• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

भिड़े और माधवी एक मस्त चुदाई के बाद हाँफ रहे थे...उधर दया घर पहुँचती है..और देख के चौंक जाती है...अब आगे...!!!

जैसे ही दया अपने कदम ..लिविंग रूम की तरफ बढ़ती है...वहाँ का नज़ारा देख के चौंक जाती है.....

पूरे फ्लोर पे...गुलाब की चादर थी....जो चल के जाने के लिए बनाई गई थी...

दया ये देख कर थोड़ी कन्फ्यूज़ और हैरान होती है...कि ये सब किया किसने है...

लेकिन फिर वो धीरे धीरे फूलों के उपर चलती हुई जाती है..जो उसके कमरे के दरवाजे पे ख़तम होती है..

दरवाजा बंद होता है...वो कुछ देर सोचती है...और गेट को अपनी तरफ़ खिचती है...उसके कमरे का गेट...बाहर की तरफ खुलता है इसलिए...

जैसे ही गेट को खिचती है....उसके सर पे....फूलों की बरसात हो जाती है....

दया ये सब देख के ..बहुत ही ज़्यादा खुश होती है....तब उसे लगता है..शायद टप्पू के पापा ने किया होगा ये सब...वो चिल्लाती है..

दया :- टप्पू के पापा.....टप्पू के पापा..आब यहीं पर हैं ना.....

तभी......

तभी पीछे से आके उसको ..पीछे से कोई पकड़ लेता है....दया की सांस रुक जाती है...वो घबरा जाती है..कि कौन आ गया...

लेकिन कुछ सेकेंड्स बाद वो निर्मल हो जाती है...क्यूँ कि वो समझ जाती है..कि पीछे जेठालाल खड़ा है...

वो अपने ग्रिप को ढीला बनाती है..और पीछे मूड कर देखती है...जेठालाल एक कातिल मुस्कान के साथ खड़ा होता है...

दया :- नटखट....

जेठालाल कुछ नही बोलता...बस उसे देखता ही रहता है.....

दया :- ये सब करने की क्या ज़रूरत थी...जब वो ये बोल रही थी..तो उसकी आँखे नीचे थी..और वो अपने नखुनो के साथ खेल रही थी...

जेठालाल अब कुछ नही बोलता है..और उसकी तरफ ऐसे ही देखता रहता है...

दया :- अपना सर उपर करके...अरे ऐसे क्यों खड़े हैं...कुछ बोलिए...बोलते क्यूँ नही है...एक ही सांस में बोल देती है...

जेठालाल अब भी कुछ नही बोलता...

लेकिन....

इस बार वो अपने होंठ दया के होंठ पे रख के एक प्यारी सी पप्पी ले लेता है...

दया इसके लिए तैयार नही होती..और अपने आप को छुड़ाने के लिए पीछे भागती है...

दया :- हाई दैया....ये क्या कर रहे हैं...और शरमाने लगती है...फिर कुछ देर बाद बोलती है....टप्पू आ जाएगा...

जेठालाल इस बार बोल पड़ता है...

जेठालाल :- वो नही आएगा....

और अपनी कातिल मुस्कान दया को दिखा देता है..

दया बस दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी...शर्म के मारे.....

 
तब जेठालाल उसके करीब आके...अपना हाथ पीछे कमर पे ले जाता है...और खीच कर अपने सीने से लगा लेता है...

दया :- आह....टप्पू के पापा...

बॅस इतना ही बोल पाती है....कि तभी जेठालाल अपने होंठ दया की गर्दन पे रख के ... वहाँ चूमने लगता है...

दया अब मदहोशी में चली जाती है..

लड़कियों की सबसे कमजोर जगह होती है उनकी गर्दन..वहाँ किस करने से वो काफ़ी मदहोश हो जाती है.....और यही जेठालाल ने दया के साथ किया...

जेठालाल अपने चूमने में लगा हुआ था...कभी गर्दन..कभी होंठ...तो काफ़ी गाल...चुचों के उपरी हिस्से को वो बस चूमे जा रहा था....

फिर वो हटा...कुछ सेकेंड रुका...और दया का पल्लू नीचे गिरा दिया...अब उपर से सिर्फ़ उसका ब्लाउस था...उसने बिना वक़्त गँवाए ब्लाउस भी खोल दिया....अब उपर से वो सिर्फ़ ब्रा में थी....

