• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

उधर आइयर भाई अपने घर के सोफे पे बैठ के कॉफी पी रहे होते हैं...और न्यूसपेपर पढ़ रहे होते हैं.......उधर से आती है उनकी हॉट सेक्स बॉम्ब बीवी बबिता...जो कि बहुत गुस्से में होती है...और आते ही आइयर से बोलती है.....

बबिता :- गुस्से मे आइयर...तुम बिल्कुल बेकार हो ... किसी काम के नही हो...

इएर :- चौंकते हुए.... क्या हुआ डार्लिंग...मेने ऐसा क्या कर दिया जो तुम इतना नाराज़ हो मुझसे...

बबिता :- अच्छा तो तुम्हे नही पता ... नाटक मत करो आइयर....कल रात तुमने कितना ग़लत किया तुम्हे पता भी है...

इएर :- सोच मे पड़ जाता है....और बोलता है...ऐसा क्या ग़लत कर दिया कल रात में मेने बबिता...??

बबिता :- ओफू आइयर...कल रात मुझे इतना गरम करके खुद सो गये...तुम्हे पता भी है कल मेरी चूत आग बाबूला हो रही थी...तुमने तो अपना लंड मुझसे चुस्वा के अपनी शांति कर ली...और खुद झड्ते ही सो गये....और में वहाँ अपनी गरम चूत को लेके करवटें बदलती रही...बड़ी मुश्किल से उंगली कर के मेने अपने आप को शांत करने की कॉसिश की....और बोलते हो मैने क्या किया...हुह.....!!!

आइयर :- घबरते हुए...सॉरी डियर...वो मुझे थकान की वजह से नींद आ गई थी....और कुछ सोचते हुए बोलता है...बबिता अपना हाथ मुझे दो..

बबिता :- सवालिया नज़रों से देखते हुए दे देती है....और जैसे ही वो हाथ देती है वो चिहुन्क जाती है...

आइयर बबिता का हाथ लेकर अपनी पॅंट के उपर से उसके लंड पे रख देती है..

बबिता :- आइयर ये क्या है??

आइयर :- बबिता वो तुम्हारी बात सुनके मेरा लंड कब खड़ा हो गया पता ही नही चला....और अब जब तक ये झड़ेगा नही तब तक में लॅब नही जा पाउन्गा..

बबिता :- नही आइयर में नही करूँगी...खुद तो मुझे शांत नही करते और खुद रिलॅक्स हो के चले जाते हो...

इएर :- डियर बबिता आज ऐसा नही होगा प्लस्स करो ना.....

बबिता :- सोचते हुए ...... ठीक है.....

और बबिता धीरे धीरे पॅंट के उपर से आइयर के लंड को उपर नीचे करती रहती है...

आइयर :- आआहह बबिता डार्लिंग...वाहह आईईयूऊ...... आ रहा है .....लंड को बाहर निकाल के चूसो ना...

और बबिता आइयर के लंड को बाहर निकलती है....आइयर का लंड ज़्यादा बड़ा तो था नही....पर बबिता काम चला लेती थी उससे....

अब बबिता आइयर के लंड को मूह में लेके चूसना शुरू कर देती है....सबसे पहले बबिता आइयर के लंड के सुपाडे को चाटती है...उसके बाद जीभ से पूरे लंड को चाट्ती है...और बॉल्स को भी चूस्ति है...इससे आइयर मचल उठता है...और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भरता है....अहह ओह मज़ा आ गया....ओह उउउउउउउउउउउउ.....अब बबिता पूरा लंड मूह में लेके ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर देती है...पूरे कमरे में अजीब सी आवाज़ें गूँजनी शुरू हो जाती है.....अब बबिता स्पीड बढ़ा देती है और तेज़ी से लंड चूसना शुरू कर देती है....आइयर इस हमले को संभाल नही पाता और मूह में ही अपना पानी छोड़ देता है.....और बबिता एक अच्छी बिच( कुतिया ) की तरह सारा पानी गटक जाती है....

बबिता :- हान्फते हुए..चलो आइयर अब तुम्हारी बारी....

आइयर :- हाँ डार्लिंग बिल्कुल..... और जैसे ही आइयर बबिता की चूत की तरफ बढ़ता है...... वैसे ही...

आइयर का फोन बज उठता है.....

