डॉली जैसे ही सीढ़ियों की तरफ बढ़ी, राज पीछे से बोला, " सुनो संतोष!! सिर्फ बेबाक बोलने से कामयाबी हासिल हो जाती तो हर बड़बोला कामयाब हो जाता! काम के पहले ही दिन खिड़की से कूदकर कायरों की तरह भागने वाले अगर ये सोचते हैं कि इस तरीके की हरकतों से भविष्य में वो अच्छा मुकाम हासिल कर लेंगे तो बता दूँ की ऐसे लोगो से कामयाबी कोसो दूर रहती है।"
डॉली के कदम ठिठक गए और वो कदम पीछे लेकर राज के सामने खड़ी हुई तो संतोष हट गया।
राज ने पत्रिका खोलनी चाही तो डॉली ने पत्रिका पकड़ते हुए उसके चेहरे पर नजर जमाते हुए कहा, " जानकर अच्छा लगा की आप मुझसे डायरेक्ट बात कहने से डरते हैं! इतना डर...!!"
राज की नजरें ऊपर उठी और उसने पत्रिका सोफे पर पटकते हुए कहा, " बहुत ज्यादा बोल रही हो आप! बहुत
ज्यादा...!! मेरा नियंत्रण खोने पर मजबूर मत करो मुझे।"
" उफ्फ! माहौल में बहुत गर्मी हो गयी, है न..??" डॉली ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, " मैं आपके संतोष को कह देती हूं की आपको ठंडा पिला दे क्योंकि अब मैं यहाँ से कहीं नही जा रही हूँ और आपको हर दिन अपनी नियंत्रण शक्ति को बढ़ाना होगा, वो क्या है न कि ताने मारना आपको पसन्द होगा लेकिन मैं सामने से छलनी करूँगी आपको! गुड लक..!"
" गुड लककी जरूरत आपको है!" राज ने भी गुस्से से अकड़ते हुए कहा।
दादी ने जब उसे ऊपर आते देखा तो वह झट से लेट गयी और शरीर को ढीला छोड़ दिया, डॉली ने कमरे में जाते हुए उन्हें आवाज दी लेकिन वो नही बोली तो डॉली चिंतित हो उठी।
"मिसेज शर्मा ..! मिसेज शर्मा ...!!" डॉली ने उनके चेहरे को थपथपाते हुए कहा।
वो नही हिली और कोई प्रतिक्रिया नही दी तो डॉली ने दरवाजे से बाहर निकल कर आवाज दी, " मिस्टर एरोगेंट,
ऊपर आइये!"
राज इस नाम से तिलमिला गया और चुपचाप सोफे पर बैठा रहा तो वह दनदनाती हुई नीचे आयी और पत्रिका छीनते हुए बोली, " इस पत्रिका में ऐसा कुछ नही जो आपकी दादी से ज्यादा महत्वपूर्ण हो, आपकी दादी बेहोश हैं!"
राज ने खड़े होकर दो - दो सीढियां कूदकर जाते हुए कहा, "दादी ठीक थी, जरूर आपने ही कुछ किया होगा!"
डॉली भी उसके पीछे पीछे ऊपर चली आयी औऱ कमरे में आकर दादी के पास खड़ी हो गयी। राज बेचैनी से उन्हें उठाने की कोशिश कर रहा था तो डॉली को उसका ये संवेदनशील पक्ष नजर आया, एसी के बावजूद भी चेहरे पर छलकी पसीने की बूंदे और तनाव से भरा उसका चेहरा देखकर डॉली को अच्छा लगा।
" खड़ी होकर क्या कर रही हो? डॉक्टर को फोन करो!" राज ने झल्लाते हुए कहा तो डॉली शांति से बोली, " आपकी तरह पैनिक होने से दादी ठीक नही हो जाएंगी, संतोष ने कर दिया है फोन!"
राज को बेचैन देखकर डॉली ने खिड़कियाँ खोल दी तो
वह गुस्से से खड़ा होता हुआ बोला, " कहां से आई हो की इतना भी नही मालूम की जब एसी चालू हो तो खिड़कियाँ बन्द करके रखते हैं!"
