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Adultery हसीनों का मेला वासना का रेला

जय ने कल रात की ट्रेन से टिकेट निकाली थी। लेकिन वह राज को एक और झटका देने की सोचता है और वो टक्सी करके रेलवे स्टेशन चला जाता है। वहां पहुँचकर वो टीटी से रिक्वेस्ट करके ट्रेन में सीट ले लेता है। ट्रेन रात में 9:00 बजे थी और अभी जय की घड़ी में 8:30 बज रहे थे। उसकी ट्रेन आने में अभी भी 30 मिनट थे और जय राज को फोन करने की सोचता है। लेकिन वो रूक जाता है और कुछ साच कर मुश्कुरा देता है। ट्रेन ठीक 9:00 बजे प्लेटफॉर्म में आ जाती है। जय ने एसी-2 में सीट ली थी। जब वो अपनी सीट

तो वहां एक आदमी पहले से ही बैठा था।

वो आदमी जय को देखते ही अजीब सा मैंह बनाता है। उसने अपनी लाइफ में ऐसा आदमी नहीं देखा था। जय किसी जिन्न की तरह था। उसकी हाइट 67 फीट से भी ज्यादा थी। उसके सिर पर बिल्कुल बाल नहीं थे और उसकी आँखें किसी कसाई की तरह थी। उसके मुंह पर सिर्फ दादी थी मैं नहीं थी। और उसकी बाडी इतनी मस्कुलर श्री की जैसे वो जिम करता हो। जय कुवैत में पत्थर तोड़ने का काम करता था जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर कसा हुआ था। वो आदमी जय को देखे जा रहा था।

तब जय उसमें पूछता है- "क्या कभी आदमी नहीं देखा?"

वो आदमी कुछ नहीं बोलता। ट्रेन चल देती हैं। थोड़ी देर बाद उनके कम्पार्टमेंट में टीटी आता है और जय की टिकेट चेक करता है और फिर उस आदमी को आवाज देता है- "मिस्टर जुनैद... टीटी उसे दो बार आवाज देता

वो आदमी 'हाँ' बोलकर टीटी को अपनी टिकेट दिखाता है। जय को पता चल जाता है की उस आदमी का नाम जुनैद है। टीटी के जाने के बाद जय उससे हाथ मिलने के लिए आगे बढ़ता है। लेकिन जुनैद उसे मना कर देता है और जय को अपना काम करने के लिए कहता है। जुनैद मुश्लिम लोगों को ज्यादा पसंद नहीं करता था।

जय को जुनैद का व्यवहार अच्छा नहीं लगता है तो वो भी उसे- "भाड़ में जाओ...' बोलकर अपनी सीट में लेट जाता है थोड़ी देर तक दोनों शांत रहते हैं।

जुनैद को अपनी गलती का एहसास होता है तो वो सोचता है मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए और वह जय को सारी बोलता है। जय भी उसे गले लगा लेता है। तब जुनैद बताता है- "मैं काफी अपसेट था। मैं जिस काम के लिए गया था वो पूरा नहीं हुआ। और फिर मुझे इसी काम के लिए अगले हफ्ते फिर से वापस जाना पड़ेगा.."

तब जय कहता है- "कोई बात नहीं। ये तो लगा रहता है....

थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे से बात करने के बाद जय जुनैद का सिगरेट आफर करता है। दोनों सिगरेट पीने बाथरूम चले जाते हैं। तब जय उसे अपने पुराने घर का अड्रेस बताता है। लेकिन जुनैद उसे अपना अड्रेस नहीं बता पाता। दोनों सिगरेट खत्म करके अपनी सीट पर आ जाते हैं और एक दूसरे को गुड नाइट बोलकर साने लगते हैं।

अपनी सीट पर लेटने के बाद भी जय को नींद नहीं आ रही थी। उसके दिमाग में तो बस नजमा घम रही थी। । यही सोचकाए उत्तेजित हो जाता है की साला राज आज रात फिर से नजमा की चूत फाड़ेगा।

उधर शाज़िया खाना खाने के बाद नजमा को गड नाइट कहती है और दूध पीने के लिए मना करके अपने रूम में सोने चली जाती है। शाज़िया ने भी आज नाइट गाउन पहना हुआ था। जब शाज़िया सोने के लिए अपने रूम में जाती हैं तब नजमा राज का खाना लेकर ऊपर चली जाती है।

राज में आज भी वियाया की गोली खा रखी थी। वो आज नजमा की चूत को जी भरकर मारना चाहता था। वो आज नजमा को पूरा नंगी करके चोदना चाहता था।

जब नजमा राज के कमरे में खाना लेकर है तो राज नजमा का ही इंतजार कर रहा था। राज नजमा को देखते ही उसके हाथ से खाना लेकर टेबल रख देता है और नजमा को बेड पर खींच लेता है। नजमा के मन में इर था की आज उसने शाज़िया को नींद की गोली नहीं दी है। वो राज को बताना चाहती थी लेकिन राज को तो सिर्फ नजमा की चूत से मतलब था। वो तुरंत नजमा को खींचकर बेड पर लिटा देता है और उसके सारे कपड़े उतारकर उसे पूरा नंगी कर देता है।

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नजमा भी राज का साथ देती है। आज पर दिन में उसे राज से चुदने का मौका नहीं मिला था। वो राज को अपने ऊपर खींच कर उसे किस करने लगती है। राज भी उसे किस करने लगता है। राज अब धीरे-धीरे नजमा के हर अंग को चूमने लगता है जिससे नजमा भी अब गरम होने लगती है।

राज नजमा की चूचियों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता है और एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत में उंगली पेलने लगता है। नजमा इस दोहरी मार से पागल होने लगती है और उसकी चूत गीली होने लगती है। कुछ देर तक राज ऐसे ही नजमा को तड़पाता है फिर राज नजमा की नाभि में जीभ डालकर घुमाता है। नजमा अब पूरी तरह से पागल हो जाती है। राज की उंगलियां अभी भी नजमा की चूत को बहुत तेजी से पेल रही थी। अब राज नजमा की नाभि से जीभ निकालकर सीधे नजमा की गीली चूत में लगाता है। राज की जीभ चूत में लगते ही नजमा की सांसें उखाड़ने लगती है और वो राज के सिर को अपनी चूत में जोर से दबा लेती है और बहुत तेज सिसकी लेकर झड़ने लगती है।

राज नजमा की चूत का सारा पानी अपनी जीभ से चाटकर साफ करता है। नजमा बेहाल होकर अपना सिर पीछे और बहुत तेज सांस लेने लगती है। अब राज भी अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो जाता है, और वह नजमा की दोनों टाँगों को उठाकर अपने कंधे पर रखता है। अपना कटा लण्ड नजमा की गीली चूत में सेट करके एक जोरदार झटका मारता है और अपना पूरा लण्ड नजमा की चूत में डाल देता है।

नजमा इतनी गरम होने के बाद भी उसकी एक जोरदार चीख निकल जाती है, जिससे पूरा कमरा गूज उठता है नजमा की आँखें बाहर आ जाती हैं, उसकी सांस फूल जाती है। उसको बहुत तेज दर्द अपनी चूत में महसूस होता

है। आज राज ने अपना मसल एक झटके में ही पूरा का पूरा नजमा की चूत में उतार दिया था। उसके टट्टे नजमा की चूत में टच हो रहे थे। नजमा को यकीन नहीं हो रहा था की राज का पूरा लण्ड उसकी चूत में समा चुका है। वो अपना हाथ अपनी चूत में लगाती है तब उसे यकीन होता है।

राज उससे कहता है- "मेरी जान आज तुमने एक बार में ही पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया है.."

