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Romance अनमोल अहसास

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अनमोल अहसास

पाँच साल के बेटे की जिद पर उसके बाल कटवाने के लिए डॉली मैन्स सैलून में बैठी थी, असहज भी लग रहा था की मैन्स सैलून में लेडीज!

पहले से कुछ कस्टमर थे इसलिए वक़्त लग रहा था, बार - बार मन मे आता की यहाँ से चली जाऊं क्या? नुक्कड़ वाले से ही कटवा लूँगी! कश्मकश में पड़ी डॉली से न बैठते बन रहा था, न उठते।

उसी समय एक हेंडसम औऱ खूबसूरत शख्सियत वाले आदमी ने प्रवेश किया, सुदृढ़ चेहरा था, फिर भी इतना आकर्षक लग रहा था की किसी की भी नजर उसकी तरफ उठ जाये।

उसकी इस हरकत पर उस शख्स ने फिर शीशे में एक नजर उसकी तरफ देखा, डॉली ने नजर नही उठायी , पलके झपकते हुए बाहर देखती रही!

फिर कुछ देर बाद अंदर देखने के बहाने ही शीशे पर नजर डालते हुए ही निगाह दूसरी तरफ की तो उस शख्स को डॉली की इस हरकत पर रोकते रोकते भी एक हल्की मुस्कान की रेखा उसके चेहरे पर आ ही गयी।

वह बाहर निकल गया और गाड़ी में बैठते हुए ड्राइवर से बोला, " चलो! कहीं और चले।"

ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की तो पीछे बैठे उस शख्स ने पत्रिका उठा ली और फिर पत्रिका एक तरफ को रखते हुए खिड़की से बाहर देखते हुए मन ही मन कहा, " उम्र बत्तीस के आस पास होगी और हरकतें देखो बाइस वाली!!"

वह ठोड़ी को हथेली पर टिकाते हुए हँस दिया और चश्मा चढ़ा लिया।

कुछ महीनों बाद----

"राज ! राज ...!!" दादी माँ 'सुभद्रा देवी ' ने राज को आवाज दी लेकिन राज कुछ नही बोला।

" बहरे हो! वैसे तो जब तुम ऑफिस में होते हो तो आवाज पहचानने में जरा भी देरी नही करते!"

" दादी मां, प्लीज! सुबह सुबह नही..!! मैं काम को लेकर पहले ही परेशान हूँ, बहुत जरूरी मीटिंग में जाना है; फ्लाइट है कुछ ही देर में! हम बाद में बात करते है!" राज ने दादी को टालते हुए नाश्ते की आखिरी बाइट लेकर कहा।

"लेकिन तस्वीर तो देखता जा, बात लौट कर करना।" दादी ने फिर भी पीछे भागते हुए कहा लेकिन राज ने आँखों पर चश्मा चढ़ाते हुए कदम आगे बढ़ाकर उन्हें गले से लगाया औऱ तेजी से बाहर निकल गया।

"इसे मिला दे भगवान किसी लड़की से, अब कब शादी करेगा ये लड़का! इस उम्र में हमारे बच्चे दस- बारह साल के हो गए थे! एक ये पीढ़ी है की अभी तक शादी ही नही हुई! हाय भगवान! क्या जमाना आ गया!!" सुभद्रा जी उसके जाने के बाद बोलते हुए सोफे पर बैठ गयी।
 
उधर दूसरी तरफ डॉली फोन पर अपनी सहेली जैस्मीन से बात करते हुए बाहर निकली, " हाँ! हाँ..!! जस्सी मैं निकल गयी हूँ, कुछ ही देर में पहुंच जाऊँगी एयरपोर्ट..! तू चिंता मत कर इस बार लेट होने का सवाल ही नही उठता।"

डॉली जहाज में पहली बार बैठी थी, फ्लाइट अभी टेक ऑफ के लिए अनाउंस नही कर रही थी, फिर भी डॉली ने सीट बेल्ट किसी तरह लगा तो ली लेकिन तभी फोन हाथ से छूट कर नीचे गिर गया तो वह बेल्ट खोलने की कोशिश करने लगी, लेकिन उससे बेल्ट खुली नही तो वह होठों ही होठो में बड़बड़ाई, " च्च..!! क्या मुसीबत है, अब ये खुलता कैसे है?"

साइड वाली सीट पर एक शख्स आकर बैठ चुका था, उसने जब डॉली को कुछ देर परेशान हो लेने दिया तब अपनी हथेली बढ़ाई और रुआँसी होती डॉली की बेल्ट को छूना चाहा तो हिलती हुई डॉली के कमर से उसकी हथेली छू गयी , डॉली ने फौरन उसकी कलाई को पकड़ते हुए कहा, "बड़े बद्तमीज हो! मुझे तो लगा था, फ्लाइट में शरीफ लोग होते हैं!"

उस शख्स ने अचंभित होकर डॉली की तरफ देखा और बोला, " लिहाज करना सीखिए दूसरों का, तमीज से बात कीजिये।"

" आप अपनी तमीज बेचकर आये हो औऱ मुझे तमीज सीखा रहे हो!" डॉली ने गुस्से से कहा, और आगे बोली, " देखो! अपनी सीट पर चैन से बैठे रहो! मेरा दिमाग खराब मत करो, रोज निपटती हूँ आप जैसे लोगो से मैं!'

उस शख्स ने अब दाँत जमाते हुए उसकी कलाई कसकर पकड़ते हुए कहा, "आप जैसे...!! मतलब क्या है आपका?"

डॉली ने अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा, " हाथ छोड़िए! हद में रहिए अपनी।"

वो शख्स अब भी उसकी कलाई न छोड़ते हुए बोला, " मुझसे इस तरह आज तक किसी ने बात नही की! हद सिखाने वाला कोई पैदा ही नही हुआ आज तक! लेकिन आज के बाद बहुत संभावना है की आपको हद में रहना पड़ जाए।"

कलाई छुड़ाने की जद्दोजहद में ही बेल्ट का ऊपरी हिस्सा उठ गया औऱ बेल्ट खुल गयी तभी अनाउंसमेंट भी हुई तो उस शख्स ने अपना हाथ उसकी कलाई से हटा लिया और अपनी बेल्ट बांधने लगा तो बेल्ट खुलने से डॉली के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी और वो होंठो ही होठों में बोली, "अच्छा ! तो ऐसे खुलती है बेल्ट।"

वो झुकी और अपना मोबाइल उठाते हुए फिर से बेल्ट को लगा लिया तभी विमान में एयरहोस्टेस ने बेल्ट खोलना और बन्द करना बताना शुरू किया तो डॉली ने मुस्कुराते हुए मन ही मन सोचा, " मैं भी पागल हूँ, कब से ख्वामख्वाह जूझ रही थी , मुझे तो पता ही नही था की ये सब भी सिखाया जाता है।"

बगल की सीट वाला शख्स अपना टैब खोलकर बैठा हुआ था, शायद कोई ऑफलाइन सेव की हुई वीडियो देख रहा था। जैसे ही फ्लाइट ने उड़ान भरी, डॉली को लगा की उसके सिर पर किसी ने कुछ भारी सा रख दिया है! बहुत दबाव सा महसूस हो रहा था सिर पर, उसने फटाफट अपनी आंखें मींच ली और अपना हाथ तिरछा बढ़ाकर बगल वाले शख्स के पेट के पास शर्ट को कसकर पकड़ लिया।

"अरे..!" उस शख्स के मुंह से निकला क्योंकि उसका टैब गिरते गिरते बचा था। उसने चुपचाप डॉली को घूरना जारी रखा और जब वो रिलेक्स हो गयी तब अपनी आंखें खोलते हुए जैसे ही उसने हाथ हटाते हुए सॉरी कहना चाहा, वह शख्स पहले ही बोल उठा, " हुँह!! यही होता है लेडीज होने का एडवांटेज लेना!"

" मतलब??" डॉली ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

" तीस - बत्तीस साल की लगती हो! इतनी नासमझ तो नही जितनी बनने की कोशिश कर रही हो!"

- " आप भी कोई बीस - बाइस साल के छोकरे नही हो, मेरी उम्र पर कमेंट करने वाले आप होते कौन हो?"

