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Adultery शीतल का समर्पण

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वसीम ने कहा- "मैं आ गया है, दरवाजा खोल दो प्लीज..."

शीतल फिर से उनींदी आवाज में ही- "हाँ आती हूँ.." बोली और खुद को अइजस्ट कर ली। उसने खुद को एक बार आईने में देखा और गाउज को ठीक से अइजस्ट की जिसमें बलीवेज चचियों की गोलाईयों के साथ दिखें।

शीतल ऐसे चलकर बाहर आई, जैसी कितने नींद में हो। उसने बाहर की लाइट जला दी और दरवाजा खोल दिया।

दरवाजा खुलते ही बसीम की आँखों के सामने शीतल की गोरी चूचियां चमक रही थी। वसीम तो शीतल की आवाज सुनकर ही लण्ड टाइट किए बैठा था। एक झटके में उसे अंदाजा लग गया की उसकी होने वाली चंडी अभी भी बिना ब्रा के है और उसी को दिखाने के लिए डीप नेक गाउन पहनी हुई है। उसका मन किया की हाथ बढ़ाए और इन दूध से भरी बसमलाईयों को पकड़कर जिचोर दे और चूस लें। वसीम को पता था की शीतल भी यही चाहती होगी, और अगर उसनं ऐसा किया तो छोटी मोटी आक्टिंग के अलावा और शीतल कुछ लेकिन वसीम ने खुद पे काबू किया और बोला- "सारी, आप लोगों को परेशान किया..'

शीतल उल्टे कदम ही पीछे होती हई बोली। ताकी उसकी चूचियों को थिरकन को वसीम अच्छे से देख सके। कल बिकास मौजूद था तो इन्हें बुरा लग रहा होगा लेकिन आज काई नहीं है तो ये अच्छे से देख सकें मुझे। शीतल बोली- "इसमें परेशानी की क्या बात है?"

वसीम ने दरवाजा लाक कर दिया और ऊपर जाने लगा। शीतल को लगा की ये क्या हो रहा है। ये तो जा रहे हैं।

शीतल तुरंत बोली. "खाना खाकर आए हैं या अभी बजाएंगे। आइए यहीं खा लीजिए, मैं बनाकर रखी हूँ.."

वसीम नजरें नीची किए हुए ही चलते हुए बोला- "नहीं शुक्रिया, मैं खाकर आया हैं। सो जाइए आप भी। शुक्रिया फिर से और माफी मांगता हैं परेशान करने के लिए...' बोलता हआ वसीम सीटियों पे चल दिया और शीतल उगी सी खड़ी की खड़ी रह गई।

शीतल को यकीन नहीं हआ की ये आदमी ऐसा है। उसे लगा था की इस तरह के कपड़े और अकेली पाकर वो पकड़कर शीतल से बातें करने लगेगा और शीतल उसकी मदद कर पाएगी उसके अंदर के जमे हए गुबार को बाहर करने में। उसे गुस्सा भी बहुत आया और फिर विकास की वही बात याद आई की इसे अपने उम्र की वजह से शर्म आती होगी, नहीं तो जी तो चाहता होगा उसका की तुम्हारे साथ खूब मस्ती करें।

शीतल को जोर का गुस्सा आया। उसका मन किया की अभी वसीम पे बरस पड़े। वा वहीं खड़ी थी और वसीम सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर चला गया। शीतल का मन हुआ की वसीम को खींचकर रोक लें और उससे पूछे की अगर अभी नजर उठाकर देख भी नहीं सकते, बात भी नहीं कर सकते तो दिन में क्या करते हो? लेकिन गुस्सा दिखना सही नहीं होगा। वो तो वही कर रहे हैं जो एक शरीफ इंसान को करना चाहिए।
 
शीतल को जोर का गुस्सा आया। उसका मन किया की अभी वसीम पे बरस पड़े। वा वहीं खड़ी थी और वसीम सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर चला गया। शीतल का मन हुआ की वसीम को खींचकर रोक लें और उससे पूछे की अगर अभी नजर उठाकर देख भी नहीं सकते, बात भी नहीं कर सकते तो दिन में क्या करते हो? लेकिन गुस्सा दिखना सही नहीं होगा। वो तो वही कर रहे हैं जो एक शरीफ इंसान को करना चाहिए।

फिर उसने सोचा की जाती हैं ऊपर और अच्छे से बात कर ही लेती हैं आज। वो दो-तीन सीढ़ी चढ़ी भी लेकिन इससे आगे की उसकी हिम्मत नहीं हुई। वो सोचने लगी की इतनी रात को अगर में उनके गम में जाऊँगी तो ये ठीक नहीं रहेगा। कल दिन में पूछ लेंगी। वो तो शरीफ इंसान हैं, लेकिन मैं क्यों रंडी जैसी हरकत कर रही हैं? शीतल कल दिन में कैसे क्या बात करेंगी सोचती हई अपने रूम में आ गई।

विकास ने आधखुली आँख से अपनी बीवी को अंदर आते देखा। उसे सदमा लगा। शीतल उसे सोया हुआ मानकर दरवाजा खोलने की जो तैयारी कर रह रही थी। विकास वो सब अपनी अधखुली आँखों से देख रहा था। उसे अब यकीन हो चला था की उसकी कमसिन जवान बीवी उस बूटै बसीम के चक्कर में हैं। जितनी देर शीतल रूम से बाहर दरवाजा के पास थी, विकास सोच रहा था की वसीम और शीतल क्या कर रहे होंगे?

