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"हम..आइडिया तो तेरा अच्छा है..मगर साले अगर हम इन्हें जाने दिए तो यह साले उस लड़की के साथ वास्तव में वो सब करेंगे जो तू बता रहा था." रोहन को खामोश देखा तो परवेज़ ने कहा.
"हां तो करने देना!! हमें क्या फर्क पढ़ता है? और वैसे भी हमारे पास इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है. और यह साले राइस जाड़े, यह तो इन लोगों का शौक है. मान भी लो की हम इन्हें आज ऐसा करने से रोकते है तो क्या यह साले कल या किसी और दिन...उस लड़की को चोद देंगे क्या...? कहते हुए रोहन थोड़ा रुका फिर कहा "एक और बात बोलू तुझे? मुझे नहीं लगता की यह सब करने से उस लड़की को भी कोई ज्यादा फर्क पड़ेगा..आबे यह लोग पहले से ही खाए पिए रहते है. यह तो इनके लिए आम बात है..अभी यह लोग उसकी सेक्स की वीडियो बनाएँगे फिर उसे इंटरनेट पर डालेंगे फिर थोड़े दिन तक उस लड़की के बारे में लोग चर्चा करेंगे..फिर उसके बाद किसी और लड़की का सेक्स वीडियो इंटरनेट पर आएगा और यह लोग पहले वाले किससे को भूल जाएँगे..मेरा यह कहने का मतलब है की जब इन्हें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पढ़ता तो हम क्यों इनके पीछे अपना नुकसान करे."
"हम...सही कहा तूने जब उस लड़की को ही ज्यादा फर्क नहीं पढ़ने वाला तो हम क्यों अपना नुकसान करे. ठीक है में समझ गया तेरी बात. तो कैसे राजी करे इन्हें अपने साथ चलने को? " परवेज़ ने कहा.
"करना क्या है.अभी इन्हें अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर लेकर चलते है. फिर वहां पहुंचने के बाद इनमें से किसी एक को अकेले बुलाकर धँकाएँगे की अगर तुम लोगों ने पुलिस में हमारी कंप्लेंट करी तो हम उस लड़की को सब कुछ सच सच बता देंगे जो तुम लोग उसके साथ में करने वाले हो." रोहन ने कहा.
"पर रोहन!! में क्या कहता हूँ...उन्हें वहां धमकाने से अच्छा है की हम उन्हें यही से धमका कर लेकर जाते है ताकि हमें अपनी पिस्तौल का ज़ोर ना दिखना पड़े " परवेज़ ने कहा.
"कहा तो तूने ठीक है पर , में सिर्फ़ उन्हें इस बात पर नहीं धमकाना चाहता की वो लोग उस लड़की के साथ कुछ गलत करने वाले है. बल्कि में चाहता हूँ की उनके दिलों पर हमारा खौफ भी बना रहे , और वो सिर्फ़ हम अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर ही कर सकते है." रोहन ने परवेज़ को समझाते हुए कहा.
"ओके ठीक है!! तू जैसा बोलता है वैसा ही करेंगे. पर प्लान क्या है? " परवेज़ ने रोहन से कहा.
"हम दोनों जल्दी से अपना खाना खत्म करके बाहर अपनी गाड़ी में वेट करेंगे यह लोग के बाहर आने का. फिर जब यह लोग बाहर आने के बाद जैसे ही अपनी गाड़ी के अंदर भइतने जाएँगे हम चुपके से ताकि और लोगों को पता ना चल जाए इनके पीछे पिस्तौल दिखा के इन्हें धमका के गाड़ी के अंदर भात जाएँगे." रोहन, परवेज़ को समझाते हुए कहा.
"ओह हां यह ठीक रहेगा. पर अगर लड़कियों की कांपती के ऊपर रखेंगे तो ठीक रहेगा, क्योंकि वो ज्यादा डरती है.हिहिहीही." परवेस ने कहा.
"तू साले नहीं सुधरेगा. ठीक है लेकिन ज़रा होशियारी से काम लेना पड़ेगा कहीं उन लड़कों में कोई हीरो गिरी दिखाया तो मुसीबत हो जाएगी या फिर उन लड़कियों में से कोई शोर शराबा ना करे." रोहन समझने लगा परवेज़ को.
"ओके बॉस!! टेन्शन ना लो में सब संभाल लूँगा. कोई पहली बार तो थोड़े ही हम यह काम कर रहे है. याद हैं ना इससे पहले हम ने उस मेहरा फॅमिली को कैसे हैंडिल किया था?" परवेज़ ने कहा.
"हां याद है लेकिन जो उस वक्त तूने उस मेहरा के लड़के को घायल किया था वो दोबारा नहीं करना, हमें उन का सिर्फ़ इस्तेमाल करना है, उनको चोट नहीं पहुचाना है. समझा?" रोहन ने कहा.
"अगर कही वो सब लोग कोई होशियारी करे तो?"
"वो लोग ऐसा वैसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि मुझे पता है यह साले आमेर बाप के लौंदो की सिर्फ़ जेबें ही भारी रहती है . इनके अंदर दिल गुर्दा नहीं होता है. ज़रा सा इन्हें डराव साले यह वही मूठ देते है.. फिर भी अगर कुछ ज्यादा उछल कूदी करे तो रख के देना एक हाथ. और अगर फिर भी कंट्रोल में ना आए तो एकात के हाथ पैर में गोली दाग देना, पर हां पिस्तौल में साइलेनसर लगाना नहीं भूलना. समझा? "
"अभी तू कह रहा की किसी को चोट मत पहुचना और अब गोली मारने की बात कर रहा है."
"आबे जब सिचुयेशन आउट ऑफ कंट्रोल हो जाए तब यह काम करना. समझा? फालतू में हीरो मत बनना." उसके बाद रोहन अपनी सीट से उठने लगा और फिर उसने परवेज़ से कहा " अब तू जल्दी से बिल पे कर और यहां सी निकल कहीं वो लोग हमसे पहले ना निकल जाए."
फिर उसके बाद परवेज़ ने जल्दी से खाने का बिल अदा किया और फौरन रोहन के साथ बाहर आ गया.
"श्रुति! तुम भी कुछ आर्डर करो अपने लिए." प्रतीक ने श्रुति की तरफ देख कर कहा जो काफी देर से खामोश[/color]