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वसीम ने कहा- "मैं आ गया है, दरवाजा खोल दो प्लीज..."
शीतल फिर से उनींदी आवाज में ही- "हाँ आती हूँ.." बोली और खुद को अइजस्ट कर ली। उसने खुद को एक बार आईने में देखा और गाउज को ठीक से अइजस्ट की जिसमें बलीवेज चचियों की गोलाईयों के साथ दिखें।
शीतल ऐसे चलकर बाहर आई, जैसी कितने नींद में हो। उसने बाहर की लाइट जला दी और दरवाजा खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही बसीम की आँखों के सामने शीतल की गोरी चूचियां चमक रही थी। वसीम तो शीतल की आवाज सुनकर ही लण्ड टाइट किए बैठा था। एक झटके में उसे अंदाजा लग गया की उसकी होने वाली चंडी अभी भी बिना ब्रा के है और उसी को दिखाने के लिए डीप नेक गाउन पहनी हुई है। उसका मन किया की हाथ बढ़ाए और इन दूध से भरी बसमलाईयों को पकड़कर जिचोर दे और चूस लें। वसीम को पता था की शीतल भी यही चाहती होगी, और अगर उसनं ऐसा किया तो छोटी मोटी आक्टिंग के अलावा और शीतल कुछ लेकिन वसीम ने खुद पे काबू किया और बोला- "सारी, आप लोगों को परेशान किया..'
शीतल उल्टे कदम ही पीछे होती हई बोली। ताकी उसकी चूचियों को थिरकन को वसीम अच्छे से देख सके। कल बिकास मौजूद था तो इन्हें बुरा लग रहा होगा लेकिन आज काई नहीं है तो ये अच्छे से देख सकें मुझे। शीतल बोली- "इसमें परेशानी की क्या बात है?"
वसीम ने दरवाजा लाक कर दिया और ऊपर जाने लगा। शीतल को लगा की ये क्या हो रहा है। ये तो जा रहे हैं।
शीतल तुरंत बोली. "खाना खाकर आए हैं या अभी बजाएंगे। आइए यहीं खा लीजिए, मैं बनाकर रखी हूँ.."
वसीम नजरें नीची किए हुए ही चलते हुए बोला- "नहीं शुक्रिया, मैं खाकर आया हैं। सो जाइए आप भी। शुक्रिया फिर से और माफी मांगता हैं परेशान करने के लिए...' बोलता हआ वसीम सीटियों पे चल दिया और शीतल उगी सी खड़ी की खड़ी रह गई।
शीतल को यकीन नहीं हआ की ये आदमी ऐसा है। उसे लगा था की इस तरह के कपड़े और अकेली पाकर वो पकड़कर शीतल से बातें करने लगेगा और शीतल उसकी मदद कर पाएगी उसके अंदर के जमे हए गुबार को बाहर करने में। उसे गुस्सा भी बहुत आया और फिर विकास की वही बात याद आई की इसे अपने उम्र की वजह से शर्म आती होगी, नहीं तो जी तो चाहता होगा उसका की तुम्हारे साथ खूब मस्ती करें।
शीतल को जोर का गुस्सा आया। उसका मन किया की अभी वसीम पे बरस पड़े। वा वहीं खड़ी थी और वसीम सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर चला गया। शीतल का मन हुआ की वसीम को खींचकर रोक लें और उससे पूछे की अगर अभी नजर उठाकर देख भी नहीं सकते, बात भी नहीं कर सकते तो दिन में क्या करते हो? लेकिन गुस्सा दिखना सही नहीं होगा। वो तो वही कर रहे हैं जो एक शरीफ इंसान को करना चाहिए।
शीतल फिर से उनींदी आवाज में ही- "हाँ आती हूँ.." बोली और खुद को अइजस्ट कर ली। उसने खुद को एक बार आईने में देखा और गाउज को ठीक से अइजस्ट की जिसमें बलीवेज चचियों की गोलाईयों के साथ दिखें।
शीतल ऐसे चलकर बाहर आई, जैसी कितने नींद में हो। उसने बाहर की लाइट जला दी और दरवाजा खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही बसीम की आँखों के सामने शीतल की गोरी चूचियां चमक रही थी। वसीम तो शीतल की आवाज सुनकर ही लण्ड टाइट किए बैठा था। एक झटके में उसे अंदाजा लग गया की उसकी होने वाली चंडी अभी भी बिना ब्रा के है और उसी को दिखाने के लिए डीप नेक गाउन पहनी हुई है। उसका मन किया की हाथ बढ़ाए और इन दूध से भरी बसमलाईयों को पकड़कर जिचोर दे और चूस लें। वसीम को पता था की शीतल भी यही चाहती होगी, और अगर उसनं ऐसा किया तो छोटी मोटी आक्टिंग के अलावा और शीतल कुछ लेकिन वसीम ने खुद पे काबू किया और बोला- "सारी, आप लोगों को परेशान किया..'
शीतल उल्टे कदम ही पीछे होती हई बोली। ताकी उसकी चूचियों को थिरकन को वसीम अच्छे से देख सके। कल बिकास मौजूद था तो इन्हें बुरा लग रहा होगा लेकिन आज काई नहीं है तो ये अच्छे से देख सकें मुझे। शीतल बोली- "इसमें परेशानी की क्या बात है?"
वसीम ने दरवाजा लाक कर दिया और ऊपर जाने लगा। शीतल को लगा की ये क्या हो रहा है। ये तो जा रहे हैं।
शीतल तुरंत बोली. "खाना खाकर आए हैं या अभी बजाएंगे। आइए यहीं खा लीजिए, मैं बनाकर रखी हूँ.."
वसीम नजरें नीची किए हुए ही चलते हुए बोला- "नहीं शुक्रिया, मैं खाकर आया हैं। सो जाइए आप भी। शुक्रिया फिर से और माफी मांगता हैं परेशान करने के लिए...' बोलता हआ वसीम सीटियों पे चल दिया और शीतल उगी सी खड़ी की खड़ी रह गई।
शीतल को यकीन नहीं हआ की ये आदमी ऐसा है। उसे लगा था की इस तरह के कपड़े और अकेली पाकर वो पकड़कर शीतल से बातें करने लगेगा और शीतल उसकी मदद कर पाएगी उसके अंदर के जमे हए गुबार को बाहर करने में। उसे गुस्सा भी बहुत आया और फिर विकास की वही बात याद आई की इसे अपने उम्र की वजह से शर्म आती होगी, नहीं तो जी तो चाहता होगा उसका की तुम्हारे साथ खूब मस्ती करें।
शीतल को जोर का गुस्सा आया। उसका मन किया की अभी वसीम पे बरस पड़े। वा वहीं खड़ी थी और वसीम सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर चला गया। शीतल का मन हुआ की वसीम को खींचकर रोक लें और उससे पूछे की अगर अभी नजर उठाकर देख भी नहीं सकते, बात भी नहीं कर सकते तो दिन में क्या करते हो? लेकिन गुस्सा दिखना सही नहीं होगा। वो तो वही कर रहे हैं जो एक शरीफ इंसान को करना चाहिए।