जेठालाल और वो लड़की दोनो अपनी अपनी चेयर पे चिपके के बैठे थे....
लड़की :- अच्छा तो आप इसके फीचर्स बता दीजिए प्लीज़्ज़ज्ज्ज....
जेठालाल :- लार टपकाते हुए..उसकी तरफ एक टक देख रहा था....जी बिल्कुल...क्यूँ नही...ये तो मेरा काम है...आप जैसों को अच्छी तरह से समझाना...
लड़की :- मुस्कुराते हुए...क्या मतलब..
जेठालाल :- मतलब..फीचर्स समझाना ...
लड़की :- ओके...तो बताइए ना...
जेठालाल अब फीचर्स बताने लगता है....वो एक एक फीचर को ऐसे बता रहा था जिससे काफ़ी टाइम लगे.....
अब वो उस लड़की के बेहद चिपक के बैठा था....जिसकी वजह से उसका एक हाथ उसके बड़ी बड़ी चुचियों पे लग रहा था....
जेठालाल का हाथ उसकी चुचियों पर लगता है...उसका लंड लोहे जैसा कड़क होके खड़ा हो गया..क्यूँ कि...वो बहुत ही ज़्यादा सॉफ्ट थी...जिसकी वजह से उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था....
उधर लड़की को जेठालाल का हाथ अपनी चुचियों पे महसूस हो रहा था...जिसकी वजह से वो भी धीरे धीरे गरम हो रही थी.....अब वो लड़की जान बुझ के अपने चुचों को आगे पीछे कर रही थी...जिसकी वजह से जेठालाल का हाथ और उसकी चुचियों पे चिपक रहा था....
अब जेठालाल की हिम्मत बढ़ चुकी थी...अब वो भी अपनी कोहनी को और अंदर दबा रहा था....जिसकी वजह से उस लड़की के चुचे और ज़्यादा अंदर धन्स रहे थे....
तभी जेठालाल को एक झटका लगा....क्यूँ की उस लड़की ने अपना एक हाथ..जेठालाल की पैंट के उपर से उसके लंड पे रख दिया था...जो पहले से अकडा पड़ा हुआ था...और पैंट में से आज़ाद होने के लिए तड़प रहा था...
जेठालाल सवालिया नज़रों से उस लड़की को देख रहा था....वो लड़की उसकी तरफ देख कर मुस्कुरई...और बोली...
लड़की :- क्या हुआ...अच्छा नही लग रहा है क्या...
तभी.जेठालाल का फोन बज उठता है...और वो होश में आता है..और अपने हाथ से उस लड़की के हाथ को झटका देता है....
वो फोन की तरफ देखता है...तो दया का फोन होता है....
जेठालाल फोन उठा के..
जेठालाल :- हाँ दया बोल.....
दया :- टप्पू के पापा...क्या कर रहे हो..
जेठालाल :- दया कैसी नॉनसेन्स जैसी बात कर रही है...दुकान में हूँ काम कर रहा हूँ...
दया :- ओह्ह हाँ..सोरररययी....अच्छा ये बताइए कि आप रात में क्या खाएँगे...
जेठालाल मन में सोचते हुए...कि दया मुझसे कितना प्यार करती है..और में यहाँ ग़लत काम कर रहा था...
दया :- हेलो...टप्पू के पापा...आप हो..
जेठालाल :- हाँ हाँ भाई...तू जो चाहे वो बना ले...चलो..ज***********
दया :- ठीक है...ज*************.....
फिर जेठालाल पीछे मुड़ता है और उस लड़की की तरफ देखता है....
लड़की :- आइए ना मुझे फीचर बताइए ना....
जेठालाल जैसे ही बोलने वाला होता है...उधर से नटू काका की आवाज़ आती है...
नटू काका :- सेठ जी...में पेमेंट ले आया..
जेठालाल हश्ह्ह्ह....
