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ज्ञानपत और भी वाइल्ड हो रहा था और भारी आवाज में कहा- “तुमसे और सभ्य? बिल्कुल भी नहीं। तुमको तो बहुत सारे आदमियों को एक साथ मिलकर चोदना चाहिए, रंडी हो तुम। एक गैर मर्द को अपने घर में घुसाकर चुदवा रही हो और सभ्य होने को बोल रही हो? तेरा तो रेप करना चाहिए मिलकर, गैंग रेप करना चाहिए तुझ जैसी को। तुमको कड़क चुदाई चाहिये, सख्ती करके चोदना चाहिए तुझे और मुझे ऐसे ही चोदना पसंद है और वैसे ही चोदूंगा तुझे अब साली रांड.”
ज्ञानपत ने अदिति की बाहों को मोड़कर उसको सोफे पर धकेला, तब तक वो बिल्कुल नंगा हो चुका था और
अदिति भी नंगी थी। अदिति तड़प उठी जिस तरह से ज्ञानपत ने उसके बाजू को मोड़ा। क्योंकी अदिति को दर्द हुआ, अदिति तकरीबन रोते हुए उसको हाथ को छोड़ने को कहा ज्ञानपत से, क्योंकी दुख रहे थे जिस तरह से उसने सख्ती से मोड़ा थे बाहों को।
मगर ज्ञानपत ने उसकी आवाज को अनसुनी करते हुए अदिति की गाण्ड पर अपने दाँतों को गड़ाया और जोर से दाँत काटा अदिति की गाण्ड पर। लगता था एक टुकड़ा गोश्त काट देगा वहाँ से। दर्द से अदिति जोर से चिल्लाई। फिर ज्ञानपत ने अदिति को थप्पड़ मारते हुए आवाज नहीं निकालने का आदेश दिया धमकाते हुए, वरना वो और ज्यादा दर्द देगा उसको।
अदिति रोने लगी और उसको छोड़ने की बिनती की।
ज्ञानपत ने अदिति की गाण्ड पर बहुत सारे तमाचे मारे। जोर से कई बार मारता गया की उसकी गाण्ड लाल हो गई, उसकी उंगलियों के निशान दिखने लगे थे अदिति के चूतड़ों पर। अदिति रोती गई और ज्ञानपत के चेहरे में खौफ से देखने लगी और सोचा की इस बार शायद वो किसी गलत आदमी के हाथ लग गई है। अदिति ने उसको जाने को कहा, मिन्नतें की अदिति ने और वो नहीं माना।
अदिति ने तब कहा- “मैं अपने पति को बताऊँगी और पोलिस को रिपोर्ट करूंगी..."
ज्ञानपत ने कहा- “अगर तुमने पोलिस को कुछ बताया तो मैं कहूँगा की तुमने मुझको यहां चुपके से बुलाया था अपने पति के जाने के बाद, और उस रात को मुझसे चुदवाने आई थी और हम दोनों अक्सर चुदाई करते हैं उस रात के बाद से। तुम्हारा पति और अपार्टमेंट के सभी लोगों को पता चल जाएगा की तू एक रंडी है, तू चाहती है की ऐसा हो? तो ठीक है पोलिस को बताना फिर देखना मैं क्या करता हूँ..”
