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अगले दिन----
राज की मीटिंग आज दूबे जी के साथ थी,,,,
वह मीटिंग के लिए पहुँचा तो मिस्टर राव और मिस्टर राठी अभी तक नही पहुँचे थे! दूबे जी उसे केबिन में बिठाकर कुछ अर्जेंट काम से चले गए थे!
उनके जाते ही राज भी केबिन से बाहर निकल आया और
इधर उधर घूमकर ऑफिस देखने लगा! तभी उसके कानों में जानी पहचानी सी आवाज पड़ी,, " मैं बता रही हूँ, आगे की चेयर पर बैठो तो छाता लेकर बैठो, ताकि दुबे जी के थूक के फव्वारों से बच सको!! वरना आराम से भीगो उनके फव्वारों में!"
राज चुपचाप उस ओर देखने लगा,,, जैसे ही वो हल्की सी तिरछी हुई , राज को कोई संदेह नही रह गया! वो डॉली थी!
राज उसे देखते ही गुस्से में जाने के लिए पलटा और मन ही मन बोला, " मुझे बिना इन्फॉर्म किये नौकरी छोड़ दी और यहाँ काम कर रही है,, लगता है कुछ ज्यादा ही खुशी मिल गयी है! कैसे हँस रही है?"
तभी राज पर मिस कपूर की नजर पड़ गयी और वो आगे बढ़ते हुए बोली,, " मिस्टर शर्मा !! हैलो!"
उसने अपना हाथ बढ़ाया तो भी राज ने अपना हाथ जेब से नही निकाला,, सारी लड़कियों का ध्यान उसी ओर चला गया और वे खुसर फुसर करने लगी,,,
एक बोली, " देख, राज शर्मा यहाँ हैं!"
दूसरी,,,," ओ माई गॉड! यकीन नही हो रहा!"
तीसरी,,,,"उफ्फ! कितना हैंडसम हैं न!!"
चौथी,,,,"हैंडसम तो बहुत लोग होते हैं! ये तो हॉट है!!"
डॉली ने अब पलटकर उस ओर देखना चाहा तो राज ने जान बूझकर उसे दिखाने के लिए मिस कपूर का बढ़ा हुआ हाथ थामते हुए कहा, " हैलो! मिस कपूर..!" और फिर बाकी कलीग्स की तरफ देखकर उसने एक खूबसूरत स्माइल की तो सारी लड़कियाँ उसकी तरफ चल दी!
डॉली की नजर उस पर पड़ी और उसे लड़कियों से घिरा देखकर वो मन ही मन बोली, " ये लड़कियाँ नही सुधरेंगी! इन्होंने ही इस नागफनी के भाव बढ़ा रखे हैं! घेर कर खड़ी हो जाती हैं , चाहे वो भाव दे या न दे!"
राज आज सबसे मुस्कुराते हुए बात कर रहा था, डॉली वहाँ से चली गयी तो राज भी अपने केबिन में जाने के लिए बढ़ गया।
मीटिंग में राज , दूबे जी के सामने वाली चेयर पर दूसरे छोर पर बैठा, दूबे जी ने कितना भी इंसिस्ट किया आगे अपने पास वाली चेयर पर बैठने को लेकिन राज नही बैठा!
मीटिंग शुरू हुई तो सबका ध्यान बातों पर था और आगे की
चेयर पर बैठने वाले दूबे जी के फव्वारों से परेशान थे! राज राहत की सांस लेते हुए सोचने लगा , " अच्छा हुआ!! उसकी बात कानो में पड़ गयी थी वरना उन लोगो की जगह मैं वहाँ बैठा ये सब झेल रहा होता...!!"
"आगे की चेयर पर छाता लेकर बैठना !" इमेजिन करते हुए राज के होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी, जिसे राज ने फौरन दबा लिया।
तभी दरवाजा खुला तो डॉली और एक अन्य लड़की साथ मे अंदर आयी, उनके हाथ मे नाश्ता था!
राज ने उसे अनदेखा कर दिया औऱ फाइल में देखने लगा, डॉली सबके आगे सर्व करने लगी!
डॉली ने जैसे ही राज के आगे सर्व किया राज ने तुरंत हथेली से उसे एक तरफ को सरका दिया औऱ बोला, " हटा लीजिये!"
दूबे जी उसे देखते हुए बोले, " ऐनी प्रॉब्लम शर्मा साहब!"
