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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

ज्ञानपत और भी वाइल्ड हो रहा था और भारी आवाज में कहा- “तुमसे और सभ्य? बिल्कुल भी नहीं। तुमको तो बहुत सारे आदमियों को एक साथ मिलकर चोदना चाहिए, रंडी हो तुम। एक गैर मर्द को अपने घर में घुसाकर चुदवा रही हो और सभ्य होने को बोल रही हो? तेरा तो रेप करना चाहिए मिलकर, गैंग रेप करना चाहिए तुझ जैसी को। तुमको कड़क चुदाई चाहिये, सख्ती करके चोदना चाहिए तुझे और मुझे ऐसे ही चोदना पसंद है और वैसे ही चोदूंगा तुझे अब साली रांड.”

ज्ञानपत ने अदिति की बाहों को मोड़कर उसको सोफे पर धकेला, तब तक वो बिल्कुल नंगा हो चुका था और

अदिति भी नंगी थी। अदिति तड़प उठी जिस तरह से ज्ञानपत ने उसके बाजू को मोड़ा। क्योंकी अदिति को दर्द हुआ, अदिति तकरीबन रोते हुए उसको हाथ को छोड़ने को कहा ज्ञानपत से, क्योंकी दुख रहे थे जिस तरह से उसने सख्ती से मोड़ा थे बाहों को।

मगर ज्ञानपत ने उसकी आवाज को अनसुनी करते हुए अदिति की गाण्ड पर अपने दाँतों को गड़ाया और जोर से दाँत काटा अदिति की गाण्ड पर। लगता था एक टुकड़ा गोश्त काट देगा वहाँ से। दर्द से अदिति जोर से चिल्लाई। फिर ज्ञानपत ने अदिति को थप्पड़ मारते हुए आवाज नहीं निकालने का आदेश दिया धमकाते हुए, वरना वो और ज्यादा दर्द देगा उसको।

अदिति रोने लगी और उसको छोड़ने की बिनती की।

ज्ञानपत ने अदिति की गाण्ड पर बहुत सारे तमाचे मारे। जोर से कई बार मारता गया की उसकी गाण्ड लाल हो गई, उसकी उंगलियों के निशान दिखने लगे थे अदिति के चूतड़ों पर। अदिति रोती गई और ज्ञानपत के चेहरे में खौफ से देखने लगी और सोचा की इस बार शायद वो किसी गलत आदमी के हाथ लग गई है। अदिति ने उसको जाने को कहा, मिन्नतें की अदिति ने और वो नहीं माना।

अदिति ने तब कहा- “मैं अपने पति को बताऊँगी और पोलिस को रिपोर्ट करूंगी..."

ज्ञानपत ने कहा- “अगर तुमने पोलिस को कुछ बताया तो मैं कहूँगा की तुमने मुझको यहां चुपके से बुलाया था अपने पति के जाने के बाद, और उस रात को मुझसे चुदवाने आई थी और हम दोनों अक्सर चुदाई करते हैं उस रात के बाद से। तुम्हारा पति और अपार्टमेंट के सभी लोगों को पता चल जाएगा की तू एक रंडी है, तू चाहती है की ऐसा हो? तो ठीक है पोलिस को बताना फिर देखना मैं क्या करता हूँ..”

अदिति खुद को आज मायूस महसूस कर रही थी, बेसहारा महसूस कर रही थी अपने आपको उस वक़्त। उसने कभी भी नहीं सोचा था की एक दिन किसी ऐसे आदमी से भी उसकी मुलाकात होगी। ज्ञानपत वाग्लेंट और वाइल्ड था। अदिति की समझ में आ गई की वो कुछ भी नहीं कर पाएगी और ज्ञानपत को वैसे ही करने देना पड़ेगा, जैसे वो करना चाहता है और अदिति को खामोश होकर सब सहना पड़ेगा और कोई चारा नहीं था।

ज्ञानपत ने सख्ती से अदिति का सिर दबाते हुए उसके मुँह को अपने लण्ड तक किया और चूसने को कहा। अदिति मना नहीं कर पाई। उसने अपने लण्ड को अदिति के मुँह के अंदर जोर से धक्का देते हुए ठूँसा और मुँह में चोदने लगा। अदिति के गले की गहराई में उसका लण्ड घुसता गया। ज्ञानपत बहुत जोरों से धक्का देते हुए अंदर-बाहर किए जा रहा था अपने लण्ड को, अदिति खाँसने लगी, उसकी साँस उखड़ने लगी, नाक बहने लगी आँखों से आँसू बहने लगे। फिर भी ज्ञानपत नहीं रुक रहा था, धक्के पे धक्का दिए जा रहा था। जब अदिति चूसना बंद कर दी तो ज्ञानपत ने एक जोर से थप्पड़ मारा अदिति के गाल पर।

गाल पर थप्पड़ मारने से अदिति की गाल बिल्कुल लाल हो गई, एक बार एक उल्टा थप्पड़ मारा ज्ञानपत ने अदिति को जिससे उसके नीचे के होंठ के कोने से थोड़ा सा खून निकल आया। ज्ञानपत ने उसके खून को चूसा, इतना चूसा जब तक खून बहना बंद नहीं हुआ। अदिति के होंठों को चूसते वक्त ज्ञानपत अपनी उंगली को

अदिति की चूत में पेल रहा था, अपनी तीन उंगलियां चूत के अंदर डालकर घुमा रहा था।

कुछ देर बाद ज्ञानपत ने अदिति को सोफे पर पेट के बल लेटाया, फिर उसको झुकाया और अपने लण्ड को उसकी गाण्ड में ठूसने की कोशिश किया। अदिति ने मना किया, उसको धक्का दिया और खुद को बचाने की कोशिश की। मगर मर्द वाली ताकत कहाँ से लाती अदिति? बूढ़ा ताकतवर था और अदिति को कुछ इस तरह से ब्लाक किया की अदिति का निकलना नामुमकिन था।

अदिति की गाण्ड ज्ञानपत के सामने था जिस तरह से ब्लाक किया था उससे बूढ़े ने, अपने अंगूठे को गाण्ड की छेद में घुसेड़ा, फिर दो दूसरी उंगलियों को घुसाया और घुमाया अंदर करके। अदिति ने चिल्लाकर निकालने को कहा। मगर वो पेलता गया और आखीर में थूक लगाया अपने लण्ड पर और लण्ड को अदिति की गाण्ड की गहराई में पेल दिया और धक्का देना शुरू कर दिया।

मगर अदिति हिलने लगी, उसको नहीं करने दे रही थी, अपनी कमर इस तरह हिला रही थी की तीन बार ज्ञानपत का लण्ड बाहर निकल गया, और जब वापस डालना चाहा तो लण्ड नरम हो गया, नहीं घस रहा था। उसने लण्ड को गाण्ड के बीच रगड़ा, चूत पर भी मसला पर नरम ही रहा। अदिति ने उसके चेहरे में देखा, आँसू भरे नैनों से फिर उसके लण्ड को देखा। फिर से ज्ञानपत के चेहरे में देखा, और वो समझ गई की वो नहीं कर पाएगा क्योंकी उसका लण्ड नरम हो गया था।

अदिति ने चिल्लाते हुए कहा- “बूढा सांड़... खड़ा ही नहीं कर पा रहे हो और चोदना चाहते हो? निकलो यहाँ से वरना जान से मार डालूंगी तुम्हें, कर नहीं पाते हो इसलिए अपना गुस्सा मुझपर निकाल रहे हो, गेट थे हेल आउट आफ हियर वरना मैं खून कर डालूंगी आज...”

ज्ञानपत ने अदिति के चेहरे को जोर से पकड़े हुए अपने लण्ड तक किया और कहा- “तुम हो ना इसको खड़ा करने के लिए... रंडी कहीं की ले चूस इसको अपने आप खड़ा हो जाएगा, चल चूस वरना तेरा गला काट दूंगा अभी के अभी.”

इस बार अदिति उसके लण्ड को अपने मुँह नहीं ले रही थी। और अदिति ने पता नहीं कैसे ताकत जमा किया

और बूढ़े को जोर का धक्का दिया और वो जमीन पर जा गिरा। तुरंत अदिति ने अपने कपड़े लिए और भागकर अपने कमरे में खद को लाक कर लिया और अंदर से चिल्लाते हए कहा- "आप अभी इसी वक़्त यहाँ से निकलो. वरना मैं सच में पोलिस को फोन कर रही हूँ। गेट थे हेल आउट आफ हियर राइट नाउ यू ओल्ड बस्टर्ड."

