पोपटलाल माधवी के हाथों को चूमता है...फिर उसके गालों को...उसके पेट को...और आख़िर में उसके चुचियो को ब्रा के आजू बाजू में चूमता है....और नीचे अब्दुल माधवी की जाँघो को चूमता है..धीरे धीरे पूरी जाँघ को चूमता है...फिर चूत के साइड में भी चूमता है....इधर माधवी की पेंटी पूरी तरह गीली हो जाती है...उसके मुँह से अहह ओह्ह निकल रही थी...दोनो ये सुन के हंस पड़ते हैं..और फिर अपने काम में लग जाते हैं....इस बार पोपटलाल नीचे और अब्दुल उपर आ जाता है..10 मिनट ऐसा खेल चलने के बाद दोनो ने माधवी को पूरी नंगी करने का फ़ैसला कर लिया होता है....
अब माधवी की ब्रा और पेंटी उतार दी जाती है..अब वो विल्कुल नंगी हो जाती है...दोनो माधवी को नंगा देख के हिल जाते हैं..क्यूँ कि उस वक़्त माधवी लग भी रही थी कमाल की...उसका गोरा बदन...बदन पे मस्त सी बड़ी बड़ी चुचियाँ..जिसपे काले कलर के निप्पल्स जो चुचियों की सुंदरता बढ़ा रहे थे....और नीचे उसकी चूत...वाअहह वो तो बिल्कुल कमाल की लग रही थी...एक भी बाल नही था उसकी चूत पर...एक दम चिकनी थी..जैसे कल ही उसके बाल हटाए हो..छोटी सी चूत है माधवी की...
अब दोनो के लंड ऐसे अकड़ चुके थे जैसे कोई रास्ते पर खंबा खड़ा होता है.....
अब दोनो ने माधवी को आज बुरी तरह चोद्ने का इरादा बना लिया था..इसलिए सबसे पहले पोपटलाल ने शुरू किया...और अब्दुल साइड में बैठ कर अपने लंड को मसल्ने लगा...
पोपटलाल अपना छाता लिए माधवी के उपर चढ़ गया....और चढ़ते ही उसने अपने पतले से होंठ माधवी के रसीले होंठो पे रख कर उन्हे चूसना शुरू कर दिया...ऐसा करते ही माधवी के हाथ हिलने लगे..लेकिन वो हाथों से रोक नही पा रही थी...उसे पता था कि उसके साथ कुछ ग़लत हो रहा है...उधर पोपटलाल इससे बिना कोई फरक पड़ते हुए अपने चुंबन में लगा हुआ होता है....अब वो बड़ी बहरामी से होठों को चूस रहा होता है......फिर रुक कर..उसने माधवी का मूह खोला और अपनी जीभ अंदर डाल कर माधवी की जीभ को चूस रहा था...माधवी के मूह से बस अहह..अयीई..पुच पुच की आवाज़ें ही बस बाहर आ रही थी..5 मिनट तक वो माधवी के मूह को अपने मूह से ऐसे ही चूस्ता रहा...और फिर हटते ही अपनी जीभ अपने होंठो के चारो तरफ घुमा के ...वहाँ पे लगे माधवी के थूक को चाट लिया....और अपने दाँत फाड़ने लगा..इधर माधवी अपनी आँख खोलने की कोशिस करती है...लेकिन उसको कुछ सॉफ दिखाई नही देता ....वो बस हल्की हल्की आवाज़ में नाहियिइ कर रही थी...ये सुन के पोपटलाल और अब्दुल दोनो हँसने लगते हैं...फिर पोपटलाल...नीचे आके माधवी के चुचों को हाथ में लेकर मसल्ने लगता है....बेवकूफ़ कहीं का इतनी ज़ोर से मसलता है कि माधवी बेहोशी में भी छींक देती है....और अब्दुल उसे डाँटते हुए चिल्लाता है..
अब्दुल :- पोपट भाई सठिया गये हो क्या...आराम से करो...इतनी ज़ोर से कोई दबाता है क्या..
पोपटलाल :- ग़लती समझते हुए...सॉरी भाई अब्दुल सॉरी...वो क्या है ना...ऐसे जोश में आ गया था इसलिए इतनी ज़ोर से दबा दिया...
और इस बार पोपटलाल धीरे धीरे चुचियाँ दबाने लगता है..बहुत धीरे धीरे आराम आराम से उन्हे दबा रहा था..और बीच बीच में निपल्स को भी खीच रहा था....