राज और डॉली ने एक साथ उनकी तरफ देखा तो दूबे जी बोले, " चख कर तो देखिए,, डॉली ने खुद बनाया है! इनके हाथ के टेस्ट को मान जाएंगे आप!"
राज ने फिर भी इंकार कर दिया और बोला, " शुक्रिया दूबे जी, लेकिन अगर ऐसा है तो मुझे अपना टेस्ट नही बदलना।"
डॉली ने नाश्ता उठा लिया और जाने को हुई तो राज ने
नजर हटा ली लेकिन तभी वो नाश्ता राज के ऊपर गिर गया तो राज उठ खड़ा हुआ!
बाकी सब भी चौंक गए!
राज फौरन बोला, " कैसे लोगो को काम पर रखते हैं आप? जिन्हें चलने भी नही आता!! कपड़े खराब कर दिए मेरे!"
"डॉली खड़ी खड़ी देख क्या रही हो? ध्यान से हटाना चाहिए था न!! अब जाओ, इन्हें वॉशरूम दिखा दो, सॉरी बोलो!!" दूबे जी नाराजगी से बोले।
"सॉरी!! आइये सर..! मैं साफ करने में हेल्प कर देती हूँ।" डॉली ने मन मारकर कहा और गेट से बाहर निकल गयी तो राज भी साथ मे बाहर आया और बोला, " ये हरकत जान बूझकर की थी न आपने!!"
डॉली ने अब उसकी तरफ देखते हुए कहा, " खाना आपके लिए था, आपने न सही, आपके कपड़ो ने ही टेस्ट कर लिया! आपको अच्छा नही लगा?"
" अभी तो सिर्फ सॉरी बुलवाया है! नौकरी से भी निकलवा
सकता हूँ!"
" ऑप्शन तो हर जगह होते हैं न शर्मा साहब! आपके यहाँ से काम छोड़ा तो यहाँ नौकरी कर ली! यहाँ से छोडूंगी तो कहीं और कर लूँगी! पूरी दुनिया पर तो आपका राज है नहीं!!"
राज अब रुक गया और उसकी तरफ मुड़ते हुए बोला, "शुक्र कीजिये की अभी तक आपको खुद से दूर करने की कोशिश की है, क्योंकि जिस दिन आप मे दिलचस्पी जगी न, उस दिन आपको मेरी क्षमता का अंदाजा खुद हो जाएगा!"
"आपकी क्षमता का तो पता नही लेकिन हाँ! आज की इस सॉरी के बदले आपसे सॉरी न बुलवाया तो मैं डॉली नही!!"
" हाहाहा! सपने बहुत हसीन है आपके! पर अफसोस पूरे नही होंगे!" राज अकड़कर बोला।
"वॉशरूम आ गया , आप अंदर जा सकते हैं!" डॉली ने कहा और जैसे ही दूसरी तरफ जाने को हुई , राज ने उसकी कलाई पकड़ ली।
"लगता है पहले की बातें भूल गए हैं आप!" डॉली ने
अपनी कलाई की तरफ देखते हुए कहा तो राज ने हाथ छोड़ दिया औऱ बोला, " सूट की कीमत पता है आपको! आपकी आधे साल की सैलरी लग जायेगी मेरा भुगतान करने में.....!! गन्दा करके चल दी, साफ कौन करेगा?"
"अरे कैसी बात कर रहे हैं सर आप, ऑफ कोर्स मैं करूँगी न!" कहते हुए डॉली ने उसका सूट उतारने में मदद की औऱ फिर शर्ट को तौलिए से रगड़ते हुए धीमे से कहा, "इस दौरान कोई दुर्घटना घटी तो जिम्मेदार आप होंगे! क्योंकि आपके मुताबिक मुझे तो कोई शऊर ही नही किसी काम को करने का!"
राज को उसकी बात याद आ गयी की ' छाती के बाल उखाड़ दूँगी' और उसके साथ ही उसने अपने सीने पर मौजूद डॉली की कलाई पकड़कर उसे दूर करते हुए , उसके हाथ से तौलिया छीनते हुए कहा, " आप जा सकती हैं! कोई काम आपसे ढंग से करने की उम्मीद नही की जा सकती, मैं खुद कर लूँगा!"