ज्ञानपत ने सोचा की वो सचमुच पोलिस को फोन कर देगी, तो ज्ञानपत ने अपने कपड़े पहने और कहा- “मैं जा रहा हूँ.."

अदिति ने अंदर से उसको बाहर का दरवाजा बंद करते सुना, तब वो अपने कमरे से बाहर निकली। और देखा के ज्ञानपत जा चुका था सच में। हाँ अदिति ऐसे दौर से भी गुजरी थी।

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कड़ी_58 आनंद काल करता है अदिति को

आनंद ने जब आखिरी बार अदिति के साथ वक़्त गुजारा था तब से इंतेजार कर रहा था अदिति से मिलने को मगर वक्त नहीं मिल रहा था दोनों को एक साथ होने के लिए। जिस दिन आफिस से अदिति से मिलने आया था, उस दिन के बाद बिल्कुल नहीं मिले थे दोनों। मगर हाँ फोन पर अक्सर छुप-छुपकर बातें किया करते थे थोड़ा बहुत। उसके बाद अदिति अपनी ससुराल चली गई थी उत्सव के लिए, उसके बाद नहीं मिली थी आनंद से। तब राजन, ओम और उस बूढ़े ज्ञानपत से मिली।

बीच में कई बार आनंद ने फोन पर बात किया थे अदिति से, जब वो अपने ससुराल गई थी वहाँ भी आनंद ने फोन किया था उसे। सभी फोन काल्स के बीच एक काल एक दिन ऐसा था जब आनंद ने अदिति से बात करते वक़्त मूठ भी मारा था, सेक्स चैट किया था फोन पर उस दिन वो चैट कुछ ऐसा था।

आनंद ने विशाल से कहा था के लंच टाइम में उसका अपायंटमेंट था डेंटिस्ट के साथ और वो एक प्राइवेट बिल्डिंग की पार्किंग में वाचमैन को घूस देकर, जाकर अदिति को फोन किया था। वो अदिति के यहाँ डाइरेक्ट

जा सकता था, मगर उसको नाखुश नहीं करना चाहता था, बिना बताए उसके यहाँ जाकर। इसलिए फोन से ही बात करना पसंद किया उसने। असल में एक दिन पहले उसने अदिति को फोन पर बताया था की लंच टाइम में वो उससे मिलने आएगा। मगर अदिति ने कहा था नहीं आने को और वो खुद उसको बताएगी किस दिन को आना है। तो आनंद ने एक अंडरग्राउंड पार्किंग में कार पार्क किया अपने आफिस से थोड़ी दूर और सिर्फ 45 मिनट थे उसके पास तब वापस आफिस जाना था उसे। दूर से सेक्स करना एक अजीब अनुभव था, एक अलग मजा था, यही अनुभव किया इस दिन को दोनों ने।

अदिति से बात करने से पहले ही आनंद का खड़ा हो चुका था, उसको सोचते ही उसका खड़ा हो जाता था हर बार, क्योंकी वो अदिति को सेक्स का माध्यम सोचता था सिर्फ। सिर्फ अदिति का चेहरा, आवाज, जिश्म, जिश्म की खुशबू, मुश्कान। उसको बाहों में भरने की तड़प, अदिति की तड़पती आवाज, उसकी अदायें। यह सब काफी था किसी भी मर्द को पागल करने के लिए। और ये सब सोचते ही आनंद उत्तेजित हो जाया करता था।

अदिति की निहारने की अदा कुछ ऐसी थी जो हर औरत में नहीं होती है। आखीरकार, हुआ ये था की आनंद खुद अपनी बीवी को नेगलेक्ट कर रहा था अदिति के लिए। और जब कभी अपनी बीवी से संभोग करता था तो अदिति को दिमाग में था। अब आनंद अपनी बीवी के साथ करते वक़्त अपने दिमाग में अदिति को सोचकर रोल-प्ले करता था, तब जाकर अपनी बीवी के साथ कर पाता था, और यही बात आज सुबह को अदिति से आनंद ने कहा था, जब विशाल आफिस के लिए निकल गया था तब।

तभी डिसाइड किया की आज लंच टाइम में इस बारे में बात करेंगे दोनों। ये उन दोनों के लिए एक रूटीन जैसी हो गई थी की हर सुबह जैसे विशाल आफिस के लिए घर से निकलता तो आनंद उधर घर से निकलने के बाद कार को रास्ते में पार्क करके, अदिति को फोन करके कुछ देर बात करता। हर सुबह 9:30 बजे अदिति आनंद की काल का इंतेजार करती। और दो प्रेमियों की तरह दोनों बातें करते थोड़ी देर तक। यही होता शाम को भी जब विशाल आफिस से निकलता था घर वापस जाने के लिए। आनंद कार रोक कर अदिति से बातें करने लगता और उधर जब विशाल की कार अपार्टमेंट की गेट तक आती तो अदिति आनंद से कहती की विशाल आ गया. तब । बातें बंद करते दोनों। रातों को कभी एस.एम.एस. करते दोनों, विशाल की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए जैसे जब वो नहाने जाता वगैरा।

आनंद ने अंडरग्राउंड पार्किंग से फोन किया और तुरंत अदिति ने फोन उठाया क्योंकी वो इंतेजार कर रही थी।

आनंद बेचैन था और कहा- “पहले जल्दी बताओ की क्या पहना है तुमने और कहाँ हो इस वक्त, जल्दी हमारे पास वक़्त कम है डार्लिंग..."
 
अदिति ने चुलबुलाती आवाज में कहा- “क्यों ऐसी भी क्या जल्दी आनंदजी? मैं तो बिल्कुल आराम से पूरा वक्त लेकर बात करूँगी जी, अगर आपको सबर नहीं तो वेरी सैड आनंदजी...” उसकी आवाज में शरारत और नटखट होने का स्वभाव था।

आनंद मजबूर था और अदिति की धुन पर ही उससे नाचना था। तो पूछा- “अच्छा बताओ तो किस ड्रेस में हो, उसी में तुमको दिमाग में बसाता हूँ.."

अदिति- “एक मामूली सी ब्लाउज़ और स्कर्ट में हूँ जी...”

आनंद- “जरा डिस्क्राइब करो ड्रेस को और कहाँ हो इस वक़्त लाउंज या बेडरूम में?” आनंद ने अपने कार सीट को थोड़ा पीछे किया और जरा सा लेट गया जैसे एक बेड पर हो।

अदिति- “हम्म... स्कर्ट थोड़ी लंबी है जो घुटनों के नीचे तक आती है, और ब्लाउज़ ठीक स्कर्ट को कवर करती है कमर पर। और ना मैं बेडरूम में हूँ और ना ही लाउंज में...” वो चुलबुलाते हुए हँसी और कहा- “मैं इस वक्त छत पर हूँ जी, और रास्ते पर देख रही हूँ.”

आनंद- “ओहह... नो। अंदर वापस जाओ ना प्लीज... अगर बाहर देख रही हो तो नहीं कान्सेंट्रेट कर पाओगी। मुझे कुछ खास बातें करनी हैं, अपने कमरे में जाओ ना प्लीज... वक़्त कम है मत टाइम बर्बाद करो अदिति जाओ ना प्लीज...”

अदिति- “ओके ठीक है बाबा... मैं अंदर आ गई अब बोलो क्या बोलना है?” कहकर अदिति ने छत वाले दरवाजे को बंद किया और आनंद की बातों को सुनते हुए अपने कमरे में गई।

आनंद- “अब अपने बिस्तर पर लेट जाओ और बिल्कुल वैसा करो जो मैं कहूँगा प्लीज। बहुत जरूरी है.."

अदिति बेड पर लेट जाती है तकिये को सरहाने से लगाते हुए और पूछती है- “ओफफो क्या जरूरी है?"

आनंद- “अब अपनी एक टांग को ऊपर उठाओ और धीरे-धीरे अपनी स्कर्ट को ऊपर खींचो और जो ज्यादा गोरा सफेद हिस्सा है उसको नजर आने दो और मुझको बताओ कितना उठाया और क्या दिख रहा है, कहाँ तक दिख रहा है। मैं इस वक्त बिल्कुल वो नजारा अपनी आँखों के सामने देखने की कोशिश कर रहा हूँ। तुम और ज्यादा बताकर पूरा करो जो मुझको दिखाई दे रहा है और मैं महसूस करूँगा की इस वक्त बिल्कुल तुम्हारे पास बेड पर ही हूँ."

