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दूसरी तरफ रीत को मलिक का फोन आता है।
रीत- हेलो।
मलिक- ऐसा कर घर की बैक साइड आ जा, जहाँ पर भैंसें बँधी हुई हैं।
रीत- क्यों?
मलिक- मैंने एक जरूरी बात करनी है।
रीत- गंदे मुझे पता है, क्या बात करनी है तूने?
मलिक- ओहह... मेरे बाबू, सच में बात करनी है।
रीत- ओके, मैं आती हूँ।
मलिक वहां खड़ा होता है, जहा भैंसें होती हैं। उस जगह पर दोपहर को कोई भी नहीं आता था। शादी के काम में सारे बंदे बहुत बिजी थे। थोड़ी देर को रीत उधर आ जाती है। रीत ने लोवर और एक टी-शर्ट डाली हुई थी।
रीत मलिक के पास जाकर बोली- “हाँ जी बोलो क्या बात करनी है.."
मलिक सेक्सी सी स्माइल करके रीत को खींचकर अपने सीने से लगा देता है। मलिक अपना हाथ रीत के चूतरों पर ले जाता है। जैसे ही रीत के चूतरों पर मलिक का हाथ जाता है, वो कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है, और बोली।
रीत- हाए प्लीज़्ज़... मलिक यहाँ कुछ ना करो, घर का मामला है। कोई भी कहीं से भी आ सकता है।
पर मलिक रीत की एक बात नहीं मानता और वो रीत के होंठों पर अपने होंठ रखा देता है। रीत ना ना ही करती रह जाती है। मलिक अपना हाथ रीत की टी-शर्ट में लेकर जाता है। आज रीत ने ब्रा नहीं डाली हुई थी, इसलिए मलिक के हाथों में रीत के नंगी चूचियां आ जाती हैं। जैसे ही मलिक हल्का सा उसकी चूचियां मसलता है, तभी रीत कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है। फिर रीत जोर-जोर से उसके होंठों के सने लगी।
इतने में उन्हें बाल्टी की आवाज सुनाई देती है, वो दोनों एकदम घबरा कर एक दूसरे से अलग हो जाते हैं। पर जब वो दोनों देखते है, की बाल्टी तो भैंस ने हिलाई है। तो रीत ये देखकर जल्दी से वहां से भाग जाती है। जाते जाते वो मलिक को जीभ निकालकर चिढ़ाती देती है।
मलिक भी देखकर हँसते हुए कहता है- “साली आज फिर निकल गई हाथ से...”
इतने में रात होने लगती है, सभी खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे होते है। 11:00 बजे चुके थे, चरणजीत किचेन में बर्तन साफ कर रही थी।
सुखजीत उसके पास आती है और बोलती है- “क्या बात है बहनजी अभी तक सोए नहीं आप?"
चरणजीत- नहीं ये थोड़ा काम है, ये बर्तन साफ करने के बाद देखती हूँ।
सुखजीत- बहनजी आज जो घर में हुआ, उस बात का किसी को पता तो नहीं चला?
चरणजीत- नहीं बहनजी घर में कोई नहीं था।
सुखजीत मोढ़ा मारकर बोली- “चलिए बहनजी?"
चरणजीत हेरनी से बोली- कहां बहनजी?
सुखजीत- मोटर पर बहनजी।
चरणजीत- हाए नहीं बहनजी मैंने नहीं जाना।
***** *****
रीत- हेलो।
मलिक- ऐसा कर घर की बैक साइड आ जा, जहाँ पर भैंसें बँधी हुई हैं।
रीत- क्यों?
मलिक- मैंने एक जरूरी बात करनी है।
रीत- गंदे मुझे पता है, क्या बात करनी है तूने?
मलिक- ओहह... मेरे बाबू, सच में बात करनी है।
रीत- ओके, मैं आती हूँ।
मलिक वहां खड़ा होता है, जहा भैंसें होती हैं। उस जगह पर दोपहर को कोई भी नहीं आता था। शादी के काम में सारे बंदे बहुत बिजी थे। थोड़ी देर को रीत उधर आ जाती है। रीत ने लोवर और एक टी-शर्ट डाली हुई थी।
रीत मलिक के पास जाकर बोली- “हाँ जी बोलो क्या बात करनी है.."
मलिक सेक्सी सी स्माइल करके रीत को खींचकर अपने सीने से लगा देता है। मलिक अपना हाथ रीत के चूतरों पर ले जाता है। जैसे ही रीत के चूतरों पर मलिक का हाथ जाता है, वो कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है, और बोली।
रीत- हाए प्लीज़्ज़... मलिक यहाँ कुछ ना करो, घर का मामला है। कोई भी कहीं से भी आ सकता है।
पर मलिक रीत की एक बात नहीं मानता और वो रीत के होंठों पर अपने होंठ रखा देता है। रीत ना ना ही करती रह जाती है। मलिक अपना हाथ रीत की टी-शर्ट में लेकर जाता है। आज रीत ने ब्रा नहीं डाली हुई थी, इसलिए मलिक के हाथों में रीत के नंगी चूचियां आ जाती हैं। जैसे ही मलिक हल्का सा उसकी चूचियां मसलता है, तभी रीत कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है। फिर रीत जोर-जोर से उसके होंठों के सने लगी।
इतने में उन्हें बाल्टी की आवाज सुनाई देती है, वो दोनों एकदम घबरा कर एक दूसरे से अलग हो जाते हैं। पर जब वो दोनों देखते है, की बाल्टी तो भैंस ने हिलाई है। तो रीत ये देखकर जल्दी से वहां से भाग जाती है। जाते जाते वो मलिक को जीभ निकालकर चिढ़ाती देती है।
मलिक भी देखकर हँसते हुए कहता है- “साली आज फिर निकल गई हाथ से...”
इतने में रात होने लगती है, सभी खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे होते है। 11:00 बजे चुके थे, चरणजीत किचेन में बर्तन साफ कर रही थी।
सुखजीत उसके पास आती है और बोलती है- “क्या बात है बहनजी अभी तक सोए नहीं आप?"
चरणजीत- नहीं ये थोड़ा काम है, ये बर्तन साफ करने के बाद देखती हूँ।
सुखजीत- बहनजी आज जो घर में हुआ, उस बात का किसी को पता तो नहीं चला?
चरणजीत- नहीं बहनजी घर में कोई नहीं था।
सुखजीत मोढ़ा मारकर बोली- “चलिए बहनजी?"
चरणजीत हेरनी से बोली- कहां बहनजी?
सुखजीत- मोटर पर बहनजी।
चरणजीत- हाए नहीं बहनजी मैंने नहीं जाना।
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