"बस यही सुनना था मुझे, की आप खुद कर लोगे!" डॉली ने कहा तो राज ने उसकी तरफ घूरकर देखा तभी डॉली ने भी उसकी आँखों मे देखते हुए कहा, " लेकिन ये नही सुनना था की सामने वाली को ये बोलते रहो की 'तुम्हे ये नही
आता!' 'वो नही आता!' 'तुमको कुछ नही आता!!'
क्योंकि मुझे तो सब आता है......, लेकिन बाकी जो औरतें चुपचाप सह लेती हैं न, उन्हें भी ये सुनाने का हक नही है आप मर्दों को की तुम्हे कुछ नही आता....!! क्योंकि उन्हें जो सहना आता है न, वही सहनशक्ति आपके परिवार के बने रहने की नींव है! सहना छूटा तो परिवार टूटा!!
आप अकड़ में रहोगे और मुझसे बेबस होने की ख्वाहिश करोगे तो नही चलने वाला....!! बहुत दृढ़ता से निर्भय होकर जीना सीखा है मैंने ,और किसी को भी मैं खुद को डराने या दबाने की इजाजत नही दूँगी!"
राज ने नजर हटाकर अपने शर्ट को साफ करते हुए कहा, " डराने की तो कोशिश ही नही की मैंने आज तक! लेकिन इतना समझ चुका हूँ की तुम डरोगी किस चीज से!"
डॉली ने उसकी तरफ असमंजस से देखा तो शीशे में ही राज उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराकर बोला, " इस तरह सवालिया निग़ाहों से मेरी तरफ देखने से आपको मैं जवाब नही दे दूँगा, आप जा सकती हैं।"
" नही!! जरा मैं भी तो सुनूं, मैं किस चीज से डर जाऊँगी!"
" इतनी बेताबी क्या है जानने की? यकीन रखिये और वक़्त
आने दीजिये, आपको मैं खुद बताऊँगा।"
डॉली चिढ़ा हुआ सा मुँह बनाकर जाते हुए बोली, " हुँह!! एवै ही , पता तो कुछ है नही , बस यूं ही कुछ भी बोलकर उलझाने की कोशिश कर रहा है।"
राज अब कुछ देर बाद बाहर निकलते हुए उसके हाथ मे सूट पकड़ाते हुए बोला, " ये सूट ड्राई क्लीन को दे देना और जब आ जाये तो मेरे घर पहुंचा देना।"
डॉली ने उसको टोकते हुए कहा, " सूट पकड़ाकर चल दिये, पैसे कौन देगा?"
राज अब पलटा और बोला, " ओवर स्मार्टनैस के चक्कर मे गलती आपने की है और पे भी अब आप खुद ही करेंगी!"
"तुम न..!!" डॉली ने कुछ कहना चाहा फिर रुक गयी तो राज बोला, " आप कुछ कहना चाह रही थी?"
" हाँ!! मैं आपके यहाँ कुछ दिन काम करके गयी थी, जिसकी पेमेंट मैंने अभी तक नही ली, तो उन पैसों से अपनी ड्राई क्लीन खुद करा लेना।" डॉली ने कहा और राज के हाथों में सूट पकड़ाना चाहा तो राज ने अपना हाथ पीछे
खींच लिया और बोला, " आप मेरे यहाँ से बिना इन्फॉर्म किये काम छोड़कर चली गयी तो सैलरी भी कट हो गयी, एक रूल आपने फॉलो नही किया तो एक रूल मैंने भी तोड़ दिया! अब ये आपकी हेडेक है की आप ड्राई क्लीन कैसे कराती हैं...? और एहसान मानिए की तारीख फिक्स नही की कब लौटाना है..... वरना आपको मुसीबत में फँसाने के तरीके बहुत हैं मेरे पास लेकिन आप इतनी इम्पोर्टेन्ट नही की अपनी सारी क्षमता का उपयोग आप पर करूँ!"
डॉली चिढ़ते हुए नाराजगी से बोली, "आप एक नम्बर के बेहूदे आदमी हैं! जरा सी भी सभ्यता तो आप दिखा ही नही सकते! हैं न..??"
राज ने शान से जेब मे हाथ रखते हुए कहा, "क्योंकि आप यही डिजर्व करती हैं, और रही बात सभ्यता की.... तो जैसा मैं नही हूँ वैसा बनने का असफल प्रयास भी नही करता! मैं असभ्य हूँ तो हूँ!!"