फिर हाथों को हटा कर..पोपटलाल अपने होठ रख देता है और चुचियो को मूह में लेकर चूसना शुरू कर देता है...वो बहुत धीरे धीरे चुचियों को चूस रहा था...पूरा तो उसके मूह में नही आ रही थी...क्यूँ कि पोपटलाल का मूह छोटा सा और माधवी के चुचे एक बड़े गुबारे जैसे...वो कॉसिश कर रहा थे कि पूरा मूह में ले ले लेकिन ले नही पा रहा था...
इसलिए वो बस चुचियो के निपल्स को मूह में लेकर चूसने लगा...माधवी के मूह से हल्की से अहहह निकल रही थी....फिर पोपट चूसने की बजाए चुचियों को चाटने लगा और प्युरे चुचि को जीभ से चाटने लगा और पूरा अपने थूक से सान दिया...और फिर उसने ऐसा ही दूसरी चुचि के साथ किया...माधवी के दोनो चुचि गीले पड़े थे...
फिर वो नीचे की ओर बढ़ता हुआ पेट को चाटने लगा..और अपनी जीभ नाभि में डाल के उसे चाटने लगा...ऐसा करते ही माधवी बेचैन हो गई वो इधर उधर हाथ पावं मार रही थी..जैसे कोई मछली बिना पानी के...अब अब्दुल सबसे नीचे उसके पैरों पर आ गया था...पहले उसने पंजों को अच्छे तरह चूमा...और धीरे धीरे उपर आते हुए उसकी जांघों को अच्छी तरह चूमा....ये देख के अब्दुल का बुरा हाल था क्यूँ कि उस वक़्त उस कमरे का बहुत ज़्यादा गरम महॉल हो गया था....
अब पोपटलाल उस जगह पहुच गया था जहाँ पहुचने के लिए सभी मरे जा रहे थे...वो आज अपने आप को इस दुनिया का सबसे लकी आदमी मान रहा था...और वो स्पेशल चीज़ थी माधवी की सुंदर बिल्कुल सॉफ चूत ..
वो उसकी चूत की तरफ आकर उसको सूँघता है...वाहह ऐसे उसके मूह से निकल जाता है...क्यूँ कि माधवी की चूत से एक मस्त खुसबु आ रही थी जो उसे पागल बना रही थी........
वो धीरे से अपने हाथों से चूत की फांको को अलग करता है..और अंदर का नज़ारा देखता है...और उसका सबर का बाँध टूट जाता है और अपनी जीब सीधे चूत के अंदर डाल देता है और अंदर उसे ज़ोर ज़ोर से घुमाने लगता है...और इधर माधवी इस वार को सहन नही कर पाती और मूह से सीस्याकियाँ लेती हुई...आआआआआआहह ओह...उफफफफफफफफफफफफफ्फ़.....उई.
माआअ....ओह.....मत कीजिए सोनू के पापा.....
इतने सुनते ही अब्दुल उसके चेहरे की तरफ देखता है और फिर अब्दुल की तरफ और फिर दोनो हँसने लगता है..और फिर अपने काम में लग जाता है...
अब वो पहले बाहर से ही उसकी चूत को चाटता रहता है और उसकी चूत को पूरी तरह गीली कर देता है...फिर चूत को खोल कर के अपनी एक उंगली अंदर डाल देता है...माधवी की चूत पूरी तरह से गीली हुई होती है...बहुत ही ज़्यादा पानी निकल रहा होता है उसकी चूत में से....और फिर पोपटलाल अपनी उंगली अंदर बाहर करना चालू कर देता है...लेकिन माधवी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी...पता है क्यूँ..अब आप ही बताइए..पोपटलाल की एक उंगली कितनी पतली है..उससे क्या होगा...जब पोपटलाल को लगा एक उंगली से कोई काम नही हो रहा...तब उसने सीधे 2 उंगलियों की जगह 3 एक साथ अंदर घुस्सा दी...और तेज़ी से इस बार अंदर बाहर करने लगा.....
इस बार माधवी अपने आप को रोक नही पाई और उसके मूह से वो सिसकियाँ निकल ही गई....अहह मॅर गाइिईई...ओह्ह्ह्ह....धीरे धीरे....
पोपटलाल जोरों से उंगली अंदर बाहर करता रहा इधर माधवी बेचैन हो गई थी...वो झरने के बिल्कुल करीब थी..पोपट लाल को ये एहसास हुआ कि वो झड़ने वाली है तो उसने उंगली बाहर निकाल ली...और अपना मूह लगा लिया..क्यूँ कि वो माधवी का सारा रस पीना चाहता था...
