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"क्या हुआ? कैसा शोर है यह."कहते हुए विजय ने श्रुति के रूम में प्रवेश किया तो देखता है की श्रुति अपनी नौकरानी कावेरी पर बरस रही थी.
" तुझे कितनी बार बोलना पड़ेगा मेरी चीज़ों को हाथ मत लगाया कर. तुझे कोई बात समझ नहीं आती है क्या?"
"अरे क्या हुआ श्रुति बेटा? सब ठीक तो है ना?" सौंदर्या ने फिक्र मंदी से श्रुति से कहा.
" देखो ना मामा मैंने इस जाहिल को कितनी बार कहा है की ज़रा अपनी औकात में रहा करे और मेरी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे पर इसे कोई बात समझ में ही नहीं आती है और उप्पर से मुझसे जबान चला रही है." चिल्लाते हुए श्रुति ने कहा.
"क्यों रे कावेरी, जब तुझसे कहा गया है की किसी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे तो क्या जरूरत है किसी भी चीज़ों को यहां से वहां करने की." सौंदर्या ने कावेरी को दांते हुए कहा.
"नहीं मालकिन जब से श्रुति बेबी ने अपनी चीज़ों को छूने से मना किया है मैंने इनकी किसी भी चीज़ों को हाथ तक नहीं लगाया है." अपनी सफाई देते हुए कावेरी ने कहा.
" तो मतलब मेरी बेटी झूठ बोल रही है, ऐसे कैसे तुम्हारे ना छूने से इसकी चीज़ खो सकती है." सौंदर्या ने कावेरी को चिल्लाते हुए कहा. मामला को बिगड़ता हुआ देख के वियाजे ने श्रुति से कहा
" श्रुति बेटा पहले यह बताओ तुम्हारी कौनसी चीज़ गुम हुई है."
"मेरा हेयर ड्राइयर पापा." श्रुति ने जल्दी से कहा.
" अच्छा तो यह क्या है? " विजय ने बेड के तकिये को हटते हुए कहा जहां से उन्हें हेयर ड्राइयर का वाइयर दिख रहा था. इस पर जल्दी से सौंदर्या ने कहा
" जरूर इस कावेरी ने रखा होगा."
" नहीं मालकिन मैंने नहीं रखा..." कावेरी ने और भी कहना चाहा पर विजय ने उसे हाथ के इशारे से रोक दिया और कहा की
" कावेरी तुम जाओ अपना काम करो." यह सुन के कावेरी वहां से फौरन चली गयी. फिर विजय ने श्रुति की तरफ पलटते हुए कहा,
"बेटी अपने बडो से इस तरह से बात नहीं करते, जब तुम छोटी थी और तुम्हारी मां को पार्टी करने से फुर्सत नहीं मिलती थी तो यही कावेरी ही तुम्हारा ख्याल रखती थी. और तुम उससे इस तरह से बात कर रही हो? अगर आज तुम्हारी कोई भी चीज़ खो गयी थी तो उससे अच्छे से पूछती , इतना हाइपर होने की क्या जरूरत है?"
"आप उस दो ताकि की नौकरानी को चिल्लाने की बजाए मुझे और मेरी बेटी को दोष दे रहे हो, उसकी हिम्मत कैसे हुई इतना ज़ाबान चलाने की." सौंदर्या ने गुस्सा होते विजय से कहा.
"बिगाड़ लो, बिगाड़ लो अपनी बेटी को बाद में खुद ही पछताॉगी." कहते हुए विजय कमरे से बाहर निकल गया.
"मामा! बजाए उस कावेरी को डाँटने के पापा मुझे ही चिल्ला रहे है, इट'से नोट फेयर, में पापा से बात नहीं करूँगी अब." श्रुति ने मुंह बनाते हुए कहा.
"नहीं बेटी ऐसा नहीं कहते तुम तो जानती हो ना अपने पापा को.हर जगह उन्हें इंसानियत दिखाने का शौक रहता है. कभी बिना किसी वजह चॅरिटी करते है तो काहबी कुछ और. चोदो उनको, तुम जाओ अपने कॉलेज जाने की तैयारी करो." सौंदर्या ने अपनी बेटी को समझते हुए कहा.
" वैसे क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही साज धज रही हो, डेट पे जा रही हो क्या?" सौंदर्या ने चोदते हुए श्रुति से कहा.