विकास के अनुसार शीतल दरवाजा खोली होगी और वसीम के सामने उसकी गोल मुलायम गोरी चूचियां चमक उठी होगी। वसीम देखता रह गया होड़ा। उसने अपनी नजरें नीची कर ली और शीतल को थैक बोलतं हआ पीछे हटने बोला लेकिन शीतल हटी नहीं और उससे सट गई। उसने चूचियां वसीम के सीने से दबा दी और वसीम को पकड़ लिया। अब वसीम के लिए कंट्रोल मुश्किल था। वो शीतल के होठों को चूमने लगा और नाइटगाउन की बीच दिया। शीतल की चूची बाहर आ गई और वसीम पागलों की तरह उसे मसलता हआ चूसने लगा। शीतल आहह... उहह... कर रही थी.." सोचते हये विकास का लण्ड पूरा टाइट हो चुका था। लेकिन शीतल के अंदर आने से उसे बहुत बुरा लगा की उसकी इतनी हसीन बीवी को वसीम भाव नहीं दे रहा।

शीतल को भी लगा था की अभी तो बसीम उससे बात करेंगा ही और देखेंगा हो लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शीतल सो गई और उसकी नाइटी दीली हो गई जिससे उसकी चूचियां बाहर आ गई। विकास को नींद नहीं आ रही थी

और उसका लण्ड टाइट था। शीतल की चूची को देखकर बो उसे सहलाने और चूसने लगा। शीतल नींद में थी और गरम थी। वो सपने देख रही थी की वसीम उसके साथ ऐसा कर रहा है। वो मुश्करा रही थी और विकास का पूरा साथ देते हए वो पूरी गरम हो चुकी थी।

विकास ने शीतल की नाइटी को सामने से पूरा खोल दिया और शीतल का गोरा जिश्म चमक उठा। विकास ने लण्ड को शीतल की चूत में लगाया और अंदर डाल दिया। शीतल कमर उठाकर और अंदर लेने के लिए उछलने लगी, लेकिन वसीम का लण्ड होता तब तो अंदर जाता। था तो ये विकास का ही लण्ड। शीतल की नींद खुल गई और उसका मूड आफ हो गया। वो विकास को हटाने लगी।

विकास पहले से ही पूरा टाइट था, लण्ड अंदर डालते ही 8-10 धक्के में उसने पानी छोड़ दिया। शीतल को अब गुस्सा आ गया और उसका मन किया की विकास से खूब झगड़ा करें लेकिन रात थी इसलिए वो मन मसोसकर रह गई और विकास को अपने ऊपर से उतारकर बाथरुम चली गई।

शीतल नाइटी उतार दी थी और नंगी ही बाथरूम गई थी। पेशाब करने के बाद वो चूत सहलाने लगी। सोचने लगी की कितना अच्छा सपना था की वसीम मुझे चूमते हए मेरी चूची को सहला रहे थे, और फिर नाइटी की डारी खोलकर नंगी चूचियों को सहला रहेज थे, और चूस रहे थे। आहह... कितना अच्छा होता की ये वसीम ही होतं, विकास नहीं होता। आहह... वसीम का लण्ड चूत में कितना अंदर तक जाता आहह... आहह... वसीम क्यों नहीं आपने पकड़ लिया मुझे दरवाजा पै? क्यों नहीं मुझे चूमने लगे? खोल देते मैरी नाइटी को और अच्छे से देखतें मेरे नगे जिस्म का। देखतं उस जगह को जहाँ में पैंटी ब्रा पहनती हैं। छ लेते उस जगह को। चमतं ममलत मेरी चूचियों को। जो वीर्य आप पैंटी बा पे गिराते है वो उस जगह पे गिरते जहाँ मैं उन्हें पहनती हैं। आह्ह. वसीम चाचा चोद लेते मझे। मेरी चूत में डाल देते अपना मोटा लण्ड और गिरा देते वीर्य मेरी चूत में। आहह... उम्म्म्म ... शीतल की चूत में पानी छोड़ दिया और वो हौंफती हुई बाथरूम से आ गई।
 
शीतल को चोदने के बाद विकास सो गया था। शीतल किचन में जाकर पानी पिया और फिर सोने आ गई। पहली बार आज शीतल नंगी सो रही थी। शीतल सोचने लगी की ये क्या सोच रही थी वो? ये कैसा सपना था की उसका पति बिकास उसे चोद रहा था लेकिन वो सोच रही थी की वसीम से चुद रही है। क्या मैं सच में वसीम से चुदवाना चाहती हैं? हौं, तभी तो मैं दरवाजा पे ऐमें गई थी। अगर वसीम चाचा मुझे कुछ करते तो क्या मैं उन्हें रोक पाती? बिल्कुल नहीं। मैं उनसे चुदवाना चाहती हूँ तभी तो उनके वीर्य की खुश्बू मुझे पागल कर देती है। और जो आदमी मेरी पैंटी ब्रा पे वीर्य गिराता है राज तो वो मुझे चोदने का सोचकर ही वीर्य गिराता होगा, कोई भजन गाकर तो वीर्य नहीं ही गिरता होगा।

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मुझे चोदकर ही वसीम चाचा रिलैक्स हो पाएंगे। नहीं तो वो शरीफ इंसान अंदर ही अंदर घुट-घुट कर मार जाएगा। कल मैं उनसे सीधी-सौंधी बात करेंगी, और अगर वो मुझे चोदना चाहेंगे तो मेरा जिस्म पेंश हैं उनकी मदद के लिए। मेरी वजह से वो आदमी मर रहा है तो ये पूरी तरह मेरी जिम्मेवारी है की मैं उन्हें इससे बाहर निकालं, चाहे भलें इसके लिए मुझे उन्हें अपना जिम ही क्यों ना देना पड़े।

शीतल के अंदर से आवाज आई- "तू रंडी हो गई है क्या, जो दूसरे मर्द से चुदवाने की बात सोच रही है? तू ऐसा सोचकर भी पाप कर रही है। अपने पति को धोखा देगी त? वसीम के बड़े लण्ड के लालच में तू विकासको धोखा देंगी?"

