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Adultery हसीनों का मेला वासना का रेला

जय अब अपनी दोनों उंगलियों को जो की चूत के पानी से गीली थी, नजमा के सामने ही चाटने लगता है और अपनी जीभ से नजमा की चूत पूरा चाटकर उसका पानी साफ कर देता है। जय की हर हरकत पर नजमा अपना पानी छोड़ रही थी। अब जय भी उठकर खड़ा हो जाता है और अपनी लोवर को एक झटके में लेकर सहित नीचे कर देता है।

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नजमा के सामने अब जय का तगड़ा लण्ड था, जिसे देखते ही नजमा की सांसें फूल जाती हैं और उसकी बाडी सन्न हो जाती है। नजमा के मन में एक बार अपनी चूत फटने का खयाल आता है। नजमा को जय का लण्ड राज के लण्ड से भी बड़ा और मोटा लग रहा था। जय का लण्ड 12 इंच लंबा और 4" इंच मोटा था जो की गधे के लण्ड जितना था।

अब जय आगे आता है और अपना लण्ड नजमा की चूत में सेट करता है। जैसे ही नजमा की चूत में जय का लण्ड टच होता है नजमा की चूत जय के लण्ड के गरम-गरम एहसास से ही पानी छोड़ देती है, जिससे नजमा की चूत और गीली हो जाती है। नजमा किचेन में सिकके ऊपर बैठकर नहीं चुदना चाहती थी। उसे पता था यहां पर जय का लण्ड उसकी और चूत दोनों की चीख निकाल देगा, लेकिन वो कुछ कर नहीं पा रही थी।

अब जय धीरे से अपने लण्ड के टॉप को दबाता है जिससे नजमा अपनी फी चूत को फैलाने में जान लगा देती है। जय के लण्ड का थोड़ा हिस्सा ही नजमा की चूत में जाता है तो नजमा की सिसकी निकल जाती है।

नजमा जय से कहती है- "जय जी प्लीज... अभी मत चोदो मुझे... कोई आ जाएगा। मैं आपका इतना मोटा और बड़ा लण्ड नहीं ले पाऊँगी..."

जय- क्यों साली रांड़ राज का लण्ड ले सकती है मेरा नहीं ले पाएगी?

नजमा- मैं ये नहीं कह रही की नहीं ले पाऊँगी। मैं लैंगी अपनी चूत में आपका लण्ड लेकिन अभी नहीं। अभी कोई भी आ जाएगा। आपका लण्ड मेरी चूत फाड़ देगा।

जय- अभी नहीं चुदवाएगी तो कब चुदवाएगी? रात में तेरा खसम तुझे चोदेगा और मैं अपना लण्ड हिलाऊँगा

नजमा- आज रात में आप मेरे खसम बन जाना। आप चोद लेना मझे।
 
जय नजमा की चूत में और थोड़ा दबाव डालता है, जिससे नजमा की चूत पूरी फैलने लगती हैं। और नजमा की हालत खराब होने लगती है।

नजमा- जय जी मैं पक्का रात में आपके कमरे में आ जाऊँगी, बस अभी छोड़ दीजिए।

लंड नजमा की चूत में घुस गया था। जय नजमा की चूत की कसावट से समझ जाता है की इसे यहां में सही से चोद भी नहीं पाऊँगा और रात में इसे कहां चोदूंगा सोचने लगता है। तभी फोन की घंटी सुनाई देती है। जय तरंत अपना लंड नजमा की चूत से हटा लेता है और अपनी लोक ऊपर कर लेता है और बाहर चला जाता है। नजमा भी जल्दी से अपनी लेगिंग पहन लेती हैं।

उधर राज, जय के किचेन में जाते ही शाज़िया के रूम में घुस जाता है। जहां शाज़िया अपने बेड पर बैठकर टीवी देख रही थी।

शाज़िया राज को देखते ही खड़ी हो जाती है और कहती हैं- "राज सर, आप मेरे रूम में किसलिए आए?"

राज शाज़िया की बात सुनकर हँस देता है और कहता है- "शाज़िया डालिंग में तेरी चूत मारने आया हूँ । और मेरा दोस्त जय तेरी भाभी की चूत मारने आया है। हम दोनों एक हफ्ते यही रुकेंगे और बारी-बारी से तुम ननद और भाभी की चूत और गाण्ड मारेंगे। और तेरा भाई सिर्फ तुम्हें चुदता हुआ देखेगा। समझी?"

