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Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

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मगर ज्योति भी बहुत चालाकी से गेम खेल रही थी..

और शायद जो इस वक़्त राज सोच रहा था

वही सब ज्योति के माइंड में भी चल रहा था ...

इसी लिए अब तक ज्योति दीदी की दो गोटी पिट चुकी थी .....

गोटी पिटने से डॉली दीदी को मायूसी होने लगती है ...

डॉली... भाई लगता है आज में हारने वाली हूँ अब मुझे ही खाना बनाना पड़ेगा ...

राज ... दीदी अभी से हार क्यूँ मानती हो अभी तो खेल शुरू हुआ है ...

ज्योति मुस्कुराते हुए ...

ज्योति ... भैया खेल शुरू होते ही दीदी की दो गोटी पिट चुकी है ....

राज चुप बैठकर दीदी की चान्स देखता है ...

दीदी अपना पासा चलती है ....

मगर डॉली का पासा फिर ग़लत आता है...

अब तो राज को भी लगने लगा था...

ये गेम ज्योति जीत जाएगी ...

और तभी ज्योति की दो गोटी लाल हो जाती है ...

मगर तभी गेम पलटी मार जाता है ..

डॉली दीदी की गोटी खुलते ही ज्योति की

बाकी बची दोनो गोटी पिट जाती है ...

डॉली...अब आया ऊउत पहाड़ के नीचे..

ज्योति की बोलती बंद ...

राज का चेहरा भी खिल जाता है ...

इस वक़्त दीदी की चारो गोटी खुल चुकी थी ...

गेम इंट्रेस्टिंग हो गया था ..

कोई भी इस गेम को जीत सकता था ..

हर पासे के साथ राज की धड़कने भी तेज़ होने लगी थी ...

ज्योति की अभी तक दोनो गोटी खुल नही पाई थी ..और दीदी पासे पे पासे चलती हुई अपनी चारो गोटू को मंज़ील के करीब ले आई थी ...

तभी ज्योति का पासा भी सही पड़ जाता है

और ज्योति की दोनो गोटी खुलकर बिल्कुल दीदी की गोटी के पीछे आ चुकी थी ...

और फिर ऐसी सिचुएशन आती है ..

ज्योति और डॉली की एक एक गोटी रह जाती है

और दोनो को सिर्फ़ 1 नंबर वाला पासा चाहिए था ....

और तभी ज्योति हुर्री कहते हुए खुशी से उछल पड़ती है .....

ज्योति ... में जीत गई भैय्ाआ ...

दीदी के हारने से राज भी मायूस सा हो जाता है.. मगर ज्योति के जीत के जस्न में राज मुस्कुरा देता है ...

और फिर थोड़ी देर बाद ज्योति अपने रूम में तैयार होने चली जाती है ...

राज ... दीदी में तो आपके साथ जाना चाह रहा था..काश दीदी ये गेम आप जीत जाती ..

डॉली... कोई बात नही राज में फिर कभी तुम्हारे साथ चलूंगी..आज तुम ज्योति को ही दिखा लाओ ...

दीदी की बात सुन राज को दीदी पर एक दम प्यार सा आ जाता है और राज दीदी को अपनी बाँहो में भर कर किस करने लगता है .....
 
दीदी भी किस करते हुए राज का पूरा साथ दे रही थी ........

और थोड़ी देर बाद ज्योति तैयार होकर आ जाती है ..

ज्योति... चलो भैया में एक दम रेडी हूँ ...

ज्योति बाइक राज के साथ बिल्कुल गर्लफ्रेंड की तरह चिपक कर बैठ जाती है ...

शाम का वक़्त था और अंधारा भी हो चुका था.. .

ज्योति राज को पकड़ते हुए अपना हाथ बिल्कुल राज के लंड से टच किए हुए थी ...

और चिपकी ऐसे बैठी थी जिससे ज्योति की चुचि

बिल्कुल राज को अपनी कमर में महसूस हो रही थी ....

राज अपना धीयाँ बाइक चलाने में लगे हुए था...मगर ज्योति के हाथ बार बार लंड को टच कर रहे थे जिससे राज का लंड काबू से बाहर होकर खड़ा होने लगता है ...