अंदर से शैतान ने जवाब दिया- "धोखा वाली कौन सी बात हो गई? मैं तो वसीम की मदद करगी, क्योंकी वो मेरी वजह से दर्द सह बहा है। इतने सालों से वो अकेला है और अब मेरी वजह से तड़प रहा है, तो मेरा ही फर्ज हैं उसकी मदद करना। और मैं उससे चुदवाने नहीं जा रही हैं। मैंने कहा की अगर मुझे अपना जिश्म देकर भी उसकी मदद करनी पड़ी को करेंगी। अगर मैं उससे चदबाऊँगी हो तो कौन सा राज चदवाऊँगी?

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शीतल की वसीम से चोदवाने की ख्वाहिश

शीतल साचती-सोचती नींद के आगोश में जा चुकी थी। सुबह जब नींद खुली ता नंगी थी शीतल। शीतल राज सवेरे जागकर फ्रेश होती थी और फिर नहाकर पूजा करके फिर चाप बनाती थी और विकास को जगाकर चाय देती थी। शीतल नंगी ही बेड से उठी और फ्रेश होकर नहाने चल दी। पहली बार वो अपने घर में ऐसे नंगी घूम रही थी। नहाने के बाद वो एक साड़ी पहन ली और पूजा करने लगी। फिर चाय बनाकर उसने विकास को जगाया और फिर किचेन के काम में लग गई।

शीतल का ये सब डेली रुटीन था लेकिन शीतल का ध्यान दोपहर पे था की आज वो बसीम से फाइनल बात करके रहेंगी।

विकास आफिस चला गया और शीतल एक बजे का इंतजार करने लगी। उसके मन में बहुत उथल-पुथल मची हुई थी। आज वो स्टोररुम में नहीं गई। उसका प्लान था की जब वसीम पैंटी बा हाथ में लेकर मूठ मार रहा होगा तब वो ऊपर जाएगी और वसीम से क्लियर कट बात करेंगी।

आज फिर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था की क्या होगा? कहीं वसीम ने मुझे चोदने की बात कह दी तो क्या मैं उसी वक़्त चुदवा लेंगी? अगर उन्होंने मना कर दिया और गलती मानते हुए बोल दिया की आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे तो? नहीं नहीं। मैं उन्हें गलती नहीं मानने गुज़ारा । इस तरह तो वो और शर्मिंदगी महसूस करेंगे और अंदर-अंदर ही और घुटेंगे। मुझे उन्हें समझाना होगा की आपने जो किया उसमें कुछ गलत नहीं है और आप तो बहुत महान हैं की बस ऐसा करके खुद को सम्हाल लेते हैं। मेरे सामने रहने में भी मुझे देखते भी नहीं। आपकी जगह कोई और होता तो रोज जो दिन भर मैं अकेली होती हैं, पता नहीं क्या करता? आपको घबराने शर्माने की जरूरत नहीं है। आप मुझसे बात कीजिए और मुझे बताइए की प्राब्लम क्या है?

दरवाजे से अंदर आते ही शीतल के घर के दरवाजा को देखकर बसीम समझ गया की उसकी होने वाली रांड़ शीतल शर्मा आज ऊपर नहीं गई है। शीतल का दरवाजा अंदर से बंद था। अगर वो ऊपर जाती तो दरवाजा या तो बाहर से बंद होता या फर खुला होता। उसे थोड़ा बुरा लगा की कहीं मैं ओवरएक्टिंग तो नहीं कर गया। ऊपर पैटी ब्रा अपनी जगह पे वसीम के वीर्य के इंतजार में टंगी पड़ी थी। वसीम रूम में गया और कपड़े चेंज करके शीतल का इंतजार करने लगा की शायद वो आए लेकिन वो नहीं आई।

बसीम अपने डेली के काम में लग गया, स्टाररूम के बाहर मूठ मारने का। उसने स्टोर रूम में झाँक कर भी देखा लेकिन वहाँ कोई नहीं था। आज बसीम का लण्ड टाइट ही नहीं हो रहा था। उसे लगने लगा की मैंने ओबर आक्टिंग कर दी हैं। रात में शीतल रंडियों की तरह बिना ब्रा पहनें क्लीवेज दिखातें सिर्फ गाउन लपटें आई थी और बात भी करने की कोशिश की। लेकिन मैं सीधा ऊपर आ गया था। कहीं राड़ ने ये तो नहीं सोच लिया की मैं उसके हाथ नहीं आने वाला, और अब वो कहीं मुझसे दूर तो नहीं रहने वाली। सही बात है यार, रोज-रोज कोई हाडिन माल सिर्फ मुझे लण्ड हिलाता देखने क्यों आएगी? नहीं मेरी जान, मैं तुझे बिना चा नहीं छोड़ सकता। अगर मैं तुझे बिना चोदें मर गया तो मेरी रूह को भी शुकून नहीं मिलेगा। मुझे कुछ करना होगा। मैं तुझे खुद से दूर होने नहीं दे सकता।
 
