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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

बॅक टू लाइव....

तारक :- तो ये सब हुआ जेठालाल...

लेडी :- अरे मुझे अब और बर्दाश्त नही हो रहा है..में अभी पोलीस को बुला रही हूँ...ऐसे कोई करता है क्या किसी के साथ...

जेठालाल का सारा नशा उतर जाता है..पोलीस का नाम सुन कर...उसकी हालत पतली हो जाती है....वो मेहता साहब बस इतना चिल्लाता है...

तारक उस लेडी को समझाते हुए...

तरल :- देखिए मेडम....इन्होने जान बुझ के ये सब नही किया है...

पोपटलाल :- हाँ मेडम.......में ये सब जान बुझ के नही किया है...में एक पत्रकार हूँ...

लेकिन उस लेडी ने तो कसम खा रखी थी कि वो आज पोपटलाल को माफ़ नही करेगी....

लेडी :- मुझे कुछ नही सुनना.....छाता लेके कोई डॅन्स करता है भला....में तो कंप्लेन करवा के छोड़ूँगी...

जेठालाल :- देखिए मेडम आप ग़लत समझ रही है......

पोपटलाल छाता जान बुझ के नही अपने साथ ले रखा...ये तो इसकी जान है...एक तरीके से...ये इसके बच्चे के समान है...

जैसे आप अपनी सुंदरता से कितना प्यार करती है...उसके बिना नही जी सकती ...वैसे ही पोपटलाल भी बिना छाते के नही जी सकता....ये इसका हमसफ़र है...

जेठालाल ने तीर छोड़ दिया था...और क्या करता वो..पोलीस के नाम से तो उसकी हालत एक गली के कुत्ते जैसे हो जाती है...

पोपटलाल :- हाँ मेडम...

भिड़े :- जेठालाल बिल्कुल सही बोल रहा है..मेडम...आप प्लीज़ ट्राइ टू अंडरस्टॅंड....

वो लेडी कुछ देर सोचती है.......

लेडी :- कुछ देर सोचने के बाद....अगर ऐसी बात है....तो ठीक है में आप सब को माफ़ कर देती हूँ.....

जेठालाल का तीर निशाने पे लग चुका था...

पोपटलाल :- सॉरी मेडम...आंड थॅंक यू...

सभी थॅंक यू बोल देते हैं.....

और वहाँ से हट के बार काउंटर पे आ जाते हैं......

सभी का नशा उतर चुका था....बस एक जने को छोड़ के....

जी हाँ अईयर....वो तो पी के टेबल पे सर रख के पड़े थे...

जेठालाल :- पोपटलाल ...तुम्हारी वजह से सारा मज़ा किरकिरा हो गया....

सोढी :- पोपु...मेरा तो मन कर रहा है..तेरा सर फोड़ दूं...

तारक :- सोढी शांत रह भाई...

पोपटलाल :- सॉरी भाई लोगों...सॉरी...

लेकिन अभी भी कुछ नही बिगड़ा है..हो जाए फिर से....

जेठालाल :- हाँ और क्या...अब तो बिना पिए...मेरा सर दर्द नही ख़तम होगा...

सभी हामी भरते हैं ...और फिर से...एक बार...

चेरसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...

ग्लास ख़तम.....

 


टाइम 12 :20

सोसाइटी में....

बबीता को नींद नही आ रही थी...तो वो बाहर आती है...

बबीता अपने आप से....कितने लेट हो गये..अईयर नही आए...अभी तक..

वो सोचती रहती है...और बाहर की ताज़ा ठंडी हवा खाने लगती है....

कुछ 10 मिनट बाद....

अहह.....ओह.....उ...

एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.....ह्म्म्म्मम.....आईईईईईईईईई

आवाज़ें आनी लगती है....

बबीता ये सुन के चौंक जाती है...

बबीता :- कौन है.....कौन है वहाँ पे.....

लेकिन इस बार भी कोई आवाज़ नही आती.....

बबीता काफ़ी डर जाती है....इसलिए वो अंदर भाग जाती है....

टाइम 1 बजे....