- "एकदम चुप रहो! अभी मैंने आपको यूँ पकड़ा होता न तो पूरे विमान के यात्रियों के जूते होते औऱ मेरा सिर! लेकिन आप तो मुझे इस तरह पकड़े बैठी थी, जैसे फ्लाइट की छत खुली हो और उसमें से बाहर उड़ने वाली हो! बद्तमीजी इसे कहते हैं ,न की उसे जो मैने किया!

मैं आपको परेशान देखकर सीट बेल्ट खोलने जा रहा था लेकिन आपके हिलने की वजह से मेरा हाथ आपसे छू गया

था पर आप तो जान बूझकर मुझे पकड़े हुए थी।"

डॉली का मुँह खुला रह गया , वह अभी कुछ बोल भी नही पायी थी कि तभी वह शख्स बोला, " स्मार्ट और हैंडसम लड़का देखा नही की ऐसे चिपक जाती हैं जैसे गुड़ पर मक्खियां भिनभिनाती हैं!"
 
" समझता क्या है खुद को, स्मार्ट होगा अपने लिए! इतनी अकड़ किस बात की?" वह खिड़की की तरफ मुँह करते हुए बड़बड़ाई फिर उसकी तरफ चेहरा करते हुए बोली, " सुनो! विमान की छत खुलकर मैं उड़ भी जाऊँ न, तो भी आपकी मदद न लूँ। होंगे आप गुड़ लेकिन मैं मक्खी नही हूँ! समझे....!!"

उसने कुछ नही कहा, चुपचाप अपने टैब में कुछ देखता रहा तो डॉली भी खिड़की से बाहर देखने लगी। जब विमान लैंड हो गया तो सब उतरकर अपने अपने गंतव्य के लिए गेट से बाहर निकल गए।

( बाहर निकलकर डॉली ने इधर उधर देखा तो सामने ही नेम प्लेट लिए हुए आदमी पर नजर पड़ गयी तो वह मन ही मन बोली, " ये जस्सी भी न! मैं टैक्सी कर लेती खुद ही लेकिन इसने पहले ही सब इंतज़ाम कर दिया।"

गाड़ी के पास खड़ा वो आदमी भी उस तरफ देखकर मुस्कुराया और नेम प्लेट नीचे करते हुए गाड़ी में बैठ गया तो डॉली भी दरवाजा खोलकर पीछे बैठ गयी , तभी दूसरी तरफ का दरवाजा खुला और एक शख्स ने अंदर बैठते हुए दरवाजा बंद कर दिया तो डॉली ने चौंक कर उसकी तरफ देखा! उसने भी डॉली की ओर देखते हुए चश्मा उतारा तो ड्राइवर भी पीछे पलटकर देखने लगा।

उस शख्स ने ड्राइवर को गाड़ी स्टार्ट करने का इशारा किया तो उसने सीधे देखते हुए गाड़ी स्टार्ट कर दी।

डॉली ने अब पर्स साइड में रखते हुए उससे कहा, " परेशानी क्या है आपकी? ड्राइवर गाड़ी रोको! इन्हें नीचे

उतारो, उसके बाद ही हम आगे जाएंगे।"

"माफ कीजियेगा मैम लेकिन आप...!" ड्राइवर की बात पूरी होने से पहले ही उस शख्स ने उसकी बात काट दी।

" गाड़ी चलाइये! किसी के सवाल का जवाब देना जरूरी नही है।" उस शख्स ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा।

"मैं आपको फ्लाइट से ही देख रही हूँ, आप तो पता नही कहाँ का शहंशाह समझ रहे हैं खुद को!"

उस शख्स ने कोई जबाब नही दिया, उसके चौड़े कन्धे ही डॉली को दिखाई दे रहे थे! करीने से कटे हुए स्टाइलिश बाल, अच्छे से आयरन की हुई फीटिंग की पैंट, और शर्ट पहनी हुई थी, चेहरे से बहुत मजबूत, दृढ़ संकल्प वाला व्यक्ति लग रहा था।

इसमें तो कोई संदेह नही था कि वह अतुलनीय रूप से आकर्षक और सुंदर था, लेकिन था बहुत अभिमानी! किसी भी बात का जबाब न देने में मानो अपनी शान समझता था।

इतना सब होने के बाद भी उसकी उपस्थिति डॉली को जरा भी नही भा रही थी।

" सुनिये! मैं कोई लड़ाई झगड़े नही चाहती, फ्लाइट में अपनी पहली उड़ान को लेकर मैं बहुत उत्साहित थी पर भगवान की दया से सारा उत्साह ठंडा पड़ गया, क्योंकि आपका सानिध्य जो प्राप्त हो गया! लेकिन अब मैं शांत मिजाज के साथ अपने काम पर जाना चाहती हूँ इसलिए मेहरबानी करके आप इस गाड़ी से उतर जाइये।

देखने से तो आप अच्छे खासे अमीर लग रहे हैं, गाड़ियों की कोई कमी तो होगी नही, फोन करके जहां कहेंगे वही गाड़ी मंगवा लेंगे, फिर क्यों खामख्वाह मुझे परेशान कर रहे हैं?"

अपनी बात कहकर जैसे ही डॉली चुप हुई तो उस शख्स ने ड्राइवर की तरफ शीशे में देखा और फिर खिड़की से बाहर देखने लगा।

अब ड्राइवर ने गला साफ करते हुए कहा, " मैम , आप गलत गाड़ी में चढ़ी है! ये गाड़ी साहब की ही है और मैं उनका ड्राइवर हूँ, आपने शायद नेम प्लेट पर गौर नही किया होगा! और साहब को ज्यादा बात करना और हँसना पसन्द नही है।"
 
डॉली तुरंत बोली, " नही! मैंने तो अच्छे से देखा था, "DRS" लिखा हुआ था और फिर.....!" कहते कहते डॉली अब चुप हो गयी और मन मे सारा वाकया चलचित्र की भांति घूम गया।

' DRS ' लिखा देखकर ही उसने डॉली समझ लिया और अब ध्यान आया की उसके आगे ही ये महान शख्स चल रहा था, ड्राइवर ने इसे देखकर मुस्कुराते हुए हाथ नीचे कर लिया था, और डॉली को गलतफहमी हो गयी थी कि वो उसे देखकर मुस्कुराया है।

" हाय रब्बा! एक ही दिन में दो दो गलतफहमियां औऱ वो भी एक ही शख्स के साथ! क्यों भगवान! मुझे परेशान करके थकते नही हो क्या? कितनी परीक्षाओं का प्लान तैयार किया हुआ है आपने मेरे लिए?" डॉली ने मन ही मन कहा।

अब वो उस घमंडी को देखते हुए बोली, "मुझे यहाँ तक लिफ्ट देने के लिए बहुत शुक्रिया , दरअसल मुझे गलतफहमी हो गयी थी , माफ कीजिये....!! लेकिन अब जब गलती का एहसास हो गया है तो मैं गाड़ी से उतरना चाहूँगी......!! गाड़ी रोकिए.....!"

" गाड़ी तेज चलाओ!" उसने अब ड्राइवर की तरफ देखे बिना आदेश दिया तो ड्राइवर ने स्पीड बढ़ा दी।

डॉली ने अब हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए कहा, " क्या तरीका है ये? आप स्पीड बढ़ाने को कैसे कह सकते हैं? मैंने कहा गाड़ी रोकिए!"

उस शख्स पर अब भी कोई प्रभाव नही हुआ तो डॉली ने चलती गाड़ी का दरवाजा खोलने का प्रयास करते हुए कहा, " गाड़ी रोको वरना मैं कूद जाऊँगी!"

उस आदमी ने फौरन सख्ती से उसकी कलाई को पकड़ लिया और अगले ही पल दरवाजा लॉक हो गया, तो उसने डॉली की कलाई छोड़ दी।

डॉली ने शीशे पर हाथ मारते हुए कहा, " क्या जबरदस्ती है? उतरने दो मुझे गाड़ी से, वरना मैं चिल्लाऊंगी।"

" मैं! मैं...!! मैं....! चुप रहो! बिल्कुल चुप..!" वह घमंडी आदमी अब गरजा।

डॉली गुस्से से तमतमाये चेहरे के साथ उसकी तरफ देखती रही तो उसने भी अपना चश्मा उतारते हुए अपनी ग्रे आंखों से डॉली की गहरी काली निगाहो में देखते हुए कहा, " जहां से इस गाड़ी मे आप चढ़ी हैं वहाँ पर्याप्त मात्रा में हर कुछ दूरी पर cctv कैमरे लगे हुए हैं! उसमें ये नजर आ जायेगा की आप एक अमीर आदमी को रिझाने की नीयत से खुद उसकी गाड़ी में अपनी मर्जी से बैठी हैं! और जब आपकी नीयत के मुताबिक काम नही हुआ तो अब आप चीखकर उसे गलत आरोप में फँसाने का प्रयास कर रही हैं!

