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Adultery हसीनों का मेला वासना का रेला

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हसीनों का मेला वासना का रेला

पात्र (किरदार) परिचय

01. जुनैद- उम्र 30 साल, नजमा का पति, प्राइवेट कंपनी में नौकरी, लण्ड " लंबा और 2" मोटा,

02. नजमा- उम्र 26 साल, जुनैद की पत्नी, बी.एड., खूबसूरत, फिगर 36-28-38 की, स्कूल में टीचर,

03. राज- उम्र 52 साल, शांत स्वाभाव, गैर - शादीशुदा, कमीना , लण्ड 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा, औरतों का चहेता,

04. सलमा- नजमा के स्कूल में टीचर, शादीशुदा, गाण्ड 40" इंच की, एक लड़का और एक लड़की की माँ,

05. वहीदा नजमा के स्कूल में टीचर, शादीशुदा, चूचियां सबसे बड़ी, एक लड़का और एक लड़की की माँ,

06. शाज़िया उम्र 29 साल, नजमा की ननद, फिगर 32-26-38 की, कद भी नजमा जैसी, कयामत,

07. जय- राज का दोस्त,

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कड़ी_01

नजमा नाम की एक हाउसवाइफ जिसकी उम्र लगभग 27 साल होगी। उसके पति की उम्र लगभग 30 साल की होगी। नजमा देखने में बहुत ही खूबसूरत है। उसकी फिगर की बात करें तो वो अपनी सोसाइटी की सबसे हाट औरत है। उसके जैसा फिगर उस सोसाइटी में किसी का नहीं है। उसकी चची का साइज 36 इंच से भी ज्यादा है, और उसकी कमर को देखकार तो अच्छे-अच्छे भी गरम हो जाएं। कमर का साइज 28" इंच होगा और सबसे कयामत वाली चीज उसकी गाण्ड जो की बिल्कुल गोल-गोल और 38 इंच की है। उसकी शादी को तीन साल हो गये हैं। अभी तक उसकी कोई औलाद नहीं है।

नजमा का पति एक प्राइवेट कंपनी में जाब करता है जो अधिकतर टाइम तो घर पर ही रहता है लेकिन कभी कभी उसे हफ्ते-हफ्ते भर के लिए बाहर भी जाना पड़ता है। नजमा के पति का नाम जुनैद है, और बा नजमा को बहुत प्यार करता है। बच्चा ना होने का कारण ये नहीं की जुनैद में कोई कमी है। बल्की वो दोनों बच्चा चाहते ही नहीं। उन्हें बच्चा पाँच साल बाद चाहिए। उनकी लाइफ सही चल रही थी जब तक नजमा की जाब नहीं लगी थी।

नजमा ने शादी से पहले ही बी.एड, किया हुआ था, जो शादी के बाद उसके काम आया और उसे अपनी सोसाइटी में 30 किलोमीटर की दूरी पर एक सरकारी स्कूल में टीचर की जाब मिल गई थी। जिससे वो बहुत खुश थी। क्योंकी उनके घर की सारी प्राब्लम खत्म हो गई थी। जिस स्कूल में नजमा की जाब लगी थी वो स्कूल क्लास 5 तक ही था, और उस स्कूल में नजमा को मिलाकर कुल चार लोग पढ़ाते थे। जिनमें तीन तो महिला थी और एक आदमी था, जो उस स्कूल का प्रिन्सिपल था।

जब नजमा ने पहले दिन स्कूल जॉयन किया तो उसे सारा दिन तो सिर्फ वहां के बारे में पता करने में चला गया। उस स्कूल की दोनों महिलायें नजमा से कम स्मार्ट थी या कहें की नजमा उनसे बहुत अच्छी थी दिखने में। नजमा की मुलाकात सबसे पहले सलमा से हुई। जो की उस स्कूल में एक साल पहले आई थी। उसकी फिगर में सबसे मस्त उसकी गाण्ड थी जो कुछ ज्यादा ही बड़ी थी। और दूसरी महिला वहीदा थी जिसकी चूचियां सबसे बड़ी थी। वो दोनों शादीशुदा थी और उनकी शादी को भी चार-पाँच साल हो गये थे। दोनों के एक-एक लड़का और एक-एक लड़की थी।

अब नम्बर आता है उस स्कूल के प्रिन्सिपल का, जिसका नाम था राज- जो अभी तक कुँवारा था। उसकी शादी किसी कारणबस नहीं हुई थी। उसकी उम्र लगभग 42 या 44 साल के लगभग होगी। वो एक नम्बर का कमीना और औरतों का दीवाना था। लेकिन उसका शांत स्वाभाव ही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। वो अपने इसी स्वाभाव के कारण ही हर औरत को अपने नीचे ले लेता था। और जो औरत एक बार उसके नीचे आ जाती थी, बो फिर बार-बार उसके नीचे जाने के लिए तड़पती रहती थी।

राज से पहली मुलाकात में नजमा को कुछ पता नहीं चला। लेकिन राज को पता चल गया था की उसके सपनों की रानी आ चुकी है। उसको जिस तरह की औरत की तलाश थी, नजमा बिल्कुल उसी की तरह थी। पहली मुलाकात में ही राज ने नजमा के बारे में सब कुछ जान लिया था। और नजमा को राज के बारे में सिर्फ इतना ही पता चला था की वो बहुत ही शांत स्वाभाव का है। पहले दिन का स्कूल नजमा के लिए किसी रोमांच से कम नहीं था। नये-नये लोगों से मुलाकात और छोटे बच्चों का साथ उसे बहुत पसंद आया था।

घर पहुँच कर नजमा ने अपने पति को सब कुछ बता दिया था, अपने स्कूल के बारे में।
 
सलमा राज के आफिस में बैठकर बातें कर रही थी और वहीदा को कोई काम होने के कारण बो घर चली गई थी। सारे बच्चे स्कूल में जा चुके थे। स्कूल में सिर्फ राज और सलमा ही बचे थे।

सलमा राज से कहती है- "राज साहब, आज तो आपको अपने सपनों की रानी मिल गई जैसी आपको चाहिए थी। नहीं तो आपने मेरी गाण्ड और वहीदा की चूचियों की ऐसी तैसी कर रखी थी। आपने मेरी गाण्ड और वहीदा की चूचियां की मार-मारकर हालत खराब कर रखी थी। अब तो आपको दोनों एक ही जगह पर मिल गये.."