पार्टी में....

सब के सब इतनी ज़्यादा पी चुके थे..कि फुल टल्ली हो गये थे....

तारक :- अब हमे....चल...चलना चाहिए....

जेठालाल :- हां.....सहीी बोल रहे हैं..आप....बहुत टाइम हो गया है...

सब के सब अग्री कर देते हैं...और पहुँच जाते हैं..लड़खड़ाते हुए...गाड़ी के पास...

गाड़ी में बैठ के सोसाइटी में पहुँचने वाले होते हैं...

भिड़े :- अब हम...इतने नशे में अपनी अपनी बीवियों के पास कैसे जाएँगे....

तारक:- पॉइंट है भिड़े....कैसे जाएँगे...

तभी जेठालाल को ऐसा बोलता है...कि सब के सब उसकी तरफ घूर घूर के देखने लगते हैं....

वो बात है.....

अगले अपडेट में देख लेंगे..कि ऐसा क्या बोल दिया जेठालाल ने जो सब चौंक गये इतना......!!!!!

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सब पार्टी में से निकल कर गाड़ी में बैठ के वापिस आने लगते हैं.....अब आगे...!!

भिड़े :- लेकिन हम लोग घर पे कैसे जाएँगे...अपने अपने.....गाड़ी में बैठे बैठे बोलता है...

तारक :- हाँ ये बात तो सही है..कैसे जाएँगे....गड़बड़ हो गई....

सोढी :- मेहता साहब...इस बार ऐसी हालत में गया....तो रोशन मुझे हमेशा के लिए घर से निकल देगी....

जेठालाल :- दया तो सीधे बापूजी को बता देगी...वो तो मेरी बॅंड बजा देंगे...

तारक :- सही बोल रहे हो....तुम्हारी नही..हम सब की बज जाएगी...

चलो सब मिल के सोचते हैं....कि क्या किया जाए...

सब सोचने लगते हैं.....

तारक बोल पड़ता है..

तारक :- क्यूँ ना हम सब पोपटलाल के घर पे रुक जायें....

पोपटलाल :- हड़बड़ाता हुआ....मेहता साहब ये आप क्या बोल रहे हैं....मेरे घर पे इतने सार जने...एक साथ कैसे सोयंगे...

जेठालाल :- ये पोपटलाल कसम से कंजूस आदमी है....सोने तक नही देगा...बहुत धीरे से वो तारक को बोलता है...

इस बात पे कोई कुछ नही बोलता है...सब चुप ही रहते हैं....

सोसाइटी आने ही वाली होती है....

सब नशे के कारण कुछ सोच भी नही पा रहे थे....तभी जेठालाल बोल पड़ता है.....

और जैसे ही वो बोलता है...गाड़ी सोसाइटी में आके रुक जाती है.....

सब उसकी तरफ ऐसे देख रहे होते हैं..जैसे सब को साँप सूंघ गया हो...

तारक :- चुप्पी तोड़ते हुई....ये क्या बोल रहे हो जेठालाल ..ऐसा थोड़ी हो सकता है...

जेठालाल :- क्यूँ नही हो सकता...

क्यूँ भाई सोढी....

सोढी सोच में पड़ जाता है...

जेठालाल :- अरे इस अईयर जी को कोई जगाओ..किसी काम का नही है....

पोपटलाल अईयर को जगाता है..और जेठालाल की बात उसे बताता है...

तारक :- पहले सब गाड़ी से उतरो...फिर देखते हैं....

सब गाड़ी से उतरते हैं....और गाड़ी चली जाती है सोसाइटी से...

किसी से खड़ा नही हुए जा रहा होता है..सब नशे में लड़खड़ा रहे होते हैं...

इसलिए सभी वहीं कॉंपाउंड की ज़मीन पर बैठ जाते हैं.....

टाइम 1:30 बज रहे होते हैं...

जेठालाल :- क्यूँ मेहता साहब क्या सोचा आपने....मेरे आइडिया..के बारे में..

तारक :- सब की राय लो जेठालाल..में तो तैयार हूँ...