"ओफफ़ो मामा आप भी ना! में तो रोज़ ऐसे ही जाती हूँ, और रही बात डेट वाते की तो अभी कोई ऐसा मिला नहीं है मुझे जिसके साथ डेट पे जा जाए." श्रुति ने जल्दी से सफाई दी
." अच्छा बाबा ठीक है. लेकिन ज़रा कोई ढंग का ढूंढ़ना जो हमारी ही स्टेटस का हो."
"अरे मामा आप भी ना यह क्या बातें करने भात गयी. ओके मामा मुझे लेट हो रहा है में तैयार होने जा रही हूँ." कहते हुए श्रुति वही हेयर ड्राइयर से अपने बालों को सेट करने लगी.
"ओके ठीक है!! तुम अपनी तैयारी करो. और कॉलेज जाने से पहले ब्रेकफास्ट करते हुए जाना. "सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर जाते हुए कहा.
"नो मामा में फ्रेंड्स विल भी वेटिंग फॉर में और ई आम गेटिंग लेट फॉर डेठ."
"ओके ठीक है. आस यू विश." कहते हुए सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर चली गयी.
श्रुति अपनी कार से अपने कॉलेज पहुंचती है. जब वो कॉलेज के अंदर एंट्री करी तो हर किसी की नज़र उसी पर ही टिकी हुई थी. और होती भी क्यों नहीं आज उसने इसी के लिए तो इतनी तैयारी करी थी, वो जानना चाहती थी लोगों की नजारे में उसके लिए क्या अहमियत है. श्रुति एक 20 साल की पड़ी जैसे लगती थी. गोरे गाल, लंबे बाल, नीली आँखें, तीखे नैन नक्श. एकदम मासूम सी लग रही थी. उसने इस वक्त मिनी स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था, लड़के तो लड़के, लड़कियां भी उसे ही निहार रही थी. पर किसी लड़कों की हिम्मत नहीं होती थी उससे बात करने की या फिर अगर कोई उससे दोस्ती करना भी चाहता था तो ज्यादा देर टिक नहीं पाता था, क्योंकि वो किसी को ज्यादा भाव नहीं देती थी. [/color]
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"क्या हुआ? कैसा शोर है यह."कहते हुए विजय ने श्रुति के रूम में प्रवेश किया तो देखता है की श्रुति अपनी नौकरानी कावेरी पर बरस रही थी.
" तुझे कितनी बार बोलना पड़ेगा मेरी चीज़ों को हाथ मत लगाया कर. तुझे कोई बात समझ नहीं आती है क्या?"
"अरे क्या हुआ श्रुति बेटा? सब ठीक तो है ना?" सौंदर्या ने फिक्र मंदी से श्रुति से कहा.
" देखो ना मामा मैंने इस जाहिल को कितनी बार कहा है की ज़रा अपनी औकात में रहा करे और मेरी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे पर इसे कोई बात समझ में ही नहीं आती है और उप्पर से मुझसे जबान चला रही है." चिल्लाते हुए श्रुति ने कहा.
"क्यों रे कावेरी, जब तुझसे कहा गया है की किसी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे तो क्या जरूरत है किसी भी चीज़ों को यहां से वहां करने की." सौंदर्या ने कावेरी को दांते हुए कहा.
"नहीं मालकिन जब से श्रुति बेबी ने अपनी चीज़ों को छूने से मना किया है मैंने इनकी किसी भी चीज़ों को हाथ तक नहीं लगाया है." अपनी सफाई देते हुए कावेरी ने कहा.
" तो मतलब मेरी बेटी झूठ बोल रही है, ऐसे कैसे तुम्हारे ना छूने से इसकी चीज़ खो सकती है." सौंदर्या ने कावेरी को चिल्लाते हुए कहा. मामला को बिगड़ता हुआ देख के वियाजे ने श्रुति से कहा
" श्रुति बेटा पहले यह बताओ तुम्हारी कौनसी चीज़ गुम हुई है."
"मेरा हेयर ड्राइयर पापा." श्रुति ने जल्दी से कहा.
" अच्छा तो यह क्या है? " विजय ने बेड के तकिये को हटते हुए कहा जहां से उन्हें हेयर ड्राइयर का वाइयर दिख रहा था. इस पर जल्दी से सौंदर्या ने कहा
" जरूर इस कावेरी ने रखा होगा."
