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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

तभी पीछे से आवाज़ आती है...मेहता साहब...!!!!

उस वक़्त तारक अंजलि को और अंजलि तारक को घूर घूर के देख रहे थे.....

अंजलि धीमी अवज़ में.....तारक कौन आ गया....हे भगवान....अब क्या करें..जो भी है उसने हमे देख लिया है...

तारक भी धीमी आवाज़ में...अंजलि घबराव मत देखता हूँ कौन है तुम ऐसे ही लेटी रहो...

वो क्या था कि अंजलि जिस तरह पड़ी थी वो देख नही सकती थी.कि तारक के पीछे कौन है....और तारक तो सिर्फ़ अंजलि को ही देख सकता था....

तभी फिर से आवाज़ आई.....मेहता साहब...आज फिर से आपने गेट खुला छोड़ दिया......कम से कम गेट तो बंद कर के ये काम किया करो...

और इतना बोलते ही तारक समझ जाता है कि पीछे कोई और नही...जेठालाल खड़ा है....और वो अंजलि को बोलता है...

तारक :- अंजलि जेठालाल है..

अंजलि :- थॅंक गॉड...कम से कम कोई और तो नही है...लेकिीन फिर भी तारक मुझे तो बहुत शरम आ रही है..उस दिन तो हम इस हालत में नही थे..एक काम करो..आप सीधे खड़े हो जाओ मेरे सामने आकर....इतनी देर में अपना पाजामा उपर कर लूँगी...

तारक हाँ में मुन्डी उठाता है...

जेठालाल :- अरे मेहता साहब आप आराम से कपड़े पहन लो में उल्टा मूड जाता हूँ...

और जेठालाल उल्टा मूड जाता है...

ये देख के अंजलि और तारक को थोड़ी राहत की सांस मिलती है...और दोनो अपने फटाफट कपड़े पहन लेते हैं...

तारक :- हाँ तो भाई जेठालाल आज सुबह सुबह कैसे आना हुआ...

जेठालाल मुड़ते हुए....मेहता साहब..आप भी ना..गेट तो बंद कर लिया करो...और आज सुबह सुबह...मूड में आ गये...

अंजलि जेठालाल की बात सुन के शर्मा जाती है....और बोलती है....क्या जेठा भाई आप भी...

तारक :- अरे काहे का रोमॅन्स सुबह सुबह...वो क्या है ना जेठालाल आज मुझे सेक्स पे आर्टिकल लिखना था...और वो फील नही आ रहा था इसलिए बॅस वो फील लाने के लिए करना पड़ा....

अंजलि ये सुन के आग बाबूला हो जाती है...

अंजलि :- अच्छा तो मेरे उपर एक्सपेरिमेंट किया जा रहा था....जेठा भाई इन्होने मुझे चुहिया बना रखा है चुहिया...

जेठालाल :- चुहिया.....ग़लत बात मेहता साहब...

अंजलि :- हाँ अब आना रात को बताउन्गी...और अपना मुँह टेडा कर के अंदर चली जाती है...

तारक :- अंजलि अंजलि...सुनो तो यार...

लेकिन अंजलि उसकी एक नही सुनती..

जेठालाल :- नाराज़ कर दिया आपने भाभी को..

तारक :- ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है...क्या ज़रूरत थी ये पूछने की मेहता साहब सुबह सुबह रोमॅन्स कर रहे हो..

जेठालाल :- सॉरी मेहता साहब..

तारक :- अरे मज़ाक कर रहा हूँ...छोड़ो...अच्छा ये बताओ...यहाँ कैसे आना हुआ..

जेठालाल :- अरे हाँ वो तो बताना भूल गया....मेहता सुबह सुबह एक गुड न्यूज़ है..

 
तारक :- पार्टी की डेट पता चल गई है ना...