वसीम ने परी कोशिश की और फिर मूठ मारकर वीर्य को पैटी पे गिरा दिया और टांगकर रूम में चला गया। आज उसका मन तो नहीं था लेकिन इस चीज को वो छोड़ नहीं सकता था। शीतल की पेंटी बा पें वीर्य गिराना उसके प्लान का मुख हिस्सा है।

इधर शीतल अंदाजे से कम से निकली की अब बसीम लण्ड को पैंटी ब्रा पे रगड़ रहा होगा। वो आगे बढ़ने के लिए हुई लेकिन उसकी हिम्मत ही नहीं हुई। कल रात की ही तरह आज भी उसके पैर नहीं बढ़े। कल रात में और अभी में अंतर बस इतना था की कल शीतल एक सीढ़ी भी नहीं चढ़ पाईधी और रूम में सोने चली गई थी। आज पहले दो सीढ़ी, फिर चार सौदी और फिर छत के दरवाजे तक जाकर शीतल रुक गई थी। उसके मन में उठा तूफान शांत ही नहीं हो रहा था, और फिर वो नीचे आ गई। शीतल बेचैन सी रही।

शीतल थोड़ी देर बाद हिम्मत करके उठी और सीधे धड़धड़ाते हए छत पे चली गई, लेकिन तब तक वसीम रगम में जा चुका था। शीतल अपनी पैटी ब्रा को उठाई और वहीं में उसे देखते हुए सूंघने लगी की अगर वसीम देख रहा हो तो उसकी हिम्मत उससे बात करने की हो जाए। शीतल पैटी को सूंघते हए वहीं पे वीर्य को चाटने लगी। उसकी हिम्मत ने जवाब दे दिया और वो नीचे आ गई, और अपनी पहनी हुई पैंटी को उतार दी और वसीम के बीर्य लगी पैटी को पहन ली। वो पैंटी के ऊपर से अपनी चूत को सहला रही थी। वसीम का वीर्य उसकी चूत को भिगा रहा था और शीतल के हाथों में भी लग गया था, जिसे शीतल चाट ली।

शीतल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और- "आह्ह... वसीम। आप इतने शरीफ क्यों हैं? क्यों नहीं मुझे देखते, क्यों नहीं मुझसे बात करते? आपको क्या लगता है मैं गुस्सा करेंगी? बिल्कुल नहीं करेंगी। मैं तो आपकी मदद करना चाहती हैं। उफफ्फ... बसीम आपको लगता है की मेरे जैसी पढ़ी-लिखी शरीफ घर की औरत आप जैसे इतने बड़े उम्र के इंसान से दोस्ती क्यों करेंगी? ऐसा नहीं है वसीम अंकल। मैं चाहती हैं की आपसे बातें करी। अब आप ऐसे नहीं मानेंगे। अब मैं भी आपको मनाकर ही रहंगी। आप मुझे शरीफ समझते हैं इसलिए बात नहीं करते ना? तो अब में रंडियों की तरह बिहेव करगी आपके सामने। तब तो आप मानेंगे ना?" शीतल की चूत में पानी छोड़ दिया और वो निटाल होकर साफे में पड़ी रही।

वसीम ने शीतल को छत में आता देखकर और पैटी बा लें जाता हआ देखकर थोड़ी राहत की सांस ली। शीतल को अपना वीर्य सूंघता और चाटता हुआ देखकर वसीम के मुर्दा लण्ड में फिर से जान आ गई थी। लेकिन फिर भी उसने सोचा की अब जल्दी ही कुछ कर लेना चाहिए।

आज विकास को भी आफिस में मन नहीं लग रहा था। वो अपनी बीवी की हरकतों के बारे में सोच रहा था। उसे शीतल पे बहुत गुस्सा आ रहा था। कैसे शीतल वसीम को डिनर पे बुलाई और कैसे उसके लिए तैयार हुई? कैसे बो उसके सामने खुद को पेश कर रही थी? और कल रात तो बो रडियों की तरह बिहेव कर रही थी। मादरचोद कभी ब्रा पहन रही है तो कभी खोल रही है। अरे कुतिया चूत में इतनी ही आग है तो सीधे-सीधे जाकर चुदवा क्यों नहीं लेती हरामजादी। और क्या पता चुदवाती भी हो, और चुदवा रही हो अभी। दोपहर में दो घंटे रोज अकेले रहते हैं दोनों। और सिर्फ दोपहर को ही क्यों, मेरे आते ही तो पूरा घर उनका, उछल-उछलकर चुदवाती होगी।

वसीम तो शरीफ इंसान है, लेकिन है तो मर्द। अगर किसी मर्द को कोई इसके जैसी हसीन रडी पटाए तो उसका लण्ड तो ऐसे ही टाइट हो जाएगा। वसीम भी अब तक चढ़ गया होगा रंडी पै। सोचते-सोचते विकास गुस्से में ही शीतल और वसीम की चुदाई सोचने लगा। इंटरनेट पे उसने कई तरह के पोर्न देखें थे और स्टोरीस पड़ी थी। उसका लण्ड टाइट हो गया और वो अपनी बीवी की चुदाई वसीम के साथ एंजाय करने लगा। वो मन में सोचने लगा की वसीम में चोद रहा होगा तो वैसे चाद रहा होगा।

विकास बाथरूम में जाकर मूठ मारने लगा, अपनी रंडी बीवी शीतल शर्मा के वसीम खान से चुदाई के नाम पे। उसका शीतल से गुस्सा खत्म हो गया था और उसने सोच लिया था की शीतल को जो करना है करने देगा। घर में कुछ जाससी कैमरे लगवाकर वो अपनी बीवी को चुदवाते हये देखेंगा और जब उससे मन भर जाएगा तो उसे छोड़ देगा।
 
रात में वसीम ने दरवाजा में नाक किया। शीतल अभी खाना बना हो रही थी। विकास और शीतल दोनों चकित हो गये की कौन आया, क्योंकी उनके यहाँ बहुत कम लोग आते जाते थे और जो आते भी थे उनके बारे में इन लोगों के पास पहले से खबर होती थी। विकास ने दरवाजा खोला तो सामने वसीम खड़ा था।

दरवाजा खुलते ही वसीम ने कहा- "आदाब विकास जी, पता नहीं कहाँ आज मेरे घर की चाभी खो गई है."