जेठालाल ने बाहर निकली चुचियों पे अपने होंठ लगा दिए...और वहाँ चूमने लगा...इश्स वक़्त दया के मुँह से बॅस...

दया :- टप्प्प्ुऊउ कीए पपपा.....आह...यही निकल रहा था..

जेठालाल एक फिर फिर पीछे हटा...दया की आँखें बंद थी..वो दोनो अभी भी वैसे ही खड़े थी....इस बार जेठालाल ने ब्रा पकड़ी और खोलने लगा....

लेकिन उससे खुल नही रही थी...वो काफ़ी कॉसिश करता है..लेकिन उससे खुल नही रही थी....

जेठालाल :- कम्बख़्त...खुल जा...एयेए...लेकिन नही खुलती ...

दया ये सब देख कर हंस पड़ती है...

जेठालाल तू क्या हंस रही है....मदद कर मेरी....वो झल्लाते हुए बोलता है...

दया :- में क्यूँ खोलो...अपने आप खोल लीजिए...और फिर हँसने लगती है....

जेठालाल को गुस्सा आ जाता है...और वो खोलने की वजाय...उसे फाड़ देता है...

दया :- ये क्या किया...अपने मेरी इतनी प्यारी...

अहह.....

जी हाँ...जेठालाल ने अपने होंठ दया के चुचों पे लगा दिए थे...और उन्हे चूस रहा था....दया के निपल्स हार्ड हो चुके थे....

 
दया के हाथ जेठालाल के बालों में घूम रहे थे....कुछ देर तक चूसने के बाद वो अलग हुआ....और दया की चुचियाँ भीग चुकी थी..जेठालाल के थूक से...

इस बार जेठालाल अपने कपड़े उतारता है...और अपना पाजामा और अंडरवेर उतार के एक बारी में नंगा हो जाता है....

दया बड़े गोर से उसे देख रही थी..

माफ़ कीजिएगा...उसे नही...उसके लंड को देख रही थी...जो अब विकराल रूप ले चुका था....और सलामी दे रहा था..आसमान को....

दया उसी हालत में आगे बढ़ती है..और लंड हो हाथ में ले लेती है...और खड़ी रहती है...कुछ देर...दोनो एक दूसरे की आँख में देखते रहते हैं...

कुछ देर के लिए सब कुछ रुक जाता है..जैसे किसी ने टाइम पे ब्रेक लगा दिया हो...

फिर जेठालाल खामोशी को तोड़ते हुए...

जेठालाल :- अब क्या सिर्फ़ देखती रहेगी..

दया सुन के हड़बड़ाती है...और झट से उससे मुँह में ले लेती है..

जेठालाल :- देख दया ....आराम से करियो......अहह......

नीचे कम शुरू हो चुका था...

जेठालाल फिर से बोलने लगता है...

जेठालाल :- दया..ह.ओह्ह्ह.....ज़्यादा..नही...आहह...नही तो निकल जाएगा मेरा...आज कुछ ज़्यादा उतावला हो रहा है यी..ओह..अह्ह्ह्ह..

दया अपना मुँह अंदर बाहर...अंदर बाहर..कर के आधा लंड ले रही थी....लेकिन उसने जेठालाल की बात सुनी थी..इसलिए...बॅस एक पौछ्ह्ह...की आवाज़ कर के एक दम छोड़ देती है....

दया :- मेरी चूसने की ज़रूरत नही है...वो वैसे ही गीली हुई है...

बििना शरम के दया जेठालाल को बोल देती है..

जेठालाल :- तो मेने तुझसे पूछा...वैसे भी में नही चूसने वाला...मुझसे अब रहा नही जा रहा...

दया :- सॉरी...

जेठालाल :- अब सॉरी वॉरी छोड़...और अपनी ये उतार...

दया :- ये क्या...क्या ये...

जेठालाल को पता था..कि दया मज़े ले रही है..उससे...वो झट से उसका पेटी कोट खीच देता है...पेटिकोट इतनी तेज़ी से खिचता है..कि उसके साथ पैंटी भी नीचे हो जाती है....

जेठालाल दया की चूत देखता ही रह जाता है...कोई बाल नही था उसपे...और इतनी गीली हो रखी थी कि पूछो मत...

जेठालाल दया को घुटनो के बल बैठाता है...और मूड कर पलंग की तरफ कर देता है...मतलब ज़मीन पर डॉगी स्टाइल

और खुद पीछे आकर चूत पे लंड सेट करता है...और एक ही धक्के में..पूरा का पूरा अंदर....

