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Romance अनमोल अहसास

क्या ये सही कह रहा है कि उसकी जिंदगी में कोई है, या फिर ये भी खुद ही एज्यूम कर लिया है, कोई फैक्ट है या नही इस बात के पीछे?"

सुभद्रा देवी सोच में डूबी नीचे उतर आई और डायनिंग टेबल के सामने चेयर पर बैठ गयी, राज किचन में लगा हुआ था, सुभद्रा देवी उसे देखते हुए सोचने लगी, " मैं गलत नही हो सकती! ये माने या न माने पर राज में बदलाव तो आ रहे हैं, उस लड़की का असर इस पर हो रहा है!"

राज नूडल्स बनाकर ले आया और दादी के आगे बाउल रखते हुए बोला, " खाइए अपने पोते के हाथ का गरमा गरम नूडल।"

दादी औऱ राज दोनो खाने लगे तो राज खत्म करते हुए बोला, " अब निकल रहा हूँ, एक बिजनेस मीटिंग है , शायद रात में ही आऊं!"

सुभद्रा देवी मुस्कुरा दी औऱ बोली, " ऐसे ही तरक्की करो!"

राज तैयार होने चला गया।

उधर आज डॉली अपने वादे के मुताबिक विनाश को लेकर

होटल पहुँची, कुछ दूरी पर ही एक गुब्बारे वाला नजर आ गया तो डॉली ने विनाश की ललचाई नजरों को देखते हुए एक गुब्बारा दिलाने का फैसला किया!

वह विनाश को लेकर आगे बढ़ गयी और गुब्बारा दिलाने के लिए पैसे निकालने लगी, विनाश का हाथ उसने छोड़ दिया था।

तभी विनाश के हाथ से गुब्बारा छूट गया तो वह डॉली से कहे बिना ही उसे पकड़ने को दौड़ गया। डॉली पैसे देकर मुड़ी तो विनाश को वहाँ न देखकर जी सन्न रह गया, उसने इधर उधर देखा तो आँख में आँसू भरे विनाश नजर आया लेकिन उसकी तरफ एक आवारा साँड़ बढ़ रहा था।

डॉली बिना कुछ सोचे समझे उसकी तरफ दौड़ गयी और साथ ही चिल्लाई, " बेबी मेरी तरफ आओ, भागों वहाँ से..!"

विनाश को दूर होने की वजह से कुछ समझ नही आया, उसकी नजर अभी भी आसमान की तरफ चली गयी।

राज की मीटिंग होटल रेजिडेंशियल में ही थी, उसने बाहर रोड के दूसरी साइड कार खड़ी की और बाहर निकलकर रोड क्रॉस करने लगा तभी कुछ लोगो को चीखते सुना, "अरे रोको उस लड़की को...!!"

राज ने उनकी नजरो का अनुसरण करते हुए उसी तरफ देखा तो बच्चे की तरफ बढ़ते साँड़ और भागती हुई डॉली पर नजर पड़ी!

तब तक विनाश भी अब साँड़ को देख चुका था और उसके दिमाग ने काम नही किया तो डर के मारे वह घुटनों में चेहरा छिपाकर बैठ गया!!

ये सब देखकर राज के कदमों की गति बढ़ गयी, डॉली भी भागते हुए विनाश तक पहुंची और उसे आगोश में समेटते हुए बैठ गयी क्योंकि भागने का वक़्त नही था, साँड़ अब विनाश पर हमला करने ही वाला था औऱ उसे बचाने का एक ही रास्ता था कि वार को अपने ऊपर ले ले!

जब कुछ पल बीतने पर भी उसे चोट नही आई तो उसने विनाश को सीने में चिपकाए हुए ही पीछे सिर घुमाया तो राज ने साँड़ की सींग को पकड़ रखा था।

"जाओ यहाँ से..!!" राज ने बिना उसकी तरफ देखे ही तेज आवाज में कहा।

डॉली उठी और विनाश को लेकर होटल की तरफ चली

गयी क्योंकि वहाँ श्रेया औऱ विशाल भी आये हुए थे! डॉली ने जाकर होटल मैनेजमेंट से हेल्प की डिमांड की और उन्हें सारा माजरा बताते हुए विनाश को विशाल के पास छोड दिया फिर खुद बाहर निकल आयी। होटल से बाकी लोग भी बाहर निकल आये औऱ राज को साँड़ के साथ फाइट करते हुए देखने लगे।

राज को साँड़ ने उठाकर दूसरी तरफ पटक दिया लेकिन सींग नीचे करते ही राज ने उतनी ही फुर्ती से वापस उसकी सींगों को पकड़ लिया और उठ खड़ा हुआ, कोहनी से उसकी दोनो आंखों के बीच के हिस्से पर वार किया तो सांड और खूंखार हो उठा, दोनो को लड़ते देख लोग वीडियो बनाने लगे तो डॉली नाराज हो गयी और चीख उठी,, " तमाशा चल रहा है यहाँ पर..! मदद को आगे नही जा सकते और वीडियो बनाये जा रहे हो, एंटरटेनमेंट चाहिए तो घर जाकर टीवी देखो, इमोशनलेस पीपल्स!"

