दीदी भी किस करते हुए राज का पूरा साथ दे रही थी ........
और थोड़ी देर बाद ज्योति तैयार होकर आ जाती है ..
ज्योति... चलो भैया में एक दम रेडी हूँ ...
ज्योति बाइक राज के साथ बिल्कुल गर्लफ्रेंड की तरह चिपक कर बैठ जाती है ...
शाम का वक़्त था और अंधारा भी हो चुका था.. .
ज्योति राज को पकड़ते हुए अपना हाथ बिल्कुल राज के लंड से टच किए हुए थी ...
और चिपकी ऐसे बैठी थी जिससे ज्योति की चुचि
बिल्कुल राज को अपनी कमर में महसूस हो रही थी ....
राज अपना धीयाँ बाइक चलाने में लगे हुए था...मगर ज्योति के हाथ बार बार लंड को टच कर रहे थे जिससे राज का लंड काबू से बाहर होकर खड़ा होने लगता है ...
थोड़ी देर बाद राज एक माल में पहुचता है ......
राज ज्योति से पूछता है ...
राज ...कौन सी मूवी देखनी है ज्योति ...
ज्योति .. दे दे प्यार दे
ज्योति मूवी का नाम ऐसे लेती है जेसे
राज से कह रही हो . दे दे प्यार दे .
राज ज्योति का इशारा समझ तो जाता है
मगर फिर भी दो टिकेट दे दे प्यार दे के ले लेता है ...
और राज ज्योति को लेकर हॉल के अंदर पहुचता है..मूवी स्टार्ट होने के कारण हॉल में अंधेरा हो चुका था ..
और ज्योति ने राज का हाथ थाम रखा था ..
राज भी ज्योति को संभालते हुए बिल्कुल ऊपर वाली शीट तक लेकर पहुचता है
मूवी काफ़ी पुरानी हो चुकी थी इसलिए सिनिमा हॉल में 5-7 लोग ही नज़र आ रहे थे
और राज और ज्योति जहा बैठे थे वहाँ इन दोनो के अलावा कोई नही बैठा था ....
ज्योति और राज शीट पर बैठ जाते है ...
राज मूवी देखने लगता है मगर ज्योति का मूवी की तरफ बिल्कुल ध्यान नही था ...
ज्योति का मान तो आज सुबह से राज के लंड से खेलने को कर रहा था ...और ज्योति बिना किसी झिझक के थोड़ी ही देर बाद अपना एक हाथ राज की गोद में बिल्कुल लंड के उपर रख देती है ....
राज का लंड बाइक पर ज्योति की शरारत से पहले ही उत्तेजित अवस्था में था ...
और अब ज्योति के हाथ रखते ही राज का लंड किसी साँप की भाँति फूंकर मरने लगता है .....
ज्योति के हाथ जींस के ऊपर से ही लंड की पूरी शेप महसूस कर रहे थे. ......
अब राज का लंड इतना अकड़ चुका था की राज की जींस में उसका दूं घुटने लगा था ...
लंड की अकड़ाहट लगातार बढ़ती ही जा रही थी जिससे राज को जींस में बहुत परेशानी महसूस होने लगी थी ....
राज का दिल ऐसा कर.रहा था अभी जींस खोलकर अपने लंड को आज़ाद कर दे .....
और ज्योति का भी दिल भी ऐसा चाह रहा था राज के लंड को बाहर निकल कर उसके साथ खेले उसे प्यार से सहलाए ...
लंड भींचने की वजह से राज बार बार अपनी जींस अड्जस्ट करते हुए ऊपर नीचे हो रहा था .... .
ज्योति का ध्यान राज की तरफ जाता है ....
और राज को परेशान देखकर ....
ज्योति आहिस्ता से राज से कहती है ...भैया लगता है आपको जींस में बहुत तकलीफ़ हो रही है ....
अगर ज़्यादा परेशानी हो रही है तो जींस की बेल्ट खोलकर बैठ जाओ ....
ज्योति ने जेसे राज के मन की बात कह दी हो
राज फॉरन अपने हाथ से जींस की बेल्ट खोल देता है .....
उससे आगे का काम ज्योति करती है ..
फॉरन अपना हाथ राज की जींस पर ले जाकर जींस की चेन खोल देती है ...
और अगले पल ज्योति के हाथ में राज का लंड आ जाता है ....
दूसरी तरफ अजय मामा के घर रात के लगभग 12 बज रहे थे ...
इस वक़्त सुषमा ऊपर वाले रूम में बॅड के किनारे डॉगी स्टाइल में बैठी हुई थी और अजय मामा खड़े होकर अपने लंबे लंड को सुषमा की चूत में अंदर बाहर करते हुए चोद रहे थे ...
सुषमा.. ठीक है बेटा डॉली के रूम में अटॅच बाथरूम है ..वहाँ नहा लो ..
अदिति...जी बुआ ..
अदिति अपने कपड़ो का बेग उठाकर डॉली ज्योति के रूम में पहुचती है और अपने बेग से टवल निकाल बाथरूम में घुस जाती है ....
अदिति एक एक कर अपने जिस्म से सारे कपड़े उतार देती है ...
अदिति का नंगा जिस्म किसी अप्सरा से कम नही लग रहा था ..
ऊपर वाले ने अदिति के जिस्म के हर हिस्से को बहुत ही खूबसूरती से नवाज़ा था...
उँचा लंबा कद उसपर अदिति के लंबे काले घने बाल किसी को भी अपना दीवाना बना सकता था ...
और आँखे इतनी नसीली की कोई भी उनकी गहराइयों में डूब जाय...
और सीने पर उभरी गोलियों तो कोई एक बार देख ले तो बस रब से उन्हे छूने की दुआ माँग ले ...इस्कदर हुष्ण था अदिति का ...
जयपुर में कितने ही लड़के अदिति के आगे पीछे चक्कर काटते थे ..मगर अभी तक अदिति इस सब से दूर ही थी .....
प्यार क्या होता है सेक्स क्या होता है ....
उसने इस तरफ कभी ध्यान ही नही दिया..
और ना ही कभी अदिति ने मास्टरबेट ही किया था चूत में उंगली तो दूर की बात है.. कभी अदिति ने अपनी चुचियों को भी नही मसला था ...
अदिति शवर के नीचे खड़ी ठंडे ठंडे पानी से अपने जिस्म को तरो ताज़ा कर रही थी ...
और नहाने के बाद अदिति अपने जिस्म पर टवल लपेट कर बाथरूम से निकल कर रूम में लगे शीशे के सामने खड़ी होकर अपने गीले बालो को सुलझाने लगती है .......
…………………
राज भी कंपनी से घर आ चुका था..
घर में अपनी मम्मी को देखकर मुस्कुराते हुए ...कब आई मम्मी
सुषमा...एक घंटा हो गया
राज ... ओह्ह मम्मी में फ्रेश होकर आता हूँ उसके बाद बात करता हूँ ..
सुषमा...ओके बेटा ...
और राज जेसे ही अपने रूम में जाता है
उसे डॉली अपने रूम में शीशे के आगे खड़ी दिख जाती है ...
राज दरवाज़े पर खड़े होकर डॉली को बाल संवारते देखकर राज को डॉली पर प्यार सा आ जाता है ...और राज दबे दाँव डॉली के पीछे पहूँचकर उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खिच देता है ....
एक दम अचानक अदिति जेसे ही पलटी है उसका टवल नीचे गिर जाता है
अदिति.... राआाज तुउुउउम्म्म्मममम
और जेसे ही दोनो का आमना सामना होता है
अदिति जल्दी से अपने नंगे जिस्म को वापस टवल से कवर करती है ....