शाज़िया को कुछ समझ में नहीं आता। तब तक राज शाज़िया के पास पहुंच जाता है और उसे धक्का देकर बेड पर गिरा देता है और एक झटके में उसकी लेगिंग को पैंटी सहित नीचे सरका देता है। शाज़िया भी समझ जाती है की राज का लंड प्यार से लेने में ही भलाई है, नहीं तो आज एक बार और मेरी चूत फट जाएगी। शाज़िया रात की चुदाई को याद करते ही गरम होने लगती है, और राज के तेज झटके उसे अपनी चूत में महसूस होने लगते हैं।

शाज़िया की नंगी गाण्ड देखकर एक बार राज सोचता है- "क्यों ना साली की आज गाण्ड मार लूँ?" फिर सोचता है की इतना टाइम नहीं है। और वो शाज़िया को पीठ के बल लिटा देता है और उसकी लेगिंग को पैटी सहित उतार कर नीचे फेंक देता है। शाज़िया उसके सामने नीचे से बिल्कुल नंगी थी। राज के पास उसके पूरे कपड़े उतारने का टाइम नहीं था। वो वैसे ही शाज़िया की टाँगें चौड़ी करके अपनी जीभ शाज़िया की चूत में डाल देता है और बहुत तेजी से उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से छेड़ने लगता हैं। फिर अपनी दो उंगलियां एक साथ शाज़िया की चुत में डाल देता है।

जिससे शाज़िया चीख पड़ती है। तभी शाज़िया रिमोट से टीवी की आवाज और बढ़ा देती है। राज 10 मिनट तक शाज़िया की चूत को चाटकर शाज़िया को झड़ा देता है। फिर अपनी पैंट उतारकर वो भी नीचे से नंगा हो जाता है और अपने लंड का टोपा शाज़िया की चुत में लगाकर एक जोर का झटका मार कर आधा लंड शाज़िया की चूत में पेल देता है। शाज़िया की चूत काफी पानी बहा चुकी थी उसकी चूत बिल्कुल गीली थी। लेकिन राज का लंड उसकी चूत के साइज में बड़ा था, इसलिए शाज़िया एक बार फिर जोर से चीखती है उसे एक बार फिर अपनी चूत में बहुत तेज दर्द हो रहा था।

राज उसकी चीख सुनकर रूक जाता है और एक हाथ उसके मुंह में रखकर एक और तेज झटका मारकर अपना पूरा लंड शाज़िया की चूत में पेल देता है। शाज़िया की आँख से आँसू आ जाते हैं। राज से एक बार चुदने के बावजूद उसकी चूतू आज फिर से फटी हुई लग रही थी। शाज़िया की चीख को इस बार राज ने अपने हाथ से दबा लिया था। कुछ देर शांत रहने के बाद राज धीरे-धीरे वेता को चोदना शुरू करता है।

अब शाज़िया का दर्द भी कम हो गया था। वो भी अपनी कमर हिलाकर राज का साथ दे रही थी। अब दोनों लय में आ गये थे। राज भी समझ रहा था की अब इसे तेज-तेज चोदना चाहिए, और वो अपनी कमर को तेजी से हिला रहा था। शाज़िया एक बार फिर आनंद की चरम सीमा पर पहुँच गई थी, वो सातवें आसमान में थी। उसे इतना मजा आ रहा था की वो अब जोर-जोर से बड़बड़ा रही थी और राज की कमर को अपने पैरों से लाक कर लेती है।

राज का पूरा लंड शाज़िया की चूत का भोसड़ा बना रहा था। हर झटके में शाज़िया अया अया कर रही थी उसकी चूत बार-बार पानी छोड़ रही थी। परे कमरे में ठप ठप और फछ.फछ की आवाज आ रही थी।

शाज़िया ने अपने दोनों हाथों से राज की शर्ट को पकड़ रखा था। शाज़िया पूरे जोश में थी। तभी राज जार से झटका मारता है और रुक जाता है। शाज़िया राज को रुका देखकर राज से कहती है- "राज सर प्लीज... चोदो ना मुझे... में झड़ने वाली है प्लीज... चोदो ना.."

राज शाज़िया से कहता है- " शाज़िया मेरी रांड, कोई ऐसा प्लान बना की मेरा दोस्त तेरी भाभी को चोद सके। और में तेरी गाण्ड मार सकू पूरी रात अपने भाई को एक रात के लिए या एक हफ्ते के लिए कहीं भेज दें या फिर तुम दोनों हमारे साथ मेरे घर चलो, जहां हम दोनों तुम दोनों की चूत और गाण्ड मार सके.."

शाज़िया को भी इस समय सिर्फ चुदाई चाहिए थी। उसे भी राज के लंड से प्यार हो गया था। वो भी राज की बात में ही कहती और उसे चोदने के लिए कहती हैं। राज भी खुश हो जाता है एक बार फिर शाज़िया की चूत का भोसड़ा बना देता है।

करीब 15 मिनट की तगड़ी चदाई के बाद राज शाज़िया से कहता है- "मेरी राह में झड़ने वाला हूँ और मैं अपना वीर्य तेरी गाण्ड के छेद में डालूँगा..."