थोड़ी देर बाद राज एक माल में पहुचता है ......

राज ज्योति से पूछता है ...

राज ...कौन सी मूवी देखनी है ज्योति ...

ज्योति .. दे दे प्यार दे

ज्योति मूवी का नाम ऐसे लेती है जेसे

राज से कह रही हो . दे दे प्यार दे .

राज ज्योति का इशारा समझ तो जाता है

मगर फिर भी दो टिकेट दे दे प्यार दे के ले लेता है ...

और राज ज्योति को लेकर हॉल के अंदर पहुचता है..मूवी स्टार्ट होने के कारण हॉल में अंधेरा हो चुका था ..

और ज्योति ने राज का हाथ थाम रखा था ..

राज भी ज्योति को संभालते हुए बिल्कुल ऊपर वाली शीट तक लेकर पहुचता है

मूवी काफ़ी पुरानी हो चुकी थी इसलिए सिनिमा हॉल में 5-7 लोग ही नज़र आ रहे थे

और राज और ज्योति जहा बैठे थे वहाँ इन दोनो के अलावा कोई नही बैठा था ....

ज्योति और राज शीट पर बैठ जाते है ...

राज मूवी देखने लगता है मगर ज्योति का मूवी की तरफ बिल्कुल ध्यान नही था ...

ज्योति का मान तो आज सुबह से राज के लंड से खेलने को कर रहा था ...और ज्योति बिना किसी झिझक के थोड़ी ही देर बाद अपना एक हाथ राज की गोद में बिल्कुल लंड के उपर रख देती है ....

राज का लंड बाइक पर ज्योति की शरारत से पहले ही उत्तेजित अवस्था में था ...

और अब ज्योति के हाथ रखते ही राज का लंड किसी साँप की भाँति फूंकर मरने लगता है .....

ज्योति के हाथ जींस के ऊपर से ही लंड की पूरी शेप महसूस कर रहे थे. ......

अब राज का लंड इतना अकड़ चुका था की राज की जींस में उसका दूं घुटने लगा था ...

लंड की अकड़ाहट लगातार बढ़ती ही जा रही थी जिससे राज को जींस में बहुत परेशानी महसूस होने लगी थी ....

राज का दिल ऐसा कर.रहा था अभी जींस खोलकर अपने लंड को आज़ाद कर दे .....

और ज्योति का भी दिल भी ऐसा चाह रहा था राज के लंड को बाहर निकल कर उसके साथ खेले उसे प्यार से सहलाए ...

लंड भींचने की वजह से राज बार बार अपनी जींस अड्जस्ट करते हुए ऊपर नीचे हो रहा था .... .

ज्योति का ध्यान राज की तरफ जाता है ....

और राज को परेशान देखकर ....

ज्योति आहिस्ता से राज से कहती है ...भैया लगता है आपको जींस में बहुत तकलीफ़ हो रही है ....

अगर ज़्यादा परेशानी हो रही है तो जींस की बेल्ट खोलकर बैठ जाओ ....

ज्योति ने जेसे राज के मन की बात कह दी हो

राज फॉरन अपने हाथ से जींस की बेल्ट खोल देता है .....

उससे आगे का काम ज्योति करती है ..

फॉरन अपना हाथ राज की जींस पर ले जाकर जींस की चेन खोल देती है ...

और अगले पल ज्योति के हाथ में राज का लंड आ जाता है ....

राज की हल्की सी सिसकी निकल जाती है ...

राज ...आऐईीइसस्स्शह

मगर ज्योति यही कहा रुकने वाली थी....

उसको खेलने के लिए खिलोना जो मिल चुका था ...
 
ज्योति राज के लंड को अपने हाथ में लेकर

आहिस्ता आहिस्ता ऊपर नीचे करने लगती है ...

ज्योति को राज के लंड से खेलना बड़ा अच्छा लग रहा था ...

ज्योति की चूत भी गीली होने लगी थी ...’