जो करना चाहे करें लेकिन बदनामी किसकी होगी ये सोच लीजिएगा क्योंकि फ्लाइट से लेकर अब तक की बद्तमीजी के हिसाब के रूप में गाड़ी नही रुकेगी, फिर चाहे आप अपने काम पर पहुंचे या न पहुँचे..!!"

"आप अपनी हद पार कर रहे हैं, हिम्मत कैसे हुई मुझ पर ऐसा घिनौना इल्जाम लगाने की?" डॉली ने नफरत से खून के घूँट पीते हुए कहा।

" यही समझाने की कोशिश की थी मैंने , की मुझसे बात करते वक़्त अपनी हद मत भूलो! क्योंकि एक बार अपनी हद भूली तो मेरी हद में आ जाओगी और मैं मेरी हद में आने वालों को उनकी मनमानी नही करने देता! राज शर्मा नाम है मेरा! आगे से मेरे आगे जबान खोलने से पहले अच्छे से तौल लेना फिर मुँह खोलना।"
 
डॉली गुस्से से फुफकारती हुई उसे घूरती रही तो राज ने उसकी व्यक्तिगत विशेषताओं पर ध्यान दिया, "वो दुबली नहीं थी, पंजाबनो जैसा भरा भरा खूबसूरत शरीर था, गाल पर हल्के डिंपल पड़ते थे! त्वचा बेदाग और चमकीली थी, कोई झुर्री नही! सही मायनों में एक खूबसूरत महिला थी वो।"

राज ने उससे नजर हटा ली और खिड़की से बाहर देखने लगा, अपने जीवन मे आने वाली हर लड़की से वो विरक्त हो चुका था क्योंकि हर लड़की उसके आगे पीछे मंडराती , दिन को रात कहने पर भी हाँ में हाँ मिलाती! यही वजह थी की राज को कोई भी लड़की अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब नही हो पाई थी।

पर ये लड़की सबसे अलग थी, अपनी बत्तीस साल की जिंदगी में वो पहली बार ऐसी सशक्त महिला से मिला था जो उससे प्रभावित नही हुई थी, बल्कि उसकी आलोचना करने की हिम्मत कर रही थी। उसको लेकर इस महिला की भावनाएं मानो निष्क्रिय थी, वह उससे प्रभावित नही हुई थी, न तो व्यक्तित्व से और न ही उसकी संपन्नता से....!!'

डॉली गुस्से के घूँट पीते हुए दूसरे किनारे खिड़की से बाहर देखती रही, उसको ये तक ध्यान नही रहा की फोन की घण्टी कब से बज रही है। जब गाड़ी रुकी तो वो झटके से आगे की सीट से टकरा गई, उसकी छोटी नाक सीट से टकराकर लाल हो गयी , वो अपनी नाक सहलाते हुए गाड़ी के दरवाजे की तरफ देखने लगी।

दरवाजा खुला तो वह फटाफट दरवाजे से बाहर निकलकर ऐसे भागी, जैसे किसी भूत से पीछा छूटा हो। राज ने एक नजर उस भागती हुई महिला पर डाली और फिर अपनी टाई को कसते हुए बाहर निकल गया।

डॉली ने एक तरफ को पहुँचकर जस्सी को फोन मिलाते हुए कहा, " अरे जस्सी! पता फिर से भेज न, मुझसे गलती से वो मेसेज डिलीट हो गया जिसमें पता लिखा हुआ था।"

" तू इतना हाँफ क्यों रही है?" जस्सी ने उधर से कहा।

" छोड़ यार , बहुत कुछ है बताने के लिए लेकिन अभी कुछ नही बताऊंगी, पहले जगह पर पहुंच जाऊँ, रिलेक्स हो जाऊँ।"

" ठीक है , टॉवर नम्बर थ्री लिखा होगा बिल्डिंग पर , वहीं मिल जाएंगे तुझे पांडे जी।"

"कौन सा टॉवर कहा?" डॉली ने फिर पूछा क्योंकि हॉर्न की वजह से वह सुन नही पायी थी!

" टावर नम्बर थ्री..!!" जस्सी ने कहा तभी ऊपर बिजली के तार पर बैठे कबूतर ने डॉली पर बीट कर दी तो वह ऊपर देखते हुए चिढ़कर बोली, " सत्यानाश हो तेरा..!! मैं ही मिली थी पॉटी करने के लिए..? जाने कौन सी घड़ी में आज घर से निकली थी मैं!"

वह बड़बड़ाते हुए जैसे ही नजर नीचे करने को हुई , उसकी नजर सामने रोड के दूसरी तरफ बिल्डिंग पर पड़ी, " टावर नम्बर थ्री।"

" मुझे नही पता, अपने कान ठीक करवा! कब से पूछे जा रही है, दिमाग जाने कहाँ है?" जस्सी ने नाराजगी से कहा तो डॉली चहकते हुए बोली , "अरे वाह! मिल गयी बिल्डिंग! मैं तो ठीक सामने खड़ी हूँ उसके, चल बाए , हाँ!"

डॉली ने फ़ोन काटा औऱ फिर जल्दी से रोड पार करके बिल्डिंग के अंदर चली गयी। वह लिफ्ट की तरफ बढ़ते हुए बोली, " हुँह! समझता क्या है खुद को? सोच रहा था कि मुझे गाड़ी से नीचे नही उतरने देगा तो मैं वक़्त पर नही पहुंच पाऊंगी, पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया, खुद ही मुझे बिल्डिंग के आगे छोड़ दिया, घमंडी...!!"
 
उधर अपने हाथ की अंगुलियों से भौंहों और माथे के बीच के हिस्से की मसाज करते हुए राज खुद को उस लड़की के बारे में सोचने से नही रोक पाया, जिसने जिंदगी में पहली बार उससे बद्तमीजी से बात करने की हिम्मत की थी और उसे कोई मलाल भी नही हुआ था।

'लेडी किलर' नाम से मशहूर था राज शर्मा लेकिन इस लड़की ने उसे ऐसे किसी भी एहसास से नही नवाजा, जिससे वो खुद को खास महसूस कर सके। राज से ये बात सहन नही हो पा रही थी और इसलिए वो मन ही मन इस सवाल से जूझ रहा था की उस लड़की से दोबारा मुलाकात हो या न हो!

ये कहना गलत नही होगा की डॉली की छाप शायद राज के मन पर पड़ चुकी थी लेकिन वो ये कभी मानेगा , इसकी संभावना बहुत कम थी।

अनजाने में ही डॉली उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करके शायद अपने लिए मुसीबत खड़ी कर चुकी थी, वह अठाइस साल की थी और सुपर क्यूट थी! गदराए जिस्म की लड़की , जिसे जीरो फिगर में कोई दिलचस्पी नही थी! जो भी कहना होता साफ साफ मुँह पर बोलती थी, फिर चाहे कोई रूठे तो रूठे उसकी बला से..!!

वह लिफ्ट में जाने के लिए बढ़ी तो लिफ्ट का दरवाजा बंद होने जा रहा था लेकिन उसके बीच से भी वो राज का चेहरा देखने मे कामयाब हो गयी और उसे देखते ही वह पलटकर फटाफट दूसरी तरफ की सीढ़ियों की ओर दौड़ गयी," जान ही न ले लो भगवान ...! आज तो सच्ची हद कर दी है आपने, ये यहाँ भी!!"