उसने जीब चूत के अंदर डाल दी और चूसने लगा...और फिर पोपटलाल ने माधवी के दाने को दबा दिया...इससे माधवी के सबर का बाँध टूट गया और वो सिसकियाँ लेते हुए झड गई....आअहह....मैं ग्गाअगईइइई...और पोपट के मूह के अंदर ढेर सारा अपना रस छोड़ दिया...और पोपट लाल उसके पानी को पीता रहा..एक एक बूँद को वो निगल गया हो..और जैसे ही उसने उसकी चूत को छोड़ा एक पुच की आवाज़ आई...जैसे एक छोटा बच्चा पूरी पानी की बूँद निचोड़ देता है बॉटल से....अब पोपटलाल माधवी को चोदने जा रहा था..जैसे ही उसने माधवी की चूत पे अपना लंड सेट किया...और अब्दुल ज़ोर से चिल्लाया...रुक जाइए पोपट भाई...
पोपटलाल :- चौंकाते हुए...क्या है अब्दुल क्यूँ रोक रहा है...
अब्दुल :- पोपट भाई आपने तो इतना कुछ कर लिया...मुझसे अब रहा नही जा रहा...मुझे भी तो करने दो..आप थोड़ा आराम कर लो जब तक...
पोपटलाल अब्दुल की हालत को समझता हुआ ....उसकी तरफ हंसता है और बोलता है..चल ठीक है अब्दुल तेरी बेचैनी को समझता हूँ..तू आ जा भाई..
और अब्दुल माधवी की तरफ बढ़ने लगता है..........
अब्दुल माधवी की ओर बढ़ता है...और अपना एक हाथ उसके चुचों पे रख देता है....उसके शरीर में एक सन स्नाहट होती है..वैसे तो वो कयि रंडियो को चोद चुका था..लेकिन इस चीज़ में कुछ अलग ही मज़ा है...
अब वो अपने दोनो हाथों को उसकी चुचियो पे रख कर उपर चढ़ जाता है..और अपने होंठ माधवी के होंठो के पास ले जाता है...कुछ देर सोचता है...और फिर अपने होंठ माधवी के रसीले होंठों पे रख देता है..और उन्हे चूसने चाटने लगता है...
वो बड़े प्यार प्यार से होठों को चूस्ता है...कभी उपर वाला होंठ लेके तो कभी नीचे का होंठ लेके...
कुछ मिनट ऐसा करने के बाद उसने माधवी के मूह को खोला और अपनी जीभ अंदर डाल के माधवी की जीभ से मिला दी...इस बार माधवी ने भी साथ दिया..क्यूँ कि वो नशे में थी..उसे कुछ नही पता था कि कौन कर रहा है उसके साथ....अब दोनो बुरी तरह एक दूसरे के मूह को अपने मूह से चूस रहे थे....दोनो की साँस आब उखड़ने लगती है..इसलिए अब्दुल हट जाता है और हाँफने लगता है....
और धीरे धीरे अब चुचियों की तरफ बढ़ता हुआ...सीधे चुचियों के निपल्स को मूह में लेके चूसने लगता है...निपल्स अकड़ के बिल्कुल खड़े होते हैं...बार बार कभी एक चुचि के निपल को तो कभी दूसरे चुचि के निपल को दोनो को एक के बाद एक चूस रहा था...कुछ देर ऐसा करने के बाद वो सीधा बिना देर करे माधवी की चूत की ओर बढ़ जाता है....
इधर माधवी एक बार झड़ने के बाद दुबारा गरम हो गई थी....चूत अभी पानी छोड़ रही थी...अब्दुल ने अपने होठों के चारो तरफ जीभ घुमाई और टूट पड़ा चूत पर...
वो पागलों की तरह चूत को उपर से चाट रहा था...ऐसे चाट रहा था जैसे किसी कुत्ते को हड्डी मिल जाती है...माधवी इस प्रहार को सहन नही करती और उसकी सिसकियाँ चालू हो जाती है....अहह....ओह...मार दिया रे.......बसस्स करूऊओ....
अब्दुल माधवी की ओर ध्यान ना देते हुए..अपने काम में लगा हुआ था....अब उसने चूत की फांकों को अलग किया और अपनी जीभ चूत के अंदर डाल दी..और चूत की गहराइयों में चाटने लगा...माधवी का हाल बहुत बुरा था..और छटपटा रही थी...उसको इतना मज़ा आ रहा था कि वो बता नही पा रही थी...क्यूँ कि उसकी ऐसी हालत नही थी..
