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Adultery Chudasi (चुदासी )

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* * *

अहमदाबाद से आए मुझे 15 दिन हो गये थे। फिर से मेरी जिंदगी में मुझे सेक्स की कमी महसूस होने लगी थी, फिर से मैं अपनी संतुष्टि नीरव की उंगली से करने लगी थी। पंद्रह दिन में मैंने कई बार नीरव को ‘मी आंड मम्मी हास्पिटल' जाकर मेरी रिपोर्ट लाने को कहा, पर वो हर रोज भूल ही जाता है। कई बार तो मैं उससे लड़ भी पड़ी और कहा- “रिपोर्ट लाओगे तो ही क्या प्राब्लम है वो मालूम पड़ेगा ना और तो ही हम दवा चालू करा सकेंगे..."

मेरी बात सुनकर नीरव हमेशा एक ही बात कहता- “मेरी जानू को कोई प्राब्लम नहीं हो सकती, शाम को आफिस से घर आते वक़्त हास्पिटल बंद हो जाती है इसलिए भूल जाता हूँ...”

मैं उसकी बात सुनकर मुँह फुलाकर कहती हैं- “तुम्हें चाहिए की नहीं चाहिए पर मुझे अब बच्चा चाहिए.”

मेरी बात सुनकर वो हँसकर कहता- “इतना बड़ा बच्चा तो है तुम्हारे सामने..."

नीरव की बात सुनकर मैं हँस पड़ती और फिर दो दिन तक रिपोर्ट याद करना भूल जाती।

* * * * * * * * *
 
मैंने पीछे देखा तो मालूम पड़ा की इस तरह से मुझे पकड़ने वाला महेश था, तो मैं जोर से चिल्लाई- “ये क्या बद-तमीजी है...”

महेश- “इसे बदतमीजी नहीं प्यार कहते हैं...” महेश ने मेरे उरोजों को दबाते हुये कहा।

मैं- “बहुत प्यार उमड़ रहा हो तो अपनी बीवी से करो, समझे...” मैंने अपना मुँह नीचे करके उसके हाथ को काटते हुये कहा।

मेरी उस हरकत से वो गुस्सा हो गया और जोर से मेरे उरोजों को दबाकर मेरे कान में फुसफुसाया- “हरामजादी रामू के नीचे लेट जाती हो और मेरे सामने नखरे दिखा रही हो..."

उसकी बात सुनकर मैं कुछ पल के लिए डर गई पर मैंने तुरंत अपने आपको संभाल लिया- “ये क्या बक रहे हो? कौन रामू?”

महेश- “इतनी जल्दी भूल गई... मादरचोद हर रोज तो चखती थी उसका लण्ड लेकर...”

मैं- “तमीज से बात कर और मुझे छोड़..” मैं रामू के बारे में कोई बात नहीं करना चाहती थी।

महेश- “चुपचाप बेडरूम में चल, नहीं तो पूरे बिल्डिंग में तेरे और रामू के बारे में बता दूंगा और फिर तो पोलिस भी आ जाएगी तेरे घर...” इतना कहकर महेश ने मुझे छोड़ दिया और फिर बोला- “जिस तरफ जाना चाहती हो। जा सकती हो, लेकिन जो भी कदम उठाना अंजाम के बारे में सोचकर उठाना...”

बात तो सही थी उसकी। रामू के बारे में पता चलते ही मेरी पूरी जिंदगी में उथल-पुथल मच सकती थी। नीरव मुझे एक सेकेंड घर में रहने नहीं देगा, और मम्मी-पापा तो पागल हो जाएंगे और ऊपर से पोलिस का टेन्शन

और मैं पहली बार तो पराए मर्द से चुद नहीं रही हूँ, अब तो गिनती भी भूल गई हूँ और कई दिन से मैं भी तो प्यासी हूँ। मैं बेडरूम की तरफ चल दी।

मुझे बेडरूम की तरफ जाते देखकर महेश हँसने लगा- “मुझे मालूम था की तुम मान जाओगी, क्योंकि तुम रांड़ नंबर एक हो...”

मुझे उसका बात करने तरीका अच्छा नहीं लगा, पर मैं कुछ बोली नहीं। वो मुझे दीवार से सटाकर मेरे होंठ । चूसने लगा। उसने मुझे ब्लैकमेल करके सेक्स के लिए तैयार किया था, इसलिए मैंने अपनी तरफ से उसे कोई रिस्पोन्स नहीं दिया। फिर वो मेरी साड़ी निकालने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया- “मेरे पास इतना वक़्त नहीं है जो भी करना है फटाफट करो...”