जेठालाल :- अरे आप तो अंतर्यामी हो...हाँ परसो की है डेट...मेने आपको बता दिया है...आप पोपटलाल को बता देना ...बाकी को पता है..

तारक :- अरे बिल्कुल ..... अब आज रात को सोढी की दुकान पे सारी बातें क्लियर कर लेंगे....

जेठालाल :- बिल्कुल....और हाँ भाभी को मना लेना...

तारक :- उसकी चिंता मत करो..अंजलि का गुस्सा अभी शांत हो जाएगा....

और फिर जेठालाल तारक के घर से बाहर निकल जाता है...दुकान जाने के लिए......!!!!

जेठालाल दुकान के लिए निकल गया था...

जैसे ही वो बाहर कॉंपाउंड में आया...उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा...जी हाँ...सामने बबीता खड़ी थी...

और बबीता को देख के तो जेठालाल की हालत ऐसी हो जाती है...जैसे किसी भूके को खाना मिल गया हो..

वो भागता हुआ..बबीता के पास पहुँचा...

जेठालाल :- बबीता जी...गुड मॉर्निंग..

बबीता :- मुस्कुराते हुई..गुड मॉर्निंग जेठा जी.....

जेठालाल :- और तो कहाँ चली सवारी सुबह सुबह...

बबीता :- जीई बॅस वो एक फ़्रेंड के यहाँ जा रही हूँ...

जेठालाल :- ओहू...अईयर भाई भी जा रहे हैं...आपके साथ...

बबीता :- नही अईयर तो आज घर पे नही है..इसलिए में अकेली ही जा रही हूँ...

जेठालाल ये सुन के फूले नही समाता .... वो सोचता है....कि आज फिर से वो बबीता जी के साथ ऑटो में जाएगा....

जी हाँ बताना तो भूल गया...वैसे आज बबीता ने एक चेक की शर्ट पहनी थी..जिसका उपर का बटन खुला था...और नीचे जीन्स पहनी थी...जो काफ़ी चिपकी हुई थी उसके बॉडी से...और उसकी जाँघ और गान्ड काफ़ी उभर के नज़र आ रही थी...

बबीता :- चुटकी बजाते हुए.....कहाँ खो गये जेठा जी आप....

जेठालाल :- सोच में से निकलते हुए...नही...बॅस...तो कहाँ जाना...

बबीता :- वो मुझे ****** रोड पे जाना है...

जेठालाल का मुँह लटक जाता है...क्यूँ कि वो उसकी दुकान के दूसरी तरफ था....

जेठालाल :- ओफूऊ....

बबीता :- क्यूँ क्या हुआ??

जेठालाल :- आप को लिफ्ट दे देता तो मेरा भी टाइम पास हो जाता...

बबीता शर्मा जाती है...उसे उस दिन की ऑटो वाली बात याद आ जाती है...

बबीता :- ओह्ह्ह...नेक्स्ट टाइम आप लिफ्ट दे दीजिएगा....ओके...अब में चलती हूँ..लेट हो रही है..ब्बबयए...

जेठालाल :- ओहकक बयए......

और मन में सोचता है....आज वो अईयर इडली नही था..आराम से मज़े करता बबीता जी के साथ...लेकिन उनको कहीं और जाना था...चलो जैसे जिसकी किस्मत...

और ऑटो पकड़ के वो भी दुकान पे पहुँच जाता है...

 
जेठालाल :- ओहकक बयए......

और मन में सोचता है....आज वो अईयर इडली नही था..आराम से मज़े करता बबीता जी के साथ...लेकिन उनको कहीं और जाना था...चलो जैसे जिसकी किस्मत...

और ऑटो पकड़ के वो भी दुकान पे पहुँच जाता है...

दुकान के अंदर पहुँचते ही...देखता है...बाघा फोन ठीक कर रहा होता है....और नट्टू काका नही होते दुकान पे...

जेठालाल :- आई बाघा नट्टू काका कहाँ है..