दया :- अहह....आइइईई... आराम से टप्पू के पापा...

 
लेकिन जेठालाल आराम के मूड में थोड़ी ही था...

उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए थे...लंड अंदर बाहर..हो रहा था...पूरा अंदर जाता है...और पूरा बाहर आता....चूत गीली होने के कारण...पच...पच...आवाज़ें आ रही थी...

दया :- आआआआआ......सीईईईईईईईईईईईईईईईईईई......उईईइ..

ओह....और तेज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़...

हर धक्के के साथ यही बोले जा रही थी...

धक्को की रफ़्तार बढ़ चुकी थी...और दोनो का बुरा हाल हो गया था....

दया :- अब मुझसे रहा नही जा रहा...में जाधने वाली हूँ...अहह...ओह्ह.

जेठालाल :- मेरा भी यही हाल है दया..में भी जाने वाला हूँ.....

और....

और दोनो एक साथ एक ही वक्त पर झड जाते हैं.....और अपना रस एक दूसरे के अंदर ही उडेल देते हैं....

जेठालाल हांफता हुआ...दया की पीठ के उपर लैत जाता है......

सब अपनी बीवियों के साथ अपना अपना कार्यक्रम कर चुके होते हैं....सिर्फ़ एक जने के....

हाँ जी सब जानते हैं....

अरे वही हमारा एक कंवारा लड़का...सॉरी सॉरी...आदमी....पत्रकार पोपटलाल ....भाई साहब....

वो अपने कमरे के बेड पर लेटे हुए थे...

पोपटलाल :- बताओ मेरी शादी भी हो गई होति..तो में भी अपनी बीवी के साथ चुदाई कर रहा होता...कितना मज़ा आता ना....अपने आपसे ही बातें कर रहा था.....

और सोचते सोचते उसको कुछ याद आ जाता है...और उसका हाथ अपने आप लंड पे चला जाता है...

और कपड़ो के उपर से ही..उसे घिसना चालू कर देता है.......कुछ मिनट तक ऐसे करने के बाद...

अहह....माधवीई भाभी...आ....मज़ा आया ना....कर के झड जाता है...

जी हाँ...उसको उस दिन वाली चुदाई के बारे मे याद आ जाता है..जब उसने और अब्दुल ने...माधवी के साथ चुदाई करी थी..उसे बेहोश करके...

जब पोपटलाल नॉर्मल होता है...

पोपटलाल :- अहेआी.....लीईए छी....आज अंदर ही निकल गया..साला...शादी हो गई होती तो ये नही करना पड़ता...चलो एक बार फिरसे फ्रेश हो जाता हूँ.....

सब अपना काम कर चुके थे...लेकिन अगला स्टेप सबसे इंपॉर्टेंट था.....

 


शाम के 6:15 बज चुके थे....

अरे इतनी जल्दी भी क्या है.....

नेक्स्ट अपडेट मे वो भी देख लेंगे..कि अगला स्टेप क्या है..इन लोगों का....!!!!!!

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जेठालाल , तारक , अईयर , सोढी और भिड़े....ये सब जेठालाल के प्लान के अनुसार...1स्ट स्टेप क्लियर कर चुके थे.....अब बारी थी अगले स्टेप की ....जो उन्हे बड़े संभाल के चलनी थी....

टाइम... 6:15 बजे......

सोढी के घर.....

सोढी...रोशन के पीछे लेटा हुआ था....और उसका एक पैर रोशन की कमर के उपर था....

और तभी वो अपनी आँख खोलता है....टाइम देखता है....उसे पता था...कि अब प्लान को आगे बढ़ाने का टाइम आ गया है....

अपना फोन उठाता है...

फोन की रिंग बजती है....

सोढी :- हेलूओ...

हाँ बालू....

कैसे है??

क्याआआआआ????????

इतनी तेज़ बोलता है कि रोशन की आँख खुलती है....और वो रोशन की तरफ हाथ मार के पूछती है क्या हुआ...रोशन उससे हाथ से चुप रहने को बोलता है..

सोढी फिर से फोन पे बात करता हुआ...

सोढी :- क्या कह रहा है ईए...

अच्छा तू चिंता ना कर....

हाँ हाँ...में बस अभी निकल रहा हूँ...

चल चंगा...

ओके बाइ...

फोन कट....

रोशन सोढी से पूछती है...