शाज़िया भी तीसरी बार झड़ने के करीब थी। वो भी हाँ कर देती है। तभी राज और चार-पाँच झटके मारता है जिससे शाज़िया झड़ने लगती है, और शाज़िया की चूत राज के लंड को दबाने लगती है। जिससे राज का भी वीर्य निकलने लगता है। राज अपना पूरा लंड बाहर खींचकर शाज़िया की गाण्ड के छेद में लगाकर दबा देता है। जिससे शाज़िया चीख पड़ती है और राज अपने वीर्य को शाज़िया की चूत और गाण्ड में भर देता है, और शाज़िया के ऊपर ही लेट जाता है।

तभी राज को कुछ आवाज सुनाई पड़ती है तो राज तुरंत अपनी पैंट पहनकर बाहर चला जाता है, जहां उसे जय किचन में आते हुए दिखता है। राज जाकर सोफे पर बैठ जाता है। जय भी उसके पास आकर बैठ जाता है। राज के चेहरे पर हँसी थी तो वहीं जय के चेहरे पर गुस्सा ।

………………….
 
शाज़िया आज की जोरदार चुदाई से निढाल हो गई थी। वो अभी भी राज का वीर्य अपनी गाण्ड में और चूत में भरे हुए पड़ी थी। उसे बम राज की बातें याद आ रही थी और आगे के प्लान के बारे में सोच रही थी की वह भाभी को जय से और अपने आपको राज से रात भर कैसे चुदवाए?

जय और राज जैसे ही सोफे पर बैठते हैं, वैसे ही जुनैद अपने रूम से फोन पर बात करते हुए बाहर आता है। उसकी आँखों में अभी भी नींद थी। वो वैसे ही उठकर किचेन में चला जाता है, जहां नजमा चाप बना रही थी।

जय जुनैद को देखते ही खुश हो जाता है लेकिन फोन में बिजी होने के कारण जय जुनैद को नहीं रोकता। और जुनैद के आने का इंतजार करता है। किचेन में नजमा अपनी लेगिंग पहनकर चाय बना रही थी।

जुनैद किचेन में जाकर खड़ा हो जाता है और वो फोन पर किसी से रिक्वेस्ट कर रहा था- "लीज्ज... सर थोड़ा कम कर लेते तो सही था.. फिर कल मिलने के लिए बोलकर फोन काट देता है और नजमा की तरफ देखता है।

नजमा भी जुनैद की तरफ देखती और कहती है- "क्या बात हो गई? क्या काम करने के लिए बोल रहे है।?"

जुनैद नजमा को बताता है की एक असाइनमेंट मिल रहा है जिससे हमारी किश्मत बदल जाएगी। लेकिन एक प्राब्लम है वो कलही मुझे एक लाख रुपये देने पड़ेंगे उस असाइनमेंट के लिए, और 6 महीने की ट्रेनिंग के लिए भी जाना पड़ेगा। वो असाइनमेंट हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। हमें तुरंत पैसों का बंदोबस्त करना पड़ेगा.."

नजमा कहती है- "एक लाख इतनी जल्दी कैसे मनेज करेंगे? अपने अकाउंट में भी तीश चालिश हजार होंगे और घर पर भी दस हजार, बाकी के कहां से लाएंगे? अभी भी हमारे पास पचास हजार कम पड़ेंगे..."

दोनों सोच में पड़ जाते है। एक बार नजमा शाज़िया से माँगने के लिए कहती है। लेकिन जुनैद उसे मना कर देता है। तब तक नजमा की चाय बन जाती है तो जुनैद नजमा से पूछता है- "आज इतनी जल्दी चाय कैसे बना रही हो?"

नजमा कहती है- " आपने बाहर नहीं देखा क्या? राज साहब और उनके दोस्त आए हुए हैं.." और नजमा चाय लेकर बाहर आने लगती है। उसे अभी भी जय का लंड अपनी चूत में घुसता हुआ लग रहा था।

जुनैद भी नजमा के पीछे आने लगता है। जैसे ही जुनैद की नजर जय पर पड़ती है वो खुश हो जाता है और जोर से चिल्लाता है- "अरे जय सर, यहां कैसे?"

जय और राज दोनों ही जुनैद के बाप की उम्र के थे। इसलिए जुनैद उन्हें अंकल की जगह सर कहना ज्यादा पसंद करता था। जय अपनी जगह से खड़ा हो जाता है और आगे बढ़कर जुनैद को गले लगा लेता है। ये सब देखकर नजमा चकित हो जाती है और राज भी चकित हो जाता है। उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की ये एक दूसरे को कैसे जानते है?

