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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

सब लो क्लब हाउस में जमा हो चुके थे.....सामने वाली तीन कुर्सी पर सोसाइटी के सेक्रेटरी आतमाराम तुकाराम भिड़े....उसके साथ पत्रकार पोपटलाल और कृष्णन अईयर...

उनके सामने सोसाइटी के सभी लोग बैठे थे...और आपस में ऐसे बातें कर रहे थे...जिसकी वजह से शोर हो रहा था.....

भिड़े काफ़ी कोशिश कर रहा था कि सब चुप हो जाए...लेकिन उसकी बात तो कोई सुन ही नही रहा था....

फिर सोसाइटी के बुजुर्ग खड़े हुए...

चंपकलाल :- अरे ऊओ.....चुप हो जाओ सब....ये जेठिया चुप हो जा....

जेठालाल :- शांति शांति...बापूजी कुछ बोल रहे हैं....हाँ बोलिए बापूजी...

बापूजी :- बोलिए वादी...चुप नही हो सकते...इतनी देर से भिड़े चिल्ला रहा है और तुम लोग अपनी धुन में लगे हुए हो...

तारक :- सॉरी चाचाजी....

और बोलता है....सब शांत हो जाओ...

और फिर सब शांति से बैठ जाते हैं...

और फिर जेठालाल बोलता है...

जेठालाल :- हाँ भाई भिड़े तो शुरू करें मीटिंग...

भिड़े :- जेठालाल अभी 2 जने आने बाकी हैं..

जेठालाल :- कौन??

भिड़े :- नाट्टू काका और बाघा..

जेठालाल :- क्या बोल रहा है भिड़े....तू उन शक़ कर रहा है...

भिड़े :- ऐसी बात नही है जेठालाल...

जेठालाल :- तो फिर कैसी बात है...

तभी तारक बीच में बोल पड़ता है...

तारक :- देखो जेठालाल..इसमे कुछ ग़लत नही है...तुम देखो सभी को बुलाया हुआ है जो उस दिन हंडी के वक़्त थे....तो इसका मतलब ये नही है कि हम उनपर शक़ कर रहे हैं...बात को समझो...

और फिर जेठालाल समझ जाता है...

उधर टप्पू सेना एंट्री कर चुकी होती है....फिर भिड़े उनसे पूछता है...

भिड़े :- टप्पू तैयारी पूरी हो गई...

टप्पू :- जी हाँ भिड़े अंकल...

उधर नाट्टू काका और बाघा आ जाते हैं...

नटू काका :- हेलो सेठ जी....कैसे हैं आप..

जेठालाल :- हाँ भाई बढ़िया तुम दोनो ने आने में देर क्यूँ कर दी....

नटू काका :- आपको पता है ना बारिश का मौसम है...रिक्शा बड़ी मुश्किल से मिलती है...और हाँ आप ये बताइए आपने हम लोगों को यहाँ क्यूँ बुलाया है....

जेठालाल :- अरे भाई अब आए हो ना..तो पता चल जाएगा...परेशान मत करो भाई शांति से बैठ जाओ....

फिर भिड़े मेहता साहब को अपने पास बुलाता है...और उन्हे सारी बात बताने के लिए बोलता है...

तारक :- देखिए दोस्तों में आपको आब जो बताने जा रहा हूँ...उससे शायद आप सब अचंभित हो जाए..तो प्लीज़ मेरा सहयोग करिएगा...और हाँ कृपया कर के ये बात किसी और को नही पता चलनी चाहिए.........

और सारी घटना बता देता है....एक एक बात जो उस दिन हुई थी....सबके मुँह खुले के खुले रह जाते हैं...सब ख़ुसर पुसर करने लगते हैं...

फिर तारक उन्हे शांत रहने के लिए बोलता है और टप्पू को अपने पास बुलाता है....

टप्पू तारक के पास आकर बोलना शुरू कर देता है...

टप्पू :- देखिए में आप सबको अब ये बताउन्गा कि हम उस आदमी को कैसे पकड़ेंगे....हमे एक एविडेन्स मिला है..जिससे हम उस आदमी को ज़रूर पकड़ लेंगे...

एविडेन्स वर्ड सुन के जेठालाल दया से पूछता है...

जेठालाल :- दया तुझे समझ आया कि ये एविडेन्स क्या है...