नजमा- "मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है..' बोलकर राज को झटक देती है और लण्ड निकालने को कहती है।

लेकिन राज उसके दोनों हाथ पकड़ लेता है और उसे शांत रहने का कहता है। थाड़ी देर बाद जब नजमा नार्मल हो जाती है तो राज उसे हल्के धक्कों से चोदने लगता है। अब नजमा भी पूरी तरह से गरम हो गई थी। राज के लण्ड में बिपाया का असर शुरू हो चुका था। वो नजमा को अब बुरी तरह से चोद रहा था। राज अपना पूरा लण्ड बाहर खींचकर एक बार में ही पूरा अंदर पेल रहा था।

राज के झटके इतने तगड़े थे की नजमा की पूरी चूत फैल रही थी। नजमा अब राज के झटकों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। क्योंकी राज का हर झटका नजमा की चूत की पूरी गहराई में जा रहा था और उसको एक नया एहसास दे रहा था। वो बहुत देर से अपने आपको संभाल रही थी, लेकिन राज के झटके उसको संभलने नहीं दें रहे थे। राज के हर झटके में नजमा की चीख निकल रही थी और वो बुरी तरह से अपनी चूत से पानी बहा रही

धी।

अब पूरे कमरे में सिर्फ नजमा की चीख और फछ-पछ की आवाज आ रही थी। नजमा की चीख और सिसकियां इतनी तेज हो चुकी थी की अपने रूम में सो रही शाज़िया की भी नींद खुल जाती है। कुछ देर तक तो उसे समझ

में नहीं आता की क्या हो रहा है? फिर उसे समझ में आ जाता है कहीं बहुत बुरी तरह से चुदाई शुरू है। आवाज का पीछा करते हुए राज के कमरे के बाहर पहुँच जाती है, जहां नजमा सब कुछ भूलकर अपनी चुदाई में गुम थी।
 
शाज़िया जब खिड़की से अंदर देखती है तो उसका मुंह भी नजमा की तरह खुला रह जाता है। शाज़िया पीछे से दोनों की चुदाई देख रही थी, जिसमें सिर्फ राज के टटें और नजमा की फैली हुई चूत दिख रही थी। इतना कामुक दृश्य देखने के बाद शाज़िया भी अब अपनी चूत सहलाने लगती है। शाज़िया को भी चुर्दे हए साल हो गया था। इतनी

गरम चदाई देखने के बाद शाज़िया भी गरम हो गई थी।

तभी राज अपना लण्ड नजमा की चूत से निकलता है।

जब शाज़िया राज का कटा लण्ड देखती है तो उसकी चूत भी सुन्न पड़ जाती है। उसे ऐसा लगता है जैसे कोई नाग अपनी बिल से बाहर आ रहा हो। इतना तगड़ा लण्ड तो उसने बल-फिल्म में भी नहीं देखा था। उसकी लम्बाई और मोटाई शाज़िया को सुन कर देती है।

राज अब नजमा को डोगी स्टाइल में खड़ा करता है और अपना मसल फिर से नजमा की चूत में पेल देता है।

शाज़िया नजमा की चूत में लण्ड जाते हुए देखती रहती है, और सोचती है- "साली नजमा ने क्या लण्ड पाया है... कसम से इतना बड़ा लण्ड तो हर औरत की चुदाई की मुराद पूरी कर दें।

नजमा की चुदाई होते हुए 30 मिनट हो चुके थे। उसकी पूरी चूत अब बिल्कुल लाल हो चुकी थी। नजमा को अब राज का लण्ड लेना मुश्किल हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो आज फिर में मत देगी। और यही सोचते हुए उसका प्रेसर बढ़ जाता है और वो राज के लण्ड के बाहर निकलते ही मत देती है। जिससे राज अपना लण्ड बाहर खींच लेता है। जिससे नजमा की चूत से फर-फर की आवाज आती है।

राज का लण्ड जब बाहर आता है तो शाज़िया नजमा की चूत देखकर चकित हो जाती है। नजमा की चूत में एक बड़ा सा छेद दिखाई देता है। शाज़िया का मुँह खुला रह जाता है।

उधर नजमा राज की चुदाईसे बेहाल थी। उसे अब राज का लण्ड किसी सजा मिलने जैसा लग रहा था। लेकिन राज आज नजमा की चूत को परा फाइना चाहता था। वो एक बार फिर नजमा को पेंट के बल लिटा देता है और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा देता है, जिसमें नजमा की चूत और गाण्ड ऊपर उठ जाती हैं। तब राज फिर से अपना मसल नजमा की चूत में पेल देता है।

शाज़िया भी बाहर खड़ी होकर इस चुदाई को देखकर बिल्कुल पागल हो जाती है। अब उसे भी एक तगड़े लण्ड की तलब लग रही थी। अब वो भी सब कुछ भूलकर अपने दिमाग में सिर्फ लण्ड पाने की सोच रही थी। वो भी आज किसी भी हालत में चदना चाहती थी।

नजमा राज का लण्ड अपनी चूत में पाते ही अपनी गाण्ड और बाहर करती हैं जिससे राज का लण्ड नजमा के और अंदर तक सरक जाता है। अब राज उसे फिर से तेज-तेज धक्के मारकर चोद रहा था। राज के दिमाग में नजमा की गाण्ड मारने का भी मौका था। क्योंकी नजमा की गाण्ड उसके सामने थी। वो धीरे से अपना लण्ड बाहर निकालता है और नजमा की चूत में दो उंगली डालकर उसका पानी लेकर नजमा की गाण्ड के छेद में लगा देता है

नजमा को कुछ समझ में नहीं आता। राज अपना थूक भी निकालकर नजमा की गाण्ड में लगाता है। अब नजमा समझ जाती है की राज साहब आज गाण्ड मारजे के मूड में हैं। वो तुरंत पलटना चाहती थी। लेकिन राज उसके ऊपर बैठा था। राज तुरंत नजमा की गाण्ड में लण्ड सेट करके अपना प्रेसर डाल देता है। जिससे राज का लण्ड नजमा की गाण्ड में फँस जाता है। नजमा की जान निकालने लगती है, वो तड़पने लगती है। उसमें दर्द नहीं सहा जा रहा था। नजमा अपने पैर पटकने लगती है। तभी राज अपना प्रेशर और बढ़ा देता है, जिससे राज के लण्ड का टोपा नजमा की गाण्ड में चला जाता है।

राज को भी नजमा की गाण्ड की टाइटनेंस का पता चलने लगता है। उसे ऐसा लगता है जैसे किसी टाइट रब्बर में अपना लण्ड फंसा रखा हो। नजमा की आँखें लाल हो जाती हैं, उसे इस दर्द का अंदाजा नहीं था। वो आज अपनी लाइफ का सबसे भीषण दर्द सह रही थी। अब राज ने और टाइम ना लेते हए अपना पूरा प्रेशर डाल देता है, जिसमें राज का पूरा लण्ड नजमा की गाण्ड फाइते हुए अंदर चला जाता है और नजमा पूरी ताकत लगाकर अपना छंद चौड़ा कर देती है। राज का लण्ड इतना बड़ा और मोटा था की नजमा को सह पाना मुश्किल था बा जोर से चीखती है।

उधर शाज़िया बाहर से सब कुछ देख रही थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था की नजमा की गाण्ड में पूरा लण्ड समा चुका है।

नजमा करीब 10 मिनट तक तड़पति है फिर धीरे-धीरे उसका दर्द कम हो जाता है, तो उसे थोड़ा सुकून मिलता है। तभी राज अपना लण्ड बाहर खींचता है तो उसके लण्ड के साथ ही नजमा की पूरी गाण्ड भी ऊपर उठ जाती हैं।