क्योंकी अदिति विशाल के साथ कुछ ऐसे रोल-प्ले खेलती है इसलिए उसके लिए ये आसान काम था। और उसको इंट्रेस्टिंग लगा यह सब करना। वो अपनी पीठ पर लेट गई और अपनी दाँयी टांग को ऊपर किया और हल्के से अपनी स्कर्ट को खींची और खुद अपनी जाँघ के ज्यादा गोरे हिस्से को देखने लगी, और एक फुसफुसासाती आवाज में कहा- “कर दिया जी...”

आनंद- “क्या कर दिया? तुम नहीं समझ रही हो, मुझे सब डिस्क्राइब करके बताओ ना... जो तुमको दिख रहा है वो बताओ मुझे, बताओ कहाँ तक स्कर्ट ऊपर है, और क्या नजारा आ रहा है?"

अदिति ने फिर चुलबुलाती हँसी में कहा- “मेरी दायीं टांग ऊपर उठी हुआ है और क्योंकी स्कर्ट सिल्की मेटीरियल की है तो वो दोनों जांघों के बीच में है, और मेरी जाँघ दिख रही है, अब खुश आनंदजी? हीहीहीही...”

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कड़ी_59 अदिति और आनंद चैट पर

आनंद ने आहें भरते हुए कहा- “अब अपने ब्लाउज़ के बटन खोलो, अपने फोन को बटन के पास खोलते वक्त रखना, मैं बटन को खुलते हुए सुनना चाहता हूँ.”

अदिति ने दाँतों में होंठों को दबाते हए ब्लाउज़ के बटन खोले, मोबाइल को बटन के पास करते हुए और आनंद को आवाजें सुनाई दी। आनंद की आवाज भारी होने लगी और उसी भारी आवाज में कहा।

आनंद- “अब अपनी हथेली को गले से लेकर अपनी चूचियों तक धीरे-धीरे फेरो और यूँ समझो की मेरा हाथ फिर रहा है वहाँ, कम ओन बेबी करो..."

अदिति को पसंद आया उसका ऐसा कहना और उसने एक गहरी साँस लिया जो आनंद को सुनाई दी। फिर अदिति ने अपने हाथ को अपने गले से चूचियों तक फेरा, और फिर से गहरी सांस लेते हुए पूछा- “अब क्या करूँ आनंदजी?"

आनंद- “अब अपनी ब्रा को अनहुक करो और मुझे सुनने देना फोन पर."

अदिति- “तो उससे पहले मुझे ब्लाउज़ निकलना होगा। निकालूं क्या?"

उत्तेजित होते हुए आनंद ने कहा- “हाँ तार दो ब्लाउज़ को जानेमन.."

अदिति एंजाय कर रही थी यह सब, उसने अपनी ब्लाउज़ उतारी और फोन को ब्रा के पास करके ब्रा को अनहक किया फिर पूछा- “आपने सुना? बताओ मैंने क्या क्या अभी?"

आनंद- “हाँ सुना, तुमने ब्रा को अनहुक कर दिया ना?” फिर बहुत उत्तेजित होकर आनंद ने कहा- “डार्लिंग अब अपने मोबाइल को अपने कंधे और सिर के बीच दबाकर अपनी दोनों हथेली से अपनी चूचियों को मसलौ और मुझे अपने आवाज सुनने दो, प्लीज बेबी करो ऐसा...”

अदिति फिर चुलबुलाते हुए हँसी और ठीक से बिस्तर पर लेट गई, फोन को कान से दबाया और दोनों हथेली से अपनी खुद की चूचियों को मसलने लगी और एक तड़पती हुई आवाज किया अदिति ने, जो आनंद को बेहद पसंद आया।

आनंद- “हाँ ऐसे ही अब अपनी एक चूची को अपने मुँह तक लाओ, ला सकती हो क्या?"

अदिति- “मैंने कभी ट्राई नहीं किया, ट्राई करती हूँ हम्म्म्म ... हाँ कर सकती हूँ आअहह... इसस्स्स ... हम्म्म्म .. बस्स अब बस्स हम्म्म्म..” आनंद समझ गया की अदिति ने खुद अपनी चूचियों को चाटा और आगे नहीं बढ़ना

चाहती थी।

आनंद ने कहा- “मेरी जान चालू रखो, अपने जीभ को उस पर फेरो। समझ लो की मैं अपना जीभ फेर रहा हूँ वहाँ। अपने निपल पर जीभ को गोल-गोल घुमाओ, देखना खुद तुमको मजा आएगा, मुझको सोचो, मुझे महसूस करो अपने पास सब करते हुए..."

अदिति आनंद को खुश करना चाहती थी तो बिल्कुल वैसा ही किया। जैसे ही उसकी जीभ ने उसकी निपल को छुआ तो अदिति ने ऐसी तड़पती आवाज निकाली की खुद बेचैन हो चली। आनंद उसकी तड़पती सिसकी और

आवाज सुनकर एकदम से खड़ा हो गया था, अपने हाथ में अपना लण्ड दबा रहा था।

अदिति ने गिड़गिड़ाती आवाज में कहा- “बस अब मुझसे और नहीं होगा। आपको खुश होना चाहिए की मैंने इतना किया, अगर मैंने ज्यादा किया तो बेकाबू हो जाऊँगी। नहीं होगा मुझसे...”

आनंद- “नहीं नहीं प्लीज... इस मोड़ पर तो मत रुको प्लीज सुनो। देखो मैं प्यासा हूँ, मेरी प्यास तो बुझा दो मेरी जान। अब अपनी स्कर्ट को बिल्कुल अपने पेट तक उठा दो, पैंटी दिखनी चाहिए और मुझको डिस्क्राइब करो सब कुछ, प्लीज जानेमन...”

अदिति ने वैसा ही किया। अपने पेट तक बिल्कुल उठा दिया अपनी स्कर्ट को, खुद अपनी दोनों चूचियों को देख रही थी और पैंटी को। फिर कहा- “बिल्कुल ऊपर तक उठा दिया स्कर्ट को, मेरी पैंटी और पेट भी दिख रहे हैं अब तो...”

आनंद ने गुर्राते हुए कहा- “बेबी अब अपनी पैंटी को नीचे करो, अपने घुटनों तक ले जाओ। फिर वहाँ रोक दो पैंटी को। मुझको मोबाइल पर पैंटी को नीचे करते वक्त सुनने दो। कम ओन स्वीटहार्ट करो प्लीज...” और यह कहते हुए आनंद खुद सिसक पड़ा।

उस वक़्त अदिति अपनी पैंटी पर अपनी उंगलियां फेर रही थी जिस वक़्त आनंद वो सब कह रहा था। अदिति ने सोचा घर में वो अकेली है कोई भी नहीं देख रहा उसको, तो क्या हर्ज हैं यह सब करने में। मोबाइल एक हाथ में लेकर पैंटी के पास किया, कमर को ऊपर उठाया और अपनी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे किया अप नों तक।

आनंद को सब साफ सुनाई दिया। वो समझ गया की सच में अदिति ने पैंटी को नीचे कर दिया है। चमड़ी पर कपड़ा घिसता है तो फोन पर उसकी आवाज साफ सुनाई देती है, सब आनंद ने सुना। अब आनंद दिमाग में सोच रहा था कैसे अदिति अपनी पैंटी को घुटनों तक नीचे करके लेटी हुई है बिस्तर पर, उसकी चूचियां और चूत नंगी नजर आ रही है। अदिति ने वापस फोन कान से लगाया और एक गहरी साँस लिया।
 
आनंद ने धीरे से कहा- “अब सुनो और बताओ मैं क्या कर रहा हूँ?” फिर उसने अपने मोबाइल को अपनी पैंट की जिप तक किया और जिप को नीचे किया, और पूछा- “बताओ मैंने क्या किया?"

अदिति- “मैं बच्ची थोड़ी ही हूँ की नहीं समझूगी की आपने किया क्या? अपने जिप को नीचे किया है ना?"

आनंद- “हाँ जानेमन बिल्कुल सही। तो अब मैं तुमको महसूस कर सकता हूँ, बेड पर तुम्हारी पैंटी घुटनों तक नीचे खींची हुई है, चूचियां नंगी दिख रही हैं। अब मेरा लण्ड वहाँ जाने को तैयार है अदिति, अब तुम मेरे लण्ड

को सोचना, अब अपने नाजुक हाथों से इसको अंडरवेर से बाहर निकालो मेरी जान... बेसब्री से इंतेजार कर रहा हूँ जानेमन। अब मत तड़पाओ। तुम्हारे छुवन के लिए बेचैन हूँ कब से मैं."