इधर अब्दुल ने स्पीड बढ़ा दी थी...पूरी चूत माधवी के काम रस से भीगी पड़ी थी...वो ज़ोर ज़ोर से चूत के अंदर चाटे जा रहा था....अब माधवी से बर्दाश्त नही हुआ और वो ज़ोर से चिल्लाते हुए झटके खाते हुए...आहह उईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआ.....में तो गईिईईईईईईई...आहूहोऊूओ......
और अपना सारा पानी अब्दुल के मूह के अंदर छोड़ देती है...अब्दुल एक एक बूँद गटक जाता है...अब्दुल अपना मूह चूत से हटाता है और पोपटलाल की तरफ देखते हुए बोलता है...
अब्दुल :- पोपट भाई मज़ा आ गया आज तो....इस चूत का टेस्ट तो मेरे सोडा से भी ज़्यादा मस्त है...और हँसने लगता है....
पोपटलाल :- हंसते हुए..भाई इस पानी का तेरे सोडे से कोई मुकाबला नही है...चल अब हट मुझे चोदने दे ...अब रहा नही जा रहा...
अब्दुल :- पोपट भाई एक मिनट..मेरे पास एक मस्त आइडिया है ..जिससे हम को और माधवी भाभी दोनो को मज़ा आएगा.....
अब्दुल के दिमाग़ में क्या चल रहा है...पोपटलाल नही जानता...इधर माधवी 2 बार झड चुकी है...उसका शरीर थक चुका है दो बार झड़ने से ...अब आगे ये दोनो और कितनी बार झड़ने पर इसे मजबूर करेंगे...
अब्दुल के दिमाग़ में एक प्लान आता है जो वो पोपटलाल को बताता है...ये सुन के पोपटलाल खुश हो जाता है...और बोलता है..
पोपटलाल :- अरे वाह अब्दुल तूने क्या प्लान बनाया है...भाई मज़ा आ गया...
अब्दुल :- पोपट भाई अब बोलते ही रहोगे कि शुरू भी करोगे..
पोपटलाल :- हाँ भाई वैसे भी अब मुझसे रहा नही जा रहा है...माधवी भाभी की डबल पेनेट्रेशन करने को..
जी हाँ अब्दुल का ये प्लान था कि दोनो एक साथ एक टाइम पर माधवी को चोदे..यानी कि एक आगे चूत में डालेगा और दूसरा उसकी गंद में...
और तय होता है कि अब्दुल माधवी की गंद में डालेगा और पोपटलाल माधवी की चूत मे....
दोनो माधवी के करीब आते हैं...माधवी को कुछ होश नही होता...और उसे नही पता होता कि उसके साथ अब क्या होने वाला है..
पोपटलाल :- पहले हम दोनो माधवी भाभी को उठाते हैं....फिर में इन्हे गोदी में उठा लूँगा तू पलंग पर लेट जइयो...और फिर में इन्हे तेरे उपर रख दूँगा .. ठीक है..
अब्दुल अपनी गर्दन हाँ में हिला देता है..और दोनो माधवी को पलंग से उठाने लगते हैं...दोनो माधवी को बड़े प्यार से उठाते हैं..और फिर पोपटलाल उन्हे अपनी गोदी में बिठा लेता है...और अब्दुल पलंग पर लेट जाता है...और फिर पोपटलाल माधवी को अब्दुल के उपर रख देता है...
और खुद माधवी के उपर आ जाता है...और बोलता है..
पोपटलाल :- अब्दुल पहले में डालूँगा अंदर ..और जब मेरा अंदर चला जाएगा तो तू अंदर डालना शुरू कर दियो...इतना बोलते ही पोपटलाल माधवी की चूत पे अपना लंड सेट करता है...और एक हल्का सा पुश मारता है ...
इससे उसके लंड का सुपाडा आराम से घुस जाता है...फिर पोपटलाल सोचता है...क्यूँ ना एक ही झटके में डॉल दिया जाय..
और ऐसा सोचते ही...वो एक ही झटके में माधवी की चूत में पूरा का पूरा लंड उतार देता है..इससे माधवी के मुँह से अहह..ऊऊओ..निकल जाता है...
पोपटलाल :- वाहह...अब्दुल माधवी भाभी की चूत तो इतनी गरम है कि बता नही सकता...मज़ा आ गया...चल तू डाल अब..में थोड़ा सा उपर उठाता हूँ इन्हे...
और फिर पोपट लाल माधवी को थोड़ा उपर उठाता है..और इधर अब्दुल गान्ड का छेद ढूँढ कर उसमे अपना लंड सेट करने की कोशिश करता है....कुछ मिनट मेहनत करने के बाद उसका लंड गान्ड पे सेट हो जाता है...और सेट होते ही..एक धकका लगाता है...जिससे उसका लंड ज़रा सा गान्ड में चला जाता है....और माधवी इस प्रहार को झेल नही पाती और ज़ोर से चिल्ला उठती हाई....अहह ओह....मर् गईिईईईईईईईई....माआआआआआअ.....क्या है ये.......निकालो....दर्द हो रहा है...