लड़ाई में राज की शर्ट कई जगह से फट गई थी लेकिन वो हार नही मान रहा था और अब तक खुद को साँड़ के सींगों के वार से बचा रखा था।

उसके चेहरे से जाहिर हो रहा था कि वो अब थक रहा था, साँड़ ने उसे फिर पटखनी दी और आखिरकार राज के पलटते पलटते भी उसकी बाँह पर सींग से वार कर ही दिया,

राज के जबड़े दर्द से कस गए और माथे में गर्मी पसर गयी, पसीने से वह पूरी तरह भीग गया था। वह उठा और घायल हाथो के साथ ही फिर साँड़ को पकड़ने की कोशिश की लेकिन उसे सींग पड़ते देखकर डॉली रुक नही पायी थी और वो उसी तरफ दौड़ गयी!

राज एक बार फिर जमीन पर पड़ा था और साँड़ जैसे ही उस पर वार करने को हुआ, डॉली अचानक ही राज के ऊपर आ गयी! राज उसे लेकर पलटी मार गया और दूसरा वार भी खुद की उसी बाँह पर ले लिया!

तब तक विनाश विशाल से हाथ छुड़ाकर दौड़ पड़ा, " मम्मा...!!"

राज ने उस बच्चे की तरफ देखा, इतने में उसकी बाहों में मौजूद डॉली विनाश की तरफ देखते हुए बोली, " बेबी...!! नो..!!"

राज ने अब अपनी आंखें बंद कर ली और डॉली से अपनी पकड़ छोड़ दी, डॉली उठ गई और राज को उठाने लगी तो राज ने अपना हाथ झटक दिया और खुद उठ खड़ा हुआ!

होटल से कुछ शेफ निकल आये थे और उनके हाथ मे कुछ

जलती मशाल थी जिससे वो उस साँड़ को दूर हटा रहे थे।

विनाश आकर डॉली से चिपक चुका था , " मम्मा.! सॉरी मम्मा! ठीक तो हो न आप..?"

"मैं पूरी तरह ठीक हूँ बेबी! डोंट वरी..!!" डॉली ने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए राज की तरफ देखते हुए कहा।

राज की तरफ विशाल ने पानी की बोतल बढ़ाई तो राज ने अपनी शर्ट उतार कर नीचे फेंक दी और बोतल को खोल पानी अपने सिर और चेहरे पर गिरा लिया।

सैंडो पहने थका हुआ राज एक अलग ही आभा फैला रहा था, डॉली की तो नजर ही नही हट पा रही थी! वो घायल था, बाँह जख्मी थी लेकिन इस वक़्त यह कहने में कोई दो राय नही थी कि वो बहुत हॉट लग रहा था।

विनाश डॉली से अलग होकर राज की तरफ बढ़ा और बोला, " मिस्टर हैंडसम! थैंक यू!! आप तो माचो मैन हो..! मुझे बड़े होकर आप जैसा ही बनना है, मैं भी सबसे लड़ जाऊंगा अपनी मम्मा के लिए!"

" अपनी मम्मा के लिए..!" सुनकर राज की लंबी

मुस्कुराहट हल्की हो गयी और उसने विनाश के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, " आई विश आप मेरी तरह बने .... लेकिन आपकी मम्मा शायद ये न चाहे! आप वैसा बनना जैसा वो चाहें, आपसे बहुत प्यार करती हैं!"

राज के साथी बिजनेस मैन भी वहाँ आ चुके थे, राज ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, " घर पर पहुँचे, वहीं करते हैं मीटिंग!"

सब उसकी तारीफ करते हुए अपनी अपनी गाड़ियों में बैठ गए तो राज ने एक बोतल को होठो से लगा लिया और पानी पीने लगा इतने में डॉली ने आगे बढ़कर अपना स्कार्फ उसके घाव पर बांध दिया तो राज ने अपना हाथ खींच लिया और विशाल की तरफ देखकर बोला, " विशाल पहुंच कर उन्हें अटेंड करो तब तक मैं ड्रेसिंग कराके आता हूँ!"

डॉली ने स्कार्फ ढंग से बांधने के लिए फिर भी उसकी बाँह पकड़ ली तो राज ने भी उसका हाथ कसकर पकड़ते हुए अपनी कलाई से उसका हाथ हटाते हुए धीरे से कहा, " ऐसे काम नही करने चाहिए जिनसे दर्द मिले!! मुझे भी कन्सर्न की आदत नही!! और जहां तक मुझे लगता है आपको सुर्खियों में आने की आदत नही होगी, ऐसी हरकतों से सुर्खियों में आ जाएंगी और सफाई मुझे पेश करनी

पड़ेगी....!! मेरा तो सुर्खी से कुछ नही बिगड़ेगा लेकिन आप पर भारी पड़ जाएगी ऐसी सुर्खियां....!! मुझसे करीबी मत बढ़ाना, दूर रहती आयी हो तो दूर ही रहो मुझसे!!"

राज के भावों और नजरो में एक ठंडक भरी चुभन थी, उसने अपने निचले होठ के कोर को एक तरफ से दबाया हुआ था , जिससे साफ जाहिर था कि वो बेहद गुस्से में है।

उसने डॉली के हाथ को अपनी मजबूत मुट्ठी से आजाद कर दिया और अपनी कार की तरफ बढ़ गया।

डॉली अपनी कलाई को सहलाने लगी, राज ने आज कुछ ज्यादा ही कठोरता से उसकी कलाई को पकड़ा था, पल भर को लगा कि वो स्थान सुन्न हो गया है।

राज हॉस्पिटल चला गया और उस रखे हुए स्कार्फ को घूरने लगा, " मम्मा..!" उसके कानों में इस शब्द से चुभन हो रही थी, वो अपने दांत जमाये हुए घर के लिए निकल गया!!
 
राज की फोटोज और वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल हो गयी थी, सब उसके फैन बने जा रहे थे!