दया :- नाआआआअ....

और फिर जेठालाल तारक से पूछता है...

तारक :- एविडेन्स का मतलब सुराग..

जेठालाल दया को बोलते हुए...समझी दया...और दया हाँ में सर हिला देती है...

टप्पू :- जो सुराग हमे मिला है....उससे उस आदमी को आराम से पहचान लिया जाएगा.....शायद वो आदमी जल्द बाजी में वहाँ गार्डन में छोड़ के चला गया है......मगर एक प्राब्लम है...

सभी बोलते हैं क्य्ाआआअ....

टप्पू :- वो सुराग की चीज़ मेने गोली को दी थी...मगर उसने वो कहीं गार्डन में ही गिरा दी.....और हम सुबह से ढूँढ रहे हैं लेकिन वो मिली ही नही...

भिड़े :- ये गोया किसी काम का नही है...टप्पू क्यूँ दी तूने इसे...इसे खाने के अलावा कुछ और आता ही नही है.....

सोढी :- गोली तुझे ध्यान से रखना चाहिए था ना...

गोली :- सॉरी सोढी अंकल....वो पता नही मेने वहाँ गार्डन के बेंच पर रखा था...और फिर मुझे भूक लगी तो में अब्दुल की दुकान चला गया कुछ लेने के लिए....और जब वापिस आया तो वो वहाँ थी ही नही....शायद कहीं गिर गयी...

भिड़े :- देखो इसे...सारा दिन बस ठूंसवा लो...

तारक :- अब छोड़ो भिड़े..बच्चा है ग़लती हो गई...तो टप्पू अब तुमने क्या सोचा है...

टप्पू :- मेहता अंकल अब रात में तो मिलेगा नही....इसलिए अब कल सुबह ही ढूंढ़ेंगे....

सभी टप्पू की बात पर सहमत हो जाते हैं...और सब अपने अपने घर की तरफ़ निकल जाते हैं...............

 
दोस्तो अभी बलात्कारी को पकड़ने के प्रयास जारी है क्या बलात्कारी पकड़ में आएगा या ये प्रयास भी फेल हो जाएगा जानने के लिए पढ़ते रहिए तारकमेहता का नंगा चश्मा

 


अब इस वक़्त रात के 12 बज रहे होते हैं...घड़ी में टिक टोक ...टिक टिक...और बाहर सिर्फ़ तेज़ हवाओं की चलने की आवाज़ आ रही होती है...

पूरी जगह सुनसान होती है.....तभी...

गार्डन में किसी का साया होता है....

वो जो कोई भी होता है...बार बार इधर उधर चक्कर लगा रहा होता है...उसके हाथ में छोटी सी टॉर्च होती है ...जिसे वो जला के गार्डन की घास पे डाल रहा होता है....

इसका मतलब तो यही होता है कि वो कुछ ढूँढ रहा होता है.....

वो बार बार इधर से उधर...कभी उस कोने में...कभी इस कोने....चक्कर पे चक्कर लगा रहा होता है...लेकिन उसके हाथ वो चीज़ नही लगती जिसे वो ढूँढ रहा होता है.....वो थक कर एक जगह खड़ा हो जाता है....और सोचने लगता है....तभी....

तभी पीछे से उसके कंधे पर कोई हाथ रख देता है....वो घबरा जाता है.....वो पीछे पलटता है...लेकिन अंधेरे की वजह से उसका चेहरा ढंग से दिखाई नही देता....

तभी उसके मुँह पर रोशनी मारी जाती है.....और उसका चेहरा देख कर सब चौंक जाते हैं....

सब का मतलब....जेठालाल , भिड़े , अईयर , तारक , चंपकलाल , सोढी , टप्पू सेना...

क्यूँ कि जो चेहरा वो देखते हैं...वो बाघा का होता है....

जेठालाल चंपकलाल और सभी चीखते हैं....बाघाअ तुउुुुउउ......!!!

सभी बाघा को वहाँ गार्डन में देख कर सन्न रह जाते हैं....किसी को यकीन नही हो रहा था कि बाघा ऐसा कर सकता है....

जेठालाल :- बगहा तू....मुझे तो यकीन हे नही हो रहा है कि तू ये कर सकता है...