तभी पोपट बोलता है...भाई अब्दुल जल्दी डाल दे ..चिल्ला ने दे इसे...ये सुन कर अब्दुल जोश में आ जाता है...और फिर 2 या 3 कस कस के धक्के लगाता है और लंड पूरा गान्ड के अंदर चला जाता है........और माधवी की भयानक चीख निकल जाती है.....और वो पागलों की तरह छटपटा रही होती है..उसे ऐसा देख कर पोपटलाल उसे कस के पकड़ लेता है और वो दोनो थोड़ी देर रुके रहते हैं...जब माधवी कुछ नॉर्मल होती है..तब पोपटलाल इशारा करता है...और शुरू होता है एक घमसान चुदाई का कार्यकरम...
पहले पोपटलाल माधवी की चूत में पेलना शुरू करता है...और लंड को अंदर बाहर करने लगता है...चूत गीली होना शुरू हो जाती है....कुछ धक्के मारने के बाद वो रुकता है...फिर पीछे से अब्दुल अंदर बाहर करने लगता है...गान्ड इतनी टाइट होती है कि अब्दुल को बहुत मज़ा आ रहा होता है..उसके मूह से आह ओह्ह निकल रही होती है...इधर माधवी का भी बुरा हाल होता है...अब दर्द की जगह एक गहरे सुखद सुकून मिलता है वो भी...ओह आहह.ह्म्म्म्मम...बहुत अच्छा...ऐसा बोलती है...कुछ धक्के अब्दुल लगता है..और फिर बोलता है..
अब्दुल :- पोपता भाई अब आप भी मारो..में भी मारता हूँ..मज़ा आएगा..
और फिर पोपटलाल आगे से धक्के लगाता है और अब्दुल पीछे से...माधवी दोनो के दिए जाने वाले प्रहार सहन नही करती...उसको ऐसा सुकून आज तक नही मिला था..इसलिए वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी....अहह....ओह....
रुकूऊऊओ मात्त्ततत्त....माआआअ.....में तो आअज मरररर गईिई......ओउर्र्रर तेज़्ज़.ज़्.....
दोनो तरफ एक ही टाइम पर धक्के लगने की वजह से तीनो के शरीर में एक अजीब से गर्मी पैदा हो गई थी...अब्दुल बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था...गान्ड इतनी टाइट थी कि अब्दुल की लंड की नसें फूलने लगी थी वो कभी भी झड सकता था...इधर पोपटलाल चूत में तेज़ी से लंड को अंदर बाहर कर रहा था....चूत बहुत ज़्यादा गीली हो चुकी थी..और पच पच की आवाज़ें आ रही थी....माधवी की सिसकियाँ चालू थी...वो ओह.आहह....और तेज़.....और तेज़....फाड़ दूऊव...मेरिइइ.....ह्म्म्म्मम.....
अब्दुल से अब रहा नही जा रहा था...और वो जबरदस्त धक्के लगाने लगा और झड गया गान्ड के अंदर ही.....इधर पोपटलाल लगा हुआ था चूत चोदने में....उससे भी अब बर्दाश्त नही हो रहा था...फिर वो और तेज़ी से लंड को अंदर बाहर करने लगा....अब माधवी से भी नही रहा गया...और वो चिल्लाते हुए ......अहह...ओह्ह्ह......माआआआआआअ.........मीईंन्न्न् तो....गईिईईईईई.....और झड जाती है....फिर पोपटलाल भी सहन नही कर पाता और अपना गरम पानी माधवी की चूत में ही डाल कर झड जाता है....
तीनो की साँसें बिल्कुल फूली पड़ी होती है...कुछ देर आराम करने के बाद पोपटलाल हटता है ...और अब्दुल माधवी को धक्का देके खुद भी खड़ा हो जाता है...और फिर अब्दुल और पोपटलाल कपड़े पहनते हुए बात करते हैं...
अब्दुल :- पोपट भाई आज तो मज़ा आ गया...ऐसा सुकून मुझे आज तक नही मिला...क्या गान्ड थी ...
पोपटलाल :- हाँ भाई अब्दुल मुझे भी बहुत मज़ा ...इनकी चूत तो कमाल की थी...उफफफफ्फ़...क्या चीज़ है ये...मन ही नही भरता...और चोदने का मन है..मगर आज नही अब देर हो रही है...तभी पोपटलाल को अपने छाते की याद आती है...और फिर वो बोलता है...अब्दुल रुक मेने एक इंपॉर्टेंट काम तो किया ही नही..