बाघा :- आ गये सेठ जी....गुड मॉर्निंग...और वो नट्टू काका...गॉडाउन में गये हुए हैं..काफ़ी देर हो गई है उन्हे...

जेठालाल :- अच्छा....गॉडाउन में क्या कर रहे हैं....ज़रा बुला के ला उन्हे...मुझे कुछ काम है उनसे..

बाघा :- अच्छा सेठ जी ... ये फोन बस ठीक होने ही वाला है....उसके बाद बुला के लता हूँ....

जेठालाल :- रहने दे भाई..में ही जाता हूँ...तू ठीक कर फोन..

उधर गॉडाउन में...

गोडोवन् में नट्टू काका खड़े थे...और कुछ कर रहे थे...कोई उन्हे देख नही सकता था कि वो क्या कर रहे हैं...

तभी उनकी आवाज़ आई....आहह......अफ...मयी गॉड्ड्ड...

जी हाँ नट्टू काका...मूठ मार रहे थे...उन्होने पैंट की जिप नीचे कर के अपना लंड हाथ में ले रखा था और वो उसे हिला रहे थी...

अह्ह्ह्ह.....आपकी चूत बहुत अच्छी है...आहह.....सो मच ऑफ वॉटर कौमिंग आउट फ्रॉम युवर चूत....मज़ा आ रहा है.....

नट्टू काका किसी की चूत के बारे में सोच सोच कर मूठ मार रहे थे....

वो झड्ने के बेहद करीब थे...उनके मुँह से उस औरत का नाम निकला जिसकी चूत के बारे में सोच के वो मूठ मार रहे थे...की तभी पीछे से आवाज़ आई....

नट्टू ककाअ.....

नट्टू काका आवाज़ सुन के घबरा गये...उनकी हालत खराब हो गई...उनको लगा आज तो गये काम से....

किसकी आवाज़ थी....ह्म...अगले अपडेट में पता चलेगा...कि नट्टू काका का क्या होगा अब और कौन है वो औरत जिसकी बारे में वो सोच रहे थे....!!!!!

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जैसे ही पीछे से आवाज़ आई..नट्टू काका.....

वो हड़बड़ाते हुए पीछे मुड़े.....उनका तना हुआ लंड ...अब डर की वजह से मुरझा गया था...

वो जैसे ही पीछे मुड़े ..... उनके सामने खड़ा था....बाघा.....

नट्टू काका :- ओह्ह माइ डियर भतीजे...तूने तो आज मेरी जान हे निकाल दी थी....मुझे लगा सेठ जी आ गये हैं..

बाघा :- नट्टू काका ये आप गॉडाउन में क्या कर रहे हो....और उसने नट्टू काका के लंड पे अपनी उंगली से इशारा करते हुए कहा..

नट्टू काका अपना लंड अंदर करना ही भूल गये थे...बाघा के इशारे को समझते हुए....फटाफट उन्होने अपना लंड अंदर कर लिया....

बाघा :- नट्टू काका ये सब क्या है...दुकान पे ये सब..कोई देख लेता तो...घर पे टाइम मिलता तो है...

नट्टू काका :- बाघा बॉय.....आज कल घर पे में नही कर पा रहा ....और आज किसी की याद आ गई तो में अपने आप को नही रोक पाया....तुझे तो पता है ना..मुझसे कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है....

बाघा :- वो में जानता हूँ ..... कि आपसे कंट्रोल नही होता..लेकिन फिर भी यहाँ अगर कोई देख लेता तो गड़बड़ हो जाती..

नट्टू काका :- लेकिन तू आया ना...सेठ जी तो नही आए ना तो फिर्र..

बाघा :- सेठ जी आ चुके हैं...और वो मुझसे पहले गॉडाउन जाने के लिए निकल गये थे....

नट्टू काका :- क्या......कहीं तुझसे पहले उन्होने मुझे ऐसे द्देख तो नही लिया...ओह्ह माइ गॉड...ये तो गड़बड़ हो गई...