नटू काका :- क्या अपने कुछ कहा मुझसे...
जेठालाल :- कुछ नही...एक काम करो..इन मेडम का फोन पॅक कर के बिल बना दो...
लड़की थोड़ी सी निराश हो जाती है...और नटू काका के पास चली जाती है...
जेठालाल उससे पैसे लेता है....और फिर...लड़की उसे अपना एक कार्ड दे देती है...और बोलती है...
लड़की :- ये लीजिए...मेरा कार्ड...कभी ज़रूरत पड़ी तो...
बॅस इतना ही बोलती है...
जेठालाल उस कार्ड को ले लेता है...बिना कुछ बोले..क्यूँ कि अगर कुछ बोलेगा तो नटू काका...फिर उससे पंचायत करेंगे...और वो कार्ड लेके...फैंक देता है......
जेठालाल मन में.....आज जो में करने जा रहा था वो था तो ग़लत...लेकिन में अपने इस बम्बू को कैसे समझाऊ...ये तो कहीं भी फुदक पड़ता है....परेशान कर रखा है सुबह से..क्या करूँ....और फिर से अपने लंड पे हाथ मार कर...अबे ओये..शांत बैठ जा...हमेशा मेढक की तरह उछल जाता है....
नटू काका :- आपने मुझसे कुछ कहा??
जेठालाल :- अरे नही भईई अपना काम करो ना....
रात के 9 बाज चुके थे.....
जेठालाल के घर पे....
जेठालाल :- वाहह दया..क्या खाना था...मज़ा आ गया...
बापूजी :- हाँ बहू सच में आज बढ़िया खाना बना था...तभी तो इस जेठिया ने...डबल खाया है..
जेठालाल :- हाँ बापूजी..क्या करूँ...क्रांट्रोल नही हो रहा था...
बापूजी :- ये क्रांट्रोल वाली...इतना खाएगा तो एक दिन पेट फट जाएगा...
जेठालाल अपना मुँह बनाते हुए...
बापूजी :- कम खयाआआआ कार्रररर....चिल्लाते हुए बोलते हैं...
जेठालाल :- ठीक है बापूजी..अगली बार से कम खवंगा...घबराते हुए बोलता है...
अच्छा दया में सोडा पीने जा रहा हूँ...
दया :- हाँ तो में भी चल रही हूँ...
जेठालाल :- तू भी सोडा पिएगी...
दया :- हाहहहहः......नही बाबा...वो नीचे सारी लॅडीस मिलने वाली है ना...तो में वहाँ जाउन्गी...
नीचे पहुँचते ही....जेठालाल की नज़र बबीता जी पर पड़ती है...और सुबह वाली घटना याद आ जाती है...और याद आते ही फिर से उसका लंड अकड़ने के लिए तैयार हो जाता है..लेकिन इस बार वो अपने आप पर कंट्रोल करता है...
जेठालाल :- बबीता जी गुड नाइट...
सब चौंकते हुए...
बबीता जी :- गुड नाइट नही जेठा जी...गुड ईव...
जेठालाल :- तो ये रखो...गुड ईव...बबीता जी...
और सबको भी गुड ईव बोलता है...
जेठालाल :- बबीता जी...आपका ये ड्रेस तो बहुत सुंदर लग रहा है...
उस वक़्त बबीता जी ने...नाइट सूट पहना हुआ था...एक टाइट सा उपर शर्ट..जिसमे उसके बूब्स बहुत ही ज़्यादा बड़े लग रहे थे और नीचे पहना था..पाजामा...जिसमे उसकी गान्ड बहुत ही ज़्यादा मस्त लग रही थी..
बबीता :- थॅंक यू जेठा जी...
जेठालाल :- वैसे आपका सुबह वाला काम पूरा हो गया था...
जेठालाल का मतलब था...कि सुबह अपना पानी निकल गया था..चूत में से...
