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Guest
प्रियम को लगा सचमुच चाची फ़ोन मिला देगी - वो सर झुकाए किचन की तरफ बढ़ गया |
तड़ाक तड़ाक तड़ाक लगातार तीन झापड़ जड़ दिए |
रीमा - बोल क्या करने वाला था, बता वरना, रोहित से पहले आज मै तेरी हड्डी पसली एक कर दूँगी | तूने क्या रंडी समझ रखा है मुझे | साले तेरे बाप की कभी हिम्मत नहीं हुई मेरे सरकते पल्लू के नीचे के उभार पर एक नजर तक उठाने की और तू चला है मेरा नंगा विडिओ बनाकर दुनिया को दिखाने | भड़वे मादरचोद .............हराम के लंड की पैदाइश .............................|
रीमा गुस्से से आगबबुला थी | उसके मुहँ से गलियां रुक ही नहीं रही थी | रीमा के झन्नाटेदार झापड़ो से प्रियम तिलमिला गया | रीमा को लगा अगर यही खड़ी रही तो कंही प्रियम का सर न फोड़ दे, उसको देखकर उसका खून खौल रहा था | उसने नजर ओट करने में ही भलाई समझी | रीमा मुट्ठी भींचते हुए पानी पीने चली गयी | उसने फ्रिज से एक पानी की बोतल निकाली और एक बार में पीते पीते पूरी बोतल खाली कर दी, जब वो अपनी पी रही थी तो उसकी नजर आईने में खुद पर गयी और उसे बिलकुल भी खुद का तमतमाया चेहरा अच्छा नहीं लगा | प्रियम की आँखों में आंसू झलक आये |
पानी पीकर रीमा का दिमाग कुछ ठंडा हुआ और आईने में खुद को देखकर उसने आपना गुस्सा कुछ काबू में में किया | उसे रोहित की दी नेक सलाह याद आ गयी, रोहित ने कहा था - गुस्सा हमारा सबसे बड़ा दुसमन है और किसी भी बुरे या कठिन समय में दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए | प्रियम पर रीमा को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन गुस्से को पीकर अपने दिमाग को ठंडा करने की कोशिश करने लगी, साथ ही दिमाग से क्या सही क्या गलत पर सोचने लगी | कहाँ इतने अच्छे मूड में थी, पूरी तरह से मस्तियाँ रही थी, अपनी जवानी भोग रही थी अपनी हवस मिटा रही थी और इसने सब कबाड़ा कर दिया | उसे फिर रोहित की डायरी में लिखी बात याद आने लगी - जब हम गुस्सा करते है इसका मतलब हम अपना नियंत्रण खोकर दुसरे के नियंत्रण में जा रहे है | दुसरे की गलती से न तो हमें अपना नियंत्रण खोना चाहिए और न ही अपने कर रहे काम को प्रभावित होने देना चाहिए | इस पूरी लाइन की याद करते ही रीमा का गुस्सा धुंए की तरह रफूचक्कर हो गया | भला मै क्यों अपना खून जलाऊ, इसने मेरा नंगा वीडियो बनाने की कोशिश जरुर की है लेकिन अभी तो मोबाइल मेरे हाथ में है और इसलिए सब कुछ पहले जैसा ही तो है | कुछ भी तो नहीं बदला, मुझे तो फिर से अपने काम में लग जाना चाहिए,
रीमा इससे पहले क्या कर रही थी उसे याद आ गया, वो उसी मनोस्थिति में पुनः जाने की कोशिश करने लगी, रीमा भले ही खुद को सामान्य करने और फिर से अपनी कामवासना में मस्तियाने जा रही थी, लेकिन प्रियम को लेकर उसके अन्दर जबरदस्त गुस्सा था, उसकी इस बेकाबू, बेहिसाब हो गयी ठरक, जो पुरे परिवार के लिए खतरनाक हो सकती थी को हमेशा हमेशा के लिए काबू में रखने और उसको उसकी हद और औकात बताने के लिए उसे एक जिंदगी भर का सबक सिखाना जरुरी था | उसे ये पता चलना चाहिए कि चूत, चुदाई, जवानी के खेल और औरत का जिस्म कोई लोलीपोप नहीं है जब मर्जी आई चूस लिया नहीं तो फेंक दिया | यहाँ संजीदगी, गहराई, सब्र और सम्मान सबसे ज्यादा जरुरी है | नहीं तो एक अपराधी और इन्सान में क्या फर्क रह जायेगा | प्रियम जो आज मेरे साथ करने की सोच रहा था वो कल को किसी मासूम लड़की के साथ भी कर सकता है, इसकी गांड फदनी तो जरुरी है, बहुत जरुरी है | उसने प्रियम को ऐसा सबक सिखाने की ठानी कि उसे जिंदगी भर याद रहे | मन में चट्टान जैसे इस फौलादी इरादे के साथ रीमा फिर से अपनी रौ में लौट आई |
रीमा अपने स्तनों पर लगा शहद पोछते हुए अपनी उंगलियों को चाट रही थी | कनखियों से उसकी पेंट के तम्बू को देखते हुए - लंड भोसड़ी के यहाँ च्रोरो की तरह क्यों आया है, क्या इरादा था तेरा, अपना लंड हिला हिला कर मेरा नंगा विडिओ बनाने के बाद क्या करने वाला था साफ़ साफ़ और सच बोलना, वरना ................|
इतना कहकर उसने फिर से अपना हाथ प्रियम को थप्पड़ मारने को उठाया, लेकिन इस बार प्रियम रीमा के पैरो में गिर गया और रुआंसा हो आया - गलती हो गयी रीमा चाची, माफ़ कर दो, गलती हो गयी | इतना कहकर फुट फुट कर रोने लगा |
रीमा को प्रियम का ये बर्ताव और ज्यादा नौटंकी लगा, उसका गुस्सा कम होने की बजाय और बढ़ गया - हट मादरचोद, दूर हट, चुपचाप खड़ा रह जैसे खड़ा था, वरना अभी पेंट उतार कर तेरे खड़े लंड पर दे दनादन इतना बेलन मारूंगी कि जिंदगी भर के लिए अपाहिज ही जायेगा तेरा लंड | दूर हट ..........
इतना कहकर पैरो से दूर ठेल दिया | प्रियम दूसरी तरफ को लुढ़क गया |
तड़ाक तड़ाक तड़ाक लगातार तीन झापड़ जड़ दिए |
रीमा - बोल क्या करने वाला था, बता वरना, रोहित से पहले आज मै तेरी हड्डी पसली एक कर दूँगी | तूने क्या रंडी समझ रखा है मुझे | साले तेरे बाप की कभी हिम्मत नहीं हुई मेरे सरकते पल्लू के नीचे के उभार पर एक नजर तक उठाने की और तू चला है मेरा नंगा विडिओ बनाकर दुनिया को दिखाने | भड़वे मादरचोद .............हराम के लंड की पैदाइश .............................|
रीमा गुस्से से आगबबुला थी | उसके मुहँ से गलियां रुक ही नहीं रही थी | रीमा के झन्नाटेदार झापड़ो से प्रियम तिलमिला गया | रीमा को लगा अगर यही खड़ी रही तो कंही प्रियम का सर न फोड़ दे, उसको देखकर उसका खून खौल रहा था | उसने नजर ओट करने में ही भलाई समझी | रीमा मुट्ठी भींचते हुए पानी पीने चली गयी | उसने फ्रिज से एक पानी की बोतल निकाली और एक बार में पीते पीते पूरी बोतल खाली कर दी, जब वो अपनी पी रही थी तो उसकी नजर आईने में खुद पर गयी और उसे बिलकुल भी खुद का तमतमाया चेहरा अच्छा नहीं लगा | प्रियम की आँखों में आंसू झलक आये |
