S
StoryPublisher
Guest
जय ने कल रात की ट्रेन से टिकेट निकाली थी। लेकिन वह राज को एक और झटका देने की सोचता है और वो टक्सी करके रेलवे स्टेशन चला जाता है। वहां पहुँचकर वो टीटी से रिक्वेस्ट करके ट्रेन में सीट ले लेता है। ट्रेन रात में 9:00 बजे थी और अभी जय की घड़ी में 8:30 बज रहे थे। उसकी ट्रेन आने में अभी भी 30 मिनट थे और जय राज को फोन करने की सोचता है। लेकिन वो रूक जाता है और कुछ साच कर मुश्कुरा देता है। ट्रेन ठीक 9:00 बजे प्लेटफॉर्म में आ जाती है। जय ने एसी-2 में सीट ली थी। जब वो अपनी सीट
तो वहां एक आदमी पहले से ही बैठा था।
वो आदमी जय को देखते ही अजीब सा मैंह बनाता है। उसने अपनी लाइफ में ऐसा आदमी नहीं देखा था। जय किसी जिन्न की तरह था। उसकी हाइट 67 फीट से भी ज्यादा थी। उसके सिर पर बिल्कुल बाल नहीं थे और उसकी आँखें किसी कसाई की तरह थी। उसके मुंह पर सिर्फ दादी थी मैं नहीं थी। और उसकी बाडी इतनी मस्कुलर श्री की जैसे वो जिम करता हो। जय कुवैत में पत्थर तोड़ने का काम करता था जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर कसा हुआ था। वो आदमी जय को देखे जा रहा था।
तब जय उसमें पूछता है- "क्या कभी आदमी नहीं देखा?"
वो आदमी कुछ नहीं बोलता। ट्रेन चल देती हैं। थोड़ी देर बाद उनके कम्पार्टमेंट में टीटी आता है और जय की टिकेट चेक करता है और फिर उस आदमी को आवाज देता है- "मिस्टर जुनैद... टीटी उसे दो बार आवाज देता
वो आदमी 'हाँ' बोलकर टीटी को अपनी टिकेट दिखाता है। जय को पता चल जाता है की उस आदमी का नाम जुनैद है। टीटी के जाने के बाद जय उससे हाथ मिलने के लिए आगे बढ़ता है। लेकिन जुनैद उसे मना कर देता है और जय को अपना काम करने के लिए कहता है। जुनैद मुश्लिम लोगों को ज्यादा पसंद नहीं करता था।
जय को जुनैद का व्यवहार अच्छा नहीं लगता है तो वो भी उसे- "भाड़ में जाओ...' बोलकर अपनी सीट में लेट जाता है थोड़ी देर तक दोनों शांत रहते हैं।
जुनैद को अपनी गलती का एहसास होता है तो वो सोचता है मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए और वह जय को सारी बोलता है। जय भी उसे गले लगा लेता है। तब जुनैद बताता है- "मैं काफी अपसेट था। मैं जिस काम के लिए गया था वो पूरा नहीं हुआ। और फिर मुझे इसी काम के लिए अगले हफ्ते फिर से वापस जाना पड़ेगा.."
तब जय कहता है- "कोई बात नहीं। ये तो लगा रहता है....
थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे से बात करने के बाद जय जुनैद का सिगरेट आफर करता है। दोनों सिगरेट पीने बाथरूम चले जाते हैं। तब जय उसे अपने पुराने घर का अड्रेस बताता है। लेकिन जुनैद उसे अपना अड्रेस नहीं बता पाता। दोनों सिगरेट खत्म करके अपनी सीट पर आ जाते हैं और एक दूसरे को गुड नाइट बोलकर साने लगते हैं।
अपनी सीट पर लेटने के बाद भी जय को नींद नहीं आ रही थी। उसके दिमाग में तो बस नजमा घम रही थी। । यही सोचकाए उत्तेजित हो जाता है की साला राज आज रात फिर से नजमा की चूत फाड़ेगा।
उधर शाज़िया खाना खाने के बाद नजमा को गड नाइट कहती है और दूध पीने के लिए मना करके अपने रूम में सोने चली जाती है। शाज़िया ने भी आज नाइट गाउन पहना हुआ था। जब शाज़िया सोने के लिए अपने रूम में जाती हैं तब नजमा राज का खाना लेकर ऊपर चली जाती है।
राज में आज भी वियाया की गोली खा रखी थी। वो आज नजमा की चूत को जी भरकर मारना चाहता था। वो आज नजमा को पूरा नंगी करके चोदना चाहता था।
जब नजमा राज के कमरे में खाना लेकर है तो राज नजमा का ही इंतजार कर रहा था। राज नजमा को देखते ही उसके हाथ से खाना लेकर टेबल रख देता है और नजमा को बेड पर खींच लेता है। नजमा के मन में इर था की आज उसने शाज़िया को नींद की गोली नहीं दी है। वो राज को बताना चाहती थी लेकिन राज को तो सिर्फ नजमा की चूत से मतलब था। वो तुरंत नजमा को खींचकर बेड पर लिटा देता है और उसके सारे कपड़े उतारकर उसे पूरा नंगी कर देता है।
.