सोढी :- में भी तैयार हूँ....

आज वो इतने नशे में था .. कि जिस चीज़ के लिए वो हाँ कर रहा था...अगर उसे बाद में पता चलेगी..तो अपने आप को कैसे माफ़ कर पाएगा....

भिड़े :- ठीक है...शिक्षक महोदय....बने फिरते हैं..लेकिन आज सारी सिक्षक गिरी ख्तम हो चुकी थी....

वो क्या कोई भी अपने आप को कैसे माफ़ कर पाएगा...

जेठालाल :- अईयर भाई ...क्या कहते हो आप...बॅस आप ही रहे गये हो...

अईयर में इतनी ताक़त ही नही होती...सबसे ज़्यादा बुरा हाल हुआ होता है..नशे से.....वो बस इतना ही बोलता है...

अईयर :- हाँ...ठीक है...ठीक है....

जेठालाल :- तो ठीक है....चलते हैं फिर...यहाँ पर क्यूँ वक़्त बर्बाद कर रहे हैं...

पोपटलाल :- मुझसे तो पूछो कि .... में क्या चाहता हूँ...

अईयर को छोड़ के बाकी तीनो हँसने लगते हैं....

जेठालाल :- आए पोपटलाल ..तेरी शादी थोड़ी हुई है....जो तुझसे पूछेंगे....हहेहहही....

तारक :- हाँ भाई..तू जा अपने घर....

सोढी :- पोपु ..तू तो वैसे भी अकेला ही है...कुँवारा...हाहहहहाः....तू किसके पास जाएगा.....

पोपटलाल गुस्से में आते हुए...

पोपटलाल :- तुम लोग समझते क्या हो मुझे....में दुनिया हिला दूँगा...में भी जाउन्गा....तुम मेरी चिंता मत करो....

आज सब नशे में वो करने जा रहे थे...जिससे उनकी दुनिया हिल जानी थी....

जी हाँ......अगर आप समझ गये होंगे तो..

जानने के लिए कि जेठालाल ने क्या ..बोला था....चलते हैं..एक बार फिर से....

फ्लश बॅक......!!!

 


सब प्लान के बारे में सोच रहे थे....कि तभी जेठालाल बोल पड़ा...

जेठालाल :- हम अपनी अपनी बीवियों के पास तो नही जा सकते...क्यूँ ना हम...दूसरों की बीवियों के पास चलें....

सभी के सभी उसकी तरफ नज़र टिकाए देखने लगते हैं...

तारक :- तुम्हारा मतलब वाइफ स्वापिंग..

जेठालाल :- क्या??

तारक :- क्या ये सही है..

जेठालाल :- हाँ बिल्कुल सही है..मेहता साहब...क्यूँ सोढी...क्यूँ भिड़े....

और इसी बात पे सब सोचने लगते हैं...

बॅक तो लाइव.....!!!

भिड़े :- लेकिन कौन किसके घर जाएगा....ये तो डिसाइड कर लो पहले....

सोढी :- ह्म..ये ज़रूरी है...

भिड़े सोचता है इससे पहले कि कोई और बोले में बोल देता हूँ...

भिड़े :- मेरा नंबर है.... रोशन भाभी के पास...

सोढी एक बार तो उसकी तरफ घूर के देखता है.....भिड़े की तो गान्ड फट जाती है..कि कहीं..सोढी उसे मार ना दे..लेकिन थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हो जाता है...

क्यूँ कि सोढी भी प्यारी सी स्माइल दे देता है...भिड़े की जान में जान आ जाती है...

कोई कुछ बोले उससे पहले जेठालाल बोल पड़ता है....हाँ ठीक है..इसका फ़िक्स करो..नही तो बाद में पंचायत करेगा....

तारक अपने मन में सोचता है..कहीं सोढी वो नाम ना बोल दे..इससे पहले में बोल देता हूँ...

तारक :- अब में बोल देता हूँ...

में जाउन्गा...माधवी भाभी के घर....

जेठालाल :- किसी को कोई दिक्कत तो नही है...