अब्दुल :- क्या?
पोपटलाल :- भाई मेरा छाता तो रह ही गया...बेचारा इसे भी तो चूत चाहिए .. तू रुक में इस छाते को भी माधवी को चोदने दूँगा...
अब्दुल :- पोपता भाई रहने दो वैसे भी माधवी भाभी की हालत देखो कितनो थकि हुई हैं..और मत करो..वैसे भी हमे अब देर हो रही है..
पोपटलाल :- कॅन्सल...कॅन्सल...अब्दुल अपनी बात को कॅन्सल कर...तू रुक बस 5 मिनट का काम है...
अब्दुल :- ठीक है पोपट भाई जल्दी करो..
और फिर पोपता छाते के आगे का हिस्सा लेके माधवी की चूत की पास आता है और चूत के छेद में एक ही झटके में डाल देता है....और माधवी फिर से ज़ोर से चिल्ला उठी ती है...ओह...अहह........
ये क्य्ाआआआआआ हाईईइ.....ऐसा क्यूँ क्यूंकी छाते का आगे का हिस्सा नुकीला होता है....और पोपटलाल ज़ोर ज़ोर से छाता अंदर बाहर करने लगता है...माधवी का बुरा हाल होता है...सिर्फ़ 2 मिनट ऐसा करने से ही..माधवी ...चिल्लाती हुई....मेंन्न्न् गईिई...अह्ह्ह्ह...और झड जाती है.....पोपटलाल छाता बाहर निकाल कर..उसका सारा कम रस चांट लेता है..और फिर बोलता है..
पोपटलाल :- चल भाई अब्दुल काम हो गया...
और फिर दोनो माधवी को कपड़े पहना देते हैं...माधवी की हालत बहुत ज़्यादा बुरी होती है..और हो भी क्यूँ ना...कुछ ही देर में 4 बार झड चुकी थी वो...
और फिर दोनो नीचे की तरफ़ उतरते हैं...और अब्दुल पहले ध्यान से देखता है कि उन्हे कोई देख तो नही रहा है...जब उसे लगता है कि सब दही हंडी में बिज़ी हैं..तो वो पोपटलाल को इशारा करता है...वो फिर वो दोनो आराम आराम से वहाँ सभी लोगों के बीच में जाके घुल मिल जाते हैं...
इधर हमारे भिड़े साहब इन्हे तो कोई मतलब ही नही कि उनकी बीवी कहाँ है ...उसे तो बस रोशन दिखाई दे रही थी...और वो बार बार सोच रहा था कि क्या करूँ....कि आज रोशन भाभी को चोद दूं...
सोसाइटी कॉंपाउंड में जोरो शॉरो से दही हाँडी का प्रोग्राम चल रहा था...सभी वहाँ नाच गा रहे थे...
ढोल नगाड़े बजाए जा रहे थे....सभी की नज़र हाँडी पर थी कि कब उसे कोई फोड़े ...सिवाय एक जने के वो आप जानते हैं हमारी सोसाइटी के एक मात्र सेक्रेटरी भिड़े...उनका दिमाग़ और उनकी नज़र सिर्फ़ एक चीज़ पे अटकी थी और वो थी रोशन...
लेकिन वो ये नही सोच पा रहा था कि क्या करे...कोई आइडिया कुछ नही सोच पा रहा था..क्यूंकी उसे डर भी था अगर किसी को पता चल गया कि मेने रोशन भाभी के साथ किया है...तो सोढी और सभी सोसाइटी वाले जान से मार देंगे ....
उधर जेठालाल की नज़र तो सिर्फ़ बबीता जी पर अटकी पड़ी थी...जो दूसरी तरफ सभी लॅडीस के साथ नाच रही थी...बहुत ही ज़्यादा हॉट और बहुत ही जदा सेक्सी लग रही थी...क्यूंकी गीले होने की वजह से उसका पूरा टॉप उसके सीने से चिपका पड़ा था.....
भिड़े सोच में पड़ा था...उसे ये ख्याल ही नही था कि माधवी कहाँ है कैसे पड़ी है...उसके अलावा किसी को भी माधवी का ध्यान ही नही था....