महेश- “साली रांड नखरे बहुत करती है। कोई बात नहीं, चल अपनी साड़ी उठाकर बेड पर लेट जा...” महेश ने मुझे बेड पर धक्का देते हुये कहा।

मैं मेरी साड़ी को कमर तक उठाकर बेड पर लेट गई।

महेश भी बेड पर आ गया और मेरे पैरों को सहलाकर पैंटी निकालने लगा, कहा- “रामू के लण्ड से चुदने के बाद भी तेरी चूत इतनी टाइट कैसे है?”

मेरी पैंटी निकालते ही महेश मेरी चूत को अपनी उंगली से सहलाने लगा।

मैं कोई जवाब दिए बगैर आँखें बंद करके उसकी उंगली का मजा लेने लगी।
 
महेश- “बोल ना रंडी...” महेश ने इस बार जोर से मेरी चूत में उंगली घुसेड़ दी थी।

मैं- “क्या?”

महेश- “रामू का बड़ा लण्ड लेने के बाद भी तेरी चूत इतनी टाइट क्यों है?”

क्या कहूँ मैं इस हरामी आदमी को की बच्चा आने तक चूत टाइट ही होती है, वो ये बात जानता भी होगा पर मुझसे गंदी बातें करके मजा लेना चाहता था वो। मैंने कहा- “तुझे कैसे मालूम की रामू का लण्ड बड़ा है?” मैंने उससे ऐसा सवाल कर दिया जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं था।

महेश- “वो... वो... हम ए-एक बार..” महेश बोलते हुये अटकने लगा।

मैं- “तुम हकलाने क्यों लगे?” मैंने उससे उपहास भरे स्वर में पूछा।

महेश कोई जवाब दिए बगैर मेरा ब्लाउज खोलकर मेरी ब्रा के कप को ऊपर करके मेरे निप्पल चूसने लगा।

मैंने महेश के बालों का सहलाया और फिर पूछा- “बोल ना महेश, तुझे रामू के लण्ड की साइज कैसे मालूम?"

मेरी बात से चिढ़कर महेश ने मेरे निप्पल को काट दिया, तो मैंने उसकी पीठ पे हाथ मारकर कहा- “प्यार से करो, अब मैं कहीं भाग जाने वाली नहीं हूँ...” ।

फिर महेश कुछ देर तक मेरे दोनों स्तनों को प्यार से बारी-बारी चूसने लगा। मैं मस्त होकर उसकी पीठ और बाल को बारी-बारी सहलाने लगी। कुछ ही पलों में मेरी चूत गीली हो गई, तो मैंने मेरा हाथ नीचे किया और उसके लण्ड को पैंट के साथ सहलाने लगी। उसने निप्पल को छोड़कर मेरी तरफ देखा तो मैंने मुश्कुराकर उसके बाल खींचे। वो ऊपर की तरफ खिंचता चला आया और मेरे होंठों को उसके होंठों के बीच लेकर चूसने लगा। मैं भी पूरी तरह से उसे सहयोग देने लगी। वो मेरे ऊपर के होंठ चूसता तो मैं उसका नीचे का होंट चूसती और वो मेरा नीचे का होंठ चूसता तो मैं उसका ऊपर का होंठ चूसती।

कुछ देर बाद वो मेरी जांघों तक नीचे झुका, उसने मेरी चूत पे किस ली तो मेरे मुँह से मादक सिसकारी निकल गई- “आह्ह...”

महेश- “तुम जितनी मासूम और भोली दिखती हो, उतनी ही शातिर हो बेड पर...” पहली बार महेश ने मुझसे ठीक तरह से बात की।

मैंने उसका मुँह मेरी चूत पर दबाया तो वो उसकी जबान निकालकर मेरी चूत चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं। मदहोश होने लगी, मेरे मुँह से अनगिनत सिसकारियां निकलने लगीं। मुझे लग रहा था की मैं अभी छूट जाऊँगी लेकिन छूट नहीं पा रही थी। मुझसे अब मेरे बदन की तपन सहन नहीं हो रही थी। मैंने फिर से उसके बालों को खींचा।

महेश ने फिर से मेरी तरफ देखा- क्या है?

मैं- “अब जल्दी करो...”

महेश- “क्या जल्दी करूं?”

मैं समझ गई कि महेश मुझसे क्या बुलवाना चाहता है, जो मेरे लिए नहीं बात नहीं थी- “जल्दी चुदाई करो...”

महेश- “क्यों... क्या जल्दी है?”