रोशन :- क्या हुआ??

सोढी :- अरे मेरी जान...वो बालू है ना..उसकी गाड़ी का वडा आक्सिडेंट हो गया है... ********** हाइवे पर....तो मुझे अभी जाना होगा...

रोशन :- ऊओ खुदाई...रोशन तो फिर..बालू भाई को चोट तो नही आईइ ना..

सोढी :- नहिी...उसको कुछ नही हुआ है....

मगर उसकी गाड़ी का बहुत बुरा हाल हो गया है...तो मुझे जाना पड़ेगा...तो में जाउ..

रोशन :- हाँ जा बावा....पूछने की क्या ज़रूरत है....

सोढी :- थॅंक यू रोशन....और हाँ...रात में 1 या 2 बज भी सकते हैं...काफ़ी दूर जाना पड़ेगा ना....

रोशन :- हाँ हाँ ओके...अब जा जल्दी....

और रोशन खड़ा होता है.....और तैयार होके...15 मिनट में निकल जाता है.....

वो कॉंपाउंड में खुश होता हुआ जा रहा होता है....और वो तभी अईयर को फोन मिलाता है...

अईयर :- हाँ सोढी...

सोढी :- अईयर में घर से निकल गया हूँ...

अईयर :- तूने क्या बहाना बनाया...

वो काफ़ी धीरे बात कर रहा था...क्यूँ कि वो भी बबिता की बगल में सो रहा था...बबीता की आँख लगी हुई थी...

सोढी :- वो यार...मेने अपने फोन की खुद अपने आप रिंग बजाई...और फिर....

सारी बात बता देता है..जो उसने रोशन से कही थी.....

अईयर :- वाह सोढी...क्या आइडिया निकाला है तूने...चल ठीक है..में भी कुछ करता हूँ...चल बाइ....

फोन कट...

सोढी कॉंपाउंड से चला जाता है...एक बॅग लेकर....

जाते समये वो ये कहता है..कि इसमे उसके गेराज का समान है...

रोशन चुदाई के बाद इतनी थकि हुई थी..कि उसने इतना ध्यान नही दिया....

 
उधर अईयर....

5 मीं तक ऐसे हे घूमता रहा...की क्या करे...तभी उसको सोढी की तरह आइडिया आया.....

टाइम 6:45 बजे.....!!

अईयर बॅग पॅक कर रहा होता है...और उसके शोर से बबीता की आँख खुल जाती है...लेकिन अच्छी तरह से नही उठी होती है...

बबीता :- अईयर ...आआ...उबासी लेती हुई...कहीं जा रहे हो क्या..

अईयर :- हाँ बबीता डार्लिंग ... वो क्या है ना आज ऑफीस का काम में बीच में छोड़ के आ गया था...तो काम बहुत ज़्यादा है...तो इसलिए अभी जा रहा हूँ...और शायद आते आते...थोड़ी देर हो जाए....तो इंतेज़ार मत करना...

पूरी बात एक ही सांस में बोल देता है...

बबीता बस इतना ही बोलती है....ओके...बट टेक केयर हाँ...और जल्दी आ जाना...और फिर से लेट जाती है...

अईयर माँ में....चलो ये बढ़िया हुआ...अब मुझे निकलना चाहिए......

और वो घर से निकल जाने की तैयारी करने लगता है....

टाइम 7 बजे....!!!

पोपटलाल को किसी को क्या बताना था...वो तो कुँवारा था...

वो विंग में से ..इधर उधर देखता है...कोई नही होता सोसाइटी में...सन्नाटा बिल्कुल सन्नाटा होता है....

वो अपने विंग से बाहर आता ही है....उसे रीता दिखाई दे जाती है...जो फोन पे बात कर रही होती है...अपने फ्लॅट के गेट के बाहर....

एक बार तो पोपटलाल घबरा जाता है....लेकिन...वो कुछ सोचता या करता...इससे पहले रीता वापिस अंदर जा चुकी होती है...

पोपटलाल मन में सोचता है...ये ब्रेकिंग न्यूज़ आ गई...काफ़ी दिनो के बाद दिखी...

पोपटलाल...पोपटलाल ...उसको आवाज़ आती है..एक मिनट एक लिए वो घबरा जाता है...मगर जब पीछे मुड़ता है...तो पीछे अईयर खड़ा होता है..

पोपटलाल :- अईयर भाई आप...

