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Romance अनमोल अहसास

डॉली ने चादर के अंदर से आँखे इधर उधर करते हुए कहा, " टाइम कैसे पता , इसका मतलब आप जाग रहे थे??"

"बेशक!" राज ने आँख बंद करते हुए कहा, " प्यार के इजहार के बाद मेरे साथ मेरी पत्नी पहली बार अकेले है, मैं सो कैसे सकता था, एक एक पल कीमती था इस रात का!!"

उसकी बात सुनकर डॉली ने चादर को खुद की बॉडी के चारो ओर अच्छे से दबा लिया तो राज इस हरकत को

देखकर छत की तरफ नजर करते हुए मुस्कुरा दिया!

राज कुछ देर बाद उठकर चला गया और डॉली दवा की वजह से फिर नींद की आगोश में चली गयी!

सुबह राज ने विनाश को भेजा तो उसने डॉली को जगाया औऱ बोला, " मम्मा, पापा कह रहे हैं कि नाश्ता करके दवा ले लीजिए फिर सो जाना!"

डॉली ने उसे प्यार करते हुए कहा, " ठीक है, आप जाओ! मैं ब्रश कर लूँ!"

विनाश रूम से बाहर भाग गया तो डॉली सरक कर किनारे तक आ गयी और जमीन पर पैर रखकर जैसे ही दीवार का सहारा लेने को हाथ बढ़ाया, एक जोड़ी बाँह ने उसे ऊपर उठा लिया। डॉली की नजर न उठ सकी औऱ भोर की बात याद करते हुए हया की लाली फिर चेहरे पर बिखर गई!

राज ने उसे बाथरूम तक छोड़ दिया और वहाँ से हटते हुए बोला, " बाहर आना तो आवाज दे देना! मैं आ जाऊँगा।"

डॉली ने दरवाजा बंद कर लिया, उसकी छुअन पिघला देने को काफी थी, बिखर जाने को जी हो उठा था! जाने क्या बदल गया था, न शर्म जा रही थी , न घबराहट, और न ही राज के ख्याल!! एक बेखुदी सी छा रही थी, राज के करीब होने पर! डॉली ने अपने सीने पर हाथ रखते हुए सोचा, "उस वक़्त लबो पर लब अगर रख देता तो जान ही चली जाती!!"

सब कुछ अलग सा था लेकिन फिर भी बहुत खूबसूरत लग रहा था! ये अहसास तो उसने आज तक कभी जीये ही नही थे, जो अहसास उसे अब राज से मिले थे! उसने सोचा ही नही था कि नागफनी का एक रूप इतना नरम भी हो सकता है, इतनी परवाह, इतना प्यार और जताने का भी ऐसा अलग सा अंदाज!! सब कुछ सपने जैसा लग रहा था!! अब तक

इकरार से डरती थी, और अब इकरार के बाद भी डर ही रही थी लेकिन राज ने कोई जल्दबाजी नही दिखाई, उसे उसके कम्फर्ट जोन में रहने दिया तो उसके प्रति डॉली की दीवानगी थोड़ी और बढ़ गयी।

वह बाहर आई तो बोली, " मिस्टर शर्मा !!"

" फिर वही!!" कहते हुए राज हाथ बांध कर खड़ा हो गया।

" मतलब..?" डॉली ने असमंजस से अब उसकी तरफ देखते हुए कहा।

" राज हल्का झुककर उसकी आँखों मे देखते हुए बोला, " मतलब कहा था न मिस्टर शर्मा नही बुलाना।"

" आप ऐसी बहस लेकर बैठेंगे तो मैं खुद ही चल दूँगी हां!" डॉली ने नजर हटाकर आगे कदम बढ़ाने की कोशिश करते हुए कहा लेकिन राज ने उसकी कमर में हाथ फँसाकर उसे चौखट से ही लगाते हुए गहरी आवाज में कहा, " ऐसे कैसे चल देंगी आप मेरे होते हुए! अपनी पत्नी का ध्यान रखना मेरा कर्तव्य है और उससे पीछे मैं नही हटने वाला! लेकिन अपने पति की ख्वाहिशों का ध्यान रखना पत्नी का भी धर्म

है, आप पीछे हट रही हैं!!"

डॉली ने उसके हाथ को हटाने के लिए जोर लगाया तो राज बोला, " जोर जबरदस्ती से आप मुझे हटा ही नही सकती, सिर्फ एक शब्द कहिए और मैं जिद छोड़ दूँगा!"

डॉली ने दूसरी तरफ को मुंह कर लिया और बोली, " मतलब मेरी हालत ठीक नही है फिर भी आपको मेरी कोई परवाह नहीं है!"

" क्यों होनी चाहिए परवाह..?" राज सपाट लहजे में बोला।

" क्योंकि मैं आपकी पत्नी हूँ...!" डॉली झल्लाहट से फौरन बोल गयी।

राज के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और उसने पूछा, " ऐसा है क्या...!!"

डॉली अब अपनी बात पर ध्यान जाते ही उसकी तरफ देखने लगी, उसके हल्के मुस्कुराते होठो पर नजर गयी तो डॉली ने फौरन नजर फेर ली!

" आप हमेशा मुझे बात में फँसाते हैं!" डॉली नाराजगी से बोली और उसके सीने पर मुक्का मारने को हुई लेकिन राज ने उसके हाथ पकड़ लिए औऱ बोला, " जब जानती है कि आप मेरी पत्नी हैं तो फिर मुझे अपना पति कहने में शर्म क्यों आती है....?"

डॉली पलके झपकाते हुए इधर उधर देखने लगी तो राज बोला, " बोलिये तो ले चलता हूँ!"

" मैं अब कुछ नही बोलूंगी!" डॉली ने नाराजगी से कहा तो राज ने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया और बोला, " हैप्पी मॉर्निंग वाइफ!"

डॉली को ये सुनकर मन मे हलचल सी हुई और उसने राज के स्वेट शर्ट को कसकर पकड़ लिया।

राज ने उसकी पकड़ को देखा तो मुस्कुरा दिया औऱ उसे बिस्तर पर रखते हुए उसके कान से अपने होंठ लगाते हुए धीरे से बोला, " कभी इस हलचल को महसूस करने का मौका मुझे भी दीजिये!! अहसासों के समंदर की रवानी तो देख ली, जज्बातों के सैलाब की रवानी कभी महसूस तो करने दीजिए!"

राज के शब्द सुनकर डॉली का पूरा जिस्म रोमांचित हो

उठा, रोम रोम फूट पड़े, औऱ एक झुरझुरी सी बदन में दौड़ गयी! लेकिन उसने अपने अहसासों को छिपा लिया, वह राज के सीने पर हाथ रखकर उसे खुद से दूर करते हुए बोली, " मिस्टर शर्मा !! ऐसे कौन बात करता है, कान से होंठ टच करके मत बोला कीजिये!"

राज उसे गहरी निग़ाहों से एकटक देखते हुए बोला, "अब पता चला कि कैसा महसूस होता है, उस रोज आप भी मेरी गर्दन से होंठ टच करके बोले जा रही थी तो मेरा भी कुछ ऐसा ही रिएक्शन था!"

डॉली खुद को छिपाने की जगह तलाशने लगी, दरवाजे पर ही निगाह लगी हुई थी उसकी और मन ही मन बोली, " सब अकेला क्यों छोड़ देते हैं मुझे मिस्टर शर्मा के साथ, काश जस्सी ही आ जाये!"

तभी डॉक्टर मानवी की आवाज आई तो डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा, " डॉक्टर क्यों आयी हैं?"

राज बेहद हौले से बोला, " तो आपकी ख्वाहिश है कि आपके जख्म की देख रेख मैं ही करूँ..?"

कल की बात याद करके डॉली के गाल सुर्ख हो उठे और

वह झट से बोली, " नही! मैं ऐसा बिल्कुल नही चाहती, आप जाइये न, बहुत काम होंगे आपको!!"

" आपसे जरूरी मेरे लिए कुछ नही!! फिर भी जा रहा हूँ, क्योंकि ये नजरें चुराना और उठाना जब देखता हूँ तो मेरी दीवानगी बढ़ने....."

" अरे डॉक्टर मानवी..!!" डॉली ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा तो राज झट से उठ गया और उस ओर देखा , इतने में डॉली ने चादर खींच कर खुद को चेहरे समेत ढक लिया। राज ने उसकी तरफ देखा तो उसे चादर में ढका पाकर होठ पर जीभ फेरते हुए हँस दिया और बोला, " इन हरकतों से मुझे खुद के और करीब ही खींच रही हो आप!!"

वह बाहर निकल गया औऱ डॉक्टर मानवी अंदर आ गयी, " आपको ठंड लग रही है क्या?"

डॉली चेहरे से चादर हटाते हुए बोली, " हां!"

" कमाल है न डॉक्टर, इतना हॉट हसबैंड है इसका फिर भी...!!" जस्सी ने अंदर आते हुए चुटकी ली तो मानवी मुस्कुरा दी।

डॉली ने आंख दिखाई और फिर जस्सी से दरवाजा बंद करने का इशारा किया!

जब मानवी ने चेकअप कर लिया तो वह बोली, " ज्यादा वक्त नही लगेगा, आप नए साल के दिन खड़ी होने लगेंगी!"

डॉली ने राहत की सांस ली , डॉक्टर बाहर निकल गयी तो जस्सी बैठते हुए बोली, " कैसा रहा कल का दिन?"
 
" हार्ट अटैक वाला!! पहले तो सब ठीक था यार, अब पता नही क्या होने लगा है, उसे देखते ही हार्ट बीट फ़ास्ट हो जाती है, बता रही हूँ मुझे कोई हार्ट प्रॉब्लम हो गयी है!"

" ऐसा है क्या...?" राज ने अंदर आते हुए कहा।

" सत्यानाश! क्या बोल गयी..?" डॉली ने मन ही मन कहा औऱ जस्सी का हाथ पकड़ती रह गयी लेकिन जस्सी भाग गई, उसके मम्मी पापा भी आये हुए थे और दादी से बाते कर रहे थे।

राज नाश्ता आगे रखते हुए बोला, " खाइए! हार्ट प्रॉब्लम का इलाज भी ढूंढेंगे, ये प्रॉब्लम ठीक होने के बाद!"

