मैं- “ये हम औरतों का सबसे बड़ा वहम है। हम हमेशा मानते हैं की हमारा पति हमसे प्यार नहीं करता, लेकिन उसके लिए कुछ हद तक हम भी जिम्मेदार होते हैं। तुम अपना दाम्पत्य जीवन बचाना चाहती हो तो मेरी बात मानो, और यहां से कहीं और चली जाओ...” मैं बोलते हुये ध्यान से चन्दा का चेहरा देख रही थी, उसके चेहरे के बदलते भाव से ऐसा लग रहा था की उसके दिमाग में मेरी बातें बैठ रही थी- “और अपने बच्चों के बारे में भी तो सोचो, उन्हें बड़े होकर तुम्हारे बारे में पता चलेगा तब उन पर क्या असर होगा? कभी सोचा है तूने..” ।
चन्दा- “भाभी, हमें अच्छी नौकरी नहीं मिलती है, तब तक हम यहां रहते हैं। लेकिन आज के बाद हम महेश को छूने भी नहीं देंगे हमारे बदन को...”
मैं- “ये भी ठीक है, यहां रहते-रहते नौकरी ढूँढ़ते रहना, मिल जाय तब छोड़ देना...”
चन्दा- “आप बहुत अच्छी हैं भाभी, हम जा रहे हैं...” कहकर चन्दा बेडरूम में से निकल गई।
मैंने एक लंबी सांस ली और चन्दा को सुनाई न दे इतना धीरे से बोली- “मैं अच्छी नहीं हूँ चन्दा, मैं तो हर रोज भगवान से एक ही दुआ करती हूँ की कोई और लड़की मेरी तरह चुदासी न बन जाए...”
चन्दा को मैंने महेश के साथ संबध ना रखने के बारे में समझाया था, तब उसने मुझे जिस तरह से प्रतिभाव दिए थे, जो देखकर मुझे लगा था की अब वो महेश के सामने थूकेगी भी नहीं। लेकिन ये उसका बैडलक मानो
या मेरे अंतर की आवाज। दूसरे ही दिन, रात को दस बजे नीचे से महेश की चीखने की आवाज आई जो सुनकर मैं बाल्कनी में गई, वहां नीरव पहले से ही मोजूद था।
मैंने नीचे की तरफ देखा तो माधो (चन्दा का पति) महेश को मारते हुये गालियां दे रहा था- “मादरचोद, तेरी । बीवी को चोदू कुत्ते...” माधो महेश के मुँह पर मार रहा था और महेश अपने हाथों को ऊपर करके उसकी मार से बचने की नाकाम कोशिश कर रहा था।
माधो- “शक तो मुझे कई दिन से था, लेकिन आज रंगे हाथ पकड़ा। साले बहनचोद मेरी पीठ पीछे मेरी बीवी के साथ रंगरेलियां मनाता है...” माधो ने महेश को कालर से पकड़कर मुँह पर मुक्का मारते हुये कहा।
नीरव- “सच कहता होगा चौकीदार, महेश हर जगह मुँह मारता फिरता है...” नीरव ने मुझसे कहा।।
मैंने देखा की बिल्डिंग के ज्यादातर लोग अपनी बाल्कनी में आ चुके थे, और तमाशा देख रहे थे।
माधो- “तेरी बीवी को आने दे भोसड़ी के, तेरे सामने चोदूंगा नहीं तो मेरा नाम माधो नहीं..." माधो ने महेश के पेट में लात मारते हुये कहा।
लात शायद बहुत जोरों से पड़ी थी। महेश चीखता हुवा तीन-चार फुट दूर जाकर गिरा और फिर वो लड़खड़ाता हुवा उठा और बाहर की तरफ भाग गया। थोड़ी दूर तक माधो भी उसके पीछे भागा और फिर वापस आया।
अब तक मेरे ध्यान में चन्दा नहीं आई थी, लेकिन माधो को एक कोने की तरफ जाते देखकर मैंने उस तरफ देखा तो अपने दोनों पैरों के बीच अपना मुँह छिपाए चन्दा जमीन पर बैठी हुई थी।
माधो ने चन्दा के पास जाकर उसे भी लात मारी, लात उसके हाथ पर लगी। चन्दा घुटनों के बीच मुँह छिपाकर बैठी ना होती तो लात शायद उसके पेट पर लगती। चन्दा जो अभी तक धीरे-धीरे रो रही थी, वो जोरों से चीखती हुई रोने लगी। मेरे खयाल से वो मार के दर्द से रो नहीं रही थी, पर इतने लोगों के बीच उसकी इज्ज़त उछल रही थी ये सोच-सोचकर रो रही थी।
माधो ने चन्दा को बालों से पकड़कर खड़ा किया और कंपाउंड के बीच लेजाकर धक्का देकर पटका और फिर वो चन्दा पर थूका- “कुतिया, तेरा यार तो भाग गया, लेकिन तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा...”
चन्दा अभी भी सिसकती हुई रो रही थी। उसने माधो के पैर पकड़ लिए और माफी मांगने लगी।
माधो- “मत दिखा अपना स्त्री चरित्र, मैं बहुत पहचानता हूँ तुमको। आज तो तुझे मार ही दूंगा...” कहते हुये माधो सीढियां के पीछे गया।
मैं- “नीरव, माधो के सिर पर खून सवार है, कुछ करो...” मैंने चन्दा की जगह अपने आपको सोचते हुये नीरव को कहा।
तभी माधो लकड़ी का इंडा लेकर आया।
मैं- “माधो मार डालेगा चन्दा को, चलो नीरव नीचे चलते हैं..” मैंने नीरव से कहा।
नीरव- “तो क्या गलत कर रहा है माधो? अपनी बीवी को दूसरों की बाहों में देखकर कोई भी आदमी यही करेगा...”
नीरव की बात सुनकर मेरा पूरा बदन कांप उठा। नीचे डंडा लेकर खड़ा माधो मुझे नीरव दिखने लगा।
मैं- “कोई तो नीचे उतरो, उसको पकड़ो... नहीं तो वो मार डालेगा अपनी बीवी को.." नीरव ने कोई रिस्पोन्स नहीं दिया तो मैंने दूसरे लोगों को जो अपनी-अपनी बाल्कनी में खड़े थे, उनको चिल्लाकर नीचे उतारने को कहा।
लेकिन सभी को सिर्फ तमाशा देखने में ही इंटरेस्ट था।