आइयर :- हेलो.....हाँ हर्रिहरन ... अच्छा अच्छा....हाँ बस अभी पहुँचता हूँ...और फोन कॉल कट कर देता है....

सॉरी बबिता डार्लिंग मुझे ऑफीस जाना पड़ेगा बहुत ज़रूरी मीटिंग है..

बबिता :- चिल्लाते हुए......आइयैयर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र....चले जाओ यहाँ से और कुछ मत कहना....और बेंगाली में आइयर को गाली देते हुए कमरे के अंदर चली जाती है...

और आइयर भी सोचता है रात में मना लूँगा और वो भी वहाँ से ऑफीस के लिए निकल जाता है....

.......................................

 
उधर पोपटलाल.....तैयार हो के ..सोफे पे बैठे हुए..मेगजीन पढ़ रहे थे....बेचारा कुँवारा है ना तो कोई है तो नही जो उसका ख्याल रखा करे या फिर उसके लंड का ख्याल रखा करे ... तो उसे खुद ही अपना ख्याल रखना पड़ता है.....मेग्ज़ीन पढ़ते पढ़ते धीरे धीरे अपने लंड को घिसता रहता है....क्यूँ कि वो मेग्ज़ीन न्यूड फोटोस से भरी हुई थी...

पोपटलाल अक्सर अपनी शांति के लिए ऐसी मेग्ज़ीन पढ़ता रहता है...

अब पोपटलाल एक एक करके न्यूड गर्ल्स को देख कर लंड हिलाए जा रहा था...अब लंड बिल्कुल तन कर पूरी तरह खड़ा हो चुका था..वैसे बता दूं पोपटलाल का लंड उसी की तरह पतला सा है पर लंबा बड़ा है अपने छाते की तरह....8.5 इंच का......

तेज़ी से अपने लंड हो हिलाते हुए....पोपटलाल एक एक करके पन्ने बदल रहा था....अब वो लंड को बहुत तेज़ी से उपर नीचे कर रहा था...उसकी साँस अब फूलने लगी थी....ऐसा लग रहा था कुछ ही पलों में वो झड जाएगा...और कुछ 2 मिनट ऐसे ही तेज़ी से हिलाने के बाद उसके लंड से एक तेज़ धारा बाहर निकली और वो झड गया...

पोपटलाल :- हांफता हुआ.....आअहह...उफफफ्फ़....मज़ा आ गया....लेकिन कुछ पलों में अपने आप से बोलते हुए...क्या खाक मज़ा आ गया...हर रोज़ मुझे ऐसे ही शांत होना पड़ता है....कब मेरा ये लंड कोई और पकड़ के मूठ मारेगा..आख़िर कब मेरी शादी होगी...कबतक में ऐसे ही नंगी लड़कियों की फोटो को देखता रहूँगा.... और झल्लाता हुआ ... अपने ऑफीस की ओर निकल पड़ता है.....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
उधर डॉक्टर.हाथी अपने क्लिनिक में पेशेंट को देख रहे होते हैं....उनकी बीवी कोमल भी उन्ही के साथ होती है....

पेशेंट :- डॉक्टर. साहब मुझे एक प्राब्लम हो गई है...

डॉक्टर.हाथी :- क्या हुआ भाई बोलो?

पेशेंट :- डॉक्टर. मेरे लंड में से कम पानी निकलता है....पहली बार करने के बाद ...दूसरी बार में तो एक बूँद भी नही टपकती..कुछ करिए ना डॉक्टर.साहब...

डॉक्टर.हाथी :- ओह्ह्ह अच्छा तो ये प्राब्लम है...जी ये तो बहुत गंभीर बात है..देखिए वैसे तो में सेक्स का डॉक्टर नही हूँ .... लेकिन आपको एक दवाई दे देता हूँ...और एक अच्छे से सेक्स डॉक्टर का नंबर. भी...अगर दवाई काम ना करे तो आप इन डॉक्टर से जाके मिल लेना....

पेशेंट :- थॅंक यू डॉक्टर...

इधर कोमल ज़रा सी बात सुनकर ही गरम हो जाती है....क्यूँ कि इसे कम चुदने को मिलता है...और वो बोलती है...

कोमल :- हंस .... कुछ करो ना...में गरम हो गई..

डॉक्टर.हाथी :- हँसते हुए...क्या कोमल तुम भी इतनी सी बात पे गरम हो गई...और इस वक़्त में कुछ नही कर सकता ..मेरे पेशेंट बाहर हैं...

