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Guest
नागर वहाँ एक काउंटर पर पहुँचा, जिसमें पब्लिक बूथ बना था । उधर शर्मन ऑटोग्राफ मांगने वालों से घिर गया था, इधर नागर ने निश्चित स्थान पर फोन किया । यह स्थान धनंजय का पोल्ट्री फॉर्म था ।
"चल फोन कर ।" कुछ देर बाद बर्मन ने कहा ।
"क्यों मुझे दुःख दे रहा है तू ? आखिर उसने तेरा बिगाड़ा क्या है ?" बुढ़िया ने लड़खड़ाते स्वर में कहा ।
"फ़ोन कर बुढ़िया उसे वही पुरानी बात बताना तेरी आवाज़ वह अच्छी तरह पहचानता है ।"
बुढ़िया बर्मन की आदत जानती थी । उसने सोचा आज भी वह शर्मन से पैसा माँगना चाहता होगा । इसलिये यहाँ बुला रहा है । बुढ़िया के दिल में टीस सी उभरी, न जाने शर्मन अब कैसा लगता होगा ? वह उसके सामने नहीं पड़ना चाहती थी, पर अब विवश थी ।
उसने शर्मन को फोन किया ।
पांच मिनट बाद लाइन मिल गई ।
"पहचाना शर्मन । मैं माया बोल रही हूं।"
"वाह, क्यों नहीं। मुझे उम्मीद थी कि तुम्हारा फोन ज़रूर आयेगा ।"
"
"क्या तुम मुझसे मिल सकोगे ? हैरी के लिये ?"
कुछ पल खामोश रही ।
" बात अगर हैरी की है तब तो मिलना ही होगा, और शायद हम अंतिम बार मिलेंगे, बोलो कहाँ मिल रही हो ?"
"तुम होटल की किसी कार में बैठकर निकलो । रास्ते में तुम्हें एक काली वैगन मिलेगी। जिसका नंबर एम. यू. एस. फाइव नाइन ज़ीरों है । जैसे ही वह तुम्हें ओवरटेक करेगी तो होटल की स्टाफ कार छोड़ देना । पैदल आगे बढ़ जाना वह कार आगे रुकी होगी ।"
इतना टेढ़ा रास्ता क्यों ?"
"तुम बहुत प्रसिद्ध आदमी हो, मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ कोई और भी आये, बिलकुल अकेले आना शर्मन ।"
"मैंने तुमसे इश्क अकेले में किया था, इसलिये अकेले ही आऊंगा ।"
माया ने फोन काट दिया ।
" हैरी के लिये अब तुम घर जा सकती हो।" बर्मन बोला ।
"क्या तुम मुझे उससे बात भी नहीं करने दोगे ?"
"नहीं, इसकी क्या ज़रूरत है ?"
"लेकिन तुमने तो कहा था।"
"बुढ़िया तेरी उम्र अब कहाँ रही ?"
"तू बहुत कमीना है हैरी ।" बुढ़िया रो उठी, "मगर याद रख उसे अधिक ज़लील न करना, अगर कुछ हुआ तो मैं तेरे जैसे बेटे को पुलिस के हवाले कर दूँगी।"
बुढ़िया को भेज दिया गया ।
लगभग एक घंटे बाद नागर शर्मन को लेकर उस स्थान पर आ गया । बेंजो सतर्क था वह राइफल लिये अन्धकार में छिपा था । शर्मन की आँखों पर पट्टी बंधी थी। नागर ने उसे भीतर पहुँचा दिया ।
"कैसा रहा ?" बेंजो ने उसके पास आकर कहा ।
"सब ठीक ।"
"किसी ने पीछा तो नहीं किया ?"