अईयर :- उसे बीच में रोकता हुआ...यहाँ बात करना ठीक नही है...चलो चलते हैं...

पोपटलाल ..भी उसकी बात से सहमत होता है...और चल पड़ते है......और दोनो सोसाइटी से बाहर...........!!

टाइम 7 :15 बजे....

तारक के घर....

तारक सोचता है...कि क्या बहाना मारा जाए....वो काफ़ी देर तक सोचता है..लेकिन आज उसका दिमाग़ कुछ काम नही कर रहा था....

तभी उसके दिमाग़ में कुछ आता है...और वो सोढी को फोन कर देता है....

सोढी :- हाँ मेहता साहब...जल्दी आ भाई..में तो यहाँ पहुँच चुका हूँ..

तारक :- भाई मेरा तो आज दिमाग़ ही नही काम कर रहा ...कि क्या बहाना दूं..

सोढी :- मेहता साहब आपको आइडिया नही आ रहा ...ये तो कमाल की बात है..

तारक :- अब भाई नही आ रहा तो क्या करूँ....दिमाग़ को निकाल के फेक दूं...

अच्छा ये छोड़...तू बता तूने क्या बहाना मारा...

और सोढी अपनी सारी बात बता देता है...

तभी तारक की दिमाग़ की बत्ती जल जाती है...

तारक :- वाहह सोढी कमाल हो गया मिल गया आइडिया....

अच्छा चल में तुझसे मिलके बात करता हूँ ओके बाइ...

और फोन कट...

लेकिन तारक कान से फोन नही हटाता...और तेज़ तेज़ बोलने लगता है...

अच्छा......ये क्या बोल रहा है....ओहूओ...अच्छा तू चिंता मत कर...हाँ में आ रहा हूँ...बस पहुँचता हूँ...तू वहीं इंतेज़ार कर मेरा...हाँ भाई बॅस आ रहा हूँ...

इतनी तेज़ तेज़ आवाज़ सुन की अंजलि उसके पास आती है..और बोलती है..क्या हुआ तारक..किसका फोन था..

तारक :- अरे वो सोढी का फोन था..वो बोल रहा था बालू की गाड़ी का आक्सिडेंट हो गया है...और मुझे साथ चलने को बोल रहा है..तो थोड़ी मदद मिल जाएगी..उसी...तो मेने हाँ कर दी...

अंजलि :- हाँ तो अच्छा किया ना आपने...आप को जाना चाहिए...

तारक :- हाँ ठीक है फिर....

और उठ कर कमरे में जाता है..और कपड़े पॅक कर के...बाहर आ जाता है..

बाहर अंजलि मेग्ज़ीन पढ़ रही होती है...

अंजलि :- ये क्या है इस बॅग में...

तारक :- अंजलि कपड़े की ज़रूरत पड़ेगी ना..तो ले जा रहा हूँ....गंदे हो गये होंगे..बल्लू के..तो सोढी ने बोला एक जोड़ी कपड़े ले आना...

अंजलि :- अच्छा ठीक है...अब जाइए.....

और तारक भी निकल जाता है....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
धन्यवाद

आप सब को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ


विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

झंडा उँचा रहे हमारा
 


टाइम 7:30 बजे....!!

भिड़े के घर.....

भिड़े काफ़ी परेशान था...उसके पास भी कोई आइडिया नही था....

वो अपने कमरे में इधर से उधर टहल रहा था बॅस......

काफ़ी देर सोचता है....लेकिन जब उसे कोई आइडिया नही आता...तो वो पहले सोचता है..कि बॅग में कपड़े डाल लिए जाए..माधवी बेड पे सोई पड़ी थी...

बॅग में कपड़े डालता है..और अलमारी को बंद करने लगता है..तो अंदर अलमारी के कुछ गिर जाता है...और माधवी की आँख खुल जाती है...और वो भिड़े को देखने लगती है...

माधवी :- आहूऊ कहाँ जा रहे हो..रात को बॅग लेकर...

भिड़े अब खुच बोलने की हालत में नही होता ..उससे कुछ समझ नही आता....लेकिन एक दम से उसके दिमाग़ में आ जाता है..

भिड़े :- वो माधवी.....आज क्या है दिन में ********* रहते हैं ना उनका फोन आया था....तो आज उनके घर में कोई है नही...तो उन्होने मुझे बोला कि थोड़ी देर के लिए मेरे घर आ जाओ..तो साथ में कुछ बाते कर लेंगे..और साथ साथ उनका मन भी लग जाएगा...