कोमल :- झिल्लाते हुए...कोई नही है बाहर जल्दी से कर दो ना मुझसे अब रहा नही जा रहा..

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुम्हे पता है ना मेरा जल्दी खड़ा नही होता ..इससे बहुत टाइम ल्गता है....इतनी जल्दी में खड़ा होगा पर जरा सा..और वो तो तुम्हे दिखेगा भी नही...

देखिए डॉक्टर.हाथी की एक अनोखी बात है...उनका लंड खड़ा तो होता है मगर उनका पेट इतना बड़ा है कि लंड दिखता नही है...इसलिए वो एक स्पेशल दवाई लेते हैं जिसे खाते ही उनका लंड हाथी जैसा हो जाता है...तभी वो चुदाई करते हैं...

कोमल :- सोचते हुए...हंस ठीक बोल रहे है..लेकिन अब में क्या करूँ मुझसे तो रहा भी नही जा रहा...फिर उसके दिमाग़ में आइडिया आता है...हंस तुम मुझे लंड से तो नही चोद सकते ...मगर अपनी ये बड़ी बड़ी उंगलियो से तो ज़रूर कर सकते हो ना..

डॉक्टर.हाथी :- सही बात है.............

इतना सुनते ही...अपनी पॅंट उतार देती है और पेंटी भी.....चूत बिकुल सॉफ होती है कोई भी बाल नही होता...चूत बहुत ज़्यादा गीली होती है...और हाँ बता दूं कि कोमल ने उंगलियों से चुदने की बात क्यूँ की ...क्यूँ कि डॉक्टर.हाथी की उंगलियाँ कुछ कम नही है...साली इतनी बड़ी है कि लंड को भी मात दे दें...

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुम्हारी चूत तो बहुत पानी छोड़ रही है....

कोमल :- हंस कुछ बोलो मत अब जल्दी करो...

और डॉक्टर.हाथी अपनी एक उंगली अंदर चूत मे डाल देते हैं जिसकी वजह से कोमल हल्की सी सिसक उठी है..अहह...और अब डॉक्टर.हाथी कोमल की चूत में उंगली अंदर बाहर करना शुरू कर देता है....कोमल को बहुत मज़ा आने लगता है...वो डॉक्टर.हाथी के शोल्डर पे हाथ रख कर खड़ी हो जाती है...क्यूँ कि उसके लिए खड़ा होना मुश्किल हो जाता है....अब डॉक्टर.हाथी..2 उंगलियाँ अंदर डाल की चूत को मारने लगते हैं.....जैसे ही दूसरी उंगली अंदर जाती है कोमल ज़ोर से चिल्ला उठती है.....हन्ंननन्न्न्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स अहह...........ओह.....मर् गयी......बहुत मज़ा आ रहा है.... .उईईईईईईईईईईईईईईईईई.... ..ओह....उफफफफफफफफफफफफ्फ़....और तेज़ करो.....अब डॉक्टर हाथी स्पीड बढ़ा देता है...और कमरे में पच पच की आवाज़ें शुरू हो जाती है....कोमल हान्फते हुए बोलती है..हंस में झड़ने वाली हूँ...और तेज़ करो.....अब डॉक्टर. हाथी पूरी ताक़त से चूत मारने लगते हैं....जिससे कोमल से अब सहन नही हो पाता और चिल्लाते हुए............अहहओह..माआआआआआआआआआअ....में तो गयी....और अपना कामरस छोड़ देती है....और उस रस को डॉक्टर. हाथी अपनी जीभ से सारा चाट लेते हैं..

कोमल :- पॅंट उपर करते हुए...थॅंक यू हंस...तुमने ने तो मुझे स्वर्ग की सैर करा डी थी...

डॉक्टर.हाथी :- यूआर वेलकम कोमल..मगर इतनी मेहनत करने के बाद बहुत भूक लगी है कुछ खाने को दो ना...

कोमल...हंसते हुए....हंस तुम भी ना....

कोमल को हंसता देख डॉक्टर .हाथी भी हंस देता है और फिर कोमल किचन में चली जाती है.............!!!!!!

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
मित्रो ये चटपटी कहानी जारी रहेगी पढ़ते रहें तारक मेहता का नंगा चश्मा..............मित्रो आज का अपडेट कैसा लगा ज़रूर बताएँ
 
सेक्रेटरी आत्माराम भिड़े अपने घर पे बैठे स्टूडेंट्स के टेस्ट पेपर चेक कर रहे थे...