डॉली बस झेंप कर रह गयी और उसे हटाने की नीयत से प्लेट उठाते हुए बोली, " पानी!!"

"पानी!" सुनकर राज ने निगाह उठायी तब तक डॉली ने भी निगाह उठायी औऱ नजर मिलते ही भोर वाली बात याद करते हुए फौरन बोली, " नही! मैं कह रही थी कि पानी नही चाहिए!! मैं खा रही हूँ!"

राज की नजरों से बचने की कोशिश मे वह प्लेट लेकर दूसरी तरफ घूम गयी तो राज ने एक गिलास पानी उसके पास टेबल पर रख दिया! तभी जस्सी ने बाहर सॉन्ग ऑन कर दिया----

"जानम देख लो मिट गई दूरियाँ, मैं यहाँ हूँ, यहाँ हूँ, यहाँ हूँ , यहाँ!"

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तुम छुपा न सकोगी मैं वो राज हूँ, तुम भुला न सकोगी वो अंदाज हूँ।

गूँजता हूँ जो दिल मे तो हैंरा हो क्यों, मैं तुम्हारे ही दिल की तो आवज हूँ।

सॉन्ग सुनकर डॉली को खाते खाते दसका लग गया और

उसने पानी के लिये हाथ बढ़ाया, उससे पहले ही राज ने गिलास उठाकर उसके होठो से लगाते हुए कहा, " मैं यहाँ हूँ! यहाँ!!"

डॉली का दिल जोरो से धड़क उठा , जी किया कि कसकर राज के सीने से लग जाये, उसने खुद को रोकने के लिए आँख मींच ली और बोली, " प्लीज!!"

राज उसकी चढ़ती उतरती सांसों को देखकर पीछे हट गया और मन ही मन बोला, " अब खुद से आगे बढ़ो इस रिश्ते में, वरना जितना मुझे तड़पाया है, उतना ही अब आप तड़पोगी! जीयो हर अहसास को, जिसे मैं जीता हूँ!! महसूस करो इस दूरी की चुभन को, ख्वाहिशों का गला घोंटने के दर्द को!! करीब तो आऊंगा लेकिन छुउँगा नही, एक बार मजबूरी से नही बल्कि प्यार से सिर को मेरे सीने से तो लगाओ फिर भी सुकून का अहसास न हो तो शिकायत करना!!"

जस्सी अंदर आयी तो डॉली ने उसे मारते हुए कहा, " तू मेरी सहेली है या राज शर्मा की..?"

"अब तो मैं अपने जीजा जी की तरफ ही रहूँगी!"

" जीजा जी..!!"

" हां तो तू मेरी बहन है तो वो तो जीजा जी ही हुए न!"

"चुप कर! सारे के सारे उसकी तरफ हो रखे हो!"

" तू भी शामिल हो जा हमारे ग्रुप में! बढ़ न उसकी तरफ!!"

" जस्सी!! मुँह तोड़ दूँगी हां!" वो झेंपते हुए बोली।

जस्सी ने उसे नहला धुलाकर ड्रेस चेंज की , फिर बाल बनाने लगी तो सॉन्ग ऑन कर दिया!

सजना है मुझे सजना के लिए

सजना है मुझे सजना के लिए

ज़रा उलझी लटें संवार दूं

हर अंग का रंग निखार लूँ

के सजना है मुझे सजना के लिए

सजना है मुझे सजना के लिए

डॉली उसे घूरने लगी तो जस्सी बोली - " क्या है?"

"तुझे आज गाने चलाने का भूत कुछ ज्यादा ही नही चढ़ा!"

" तो क्या हुआ? मेरा सलेक्शन देख, कितने खूबसूरत गाने चला रही हूं!"

" ज्यादा नशा छाया है न तो समीर के सामने चला ले ये सब सॉन्ग!"

जस्सी उसकी चोटी खींचते हुए बोली, " समीर कहाँ से आ

गया बीच मे..? मैंने तो राज का नाम भी नही लिया, मतलब अब सॉन्ग को भी तू उससे रिलेट कर रही है, वाह जी वाह क्या मदहोशी छाती जा रही है तुझ पर..! उसकी दीवानगी की!!"

पानी पड़े तन पे तो शोले निकले

जाने कैसे अगन में बदन जले

पानी पड़े तन पे तो शोले निकले

जाने कैसे अगन में बदन जले

दिन भर की थकान उतार लूँ

हर अंग का रंग निखार लून

के सजना है मुझे सजना के लिए

सजना है मुझे सजना के लिए

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राज सॉन्ग सुनकर बाहर नाश्ता करते हुए मुस्कुरा उठा, सुभद्रा देवी उसे देखते हुए बोली, " विनाश बच्चे, पापा आजकल कुछ ज्यादा ही मुस्कुराने नही लगे हैं!!"

विनाश उसे देखते हुए बोला, " हाँ! मुस्कुरा तो रहे है, पर मुझे कारण पता है!"

" क्या..?" राज चौंक कर बोला।

विनाश सुभद्रा देवी की तरफ देखकर बोला, " हां! दादी मैं सोते वक्त जैसे माँ को पैर मारकर परेशान करता हूँ न, वैसे ही मां भी इनको मारकर परेशान करती होंगी, अब पैर में चोट लगी है तो वो मार नही पा रही होंगी इसीलिए पापा खुश हैं।"

राज झेंपते हुए पानी पीने लगा तो विनाश बोला, " मैं सही कह रहा हूँ न पापा!"

" खाते वक़्त बोलते नही बेटा!!" राज नजर उठाये बिना ही बोला।

सुभद्रा देवी अब मंद मंद मुस्कुराते हुए मन ही मन बोली, " उम्मीद करती हूँ कि अब दोनो के बीच की परेशानियाँ दूर हो गयी होंगी!"

राज नाश्ता करके ऑफिस चला गया। जस्सी, सुभद्रा देवी, मिस्टर एंड मिसेज मान और विनाश डॉली के पास बैठकर गप्पे लड़ाने लगे, कुछ देर में डॉली को नींद आने लगी तो सब हट गए और दरवाजा लगा दिया।

कुछ दिन इसी तरह बीत गए और सब नए साल के जश्न का

प्रोग्राम बना रहे थे!इधर डॉली अब खड़ी होने लगी थी, टाँके लगभग गल चुके थे और आराम महसूस हो रहा था! मिहिर और मिस्टर मान ने भी बात करके जस्सी और समीर की शादी तय कर दी थी, 14 जनवरी को दोनो की सगाई थी और 19 को शादी!!

आज 31 दिसम्बर की रात थी, डॉली सो चुकी थी तो राज भी लैपटॉप पर काम करते हुए थककर सो गया था। रात में डॉली की आँख खुली तो उसने लैपटॉप हटा कर रखा औऱ राज के सिर के पीछे तकिया लगा दिया! सोये हुए राज के चेहरे पर नजर गयी तो वह उसे एकटक देखने लगी और बोली, " जाने कैसे कैसे अहसास भर दिए हैं तुमने मुझ में, अब तक मां बनने का एहसास ही जीया था, लेकिन बाकी सारे अहसास बस तुमसे....!! बहुत खुशगवार हो गयी है जिंदगी आपके दिये इन अहसासों से!! लेकिन अपने आप से ही नजरें चुरा रही हूं क्योंकि पहले बहुत कुछ कहा है तुम्हे! अपनी हर बात से पलटकर आज जब आपके ख्यालो से बाहर ही नही आ पाती तो हिचकिचाहट सी होती है!!"

उसने हाथ बढ़ाकर राज के होठ को अँगुली से छुआ और धीरे से बोली, " कैसे कहूँ की जस्सी जो कहती है, बिल्कुल सही कहती है; हॉट नही, अंगार हो तुम!!"

तभी राज की भौंहे सिकुड़ गयी तो वह घबराहट से हाथ

हटाते हुए रजाई ओढ़ाकर जैसे ही हाथ हटाने को हुई राज ने कलाई पकड़ते हुए आँख खोल दी और कहा, " हमेशा रज़ाई ओढ़ाना जरूरी थोड़े है , कभी अपना प्रेम ही ओढ़ा देने का इरादा नही होता!! जब इरादा कुछ और है तो हरकत कुछ और क्यों...?"

डॉली उससे हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन राज उसके चेहरे पर नजर डालते हुए बोला, " एक रोज किसी ने मुझसे कहा था कि जो आपकी मोहब्बत के सैलाब में बहना चाहती है वो और लड़कियाँ होंगी, मैं उनमें से नही!! लेकिन अब ऐसा क्यो लग रहा है कि कोई है जो अपनी बात से हटकर मेरी मोहब्बत के सैलाब में बहने को अधीर है।"

डॉली ने अपनी आँखें मींच ली क्योंकि राज हाथ छोड़ ही नही रहा था, वह मन ही मन बोली, " तेरी बातों की टाइमिंग बहुत खराब है डॉली, सब सुन लिया इसने तो! अब क्या सोचेगा ये!!"

उसने झट से अपने दूसरे हाथ से रजाई खींचनी चाही तो राज ने रजाई को भी पकड़ लिया, डॉली का चेहरा गुलाबी हो उठा था, चेहरा जल उठा था। छिपने को कुछ न मिलने की सूरत में अब हारकर वह हथेली से आधे चेहरे को छिपाते हुए राज के सीने से लग गयी! तभी बाहर पटाखे

चलने लगे तो घड़ी की तरफ ध्यान गया, बारह बज रहे थे!

राज ने मुस्कुराते हुए उसकी कलाई छोड़ दी और बोला, " आपका नए साल का ये तोहफा मुझे बहुत पसंद आया। इससे अच्छा गिफ्ट हो ही नही सकता था।"

कलाई छूटते ही वह फौरन राज से अलग हो गयी तो राज बोला, " आपका गिफ्ट जरूर दूँगा, पर अभी नही!!"
 