राज भी उसे देख चुका था इसलिए उसने हाथ अड़ा दिया और झट से लिफ्ट से बाहर निकल आया, लेकिन डॉली तेजी से भाग कर एक ओर छिप गयी तो वह फिर लिफ्ट में चढ़ गया और मन ही मन बोला, " लगता है आपसे मुलाकात होनी अभी भी बाकी है।"

उधर डॉली सीढ़ियों के रास्ते ऊपर चढ़ी और बड़बड़ाई, " क्यों भगवान? दुनिया गोल बनानी जरूरी थी, षट्कोण बना देते तो क्या बिगड़ जाता? किसी भी कोने टकराती रहती , कम से कम इससे तो दोबारा नही मिलती! इतनी गालियाँ देने का मन हो रहा है की पूछो मत! ......... नही! नही...!! आपको नही..! उस घमंडी इंसान को! भाड़ में जाये वो..! नीरस , उबाऊ इंसान ..!! मैं कभी दोबारा उससे मिलना नही चाहूँगी।"

डॉली ऊपर गयी तो मिस्टर पांडे उसे मिले और उन्होंने उसे लॉबी में इंतज़ार करने को कहा क्योंकि जिससे उसे मिलवाना था , वो अभी मीटिंग में था।

डॉली लॉबी में इधर उधर टहलने लगी और मन ही मन बोली, " ये काम मिल जाये तो अच्छा होगा! नौकरी सुविधाजनक है, कुछ तो कमाई होगी और वैसे भी सुना है की वो बहुत पैसे वाले हैं।'

इंतजार करते हुए उसे काफी वक्त हो गया तो वह ठंडा पीने के लिए बाहर निकल गयी , जब लौटकर आयी तो पांडे जी को किसी शख्स से बात करते हुए देखा , उसकी पीठ डॉली की तरफ थी लेकिन फिर भी वो उसे परिचित लग रहा था।
 
डॉली ने सिर को हल्का तिरछा करते हुए उसका चेहरा देखने की कोशिश की, तभी उसने पीछे की तरफ मुड़कर देखा तो उसके चेहरे की झलक देखते ही डॉली झट से पीठ फेरते हुए एक तरफ को बढ़ गयी।

राज फिर भी उसे पहचान गया और मन ही मन बोला, " तो तुम वास्तव में यहीं हो!"

हालांकि वो समझ नही पाया कि अगर डॉली यहाँ है भी तो उसे देखकर इतना सुकून क्यों मिला?

राज में कुछ देर तक इंतजार किया फिर बोला, " पांडे जी! क्या आपको वाकई यकीन है कि जो लड़की यहाँ टाइम से नही आई , वो मेरी दादी की केयरटेकर बनकर उनका ध्यान अच्छे से रख पाएगी?"

" निस्संदेह! वो करेगी! वो बहुत ही जिम्मेदार लड़की है, जरूर कुछ परेशानी आ गयी होगी, इसी वजह से वो नही आ पाई।" पांडे जी ने भरोसा दिलाने की कोशिश की।

" ठीक है फिर, यहाँ तो मिलना नही हो सका लेकिन आप पर भरोसा करके मैं उसे एक मौका देने को तैयार हूँ! उसे मेरे घर भेज दीजिएगा क्योंकि मैं अब फ्लाइट से वापस निकल रहा हूं।"

" लेकिन सर वो आज ही..!"

" आज नही कह रहा..! परसों सुबह तक वो घर पहुंच जानी चाहिए।"

" ठीक है सर।"

राज तेजी से एक तरफ को बढ़ गया तो छिपी हुई डॉली ने राहत की साँस ली लेकिन तभी पीछे से एक अभिमानी आवाज टकरायी, " ढंग से छिपी नही हो! नजर आ रही हो।"

डॉली ने आँखे और होंठ भींचते हुए खुद को संयत किया फिर बाहर निकली...., लेकिन वो बोलते हुए आगे बढ़ चुका था और उसका रुकने का कोई इरादा भी नही लग रहा था।

राज ने मुस्कुराते हुए आंखों पर चश्मा चढ़ा लिया था तो वहीं डॉली बहुत ही चिढ़ी हुई थी। वह बाहर निकलकर अपना मिजाज शांत करके कुछ देर बाद पांडे जी की तरफ गयी तो वो उसे डपटते हुए बोले, " बहुत गैर जिम्मेदाराना हरकत की आज तुमने! शुक्र है की इसके बावजूद भी नौकरी मिल गयी लेकिन परसों इस पते पर वक़्त पर पहुँच जाना।"

" ठीक है! थैंक यू पांडे जी।" वो चहकते हुए बोली और खुश होकर बालकनी में आयी, उधर राज को भी कोई मिल गया था तो उससे बात करने में राज को जरा देर हो गयी थी और वह उसी वक़्त कार मे बैठकर कार के शीशे को ऊपर कर रहा था, तभी उसकी नजर ऊपर डॉली पर चली गयी।

राज को देखते ही डॉली ने नाक - भौं सिकोड़ते हुए , मुँह

बिजका दिया और एक तरफ को हटते हुए थूक दिया तो राज का मुँह खुला का खुला रह गया, " हैं..!! ये हुआ क्या? मतलब सिरिअसली, ये लड़की तो हद किये हुए है, मैं कोई इसे तो नही देख रहा था, यूँ ही नजर ऊपर चली गयी थी, इसके दिमाग मे कोई परेशानी तो नही है! मुझसे आज तक इस तरीके की बाते और हरकते किसी ने नही की! ये है कौन ऐसा करने वाली?मतलब थूकना...!! मेरी छोटी अँगुली के बराबर भी नही और अकड़ देखो इस तुनकमिजाज लड़की की..! इसे तो अब मैं बताऊँगा की राज शर्मा है क्या चीज?"
 
राज ने गाड़ी स्टार्ट होते ही किसी को फोन लगाते हुए कहा, " विवेक ! कल शाम को घर पहुँचो, मुझे एक स्कैच बनवाना है।"

" जरूर, मैं आ जाऊंगा। कुछ खास है क्या..?"उधर से पूछा गया।

"हम्म! बहुत ज्यादा खास है!" राज ने व्यंग्य से कहा और गुस्से में उसकी आँखे छोटी हो गयी।

अगले दिन---

डॉली कमरे पर पहुंची और आते ही जस्सी के बगल में बेड पर पसरते हुए बोली, " पानी दे दे बहन!"

जैस्मीन उसे तकिया उठाकर मारते हुए बोली, " तुझे तो घूसे दूँगी! कमबख्त जब वक़्त पर उतर गई थी, बिल्डिंग पर भी पहुंच गई थी तो फिर उससे मिली क्यों नही, ये नौकरी भी छूट जाती तो...?"

"छूटी तो नही न!" डॉली ने बेपरवाही से कहा।

जैस्मीन उसे पानी देते हुए बोली, " पकड़! और बता सारी बात।"

" बात क्या बताऊँ..? मिल गया था प्लेन में एक बंदा!"

" सच्ची! कैसा था..? लम्बा , हैंडसम!"

" तेरा मुँह न तोड़ दूँ अब मैं! क्या फर्क पड़ता है हैंडसम था या नही! अकड़ तो इतनी की पूछ मत! सीधे मुँह तो बात नही कर रहा था। जाने क्या समझ रहा था खुद को? इतना ही कहीं का नवाब है तो खुद का हेलीकॉप्टर खरीद कर घूमे न!

मतलब गलती से मुझसे गलती क्या हो गयी? कायदे से बदला लिया उसने! मुझे गाड़ी से उतरने नही दिया। लेकिन

यकीन जान सच कह रही हूं, अगर उसने मुझसे बद्तमीजी की कोशिश की होती न तो काटकर रख देती हां!"

"किस चीज से..? चाकू तो तू यहाँ छोड़ गयी थी।"

" हाँ तो क्या हुआ? नाखून है, दाँत है! ये सब भी काम के ही हैं! औऱ फिर सेफ्टी पिन तो बैग में भरी हुई थी, पूरे जिस्म में चुभाकर रख देती।"

"हाहाहा..!!" जैस्मीन अब हँसने लगी तो वो बोली, "...... और तो और वो बिल्डिंग में भी मिल गया, जाने क्या हो गया था कल, मैं उसे देखना नही चाह रही थी और वो बार बार नजर के सामने आ ही जाता था।"

जैस्मीन अब मुस्कुराते हुए बोली, " जिस तरह से तू उसके बारे में बात कर रही है न, मुझे तो बहुत मजा आ रहा है! ऐसा लग रहा है तेरे दिमाग पर अपना कब्जा करके गया है वो।"

"आहाहा...!! मैं न कर लूं उसके दिमाग पर कब्जा! वो क्या करेगा..?" डॉली चिढ़कर बोली।

" बता न , कैसा था? हैंडसम था न।"

" होगा ! मैं नही जानती! मेरे लिए इस दुनिया का कोई आदमी मायने नही रखता, ये तुम जानती हो।"

" हर आदमी क्यों? हो सकता है न .....!'