राज फिर से अपना लण्ड अंदर करता है और धीरे-धीरे झटके मारने लगता है। अब उसका लण्ड नजमा की गाण्ड में रगड़ रहा था। अब नजमा को भी दर्द कम हो रहा था।
 
अब राज भी अपना लण्ड तेजी से नजमा की गाण्ड में पेलने लगता है। आज उसका नजमा की गाण्ड मारने का सपना पूरा हो गया था। वो अब नजमा की गाण्ड अच्छी तरह से चोद रहा था। वो आज पूरी तसल्ली से नजमा की गाण्ड बजा रहा था। लेकिन नजमा की गाण्ड की टाइटनेंस उसे ज्यादा देर रुकने नहीं देती और वो अपने धक्के

और तेज कर देता है। अब नजमा को भी गाण्ड मरवाने का मजा आने लगा था। आज वो पहली बार गाण्ड मरवाते हए झड़ने वाली थी, और वो बहुत तेज चीखते हए झड़ने लगती है और राज भी कुछ धक्के मारने के बाद नजमा की गाण्ड में ही अपना लावा भरने लगता है।

नजमा को भी राज का गरम-गरम वीर्य अपनी गाण्ड में महसूस होता है, जिससे वो एक बार फिर से अपनी सिसकी निकाल देती है। राज झड़ने के बाद वैसे ही नजमा के ऊपर लेट जाता है।

शाज़िया भी ऐसी भीषण चुदाई देखकर तीन-चार बार खड़े-खड़े ही झड़ जाती है, और वो वहीं नीचे बैठ जाती है।

राज का लण्ड अभी भी नजमा की गाण्ड में था। जब राज का लण्ड ढीला होता है तो वो पक्क की आवाज के साथ बाहर आ जाता है। राज और नजमा दोनों इतनी भीषण चुदाई के बाद वैसे ही लेटे रहते हैं।

नजमा की गाण्ड और चूत दोनों बहुत बुरी तरह से फैली हुई थी। नजमा अपनी इस चुदाई से बहुत ज्यादा थक गई थी और वो झड़ते ही गहरी नींद में सो गई। उसे कुछ भी होश नहीं था।

थोड़ी देर बाद राज उठकर बाथरूम चला जाता है। आज उसके लण्ड ने भी कुछ ज्यादा ही मेहनत की थी। लेकिन उसका लण्ड अभी भी आधा खड़ा था। वो एक बार और नजमा की चूत मारने की सोचता है। बाथरूम से बाहर आकर सिगरेट पीने के लिए बाहर आता है। राज जैसे ही बाहर आता है उसे शाज़िया वहीं पर बैठी हुई दिखती है। उसकी आँखें अभी भी बंद थी। राज उसकी हालत देखकर समझ जाता है की इसने आज हमारी पूरी चुदाई लिव देखी है।

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शाज़िया का हाथ अभी भी उसकी पैंटी के अंदर था। राज को आज एक और नया शिकार मिल जाता है। वो शाज़िया के पास जाकर उसे अपनी गाड़ी में उठा लेता है और शाज़िया को उसके रूम में ले जाता है। राज चाहता तो शाज़िया को नजमा के सामने ही चोद सकता था। लेकिन वो नहीं चाहता था की नजमा को इस बात का पता चले।

शाज़िया भी इस कदर बेहाल थी की उसे कुछ होश नहीं था। जब उसकी आँख खुलती है तो उसे अपने सामने राज खड़ा हुआ दिखता है जिसका लण्ड पूरी तरह से खड़ा था। शाज़िया ये सब देखकर डर जाती है, और उठकर भागनें की साचती है।

लेकिन राज उसे पकड़कर बैड पर गिरा देता है और कहता है- "शाज़िया मुझे पता है तुमने मेरी और अपनी भाभी की चुदाई देख ली है और तुमने भी उसका पूरा मजा लिया है। अब तुम चाहो तो मैं तुम्हें प्यार से चोद सकता ह नहीं तो मैं तुम्हारी चूत को जबदस्ती भी फाड़ सकता है.." और राज ये बोलकर शाज़िया के साथ ही बेड पर बैठ जाता है।

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अब शाज़िया भी सोचती है की ये सही कह रहा है। तब शाज़िया उससे कहती है- "आप हो कौन?"

तब राज उसे बताता है- "मेरा नाम राज है। और मैं तुम्हारी भाभी का प्रिन्सिपल हैं।

शाज़िया राज का नाम सुनकर ही चकित हो जाती है। उसे यकीन नहीं होता की उसकी भाभी एक मुश्लम से चुद रही थी और आज वो भी इस लण्ड का शिकार हो जाएगी।

तब राज शाज़िया की एक चूची पकड़कर दबा देता है और शाज़िया को बेड पर लिटा देता है। शाज़िया थोड़ा विरोध करती हैं लेकिन उसे पता था की इसका कोई मतलब नहीं है। अब राज शाज़िया की मैक्सी उतार देता है। अब शाज़िया केवल ब्रा और पैटी में थी। राज उसे एक बार ऊपर से नीचे तक देखता है और मन में सोचता है-"साली में भी कम कातिल नहीं है.....

राज शाज़िया को झटका देकर पेट के बाल लिटा देता है तो शाज़िया की गाण्ड देखकर और ज्यादा गरम हो जाता है। उसकी गाण्ड नजमा की गाण्ड में भी बड़ी थी। राज तुरंत शाज़िया की पैंटी में कसी गाण्ड को अपने दोनों हाथों में लेकर जोर से दबाता है, और शाज़िया की पैंटी को वहसी तरीके से खींचकर फाड़ देता है। फिर अपना मुँह उसकी गाण्ड में लगा देता है, और अपनी जीभ शाज़िया की चूत में घुमाने लगता है।

शाज़िया भी सालों बाद अपनी चूत पर किसी चीज को स्पर्श होता हुआ महसूस करती हैं। अब वो भी आहह आहह करने लगती है। बरसों बाद उसकी चूत कोई चाट रहा था। वो अपनी गाण्ड को और बाहर की तरफ पुश करती है। जिससे राज अपनी लंबी जीभ को शाज़िया की चूत में और गहराई तक पेल देता है। शाज़िया को आज बहुत दिनों बाद ऐसा मजा मिला था। शादी के बाद उसका पति ही उसकी चूत चाटता था। लेकिन तलाक के बाद उसे ये खुशी नसीब नहीं हुई थी। शाज़िया के पति ने उसे तलाक इसलिए दे दिया था की शाज़िया के अंदर बच्चा पैदा करने समता नहीं थी। जबकी शाज़िया का पति ही इस काबिल नहीं था की वो बच्चा पैदा कर सके। और उसने सारा दोष शाज़िया पर डाल दिया था। शाज़िया भी अपने आपको दोषी मानती थी। आज राज बुरी तरह से उसकी चूत और गाण्ड चाट रहा था।
 
शाज़िया की सोई हुई तमन्नाएं फिर से जाग गई थीं। शाज़िया भी अब सब कुछ भूलकर अपनी मस्ती में आ गई थी। वो भी राज की चुसाई का पूरा मजा ले रही थी।

राज अब उसे घुमाकर पीठ के बल लिटा देता है और उसकी ब्रा भी फाड़ देता है। शाज़िया की चूची नजमा से कम बड़ी थी। लेकिन राज को इससे कोई मतलब नहीं था। उसे आज दो चूत चादने को मिल रही थी। उसे तो अपनी किश्मत पर नाज हो रहा था। अब राज शाज़िया के सामने आकर बैठ जाता है और शाज़िया की दोनों टाँगें फैलाकर उसकी चूत में एक बार फिर से अपनी जीभ डाल देता है।

