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Guest
मैं हिचकिचाते हुये झुकी और दीदी के दाहिने निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी, बारी-बारी दोनों निप्पल चूसकर ये जानने की कोशिश करने लगी की मर्यों का सबसे पसंदीदा खिलोना ये क्यों है?
दीदी- “अनिल्ल्ल
क्या कर रहे हो? निशा मैं मर जाऊँगी छोड़ो मुझे..." दीदी पागलों की तरह कराह रही थी।
मैं और जीजू उनकी बात पर ध्यान दिए बगैर हमारा काम कर रहे थे। थोड़ी देर बाद दीदी झड़ गई। झड़ते वक़्त दीदी ने मेरे बाल पकड़कर इतनी जोर से खींचे की उनके साथ मैं भी कराहने लगी। इस वक़्त रूम के अंदर का जो नजारा था वो देखकर कामदेव भी शर्मा जाएं, और उन्हें जीजू की तकदीर से ईर्षा आए ऐसा हसीन नजारा था। मैं और दीदी घुटनों के बल बैठी थी और जीजू लण्ड पकड़कर हमारे सामने खड़े थे।
ब्लू-मूवी जैसा दृश्य था, मैंने लण्ड पकड़कर सहलाया और मैंने उनके और नजदीक जाकर दीदी से पूछा- “दीदी आपको इसमें से किस चीज की गंध आ रही है?”
दीदी भी मेरी तरह थोड़ा नजदीक आई- “पेशाब और पसीने की..”
दीदी की बात सुनने के बाद मैंने जीजू के लण्ड को मुँह में ले लिया और तीन-चार बार कुल्फी की तरह चूसा, चारों तरफ से अच्छी तरह चूसकर मेरे थूक से लण्ड को गीला कर दिया- “अब बताओ किस चीज की गंध आ रही है?”
मेरे कहने पर दीदी फिर से नजदीक आई और बोली- “समझ में नहीं आ रहा...”
मैं- “कैसी आ रही है?"
दीदी- “अब पहले जितनी बुरी नहीं लग रही, अच्छी लग रही है...” दीदी ने कहा।
मैंने मेरी जबान निकाली और दीदी की तरफ देखते हुये लण्ड के सुपाड़े को चाटा और फिर आगे के छेद को सहलाया।
अब दीदी की आँखों में अलग सी तरस दिखने लगी थी।
मैं- “दीदी आप भी लो ना...” कहकर मैंने लण्ड को दीदी के हाथ में दे दिया।
दीदी ने लण्ड पकड़कर मेरी ही तरह उसके सुपाड़े को चूसा, थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद दीदी लण्ड को ज्यादा अंदर लेने लगी, और मैं खड़ी होकर जीजू को किस करने लगी। जीजू ने अपने दोनों हाथों से दीदी का सिर पकड़ लिया था और बड़े ही चाव से दीदी से अपना लण्ड चुसवा रहे थे। जीजू ने मुझे फिर से बैठने को कहा।
मैंने नीचे बैठकर देखा तो दीदी जीजू का पूरा लण्ड मुँह में लेकर फिर बाहर निकालती थी।
जीजू- “दोनों एक साथ चूसो...” कहकर जीजू ने दीदी के मुँह से लण्ड निकालकर अपने हाथ में पकड़ लिया और खड़े हो गये।
फिर एक तरफ से मैं और दूसरे तरफ से दीदी, हम दोनों एक साथ जीजू के लण्ड को चाटने लगीं। जीजू का स्टेमिना गजब का था, उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थीं, पर वो आउट हो जायें ऐसा लग नहीं रहा था।
मैं- “दीदी आप लण्ड के इस छेद को चाटो, जिससे जीजू की मस्ती बढ़ जाएगी...”
मेरी बात सुनकर दीदी जीजू के लण्ड के छेद को सहलाने लगी।
मैंने पूछा- “मजा आ रहा है ना दीदी?”
दीदी- “हाँ निशा। तेरे जीजू के लण्ड को खा जाने का मन हो रहा है...” दीदी ने लण्ड को काटते हुये कहा।
मैंने ऊपर जीजू की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे होंठ फड़फड़ाकर बैंक्स कहा।
मैं और दीदी फिर से पहले की तरह जीजू के लण्ड के अलग-अलग साइड को चाटने लगीं। मुझे अब डर लग रहा था की जीजू कहीं झड़ न जायें, नहीं तो हमारा खेल सिमट जाएगा। तभी अचानक जीजू पीछे हो गये और हम दोनों के बाल पकड़कर हमारे चेहरे एक दूसरे से चिपका दिए। मेरी और दीदी की जबान जीजू के लण्ड पे थी जो ऐसा करते ही एक दूसरे की जबान से मिल गई।
जीजू- “किस करो...” जीजू ने कहा।
मैं और दीदी एक दूसरे की जीभ से जीभ सहलाने लगीं। मैंने थोड़ा आगे होकर दीदी के सिर को पकड़ लिया और उनके मुँह में मैंने मेरी जीभ डालकर पूरे मुँह का जायजा ले लिया और फिर बाहर निकालकर उनके होंठों को मेरे होंठों की गिरफ्त में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने इरते हुये दीदी को छोड़ा। डर था की दीदी को बुरा लगा होगा, लेकिन दीदी के मुँह पे मुश्कुराहट देखकर वो डर गायब हो गया। दीदी ने टांगों को चौड़ी । करके जीजू की कमर को पकड़ लिया था, और जीजू अपने चूतड़ों को आगे-पीछे करके दीदी की चुदाई कर रहे थे। वो बीच-बीच में झुक के दीदी का चुंबन कर रहे थे।
दीदी- “अनिल्ल्ल
क्या कर रहे हो? निशा मैं मर जाऊँगी छोड़ो मुझे..." दीदी पागलों की तरह कराह रही थी।
मैं और जीजू उनकी बात पर ध्यान दिए बगैर हमारा काम कर रहे थे। थोड़ी देर बाद दीदी झड़ गई। झड़ते वक़्त दीदी ने मेरे बाल पकड़कर इतनी जोर से खींचे की उनके साथ मैं भी कराहने लगी। इस वक़्त रूम के अंदर का जो नजारा था वो देखकर कामदेव भी शर्मा जाएं, और उन्हें जीजू की तकदीर से ईर्षा आए ऐसा हसीन नजारा था। मैं और दीदी घुटनों के बल बैठी थी और जीजू लण्ड पकड़कर हमारे सामने खड़े थे।
ब्लू-मूवी जैसा दृश्य था, मैंने लण्ड पकड़कर सहलाया और मैंने उनके और नजदीक जाकर दीदी से पूछा- “दीदी आपको इसमें से किस चीज की गंध आ रही है?”