नजमा भी राज का साथ देती है। आज पर दिन में उसे राज से चुदने का मौका नहीं मिला था। वो राज को अपने ऊपर खींच कर उसे किस करने लगती है। राज भी उसे किस करने लगता है। राज अब धीरे-धीरे नजमा के हर अंग को चूमने लगता है जिससे नजमा भी अब गरम होने लगती है।
राज नजमा की चूचियों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता है और एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत में उंगली पेलने लगता है। नजमा इस दोहरी मार से पागल होने लगती है और उसकी चूत गीली होने लगती है। कुछ देर तक राज ऐसे ही नजमा को तड़पाता है फिर राज नजमा की नाभि में जीभ डालकर घुमाता है। नजमा अब पूरी तरह से पागल हो जाती है। राज की उंगलियां अभी भी नजमा की चूत को बहुत तेजी से पेल रही थी। अब राज नजमा की नाभि से जीभ निकालकर सीधे नजमा की गीली चूत में लगाता है। राज की जीभ चूत में लगते ही नजमा की सांसें उखाड़ने लगती है और वो राज के सिर को अपनी चूत में जोर से दबा लेती है और बहुत तेज सिसकी लेकर झड़ने लगती है।
राज नजमा की चूत का सारा पानी अपनी जीभ से चाटकर साफ करता है। नजमा बेहाल होकर अपना सिर पीछे और बहुत तेज सांस लेने लगती है। अब राज भी अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो जाता है, और वह नजमा की दोनों टाँगों को उठाकर अपने कंधे पर रखता है। अपना कटा लण्ड नजमा की गीली चूत में सेट करके एक जोरदार झटका मारता है और अपना पूरा लण्ड नजमा की चूत में डाल देता है।
नजमा इतनी गरम होने के बाद भी उसकी एक जोरदार चीख निकल जाती है, जिससे पूरा कमरा गूज उठता है नजमा की आँखें बाहर आ जाती हैं, उसकी सांस फूल जाती है। उसको बहुत तेज दर्द अपनी चूत में महसूस होता
है। आज राज ने अपना मसल एक झटके में ही पूरा का पूरा नजमा की चूत में उतार दिया था। उसके टट्टे नजमा की चूत में टच हो रहे थे। नजमा को यकीन नहीं हो रहा था की राज का पूरा लण्ड उसकी चूत में समा चुका है। वो अपना हाथ अपनी चूत में लगाती है तब उसे यकीन होता है।
राज उससे कहता है- "मेरी जान आज तुमने एक बार में ही पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया है.."
नजमा- "मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है..' बोलकर राज को झटक देती है और लण्ड निकालने को कहती है।
लेकिन राज उसके दोनों हाथ पकड़ लेता है और उसे शांत रहने का कहता है। थाड़ी देर बाद जब नजमा नार्मल हो जाती है तो राज उसे हल्के धक्कों से चोदने लगता है। अब नजमा भी पूरी तरह से गरम हो गई थी। राज के लण्ड में बिपाया का असर शुरू हो चुका था। वो नजमा को अब बुरी तरह से चोद रहा था। राज अपना पूरा लण्ड बाहर खींचकर एक बार में ही पूरा अंदर पेल रहा था।
राज के झटके इतने तगड़े थे की नजमा की पूरी चूत फैल रही थी। नजमा अब राज के झटकों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। क्योंकी राज का हर झटका नजमा की चूत की पूरी गहराई में जा रहा था और उसको एक नया एहसास दे रहा था। वो बहुत देर से अपने आपको संभाल रही थी, लेकिन राज के झटके उसको संभलने नहीं दें रहे थे। राज के हर झटके में नजमा की चीख निकल रही थी और वो बुरी तरह से अपनी चूत से पानी बहा रही
धी।
अब पूरे कमरे में सिर्फ नजमा की चीख और फछ-पछ की आवाज आ रही थी। नजमा की चीख और सिसकियां इतनी तेज हो चुकी थी की अपने रूम में सो रही शाज़िया की भी नींद खुल जाती है। कुछ देर तक तो उसे समझ
में नहीं आता की क्या हो रहा है? फिर उसे समझ में आ जाता है कहीं बहुत बुरी तरह से चुदाई शुरू है। आवाज का पीछा करते हुए राज के कमरे के बाहर पहुँच जाती है, जहां नजमा सब कुछ भूलकर अपनी चुदाई में गुम थी।
तो वहां एक आदमी पहले से ही बैठा था।
वो आदमी जय को देखते ही अजीब सा मैंह बनाता है। उसने अपनी लाइफ में ऐसा आदमी नहीं देखा था। जय किसी जिन्न की तरह था। उसकी हाइट 67 फीट से भी ज्यादा थी। उसके सिर पर बिल्कुल बाल नहीं थे और उसकी आँखें किसी कसाई की तरह थी। उसके मुंह पर सिर्फ दादी थी मैं नहीं थी। और उसकी बाडी इतनी मस्कुलर श्री की जैसे वो जिम करता हो। जय कुवैत में पत्थर तोड़ने का काम करता था जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर कसा हुआ था। वो आदमी जय को देखे जा रहा था।
तब जय उसमें पूछता है- "क्या कभी आदमी नहीं देखा?"