और ज्योति अपनी सलवार का नाडा खोलती है नीचे पेंटी भी नही पहनी थी..

और फिर ज्योति एक हाथ से राज का हाथ पकड़कर उसे अपनी चूत के ऊपर रख देती है ..

जेसे ज्योति राज से कह रही हो भाई ये तुम्हारे खेलने का खिलोना है ..

खेलो इससे ...

ज्योति का हाथ राज के लंड को पकड़े हुए आहिस्ता आहिस्ता सहला रहा था ......

राज अपनी सिसकियों पर कंट्रोल कर रहा था मगर फिर भी राज के मूह से कोई ना कोई सिसकी निकलती जा रही थी ...

राज .... आआईसस्सस्स सस्सीईईईई..

.ज्योति का भी मान कर रहा था भैया उसकी चूत को अपने हाथ से मसलना शुरू कर दे ...

अभी ज्योति ने ये सोचा ही था की राज की उंगली उससे अपनी चूत में घुसती महसूस होने लगती है और ज्योति की सिसकिया निकालने लगती है ...

आआहह सस्स्सीईईई सस्स्स्स्स्स्सस्स ययययययएसस्स्स्स्सीईईईई आआईयईईईई

ज्योति की चूत में आग बढ़ती जा रही थी

ज्योति का दिल ऐसा कर रहा था यही हॉल में

राज के लंड पर बैठकर पूरा का पूरा चूत में उतार लू ....

यहाँ पर ये काम इतना आसान नही लग रहा था ..

.

मगर हॉल में काफ़ी अंधेरा था किसी की नज़र उन पर नही पड़ सकती थी ...

चारो तरफ देखकर ज्योति ट्राइ करने का सोचती है और अपनी शीट से उठते हुए राज की गोद में

बैठने की कोशिश करती है ....

राज ज्योति की हालत समझ जाता है ..

राज का लंड खुद भी चूत में घुसने को बेकरार था ...

राज ज्योति को पोज़िशन में लेते हुए अपनी जींस गुटनो तक उतार देता है ...
 
राज ज्योति की हालत समझ जाता है ..

राज का लंड खुद भी चूत में घुसने को बेकरार था ...

राज ज्योति को पोज़िशन में लेते हुए अपनी जींस घुटनों तक उतार देता है ...

और ज्योति कुर्शी पकड़ती हुई राज की गोद में ठीक लंड को चूत के ऊपर सेट करते हुए

आहिस्ता आहिस्ता बैठने लगती है ...

गीली चूत होने के कारण लंड भी आहिस्ता आहिस्ता चूत में घुसता चला जाता है ...

ज्योति को बड़ा मज़ा सा आ गया था ...

राज के लंड को भी चूत में घुसकर ठंडक सी महसूस हो जाती है ...

और फिर ज्योति की आहिस्ता आहिस्ता उठक बैठक

शुरू हो जाती है ...

ज्योति को चुदाई का पूरा आनंद मिल रहा था...राज के आनंद की भी कोई सीमा नही थी ... काफ़ी देर उठक बैठक लगते हुए ज्योति की रफ़्तार अचानक बढ़ने लगी थी ...

और सिसकारियाँ भी ये तो शूकर था उनके आस पास कोई नही था ...

और थोड़ी देर बाद राज और ज्योति एक साथ क्लाइमॅक्स पर पहूँचकर शांत हो जाते है .....
 
अपडेट...46....

घर पहुचने में राज और ज्योति को काफ़ी रात हो गई थी..

गेट पापा खोलते है ..

डॉली दीदी कब की अपने रूम में सो चुकी थी ....

राज अपने रूम में जाकर कपड़े चेंजकरता है..

तभी ज्योति राज के लिए दूध का ग्लास ले आती है ...

राज अंडरवेर पहने अपना लोवर देख रहा था ...

ज्योति ... लो भैया दूध पी लो .....

राज .. ज्योति टेबल पर रख दे में पी लूँगा..

राज को टॉपलेस देख ज्योति का मन फिर से राज के साथ सेक्स करने को मचलने लगता है..

और ज्योति राज की आँखो में आँखे डालते हुए राज से कहती है ...