बाघा :- आप टेन्षन मत लीजिए...उन्होने नही देखा है...

नट्टू काका :- टेल मी इन क्लियर वे माइ बॉय...

बाघा :- ओके नट्टू काका.....

वो हुआ यूँ था कि में मोबाइल ठीक कर रहा था...तो सेठ जी ने बोला कि में ही चला जाता हूँ गॉडाउन में आपको बुलाने.....और वो दुकान से बाहर निकल गये...

मेने अपना काम ख़तम किया...और सोचा चलो थोड़ी देर बाहर ही खड़ा होता हूँ....जब बाहर आया तो देखा...कि सेठ जी वहीं दुकान के बाहर खड़े थे और वो ढंजी सेठ हैं ना उनसे बात कर रहे थे...में तभी सेठ जी के पास गया और उनसे पूछा...

सेठ जी आप नही गये नट्टू काका को बुलाने..

जेठालाल :- तुझे नही दिख रहा है भाई...में यहाँ बात कर रहा हूँ...तू जा और बुला के ला...

और फिर में आ गया...और देखा कि आप यहाँ ये सब कर रहे हैं..

नट्टू काका :- थॅंक गॉड.....बच गये आज तो...

 
बाघा :- हाँ नट्टू काका आप आज तो बच गये...लेकिन हर बार नही बचोगे...इसलिए आज से घर पे ही करिएगा यहाँ नही...

नट्टू काका :- हाँ बिल्कुल...नेक्स्ट टाइम..आइ डू इन होम ओन्ली...

बाघा :- वैसे नट्टू काका....में जब अंदर आया तो आपने उस औरत का नाम लिया..लेकिन मुझे कुछ ढंग से समझ नही आया....बताइए ना......

नट्टू काका :- किसी को बताएगा नही ना माइ बॉय....

बाघा :- बिल्कुल नही...

नट्टू काका :- वो है ना अपनी पद्मिनी भोजनालय की मालकिन ...पद्मिनी .... उसको सोच के...

बाघा :- हाहहहः....ओह्ह्ह्ह क्या बात है नट्टू काका....वैसे वो है भी बहुत मस्त.....शादी भी नही हुई है उसकी...मस्त चूत होगी उसकी...

नट्टू काका :- देख बाघा...अब दुबारा गरम मत कर...नही तो गड़बड़ हो जाएगी...चल फटाफट दुकान चलते हैं...सेठ जी इंतेज़ार कर रहे होंगे.....

और दोनो दुकान की तरफ चल देते हैं.....

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उधर सोसाइटी में....!!

दया :- बापूजी में ज़रा हाथी भाई के घर जा रही हूँ...

बापूजी :- क्या हुआ बहू ...तबीयत खराब है क्या तेरी...

इससे पहले दया कुछ बोल पाती...फोन बज जाता है...और बापूजी फोन उठाते हैं...

बापूजी :--

हेलूओ...!!!

हाँ नंजी बोल...

अच्छा...

हाँ हाँ बिल्कुल...

बस आधे घंटे में ...मिलता हूँ...

पार्क में..

ठीक है....

हाँ भाई .. सब रख लूँगा...

चल ठीक है...!!!!

फोन की कन्वर्जन ख़त्म हो जाती है...

दया :- क्या हुआ बापूजी....

बापूजी :- वो में अपने यंग ओल्ड ग्रूप के साथ ******* के दर्शन के लिए जा रहा हूँ...तो 5 दिन के बाद आउन्गा.....

दया :- अरे वाह बापूजी...अच्छे से दर्शन कीजिएगा...

बापूजी :- में जेठिया को बता देता हुन्न..

दया :- बापूजी आपको देर हो रही होगी...आप जाइए में बता दूँगी...अच्छा तो बापूजी में जाऊ हाथी भाई के घर पे..