बबीता :- समझ गई थी...उसने स्माइल देते हुए कहा....हाँ जी कर लिया था...
तभी पीछे से दया आते हुए...अरे टप्पू के पापा आप गये नही सोडा पीने..
जेठालाल :- हाँ भाई जा रहा हूँ..
गुड नाइट बबीता जी...गुड नाइट...अब तो ठीक है ना बबीता जी...
बबीता :- जी हाँ ....गुड नाइट...
और जेठालाल सोडा की शॉप की तरफ निकल पड़ता है...
उधर सोडा की शॉप पर सब हंस रहे थे और आपस में बात कर रहे थे...
में आपको बता दूं..कि कौन कैसे खड़ा था अब्दुल की दुकान पर...
दुकान के अंदर अब्दुल..उसकी बगल में सोढी बैठा था...और उसके साइड में पोपटलाल खड़ा था...
नीचे बाहर की तरफ थोड़ी ज़मीन पर डॉक्टर हाथी बैठे थे...उसके जहाँ ड़कटोर हाथी बैठे थे उनकी लेफ्ट साइड में मेहता साहब खड़े थे...और राइट साइड में भिड़े और अईयर....
सोढी :- क्या बात है मेहता साहब..आज अपना जेठा प्रा नही आया अभी तक्क..
मेहता साहब बोलते इतने में भिड़े बोल पड़ा...
भिड़े :- अरे सोढी..जेठालाल सो गया होगा अभी तक...उसको सिर्फ़ दो कम आते हैं सोना और खाना....उसके अलावा उसे कुछ नही आता..
अईयर :- हाँ आत्माराम तुम बिल्कुल सही बोल रहे हो...
तभी एक आवाज़ आती है....तुम को क्यूँ इतनी चपली है भिड़े...हर वक़्त दूसरो में क्यूँ इतना दिमाग़ लगाते हो
तभी एक आवाज़ आती है....तुम को क्यूँ इतनी चपली है भिड़े...हर वक़्त दूसरो में क्यूँ इतना दिमाग़ लगाते हो...जी हाँ जेठालाल पीछे खड़ा सब सुन रहा था....
तभी मेहता साहब हंस देते हैं...
पोपटलाल :- मेहता साहब आप क्यूँ हंस रहे हैं..
तारक :- भाई मुझे पता था कि जेठालाल पीछे ही खड़ा था..
भिड़े :- तो अपने मुझे बताया क्यूँ नही..
जेठालाल :- हाँ तो पता चलना चाहिए ना..कि तुम क्या सोचते हो...चपली कहीं के...और चलते चलते मेहता साहब के पास आकर खड़ा हो जाता है..
और अईयर भाई आपको हाँ में हाँ मिलाना बहुत आता है...चुप रहा करो..
अईयर बोलने लगता है..लेकिन मेहता साहब उसे रोक देते हैं...और बोलते हैं..
तारक :- देखिए मुझे आपसे कुछ बात करनी है..
सभी बोलते हैं..बोलिए मेहता साहब..
ह्म्म्म देखते हैं...अब क्या बात होती है अब्दुल की दुकान पार....
हाँ तो मेहता साहब अब्दुल की दुकान पर कुछ बताने जा रहे थे...
तारक :- हाँ तो भाई जेठालाल बता दिया जाए...सबको...
सुबह से जेठालाल का मूड कुछ ठीक नही था..तो उसको याद भी नही था..तभी उसने पूछा..
जेठालाल :- क्या मेहता साहब...क्या कहना है...
तारक :- अरे भाई भूल गयी वो सुबह लेटर वाली बात..
जेठालाल :- दिमाग़ की बत्ती जलाते हुए...अरे हां...में तो भूल ही गया था...हाँ बिकलूल बताइए..
पोपटलाल :- हाँ मेहता साहब बताइए...क्या बात है..