भिड़े :- पेपर चेक करते हुए माधवी को आवाज़ लगाते हैं...माधवी चाई..कितनी देर हो गई है

माधवी :- जी लाई..

और माधवी चाइ लेके आती है...हर रोज़ की तरह माधवी मराठी साड़ी और स्लेवलेशस ब्लाउस में आती है...बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी..

भिड़े :- क्या बात है माधवी जी आज तो तुम बहुत सेक्सी लग रही हो..

माधवी :- क्या आप भी..सुबह सुबह शुरू हो जाते हैं..

भिड़े :- क्या करूँ माधवी तुम्हे जब भी देखता हूँ .. मेरा ये तंबू खड़ा हो जाता है...और भिड़े अपने लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहता है..

माधवी :- भिड़े के इशारे की ओर देखती हुई उसके लंड पे नज़र डाल के बोलती है...क्या आप ना ..कल रात को ही तो मारी थी मेरी इतनी ... और सुबह सुबह फिर शुरू हो गये...और मूड के जाने लगती है ..तभी उसके मूह से हल्की सी आह निकल जाती है...

क्यूंकी भिड़े ने माधवी की गान्ड को पीछे से दबा देता है...

माधवी :- ये क्या कर रहे हैं ... छोड़िए ना मुझे आचार पापड बनाने है..

भिड़े :- माधवी अच्छा पापड बनते रहेंगे...लेकिन अब जो ये गरम महॉल बना है उसे तो पहले पूरा कर लो...

और फिर भिड़े माधवी को खीच के अपने उपर बिठा लेते हैं...इसकी वजह से भिड़े का लंड माधवी की गान्ड पे चुभने लगता है....और भिड़े माधवी के पूरे फेस पर चुम्मों की बारिश सी कर देता है...माधवी पूरी तरह मदहोश हो जाती है...और वैसे ही बैठे बैठे लंड पे उपर नीचे होने लगती है ..जिससे भिड़े और पागल सा हो जाता है....और अब वो माधवी के होंठो का रस पान करना शुरू कर देता है...माधवी का पूरा चेहरा एक चुडकड़ औरत जैसा लगने लगता है.....भिड़े माधवी का पल्लू नीचे गिरा देता है...और ब्लाउस के उपर से ही माधवी के चुचे दबाना शुरू कर देता है....और होंठो को चूमता रहता है....फिर धीरे धीरे वो अपनी जीभ माधवी के मूह में डाल के उसके मूह के रस को चूसने लगता है...इधर माधवी की चूत पूरी तरह गीली हो जाती है जिसकी वजह से उसकी पेंटी चिपक जाती है....और वो वैसे ही भिड़े के लंड पे उपर नीचे होने लगती है....

फिर भिड़े माधवी के ब्लाउस और ब्रा को खोल के माधवी के बड़े बड़े और नरम चुचों को अपने हाथों से मसलना शुरू कर देता है....भिड़े के ठंडे हाथों का स्पर्श अपने चुचो पे पड़ने की वजह से माधवी पागल हो जाती है और वो भिड़े के और ज़्यादा होंठो को चूसना शुरू कर देती है....2 मिनट बाद भिड़े होंठो को छोड़ देता है....और माधवी के चुचों को मूह में लेकर चूसना शुरू कर देता है....

ऐसा करते ही माधवी के मूह से सिसकी निकल जाती है.....ओह.....हन्णन्न्... बहुत अच्छा लग रहा है सोनू के पापा और चूसिए ...

और भिड़े बारी बारी माधवी के दोनो चूचो को चूस्ता है....और निपल्स को भी चूस्ता रहता है...जिससे माधवी के सबर का बाँध टूट जाता है और वो खड़ी हो जाती है....और भिड़े के लंड को बाहर निकालने लगती है कि तभी...

नीचे से सोढी की आवाज़ आती है ऊओ भिड़ुउऊ जल्दी नीचे आ....

सोढी की आवाज़ सुन कर दोनो को बहुत गुस्सा आता है...फिर भिड़े अपना गुस्सा शांत कर के अपनी बाल्कनी में सोढी से बात करने चले जाता..

भिड़े :- क्या बात है सोढी..क्या हुआ??