तभी जय जुनैद से पूछता है- "क्या बात थी जुनैद तू आया और फोन पर बात करते हुए अंदर चला गया मेरी तरफ देखा भी नहीं?"

जुनैद कहता है- "कोई बात नहीं थी, बस ऐसे ही सोकर जगा था इसलिए ध्यान नहीं दे पाया..."

जय जुनैद के ऊपर और प्रेशर डालता है- "सच-सच बता कोई बात नहीं थी। अगर तू मुझे अपना अंकल समझता है तो मुझे बता दे की क्या बात है?"

जुनैद भी सोचता है की यार अगर जय जी ही मेरी मदद कर देंगे तो क्या बुरा है? वैसे भी वो बोल ही रहे है तब जुनैद सारी बात जय को बता देता है।

जय तुरंत अपनी जेब से ए.टी.एम कार्ड निकालकर देता है और उससे कहता है- "जितने पैसों की जरूरत हो निकाल लेना। और ए.टी.एम कार्ड मझे बाद में दे देना। जब तम्हारी प्राब्लम खत्म हो जाए...

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राज जुनैद को बोलता है- "ले लो यार जुनैद। वैसे भी ये पैसे हमारे किसी काम के नहीं है। हमारी तो कोई औलाद भी नहीं है। तुम्ही लोग अब हमारे अपने हो। नजमा हमारी बहू की तरह है तो तुम हमारे बेटे की तरह.."

जुनैद खुश हो जाता है, तब नजमा की तरफ देखता है और जय को बताता है- "ये मेरी पत्नी नजमा है..."

जय नजमा को बेटी कहता है और पूछता है- "नजमा बेटी कैसी हो?"

नजमा को समझ में नहीं आ रहा था। उसके मन में यही चल रहा था की- "ये दोनों मुझे चोदने के लिए ये सब कह रहे हैं, और राज ने तो मुझे चोद भी दिया है और अब जय भी जल्द ही मेरे अंदर अपना डाल देंगे। हाय रे मेरी किश्मत... मेरे पति के होते हुए भी आज मुझे चुदना पड़ेगा किसी गैर से...

नजमा का सोचता देखकर जुनैद उसे हिलाता है और सभी को चाय देने के लिए कहता है। तभी शाज़िया भी अपने रूम से बाहर आ जाती हैं। जय शाज़िया को भी एक गहरी नजर से देखकर उसकी पूरी बाडी को स्कैन कर लेता है
 
नजमा को समझ में नहीं आ रहा था। उसके मन में यही चल रहा था की- "ये दोनों मुझे चोदने के लिए ये सब कह रहे हैं, और राज ने तो मुझे चोद भी दिया है और अब जय भी जल्द ही मेरे अंदर अपना डाल देंगे। हाय रे मेरी किश्मत... मेरे पति के होते हुए भी आज मुझे चुदना पड़ेगा किसी गैर से...

नजमा का सोचता देखकर जुनैद उसे हिलाता है और सभी को चाय देने के लिए कहता है। तभी शाज़िया भी अपने रूम से बाहर आ जाती हैं। जय शाज़िया को भी एक गहरी नजर से देखकर उसकी पूरी बाडी को स्कैन कर लेता है

जुनैद चाय खत्म होने के बाद जय से कहता है- "अंकल आप तो आज यही रुकेंगे ना?"

जुनैद का अंकल कहना जय को पसंद आ रहा था। वो भी जुनैद का बेटा कहने लगता है। और यहीं पर रुकने के लिए जुनैद को कहता है।

जुनैद नजमा को जय को दूसरा कमरा दिखाने के लिए बोलता है।

राज कहता है- "ऊपर कमरे खाली हैं वही पर अइजस्ट कर दो.."

जुनैद हाँ कह देता है और नजमा को ऊपर जाकर रूम सही करने के लिए कहता है तो नजमा हाँ में सिर हिलाती है और राम की चाभियां लेने अपने रूम में जाती है।

राज जय को इशारा करता है की वो भी ऊपर चला जाए नजमा के साथ। तब जय जुनैद को नजमा के साथ जाने के लिए बोलता है, उसकी कुछ मदद करने का बोलकर नजमा के पीछे जाने लगता है।

जुनैद भी हँस देता है और कहता है- "जैसी आपकी मर्जी अंकल.."