वो आदमी कुछ नहीं बोलता। ट्रेन चल देती हैं। थोड़ी देर बाद उनके कम्पार्टमेंट में टीटी आता है और जय की टिकेट चेक करता है और फिर उस आदमी को आवाज देता है- "मिस्टर जुनैद... टीटी उसे दो बार आवाज देता
वो आदमी 'हाँ' बोलकर टीटी को अपनी टिकेट दिखाता है। जय को पता चल जाता है की उस आदमी का नाम जुनैद है। टीटी के जाने के बाद जय उससे हाथ मिलने के लिए आगे बढ़ता है। लेकिन जुनैद उसे मना कर देता है और जय को अपना काम करने के लिए कहता है। जुनैद मुश्लिम लोगों को ज्यादा पसंद नहीं करता था।
जय को जुनैद का व्यवहार अच्छा नहीं लगता है तो वो भी उसे- "भाड़ में जाओ...' बोलकर अपनी सीट में लेट जाता है थोड़ी देर तक दोनों शांत रहते हैं।
जुनैद को अपनी गलती का एहसास होता है तो वो सोचता है मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए और वह जय को सारी बोलता है। जय भी उसे गले लगा लेता है। तब जुनैद बताता है- "मैं काफी अपसेट था। मैं जिस काम के लिए गया था वो पूरा नहीं हुआ। और फिर मुझे इसी काम के लिए अगले हफ्ते फिर से वापस जाना पड़ेगा.."
तब जय कहता है- "कोई बात नहीं। ये तो लगा रहता है....
थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे से बात करने के बाद जय जुनैद का सिगरेट आफर करता है। दोनों सिगरेट पीने बाथरूम चले जाते हैं। तब जय उसे अपने पुराने घर का अड्रेस बताता है। लेकिन जुनैद उसे अपना अड्रेस नहीं बता पाता। दोनों सिगरेट खत्म करके अपनी सीट पर आ जाते हैं और एक दूसरे को गुड नाइट बोलकर साने लगते हैं।
अपनी सीट पर लेटने के बाद भी जय को नींद नहीं आ रही थी। उसके दिमाग में तो बस नजमा घम रही थी। । यही सोचकाए उत्तेजित हो जाता है की साला राज आज रात फिर से नजमा की चूत फाड़ेगा।
उधर शाज़िया खाना खाने के बाद नजमा को गड नाइट कहती है और दूध पीने के लिए मना करके अपने रूम में सोने चली जाती है। शाज़िया ने भी आज नाइट गाउन पहना हुआ था। जब शाज़िया सोने के लिए अपने रूम में जाती हैं तब नजमा राज का खाना लेकर ऊपर चली जाती है।
राज में आज भी वियाया की गोली खा रखी थी। वो आज नजमा की चूत को जी भरकर मारना चाहता था। वो आज नजमा को पूरा नंगी करके चोदना चाहता था।
जब नजमा राज के कमरे में खाना लेकर है तो राज नजमा का ही इंतजार कर रहा था। राज नजमा को देखते ही उसके हाथ से खाना लेकर टेबल रख देता है और नजमा को बेड पर खींच लेता है। नजमा के मन में इर था की आज उसने शाज़िया को नींद की गोली नहीं दी है। वो राज को बताना चाहती थी लेकिन राज को तो सिर्फ नजमा की चूत से मतलब था। वो तुरंत नजमा को खींचकर बेड पर लिटा देता है और उसके सारे कपड़े उतारकर उसे पूरा नंगी कर देता है।
.