राज- "सही कहा सलमा जी। नजमा की गाण्ड और चूचियां आप दोनों से बहुत अच्छी है। उसकी तो गाण्ड पहले मारूँगा चूत तो बाद में."

सलमा- "राज साहब, उसकी जब मारनी हो तब मारना पहले मेरी चूत की आग को शांत करो... ये कहकर सलमा अपनी सलवार उतारकर जमीन पर घोड़ी बन जाती है।

जिसे देखकर राज मुश्कुराकर कहता है- "ऐसी ही हालत मुझे नजमा की करनी है. और उठकर खड़ा हो जाता है और सलमा की गाण्ड के पीछे आ जाता है। अपनी पैंट उतारकर टेबल पर रख देता है।

राज के सामने सलमा की 40" इंच की गाण्ड थी। राज ने सबसे पहले उसकी चूत में उंगली डालकर उसका गीलापन देखा तो चूत पूरी गीली थी। उसने अपनी उंगली चूत से निकालकर सीधे गाण्ड में डाल दी और कुछ देर तक उंगली को चारों तरफ घुमाता रहा। जब उसे लगा की उसका लण्ड उसकी गाण्ड में आराम से चला जाएगा तो उसने उंगली निकालकर अपना लण्ड उसकी गाण्ड में लगा दिया।

सलमा को एहसास हो गया की उसकी गाण्ड अब फटने वाली है। लेकिन वो गाण्ड मरवाने के मूड में नहीं थी, उसे तो चूत में लण्ड चाहिए था। उसे एहसास हुआ की राज का लण्ड एक बार में पूरा अंदर ले पाना नामुमकिन है। पहली बार उसे लेने में पूरा आधा घंटा लगा था। 6 महीने से गाण्ड मरवाजे के बाद भी सलमा को राज के लण्ड की आदत नहीं पड़ी थी। वो इरते हए पीछे देखती है।

राज उसकी तरफ देखकर हँसता है और कहता है- "सलमा, तेरी गाण्ड ने मुझें नजमा की याद दिला दी है अब तू तैयार हो जा एक अलग मजा लेने के लिए.." इतना कहकर राज एक जोर का झटका मारता है तो उसका आधे से भी ज्यादा लण्ड सलमा की सूखी गाण्ड में घुस जाता है।

सलमा को तो जैसे चक्कर आ रहा हो उसे ऐसा महसूस हो रहा था। उसे ये महसूस नहीं हो रहा था की वो चुद रही है बल्की सलमा सोच रही थी की उसका कत्ल आज पक्का है।

पहला झटका मारने के बाद राज ने तुरंत ही दूसरा झटका मारकर पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में डाल दिया था। ऐसा पहली बार हुआ था जब राज का लण्ड दूसरी बार में सलमा की गाण्ड में घुसा था, नहीं तो हर बार कम से कम चार-पाँच धक्के मारने पड़ते थे। लण्ड पूरा का पूरा सलमा की गाण्ड में डालने के बाद राज सलमा को पूछता है- "दर्द तो नहीं हो रहा?"

सलमा कोई जवाब नहीं देती। बस शांत रहती हैं।
 
थोड़ी देर तक शांत रहने के बाद राज अपने लण्ड को आगे-पीछे करना शुरू कर देता है। कुछ देर बाद सलमा भी अपनी गाण्ड हिलाने लगती है। अब राज समझ गया था की सलमा अब उसका पूरा साथ देगी। और वो तेजी से सलमा गाण्ड पेलने लगता है। करीब आधा घंटा चोदने के बाद जर्नेद सलमा को टेंबल पर लिटा देता है

और उसे चोदने लगता है। सलमा की हालत खराब थी वो दो बार झड चुकी थी और उसकी गाण्ड में भी दर्द हो रहा था। लेकिन राज का तो उसकी गाण्ड में नजमा की गाण्ड दिख रही थी। इसलिए वो उसे फाइने के मूड में था और उसने सलमा की गाण्ड को फाड़ भी दिया था। 15 मिनट की चदाई के बाद राज ने अपना लण्ड बाहर खींचकर सीधा सलमा की चूत की गहराई में उतार दिया।

जिसके लिए सलमा तैयार नहीं थी और वो चीख पड़ी। पूरा लण्ड अंदर जा चुका था और राज के झटके तेज हो गये थे। सलमा भी इस हरकत से पागल हो गई थी और वो झड़ गई। तभी राज ने भी अपना बीज सलमा की कोख में भर दिया और उसी के ऊपर लेट गया। लण्ड छोटा होकर सलमा की चूत से बाहर आया और साथ ही टेर सारा बीज भी बहकर सलमा की जांघों में बहने लगा। तभी सलमा के मोबाइल पर उसके पति का फोन आ जाता है, जिसे देखकर सलमा डर जाती है।

सलमा राज की तरफ देखती है तो राज उसे फोन उठाने को कहता है। सलमा फोन उठाकर हेलो बोलती है।

उसका पति उससे पूछता है- "सलमा कहां हो तुम? स्कूल खत्म हुए तो एक घंटे से भी ज्यादा हो गया है। और तुम कहां हो?"