अदिति खुद को आज मायूस महसूस कर रही थी, बेसहारा महसूस कर रही थी अपने आपको उस वक़्त। उसने कभी भी नहीं सोचा था की एक दिन किसी ऐसे आदमी से भी उसकी मुलाकात होगी। ज्ञानपत वाग्लेंट और वाइल्ड था। अदिति की समझ में आ गई की वो कुछ भी नहीं कर पाएगी और ज्ञानपत को वैसे ही करने देना पड़ेगा, जैसे वो करना चाहता है और अदिति को खामोश होकर सब सहना पड़ेगा और कोई चारा नहीं था।
ज्ञानपत ने सख्ती से अदिति का सिर दबाते हुए उसके मुँह को अपने लण्ड तक किया और चूसने को कहा। अदिति मना नहीं कर पाई। उसने अपने लण्ड को अदिति के मुँह के अंदर जोर से धक्का देते हुए ठूँसा और मुँह में चोदने लगा। अदिति के गले की गहराई में उसका लण्ड घुसता गया। ज्ञानपत बहुत जोरों से धक्का देते हुए अंदर-बाहर किए जा रहा था अपने लण्ड को, अदिति खाँसने लगी, उसकी साँस उखड़ने लगी, नाक बहने लगी आँखों से आँसू बहने लगे। फिर भी ज्ञानपत नहीं रुक रहा था, धक्के पे धक्का दिए जा रहा था। जब अदिति चूसना बंद कर दी तो ज्ञानपत ने एक जोर से थप्पड़ मारा अदिति के गाल पर।
गाल पर थप्पड़ मारने से अदिति की गाल बिल्कुल लाल हो गई, एक बार एक उल्टा थप्पड़ मारा ज्ञानपत ने अदिति को जिससे उसके नीचे के होंठ के कोने से थोड़ा सा खून निकल आया। ज्ञानपत ने उसके खून को चूसा, इतना चूसा जब तक खून बहना बंद नहीं हुआ। अदिति के होंठों को चूसते वक्त ज्ञानपत अपनी उंगली को
अदिति की चूत में पेल रहा था, अपनी तीन उंगलियां चूत के अंदर डालकर घुमा रहा था।
कुछ देर बाद ज्ञानपत ने अदिति को सोफे पर पेट के बल लेटाया, फिर उसको झुकाया और अपने लण्ड को उसकी गाण्ड में ठूसने की कोशिश किया। अदिति ने मना किया, उसको धक्का दिया और खुद को बचाने की कोशिश की। मगर मर्द वाली ताकत कहाँ से लाती अदिति? बूढ़ा ताकतवर था और अदिति को कुछ इस तरह से ब्लाक किया की अदिति का निकलना नामुमकिन था।
अदिति की गाण्ड ज्ञानपत के सामने था जिस तरह से ब्लाक किया था उससे बूढ़े ने, अपने अंगूठे को गाण्ड की छेद में घुसेड़ा, फिर दो दूसरी उंगलियों को घुसाया और घुमाया अंदर करके। अदिति ने चिल्लाकर निकालने को कहा। मगर वो पेलता गया और आखीर में थूक लगाया अपने लण्ड पर और लण्ड को अदिति की गाण्ड की गहराई में पेल दिया और धक्का देना शुरू कर दिया।
मगर अदिति हिलने लगी, उसको नहीं करने दे रही थी, अपनी कमर इस तरह हिला रही थी की तीन बार ज्ञानपत का लण्ड बाहर निकल गया, और जब वापस डालना चाहा तो लण्ड नरम हो गया, नहीं घस रहा था। उसने लण्ड को गाण्ड के बीच रगड़ा, चूत पर भी मसला पर नरम ही रहा। अदिति ने उसके चेहरे में देखा, आँसू भरे नैनों से फिर उसके लण्ड को देखा। फिर से ज्ञानपत के चेहरे में देखा, और वो समझ गई की वो नहीं कर पाएगा क्योंकी उसका लण्ड नरम हो गया था।
अदिति ने चिल्लाते हुए कहा- “बूढा सांड़... खड़ा ही नहीं कर पा रहे हो और चोदना चाहते हो? निकलो यहाँ से वरना जान से मार डालूंगी तुम्हें, कर नहीं पाते हो इसलिए अपना गुस्सा मुझपर निकाल रहे हो, गेट थे हेल आउट आफ हियर वरना मैं खून कर डालूंगी आज...”
ज्ञानपत ने अदिति के चेहरे को जोर से पकड़े हुए अपने लण्ड तक किया और कहा- “तुम हो ना इसको खड़ा करने के लिए... रंडी कहीं की ले चूस इसको अपने आप खड़ा हो जाएगा, चल चूस वरना तेरा गला काट दूंगा अभी के अभी.”
इस बार अदिति उसके लण्ड को अपने मुँह नहीं ले रही थी। और अदिति ने पता नहीं कैसे ताकत जमा किया
और बूढ़े को जोर का धक्का दिया और वो जमीन पर जा गिरा। तुरंत अदिति ने अपने कपड़े लिए और भागकर अपने कमरे में खद को लाक कर लिया और अंदर से चिल्लाते हए कहा- "आप अभी इसी वक़्त यहाँ से निकलो. वरना मैं सच में पोलिस को फोन कर रही हूँ। गेट थे हेल आउट आफ हियर राइट नाउ यू ओल्ड बस्टर्ड."
