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समीर हंसता हुआ रूम से बाहर निकल गया तो राज बिस्तर पर लेट गया तभी दरवाजा खुला तो विनाश सामने था! राज ने मुस्कुराते हुए हथेली से उसे खुद के पास आने का इशारा किया तो विनाश भागकर उसके पास लेट गया और उसे कसकर लिपटते हुए बोला, " आप मेरे डैडी हो??"
" हाँ!"
" मैं आज आपके पास सोऊँ..?"
" बिल्कुल, मैं भी इंतज़ार में था इस दिन के!"
" आपको मुझे तो बताना चाहिए था न की आप मेरे पापा हो!"
"सॉरी! अब तो बता दिया न, आपको टीवी पर भी ले आये!"
" हां! आज तो मजा ही आ गया! बहुत मजा!! आप न सुपर हीरो जैसे पापा हो!"
" आप भी सुपर हीरो से कम नही! बहादुर बच्चे हो!"
" हां, आपका ही बेटा हूँ न तो आप जैसा ही हूँ! मम्मा को भी बुला लाऊं यहीं!!"
" नही!!" राज तेजी से बोला तो विनाश ने उसका चेहरा देखते हुए कहा, " क्यों नही..?"
" मतलब! मतलब! दादी ने अभी कुछ और प्लान किया हुआ है, इसीलिए अभी आपकी मम्मा यहाँ नही आ सकती!"
" ओह!!"
" हम्म! अब सो जाइये!"
विनाश उसे पकड़कर लेट गया!
इधर डॉली ने समीर से दादी को खाना भिजवा दिया और खुद गेस्ट रूम में जाकर दरवाजा बंद कर लिया, जैस्मिन सो चुकी थी! डॉली ने बाहर निकल कर विनाश के बारे में समीर से पूछा तो उसने राज के कमरे की तरफ इशारा कर दिया! डॉली ने जाकर दरवाजे पर जैसे ही हाथ रखने चाहा तब तक दरवाजा खुल गया और डॉली का हाथ राज के सीने पर पड़ने को हुआ लेकिन उसने मुट्ठी भींच ली और हाथ पीछे कर लिया तो राज ने अंदर देखते हुए कहा, " सो गया है, पर शायद रात में आपकी तलाश करे!"
डॉली ने उसकी तरफ देखे बिना ही कदम अंदर बढ़ा दिया और विनाश को उठाकर गेस्ट रूम में चली गयी तो राज ने अपना दरवाजा बंद करते हुए कहा, " अभी तक गुस्सा ठंडा नही हुआ उल्का पिंड का!"
अगली सुबह दादी ने सबको नाश्ते पर साथ बुलाया तो
डॉली आराम से आकर बैठ गयी, वो आज बिल्कुल नॉर्मल हो चुकी थी, शरमा नही रही थी! राज हाइ नैक पहने हुए बाहर आया और वो भी सहजता से बैठ गया तो दादी बोली, "आप दोनो की शादी धूमधाम से होगी! उसी सिलसिले में आपसे राय लेनी थी, कब चाहते हैं आप ऐसा करना?"
राज स्लाइस काटते हुए बोला, " मैंने आज ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया है! सब कह रहे हैं कि बिजनेस टायकून होकर भी शानदार पार्टी का आयोजन नही किया! उन्हें एक पार्टी क्या दूँ, शादी ही अटैंड करवा देता हूँ न!! मैं उनके सामने शादी करने का ऐलान करूँगा! जितनी जल्दी हो जाये उतना सही है! डॉली भी यही चाहती है!"
" मैं भी..!!" विनाश जल्दी से बोला!
लेकिन चुपचाप निवाला निगलती डॉली को राज की बात सुनकर खांसी आने लगी और कौर गले मे ही अटक गया तो जस्सी ने जल्दी से उसे पानी दिया! डॉली ने पानी पीते हुए राज को एक नजर घूरकर देखा और टेबल के नीचे से उसके पैर पर कसकर एक सैंडल जमा दी! राज की हड्डी पर चोट लगी लेकिन वह फिर भी बाहर से शांत बना रहा!!
दादी खुश होते हुए बोली, " जब दोनो ही राजी हो तो फिर
क्या परेशानी है? मैं हल्दी, मेहंदी और संगीत एक दिन रखवा देती हूँ, अगले दिन शादी!!"
