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Guest
कुछ देर बाद जब डॉली वापस लौटी
, तब भी सब मीटिंग रूम में वैसे ही बैठे थे
, जैसे वो उन्हें बैठे छोड़ गई थी। सबके चेहरे पर बारह बजे हुए थे।
अनुराग ने गर्दन घुमाकर डॉली पर नजर डाली। फिर उसे अकेली देखकर बोला-
''मोहिनी कहां है
?"
''मोहिनी
"-डॉली का स्वर अज्ञात आशंका से कांप रहा था-
''ऊपर नहीं है।
"
'
'क्या
?"-अनुराग का मुंह खुला-का-खुला रह गया। वो हैरत से डॉली को देखता रह गया।
''मोहिनी ऊपर नहीं है।
"-डॉली ने अपनी बात दोहराई-
''मैंने रिंकी से बात की। उसने कहा कि उसने भी काफी देर से मोहिनी को नहीं देखा। फिर मैंने ऊपर हर जगह देख लिया। सिवाय उस ताले वाले कमरे के। लेकिन मोहिनी कहीं भी नहीं दिखी। जबकि सुबह जब वो रिंकी को नाश्ता कराने की बात कह कर उसके लिए नाश्ता लेकर ऊपर गई थी
, उसके बाद से मैंने उसे नीचे आते नहीं देखा है।
"
''हममें से किसी ने नहीं देखा है।
"-प्रीति भी चिंतित स्वर में बोली-
''उसे ऊपर ही होना चाहिए।
"
''लेकिन वो ऊपर नहीं है।
"
अनुराग उठा और जमीन रौंदते हुए सीढिय़ों की ओर बढ़ा। डॉली उसके रास्ते से हट गई। वो ऊपर पहुंचा। उसने भी वहां का कोना-कोना छान मारा लेकिन मोहिनी का कहीं पता नहीं चला।
उस दौरान बाकी लोगों ने भी घर के निचले हिस्से में यहां तक कि आसपास और स्टोर रूम में भी झांक कर देख लिया लेकिन मोहिनी कहीं नजर नहीं आई।
कल रिंकी और आज मोहिनी के इस तरह गायब हो जाने से सभी के होश उड़े हुए थे।
करीब डेढ़-दो घंटे तक आसपास मोहिनी को तलाश करने के बाद थक-हारकर वे सब फिर मीटिंग रूम में इकट्ठे हुए।
''ये सब क्या हो रहा है
?"-अनुराग बोला लेकिन अब उसके स्वर में गुस्सा नहीं हताशा और भय झलक रहा था।
''कल रिंकी
"-प्रीति बोली-
''और आज मोहिनी इस तरह गायब हो गई। रिंकी तो फिर भी मिल गई लेकिन मोहिनी तो कहीं मिल ही नहीं रही।
"
अनुराग कहना चाहता था कि काश
, रिंकी मिली ही न होती लेकिन उसने अपने होंठ भींच लिए।
''अब हम क्या करें
?"-जय असहाय भाव से सिर हिलाते हुए बोला-
''कहां ढूंढें मोहिनी को
?"
''स्टोर रूम।
"-डॉली बोली।
''स्टोर रूम में तो देख चुके हैं। वो वहां नहीं है।
"
''हमें दोबारा स्टोर रूम की तलाशी लेनी चाहिए। शायद हमें कोई काम की चीज मिल जाए।
"
''पागल हुई हो
?"-डोंगरा बोला-
''उस कॉफिन मैन ने हमें उस स्टोर रूम में जाने से मना किया था।
"
''लेकिन रिंकी हमें वहीं मिली।
"-प्रीति बोली।
''वो अलग बात है। रिंकी नहीं मिल रही थी तो हम सब काफी डर गए थे। वही एक जगह रह गई थी
, जहां हमने उसे नहीं ढूंढा था। और शुक्र है वो हमें कम से कम वहां मिली तो। लेकिन अब बिना किसी वजह के उस स्टोर रूम में जाने का कोई मतलब नहीं है।
"
''हम बिना वजह नहीं जा रहे।
"-डॉली सख्त स्वर में बोली-
''अब हम दो बार स्टोर रूम में जा ही चुके हैं तो तीसरी बार जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या पता हमें वहां कोई काम की चीज मिल ही जाए। कोई ऐसा सुराग
, जो हमें मोहिनी के इस तरह गायब होने के बारे में कुछ बता सके। आखिर रिंकी भी तो हमें इतने रहस्यमयी ढंग से वहीं मिली थी।
''डॉली सही कह रही है।
"-अनुराग ने डॉली की बात पर सहमति व्यक्त की।
डोंगरा ने फिर कुछ कहने के लिए मुंह खोला लेकिन फिर उसने हथियार डालने वाले अंदाज में होंठ भींच लिए।
''किसी को यहां रिंकी का ध्यान रखने के लिए रूकना होगा।
"-जय उठते हुए बोला
, फिर उसने प्रीति से कहा-
''तुम रिंकी के पास रूक जाओ।
"
प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
''नहीं।
"-अनुराग बोला-
''तुम अकेली यहां मत रूको। तुम्हारे साथ कोई रहना चाहिए। तुम!