सुभद्रा देवी तक भी खबर पहुंच गई थी, राज जैसे ही घर आया सुभद्रा देवी उसे पकड़ते हुए बोली, "कहाँ चोट लगी बच्चे? क्या जरूरत थी साँड़ से भिड़ने की...?"

"मैं ठीक हूँ दादी! और जरूरत थी वरना मुझे रोड पर हीरोगिरी दिखाने का कोई शौक नही है!"

"मैं मालिश कर दूँ, दर्द हो रहा होगा न!"

" नही!! ठीक हूँ मैं! मीटिंग करने जा रहा हूं!"

राज बाहर वाले रुम में चला गया, वह मीटिंग करने लगा तो विशाल बाहर आ गया, सुभद्रा देवी ने उससे जानकारी ली तो उसने सब कह सुनाया!

सुभद्रा देवी को राज की चोट का दुख था लेकिन ये सब डॉली के लिए किया, इस बात से खुशी भी हुई।

राज आज गुप्ता जी, रॉय जी और सिंह जी और सक्सेना जी को छोड़ ही नही रहा था, वो गुस्से में था और मीटिंग को आगे बढ़ाए चला जा रहा था।

आखिर में जब हिम्मत जवाब दे गई और साँड़ के सकत फाइटिंग में पूरा बल आजमाने की वजह से अब शरीर का जोड़ जोड़ दर्द करने लगा तो उसने उन्हें छोड़ दिया।

राज जाकर अपने कमरे में लेट गया, शरीर और जख्म में बेहिसाब दर्द हो ही रहा था लेकिन मन भी कम व्यथित नही था!

"मम्मा..!" शब्द फिर उसके दिमाग मे आ ठहरा तो उसने तकिया उठाकर अपने मुंह पर रख लिया और बोला, "उस बच्चे ने उल्कापिंड को मम्मा कहा तो मुझे क्यों तकलीफ हो

रही है...? नही!! कुछ नही हुआ है मुझे , कोई तकलीफ नही है किसी की वजह से...!! दर्द की वजह से शायद कुछ समझ नही पा रहा हूँ! बेवजह दिमाग उलझा रहा हूँ अपना...!!"

वह दूसरी ओर करवट फेरने को हुआ तो बाँह का जख्म दब गया और वह दर्द से तड़प उठा, " ये क्या हो रहा है....? ये क्यों हो रहा है...? जख्म इतना भी नही की सहा न जा सके!! मगर पहली बार रोने का जी क्यों कर रहा है ?"

वह उठा और बाहर निकलने को हुआ तो संतोष कमरे में आया, उसे देखकर राज रुक गया और वापस पलंग पर आ बैठा। सन्तोष ने उसकी शर्ट उतार दी और मालिश करने को हुआ तो राज बोला, " पहले एक काम करो!"

संतोष वहाँ से चला गया और कुछ देर बाद आया तो उसने राज के पास सामान रख दिया! राज ने सिगरेट निकाली और पीने लगा,, धुआं जलन पैदा कर रहा था, आंखे दर्द से लाल हो रही थी लेकिन वह एक सिगरेट बुझते ही दूसरी निकाल लेता!

आखिर में जब वह पाँचवी सिगरेट निकालने को हुआ तो संतोष ने उसे टोक दिया, " माफ कीजिये साहब! लेकिन अब बस कीजिये! दादी साहेब आ गयी तो मुश्किल में पड़ जाएंगे हम!"

राज ने हाथ रोक दिया और आंखे बंद कर ली, मालिश से कुछ आराम मिला तो नींद आंखों को घेरने लगी! राज जाने कब सो गया!!

डॉली की आंखों में नींद नही थी तो वहीं विनाश भी जग कर बातें किये जा रहा था--

" मम्मा! वो हैंडसम अंकल कितने ब्रेव है न!"

" हम्म!"

" क्या लड़ाई की उन्होंने बुल के साथ..!"

" हम्म!"

" मैं भी बड़ा होकर उनकी तरह ही बनूंगा, ताकतवर!! किसी से नही डरूँगा!"

" हम्म!"

"मुझे तो वो बहुत पसंद है!"

"हम्म!!"

" वो आपको भी पसन्द आये न..??"

"हम्म..!"

"वाओ..! मैं जानता था आपको वो जरूर अच्छे लगेंगे!"

विनाश ने उसके गले मे बाँहे लपेटते हुए कहा तो डॉली का ध्यान उसकी बात पर गया और वो बोली, " वो अच्छे नही लगे , एक मुलाकात में हम किसी को कितना जान सकते हैं.? उनकी बहादुरी ने जरूर मन जीत लिया! अगर वो नही होते तो हम दोनों यहाँ सही सलामत बैठकर यूँ बातें नही कर रहे होते!"

" तो फिर आपने उन्हें थैंक यू क्यों नही कहा?"

" उस वक़्त सब इतनी जल्दी में हो रहा था कि दिमाग नही चल रहा था, मैं भूल गयी थैंक यू कहना..!"

" कोई बात नही, अब कह दो.!"

" कैसे..?"

" ये लो कार्ड , इस पर उनका नम्बर है! जब उन्होंने शर्ट उतारकर फेंका न तब उनकी जेब से गिर गया था! मैंने उठा लिया था चुपके से..!!"

डॉली ने उसके हाथ स्व कार्ड लेते हुए कहा, "ऐसा क्यों किया? चुपके से क्यों..? उन्हें वापस कर देते न!"