सभी अपनी गर्दन ना में हिला देते हैं...

जेठालाल :- आप ये फ़िक्स करो...

अब जेठालाल खुश होता है..और सोचता है..इससे पहले सोढी बोले में ही बोल देता हूँ....

जेठालाल :- में बोल दूं अब...

में जाउन्गा...बबीता जी के पास...

बबीता का नाम सुन के अईयर के कान फिर से खड़े हो जाते हैं...

लेकिन वो कुछ बोलने के लायक नही होता...

जेठालाल :- किसी को कोई परेशानी तो नही है....

सब अपनी गर्दन एक बार फिर ना में हिला देते हैं...

इस बार सोढी बोल पड़ता है...

सोढी :- तो ठीक है..में अंजलि भाभी के पास चला जाता हूँ...

तभी तारक बोल पड़ता है..

तारक :- सोढी..तुम अंजलि के पास मत जाओ...

सब पूछते हैं क्यूँ??

सोढी :- मेहता साहब आप क्यूँ नही चाहते ..ये तो ग़लत बात है....

जेठालाल और भिड़े एक साथ ...हन्ंणणन्..

तारक :- अरे भाई मेरी सुनो तो...मेरे कहने का मतलब् ये है..कि अईयर भाई की हालत सीढ़ी चढ़ने लायक नही है...तो उन्हे नीचे आसानी होगी...

सभी बात पर सहमति जताते हैं...

सोढी :- कोई गाल नही जी...तो में दया भाभी के पास चला जाता हूँ...और अईयर को आपके घर के गेट के सामने छोड़ दूँगा...क्यूँ अईयर..

अईयर अब कुछ ठीक ठाक सा हो रहा था..मतलब नशा तो तगड़ा था..लेकिन अब बोल पा रहा था...

अईयर :- इसकी कोई ज़रूरत नही है...में चला जाउन्गा..उपर चढ़ के...

तारक :- अईयर समझो...तुम गिर जाओगे..

अईयर :- ठीक है मेहता साहब...जैसा आप कहो....

जेठालाल :- तो हम सब का तो हो गया...लेकिन भाई पोपटलाल तू कहाँ जाएगा....तू जा अकेला घर पे जाके सो जा...

पोपटलाल :- जेठालाल.....तुम ने मुझे क्या सोच रखा है...मेरे पास भी है एक घर जानने को.....

सभी पूछते हैं कौन..........

तो सभी अपने अपने घर डिसाइड कर चुके थे...कौन किसके घर जा रहा है...वो इस प्रकार है...

जेंट्स हाउस

जेठालाल - बबीता

तारक - माधवी

अईयर - अंजलि

भिड़े - रोशन

सोढी - दया

पोपटलाल .....जी इनका क्या बताना..ये खुद तो हिलते रहते हैं...ये क्या किसी के घर जाएँगे..बस बातें बड़ी बड़ी करवा लो....

देखो क्या करते हैं.......

सभी के सभी एक ऐसी राह पर निकल गये थे....जिसका अंजाम क्या होगा...इनमे से किसी को नही पता....और ना ही मुझे पता है...कि अब आगे क्या होगा.......

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तो सब के सब अपने रास्ते निकल पड़े थे...

भिड़े ...रोशन के घर..

तारक .... माधवी के घर...

सोढी.... दया के घर...

अईयर...अंजलि के घर...

और अंत में....

जेठालाल चल पड़ा था..बबीता के घर.....

सबसे पहले ...उसके पास चलते हैं..जिसे सबसे नज़दीक जाना था...

जी हाँ...अईयर के पास....

अईयर लड़खड़ाता हुआ...अंजलि मेहता के घर के पास जाके बेल बजाता है....

थोड़ी देर बाद अंदर से आवाज़ आती है...

अंजलि :- आती हूँ..बाबा....कितनी रात से आए तारा...

बॅस जब इतना बोलके गेट खोलती है...और सामने अईयर को खड़ा पाती है तो घबरा जाती है...

अंजलि :- अईयर भाई आप...