नजमा जय को अपने पीछे आता देखकर समझ जाती है की आज तो मेरी चूत फटकर ही रहेगी।

अब नीचे शाज़िया, राज और जुनैद थे। राज और शाज़िया को जय के ऊपर जाने का पता था की वो किसलिए ऊपर गया है। बस जुनैद ही अंजान था।

शाज़िया भी राज से चुदने के बाद कुछ ज्यादा ही फ्रेश थी। वो अब जुनैद से टूर के बारे में पूछती है। वो तीनों आपस में बात करने लगते हैं।

/………………………….
 
उधर नजमा ऊपर पहुँचकर जब रूम का दरवाजा खोलती है, तभी जय नजमा को गोदी में उठा लेता है। लेकिन कमरे में कोई बैड नहीं था तो जय नजमा से पूछता है- "राज का रूम कहां है?" और नजमा को गोदी में लेकर ही राज के रूम में आ जाता है।

नजमा को राज के बेड पर लिटा देता है और रूम को गौर से देखता है तो उसे राज के बेड में नजमा की दो-तीन पैंटी पड़ी मिलती है। वो उन्हें उठाकर नजमा से पूछता है- "मेरी जान... कितनी बार चुदाई हई तुम्हारी यहा?"

नजमा जय के सवाल से शरमा जाती है।

जय नजमा के करीब आता है और उसके ऊपर ही लेट जाता है और उसके होठों को अपने होंठों में कैद कर लेता है और एक हाथ नीचं लेजाकर उसकी लेगिंग को नीचे सरका देता है, और अपनी एक उंगली नजमा की चूत में डाल देता है।

नजमा जय को मना करती है- "अभी सही टाइम नहीं है प्लीज.. मुझे जाने दो। मैं मौका मिलते ही आपके पास आ जाऊँगी..."

लेकिन जय को तो बस कैसे भी नजमा की गुलाबी चूत चाहिए थी। वो नजमा की चूत का दीवाना हो गया था। नजमा जैसी हूर की परी उसे चोदने को मिल रही थी। उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसे तो कैसे भी करके एक बार अपना लंड नजमा की चूत में डालना था।

जय की उंगली जाते ही नजमा की आ निकल जाती है। उसे पता था की वो चाहे जितना मना करे जय नहीं मानेंगे। अब वो भी जय की किसिंग का और चूत में उंगली का मजा ले रही थी। नजमा की चूतू तो पहले से जय ने गीली कर रखी थी। अब जय उठकर खड़ा हो जाता हैं और नजमा को घोड़ी बनाने के लिए कहता है।

नजमा जय को समझाती है- "प्लीज.. अभी मत चोदो। मैं आपका मसल नहीं ले पाऊँगी अभी."

लेकिन जय नजमा को घोड़ी बना देता है और उसकी चूत को किसी कुत्ते की तरह ऊपर से नीचे तक कई बार चाटता है, और अपनी जीभ चूत के छेद में डाल देता है। थोड़ी देर ऐसे ही चूत चाटने के बाद जय अपनी लोवर नीचे करके अपना लंड आजाद कर देता है और थोड़ा सा भूक अपने लंड पर लगाता है और थोड़ा धक नजमा की चूत में लगा देता है।

नजमा भी अब समझ जाती है की चूत फटने का टाइम आ गया है। नजमा डरते-डरते जय में कहती है "जय जी प्लीज़्ज़... धीरे से डालना.."
 
जय अपना लंड नजमा की गुलाबी चूत में लगाता है और नजमा की कमर को पकड़कर अपने लंड को नजमा की चूत में दबाता है। जिससे जय का टोपा नजमा की चूत में फंस जाता है। जय नजमा की गाण्ड को देख रहा था और उसकी गाण्ड के छेद को भी। जय नजमा की गाण्ड को देखकर और ज्यादा जोश में आ जाता है। नजमा की कमर का जोर से पकड़कर तेजी से अपने लंड का दबाव नजमा की चूत में डालता है। लंड का प्रेशर इतना तंज था की जय का लंड नजमा की चूत को फाइता हुआ करीब 3" इंच तक अंदर चला जाता है।

नजमा की चूत जय का मोटा लंड अंदर जाते ही पूरी फैल जाती है। जिससे नजमा की जोरदार चीख निकल जाती है, और जो नीचे बैठे थे उन्हें भी चीख सुनाई देती है। तब जुनैद उठकर ऊपर जाने लगता है तो राज उसे पकड़ लेता है।

शाज़िया कहती हैं- "राज सर, आप जाकर देखिए। मुझे लगता हैं भाभी ने कुछ देख लिया है। शायद रूम में कोई छिपकली उनके ऊपर गिर गई हो..."