मैं- “मुझसे अब रहा नहीं जा रहा, जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में डालो...” मैंने पूरी तरह निर्लज्ज होकर कहा।

महेश ने उठकर उसकी पैंट और अंडरवेर निकाल दी, मैंने उसके लण्ड की तरफ देखा, कोई पाँच-छे इंच का होगा।

महेश- “मेरी कुतिया, तू यहां रहने आई तब से मैं तेरे नाम की मूठ मार रहा हूँ...” महेश फिर से मेरे ऊपर झुकते हुये बोला।
 
महेश ने उठकर उसकी पैंट और अंडरवेर निकाल दी, मैंने उसके लण्ड की तरफ देखा, कोई पाँच-छे इंच का होगा।

महेश- “मेरी कुतिया, तू यहां रहने आई तब से मैं तेरे नाम की मूठ मार रहा हूँ...” महेश फिर से मेरे ऊपर झुकते हुये बोला।

मैंने उसे मेरी बाहों के घेरे में ले लिया, वो फिर से मुझे किस करने लगा। मैंने मेरा हाथ नीचे किया और लण्ड पकड़ लिया जो बहुत ही सख़्त और गरम हो गया था। मैंने उसे मेरी चूत के द्वार पर रख दिया। महेश धक्का देने की बजाय लण्ड से मेरी चूत के बाहरी भाग को सहलाने लगा।

महेश- “तुझे होटेल बुलाने के फोन आते थे, याद है?”

मैं- “हाँ... कहता था की इतने बजे होटेल आ जाओ..”

महेश- “वो मैं करता था रंडी...” कहकर महेश ने धीरे से धक्का देकर मेरी चूत में उसका आधा लण्ड घुसेड़ दिया।

मैं- “क्यों करते थे?"

महेश- “मैं कोशिश मारता था की कहीं तुम मेरी बात में इंटरेस्ट लो, और बात करो तो मेरी बात बन जाय। लेकिन तुम मादरचोद हर बार फोन काट देती थी...” महेश ने अब धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।

मैं- “ऐसे थोड़ी कोई लड़की आ जाती है...” मैंने मेरे पैरों को उठाकर उसकी कमर पे रख दिए।

महेश- “आज तो आ गई ना कुतिया तू मेरे नीचे... मुझे शक था पर रामू बता ही नहीं रहा था तेरे और उसके संबधों के बारे में। पोलिस की धमकी दी तब माना..”

मैं- “रामू कहां है, तुझे मालूम है?”

महेश- “हाँ... मालूम है..” महेश अब जोर से धक्के देने लगा था।

मैं भी मेरी गाण्ड ऊपर उठा-उठाकर मस्ती से चुदवा रही थी, हम दोनों के मुँह से गरम सांसे निकल रही थीं, जो एक दूसरे को और गरम कर रही थीं।

महेश- “रामू ने बताया तब ही तू आई ना अपनी माँ चुदवाने...”

महेश की बात सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया की बात-बात पे गाली, मैंने उसके सीने पर मेरे दोनों हाथ रखे और जोर से धक्का दिया, तो उसका लण्ड मेरी चूत में से बाहर निकल गया।

महेश- “साली, हरामजादी, मादरचोद, कुतिया, धक्का क्यों दे रही हो?” महेश ने मेरे गले को पकड़ते हुये कहा।

मैं- “प्यार से नहीं कर सकते, गाली क्यों दे रहे हो?”

महेश- “तेरी जैसी रंडी को गली ना दें तो पूजा करूं क्या?”

मैं- “देख करना है तो प्यार से कर ले और गाली मत दे...” मैंने अपने आपको शांत करके उसे अपने ऊपर खींचते हुये कहा। क्योंकि उसकी बात सुनकर मेरे दिमाग में जो गर्मी बढ़ गई थी उससे ज्यादा गर्मी इस वक़्त मेरे बदन

में थी, जिसे वोही ठंडा करने वाला था।

महेश- “कुतिया को चुदना भी है और नखरे भी कर रही है...” महेश मेरे ऊपर झुकते हुये बोला।
 
मैंने उसकी बात को अनसुना करके उसका लण्ड पकड़ा और मेरी चूत पे अडजस्ट करने लगी।

महेश- “अब नखरे किए ना तो तेरी माँ चोद दूंगा...”

इस बार की गली ने मुझे पूरी तरह झिझोड़कर रख दिया, मेरे हाथ में उसका लण्ड था, जिसे मैंने पूरी ताकत से दबाया। वो चीखते हुये मेरे हाथ को झटका मारकर मेरे हाथ से उसका लण्ड छुड़ाकर खड़ा हो गया। मैं भी खड़ी होकर मेरे कपड़े ठीक करने लगी।

मुझे कपड़े ठीक करते देखकर महेश गुर्राया- “तुम भूल गई शायद रामू को..."

मैंने मुश्कुराते हुये उसके लण्ड की तरफ नजर की, वो मुझ गया था- “मुझे नहीं लगता कि अब तुम कुछ घंटों तक कर सकते हो?”

मेरी बात सुनकर महेश और गुस्सा हो गया- “तुम जानती हो की तुम यहां से बाहर निकली तो मैं पूरी बिल्डिंग में सबको रामू के बारे में बता दूंगा..."