माधवी :- हाँ ...ठीक है..पर ये बॅग क्यूँ लेके जा रहे हो..

भिड़े :- अरे इसमे मेरे फटे कुर्ते हैं..वो सिल्वा लूँगा जाते टाइम...

सिलवाने के नाम से माधवी को कुछ अजीब लगा...क्यूंकी भिड़े अपने फटे कुर्ते खुद ही सिलता है....

लेकिन आज माधवी खुश थी उसने ज़्यादा कुछ नही पूछा...

माधवी :- ठीक है जाओ....

और माधवी फिर से लेट जाती है..

भिड़े कॉंपाउंड में पहुँचता है...इधर उधर देखता है...कोई नही होता...और सोसाइटी से निकल जाता है.....

टाइम 7:45 बजे.....!!!

जेठालाल के घर पे.......

जेठालाल उठ चुका होता है....फ्रेश होकर कपड़े पहन कर...बॅग में कुछ कपड़े डाल कर..बॅग को बाहर लिविंग रूम में रख देता है...जिससे दया को पता ना चले..कि वो बॅग लेकर जा रहा है.....दया भी सभी औरतों की तरह आज मस्त चुदाई के बाद पलंग पे लेटी हुई थी...

जेठालाल :- दया....ऊ मेरी प्यारी दया....

दया हल्की सी आँख खोलती है..तो देखती है...जेठालाल तैयार होकर खड़ा था...

दया :- अरे टप्पू के पापा....सुबह हो गई..जो आप दुकान जाने के लिए निकल रहे हैं...और में अभी तक सो रही हूँ..

जेठालाल दया की बात सुनकर अपने मन में...इस डोबी नॉनसेन्स...को कभी अकल आएगी...सो के उठो इसका मतलब ये है..कि सुबह हो गई..

लेकिन वो गुस्सा नही करना चाहता था...वो बड़े प्यार से बोलता है...

जेठालाल :- दया मेरी रानी...सुबह नही हुई है...वो क्या है..आज दुकान में एक फॉरिन पार्टी आने वाली है..तो मुझे अभी दुकान जाना पड़ेगा ...तो में जा रहा हूँ...

दया भी आधी नींद में होती है...वो ज़्यादा ना नुकर नही करती....

दया :- ठीक है..पर जल्दी आ जाना...

जेठालाल :- हाँ...अपना मुँह बनाते हुए..

और दया फिर से लेट जाती है...

जेठालाल फटाफट निकलता है...बॅग लेता है....कॉंपाउंड में आकर इधर उधर देखता है....और फिर सोसाइटी से बाहर...

 


टाइम रात के 8:15 बजे.....

सभी लोग बताई हुई जगह पर इकट्ठा हो जाते है...पर अभी एक जना नही आया होता है...अरे मुझसे क्या पूछ रहे हो...अभी खुद पता चल जाएगा...

भिड़े :- मेहता साहब....ये जेठालाल किधर है...कभी टाइम पे नही आता बेसिश्ट...

पीछे से आवाज़ आती हुई...

तूने यहाँ पे भी अपनी क्लास शुरू कर दी...चपली....जी सही समझे हर बार की तरह पीछे से जेठालाल आ रहा होता है...और वो भिड़े की बात सुन लेता है...

जेठालाल : - शांति रखा कर ना भाई...

अरे वाहह सभी आ गये...

अब्दुल तू भी आ गया टाइम पे क्या बात है..

अब्दुल :- हाँ जेठा भाई..पार्टी में जाना है..तो तैयारी तो करनी पड़ेगी ना...

और सभी इस बात पे हंस देते हैं...

तभी सोढी बोलता है....

अरे जो बोलेगा..वो नेक्स्ट अपडेट में पढ़ लेंगे....और ये भी देख लेंगे...की इन लोगों को पार्टी नसीब होगी या नही....!!!!!

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 


सार जेंट्स बताई हुई जगह पर पहुँच जाते हैं......और सब आपस में बात करने लगते हैं....अब आगे...

सोढी :- अरे जेठा प्रा ...तुसी तो कमाल किता सी....

जेठालाल :- क्यूँ भाई सोढी...

सोढी :- अरे इतना बढ़िया प्लान जो बनाया....सब अपनी अपनी वाइफ को खुश कर दो....और उन्हे इतना प्यार करो...कि वो पूछेंगी ही नही..कि कहाँ जा रहे हो...