पानी पीकर रीमा का दिमाग कुछ ठंडा हुआ और आईने में खुद को देखकर उसने आपना गुस्सा कुछ काबू में में किया | उसे रोहित की दी नेक सलाह याद आ गयी, रोहित ने कहा था - गुस्सा हमारा सबसे बड़ा दुसमन है और किसी भी बुरे या कठिन समय में दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए | प्रियम पर रीमा को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन गुस्से को पीकर अपने दिमाग को ठंडा करने की कोशिश करने लगी, साथ ही दिमाग से क्या सही क्या गलत पर सोचने लगी | कहाँ इतने अच्छे मूड में थी, पूरी तरह से मस्तियाँ रही थी, अपनी जवानी भोग रही थी अपनी हवस मिटा रही थी और इसने सब कबाड़ा कर दिया | उसे फिर रोहित की डायरी में लिखी बात याद आने लगी - जब हम गुस्सा करते है इसका मतलब हम अपना नियंत्रण खोकर दुसरे के नियंत्रण में जा रहे है | दुसरे की गलती से न तो हमें अपना नियंत्रण खोना चाहिए और न ही अपने कर रहे काम को प्रभावित होने देना चाहिए | इस पूरी लाइन की याद करते ही रीमा का गुस्सा धुंए की तरह रफूचक्कर हो गया | भला मै क्यों अपना खून जलाऊ, इसने मेरा नंगा वीडियो बनाने की कोशिश जरुर की है लेकिन अभी तो मोबाइल मेरे हाथ में है और इसलिए सब कुछ पहले जैसा ही तो है | कुछ भी तो नहीं बदला, मुझे तो फिर से अपने काम में लग जाना चाहिए,
रीमा इससे पहले क्या कर रही थी उसे याद आ गया, वो उसी मनोस्थिति में पुनः जाने की कोशिश करने लगी, रीमा भले ही खुद को सामान्य करने और फिर से अपनी कामवासना में मस्तियाने जा रही थी, लेकिन प्रियम को लेकर उसके अन्दर जबरदस्त गुस्सा था, उसकी इस बेकाबू, बेहिसाब हो गयी ठरक, जो पुरे परिवार के लिए खतरनाक हो सकती थी को हमेशा हमेशा के लिए काबू में रखने और उसको उसकी हद और औकात बताने के लिए उसे एक जिंदगी भर का सबक सिखाना जरुरी था | उसे ये पता चलना चाहिए कि चूत, चुदाई, जवानी के खेल और औरत का जिस्म कोई लोलीपोप नहीं है जब मर्जी आई चूस लिया नहीं तो फेंक दिया | यहाँ संजीदगी, गहराई, सब्र और सम्मान सबसे ज्यादा जरुरी है | नहीं तो एक अपराधी और इन्सान में क्या फर्क रह जायेगा | प्रियम जो आज मेरे साथ करने की सोच रहा था वो कल को किसी मासूम लड़की के साथ भी कर सकता है, इसकी गांड फदनी तो जरुरी है, बहुत जरुरी है | उसने प्रियम को ऐसा सबक सिखाने की ठानी कि उसे जिंदगी भर याद रहे | मन में चट्टान जैसे इस फौलादी इरादे के साथ रीमा फिर से अपनी रौ में लौट आई |
रीमा अपने स्तनों पर लगा शहद पोछते हुए अपनी उंगलियों को चाट रही थी | कनखियों से उसकी पेंट के तम्बू को देखते हुए - लंड भोसड़ी के यहाँ च्रोरो की तरह क्यों आया है, क्या इरादा था तेरा, अपना लंड हिला हिला कर मेरा नंगा विडिओ बनाने के बाद क्या करने वाला था साफ़ साफ़ और सच बोलना, वरना ................|
इतना कहकर उसने फिर से अपना हाथ प्रियम को थप्पड़ मारने को उठाया, लेकिन इस बार प्रियम रीमा के पैरो में गिर गया और रुआंसा हो आया - गलती हो गयी रीमा चाची, माफ़ कर दो, गलती हो गयी | इतना कहकर फुट फुट कर रोने लगा |
रीमा को प्रियम का ये बर्ताव और ज्यादा नौटंकी लगा, उसका गुस्सा कम होने की बजाय और बढ़ गया - हट मादरचोद, दूर हट, चुपचाप खड़ा रह जैसे खड़ा था, वरना अभी पेंट उतार कर तेरे खड़े लंड पर दे दनादन इतना बेलन मारूंगी कि जिंदगी भर के लिए अपाहिज ही जायेगा तेरा लंड | दूर हट ..........
इतना कहकर पैरो से दूर ठेल दिया | प्रियम दूसरी तरफ को लुढ़क गया |