" नहीं मालकिन मैंने नहीं रखा..." कावेरी ने और भी कहना चाहा पर विजय ने उसे हाथ के इशारे से रोक दिया और कहा की
" कावेरी तुम जाओ अपना काम करो." यह सुन के कावेरी वहां से फौरन चली गयी. फिर विजय ने श्रुति की तरफ पलटते हुए कहा,
"बेटी अपने बडो से इस तरह से बात नहीं करते, जब तुम छोटी थी और तुम्हारी मां को पार्टी करने से फुर्सत नहीं मिलती थी तो यही कावेरी ही तुम्हारा ख्याल रखती थी. और तुम उससे इस तरह से बात कर रही हो? अगर आज तुम्हारी कोई भी चीज़ खो गयी थी तो उससे अच्छे से पूछती , इतना हाइपर होने की क्या जरूरत है?"
"आप उस दो ताकि की नौकरानी को चिल्लाने की बजाए मुझे और मेरी बेटी को दोष दे रहे हो, उसकी हिम्मत कैसे हुई इतना ज़ाबान चलाने की." सौंदर्या ने गुस्सा होते विजय से कहा.
"बिगाड़ लो, बिगाड़ लो अपनी बेटी को बाद में खुद ही पछताॉगी." कहते हुए विजय कमरे से बाहर निकल गया.
"मामा! बजाए उस कावेरी को डाँटने के पापा मुझे ही चिल्ला रहे है, इट'से नोट फेयर, में पापा से बात नहीं करूँगी अब." श्रुति ने मुंह बनाते हुए कहा.
"नहीं बेटी ऐसा नहीं कहते तुम तो जानती हो ना अपने पापा को.हर जगह उन्हें इंसानियत दिखाने का शौक रहता है. कभी बिना किसी वजह चॅरिटी करते है तो काहबी कुछ और. चोदो उनको, तुम जाओ अपने कॉलेज जाने की तैयारी करो." सौंदर्या ने अपनी बेटी को समझते हुए कहा.
" वैसे क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही साज धज रही हो, डेट पे जा रही हो क्या?" सौंदर्या ने चोदते हुए श्रुति से कहा.
"ओफफ़ो मामा आप भी ना! में तो रोज़ ऐसे ही जाती हूँ, और रही बात डेट वाते की तो अभी कोई ऐसा मिला नहीं है मुझे जिसके साथ डेट पे जा जाए." श्रुति ने जल्दी से सफाई दी
." अच्छा बाबा ठीक है. लेकिन ज़रा कोई ढंग का ढूंढ़ना जो हमारी ही स्टेटस का हो."
"अरे मामा आप भी ना यह क्या बातें करने भात गयी. ओके मामा मुझे लेट हो रहा है में तैयार होने जा रही हूँ." कहते हुए श्रुति वही हेयर ड्राइयर से अपने बालों को सेट करने लगी.
"ओके ठीक है!! तुम अपनी तैयारी करो. और कॉलेज जाने से पहले ब्रेकफास्ट करते हुए जाना. "सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर जाते हुए कहा.
"नो मामा में फ्रेंड्स विल भी वेटिंग फॉर में और ई आम गेटिंग लेट फॉर डेठ."
"ओके ठीक है. आस यू विश." कहते हुए सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर चली गयी.
श्रुति अपनी कार से अपने कॉलेज पहुंचती है. जब वो कॉलेज के अंदर एंट्री करी तो हर किसी की नज़र उसी पर ही टिकी हुई थी. और होती भी क्यों नहीं आज उसने इसी के लिए तो इतनी तैयारी करी थी, वो जानना चाहती थी लोगों की नजारे में उसके लिए क्या अहमियत है. श्रुति एक 20 साल की पड़ी जैसे लगती थी. गोरे गाल, लंबे बाल, नीली आँखें, तीखे नैन नक्श. एकदम मासूम सी लग रही थी. उसने इस वक्त मिनी स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था, लड़के तो लड़के, लड़कियां भी उसे ही निहार रही थी. पर किसी लड़कों की हिम्मत नहीं होती थी उससे बात करने की या फिर अगर कोई उससे दोस्ती करना भी चाहता था तो ज्यादा देर टिक नहीं पाता था, क्योंकि वो किसी को ज्यादा भाव नहीं देती थी. [/color]