विकास हँसने लगा और बोला- "अरे वसीम चाचा, तो इसमें इतना घबराने वाली कौन सी बात है? आप ही का घर है ये। हम सिर्फ किराया देते हैं। आइए अंदर, यही रहिए। सुबह देखेंगे की चाभी का क्या करना है?"

तब तक शीतल भी दरवाजा पे आ गई थी। उसके मन में तो लड्डू फूटने लगे की वसीम चाचा आए हैं और रात में यहीं रहेंगे। इससे पहले की वसीम विकास की बात में कुछ बोलता, शीतल चहकते हुए बोल पड़ी- "और नहीं

तो क्या, आपका ही घर है। बिंदास आइए.."

वसीम "शुकिया..' बोलता हुआ अंदर आ गया और सोफे पे बैठ गया।

शीतल नाइट सूट वाले टाप और ट्राउजर में थी। शीतल वसीम के लिए भी खाना बना ली। वसीम आज भी शीतल को नहीं देख रहा था। वसीम विकास में बातें कर रहा था। शीतल अभी तक बसौम के वीर्य लगी पैटी को ही पहनी हुई थी। वसीम को सामने देखकर शीतल की चूत गीली हो गई। उसे लगा की वसीम अपना वीर्य उसकी चूत में भरा है और वही उसकी पेंटी में लगा है। वो बसीम की तरफ देखी जो आज भी उसे नहीं देख रहा था। उसे अपना दोपहर में लिया हुआ प्रण याद आ गया की उसे वसीम को मनाना है।

शीतल ने अपने टाप को ऊपर की एक बटन खोल दी। खाना तैयार हो चुका था तो बोने विकास और वसीम का खाना सर्व करने लगी। जब वो झुकी तो वसीम की नजरों के सामने दो पके आम लटक रहे थे।

बसीम की नजर शीतल की झूलती चूची पे पड़ ही गई और उसका लण्ड एक झटके से टाइट हो गया। उसका मन हआ की अभी दोनों हाथ बढ़ाए और रंडी के टाप के बटन को फाड़कर इसकी चूचियों को मसल दें। उसने बड़ी मुश्किल से ये सोचकर खुद पे काबू किया की बस, कुछ दिन और, फिर बताऊँगा तुझे की मैं क्या चीज हैं।

इस चीज को विकास भी देख रहा था की उसकी बीवी कैसे उस बटू मुस्लिम मर्द के लिए पागल हैं। उसे अपनी बीवी पे पहले गुस्सा आया, फिर मजा आया। उसने सोचा की आज रात तो मेरी बीवी मेरे ही घर में इस टे से चुदवाकर ही मानेंगी। ये सोचकर उसका लण्ड टाइट हो गया की वो आज ही अपनी बीवी को एक बूढ़े मुसलमान मर्द से चुदवाते देखेंगा।

खाना खाने के बाद वसीम बाश बेसिन के पास हाथ धो रहा था। शीतल के किचेन में जाने के लिए वहाँ में जगह कम थी। विकास टेंबल में ही बैठा हुआ था। शीतल के मन में शैतानी ख्याल आया। शीतल बसीम की पीठ में अपनी चूचियां रगड़ती हुई किचन में चली गई।
 
वसीम के लिए ये पहला मौका था जब उसने शीतल के बदन का स्पर्श किया। उसकी लण्ड सनसनाता हआ टाइट हो गया। वसीम में कोई रिएक्सन नहीं दिया लेकिन अपनी पीठ पे शीतल की गुदज चूचियों की छुअन को अभी तक महसूस कर रहा था।

शीतल को वसीम की तरफ से कोई रिएक्सन ना आता देखकर गुस्मा भी आया। फर शीतल को लगा की ब्रा पहने होने की वजह से हो सकता है की वसीम को पता ही ना चला हो। वो अपने बेडरूम में गई और टाप को उतार कर ब्रा को उतार दी और आलिमरा में रख दी और बिना ब्रा के बाहर आ गई। टाप के ऊपर का बटन अभी भी खुला ही रखा था उसने। परै रण्डीपने के मह में आ गई थी शीतल। अब उसने सोच लिया था की वसीम को मनाना है ताकी वो शीतल के साथ फ्रैंक हो सके।

वसीम सोफे पे जाकर बैठ गया और रिएक्सन तो उसपे ऐसा हुआ था की उसका लण्ड अब तक टाइट ही था। वो तो आज आया ही इसलिए था की माहौल पता कर सके शीतल के मन का। दोपहर में शीतल नहीं आई थी । इसलिए वो परेशान हो उठा था लेकिन यहाँ शीतल की आग को देख कर वो निश्चित हो गया। उसे कुछ करने की जरूरत नहीं थी और उसका प्लान सही दिशा में जा रहा था।