अगले दिन सुबह राज उठा तो डॉली गायब थी, राज ने बाल सेट करते हुए कहा, " गलत बात! सुबह सुबह अपना चेहरा तक नही देखने दिया, नया साल है आपका चेहरा देखना था सबसे पहले।"

राज बिस्तर से नीचे उतरा की तभी बाथरूम के दरवाजे के खुलने की आवाज के साथ डॉली नजर आयी, राज ने शादी की रात जो रेड गाउन उसे गिफ्ट किया था, वो गाउन उसने आज पहली बार पहना था। बेहद हसीन लग रही थी वो उसमें।"

राज की तो पल भर को पलक ही नही झपकी, फिर वह निगाह हटाते हुए आगे बढ़ गया तो डॉली उसे देखती रह गयी, " अब क्या हुआ इसे? मुझे तो लगा था कि खुश हो

जाएगा अपना गिफ्ट देखकर! अब क्यों इग्नोर कर रहा है...?"

राज बाथरूम से बाहर आया और शीशे के सामने खड़ा होकर तैयार होने लगा! शीशे के सामने बैठकर बाल सँवारती डॉली की तरफ एक बार भी नही देखा, डॉली वहां से हट गई औऱ धीरे धीरे संतुलित चाल के साथ बाहर आई तो विनाश उससे लिपट गया!!

" आप बहुत ब्यूटीफुल लग रही हो आज।" वह उसे किस करते हुए बोला।

डॉली ने भी किस करते हुए उसे गोद मे उठाना चाहा तभी राज ने विनाश को उठाते हुए धीरे से कहा, " अभी ही सही हुई हैं, थोड़ा एहतियात जरूरी है अभी।"

फिर विनाश से बोला, " हैप्पी न्यू ईयर बेटा!"

" हैप्पी न्यू ईयर पापा! लव यू!" विनाश ने उसे किस करते हुए कहा।

" लव यू सो मच!" राज ने उसे प्यार करते हुए कहा।

सुभद्रा देवी हॉल में आई तो उन्होंने आशीर्वाद लिया, सुभद्रा

देवी बहुत खुश थी, उन्होंने सदका उतारते हुए कहा, " बंधन कभी न टूटे, हमेशा साथ रहो।"

उसी वक़्त जस्सी अंदर आयी, तभी समीर भी चला आया तो दादी बोली, " आ गए दोनो कबूतर! तुम्हारी जोड़ी भी जल्दी ही बने!"

राज और समीर विनाश के साथ नाश्ते की टेबल की तरफ बढ़ गए तो

जस्सी डॉली के गले लगते हुए बोली, " ओ माई गॉड! कितनी प्यारी लग रही है!"

उसने अलग होकर डॉली को काजल लगाते हुए कहा, " मिस्टर शर्मा तो आज बेहोश ही हो गए होंगे न!"

" नही! पता नही क्या हो गया आज उसे फिर से!! मुझे इग्नोर कर रहा था यार! जैसे एक्सीडेंट से पहले किया करता था।"

वहीं खड़ी सुभद्रा देवी की मुस्कान ये सुनकर रुक गयी और मुड़कर एक नजर राज की तरफ देखते हुए मन ही मन बोली, " ये नही सुधरेगा!"

वह आगे बढ़ी और डॉली से बोली, " वो ऐसा ही है बचपन से, जब तक उसे मनाया न जाये , वो मानता नही!"

" पर वो तो बहुत अच्छे से बिहेव कर रहे थे!" डॉली ने तुंरन्त कहा।

" वो यही करता है, किसी को चोट आ जाये तो ऐसे बिहेव करता है कि लगता है की नाराज ही नही है, खूब सेवा करता है लेकिन ठीक होते ही फिर अपनी नाराजगी दिखाने लगता है।"

" क्यों..? और ये कैसी नाराजगी है, नॉर्मल बात कर लो फिर नाराज हो जाओ!" डॉली असमंजस से बोली।

सुभद्रा देवी सिर हिलाते हुए बोली, " राज शर्मा है न, नाराजगी का भी अलग ही अंदाज है! तबियत खराब होने पर चाहता नही है की ध्यान किसी और तरफ जाए या सामने वाला इंसान परेशान हो उसकी वजह से, इसीलिए बिल्कुल नॉर्मल बिहेव करने लगता है, जितना हो सके उतना हंसाता है, खुश रखता है! ठीक हो जाने पर फिर अपनी नाराजगी जताने लगता है!"

डॉली राज की तरफ देखने लगी, जो बैठकर समीर और

विनाश के साथ बातें करते हुए हँस रहा था!

" अब क्या होगा..? मैं तो सोच रही थी कि ये मान गया है! मैं कैसे मनाऊँगी...? अब तो गाड़ी लेकर भी नही निकल सकती, खुद ही जान ले लेगा मेरी! इतना सब होने के बाद इसे मनाना यानि पहाड़ काटकर रास्ता बनाना!राज समीर के साथ ऑफिस की पार्टी अरेंजमेंट्स देखने चला गया, दादी भी विनाश को लेकर बाहर जाते हुए बोली, " मैं और विनाश न्यू ईयर सेलिब्रेट करने जा रहे है, बाहर से घूम फिरकर मस्ती करके आएंगे।"

डॉली और जस्सी एक दूसरे की शक्ल देखकर मुस्कुरा दी, सबके जाने के बाद उन्होंने सन्तोष और सज्जन को भी छुट्टी दे दी, डॉली चेंज कर आई, फिर दोनो कुछ डिश बनाते हुए बातें करने लगी।

डॉली मालपुए का घोल बनाते हुए बोली, " मिस्टर शर्मा का गुस्सा है या कोई सामान, की सहूलियत के हिसाब से किनारे रख दिया और जब काम खत्म हुआ तो साइड से उठाकर नाक पर रख लिया! मतलब ये कैसा गुस्सा है..?"

जस्सी किचन से बाहर निकल गयी और कुछ देर बाद सॉन्ग ऑन करते हुए डॉली को बाहर खींच लिया, डॉली उसे देखकर हँसने लगी, फिर दोनो हल्का डाँस करने लगी।

डॉली माथे पर हाथ मारते हुए गाने की लाइंस गुनगुनायी

कैसा तेरा प्यार, कैसा गुस्सा है तेरा

तौबा सनम, तौबा सनम

जस्सी अकड़ते हुए बोली---

अरे जैसा मेरा प्यार, वैसा गुस्सा है मेरा

तेरी कसम, तेरी कसम

इक दिल्लगी मैंने की थी

तूने तो दिल पे लगा ली

शीशे जैसा टूटा, ऐसे जो तू रूठा

ऐसा हुआ क्या सितम

तौबा सनम, तौबा सनम

मैं एक तेरा दीवाना

देखे तुझे क्यों ज़माना

देखे मेरे नैना, दिल में छुपके रहना

रखना ना बाहर कदम

मेरी कसम, मेरी कसम

तौबा सनम, तौबा सनम

अपनी खता मैंने मानी

अब छोड़ भी ये कहानी

तू भी मुस्कुरा दे, मुझे भी हँसा दे

ओ मेरे अच्छे बलम

मेरी कसम, मेरी कसम

ओ कैसा तेरा प्यार...

---

जस्सी अब उसके गले मे बाँह फँसाते हुए बोली, " तेरा पति आएगा तो यही सॉन्ग चला दियो!"

" रहने दे!"

" अच्छा उसे कुछ और सुनना है न तो बलम कह दे!"

डॉली ने उसके सिर पर मारते हुए कहा, "हट! बलम!! कैसा लग रहा है सुनने में, मैं नही बोलने वाली ऐसा कुछ!!"

" तो प्राणनाथ या स्वामी कैसा रहेगा...?" जस्सी आंखे बड़ी करते हुए बोली।

" तू ही कहना समीर को समीर स्वामी!! प्राणनाथ समीर!!" डॉली ने एक्टिंग करते हुए कहा तो जस्सी सोफे पर बैठ गयी और हँसने लगी, " तू भी न! क्या मस्त लगेगा इसी टोन में जब तू कहेगी स्वामी! स्वामी!! स्वामी राज !! ओ प्राणनाथ!!"

डॉली ने उस पर आलू फेंक दिया और बोली, " चुप कर!! गलती से आ गए न दोनो तो एक तो कहेगा , " ऐसा है क्या...?"

" हाँ, ऐसा ही है।" जस्सी हथेली पर ठोड़ी टिकाते हुए बोली।

" तो बस इतना कि अब से मैं भी तुम्हे प्राण प्रिया बोलूंगा।" डॉली ने एक्टिंग करते हुए कहा।

" प्राणप्रिया....!!" जस्सी ने कहा और फिर सोफे पर गोल होते हुए हँसने लगी, अम्वेषा भी मुस्कुराते हुए किचन में काम करने लगी।

जस्सी आकर कचौड़ी तलते हुए बोली, " कैसे मनाएगी...?"

" मेरा दिमाग काम नही कर रहा! प्यार की बातों से तो मुझे शरम आने लगती है! लड़कर ही देखूंगी!"

" मेरी लड़ाका डॉली! लड़ना नही है, कोई सॉन्ग ही चुन न, जिस पर हॉट शॉट डाँस करके उसे मना सके।"

" अभी मैं पैर की वजह से ज्यादा डाँस नही कर सकती, और हॉट शॉट डाँस न तू अपने समीर के लिए रख।"

" मैं तो करूँगी ही!"

" तो कर, मेरे बस का नही।"

" क्यों नही! मेरी मान तो दिलबर दिलबर पर ही कर ले!! शादी की याद ताजी हो जाएगी, अरमान मचल उठेंगे तो खुद ही नाराजगी भूल जाएगा।"

"जस्सी!! अब तो तू गयी!" कहते हुए डॉली ने उस पर पानी फेंक दिया।

" अरे!!" कहते हुए जस्सी पीछे भाग गई और गाना चलाते हुए बोली, आजा, इस गाने पर करना डाँस जीजा जी के सामने!"

तुने ओ रंगीले कैसा जादू किया

पिया पिया बोले मतवाला जिया

बाहों में छुपाके ये क्या किया, ओ रे पिया

पास बुला के, गले से लगा के

तुने तो बदल डाली दुनिया

नए हैं नजारे, नए हैं इशारे

रही ना वो कल वाली दुनिया

सपने दिखाके ये क्या किया, ओ रे पिया

............. .............

.............. ...........

