सोढी भाई...साहब....तो गर्दन उस तरफ कर के लेटे हुए थे...जहाँ से वो आँख खोलते और उन्हे सामने दया सोई हुई पड़ी मिल जाती.....
लेकिन यहाँ पे...दया उठ जाती है....
दया अपने मन में.....
ये क्या हो गया कल.......उसकी आँखों से आँसू की बूँद बहने लगती है.....
उसने रज़ाई नही ओढ़ रखी थी....और ना ही...साड़ी पह्न रखी थी.....वो सिर्फ़ पेटिकोट ब्लाउस में बैठी थी....
ब्लाउज भी ऐसा हो रखा था...कि उसके आगे के दो हुक खुले थे..जिसमे से हल्की सी ब्रा दिख रही थी....
और पेटिकोट भी घुटनो तक चढ़ा हुआ था.......
वो कुछ देर ऐसे ही सोचती है...आँसू अभी भी बह रहे थे.....
और फिर उठ के खड़ी हो जाती है..और बाथरूम की तरफ जाने लगती है....
सोढी की नींद कुछ टूटी है....थोड़ी सी हलचल की वजह से.....वो एक दम से उठता हुआ...आँखें मल्ता है...
सोढी :- रोशन मेरी जान्न...ज़रा लस्सी तो ला.....
दया :- हाँ लाती हूँ सोढी भाई...
सोढी आवाज़ सुन के चौंक जाता है....और आवाज़ की तरफ मूड के देखता है....और देख के दंग रह जाता है...
सोढी :- दया भाभी आपप....और यहाँ सुबह सुबह मेरे घर में...ऐसी हालत में....
और मुँह दूसरी तरफ कर लेता है...
दया :- सोढी भाई...ये आपका नही..मेरा घर है....
सोढी ये सुन के होश में आ जाता है..और इधर उधर देखता है....उसकी हालत भी खराब हो चुकी थी......
सोढी :- दया भाभी ये सब..में यहाँ कैसे आ गया...ये क्या हो रहा है...
दया :- आपको नही पता....कल आप ने इतनी शराब पी रखी थी...आप मेरे घर आए...और और्र...मेरे साथ वो सब कुछ कर दिया....जो सिर्फ़ एक पति पत्नी के साथ करता है....
और फुट फुट कर रोने लगती है.......
वैसे भी उसके रोने की आवाज़ तो धाँसू है....
सोढी के पैरो तले ज़मीन खिसक जाती है...ये सब सुन की...उसको कुछ समझ नही आता ये सब क्या हो रहा है......
दया बाथरूम में घुस जाती है...और सोढी वहीं पलंग पे बैठे बैठे सोचता रह जाता है......
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,