मैं- “तुम क्या बताओगे? मैं बताऊँगी सबको की तुम रामू को आज भी मिलते हो, वो कहां छुपा है तुम जानते हो और तुम मुझे ब्लैंक काल करते थे उसकी रिपोर्ट दे देंगी पोलिस में...” मैंने बेडरूम में से बाहर निकलते हुये कहा।

महेश नंगा ही दौड़ता हुवा बाहर आया, पीछे से मुझे पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पे उसका लण्ड घिसने लगा।

मैंने मेरी कलाई उसके पेट पर मारी और उसकी पकड़ से छूट गई तो वो जल्दी से दो कदम जोर से चलकर मेरे सामने आ गया- “साली मुझे धमकी दे रही है, अब तो तेरे पूरे खानदान को चोद दूंगा...”

मैं- “तुम नहीं सुधरोगे?" मैंने मुश्कुराते हुये उसकी दो टांगों की बीच में जोर से लात मारी।

मुझे जितना मारना था उससे भी जोर से लग गया था शायद, वो अपना लण्ड पकड़कर जमीन पे बैठ गया। वो चिल्लाना चाहता था पर मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, दर्द से उसकी आँखों से पानी निकल रहा था।
 
मुझे जितना मारना था उससे भी जोर से लग गया था शायद, वो अपना लण्ड पकड़कर जमीन पे बैठ गया। वो चिल्लाना चाहता था पर मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, दर्द से उसकी आँखों से पानी निकल रहा था।

मैंने उसके घर से निकलते हुये कहा- “तुम्हें रामू के लण्ड की साइज किसने बताई? तुम्हारी बीवी संगीता ने? या फिर तुम खुद उसका लण्ड लेते थे?”

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मेरी शादी को सात साल हो गये हैं, शादी के एकाध साल के अंदर हमें बच्चा हो जाता तो आज छे साल का होता और मुझे उससे फुरसत ही नहीं मिलती। मैंने अपने आपसे कहा- “अभी देर नहीं हुई है निशा, रात को नीरव के आते ही उससे बात करो और पूछो की वो रिपोर्ट का क्या हुवा? और जल्दी से बेबी ला दो तो तुम्हारी जिंदगी फिर से बदल सकती है..." और रात को नीरव से बात करने की ठान ली।

खाना खाने के बाद मैंने नीरव से पूछा- “नीरव तुम वो रिपोर्ट लाए की नहीं?”

नीरव- “कौन सी रिपोर्ट?”

नीरव के सवाल से मैं गुस्सा हो गई, और कहा- “अब तुम ये भी भूल गये की कौन से रिपोर्ट तुम्हें लानी थी? अहमदाबाद जाने से पहले मैं माँ बन सकती हूँ की नहीं उसके लिए मैंने जो टेस्ट करवाए थे उसके रिपोर्ट? मैं तुम्हें हर रोज लाने को कहती हूँ और तुम भूल जाते हो वो रिपोर्ट..”

नीरव- “मैं मजाक कर रहा था, यार मुझे याद है रिपोर्ट और कल ले आऊँगा..”

मैं- “मजाक तो मेरा बन चुका है। लोग हमेशा माँ को बांझ कहते हैं, बाप को नहीं..” बोलते-बोलते मेरी आवाज भारी हो गई और आँखों में पानी भर आया।

*****

* * * * *

एक दिन मैंने नीरव से कहा- “नीरव, मैं काम करना चाहती हूँ...”

नीरव- “पागल हो गई हो क्या, तुम्हें कौन काम देगा? तुम सिर्फ एक साल कालेज गई हो...”

मैं- “कोई भी काम करूंगी, कोई तो देगा...”

नीरव- “पापा नहीं करने देगे, उनकी इज्ज़त का तो खयाल करो...”

मैं- “वाह मेरे पातिदेव वाह.. तुम्हारे पापा हमें घर खर्च के लिए भी कम पैसे दें तो उनकी इज़्ज़त मेरी नजरों से कितनी कम हो गई है वो तुम्हें मालूम है और मैं बाहर काम पे जाऊँ तो दुनियां के सामने उनकी इज्ज़त कम होगी वो तुम्हें मंजूर नहीं होगा। इंसान की इज्ज़त पहले घर में होनी चाहिए बाद में बाहर...”