शाज़िया पहली भी कई बार झड़ चुकी थी अपनी भाभी की चुदाई देखकर। लोकन राज की चुसाई ने उसे एक बार फिर से झड़ा दिया और वो भी अपनी चूची को अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से दबा रही । उसकी आँखें बंद थी। तभी राज उठकर उसके पीछे चला जाता है, और अपना लण्ड शाज़िया के होठों पर लगा देता है। शाज़िया तरत अपनी

आँख खोलती हैं और अपना मुँह खोल देती है।

शाज़िया को लण्ड चूसना बहुत पसंद था और राज जैसा लण्ड देखकर ही उसकी लार टपक रही थी। वो तुरंत राज के लण्ड का टोपा अपने मुंह में भर लेती है जिससे राज की भी सिसकी निकल जाती है। और वह अपने लण्ड को और थोड़ा अंदर सरका देता हैं। राज का मोटा लण्ड शाज़िया के मुँह में आधे से ज्यादा चला जाता है। जिसमें शाज़िया की आँखें बाहर आ जाती है।

तभी राज और थोड़ा धक्का देकर अपना पूरा लण्ड उसके मुँह में भर देता है। राज का लण्ड अब शाज़िया के गले से भी नीचे तक पहुँच जाता है, जिसमें शाज़िया का दूं घुटने लगता है। तभी वो अपना लण्ड पूरा शाज़िया के मुँह में बाहर निकाल लेता है।

शाज़िया खाँसते हए उठकर बैठ जाती है, और जोर-जोर से सांस लेने लगती है। राज फिर से उसे लिटाकर अपना पूरा लण्ड एक बार फिर शाज़िया के मुँह में भर देता है। ऐसा ही वो चार-पाँच बार करता हैं। बता की हालत खराब हो जाती है, और अब राज को अपनी चूत मारने के लिए बोलती है। शाज़िया अब पूरी तरह से गरम थी, उसकी चूत लगातार पानी बहा रही थी।

अब राज को भी लगने लगा था की इसको जल्दी से चोदकर ऊपर जाना चाहिए। कहीं नजमा जाग ना जाए और उसका जो प्लान है उसे पता चल जाए। वो शाज़िया से कहता है- "मेरी जान अपनी चुदाई के बारे में नजमा को मत बताजा, और उसकी चुदाई जो तुमने देखी है बो भी मत बताना..." कहकर राज शाज़िया की चूत में अपना टोपा सेंट करता है और एक झटका मारता है। राज का टोपा शाज़िया की चूत में फंस जाता है। राज को यकीन हो जाता है

की में भी नजमा जैसी ही कमसिन है। इसकी चूत भी साली किसी कुंवारी लड़की की तरह टाइट है।

शाज़िया को राज का लण्ड अपने अंदर जाते ही बहुत तेज दर्द होता है। वो राज को अपना लण्ड बाहर निकालने के लिए बोलती है और कहती है- "राज सर आपका बहुत बड़ा और मोटा है..."

तब राज उसकी बात पर हँसता है और एक तेज झटका मारता है, और उसके तुरंत बाद ही एक और तगड़ा झटका मारकर अपना पूरा लण्ड शाज़िया की चूत में उतार देता है।

शाज़िया को अपनी चूत में एक के बाद एक तीन झटके लगते ही उसकी चीख निकल जाती है, और वो रो पड़ती है। राज अब शाज़िया की कमर को पकड़ लेता है। उसका पूरा लण्ड शाज़िया की चूत में था। वो कुछ देर शांत रहता है। शाज़िया अपना दर्द बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, तब राज उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर धीरे धीरे दबाता है।

अब शाज़िया भी थोड़ा रिलॅक्स महसूस करती हैं। राज शाज़िया को शांत होता देखकर उसकी कमर को पकड़कर धक्के मारने लगता है। उसकी चूत भी राज के लण्ड को जकड़कर राज के लण्ड के साथ ही आगे-पीछे हो रही थी। राज शाज़िया की चूत को गौर से देखता है। शाज़िया की चूत में झांटे बहुत ज्यादा थी। उसकी चूत में राज का लण्ड दिख भी नहीं रहा था। चूत का छेद राज के लण्ड से भरा हुआ था।
 
राज अब अपने झटके तेज कर देता है। अब शाज़िया को भी अपनी चुदाई का मजा आने लगता है। उसकी चूत भी पानी छोड़ रही थी जिसमें राज का लण्ड अब अच्छे से शाज़िया की चूत में सरक रहा था। शाज़िया को भी राज का लण्ड अपनी अनछुई गहराई तक महसूस हो रहा था। उसे ऐसा एहसास पहली बार हुआ था। इतना तगड़ा लण्ड उसकी चूत में था की उसकी चूत की फांके खुलकर पूरी गोल हो गई थी। राज के लण्ड ने शाज़िया की चूत के अंदर की दीवारों को भी पूरा फैला रखा था। उसके लण्ड की रगड़ शाज़िया को अपनी पूरी चूत में महसूस हो रही थी राज का हर झटका शाज़िया को असीम आनंद दे रहा था।

राज भी शाज़िया की कमर को पकड़कर अब बहुत तेजी से केता की चूत मार रहा था, और शाज़िया भी बार-बार राज की चुदाई से पानी छोड़ रही थी। परा कमरा फच फच की आवाज में गज रहा था। शाज़िया अपनी चीख का बहुत देर से रोक रही थी। उसे लग रहा था की अगर वो चिल्लाई तो नजमा भी जाग जाएगी। उसे अपनी सांस

और अपनी चीख को रोक पाना अब मुश्किल लग रहा था। वो तुरंत अपने मुँह में तकिया दबा लेती है और जोर जोर से चीखने लगती है। उसे अब राज के लण्ड का मजा इतना ज्यादा आ रहा था की वो बेडशीट को भी जोर से पकड़कर खींच रही थी।

राज के झटके भी उसके पूरे शरीर को हिला रहे थे। शाज़िया की चूचियां भी राज के झटके से बहुत तेज हिल रही थीं। अब राज भी झड़ने के करीब था और शाज़िया भी अपना पानी छोड़ रही थी।

तभी राज बोलता है- "मेरी जान लें मेरा वीर्य अपनी चूत में..."

शाज़िया उसे हाँ कह देती है। उसे तो यही लग रहा था की इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तभी राज एक जोर का झटका मारकर पूरा लण्ड शाज़िया की चूत की गहराई में उत्तार देता है, और अपना पूरा वीर्य शाज़िया की बच्चेदानी में भर देता है और राज भी जोर-जोर से सांसें लेने लगता है। फिर वो भी शाज़िया के ऊपर लेट जाता है। शाज़िया की चूत राज का गरम वीर्य पड़ते ही एक बार फिर से पानी छोड़ देती है, और राज को अपनी बाहों में भर लेती है दोनों पी तरह से संतुष्ट होकर वैसे ही लेटे रहते हैं।

कुछ देर बाद राज नजमा की चूत में अपना लण्ड बाहर निकालता है। उसके लण्ड में शाज़िया की चूत से निकला खून लगा था। शाज़िया को भी राज का लण्ड अपनी चूत से निकलते ही उसे अपने अंदर कुछ खाली लगता है। शाज़िया की चूत भी बुरी तरह से फैल गई थी। राज के वीर्य की कुछ बूंदें शाज़िया की चूत के बाहर आ जाती हैं।

राज शाज़िया को चोदने के बाद कुछ देर वहीं पर रुकता है और शाज़िया को एक लंबी किस देने के बाद ऊपर जाने के लिए कहता है, तो शाज़िया उसे वहीं रुकने को बोलती है। लेकिन राज वहां नहीं रुकता और नजमा के पास चला जाता है।
 