सोढी :- ओये भिड़े यार तूने आज बॉरड पर कोई सुविचार नही लिखा इसलिए तुझे आवाज़ लगाई..

भिड़े :- मन में सोढी को गाली देते हुए....आता हूँ भाई अभी लिखता हूँ..

और इतना कह कर वो चला जाता है...सुविचार लिखने.......!!!

दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि अभी तक सेक्स क्यूँ नही हुआ किसी का...आप सब चिंता मत करिए ये तो बस एक शुरुआत है...बस आप मुझसे जुड़े रहें आगे देखिए अभी बहुत कुछ बाकी है ........

.......................................

 


इधर जेठालाल नहा धो कर चाय पी रहा था.....तभी दया और बोली अरे टप्पू के पापा आपने अभी तक चाइ नही पी...दुकान नही जाना क्या.

जेठालाल :- हाँ भाई बस पी ने जा रहा हूँ...चलो जै जिनेन्द्र..

दया :- जय जिनेन्द्र...

और जेठालाल अपनी विंग की सीढ़ियों से नीचे कॉंपाउंड में आता है...और जैसे उसकी नज़र सोसाइटी के गेट पे पड़ती है उसका मूह खुला का खुला रह जाता है...क्यूँ कि उसकी फेव चीज़ वहाँ खड़ी थी...बिल्कुल सही समझे आप वहाँ बबिता खड़ी थी...और जेठालाल बबिता को देख कर खुश हो जाता है और उसके पास चला जाता है...

जेठालाल :- गुड मॉर्निंग बबिता जी..

बबिता :- स्माइल देते हुए...गुड मॉर्निंग जेठा जी...क्या हाल चाल है आपके??

जेठालाल :- बस अब आपको देख लिया मेरे हाल चाल बिल्कुल ठीक हो गये हैं..

बबिता :- थोड़ा ब्लश होते हुए...आप भी ना जेठा जी हमेशा मेरी तारीफ ही करते रहते हैं....

जेठालाल :- अरे आप हैं ही इतनी तारीफ के काबिल तो तारीफ तो करूँगा....वैसे एक बात कहूँ बबिता जी अगर आप बुरा ना माने तो..

बबिता :- अरे बिल्कुल बोलिए ना ... आपकी बात का बुरा क्यूँ मानूँगी..

जेठालाल :- वैसे आज आप बहुत ही ज़्यादा .... मतलब बहुत ही ज़्यादा सुंदर...और ग़ज़ब लग रही है...बस इतनी सेक्सी लग रही हो कि क्या बताऊ..

बबिता :- थोड़ा चौन्कते हुए और थोड़ा ब्लश होते हुए.....जेठा जी आपने मुझे सेक्सी कहा??

जेठालाल :- मन में...लगता है बबिता जी को बुरा लग गया....सॉरी सॉरी बबिता जी वो आप आज इतनी सेक्सी लग रही थी ना इसलिए बोल दिया....ओह्ह सॉरी मेने दुबारा बोल दिया सॉरी बबिता जी...

बबिता :- हंसते हुए.....अरे जेठा जी आप सॉरी क्यूँ बोल रहे हैं ...मुझे बुरा नही लगा..वो तो मेने आपसे इसलिए पूछा क्यूंकी में इतनी भी सेक्सी नही हूँ ठीक ठाक हूँ...

जेठालाल :- हिम्मत बढ़ाते हुए....अरे नही बबिता जी आप बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रहे हो..मन कर रहा है आपको देखता रहूं...

बबिता :- फिर से ब्लश होते हो...थॅंक यू जेठा जी...और मन में सोचते हुए...ये जेठा जी की तारीफ की वजह से मेरी चूत गीली हो गई है....

जेठालाल :- मन में सोचते हुए....क्या ग़ज़ब माल लग रही है बबिता जी...मेरा लंड खड़ा हो गया है...अब इसे कैसे छुपाऊ..कहीं बबिता जी ने देख लिया तो क्या सोचेंगी वो..

दोनो एक दूसरे की नज़रों से अपने गुप्त अंगो को छुपाने की कोशिश में लगे हुए थे....वैसे बता दूं...जेठालाल का क्या ..अगर कोई और भी होता तो उसका भी लंड खड़ा हो जाता बबिता को देख कर....