ओ मेरे साजन, कैसी ये धड़कन

शोर मचाने लगी मन में

जस्सी नाचती रही, डॉली पुए बनाने लगी तभी जस्सी ने डॉली को भी खींच लिया, जस्सी औऱ डॉली लहराते हुए घूमी तभी राज और समीर लौट आये।

जैसे लहराए नदिया का पानी

लहर उठे रे मेरे तन में

मुझमें समाके ये क्या किया, ओ रे पिया

........... ...............

समीर जस्सी को देखने लगा और राज ने एक नजर डॉली की तरफ देख नजर हटा ली, फिर कमरे की तरफ बढ़ गया।

डॉली किचन में चली गयी तो जस्सी भी आंखे गोल करते हुए सॉन्ग बन्द करके किचन में भाग गई। समीर मुस्कुराते हुए वहीं चला आया, " खुशबू आ रही है भाभी , क्या पक रहा है..?"

" यहाँ तो मालपुए बन रहे हैं लेकिन आपके मन मे धीमा धीमा इश्क पक रहा है!" डॉली ने नजर उठाते हुए कहा तो समीर ने जस्सी की तरफ देखा और बोला, " मेरे ही मन की बात बताएंगी या कभी अपनी सखी के मन की भी!!"

" अब तो कुछ दिनों की ही बात है फिर दोनो खुद ही एक दूसरे को मन की बात बताना!"

डॉली ने जस्सी की तरफ देखते हुए कहा, " समीर को सर्व कर दो!" कहते हुए वह वहाँ से हट गई तो समीर बोला, " नजर जरा इधर भी पड़ जाए तो ये मुरझाया इंसान खिल उठे।"

जस्सी हँस पड़ी और उसे देखते हुए बोली, " बताऊँ अभी, बड़े आये मुरझाने वाले, फूल नही हो, इंसान हो।"

" तुम तो ऐसे हँस रही हो तो खिला हुआ फूल ही लग रही हो!"

जस्सी मुस्कुराते हुए बोली, " हैप्पी न्यू ईयर!"

" आज भी रूखे सूखे, गले तो लगती कम से कम!"

जस्सी ने उसे प्लेट पकड़ाते हुए कहा, " जाइये।"

समीर मन मारकर जैसे ही जाने को हुआ, जस्सी ने टोका, " सुनो!"
 
समीर ने पलटकर देखा तो जस्सी ने फ्लाइंग किस देते हुए नजर फेर ली, समीर ने अपने सीने पर हाथ रख लिया आंखे बंद करके मुस्कुरा उठा।

डॉली कमरे में आई और राज की तरफ देखकर बोली, " चेंज कर लिया है तो आकर लंच कर लीजिए।"

" मेरा मन नही है!"

डॉली ने आगे बढ़कर उसकी फाइल छीन ली और बोली, " चलिए अब!"

" डॉली !! फाइल दीजिये।"

" पहले आप लंच कीजिये।"

" नही करूँ तो!!"

" तो फाइल जला दूँगी।"

राज उसे घूरने लगा तो डॉली भी निग़ाहों में देखती रही और कुछ पल बाद बोली, " हो गया घूरना, घूरने से ही पेट

भर गया या लंच की जगह बाकी है पेट मे??"

राज ने नजर हटा ली और मन ही मन सोचने लगा, " ये शरमाना छोड़कर फिर उल्कापिंड कैसे बन गयी?"

वह उठकर बाहर बढ़ गया तो डॉली ने उसे सर्व कर दिया, चारो ने साथ बैठकर खाना खाया फिर राज कमरे में आ गया।

शाम को राज सीसीटीवी कैमरा की फुटेज चलाकर जस्सी और डॉली का डाँस और उनकी मस्ती देखने लगा, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी लेकिन तभी कदमो की आहट हुई तो वो शांत हो गया!

डॉली ने अंदर आकर विनाश की ड्रेस चेंज की फिर उसे कमरे से बाहर भेज दिया और खुद भी चेंज कर लिया।

पार्टी के लिए सब होटल गए तो डॉली खाने से पहले स्टेज पर गयी और राज को देखते हुए सॉन्ग गाने लगी....

ज़माने की सारी ख़ुशी मिल गयी है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गई है

ज़माने की सारी ख़ुशी मिल गई है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गई है

तुम्हे पा के ऐसा हमें लग रहा है

तुम्हे पा के ऐसा हमें लग रहा है

के जैसे कसम से जहाँ पा लिया है

कमी ज़िंदगी में नही कोई भी अब

तुम्हे देके रबने हमे दे दिया सब

हमें एक नई रोशनी मिल गयी है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गयी है

डॉली चुप हो गयी तो राज मंच पर चला आया और आगे की सॉन्ग की लाइंस खुद गाने लगा।

ये रिश्ता ना टूटेगा जन्मो जनम तक

ये रिश्ता ना टूटेगा जन्मो जनम तक

जुदाई का साया ना आएगा हम तक

कसम से करेंगे मोहब्बत हम ऐसी

किसी ने किसी से ना की होगी अब तक

हमें रात फूलो भरी मिल गयी है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गयी है

तरसते लबो को हँसी मिल गयी है

तरसते लबो को हँसी मिल गयी है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गयी है

ज़माने की सारी ख़ुशी मिल गई है

हमें तुम मिले ज़िंदगी मिल गई है
 
दोनो को देखकर कोई कह नही सकता था कि उनके बीच कोई मनमुटाव है! पार्टी के बाद सब घर लौट गए, राज चेंज करने के बाद बेड पर बैठकर मैगजीन पलटने लगा तभी उसने जैसे ही डॉली को अंदर आते देखा तो नजर हटा ली लेकिन डॉली अलमारी से कपड़े निकालने के बाद भी जब बाथरूम की तरफ नही गयी तो राज ने नजर उठायी। डॉली ने जो गाउन पहना था उसमें बटन थे, उसे अपनी गाउन का एक बटन खोलते देखा तो राज उसे टोकते हुए बोला, " क्या कर रही हो आप..?"

" आपको नजर नही आ रहा!"

" मतलब नजर आ रहा है पर इस तरह....!! आप बाथरूम में चली जाइये न!"

" क्यों? मेरा कमरा है मेरी मर्जी!!"

" आपका अकेले का नही, मेरा भी कमरा है और इस वक़्त मैं मौजूद हूँ यहाँ!"

" मुझे तो नजर ही नही आए आप!!"

" अब आ गया न!"

" बोलकर जबरदस्ती कोई खुद की तरफ ध्यान दिलाएगा तो क्या ही कहें?"

राज ने निगाह उसकी तरफ उठायी तो वह भी निगाह मिलाते हुए बोली, " क्या हुआ? मेरा एक जरा सी हरकत से आपकी साँस क्यों रुक गयी? आप तो तीन तीन बटन खोलकर घूमते हैं, मैं तो बिल्कुल असहज नही होती!!"

डॉली को ठीक अपने सामने और करीब देखकर राज ने नियंत्रण खोने के डर से नजर हटाते हुए हटना चाहा तो डॉली चेहरा पकड़कर अपनी तरफ करते हुए बोली, " मान रहे हो कि नही!!"

" मना रही हो या गुंडागर्दी कर रही हो आप..?" राज उसकी आँखों मे देखते हुए ही बोला।

" डॉली छाप यूनिक स्टाइल है ये, जैसे आपकी नाराजगी का तरीका अलग है, वैसे मेरे मनाने का तरीका अलग है!"

" ऐसा है क्या...?"

" हां ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि मैं नही मानने वाला!"

" होते कौन हैं आप न मानने वाले!"

" एक्सक्यूज मी!!" राज उसका लहजा देखकर हैरानी से बोला।

" नो एक्सक्यूज!! मैं अपने पति से बात कर रही हूं, और वो मेरे मनाने से न माने ऐसा हो ही नही सकता!"

" अपने पति!!" सुनकर राज के मन मे गुदगुदी सी हुई लेकिन वो अपने मचल उठे मन को रोकते हुए नजर फेरकर बोला, " मैं राज शर्मा हूँ.....! मेरी मर्जी...!!"

डॉली ने फिर उसका चेहरा खुद की तरफ करते हुए कहा, "

तो मिस्टर शर्मा से बात कर कौन रहा है, मैं तो अपने नागफनी से बात कर रही हूँ! मेरे और मेरे पति के बीच आने का हक बिजनेस मैन राज शर्मा को दिया किसने...??"

राज की नाराजगी अब डॉली के इस अंदाज की वजह से मिटती जा रही थी! वह खुद को रोकना चाह रहा था इसलिए हटने लगा लेकिन डॉली ने उसकी बाँह थामते हुए कहा, " चोर हो तुम..!!"

राज बढ़े हुए कदम वापस लेते हुए उसकी आँखों मे देखकर बोला " ऐसा है क्या..??"

" हां , दिल जो चुरा लिया मेरा!!" डॉली ने भी उसकी नजर से नजर मिलाते हुए जवाब दिया।

" हम्म तो बस इतना की जब चोर करार दे ही दिया है तो अब तो कुछ खुलकर चोरी करूँगा!!" कहते हुए राज उसके चेहरे पर झुक गया!!

" हटो..!! आप भी न..!! बहुत बुरे हो! औऱ सारी आदतें भी बुरी है!!" डॉली ने उसे खुद से दूर धकेलते हुए कहा, राज की करीबी से उसका पूरा बदन जल उठा था।

" ऐसा है क्या...?" राज उसे करीब खींचते हुए उसकी निगाहों में झांकते हुए बोला।

" हां, ऐसा ही है।"

" तो पहले भी कहा है कि मेरी आदत में आप भी शामिल हैं!" कहते हुए राज ने दिल मे उठते तूफान को न रोक पाने की सूरत में उसके जलते बदन को अपनी बाहों के घेरे में लेकर कसकर उसके होंठ पर प्यार भरा चुम्बन जड़ दिया। प्यार की तपिश से आज उसका मन पिघल उठा था, राज के दिल ने आज अपनी चला ही ली थी और उसके दिमाग को मात दे दी थी!

डॉली के बदन में सिहरन सी उठी जिससे उसकी पकड़ राज के कंधे पर कस गयी, राज के आस पास होने से आजकल उसे जो प्यास महसूस होने लगती थी, वो आज राज के इस प्यार भरे हस्ताक्षर से कुछ कम हो गयी थी!