विकास भी अब हाथ धोकर वहीं सोफे पे आ गया।

लण्ड टाइट हो चुका था और वो जान गया था की अब वो जब चाहे इस चिड़िया को पटक कर खा सकता है। लेकिन उसे कोई हड़बड़ी नहीं थी और वो बड़ा खेल खेलना चाह रहा था। उसने एक नजर में ताड़ लिए की शीतल ब्रा के बिना घूम रही है। उसका भी जी चाह रहा था की अब शीतल को चोद डालें।

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एक मई के लिए तो फेसबुक पे लड़की की दोस्त रिक्वेस्ट रिजेक्ट करना मुश्किल कम होता है और यहाँ तो वसीम सामने परोसा हआ मीट रिजेक्ट कर रहा था। वसीम शीतल के दिमाग को इस अवस्था में ले आना चाहता था जिसमें वो उसकी हर बात माने। किसी भी कीमत पे वसीम को ना छोड़ पाए, चाहे और सब कुछ छोड़ना पड़े। इसके लिए बहुत धैर्य की जरूरत थी और वसीम इसीलिए खुद में काबू किए हुए बैठा था।

विकास में भी ये नोटिस किया की उसकी बीवी ने ब्रा को उतार दिया है। वो सोचने लगा की कैसी है शीतल जो इस बर्ट मर्द के लिए पागल है? और कैसा है ये बसीम जो इस चिंगारी से खुद को बचाए हए है? उसने सोचा की शायद मेरी वजह से बीम घबरा रहा है या शीतल खुलकर कुछ नहीं कर पा रही है। उसने सोचा की मैं थोड़ा दर होकर इन लोगों की मदद कर देता है ताकी मेरी रंडी बीवी अपने आशिक से चुद पाए।

विकास और बसीम वहीं बातें कर रहे थे और शीतल किचेन की सफाई कर रही थी। थोड़ी देर बाद वसीम ने शीतल से पानी माँगा। क्मीम सोफे पे बैठ था। विकास उसी वक़्त फोन पे किसी से बात करता हुआ उठा और रूम में जाकर बात करने लगा। शीतल पानी लेकर आई। उसके एक हाथ में जग और एक हाथ में उलास था। वो कुछ ऐसे लड़खड़ाई की वसीम की तरफ दोनों हाथ फैलाकर गिरने लगी।

वसीम ने उसे पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया और वसीम का हाथ शीतल की चूचियों पे दब गया। शीतल का रोम रोम सिहर गया। बसीम का पूरा हाथ शीतल की चूचियों की गोलाई को दबा गया था। शीतल साड़ी फैकय कहती हुई खड़ी हो गईं। भले ही उसकी चूची दब गई थी, लेकिन उसने पानी नहीं गिरने दिया था, जग उत्लास से। वसीम ने ये जानबूझ कर नहीं किया था लेकिन उसके पूरे हाथ में शीतल की बिना बा की चूची आ गई थी। वसीम को बहुत मजा आया था।
 
वसीम ने उसे पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया और वसीम का हाथ शीतल की चूचियों पे दब गया। शीतल का रोम रोम सिहर गया। बसीम का पूरा हाथ शीतल की चूचियों की गोलाई को दबा गया था। शीतल साड़ी फैकय कहती हुई खड़ी हो गईं। भले ही उसकी चूची दब गई थी, लेकिन उसने पानी नहीं गिरने दिया था, जग उत्लास से। वसीम ने ये जानबूझ कर नहीं किया था लेकिन उसके पूरे हाथ में शीतल की बिना बा की चूची आ गई थी। वसीम को बहुत मजा आया था।

हालाँकी शीतल का प्लान सफल रहा था और आखिरकार, वो अपनी चूची वसीम से मसलवा ही ली थी फिर भी उसे शर्म आ ही गई। शीतल नजरें झुकाए हए वसीम को पानी दी और फिर किचन में चली गई। वसीम अपने हाथ पेशीतल की चूचियों को महसस करता रहा और शीतल अपनी चूची पे वसीम का सख्त हाथ।

तभी लाइट कट गई। अंदर सबको गर्मी लगने लगी तो विकास ने ही कहा- "छत में चलते हैं."

सब छत पे टहलने लगे और शीतल वसीम के आस-पास ऐसे चक्कर काटने लगी की जिससे किसी तरह एक और बार अपने बदन को वसीम के बदन में सटा पाए। शीतल और वसीम उसी जगह पे थे जहाँ वसीम शीतल की पैंटी ब्रा पे अपना वीर्य गिराता था।

छत में अंधेरा था। विकास अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था और वसीम से बात कर रहा था। शीतल का मौका नहीं मिल रहा था। तभी विकास में मोबाइल में एक वीडियो प्ले किया और वसीम को दिखाने लगा। शीतल भी वसीम के साइड से आकर वीडियो देखने लगी। ये सबसे अच्छा मौका था।

शीतल वसीम के बदन में चिपक गई। उसकी गोल-गोल मुलायम चूचियां वसीम के बाज़ में दब रही थी। शीतल को बड़ा सुकून मिल रहा था। अब शायद वसीम थोड़ा रिलैक्स हो पाएंगे। लेकिन वसीम ने वीडियो देखते हुए ही अपने जिश्म को थोड़ा आगे किया तो शीतल भी आगे हई। वसीम बीडियो देखता हआ हसने लगा और थोड़ा और आगें हुआ। शीतल अब इससे आगे नहीं हो सकती थी। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था