सलमा कुछ समझ नहीं पाती की क्या बोले? तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आता है और अपने पति से कहती है- "मेरे कूल्हे में मोच आ गई है। जिसकी वजह से में चल नहीं पा रही हूँ। अभी-अभी प्रिन्सिपल सर ने मुझे दवा दी है, आप आकर मुझे ले जाओ.." और इतना कहकर सलमा फोन काट देती है।

राज सलमा की बात पर हँस रहा था। उसे पता था की मैने जिस हिसाब से इसकी गाण्ड और चूत मारी है वो जरूर किसी से कुछ भी कह नहीं पाएगी।

सलमा वैसे ही अपनी सलवार पहनकर बाहर निकल जाती है। वो ठीक ढंग से चल भी नहीं पा रही थी। उसकी जांघ राज के बीज से पूरी गीली हो चुकी थी और उसकी सलवार उसकी जांघों में चिपक गई थी। कुछ देर बाद सलमा का पति आ जाता है और सलमा को लेकर घर चला जाता है। रास्ते में सलमा राज को फोन करके कल की छुट्टी ले लेती है।
 
सलमा को चोदने के बाद भी आज राज को अपना लण्ड पूरी तरह से शांत नहीं लग रहा था। उसे शांत तो सिर्फ नजमा ही कर सकती है। ऐसा सोचकर राज मुश्कुरा देता है और अपनी पैंट पहनकर बाहर आ जाता है,

और कमरा लाक करके अपनी गाड़ी की तरफ चल देता है। उसका घर स्कूल से 60-70 किलोमीटर दूर था वो कभी-कभी वहीं स्कूल में रुकता था, नहीं तो हर रोज घर से आता जाता था।

राज पूरे रास्ते में सिर्फ नजमा को चोदने का ही प्लान बनाता रहा, और घर जाकर नहा धोकर थैयार होकर घर से बाहर निकलकर होटल की तरफ चला जाता है।
 
उधर नजमा आज अपने आपको बहुत ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रही थी। वो घर पहुँचकर सबसे पहले बाथरूम में घुस जाती है, और नहाने के लिए अपने सारे कपड़े उतारकर शावर के नीचे बिल्कुल नंगी खड़ी हो जाती है। ये पहली बार नहीं था, उसके नहाने का तरीका ही यही था। नहाते समय वो अपने हर अंग को अच्छे से साफ करती थी। क्योंकी उसे पता था उसका पति घर आकर सबसे पहले चूत में ही मुह मारता है। ये सोच कर बो इस पड़ती है और नहाने के बाद बाथरूम से बाहर आकर अपना नाइट गाउन पहन लेती है।

नजमा नाइट गाउन के नीचे कभी भी साया नहीं डालती थी। वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में ही रहती थी। खाना बनाने के बाद वो जुनैद का इंतजार करने लगती है। और उसे आज के स्कूल के बारे में बताने के लिये पूरा उत्तेजित हो जाती है।

जुनैद करीब 8:30 बजे घर आता है। नजमा जुनैद को देखकर खुश हो जाती है, और उससे जाकर लिपट जाती है। जुनैद को नजमा की इस हरकत का पता था। वो जानता था की जब नजमा उत्तेजित होती है तभी वो ऐसा करती है। नजमा के लिपटते ही जुनैद भी मूड में आ जाता है और धीरे से नजमा की गाण्ड दबाने लगता है। जिसका विरोध नजमा नहीं करती। वो भी अपनी टांग ऊपर की तरफ उठा देती है जिससे जुनैद आसानी से उसकी गाण्ड को मसलने लगता है।

नजमा और जुनैद अब धीरे-धीरे गरम हो गये थे। जुनैद नजमा को गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले जाता हैं

और उसे बैड पर लिटाकर अपने परे कपड़े खोल देता है। नजमा जुनैद का पूरा नंगा देखकर शर्मा जाती है। लेकिन छुपी नजरों से जुनैद के लण्ड को बार-बार घुरती है, और खड़ी होकर तुरंत उसे मैंह में लेकर चूसना शुरू कर देती है। लण्ड चूसना उसे जुनैद ने ही सिखाया था, नहीं तो शादी के पहले सिर्फ उसे चुदने का ही पता था। शादी के बाद ही जुनैद ने उसे लण्ड चूसने और चूत चाटने जैसे अनुभव दिए थे।

जुनैद के लण्ड का साइज 6" लंबा और 2" मोटा था। जिसे नजमा बहुत पसंद करती थी। नजमा की नजरों में बड़ा लण्ड उसके पति का है, ऐसा उसका मानना था। जुनैद ने भी उसे यही भरोसा दिलाया था की उसका लण्ड सबसे बड़ा है। वैसा ही वो समझ रही थी। लण्ड चुसवाना जुनैद को ज्यादा पसंद नहीं था क्योंकी उसे पता था की नजमा दो मिनट में ही उसे झड़ा देगी।

जुनैद तुरंत नजमा के मुंह में लण्ड खींचता है और नजमा को बैड पर लिटाकर अपना मुँह उसकी गरम चूत पे रख देता है। जिससे नजमा पागल हो जाती है और जुनैद का सिर अपनी चूत में जोर से दबाती है। जुनैद को उसकी ये अदा बहुत पसंद आती है। करीब 5 मिनट की चूत चुसाई के बाद जुनैद नजमा की दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधे पर रखता है और अपना लण्ड नजमा की चूत में लगाकर एक जोर का झटका मारकर पूरा लण्ड एक बार में ही उसकी चूत में उतार देता है।

जिससे नजमा की चीख निकल जाती है और नजमा अपने नाखून जुनैद की पीठ में गड़ा देती है। पूरा लण्ड अंदर लेने के बाद नजमा हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू कर देती है।