बाघा :- सेठजी जो आप सोच रहे हैं..वैसा कुछ नही है...

जेठालाल :- मुझे सेठ जी मत बोल ...

सोढी :- इससे पहले मेरा हाथ इस्पे उठ जाए ...इसको पोलीस के पास ले चलो..

बाघा :- मेरी बात तो सुनिए...बापूजी आप तो सुनिए ... मेने ऐसा कुछ नही किया है..

बापूजी :- अरे शांति रखो एक मिनट...उसे तो बोलने दो कि वो क्या कहना चाहता है...

तारक :- हाँ भाई एक बार उसे तो मौका दो कि वो क्या कहना चाहता है...

जेठालाल :- ठीक है जब बापूजी और मेहता साहब बोल रहे हैं तो चल बता भाई क्या बोलना है तुझे..

बाघा :- देखिए आप सब...में यहाँ सिर्फ़ इसलिए हूँ...कि जब टप्पू सेठ ने बोला कि वो चीज़ खो गई है तो में उसे यहाँ ढूँढने आ गया..मेने सोचा कि आज ही ढूँढ लूँ...कहीं कल सुबह तक किसी और ने ढूँढ लिया तो गड़बड़ हो जाएगी...

सब उसकी बात सुन के राहत की सांस लेते हैं ..ख़ासकर जेठालाल..

जेठालाल :- तो भाई पहले बोलना था ना...खाम खा हमने क्या सोच लिया तेरे बारे में...

बाघा :- लेकिन आपने मुझे कुछ बोलने का मौका ही नही दिया...

जेठालाल :- अच्छा वो छोड़...तुझे वो चीज़ मिली कि नही....

बाघा :- नही सेठ जी...बहुत कॉसिश करी लेकिन मुझे वो चीज़ मिली ही नही...

जेठालाल :- ओफूऊ...पता नही कहाँ होगी...

और बोलते बोलते वो पीछे की तरफ मुड़ता है....और उसको एक साया नज़र आता है....वो चिल्लाता है..कौन कौन है वहाँ....

वो साया इधर उधर घूमने लगता है...

जेठालाल की आवाज़ सुन के सब मुड़ते हैं और उस साए को देखते हैं....वो सब चिल्लाते हैं...और उसे आने को बोलते हैं..

तभी वो साया बाहर आता है....उसको देख के फिर से एक बार सबको झटका लगता है....क्यूँ कि वहाँ उन्ही की सोसाइटी का एक सदस्य खड़ा होता है...और सब उससे पूछते हैं तू वहाँ....मतलब तू ही है...

वो आदमी :- नही नही चाचाजी... में तो यहाँ वही चीज़ ढूँढने आया हूँ....मेने सोचा कि अगर वो चीज़ मिल जाए..तो हम उस आदमी को पकड़ सकते हैं....

तभी बोलते हैं...ओफो तुम भी...क्या सब ढूँढने ही आएँगे...और भी रात को...

तभी टप्पू को बोलता है...

टप्पू :- झूठ बोल रहे हैं.....शिवांक अंकल (दोस्तों आप इस किरदार को जानते होंगे...लेकिन में उसकी ढंग से स्पीलींग नही डिस्क्राइब कर पा रहा ..लेकिन उसका नाम कुछ ऐसा ही है)

सब टप्पू की बात सुन के टप्पू की तरफ देखते हैं....और उससे बोलते हैं...कि ये क्या टप्पू क्या कह रहे हो...

उधर शिवांक घबरा जाता है...

 
जेठालाल :- टप्पू बेटा क्यूँ...तुझे क्यूँ लग रहा है कि ये झूठ बोल रहा है..

तारक :- हाँ बताओ टप्पू..

टप्पू :- पापा तारक अंकल...यही है जिन्होने रोशन आंटी के साथ इतनी गंदी हरकत की है...

सब सब के टप्पू की बात सुन के दंग रह जाते हैं..किसी को कुछ समझ नही आ रहा होता है कि ये कैसे हो सकता है...

तभी सोढी उसकी तरफ भागता है..और उसको पकड़ के एक दो लात और मुक्के मार देता है...उसके मुँह से खून निकलने लगता है...और दर्द से चिल्लाता है...अहह.....और नीचे गिर जाता है...