राज चल दिया तो डॉली पीछे से पैर पटक कर रह गयी।
राज मीटिंग हॉल में लौट गया और डॉली अपने केबिन में! वह गुस्से में बड़बड़ाते हुए बोली, " इसे सबक सिखाने के चक्कर मे बेकार का खर्चा बढ़ गया! ये आया ही क्यों यहाँ, भगवान करे जिस काम के लिए आया है वो काम न बने और यहाँ से चलता बने!"
राज अपनी जीत पर बहुत खुश था और मीटिंग करते हुए दूबे जी के साथ डील साइन कर ली। मीटिंग के बाद डिनर का भी प्रोग्राम था, काफी लेट हो गया इन सब मे और बाहर मौसम खराब था! तेज बारिश शुरू हो चुकी थी, डॉली भी घर फोन कर चुकी थी और अब जल्दी में बाहर निकलने को हुई तो देखा की बारिश हो रही है! लेकिन जाना तो था ही, वो बारिश में ही स्टैंड की तरफ चल पड़ी।
राज बाहर निकला और पार्किंग से गाड़ी निकालते वक़्त बारिश देखकर उसे बेवजह ही डॉली याद आ गयी, " चली गयी होगी क्या? लेकिन खाना तो उसका ही बनाया हुआ था! अभी ही निकली होगी! ऐसे मौसम में दूर दूर तक ऑटो भी नजर नही आ रहे!"
डॉली स्टैंड पर खड़ी थी , लगभग पूरी ही भींग चुकी थी! लेट होने की वजह से आस पास लड़कियाँ नजर नही आ रही थी , चंद आवारा किस्म के लड़के कुछ दूरी पर खड़े थे और डॉली के भींगे गदराए जिस्म को रुक रुककर निहार लेते!
राज की आती हुई गाड़ी पर डॉली की नजर पड़ी तो वह अंधेरे की तरफ हो गयी ताकि राज उसे न देख सके! राज की कार वहाँ से गुजरी तो साइड व्यू मिरर में उसे आगे आकर खड़ी होती हुई डॉली नजर आ गयी और उसने कार की गति धीमी करते हुए पीछे देखना शुरू कर दिया! उसके पास खड़े लड़के जब नजर आए तो राज ने अंधेरे में गाड़ी रोक दी और उस मे बैठा उस तरफ देखता रहा, वो लड़के अब कुछ कमेंट करने लगे थे शायद क्योंकि डॉली ने पलटकर गुस्से भरी नजरों से उन्हें घूरते हुए कुछ कहा।
राज की मुठ्ठियाँ स्टेयरिंग पर कस गयी और चेहरे पर नाराजगी के भाव आ गए! वो लड़के उसकी तरफ बढ़ने लगे
तो राज ने दाँत कसते हुए कठोर चेहरा किया और गाड़ी से बाहर निकलना चाहा लेकिन तभी देखा की डॉली ने हाथ का पर्स औऱ थैला एक तरफ को रख दिया और आगे बढ़ते लड़के को एक घूसा जड़ दिया , साथ वाले लड़के आगे बढ़े तो उनमें से एक को पीछे की तरफ गधे की तरह लात जमाते हुए आगे वाले कि गर्दन पर तिरछी हथेलियों से वार कर दिया गिरते ही कोहनी से उसके जबड़े पर ताबड़तोड़ वार कर दिए!
बारिश में ही खड़ी होकर बाकी दोनो की तरफ बाजू चढ़ाते हुए बढ़ी तो उन्होंने चाकू निकाल लिया और चलाने को हुए तो डॉली ने झुककर वार से बचते हुए हाथ पकड़ लिया औऱ सिर से ही सीने पर वार किया तो चाकू छिटक कर नीचे गिर गया, डॉली ने पलक झपकते ही झपट्टा मारते हुए चाकू उठा लिया औऱ लहराते हुए बोली, " बचना है तो भाग जाओ वरना काटकर रख दूँगी!"
वे सभी भाग गए तभी डॉली के हाथ से पीछे से किसी ने चाकू छीन लिया तो डॉली ने कोहनी मारने के लिए जैसे ही हाथ पीछे किया, राज ने हाथ पकड़कर खुद की तरफ खींच लिया और बोला, " इनफ!"