"जहाँ से भी आई हूँ, आपकी तरह दिखावे में यकीन नही रखती! इतना तो पक्का है कि उन्हें घुटन की वजह से ही चक्कर आया होगा! फ्रेश हवा मिलते ही वो होश में आ जाएंगी।" डॉली ने चुपचाप खिड़कियों को खोलकर पर्दे हटाते हुए कहा।
"अपने ये सस्ते नुस्खे यहाँ मत आजमाओ!" राज ने चिढ़कर कहा लेकिन डॉली ने एसी बन्द कर दिया और पंखा ऑन करते हुए पानी का गिलास ले लायी फिर राज की तरफ बढ़ाते हुए बोली, " लीजिये।"
राज ने गिलास को हाथ मारकर फर्श पर गिरा दिया तो डॉली ने जबड़े कस लिए और उसे आग्नेय नेत्रों से देखकर धीरे से दांत जमाते हुए कहा, "अब तो आप मांगो भी तो पानी न दूँ कभी!"
तभी दादी ने आंखे खोल दी तो डॉली मुस्कुराते हुए बोली, " आप ठीक तो है न मिसेज शर्मा ?"
" हाँ! ठीक हूँ, अचानक ही घुटन महसूस होने लगी थी फिर पता ही नही चला की कब बेसुध हो गयी?" सुभद्रा देवी ने बैठने की कोशिश करते हुए कहा तो राज ने उन्हें थामते हुए कहा, " आपने आवाज क्यों नही दी , घुटन हो रही थी तो ! अभी अगर ये नही आती तो...!!" राज ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया और शांत हो गया तो सुभद्रा देवी मुस्कुराते हुए बोली, " तेरी शादी देखे बिना मुझे कुछ नही होने वाला!"
" मेरा तो वैसे भी शादी करने का कोई इरादा नही लेकिन अगर आपके जीने की यही शर्त है तो मैं कभी शादी न करूँ!" राज ने दृढ़ता से कहा।
तभी डॉक्टर ने दरवाजे पर कदम रखा तो डॉली वहाँ से हट गयी और नीचे जाकर सूप गरम करने लगी।
राज परेशान सा खड़ा दोनो को देख रहा था तभी दादी ने डॉक्टर को इशारा किया , डॉक्टर पीछे मुड़ते हुए बोला, " मिस्टर शर्मा आप बाहर जाइये, प्लीज!"
" ठीक है!" राज ने कहा और बाहर निकल गया तो सुभद्रा देवी डॉक्टर से बोली, " अरे हटाइये न ये सब! कुछ नही हुआ मुझे! मुझे तो बस एक ही रोग है और वो है राज की शादी देखने का! सब ड्रामा था!"
डॉक्टर सिंह बोले, " और मैं उन्हें क्या जबाब दूँगा की आपको उनकी शादी का रोग है?"
सुभद्रा देवी मुस्कुरा उठी और बोली, " कह देना की बीपी लो हो गया था। बेवकूफ लड़का इतना भी नही समझता की इस उम्र में केयरटेकर नही लायी जाती, दुल्हन लायी जाती है।"
डॉक्टर सिंह मुस्कुरा उठे और खड़े होते हुए बोले, " ठीक है! चलता हूँ फिर।"
सुभद्रा देवी ने स्वीकृति दे दी तो वह बाहर निकल गए और राज से बात करने लगे।
डॉली ऊपर आयी और बोली, " मिसेज शर्मा ! ये गरमा गरम सूप हाजिर है, पी लीजिये और फिर देखिए आपमे कितनी ऊर्जा आ जायेगी।"
सुभद्रा देवी ने सूप पीते हुए कहा, " बहुत प्यारी हो तुम, लड्डू की तरह।"
"आपको लग रही हूँ प्यारी, लोगो को तो जीरो फिगर की आदत है उन्हें मैं मोटी लगती हूँ!"
"धत्त..! तुम तो सीप से निकली मोती हो! हमेशा ऐसे ही खुश रहो, जीती रहो।"
" नही! नही..!! हमेशा नही जीना मुझे, जब तक हाथ पैर खुद से चला सकूँ, तब तक ही, दूसरो पर बोझ बनकर जीना भी कोई जीना है।"
" ठीक कह रही हो!" सुभद्रा देवी उदासी से बोली तो डॉली को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो माफी मांगने को हुई, तभी राज की आवाज गूंज उठी, " इस तरह की बात कहने की हिम्मत भी कैसे हुई? आप ये जताना चाहती है की दादी आप पर सहारे के लिए निर्भर हैं! या फिर ये की अब उनका जीना बेकार है!"