ज्योति ... भैया क्या में आज आपके पास ही सो जाउ ..

राज भी ज्योति का इशारा समझ जाता है..

मगर अब राज का बिल्कुल मूड नही था ..

राज... नही ज्योति मुझे सुबह एक न्यू कंपनी जाय्न करनी है..

इसलिए मुझे अब आराम से सोना है ..

और हा तू भी जाकर अपने रूम में

आराम से सो जा ....

ज्योति को भी लगता है अभी उसकी दाल गलने वाली नही है ...

ज्योति ... ओके भैया जाती हूँ जैसी आपकी मर्ज़ी ..

और ज्योति राज के रूम से चली जाती है ...
 
दूसरी तरफ अजय मामा के घर रात के लगभग 12 बज रहे थे ...

इस वक़्त सुषमा ऊपर वाले रूम में बॅड के किनारे डॉगी स्टाइल में बैठी हुई थी और अजय मामा खड़े होकर अपने लंबे लंड को सुषमा की चूत में अंदर बाहर करते हुए चोद रहे थे ...

सुषमा.... आअहह ऊहह आऐईसशह भैय्ाआआआआ सस्स्स्सीईई ऊओह सस्सीईईईई सस्सीईई

अजय मामा पूरा लंड चूत से बाहर खिचते और एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा देते..अजय मामा की भी सिसकिया निकल रही थी ...

अजय .... ऊओह सुषमा बहुत मज़ा आ रहा है बहन ...आअहह आअहह आअहह अजय के धक्को का साथ सुषमा भी पूरा पूरा अपनी गान्ड पीछे करके दे रही थी ....

और कुछ ही देर बाद अजय मामा अपने लंड के वीर्य से सुषमा की चूत भर देता है ...

और सुषमा भी अपने चरम पर पहूँचकर अपने भाई के वीर्य से संगम करा देती है ....

और फिर निढाल एक दूजे की बाँहो में आकर

एक दूजे के होंठ चूमने लगते है ...

अजय...सुषमा तुम कल चली जाओगी

सुषमा...हा भाई जाना तो है पंकज का कल से कई बार फोन आ चुका है ...

अजय... लगता है बहन तुम्हारे बिना हमारे जीजू को भी नींद नही आती ...

सुषमा... हा भाई आपकी तरह उन्हे भी

रोज चाहिए ...

अजय... फिर कब आओगी सुषमा बहन ...

सुषमा... भाई जल्दी आने की कोशिश करूँगी.

.

अजय... हमेशा जल्दी आने का बोलकर जाती हो और फिर कई महीने बाद आती हो ..

.

सुषमा...क्या करूँ भाई..जब से डॉली ने जॉब शुरू किया है घर की ज़िम्मेदारी सारी मुझपर ही है...

अजय..राज की शादी करके एक सुंदर सी बहूँ ले आओ ...

सुषमा... राज भी कहा मानता है शादी के लिए कहता है ..पहले डॉली की शादी होगी उसके बाद करूँगा...

अजय...क्या करे बहन बच्चो की ज़िद के आगे झुकना पड़ता है..

हमे भी अदिति ने बहुत परेशान किया हुआ है.

खुद भी काफ़ी चिड़चिड़ी रहने लगी है ..

और जब भी उससे शादी की बात करते है कई दिन खाना भी छोड़ देती है क्या करूँ

उसे तो बस नोकरी करने का भूत सवार है ...

सुषमा.. भैया अदिति को मेरे साथ भेज दो हो सकता है कुछ दिन घर से दूर रहकर समझ आ जाये ..

.

अजय ..कोई फ़ायदा नही बहन.. मुझे नही लगता अदिति को कभी समझ आएगी ...

सुषमा.... भाई तुम टेंशन ना लो

में बात करूँगी अदिति से .....

अजय...ठीक है सुषमा बहन जैसी तुम्हारी मर्ज़ी ....

सुषमा अजय के तरफ मुस्कुराते हुए ...

सुषमा ...भाई एक राउंड और हो जाए ..

अजय के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है ...