डॉली ने हाथ छुड़ाकर उसे खुद से दूर कर दिया और अपना बैग लेने दूसरी तरफ बढ़ गयी तो राज ने रुमाल से चाकू पोंछते हुए उसे दूर फेंक दिया और उसकी तरफ देखने लगा।
राज की मीटिंग आज दूबे जी के साथ थी,,,,
वह मीटिंग के लिए पहुँचा तो मिस्टर राव और मिस्टर राठी अभी तक नही पहुँचे थे! दूबे जी उसे केबिन में बिठाकर कुछ अर्जेंट काम से चले गए थे!
उनके जाते ही राज भी केबिन से बाहर निकल आया और
इधर उधर घूमकर ऑफिस देखने लगा! तभी उसके कानों में जानी पहचानी सी आवाज पड़ी,, " मैं बता रही हूँ, आगे की चेयर पर बैठो तो छाता लेकर बैठो, ताकि दुबे जी के थूक के फव्वारों से बच सको!! वरना आराम से भीगो उनके फव्वारों में!"
राज चुपचाप उस ओर देखने लगा,,, जैसे ही वो हल्की सी तिरछी हुई , राज को कोई संदेह नही रह गया! वो डॉली थी!
राज उसे देखते ही गुस्से में जाने के लिए पलटा और मन ही मन बोला, " मुझे बिना इन्फॉर्म किये नौकरी छोड़ दी और यहाँ काम कर रही है,, लगता है कुछ ज्यादा ही खुशी मिल गयी है! कैसे हँस रही है?"
तभी राज पर मिस कपूर की नजर पड़ गयी और वो आगे बढ़ते हुए बोली,, " मिस्टर शर्मा !! हैलो!"
उसने अपना हाथ बढ़ाया तो भी राज ने अपना हाथ जेब से नही निकाला,, सारी लड़कियों का ध्यान उसी ओर चला गया और वे खुसर फुसर करने लगी,,,
एक बोली, " देख, राज शर्मा यहाँ हैं!"
दूसरी,,,," ओ माई गॉड! यकीन नही हो रहा!"
तीसरी,,,,"उफ्फ! कितना हैंडसम हैं न!!"
चौथी,,,,"हैंडसम तो बहुत लोग होते हैं! ये तो हॉट है!!"
डॉली ने अब पलटकर उस ओर देखना चाहा तो राज ने जान बूझकर उसे दिखाने के लिए मिस कपूर का बढ़ा हुआ हाथ थामते हुए कहा, " हैलो! मिस कपूर..!" और फिर बाकी कलीग्स की तरफ देखकर उसने एक खूबसूरत स्माइल की तो सारी लड़कियाँ उसकी तरफ चल दी!
डॉली की नजर उस पर पड़ी और उसे लड़कियों से घिरा देखकर वो मन ही मन बोली, " ये लड़कियाँ नही सुधरेंगी! इन्होंने ही इस नागफनी के भाव बढ़ा रखे हैं! घेर कर खड़ी हो जाती हैं , चाहे वो भाव दे या न दे!"
राज आज सबसे मुस्कुराते हुए बात कर रहा था, डॉली वहाँ से चली गयी तो राज भी अपने केबिन में जाने के लिए बढ़ गया।
मीटिंग में राज , दूबे जी के सामने वाली चेयर पर दूसरे छोर पर बैठा, दूबे जी ने कितना भी इंसिस्ट किया आगे अपने पास वाली चेयर पर बैठने को लेकिन राज नही बैठा!
मीटिंग शुरू हुई तो सबका ध्यान बातों पर था और आगे की
चेयर पर बैठने वाले दूबे जी के फव्वारों से परेशान थे! राज राहत की सांस लेते हुए सोचने लगा , " अच्छा हुआ!! उसकी बात कानो में पड़ गयी थी वरना उन लोगो की जगह मैं वहाँ बैठा ये सब झेल रहा होता...!!"
"आगे की चेयर पर छाता लेकर बैठना !" इमेजिन करते हुए राज के होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी, जिसे राज ने फौरन दबा लिया।
तभी दरवाजा खुला तो डॉली और एक अन्य लड़की साथ मे अंदर आयी, उनके हाथ मे नाश्ता था!
राज ने उसे अनदेखा कर दिया औऱ फाइल में देखने लगा, डॉली सबके आगे सर्व करने लगी!
डॉली ने जैसे ही राज के आगे सर्व किया राज ने तुरंत हथेली से उसे एक तरफ को सरका दिया औऱ बोला, " हटा लीजिये!"
दूबे जी उसे देखते हुए बोले, " ऐनी प्रॉब्लम शर्मा साहब!"