अदिति ने नर्म आवाज में एक गहरी साँस लेते हुए जवाब दिया- “मैं कैसे कर सकती हूँ, तुम कितने दूर हो, तुम खुद निकालो और मुझको निकालते हुए महसूस करो ना..."

आनंद- “हाँ मेरी जान... यह रहा अंडरवेर से बाहर आ गया अब मेरा मोटा तना हुआ लण्ड। तुम्हारे होंठों तक जाने के लिए तैयार है, तुम्हारे भीगे हुए होंठ और जीभ के स्पर्श के लिए बेताब है यह लण्ड अब। चूस लो इसे जानम ले लो अपने मुँह में इसको मेरी जान...” उसकी आवाज में तड़प थी, बेचैनी थी, साँस जैसे अटकी हुई थी।

अदिति खुद बेचैन हो गई और सिसकती आवाज में कहा- “ओह माई गोड... यह क्या हो रहा है, आनंदजी क्या कर रहे हो आप मुझे...”

आनंद- "बेबी अब अपनी उंगलियों को चूत के ऊपर करो, और हल्के से ऊपर रगड़ो। चूत की पंखुड़ियों के बीच मसलो अपने उंगलियों को और जब थोड़ी गीली हो जाएं तो मुझे बताओ, इधर में थूक से अपने लण्ड को भिगा रहा हूँ, और मूठ मारने जा रहा हूँ। तुमको, तुम्हारे जिश्म को अपने करीब महसूस करते हुए। अपने फोन पर मूठ मारने की आवाज सुनो, सब सुन सकती हो। तुम भी मेरे साथ उधर बिल्कुल वैसे ही अपनी चूत पर अपनी हथेली रगड़ती जाओ। मैं तुमको वो करते हुए सुनना चाहता हूँ और तुम मुझे सुनो। चलो शुरू करते हैं डार्लिंग..."

और आनंद ने एक गहरी साँस लिया और मूठ मारना शुरू किया।

अदिति सुन रही थी, उसके दिल की धड़कनें तेज हो गई थी, पशीने छूट पड़े थे, उसकी साँसें तेज चल रही थी, और ऐसी आवाजें सुनाई दे रही थी उसे आनंद के फोन से- “पाउच-पाउच फुच्च-फुच्च फुश्ह फुचुक-फुचुक.."

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अदिति को आनंद पे तरस आई और धीरे से अपनी उंगली को अपनी चूत पर किया उसने और धीरे-धीरे अपनी चूत को मसलने लगी। अपनी चूत में तेजी से उंगली करने लगी अदिति और फोन को चूत के पास कर दिया आनंद को सुनाने के लिए। अब आनंद भी अदिति की उंगली को उसकी गीली चूत में आता-जाता सुन सकता था। फच-फच फुच-फुच जैसे आवाजें सुनाई दे रही थी आनंद को भी अब। और साथ में अदिति की सिसकियां और तड़प सुनाई दे रही थी। आनंद अपने हाथ को ज्यादा तेजी से चलाने लगा अपने लण्ड पर और भी जोरों से गुर्राने लगा।

उधर अदिति की सिसकियां भी बढ़ने लगी थी और एक पतली सी आवाज में अदिति ने पूछा- “आप सुन सकते हो? मैं बिल्कुल गीली हो चुकी हूँ आनंदजी, मैंने यह पहले कभी भी नहीं किया था फोन पर जी। आप कमाल के हो आनंदजी... मैं आपको महसूस कर सकती हूँ मेरे अंदर इस वक्त, कमाल हो आप आनंदजी... सस्स्स... आअहह... आनंद जीईईई...”

आनंद अदिति को उस हालत में सुनकर खुद चिल्लाने लगा- “आघ्गघह... आई आम कम्मिंग... मैं झड़ रहा हूँ अदितिईई...” और जोर से अपने लण्ड को हथेली में दबाते हए जब आनंद ने पिचकारी छोड़ी तो कार की विंडस्क्रीन पर भी जा गिरा उसका पानी। आनंद हॉफने लगा और बात करना जारी रखा हाँफते हुए।

अदिति अपने तकिये में मुंह दबाए आनंद के लिए पछता रही थी, अफसोस कर रही थी सब सुनते हुए। उसको सब पता था, मालूम था की आनंद ने मूठ मारा उसको सोचते हुए, उसको अपने पास महसूस करते हुए। बहुत अफसोस हो रही थी अदिति को आनंद को उस तरह से हॉफते हुए, तड़पते हुए बात करते हुए सुनकर।।

अदिति ने सोचा काश उस वक़्त आनंदजी उसके पास बिस्तर पर होता। फिर अपनी उंगलियों को चूत के अंदर किए हुए अदिति ने दोनों जांघों को एक साथ दबाया और धीरे से आनंद से कहा- “आई आम वेरी सारी आनंदजी मुझे माफ कर देना प्लीज... मैंने आपको इतना दुख दिया, आपको तड़पाया इतना मैंने... प्लीज आई आम वेरी सारी जी...”

आनंद ने जबड़ा दबाए हुए साँस लिया और जवाब दिया- “फिकर मत करो जानेमन... बहुत जल्द हम सच में यह सब करेंगे फोन पर नहीं, है ना अदिति?"

अदिति- “मुझे सच में बहुत अफसोस हो रहा है आनंदजी, बहुत बुरा लग रहा है मुझे की मैंने आपको आने नहीं दिया, मुझे गिल्टी महसूस हो रही है। आप यहाँ खुद हो सकते थे, फोन पर यह सब करने की बजाए इस वक़्त। एक काम कर सकते हो आप। हाफ-डे छुट्टी ले लीजिए और आ जाईए यहाँ मैं आपको कामपेनसेट करना चाहती हँ अब.”

सब कुछ साफ करते हुए कार के अंदर से आनंद ने जवाब दिया- “नहीं अदिति, मैं छुट्टी नहीं ले सकता, विशाल को शक होगा अगर मैंने छुट्टी लिया तो... वो पीछा कर सकता है, हमारे लिए खतरनाक होगा। फिकर मत करो जल्द ही मैं तुम्हारे बिस्तर पर होऊँगा तुम्हारे साथ। वैसे अभी साथ देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। अदिति मुझे तो बेहद मजा आया थैक्स वेरी मच मुऊआह्ह... बाइ चलता हूँ अब जल्द ही मिलेंगे जानेमन...”

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कड़ी_60 बेकरार अदिति

आनंद से उस सेक्स चैट के बाद अदिति के अरमान मचल उठे थे और सेक्स के लिए वो बेताब हो गई थी। उस वक़्त तो अदिति किसी से भी सेक्स के लिए तैयार हो सकती थी। क्योंकी उससे यही अब नहीं सहा जाता। वो अपने बेड पर करवटें बदलती जा रही थी बेचैनी में, और उसके जिश्म को किसी की छवन की जरूरत महसूस हो रही थी। उसके अपने हाथ खुद के जिश्म पर फेरे जा रही थी, कभी अपनी जांघों के बीच, कभी चूचियों पर, तो । कभी गले से लेकर पेट तक, फिर अपनी पैंटी के अंदर खुद की चूत को मसल रही थी जो बिल्कुल गीली हो चुकी थी।

अदिति एक गहरी साँस लेकर बेड से उठी और चलकर बाल्कनी पर गई और नीचे कि तरफ देखने लगी। उसकी आँखें उस वक्त बेशक ओम को ही ढूंढ रही थीं मगर अफसोस कोई भी नजर नहीं आया। कछ देर बाद अदिति ने अपने सेक्सुअल डिजाइर को शांत किया एक ठंडी बाथ लेकर। नहाते वक्त खुद को उंगली कर रही थी फिर रुक गई। क्योंकी उसको एक मर्द के साथ करना ज्यादा पसंद था, अपने हाथ के इश्तेमाल से ज्यादा। उस रात को विशाल के साथ एक बहुत ही गरम सेशन हुई और विशाल बहुत हैरान हुआ अदिति की चाह और गर्मी को देखकर।

अदिति ने विशाल की पड़ोसी की पत्नी होने की रोल-प्ले किया था और बहुत ही मजेदार और रोमांचक अनुभव रहा। मजे का अंत हुआ जब दोनों एक दूसरे को बाहों में लिए नींद के आगोश में खो गये सुबह तक।