" राज ...!' सुभद्रा देवी ने उसे आँख दिखाते हुए कहा, तब तक डॉली भी बोल उठी, " मैंने जिंदगी के बारे में अपनी राय रखी थी, उसे दूसरी दिशा में मोड़कर इस तरह फालतू चीखने की जरूरत नही है!"
" आप मुझसे इस तरह बात नही कर सकती!" राज ने नाराजगी से कहा तो डॉली भी तुरंत बोली, " खुद को सम्मान चाहिए तो सामने वाले को भी सम्मान देना सीखिए.... और अगर नही दे सकते तो मुझसे बात ही मत कीजिये!"
सुभद्रा देवी ने अब राज को मुंह खोलते देखा तो बीच मे पड़ते हुए बोली, " अरे!! शांत हो जाओ! पहली मुलाकत औऱ इतनी लड़ाई।"
"किसने कहा की पहली..!"एक साथ कहते कहते दोनो ही रुक गए तो सुभद्रा देवी उन्हें देखने लगी और बोली," पहले भी मिल चुके हो तुम दोनो?"
राज उनके पास बैठते हुए बोला, "हम ये कहना चाह रहे थे की कुछ लोगो से पहली बार मिलकर भी ऐसा लगता है जैसे कितनी बार मिल चुके हों, कुछ वैसा ही! है न..?" कहते हुए राज ने डॉली की तरफ देखा तो डॉली ने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया और मन ही मन बोली, " ये नागफनी तो बात बदलने की कला में बहुत माहिर है, सतर्क रहना होगा, कौन जाने की किस बात का क्या मतलब निकाले।"
उधर सुभद्रा देवी तो राज के मुँह से 'हम' सुनकर एकटक उसका मुंह ही देखे जा रही थी, पहली बार उसने किसी के साथ खुद को जोड़कर हम शब्द का इस्तेमाल किया था।
" क्या हुआ? ऐसे एकटक क्यों देख रही हैं? राज ने पूछा
तो दादी ने नजर हटाते हुए कहा, "कुछ नही! बहुत प्यारी लड़की है,, दुल्हन न सही, केयरटेकर ही सही!"
राज ने उसे एक नजर देखा और मन ही मन कहा, "प्यारी और ये! भूकंप ही न आ जाये ये सुनकर!"
डॉली अपने घर चली आयी तो जस्सी गरमा गरम नूडल देते हुए बोली, " खा ले! कैसा रहा आज का दिन? कैसे लोग है वो? और जिसकी तू केयरटेकर है वो कैसी है, खडूस या स्वीट!!"
डॉली ने नूडल निगलते हुए कहा, "साँस तो ले ले। इतने सवाल?"
जैस्मीन ने मुस्कुराते हुए कहा, " अभी तो एक सवाल बाकी ही है , इजाजत हो तो वो भी पूछ लूँ!"
डॉली ने उसकी तरफ निगाह उठायी तो वह बोली, " मिला था क्या वो भी? फ्लाइट वाला लड़का?"
डॉली ने गहरी साँस भरी और बोली, " हाँ! भगवान ने कसम खायी हुई है कि मेरी जिंदगी सीधी तो चलने नही देंगे।"
"ओये होय सच्ची! कहाँ मिला , बता न!" जैस्मीन ने मुस्कुराते हुए पूछा।
डॉली नूडल खाते हुए बोली, " खुद ही समझ जा!"
"एक मिनट! मतलब तू जहां गयी थी वो..!'
" हम्म! वो उसका ही घर है। इमेजिन कर सकती है की कितना अजीब लगा होगा मुझे उसके सामने!"