राज और डॉली ने एक साथ उनकी तरफ देखा तो दूबे जी बोले, " चख कर तो देखिए,, डॉली ने खुद बनाया है! इनके हाथ के टेस्ट को मान जाएंगे आप!"
राज ने फिर भी इंकार कर दिया और बोला, " शुक्रिया दूबे जी, लेकिन अगर ऐसा है तो मुझे अपना टेस्ट नही बदलना।"
डॉली ने नाश्ता उठा लिया और जाने को हुई तो राज ने
नजर हटा ली लेकिन तभी वो नाश्ता राज के ऊपर गिर गया तो राज उठ खड़ा हुआ!
बाकी सब भी चौंक गए!
राज फौरन बोला, " कैसे लोगो को काम पर रखते हैं आप? जिन्हें चलने भी नही आता!! कपड़े खराब कर दिए मेरे!"
"डॉली खड़ी खड़ी देख क्या रही हो? ध्यान से हटाना चाहिए था न!! अब जाओ, इन्हें वॉशरूम दिखा दो, सॉरी बोलो!!" दूबे जी नाराजगी से बोले।
"सॉरी!! आइये सर..! मैं साफ करने में हेल्प कर देती हूँ।" डॉली ने मन मारकर कहा और गेट से बाहर निकल गयी तो राज भी साथ मे बाहर आया और बोला, " ये हरकत जान बूझकर की थी न आपने!!"
डॉली ने अब उसकी तरफ देखते हुए कहा, " खाना आपके लिए था, आपने न सही, आपके कपड़ो ने ही टेस्ट कर लिया! आपको अच्छा नही लगा?"
" अभी तो सिर्फ सॉरी बुलवाया है! नौकरी से भी निकलवा
सकता हूँ!"
" ऑप्शन तो हर जगह होते हैं न शर्मा साहब! आपके यहाँ से काम छोड़ा तो यहाँ नौकरी कर ली! यहाँ से छोडूंगी तो कहीं और कर लूँगी! पूरी दुनिया पर तो आपका राज है नहीं!!"
राज अब रुक गया और उसकी तरफ मुड़ते हुए बोला, "शुक्र कीजिये की अभी तक आपको खुद से दूर करने की कोशिश की है, क्योंकि जिस दिन आप मे दिलचस्पी जगी न, उस दिन आपको मेरी क्षमता का अंदाजा खुद हो जाएगा!"
"आपकी क्षमता का तो पता नही लेकिन हाँ! आज की इस सॉरी के बदले आपसे सॉरी न बुलवाया तो मैं डॉली नही!!"
" हाहाहा! सपने बहुत हसीन है आपके! पर अफसोस पूरे नही होंगे!" राज अकड़कर बोला।
"वॉशरूम आ गया , आप अंदर जा सकते हैं!" डॉली ने कहा और जैसे ही दूसरी तरफ जाने को हुई , राज ने उसकी कलाई पकड़ ली।
"लगता है पहले की बातें भूल गए हैं आप!" डॉली ने
अपनी कलाई की तरफ देखते हुए कहा तो राज ने हाथ छोड़ दिया औऱ बोला, " सूट की कीमत पता है आपको! आपकी आधे साल की सैलरी लग जायेगी मेरा भुगतान करने में.....!! गन्दा करके चल दी, साफ कौन करेगा?"
"अरे कैसी बात कर रहे हैं सर आप, ऑफ कोर्स मैं करूँगी न!" कहते हुए डॉली ने उसका सूट उतारने में मदद की औऱ फिर शर्ट को तौलिए से रगड़ते हुए धीमे से कहा, "इस दौरान कोई दुर्घटना घटी तो जिम्मेदार आप होंगे! क्योंकि आपके मुताबिक मुझे तो कोई शऊर ही नही किसी काम को करने का!"
राज को उसकी बात याद आ गयी की ' छाती के बाल उखाड़ दूँगी' और उसके साथ ही उसने अपने सीने पर मौजूद डॉली की कलाई पकड़कर उसे दूर करते हुए , उसके हाथ से तौलिया छीनते हुए कहा, " आप जा सकती हैं! कोई काम आपसे ढंग से करने की उम्मीद नही की जा सकती, मैं खुद कर लूँगा!"