मगर सुबह को अदिति फिर से गरम हो गई थी और दोबारा सेक्स करने की तमन्ना थी, मगर विशाल के साथ नहीं। अदिति को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकी एक भी चाहने वाला नजर नहीं आ रहा था उसे, जब उसको जरूरत थी तब। वरना एक दिन में 3-4 हर रोज सामने आ जाया करते थे।

विशाल जैसे ही आफिस के लिए निकला, अदिति ने आनंद को खुद फोन किया। नार्मली आनंद फोन किया करता था, मगर आज अदिति ने उससे पहले उसको काल कर दिया। वो ड्राइव कर रहा था आफिस के लिए उस वक़्त। आनंद हैरान हुआ अदिति की काल देखकर और उस वक़्त वो भी उसी के बारे में सोच रहा था। कल की सेक्स चैट के बारे में ही सोचते हुए आनंद ड्राइव कर रहा था, जब अदिति की काल आई। और रात को आनंद ने अपनी बीवी को नहीं चोदा था, सिर्फ अदिति को याद करते हए सो गया था। मतलब वो भी बेचैन था अदिति के लिए और उधर अदिति बेचैन हो गई थी और फोन कर रही थी।

आनंद ने फोन उठाया और कार पार्क करके हेलो किया।

अदिति- “आप आफिस तो नहीं पहुँचे हो ना?"

आनंद- “नहीं, अभी जा रहा हूँ, क्यों क्या हुआ जानेमन?"

अदिति- “आफिस मत जाओ आज। सीधे यहाँ आओ, मैं आपको कल की भरपाई करना चाहती हूँ...”

आनंद- “मैं अभी तुमको ही सोच रहा था मेरी जान, तुम इतनी आनिवार्य हो की मैं अपनी वाइफ को टच भी नहीं करना चाहता अब। सिर्फ तुम्हारा खयाल आता है। तुमने मेरे दिल और दिमाग पर बिल्कुल कब्ज़ा कर लिया है। तुम इतनी हाट और आकर्षक हो की मैं किसी और के बारे में सोच ही नहीं पाता हूँ। अब विशाल आफिस के लिए निकल गया होगा तभी तुम फोन कर रही हो ना? तो अभी मैं आया तो रास्ते में हम एक दूसरे को देख लेंगे ड्राइव करते वक्त। थोड़ा इंतेजार करता हूँ वो आफिस पहुँच जाएगा तब आता हूँ ओके? मगर जानेमन मुझे काम पर भी तो जाना है...”

अदिति- “नहीं आज काम पर मत जाओ ना। आज हम दोनों एक साथ वक्त गुजारेंगे, आज का दिन तुम्हारे नाम करती हूँ। तुम्हारे साथ पूरा दिन बिताना चाहती हूँ, एक छुट्टी ले लो ना आज के लिए प्लीज..”

आनंद- “हाँ ले सकता हूँ एक छुट्टी मगर एक प्राब्लम है। क्या होगा अगर विशाल ने मुझको घर पर फोन किया

और मेरी वाइफ ने जवाब देकर उससे कहा की मैं काम पर गया हुआ हूँ?"

अदिति- “मेरे खयाल से वो तुमको लैंड लाइन पर नहीं मोबाइल पर फोन करेगा, है ना?"

आनंद- "खैर, फिकर मत करो मैं कुछ करता हूँ अभी। इससे पहले की विशाल आफिस पहुँचे मैं वहाँ फोन करके बोल देता हूँ की मैं आज नहीं आ रहा...”

फिर आनंद ने आफिस फोन करके बताया की वो बीमार है और आज काम पर नहीं आ रहा है। वहाँ के मेसेंजर ने काल लिया। तब आनंद ने घर फोन करके अपनी बीवी से कहा लैंडलाइन को डिसकनेक्ट कर देने को, क्योंकी इनकम टैक्स से काल आने वाला है। और वाइफ से कहा की अगर मेरी जरूरत पड़े तो मुझको मोबाइल पर मोबाइल से काल करे। अब अगर विशाल उसके घर फोन भी करेगा तो

अदिति ने एक शावर लिया और एक लंबी सी टी-शर्ट में ना ब्रा और पैंटी के। टी-शर्ट ठीक उसकी जांघों तक आती थी और उसके निपल साफ दिख रहे थे टी-शर्ट के ऊपर, जैसे एक अंगूर टी-शर्ट के अंदर रखा

अदिति बिल्कल गरम हो चकी थी, और उसको लगता था की रफ सेक्स की जरूरत है उसको उस वक़्त, कम से कम ऐसा महसूस हो रहा था उसे। एक चूइंगम चबाते हुए वो आनंद का इंतेजार करने लगी।

आनंद की कार ने गेट में एंट्री की आधे घंटे के बाद, और ओम ने आनंद को सल्यूट करते हुए गेट खोला और तुरंत ऊपर सिर उठाकर अदिति की छत की तरफ देखा। क्योंकी उसको पता था की आनंद तो अदिति के लिए आता है वहाँ। अदिति वहीं थी और ओम के साथ मुश्कुरा दिया, जब उसकी तरफ ओम ने देखा तो।

ओम को उस वक्त पता चल गया की आज अदिति आनंद के साथ मजा करेगी। सिर्फ यह सोचते हए ओम ने अपने लण्ड को पैंट में सीधा किया। अदिति ने फिर मुश्कुराया और कमर हिलाते हुए वापस अंदर चली गई, चल रही थी तो ऐसा लग रहा था की किसी धुन के ऊपर कमर डोल रही है। क्योंकी वो टी-शर्ट उसकी गाण्ड पर इस तरह से सटा हुआ था और उसके चलने से जिस तरह से टी-शर्ट हिल रही थी तो ऐसा ही लग रहा था की अदिति डान्स स्टेप करते हुए चल रही थी।
 
चंद मिनट में आनंद अदिति के फ्लैट पर पहुँच गया। अदिति चौखट पर दरवाजा खोले हुए इंतेजार कर रही थी। एक स्वीट स्माइल के साथ अदिति ने बाहें फैलाकर आनंद का स्वागत किया और उसको जोर से बाहों में कसके हग किया और अपने होंठों को आनंद के गले पर हल्के से फेरा। जबकी उसका पूरा जिश्म आनंद के जिश्म से बिल्कुल सटा हुवा था। अदिति की बायीं टांग ने आनंद की दायीं टांग को हाफ क्रास किया हुआ था, और आनंद ने देखा की अदिति की सफेद जाँघ उसके ट्राउजर पर खुद की जांघ के ऊपर किए हुए थी, आनंद की नजर उसकी जाँघ पर थे उस वक्त।

आनंद ने फिर एक फुसफुसाहट सी आवाज में अदिति को अंदर चलने को कहा। अदिति ने चुलबुलाती सी हँसी हँसी और उसको बाहों में लिए हुए ही अंदर गई। अंदर जाते ही अदिति ने दरवाजा लाक करके अपनी दोनों टाँगों को आनंद की कमर पर कसके क्रास किया और आनंद को उसे अपने ऊपर संभालना पड़ा। आनंद खड़ा हुआ था उस वक़्त और अदिति की दोनों टाँगें उसकी कमर पर क्रॉस्ड थी तो आनंद उसको उसी पोजीशन में लिए हए । कमरे की तरफ जाने लगा। जबकी अदिति आनंद के चेहरे को और होंठों को चूमे जा रही थी। भूखी लग रही थी और लगता था आनंद को खा जाएगी।

बेडरूम में जाते ही आनंद ने अदिति को लेटाया और अपनी शर्ट और पैंट उतारकर बेड पर अदिति के पास लेटा वो भी। तब अदिति ने खिसक कर एक बेहतर पोजीशन लिया आनंद के बगल में उसके चेहरे में मुश्कुराते हुए देखते, और आनंद धीरे-धीरे अदिति की टी-शर्ट को जांघों के ऊपर उठाने लगा। फिर आनंद अदिति की नर्म जांघों पर अपनी जीभ हल्के से फेरना शुरू किया और एक हाथ से उसकी चूचियां मसलने लगा।

चूचियों को मसलते वक्त आनंद को पता चल गया की उसने ब्रा नहीं पहना हुआ है, उसकी चूचियों का नर्म एहसास अपनी हथेली में महसूस कर सकता था आनंद। जिससे उसके लण्ड में हरकतें होने लगी। तब तक आनंद टी-शर्ट को जांघों के ऊपर कर चुका था और जब उसने देखा की पैंटी भी नहीं पहनी हुई है अदिति ने तो आनंद समझ गया की वो बिल्कुल तैयार है हाट चुदाई सेशन के लिए और आनंद का जमकर खड़ा हो गया तब।