अईयर बिना सुने...घर के अंदर जाने लगता है....वो अभी भी लड़खड़ाता है...

अंजलि :- अईयर भाई...आप यहाँ क्या कर रहे हैं...और तारक कहाँ है...आप कुछ बोलते क्यूँ नही...

और ना जाने क्यूँ दरवाज़ा बंद कर के उसके पास आ जाती है...

अईयर अब पीछे घूमता है...और अंजलि के सामने फेस फेस कर लेता है...

वो अंजलि को बस देखता रहता है....

उस टाइम अंजलि ने एक ब्लू कलर का नाइट सूट पहना होता है....और उसके शर्ट के उपर के 2 बटन खुले होते हैं....

और जिसकी वजह से उसका अंदर का बदन बाहर झलक रहा होता है...अईयर की नज़र वहीं पर गई रहती है...

जब अंजलि उसकी नज़र का पीछा करती है...तो पाती है...कि अईयर की नज़र कहाँ है...वो झट से..अपने हाथ रख लेती है...

अईयर :- अंजलि भाभी...हाथ क्यूँ रख लिया.....

इस वक़्त तगड़े नशे में होता है..

अंजलि जब उसकी आवाज़ सुनती है...तो उसके मुँह से शराब की बदबू आती है..

अंजलि :- अईयर भाई आप ने इतनी पी रखी है...और आप ये कैसी बात कर रहे हैं...

अईयर अंजलि की बात सुनता सुनता उसके करीब आ जाता है....वो उस वक़्त सोफे के पीछे खड़ा था...और अंजलि उसके आगे.....

अंजलि :- देखिए अईयर भाई...आगे मत आइए...प्लीज़...नही तो में चिल्लाउंगी...

अईयर उसकी नही सुनता वो आगे बढ़ता रहता है..और तभी अंजलि के चीखने की आवाज़ आती है...जो उसके पूरे घर में गूँज उठती है....

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उधर सोढी भी लड़खड़ाता हुआ...सीढ़ियाँ चढ़ के दया के घर की बेल बजाता है....

दया तो सोई नही होती है....वो जैसे ही बेल की आवाज़ सुनती है..वो दौड़ी दौड़ी दरवाजा खोलते हुए बोलने लगती है...टप्पू के पापा आप...

बॅस इतना ही बोल के जब सर उपर कर के देखती है...तो सामने सोढी को खड़े देख एक मिनट के लिए तो डर जाती है....

दया :- सोढी भाई आप..इतनी रात में यहाँ क्या कर रहे हैं...

सोढी कुछ नही बोलता और..हल्का सा दरवाजा और खोलता है..और अंदर चल पड़ता है...

दया उसके पीछे पीछे भागते हुई आती है...और उससे फिर से पूछती है...लेकिन इस बार भी सोढी कुछ नही बोलता...और जाके सोफे पे बैठ जाता है...

दया उसे सोफे पे बैठे देखती है...और उससे फिर से पूछने ही वाली होती है...कि

सोढी उससे पानी लाने के लिए बोलता है...दया कुछ सोचती है...और उसको वहीं रखे डाइनिंग टेबल पे पड़े जग से ग्लास में पानी डालने लगती है...

सोढी बड़े गौर से पीछे से दया को देख रहा था...वैसे तो उसने साड़ी ही पह्न रखी थी...लेकिन उसकी गान्ड बाहर की तरफ निकली हुई थी..जिसे देख कर सोढी पागल हुए जा रहा था....

सोढी सोफे से उठा..और चल दिया दया के नज़दीक....

दया जैसे ही पीछे मूडी...वो बहुत ज़्यादा घबरा गाइ...क्यूँ कि सोढी उसके बिल्कुल नज़दीक खड़ा था...

दया :- डरते हुए पानी...

सोढी :- पानी तो फिर भी पीते रहेंगे....आज कुछ और पीने का मन है...

सोढी दया के इतने करीब था...कि दया को सोढी के मुँह से बहुत ही ज़्यादा बदबू आ रही थी...शराब की...

दया वहाँ से फटाफट हटती हुई....कमरे की तरफ चलने लगती है...