नीरव- “निशा मुझे आगे बहस नहीं चाहिए, तुम बाहर काम भी नहीं करोगी और हमें बच्चा भी नहीं चाहिए." इतना कहकर नीरव बेडरूम के अंदर चला गया।

पहली बार नीरव ने मुझसे इस तरह बात की थी, इसके पहले मुझे याद नहीं की वो कभी मुझ पर गुस्सा हुवा हो। मुझे रोना आ गया। मैं रोती हुई सारा काम निपटाकर बेडरूम में गई और नीरव से दूसरी तरफ मुँह करके

सो गई।

थोड़ी देर बाद नीरव ने मुझे पीछे से सटकर, आगे हाथ करके मेरे स्तन को सहलाते हुये बोला- “आई एम सारी, निशु डार्लिंग...”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया, वो मेरे स्तनों को ऐसे ही सहलाते हुये मेरी प्रतिक्रिया की राह देखने लगा। लेकिन मैंने कोई रिस्पोन्स नहीं दिया तो थोड़ी देर बाद उसने मुझे उसकी तरफ खींचना चाहा तो मैंने उसके हाथ से मेरे स्तन को छुड़ाकर उसके हाथ को झटक दिया और बेड पर थोड़ा आगे सरक गई।

नीरव- “जा नीचे जाकर सो जा...” नीरव फिर से चिढ़ गया।

और मैं उसकी बात सुनकर जोर से रोने लगी।

नीरव उठकर मेरी तरफ आया- “रियली सारी निशु...”

और मेरी साइड में थोड़ी सी जगह थी वहीं पर लेट गया, उस तरफ जगह कम थी तो मुझे लगा की वो गिर जाएगा तो मैं थोड़ा पीछे सरक गई। जब तक मेरी सिसकियां बंद नहीं हुई तब तक नीरव ने मेरे मुँह को उसके सीने पर दबाकर रखा और फिर मेरा चेहरा ऊपर उठाया- “आई लव यू...” कहकर मेरे होंठों पर उसके होंठ रख दिए।

मैंने एक-दो बार मेरे होंठ उसके होंठों से छुड़ाने की कोशिश की पर उसने मेरा मुँह सख्ती से पकड़ रखा था और कुछ ही देर में मैं भी सारी बातें भूलकर उसके होंठ चूसने लगी। उस रात नीरव ने मुझे अविस्मरणीय आनंद दिया। उसने मेरी चूत को भी चाटा जो उसे पसंद नहीं। शायद ये उसका सारी कहने का नया तरीका था, या वो कुछ दिन से मेरी सेक्स के प्रति रूचि देखकर इस तरह से मुझे मना रहा था।

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दूसरे दिन दोपहर को चन्दा, जिसने मुझे धोखे से महेश के पास भेजा था, काम पर आई। मैंने सोचा था की वो अब कभी नहीं आएगी। मैंने मन ही मन उसकी हिम्मत की दाद दी, काम खतम करके वो निकल ही रही थी कि मैंने उसे रोका- “चन्दा..."

मेरे टोकने से चन्दा रुक गई और मैं सोफे पर बैठी थी वहां आई।

मैंने पूछा- “कल वहां संगीता नहीं थी, तुम जानती थी ना?”

चन्दा ने कोई जवाब दिए बगैर अपना सिर झुका दिया, तो मैंने मेरा सवाल अलग तरीके से दोहराया- “कल वहां महेश था, तुम जानती थी ना...”

चन्दा- “मुझे माफ कर दो भाभी...”

क्या कहा था उसने?” मैंने कड़क लब्जों में कहा।

चन्दा- “हमें यहां से निकाल देने की धमकी दी थी...”

मैं- “और तू मान गई...”

चन्दा- "तो क्या करती भाभी? मेरे पति को यहां चौकीदार की नौकरी मिल गई है, ऊपर से रहने की जगह और मैं भी महीना भर काम करके दो हजार कम लेती हैं। यहां से निकाल देंगे तो कहा जाएंगे हम?”

मैं- “तो उसके लिए तूने मेरी इज़्ज़त दांव पे लगा दी...”

चन्दा- “पहले तो मैंने ना बोला था भाभी, पर बाद में मैं उसकी बातों में आ गई। मुझे माफ कर दो, आइन्दा मैं ऐसा किसी के साथ नहीं करूंगी...”

तीन-चार बार चन्दा ने माफी मांगी तो मैं थोड़ी शांत हो गई तब मेरे दिमाग में एक नई बात आई- “एक बात पूंछू, सच-सच बताना.."

चन्दा- “पूछिये भाभी...”

मैं- “तेरे साथ करता है, महेश?”

चन्दा- “हाँ..” इतना बोलकर चन्दा ने अपना सिर झुका दिया।

मैं- “तेरे पति को मालूम पड़ेगा तो?”

चन्दा- “पड़ेगा तो वो कुछ नहीं करेगा भाभी, दिन को शराब पीकर पड़ा रहता है और रात को चौकीदारी करता है, कभी मुझे नहीं देखता। शादी के शुरुआती दिनों में ठीक था, अब तो कभी नहीं आता मेरे पास..”

