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“क …करण ….पल ..प्लीज ….बचाओ …मु …मुझे ….” निहारिका का दम घुटता जा रहा था, उसके नाक से खून की धार निकलने लगी थी.
इधर सर फट जाने से और बहुत सा खून बह जाने से करण को चक्कर आने लगा. वो अपनी पूरी कोशिश कर रहा था की अपने होश पर काबू रख सके, क्यूंकि उसे मालूम था की निहारिका अब ज्यादा देर जिंदा नहीं रह सकती, अगर वो बेहोश हो गया तो निहारिका की मौत पक्की थी.
निहारिका की मौत की कल्पना करते हुए उसका वो प्यार जग गया जो उस निहारिका के प्रति महसूस होता था. उसने अपनी पूरी इच्छाशक्ति बटोरते हुए किसी तरह ज़मीन पे घिसट-घिसट के निहारिका की तरफ बढ़ने लगा. निहारिका ने दर्द मे करण के लिए हाथ आगे बढाया, लेकिन हवाओ का जोर इतना बढ़ गया मानो वो करण को ज़मीन से उखाड़ के दूर फ़ेंक देना चाहती हो.
विपरीत दिशा मे चलती हवाए करण को आगे नहीं बढ़ने दे रही थी. लेकिन उसको पता था की निहारिका की साँसे ज्यादा देर तक नहीं चल सकती. बजरंग बलि हनुमान का नाम लेके उसने आपनी सारी शरीरिक शक्ति और इच्छाशक्ति बटोर कर आगे बढ़ने लगा.
“य़ाआआ ……..” करण चिल्लाता हुआ तेज़ आंधी मे भी घिसटता हुआ आगे बढ़ रहा था. अपने प्यार को बचाने की उसमे प्रबल इच्छाशक्ति और ताक़त का एक नया संचार हो गया था.
अब कोई आंधी भी नहीं रोक सकती थी उसे ….प्यार की ताक़त, शैतानी ताक़त से हमेशा बढ़कर होती है. इसी प्यार की ताक़त और भगवान के आशीर्वाद से वो निहारिका तक पहुँच गया.
निहारिका की गर्दन पे एक अदृश्य ताक़त दबाव डाल रही थी . बजरंग बलि हनुमान का नाम लेते हुए करण ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी, और निहारिका की गर्दन पे से उस परलौकिक शक्ति का हाथ हटाने लगा.
उसमे सारे जहाँ की प्यार की शक्ति समां गयी थी, अपने दृढनिश्चय से उसने वो हाथ हटा दिया और निहारिका को उस प्रेत के चंगुल से छुड़ा लिया.
निहारिका की गर्दन छुटते ही कमरे का माहोल वापस से नोर्मल हो गया.
हवाएं चलनी बंद हो गयी. लाइट भी नोर्मल हो गयी. खिडकियों का खटखटाना भी बंद हो गया. जैसे किसी भयानक तूफ़ान के बाद शान्ति आती है वैसा ही कुछ माहोल था उस कमरे का.
करण की बाहों मे निहारिका बेजान पड़ी थी.
“निहा ….तुम्हे कुछ नहीं हो सकता ….प्लीज आँखे खोलो.” करण निहारिका को अपनी बाहों मे पकडे रोने लगा.
“प्लीज तुम मुझे छोड़ के नहीं जा सकती निहारिका ……” करण की आँखों से आंसू की झड़ी लग गयी.
उसे बिलकुल ख्याल नहीं रहा की उसका सर फट गया है जिस से खून बहकर उसके पूरे चेहरे को लाल रंग से रंग दिया है.
उसने निहारिका का बदन कमर से उठा के नीचे हॉल मे आया.
“प्लीज निहारिका लौट आओ ……….हे भगवान कही मुझे देर तो नहीं हो गयी निहारिका को बचाने मे …” उसकी आँखे आंसू से भरी हुई थी.
“निहारिका प्लीज उठो ….देखो मैं तुम्हे छोड़ के लन्दन नहीं जाऊंगा, पर तुम भी मुझे छोड़ के कहीं मत जाना …” करण बिलख-बिलख के रोने लगा.
उसने निहारिका का सीना जोर से दबाया. एक बार मे कुछ नहीं हुआ तो उसने कई बार दबाया इस उम्मीद मे की निहारिका की साँसे वापस चलने लगेंगी. आज तक उसने भगवान से निहारिका की जान से ज्यादा कुछ नहीं माँगा था.
वो कहते है ना की भगवान के घर देर है …अंधेर नहीं. करण की कोशिश रंग लायी और सीना दबाने से निहारिका की साँसे वापस चलनी लगी.
खांसते हुए उसे होश आया. पहली चीज़ जो उसने देखि की उसे प्यार करने वाला एक लड़का उसे अपने बाहों में थामे है, जो अभी उसे मौत के मुह से बचा के लाया है.
“क ….करण ….” निहारिका बस इतना ही कह सकी की करण ने उसके कांपते होठों पे अपने होंठ रख दिए.
बड़ा अजीब मिलन था ये, पिछले कुछ पलों में हम जीवन के सारे रंग देख सकते है. कैसे निहारिका ने करण की इतनी मदद की. वो बहुत रोई थी यह सुनकर की करण उसको छोड़ कर हमेशा के लिए चला जायेगा. फिर निहारिका ने पहली बार दहशत महसूस की, खौफ्फ़ और डर क्या होता है उसे आज पता चल गया. दोनों ने इन कुछ दिनों में मौत को बड़े करीब से देखा था. पर उसे आज यह भी पता चल गया था की प्यार की शक्ति का मुकाबला दुनिया की कोई भी शक्ति नहीं कर सकती थी.