नजमा भी राज का साथ देती है। आज पर दिन में उसे राज से चुदने का मौका नहीं मिला था। वो राज को अपने ऊपर खींच कर उसे किस करने लगती है। राज भी उसे किस करने लगता है। राज अब धीरे-धीरे नजमा के हर अंग को चूमने लगता है जिससे नजमा भी अब गरम होने लगती है।
राज नजमा की चूचियों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता है और एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत में उंगली पेलने लगता है। नजमा इस दोहरी मार से पागल होने लगती है और उसकी चूत गीली होने लगती है। कुछ देर तक राज ऐसे ही नजमा को तड़पाता है फिर राज नजमा की नाभि में जीभ डालकर घुमाता है। नजमा अब पूरी तरह से पागल हो जाती है। राज की उंगलियां अभी भी नजमा की चूत को बहुत तेजी से पेल रही थी। अब राज नजमा की नाभि से जीभ निकालकर सीधे नजमा की गीली चूत में लगाता है। राज की जीभ चूत में लगते ही नजमा की सांसें उखाड़ने लगती है और वो राज के सिर को अपनी चूत में जोर से दबा लेती है और बहुत तेज सिसकी लेकर झड़ने लगती है।
राज नजमा की चूत का सारा पानी अपनी जीभ से चाटकर साफ करता है। नजमा बेहाल होकर अपना सिर पीछे और बहुत तेज सांस लेने लगती है। अब राज भी अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो जाता है, और वह नजमा की दोनों टाँगों को उठाकर अपने कंधे पर रखता है। अपना कटा लण्ड नजमा की गीली चूत में सेट करके एक जोरदार झटका मारता है और अपना पूरा लण्ड नजमा की चूत में डाल देता है।
नजमा इतनी गरम होने के बाद भी उसकी एक जोरदार चीख निकल जाती है, जिससे पूरा कमरा गूज उठता है नजमा की आँखें बाहर आ जाती हैं, उसकी सांस फूल जाती है। उसको बहुत तेज दर्द अपनी चूत में महसूस होता
है। आज राज ने अपना मसल एक झटके में ही पूरा का पूरा नजमा की चूत में उतार दिया था। उसके टट्टे नजमा की चूत में टच हो रहे थे। नजमा को यकीन नहीं हो रहा था की राज का पूरा लण्ड उसकी चूत में समा चुका है। वो अपना हाथ अपनी चूत में लगाती है तब उसे यकीन होता है।
राज उससे कहता है- "मेरी जान आज तुमने एक बार में ही पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया है.."
नजमा- "मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है..' बोलकर राज को झटक देती है और लण्ड निकालने को कहती है।
लेकिन राज उसके दोनों हाथ पकड़ लेता है और उसे शांत रहने का कहता है। थाड़ी देर बाद जब नजमा नार्मल हो जाती है तो राज उसे हल्के धक्कों से चोदने लगता है। अब नजमा भी पूरी तरह से गरम हो गई थी। राज के लण्ड में बिपाया का असर शुरू हो चुका था। वो नजमा को अब बुरी तरह से चोद रहा था। राज अपना पूरा लण्ड बाहर खींचकर एक बार में ही पूरा अंदर पेल रहा था।
राज के झटके इतने तगड़े थे की नजमा की पूरी चूत फैल रही थी। नजमा अब राज के झटकों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। क्योंकी राज का हर झटका नजमा की चूत की पूरी गहराई में जा रहा था और उसको एक नया एहसास दे रहा था। वो बहुत देर से अपने आपको संभाल रही थी, लेकिन राज के झटके उसको संभलने नहीं दें रहे थे। राज के हर झटके में नजमा की चीख निकल रही थी और वो बुरी तरह से अपनी चूत से पानी बहा रही
धी।
अब पूरे कमरे में सिर्फ नजमा की चीख और फछ-पछ की आवाज आ रही थी। नजमा की चीख और सिसकियां इतनी तेज हो चुकी थी की अपने रूम में सो रही शाज़िया की भी नींद खुल जाती है। कुछ देर तक तो उसे समझ
में नहीं आता की क्या हो रहा है? फिर उसे समझ में आ जाता है कहीं बहुत बुरी तरह से चुदाई शुरू है। आवाज का पीछा करते हुए राज के कमरे के बाहर पहुँच जाती है, जहां नजमा सब कुछ भूलकर अपनी चुदाई में गुम थी।