"कुछ नही हो सकता है, कुछ नही...!! जो होना था, हो चुका। मैं पाँच साल पहले हुए उस विश्वासघात को नही भूल सकती , किसी भी आदमी पर भरोसा नही कर सकती! कभीं नही...!!" डॉली ने कहा और उठकर खिड़की पर आ गयी।

तभी ' ममा!' कहते हुए उसका बेटा "विनाश " आया और उसके गले से लग गया, डॉली ने प्यार से उसे गोद मे उठा लिया और उसके चेहरे को स्नेह से चूम लिया।

उधर राज विवेक को उसके चेहरे की बारीकी समझाते हुए उसका स्कैच बनवा रहा था, जब स्कैच बनकर तैयार हुआ तो लगा मानो जीती जागती डॉली उसकी आँखों के सामने थी।

राज ने विवेक को चैक दिया और उसके जाने के बाद स्कैच के गाल पर अँगुली फिराते हुए बोला, "कल मैं तुम्हे ढूंढ निकालूँगा, छोड़ तो तुम्हे नही सकता , मिस तुनकमिजाज , मुझे देखकर थूकने का खामियाजा तो भुगतना होगा।"

वह हटा औऱ शर्ट के बटन खोलने लगा तो शीशे में खुद के चेहरे पर नजर पड़ी और वो शीशे के करीब चला आया, खुद को देखते हुए बोला, " लड़कियाँ एक झलक की दीवानी हैं, राज शर्मा का नाम ही काफी है उनको पागल कर देने के लिए , फिर तुम क्या चीज हो? मुझे मेरे ही आकर्षण पर संदेह करने पर मजबूर कर दिया, इस कदर मुझे अनदेखा करने की मजाल कैसे हुई? परेशानी मेरे आकर्षण में नही है , परेशानी तुम्हारे दिमाग मे है! न देखना तो चलता है, अनदेखा करना स्वभाविक है लेकिन ये मुँह बनाना और वो प्रतिक्रिया मुझसे भुलाए नही भूलेगा, उस रोज जो किया सो किया, अब मेरी बारी है।"
 
अगले दिन डॉली उठकर काम पर चली गयी तो वही दूसरी तरफ राज ने भी अपने आदमियों को डॉली की तस्वीर सेंड करते हुए उसे ढूंढने का आदेश दे दिया।

डॉली जैस्मीन के साथ ही रहती थी तो लगभग आधा दिन बीतने पर राज के आदमियों को डॉली का पता लगा और उन्होंने राज को फोन मिलाया।

"हैलो!"

" सर , वो जिस पते पर गयी है , वो है.........×××××××"

" नॉनसेंस! इम्पॉसिबल...! दोबारा चेक करो।" राज पता

सुनते ही भड़क कर बोला।

उधर से फिर वही आवाज आई, " सर, पक्की ख़बर है, वो इसी पते पर गयी है।"

राज ने फोन काटते हुए कहा, "इसकी इतनी हिम्मत की टकराने से जी नही भरा तो घर मे ही घुस आयी, इसे तो आज अच्छे से सुनाऊंगा, पक्की लालची है ये! घर मे..! वो भी मेरे घर मे......! शातिर लडक़ी को मेरा पता कहाँ से मिला...!"

राज गाड़ी में बैठकर घर के लिए निकल गया और गाड़ी पार्क करके उतरा, उसने दरवाजे से अंदर कदम रखा तो डॉली खाली बर्तन किचन में रखकर बाहर निकलने वाली थी, किचन में दो नौकर भी मौजूद थे।

डॉली ने जब राज को देखा तो वो झट से दीवार के पीछे हो गयी और सिर झटकते हुए बड़बड़ाई, " इतना असर हो गया उस शख्स से उस दिन की बार बार टकराहट का, की अब हर जगह लगता है की वही मौजूद है।"

राज उस वक़्त फोन में कोई मेल देख रहा था इसलिए वह डॉली को नही देख पाया था, उसने सिर ऊपर किया और

फोन रखते हुए अपने कमरे में चला गया।

डॉली ने फिर से सिर निकाल कर झाँका तो वह गायब था, " कोई भी नही है, मुझे यहाँ सावधानी से काम करना होगा, श्रीमती शर्मा भी बहुत नेकदिल है!"

डॉली ने अब सूप को गैस से उतारा और लेकर सुभद्रा देवी के कमरे की तरफ चली तो उसे फिर से एक तरफ से आता हुआ राज नजर आया, फॉर्मल कपड़े डाले हुए वह अपने लंबे डग भरते हुए चला आ रहा था।

डॉली ने एक नौकर को आवाज देते हुए कहा, " सुनो! सिर्फ मेरा वहम है या तुम्हे भी वहाँ कोई नजर आ रहा है क्या?"

" हाँ!" उसने जवाब दिया।

" वो आदमी तुम्हे भी नजर आ रहा है, नेवी ब्लू शर्ट और व्हाइट ट्राउजर में है..?" हैरानी से डॉली ने पूछा।

" हाँ! साहब है ये हमारे! समझ सकता हूँ आपकी मनो:स्थिती, हमारे साहब है ही ऐसे , उन्हें देखकर लड़कियों का यही हाल होता है।" कहते हुए वो हट गया तो डॉली का

मुंह खुला का खुला रह गया और राज के ऊपर देखते देखते वह फटाफट फ्रिज से चिपक गयी।

राज ने आवाज देते हुए कहा, " संतोष , कॉफ़ी ले आइये मेरी!"

" जी साहब!"

राज ड्राइंग रूम की तरफ बढ़ते हुए बोला, " संतोष, घर में कोई बाहरी आया था क्या?"

" नही साहब! बाहरी तो कोई नही, आपने किसी केयरटेकर को रखा है न, सिर्फ वही आयी थी।" संतोष ने जबाब दिया।

"हम्म! ठीक है।"

राज पत्रिका लेकर एक तरफ को गया तो डॉली ने अपने सिर पर जाने कितने थप्पड़ जमा लिए और मन ही मन बोली, " ये इस नागफनी का घर है, भगवान ये तो धोखा है मेरे साथ! फिर उसी दिन की तरह चाल चल दी न! मुझे यहाँ भेजकर आपके दिल को सुकून मिल गया, सच मे दुनिया गोल होने के साथ साथ बहुत छोटी भी है, तभी तो फिर एक दिन बाद ही आमने सामने आ खड़े हुए हैं!"

वह सूप रखते हुए किचन की खिड़की की तरफ देखने लगी और मन ही मन बोली, " मैं यहाँ नही रुकने वाली, यहाँ काम ही नही करना मुझे! रोज रोज इस नागफनी के कांटो को मैं सहन नही कर पाऊंगी, और इसकी दादी के सामने इसकी बेइज्जती करना अच्छा नही लगेगा।

वह संतोष के कॉफी बनाकर निकलते ही खिड़की से बाहर कूद गई और खिड़की बन्द करते हुए जैसे ही मुड़कर भागना चाहा, सामने राज से टकराते टकराते बची।

"धत्त तेरे की..! इसकी टांगो में भी चैन नही रहता क्या? अभी घर के अंदर था न, तो फिर बाहर भटकने की कौन सी आफत मची थी? चैन से भागने भी नही देते लोग!"

राज उसकी तरफ देख रहा था तो डॉली ने भी नजर उठायी और बोली, " सामने आने का कारण जान सकती हूं?"

राज ने जेब मे हाथ रखते हुए कहा, " सवाल मेरे पास भी हैं, खिड़की से कूदने का कारण क्या है? जबकी मेरे घर मे कायदे से दरवाजे लगे हुए हैं!"

" मेरी मर्जी!"

" एक्सक्यूज मी!" राज ने हैरानी से कहा।

" इतने हैरान क्यों हो आप? मुझे आपकी ये शक्ल देखने का जरा भी मन नही था ,इसलिए मैंने बाहर निकलने के लिए ये रास्ता चुना।"

राज ने अपने दाँत जमा लिए और उसे कुछ पल विराम के बाद बोला, " यहाँ आपको काम के लिए रखा गया है! अगर ऐसी हरकतें...!"