इधर सर फट जाने से और बहुत सा खून बह जाने से करण को चक्कर आने लगा. वो अपनी पूरी कोशिश कर रहा था की अपने होश पर काबू रख सके, क्यूंकि उसे मालूम था की निहारिका अब ज्यादा देर जिंदा नहीं रह सकती, अगर वो बेहोश हो गया तो निहारिका की मौत पक्की थी.
निहारिका की मौत की कल्पना करते हुए उसका वो प्यार जग गया जो उस निहारिका के प्रति महसूस होता था. उसने अपनी पूरी इच्छाशक्ति बटोरते हुए किसी तरह ज़मीन पे घिसट-घिसट के निहारिका की तरफ बढ़ने लगा. निहारिका ने दर्द मे करण के लिए हाथ आगे बढाया, लेकिन हवाओ का जोर इतना बढ़ गया मानो वो करण को ज़मीन से उखाड़ के दूर फ़ेंक देना चाहती हो.
विपरीत दिशा मे चलती हवाए करण को आगे नहीं बढ़ने दे रही थी. लेकिन उसको पता था की निहारिका की साँसे ज्यादा देर तक नहीं चल सकती. बजरंग बलि हनुमान का नाम लेके उसने आपनी सारी शरीरिक शक्ति और इच्छाशक्ति बटोर कर आगे बढ़ने लगा.
“य़ाआआ ……..” करण चिल्लाता हुआ तेज़ आंधी मे भी घिसटता हुआ आगे बढ़ रहा था. अपने प्यार को बचाने की उसमे प्रबल इच्छाशक्ति और ताक़त का एक नया संचार हो गया था.
अब कोई आंधी भी नहीं रोक सकती थी उसे ….प्यार की ताक़त, शैतानी ताक़त से हमेशा बढ़कर होती है. इसी प्यार की ताक़त और भगवान के आशीर्वाद से वो निहारिका तक पहुँच गया.
निहारिका की गर्दन पे एक अदृश्य ताक़त दबाव डाल रही थी . बजरंग बलि हनुमान का नाम लेते हुए करण ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी, और निहारिका की गर्दन पे से उस परलौकिक शक्ति का हाथ हटाने लगा.
उसमे सारे जहाँ की प्यार की शक्ति समां गयी थी, अपने दृढनिश्चय से उसने वो हाथ हटा दिया और निहारिका को उस प्रेत के चंगुल से छुड़ा लिया.
निहारिका की गर्दन छुटते ही कमरे का माहोल वापस से नोर्मल हो गया.
हवाएं चलनी बंद हो गयी. लाइट भी नोर्मल हो गयी. खिडकियों का खटखटाना भी बंद हो गया. जैसे किसी भयानक तूफ़ान के बाद शान्ति आती है वैसा ही कुछ माहोल था उस कमरे का.
करण की बाहों मे निहारिका बेजान पड़ी थी.
“निहा ….तुम्हे कुछ नहीं हो सकता ….प्लीज आँखे खोलो.” करण निहारिका को अपनी बाहों मे पकडे रोने लगा.
“प्लीज तुम मुझे छोड़ के नहीं जा सकती निहारिका ……” करण की आँखों से आंसू की झड़ी लग गयी.
उसे बिलकुल ख्याल नहीं रहा की उसका सर फट गया है जिस से खून बहकर उसके पूरे चेहरे को लाल रंग से रंग दिया है.
उसने निहारिका का बदन कमर से उठा के नीचे हॉल मे आया.
“प्लीज निहारिका लौट आओ ……….हे भगवान कही मुझे देर तो नहीं हो गयी निहारिका को बचाने मे …” उसकी आँखे आंसू से भरी हुई थी.
“निहारिका प्लीज उठो ….देखो मैं तुम्हे छोड़ के लन्दन नहीं जाऊंगा, पर तुम भी मुझे छोड़ के कहीं मत जाना …” करण बिलख-बिलख के रोने लगा.
उसने निहारिका का सीना जोर से दबाया. एक बार मे कुछ नहीं हुआ तो उसने कई बार दबाया इस उम्मीद मे की निहारिका की साँसे वापस चलने लगेंगी. आज तक उसने भगवान से निहारिका की जान से ज्यादा कुछ नहीं माँगा था.
वो कहते है ना की भगवान के घर देर है …अंधेर नहीं. करण की कोशिश रंग लायी और सीना दबाने से निहारिका की साँसे वापस चलनी लगी.
खांसते हुए उसे होश आया. पहली चीज़ जो उसने देखि की उसे प्यार करने वाला एक लड़का उसे अपने बाहों में थामे है, जो अभी उसे मौत के मुह से बचा के लाया है.
“क ….करण ….” निहारिका बस इतना ही कह सकी की करण ने उसके कांपते होठों पे अपने होंठ रख दिए.
बड़ा अजीब मिलन था ये, पिछले कुछ पलों में हम जीवन के सारे रंग देख सकते है. कैसे निहारिका ने करण की इतनी मदद की. वो बहुत रोई थी यह सुनकर की करण उसको छोड़ कर हमेशा के लिए चला जायेगा. फिर निहारिका ने पहली बार दहशत महसूस की, खौफ्फ़ और डर क्या होता है उसे आज पता चल गया. दोनों ने इन कुछ दिनों में मौत को बड़े करीब से देखा था. पर उसे आज यह भी पता चल गया था की प्यार की शक्ति का मुकाबला दुनिया की कोई भी शक्ति नहीं कर सकती थी.