"बिल्कुल ठीक दादी!" राज उठते हुए बोला, " अब मैं चलता हूँ, सारी अरेंजमेंट भी तो करनी है!"
दादी ने उसके जाने के बाद, समीर और जैस्मिन से कहा, " तो आज हम लोग शॉपिंग पर चलेंगे!"
" मैं भी..??"विनाश ने पूछा तो दादी बोली, " हां आप भी!"
डॉली तुरंत बोली, " मैं नही जाऊँगी!"
" क्यों? लहंगा पसन्द करना है न!" दादी ने कहा।
" नही दादी!" लहंगा तो ससुराल की तरफ से आता है न, आप जो भी पसंद करके लाएंगी मैं पहन लूँगी!"
" लेकिन यहीं रहना , जाना मत!!"
" मैं यहीं रहूँगी दादी! डोंट वरी!!"
" चल न!!" जस्सी बोली तो डॉली ने आंखे दिखाते हुए
सिर हिला दिया!
दादी मुस्कुराते हुए बोली, " छोड़ दो जस्सी, समझ नही रही तुम! अकेले वक़्त बिताने का मौका चाहिए दोनो को साथ मे! शॉपिंग में वक़्त लगेगा और तब तक राज भी लौट ही आएगा!"
डॉली मुस्कुरा दी और उठकर चली गयी! कुछ देर बाद सभी खरीददारी करने निकल गए तो डॉली ने चैन की सांस ली और बोली, " राज शर्मा ! अब आओ तुम!!"
दोपहर में राज आया और जैसे ही दरवाजे पर कदम रखा पैर स्लिप हो गया, उसने चौखट को थाम लिया और गिरने से बचा तो पल भर को साँस ऊपर नीचे हो गयी, वह गुस्से में जूते उतारकर अंदर आते हुए चीखा, " संतोष...!! सज्जन..!!"
लेकिन कोई आवाज नही आई तो वह फिर बोला, " क्या गिरा है दरवाजे पर? सज्जन! सज्जन!! संतोष...!!"
वह आगे बढ़कर किचन में आया तो डॉली को देखते हुए बोला, "कहाँ हैं वो दोनो?"
" उन्हें छुट्टी दे दी है मैंने!" डॉली ने बेहद शांति से कहा।
" हाँ!"
" मैं आज आपके पास सोऊँ..?"
" बिल्कुल, मैं भी इंतज़ार में था इस दिन के!"
" आपको मुझे तो बताना चाहिए था न की आप मेरे पापा हो!"
"सॉरी! अब तो बता दिया न, आपको टीवी पर भी ले आये!"
" हां! आज तो मजा ही आ गया! बहुत मजा!! आप न सुपर हीरो जैसे पापा हो!"
" आप भी सुपर हीरो से कम नही! बहादुर बच्चे हो!"
" हां, आपका ही बेटा हूँ न तो आप जैसा ही हूँ! मम्मा को भी बुला लाऊं यहीं!!"
" नही!!" राज तेजी से बोला तो विनाश ने उसका चेहरा देखते हुए कहा, " क्यों नही..?"
" मतलब! मतलब! दादी ने अभी कुछ और प्लान किया हुआ है, इसीलिए अभी आपकी मम्मा यहाँ नही आ सकती!"
" ओह!!"
" हम्म! अब सो जाइये!"
विनाश उसे पकड़कर लेट गया!
इधर डॉली ने समीर से दादी को खाना भिजवा दिया और खुद गेस्ट रूम में जाकर दरवाजा बंद कर लिया, जैस्मिन सो चुकी थी! डॉली ने बाहर निकल कर विनाश के बारे में समीर से पूछा तो उसने राज के कमरे की तरफ इशारा कर दिया! डॉली ने जाकर दरवाजे पर जैसे ही हाथ रखने चाहा तब तक दरवाजा खुल गया और डॉली का हाथ राज के सीने पर पड़ने को हुआ लेकिन उसने मुट्ठी भींच ली और हाथ पीछे कर लिया तो राज ने अंदर देखते हुए कहा, " सो गया है, पर शायद रात में आपकी तलाश करे!"