राज उठकर ऊपर चला जाता है, और जुनैद सोच में पड़ जाता है। राज ऊपर पहुँचते ही अपने रूम में जाता है जहां जय अपना आधा लंड नजमा की चूत में डालकर खड़ा था। राज के आते ही जय अपना लंड नजमा की चूत से निकाल लेता है।

राज जय को कहता है- "अर्ब रुक जा साले... अभी जुनैद आकर तरी करतूत देखता तो क्या सोचता? साले तेरा लंड नजमा इतनी आसानी से अपनी चूत में नहीं ले पाएगी.."

उधार नजमा की आँखें आँसुओं से भरी थी, उसकी चूत अपने पूरे आकार में फैल गई थी। उसे बहुत तेज दर्द हो रहा था। जय के लंड निकालने के बाद भी उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने घाव में नमक डाल दिया

हो। राज को भी पता था की जुनैद कभी भी ऊपर आ सकता है। वो जय को लोवर पहनने के लिए कहता है और खुद अपनी पैंट नीचे कर देता है और अपने लंड को एक बार फिर से नजमा की चूत में सेट करता है।

नजमा समझ जाती है की राज क्या सोच रहा है? वो पहले नजमा को चोदकर उसकी चूत का छेद ढीला करना चाहता है। वो धीरे-धीरे अपना लंड नजमा की चूत में उतार देता है। राज का लंड लेने में नजमा को थोड़ा दर्द हुआ था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा मजा भी आया था।

राज नजमा को ऐसे ही पाँच मिनट तक चोदता है। जब नजमा की चूत थोड़ी ज्यादा गीली हो जाती है तो वो जय को अपने पास बुलाता है और अपना लंड बाहर निकाल लेता है और जय को अपना लंड नजमा की चूत में डालने के लिए कहता है।

नजमा आज दो लंड एक चुदाई में ले रही थी। उसकी चूत इसी उत्तेजना में पानी छोड़े जा रही थी। राज से चुदवाना अब नजमा को बहुत अच्छा लगने लगा था। जय नजमा की चूत में अपना लंड लगाता है और नजमा की कमर को पकड़कर अपना लंड नजमा की चूत में दबाने लगता है। जय का लंड नजमा की चूत की फांकों को फैलाता हुआ अंदर जाने लगता है।
 
नजमा का सोचता देखकर जुनैद उसे हिलाता है और सभी को चाय देने के लिए कहता है। तभी शाज़िया भी अपने रूम से बाहर आ जाती हैं। जय शाज़िया को भी एक गहरी नजर से देखकर उसकी पूरी बाडी को स्कैन कर लेता है

जुनैद चाय खत्म होने के बाद जय से कहता है- "अंकल आप तो आज यही रुकेंगे ना?"

जुनैद का अंकल कहना जय को पसंद आ रहा था। वो भी जुनैद का बेटा कहने लगता है। और यहीं पर रुकने के लिए जुनैद को कहता है।

जुनैद नजमा को जय को दूसरा कमरा दिखाने के लिए बोलता है।

राज कहता है- "ऊपर कमरे खाली हैं वही पर अइजस्ट कर दो.."

जुनैद हाँ कह देता है और नजमा को ऊपर जाकर रूम सही करने के लिए कहता है तो नजमा हाँ में सिर हिलाती है और राम की चाभियां लेने अपने रूम में जाती है।

राज जय को इशारा करता है की वो भी ऊपर चला जाए नजमा के साथ। तब जय जुनैद को नजमा के साथ जाने के लिए बोलता है, उसकी कुछ मदद करने का बोलकर नजमा के पीछे जाने लगता है।

जुनैद भी हँस देता है और कहता है- "जैसी आपकी मर्जी अंकल.."

नजमा जय को अपने पीछे आता देखकर समझ जाती है की आज तो मेरी चूत फटकर ही रहेगी।

अब नीचे शाज़िया, राज और जुनैद थे। राज और शाज़िया को जय के ऊपर जाने का पता था की वो किसलिए ऊपर गया है। बस जुनैद ही अंजान था।

शाज़िया भी राज से चुदने के बाद कुछ ज्यादा ही फ्रेश थी। वो अब जुनैद से टूर के बारे में पूछती है। वो तीनों आपस में बात करने लगते हैं।

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उधर नजमा ऊपर पहुँचकर जब रूम का दरवाजा खोलती है, तभी जय नजमा को गोदी में उठा लेता है। लेकिन कमरे में कोई बैड नहीं था तो जय नजमा से पूछता है- "राज का रूम कहां है?" और नजमा को गोदी में लेकर ही राज के रूम में आ जाता है।

नजमा को राज के बेड पर लिटा देता है और रूम को गौर से देखता है तो उसे राज के बेड में नजमा की दो-तीन पैंटी पड़ी मिलती है। वो उन्हें उठाकर नजमा से पूछता है- "मेरी जान... कितनी बार चुदाई हई तुम्हारी यहा?"