जिससे जुनैद भी अपनी स्पीड बढ़ा देता है। करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद जुनैद अपना लण्ड बाहर निकाल कर सीधा नजमा की गाण्ड के छेद में लगाकर अपना पूरा माल नजमा की गाण्ड में निकाल देता है। जिससे नजमा भी उत्तेजित होकर अपना पानी छोड़ देती है। दोनों निढाल होकर बिस्तर पर ही सो जाते है।

नजमा अपनी शादी के तीन साल में बहुत ही कम दो या तीन बार ही चुदी थी। जुनैद हमेशा एक बार चोद कर ही सो जाता था। नजमा को भी यही लगता था की इससे ज्यादा चुदाई नहीं होती होगी। लेकिन नजमा का मन उस चुदाई से नहीं भरता था, और बो और ज्यादा के लिए सोचने लगती है और सोचती है की जुनैद से बात करेगी।

सुबह नजमा की आँख जब खुली तो उस समय सुबह के 6:30 बज रहे थे। नजमा को 9:00 बजे स्कूल के लिए निकलना था तो वो जल्दी से तैयार होकर खाना बनाने लगती है। जुनैद की नींद खुलती है तो वो सीधे किन में जाकर नजमा को पीछे से पकड़ लेता है और किस करने लगता है।

नजमा उसे अपने अलग करते हुए कहती है- "जान... मैं लेट हो जाऊँगी प्लीज़... छोड़ दो..."

जुनैद उसे छोड़ देता है और स्कूल के बारे में पूछने लगता है, तो नजमा उसे बहा के स्टाफ के बारे में बताती है की उसके स्कूल में तीन औरतें और एक मर्द है जो की स्कूल का प्रिन्सिपल है।

तभी जुनैद उसको छेड़ते हुए कहता है- "प्रिन्सिपल की तो बल्ले-बल्ले है.."

नजमा उसका मतलब समझ जाती है और जुनैद को बताती है- "हमारे प्रिन्सिपल बहुत अच्छे नेचर के है, और बहुत शांत रहते हैं."

जुनैद चुटकी लेते हुए कहता है- "देखना मेरी जान कहीं तुम जैसी हाट माल को देखकर अशांत ना हो जाए और मैं अपनी बीबी को खो दूं.." और जोर से हँसने लगता है।

नजमा उसकी पीठ में घुसा मारती है और कहती है- "वो ऐसे नहीं हैं, और होंगे भी तो क्या?" ये बात वो आँख मार कर कहती है। नजमा टाइम देखकर कहती है- "जुनैद मैं लेट हो रही हूँ प्लीज... मुझे बस स्टैंड तक छोड़ दोगे?"

जुनैद उसे बाइक से बस स्टैंड तक छोड़ देता है। नजमा अपने घर से स्कूल तक बस से ही जाती थी। स्कूल जाते समय नजमा ने आज साड़ी पहनी हुई थी जिससे उसका हर अंग आज पूरी तरह से कहर ढा रहा था। आज उसे देखकर अच्छे अच्छे पागल हो रहे थे। उसकी गाण्ड आज अच्छे-अच्छे लण्ड को खड़ा कर रही थी।
 
रास्ते में ट्रैफिक होने की वजह से नजमा पहले ही दिन आधा घंटा लेट हो गई थी। उसके दिमाग में अजीब से खयाल आ रहे थे की पहले ही दिन बा स्कूल आने में लेट हो गई है, कहीं राज साहब कुछ कहे ना? इसी उधेड़बुन में वो स्कूल पहुँचती है। स्कूल पहुँचते ही वो सीधे प्रिन्सिपल के आफिस चली जाती है। सलमा उस दिन छुट्टी पर थी और वहीदा क्लास में बच्चों को पढ़ा रही थी। राज अपने आफिस में बैठकर नजमा के बारे में ही सोच रहा था, जिससे उसका लण्ड पूरी तरह से खड़ा था।

नजमा बिना नाक किए हुए ही राज के आफिस में घुस जाती है। जिससे राज हड़बड़ाकर खड़ा हो जाता है और उसका लण्ड पूरी तरह से दिखने लगता है। जैसे ही नजमा राज को देखती है वो अवाक हो जाती है। उसके मुँह से बिल्कुल भी आबाज नहीं निकलती। वो सिर झुका कर नीचे देखने लगती है।

राज को भी कुछ समझ में नहीं आता की क्या हो गया? वो भी चुपचाप खड़े होकर नजमा को देखता रहता है।

नजमा अपनी नजरें झुका कर सिर्फ राज के लण्ड को देख रही थी, और मन में सोच रही थी ये क्या हो गया मुझसे?

राज को इस बात का अंदाजा हो जाता है की नजमा उसके लण्ड को ही घूर रही है तो अपने लण्ड को हाथ में लेकर अइजस्ट कर लगता है।

नजमा का चेहरा ये सब देखकर लाल हो जाता है और वो वहां से भागकर बाहर चली जाती है। आफिस से निकलकर नजमा सीधे अपनी क्लास में जाकर चेयर पे बैठ जाती है। उसकी सांसें ऊपर-नीचे हो रही थी और दिमाग में सिर्फ लण्ड का उभार ही घर रहा था। नजमा जैसे तैसे अपने आपको कंट्रोल करती है और क्लास में पढ़ाना शुरू कर देती है।

राज अभी तक अपने लण्ड को शांत नहीं कर पा रहा था। वो बार-बार जाते समय नजमा की जो गाण्ड दिखी थी उसी को सोचकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा था। आज से पहले राज ने अपने आपको इतना उत्तजित महसूस नहीं किया था। तभी उसके रूम में वहीदा आती है अटेंडेंन्स रजिस्टर पर साइन करने के लिए।

राज उसे देखते ही उछल पड़ता है और उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचता है। जिससे वहीदा उसके ऊपर गिर जाती है। राज तुरंत अपना हाथ बढ़ाकर उसकी गाण्ड को दबाना शुरू कर देता है। वहीदा को कुछ समझ में नहीं आता। वो भी डर जाती है। तभी राज उसको चोदने की बात कहता है, और उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगता है।

लेकिन वहीदा मना कर देती है, और कहती है- "मेरा पीरियड चल रहा है इसलिए मैं चूत नहीं मरवा सकती..."