"-वो जय से बोला-
''तुम यहीं प्रीति के साथ रूको। हम सब स्टोर रूम में देख कर आते हैं।
"
''और रिंकी के करीब मत जाना।
"-डॉली बोली-
''अगर जाना पड़े तो किसी चीज का मास्क बनाकर चेहरे को ढंक लेना और उससे थोड़ा दूर ही रहना। उसे भी बता देना कि हमें शक है कि वो पॉजीटिव हो सकती है।
"
''ठीक है।
"-जय बोला।
फिर बाकी सभी लोग वहां से निकलकर स्टोर रूम की ओर बढ़ गए।
स्टोर रूम बहुत बढ़ा था और उसमें बहुत सारा सामान भरा हुआ था। कुछ डिब्बे वगैरह तो इतने भारी थे कि दो लोग मिलकर भी नहीं उठा पा रहे थे। और धूल इतनी ज्यादा थी कि एक चीज हिलाओ तो धूल का गुबार उठ खड़ होता था
, जिससे बचने के लिए सबको बाहर वहां से बाहर निकलना पड़ता था।
''तौबा!
"-डोंगरा हांफता सा बोला-
''यहां तो पता नहीं कौन-कौन सी बीमारी हो जाए आदमी को। और रिंकी उतनी देर यहां पड़ी रही थी।
"
''उससे ज्यादा बड़ा सवाल ये है कि वो बेहोशी की हालत में बंद स्टोर रूम के अंदर कैसे पहुंच गई
? वो भी तब
, तब स्टोर रूम के दरवाजे पर ताला लगा था।
"-डॉली बोली।
कोई कुछ न बोला।
बोलता भी क्या
? उनमें से किसी के पास उस सवाल का जवाब नहीं था।
वे लोग फिर हिम्मत करके स्टोर रूम में घुसे। इस बार सामान के पीछे एक बड़ी सी पेटी में अनुराग को एक बेहद पुरानी लेकिन बड़े आकार की किताब मिल गई।
''देखो
, मुझे क्या मिला।
"-अनुराग बोला।
सबकी नजरें उसकी ओर घूम गईं। उसके हाथ में वो अजीब सी किताब देख कर सभी को आश्चर्य हुआ।
''ये किताब कैसी है
?"-डोंगरा बोला।
''ये तो इसे पढ़कर ही पता चलेगा।
"-अनुराग गहरी सांस लेकर बोला।
''चलो फिर
"-काफी देर से वहां जुते होने के बाद भी अब तक कुछ और कारआमद नहीं ढूंढ पाने के कारण हार मानते हुए राज ने कहा-
''इसे ही देखते हैं। क्या बला है ये
?"