नजमा जय के सवाल से शरमा जाती है।

जय नजमा के करीब आता है और उसके ऊपर ही लेट जाता है और उसके होठों को अपने होंठों में कैद कर लेता है और एक हाथ नीचं लेजाकर उसकी लेगिंग को नीचे सरका देता है, और अपनी एक उंगली नजमा की चूत में डाल देता है।

नजमा जय को मना करती है- "अभी सही टाइम नहीं है प्लीज.. मुझे जाने दो। मैं मौका मिलते ही आपके पास आ जाऊँगी..."

लेकिन जय को तो बस कैसे भी नजमा की गुलाबी चूत चाहिए थी। वो नजमा की चूत का दीवाना हो गया था। नजमा जैसी हूर की परी उसे चोदने को मिल रही थी। उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसे तो कैसे भी करके एक बार अपना लंड नजमा की चूत में डालना था।

जय की उंगली जाते ही नजमा की आ निकल जाती है। उसे पता था की वो चाहे जितना मना करे जय नहीं मानेंगे। अब वो भी जय की किसिंग का और चूत में उंगली का मजा ले रही थी। नजमा की चूतू तो पहले से जय ने गीली कर रखी थी। अब जय उठकर खड़ा हो जाता हैं और नजमा को घोड़ी बनाने के लिए कहता है।
 
नजमा जय को समझाती है- "प्लीज.. अभी मत चोदो। मैं आपका मूसल नहीं ले पाऊँगी अभी."

लेकिन जय नजमा को घोड़ी बना देता है और उसकी चूत को किसी कुत्ते की तरह ऊपर से नीचे तक कई बार चाटता है, और अपनी जीभ चूत के छेद में डाल देता है। थोड़ी देर ऐसे ही चूत चाटने के बाद जय अपनी लोवर नीचे करके अपना लंड आजाद कर देता है और थोड़ा सा थूक अपने लंड पर लगाता है और थोड़ा धक्का नजमा की चूत में लगा देता है।

नजमा भी अब समझ जाती है की चूत फटने का टाइम आ गया है। नजमा डरते-डरते जय में कहती है "जय जी प्लीज़्ज़... धीरे से डालना.."

जय अपना लंड नजमा की गुलाबी चूत में लगाता है और नजमा की कमर को पकड़कर अपने लंड को नजमा की चूत में दबाता है। जिससे जय का टोपा नजमा की चूत में फंस जाता है। जय नजमा की गाण्ड को देख रहा था और उसकी गाण्ड के छेद को भी। जय नजमा की गाण्ड को देखकर और ज्यादा जोश में आ जाता है। नजमा की कमर का जोर से पकड़कर तेजी से अपने लंड का दबाव नजमा की चूत में डालता है। लंड का प्रेशर इतना तंज था की जय का लंड नजमा की चूत को फाडता हुआ करीब 3" इंच तक अंदर चला जाता है।

नजमा की चूत जय का मोटा लंड अंदर जाते ही पूरी फैल जाती है। जिससे नजमा की जोरदार चीख निकल जाती है, और जो नीचे बैठे थे उन्हें भी चीख सुनाई देती है। तब जुनैद उठकर ऊपर जाने लगता है तो राज उसे पकड़ लेता है।

शाज़िया कहती हैं- "राज सर, आप जाकर देखिए। मुझे लगता हैं भाभी ने कुछ देख लिया है। शायद रूम में कोई छिपकली उनके ऊपर गिर गई हो..."

राज उठकर ऊपर चला जाता है, और जुनैद सोच में पड़ जाता है। राज ऊपर पहुँचते ही अपने रूम में जाता है जहां जय अपना आधा लंड नजमा की चूत में डालकर खड़ा था। राज के आते ही जय अपना लंड नजमा की चूत से निकाल लेता है।
 
राज उठकर ऊपर चला जाता है, और जुनैद सोच में पड़ जाता है। राज ऊपर पहुँचते ही अपने रूम में जाता है जहां जय अपना आधा लंड नजमा की चूत में डालकर खड़ा था। राज के आते ही जय अपना लंड नजमा की चूत से निकाल लेता है।

राज जय को कहता है- "अबे रुक जा साले... अभी जुनैद आकर तेरी करतूत देखता तो क्या सोचता? साले तेरा लंड नजमा इतनी आसानी से अपनी चूत में नहीं ले पाएगी.."