आनंद ये सोचकर और भी उत्तेजित महसूस किया की एक वाइफ जिसका पति अभी-अभी आफिस के लिए निकला है, और उस वाइफ ने अपने पति के दोस्त को अपने पास बेड पर बलाया। ये सोचते ही आनंद का लण्ड और उसने लण्ड को अदिति के जिश्म पर हल्के से लगाया। इतनी खूबसूरत और सेक्सी वाइफ अपने पति के दोस्त के साथ बिस्तर पर ऐसे ड्रेस में बिना अंडरवेर पहने हुए, क्या मस्त मौका था चुदाई के लिए। आनंद पाघल हो रहा था। वो खुद कितने दिनों से ऐसे मौके की इंतेजार में था और अचानक सब उसके सामने ऐसे आ गया था, जैसे एक सपना देख रहा हो। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की कैसे शुरू करें पहले क्या करें।

अदिति छोटी-छोटी सिसकारियां ले रही थी और उसने अपनी हथेली को आनंद की छाती को टटोलते हए धीरे धीरे उसके लण्ड तक ले गई, और आनंद के लण्ड पर हथेली को जोरों से दबाया। जो उस वक्त अंडरवेर के अंदर था। तो अदिति ने धीमी आवाज में कहा- “आप अपने अंडरवेर को निकालो ना मैं इसको खाना चाहती हूँ आज.."

आनंद जल्दी से घुटनों के बल हआ बेड पर अंडरवेर को निकालने के लिए। मगर इससे पहले के वो उसे निकालता अदिति उठी और अपने चेहरे को उसके अंडरवेर से लगाया, अपने गाल को उसके लण्ड पर फेरने लगी

फिर धीरे से अपनी उंगलियों को अदिति ने अंडरवेर की एलास्टिक के बीच किया और हौले से आनंद की अंडरवेर को नीचे करने लगी। उसकी खूबसूरत नर्म पतली और लंबी उंगलियों ने आनंद के खड़े लण्ड के ऊपरी हिस्से को छुआ, हल्के से, हौले से, जिससे आनंद के जिश्म में जैसे एक करेंट सी लगी।

अदिति अपने नजरों को उस वक्त ऊपर उठाए आनंद के चेहरे में देख रही थी और थोड़ा मुश्कुरा रही थी और थोड़ा सीरियस भी थी एक साथ। उसकी आँखें जैसे नशे की हालत में दिख रही थी और उसकी साँसें तेज चल रही थी। अदिति उस वक़्त अपने आप में नहीं थी। एक मदहोशी की हालत में थी, होश गुम थे, उसने लण्ड को हथेली में लिया और अपने गाल पर दबाकर मसला, पूरे चेहरे में रगड़ा, जीभ से चाटा, अपनी चूची पर दबाया, फिर से चाटा, फिर दूसरी चूची पर दबाया फिर आनंद को देखा।

अदिति ने हॉफते हुए भारी आवाज में आनंद से कहा- “कल आपने कार में अपने लंच टाइम में मुझपर इसका वीर्य छोड़ा था ना आनंदजी, जब आपने फिनिश किया तो मैं इसकी भूखी हो गई थी, और इसको खाना चाहती थी उस वक्त। तब से अब तक इसका इंतेजार करती रही मैं। कल मैं इसको अपने मुँह में लेना चाहती थी, अब वो सब कुछ जो कल मिस किया अब पूरा करती हूँ। आनंदजी मुझे इसकी सख्त जरूरत है आप मेरी प्यास बुझाओ आज। मैं आपको सब कुछ करने दूंगी जो भी आप मेरे साथ करना चाहते हों आज मैं पूरी तरह से आपकी हूँ ले लो मुझे आनंदजी ईसस्स.... आअहह..."

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अदिति ने यह कहकर आनंद के लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी, जैसे बेहोशी की हालत में थी। एक हाथ से लण्ड के बाकी हिस्से को दुलार रही थी और बाकी उसके मुंह में था। जिसको बड़े मजे से चूसे जा रही थी

अदिति, और आनंद बेहाल होता जा रहा था।

आनंद ऊपर छत पर देखते हुए, तब भी अपने घुटनों पर था और जबड़े दबाए हुए आनंद कराहते हुए बोला- “हाँ, मुझे भी इसकी सख़्त जरूरत थी मेरी जान, मैं भी बहुत तड़पा हूँ तुम्हारे लिए जानम, कितनी हसरत थी इसको तुम्हारे मुँह के अंदर महसूस करने की, मैं ही जानता हूँ कितना तड़पा हूँ मैं। वाह कमाल कर रही हो बेहद मजा आ रहा है अदिति और चूसो चूसती जाओ मेरी जान... और गहराई में ले लो इसे और भीतर जाने दो ना..”

अदिति ने एक शैतानी मुश्कराहट के साथ आनंद के चेहरे में देखा और अंडरवेर को जमीन पर निकाल फेंका। तब तक लण्ड को मुँह में लिए हुए थी। फिर अदिति ने लण्ड को दोनों हाथों में थामा, और उसके ऊपर हाथ चलाया, फोरस्किन को ज्यादा नीचे किया और अपनी जीभ को ऊपर छेद पर गोल-गोल घुमाने लगी, जिससे आनंद को अपने जिश्म को टेढ़ा मेढ़ा मोड़ना पड़ा, उसके जिश्म में एक सरसराहट सी हुई और उसने तड़पती आवाज में- “आहह... सस्स्स्श ह उफफ्फ..” जैसे शब्द कहे।

फिर अदिति ने एक हाथ से आनंद के बाल को नीचे सहलाया, और लण्ड को फिर से मुँह में ले लिया चूसते हए। और अपनी नजरें उठाकर ऊपर आनंद के चेहरे में देखने लगी।

आफिस में जब विशाल ने देखा की आनंद अब तक नहीं आया है तो उसने आनंद की मोबाइल पर फोन किया। आनंद की मोबाइल बजी जब उसका लण्ड अदिति के मुँह में था।

***** *****
 
कड़ी_61 आनंद ने चुदाई जारी रखी

आनंद बड़े मजे से अदिति की चूत को चाट चूस रहा था जब विशाल ने फोन किया उसको। वो काल नहीं लेना चाहता था, क्योंकी अदिति को भी चूसते हुए खुद आनंद एंजाय कर रहा था उस वक्त। कीन-चार बार फोन के बजने के बाद आनंद ने स्क्रीन देखा और अदिति से धीरे से कहा- “विशाल का है...”

मगर अदिति को परवाह नहीं थी। उसने आनंद को चूसना जारी रखा जब आनंद ने काल लिया तब भी। आनंद ने विशाल को एक बीमार आदमी की आवाज में जवाब दिया।

आनंद- “हाँ विशाल, आज अच्छा नहीं महसूस कर रहा हूँ यार इसीलिए एक सिक छुट्टी ले लिया आज..."

विशाल- “ओह्ह... अच्छा। मैं फिकर कर रहा था की तुम क्यों आज आफिस नहीं आए। ओके फिर ठीक है आराम करो कल मिलते हैं फिर। बाइ..."

अदिति आनंद को अपने पति से बात करते सुन रही थी फिर भी मुँह में आनंद का लण्ड लिए चूसती जा रही थी और आनंद के चेहरे में देखते हुए एक मुश्कुराहट के साथ एक आँख मारी। आनंद ने मोबाइल रखकर अदिति के सिर को अपने नीचे दबाया, अपने लण्ड को अदिति के मुँह में अच्छी तरह से महसूस करते हुए।

अदिति की साँस फूल गई और लण्ड को मुँह से निकालते हुए कहा- “आपने क्यों ऐसा किया? यह बहुत बड़ा

और लंबा है, मेरे मुँह में पूरा नहीं समायेगा, मेरे गले के बिल्कुल अंदर डाल दिया आपने इतना मत धकेलो ना..."