राज उससे अलग हुआ तो डॉली के शर्म से गुलाबी चेहरे पर नजर दौड़ाई, डॉली मुड़ने के भागने के चक्कर मे थी! वह शर्म से पानी पानी हो रही थी लेकिन राज ने उसकी दोनो बाँह पकड़ ली और उसके पीछे करीब लगकर आ खड़ा हुआ! डॉली की पीठ राज के सीने से लगी हुई थी तो धड़कने धक धक कर उठी! साँसे तेज चलने लगी! राज ने उसे अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया और पीछे से उसकी गर्दन पर अपनी ठोड़ी टिकाते हुए धीरे से बोला, " आपके इस शर्मीले चेहरे की बात ही अलग है!! जी नही करता कि

आपको खुद से दूर जाने दूँ!! लेकिन अपनी लड़ाकू बीवी से भी दूर नही जाना चाहता, ये गुलाबी चेहरा अपनी जगह औऱ वो अकड़ू लाल चेहरा अपनी जगह!!"

डॉली ने उसके हाथों को खुद से दूर करना चाहा लेकिन राज ने उसे और कसकर पकड़ते हुए कहा, " आज भी आपको मेरे करीब आने पर रोना आ रहा है..?"

डॉली ने सिर हिला दिया तो वो उसे अपनी तरफ घुमाते हुए बोला, " उस रोज क्यों रोई थी...?"

डॉली ने नजर न मिलाते हुए आंखे बन्द कर ली और बोली, " मैं बस अहसासों से जूझ रही थी, मुझे यकीन नही हो रहा था कि आप मुझसे मोहब्बत कर सकते हैं!"

राज ने उसकी ठोड़ी अँगुली से उठाते हुए कहा, " आँखे खोलकर बात कीजिये, आप सच कह रही हैं तो मेरी निग़ाहों में देखते हुए जवाब दीजिये!!"

डॉली ने आँखे खोल दी और बोली, "मैं आपके करीब आने से या आपकी हरकत की वजह से नही रोई थी, मैं इसलिए रोई थी क्योंकि मैं आपके करीब नही आना चाहती थी! मैं आपके प्यार पर यकीन करने के लिए वक़्त चाहती थी,

मुझमें फिर से अहसास से भरे मन को टूटने पर जीने की हिम्मत नही है! मैं झेल नही पाऊंगी फिर एक बार, मर जाऊँगी।" कहते हुए डॉली आंखों के डबडबाने की वजह से नजर हटाते हुए उसके सीने से लग गयी और उसे कसकर पकड़ते हुए बोली, "बहुत बुरे हैं आप, बहुत बुरे!! मैं नही चाहती थी कि आपकी वजह से मेरे मन मे कोई अहसास उठे लेकिन सब गड़बड़ हो गया! आपने मुझे अपनी खामोशी से इतना तड़पा दिया कि सारी जिद्दी दीवार गिर गयी और अहसासों के हाथ मजबूर होकर ये इश्क का हादसा मेरे साथ भी घट ही गया।"
 
राज ने अब उसे खुद से अलग करना चाहा लेकिन वो फिर भी उसकी पीठ पर से अपनी पकड़ ढ़ीली नही कर रही थी तो राज उसे गोद मे उठाकर बिस्तर पर रखते हुए बोला, " बहुत जलाया है मेरा दिल आपने, कितना इंतज़ार किया है मैंने आपके इस तरह बेखौफ मेरी बाँहों में समा जाने का। अंतस का ताप सहना बहुत मुश्किल होता है, आज आपके गले लग जाने मात्र से लग रहा है कि आप मेरे अंदर उतर गई हो, मुझमें प्राण लौट आये हो! आपसे बात नही करने पर दम घुटता था मेरा! खुद को समेटना बहुत मुश्किल हो जाता था, बाहर से ठंडा बना रहा था लेकिन अंदर वो सारे अहसास सुलगते थे जो बस तुमसे मिले है मुझे!! अपने जज्बातों की रवानी को रोकना आसान काम नही है पर ज़िद्दी हूँ न, तुम्हे

इन अहसासों का अहसास दिलाने के लिए, अहसासों को अल्फाज दिलाने के लिए अपनी हसरतों को भी रोक लिया!"

डॉली उससे लिपटी रही तो राज उसे खुद से अलग करके उसके गाल को अँगुलियों से सहलाते हुए बोला, " इतनी रातों का फासला एक दिन में मिटा देना चाहती हो, पूरी जिंदगी साथ ही रहना है हमें। इत्मीनान से मोहब्बत लुटाऊँगा आप पर! कोई जल्दबाजी नही है मुझे!! जाओ चेंज कर आओ!"

"नही!!" डॉली ने सिर हिला दिया।

" क्यो...?"

" ऐसे ही।"

" तो एक पल की भी दूरी बर्दाश्त नही अब!"

" यही समझ लीजिए।"

" ऐसा है क्या..?"

" हम्म!"

" तो बस इतना कि करीब आ जाइये!" कहते हुए राज ने उसके सिर के नीचे अपनी बाँह का तकिया लगा दिया और दूसरे हाथ से उसके इर्द गिर्द घेरा बना लिया, डॉली उसकी बाँहों में सिमटकर सुकून से सो गई।

सुबह डॉली की आंख खुली तो खुद को राज की बाँहों में पाया, वह कोहनी के बल अधलेटी होकर राज का चेहरा देखने लगी, फिर धीरे से आगे बढ़ी और सोते हुए राज के गाल को होठो से छूकर जैसे ही हटने को हुई राज ने उसे पकड़कर बिस्तर पर गिरा दिया और बोला, " चोर मुझे करार दिया और चोरी करके खुद भागना चाहती थी! चोरी का मेरा हिस्सा भी बनता है न!"

डॉली दूसरी तरफ चेहरा फेरने लगी लेकिन राज ने उसके माथे को चूमते हुए कहा, " मेरी जिंदगी में प्यार को लाने के लिए शुक्रिया जानेमन! ये सारे अहसास देने के लिए शुक्रिया! अब से पहले प्यार के अहसास से मैं वाकिफ ही नही था, ये सारे अहसास बस तुमसे है!! ये अहसास न तुमसे पहले कभी किसी से थे, न तुम्हारे बाद किसी से होंगे.....!! राज शर्मा हमेशा डॉली शर्मा का रहेगा।"

डॉली शरमा कर हौले से मुस्कुराई और उसके सीने में

चेहरा छिपाते हुए बोली, " जानती हूँ कि मैं जो कहूँगी, आप मुझे वो सब दे सकते है लेकिन मुझे आप कुछ न दे तो भी चलेगा, मुझे सिर्फ आपका ये प्रेम से लबरेज आलिंगन चाहिए!! आप हमेशा मेरे रहेंगे ये आश्वासन चाहिए! जब तक जियूँ आपका सरनेम मेरे साथ बना रहे। आपको नजदीक पाती हूँ तो एक पल में पूरी जिंदगी जी लेती हूँ! मैं चाहती हूँ कि जब भी तुम्हे छूने को हाथ बढाऊँ तो तुम्हे छू सकूँ, मेरा हाथ कभी कोरा वापस न लौटे!! तुम हाथ थामे रखोगे तो मेरी लकीरें बदल जाएंगी! तुम्हारा स्पर्श मेरे लिए जिंदगी है! क्योंकि जिंदगी अहसासों से होती है और अहसास बस तुमसे है.....!!"

डॉली अब उठी और जाने को हुई तो राज भी उठ गया, उसकी कलाई थामकर हथेली चूमते हुए बोला, " तुम्हारे लिए मेरा स्पर्श जिंदगी है तो मेरे स्पर्श से तुम्हारे चेहरे पर आई ये सिंदूरी आभा मेरी जिंदगी है!! ये सुर्खी मैं तुम्हारे चेहरे पर हमेशा कायम रखूंगा!!"

जाती हुई डॉली का मन मचल उठा औऱ वो पलटकर राज की गोद मे जा छिपी।

राज उसे अपनी आगोश में समेटते हुए बोला, " इस दीवाने की दीवानगी ऐसी ही है मिसेज राज शर्मा , ये जोर जबर्दस्ती नही करता, सब्र से काम लेता है और खुद ही अपने

करीब आने पर मजबूर कर देता है! आखिर आपको सही मायनों में अपना बना ही लिया आज!!"

डॉली उसके सीने पर मुक्का मारकर जाते हुए बोली, "आत्म प्रशंसक!!"

" ऐसा है क्या...?" राज ने उसकी कलाई पकड़ते हुए कहा।

" हां , ऐसा ही है!"

राज उसके सामने आते हुए बोला, " तो बस इतना की आइये आपकी प्रशंसा करता हूँ!"

अर्ज किया है--

" हर वक़्त करती अनबन और तकरार है

फिर भी उन्हें मुझसे प्यार बेशुमार है!!

जाने कोई फितूर या फिर खुमार है,,,,,

उनके बिना अधूरे से हम यार है।।"

"हटो...!!" कहते हुए डॉली झेंप कर हाथ छुड़ाते हुए भाग गई।

डॉली फ्रेश होकर बाहर आई और किचन में गयी तब तक विनाश और दादी भी नीचे आ गए! डॉली उन्हें नाश्ता परोसने लगी तभी राज आता नजर आया!

डॉली के चेहरे पर सुर्खी आ गयी, दादी उसका चेहरा देखने के बाद राज की तरफ देखते हुए बोली, "गुड मॉर्निंग! उम्मीद है नए साल की शुरूआत अच्छी रही आपके लिए!"

" जी दादी!" वो गला साफ करते हुए बोला, " मेरा काम काफी अच्छा चल रहा है!"

