकी गांड को इतनी अच्छी तरह चोदने के लिए दिया था | गांड में जाते मोटे बेजान लंड की सनसनाहट से उसकी कमर चूतड़ मन मस्तिष्क दिली दिमाग सब झूम उठे थे | उसकी गांड का दर्द चुताड़ो से लेकर जांघो तक फैला हुआ था | उसके गांड की खुजली भी अब शांत ही थी फिर भी मालविका अपने को पूरी तरह संतुष्ट करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती थी | उसने लड़की को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर आ गयी | उसकी कमर के ऊपर दोनों पैर दोनों तरफ टिकाकर उसके लंड के ठीक सामने खुद को पोजीशन कर लिया | लड़की ने लंड को बिलकुल मालविका की गांड के सामने तान दिया था | मोटा सा बेजान लंड मालविका अपनी चौड़े चुताड़ो के खुले गांड के छेद में लेने लगी | उसने अपने जबड़े सख्त किये और लंड पर बैठने लगी | लंड में बिना किसी दिक्कत के उसकी गुलाबी गांड के चौड़े छेद धसने लगा |
एक ही बार में मालविका की खुली गांड पूरा का पूरा लंड जड़ तक घोट गयी | मालविका ने एक लम्बी कराह और हुंकार एक साथ भरी, जैसे कोई जंग जीत ली हो | अब उसकी बारी गांड की बची कुची खुजली मिटाने की थी | उसने ऊपर नीचे होना शुरू किया और उसी के साथ वो मोटा बेजान लंड उसकी गांड का मर्दन करने लगा | सब कुछ मालविका के नियंत्रण में था, जीतनी स्पीड में खुद की गांड मारना चाहती थी, जितनी गहराई तक मारना चाहती थी, सब कुछ उसी पर निर्भर था | मालविका भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती थी | उसने फुल स्पीड में लड़की के ऊपर उछलना शुरू किया और मोटा बेजान लंड भी उसी तेजी से मालविका की गुलाबी कसी गांड को चीर कर उसकी गुलाबी सुरंग में सरपट दौड़ने लगा, मालविका की गांड की गुलाबी दीवारों को रौदने लगा | जिस स्पीड में मालविका अपनी कसी गांड में लंड ठुसने में लगी थी, उससे रबर का लंड झुक जा रहा था | नीचे लड़की ने बेजान लंड को कसकर थाम लिया ताकि वो मोटा सा रबर लंड मालविका की गांड की गहराई तक जा सके, और उसकी गांड की सुरंग की दीवारों के हर कोने को रगड़ सके | जिससे मालविका की गांड की खुजली दूर हो सके और उसके जिस्म को एक अनोखा सा वासना का सुखद अनुभव हो सके | मालविका के जिस्म के कोने कोने में आग लगी हुई थी और गांड में जाते मोटे लंड के स्पंदन ही उसे बुझा सकते थे | मालविका भी पूरा जोर लगाये पड़ी थी | जीतनी तेज झटका होगा, उतनी तेज लंड गांड में घुसेगा और उतनी तेज ही गांड में कम्पन उठेगा, जो उसके चुताड़ो जांघो पिंडलियों पेट पीठ कमर छाती सर दिल और दिमाग सबको हिला देगा और गांड से निकलने वाली दर्द भरी उत्तेजना की तरंगे उसके शरीर के कोने कोने की प्यास बुझा देगी, उसके जिस्म की नस नस को कंपा देगी | मालविका बस उत्तेजना से तपते शरीर और वासना से नहाये दिलो दिमाग को ध्यान में रखकर बेतहाशा अपनी गांड में मोटा सा रबर लंड ले रही थी | खुद ही खुद की गांड मार रही थी और वासना में सिसकारियो के साथ कुछ भी बडबडा रही थी | इतनी तेज चुदाई से उसकी सांसे भी धौकनी की तरह चलने लगी थी | वो बुरी तरह हांफने लगी थी, जाहिर सी बात है इसका असर उसके धक्को पर पड़ रहा था, उसके तेज हांफने के कारन उसकी गांड में लंड जाने की स्पीड भी कम हो गयी थी जबकि इस समय तो चरम पाने के लिए बेतहाशा धक्को की जरुरत थी |
इस बार लड़की बोली - मैडम आप थक गयी है, क्या मै आपको अच्छा फील करा सकती हूँ |