चन्दा की बातों ने मेरा एक भ्रम तोड़ दिया। मैं हमेशा मनती थी की लंबे, चौड़े मर्द सेक्स में ज्यादा इंटरेस्ट लेते। हैं, लेकिन चन्दा की बातों ने वो बात गलत साबित कर दी थी। चन्दा के जाने के बाद मैं सोचने लगी की अब मुझे महेश से डरने की कोई जरूरत नहीं है। वो मेरे और रामू के बारे में सबको बताएगा तो मेरे पास उसकी और चन्दा की बात है।

आज भी रात को नीरव पूरे मूड में था, बेडरूम में जाते ही उसने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगा और फिर मेरे कपड़े निकालकर मेरी चूचियों को चूसने लगा। फिर नीचे झुक गया और मेरी चूत चाटने लगा। कुछ देर बाद मुझे लगा की मैं आज भी कल की तरह ऐसे ही झड़ जाऊँगी तो मैंने उसे अपने ऊपर खींचा

और अंदर डालने को कहा।

लेकिन वो हर रोज की तरह तुरंत झड़ गया और कुछ ही देर में सो गया और मुझे बहुत देर बाद नींद आई।

* *

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चन्दा बाहर काम कर रही थी और मैं बेडरूम में सो रही थी, कुछ दिनों से रात को जल्दी से नींद नहीं आ रही थी, जिस वजह से मैं बहुत थक जाती हूँ।

तभी करण आया- “हाय मेरी जान... कैसी है तू?”

मैं- “मैं और तेरी जान... कुछ दिन पहले तो तुम कह रहे थे की मैं तो सबकी जान लेती हूँ...” मैं करण को देखकर खुश तो बहुत हुई थी, लेकिन उसके साथ हुई अंतिम मुलाकात की बात को याद करके बोली।

करण- “छोड़ पुरानी बात को, तुम पे जान छिड़कने वालों की तादात तो हर रोज बढ़ती ही जा रही है...”

मैं- “मुझ पर... कौन?”

करण- “महेश परमार, तुम्हारा नया आशिक...”

मैं- “उस हलकट का नाम मत लो मेरे सामने...”

करण- “क्यों क्या खराबी है उसमें?” करण ने मेरी आँखों में आँख डालकर पूछा।

मैं- “वो... वो अच्छा आदमी नहीं है...” मुझे कोई जवाब नहीं सूझा तो मेरे दिमाग में जो आया वो बोल गई।

करण- “महेश अच्छा आदमी नहीं है तो क्या रामू अच्छा आदमी था? अंकल और अब्दुल अच्छे थे?” करण ने मुझे ताने मारते हुये कहा।

मैं- “तुम यहां से जाओ करण, मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती...” मैंने चिढ़कर कहा।

करण- "क्यों चला जाऊँ मैं? क्यों तुम मुझसे बात नहीं करना चाहती?”

मैं- "मेरी मर्जी..."

करण- “मर्जी नहीं निशा, तुम्हारे पास मेरी बात का कोई जवाब नहीं इसलिए तुम मुझे जाने को बोल रही हो..”

मैं- “आज मैं जो हूँ तुम्हारी वजह से हूँ करण, पहली बार तुमने मुझे बहकाया था."

करण- “अपनी गलतियों को दूसरों पे थोपना कोई तुमसे सीखे, कभी मेरी वजह से, कभी नीरव की वजह से...”

मैं- “तो मैं कहां गलत कह रही हूँ करण? नीरव मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहा था, तभी तुमने मुझे अपनी बातों में फँसाया और फिर मैं... मैं...”

करण- “फिर क्या बताओ?"

मैं- “तुम यहां से जाओ करण, मुझे तुमसे बात नहीं करनी...” मैंने ऊंची आवाज में कहा।

करण- “क्यों नीरव जैसे भोले भाले इंसान को धोखा दे रही हो? क्या बिगाड़ा है उसने तेरा? वो तुमसे प्यार करता है वो गलती है उसकी? सेक्स ही जीवन है क्या? प्यार के कोई मायने नहीं?”

मैं- “तुम यहां से चले जाओ, करण..” मैंने मेरा मुँह नीचे करके दोनों हाथ के अंगूठे से सिर को दबाते हुये कहा।

करण- “सच हमेशा कड़वा ही होता है, निशा और सच ये है की तुम्हें वेश्या कहना भी वेश्या के लिए गाली होगा..."

मैं- “चुप्प... चुप हो जाओ तुम, निकलो यहां से नहीं तो मैं तुम्हें मार देंगी...” मैं चीखने लगी, रोती हुई जोरों से चीखने लगी।

चन्दा- “भाभी, भाभी क्या हुवा?”

करण की जगह चन्दा की आवाज आई तो मैंने आँखें खोलकर उसकी तरफ देखा।

चन्दा- “क्या हुवा भाभी, आप अचानक नींद में क्यों चीखने लगी?”