तब आनंद ने अदिति के सिर के बाल पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपनी जीभ से उसका गाल चाटा, फिर उसके होंठों को चाटा, तब तक अदिति ने अपनी जीभ भी बाहर निकाल दिया और दोनों ने एक दूसरे की जीभ

चाटी। रस बहते हुए दोनों के जीभ और फिर दोनों एक हाट कामुक किस में डूब गये।

किस करते हुए दोनों की बाहें एक दूसरे के जिश्म पर फिर रही थीं। फिर आनंद ने अदिति को पीठ पर लेटाया

और किस खतम करके अपने मुँह को अदिति का मुँह छोड़कर गले पर फेरते हुए नीचे की तरफ बढ़ा और उसकी चूचियों पर रुका। पहले उसने एक चूची को दबाया और मसला जबकी अदिति बेड पर अपने जिश्म को स्ट्रेच करते हुए खुद को मदहोशी में महसूस किए जा रही थी किसी और दुनियां में खोकर।

चूचियों को खूब चूसने और मसलने के बाद, निपल को दाँतों के बीच हल्के से दबाया, बिना अदिति को हर्ट किए और धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ता गया चूमते चाटते हए। अदिति की नाभि पर रुका, अपनी जीभ को गोल गोल घुमाया वहाँ पर और अदिति बेकाबू होती गई। उसने चादर को अपनी मुट्ठी में कसके दबोचा और खींचा सिसकारियों के साथ। फिर बदन को बेड पर इधर से उधर मोड़ रही थी तेज साँसों के साथ। उसकी आँखें नशीली हो गई थीं लगता था शराब पिया हो या किसी ड्रग की नशे की हालत में थी अदिति उस वक़्त।

नाभि छोड़कर आनंद ने धीरे-धीरे थोड़ा नीचे अपनी जीभ को फेरना शुरू किया थोड़ा सा दबाकर। अदिति की शेव की हुई हिस्से पर अपनी जीभ पर आनंद ने थोड़ा चुभन महसूस किया छोटे-छोटे बालों की वजह से। मगर जीभ को फेरना बरकरार रखा और ज्यादा नीचे की तरफ बढता गया धीरे-धीरे, आँखों को ऊपर अदिति के चेहरे में। देखते हए। जीभ को चूत की शुरुवात पर दबाया जिससे अदिति की सिसकारियों से कमरा गूंज उठा और आनंद ने हौले से जीभ को चूत की पंखुड़ियों के बीच फेरना और रगड़ना शुरू किया।

अपने हाथ से उसकी जांघों को सहलाते हुए आनंद अदिति की गीली चूत में अपनी जीभ को फँसाता गया और अदिति बिल्कुल होश-ओ-हवास खोने लगी जिश्म को रौंददते हुए उसकी जिश्म में एक कंपकंपी होने लगी थी। आनंद ने जीभ को चूत की छेद में ठूसा और जीभ को घुमाया वहाँ पर और अदिति बेकाबू होती गई “आह्ह... इसस्श... उफफ्फ." जैसी आवाजें करते हुए।

अदिति कभी दोनों टाँगों को ऊपर उठा रही थी, तो कभी कमर और चूतड़ को ऊपर कर रही थी, फिर कभी जिश्म को मोड़ रही थी, तो कभी सिर उठाकर आनंद को देख रही थी। बेहाल थी और अपनी मुट्ठी में आनंद के सिर के बालों को भरके जोर से अदिति ने खींचा। अदिति ने गिड़गिड़ाना शुरू किया और आनंद को अपने अंदर घुसाने की बिनती करने लगी।

अदिति- “अब करो आनंदजी, मुझसे और नहीं सहा जा रहा... अंदर आ जाओ... बस करो ऐसे करना अब आई नीड इट पेनेटरेट मी, आनंदजी आई वॉट इट डीप इनसाइड मी प्लीज़्ज़..."

* * * * * * *
 
आनंद को अदिति को उस हालत में देखकर बहुत मजा आ रहा था। आनंद ने दाँतों को दबाए हुए कहा- “जानती हो कैसा मजा आता है अपने दोस्त की बीवी को इस तरह नंगी उसकी बेड पर उसके जिश्म को चूमने चाटने से जानेमन? इस मजे का बयान करना नामुमकिन है मेरी जान... जो खुशी और मजा मिलता है मैं क्या कहूँ हाए रे मेरी किश्मत... एक मर्द के लिए इससे बड़ी शायद कोई खुशी हो ही नहीं सकती। खास कर जब औरत उसके । दोस्त की बीवी हो, खुद की नहीं। यह एक मर्द के लिए एक बहुत ही स्पेशल मौका होता है जानम। मुझको इस

लम्हे का पूरा मजा लेने तो दो मेरी जान, वाह... मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं एक दिन इतना खुशकिश्मत भी हो सकता हूँ, खासकर तुम जैसी खास स्पेशल जवान सेक्सी हाट औरत के साथ इस हालत में उसके बेड पर ऐश करना... क्या किश्मत पाया है मैंने मेरी जान... इसके लिए किसका शुक्रिया अदा करूँ ऊपर वाले का या तुम्हारा? मुउआह्ह.."

अदिति ने तड़पती आवाज में फिर मिन्नतें की- “मेरे ऊपर आओ ना आनंदजी, मुझे अब पेनेटरेट करो ना प्लीज... मुझसे सहा नहीं जा रहा है अब प्लीज... आनंदजी प्लीज़्ज़...”

और आनंद से भी नहीं रहा गया और वो अदिति के ऊपर चढ़ा आखीर में। अदिति ने टाँगों को फैला दिया, आनंद बीच में गया उसकी दोनों टाँगों के, और देर ना करते हुए अपने तने हुए लण्ड को अदिति के अंदर डालने ही वाला था की अदिति ने खुद उसके मोटे लण्ड को हाथ में लिया और अपने अंदर डाल लिया और कमर को उठाकर पोजिशनिंग की और सिसकारियों के साथ जोर से- “उफफ्फ... सस्स्स्स ...” करती गई आनंद के नीचे हिलते हुए।

तब आनंद ने अपनी बाहों को अदिति के नीचे करके उसके जिश्म को अपने जिश्म से सटाया। अदिति की खूबसूरत मुलायम चूचियां आनंद की छाती से बिल्कुल सट गईं और आनंद ने अपने लण्ड को अदिति की गहराई में धक्का देकर ठूँसा तो अदिति ने एक झटका देते हुए साँस लिया और अपनी बाहों को आनंद के कंधों पर किया और बंद आँखों से अदिति के मुँह ने आनंद के मुँह को तलाश किया। मगर आनंद का कंधा उसके मुँह से लगा तो वहीं अदिति ने भर मुँह आनंद के कंधे को दबोचा और दाँत काटते हुए उसको चूसा जी भर के। जबकी उसकी चूत के अंदर आनंद का लण्ड आता-जाता रहा। और अदिति भी अपनी कमर हिलाते हुए आनंद के लण्ड को अपने अंदर महसूस किए जा रही थी। जबकी आनंद अदिति को उस तरह से मदहोशी में बेकाबू और बेहाल होते देख रहा था उसे चोदते हुए।

अटकती हए साँसों के साथ अदिति ने आँखें खोलकर आनंद के पशीने में तर हए चेहरे में देखा और तड़पती आवाज में चुदवाते हुए कहा।

अदिति- “कल मुझको बहुत बुरा लगा था जब आपने कार में हाथ मारे थे आनंदजी। उसी वक्त आपको देना चाहती थी मैं, जिस वक्त आप मूठ मार रहे थे। मैं आपको उस वक्त ऐसे महसूस करना चाहती थी अपने अंदर जैसे अभी इसस्स्स..”

अदिति की साँसें फूल रही थी फिर भी अटकती साँसों के बीच रह-रहकर गहरी साँसें लेते हुए बोलती जा रही थी। जबकी उसकी चूत के अंदर आनंद का लण्ड धक्का देता जा रहा था लगातार।

अदिति ने बोलना जारी रखा- “मुझे बहुत अफसोस हुआ था कल, आपको सोचकर मेरा दिल तड़प गया था कल, आपके लिए बहुत सारी महसूस किया मैंने उस वक्त आनंदजी। मुझे सोचकर आप मूठ मार रहे थे और मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकी उस वक़्त, मुझे उसके लिए माफ करना आनंदजी। उसके बदले अब जितना चाहे एंजाय करो आनंदजी, मजे लूटो अब आनंदजी। हाँ आपकी दोस्त की पत्नी हूँ और आपको खुश कर रही हूँ,

आपको ऐश करवा रही हूँ अपने गरम जिश्म से आनंदजी। असल में मुझे भी इसकी सख्त जरूरत थी आनंदजी, तो मैं खुद को भी खुश कर रही हूँ अब, इट्स माई प्लेज़र एज वेल। आह, इसस्स्स... उफफ्फ... हाँ कितना अच्छा लग रहा है आनंदजी और करो, ज्यादा करो और तेज, करते जाओ हाँ हाँ मजा आ रहा है आनंदजी ओह माई गोड... इसस्स्स ... आई वांट मोर... मोर... और और हाँ हाँ हाँ..."