दया :- आपने इतनी शराब क्यूँ पी रखी है...

सोढी कुछ नही बोलता...और दया के कमरे की तरफ चलता रहता है...

दया कमरे में पहुँच के...पलंग पे चढ़ जाती है...

दया :- सोढी भाई...आप इतनी आगे मत आइए....नही तो में चिल्लाउंगी...मत आइए इतना आगे....

सोढी भी पलंग के बिल्कुल नज़दीक आ जाता है.....और तभी दया चिल्ला पड़ती है....

दया :- हेयययययययययययययी माआआआआ माताजीीइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई..............

उसकी चीख पूरे कमरे में गूँज उठती है.........

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इधर भिड़े रोशन के गेट की तरफ पहुँच चुका होता है.......

भिड़े रोशन के घर पे पहुँच गया था..और डोर बेल बजाता है....

रोशन अंदर से चलती हुई आती है...उसने रेड कलर का सिल्क टाइप सी नाइटी पहनी होती है....अंदर ब्रा नही पहनी होती है....और उसके चुचे उछल रहे होते हैं..हिलने से..और उसकी पाज़ामी इतनी टाइट थी...कि गान्ड की शेप अलग से दिख रही होती है.....

रोशन :- आईइ बावा.....एक तो इतनी देर से आ रहे हो..और इतनी घंटी बजा रहे हो....

और वो गेट खोलती है...तो सामने खड़े भिड़े को देख कर थोडा सा चौंक जाती है...

रोशन :- भिड़े भाई आप....इतनी रात को कैसे..

भिड़े :- आपके लिए आया हूँ...

रोशन को शराब की बदबू आ जाती है....

रोशन :- ये क्या कह रहे हैं आप..

भिड़े :- जो आपने सुना वही कह रहा हूँ...आपके लिए आया हूँ आज...

रोशन :- देखिए भिड़े भाई..आप जाके सो जाए...

और गेट बंद करने लगती है...लेकिन भिड़े हाथ से गेट को रोक लेता है....और खोलता हुआ बड़ी तेज़ी से अंदर आता है...और गेट को लॉक कर देता है....

ये काम इतनी जल्दी हुआ होता है...कि रोशन कुछ कर ही नही पाती....

रोशन :- भिड़े भाई...आप ये क्या कर रहे हैं....आप जाएँ यहाँ से नही तो में चिल्लाउंगी...

भिड़े :- तो चिल्लाओ......मुझे कोई फ़र्क नही पड़ेगा....

आज तो बहुत मज़ा आएगा....

रोशन :- देखिए....ऐसा मत करिए..आप जाएँ..सुबह बात करेंगे...आप ग़लत कर रहे हैं...

भिड़े रोशन के करीब आ जाता है....

रोशन :- रुक जाएँ....आप ने तो बहुत पी रखी है.....

रोशन वहाँ से हट के कमरे में भागने लगती है....लेकिन भिड़े उसका हाथ पकड़ लेता है.....रोशन काफ़ी कॉसिश करती है....थोड़ी कॉसिश करने के बाद हाथ छूट जाता है.....

लेकिन ....फिर एक आवाज़ गूँज पड़ती है रोशन की...........ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह......

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उधर मेहता साहब.....माधवी के घर के पास पहुँच के...बेल बजा देते हैं...

कोई दो चार मिनट के बाद माधवी आती है....पहले टाइम देखती है....2 बजे के आस पास हो रहे होते हैं...उसने एक ब्लॅक कलर की नाइटी पहनी हुई थी....जिसका डीप नेक था.....काफ़ी हद तक उसके चुचे देखे जा रहे थे....

वो नींद में चलती हुई...गेट खोलती है...और जैसे ही गेट खोलती है....उसकी सारी नींद उड़ जाती है....

और दूसरी तरफ से तारक माधवी के नज़ारे को देख के हिल जाता है....क्यूँ कि माधवी के चुचे आधे देख पा रहा था वो.....

मतलब ये है ये...कि दोनो के दूसरे को देख के हिल जाते हैं.....

 
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