" कर तो देता लेकिन मुझे वो बहुत अच्छे लगे न इसलिए छिपाकर रख लिया..!! उनसे बात करके उनके बारे मे आप मुझे बताना फिर मैं उनके जैसा बनूँगा।"

डॉली ने उसे खुद से चिपका लिया और बोली, " अब सो जाइये आप! उन्हें आप इतना याद करेंगे तो वो सो नही पाएंगे और उन्हें तो चोट लगी है न , उनका सोना जरूरी है!"

विनाश अब चुपचाप सो गया, डॉली उसके बालों को सहलाती रही। जब लगा कि विनाश गहरी नींद में चला गया है तो वह उठी और मोबाइल लेकर कार्ड को देखने लगी, " मिलाऊँ की नही..!!हाल पूछने का गलत मतलब तो नही निकलेगा..?? पर कॉल करने पर कहने लगा कि मेरा नम्बर ढूंढती फिर रही हो, बहुत डिस्पेरेट हो तब...?? नही..! फोन नही करूँगी..! घर पर ही जाकर मिल आऊंगी कल..!"

डॉली रात भर करवट बदलती रही लेकिन उसको नींद नही आई, राज के लिए उसके मन मे कोई भी अरमान नही थे लेकिन कल से उसे देखने का नजरिया जरूर बदल गया था।

उधर राज ने दर्द और नींद का इंजेक्शन लिया तब जाकर वह सो पाया।

सुबह डॉली ने विनाश जो स्कूल ड्राप किया फिर राज के घर चली गयी! दादी पूजा कर रही थी तो वह राज के रूम में चली आयी, राज सिरहाने से सिर को टिकाए आँखे बंद किये हुए था, डॉली के कदमो की आहट के बावजूद उसने आंख नही खोली और बोला, " यहाँ आने की अनुमति नही है आपको!"

" मैं बस कल की वजह से हाल चाल पूछने आयी थी...!"

" जिंदा नजर आ रहा हूँ न!" राज ने आंख खोलते हुए तल्ख लहजे में कहा।

" कल के लिए थैंक यू..!"

" आप जा सकती है!"

" कल से इस तरह का बिहेव क्यों कर रहे हैं आप..? मैं कुछ समझ नही पा रही! मैं जान बूझकर मुसीबत में नही फंसी थी औऱ न ही आपको बुलाया था, आप खुद आये और अब मुझ पर गुस्सा दिखा रहे हैं।"

" ऐसा है क्या..??"

" हाँ! ऐसा ही है!!"

राज एकाएक खड़ा हो गया, और उसकी बाँह पकड़ते हुए उसे करीब खींच कर उसकी निग़ाहों में देखकर बोला, " तो प्यार दिखाऊँ..??"

डॉली की धड़कने बेहिसाब धड़कने लगी, राज के चेहरे की अभिव्यक्ति बहुत उग्र थी, हल्की लाल आंखों में अजीब सा जुनून था।

डॉली ने उससे छूटने की कोशिश की लेकिन राज नही छोड़ रहा था , चुपचाप उसकी आँखों मे घूर रहा था।

" छोड़िये मुझे! कल के लिए थैंक कहने आयी थी लेकिन अब लग रहा है कि गलती कर दी आकर! आप कमीने थे

और वही रहोगे!!"

" और आप क्या हो..? अटेंशन सीकर!!"

" मैंने ऐसी कोई हरकत नही की!"

राज अब नाराजगी से हंसा औऱ उसे छोड़कर हटते हुए बोला, " एक बच्चे की माँ को किसी गैर मर्द के गुस्से या नाराजगी से कोई फर्क नही पड़ना चाहिए! लेकिन उसे फर्क पड़ रहा है और वो बकायदा शिकायत भी कर रही है!!"

डॉली ने अब नाराजी से कहा, " आप बात को गलत दिशा में मोड़ रहे हैं!"

" मैं गलत नही हूँ, गलत आप हो...!! जो है उसे छोड़कर गैर मर्द से प्रभावित हो रही हो!"

" छी: !! निहायती घटिया आदमी हैं आप! न तो मैं किसी से प्रभावित हो रही हूं .... और न ही मेरी जिंदगी में किसी के प्यार की कोई जगह है! आप से जिंदगी में दोबारा कभी नही मिलना चाहूँगी मैं..! कभी नही.!!"

डॉली तेज कदमो से बाहर चली गयी तो राज सब सामान

इधर उधर फेंकते हुए आंखे बंद करके बैठ गया।

दादी दोनो की लड़ाई सुन चुकी थी और अब उसके पास बैठते हुए बोली, " खुद में घुलते रहते हो और उसे भी परेशान करते हो...!! वो चाहत बन गयी है सिर्फ इसलिए उसे तीखे लफ्जो से आहत करते रहते हो, क्यों..? वो तो नही कहने आयी थी कि उसे तमन्ना बना लो अपनी, खुद चुना तुमने उसे! और जब चुना ही है तो उसे अपनाने में संकोच कैसा......?"

" दादी आज नही! प्लीज..!! और उसकी बात तो अब बिल्कुल नही..!! वो शादीशुदा है, उसका एक बेटा है! आप बेवजह ख्वाब देखती रहीं और मुझे भी इन्वॉल्व करती रही लेकिन अब बस हाँ...! अब बस!!"

" वो कभी सिंदूर नही लगाती..! तुम्हे कोई गलतहमी हुई होगी!" दादी ने कहा।

" मुझे कोई गलतफहमी नही हुई दादी! अपनी इन आँखों से देखा है और सुना है! अगर वो मैरिड है तो रहे न मैरिड की तरह, इस तरह क्यों रहती है ताकि आपकी तरह कुँवारो के घरवाले उसके दीवाने हो सके!!"