अजय ... सुषमा मेरा तो ऐसा दिल करता है बस तुम्हे रात दिन चोदता रहूं...

सुषमा... भाई मना किसने किया है में तो आपसे हमेशा चुदने को तैयार रहती हूँ .....

और सुषमा अजय के लंड को अपने हाथ में पकड़ते हुए पूरा मूह के अंदर ले लेती है शायद अजय के लंड को फिर से चोदने लायक बना रही थी ...

और चाँद मिनटों में अजय का लंड फिर से खड़ा हो जाता है....

इस बार सुषमा अजय को बॅड पर धक्का देते हुए खुद अजय के ऊपर चढ़ जाती है ..

और अपने हाथ से अजय के लंड को अपनी चूत पर सेट करते हुए बैठती चली जाती है ...

अजय का लंड भी सागर की गहराइयों में उतरता चला जाता है ..

और फिर दोनो भाई बहन एक बार फिर

असीम सुख की तरफ बढ़ते हुए

मंज़िल तक पहुच जाते है ......
 
--------------

उधर राज सुबह 7 बजे ही कंपनी के लिए तैयार हो रहा था ...

डॉली.. भाई आज इतनी सुबह ऑफीस जा रहे हो ..

राज ... हा दीदी मेंने आज से एक न्यू कंपनी जाय्न कर ली है ...

डॉली... क्याआआआअ कह रहे हो भाई ..

अब में किसके साथ ऑफीस जाउन्गी ..

राज ... दीदी छोड़ो उस नोकरी को

कुछ दिन बाद आपको भी अपने साथ जाय्न करा लूँगा ...

डॉली... ठीक है राज जैसी तुम्हारी मर्ज़ी ..

दीदी की बात सुनकर राज भी मुस्कुरा देता है ..राज को लग रहा था शायद दीदी इतनी आसानी से मानेगी नही ....

और कुछ देर बाद राज घर से निकल जाता है और सीधी नेहा के डॅडी की कंपनी पहुच जाता है ...

नेहा के डॅडी भी आज सुबह ही कंपनी

पहुच गये थे...

और राज को कंपनी के सारे स्टाफ से इंट्रोडक्षन कराते है और फिर राज को एक कॅबिन में लेजाकर ...

राजेश... राज आज से ये ऑफीस तुम संभालोगे...

और राज कंपनी की सारी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले लेता है ........

....

उधर कॉलेज में नेहा को खुश देखकर ज्योति उसकी खुशी का राज पूछ रही थी ...

ज्योति ... क्या बात है नेहा आज तो बड़ी खिली खिली नज़र आ रही है ...

नेहा ... ज्योति तुझे कैसे बताओ मुझे क्या मिल गया है...तुझे एक गाना सुनाती हूँ ...

मिल गये मिल मये आज मेरे सनम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम -२

मिल गये मिल गये आज मेरे सनम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम -२

ऐ नज़ारो ज़रा काम इतना करो -२

तुम मेरी माँग में आज मोती भरो -२

इक उजाला हुआ ढल गई शाम-ए-ग़म -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम

मिल गये मिल मये आज मेरे सनम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम -२

वो कहाँ छुप रहे थे मैं हैरान थी -२

मेरी सदियों से उनसे ही पहचान थी -२

ऐसे क़िस्से ज़माने में होते हैं कम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम

मिल गये मिल मये आज मेरे सनम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम -२

उम्र भर की तड़प को करार आ गया -२

उनसे आँखें मिलीं मुझको प्यार आ गया -२

याद करती रही मैं उन्हें दम ब दम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम

मिल गये मिल मये आज मेरे सनम -२

आज मेरे ज़मीं पर नहीं हैं कदम -२

ज्योति ...वूओव नेहा तू तो प्यार में सिंगर

भी बन गई..

यार प्लीज़ बता ना कौन मिल गया है तुझे ...

नेहा ... बता दूँगी मेरी जान इतनी भी क्या जल्दी है.....

पहले तुझे इस खुशी में मेरी तरफ से पार्टी तो दे दूं बोल केसी पार्टी लेगी ...
 