तभी राज उसके बाल पकड़कर नीचे बिठा देता है और अपने पैट की जिप खोलकर लण्ड बाहर निकाल लेता है वहीदा को समझने में देर नहीं लगती और लण्ड को पकड़कर मुँह में ले लेती है और ब्ला-जाब देना शुरू कर देती है। राज को बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हो रहा था और वो एक झटका जोर से मार कर आधे से ज्यादा लण्ड को वहीदा के गले में उतार देता है।

वहीदा इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी अचानक हए इस हमले से वहीदा तिलमिला जाती है। उसकी सांसें और आँखें बाहर आने लगती हैं। क्योंकी आज से पहले उसने इतनी अंदर तक राज का लण्ड नहीं लिया था। वो उसका आधा लण्ड हो चूमती थी। लेकिन आज उसकी जान जा रही थी। तभी राज अपना पूरा लण्ड बाहर निकाल लेता है जिससे वहीदा की जान में जान आती हैं और वो बहुत जोर से हाँफने लगती है। उसकी आँखें पूरी लाल हो गई थी।

राज उसकी हालत देखकर उससे सारी बोलता है और कहता है - "मैं पागल हो गया था जब से नजमा की गाण्ड देखी है.."

वहीदा इस बात को सुनकर होश में आ जाती है और वो राज के लण्ड को फिर से चूसना शुरु कर देती है। वहीदा राज से कहती है- "राज साहब, किसी की तो गाण्ड और चूत बख़्श दो। बो बैचारी आपका लण्ड नहीं ले पाएगी..."

राज बोलता है- "तूने तो ले लिया था.."

सुनीता कहती है- "राज साहब हमारे बच्चे हो गये थे तब आपने पेला था हमें। जिस दिन मैंने आपका मूसल अंदर लिया था उस दिन से तीन दिन मैंने अपने पति को पास नहीं आने दिया था। हर रोज अपनी चूत को गरम पानी से सेंकती थी, तब जाकर आराम मिला था| और नजमा बेचारी तो अभी सही में चदी भी नहीं हैं। उसकी तो आप फाड़ ही डालोगे."

तभी दरवाजे पर नाक होती है। दरवाजा पर नाक हातं ही वहीदा का दिल डर की वजह से जार-जोर से धड़कने लगता है। वहीं राज को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो जानता था की दरवाजे के पीछे नजमा होगी और उसका ये सोचना सही भी था।

तभी कमरे में एक मीठी सी आवाज गँजती है- "में आई कम इन सर?"

आवाज सुनते ही राज खुश हो जाता है और उसके दिमाग में एक आइडिया आता है। वो वहीदा के डर को अपना रोमांच बनाने की सोचना है और वहीदा को इशारा करके टेंबल के नीचे जाने को कहता है। वहीदा टेबल के नीचे हो जाती है और राज का लण्ड छोड़ देती है। लेकिन राज उसका सिर पकड़कर अपने लण्ड पर दबा देता है। वहीदा की सांस फूल रही थी लेकिन उसे ये सब करने में एक अजीब सा मजा आ रहा था। वहीदा तुरंत राज के लण्ड को मैंह में लेकर चूसना शुरू कर देती है। राज अपनी चेयर में आधा लेटा हुआ नजमा को अंदर आने के लिए कहता है।

जब नजमा अंदर आती है तब वो राज को आधा लेटा हुआ देखकर कुछ सोच में पड़ जाती है।

तभी राज उससे बोलता है- "हाँ नजमा, बोलो क्या काम था? कोई जरूरी काम था क्या?"
 
तभी राज उससे बोलता है- "हाँ नजमा, बोलो क्या काम था? कोई जरूरी काम था क्या?"

नजमा- सारी सर, वो मैं सुबह बिना नाक किए आ गई थी। मुझे पता नहीं था।

राज- कोई बात नहीं, गलती मेरी ही है। मुझं ऐसे नहीं करना चाहिए था और मुझे पता भी नहीं था की सुबह सुबह ही इतनी हसीन औरत सीधै मेरे पास आ जाएगी, जिसकी वजह से ये कुछ ज्यादा ही हो गया.."

नजमा में सब सुनकर शर्म से लाल हो जाती है। उसे कुछ समझ में नहीं आता की वो क्या करें? तभी राज उसे चेयर पे बैठने को कहता है लेकिन नजमा अब वहां दो मिनट भी नहीं रुकना चाहती थी।

तभी वहीदा राज के लण्ड को जोर से चूसती है, जिससे राज की आँखें बंद होने लगती हैं। उधर नजमा को कुछ समझ में नहीं आता की क्या हो रहा है? तभी राज जानबूझ कर थोड़ा ऊपर की तरफ उठता है जिससे चूड़ियों की खन-खन नजमा को सुनाई पड़ती है। नजमा को कुछ समझ में नहीं आता और वो तेजी से रूम से बाहर निकल जाती है, और सीधे वहीदा की क्लास में जाती है जहां वहीदा उसे नहीं दिखाई पड़ती है। उसके दिमाग में सिर्फ यही आ रहा था की टेबल के नीचे वहीदा राज साहब को ब्लो-जाब दे रही थी।

नजमा को इस बात पर यकीन नहीं होता और बाहर जाकर वहीदा का इंतजार करती है। करीब 20 मिनट बाद वहीदा अपना मुँह साफ करते हुए राज के कमरे से बाहर निकलती है। तब नजमा को पूरा यकीन हो जाता है की बो वहीदा के मामले में सही थी।