राज के जाने के बाद शाज़िया अपनी चूत में हाथ लगाकर देखती है तो उसकी तीन उंगलियां एक बार में ही उसकी चूत में चली जाती है। उसकी चूत से राज का वीर्य और खून दोनों बहकर बेडशीट पर गिर रहा था। शाज़िया उठकर बाथरूम जाने लगती है तो उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, उसे ऐसा लग रहा था जैसे राज का लण्ड अभी भी उसकी चूत में है।

शाज़िया अपनी दोनों टांगों को चौड़ी करके चलते हए बाथरूम में जाती है और वहीं पर बैठ जाती है। बहुत जोर लगाने के बाद उसकी चूत से कुछ बूदें पेशाब की बाहर आती है, जिससे उसकी चूत में बहुत तेज जलन होती है

और वो तुरंत उठकर खड़ी हो जाती है और बाथरगम से आकर अपने बैड पर पेट के बल लेटकर सोने लगती है। उसने अभी भी कोई कपड़ा अपने ऊपर नहीं डाला था, और ऐसे नंगी होकर सो जाती है।

राज ऊपर पहुँचकर देखता है तो नजमा अभी भी सो रही थी। वो जाकर नजमा से लिपटकर सो जाता है।

करीब दो घंटे बाद जब नजमा उठती है तो उसकी गाण्ड में बहुत तेज दर्द उसे महसूस होता है। वो हाथ लगाकर देखती है तो उसे अपनी गाण्ड फटी हुई मिलती है। राज का वीर्य भी उसकी गाण्ड में अभी भी बह रहा था। एक नजर बा राज की तरफ देखती है फिर राज के लण्ड को देखती है। लण्ड देखते ही नजमा अपना दर्द भूल जाती हैं और राज के लण्ड को अपने हाथ में पकड़कर हिलाने लगती है।

राज नजमा की इस हरकत से जाग जाता है वो एक बार फिर नजमा की टांग को उठाकर अपना लण्ड उसकी चूत में सेट करता है, और एक झटके में अपना लण्ड नजमा की चूत में उतार देता है। अबकी बार नजमा का ज्यादा दर्द नहीं होता। वो अपनी गाण्ड और पीछे करके राज का लण्ड और गहराई में ले लेती है राज भी अब नजमा

की चूत का बड़े आराम से मार रहा था। उसे यकीन हो गया था की नजमा अब अपने पति के लण्ड से कभी खुश नहीं होगी, और वो अपनी चूत की आग अब उसके लण्ड से ही शांत करेगी।

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राज नजमा को कई पोजीशन बदल-बदलकर चोदता है। नजमा भी राज की चुदाई से पूरी तरह से पागल हो जाती है। राज से चुदने के दौरान उसे ये पता नहीं चलता था की वो कितनी बार झड़ी? बस उसे इतना पता रहता था की जब तक राज का लण्ड उसकी चूत में रहता है तब तक उसकी चूत से पानी बहना बंद नहीं होता। राज एक बार फिर नजमा की चूत को अपने गर्म वीर्य से भर देता है, और वैसे ही नजमा की चूत में लण्ड डालकर लेटा रहता है।

राज और नजमा ने अभी तक आपस में कभी 5 मिनट से ज्यादा बात नहीं की थी। लेकिन उन्होंने चुदाई जरूर एएक घंटे से भी ज्यादा की थी। उस रात राज ने नजमा को एक बार और चोदा। उस रात नजमा को अपनी चूत पूरी तरह से खुली हुई लग रही थी। पहली रात की तरह उसे ज्यादा दर्द भी नहीं हुआ था। बस उसकी गाण्ड आज ज्यादा दर्द कर रही थी। नजमा राज से चुदने के बाद अपनी चूत में राज का वीर्य लेकर अपने रूम में आ जाती है और सो जाती हैं। नजमा को आज कोई भी जल्दी जगाने वाला नहीं था। क्योंकी आज सनडे का दिन था

और किसी को भी स्कूल नहीं जाना था।

ट्रेन में जय की जब नींद खुलती है तो सुबह हो गई थी और उसका स्टेशन भी आने वाला था। वो जुनैद को जगाता है। जुनैद भी उसे स्टेशन में छोड़ने के लिए खड़ा हो जाता है। तब जय और जुनैद आपस में एक दसरे से फोन नम्बर लेते हैं और एक दूसरे का घर आने का लिए कहते हैं। अगला स्टेशन जुनैद का था। जब गाड़ी स्टेशन पर रुकती है तब जय जुनैद के गले लगता है और उसे इंद वाले दिन अपने घर पर परिवार सहित इन्वाइट करता है। अगले हफ्ते इंद थी।

जुनैद भी कहता है- "अगर काम से बाहर नहीं गया तो मैं पक्का अपनी परिवार के साथ आपके घर आऊँगा.."

जय ट्रेन से उतार कर सीधे राज के घर की तरफ निकाल लेता है, और जुनैद भी अपनी सीट में आ जाता है।

जब नजमा की आँख खुलती है तो उसे याद आता है की आज जुनैद वापस आ रहे हैं। उसे थोड़ा डर भी लगता है और थोड़ा गुस्सा भी। वो नहीं चाहती थी की जुनैद इतनी जल्दी आए। वो उठकर बाथरूम जाने लगती है तब उसे अपनी गाण्ड में बहुत तेज दर्द होता है। उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। उसे चिंता होने लगी की राज की चुदाई से उसकी चूत तो फैल गई है। वो सोचती है की जुनैद आते ही उसकी चूत मरेगा। लेकिन नजमा इस बात का भी आईडिया सोच लेती हैं और बाथरूम में जाकर फ्रेश होती है।

शाज़िया की भी नींद खुल गई थी। वो भी ऐसी ही नगी हालत में बाथरूम में जाकर फ्रेश होती है। अपनी चूत की गरम पानी से सिंकोई भी करती है। उसे भी आज अपनी चूत पहले से ज्यादा फूली हुई लग रही थी। फिर शाज़िया आज ही अपनी झांटें भी साफ कर लेती और पूरे शरीर को अच्छे तरीके से राज के लिए तैयार कर लेती हैं। लेकिन उसे भी अपने भाई के आने की चिता हो जाती है। वो भी सोचती है की भैया को भी आज ही आना था। वो भी तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आ जाती है।

नजमा किचेन में जाकर सभी के लिए चाय बनाती है और एक कप चाय लेकर राज के रूम में जाती है। राज अभी भी नंगा ही अपने रूम में सो रहा था। तब नजमा राज का लण्ड पकड़कर हिलाती है और राज को मस्ताने अंदाज में जगाती है।

राज जागने के बाद एक बार फिर नजमा को बेड पर पटक कर उसकी सलवार को नीचे खींच देता है। नजमा उसे मना करती है लेकिन राज नहीं मानता और एक बार फिर नजमा की चूत में अपना लण्ड पेल देता है, और उसे वहीं घोड़ी बनाकर चोदता है। करीब 10 मिनट की भीषण चुदाई के बाद राज अपना वीर्य एक बार फिर से नजमा की चूत में भरने लगता है।
 
तभी घर की डोरबेल बजती है नजमा तुरंत उठकर खड़ी होती है और अपनी सलवार और पैंटी ऊपर चढ़ा लेती है। राज का वीर्य उसकी चूत में ऊपर तक भरा था। जैसे-जैसे नजमा सीढ़ियां उतर रही थी राज का वीर्य नजमा की चूत से बहकर नजमा की जांघे गीली कर रहा था। राज के वीर्य में भरी चूत लेकर जब नजमा नीचे पहुँचती है तो जुनैद और शाज़िया दोनों खड़े थे। शाज़िया अपनी भाभी को देखकर मुश्कुरा देती है, जिससे नजमा भी हँस देती है शाज़िया के हँसने का कारण और और नजमा के हँसने का कारण और था।

नजमा जुनैद के पास पहुँचती है तो जुनैद उसे तुरंत अपनी बाहों में भर लेता है। नजमा भी उसकी बाहों में सिमट जाती है।

तब शाज़िया नजमा और जुनैद को अलग करती है और चुटकी लेते हुए कहती है- "जाओं भाभी भैया की थकान उतारों..."