ये देख के सब सोढी की तरफ भागते हैं...और उसे पकड़ लेते हैं...

चाचाजी :- सोढी ये क्या कर रहा है...शांति रख ऐसे मारा मारी से कुछ नही होगा..इसको इसकी सज़ा मिलेगी...

और फिर सोढी शांत हो जाता है..

तारक और अईयर शिवांग को खड़ा करते हैं..

चाचाजी :- छड़ी उठाते हुए....बोल तूने ऐसा क्यूँ किया ...बोल...

जेठालाल :- अर्रे बापूजी आप शांत रहिए....बोल शिवांक बापूजी कुछ पूछ रहे हैं क्यूँ किया तूने ऐसा...

शिवांक :- बताता हूँ..प्लस्सस मुझे मत मारो सब बताता हूँ...

और फिर शिवांक बताना शुरू करता है...

शिवांक :- उस दिन जब दही हाँडी का प्रोग्राम चल रहा था ... नाचने की वजह से मुझे प्यास लग रही थी..तो में ठंडई के पास चला गया और एक ग्लास गटक गया...थोड़ी देर तक तो सब कुछ ठीक रहा..लेकिन अचानक पता नही मुझे क्या हो गया..मेरा शरीर कुछ अकड़ने सा लगा...ऐसा लगा मानो..कुछ फूल रहा है...शरीर में बहुत ज़्यादा गर्मी लगने लगी...मेने नीचे हाथ लगाया तो मेरा लंड फूल के 4 गुना बड़ा हो गया था...मुझसे वो गर्मी सहन नही हो रही थी....

इसलिए में थोड़ी देर गार्डन में चला गया कुछ देर बैठने ...लेकिन फिर भी मुझे वहाँ आराम नही मिला...

मेरा शरीर गरम होता जा रहा था...ऐसा लग रहा था कि अभी मेरा लंड फॅट जाएगा और तभी मुझे चैन आएगा...मेरी हालत नशे में झूमने जैसी हो गई...मेरे आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा..और तभी...

तभी रोशन भाभी मुझे गार्डन में आती दिखाई दी...उस वक़्त मुझे वो सिर्फ़ एक जिस्म दिखाई दे रहा था....मुझे उस वक़्त होश नही था...फिर मेने अपना चेहरा छुपाने की लिए कुछ ढूँढने लगा...मेने इधर उधर नज़र दौड़ाई....लेकिन मुझे कुछ नही मिला...तभी मुझे गार्डन की पीछे एक काला कलर का मास्क दिखाई दिया...जो शायद वहाँ खड़े आदमी ने रखा हुआ था में वहाँ गया और मेने वो मास्क उठा के पहन लिया और फिर.... में चल पड़ा वहाँ और रोशन भाभी के साथ वो कर बैठा जो मुझे नही करना चाहिए था....

तारक :- ह्म्म्म्मम शिवांक जो तुम कह रहे हो अगर में उसको मान लूँ पर तुमने भिड़े को क्यूँ फसाया...तुमने तो मास्क भी पहना हुआ था....

शिवांक :- तारक भाई....जब मेने अपनी गर्मी छोड़ डी...तब में होश में आया ..तब मुझे पता चला कि ये मेने क्या कर दिया है...फिर में बहुत डर गया था..इसलिए मुझे कुछ नही सूझा और मेने भिड़े भाई की नकल कर दी...

शिवांक की बात सुन के सब उसकी तारक देख रहे थे...भिड़े अपने मन में उसे गाली दे रहा था...क्या निर्लज्ज मानव है ये...

सोढी :- अरे हम कैसे मान ले कि ये सच बोल रहा है..इसको तो मार मार के इसका कचूमर बना दूँगा...

तारक :- सोढी तुम इसकी बात को समझो शांत रहो....लेकिन शिवांक ऐसा कैसे तुम्हे इस तरीके का नशा हो गया...

शिवांक :- तारक भाई...मेने जैसे ही वो ठंडाइ पी उसके बाद ही मुझे ये हुआ..शायद उस ठंडई में ही कुछ किसी ने डाल दिया था...

तभी एक जने के दिमाग़ में कुछ आता है...और वो होता है जेठालाल ...