" हाय , क्या मुलाकात हुई होगी।"
" बहुत ही वाहियात! उसे देखकर मैं खिड़की से भागने ही जा रही थी और वो सामने था, बहुत गुरुर है उसमें, पर मैं भी किसी को भाव देने वालो में से तो हूँ नही! धो दिया अच्छे से उसे, अब ज्यादा बनने की कोशिश नही करेगा। अमीर होगा अपने लिए, मुझे टिप देने चला था, मुझे! शुक्र करे की उसकी पैसे की गड्डी को बस उड़ाया, फाड़ा नही!"
जैस्मीन ने उसके सिर पर हल्के से चपत जमाते हुए कहा, "शुक्र तू कर की तेरे इस बर्ताव के बाद भी तू सही सलामत यहाँ है , कितनी बार कहा है की शांत रहना सीख! किसी से मत उलझा कर , वो अमीर आदमी है कुछ भी कर सकता है।"
" कुछ कर के तो देखे , जान न ले लूँ उसकी! वैसे कुछ नही करेगा क्योंकि आज की मुलाकात में ही इतना तो समझ गया होगा की उसके इशारों पर नाचने वाली लड़कियों की तरह नही हूँ मै।"
"क्या किया है तूने वहाँ?"
" कुछ ज्यादा नही! उसने कलाई पकड़ ली थी तो मुझे भी मजबूरी में उसकी गिरेबान पर हाथ डालना पड़ा!"
जैस्मीन अपने सीने पर हाथ रखते हुए बोली, " हे भगवान तेरा दिमाग खराब हो गया है! तू काम पर मत जा कल से, कोई और नौकरी ढूंढ दूँगी तेरे लिए।"
"ओए , शांति से बैठी रह! सामने नही आई थी तब तक भाग भी जाती लेकिन अब तो मैं कहीं नही हटने वाली! वैसे भी उस नागफनी से क्या लेना देना है? उसकी दादी की केयरटेकर हूँ न, और वो बहुत प्यारी है।"
" नागफनी! सिरिअसली..!!" जस्सी हँसने लगी और बोली, " वो भी तो घर मे आएगा जाएगा न!"
" तो आये जाए न, उसे रोका किसने है , सिर्फ मुझे न छेड़े वरना आज तो सिर्फ धमकी दी है बाल उखाड़ने की, अगली दफा उखाड़ कर बालतोड़ न करा दिया तो कहना।"
" बाल! मतलब?" जस्सी ने हैरानी से कहा।
" शर्ट के दो नही, तीन बटन खोलकर हीरो बन रहा था, मतलब ऐसे प्रदर्शन की क्या जरूरत है? ढंग से बटन बन्द करके भी तो रह सकता था न!"
"तू सीने के बाल .....! पागल हो गयी है! क्या सोच रहा होगा वो? ऐसे कौन सी लड़की बात करती है?"
"सोचता तब जब मैं उसके सीने की तारीफ में कसीदे पढ़ती, या उससे चिपटती! मैंने ऐसा कुछ नही किया कि वो मेरे बारे में सोचे, बहुत अड़ियल है वो। गारंटी लेती हूं , कुछ नही सोचेगा वो!"
" कैसे?"
" क्योंकि हजारों तारो सितारों के बीच टिमटिमाता एकमात्र चांद जो है वो , ऐसे में एक धूमकेतु जैसी लड़की को क्यों
सोचेगा? शांत रह, सब ठीक है।"
" अशांति लाने वाले काम करती है और कहती है की शांत रह! ये तो सोचा कर की विनाश है तेरे आगे..!"
" विनाश है मेरे आगे इसलिये तो ऐसे काम करती हूँ ताकि कोई भी मुझे पसन्द न करे , मैं चाहती हूँ की जिंदगी में आने वाला हर लड़का नापसंद करे मुझे।"
" सब कुछ चाहने के मुताबिक होता तो फिर बात ही क्या रहती?" जैस्मीन ने कहा, फिर मन ही मन बोली, " तू नही जानती की तेरे इसी रवैये के चलते वो तेरी तरफ और ज्यादा खिंचेगा। जहाँ तक मुझे लगता है वो तेरी तरफ आकर्षित हो भी चुका है! उस रोज उसे बदला ही लेना था तो वो चलती गाड़ी से नीचे फेंक देता या फिर कुछ बद्तमीजी करता लेकिन उसने कार से उतरने तक नही दिया क्योंकि शायद वो कुछ पल का साथ चाहता था।"