तारक :- हाँ पोपटलाल बताता हूँ....बात ये है कि....जेठालाल को सुबह एक लेटर आया था..जिसमे उसको पार्टी के लिए इन्वाइट किया गया है...और उसमे ये भी लिखा था कि वो 5 या 6 जनों को अपने साथ ले जा सकता है...
सोढी :- अरे क्या बात कर रहे हो...मेहता साहब..पार्टी शार्टी....मज़ा आ जाएगा...
अईयर :- हाँ सोढी...मज़ा आ जाएगा..वैसे भी काफ़ी दिन हो गये हैं...
भिड़े :- पार्टी ..... मज़ा आएगा..
जेठालाल :- क्यूँ भिड़े अब क्या हुआ...अभी तो कुछ और ही बोल रहे थे...
भिड़े :- वो तो बस ऐसे ही जेठालाल....आइ आम सॉरी..
जेठालाल :- क्या सॉरी...तुझे नही लेके जाउन्गा पार्टी में..
भिड़े :- अरे जेठालाल सॉरी बोला ना तुझे...
तारक :- हँसता हुआ....अरे भाई भिड़े जेठालाल मज़ाक कर रहा है...
डॉक्टर. हाथी :- जेठा भाई खाने का भी प्रोग्राम हो गया ना...
जेठालाल :- हान्फते हुए...जी बिल्कुल होगा..
पोपटलाल :- अच्छा तो पार्टी है कब??
जेठालाल :- अभी डेट तो नही आई है..जिस दिन आ जाएगी..में मेहता साहब को बता दूँगा..वो तुम सबको बता देंगे...
जेठालाल पलंग पे बैठा था...उसका मूड कुछ अच्छा हो गया था...और उधर दया किचेन से कमरे में आई..नीचे की ही बातों से वो काफ़ी गरम थी और आज अच्छे से चुदना चाहती थी...लेकिन उसने जेठालाल से कुछ बोला नही...और बगल में आके लेट गई...
दया पलंग पे आके..जेठालाल की तरफ पीठ कर के लेट गई...
जेठालाल को थोडा अजीब लगा...उसे लगा शायद दया नाराज़ है..कि इतने दीनो से उसकी जम कर चुदाई नही की है...चलो आज सही मौका है...मेरा भी बुरा हाल है..सुबह से परेशान हूँ...पता नही किसकी पनौती लग गई है....वो सारी भडास आज दया के उपर निकाल देता हुन्न्ं.....
जेठालाल :- दया....दया...मेरी रानी...नींद आ गई क्या..
लेकिन दया कोई जवाब नही देती....
फिर जेठालाल सोचता है..कि बोलने से क्या फ़ायदा....शुरू कर देता हूँ..अपना काम...अपने आप ठीक हो जाएगी...
और फिर जेठालाल हाथ बढ़ा कर...दया की गान्ड को अपने हाथ से दबा देता है...दया थोड़ी कसमसाती है..लेकिन कुछ नही बोलती है...
जब दया को लगता है..कि उससे कोई फरक नही पड़ा...तो वो एक अजीब सी हँसी हब्साता है..और गान्ड को इस बार कस के दबा देता है...
इस बार दया सिसक उठती है....और वो मूड कर..जेठालाल की तरफ देखती है...और बोलती है..
दया :- अब क्यूँ कर रहे हैं आप
जेठालाल :- दया तुझे तो पता है ना...कि कुछ दिनो से क्या हाल थे सोसाइटी के ..टाइम ही कहाँ मिला..तू ही बता मेरी क्या ग़लती है..
जेठालाल की बात सुन के...थोड़ा सोचके बोलती है...
दया :- हाँ टप्पू के पापा आप ठीक बोल रहे हैं...सॉरी..
जेठालाल :- अरे सॉरी क्या इसमे डोबी..अब छोड़ बोलने पर टाइम वस्ती मत कर...और उसकी गान्ड को और ज़ोर से निचोड़ देता है...