जेठालाल सोचने लगता है...उस दिन उसके पास एक डब्बे में दवाई होती है..जिसे उस दिन उसने वो दवाई बबीता जी के साथ सेक्स करने के लिए खरीदी थी...और जब उसकी नशे की पूडिया गिर गयी...तो उसने वो डब्बे में से गोली निकाली और दो चार हाथ में लेके बोला था...अब क्या फ़ायदा इस दवाई का...और उसे फेंकता है...जो पास में पड़ी ठंडई के ग्लास में गिर जाती है.....वो एक गोली काफ़ी होती है...उस वक़्त जेठालाल ने 4 गोली डाल दी थी..इसलिए शिवांक की ये हालत हुई....अब जेठालाल सोच रहा था...कि ये शिवांक सच बोल रहा है..लेकिन में इसका साथ नही दे सकता ....

तभी अईयर बोलता है...

अईयर :- सोढी शिवांक सही बोल रहा है...

सभी अईयर से पूछते हैं...कैसे?

अईयर :- देखो सोढी...ऐसी दवाई आती है जिससे सेक्स का पवर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है....और अगर एक से ज़्यादा गोली का इस्तेमाल हो तो आदमी शिवांक जैसा हो जाता है...

पोपटलाल :- हाँ मेहता साहब ..अईयर भाई सही बोल रहे हैं...में इस पर आर्टिकल लिख चुका हूँ...ज़रूर इसकी ठंडई में किसी ने ऐसे कुछ गोलियाँ डाल दी होगी...

तारक :- ठीक है अगर हम सब ये बात मान ले...लेकिन ऐसी गोलियाँ सोसाइटी में लाया कौन...

जेठालाल :- अरे मेहता साहब आपको उससे क्या करना है...आप वो छोड़िए पहले ये देखिए कि करना क्या है इसका??

तारक :- मेरे हिसाब से तो इसका फ़ैसला सोसाइटी के बुजुर्ग चंपक चाचाजी को लेना चाहिए...

चाचाजी :- मेरे ख़याल से इसका परिणाम सोढी को लेना चाहिए...क्यूँ कि उसके साथ ये बात हुई है...लेकिन में इतना कहना चाहूँगा...जो भी इसने किया वो इसकी ग़लती नही थी...किसी ने इसके साथ ऐसा किया और इसी अंजाने में ग़लती हुई है...

सोढी :- वैसे तो में माफ़ नही करूँगा...क्यूँ कि में अपनी रोशन ने बहुत प्यार करता हूँ...और उसके साथ कोई ऐसी गंदी हरकत करे...में तो उसे जान से मार दूं..लेकिन चाचाजी भी सही बोल रहे हैं...इसलिए ....में...माफ़ कर देता हूँ..लेकिन इसे रोशन से माफी माँगनी पड़ेगी....

तारक :- सोढी बहुत बढ़िया ..तुमने जो आज किया है वो बहुत ही महान काम है....क्यूँ कि सज़ा देने से ज़्यादा माफ़ करना मुश्किल काम होता है....और सभी तालियाँ बजा देते हैं...

शिवांक :- थॅंक यू सोढी भाई..और में रोशन भाभी के पैर पकड़ के माफी भी माँगूंगा...

तभी तारक टप्पू से पूछता है...बेटा टप्पू तुझे ये कैसे पता चला कि ये शिवांक का काम है...

और सभी एक साथ बोलते हैं हाँ...कैसे पता चला..

टप्पू :- तारक अंकल...जब मुझे ये सब पता चला कि रोशन आंटी के साथ ऐसा हुआ है..तुम हम टप्पू सेना गार्डन में आ गये...ये ढूँढने कि क्या पता कुछ सुराग मिल जाए...तभी मुझे एक बटन मिला...एक शर्ट का बटन .... मुझे शक़ था कि ये बटन उसी आदमी का होगा....मेने काफ़ी कॉसिश करी लेकिन मुझे पता नही चला रहा था कि बटन किसका हो सकता है...

फिर में सोचने लगा....और अचानक से मुझे याद आया...कि मेने ये बटन दही हाँडी वाले दिन किसी की शर्ट में देखा है...मैं सोचने लगा...फिर मुझे ध्यान आया कि मैं उस दिन शिवांक अंकल से टकराया था ....और जब में उनसे टकराया था तो मेने देखा था कि उनकी शर्ट मे बीच का एक बटन नही था...मेने उनसे पूछा कि अंकल आपका बटन टूटा हुआ है...