" राज ..! अपनी जबान काबू में रखें! हो सकता है न कि विधवा हो, इसलिए इस तरह साधारण सी रहती है, मुझसे तो इस तरह की बाते कह ली लेकिन उससे ऐसे लफ्जो में बात मत करना वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा!"

" क्या हो सकता है, क्या नही..? मुझे कोई मतलब नही!! आपकी नजरो में मैं उसके बारे में कुछ नही जानता हूँ ... तो मैं कहता हूं कि कुछ नही जानना......!! कुछ नही..!!"

सुभद्रा देवी उसे गुस्से में देखकर कमरे से बाहर चली गयी, राज ने अपना सिर पकड़ लिया, " क्यो न चाहते हुए भी ये सब हो रहा है? क्यों मेरी जिंदगी का सुकून जा रहा है? क्यों उस पर अधिकार जमाने को जी चाह रहा है? क्या हो गया अगर वो किसी की पत्नी या मां है तो...? मेरी है भी कौन वो जो उससे सफाई मांगूँ या मन मे कड़वाहट रखूं? किस बात की तड़प..?कैसी बदहवासी....? क्यों अपने दायरे में नही रह पा रहा हूँ..? उसे इतना जलील करने का क्या हक...? लेकिन मजबूर भी तो उसी ने किया है, हाँ गलत है वो..! गलत है!!"

डॉली ऑफिस चली गयी और सोचते हुए बोली, " सनकी आदमी है सनकी , साँड़ से कम नही! कब शांत है , कब हमला कर देगा कोई नही जानता!!बेवजह लड़ने के मौके

तलाश लेता है, बद्तमीज, घटिया, अकड़ू , बड़ा आया प्यार दिखाऊँ..?इसी के प्यार की भूखी हूँ जैसे मैं...? खुद को समझता क्या हूं ये आखिर..! इतनी घटिया बातें कह कैसे सकता है..? तेजाब ही खाता पीता है औए मुँह से भी वही उगलता है! सामने वालो को बातों से जला कर रख दे..! इसका बस चले तो आकर कहे कि ' चलो जी भरकर लड़ते हैं!!'

हैंडसम होगा तो अपने लिए मेरे लिए तो हैंडपंप के बराबर भी जरूरी नही!सुभद्रा देवी भी आजकल डॉली के बारे में सोचती रहती थी, जानना तो उन्हें सब कुछ था लेकिन वह उससे फोन पर ये सब बातें नही करना चाहती थी! राज को खुद में घुलता हुआ वह अब और नही देख पा रही थी! उसका स्वभाव बहुत चिड़चिड़ा हो गया था और उदास था लेकिन फिर भी खुद को ठीक होने की तसल्ली देता रहता था।

सुभद्रा देवी जानती थी कि मन से राज खुद से ज्यादा डॉली के पास है लेकिन तन से वो जाने को राजी नही था, उसके बारे में सोचना मंजूर था लेकिन किसी से कहकर उसके बारे में पता लगवाना नही!! उसकी बेचैन नजरों में अब एक उदासी ने घर कर लिया था,बहुत उलझा लिया था उसने खुद को खुद ही!! सुभद्रा देवी ये सारी उलझन सुलझाना चाहती थी और इसलिए राज की हालत ठीक होते ही कुछ रोज बाद उन्होंने अपनी चाल को अंजाम देने का सोचा...!

राज अब पूरी तरह ठीक हो चुका था लेकिन सुभद्रा देवी अचानक ही बीमार पड़ गयी, उन्हें उल्टी दस्त होने लगे और वो दिन ब दिन

कमजोर होने लगी!

राज ने डॉक्टर्स को उनके पीछे लगा दिया था, खुद भी उनकी देखरेख करता लेकिन कोई असर नही हो रहा था।

डॉक्टर का कहना था कि किसी चिंता से इनकी ये हालत हुई जा रही है, और चिंता दूर होने पर ही हालत में सुधार सम्भव है!"

राज एक रोज उनके पास जा बैठा और बोला, " क्या चिंता है आपको? सब कुछ है आपके पास फिर क्यों खुद को परेशान कर रही है?"

"डॉली को ले आओ!!" सुभद्रा देवी ने कमजोर सी आवाज में कहा।

" दादी..!! कैसी बात कर रही हैं आप..?" राज खड़े होते हुए तल्खी से बोला।
 
" केयरटेकर के रूप में...! वो ख्याल रखेगी तो मैं ठीक हो जाऊँगी!"

"वो नही आएगी!" राज कड़े शब्दों में बोला।

"जो बातें आपने उससे कही है, वो क्यों आएगी?"

"तो फिर..!!"

" तो फिर आप जाएंगे और उसे कायदे से लेकर आएंगे!"

"मैं और उसके पास...! कभी नही!!"

"देखते हैं कि आपको अपने एटीट्यूड से ज्यादा प्यार है या दादी से!"

" ऑफकोर्स आपसे है दादी..! लेकिन उसके पास मैं नही जाऊँगा, मैं क्यों झुकूँ उसके आगे..?"