" काम की बात नही कर रही, रिश्ते की बात कर रही हूँ।"

" हां! सब ठीक है।" राज बोला और साथ ही साथ चेहरे

पर मुस्कुराहट आ गयी।

डॉली परोस कर विनाश के पास बैठ गयी और उसे खिलाने लगी, तभी सुभद्रा देवी बोली, " खुद खाये जा रहे हो राज , अपने हाथो से डॉली को भी खिलाओ।"

डॉली जल्दी से बोली, " नही! उन्हें ऑफिस जाना है, मैं विनाश को खिलाकर खुद खा लूँगी।"

राज उसकी तरफ निगाह उठाते हुए बोला, " इतनी जल्दी नही है मुझे, दादी कह ही रही है तो खिला देता हूँ आपको।"

डॉली ने उसे आँख दिखाई तो भी राज ने निवाला तोड़कर उसकी तरफ बढ़ा दिया तो डॉली ने जानबूझकर उसकी अँगुली भी दाँत से पकड़ ली, राज अपना हाथ खींचते हुए उसे देखने लगा।

विनाश हँस दिया औऱ बोला, " मम्मा छोटी बच्ची नही है फिर भी उन्होंने पापा की अंगुली काट खाई।"

राज अब खुद खाते हुए बोला, " आपकी मम्मा को काटने की पुरानी आदत है।"

सुभद्रा देवी मुस्कुराते हुए खाने लगी और बोली, " आपके पापा की भी!"

" और मेरी भी।" विनाश हंसते हुए बोला।

राज अब खड़े होते हुए बोला, " मुझे जाना है, समीर को जरूरत है।"

" हम भी जस्सी के यहाँ जा रहे हैं।" सुभद्रा देवी बोली।

" हम मतलब!" राज ने पूछा।

" हम तीनों।"

" डॉली भी।"

" हां!"

" हम्म!" कहकर राज कमरे में चला गया तो डॉली बर्तन रखने चली गयी। विनाश और सुभद्रा देवी लूडो खेलने ऊपर चले गए!

राज पानी पीने के बहाने किचन में आया औऱ डॉली को

अपनी तरफ घुमाते हुए बोला, " मुझसे दूर भागने की कोशिश हो रही है!!"

" नही! दोस्ती निभाई जा रही है, समीर को आपकी जरूरत है तो जस्सी को भी मेरी जरूरत है!" डॉली ने निगाह मिलाते हुए कहा।

" और मेरी जरूरत का क्या...?"

" कैसी जरूरत...?"

" कैसी जरूरत..? आऊँगा तो तुम घर पर नही रहोगी, मुझे जरा भी अच्छा नही लगेगा।"

" पहले तो मुझे अपनी नजरो से दूर करने के बहाने ढूंढते थे न!"

" पहले तुम मेरी कुछ नही थी, अब बीवी हो, दूर जाकर तो देखो!"

" क्या करोगे...?"

" अपने पास उठा लाऊँगा, चाहे कोई कुछ भी कहे।"

" ऐसा है क्या..?"

" हां, ऐसा ही है।"

" तो बस इतना कि आपके पास आने से डर लगता भी किसे है?"

" ऐसा है क्या?" राज उसकी निग़ाहों में झांकते हुए बोला।

" हम्म! ऐसा ही है।" डॉली बिना नजर हटाये बोली।
 
राज उसकी कमर में हाथ फँसाकर खुद के करीब करते हुए बोला, " तो बस इतना की डराना भी कौन चाहता है, मैं तो बस आपको अपनी मोहब्बत में सरोबार करना चाहता हूँ!"

राज ने उसके चेहरे को हथेली से उठाकर उसे जैसे ही चूमना चाहा तभी विनाश की आवाज आई और साथ ही साथ कदम की आवाज भी।

" मम्मा!! आओ न! दादी बुला रही है।"

डॉली राज को दूर करते हुए बोली, " हटिये, विनाश !!"

राज उसके चेहरे की तरफ देखते हुए मुस्कुराकर बोला, " अभी अभी किसी ने कहा था की मेरे पास आने से डर नही लगता लेकिन अब उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ती नजर आ रही हैं!"

" मिस्टर शर्मा हटिये।"

" अब तो नही हटूँगा।"

" राज प्लीज!!" डॉली झट से दरवाजे की तरफ गर्दन मोड़कर देखते हुए बोली तभी राज ने उसकी सुराहीदार गर्दन को चूम लिया औऱ फुसफुसाया, " बाय!"

कदमों की आहट करीब आ गयी थी इसलिए वह उसे छोड़कर जल्दी से हटा तो विनाश लास्ट पौड़ी उतर रहा था, राज ने उसे भी किस करते हुए कहा, " बाय बेटा!"

" बाय पापा!"

राज चला गया, अगले कुछ दिन यूँ ही समीर जस्सी की शादी की तैयारियों में बीत गए।

कुछ दिनों के लिए डॉली विनाश को लेकर जस्सी के यहाँ

ही चली गयी थी।

राज ने उसे उसकी पसंद की ड्रेस लेने को कह दिया था, हल्दी मेहंदी में राज नही आया क्योंकि उसे ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ गया। संगीत के दिन राज पहुँचा तो डॉली अब गुस्से में अकेले परफॉर्मेंस देने जा रही थी क्योंकि वो राज को कॉल कर के थक चुकी थी और राज फोन नही उठा रहा था।

" बोले चूड़ियाँ बोले कंगना..." पर डॉली डाँस कर रही थी तभी एक रिश्तेदार स्टेज पर चढ़ा और डॉली के आगे अपना हाथ किया , ठीक उसी वक्त डॉली का हाथ किसी औऱ ने पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया तो डॉली के चेहरे पर उसे देखकर रौनक आ गयी। वो रिश्तेदार अपना सा मुँह लेकर उतर गया और राज ने डॉली के चेहरे को छूते हुए उसे गोल घुमा दिया और फिर उसके साथ डांस करने लगा---

" सोणी कित्ती सोणी आज तू लगदी वे, बस मेरे साथ ये जोड़ी तेरी सजदी वे!"

दोनो डाँस करने लगे तो राज उसकी कमर में हाथ लपेटते हुए बोला, " मेरे अलावा कोई और तुम्हारे साथ डांस नही कर सकता! जाम की वजह से लेट हो गया लेकिन फिर भी

पहुंच ही गया न!"

डॉली कुछ नही बोली तो राज समझ गया कि वो नाराज है, राज ने डाँस करते हुए ही धीरे से उसके कान में कहा, " आपके गुस्से को बहाने के लिए तो बस मेरे प्यार की एक लहर ही काफी है!"

डॉली का चेहरा गर्म हो गया और वो स्टेज से नीचे उतरने लगी लेकिन जस्सी ने उसका हाथ पकड़ा और वापस स्टेज पर चढ़ते हुए डाँस शुरू कर दिया! राज सामने ही बैठ गया------

रिमझिम रिमझिम सावन बरसे , अब तो मिलन को मन मेरा तरसे

दूरी सही नही जाए, पिया की बड़ी याद आए, पिया की बड़ी याद आए।

इक दर्द सा दिल मे होने लगा है, जाने कहाँ चैन खोने लगा है

चुनरी सरकती जाए है सर से, हार गई मैं अपनी उमर से

क्या करूँ कोई बताये, पिया की बड़ी याद आए, पिया की बड़ी याद आये।

डॉली अब नीचे उतरने को हुई तो समीर राज का हाथ पकड़कर स्टेज पर आ गया और सॉन्ग चेंज हो गया,,,,,

जस्सी ने विशाल और श्रेया को भी इशारा कर दिया, वो हनीमून पर जाने की वजह से राज और डॉली की शादी में नही आ पाए थे!!

समीर और राज ने जैस्मिन और डॉली के चेहरे पर हथेली फेरते हुए कहा,,,,,

क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो-2

तीनो अपने अपने पार्टनर के गले मे बाँहे फँसाते हुए बोली,,,,

फिर से कहो कहते रहो, अच्छा लगता है

जीवन का हर सपना अब सच्चा लगता है

अपनी अपनी मोहब्बत को अपनी बाँहों में खींचते हुए सारे लड़के गुनगुनाये,,,,,,,

क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो।

तीनो लड़कियाँ अपने पार्टनर्स के कन्धे पर कोहनी टिकाते हुए बोली,,,,

तारीफ करोगे कब तक, बोलो कब तक

लड़के भी अब उनके कंधों पर अपनी दोनो बाँहों को रखते हुए गाने के बोल गुनगुनाये,,,,,

मेरे सीने में साँस रहेगी जब तक

लड़कियाँ उनका हाथ हटाकर मुँह फेरते हुए बोली,,,,,

कब तक मैं रहूँगी मन मे, हां मन मे

लड़के उनको वापस अपनी तरफ खींचते हुए बोले,,,,,

सूरज होगा जब तक नील गगन में

लड़कियाँ उनके पीछे चली गयी और कन्धे थामते हुए दाएं बाए ओर से झांकते हुए बोली,,,,,,

फिर से कहो कहते रहो, अच्छा लगता है

जीवन का हर सपना अब सच्चा लगता है

लड़के उनकी अँगुली पकड़कर उन्हें गोल गोल घुमाने लगे,,,,

क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो।

तुम प्यार से प्यारी हो, तुम जान हमारी हो।

लड़के उनकी कमर में हाथ लपेटकर बैक हग करते हुए बोले,,,,

खुश हो न मुझे तुम पाकर , मुझे पाकर

लड़कियाँ मुड़कर गले मे बाँहे डालते हुए बोली,,,,

प्यासे दिल को आज मिला है सागर

लड़के उनके झुमकों को अँगुलियों से हिलाते हुए बोले,,,,

क्या दिल मे है और तमन्ना, है तमन्ना

तीनो उनके सीने से सिर लगाते हुए गुनगुनायी,,,,

हर जीवन मे तुम मेरे ही बनना

फिर से कहो कहते रहो, अच्छा लगता है

जीवन का हर सपना अब सच्चा लगता है

तुम प्यार से प्यारे हो, तुम जान हमारी हो।

परफॉर्मेंस समाप्त हुई और तालियों से हॉल गूंज उठा। राज

फोन पर बात करते हुए एक तरफ उठकर चला गया तो डॉली भी विनाश को सुलाकर बाहर निकली लेकिन तभी उसे राज की बाँहों ने अपने करीब खींच लिया!!

" अब भी नाराज हो??"

" नही!!"

" तो फिर वेलकम क्यों नही किया मेरा!"

" कैसा वेलकम...?"

" ऐसा...!!" कहते हुए राज झुका और डॉली के गाल को चूम लिया।

" वक़्त नही मिला!!" कहते हुए डॉली जाने को हुई तो राज ने उसे अपनी गिरफ्त में लेते हुए कहा, " वक़्त का बहाना वो बनाते हैं जिन्हें कुछ करना नही होता!"