उधर झड़ने के बाद भी राज का लण्ड किसी रोड की तरह कड़क था। वो बाहर निकलकर टायलेंट के लिए चला जाता है।

वहीदा को आता देखकर नजमा वहीदा से ही हेलो करती है और उसके दिन के बारे में और सलमा के बारे में पूछती है। तभी वहीदा उसे याद दिलाती है की वो अटेंडेन्स रजिस्टर पर साइन कर दे। नजमा को भी मौका सही लगता है की वो जाकर जल्दी से साइन करके आ सकती है, और वो राज के आफिस की तरफ चल देती है

और रूम में पहुँचकर टेबल पर रजिस्टर ढूँढने लगती है, और रजिस्टर उसे मिल जाता है।

तभी राज भी आफिस के बाहर खड़े होकर नजमा की गाण्ड को देखने लगता है और जैसे ही नजमा झुकती है, उसकी कातिल गाण्ड बाहर की तरफ निकल जाती है। जिसका फायदा राज उठाने की सोचता है। वो जानबूझ कर नजमा के पीछे से होकर आगे की तरफ जाने की सोचता है।

नजमा को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था की उसकी गाण्ड पे आज कोई बड़ा लण्ड दस्तक देगा। नजमा का पूरा ध्यान रजिस्टर पे था। वा एक-एक पेज पलट रही थी।

तभी राज आकर उसके पीछे खड़ा हो जाता है और उसका लण्ड सीधे नजमा की उभरी हुई गाण्ड के कटाव के बीच में फंस जाता है।

नजमा को अपनी गाण्ड में कोई बड़ा सा इंडा महसस होता है, जो सीधा उसकी गाण्ड के छेद में घुसने की कोशिश कर रहा था। उस समय नजमा को कुछ भी समझ नहीं आता और वो सीधी होकर खड़ी हो जाती है, जिससे वो राज से बिल्कुल चिपक जाती है। उसकी पूरी बाडी सुन्न पड़ जाती है।

तभी राज धीरे से अपने हाथ आगे लेजाकर नजमा की बड़ी-बड़ी चूचियों को प्यार से मसल देता है और धीरे से आगे बढ़ जाता है। राज के आगे बढ़ते ही नजमा राज की तरफ देखती है और अपनी आँखें नीचे झुका लेती हैं। क्योंकी उस समय राज उसे पूरी तरह वासना और हवस से भरी नजरों से देख रहा था।

नजमा की लाइफ का ये पहला चान्स था जब उसे किसी अजनबी का स्पर्श मिला था। वो पूरी तरह से लाल हो गई थी। उसकी आँखों में भी हवस धीरे-धीरे बढ़ रही थी। उसे एहसास हो रहा था की अगर वो यहां से नहीं गई तो आज वो किसी अजनबी से चुद भी सकती है और पता नहीं उससे क्या-क्या हो जाएगा।



नजमा अपनी सांसें संभालते हए कमरे से बाहर चली जाती है। रूम से निकलकर नजमा सीधे अपनी क्लास में जाती हैं और चेयर में बैठ जाती है। चेयर में बैठने के बाद भी उसे राज का लण्ड अपनी गाण्ड में महसूस हो रहा था। उसे लग रहा था जैसे राज का लण्ड अभी भी उसकी गाण्ड में है। एक अजीब सी फीलिंग उसके मन में बार-बार आ रही थी। उसकी उत्तेजना में सब सोचकर लगातार बढ़ रही थी और उसकी चूत राज के ख्याल से पानी छोड़े जा रही थी। अब स्कूल में टाइम निकालना उसके लिए मुश्किल हो रहा था।

नजमा जब अपने आपको कंट्रोल कर लेती है तो वो बाहर की तरफ चल देती है। बाहर जाकर उसे बाहर का मौसम बहुत ही सुहाना लगता है। लेकिन उसके दिमाग में एक टेन्शन होने लगती है की अगर मौसम खराब हो गया, बारिश शुरू हो गई तो वो घर कैसे जाएगी? तभी उसका सोचना सही हो जाता है और जार की हवा चलने के साथ बारिश भी शुरू हो जाती है। नजमा का दिमाग भी अब काम करना बंद कर देता है और पूरी सिचुयेशन भगवान पर छोड़ देती है।

जब बारिश शुरू होती है तो राज अपने आफिस से बाहर आकर मौसम का मजा लेने लगता है। तभी उसकी नजर नजमा पे पड़ती है जो उदास खड़ी थी। तब राज एक बच्चे को भेजकर नजमा का अपने पास बुलाता है।

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नजमा का कुछ समझ में नहीं आता की वह राज का कैसे सामना करेगी? और वह आफिस की तरफ चल देती है।

राज आफिस के बाहर ही खड़ा था। नजमा को आता देखकर राज एक बार अपने लण्ड को सही से अइजस्ट करता है जो की नजमा देख लेती है। राज के पास पहुँचकर नजमा राज को हेलो करती है और उसके पास जाकर खड़ी हो जाती है।

राज नजमा को अपने सामने देखकर एक बार उसको पूरा ऊपर से नीचे तक घूरता है, उसके हर एक कटाव को महसूस करता है।

वहीदा दूर खड़ीहोकर दोनों की हरकतों को देख रही थी।

तभी राज नजमा से पूछता है- "आप परेशान क्यों है? क्या स्कूल आपको पसंद नहीं आया या फिर मैं आपको पसंद नहीं आया?"

नजमा बोलती है- "नहीं राज सर, ऐसी बात नहीं है। मुझे सब लोग पसंद आए। स्कूल भी अच्छा है.." में सब उसके मुँह से अपने आप ही निकल रहा था। उसे खुद पता नहीं चला की क्या बोल गई? वो जब राज के पास

खड़ी होती थी तब उसे ऐसा लगता था जैसे उसके हाथ पैर और शरीर में काम करना ही बंद कर दिया हो।

राज उससे प्राब्लम पूछता है तो नजमा उसे घर जाने की प्राब्लम बताती की वो घर कैसे जाएगी? अगर बारिश नहीं रुकी तो?