नजमा और जुनैद दोनों अपने कमरे में चले जाते हैं, और शाज़िया भी अपने रूम में चली जाती है।

उधर राज की सुबह भी हसीन हो गई श्री नजमा की चूत मारकर । राज अपने बिस्तर में खड़ा होता है और फेश होनें बाथरूम में घुस जाता है। आज उसके दिमाग में अपने घर जाने का प्लान आता है। उसे पता था जुनैद के घर पर होते हुए वो दोनों में से किसी की भी चूत नहीं मार पाएगा और फ्रेश होने लगती है।

नजमा और जुनैद जैसे ही अपने रूम में पहुँचते हैं, जुनैद तुरंत नजमा को अपनी बाहों में भर लेता है और उसे बेतहाशा चूमने लगता है। नजमा की चुदाई की खुमारी उतरी नहीं थी। राज ने तो उसे अच्छी तरह से चोदा था। नजमा भी जुनैद की हरकत से गरम होने लगती है। तभी उसे याद आता है की कहीं जुनैद ने उसे नंगी कर दिया

तो उसे पता चल जाएगा की मेरी बीबी कहीं से, अपनी चूत मरवाकर आ रही है। बा तुरंत जुनैद को अपने से अलग करती है और जुनैद को धकलकर बाथरूम की तरफ ले जाती है।

नजमा कहती है- "पहले आप फ्रेश हो जाओं, उसके बाद जो करना चाहते हो कर लेना..."

जुनैद बाथरूम में चला जाता है और नजमा नाश्ता बनाने किचेन में चली जाती है।

राज तैयार होकर नीचे आता है तो वो सीधे किन की तरफ जाता है जहां नजमा नाश्ता तैयार कर रही थी। जैसे ही राज किचन में पहुँचता हैं वो नजमा को पीछे से अपनी बाहों में भर लेता है, और नजमा की चूचियों को जोर से मसल देता है।

जिससे नजमा की चीख निकल जाती है। उसे लगता है की पं सब जुनैद ने किया है। लेकिन जब वो राज के मोटे हाथ देखती है तो एकदम से घबरा जाती है, और तुरंत राज के हाथ अपनी चूची पर से हटाती हैं और राज का रिक्वेस्ट कर के बाहर भेजती है। राज बाहर आकर सोफे पर बैठ जाता है।

तभी जुनैद भी फ्रेश होकर आ जाता हैं जुनैद को देखते ही राज उठकर उससे हाथ मिलाता है और अपना परिचय देता है। जुनैद भी अपना परिचय देता है और दोनों वहीं सोफे पर बैठ जाते हैं दोनों आपस में थोड़ी बात चीत करते हैं। थोड़ी देर की बात-चीत में ही दोनों में काफी मेल मिलाप हो जाता है।

राज जुनैद से मेल मिलाप इसलिए बढ़ाता है की वो उसकी बहन और बीबी दोनों को चोद सके। जुनैद बेचारा इन सब बातों से अंजान रहता है। थोड़ी ही देर में दोनों अच्छे दोस्त बन जाते हैं। जुनैद को राज का नेचर काफी पसंद आया था। तभी नजमा नाश्ता लेकर आ जाती है और नाश्ता टेबल पर रख देती हैं। तब राज नजमा को बेटा कहकर बुलाता है।

जिससे नजमा चकित हो जाती है और मन में सोचती है- "अभी कुछ देर पहले जब मेरी चूत मार रहे थे तब मेरी जान बोल रहे थे और अब बेटा?" नजमा को भी समझते देर नहीं लगती की राज ने ऐसा क्यों बोला? तब नजमा भी राज को अंकल कहकर बुलाती है। तब राज नजमा से नाश्ता सर्व करने के लिए कहता है।

जुनैद दोनों की बात से काफी खुश हो जाता है। और दोनों नाश्ता करते है। नाश्ता खत्म होने के बाद राज जुनैद को बताकर अपने घर चला जाता है, और नजमा को अपने रूम की चाभी भी दें जाता हैं। नजमा दोनों को नाश्ता कराने के बाद सीधे बाथरूम में जाकर अपनी चूत से राज का वीर्य साफ करती है, और अपने कमरे में चली जाती है। जहां जुनैद नजमा की चुदाई के लिए तड़प रहा था।

नजमा जैसे ही रूम में पहुँचती है जुनैद उसे अपनी गादी में उठा लेता है और उसे बैड पर पटक देता है। नजमा भी अब समझ गई थी की अब वो बचने वाली नहीं है। और नजमा भी जुनैद को पकड़कर अपने ऊपर खींच लेती हैं। अब दोनों के ऊपर सेक्स चढ़ा हुआ था जुनैद तुरंत नजमा की सलवार और कुर्ते को उतारकर उसे नंगी कर देता है, और उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार देता है। अब नजमा पूरी नंगी होकर जुनैद के सामने लेटी थी। जुनैद तुरंत झककर नजमा की मखमली जाघे चूमने लगता है।

नजमा भी अब गरम हो रही थी। जुनैद उसकी जांघों को चूमते और सहलाते हुए नजमा की चूत तक पहुँच जाता हैं और जुनैद अपनी जीभ नजमा की चूत में डालने लगता है ता नजमा उसे अपने ऊपर खींच लेती है। नजमा को पता था की राज का वीर्य अभी भी उसकी गहराई में है। वो जुनैद को अच्छी तरह से अपनी बाहों में भर लेती है और जुनैद के होंठों को बेतहाशा चूसने लगती है।

जुनैद भी उसे चूसने और चाटने लगता है। अब नजमा पूरी तरह गरम हो चुकी थी। अब उसे उसकी चूत में लण्ड चाहिए था। वो तुरंत अपना हाथ नीचे ले जाती है और जुनैद का लण्ड अपनी चूत में लगाती है। नजमा की उत्सुकता देखकर जुनैद तुरंत एक जोर का झटका मारता है, ता नजमा जोर से चीख पड़ती है जब की हकीकत में उसे जुनैद के लण्ड का पता ही नहीं चला था की कब लण्ड उसकी चूत में समा गया।

जुनैद को भी इस बात का अंदाजा हो गया था की नजमा की चूत पहले से ज्यादा टीली है और उसका लण्ड इतनी आसानी से चूत में चला गया। तब जुनैद नजमा से पूछता है- "क्या बात है मेरी जान आज तो एक बार में ही पूरा खा गई?"

नजमा को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या बोले? तभी नजमा कुछ सोचकर कहती है- "मेरी जान इतने दिन बाद मिले हो इसीलिए मैं पूरी गीली हो गई हैं। आज बहुत ज्यादा पानी निकल रहा है..."

जुनैद का लण्ड नजमा की चूत में था और नजमा भी अपनी चूत में राज का लण्ड सोचकर ही जुनैद से चुद रही थी। उसकी चूत भी राज के खयाल से ही पानी बहा रही थी तो, जुनैद भी समझ जाता है की बात तो सही है आज नजमा की चूत कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही है। तभी जुनैद नजमा को चिढ़ाने के लिए बोलता है- "मेरी जान आज तो तुम्हारी चूत में गधे का लण्ड भी आराम से चला जाए."