ज्योति ...यार पार्टी वार्टी छोड़ बस मुझे तू इतना बता दे कौन मिल गया तुझको ....

नेहा ...अच्छा बाबा में तुझे एक क्लू देती हूँ अगर समझ सके तो समझ लेना फिर मुझे फोर्स मत करना .......

ज्योति ... उफफफ्फ़ नेहा तेरी बातो ने तो मेरा सिर घुमा दिया ... चल बता तेरा क्लू क्या है ...

नेहा ....

मुझे जिससे प्यार हुआ है ना

उसे तू भी जानती है ...

बस यही है मेरा क्लू ...

ज्योति नेहा के क्लू को समझने के लिए अपना माइंड पर ज़ोर डालने लगती है ...

मगर उसकी कुछ समझ नही आ रहा था ..

कौन हो सकता है नेहा का हमसफ़र जिसे में भी जानती हूँ ...

कही नेहा राज भैया के बारे में तो बात नही कर रही ....

फिर ज्योति सोचती है ...नही नही ये नही हो सकता..नेहा ने तो उसके साथ आगे पीछे से सेक्स भी कर रखा है....

ये सोचकर ज्योति का ध्यान राज की तरफ से हट जाता है ...

और ज्योति अपनी हार मान लेती है .....

ज्योति ... मेरी तो कुछ समझ नही आ रहा ..

नेहा .. इसका मतलब तू हार गई..

ज्योति .. हा में हार गई अब बता ..

नेहा ... पहले तो तुझे पार्टी देती हूँ उसके बाद अपने घर लेजाकर तुझे आराम से पूरी स्टोरी सुनाउन्गी...

ज्योति ... ठीक है नेहा जैसी तेरी मर्ज़ी ..में भी आज तेरे हीरो के बारे में जानकर रहूंगी ....
 
ज्योति की बेकरारी देख नेहा मुस्कुरा देती है..

नेहा सोचती है कितनी ख़ुसनसीब हूँ में

जो मेरी सबसे प्यारी फ्रेड ही ननद बनने वाली है ..

नेहा ज्योति को अपनी ननद समझने लगी थी ... ..

नेहा राज को कॉल करके पूछती है ..डार्लिंग केसा रहा कंपनी में पहला दिन....

राज मुस्कुराते हुए

राज ... बहुत अच्छा..

नेहा ... मुझे बड़ी खुशी है तुमने कंपनी जाय्न कर ली ...

राज में ज्योति को अपने साथ मार्केट शॉपिंग के लिए ले जा रही हूँ

हो सकता है आज रात ज्योति मेरे पास ही रुक जाएगी...

राज ... कोई बात नही नेहा ले जाओ ...

नेहा ... थॅंक यू राज.....

राज से बात करके नेहा ज्योति को एक माल में लेकर पहुचती है ...

नेहा ...यार पहले कुछ खा लिया जाय बहुत ज़ोरो की भूक लगी है ...

और नेहा ज्योति के साथ एक रेस्टोरेंट

में घुस जाती है .....

------------

उधर घर पर आज डॉली अकेली थी

और अकेले डॉली का बिल्कुल मान नही लग रहा था ....

इसलिए डॉली ने सोचा क्यूँ ना घर की सफाई ही कर ली जाय...

और डॉली पूरे घर की सफाई के साथ साथ

सारे घर की सेट्टिंग भी बदल देती है ....

मगर इतनी मेहनत करके डॉली बुरी तरह थक जाती है ...

और डॉली को बहुत तेज़ फीवर हो जाता था ...

जिससे डॉली बिस्तर पर लेटकर आराम करने लगती है ...

शाम को जयपुर से मम्मी के साथ अदिति

भी आ जाती है ...

डॉली अदिति को देखकर खुशी से अदिति को

अपने गले लगा लेती है ...

मगर जेसे ही अदिति डॉली के गले लगती है ...

अदिति... अर्रे डॉली तुझे तो बहुत तेज़ बुखार है ...

सुषमा भी डॉली के माथे पर अपना हाथ रखकर देखती है ..