"इससे पहले की न झुकने का मलाल रह जाये , सम्भल जाइये आप!" सुभद्रा देवी ने कहा और चुप हो गयी।

राज वहाँ से हट गया और कमरे में चला आया, " उसे तो मैं छोडूंगा नही!! जाने क्या जादू चलाया है दादी पर? पागल हो गयी हैं उसके पीछे! पागल तो मुझे भी कर दिया है, फिर भी मैं अपनी दहलीज जानता हूँ! जो किसी और की सब कुछ है, वो यहाँ की कुछ भी नही हो सकती!! न दोस्त , न प्यार , कुछ नही..!!

दादी समझ क्यों नही रही..? शायद इसलिए कहते है की बूढ़े और बच्चे एक समान होते है, इन्होंने तो डॉली की जिद ऐसे पकड़ ली है जैसे उसके बिना इनकी जिंदगी में कुछ बचा ही नही है! एक पल के लिए भी मैं कुछ भी नही भूल सकता, उसे क्यों लाऊं इस घर मे जो पहले ही किसी के साथ बंटी हुई है! ये बातें, ये जज्बात कोई मायने नही रखते उसके लिए...! उसे जिसका होना था, वो हो चुकी है! दादी को समझना ही होगा।"

राज काम पर चला गया।

कुछ रोज और बीते लेकिन सुभद्रा देवी की हालत जरा भी नही सुधरी तो राज को हार माननी पड़ी, सन्डे का दिन था!

बोला, " क्या हुआ..? इस तरह का रिएक्शन क्यों?"

जैस्मिन बात संभालते हुए बोली, " वो ! वो मैं पहले ऐसी गाड़ी में नही बैठी और फिर राज शर्मा की गाड़ी में बैठना सपने जैसा है बस इसी खुशी में निकल गया मुँह से!"

राज को जस्सी जैसे जैसे मोड़ बता रही थी वही सारे मोड़ विशाल ने भी बताए थे! राज ने अब फ्रंट मिरर सेट किया और पीछे जैस्मिन को देखा, " ये तो वही लड़की है जो उल्का के साथ थी मार्केट में, लग ही रहा था कि कहीं देखा है?"

राज ने नजर हटा ली और सामने देखने लगा, गाड़ी घर के बाहर रुकी तो जैस्मिन बोली, " जाइयेगा मत प्लीज! आइये न हमारे गरीब खाने को पवित्र कर दीजिए अपने चरणों से!"

" कुछ ज्यादा हो रहा है, नॉर्मल भी आने को कह सकती हैं आप!" राज ने तटस्थता से कहा।

" हाँ तो आइए न!" जैस्मिन खुश होकर बोली।

राज गाड़ी से उतरा और जैस्मिन के पीछे बढ़ गया! डॉली ने दरवाजा खोला तो जैस्मिन अंदर आयी और सामान एक तरफ को रखने लगी! राज जैस्मिन से थोड़ा पीछे ही था तो डॉली ने उसे देखा नही था।

डॉली जैस्मिन के गले लगते हुए बोली, " बहुत मिस किया तुझे!"

तभी राज ने अंदर कदम रखा तो डॉली के चेहरे की हँसी हल्की होते होते रुक गयी और उधर जस्सी मुँह दबाए हँस रही थी।

" आप..!!" डॉली ने अलग होते हुए कहा तो राज के कुछ बोलने से पहले ही जस्सी बोल पड़ी, " इन्हें तू जानती है क्या? मुझे रास्ते मे मिल गए , इतना सामान देखकर कहने लगे कि गाड़ी से ड्राप कर देता हूँ तो मैं भी आ गयी!"

राज की भौंहे सिकुड़ गयी और आंखे छोटी हो गयी, मन ही मन बोला, " ये है क्या? ये तो उल्कापिंड से भी ज्यादा ड्रामेबाज है!"

"जानती भी है ये कौन है..?" डॉली ने नाराजी से कहा।

" नही तो...! कौन है..?" जैस्मिन ने अंजान बनते हुए कहा।

"यही राज शर्मा है!" डॉली दांत जमाकर बोली।

" ओ तेरी! ये राज शर्मा है! मुझे नही पता था सच्ची..!!" जस्सी हैरत से बोली तो डॉली ने डपट दिया, " चुप कर!"

राज अब बोल पड़ा, " मुझे बात करनी है आपसे!"

जैस्मिन आंखे खुशी से झपकते हुए बोली, " हाँ! हाँ! कीजिये न बाते आप दोनो, मैं जा रही हूं अंदर सामान सेट करने! वैसे विनाश कहाँ है..?"

" लहजा तो कुछ और ही बयां कर रहा है! आपको लगा भी कैसे की उस रोज की आपकी कही गयी बातों के बाद मैं वहाँ वापस कदम भी रखूँगी?"

" लहजा तो आपका भी कुछ अमन शांति वाला नही!! पर फिर भी मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूँ कि आप मेरी दादी की केयरटेकर बन जाइए!"

" मैं आपकी रिक्वेस्ट नही मान सकती! आप जा सकते हैं!!"

" आप ऐसी नही हैं, जैसा बनने का दिखावा कर रही है, आप मेरी रिक्वेस्ट अस्वीकार नही कर सकती।"

"मैंने कहा न आप जाइये यहाँ से, हर लड़की पिघला हुआ मोम नही होती, कुछ मुझ जैसी कठोर भी होती हैं और वजह होते हैं आप जैसे ही लोग...!!"

"फिर मुझ में और आपमे अंतर क्या है? मैं इतना बुरा हूँ आपकी नजरो में , फिर भी मेरे जैसी ही बनने की कोशिश!! क्या आयरनी है न? किस को इतना अधिकार ही क्यों देना की वो आपकी हरकतों के पीछे की वजह बन जाये......?"