तब राज उसके कंधे पर हाथ रखता है जिससे नजमा के रौंगटे खड़े हो जाते हैं। राज उससे कहता है- "घबराने की जरूरत नहीं है। मैं आपको घर तक छोड़ दूँगा। क्योंकी मैं भी उसी तरफ जाऊँगा.."

नजमा पूछती है- "सर, आप तो यही रहते हैं फिर मुझे कैसे छोड़ेंगे?"

राज बताता है- "मेरा घर भी उसी रास्ते में हैं जो की स्कूल से कम से कम 70-80 किलोमीटर है। मैं कभी कभी ही यहां पर रुकता हूँ, नहीं तो घर से ही आता जाता हूँ.."

नजमा यह सुनकर खुश हो जाती है और स्कूल से घर जाने की उसकी टेन्शन खत्म हो जाती है। नजमा को खुश होता देखकर राज नजमा से बिल्कुल चिपक जाता है। जिससे नजमा को एक बार फिर से राज का लण्ड अपनी गाण्ड में चुभता हुआ महसूस होता है। नजमा को भी अब राज की हरकतों का मजा आने लगा था। लेकिन उसके मन भी डर था की वो सही कर रही है या गलत? बो जुनैद से बहुत प्यार करती थी, उसे धोखा नहीं देना चाहती थी। लेकिन राज के ऐसे छेड़ने से उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था।

नजमा भी अब सोच रही थी की इससे ज्यादा राज साहब कुछ नहीं करेंगे। शायद नजमा का यह सोचना गलत था। राज कैसे भी करके जल्दी से जल्दी नजमा की चूत में अपना लण्ड डालना चाहता था और वो जब नजमा का कोई रिएक्सन नहीं देखता तो अपना एक हाथ आगे लेजाकर नजमा की नाभि में उंगली को गोल-गोल घुमाना शुरू कर देता है। जिससे नजमा पागल होने लगती है। नजमा को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की वो राज को मना करें या ऐसे ही सब होने दे?

राज जब नजमा की तरफ से कोई रिएक्सन नहीं देखता तो वो धीरे से अपना हाथ नजमा की साड़ी के अंदर डाल देता है और नजमा की पैटी की लकीर को महसूस करता है।

नजमा को बहुत जोर का झटका लगता है। उसे ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी की राज इतनी जल्दी अपने मुकाम की तरफ बढ़ेगा, और इतनी जल्दी वो उसकी चूत भी छू लेगा। नजमा की चूत और राज की उंगली के बीच सिर्फ पैटी की दीवार थी, जो किसी भी वक्त गिर सकती थी।

राज भी अपनी उंगली को पैटी के अंदर जल्दी से जल्दी पहँचना चाहता था। नजमा बिल्कुल निशब्द होकर आगे की हरकत क्या होगी यही सोच रही थी। तभी स्कूल की घंटी बजने लगती है। जिससे नजमा की जान में जान आ जाती है। लेकिन राज अपने हाथ आए हए इस मौके का छोड़ना नहीं चाहता था। वो तुरंत ही नजमा की पैटी के अंदर हाथ डालकर अपनी बीच बाली उंगली को अधी से भी ज्यादा उसकी चूत में डालकर निकाल लेता है।

जिससे नजमा की चीख निकल जाती है। लेकिन वो चीख बच्चों के शोरगुल में गायब हो जाती है। राज को भी नजमा की चूत की कसावट पसंद आ गई थी। इतनी जल्दी सब कुछ हो गया की नजमा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बस उसे अपनी चूत में राज की उंगली महसूस हो रही थी। नजमा की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। आज सुबह से उसकी चूत तीसरी बार गीली हो रही थी। उससे अपने शरीर की गर्मी बर्दास्त नहीं हो रही थी उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो गया था। माथे पर पसीना साफ दिखाई दे रहा था। मौसम ठंडा होने के बाद भी उसे आज गर्मी ज्यादा ही लग रही थी।

इस हरकत के बाद राज नजमा के सामने ही अपनी उंगली को जो की नजमा की चूत के पानी से गीली थी, उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है। जिसे देखकर नजमा शर्मा जाती है और वो वहां से अपने क्लास की तरफ चल देती है। तभी राज उसे आवाज देकर रोकता है और उसे बाहर इंतजार करने के लिए कहता है। अभी भी बारिश रूकी नहीं थी लेकिन इस बारिश ने नजमा को बिना भीगे ही पूरी तरह से गीला कर दिया था।

नजमा क्लास रूम में पहुँचकर अपना बैग उठाकर क्लास से बाहर आती है, जहां उसे वहीदा मिलती है जो उसे देखकर हँस रही थी और उसे इशारोइशारों में कब चूदना है पूछ रही थी। नजमा शमांकर वहां से बाहर चली जाती है। वो अब वहीदा से बात नहीं करना चाहती थी।

उधर राज अपनी इस हरकत से बहुत खुश था। उसे लगने लगा था की वो बहुत जल्द ही नजमा को अपनी रखैल बना लेगा, वहीदा और सलमा की तरह। लेकिन वो एक बात जानता था की नजमा सलमा और वहीदा से अलग है, वो स्कूल में उसे नहीं चोद पाएगा। क्योंकी अगर उसने नजमा को स्कूल में चोदा तो पूरे स्कूल को पता चल जाएगा और राज उसे चोदने की जगह की प्लानिंग करने लगता है।

नजमा स्कूल के गेट के पास राज का इंतजार कर रही थी और मन ही मन आगे क्या होगा? इसके बारे में सोच रही थी। उधर राज जब आफिस से निकलता है तो वहीदा उसे रास्ते में मिल जाती है।