" एक मिनट!" वह राज की बात काटकर बोली , " मैं ये काम छोड़ रही हूं। यहाँ आने से पहले मुझे मालूम नही था की ये घर आपका है, लेकिन अब जब जान गई हूँ तो आपके साथ काम करने का मेरा कोई इरादा नही है।"

राज का दिमाग भन्ना उठा, उसे इंकार की आदत नही थी! आजतक किसी ने उसे इंकार नही किया था, उसके किसी भी ऑफर को लोग लपकने को आतुर रहते थे लेकिन जब से ये लड़की नजर आयी थी तबसे उसका दिमागी सुकून दूर हो गया था।

राज ने गुस्से से थूक निगला और बोला, " साबित क्या करना चाह रही हो?"

डॉली ने व्यंग्य से होंठ टेढ़े करते हुए कहा, " आपसे मेरा क्या वास्ता , जो मैं आपको कुछ साबित करना चाहूँगी, गलतफहमियां कम पाला कीजिये।"

ऊपर से सुभद्रा देवी बन्द खिड़की के शीशे से टिकी दोनो को देख रही थी, एक साथ बेहद शानदार नजर आ रहे थे दोनो! डॉली के चेहरे पर दोपहर की धूप पड़ रही थी जिससे उसके गाल लाल हो चुके थे, उसका उज्ज्वल चेहरा बेहद खूबसूरत लग रहा था।

बात करते हुए ही उसने लापरवाही से अपने बालों को समेटते हुए जूडा बना लिया तो दादी मुस्कुरा उठी और मन ही मन बोली, " शायद मेरे पोते की तलाश पूरी हो गयी!"

राज ने उसे जूड़ा बनाते हुए देखा तो उसकी नजर डॉली की सुराहीदार लम्बी गर्दन पर चली गयी , गर्दन पर धूप की वजह से पसीने की बूंदे आ गयी थी , उसकी छोटी नाक पर भी पसीने की कुछ बूंदे थी।

वह उसके लहजे को देखकर वह तिलमिला उठा था लेकिन फिर भी वह उसे जाने नही देना चाहता था! उसकी राहों में

कठिनाई खड़ी करना चाहता था!

उसे रोकने के लिहाज से वह समझदारी से बोला, " मुझे आपसे ऐसी ही आशा थी, अच्छा हुआ की आपको बाहर निकालने का कष्ट मुझे नही करना पड़ा!"

डॉली ने अपनी चिढ़ी हुई निगाह उठायी तो राज थोड़ा झुककर उसकी आँखों मे झांकते हुए बोला, " वैसे किस बात का डर है कि दरवाजे की जगह खिड़की से ही भाग रही थी? खैर ! जानकर बहुत अच्छा लगा कि आप मुझसे डरती है।"

" मैं किसी से नही डरती!"

" मैदान छोड़कर भागने की तैयारी थी, रंगे हाथ पकड़ी भी गई लेकिन अब भी झूठ! च्च.! च्च..!! दया आ रही है आपकी नकली हिम्मत पर!"

डॉली ने कुछ कहने को मुंह खोला तभी राज फिर बोल उठा, " यहाँ आयी हो तो कुछ काम तो किया ही होगा! पेमेंट लेती जाओ , मैं किसी का एहसान नही रखता!"

राज ने पैसे की गड्डी निकाल कर उसकी तरफ बढ़ा दी और बोला, " काम के साथ साथ टिप भी है।"

डॉली ने अब आंखे तरेर कर उसकी तरफ देखा और अकस्मात ही उसके हाथ से पैसे लेकर एक नोट अलग निकाला और बाकी उसके मुँह पर फेंक दिए।

राज ने जेब से हाथ निकालकर उसकी कलाई पकड़ते हुए बेहद गुस्से से गरजते हुए कहा, " ऐसी हरकत की हिम्मत कैसे हुई?"

डॉली भी उसकी आँखों मे देखते हुए एक स्टेप आगे लेकर उसका गिरेबान पकड़ते हुए गरजकर बोली, " आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे टिप देने की? आजतक किसी की इतनी औकात नही होने दी मैंने की वो मुझे टिप दे सके! तो फिर आप कौन है? मैं मेहनत के पैसे छोड़ती नही और भीख के पैसे लेती नही! समझे..! आइंदा याद रहे...!"

राज ने गुस्से से खा जाने वाली नजरो से देखते हुए कहा, " गिरेबान छोड़ो..!!"

" पहले आप कलाई छोड़ो..!!" डॉली ने भी दाँत पीसते हुए कहा।

" क्या कहा? फिर से कहना!" राज ने कहा।

" मैंने कहा पहले मेरी कलाई छोड़िये, तब मैं आपका गिरेबान छोडूँगी।" डॉली ने आंखों में आंख डालकर अपनी बात दोहरा दी।

" जानती हो मैं कौन हूँ, और क्या कर सकता हूँ?"

" अगर मैं नही जानती तो आप भी नही जानते, की आपके हर किये का मुँह तोड़ जवाब दूँगी मैं! ये भ्रम दिमाग से निकाल दीजिएगा की किसी कमजोर - डरपोक लड़की से पाला पड़ा है।"

" समझती क्या हो खुद को? कौन हो तुम?"

" मैं, मैं हूँ! खुद ही खुद की मिसाल।"

" इस तरह की हरकतों से ये सोच रही हो कि मैं आपसे

प्रभावित हो जाऊँगा तो ये भ्रम निकाल देना दिमाग से, क्योंकि इतना आसान शिकार नही हूँ मैं।"

डॉली अब जरा सा हँस दी और बोली, " शिकार इंसानों का नही किया जाता, और आपने खुद को शिकार बताकर खुद को जानवर की उपाधि दे दी!"

डॉली के बोलते ही राज ने जबड़े कसे और साथ ही मुट्ठी भी भींचने को हुआ तब तक डॉली उसके हाव भाव देखते हुए बोल उठी, " सोचना भी मत! जबड़े कसे है तो ठीक है...! लेकिन मुठ्ठी कसी तो उसके बीच मेरी कलाई है......!और मुझे चोट पहुँची तो कसम से ये जो आपके सीने पर बाल नजर आ रहे है न, एक एक बाल उखाड़ फेंकूँगी!"

राज उसके जबाब से चकित रह गया , जाने कैसा दबा हुआ एहसास हुआ, अपनी छाती पर गर्मी का अहसास हुआ और मन ही मन हँसी भी आई की ऐसी बात कहने में ये लड़की जरा भी नही हिचकिचाई, लेकिन प्रत्यक्ष में वह ठंडेपन से बोला, "हिम्मत है...!!"

" आजमा के देख लो!" डॉली ने भी उसकी निग़ाहों में देखते हुए दृढ़ता से कहा।

राज ने उसकी बात सुनकर हँसी रोकने के लिहाज से दूसरी दिशा में देखते हुए होठों को गोल करके हवा बाहर छोड़ दी और साथ ही डॉली की कलाई भी...! तो डॉली ने भी उसके गिरेबान को छोड़कर उसकी शर्ट के खुले तीसरे बटन की तरफ एक नजर देखते हुए कहा, " मेरे साथ उलझने से पहले या तो बटन बन्द कर लिया कीजिये! या फिर उलझने के लिए करीब मत आया कीजिये! हादसे से बचे रहेंगे!"

" घर मेरा है, शरीर मेरा है, शर्ट मेरी है! मुझे खुद को कितना दिखाना है और कितना ढकना है, ये मेरी मर्जी है!"

डॉली उसकी बात को अनसुना करके चल दी तो राज झुंझला उठा, " आखिर इस लड़की की परेशानी क्या है? मुझे इतनी आसानी से नजरअंदाज करके चली कैसे जाती है? कैसे रोकूँ..?"

राज ने बल पड़े माथे पर अंगुलियाँ फिराते हुए दिमाग पर जोर डाला तभी डॉली रुककर बोली, " मिस्टर शर्मा ! अपनी दादी के सामने मुझे भगोड़ा पेश मत कीजियेगा! मैं सच्चाई में यकीन रखती हूं और आप कारण बताने को स्वतंत्र है!"