जेठालाल :- अच्छा उसके लिए ... थॅंक यू भाई...ये तो मेरा फ़र्ज़ था..

तारक :- हाँ भाई जेठालाल......ये बात तो माननी पड़ेगी...सच में कमाल का प्लान था...अंजलि ने ज़्यादा सवाल जवाब किए ही नही आज...

भिड़े :- हाँ मेहता साहब....मुझसे भी माधवी ने कुछ नही पूछा....वो इतना थक गई थी..कि उसने मुझे आराम से आने दिया...

तारक :- अच्छा.....तो हमारे शिक्षक महोदय ने...खूब जम के बजाई हैं आज...

इतना बोलते ही सब हंस पड़ते हैं....

भिड़े :- क्या मेहता साहब आप भी...

अईयर :- हाँ भिड़े...आज बबीता ने भी ज़्यादा कुछ नही पूछा.....वो मेने...

जेठालाल उसकी बात को सुन के बीच में ही बोल पड़ता है...

जेठालाल :- चलो भाई चलो....पार्टी क्या अब यही मनानी है......

अपने मन में....ये अईयर इडली क्या खुश करेगा बबीता जी को....

अईयर को गुस्सा तो आता है..लेकिन कुछ बोलता नही....

सब गाड़ी में बैठ जाते हैं.....

सोढी अपनी जीप लेके नही आया था...उसने किराए की गाड़ी ली थी....

गाड़ी पार्टी वाली जगह की ओर चल देती है...

तारक :- यार में हाथी भाई को बहुत मिस करूँगा...

जेठालाल :- सही बात है मेहता साहब....

सोढी :- कोई नही जी...अगली बार फिर से प्लान बना लेंगे...और हाथी प्रा को भी ले चलेंगे....

हाँ ये सही बात है....सब बोल पड़ते हैं....

गाड़ी अब उस जगह पहुँच गई थी...जहाँ सभी जेंट्स को बड़ी बेसब्री से इंतेज़ार था.....बड़ी मुश्किल से आज घर से झूठ बोल के...बिना किसी शक़ के वो आज जाम के पार्टी करने आए थे....

सब होटेल के अंदर एंटर हो जाते हैं....

तारक :- अच्छा तो सबसे पहले...हम सब वॉशरूम जाके .... कपड़े बदल लेते हैं....

सभी के सभी वॉशरूम में अंदर चले जाते हैं,....

करीब 20 मिनट बाद..... सभी वॉशरूम से बाहर आते हैं.....

सभी के सभी...अपनी जगह हॅंडसम लग रहे थे....

और काफ़ी खुश थे....और हो भी क्यूँ ना....बड़े दिनो के बाद आज पार्टी शर्ती करने जा रहे थी......

तारक :- देखो बही लोगों...अंदर जाने से पहले मुझे एक बात बतानी है ...

भिड़े :- क्या...

तारक :- हाँ बताता हूँ...

पोपटलाल :- जल्दी बताइए मेहता साहब...अब अंदर जानने से रुका नही जा रहा है....

तारक :- हाँ भाई वही तो बोलना चाहता हूँ..सुनो...

जेठालाल :- बीच में रोकते हुए....अरे भिड़े और पोपटलाल बोलने तो दो...मेहता साहब को....

बोलिए मेहता साहब अब कोई नही बोलेगा...

तारक :- अपनी गर्दन हिलाते हुए...थॅंक यू मिस्टर . गाड़ा....

हाँ तो में बताना चाहता हूँ...कि हम यहाँ पार्टी में मस्ती करने आए हैं...लेकिन में चाहता हूँ..कि हम लोग ज़्यादा नही पिएँगे....

जेठालाल :- क्यूँ...क्यूँ..

सोढी :- हाँ मेहता साहब क्यूँ??

तारक :- देखो..भाई...तुम लोग ज़्यादा पियोगे....तो नशा इतना तगड़ा हो जाएगा..कि घर पे सबको पता चल जाएगा....

जेठालाल :- हाँ मेहता साहब आप ठीक बोल रहे हैं...ठीक है हम सब बस थोड़ी थोड़ी ही पिएँगे....

अच्छा अब चलें...

तारक :- हाँ भाई चलो.....

और सब हर्ष उल्लास से अंदर जाने लगते हैं....अपना पास दिखाते हैं...और एक एक कर के एंटर हो जाते हैं...

 
Back
Top