आनंद अदिति की बातों को सुनकर इतना उत्तेजित हुआ की उसके जिश्म में एक अजीब लहर दौड़ी और उसके कान से उन बातों का असर कुछ ऐसा हुआ की कान से दिमाग से होते हुए उसके खून की लहर ऐसी दौड़ी की जिश्म के हर रग में खून ऐसा दौड़ा की जैसे बिना चोदे ही झड़ने वाला था, वो अपने लण्ड के धक्कों को तेजी से बढ़ाता गया, अदिति के चेहरे और चूचियों को देखते हुए, की झड़ने का नौबत आ गई और चिल्लाया। जोर से धक्कों को और भी तेजी के साथ बढ़ाते हुए अदिति के चूत में। अदिति उन रफ़्तार भरे धक्कों से हिल रही थी। उसकी चूचियां जैसे जिश्म से उखड़ जाएंगी लगता था। अदिति की तड़प और सिसकारियां बढ़ती गई और जोर जोर से आनंद को दोनों बाहों में जकड़कर अपने सिर को तकिये पर पटकी।

फिर अदिति चिल्लाई- “ओह माई गोड... इसस्स्स... आनंद जी आनंद जीईई इसस्स्स्स... मैं झड़ रही हॅन् वाओ...

इट्स फॅटस्टिक आनंद जीईई..” अदिति बिस्तर पर रेंगने लगी उसकी चूची ऊपर छत के तरफ खड़ी थी जैसे उसके निपल लण्ड के जैसे खड़े हो गये थे।

आनंद से रहा नहीं गया और अपने लण्ड को बाहर निकालने ही वाला था की अदिति ने आनंद की कमर को अपने ऊपर दबाते हुए और हाँफते हुए कहा- “बाहर मत निकालो आनंदजी, मेरे अंदर ही झड़ने दो। मैं पिल्स ले रही हूँ फिकर नहीं करने का, आप अंदर ही झड़ आओ... मुझे भी ज्यादा मजा आएगा."

आनंद ने जितना हो सका उतनी गहराई में लण्ड को ठूँसा झड़ते हुए, अपने सारे वीर्य को अदिति की चूत के अंदर ही छोड़ दिया। हाँफते हुए गुर्राते हुये आनंद की आवाजें दबी हुए दाँतों के बीच कुछ ऐसे निकली- “आगघ्ग... हाँ बेबी माई लोव... हाँ इट्स ग्रेट फीलिंग यू डीप इनसाइड वा... क्या बात है तुझमें अदिति वाह वाह... आघघग इसस्स्स...” और अपने पूरे जिश्म का वजन आनंद ने अदिति के जिश्म के ऊपर कर दिया।

उसके के नीचे अदिति एक साँप की तरह रेंगते हुए सिसकारियां ले रही थी तड़पते हुए।

जब दोनों थोड़े ठंड हुए तो उन दोनों के हॉफने की आवाज सुनाई दे रही थे कमरे में। कुछ देर आनंद अदिति के ऊपर लेटा रहा उसके माथे से पशीना अदिति की पलकों पर टपक रहा था। और अदिति आनंद के जिश्म का वजन अपने जिश्म के ऊपर सह रही थी। उसके चूचियां बिल्कुल आनंद की छाती से कुचली हुईम थी, और उस वक्त उसकी चूचिया एक हवा निकले हुआ फुटबाल के जैसे दिख रही थी।

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* * *
 
कड़ी_62 पार्टी

और एक रात को विशाल के एक कोलीग के यहाँ एक पार्टी था। वो अपनी प्रमोशन का एक छोटा सा सेलेब्रेशन कर रहा था और आफिस के कालीग्स और उनकी बीवियों को और कंपनी के हेड्स को इन्वाइट किया हुआ था। सभी शादीशुदा कपल्स को इन्वाइट किया गया था। मगर सभी बीवियां वैसी पार्टियों में जाना पसंद नहीं करती हैं। तो पार्टी में सबको पहले से ही पता था की कुछ गिने चुने दोस्तों की बीवियां आएंगे पार्टी में रात को।

इसलिए की आनंद पार्टी में आने वाला था तो विशाल ने अदिति को साथ ले जाने को डिसाइड किया। विशाल ने सोचा की शराब पीकर नशे में होने की हालत में आनंद और अदिति को पार्टी में वाच करेगा। आनंद के साथ

उसने प्लान बनाया की वही अपनी कार में आएगा, उन दोनों को घर से पिकप करेगा और पार्टी खतम होने के बाद वही विशाल और अदिति को वापस घर ड्रॉप करेगा। आनंद तो बहुत खुश था यह सब करने को बेशक। । पार्टी में जाने के लिए, क्योंकी यह पहली बार था की विशाल ने उसको ऐसी पार्टी में चलने के लिए कहा था।

अदिति पहले कभी भी विशाल के साथ किसी पार्टी में नहीं गई थी रात को, जब से शादी हुई थी। तो जाने से पहले घर पर दोनों डिसाइड कर रहे थे की अदिति कौन सी ड्रेस पहनेगी वहाँ जाने के लिए? अदिति के सभी कपड़े फर्स्ट क्लास ही तो थे, तो फाइनल डिसिशन हआ की एक साड़ी में जाएगी। साड़ी जिसकी ब्लाउज़ बैकलेश थी, बल्की जो एक ब्रा के जैसी दिखती थी। काले रंग की साड़ी और ब्लाउज़ थे। उस कपड़े के मेटीरियल पर कुछ चमकते हुए मोती भी जड़े थे। रात के लिए एक पर्फेक्ट ड्रेस थी, और उसमें अदिति बस कयामत लग रही थी। बहुत ही हाट और सेक्सी दिख रही थी यह तो कहने की जरूरत ही नहीं। क्लीवेज छुपाने का बिल्कुल कोई चारा नहीं था। पल्लू इतनी ट्रान्स्परेंट थी की क्लीवेज छुपाना नामुमकिन था, उसके ऊपर से भी साफ दिख रहा था।

घर से निकलने से पहले विशाल ने सोचा कैसे सभी मर्द पार्टी में अदिति पर नजरें रखेंगे, खासकर आनंद। अदिति की कमर, नाभि, उसकी कटाव, गाण्ड, पतली कमर, उसकी सिलोवेट निखरकर सामने आ रही थी। उसके खुले हुए बाल जो उसकी पीठ के नीचे करीब उसकी गाण्ड तक आते हैं, पीठ को थोड़ा बहुत तो ढंक रहे थे। फिर काले बाल के बीच उसकी गोरी नंगी पीठ इतना सेक्सी लग रही थी की किसी भी मर्द की नीयत डांवांडोल हो सकती थी।

जब रात को 8:00 बजे आनंद दोनों को लेने आया तो वह दोनों नीचे गेट की गुमटी से पास इंतेजार कर रहे थे। क्योंकी आने से पहले आनंद ने फोन करके बता दिया था की वो करीब पहुँच गया है। ओम घर जाने वाला था

और अदिति पर आँखें जमाए रखा था, जब दोनों आनंद की कार का इंतेजार कर रहे थे। और विशाल ने जानबूझ कर अदिति को ओम के करीब खड़ी होने दिया था और चोरी-छिपे दोनों को देख रहा था। अदिति को पता था की वो बहुत हाट दिख रही थी और ओम बेकरार हो रहा था। फिर भी अदिति बार-बार उसको देख रही थी और दाँतों में अपने होंठ को दबा रही थी मुश्कुराते हुए।

आनंद आया, बाहर निकला पीछे का दरवाजा खोलने के लिए अदिति के लिए। जबकी विशाल आगे गया आनंद के पास बैठने को। जब अदिति झुक कर कार के अंदर घुस रही थी तो आनंद ने अदिति के पीठ और साड़ी में लिपटी गाण्ड पर अपना हाथ अच्छी तरह से दबाया। और ओम ने भी वो सब देखकर अपने पैंट में अपने लण्ड

की हरकत को रोकने की कोशिश किया।

ओम ने खुद से कहा- “लगता है आज रात को अदिति अपने पति और उसके दोस्त दोनों से चुदाई करेगी, वाउ। आई विल मिस दैट...” ऐसा ओम ने सोचा पर जरूरी नहीं की ऐसा ही होगा।

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