"बस यही सुनना था मुझे, की आप खुद कर लोगे!" डॉली ने कहा तो राज ने उसकी तरफ घूरकर देखा तभी डॉली ने भी उसकी आँखों मे देखते हुए कहा, " लेकिन ये नही सुनना था की सामने वाली को ये बोलते रहो की 'तुम्हे ये नही
आता!' 'वो नही आता!' 'तुमको कुछ नही आता!!'
क्योंकि मुझे तो सब आता है......, लेकिन बाकी जो औरतें चुपचाप सह लेती हैं न, उन्हें भी ये सुनाने का हक नही है आप मर्दों को की तुम्हे कुछ नही आता....!! क्योंकि उन्हें जो सहना आता है न, वही सहनशक्ति आपके परिवार के बने रहने की नींव है! सहना छूटा तो परिवार टूटा!!
आप अकड़ में रहोगे और मुझसे बेबस होने की ख्वाहिश करोगे तो नही चलने वाला....!! बहुत दृढ़ता से निर्भय होकर जीना सीखा है मैंने ,और किसी को भी मैं खुद को डराने या दबाने की इजाजत नही दूँगी!"
राज ने नजर हटाकर अपने शर्ट को साफ करते हुए कहा, " डराने की तो कोशिश ही नही की मैंने आज तक! लेकिन इतना समझ चुका हूँ की तुम डरोगी किस चीज से!"
डॉली ने उसकी तरफ असमंजस से देखा तो शीशे में ही राज उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराकर बोला, " इस तरह सवालिया निग़ाहों से मेरी तरफ देखने से आपको मैं जवाब नही दे दूँगा, आप जा सकती हैं।"
" नही!! जरा मैं भी तो सुनूं, मैं किस चीज से डर जाऊँगी!"
" इतनी बेताबी क्या है जानने की? यकीन रखिये और वक़्त
आने दीजिये, आपको मैं खुद बताऊँगा।"
डॉली चिढ़ा हुआ सा मुँह बनाकर जाते हुए बोली, " हुँह!! एवै ही , पता तो कुछ है नही , बस यूं ही कुछ भी बोलकर उलझाने की कोशिश कर रहा है।"
राज अब कुछ देर बाद बाहर निकलते हुए उसके हाथ मे सूट पकड़ाते हुए बोला, " ये सूट ड्राई क्लीन को दे देना और जब आ जाये तो मेरे घर पहुंचा देना।"
डॉली ने उसको टोकते हुए कहा, " सूट पकड़ाकर चल दिये, पैसे कौन देगा?"
राज अब पलटा और बोला, " ओवर स्मार्टनैस के चक्कर मे गलती आपने की है और पे भी अब आप खुद ही करेंगी!"
"तुम न..!!" डॉली ने कुछ कहना चाहा फिर रुक गयी तो राज बोला, " आप कुछ कहना चाह रही थी?"
" हाँ!! मैं आपके यहाँ कुछ दिन काम करके गयी थी, जिसकी पेमेंट मैंने अभी तक नही ली, तो उन पैसों से अपनी ड्राई क्लीन खुद करा लेना।" डॉली ने कहा और राज के हाथों में सूट पकड़ाना चाहा तो राज ने अपना हाथ पीछे
खींच लिया और बोला, " आप मेरे यहाँ से बिना इन्फॉर्म किये काम छोड़कर चली गयी तो सैलरी भी कट हो गयी, एक रूल आपने फॉलो नही किया तो एक रूल मैंने भी तोड़ दिया! अब ये आपकी हेडेक है की आप ड्राई क्लीन कैसे कराती हैं...? और एहसान मानिए की तारीख फिक्स नही की कब लौटाना है..... वरना आपको मुसीबत में फँसाने के तरीके बहुत हैं मेरे पास लेकिन आप इतनी इम्पोर्टेन्ट नही की अपनी सारी क्षमता का उपयोग आप पर करूँ!"
डॉली चिढ़ते हुए नाराजगी से बोली, "आप एक नम्बर के बेहूदे आदमी हैं! जरा सी भी सभ्यता तो आप दिखा ही नही सकते! हैं न..??"
राज ने शान से जेब मे हाथ रखते हुए कहा, "क्योंकि आप यही डिजर्व करती हैं, और रही बात सभ्यता की.... तो जैसा मैं नही हूँ वैसा बनने का असफल प्रयास भी नही करता! मैं असभ्य हूँ तो हूँ!!"