दीदी भी मेरी तरह थोड़ा नजदीक आई- “पेशाब और पसीने की..”
दीदी की बात सुनने के बाद मैंने जीजू के लण्ड को मुँह में ले लिया और तीन-चार बार कुल्फी की तरह चूसा, चारों तरफ से अच्छी तरह चूसकर मेरे थूक से लण्ड को गीला कर दिया- “अब बताओ किस चीज की गंध आ रही है?”
मेरे कहने पर दीदी फिर से नजदीक आई और बोली- “समझ में नहीं आ रहा...”
मैं- “कैसी आ रही है?"
दीदी- “अब पहले जितनी बुरी नहीं लग रही, अच्छी लग रही है...” दीदी ने कहा।
मैंने मेरी जबान निकाली और दीदी की तरफ देखते हुये लण्ड के सुपाड़े को चाटा और फिर आगे के छेद को सहलाया।
अब दीदी की आँखों में अलग सी तरस दिखने लगी थी।
मैं- “दीदी आप भी लो ना...” कहकर मैंने लण्ड को दीदी के हाथ में दे दिया।
दीदी ने लण्ड पकड़कर मेरी ही तरह उसके सुपाड़े को चूसा, थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद दीदी लण्ड को ज्यादा अंदर लेने लगी, और मैं खड़ी होकर जीजू को किस करने लगी। जीजू ने अपने दोनों हाथों से दीदी का सिर पकड़ लिया था और बड़े ही चाव से दीदी से अपना लण्ड चुसवा रहे थे। जीजू ने मुझे फिर से बैठने को कहा।
मैंने नीचे बैठकर देखा तो दीदी जीजू का पूरा लण्ड मुँह में लेकर फिर बाहर निकालती थी।
जीजू- “दोनों एक साथ चूसो...” कहकर जीजू ने दीदी के मुँह से लण्ड निकालकर अपने हाथ में पकड़ लिया और खड़े हो गये।
फिर एक तरफ से मैं और दूसरे तरफ से दीदी, हम दोनों एक साथ जीजू के लण्ड को चाटने लगीं। जीजू का स्टेमिना गजब का था, उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थीं, पर वो आउट हो जायें ऐसा लग नहीं रहा था।
मैं- “दीदी आप लण्ड के इस छेद को चाटो, जिससे जीजू की मस्ती बढ़ जाएगी...”
मेरी बात सुनकर दीदी जीजू के लण्ड के छेद को सहलाने लगी।
मैंने पूछा- “मजा आ रहा है ना दीदी?”
दीदी- “हाँ निशा। तेरे जीजू के लण्ड को खा जाने का मन हो रहा है...” दीदी ने लण्ड को काटते हुये कहा।
मैंने ऊपर जीजू की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे होंठ फड़फड़ाकर बैंक्स कहा।
मैं और दीदी फिर से पहले की तरह जीजू के लण्ड के अलग-अलग साइड को चाटने लगीं। मुझे अब डर लग रहा था की जीजू कहीं झड़ न जायें, नहीं तो हमारा खेल सिमट जाएगा। तभी अचानक जीजू पीछे हो गये और हम दोनों के बाल पकड़कर हमारे चेहरे एक दूसरे से चिपका दिए। मेरी और दीदी की जबान जीजू के लण्ड पे थी जो ऐसा करते ही एक दूसरे की जबान से मिल गई।
जीजू- “किस करो...” जीजू ने कहा।
मैं और दीदी एक दूसरे की जीभ से जीभ सहलाने लगीं। मैंने थोड़ा आगे होकर दीदी के सिर को पकड़ लिया और उनके मुँह में मैंने मेरी जीभ डालकर पूरे मुँह का जायजा ले लिया और फिर बाहर निकालकर उनके होंठों को मेरे होंठों की गिरफ्त में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने इरते हुये दीदी को छोड़ा। डर था की दीदी को बुरा लगा होगा, लेकिन दीदी के मुँह पे मुश्कुराहट देखकर वो डर गायब हो गया। दीदी ने टांगों को चौड़ी । करके जीजू की कमर को पकड़ लिया था, और जीजू अपने चूतड़ों को आगे-पीछे करके दीदी की चुदाई कर रहे थे। वो बीच-बीच में झुक के दीदी का चुंबन कर रहे थे।