वहीदा राज को देखकर उसकी जीत पर उसे बधाई देती है और राज को थोड़ी देर रुकनें लिए कहती है। लेकिन राज उसे मना कर देता है और कल उसे चोदने का वादा करता है।

राज जब गाड़ी लेकर बाहर निकलता है तो नजमा दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी रहती हैं। राज उसका एक बार फिर से ऊपर से नीचे तक घूरता है। और फिर नजमा को आवाज देकर गाड़ी में बैठने के लिए कहता है। नजमा तुरंत दरवाजा खोलकर पीछे वाली सीट पर बैठ जाती हैं। तब राज उसे आगे आकर बैठने को बोलता है।
 
लेकिन नजमा मना कर देती हैं। नजमा को पता था की अगर वो गलती से भी आगे बैठ गई तो राज को कुछ भी करने में नहीं रोक पाएगी। लेकिन राज उसको छोड़ने वाला नहीं था। वो नजमा को बार-बार बोलकर आगे वाली सीट पर बिठा लेता है। नजमा के बैठते ही राज गाड़ी आगे बढ़ा देता है। करीब 5 किलोमीटर जाने के बाद राज उससे उसके घर और पति के बारे में पूछता है।

नजमा जुनैद के बारे में सब बता देती है, और अपने घर के बारे में भी बता देती है।

राज उसे कोई किराएदार रखने के लिए बोलता है।

नजमा उसे बताती है की- "मैं किराएदार की तलाश में हैं.."

ऐसे ही बातें चलती रहती हैं राज अपना एक हाथ बढ़कर धीरे से नजमा की जाँघ पर रख देता है। जिससे नजमा इर जाती है। वो राज का हाथ हटाने के लिए जैसी ही हाथ बढ़ाती है राज उसका हाथ रोक लेता है और रिक्वेस्ट भरी नजरों से उसे करने देने के लिए कहता है। नजमा पहली बार राज को गौर से देख रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे मोटे होंठ, सिर पर आधे बाल और उसके बड़े-बड़े हाथ। वो हाथ देखकर सोच में पड़ जाती है की कुछ देर पहले ही ये हाथ उसकी चूत पर था और उसकी उंगली तो मेरी चूत में भी जा चुकी है। कितनी मोटी है इनकी उंगली? मेरी चूत तो बिल्कुल तैयार नहीं थी, तब इन्होंने उसे मेरे अंदर डाल दिया था।

नजमा को सोचता हुआ देखकर राज धीरे से नजमा की साड़ी को घुटने के ऊपर करने लगता है। जिससे नजमा अपनी सोच से बाहर आ जाती हैं और राज को रोकती हैं। लेकिन राज रुकने के मूड़ में नहीं था।

राज नजमा को रिक्वेस्ट करता है- "प्लीज्ज... एक बार...

नजमा को भी उसकी हरकत का मजा आ रहा था। थोड़ी ना-नकर के बाद राज उसकी साड़ी को जांघों तक उठा देता है। नजमा की मोटी-मोटी गोरी और मांसल जाधं देखकर राज की आह निकल जाती है। उसने आज तक ऐसी खूबसूरत जांघे नहीं देखी थी। बिना बाल के इतनी चिकनी जांघे देखकर राज का लण्ड पूरी तरह से बगावत करने लगा था।

उधर नजमा आँखें बंद करके जो हो रहा था उसका मजा ले रही थी।

राज धीरे से नजमा की जांघों को खोलता है जिससे उसकी ब्लैक कलर की पैंटी दिखाई देती है। गोरी और चिकनी जांघों पर ब्लैंक पैंटी कयामत लग रही थी। राज अपना हाथ बढ़ा कर उस पैर्टी को छूता है, तो उसे यकीन नहीं होता की नजमा की पैटी बिल्कुल गीली थी। वो अपनी दो उंगलियों से नजमा की चूत को पेंटी के ऊपर से ही छूता है फिर उसे रगड़ने लगता है।

नजमा को राज की हरकत में बहुत मजा आ रहा था। नजमा भी अपनी कमर को हल्का सा धक्का देती है जिसमें राज को एहसास हो जाता है की नजमा अब पूरी तरह से गरम है। वो अब नजमा की पैटी को एक साइड कर देता है, जिसमें नजमा की चूत उसे साफ-साफ दिखने लगती है, एक पतली सी लकीर जैसी।

राज नजमा की चूत देखकर सोचता है- "ये साली चढ़ी भी है या सिर्फ ऊपर से रगड़ी गई है?"

नजमा अपनी चूत पर कोई हरकत ना होते देखकर अपनी आँख खोलती है तो राज को अपनी चूत को घरते हुए पाती है और वो तुरंत अपनी आँख बंद कर लेती हैं। राज से अब रहा नहीं जा रहा था। वो अपनी दोनों उंगलियों से नजमा की चूत को खोलता है और अपनी बीच की उंगली नजमा की चूत में पल देता है।

जिससे नजमा चीख पड़ती है। कुछ देर शांत रहने के बाद नजमा राज की तरफ देखती है राज उसे आँख बंद करने के लिए कहता है। नजमा अपनी आँख बंद कर लेती है। तब राज अपनी उंगली को हरकत देता है वो धीरे धीरे नजमा की चूत में उंगली पेल रहा था। कुछ देर बाद उंगली की स्पीड बढ़ जाती हैं, जिससे नजमा बेचैन हो जाती है। उसकी चूत में एक तूफान सा उठता है। उसे महसूस होता है की अब वो जल्द ही झड़ने वाली है और बहुत तेज चीख के साथ वो राज की उंगली को पूरा अंदर लेकर झड़ने लगती है। करीब पाँच मिनट तक झड़ने के बाद उसकी सांस कंट्रोल होती है। उसे ऐसा मजा आज तक नहीं आया था। वो सातवें आसमान में थी।
 
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