" मैं नही जानता कारण, और न ही आपका पर्सनल असिस्टेंट हूँ! जिसे मेसेज देना है आप खुद दे दीजिए।" ये कहकर वह लंबे डग भरते हुए अंदर चल दिया तो डॉली ने उसे एक नजर घूरकर देखा फिर पैर पटकते हुए अंदर की तरफ बढ़ गयी।
 
डॉली जैसे ही सीढ़ियों की तरफ बढ़ी, राज पीछे से बोला, " सुनो संतोष!! सिर्फ बेबाक बोलने से कामयाबी हासिल हो जाती तो हर बड़बोला कामयाब हो जाता! काम के पहले ही दिन खिड़की से कूदकर कायरों की तरह भागने वाले अगर ये सोचते हैं कि इस तरीके की हरकतों से भविष्य में वो अच्छा मुकाम हासिल कर लेंगे तो बता दूँ की ऐसे लोगो से कामयाबी कोसो दूर रहती है।"

डॉली के कदम ठिठक गए और वो कदम पीछे लेकर राज के सामने खड़ी हुई तो संतोष हट गया।

राज ने पत्रिका खोलनी चाही तो डॉली ने पत्रिका पकड़ते हुए उसके चेहरे पर नजर जमाते हुए कहा, " जानकर अच्छा लगा की आप मुझसे डायरेक्ट बात कहने से डरते हैं! इतना डर...!!"

राज की नजरें ऊपर उठी और उसने पत्रिका सोफे पर पटकते हुए कहा, " बहुत ज्यादा बोल रही हो आप! बहुत

ज्यादा...!! मेरा नियंत्रण खोने पर मजबूर मत करो मुझे।"

" उफ्फ! माहौल में बहुत गर्मी हो गयी, है न..??" डॉली ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, " मैं आपके संतोष को कह देती हूं की आपको ठंडा पिला दे क्योंकि अब मैं यहाँ से कहीं नही जा रही हूँ और आपको हर दिन अपनी नियंत्रण शक्ति को बढ़ाना होगा, वो क्या है न कि ताने मारना आपको पसन्द होगा लेकिन मैं सामने से छलनी करूँगी आपको! गुड लक..!"

" गुड लककी जरूरत आपको है!" राज ने भी गुस्से से अकड़ते हुए कहा।

दादी ने जब उसे ऊपर आते देखा तो वह झट से लेट गयी और शरीर को ढीला छोड़ दिया, डॉली ने कमरे में जाते हुए उन्हें आवाज दी लेकिन वो नही बोली तो डॉली चिंतित हो उठी।

"मिसेज शर्मा ..! मिसेज शर्मा ...!!" डॉली ने उनके चेहरे को थपथपाते हुए कहा।

वो नही हिली और कोई प्रतिक्रिया नही दी तो डॉली ने दरवाजे से बाहर निकल कर आवाज दी, " मिस्टर एरोगेंट,

ऊपर आइये!"

राज इस नाम से तिलमिला गया और चुपचाप सोफे पर बैठा रहा तो वह दनदनाती हुई नीचे आयी और पत्रिका छीनते हुए बोली, " इस पत्रिका में ऐसा कुछ नही जो आपकी दादी से ज्यादा महत्वपूर्ण हो, आपकी दादी बेहोश हैं!"

राज ने खड़े होकर दो - दो सीढियां कूदकर जाते हुए कहा, "दादी ठीक थी, जरूर आपने ही कुछ किया होगा!"

डॉली भी उसके पीछे पीछे ऊपर चली आयी औऱ कमरे में आकर दादी के पास खड़ी हो गयी। राज बेचैनी से उन्हें उठाने की कोशिश कर रहा था तो डॉली को उसका ये संवेदनशील पक्ष नजर आया, एसी के बावजूद भी चेहरे पर छलकी पसीने की बूंदे और तनाव से भरा उसका चेहरा देखकर डॉली को अच्छा लगा।

" खड़ी होकर क्या कर रही हो? डॉक्टर को फोन करो!" राज ने झल्लाते हुए कहा तो डॉली शांति से बोली, " आपकी तरह पैनिक होने से दादी ठीक नही हो जाएंगी, संतोष ने कर दिया है फोन!"

राज को बेचैन देखकर डॉली ने खिड़कियाँ खोल दी तो

वह गुस्से से खड़ा होता हुआ बोला, " कहां से आई हो की इतना भी नही मालूम की जब एसी चालू हो तो खिड़कियाँ बन्द करके रखते हैं!"

"जहाँ से भी आई हूँ, आपकी तरह दिखावे में यकीन नही रखती! इतना तो पक्का है कि उन्हें घुटन की वजह से ही चक्कर आया होगा! फ्रेश हवा मिलते ही वो होश में आ जाएंगी।" डॉली ने चुपचाप खिड़कियों को खोलकर पर्दे हटाते हुए कहा।

"अपने ये सस्ते नुस्खे यहाँ मत आजमाओ!" राज ने चिढ़कर कहा लेकिन डॉली ने एसी बन्द कर दिया और पंखा ऑन करते हुए पानी का गिलास ले लायी फिर राज की तरफ बढ़ाते हुए बोली, " लीजिये।"

राज ने गिलास को हाथ मारकर फर्श पर गिरा दिया तो डॉली ने जबड़े कस लिए और उसे आग्नेय नेत्रों से देखकर धीरे से दांत जमाते हुए कहा, "अब तो आप मांगो भी तो पानी न दूँ कभी!"

तभी दादी ने आंखे खोल दी तो डॉली मुस्कुराते हुए बोली, " आप ठीक तो है न मिसेज शर्मा ?"

" हाँ! ठीक हूँ, अचानक ही घुटन महसूस होने लगी थी फिर पता ही नही चला की कब बेसुध हो गयी?" सुभद्रा देवी ने बैठने की कोशिश करते हुए कहा तो राज ने उन्हें थामते हुए कहा, " आपने आवाज क्यों नही दी , घुटन हो रही थी तो ! अभी अगर ये नही आती तो...!!" राज ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया और शांत हो गया तो सुभद्रा देवी मुस्कुराते हुए बोली, " तेरी शादी देखे बिना मुझे कुछ नही होने वाला!"

" मेरा तो वैसे भी शादी करने का कोई इरादा नही लेकिन अगर आपके जीने की यही शर्त है तो मैं कभी शादी न करूँ!" राज ने दृढ़ता से कहा।

तभी डॉक्टर ने दरवाजे पर कदम रखा तो डॉली वहाँ से हट गयी और नीचे जाकर सूप गरम करने लगी।

राज परेशान सा खड़ा दोनो को देख रहा था तभी दादी ने डॉक्टर को इशारा किया , डॉक्टर पीछे मुड़ते हुए बोला, " मिस्टर शर्मा आप बाहर जाइये, प्लीज!"

" ठीक है!" राज ने कहा और बाहर निकल गया तो सुभद्रा देवी डॉक्टर से बोली, " अरे हटाइये न ये सब! कुछ नही हुआ मुझे! मुझे तो बस एक ही रोग है और वो है राज की शादी देखने का! सब ड्रामा था!"

डॉक्टर सिंह बोले, " और मैं उन्हें क्या जबाब दूँगा की आपको उनकी शादी का रोग है?"

सुभद्रा देवी मुस्कुरा उठी और बोली, " कह देना की बीपी लो हो गया था। बेवकूफ लड़का इतना भी नही समझता की इस उम्र में केयरटेकर नही लायी जाती, दुल्हन लायी जाती है।"

डॉक्टर सिंह मुस्कुरा उठे और खड़े होते हुए बोले, " ठीक है! चलता हूँ फिर।"

सुभद्रा देवी ने स्वीकृति दे दी तो वह बाहर निकल गए और राज से बात करने लगे।

डॉली ऊपर आयी और बोली, " मिसेज शर्मा ! ये गरमा गरम सूप हाजिर है, पी लीजिये और फिर देखिए आपमे कितनी ऊर्जा आ जायेगी।"

सुभद्रा देवी ने सूप पीते हुए कहा, " बहुत प्यारी हो तुम, लड्डू की तरह।"

"आपको लग रही हूँ प्यारी, लोगो को तो जीरो फिगर की आदत है उन्हें मैं मोटी लगती हूँ!"

"धत्त..! तुम तो सीप से निकली मोती हो! हमेशा ऐसे ही खुश रहो, जीती रहो।"

" नही! नही..!! हमेशा नही जीना मुझे, जब तक हाथ पैर खुद से चला सकूँ, तब तक ही, दूसरो पर बोझ बनकर जीना भी कोई जीना है।"

" ठीक कह रही हो!" सुभद्रा देवी उदासी से बोली तो डॉली को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो माफी मांगने को हुई, तभी राज की आवाज गूंज उठी, " इस तरह की बात कहने की हिम्मत भी कैसे हुई? आप ये जताना चाहती है की दादी आप पर सहारे के लिए निर्भर हैं! या फिर ये की अब उनका जीना बेकार है!"