थोड़ी देर में सब सोने चले गये, लेकिन शीतल की आँखों में नींद नहीं थी। वो समझ नहीं पा रही थी की क्या ? वो अपनी चचियों पे वसीम का सख्त हाथ महसस कर रही थी और चाह रही थी की क्सीम अच्छे से आकर उसकी चूचियां मसल डाले। लेकिन वसीम ता इतना शरीफ है की देखता तक नहीं, लेकिन इतना प्यासा है की पैटी पे अपना वीर्य बर्बाद कर रहा है। उसे गुस्सा आ रहा था की जब अंदर से इतने बेचैन हो तो कुछ करो। इतना हिंट दे रही हैं, इतनी तरह से कोशिश कर रही हैं फिर भी कोई असर होता ही नहीं जनाब में। अब क्या करण? सीधा-सीधा जाकर बोल दूं की चाद लो मुझे। ये वीर्य मेरी पेंटी में नहीं मेरी चूत में डालो। लगता है यही सुनकर मानेंगे वसीम चाचा।

शीतल वसीम के खयालों में खोई थी तभी विकास उसकी तरफ करवट बदला और उसकी चूची में हाथ रखता हआ बोला- "ब्रा क्यों खोल दी?"

शीतल थोड़ा घबरा गई लेकिन तुरंत बाली- "बहुत गमी लग रही थी और पेट भी टाइट लग रहा था ता खोल दी। तब थोड़ा रिलैक्स हुई..."

विकास उसकी चूचियों को बाहर निकालकर मसलने लगा तो शीतल विकास का हाथ हटा दी और उसे मना कर दी की तबीयत ठीक नहीं लग रही। शीतल चाहती थी की अभी बसीम आकर उसकी चूचियों को मसलता तो ज्यादा मजा आता।

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विकास करवट बदलकर सोने की आक्टिंग करने लगा। उसे लगा की उसके सोने के बाद शायद शीतल और वसीम चदाई करें। वसीम को नींद नहीं आ रही थी और वो शीतल की चदाई के सपने देख रहा था।
 
शीतल का पेट दर्द

शीतल को नींद नहीं आ रही थी। क्योंकी वो चाहती थी की किसी तरह वसीम उसके नजदीक आए और उसके बदन से खेले।

आधे घंटे भी नहीं हए की शीतल पेंट दर्द चिल्लाने लगी। उसने विकास को जगाया और जोर-जोर से कराहने लगी। वो मछली की तरह तड़पने लगी। विकास जाग गया और वसीम भी जागकर इसके रूम में आ गया। विकास को समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे? घर में कोई दवाई भी नहीं थी और रात काफी हो चुकी थी। शीतल इधर से उधर छटपटा रही थी। विकास अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था और शीतल को ऐसे देखकर वो घबरा गया था।

वसीम बोला- "मुझें देखने दो की कहाँ दर्द है?"

शीतल सीधी लेटी हुई थी, वो अपने पेट से शर्ट को उठा ली और अब उसका चमकता हुआ पेट वसीम की नजरों के सामने था। शीतल अभी मात्र 23 साल की थी और उसकं पेंट में अभी तक चर्बी जमा नहीं हुई थी, इसलिए उसका पेट पूरी तरह फ्लेंट था। शीतल का ट्राउजर नाभि से नीचे ही था, इसलिए बहुत सेक्सी सा दृश्य था।

वसीम ने अपना हाथ बढ़ाया और शीतल के चिकने पेंट को सहलाता हआ दबाने लगा। शीतल का पेट गैस की बजह से टाइट था और इसलिए वो दर्द से छटपटा रही थी। वसीम खान शीतल के पेट को दबा-दबाकर सहला रहा था।

शीतल की पेट पूरी गोरी चिकनी थी। शीतल बा नहीं पहनी हुई थी और उसने टाप को चूचियों तक उठा लिया था। उसका ट्राउजर नाभि से नीचे था और शीतल का पूरा नाभि क्षेत्र वसीम के सामने था और उसके लिए फुल अवेलबल था। वसीम के लिए खुद को रोकना बड़ा मुश्किल हो रहा था। उसने बड़ी मुश्किल से अपने एक्सप्रेशन का सम्हल रखा था। वो विकास के सामने उसकी हसीन बीवी की नाभि को सहला रहा था।

वसीम शीतल के पेंट को सहला रहा था और शीतल अपने बदन को ऐठने लगी। शीतल का जी चाह रहा था की वसीम अपना हाथ पैट के अंदर चूत पै या फिर और ऊपर शर्ट के अंदर ले जाए जहाँ उसकी टाइट चूची बिना ब्रा के खड़ी थी। शीतल पेट दर्द से जो भी परेशान हो लेकिन उसे मजा बहुत आ रहा था। उसके अंदर ये खुशी तो थी ही का आज वसीम ने उसकी चूचियों का भी छू लिया और पेट भी सहला लिया।

विकास परेशान सा चुपचाप खड़ा देख रहा था। उसे परेशानी में कसीम से पूछा- "क्या हुआ है इसे?"