नजमा मन में सोचती है- "अब तुम्हें क्या बताऊँ मेरी जान... तीन दिन से एक गधे के जितने बड़े लण्ड से ही तो चुद रही है, तभी तो मेरी चूत फैल गई है और आपका लण्ड मुझे बहुत छोटा लग रहा है.."

तब जुनैद नजमा की चूत में बहुत तेज झटके मारने लगता है। जिससे नजमा की चूत और भी ज्यादा फैलने लगती है। करीब 10 मिनट तक जुनैद नजमा को चोदता है। तभी नजमा का फोन बजने लगता है। नजमा स्क्रीन पर नाम देखते ही उसकी चूत जुनैद के लण्ड को कस लेती है।
 
जुनैद पूछता है- "किसका फोन है जान?"

नजमा कहती है- "मेरी स्कूल वाली दोस्त का.." और फोन उठा लेती है।

फोन जय का था जो आज बहुत समय बाद नजमा को फोन कर रहा था। जय भी जल्दी से जल्दी नजमा की चूत मारना चाहता था। नजमा और जय आपस में बात करने लगते हैं और जुनैद वैसे ही नजमा की चूत में झटके मारता रहता है, और नजमा की चूत में ही झड़ जाता है। नजमा भी कुछ नहीं बोलती बो तो जय से बात करने में बिजी थी।

नजमा- हेलो।

जय- कैसी हो मेरी जान?

नजमा- ठीक हैं। और आप कैसी हो?

जय- कैसी हो मतलब?

नजमा- हाँ मेरे पति आज ही आए है।

जय- ओह मेरी जान ये बात है। साली अपने खसम से चुदवा रही है।

नजमा- आप भी तो हो।

जय- मुझे कब मिलेंगी तेरी चूत?

नजमा- क्या यार कभी आओं हमारे घर वा भी मिल जाएगी।

जय- चिंता मत कर मेरी जान। बहुत जल्द मैं तेरे घर आकर तेरी चूत मारेगा।

नजमा- हाँ हाँ ठीक है। मेरे पति मेरे पास ही है अभी उन्हें कही जाना भी नहीं है।

जय- अगर आऊँगा तो बिना चोदं मैं वहां से आऊँगा नहीं। कबैठ से मैं सिर्फ तुझे अपनी रांड बनाने आया है समझी?

नजमा. राज सर ने बना लिया है, अब तुम भी बना लो।

जय गुस्से में- "साली क्यों गरम कर रही है मुझं? अभी आकर चोद दूँगा..."

नजमा- सच में। ठीक है, तो आ जाओ।

जय- अपनी फोटो भेज।

नजमा- "बाद में। अभी मुझे काम है बाइ बाइ...' बोलकर नजमा फोन काट देती है।

जुनैद दोनों की बात सुनता रहता है। फोन काटने के बाद नजमा जुनैद को फिर से अपने ऊपर खींच लेती है

बातों से वो फिर से गरम हो गई थी। और बेचारा जुनैद इन सब बातों से अंजान था। नजमा फिर से एक बार जुनैद के लण्ड को खड़ा करके अपनी चूत में ले लेती है, और एक बार फिर से जुनैद तेज झटकों से नजमा को चोदने लगता है। कुछ देर झटके मारने के बाद एक बार फिर जुनैद अपना वीर्य नजमा की चूत में भर देता है।

नजमा को आज अपने पति से चुदने में वो मजा नहीं आया था, जो राज उसे एक चुदाई में ही दे देता था। नजमा को अब बड़े और मोटे लण्ड की आदत लग चुकी थी।
 
नजमा को आज अपने पति से चुदने में वो मजा नहीं आया था, जो राज उसे एक चुदाई में ही दे देता था। नजमा को अब बड़े और मोटे लण्ड की आदत लग चुकी थी।

उधर राज जब अपने घर पहुँचता है तो वो जय को बहा देखकर चकित हो जाती है। जय को देखते ही राज उससे कहता है- "साले हरामी बिना बताए आ गया। साले तू तो कल आने वाला था.."

राज की बात सुनकर जय हँस देता है और कहता है- " साले राज अकेले-अकेले उस रांड़ को चोद रहा है। उसी रांड़ की वजह से तो मैं इंडिया आया हूँ। अब बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है। तू कब मिलवाएगा मुझे?"

राज जय की बातों से खुश हो जाता है और कहता है- "मिलवा तो मैं तुझे अभी देता, लेकिन साली का खसम आ गया आज सुबह। जब साली को चोद रहा था तभी उसका पति आ गया, जिससे मुझे जल्दी खत्म करना पड़ा। नहीं तो साली की गाण्ड भी मारता। रात में एक बार ही गाण्ड मारी थी साली की बहुत टाइट है यार..."

जय राज की बातें सुनकर चकित हो जाता है, और कहता है- "तू बड़ा कमीना है साले, जहां गाण्ड दिखती है वहीं मार देता है नजमा की गाण्ड भी तूने मार ही ली..."

जय और राज बस नजमा की ही बात कर रहे थे। लेकिन राज में एक बार भी शाज़िया का नाम नहीं लिया था। राज को पता था अगर शाज़िया के बारे में बता दिया तो साला ये उसे भी मेरे लायक नहीं छोड़ेगा। दोनों काफी समय तक एक दूसरे से बात करते हैं।

जब राज को लगता है की अब जाना चाहिए तो वो जय से कहता है- "मेरे भाई तू आज रूक जा मैं कल आकर तुझे अपने साथ ले जाऊँगा..."

जय राज की बात सुनकर गुस्सा हो जाता है और कहता है- "मुझे आज ही तो साथ चलना है..."

राज भी समझ जाता है की जय मानने वाला नहीं है तो वो भी जय को अपने साथ लाने के लिए तैयार हो जाता है। घर से निकलकर राज और जय नजमा के घर की तरफ चल देते हैं।

उधर नजमा जुनैद के सो जाने के बाद करीब आधे घंटे तक अपनी चूत में उंगली पेलती है, कभी वो राज को अपनी चूत मारते हुए, तो कभी जय के लण्ड को याद करके उंगली करती है, और अपना पानी छोड़कर वहीं जुनैद के साथ बैड में लिपटकर सो जाती है।

एक घंटे के बाद जब राज जय को लेकर नजमा के घर पहुँच ता है तो उस समय सब लोग सो रहे थे। राज घर की डोरबेल बजाता है। काफी देर तक कोई नहीं आता तो राज एक बार फिर डोरबेल बजाता है।

इस बार शाज़िया की आँख खुलती है तो वो घड़ी की तरफ देखती है। अभी दोपहर के ढाई बज रहे थे। वो उन्हीं बाझिल आँखों के साथ दरवाजा खोलती है तो उसके सामने राज खड़ा था। राज को देखते ही शाज़िया को अपनी रात की चुदाई याद आ जाती है जिससे उसकी चूत में थोड़ी हलचल होने लगती है।

राज शाज़िया को देखकर आँख मार देता है और धीरे से अपना लण्ड भी हिला देता है। जिससे शाज़िया शर्मा जाती है और राज को अंदर आने के लिए कहती है। जब राज अंदर आता है तो उसके साथ में जय भी अंदर आ जाता है। जय को देखते ही शाज़िया राज की तरफ देखती है।

तब राज बताता है- "शाज़िया जी ये मेरा दोस्त हैं, आज ही कुवैत से आया है..."

शाज़िया जय को देखते ही अजीब सा मुंह बनाती है। उसने जय जैसे भारी भरकम इंसान को पहले कभी नहीं देखा था। शाज़िया जय से नमस्ते करती है और उनका वहीं साफे पर बैठने के लिए कहती हैं। और उनके लिए पानी लेने किचेन में चली जाती है।

जय राज से कहता है- "ये कौन है?"

राज बताता हैं- "ये नजमा की ननद है..."