ज्ञानपत ने सोचा की वो सचमुच पोलिस को फोन कर देगी, तो ज्ञानपत ने अपने कपड़े पहने और कहा- “मैं जा रहा हूँ.."
अदिति ने अंदर से उसको बाहर का दरवाजा बंद करते सुना, तब वो अपने कमरे से बाहर निकली। और देखा के ज्ञानपत जा चुका था सच में। हाँ अदिति ऐसे दौर से भी गुजरी थी।
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ज्ञानपत ने अदिति की बाहों को मोड़कर उसको सोफे पर धकेला, तब तक वो बिल्कुल नंगा हो चुका था और
अदिति भी नंगी थी। अदिति तड़प उठी जिस तरह से ज्ञानपत ने उसके बाजू को मोड़ा। क्योंकी अदिति को दर्द हुआ, अदिति तकरीबन रोते हुए उसको हाथ को छोड़ने को कहा ज्ञानपत से, क्योंकी दुख रहे थे जिस तरह से उसने सख्ती से मोड़ा थे बाहों को।
मगर ज्ञानपत ने उसकी आवाज को अनसुनी करते हुए अदिति की गाण्ड पर अपने दाँतों को गड़ाया और जोर से दाँत काटा अदिति की गाण्ड पर। लगता था एक टुकड़ा गोश्त काट देगा वहाँ से। दर्द से अदिति जोर से चिल्लाई। फिर ज्ञानपत ने अदिति को थप्पड़ मारते हुए आवाज नहीं निकालने का आदेश दिया धमकाते हुए, वरना वो और ज्यादा दर्द देगा उसको।
अदिति रोने लगी और उसको छोड़ने की बिनती की।
ज्ञानपत ने अदिति की गाण्ड पर बहुत सारे तमाचे मारे। जोर से कई बार मारता गया की उसकी गाण्ड लाल हो गई, उसकी उंगलियों के निशान दिखने लगे थे अदिति के चूतड़ों पर। अदिति रोती गई और ज्ञानपत के चेहरे में खौफ से देखने लगी और सोचा की इस बार शायद वो किसी गलत आदमी के हाथ लग गई है। अदिति ने उसको जाने को कहा, मिन्नतें की अदिति ने और वो नहीं माना।
अदिति ने तब कहा- “मैं अपने पति को बताऊँगी और पोलिस को रिपोर्ट करूंगी..."
ज्ञानपत ने कहा- “अगर तुमने पोलिस को कुछ बताया तो मैं कहूँगा की तुमने मुझको यहां चुपके से बुलाया था अपने पति के जाने के बाद, और उस रात को मुझसे चुदवाने आई थी और हम दोनों अक्सर चुदाई करते हैं उस रात के बाद से। तुम्हारा पति और अपार्टमेंट के सभी लोगों को पता चल जाएगा की तू एक रंडी है, तू चाहती है की ऐसा हो? तो ठीक है पोलिस को बताना फिर देखना मैं क्या करता हूँ..”
अदिति खुद को आज मायूस महसूस कर रही थी, बेसहारा महसूस कर रही थी अपने आपको उस वक़्त। उसने कभी भी नहीं सोचा था की एक दिन किसी ऐसे आदमी से भी उसकी मुलाकात होगी। ज्ञानपत वाग्लेंट और वाइल्ड था। अदिति की समझ में आ गई की वो कुछ भी नहीं कर पाएगी और ज्ञानपत को वैसे ही करने देना पड़ेगा, जैसे वो करना चाहता है और अदिति को खामोश होकर सब सहना पड़ेगा और कोई चारा नहीं था।
ज्ञानपत ने सख्ती से अदिति का सिर दबाते हुए उसके मुँह को अपने लण्ड तक किया और चूसने को कहा। अदिति मना नहीं कर पाई। उसने अपने लण्ड को अदिति के मुँह के अंदर जोर से धक्का देते हुए ठूँसा और मुँह में चोदने लगा। अदिति के गले की गहराई में उसका लण्ड घुसता गया। ज्ञानपत बहुत जोरों से धक्का देते हुए अंदर-बाहर किए जा रहा था अपने लण्ड को, अदिति खाँसने लगी, उसकी साँस उखड़ने लगी, नाक बहने लगी आँखों से आँसू बहने लगे। फिर भी ज्ञानपत नहीं रुक रहा था, धक्के पे धक्का दिए जा रहा था। जब अदिति चूसना बंद कर दी तो ज्ञानपत ने एक जोर से थप्पड़ मारा अदिति के गाल पर।