उधर जब जेठालाल नाच के थोड़ी देर रुका..उसने सोचा अब यही सही वक़्त है अपने प्लान को अंजाम देने का....उसने अपनी पॉकेट में हाथ डाला...और डालते ही उसे एक झटका लगा...और वो मन में चिल्लाया....अरे ये क्या...मेरी पॉकेट खाली है...वो पॅकेट कहाँ गया...जो मेने रखा था...हे भगवान कहीं गिर तो नही गया....और इधर उधर ढूँडने लगता है...लेकिन बहुत कॉसिश करने के बाद भी उसे नही मिलता.......
जी हाँ आप लोग बिकुल सही समझे..जो पॅकेट पोपटलाल को मिला था वो हमारे जेठालाल का था...क्यूंकी जेठालाल ने वो पॅकेट बबीता जी के लिए रखा था......और उस पॅकेट की वजह से माधवी की बुरी हालत हो गई थी....
जेठालाल परेशान सोच में डूबा पड़ा था...तभी मेहता साहब ने आकर पूछा..
तारक :- क्या हुआ भाई जेठालाल....इतना क्या सोच रहे हो..
जेठालाल :- अब बता तो सकता नही था .. उसने बात को टालते हुए कहा...कुछ नही मेहता साहब बस ऐसे ही...में ये बोल रहा कि कोई ये मटकी फोड़ पाएगा कि नही.
तारक :- अरी जेठालाल फुटेगी ना..चिंता मत करो....
इधर भिड़े कॉम्पोन्ड के कोने में खड़ा सोच रहा था कि क्या किया जाए...उधर रोशन डॅन्स कर रही थी...कि अचानक उसकी आँख में कुछ चला गया...उसने काफ़ी कोशिश की कि वो आँख से निकल जाए..लेकिन निकला नही...और आख़िर कार उसे जाना पड़ा...आँख सॉफ करने ..वो किसी को बताए बिना चली गयी ...
पता नही उसने क्या सोचा वो अपने विंग की तरफ ना जाकर सोसाइटी के गार्डन में चली गयी....जब भिड़े ने उसे सोसाइटी के गार्डन में जाते देखा तब उसने एक प्लान बनाया ... कि अब वो रोशन को चोद के रहेगा...
उधर रोशन ने सोसाइटी गार्डन में पानी चला की आँख को धोना चालू ही किया था..कि तभी पीछे से एक आदमी आया और उसने रोशन को ज़ोर से पकड़ लिया...
रोशन चिल्लाना चाहती थी मगर उसने उसके मुँह पे हाथ रख के बंद कर दिया था...और वो रोशन को घसीटता हुआ एक कोने में ले गया..जहाँ पेड़ पौधो की वजह से उसे कोई देख नही पाता...
उसने रोशन को अपनी तरफ पलटा..रोशन उस आदमी को देख नही पा रही थी क्यूँ कि उस आदमी ने ब्लॅक कलर का मास्क अपने चेहरे पे बाँधा हुआ था....जैसे ही रोशन ने चिल्लाने की कोशिश करी..उस आदमी ने एक कपड़ा उसके मुँह में ठूंस दिया...और हाथों को एक पेध से बाँध दिया...रोशन हाथ पैर मारे जा रही थी....लेकिन उसका कोई फ़ायदा नही था..उसको पता था अगर कोई इधर जल्दी से नही आया तो उसका आज बलात्कार हो ही जाएगा....
रोशन को ये समझ आ गया था कि आज उसका बलात्कार हो जाएगा..अगर सोसाइटी में से किसी ने उसको नही देखा....वो अपने पैर चलाए जा रही थी...वो अपने आप को छुड़ाना चाहती थी...लेकिन वो आदमी पूरे इरादे से रोशन को चोदने आया था...
तभी ब्लॅक मास्क वाले आदमी ने एक थप्पड़ रोशन के गाल पे रसीद कर दिया और बोला...ए साली ज़्यादा नखरे करे ना तो यहाँ तेरा एमएमएस बना के इंटरनेट पे डाल दूँगा..आराम से करवा ले किसिको पता भी नही चलेगा और तू मज़े भी ले सकेगी...
रोशन अपनी गर्दन ना में हिला रही थी...वो ऐसा बिल्कुल नही चाहती थी..लेकिन उस वक़्त उसकी एक ना चली...वो बुरी तरह से फँस चुकी थी....
तभी उस आदमी ने फिर से बोला...देख में तेरे मुँह से कपड़ा हटा रहा हूँ..अगर तू चिल्लाई या तूने ज़रा सा भी शोर मचाया तो याद रख में तो यहाँ से भाग जाउन्गा लेकिन फिर तेरा बेटा ज़िंदा नही रहेगा...फिर तू उसे कभी देख नही पाएगी....
ये सुन के रोशन के हाथ पैर कांप गये..उसने मजबूरी में अपने बेटे की खातिर अपनी गर्दन हाँ में हिला दी...