वो सचमुच बला ही थी।
वे सब उस किताब को लेकर
'मीटिंग रूम
' में सिर से सिर जोड़े बैठे थे। किताब का धेला अक्षर उनके पल्ले नहीं पड़ा था। वो किताब पता नहीं किस भाषा में थी लेकिन इतना तो तय था कि वो बहुत बहुत पुरानी थी और भूत-प्रेतों से सम्बन्धित थी क्योंकि उसमें कई जगह पर डरावने चित्र बने हुए थे
, जिनमें से ज्यादातर चित्र लोगों को भयानक ढंग से मारने
, भूत-प्रेत
, शैतानों के और अजीबोगरीब
, रहस्यमयी व डरावनी तंत्र क्रियाओं के चित्र थे।
लेकिन उस किताब में ऐसा भी कुछ था
, जो वे समझ सकते थे।
उसमें अलग से कई तस्वीरें
, अखबारों की कटिंग और हस्तलिखित नोट्स थे
, जिनका वे लोग अध्ययन कर रहे थे।
जैसे-जैसे वे लोग उन नोट्स
, अखबारों की कटिंग वगैरह को पढ़ते जा रहे थे
, उनकी आंखें फैलती जा रहंी थीं।
''तुमने कहा था
"-प्रीति एक अखबार की कटिंग को गौर से देखते हुए डॉली और राज से बोली-
''कि यहां आते समय रास्ते में तुम्हें एक पेट्रोल पम्प मिला था
, जिसके अटेंडेंट ने तुम लोगों से काफी अजीब व्यवहार किया था
?"
''हां
, हमने उससे एक कैन में पेट्रोल भी लिया था, जो अब भी कार में रखा है"-डॉली बोली-
''क्यों
? क्या हुआ
?"
प्रीति कुछ देर तक हाथ में थमी उस कटिंग को देखती रही
, फिर उसने वो कटिंग डॉली की ओर बढ़ा दी।
उसके चेहरे की ओर देखते हुए डॉली ने कटिंग उसके हाथ से ली
, फिर उसे पढऩा शुरू करने ही वाली थी कि उस पर छपी तस्वीरों को देख कर उसकी आंखें फैल गईं।
खबर की हैडिंग थी-
दुर्घटना में पेट्रोल पम्प जलकर स्वाहा
पेट्रोल पम्प अटेंडेंट की भयावह मृत्यु
खबर के साथ तीन तस्वीरें छपीं थीं। एक जले हुए पेट्रोल पम्प की थी
, जो कि वही पेट्रोल पम्प लग रहा था
, जहां से उन लोगों ने आते टाइम रास्ते में पेट्रोल भरवाया था। दूसरी तस्वीर एक बुरी तरह जली हुई लाश की थी और तीसरी...।
, तब भी सब मीटिंग रूम में वैसे ही बैठे थे
, जैसे वो उन्हें बैठे छोड़ गई थी। सबके चेहरे पर बारह बजे हुए थे।
अनुराग ने गर्दन घुमाकर डॉली पर नजर डाली। फिर उसे अकेली देखकर बोला-
''मोहिनी कहां है
?"
''मोहिनी
"-डॉली का स्वर अज्ञात आशंका से कांप रहा था-
''ऊपर नहीं है।
"
'
'क्या
?"-अनुराग का मुंह खुला-का-खुला रह गया। वो हैरत से डॉली को देखता रह गया।
''मोहिनी ऊपर नहीं है।
"-डॉली ने अपनी बात दोहराई-
''मैंने रिंकी से बात की। उसने कहा कि उसने भी काफी देर से मोहिनी को नहीं देखा। फिर मैंने ऊपर हर जगह देख लिया। सिवाय उस ताले वाले कमरे के। लेकिन मोहिनी कहीं भी नहीं दिखी। जबकि सुबह जब वो रिंकी को नाश्ता कराने की बात कह कर उसके लिए नाश्ता लेकर ऊपर गई थी
, उसके बाद से मैंने उसे नीचे आते नहीं देखा है।
"
''हममें से किसी ने नहीं देखा है।
"-प्रीति भी चिंतित स्वर में बोली-
''उसे ऊपर ही होना चाहिए।
"
''लेकिन वो ऊपर नहीं है।
"
अनुराग उठा और जमीन रौंदते हुए सीढिय़ों की ओर बढ़ा। डॉली उसके रास्ते से हट गई। वो ऊपर पहुंचा। उसने भी वहां का कोना-कोना छान मारा लेकिन मोहिनी का कहीं पता नहीं चला।
उस दौरान बाकी लोगों ने भी घर के निचले हिस्से में यहां तक कि आसपास और स्टोर रूम में भी झांक कर देख लिया लेकिन मोहिनी कहीं नजर नहीं आई।
कल रिंकी और आज मोहिनी के इस तरह गायब हो जाने से सभी के होश उड़े हुए थे।
करीब डेढ़-दो घंटे तक आसपास मोहिनी को तलाश करने के बाद थक-हारकर वे सब फिर मीटिंग रूम में इकट्ठे हुए।
''ये सब क्या हो रहा है
?"-अनुराग बोला लेकिन अब उसके स्वर में गुस्सा नहीं हताशा और भय झलक रहा था।
''कल रिंकी
"-प्रीति बोली-
''और आज मोहिनी इस तरह गायब हो गई। रिंकी तो फिर भी मिल गई लेकिन मोहिनी तो कहीं मिल ही नहीं रही।
"
अनुराग कहना चाहता था कि काश
, रिंकी मिली ही न होती लेकिन उसने अपने होंठ भींच लिए।
''अब हम क्या करें
?"-जय असहाय भाव से सिर हिलाते हुए बोला-
''कहां ढूंढें मोहिनी को
?"