" बस यही..! यही...!! यही अकड़ जो है न , मुझे आपके साथ खड़ा तक नही होने देगी , आपके पीछे चलना तो बहुत दूर की बात है! आपकी दादी की फिक्र है मुझे लेकिन आपकी जबान का क्या?? ये

"पार्क गया है, श्रेया के साथ!" डॉली ने कहा।

"अच्छा!" कहते हुए जस्सी अंदर चली गयी तो डॉली बोली, " मुझे कोई बात नही करनी आपसे!"

" दादी की तबियत ज्यादा खराब है! आपकी रट लगाए हुए हैं इसलिए आया हूँ आपको लिवाने!"

" मैं नही चल सकती! फोन पर बात कर लूँगी मैं उनसे!"

" वो ज्यादा बात नही कर पा रही हैं, और ....!" राज बोलते हुए रुका

"और...!"

" और आपको केयरटेकर के रूप में दोबारा चाहती हैं!" राज ने बात पूरी की।

" मैं ये जॉब नही करूँगी!" डॉली दृढ़ता से बोली।

" आपको पहले से डबल पेमेंट दी जाएगी!"

" पैसे से आप मुझे खरीदने आये हैं?"

" मैं सिर्फ बात करने आया हूँ!"

फिर कोई तेजाबी बात उगलेगी और मेरे स्वाभिमान को चोट पहुँचाएगी! मैं आपसे कोई सवाल जवाब किये बिना अपनी जिंदगी में सुकून से रहना चाहती हूँ! तो बस जाइये आप , जाइये..!!"

राज जाने के लिए मुड़ा फिर अचानक रुकते हुए पलटा और अपनी आवाज को संयत करते हुए नरमी से बोला, " मैं आपसे उस रोज अपनी कही हुई उन सारी बातों की माफी मांगता हूँ! प्लीज मेरी बात मानकर मेरे साथ चलें! पांच मिनट गाड़ी में इंतज़ार करूँगा, आती हैं तो ठीक है वरना चला जाऊँगा!! अपनी दादी के लिए मैं कोई कमी नही रखता और इसलिए यहाँ खड़ा हूँ...!!"

राज थोड़ा रुका और जब डॉली ने कुछ नही कहा तो अब उसकी आंखें जुनून से भर गई , सारी नरमी भुलाकर वह उतने ही भावहीन चेहरे के साथ कठोरता से बोला, "भगवान न करे कि ऐसा कुछ हो लेकिन अगर आप नही आई और मेरी दादी को कुछ हुआ तो वजह आपको समझूँगा और आज यहाँ से खाली लौटा हुआ ये राज शर्मा चक्रवात बनकर आपकी जिंदगी में लौटेगा, सब कुछ तहस नहस करने के लिए....! अपने एक प्यारे रिश्ते के बदले आपके हर करीबी रिश्ते को छीन लेगा.......!!"

राज मुड़ा और बाहर निकलने को कदम बढ़ाया, तभी विनाश अंदर आ रहा था, उसे देखते ही विनाश खुशी से उछल पड़ा, "वाओ, मिस्टर हैंडसम!! आप हमारे घर!!"

राज उसे देखकर हल्का सा मुस्कुरा दिया, " हम्म! कैसे हो आप?"

"मैं तो अच्छा ही हूँ, आपको यहाँ देखकर बहुत अच्छा लगा! मम्मा से मिले आप?"

"हाँ...! उनसे ही मिलने आया था..!"

" सच मे..!!" वो खुशी से चमकते चेहरे के साथ बोला।

" हाँ!"

" आज सन्डे है तो आप उन्हें कहीं घुमाने ले जाने आये हैं क्या? जैसे टीवी में होता है!"

राज उसे असमंजस से देखने लगा तो वह फिर बोला, " बताइये न, आप मम्मा को कहीं घुमाने ले जाने वाले हैं!"

"विनाश ..!!" डॉली जरा तेज आवाज में बोली, " बेबी यहाँ आओ! अजनबियों से बातें नही करते!"

राज ने अब डॉली की तरफ कदम बढ़ाते विनाश को गोद मे उठाते हुए कहा, " तो आपका नाम विनाश है! मैं राज शर्मा ...!! मेरी एक बात हमेशा याद रखना, टीवी की हर बात सच नही होती, थोड़ा सच, थोड़ी कल्पना होती है! और हाँ मैं यहाँ आपकी मम्मा को ले जाने आया हूँ, आपको कोई परेशानी नही है....!!"

" नही!! मैं तो बहुत खुश हूं, ये मेरा सपना है कि मम्मा को कोई घुमाने ले जाये समुद्र के किनारे, जहां पानी पर झाग बनता है न वहाँ...!"

विनाश भोलेपन से बोला तो राज मुस्कुरा दिया और बोला, " आई विश के आपकी ये विश पूरी हो, अपने पापा से कह.....!!"

राज की बात पूरी नही हो पाई क्योंकि डॉली अब आगे बढ़ आयी और विनाश को राज की गोद से उतारते हुए बोली, "विनाश ...! आपको चुप रहने को कहा न, नीचे उतरो!!"

विनाश को गोद से लेते हुए डॉली की अंगुलियाँ जब राज की बाँह से छू गयी तो राज को महसूस हुआ उसके हाथ बहुत ठंडे हो रखे थे। सितंबर की शुरुआत थी तो इतनी ठंड तो थी नही, राज सोच में पड़ गया, " हाथ इतने ठंडे क्यों...?"