बबिता ने एक टाइट टॉप..इतना टाइट कि उसके चुचे बाहर आने के लिए बेताब है....बहुत की सेक्सी शेप दे रहे थे..और नीचे एक छोटी सी शॉर्ट्स पहन रखी थी जिससे उसकी गोरी गोरी जाँघ दिखाई दे रही थी....और गान्ड तो बिल्कुल ऐसी लग रही थी...कि कोई भी वहाँ नज़र टिकाए तो हटा ना पाए..

जेठालाल चुप्पी तोड़ते हुए..

जेठालाल :- बबिता जी वैसे आप सुबह सुबह कहाँ जा रहे हैं??

बबिता :- हाँ वो में दया भाभी से मिलने जा रही थी कुछ काम था उनसे..

जेठालाल :- ओह्ह पहले पता होता तो में घर पे और थोड़ी देर रुक जाता आपसे बात करने के लिए....

जेठालाल पूरी लाइन मार रहा था उस वक़्त बबिता पर..

बबिता :- ओह्ह जेठा जी उसके लिए ये ज़रूरी थोड़े ही है कि में जब आपके घर आउन्गि तभी आप मुझसे बात करेंगे...आप मेरे घर कभी भी आ सकते हैं...किसी भी टाइम..

उधर बबिता कम थोड़ी ही थी..वो भी तो चाहती थी जेठालाल के साथ वक़्त बिताने को..

जेठालाल :- खुश होते हुए...थॅंक यू बबिता जी.....वैसे में क्या बोल रहा थी कि क्यूँ ना आज....और तभी जेठालाल का फोन बज जाता है.....फोन नाट्टू काका का होता है....

दोस्तों में आपको बता दूं कि नाट्टू काका..गाड़ा एलेक्ट्रॉनिक्स के मॅनेजर हैं....

नाट्टू काका :- सेठ जी कहाँ तक पहुँचे ... आपको पता है ना पार्टी कभी भी आ सकती है मीटिंग के लिए.

जेठालाल :- हाँ भाई बस थोड़ी देर में आता हूँ शांत रहो ..परेशान मत होइए..

और फोन काट देता है..

बबिता :- जेठा जी आप कुछ कह रहे थे उस वक़्त....बबिता को पता था कि जेठालाल क्या कहना चाहता है फिर भी वो उसके मूह से बुलवाना चाहती है..

जेठालाल :- सोचते हुए....भूल गया बबिता जी अभी तो याद नही आ रहा..मगर याद आया तो में आपको फोन कर दूँगा...अभी में थोड़ा जल्दी में हूँ दुकान पे थोड़ा काम है...अच्छा ओके बबिता जी बाइ..

बबिता :- जी बिल्कुल जेठा जी फोन कर दीजिएगा..बाइ...

और जेठालाल दुकान की तरफ चला जाता है और बबिता दया के घर..

बबिता दया के घर पे आते ही दया को आवाज़ लगाती है...

बबिता :- दया भाभी...दया भाभी..

और दया किचन में से बाहर आती है और बबिता को देख के मुस्कुरा के बोलती है..

दया :- अरे बबिता जी बैठिए ना खड़ी क्यूँ है आप...

और दोनो बैठ जाती हैं...

दया :- हाँ तो बबिता जी बोलिए क्या लेंगी आप चाइ या कॉफी...

बबिता :- नही दया भाभी कुछ नही चाहिए...मुझे आपसे कुछ काम था.

दया :- हाँ बोलिए ना..

बबिता :- मुझे आपसे ये पूछना था कि आप वो ब्लू वाली साड़ी काहन से लाई थी जो आपने कल पहनी थी...

दया साड़ी जहाँ से लाई थी वो जगह बता देती है......और वो दोनो इधर उधर की बातें करने लगती हैं...फिर बबिता दया से पूछती है..

बबिता :- क्या बात है दया भाभी आज आप बहुत खुश लग रही हैं?

दया :- हाँ बबिता जी आज में बहुत खुश हूँ....वो सुबह सुबह टप्पू के पापा ने..और शर्मा जाती है...

बबिता :- बताइए ना क्या किया आज जेठा जी ने..

दया :- वैसे तो वो हमेशा रात में ही करते हैं...लेकिन आज उन्होने सुबह सुबह ही मुझे बहुत सुकून पहुचा दिया..

बबिता :- उत्सुकता से..बताइए ना...दया भाभी प्लस्सस्स...