राज चल दिया तो डॉली पीछे से पैर पटक कर रह गयी।
राज मीटिंग हॉल में लौट गया और डॉली अपने केबिन में! वह गुस्से में बड़बड़ाते हुए बोली, " इसे सबक सिखाने के चक्कर मे बेकार का खर्चा बढ़ गया! ये आया ही क्यों यहाँ, भगवान करे जिस काम के लिए आया है वो काम न बने और यहाँ से चलता बने!"
राज अपनी जीत पर बहुत खुश था और मीटिंग करते हुए दूबे जी के साथ डील साइन कर ली। मीटिंग के बाद डिनर का भी प्रोग्राम था, काफी लेट हो गया इन सब मे और बाहर मौसम खराब था! तेज बारिश शुरू हो चुकी थी, डॉली भी घर फोन कर चुकी थी और अब जल्दी में बाहर निकलने को हुई तो देखा की बारिश हो रही है! लेकिन जाना तो था ही, वो बारिश में ही स्टैंड की तरफ चल पड़ी।
राज बाहर निकला और पार्किंग से गाड़ी निकालते वक़्त बारिश देखकर उसे बेवजह ही डॉली याद आ गयी, " चली गयी होगी क्या? लेकिन खाना तो उसका ही बनाया हुआ था! अभी ही निकली होगी! ऐसे मौसम में दूर दूर तक ऑटो भी नजर नही आ रहे!"
डॉली स्टैंड पर खड़ी थी , लगभग पूरी ही भींग चुकी थी! लेट होने की वजह से आस पास लड़कियाँ नजर नही आ रही थी , चंद आवारा किस्म के लड़के कुछ दूरी पर खड़े थे और डॉली के भींगे गदराए जिस्म को रुक रुककर निहार लेते!
राज की आती हुई गाड़ी पर डॉली की नजर पड़ी तो वह अंधेरे की तरफ हो गयी ताकि राज उसे न देख सके! राज की कार वहाँ से गुजरी तो साइड व्यू मिरर में उसे आगे आकर खड़ी होती हुई डॉली नजर आ गयी और उसने कार की गति धीमी करते हुए पीछे देखना शुरू कर दिया! उसके पास खड़े लड़के जब नजर आए तो राज ने अंधेरे में गाड़ी रोक दी और उस मे बैठा उस तरफ देखता रहा, वो लड़के अब कुछ कमेंट करने लगे थे शायद क्योंकि डॉली ने पलटकर गुस्से भरी नजरों से उन्हें घूरते हुए कुछ कहा।
राज की मुठ्ठियाँ स्टेयरिंग पर कस गयी और चेहरे पर नाराजगी के भाव आ गए! वो लड़के उसकी तरफ बढ़ने लगे
तो राज ने दाँत कसते हुए कठोर चेहरा किया और गाड़ी से बाहर निकलना चाहा लेकिन तभी देखा की डॉली ने हाथ का पर्स औऱ थैला एक तरफ को रख दिया और आगे बढ़ते लड़के को एक घूसा जड़ दिया , साथ वाले लड़के आगे बढ़े तो उनमें से एक को पीछे की तरफ गधे की तरह लात जमाते हुए आगे वाले कि गर्दन पर तिरछी हथेलियों से वार कर दिया गिरते ही कोहनी से उसके जबड़े पर ताबड़तोड़ वार कर दिए!
बारिश में ही खड़ी होकर बाकी दोनो की तरफ बाजू चढ़ाते हुए बढ़ी तो उन्होंने चाकू निकाल लिया और चलाने को हुए तो डॉली ने झुककर वार से बचते हुए हाथ पकड़ लिया औऱ सिर से ही सीने पर वार किया तो चाकू छिटक कर नीचे गिर गया, डॉली ने पलक झपकते ही झपट्टा मारते हुए चाकू उठा लिया औऱ लहराते हुए बोली, " बचना है तो भाग जाओ वरना काटकर रख दूँगी!"
वे सभी भाग गए तभी डॉली के हाथ से पीछे से किसी ने चाकू छीन लिया तो डॉली ने कोहनी मारने के लिए जैसे ही हाथ पीछे किया, राज ने हाथ पकड़कर खुद की तरफ खींच लिया और बोला, " इनफ!"
डॉली ने हाथ छुड़ाकर उसे खुद से दूर कर दिया और अपना बैग लेने दूसरी तरफ बढ़ गयी तो राज ने रुमाल से चाकू पोंछते हुए उसे दूर फेंक दिया और उसकी तरफ देखने लगा।