और फिर वो घबराते हुए बोले....हाँ वो टप्पू में टकरा गया था इसलिए पता नही चला कैसे टूट गया...

जैसे मुझे याद आया कि वो बटन शिवांक अंकल का है...तो मुझे फिर ये प्लान बनाना पड़ा...क्यूँ कि मुझे पता था..वो ज़रूर आएँगे..बटन ढूँडने...

सभी टप्पू की इस प्लान पर तालियाँ बजाते हैं....

तारक:- वाहह टप्पू बेटा तुमने तो बहुत बढ़िया काम किया है....

चाचाजी :- हाँ तो फिर...पोता किसका है....

और फिर शिवांक रोशन से माफी माँगता है और सबसे भी...सब उसकी ग़लती को माफ़ सिर्फ़ इसलिए कर देते हैं...कि उसने जो भी किया अंजाने में किया उसका कोई इंटेन्षन नही था ऐसा करने का....

इसी तरह सब कुछ ठीक हो जाता है....और सोसाइटी की फिर से एक प्राब्लम चली जाती है....लेकिन एक प्राब्लम गई है...दूसरी कभी भी आ सकती है..

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मित्रो एक काम तो सही हो गया कि बलात्कारी पकड़ा गया गोकुलधाम सोसायटी की एक बहुत बड़ी समस्या सोल्व हो गई

पर क्या ये गोकुलधाम सोसायटी की ये आख़िरी प्रॉब्लम थी दोस्तो अब देखना ये है कि अगला हंगामा क्या होने वाला है


दोस्तो अपने विचारो से प्रोत्साहित ज़रूर करें
 
काफ़ी दिनो की परेशानी के बाद...एक नयी सुबह...सोसाइटी में....

सुबह के 6 बज रहे थे....और एक घर की घंटी बजी....

वो घर है आत्माराम भिड़े का...

कोई घंटी पे घंटी बजाए जा रहा था...

भिड़े :- ए माधवी देख कौन है...कितनी घंटी कोई मार रहा है..शायद दूध वाला होगा...

और अपने हाथ से माधवी को हिलाता है..

माधवी :- उःम्म्म क्या है...क्यूँ तंग कर रहे हो..

भिड़े :- अरे जा के देख कोई है दरवाजे पर..

माधवी :- हाँ जाती हूँ..

और आधी नींद में बाहर आती है...और गेट खोलती है...सामने दूध वाला खड़ा होता है....

दूध वाला माधवी को देख के चौंक जाता है....वो बस उसे देखता हे रहता है....माधवी की आधी नाइटी उसके शोल्डर्स से नीचे खिसकी हुई होती है...जिससे उसका कुछ चुचि का हिस्सा दिखाई दे रहा था...यही नही...आज तो दूध वाले के और भी मज़े आने वाले थे....उसकी नाइटी पता नही कैसे उपर की तरफ हुई थी...और फँस गई थी...जिससे उसके आधी से ज़्यादा गोरी गोरी जाँघ दिखाई दे रही थी...

तभी दूधवाला देखते हुए बोला...मेम्साब कितना दूं....

माधवी :- क्या मतलब?

दूध वाला :- हड़बड़ाता हुआ...मेरा मतलब है दूध....

माधवी :- 2 किलो चाहिए..अभी रूको में पतीला लेके आती हूँ...और वो चली जाती है...

जैसे ही वो पलटी...दूधवाले माधवी की गोल गोल और मस्त बड़ी गान्ड को देखने लगता है....उसका बम्बू खड़ा हो जाता है.....वैसे तो वो रोज़ दूध देने आता था..लेकिन आज माधवी को अधनंगी देख के उससे रहा नही गया...

फिर माधवी आई उसने दूध लिया...और दरवाजा बंद कर दिया...

आज तो सुबह सुबह ही ... मज़े आ गये...अब दिल अच्छा कटेगा....दूधवाला बड़बड़ाते हुए निकल गया.....

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अब सूरज चढ़ने लगा था....8 बज गये थे....हर रोज़ की तरह हमारे जेठालाल सोए पड़े थे....और हर बार की तरह ही दया उसे जगाने आती है...