दया :- उन्होने आज सुबह सुबह मेरी चूत चाट के मुझे मज़ा ही दे दिया...

बबिता :- वाऊ दया भाभी आप तो बहुत लकी हैं..काश में भी लकी होती...

दया :- क्यूँ क्या हुआ बबिता जी ... आइयर भाई नही करते क्या??

बबिता :- गुस्से में...आप आइयर का नाम तो लीजये ही मत...जब भी में उससे कुछ करने को कहती हूँ...उसको ज़रूरी मीटिंग के लिए जाना पड़ता है..या फिर वो इतना तका हुआ होता है कि वो सो जाता है....में तो परेशान हो गई हूँ....इतने दिन हो गये मेरी चूत की प्यास ही नही भुज पाती...

दया :- उदास मत हुए बबिता जी...सब ठीक हो जाएगा...

बबिता मन में सोचते हुए....काश में और जेठा जी साथ होते..तो मेरे तो मज़े ही आ जाते...

और फिर बबिता अपने घर चली जाती है...और दया अपने किचन के काम में लग जाती है....

 
उधर भिड़े सोसायटी बोर्ड पे कुछ सूचना लिख रहा था....और आज मेहता साहब ऑफीस नही गये थे तो वो बाहर चेर पे बैठे थे...जैसे ही उन्होने देखा कि भिड़े कुछ लिख रहा है तो वो चले गये वहाँ उसे पढ़ने....और बोर्ड पे कुछ इस प्रकार लिखा था...

आज सोसाइटी में ठीक 10 बजे मीटिंग है..और आप सभी को सही समय पर उपस्थित होना है...ये मीटिंग कल के होने वाले प्रोग्राम के लिए रखी गई है..

तभी तारक भिड़े से पूछता है...

तारक :- भाई भिड़े किस चीज़ का प्रोग्राम करना है सोसाइटी में??

भिड़े :- मेहता साहब आप कैसे भूल गये ... कल सोसाइटी में दही हाँडी है...

तारक :- हाँ वो तो में भूल ही गया था....अच्छा है तुम जैसे सेक्रेटरी हमारे सोसाइटी में है तुमको याद नही रहता तो कोई प्रोग्राम हो ही नही पता...

भिड़े :- थॅंक यू मेहता साहब..वैसे ये मेरा फ़र्ज़ है...

उसके बाद तारक अपने घर चला जाता है....और भिड़े अब्दुल की दुकान की तरफ निकल पड़ता है...

भिड़े अब्दुल की दुकान पे जाके अब्दुल को एक काम देता है.......

भिड़े :- देख भाई अब्दुल ... में तुझे एक सर्क्युलर दे रहा हूँ..सबके घर पे दे आना...वैसे मेने सोसायटी बोर्ड तो लिख दिया है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं सोसाइटी मे जो उसे पढ़ेंगे नही...

अब्दुल :- ठीक है भिड़े भाई में दे आउन्गा...आप टेन्षन मत लो..

फिर भिड़े बाहर निकल जाता है...और अब्दुल अपनी दुकान पे किसी को बिठा के सर्क्युलर बाटने निकल जाता है........

................................

उधर बबिता बैचैन हो रही थी सुबह दया की बातों को सुन कर...वो बार बार ये सोच कर परेशान थी कि आइयर तो कुछ करता ही नही है..और जेठाजी को देखो कितने मज़े से दया भाभी के साथ करते हैं...वो सोच ही रही थी की उसके घर की कोई घंटी बजाता है...

बबिता :- गेट खोल कर........अरे अब्दुल भाई आप...आइए ना अंदर आइए..

अब्दुल :- नही नही बबिता जी...आप बस इस सर्क्युलर को पढ़ कर साइन कर दी जिए..

बबिता सर्क्युलर लेके पढ़ती है...आज सोसाइटी की मीटिंग है कल के दही हाँडी के प्रोग्राम के लिए...और फिर बबिता उसे पढ़ कर साइन करके अब्दुल को देके गेट बंद कर देती है....

और फिर से उसी सोच में डूब जाती है....तभी उसके फोन की घंटी बजती है...दूसरी तरफ दया का फोन होता है..

दया :- हेलो बबिता जी....मेरे घर पे सारी महिला इकट्ठी हो रही है तो आप भी आजाइयेगा आधे घंटे में..