उधर नजमा की आँखें आँसुओं से भरी थी, उसकी चूत अपने पूरे आकार में फैल गई थी। उसे बहुत तेज दर्द हो रहा था। जय के लंड निकालने के बाद भी उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने घाव में नमक डाल दिया हो।

राज को भी पता था की जुनैद कभी भी ऊपर आ सकता है। वो जय को लोवर पहनने के लिए कहता है और खुद अपनी पैंट नीचे कर देता है और अपने लंड को एक बार फिर से नजमा की चूत में सेट करता है।

नजमा समझ जाती है की राज क्या सोच रहा है? वो पहले नजमा को चोदकर उसकी चूत का छेद ढीला करना चाहता है। वो धीरे-धीरे अपना लंड नजमा की चूत में उतार देता है। राज का लंड लेने में नजमा को थोड़ा दर्द हुआ था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा मजा भी आया था।

राज नजमा को ऐसे ही पाँच मिनट तक चोदता है। जब नजमा की चूत थोड़ी ज्यादा गीली हो जाती है तो वो जय को अपने पास बुलाता है और अपना लंड बाहर निकाल लेता है और जय को अपना लंड नजमा की चूत में डालने के लिए कहता है।

नजमा आज दो लंड एक चुदाई में ले रही थी। उसकी चूत इसी उत्तेजना में पानी छोड़े जा रही थी। राज से चुदवाना अब नजमा को बहुत अच्छा लगने लगा था। जय नजमा की चूत में अपना लंड लगाता है और नजमा की कमर को पकड़कर अपना लंड नजमा की चूत में दबाने लगता है। जय का लंड नजमा की चूत की फांकों को फैलाता हुआ अंदर जाने लगता है।

नजमा दोनों हाथों से बेडशीट को पकड़ लेती है और अपने दाँत पीसने लगती है। जय का लंड नजमा की चूत को चीरता हुआ उसकी गहराई में दाखिल हो रहा था। नजमा की चूत अपनी तय सीमा तक पूरी फैल चुकी थी। जय का आधा लंड नजमा की चूत में था। अब राज जय को इशारा करके पूरा डालने को कहता है।

जय एक जोर का झटका मारकर अपना 10" इंच तक लंड नजमा की चूत में पेल देता है। एक बार फिर नजमा की चीख निकल जाती है। जय तुरंत अपना लंड बाहर खींच लेता है और नजमा की लेगिंग ऊपर कर देता है, और अपने लंड को भी लोवर में कैद कर देता है।

राज तुरंत रुम से बाहर जाता है। जय नजमा की पैंटी को अपनी जेब में डाल लेता है और नजमा को बही राज के बेड पर लिटा देता है।

तब जुनैद राज के रूम में आ जाता है तो उसे नजमा की आँखों में आँस दिखाई देते हैं। तब वो जय से पूछता है- "क्या हुआ अंकल?"

जय- "बेटा नजमा सीढ़ी पर चढ़कर सफाई कर रही थी कमरे में, तभी छिपकली आ गई और ये डरकर सीदी से नीचे गिर गई। जिससे इसकी कमर में और बक में मोच आ गई तो में नजमा को उठाकर यहां ले आया..'

नजमा जय की बात सुनकर मन ही मन जय को गाली देती है- "साले बुड्ढे को मना कर रही थी की अभी मत चोद, लेकिन नहीं माना। अब देखो कैसे बहाने बना रहा है? कसम से इसने मेरी चूत फाड़ दी है। इसका लंड तो राज के लंड में भी बहुत बड़ा है। अगर मैं आज इनके चक्कर में फंस गई तो कसम से सुबह तक मेरी चूत और गाण्ड दोनों एक हो जाएंगी.."

जुनैद नजमा को शांत लेटा देखकर नजमा को हिलाता है और उसके दर्द के बारे में पूछता है।

तब नजमा- "दर्द कम हो रहा है..." बोलकर जुनैद को नीचे जाने के लिए कहती हैं।

जुनैद नजमा को बोलता है- "मैं यहां पर काम कर लूँगा तम नीचे चली जाओ..."

नजमा जुनैद से कहती है- "जय अंकल और राज साहब है ना यहां? ये लोग मेरे साथ मिलकर यहां की सफाई कर लेंगे और जय जी का कमरा भी सेट कर लेंगे..."

जुनैद नजमा की तरफ देखता है तो जय भी जुनैद को कहता है- "बेटा तुम जाओं और नजमा को भी साथ ले जाओ। मैं और राज मिलकर रूम साफ कर लेंगे." ये कहना जय की चाल का हिस्सा था उसे पता था ऐसा कहने पर जुनैद नजमा को साथ नहीं ले जाएगा।

तभी जय जुनैद को एक बात और कहता है- "तम जाकर ए.टी.एम. से पैसे भी निकाल लो तुम्हें कल पैसे भी देने हैं..."

जुनैद को जय की बात सही लगती है और वो नजमा को सही से काम करने के लिए बोलकर चला जाता है।
 
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