''स्टोर रूम।
"-डॉली बोली।
''स्टोर रूम में तो देख चुके हैं। वो वहां नहीं है।
"
''हमें दोबारा स्टोर रूम की तलाशी लेनी चाहिए। शायद हमें कोई काम की चीज मिल जाए।
"
''पागल हुई हो
?"-डोंगरा बोला-
''उस कॉफिन मैन ने हमें उस स्टोर रूम में जाने से मना किया था।
"
''लेकिन रिंकी हमें वहीं मिली।
"-प्रीति बोली।
''वो अलग बात है। रिंकी नहीं मिल रही थी तो हम सब काफी डर गए थे। वही एक जगह रह गई थी
, जहां हमने उसे नहीं ढूंढा था। और शुक्र है वो हमें कम से कम वहां मिली तो। लेकिन अब बिना किसी वजह के उस स्टोर रूम में जाने का कोई मतलब नहीं है।
"
''हम बिना वजह नहीं जा रहे।
"-डॉली सख्त स्वर में बोली-
''अब हम दो बार स्टोर रूम में जा ही चुके हैं तो तीसरी बार जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या पता हमें वहां कोई काम की चीज मिल ही जाए। कोई ऐसा सुराग
, जो हमें मोहिनी के इस तरह गायब होने के बारे में कुछ बता सके। आखिर रिंकी भी तो हमें इतने रहस्यमयी ढंग से वहीं मिली थी।
''डॉली सही कह रही है।
"-अनुराग ने डॉली की बात पर सहमति व्यक्त की।
डोंगरा ने फिर कुछ कहने के लिए मुंह खोला लेकिन फिर उसने हथियार डालने वाले अंदाज में होंठ भींच लिए।
''किसी को यहां रिंकी का ध्यान रखने के लिए रूकना होगा।
"-जय उठते हुए बोला
, फिर उसने प्रीति से कहा-
''तुम रिंकी के पास रूक जाओ।
"
प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
''नहीं।
"-अनुराग बोला-
''तुम अकेली यहां मत रूको। तुम्हारे साथ कोई रहना चाहिए। तुम!
"-वो जय से बोला-
''तुम यहीं प्रीति के साथ रूको। हम सब स्टोर रूम में देख कर आते हैं।
"
''और रिंकी के करीब मत जाना।
"-डॉली बोली-
''अगर जाना पड़े तो किसी चीज का मास्क बनाकर चेहरे को ढंक लेना और उससे थोड़ा दूर ही रहना। उसे भी बता देना कि हमें शक है कि वो पॉजीटिव हो सकती है।
"
''ठीक है।
"-जय बोला।
फिर बाकी सभी लोग वहां से निकलकर स्टोर रूम की ओर बढ़ गए।
स्टोर रूम बहुत बढ़ा था और उसमें बहुत सारा सामान भरा हुआ था। कुछ डिब्बे वगैरह तो इतने भारी थे कि दो लोग मिलकर भी नहीं उठा पा रहे थे। और धूल इतनी ज्यादा थी कि एक चीज हिलाओ तो धूल का गुबार उठ खड़ होता था
, जिससे बचने के लिए सबको बाहर वहां से बाहर निकलना पड़ता था।
''तौबा!