वसीम बोला- "कुछ खास नहीं, गैस बन गई है पेट में..." फिर वसीम ने विकास को एक बोतल में गरम पानी भर कर लाने को कहा।

विकास दौड़ता हुआ किचेन की तरफ भगा और पानी गरम करने लगा।

अब रूम में सिर्फ वसीम और शीतल थे। शीतल अपने पेट को उघारे लेटी हुई थी और वसीम उसके पेट को सहला रहा था। विकास के जाते ही और तेज दर्द की आक्टिंग करते हए शीतल वसीम का हाथ पकड़ ली और ऊपर अपनी चूची पे रख ली।

उफफ्फ... वसीम हड़बड़ा गया। उसे शीतल से इस बोल्डनेस की उम्मीद नहीं थी। वसीम हड़बड़ाते हए हाथ नीचे खींचा की कहीं अगर विकास ने देख लिया तो पूरा खेल, पूरा प्लान चौपट हो जाएगा। लेकिन शीतल की पकड़ मजबूत थी। उसने फिर से हाथ ऊपर खींच लिया। इस खींचा तानी में शीतल का टाप थोड़ा सा और ऊपर उठ गया था और चूची के नीचे का हिस्सा चमकने लगा था। शीतल की चूचियां वसीम के हाथ से दब रही थी नीचे से। अब क्सीम खुद को रोक नहीं पाया और उसने हाथ को ढीला कर दिया। शीतल फिर से वसीम के हाथ को ऊपर की, और अब वसीम के हाथ में शीतल की नंगी चूचियां थी। उफफ्फ... वसीम ने ना चाहते हए भी कम के एक बार दबा ही दिया और फिर हाथ हटा लिया। शीतल की प्यास और बढ़ गई। वसीम का मन तो नहीं था हाथ हटाने का, लेकिन उसे विकास का डर था की कहीं अगर उसने देख लिया तो हंगामा ना हो जाए और हाथ आया हआ शिकार उससे दूर ना चला जाए। ये रिस्क वो नहीं ले सकता था।

वसीम ने बहुत मेहनत और इंतजार किया था इसके लिए। वसीम अलग होकर खड़ा हो गया, क्योंकी वो अगर शीतल के पास रहता तो शीतल उसे नहीं छोड़ती।

शीतल भी हाथ से आए मौके को निकलता देखकर पागल हो गई। वो अपनी पीठ को उठाते हुए अपने टाप के ऊपर से अपनी चूचियां मसलने लगी। उसने चूची मसलते हए टाप को भी ऊपर कर लिया। वसीम नजरें नीचे किए खड़ा था, लेकिन चूचियों के चमकते ही उसने कनखियों से देखा। शीतल की गोल-गोल चूची और उसके बीच में ब्राउन कलर का निपल कयामत ढा रहा था।

विकास के आने की आहट हई और शीतल टाप नीचे करके अपनी चूची टक ली। विकास ने बोतल वसीम को दें दिया।

वसीम ने उसे बताया- "बोतल को पेट पे रखकर ऊपर से नीचे रोल करो..."

विकास हड़बड़ाया हुआ था, बोला- "मुझे ये सब नहीं आता, आफि करिए ना क्सीम चाचा, आप अच्छा करेंगे."

शीतल मन ही मन मुश्कुरा दी की फिर से वसीम चाचा उसके जिस्म का टच करेंगे। वसीम ऐसा नहीं करना चाहता था। क्योंकी उसे डर था की कहीं शीतल विकास के सामने कुछ ऐसी वैसे हरकत ना कर दे। लोकन और कोई उपाय नहीं था।
 
वसीम फिर से बैंड पे शीतल के बगल में बैठ गया और बोतल को शीतल के पेट में ऊपर से नीचे रोल करने लगा। वसीम पूरा ख्याल रख रहा था की वो शीतल को कहीं से टच ना करें। थोड़ी देर में शीतल का दर्द थोड़ा कम हो गया।

विकास देख रहा था और अब उसका ध्यान गया की वसीम उसकी नजरों के सामने उसकी बीवी के पेंट को सहला रहा है। जब वसीम ने एक बार शीतल के पेट को दबाकर देखा की अब कैसा है यो अचानक विकास के लण्ड में हरकत हुई। उसका ककोल्ड मन जाग गया था।

विकास सोचने लगा। विकास की आँखों में जो दृश्य चल रहे थे उसमें शीतल जंगी हो चुकी थी और वसीम उसकी चूचियां चूस रहा था। शीतल का पेट दर्द कम हो गया लेकिन वो अब भी कुछ ऐसा ही चाह रही थी की वसीम उसके पेट को सहलाता रहे और चूचियों को मसले। लेकिन वसीम अपनी जगह से उठ गया और रूम से बाहर

आ गया। वसीम बिल्कुल शातिर खिलाड़ी की तरह अपनी चाल में मस्त था।

सब सोने चले गये। शीतल की एक तरह से जीत हुई थी। जैसा उसने सोचा था दोपहर में, उसने उसी तरह रंडियों की तरह की हरकत की थी क्सीम के सामने। उसने पहले ब्रा के ऊपर से फिर बिना ब्रा के टाप के ऊपर में और फिर अपनी नंगी चूचियों को वसीम से मसलबा लिया था और पेंट तो बहुत देर तक सहलाया था वसीम ने। शीतल सोच रही थी की अब वसीम चाचा को रिलैक्स लग रहा होगा। अब तो मैंने अपनी तरफ से इतना न्योता दे दिया है। शायद अब वो मेरे से बात करें, मुझे देखें। अब शर्माना घबराना बंद कीजिए वसीम चाचा, अब आपको मेरी पैंटी खराब करने की जरूरत नहीं है।

वसीम बैंड पे लेटते ही अपने लण्ड को फ्री किया और सहलाने लगा। उसकी हथेली में शीतल की नंगी चूचियों की एअन अब भी थी। उसकी आँखों के सामने शीतल की नंगी चूचियां चमक रही थीं। उफफ्फ.. आग भर गई है रांड की चूत में। अब ये पूरी तरह तैयार है और अब इसे छोड़ना होगा, नहीं तो कहीं ऐसा ना हो की देर हो जाए। बस एक-दो दिन और फिर उसके बाद तो त मेंरी पालत कृतिया बनकर मेरे इशारों में नाचेंगी। वसीम अपने लण्ड को सहलाता हवा सो गया।

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