बापूजी :- अरे हाँ तेरी तबीयत खराब हो गई है क्या बहू..

दया :- नही बापूजी.....वो आज सारी लॅडीस लोग वहाँ मिल रहे हैं...तो इसलिए...

बापूजी :- अच्छा अच्छा...हाँ हाँ जा बहू..

दया :- बापूजी आपको कोई समान की ज़रूरत तो नही है ना...

बापूजी :- नही बहू तू जा आराम से मेरा सारा समान निकला ही हुआ है....

दया :- ठीक है बापूजी....********

बापूजी :- ********* बहू....!!!!

और दया हाथी के घर की तरफ निकल पड़ती है.....!!!!!

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बापूजी का फोन आया और वो कहीं जाने के लिए निकल पड़ा...और उधर दया डॉक्टर हाथी के घर के लिए निकल पड़ी....अब आगे...

दया सीडियो से उतर के डॉक्टर. हाथी के अपार्टमेंट की तरफ जाने लगी...सफ़ी औरतें उसके घर के बाहर ही खड़ी थी और आपस में बात चीत कर रही थी....

सभी दया को देख के...बोल पड़ी..

दया भाभी कहाँ रह गये थे आप..

दया :- सॉरी....वो क्या है ना बापूजी अपने ग्रूप के साथ जा रहे हैं तो इसलिए थोड़ी देर हो गई .. सॉरी..

अंजलि :- कोई बात नही दया भाभी..अब चलें अंदर...

इधर डॉकटर हाथी के घर के अंदर का माहौल 10 मीनल पहले कुछ ऐसा था...

आज डॉक्टर हाथी का लंड अपने पूरे उफान पे था....उसका लंड आज पूरी तरह खड़ा था...कम से कम 10 इंच और 6 इंच मोटा था...

लेकिन अपने भारे शरीर के कारण सिर्फ़ 6 इंच ही अंदर जा सकता था....लेकिन 6 * 6 का लंड बहुत होता है....

कोमल को जब पता चला कि उनका आज पूरा खड़ा है..तो वो पागल हो गई..

कोमल :- हंस आज तो कमाल हो गया...अब यही सोच के में बहुत गरम हो चुकी हूँ...अब फटाफट मेरी इस चूत की प्यास भुजा दो..

डॉक्टर हाथी :- क्यूँ नही कोमल... और अपनी पेंट को उतार देता है...

कोमल अपने सार कपड़े उतार देती है...वो पूरी नंगी हो जाती है...

उसका नंगा शरीर ऐसा लग रहा था...जैसे किसी ने उसके आगे...2 बड़े बड़े साइज़ के तरबूज़ लगा दिए हों..इतने बड़े चुचे हैं उसकी...और पीछे का इतना बड़ा था कि उसमे एक बच्चा समा जाए.......

वो फटाफट बिना लंड को चूसे सीधे जाके धडाम से उसके लंड पे बैठ गई...जिससे कोमल के मुँह से हल्की सी आह निकली.......और डॉक्टर हाथी के मुँह से भी हल्की सी आहह निकली....

दोस्तों एक ही बार में इतना मोटा लंड कोमल अपने अंदर ले चुकी थी....हैरान क्यूँ है...

कोमल की चूत का साइज़ भी तो इतना बड़ा था...तभी तो एक हाथी का लंड ले पा रही है...

वो इतने दिन की प्यासी थी...कि वो ढका धक उछल रही थी.....कुर्सी पूरी तरह हिल रही थी....जब दो दो इतने मोटे लोग एक ही कुर्सी पर होंगे तो सोचिए कि कुर्सी का क्या होगा...

कोमल अब उपर नीचे हो रही थी...उसके चुचे बुरी तरह हिल रहे थे...डॉक्टर हाथी ने फिर अपना मुँह उसके चुचों पे घुसा दिया...और अपने मुँह से मसलने लगे..

 
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