अब तक मैं समझ गई थी की आज भी हर रोज की तरह करण मेरे सपनों में आया था- "कुछ नहीं, तुम जाओ...” मेरा बदन पसीने से तरबतर था और मैं बोलते हुये हॉफ रही थी।
 
चन्दा- “हमने उस दिन बहुत बड़ा पाप कर दिया, भाभी हमें भगवान भी माफ नहीं करेगा..”

चन्दा से मेरी हालत देखी नहीं जा रही थी। लेकिन वो क्या बोल रही थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था। मैं । कुछ बोलूं उसके पहले वो खड़ी हुई और किचन में जाकर पानी ले आई और मुझे दिया, और पूछा- “भाभी आपको सपनों में महेश आया था ना? वो आप पर जबरदस्ती कर रहा था ना? हमें माफ कर दीजिए, हमने उस दिन आपको वहां भेजा इसलिए आपको इस तरह के गलत-गलत खयाल आ रहे हैं..." इस बार उसकी बात मेरी समझ में आ गई।

मैं कुछ बोले बगैर चन्दा के मासूम चेहरे को देखने लगी। अच्छे कपड़े पहन ले तो कोई उसे देखकर वो कामवाली है' ऐसा नहीं कह सकता। मैंने कहा- “मेरी एक बात मनोगी, चन्दा?”

चन्दा- “कहिए, भाभी...

मैं- “तुम यहां से चली जाओ, तुम्हारे पति को बोलो की वो कहीं और नौकरी ढूंढ़ ले...”

चन्दा- “ऐसा क्यों कह रही हो भाभी? हमने अपनी गलती मान ली ना..” चन्दा मेरी बात सुनकर चिंतित स्वर में बोली।

मैं- “मैं उसके लिए नहीं कह रही, मैं तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ..” मैंने उसे समझाते हुये कहा।

चन्दा- “हमारे भले के लिए? हमारी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा...”

मैं- “तुम तुम्हारे पति और महेश के सिवा और किसी के साथ सोई हो?”

मैंने अचानक ही एक ऐसा सवाल उससे पूछ लिया की वो दो पल के लिए मुझे देखती ही रही, फिर सिर हिलाकर उसने 'ना' बोला।

मैं- “कितनी बार सोई हो महेश के साथ?”

मेरे सवाल का जवाब देने के लिए उसने अपना हाथ आगे किया और अपनी पाँच उंगलियां दिखाई।

मैं- “अभी भी कोई देरी नहीं हुई है चन्दा, लेकिन कुछ वक़्त और निकल जाएगा तो तुम्हारी वासना इतनी बढ़ जाएगी की तुम कोई भी मर्द के साथ हमबिस्तर होने के लिए तैयार हो जाओगी..”

चन्दा- “लेकिन भाभी..."

मैं- “तुम यहां रहोगी तब तक किसी ना किसी तरीके से तुझे फुसलाकर महेश तुम्हारे साथ सोता रहेगा और धीरेधीरे तुम्हें उसका चस्का लग जाएगा और फिर तो तुम किसी के साथ भी सोने के लिए हमेशा तैयार ही रहोगी...”

चन्दा- “लेकिन भाभी हमारा पति भी तो हमारा खयाल नहीं रखता...'
 
मैं- “ये हम औरतों का सबसे बड़ा वहम है। हम हमेशा मानते हैं की हमारा पति हमसे प्यार नहीं करता, लेकिन उसके लिए कुछ हद तक हम भी जिम्मेदार होते हैं। तुम अपना दाम्पत्य जीवन बचाना चाहती हो तो मेरी बात मानो, और यहां से कहीं और चली जाओ...” मैं बोलते हुये ध्यान से चन्दा का चेहरा देख रही थी, उसके चेहरे के बदलते भाव से ऐसा लग रहा था की उसके दिमाग में मेरी बातें बैठ रही थी- “और अपने बच्चों के बारे में भी तो सोचो, उन्हें बड़े होकर तुम्हारे बारे में पता चलेगा तब उन पर क्या असर होगा? कभी सोचा है तूने..” ।

चन्दा- “भाभी, हमें अच्छी नौकरी नहीं मिलती है, तब तक हम यहां रहते हैं। लेकिन आज के बाद हम महेश को छूने भी नहीं देंगे हमारे बदन को...”

मैं- “ये भी ठीक है, यहां रहते-रहते नौकरी ढूँढ़ते रहना, मिल जाय तब छोड़ देना...”

चन्दा- “आप बहुत अच्छी हैं भाभी, हम जा रहे हैं...” कहकर चन्दा बेडरूम में से निकल गई।

मैंने एक लंबी सांस ली और चन्दा को सुनाई न दे इतना धीरे से बोली- “मैं अच्छी नहीं हूँ चन्दा, मैं तो हर रोज भगवान से एक ही दुआ करती हूँ की कोई और लड़की मेरी तरह चुदासी न बन जाए...”