डॉली बुरी तरह बुखार में ता\प रही थी ...

सुषमा...तुझे तो वास्तव में बहुत तेज़ बुखार है में तेरे लिए पानी की पट्टी लाती हूँ ...

और सुषमा किचिन से ठंडा पानी ले आती है

और डॉली के माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखती है ...

थोड़ी देर में पंकज भी घर आ जाता है..

सुषमा और अदिति को देखकर पंकज खुश हो जाता है ..

पंकज...कब आई सुषमा

सुषमा... आधा घंटा हो गया ..

पंकज...अच्छा..

सुषमा ..देखना ग डॉली को बहुत तेज़ बुखार है ....

पंकज भी डॉली का हाथ पकड़कर देखता है ...

पंकज... हा इसे तो बहुत तेज़ बुखार है चल तुझे डॉक्टर के ले चलता हूँ ....

और पंकज डॉली को अपने साथ बाइक पर

डॉक्टर के यहाँ ले जाता है ...
 
अदिति... बुआ में नहा लू ..

सुषमा.. ठीक है बेटा डॉली के रूम में अटॅच बाथरूम है ..वहाँ नहा लो ..

अदिति...जी बुआ ..

अदिति अपने कपड़ो का बेग उठाकर डॉली ज्योति के रूम में पहुचती है और अपने बेग से टवल निकाल बाथरूम में घुस जाती है ....

अदिति एक एक कर अपने जिस्म से सारे कपड़े उतार देती है ...

अदिति का नंगा जिस्म किसी अप्सरा से कम नही लग रहा था ..

ऊपर वाले ने अदिति के जिस्म के हर हिस्से को बहुत ही खूबसूरती से नवाज़ा था...

उँचा लंबा कद उसपर अदिति के लंबे काले घने बाल किसी को भी अपना दीवाना बना सकता था ...

और आँखे इतनी नसीली की कोई भी उनकी गहराइयों में डूब जाय...

और सीने पर उभरी गोलियों तो कोई एक बार देख ले तो बस रब से उन्हे छूने की दुआ माँग ले ...इस्कदर हुष्ण था अदिति का ...

जयपुर में कितने ही लड़के अदिति के आगे पीछे चक्कर काटते थे ..मगर अभी तक अदिति इस सब से दूर ही थी .....

प्यार क्या होता है सेक्स क्या होता है ....

उसने इस तरफ कभी ध्यान ही नही दिया..

और ना ही कभी अदिति ने मास्टरबेट ही किया था चूत में उंगली तो दूर की बात है.. कभी अदिति ने अपनी चुचियों को भी नही मसला था ...

अदिति शवर के नीचे खड़ी ठंडे ठंडे पानी से अपने जिस्म को तरो ताज़ा कर रही थी ...

और नहाने के बाद अदिति अपने जिस्म पर टवल लपेट कर बाथरूम से निकल कर रूम में लगे शीशे के सामने खड़ी होकर अपने गीले बालो को सुलझाने लगती है .......

…………………

राज भी कंपनी से घर आ चुका था..

घर में अपनी मम्मी को देखकर मुस्कुराते हुए ...कब आई मम्मी

सुषमा...एक घंटा हो गया

राज ... ओह्ह मम्मी में फ्रेश होकर आता हूँ उसके बाद बात करता हूँ ..

सुषमा...ओके बेटा ...

और राज जेसे ही अपने रूम में जाता है

उसे डॉली अपने रूम में शीशे के आगे खड़ी दिख जाती है ...

राज दरवाज़े पर खड़े होकर डॉली को बाल संवारते देखकर राज को डॉली पर प्यार सा आ जाता है ...और राज दबे दाँव डॉली के पीछे पहूँचकर उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खिच देता है ....

एक दम अचानक अदिति जेसे ही पलटी है उसका टवल नीचे गिर जाता है

अदिति.... राआाज तुउुउउम्म्म्मममम

और जेसे ही दोनो का आमना सामना होता है

अदिति जल्दी से अपने नंगे जिस्म को वापस टवल से कवर करती है ....

अदिति को देखकर राज को झटका लगता है...
 
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