“किया था, परन्तु मैंने झांसा दे दिया ।"
"फिर तो पीछा करने वाले ने तुम्हारी गाड़ी का नंबर अवश्य नोट किया होगा ।"
"तुम तो जानते ही हो गाड़ी का नंबर जाली है।"
भीतर बर्मन उसकी पट्टियां खोल रहा था। शर्मन ने उस गंदे से कमरे को देखा, फिर बर्मन पर ही उसकी निगाह ठहर गई ।
“हैरी, तुम्हारी नाजायज़ औलाद, वेश्या पुत्र !" बर्मन ने मुस्कुराकर कहा ।
ओह, तो तुम हो, तुम्हारी माँ कहाँ है ?"
“जहन्नुम में ।"
"तेरा मुंह इतना ही कड़वा है क्या ?"
"इससे भी कड़वा, इतना कड़वा कि नीम भी पनाह मांग ले ।"
"मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी, तू पैसा लेता ही रहता है, तू मेरे सामने ब्लैक मेलर जैसा है, घृणित आदमी, तूने अपनी माँ को भी गन्दा बेलर जैसा है. घृणित अपनी माँ को भी गन्दा कर दिया है ।"
“मैंने या तूने ? गन्दा और घृणित आदमी तू है, इतना बड़ा वैज्ञानिक, हा... हा... जिसने एक सीधी-सादी लड़की को वेश्या बना दिया । जिसकी बीवी वेश्या बन गई, गंदे आदमी थू ।"
शर्मन ने उसके गाल पर तड़ाक से चांटा रसीद कर दिया । इस पर बर्मन ने उसे घूंसों पर ले लिया । शर्मन की चींखों से बेंजो उधर भाग कर आया । बर्मन अपने बाप की पीठ पर चढ़ा था ।
शर्मन इन करारे वारों के कारण बेहोश हो गया ।
"क्या किया ?" बेंजो ने उसे हटाया ।
"ज़िंदा है अभी, लादकर ले चलना होगा, दो तीन हाथों में बेहोश हो गया साला ।"
"फौरन यह जगह खाली करो, पीछे जंगल के रास्ते से ।"
वे लोग जंगल के रास्ते से शर्मन को स्ट्रेचर पर डालकर ले चले। वे जानते थे थोड़ी ही देर में सारे शहर की पुलिस वैगन तलाश कर रही होगी ।
चलते-चलते बर्मन एक स्थान पर रुका ।
"चल फोन कर ।" कुछ देर बाद बर्मन ने कहा ।
"क्यों मुझे दुःख दे रहा है तू ? आखिर उसने तेरा बिगाड़ा क्या है ?" बुढ़िया ने लड़खड़ाते स्वर में कहा ।
"फ़ोन कर बुढ़िया उसे वही पुरानी बात बताना तेरी आवाज़ वह अच्छी तरह पहचानता है ।"
बुढ़िया बर्मन की आदत जानती थी । उसने सोचा आज भी वह शर्मन से पैसा माँगना चाहता होगा । इसलिये यहाँ बुला रहा है । बुढ़िया के दिल में टीस सी उभरी, न जाने शर्मन अब कैसा लगता होगा ? वह उसके सामने नहीं पड़ना चाहती थी, पर अब विवश थी ।
उसने शर्मन को फोन किया ।
पांच मिनट बाद लाइन मिल गई ।
"पहचाना शर्मन । मैं माया बोल रही हूं।"
"वाह, क्यों नहीं। मुझे उम्मीद थी कि तुम्हारा फोन ज़रूर आयेगा ।"
"
"क्या तुम मुझसे मिल सकोगे ? हैरी के लिये ?"
कुछ पल खामोश रही ।
" बात अगर हैरी की है तब तो मिलना ही होगा, और शायद हम अंतिम बार मिलेंगे, बोलो कहाँ मिल रही हो ?"
"तुम होटल की किसी कार में बैठकर निकलो । रास्ते में तुम्हें एक काली वैगन मिलेगी। जिसका नंबर एम. यू. एस. फाइव नाइन ज़ीरों है । जैसे ही वह तुम्हें ओवरटेक करेगी तो होटल की स्टाफ कार छोड़ देना । पैदल आगे बढ़ जाना वह कार आगे रुकी होगी ।"
इतना टेढ़ा रास्ता क्यों ?"