" मैं गुस्सा हूँ समझे!!"

" ऐसा है क्या...?"

"हां!"

" तो अभी मना लेते हैं आपको!" कहते हुए राज ने बिना इंतज़ार किये उसके होठो पर अपने होठ रख दिये!! डॉली अब खुद को पिघलने से नही रोक पायी और उसने चेहरा हटाते हुए राज को कसकर हग कर लिया।

राज उसे बाँहों में कसते हुए बोला, " मैं लौट आया हूँ तो घर चल रही हो न!!"

" नही!!"

" नही!!" वो उसे अलग करते हुए बोला।

" जी हाँ! हैरान मत हो, शादी के बाद चलूँगी आपके साथ।"
 
राज उसकी कमर पर हाथ रखे हुए बोला, " मैं इतने दिन से बाहर था, दूरी कितनी चुभ रही थी, लौट कर आया हूँ, कितना बेकरारी थी मिलने की...!! समझती नही हो क्या...?

ये तो गलत है, इन्फेक्ट बहुत गलत है!! रात कैसे कटेगी आज की? तन्हाई मेरा क्या हाल करेगी? बात को आप आगे बढने से पहले ही फुल स्टॉप लगा देती हो! मैं एक कदम आगे बढ़ाता हूँ तो आप पांच कदम पीछे जाती हो!! कभी अपने होठों से मेरे होठो पर कुछ लिखो! अपनी हद तोड़कर मेरी तरफ कब कदम बढ़ाएंगी आप!!"

डॉली उसका हाथ हटाते हुए बोली, " ये मेरा फोन न उठाने की आपकी सजा है!! अपने चार्म से मुझे इम्प्रेस करने की कोशिश अच्छी थी, लेकिन अब ये रात तन्हाई में काटिये,,,, एक एक पल की बेचैनी महसूस कीजिये!!"

" इतने दिनों से यही तो कर रहा था।"

" अकेली मैं भी थी यहाँ!!"

" इसीलिए तो कह रहा हूँ, इतने दिनो बाद चाहत तो जताए एक दूसरे से!"

" कल के बाद,,,, गुड नाईट!!"

" गुड नाईट...?? क्या गुड है इस नाइट में...?" फिर मन ही मन बोला,,, "हमेशा दूरी में ही घुलते रहना है, एक दूसरे की

बाँहों में पिघलने का दिन इतनी जल्दी नही आने वाला, मैंने सोचा भी कैसे की उल्कापिंड इतनी जल्दी मान जाएगी...? जाने इस जुदाई की अगन में कब तक जलना होगा...??"

तभी डॉली दबे कदमो से लौटी और उचक कर राज के गाल को चूमते हुए बिना एक पल भी ठहरे भाग गई तो राज मुस्कुरा उठा औऱ बोला, " हम्म, कुछ तो गुड हुआ।"

राज घर लौट गया, पूरी रात खिड़की पर खड़े खड़े और फिर बचा वक़्त करवटों में गुजार दिया,,, अगले दिन शादी थी!!

समीर बारात ले आया,,,,जय माल के वक़्त सॉन्ग चल रहा था

समीर जैस्मिन का हाथ पकड़कर डाँस करते हुए स्टेज पर ले आया

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उठा ले जाऊँगा तुझे मैं डोली में

देखती रह जाएँगी सखियाँ तुम्हारी

तुम को मुझ से प्यार है प्यार है प्यार

जैस्मिन भी मुस्कुराते हुए डाँस करने लगी।

तेरे घर आऊँगी दुल्हन बन जाऊँगी

अकेली रह जाएँगी सखियाँ बेचारी

तुम को मुझ से प्यार है प्यार है प्यार

उठा ले जाऊँगा ...

ओ आ ओ आ

बजेगी ढोलक बजेंगे ताशे मेरी सगाई में

कभी तो खनकेगी मेरी चूड़ी तेरी कलाई में

सनम हथेली में तेरी मेहंदी लगा के बैठूँगी

तेरी मुहब्बत की शोख बिंदिया सजा के बैठूँगी

तेरा इन्तज़ार है प्यार है प्यार

उठा ले जाऊँगा ...

इधर मौका पाकर राज ने डॉली को पकड़ते हुए उसकी कमर में हाथ फँसाकर करीब करते हुए कहा,,,,,

चुना है तुम को दीवाने दिल ने इसे न तड़पाओ

जवान मौसम गुज़र न जाए करीब आ जाओ

डॉली उसके गले मे अपनी बाँहों का हार डालते हुए उसकी नाक से अपनी नाक छुआते हुए बोली,,,,,,,

सजन जुदाई भला यूँ कब तक हमें सताएगी

तू सब्र कर ले घड़ी मिलन की ज़रूर आएगी

राज उसे गले लगाते हुए गोद मे उठाकर गाल चूमते हुए बोला,,,,,

मुझे ऐतबार है प्यार है प्यार

उठा ले जाऊँगा ...

"मम्मा - पापा...!!" विनाश वहाँ आकर बोला तो राज ने डॉली को गोद से उतारते हुए कहा, " आइये!!"

विनाश उसकी गोद मे चढ़ते हुए बोला, " जस्सी मासी आप दोनो को ढूंढ रही थी तो मैं चला आया!"

" कोई बात नही!! आप परेशान न हो। आप जब चाहे तब हमारे पास आ सकते हैं!!"

" अच्छा!! लेकिन जस्सी मासी ने समझाया था कि दरवाजा नॉक कर दिया करूँ पर मैं भूल गया।"

" जस्सी मासी ने भी सही समझाया लेकिन अगर भूल गए तो भी कोई बात नही,, पता है आपकी मम्मा कह रही थी कि वो आपसे हल्की है!! तो मैंने कहा कि उठाकर देखता हूँ कि कौन हल्का है!! अब पता चल गया,,, आप जीत गए! हल्के तो आप ही है!!"

विनाश हँसते हुए राज के गले लग गया तो राज ने आगे बढ़ते हुए डॉली को आंख मार दी, और भौंहों से ही बाहर चलने का इशारा किया।

तीनो जस्सी और समीर के पास आ गए,,,, शादी हुई,, उसके बाद विदाई के वक़्त जस्सी बेतहाशा रोने लगी तो समीर धीरे से बोला, " मैं तुम्हें प्यार करूँगा यार, मारने पीटने थोड़ी ले जा रहा हूँ जो इतना रो रही हो।"

जस्सी रोते रोते भी हँस पड़ी,, वो विदा होकर समीर के यहां चली गयी।

राज भी डॉली , दादी और विनाश के साथ घर लौट आया!! विनाश स्कूल चला गया तो सुभद्रा देवी आराम करने अपने रूम की तरफ बढ़ गयी तो राज अपने रूम में आया और फाइल लेकर ऑफिस चला गया!!

डॉली नीचे आयी तो नोट मिला, " काम है इसलिए जाना जरूरी है, शाम को जल्दी आ जाऊँगा।"

डॉली भी अब शांति से सो गई,,,

दोपहर में विनाश आया तो डॉली लंच करने के बाद उसके साथ बाते करने लगी,, सुभद्रा देवी भी वहीं थी!!

" मम्मा, मेरे भाई बहन कहाँ है...?" विनाश ने अचानक पूछा तो सुभद्रा देवी मुस्कुरा उठी और डॉली नजरें चुराते हुए सकपका गयी फिर बोली, " भाई बहन मतलब...? आप तो अकेले हो न बेटा।"

" हां, हूँ,,, लेकिन स्कूल में और बच्चों के भाई बहन है, मेरे कब होंगे...?"

डॉली इधर उधर देखते हुए बोली, " पता नही!! अच्छा मैं दादी के लिए सूप बना लाऊं, आप दादी के साथ कैरम खेलो न! छोड़ो ये सवाल जवाब!!"

सुभद्रा देवी मंद मंद मुस्कुराते हुए मन ही मन बोली, " मेरे मन की बात तो विनाश ने ही कह दी।"

रात हो चली थी,,,, उधर जैस्मिन और समीर अब कमरे में थे,,,जस्सी उसके आते ही मुस्कुराने लगी तो समीर बोला, " मुझे सोचकर मुस्कुराती हो तो मुस्कुराहट देखने भी दिया करो न!"

जैस्मिन उसकी तरफ नही मुड़ी तो समीर ने उसे अपनी तरफ घुमाते हुए कहा,, " आज तो आपको आँख भर देखना है,, मेरी आँखों को टॉनिक हो आप! बीमार हो जाता हूँ जब आप नजर नही आती तो!!"

" धत्त!!" कहते हुए जैस्मिन उसके सीने से लग गयी तो समीर ने उसे अपनी बाँहों में कसते हुए आंखे बंद कर ली और बोला,, " उफ्फ!! ये करीबी!! मुझे नही पता था कि किसी के गले लगना इस कदर सुकून देता है।"

" मुझे भी!!" जस्सी हल्के से बोली तो समीर ने उसका चेहरा अपनी अँगुली से ऊपर उठाया और उसकी आँखों को चूम लिया!!

" आई लव यू।" वह बोला तो जस्सी झट से उसके गाल को चूम कर दोबारा उसके सीने में चेहरे छिपाते हुए बोली, " आई लव यू मोर!!"

" आई लव यू कबूतर!!" समीर बोला तो जस्सी उससे अलग होते हुए बोली, " क्या मतलब??"

" मतलब तुमने कहा न आई लव यू मोर, तो मैंने भी कह दिया आई लव यू कबूतर!! आई लव यू समीर तो किसी ने कहा ही नही!!"

जैस्मिन ने अब तकिया उठाते हुए कहा,, " बताती हूँ तुम्हे तो मैं!!"

वो समीर को तकिए से मारने लगी तो समीर ने तकिया छीनकर फेंक दिया और जस्सी को बाँहों में उठाकर उसके होठो को चूमते हुए बोला, " यही मस्ती करने वाली जैस्मिन पसंद है मुझे,,, रोंदू जस्सी बहुत फीकी लगती है इसके सामने!!"

जस्सी उसकी गर्दन में चेहरा छिपाते हुए बोली, " रोंदू हो या मस्ती करने वाली, जस्सी है अब सिर्फ तुम्हारी!!"