डॉली ने उसकी तरफ देखे बिना ही कदम अंदर बढ़ा दिया और विनाश को उठाकर गेस्ट रूम में चली गयी तो राज ने अपना दरवाजा बंद करते हुए कहा, " अभी तक गुस्सा ठंडा नही हुआ उल्का पिंड का!"
अगली सुबह दादी ने सबको नाश्ते पर साथ बुलाया तो
डॉली आराम से आकर बैठ गयी, वो आज बिल्कुल नॉर्मल हो चुकी थी, शरमा नही रही थी! राज हाइ नैक पहने हुए बाहर आया और वो भी सहजता से बैठ गया तो दादी बोली, "आप दोनो की शादी धूमधाम से होगी! उसी सिलसिले में आपसे राय लेनी थी, कब चाहते हैं आप ऐसा करना?"
राज स्लाइस काटते हुए बोला, " मैंने आज ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया है! सब कह रहे हैं कि बिजनेस टायकून होकर भी शानदार पार्टी का आयोजन नही किया! उन्हें एक पार्टी क्या दूँ, शादी ही अटैंड करवा देता हूँ न!! मैं उनके सामने शादी करने का ऐलान करूँगा! जितनी जल्दी हो जाये उतना सही है! डॉली भी यही चाहती है!"
" मैं भी..!!" विनाश जल्दी से बोला!
लेकिन चुपचाप निवाला निगलती डॉली को राज की बात सुनकर खांसी आने लगी और कौर गले मे ही अटक गया तो जस्सी ने जल्दी से उसे पानी दिया! डॉली ने पानी पीते हुए राज को एक नजर घूरकर देखा और टेबल के नीचे से उसके पैर पर कसकर एक सैंडल जमा दी! राज की हड्डी पर चोट लगी लेकिन वह फिर भी बाहर से शांत बना रहा!!
दादी खुश होते हुए बोली, " जब दोनो ही राजी हो तो फिर
क्या परेशानी है? मैं हल्दी, मेहंदी और संगीत एक दिन रखवा देती हूँ, अगले दिन शादी!!"
"बिल्कुल ठीक दादी!" राज उठते हुए बोला, " अब मैं चलता हूँ, सारी अरेंजमेंट भी तो करनी है!"
दादी ने उसके जाने के बाद, समीर और जैस्मिन से कहा, " तो आज हम लोग शॉपिंग पर चलेंगे!"
" मैं भी..??"विनाश ने पूछा तो दादी बोली, " हां आप भी!"
डॉली तुरंत बोली, " मैं नही जाऊँगी!"
" क्यों? लहंगा पसन्द करना है न!" दादी ने कहा।
" नही दादी!" लहंगा तो ससुराल की तरफ से आता है न, आप जो भी पसंद करके लाएंगी मैं पहन लूँगी!"
" लेकिन यहीं रहना , जाना मत!!"
" मैं यहीं रहूँगी दादी! डोंट वरी!!"
" चल न!!" जस्सी बोली तो डॉली ने आंखे दिखाते हुए
सिर हिला दिया!
दादी मुस्कुराते हुए बोली, " छोड़ दो जस्सी, समझ नही रही तुम! अकेले वक़्त बिताने का मौका चाहिए दोनो को साथ मे! शॉपिंग में वक़्त लगेगा और तब तक राज भी लौट ही आएगा!"
डॉली मुस्कुरा दी और उठकर चली गयी! कुछ देर बाद सभी खरीददारी करने निकल गए तो डॉली ने चैन की सांस ली और बोली, " राज शर्मा ! अब आओ तुम!!"
दोपहर में राज आया और जैसे ही दरवाजे पर कदम रखा पैर स्लिप हो गया, उसने चौखट को थाम लिया और गिरने से बचा तो पल भर को साँस ऊपर नीचे हो गयी, वह गुस्से में जूते उतारकर अंदर आते हुए चीखा, " संतोष...!! सज्जन..!!"
लेकिन कोई आवाज नही आई तो वह फिर बोला, " क्या गिरा है दरवाजे पर? सज्जन! सज्जन!! संतोष...!!"
वह आगे बढ़कर किचन में आया तो डॉली को देखते हुए बोला, "कहाँ हैं वो दोनो?"
" उन्हें छुट्टी दे दी है मैंने!" डॉली ने बेहद शांति से कहा।