दया हल्की सी चिल्लाते हुई...उईइ माआ....आराम से टप्पू के पापा...
जेठालाल :- दया आज तेरा कचूमर बना दूँगा....देखती जा बसस्स...
दया :- अच्छा...हँसती हुई...हर बार में ही निकालती हूँ....
जेठालाल :- चल आज देख लेते हैं..कौन किसका कचूमर निकालेगा...
और फिर जेठालाल दया को अपने उपर लेटा लेता है....और उसके बाल खोल देता है...और उसके बालों के अंदर हाथ फैरने लगता है...
जेठालाल :- दया...आज में तुझे अब तक की सबसे बड़ी चुदाई दूँगा...
दया :- शरमाते हुए..अच्छा...में भी कब से इंतेज़ार कर रही थी...बॅस इतना ही बोल पाती है..और जेठालाल उसके होंठ अपने होंठ से चिपका लेता है...
और उसके होंठो को चूसना शुरू कर देता है...दोनो के होंठ ऐसे जुड़े थे..जैसे फेवीकॉल लगा दी हो..थोड़ी ही देर में..ससयरृूप्प्प्प्प जैसी आवाज़ें आनी शुरू हो जाती है...
फिर कुछ देर बाद..जेठालाल अपनी जीभ दया के मुँह के अंदर डाल देता है...और फिर दोनो एक दूसरे के मुँह का रस पान करने लगते हैं...
कुछ 3 मिनट तक ऐसा ही चलता रहता है...फिर दया अपने आप को छुड़ाते हुए...
दया हान्फते हुई...
दया :- बसस्स करिए....साँस नही आ रहा था मुझे....
जेठालाल :- हाहहः क्या हुआ..मेने कहा था ना आज तेरा कचूमर निकाल दूँगा....
दया :- मेने भी मादरचोद का पानी पिया है....अभी तो बहुत कुछ बाकी है मेरे दोस्त...
जेठालाल :- अच्छा चल...एक शर्त लगाते हैं..
दया :- कैसी शर्त?
जेठालाल :- देखते हैं....कि कौन किसका पानी सबसे पहले निकालेगा.....
दया :- ठीक है...चलो...देखते हैं..
जेठालाल :- लेकिन सिर्फ़ 5 मिनट ही मिलेंगे...नही तो कोई भी निकाल देगा...
दया :- हुह...5 मिनट तो बहुत है..में तो आपका 2 मिनट ही निकाल दूँगी....
जेठालाल :- चल जा ना...देखते हैं...
बस इतना बोलती है..और जेठालाल को झटका लगता है...क्यूँ कि...वो जेठालाल के लंड को पाजामे के अंदर से निकाल के...हाथ में पकड़ लेती है...
जेठालाल दया की इस फुर्ती हो देख के दंग रह जाता है...
दया उसकी आँखों में देख के....अपनी जीभ बाहर निकाल के..पूरे लंड को उपर से नीचे तक चाट देती है...जिससे जेठालाल का पूरा का पूरा शरीर हिल जाता है.....
फिर से एक बार दया...अपनी जीभ बाहर निकालती है...और इस बार...उसके लंड के बॉल्स से लेकर ऊपर लंड के सुपाडे तक फिर से चाट देती है...इस बार जेठालाल की आधी पीठ हवा में झूल जाती है....
जेठालाल :- आहह दयाया.....मज़ा आ गया....
और फिर दया अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देती है...और अपनी ब्लाउस के बटन को खोल देती है...
जब जेठालाल की नज़र उस पर पड़ती है..तो उसका लंड और ज़्यादा अकड़ जाता है....वो घड़ी की तरफ देखता है...अभी तो सिर्फ़ 1 मिनट ही बीता होता है..और जेठालाल का बुरा हाल हो जाता है...