समीर उसे उतारकर सीने से भींचते हुए बोला, " हाय!! जान ही ले ली आपकी इस लाइन ने, आपकी तरह बोलूं तो मैं सदके जांवां!!"

जस्सी ने भी मुस्कुराते हुए उसे कसकर पकड़ लिया।

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इधर राज आने में थोड़ा लेट हो गया,,, विनाश सोने से पहले एक गिलास दूध पी रहा था! डॉली राज के लिए खाना निकालने लगी तो

राज चेंज करके उसके पास आकर बैठते हुए बोला, " सोने की तैयारी हो रही है!"

" हां! सुबह स्कूल जाना है न!!" विनाश घूँट लेते हुए बोला।

" अच्छे से पढ़ो, मुझसे भी बड़ा बिजनेस मैन बनना है आपको।" राज उसके सिर पर हाथ रखते हुए बोला।

" हां, मैं तो मन लगाकर पढ़ रहा हूँ! अभी आपसे कुछ पूछूँ, बताएंगे!!"

"हाँ!! क्यों नही?"

" मेरे छोटे भाई बहन कब आएंगे..?"

राज हक्का बक्का सा अब पलटकर किचन की तरफ

देखने लगा,, डॉली पानी लेकर आ रही थी, तभी सुभद्रा देवी अपनी प्लेट में खाना निकालते हुए बोली,, " जवाब दीजिये राज !"

विनाश भी बोला, " हां पापा बताईये न, मम्मा से भी पूछा था मैंने, उन्होंने तो कुछ बताया ही नही!! स्कूल में सब बच्चों के भाई बहन है, मुझे भी चाहिए!!"

डॉली चुपचाप खाना निकालने लगी लेकिन चेहरा गुलाबी हो उठा था!!

राज ने उसका चेहरा एक नजर देखकर फिर विनाश की तरफ देखते हुए कहा, " हमें पता ही नही था कि आपको भाई बहन की ख्वाहिश है, अब पता चल गया है तो आपकी मम्मा और मैं ये ख्वाहिश जरूर पूरी करेंगे, क्यों डॉली ?"

डॉली कुछ नही बोली, न ही नजर उठायी! वो आज सच मे शर्म से पानी पानी हो उठी थी, दादी के सामने इन बातों से वो बहुत ऑकवर्ड महसूस कर रही थी! जबकि दादी मुस्कुरा कर तीनो को देख रही थी फिर सदका उतारते हुए बोली, " मेरा परिवार अब वाकई परिवार लगता है! सबके चेहरों की रौनक यूँ ही बरकरार रखे भगवान।"

खाने पीने के बाद दादी माँ विनाश को साथ लेकर चली गयी, और डॉली जान बूझकर बर्तन धोने लगी ताकि लेट हो जाये और राज सो जाए लेकिन उसके टँकी की तरफ हाथ बढ़ाते ही अचानक राज ने आकर उसे गोद मे उठा लिया और कमरे की तरफ बढ़ते हुए बोला, " इन कामो के लिए संतोष है!!"

डॉली उसके कंधे पर हथेली मारते हुए बोली, " क्या करते हो..? नीचे उतारो! कहीं उस रोज की तरह विनाश आ गया तो...??"

" तो कोई बात नही!! आखिर उसी की फरमाइश पर अमल कर रहा हूँ!" राज शरारत से बोला।

डॉली उसे देखते हुए बोली, " आपकी आंखों में इतनी शरारत क्यों है..?"

" आपकी में क्यों नही..?" राज ने भी निग़ाहों में देखते हुए भौंहे उठाकर पूछा।

राज ने डॉली को कमरे में रखते हुए आगे बढ़कर दरवाजा बन्द कर लिया तो डॉली बेड से उतर गई लेकिन राज ने उसकी बाँह पकड़ते हुए कहा, " कुछ हुआ

क्या..?"

" नही तो!" कहते हुए डॉली को पहली रात की याद आ गयी औऱ चेहरे पर खून की गर्म लहर दौड़ गई। वह मुड़ने को हुई लेकिन राज ने बैठते हुए उसे अपनी गोद मे बिठा लिया और बोला, " क्या हुआ, हमेशा दूर भागने की फिराक में क्यों रहती हैं आप.?" डॉली का सारा बदन थरथरा उठा औऱ वो बिना कुछ बोले उसका हाथ हटाकर उसकी गोद से उठकर खिड़की पर आ गई!!

बाहर इस जनवरी के महीने में भी मूसलाधार बारिश हो रही थी,,, मौसम सर्द था और खिड़की खोलने पर ठंडी हवाओं से डॉली को सिहरन सी उठी, उसी पल राज उसके पीछे आ खड़ा हुआ और उसके इर्द गिर्द अपनी बाँहों का घेरा बनाते हुए उसके कंधे पर ठोड़ी टिकाते हुए बोला, " बहुत सर्दी है न!!"

" हम्म!! डॉली धीरे से बोली, " रजाई ओढ़नी पड़ेगी आज तो...!!"

राज पीछे से उसकी गर्दन होठो से छूते हुए बोला, " कौन कहता है कि ठंड में रजाई ही ओढ़ी जाये...? इजाजत हो जो आपकी तो आज अपना प्रेम ही ओढ़ाने का इरादा है!!"

डॉली का मन अंदर तक मचल उठा और उसने मुड़कर राज के सीने में अपना चेहरा छिपाते हुए कसकर पकड़ लिया!! राज जैसा जीवनसाथी पाकर उसका मन इठला उठा था,,,राज के प्यार जाहिर करने के इस तरीके से डॉली के ठूँठ मन मे आज प्यार के फूल खिल उठे थे!! मन आतुर हो उठा उसके प्रेम की झील में उतरने को!! लेकिन फिर भी अपनी अवस्था का भान होते ही वह उसकी पीठ पर से अपनी पकड़ ढीली करके अलग होने को हुई तो राज ने बढ़कर उसे पीछे से हग करते हुए कहा, " ये हसरतो को समेट कर रखने की रात नही, ये हसरतो को जताने की रात है! कब तक अहसासों से दूर भागती रहेंगी!! मेरे देह के स्पर्श को पाकर मुझमे समाने का जी नही करता..!! अगर करता है तो क्यों छिटककर दूर भागती है..? मैं आपको सदा के लिए अपने पास रखना चाहता हूँ,, अपने रंग में इस तरह रँगना चाहता हूँ कि मेरे रँग के आगे सब रंग फीके पड़ जाएं!! मुझे महसूस करो,, मेरे अहसासों को महसूस करो! उस प्रेम को प्रज्ज्वलित होने दो, जो तुम्हारी जिंदगी से हर बुरे अहसास और हर अंधेरे को दूर कर देगा!!"

उसका ये प्रेम से भरा स्पर्श पाकर डॉली का ह्रदय झँकृत हो उठा और अन्तस् का ताप न सह पाने की सूरत में उसने मुड़कर अपनी बाँहे राज के गले मे डालते हुए उसके होठों पर अपने होठ रख दिये!! राज ने उसे अपनी बाँहों में समेट

लिया, दोनो के बीच के सारे तटबंध आज टूट गए थे,,उनकी आत्मा तक इस प्रेम की बरसात में भींग रही थी!!

उद्वेगों से भरा अँधियारा था आज, एक दूसरे के सानिध्य में ,, दिल मे ठहरी ख्वाहिशें के बरसने की रात थी। इस बरसात में डॉली के मन का हर सवाल धुल गया और फिर धुले हुए कोरे मन पर सिर्फ राज का नाम रह गया!!

वक़्त बीता,,,,,

तीन साल बाद-----

जैस्मिन और समीर राज के यहाँ आये हुए थे, साथ मे उनका डेढ़ साल का बेटा जय था!! जो यहाँ वहाँ खेल रहा था!! विनाश उसके साथ ही व्यस्त था, भाग भागकर उसे खिलौने दे रहा था!!

डॉली तैयार होकर बाहर आई क्योंकि आज उसका जन्मदिन तो था ही,,,, साथ ही साथ उनकी बेटी आर्या का बर्थ डे भी था, जो आज एक साल की हो गयी थी!! ये एक संयोग ही था कि विनाश और राज की बर्थ डेट सेम थी तो वहीं आर्या और डॉली की बर्थ डेट सेम थी!!

राज ने आर्या को गोद मे लिया तो डॉली ने विनाश का

हाथ थामा और केक कट करने लगे!! सब बहुत खुश थे,,,,,, डिनर के बाद राज ने आर्या को पकड़ते हुए रोज की तरह रटना शुरू किया,, " बोलो पापा!! पापा!!"

आर्या विनाश को देखे जा रही थी तो कभी दादी को!! राज उसे अपनी तरफ मोड़ते हुए बोला,, " देखो! मेरा मुँह देखो!! होठो की तरफ देखो कैसे बोल रहा हूँ...? वैसे ही बोलो!! पा.....पा!! पापा......!!"

विनाश हंसते हुए बोला, " आज तो बोल ही देगी!"

आर्या कुछ देर तो देखती रही फिर अचानक ही उसके गाल पर हथेली रखी और लपककर चेहरा आगे बढ़ाकर राज के होंठ काट लिए तो सभी ठहाका लगाकर हँस पड़े!!

जस्सी हंसते हुए बोली, " हेन्स प्रूव्ड!! आर्या डॉली की ही बेटी है!!"

राज ने आर्या को छोड़ दिया तो वो घुटनों के बल चलते हुए विनाश और जय के पास पहुंच कर किलकारी मारने लगी।

राज ने डॉली की तरफ देखकर कहा, " कोई बताएगा कि इसने काटा क्यों...?"

डॉली हँसते हँसते बोली, " वो इधर उधर देख रही है तो

देखने नही दे रहे!!कब से सिखाये जा रहे हो की मेरे होठ की तरफ देखो, मुँह की तरफ देखो,,, तो मुँह ही काट लिया उसने, न रहेगा मुँह और न ही सिखाओगे।"

राज ने एक नजर आर्या की तरफ देखा फिर डॉली को देखकर मन ही मन बोला, "इंडीड!! अपनी माँ पर ही गयी है बिल्कुल!!"

डॉली मंद मंद मुस्कुरा उठी,,, सुभद्रा देवी सबको देखकर बलाये लेती नही थक रही थी!!

( समाप्त
 
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