"-डोंगरा हांफता सा बोला-
''यहां तो पता नहीं कौन-कौन सी बीमारी हो जाए आदमी को। और रिंकी उतनी देर यहां पड़ी रही थी।
"
''उससे ज्यादा बड़ा सवाल ये है कि वो बेहोशी की हालत में बंद स्टोर रूम के अंदर कैसे पहुंच गई
? वो भी तब
, तब स्टोर रूम के दरवाजे पर ताला लगा था।
"-डॉली बोली।
कोई कुछ न बोला।
बोलता भी क्या
? उनमें से किसी के पास उस सवाल का जवाब नहीं था।
वे लोग फिर हिम्मत करके स्टोर रूम में घुसे। इस बार सामान के पीछे एक बड़ी सी पेटी में अनुराग को एक बेहद पुरानी लेकिन बड़े आकार की किताब मिल गई।
''देखो
, मुझे क्या मिला।
"-अनुराग बोला।
सबकी नजरें उसकी ओर घूम गईं। उसके हाथ में वो अजीब सी किताब देख कर सभी को आश्चर्य हुआ।
''ये किताब कैसी है
?"-डोंगरा बोला।
''ये तो इसे पढ़कर ही पता चलेगा।
"-अनुराग गहरी सांस लेकर बोला।
''चलो फिर
"-काफी देर से वहां जुते होने के बाद भी अब तक कुछ और कारआमद नहीं ढूंढ पाने के कारण हार मानते हुए राज ने कहा-
''इसे ही देखते हैं। क्या बला है ये
?"
वो सचमुच बला ही थी।
वे सब उस किताब को लेकर
'मीटिंग रूम
' में सिर से सिर जोड़े बैठे थे। किताब का धेला अक्षर उनके पल्ले नहीं पड़ा था। वो किताब पता नहीं किस भाषा में थी लेकिन इतना तो तय था कि वो बहुत बहुत पुरानी थी और भूत-प्रेतों से सम्बन्धित थी क्योंकि उसमें कई जगह पर डरावने चित्र बने हुए थे
, जिनमें से ज्यादातर चित्र लोगों को भयानक ढंग से मारने
, भूत-प्रेत
, शैतानों के और अजीबोगरीब
, रहस्यमयी व डरावनी तंत्र क्रियाओं के चित्र थे।
लेकिन उस किताब में ऐसा भी कुछ था
, जो वे समझ सकते थे।
उसमें अलग से कई तस्वीरें
, अखबारों की कटिंग और हस्तलिखित नोट्स थे
, जिनका वे लोग अध्ययन कर रहे थे।
जैसे-जैसे वे लोग उन नोट्स
, अखबारों की कटिंग वगैरह को पढ़ते जा रहे थे
, उनकी आंखें फैलती जा रहंी थीं।
''तुमने कहा था
"-प्रीति एक अखबार की कटिंग को गौर से देखते हुए डॉली और राज से बोली-
''कि यहां आते समय रास्ते में तुम्हें एक पेट्रोल पम्प मिला था
, जिसके अटेंडेंट ने तुम लोगों से काफी अजीब व्यवहार किया था
?"
''हां
, हमने उससे एक कैन में पेट्रोल भी लिया था, जो अब भी कार में रखा है"-डॉली बोली-
''क्यों
? क्या हुआ
?"
प्रीति कुछ देर तक हाथ में थमी उस कटिंग को देखती रही
, फिर उसने वो कटिंग डॉली की ओर बढ़ा दी।
उसके चेहरे की ओर देखते हुए डॉली ने कटिंग उसके हाथ से ली
, फिर उसे पढऩा शुरू करने ही वाली थी कि उस पर छपी तस्वीरों को देख कर उसकी आंखें फैल गईं।
खबर की हैडिंग थी-
दुर्घटना में पेट्रोल पम्प जलकर स्वाहा
पेट्रोल पम्प अटेंडेंट की भयावह मृत्यु
खबर के साथ तीन तस्वीरें छपीं थीं। एक जले हुए पेट्रोल पम्प की थी
, जो कि वही पेट्रोल पम्प लग रहा था
, जहां से उन लोगों ने आते टाइम रास्ते में पेट्रोल भरवाया था। दूसरी तस्वीर एक बुरी तरह जली हुई लाश की थी और तीसरी...।