बबिता :- पहले सोचती है मना कर दूं...फिर भी वो हाँ कर के फोन काट देती है....

आधे घंटे बाद.....

दया के घर में सब हँसी मज़ाक कर रहे थे और चाइ नाश्ता कर रहे थे...सब हंस रहे थे.....और आपस में बात कर रहे थे...बस एक को छोड़ के...जी हाँ बबिता को छोड़ के....वो अभी भी उसी बात से परेशान रहती है...और तभी अंजलि की नज़र उस पर पड़ती है...और वो बबिता से पूछती है...

अंजलि :- बबिता जी क्या बात है..आप बड़े चुप चुप लग रहे हो...कोई बात हुई है क्या??

जब सब अंजलि की बात सुनते हैं तब सब उसकी तरफ देखते हैं..मगर दया समझ जाती है कि क्या बात है और बोलती है...

दया :- अंजलि भाभी मुझे पता है कि बबिता जी क्यूँ परेशान है..

सब दया से पूछते हैं क्या बात है दया भाभी...

दया :- वो बात ये है...कि आइयर भाई बबिता जी का ख़याल नही रखते..

सब लोग कुछ समझ नही पाते..और बोलते हैं दया भाभी सॉफ सॉफ बताइए ना..

दया :- हाँ बताती हूँ....वो क्या है आइयर भाई बबिता जी को संतुष्ट नही करते...हमेशा काम में ही लगे रहते हैं....उनको बबिता जी के साथ सॅक्स करने का टाइम नही मिलता...

सब दया की बात सुन के चौंक जाते है...और बबिता की तरफ देखते हैं..सबसे पहले अंजलि बबिता से बोलती है..

अंजलि :- देखिए बबिता जी...आप ऐसा मत सोचिए आइयर भाई आपसे बहुत प्यार करते हैं..कुछ काम में बिज़ी होंगे इसलिए नही कर पा रहे होंगे..

बबिता :- ऐसा नही है अंजलि भाभी.....आइयर अब वैसा नही रहा..उसको बस अपनी ही पड़ी है...वो बस यही चाहता है कि में उसका चूस के शांत कर दूं....वो खुद तो कुछ करता ही नही है...काफ़ी टाइम हो गया अंजलि भाभी हम दोनो ने सेक्स नही किया..में परेशान हो चुकी हूँ...आप ही बताइए कब तक में अपनी उंगली से काम चलाउन्गी...

दया :- हाँ सही बात है अंजलि भाभी..बबिता जी बिल्कुल ठीक बोल रहे हैं...आइयर भाई को ध्यान रखना पड़ेगा...

अंजलि :- वो बात तो ठीक है दया भाभी...बबिता जी अब सभार रखिए सब ठीक हो जाएगा..

कोमल :- हाँ बबिता...तुम्हारी तरह मेरा भी यही हाल है तुम तो जानती हो ना डॉक्टर हाथी को वो तो सेक्स कर ही नही पाते बहुत कम ही करते हैं...उनका लंड खड़ा ही बहुत कम होता है....पर हाँ वो मुझे अपनी उंगलियों से संतुष्ट कर देते हैं...आपको पता है कि उनकी उंगलियाँ इतनी मोटी है कि लंड की कमी ज़्यादा महसूस नही होती और वो हंस पड़ती है...

बाकी सब भी कोमल की बात सुनके हंस पड़ते है....और इस बार बबिता भी हंस पड़ती है..

उधर रोशन भी बोलने लगती है..

रोशन :- अब में क्या बताऊ इस मामले में इसलिए परेशान हूँ कि इस रोशन (यानी सोढी) को हमेशा मेरी चूत मारने को लगा रहता है.....और जिस दिन पार्टी शार्टी कर के आता है..उस दिन तो रात भर नही सोने देता ...एक तो पूरी रात मेरी मारता रहेगा...और दूसरी इतनी ज़ोर ज़ोर से मारता है कि क्या बताऊ जान निकाल देता है मेरी...

रोशन की बात सुनके सब हंस पड़ते हैं और बोलते हैं...कि रोशन भाभी आप तो बहुत लकी हैं....

फिर थोड़ी देर और ऐसे ही बात करने के बाद...सब बोल के चले जाते हैं कि शाम को मीटिंग में मिलते हैं.........................

अब देखते हैं शाम की मीटिंग में क्या डिसाइड होता है.......!!!!!!!

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
Back
Top