अब दया अपने हाथ से लंड को हिला रही थी..और लंड का मूठ मार रही थी...कुछ देर ऐसे करने के बाद...दया अपने मुँह को खोल के...जेठालाल का लंड थोडा सा मुँह में लेके चूसना शुरू कर देती है...
जेठालाल :- आहह ओह्ह्ह्ह...ह्म...दया....बहुत अच्छा लग रहा है...करती रह....
अब दया अपना पूरा ब्लाउस..उतार के फेंक देती है....अब वो सिर्फ़ ब्रा में होती है उपर से...जेठालाल का और ज़्यादा बुरा हाल हो जाता है....
अब दया अपना पूरा ब्लाउस..उतार के फेंक देती है....अब वो सिर्फ़ ब्रा में होती है उपर से...जेठालाल का और ज़्यादा बुरा हाल हो जाता है....
जेठालाल :- ये तो चीटिंग है दया..
दया लंड को निकाल के....
दया :- इसमे क्या चीटिंग...है...अपने दिखाए डिस्ट्रब मत कीजिए..टाइम ख्तम हो जाएगा....
और फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगती है...
अभी 3 मिनट बीत चुके थे...अब दया को थोड़ी टेन्षन हो गई थी..कि..अब क्या होगा....लेकिन फिर भी वो हिम्मत नही हारती....और अब लंड को तेज़ी से चूसने लगती है...
अब पूरे कमरे में घड़ी की आवाज़ के अलावा...पूछ पुचह,.....जैसी आवाज़ें आ रही थी.....
4 मिनट बीत गये थे...अब सिर्फ़ 1 मिनट बचा था...जेठालाल कुछ होते हुए....
दया जेठालाल की बात सुनती है..लेकिन कुछ बोलती नही...बस अब वो सिर्फ़ लंड चूसने में लगी रहती है....
लेकिन अब सिर्फ़ 30 सेक बाकी थे....दया को कुछ जल्दी सोचना था....और उसने सोचा....उसने वो किया कि ..किसी का भी लंड से पानी छूट जाए.......
दया ने अपना मुँह बाहर निकाला 1 सेक के लिए जेठालाल की शक्ल देखी और फिर.....
अपना मुँह खोल के पूरा का पूरा लंड अंदर ले लिया...और बड़ी तेज़ी से उसे अंदर बाहर करने लगी....
जेठालाल इस प्रहार से पागल हो गया....वो ना चाहते हुए भी..दया के सर के पीछे हाथ ले जाके ... लंड पे दबा रहा था....दया पूरे जोश से पूरे लंड को मुँह में लेती और बाहर कर देती.....अब जेठालाल का निकलने वाला था...जब उसको याद आया..कि ये शर्त है ..उसने बड़ी मुश्किल से हाथ हटाया....
लेकिन दया रुकी नही....वो ऐसे करती रही...बससस्स..अब जेठालाल से कंट्रोल नही हो रहा था...उसने टाइम देखा.....
टाइम पूरा हो चुका था..5 मिनट हो चुके थे...उसने दया के सर को पकड़ा और झटके से बाहर निकाला....
उसने सर को इतनी ज़ोर से पीछे पटका..कि दया पीछे की तरफ़ गिर गई...
जेठालाल :- बसस्सस्स...हान्फते हुए...बससस्स...टाइम पूरा हो गया...
दया :- हान्फते हुई...अहहहहः...हांफे जा रही थी...देखा निकाल दिया ना..
जेठालाल :- अभी भी हाँफ रहा था...आई डोबी..नही निकला अभी..देख...वो तो अच्छा है टाइम देख लिया मेने...नही तो में हार ही जाता..
दया थोड़ा मायूस होते हुए...
दया :- ओफूऊ...ये कैसे...मेने तो अपना सबसे बड़ा हथियार इस्तेमाल किया था...
जेठालाल :- हाहहः...दया ..ये ब**** के रहने वाले का लंड है..ऐसे थोड़ी छोड़ेगा...हार गई ना तू...