दया :- टप्पू के पापा उठ जाइए....8 बज गये हैं..बापूजी गुस्सा करेंगे...

जेठालाल :- नींद में...हाँ बॅस 5 मिनट और दाययाअ...

दया मन में सोचती है ....आज फिर से कुछ करना पड़ेगा...नही तो बापूजी आ जाएँगे और फिर इन्हे डाँट पड़ेगी...

और जेठालाल का हाथ उठा के अपने चुचों पे रख देती है....और धीरे धीरे उसका हाथ हिलाने लगती है...

वैसे बता दूं..कि दया बहुत चालाक है ..शकल पे मत जाइए उसकी....उठाना तो उसका बहाना है ..क्यूँ कि उसको भी पता है..कि उसे मज़े मिलते हैं ऐसे उठाने में...

अब दया बहुत तेज़ी से हाथ चुचों पे रख के हिला रही थी..उसके मुँह से हल्की से सिसकयाँ निकल रही थी...वो बहुत धीमी आवाज़ में ले रही थी..आह ओह्ह...

कुछ देर बाद जेठालाल को लगा उसका हाथ कुछ मुलायम चीज़ को छू रहा है....उसने आँख खोल के देखा...तो दया अपना हाथ पकड़ कर उससे चुचों को दबा रही थी.....अब जेठालाल को भी मज़ा आने लगा था...अब उसने सोचा कि क्यूँ ना दया को और थोड़ा मज़ा दे दूं...

एक दम से दया के मुँह तेज़ अहह...निकली ...क्यूँ कि अब जेठालाल दया के चुचों को मसल्ने लगा था....अब वो उन्हे ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था...

दया :- टप्पू के पापा धीरे....कोई आ जाएगा...ही माआ....

जेठालाल :- क्यूँ अब क्या हुआ...अभी तो बड़े मज़े ले रही थी...अब क्यूँ डर रही है....और फिर वो जोरों से उसके निपल खीच लेता है...

इससे दया की सिसकियाँ और तेज़ी से निकल जाती है....

दया :- टप्पू के पापा बॅस...अब और नही....में तो आपको उठाने आई थी....आयईी दयाअ....आराम से...

फिर जेठालाल उसके चुचों को छोड़ देता है...उस वक़्त दया उसे ऐसे देखती है..जैसे पूछ रही हो..में तो बस ऐसे ही बोल रही थी...आपने सच में मुझे छोड़ दिया....

फिर जेठालाल दया को नीचे की ओर इशारा करती है....

लेकिन दया समझ नही पाती...वो बोलती है...

दया :- क्या बोल रहे हैं??

जेठालाल :- ए डोबी नॉनसेन्स...अब तूने अपनी चुचियाँ मसलवा के मेरा वो खंबे जैसा हो गया है...अब तू उसे शांत करेगी कि नही...

दया :- शरमाते हुए....आप भी ना...और अपना हाथ नीचे ले जाने लगती है...तभी..

बापूजी :- जेठिया...ओ जेठिया....उठा कि नही...

जेठालाल :- हड़बड़ाते हुए...हाँ बाबूजी उठा हुआ हूँ...

बाबूजी :- चल अच्छी बात है...जा जल्दी से नहा धो ले...फिर हम साथ में नाश्ता करेंगे....तब तक में अख़बार पढ़ लेता हूँ...

दोस्तों कनफयूज मत हो...बापूजी हॉल में से चिल्ला रहे थे...ना कि जेठालाल के कमरे से....

दया हंसते हुए किचन में भाग जाती है...

जेठालाल :- हे भावगन तू कौन से जन्म का बदला लेता है मुझसे...हॅश..आज शुरुआत ऐसी हुई है..तो बाकी का दिन कैसा जाएगा...और अपने बाथरूम की तरफ चल देता है....

जेठालाल बाथरूम से नहा धोके...हर बार की तरह...सूरज भगवान को जल चढ़ाने गलरी में जाने लगता है...

सूरज भगवान को देख के जल चढ़ा देता है....और जल चढ़ाने के बाद जैसे ही अंदर जाने के लिए अंदर मुड़ता है...तभी

 
सूरज भगवान को देख के जल चढ़ा देता है....और जल चढ़ाने के बाद जैसे ही अंदर जाने के लिए अंदर मुड़ता है...तभी उसकी नज़र किसी पर पड़ती है...और मुँह खुला का खुला रह जाता है...