जय कहता है- "साले इसकी गाण्ड मारी की नहीं, देख कितनी बड़ी गाण्ड है?"

राज उसे शांत करते हुए कहता है- "देख जय, अभी ऐसी बात मत कर। थोड़ा सबर कर..."

तब तक शाज़िया पानी लेकर आ जाती है और उन्हें पानी देकर शाज़िया नजमा को जगाने उसके रूम में चली जाती है। दो आवाज देने के बाद नजमा की नींद खुलती हैं। वो तुरंत अपने कपड़े पहनने लगती है लेकिन उसे अपनी पैटी

और ब्रा नहीं मिलती तो वो वैसे ही सलवार कुर्ता पहनकर बाहर आ जाती है।

शाज़िया उसे बताती हैं- "भाभी, वो राज सर के साथ उनका कोई दोस्त आया है कुवैत से। उनके लिए चाय बना दो...' शाज़िया की बात सुनकर नजमा की चूत सुन्न पड़ जाती हैं।
 
शाज़िया उसे बताती हैं- "भाभी, वो राज सर के साथ उनका कोई दोस्त आया है कुवैत से। उनके लिए चाय बना दो...' शाज़िया की बात सुनकर नजमा की चूत सुन्न पड़ जाती हैं।

नजमा को यकीन नहीं होता की जय इतनी जल्दी आ जाएगा। नजमा को सोचता देखकर शाज़िया समझ जाती है की भाभी आज जय मिया से चुदेगी।

शाज़िया नजमा को हिलाते हुए कहती है- "भाभी जाओ चाय बना दो.."

नजमा किचेन की ओर जाने लगती है। जैसे ही जय की नजर और नजमा की नजर टकराती है, नजमा की चूत पानी छोड़ देती हैं। नजमा के मन में बहुत सारे खयाल आ रहे थे।

राज नजमा को रोकते हुए कहता है- "नजमा जी ये जय राज हैं, और जय ये नजमा है इस घर की मालकिन....

नजमा जय की तरफ देखती है तो जय उसे किसी राक्षस जैसा लग रहा था, और नजमा उसके सामने कमसिन कली। नजमा को देखते ही जय की आँखें लाल हो जाती हैं और उसका लण्ड अपने आकार में बदल ने लगता है। नजमा जैसी औरत को देखकर जय को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

तभी राज नजमा से उसके पति के बारे में पूछता है।

नजमा बताती है- "वो अभी सो रहे हैं... और वो किचेन की तरफ जाने लगती है।

जय पीछे से नजमा की गाण्ड देखकर पागल हो जाता है।

राज के दिमाग में एक आइडिया आता है और वो हँस देता है।

शाज़िया नजमा के आते ही अपने रूम में चली जाती है।

राज जय को इशारा करके किचन में जाने के लिए कहता है और बताता है की वो ऊपर जा रहा है। जय राज की बात से खुश हो जाता है और वो किचेन की तरफ चला जाता है। जय के जाते ही राज शाज़िया के कमरे में घुस जाता है।

किचेन में पहुँचते ही जय नजमा को पीछे से पकड़ लेता है और अपने दोनों हाथों में नजमा की दोनों चूचियों को दबाने लगता है। नजमा को इस बात का अंदाजा नहीं था की जय किचन में आकर उसके साथ ऐसा करेगा। नजमा के मन में डर था की कहीं जुनैद ना जाग जाए। लेकिन जय को इन सब बातों में कोई मतलब नहीं था। उसे तो बस नजमा ही दिखाई दे रही थी। अब जय को अपने आप में कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। वो दोनों हाथों से नजमा की चूचियां मसल रहा था। नजमा की चूचियां इतनी बड़ी थी की राज के हाथों में पूरी नहीं आ रही थी लेकिन यहां जय के हाथ नजमा की चूचियों को अच्छी तरह से अपने कैद में लिए

थी अब नजमा भी गरम होने लगी थी।

अब जय अपना एक हाथ नीचे ले जाता है और नजमा की लेगिंग के अंदर हाथ डाल देता है, जिसमें नजमा की बिना झांटों वाली चूत जय को टच हो जाती है। जय भी अब पूरी तरह गरम हो चुका था। उसका बड़ा लण्ड नजमा की गाण्ड में टच हो रहा था।

नजमा अपनी गाण्ड में जय का लण्ड महसूस कर रही थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा खूटा उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा हो।

जय अपने हाथ की बड़ी उंगली को नजमा की चूत में रखकर हल्के से दबाता है और फिर एक झटके में पूरी उंगली नजमा की चूत में पेल देता है। नजमा जय की इस हरकत से तड़प जाती है और उसकी सिसकी निकल जाती है। नजमा को अपनी चूत में जय की उंगली अपने पति के लण्ड से बड़ी और मोटी लग रही थी। अब जय अपनी उंगली का नजमा की चूत में तेजी से पेलने लगता है, और एक हाथ से नजमा की चुची को भी दबाता है, और अपने होंठ उसके गले में रखकर वहां पर हल्के से काटने लगता है।

नजमा को कुछ भी समझ में नहीं आता। उसे ऐसा मजा पहली बार मिला था। नजमा की सांसें बहुत तेज चलने लगती है। जय लगातार उसकी चूत में उंगली पेल रहा था, जिससे नजमा बहुत तेज सिसकारी लेते हुए जय की उंगली के ऊपर ही अपना पानी छोड़ देती है। जय ने 5 मिनट में ही उसकी चूत का पानी निकाल दिया था। नजमा लंबी-लंबी सांसें ले रही थी।

तभी जय उसे अपनी तरफ घुमा लेता है और उसके पिंक होंठों को अपने काले होंठों से दबा लेता है, और नजमा को बुरी तरह से चूसने लगता है। नजमा भी उसके होठों को चूसने लगती है। अब जय नीचे बैठ जाता हैं और नजमा की लेगिंग को नीचे कर देता है। अब नजमा की हसीन चूत जय के सामने थी। जिस चूत ने जय की हालत खराब कर रखी थी आज वो जय के सामने थी।

नजमा की क्लीन सेब चूत देखते ही जय पागल हो जाता है और वो नजमा की लेगिंग पूरी उतार देता है, और नजमा को उठाकर किचेन की सिक पर बिठा देता है और नजमा की दोनों टाँगें चौड़ी कर देता है।

जिसमें नजमा की चूत का छेद और उसकी पूरी चूत फैल जाती है। अब जय अपने घुटनों पर बैठ जाता है और अपनी जीभ नजमा की चूत के छेद में रखकर धीरे-धीरे चाटने लगता है। नजमा की मजे से आँखें बंद हो जाती हैं। उसे आज बहुत मजा आ रहा था। जय नजमा की चूत को ऊपर से नीचे किसी कुत्ते की तरह चाट रहा था। नजमा जय की चूत चाटने के तरीके से पागल हो जाती है। उसे समझ में आ जाता है की जय के साथ उसकी चुदाई हर हद को पार कर जाएगी।

जय अब अपनी बीच वाली उंगली नजमा की चूत में डाल देता है और अपनी जीभ से चूत के दाने को छेड़ने लगता है। नजमा के लिए ये दोहरी मार थी और नजमा भी अपनी कमर हिलाने लगती है। अब जय भी समझ जाता है की नजमा ती गरम है। अब जय अपनी दूसरी उंगली भी डाल देता है। नजमा की चूत में जब, जय की उंगली जाती है तो नजमा की चूत और ज्यादा फैल जाती है। जय की मोटी उंगलियां और जय की जीभ ने नजमा को एक बार फिर झड़ने पर मजबूर कर दिया था, 10 मिनट में वो दूसरी बार अपना पानी छोड़ देती है।
 
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