चन्दा को मैंने महेश के साथ संबध ना रखने के बारे में समझाया था, तब उसने मुझे जिस तरह से प्रतिभाव दिए थे, जो देखकर मुझे लगा था की अब वो महेश के सामने थूकेगी भी नहीं। लेकिन ये उसका बैडलक मानो

या मेरे अंतर की आवाज। दूसरे ही दिन, रात को दस बजे नीचे से महेश की चीखने की आवाज आई जो सुनकर मैं बाल्कनी में गई, वहां नीरव पहले से ही मोजूद था।

मैंने नीचे की तरफ देखा तो माधो (चन्दा का पति) महेश को मारते हुये गालियां दे रहा था- “मादरचोद, तेरी । बीवी को चोदू कुत्ते...” माधो महेश के मुँह पर मार रहा था और महेश अपने हाथों को ऊपर करके उसकी मार से बचने की नाकाम कोशिश कर रहा था।

माधो- “शक तो मुझे कई दिन से था, लेकिन आज रंगे हाथ पकड़ा। साले बहनचोद मेरी पीठ पीछे मेरी बीवी के साथ रंगरेलियां मनाता है...” माधो ने महेश को कालर से पकड़कर मुँह पर मुक्का मारते हुये कहा।

नीरव- “सच कहता होगा चौकीदार, महेश हर जगह मुँह मारता फिरता है...” नीरव ने मुझसे कहा।।

मैंने देखा की बिल्डिंग के ज्यादातर लोग अपनी बाल्कनी में आ चुके थे, और तमाशा देख रहे थे।

माधो- “तेरी बीवी को आने दे भोसड़ी के, तेरे सामने चोदूंगा नहीं तो मेरा नाम माधो नहीं..." माधो ने महेश के पेट में लात मारते हुये कहा।

लात शायद बहुत जोरों से पड़ी थी। महेश चीखता हुवा तीन-चार फुट दूर जाकर गिरा और फिर वो लड़खड़ाता हुवा उठा और बाहर की तरफ भाग गया। थोड़ी दूर तक माधो भी उसके पीछे भागा और फिर वापस आया।

अब तक मेरे ध्यान में चन्दा नहीं आई थी, लेकिन माधो को एक कोने की तरफ जाते देखकर मैंने उस तरफ देखा तो अपने दोनों पैरों के बीच अपना मुँह छिपाए चन्दा जमीन पर बैठी हुई थी।

माधो ने चन्दा के पास जाकर उसे भी लात मारी, लात उसके हाथ पर लगी। चन्दा घुटनों के बीच मुँह छिपाकर बैठी ना होती तो लात शायद उसके पेट पर लगती। चन्दा जो अभी तक धीरे-धीरे रो रही थी, वो जोरों से चीखती हुई रोने लगी। मेरे खयाल से वो मार के दर्द से रो नहीं रही थी, पर इतने लोगों के बीच उसकी इज्ज़त उछल रही थी ये सोच-सोचकर रो रही थी।

माधो ने चन्दा को बालों से पकड़कर खड़ा किया और कंपाउंड के बीच लेजाकर धक्का देकर पटका और फिर वो चन्दा पर थूका- “कुतिया, तेरा यार तो भाग गया, लेकिन तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा...”

चन्दा अभी भी सिसकती हुई रो रही थी। उसने माधो के पैर पकड़ लिए और माफी मांगने लगी।

माधो- “मत दिखा अपना स्त्री चरित्र, मैं बहुत पहचानता हूँ तुमको। आज तो तुझे मार ही दूंगा...” कहते हुये माधो सीढियां के पीछे गया।

मैं- “नीरव, माधो के सिर पर खून सवार है, कुछ करो...” मैंने चन्दा की जगह अपने आपको सोचते हुये नीरव को कहा।

तभी माधो लकड़ी का इंडा लेकर आया।

मैं- “माधो मार डालेगा चन्दा को, चलो नीरव नीचे चलते हैं..” मैंने नीरव से कहा।

नीरव- “तो क्या गलत कर रहा है माधो? अपनी बीवी को दूसरों की बाहों में देखकर कोई भी आदमी यही करेगा...”

नीरव की बात सुनकर मेरा पूरा बदन कांप उठा। नीचे डंडा लेकर खड़ा माधो मुझे नीरव दिखने लगा।

मैं- “कोई तो नीचे उतरो, उसको पकड़ो... नहीं तो वो मार डालेगा अपनी बीवी को.." नीरव ने कोई रिस्पोन्स नहीं दिया तो मैंने दूसरे लोगों को जो अपनी-अपनी बाल्कनी में खड़े थे, उनको चिल्लाकर नीचे उतारने को कहा।

लेकिन सभी को सिर्फ तमाशा देखने में ही इंटरेस्ट था।
 
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