जी हाँ उस समय ...सी विंग में ...एक हॉट सेक्सी....मोस्ट ब्यूटिफुल जेठालाल के लिए...वहाँ बाहर गलरी में साइक्लिंग कर रही थी....

जेठालाल :- गुड मॉर्निंग बबीता जी....

बबीता जी :- गुड मॉर्निंग जेठा जी...

जेठालाल :- और सुबह सुबह कसरत हो रही है...

और बबीता उधर से स्माइल दे देती है...

इधर जेठालाल का लंड खड़ा हो चुका था...और उसका बहुत बुरा हाल हो रहा था...क्या करता..क्यूँ कि उस वक़्त बबीता...एक मस्त से टॉप में और नीचे एक छोटी सी शॉर्ट....टॉप इतना टाइट था कि साइक्लिंग की वजह से उसके चुचे हिल तो नही रहे थे...लेकिन इतने बड़े लग रहे थे..मानो अभी टॉप को फाड़ेंगे और ताज़ी हवा का आनंद लेंगे....पसीने की वजह से बिल्कुल चिपक चुके थे...और नीचे गोरी गोरी सुंदर.....और बहुत ही सेक्सी जांघे...नज़र आ रही थी...

तभी जेठालाल लाइन मारता है...

जेठालाल :- बबीता जी..आपका ये पर्पल कलर का ड्रेस तो बहुत से...

बॅस सेक्सी बोलने वाला होता है..लेकिन नही बोलता क्यूँ कि उस वक़्त वो काफ़ी दूर खड़ा था..कोई सुन लेता तो क्या सोचता...

बबीता :- क्या जेठा जी..

जेठालाल :- वो आपका ये पर्पल कलर का ड्रेस बाहुत ही सुंदर है..कहाँ से लाई..

बबीता जी :- यू मीन पर्पल राइट...हाँ वो में कल शॉपिंग के लिए गई थी...वहाँ से लाई...आपको पसंद आई..

बबीता भी पीछे रहने वालों में से थोड़े ही थी...

जेठालाल बड़बड़ाते हुए...अरे मस्त तो इतनी है..कि अभी आकर आपको कस के पकड़ लूँ..और दबोच डालूं...

बबीता जी :- आपने कुछ कहा जेठा जी..

जेठालाल :- नही बॅस...सच में बहुत ज़्यादा अच्छी लग रही है आपकी ये ड्रेस...बहुत सुंदर लग रही हैं आप इस ड्रेस में...

बबीता जी :- थॅंक यू सो मच जेठा जी....

और फिर उसका मोबाइल बज उठता है..

बबीता :- अच्छा जेठा जी....मोम का फोन है में आपसे बाद में बात करती हूँ..

जेठालाल :- ओके गुड बाइ...

और सोचता है...सच में आज का दिन खराब ही होगा...और थोड़ी बात करनी थी..पता नही इनकी मम्मी जी को भी अभी ही फोन करना होता है...

और बोलते बोलते अंदर घुस जाता है...

अंदर बापूजी टेबल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे...और जेठालाल भी नाश्ता करने बैठ जाता है...

इधर तारक ऑफीस के लिए जाने की तैयारी करने लगता है...वो अंजलि को आवाज़ देता है...

तारक :- अंजलि चाइ मिलेगी...देर हो रही है भाई..

अंजलि :- हाँ जी ली आईइ....

तारक :- क्या यार अंजलि...इतनी लेट...

अंजलि :- तारक..अभी टाइम है..

और तारक के पास में आके बैठ जाती है...

तारक :- क्या बात है अंजलि आज सुबह सुबह मूड बनाया हुआ है..

अंजलि शर्मा जाती है...

अंजलि :- धत्त्त....वो तो बस ऐसे ही..

उधर जेठालाल के घर पे कोरियर आता है...और वो साइन कर के ले लेता है...

और जैसे ही वो कोरियर खोलता है..

जेठालाल :- ओहूओ....ये क्या सबको अँग्रेज़ी का इतना बेराग है...अब मेहता साहब के पास जाना पड़ेगा....

और घर में सबको जय जिनेन्द्र बोल के निकल जाता है...

 
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