" राज ...!' सुभद्रा देवी ने उसे आँख दिखाते हुए कहा, तब तक डॉली भी बोल उठी, " मैंने जिंदगी के बारे में अपनी राय रखी थी, उसे दूसरी दिशा में मोड़कर इस तरह फालतू चीखने की जरूरत नही है!"

" आप मुझसे इस तरह बात नही कर सकती!" राज ने नाराजगी से कहा तो डॉली भी तुरंत बोली, " खुद को सम्मान चाहिए तो सामने वाले को भी सम्मान देना सीखिए.... और अगर नही दे सकते तो मुझसे बात ही मत कीजिये!"

सुभद्रा देवी ने अब राज को मुंह खोलते देखा तो बीच मे पड़ते हुए बोली, " अरे!! शांत हो जाओ! पहली मुलाकत औऱ इतनी लड़ाई।"

"किसने कहा की पहली..!"एक साथ कहते कहते दोनो ही रुक गए तो सुभद्रा देवी उन्हें देखने लगी और बोली," पहले भी मिल चुके हो तुम दोनो?"

राज उनके पास बैठते हुए बोला, "हम ये कहना चाह रहे थे की कुछ लोगो से पहली बार मिलकर भी ऐसा लगता है जैसे कितनी बार मिल चुके हों, कुछ वैसा ही! है न..?" कहते हुए राज ने डॉली की तरफ देखा तो डॉली ने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया और मन ही मन बोली, " ये नागफनी तो बात बदलने की कला में बहुत माहिर है, सतर्क रहना होगा, कौन जाने की किस बात का क्या मतलब निकाले।"

उधर सुभद्रा देवी तो राज के मुँह से 'हम' सुनकर एकटक उसका मुंह ही देखे जा रही थी, पहली बार उसने किसी के साथ खुद को जोड़कर हम शब्द का इस्तेमाल किया था।

" क्या हुआ? ऐसे एकटक क्यों देख रही हैं? राज ने पूछा

तो दादी ने नजर हटाते हुए कहा, "कुछ नही! बहुत प्यारी लड़की है,, दुल्हन न सही, केयरटेकर ही सही!"

राज ने उसे एक नजर देखा और मन ही मन कहा, "प्यारी और ये! भूकंप ही न आ जाये ये सुनकर!"

डॉली अपने घर चली आयी तो जस्सी गरमा गरम नूडल देते हुए बोली, " खा ले! कैसा रहा आज का दिन? कैसे लोग है वो? और जिसकी तू केयरटेकर है वो कैसी है, खडूस या स्वीट!!"

डॉली ने नूडल निगलते हुए कहा, "साँस तो ले ले। इतने सवाल?"

जैस्मीन ने मुस्कुराते हुए कहा, " अभी तो एक सवाल बाकी ही है , इजाजत हो तो वो भी पूछ लूँ!"

डॉली ने उसकी तरफ निगाह उठायी तो वह बोली, " मिला था क्या वो भी? फ्लाइट वाला लड़का?"

डॉली ने गहरी साँस भरी और बोली, " हाँ! भगवान ने कसम खायी हुई है कि मेरी जिंदगी सीधी तो चलने नही देंगे।"

"ओये होय सच्ची! कहाँ मिला , बता न!" जैस्मीन ने मुस्कुराते हुए पूछा।

डॉली नूडल खाते हुए बोली, " खुद ही समझ जा!"

"एक मिनट! मतलब तू जहां गयी थी वो..!'

" हम्म! वो उसका ही घर है। इमेजिन कर सकती है की कितना अजीब लगा होगा मुझे उसके सामने!"

" हाय , क्या मुलाकात हुई होगी।"

" बहुत ही वाहियात! उसे देखकर मैं खिड़की से भागने ही जा रही थी और वो सामने था, बहुत गुरुर है उसमें, पर मैं भी किसी को भाव देने वालो में से तो हूँ नही! धो दिया अच्छे से उसे, अब ज्यादा बनने की कोशिश नही करेगा। अमीर होगा अपने लिए, मुझे टिप देने चला था, मुझे! शुक्र करे की उसकी पैसे की गड्डी को बस उड़ाया, फाड़ा नही!"

जैस्मीन ने उसके सिर पर हल्के से चपत जमाते हुए कहा, "शुक्र तू कर की तेरे इस बर्ताव के बाद भी तू सही सलामत यहाँ है , कितनी बार कहा है की शांत रहना सीख! किसी से मत उलझा कर , वो अमीर आदमी है कुछ भी कर सकता है।"

" कुछ कर के तो देखे , जान न ले लूँ उसकी! वैसे कुछ नही करेगा क्योंकि आज की मुलाकात में ही इतना तो समझ गया होगा की उसके इशारों पर नाचने वाली लड़कियों की तरह नही हूँ मै।"

"क्या किया है तूने वहाँ?"

" कुछ ज्यादा नही! उसने कलाई पकड़ ली थी तो मुझे भी मजबूरी में उसकी गिरेबान पर हाथ डालना पड़ा!"

जैस्मीन अपने सीने पर हाथ रखते हुए बोली, " हे भगवान तेरा दिमाग खराब हो गया है! तू काम पर मत जा कल से, कोई और नौकरी ढूंढ दूँगी तेरे लिए।"

"ओए , शांति से बैठी रह! सामने नही आई थी तब तक भाग भी जाती लेकिन अब तो मैं कहीं नही हटने वाली! वैसे भी उस नागफनी से क्या लेना देना है? उसकी दादी की केयरटेकर हूँ न, और वो बहुत प्यारी है।"

" नागफनी! सिरिअसली..!!" जस्सी हँसने लगी और बोली, " वो भी तो घर मे आएगा जाएगा न!"

" तो आये जाए न, उसे रोका किसने है , सिर्फ मुझे न छेड़े वरना आज तो सिर्फ धमकी दी है बाल उखाड़ने की, अगली दफा उखाड़ कर बालतोड़ न करा दिया तो कहना।"

" बाल! मतलब?" जस्सी ने हैरानी से कहा।

" शर्ट के दो नही, तीन बटन खोलकर हीरो बन रहा था, मतलब ऐसे प्रदर्शन की क्या जरूरत है? ढंग से बटन बन्द करके भी तो रह सकता था न!"

"तू सीने के बाल .....! पागल हो गयी है! क्या सोच रहा होगा वो? ऐसे कौन सी लड़की बात करती है?"

"सोचता तब जब मैं उसके सीने की तारीफ में कसीदे पढ़ती, या उससे चिपटती! मैंने ऐसा कुछ नही किया कि वो मेरे बारे में सोचे, बहुत अड़ियल है वो। गारंटी लेती हूं , कुछ नही सोचेगा वो!"

" कैसे?"

" क्योंकि हजारों तारो सितारों के बीच टिमटिमाता एकमात्र चांद जो है वो , ऐसे में एक धूमकेतु जैसी लड़की को क्यों

सोचेगा? शांत रह, सब ठीक है।"

" अशांति लाने वाले काम करती है और कहती है की शांत रह! ये तो सोचा कर की विनाश है तेरे आगे..!"

" विनाश है मेरे आगे इसलिये तो ऐसे काम करती हूँ ताकि कोई भी मुझे पसन्द न करे , मैं चाहती हूँ की जिंदगी में आने वाला हर लड़का नापसंद करे मुझे।"

" सब कुछ चाहने के मुताबिक होता तो फिर बात ही क्या रहती?" जैस्मीन ने कहा, फिर मन ही मन बोली, " तू नही जानती की तेरे इसी रवैये के चलते वो तेरी तरफ और ज्यादा खिंचेगा। जहाँ तक मुझे लगता है वो तेरी तरफ आकर्षित हो भी चुका है! उस रोज उसे बदला ही लेना था तो वो चलती गाड़ी से नीचे फेंक देता या फिर कुछ बद्तमीजी करता लेकिन उसने कार से उतरने तक नही दिया क्योंकि शायद वो कुछ पल का साथ चाहता था।"
 
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