और फिर उस आदमी ने उसके मुँह से कपड़ा निकाल दिया और बोला....समझदार है ... अगर तूने ज़रा सी भी चालाकी दिखाई तो में तेरे बेटे को जान से मार दूँगा...
रोशन की आँखों में से आँसू निकल आए..और उसने बोला में कोई चालाकी नही करूँगी..लेकिन तुम मेरे गोगी को कुछ नही करोगे...
वो आदमी हंसते हुए बोला....हाँ हाँ उसे कुछ नही करूँगा....लेकिन आज तेरी अच्छे से बजाउन्गा मेरी जानं....बॅस इतना बोलते ही...वो रोशन के होंठो के उपर टूट पड़ा...
वो रोशन के होंठो को ऐसे चूस रहा था मानो ये दुनिया की आखरी औरत हो...बड़ी बेहरमि से उसके होंठो को अपने होंठो को चूस्ता रहा...और फिर अपनी जीभ ज़बरदस्ती अंदर डाल के उसकी जीभ को अच्छी तरह चूसने लगा...
रोशन के आँसू थमने का नाम नही ले रहे थे...वो उस आदमी को ढकलेना चाहती थी लेकिन वो ऐसा नही कर पा रही थी....
कुछ देर बेरहमी से होंठ चूसने के बाद उस आदमी ने रोशन के होंठो को छोड़ा...दोनो बुरी तरह हाँफ रहे थे...
रोशन ने एक बार फिर कोशिश की और बोली...देखो मुझे छोड़ दो प्लीज़..तुम्हे जितना पैसा चाहिए में दिला वा दूँगी बावा...बॅस मुझे छोड़ दो...
वो आदमी हंसता हुआ...चल नखरे ना कर...मुझे पता है तू कितनी बड़ी चुड़क्कड़ है तभी तो बिना ब्रा के नीचे सबके सामने ऐसे ही आ गई...और यहाँ बड़ी बड़ी बातें कर रही है...
रोशन ये सुन के बिल्कुल चुप हो गई..उसे पता था कि कोई फ़ायदा नही है अब...
फिर उस आदमी ने बिना टाइम गवाए रोशन का टॉप उपर कर दिया और उसका लोवर नीचे कर दिया..और देख के और भी ज़्यादा खुश हो गया और हंसते हुए बोला अरे वाह चुड़क्कड़ तूने तो पेंटी भी नही पहनी है...क्या बात है...
और फिर उसने अपनी जीन्स नीचे कर दी...
जीन्स नीचे होते ही उस आदमी का लंबा लंड रोशन की आँखों के सामने आ गया...और उसने एक दम से अपनी आँखे बंद कर के मुँह दूसरी तरफ फेर लिया...
उस आदमी को पता था कि उसके पास ज़्यादा वक़्त नही है इसलिए उसने ज़्यादा वक़्त ना गँवाते हुए वो करना चालू किया....जिसकी वजह से आज रोशन की ज़िंदगी बदलने वाली थी.....
लेकिन जब उसने रोशन की चिकनी चूत और मस्त चुचे देखे तो उससे रहा नही गया इसलिए उसने सबसे पहले चूत के उपर अपने होंठ रख दिए और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा...और अपनो दोनो हाथों से रोशन के चुचों को दबाने लगा......रोशन ये सब नही करना कहती थी...लेकिन उसका शरीर उसकी नही सुन रहा था....वो अब गरम होने लगा था....
वो आदमी ने अब चूत को बहुत तेज़ी से चाटने लगा....चूत की फांकों को अलग करके अपनी जीभ अंदर डाल के उसके अंदर तक चाटने लगा....अब रोशन से कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो रहा था...वो चाहती तो नही थी..लेकिन फिर भी उसके मुँह से अहह..ओह नहियीईई...ऐसा मत करो प्लस्सस्स्सस्स...
.लेकिन उस आदमी ने बिना सुने अपना काम चालू रखा...वो बहुत ही मज़े से चूत को चाट रहा था....चाटने की वजह से वहाँ पच पच की आवाज़ें आ रही थी....
और फिर वो हुआ जिससे रोशन को बहुत गिल्टी फील हुई...जी हाँ वो झड गई..उसने सारा रस उस आदमी के मुँह पे उगल दिया...और वो आदमी ने सारा रस पी लिया...
आदमी हटा और हंसते हुए बोला...ओ साली तू तो बड़े नखड़े कर रही थी...कि में नही करूँगी....नाटक कर रही थी....अब देख कैसे पानी बहा रही है....हाहहहः और हंसता रहा...