"तुम बहुत प्रसिद्ध आदमी हो, मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ कोई और भी आये, बिलकुल अकेले आना शर्मन ।"
"मैंने तुमसे इश्क अकेले में किया था, इसलिये अकेले ही आऊंगा ।"
माया ने फोन काट दिया ।
" हैरी के लिये अब तुम घर जा सकती हो।" बर्मन बोला ।
"क्या तुम मुझे उससे बात भी नहीं करने दोगे ?"
"नहीं, इसकी क्या ज़रूरत है ?"
"लेकिन तुमने तो कहा था।"
"बुढ़िया तेरी उम्र अब कहाँ रही ?"
"तू बहुत कमीना है हैरी ।" बुढ़िया रो उठी, "मगर याद रख उसे अधिक ज़लील न करना, अगर कुछ हुआ तो मैं तेरे जैसे बेटे को पुलिस के हवाले कर दूँगी।"
बुढ़िया को भेज दिया गया ।
लगभग एक घंटे बाद नागर शर्मन को लेकर उस स्थान पर आ गया । बेंजो सतर्क था वह राइफल लिये अन्धकार में छिपा था । शर्मन की आँखों पर पट्टी बंधी थी। नागर ने उसे भीतर पहुँचा दिया ।
"कैसा रहा ?" बेंजो ने उसके पास आकर कहा ।
"सब ठीक ।"
"किसी ने पीछा तो नहीं किया ?"
“किया था, परन्तु मैंने झांसा दे दिया ।"
"फिर तो पीछा करने वाले ने तुम्हारी गाड़ी का नंबर अवश्य नोट किया होगा ।"
"तुम तो जानते ही हो गाड़ी का नंबर जाली है।"
भीतर बर्मन उसकी पट्टियां खोल रहा था। शर्मन ने उस गंदे से कमरे को देखा, फिर बर्मन पर ही उसकी निगाह ठहर गई ।
“हैरी, तुम्हारी नाजायज़ औलाद, वेश्या पुत्र !" बर्मन ने मुस्कुराकर कहा ।
ओह, तो तुम हो, तुम्हारी माँ कहाँ है ?"
“जहन्नुम में ।"
"तेरा मुंह इतना ही कड़वा है क्या ?"
"इससे भी कड़वा, इतना कड़वा कि नीम भी पनाह मांग ले ।"
"मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी, तू पैसा लेता ही रहता है, तू मेरे सामने ब्लैक मेलर जैसा है, घृणित आदमी, तूने अपनी माँ को भी गन्दा बेलर जैसा है. घृणित अपनी माँ को भी गन्दा कर दिया है ।"
“मैंने या तूने ? गन्दा और घृणित आदमी तू है, इतना बड़ा वैज्ञानिक, हा... हा... जिसने एक सीधी-सादी लड़की को वेश्या बना दिया । जिसकी बीवी वेश्या बन गई, गंदे आदमी थू ।"
शर्मन ने उसके गाल पर तड़ाक से चांटा रसीद कर दिया । इस पर बर्मन ने उसे घूंसों पर ले लिया । शर्मन की चींखों से बेंजो उधर भाग कर आया । बर्मन अपने बाप की पीठ पर चढ़ा था ।
शर्मन इन करारे वारों के कारण बेहोश हो गया ।
"क्या किया ?" बेंजो ने उसे हटाया ।
"ज़िंदा है अभी, लादकर ले चलना होगा, दो तीन हाथों में बेहोश हो गया साला ।"
"फौरन यह जगह खाली करो, पीछे जंगल के रास्ते से ।"
वे लोग जंगल के रास्ते से शर्मन को स्ट्रेचर पर डालकर ले चले। वे जानते थे थोड़ी ही देर में सारे शहर की पुलिस वैगन तलाश कर रही होगी ।
चलते-चलते बर्मन एक स्थान पर रुका ।