गाल पर थप्पड़ मारने से अदिति की गाल बिल्कुल लाल हो गई, एक बार एक उल्टा थप्पड़ मारा ज्ञानपत ने अदिति को जिससे उसके नीचे के होंठ के कोने से थोड़ा सा खून निकल आया। ज्ञानपत ने उसके खून को चूसा, इतना चूसा जब तक खून बहना बंद नहीं हुआ। अदिति के होंठों को चूसते वक्त ज्ञानपत अपनी उंगली को
अदिति की चूत में पेल रहा था, अपनी तीन उंगलियां चूत के अंदर डालकर घुमा रहा था।
कुछ देर बाद ज्ञानपत ने अदिति को सोफे पर पेट के बल लेटाया, फिर उसको झुकाया और अपने लण्ड को उसकी गाण्ड में ठूसने की कोशिश किया। अदिति ने मना किया, उसको धक्का दिया और खुद को बचाने की कोशिश की। मगर मर्द वाली ताकत कहाँ से लाती अदिति? बूढ़ा ताकतवर था और अदिति को कुछ इस तरह से ब्लाक किया की अदिति का निकलना नामुमकिन था।
अदिति की गाण्ड ज्ञानपत के सामने था जिस तरह से ब्लाक किया था उससे बूढ़े ने, अपने अंगूठे को गाण्ड की छेद में घुसेड़ा, फिर दो दूसरी उंगलियों को घुसाया और घुमाया अंदर करके। अदिति ने चिल्लाकर निकालने को कहा। मगर वो पेलता गया और आखीर में थूक लगाया अपने लण्ड पर और लण्ड को अदिति की गाण्ड की गहराई में पेल दिया और धक्का देना शुरू कर दिया।
मगर अदिति हिलने लगी, उसको नहीं करने दे रही थी, अपनी कमर इस तरह हिला रही थी की तीन बार ज्ञानपत का लण्ड बाहर निकल गया, और जब वापस डालना चाहा तो लण्ड नरम हो गया, नहीं घस रहा था। उसने लण्ड को गाण्ड के बीच रगड़ा, चूत पर भी मसला पर नरम ही रहा। अदिति ने उसके चेहरे में देखा, आँसू भरे नैनों से फिर उसके लण्ड को देखा। फिर से ज्ञानपत के चेहरे में देखा, और वो समझ गई की वो नहीं कर पाएगा क्योंकी उसका लण्ड नरम हो गया था।
अदिति ने चिल्लाते हुए कहा- “बूढा सांड़... खड़ा ही नहीं कर पा रहे हो और चोदना चाहते हो? निकलो यहाँ से वरना जान से मार डालूंगी तुम्हें, कर नहीं पाते हो इसलिए अपना गुस्सा मुझपर निकाल रहे हो, गेट थे हेल आउट आफ हियर वरना मैं खून कर डालूंगी आज...”
ज्ञानपत ने अदिति के चेहरे को जोर से पकड़े हुए अपने लण्ड तक किया और कहा- “तुम हो ना इसको खड़ा करने के लिए... रंडी कहीं की ले चूस इसको अपने आप खड़ा हो जाएगा, चल चूस वरना तेरा गला काट दूंगा अभी के अभी.”
इस बार अदिति उसके लण्ड को अपने मुँह नहीं ले रही थी। और अदिति ने पता नहीं कैसे ताकत जमा किया
और बूढ़े को जोर का धक्का दिया और वो जमीन पर जा गिरा। तुरंत अदिति ने अपने कपड़े लिए और भागकर अपने कमरे में खद को लाक कर लिया और अंदर से चिल्लाते हए कहा- "आप अभी इसी वक़्त यहाँ से निकलो. वरना मैं सच में पोलिस को फोन कर रही हूँ। गेट थे हेल आउट आफ हियर राइट नाउ यू ओल्ड बस्टर्ड."
ज्ञानपत ने सोचा की वो सचमुच पोलिस को फोन कर देगी, तो ज्ञानपत ने अपने कपड़े पहने और कहा- “मैं जा रहा हूँ.."
अदिति ने अंदर से उसको बाहर का दरवाजा बंद करते सुना, तब वो अपने कमरे से बाहर निकली। और देखा के ज्ञानपत जा चुका था सच में। हाँ अदिति ऐसे दौर से भी गुजरी थी।
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