लड़की की बात मालविका को सही लगी | मालविका झट से उसके ऊपर से हटकर बिस्तर पर आ गयी और पीठ के बल लेटकर अपनी जांघे हवा में उठा दी | लड़की भी उसी फुर्ती से बिस्तर से उठी और मालविका की जांघो के बीचो बीच अपनी जगह बनाकर उसकी गांड में बेदर्दी से लंड घुसेड दिया | अब दर्द की परवाह न मालविका को थी न उस लड़की को इस बात का ख्याल रखना था | अब तो सारी जद्दोजहद अपने जिस्म की आग बुझाने की थी उसके लिए चाहे मुसल लंड से चुदना पड़े या गांड फड़वानी पड़े | लड़की ने जड़ से बेजान लंड को कसकर थाम रखा था और मालविका की गांड के टाइट छेद में बेतहाशा पेल रही थी | मालविका भी अपनी जांघो को अपने हाथो में फंसाए अपनी चूत को बेतहाशा रगड़ रही थी | दोनों एक दुसरे की आँखों में देख रही थी | मालविका गांड में जाते मोटे लंड के कारन उत्तेजना से लम्बी लम्बी सिसकारियां भर रही थी और मादकता से कराह रही थी | लड़की ने पूरी ताकत लगाकर पूरा लंड मालविका की गांड में घुसेड़ कर चार पांच करारे पुरे पुरे झटके दे मारे | पूरा का पूरा लंड हर झटके के साथ मालविका की गांड में घुस गया और उसके आखिरी छोर पर जोरदार ठोकरे मारी | लंड मालविका की गांड की गुलाबी सुरंग के उपरी हिस्से में जाकर टकराया और दर्द के एक तीखी तरंग उसके चुताड़ो, जांघो और पिंडलियों को हिला गयी | इतनी देर से मालविका अपने जिस्म को कठोर करके अपनी गांड मोटे लंड को ले रही थी लेकिन इन करारे झटको और उसके बाद उठने वाली दर्द भरी तरंग मालविका के हाथ पाँव ढीले कर दिए | मोटे लंड को अपनी जलती गांड में लेने की और ज्यादा सहने की शक्ति मालविका के शरीर में नहीं बची थी | मोटा लंड जैसे ही गांड की सुरंग के उपरी हिस्से से टकराया था मालविका दर्द से बेहाल हो गयी उसके शरीर ने हाथ खड़े कर दिए , उसकी जांघे लंड के झटके से बने कम्पन से थरथराने लगी, उसके चूतड़ अपने आप हिलने लगे | मालविका का उसके शरीर में नियंत्रण समाप्त हो गया | मालविका ने गांड मरवाकर कर भी अपने चरम सुख को पा लिया | मालविका के हाथ पाँव ढीले पड़ने लगे | उसका शरीर निढाल होने लगा | उसके चुताड़ो का दर्द कम होने लगा, मालविका ने अपनी चूत को रगड़ना छोड़ लड़की को अपनी बांहों में भर लिया | उसे बेतहाशा चूमने लगी, अपनी सांसे व्यवस्थित करने लगी |
लड़की को लगा मालविका पूरी तरह तैयार है रबर का लंड घोटने को, उसने हल्का सा कमर को पीछे खीचा और आगे को एक जोरदार धक्का दिया | मालविका की गरम चूत की गीली दीवारों को चीरता हुआ लंड मालविका की मखमली सुरंग में अन्दर तक धंस गया | फिर क्या था, लड़की ने लंड बाहर खीचा फिर से मारा जोर का झटका और लंड फिर सटाक से अन्दर | मालविका की चुदाई शुरू हो गयी थी, एक लड़की नकली रबर का लंड लगाकर उसे चोद रही थी | मालविका जोर जोर से अपने खूबसूरत सुडौल स्तनों को मसलने लगी साथ ही साथ लय में कमर हिला हिलाकर चुदने लगी | लड़की और मालविका दोनों ही कराह रहे थे | हर बार मालविका की चूत में घुसते लंड की ठोकर लड़की को अपने चूत त्रिकोण पर भी महसूस होती और उसका पूरा इलाका इस ठोकर से कम्पन से भर जाता | कई बार उसके रबर के लंड की जड़ , उसके चूत दाने को मसल जाती | इस चुदाई में दोनों ही वासना की आग में तप रही थी | दोनों के बदन उत्तेजित थे और पसीने से तर बतर हो चुके थे | सांसे धौकनी की तरह चल रही थी और दोनों ही मुहँ से मादक कराहे निकाल रही थी | दोनों ही इस चुदाई का जमकर मजा लूट रहे थे | दोनों के जवान जिस्म इस जवानी को भरपूर भोग रहे थे |