वह उससे निगाह हटाकर विनाश की तरफ देखते हुए बोला, "आपसे बात करके अच्छा लगा!"

" बेबी जस्सी मासी आयी हैं, अंदर जाइये!!" डॉली ने उसका ध्यान भटकाया तो विनाश खुशी से अंदर भाग गया, डॉली भी जाने को मुड़ी, तभी राज की आवाज कानो में पड़ी, "याद रहे, पांच मिनट के लिए बाहर रुका हूँ!!"

डॉली ने कुछ नही कहा , चुपचाप अंदर चली गयी तो राज बाहर निकल गया। वह बाहर जाकर गाड़ी में बैठ गया और घड़ी देखने लगा!
 
उधर जैस्मिन विनाश को टॉय और खाने पीने की चीजों में उलझाकर झट से डॉली को बाहर वाले कमरे में खींच ले गयी!

" मैंने उस दिन तुझे क्या समझाया था, शांत रहने को कहा था न!!"

" वो बहुत ही घटिया बात बोलता है , चुप कैसे रह जाऊँ...?"

"उसने आज तो माफी माँगी न! राज शर्मा तेरे घर आया, तुझसे माफी मांगी, तुझसे रिक्वेस्ट की , अब और क्या चाहती है तू?"

"सब किया उसने लेकिन फिर भी उसके चेहरे से घमंड टपक रहा था!"

" अरे उसका चेहरा है ही इतना रॉयल तो तू क्या चाह रही है, वो कोयला पोत कर आये तुझसे माफी मांगने.!"

" नही चाहिए मुझे माफी या रिक्वेस्ट, कुछ नही चाहिये उससे मुझे!! मुझे उससे दूरी चाहिए बस!!"

" तो कौन सा वो तुझसे लिपटने आ रहा है..? डॉली गलत कर रही है तू, उसकी दादी की तबियत वाकई खराब है तभी उसने माफी माँगी! तू नही जाएगी और उन्हें कुछ हो गया तो सच मे बहुत बुरा हो जाएगा! उसे हल्के में मत ले, बाते बोलता है तो तू भी बोलती है न! लेकिन उसे कुछ गलत करने को मत उकसा!! हमारी उससे उलझने की हैसियत नही है...!!"

डॉली को पर्स पकड़ाते हुए बोली, " अब जा न!!"

राज गाड़ी की चाभी घुमाने को हुआ तभी डॉली बाहर चली आयी

और दरवाजा खोलकर अंदर बैठ गयी!

राज ने बिना एक शब्द कहे गाड़ी स्टार्ट कर दी लेकिन उसके चेहरे की कठोरता दूर हो गयी और वो सहज हो गया।

डॉली उसे कुछ पल घूरती रही, कलाई पर पहनी महंगी घड़ी उसके हाथों पर बहुत अच्छी लग रही थी! चेहरा दमक रहा था, घमंडी आभा चेहरे से टपक रही थी। वो दबंग व्यक्तित्व वाला आदमी था, आत्मविश्वास से परिपूर्ण वो आदमी हर लड़की के सपनो का राजा होने के काबिल था!

पर उसकी कड़वी बातें कौन झेल सकता था...? कितना घटिया आदमी था, ये तो बस वही जानती थी! कैसी जलील करने वाली बातें कहता था सिर्फ लुक से किसी को पसन्द नही किया जा सकता, ये शख्स था तो नागफनी ही!

डॉली ने नजर सामने कर ली तो राज ने कनखियों से एक बार उसकी तरफ देखा और मन ही मन कहा, " जब भी गाड़ी में बैठती है तो मुझे इतना घूरती क्यों है ये??"

राज ने स्पीड बढ़ा ली और विनाश की बात याद आ गयी, " मम्मा को कोई घुमाने ले जाये समुद्र के किनारे......!!"

" आपके हसबैंड कहाँ है! नजर नही आये..!!" राज ने आखिरकार चुप्पी तोड़कर कहा।

" इसी शहर में है!" कहकर डॉली चुप हो गयी , अब उसने सोच

लिया था कि राज से जवाबी सवाल नही करेगी, मां जब थी तो अक्सर कहा करती थी कि लड़कों के मुंह नही लगते, वो बात बढ़ाने की कोशिश करते हैं ताकि उसी बहाने बात तो हो सके! जस्सी भी चुप रहने को कहती थी, डॉली ने अब इसी बात पर अमल करने का निर्णय लिया।

वो राज की धमकी से डर गई थी, इसलिए विनाश से घुलता मिलता देखकर उसके हाथ ठंडे पड़ गए थे....!! करीबी के नाम पर उसके पास विनाश ही तो था, और थी जस्सी, जिसने बिना किसी सवाल जवाब हमेशा साथ निभाया था, रहने को जगह दी थी! दोनो को ही खो नही सकती थी! चाहे खुद थोड़ी झुक जाए लेकिन उन्हें सलामत रखना ही था!

राज ने घर के बाहर गाड़ी पार्क की तो डॉली उतरकर अंदर चली गयी, राज भी पीछे पीछे अंदर चला आया।

डॉली सुभद्रा देवी के पास बैठते हुए बोली, " क्या हालत कर ली मिसेज शर्मा ? मुझे इन्फॉर्म तक नही किया?"

" क्या करूँ? श्रेया का काम इसे पसन्द नही आया तो उसे हटा दिया और खुद कितना भी कर ले, कुछ न कुछ जरूरत रह ही जाती है! तुझे बहुत याद कर रही थी तो भी मना कर रहा था की अब कोई नही आएगा लेकिन देख लिवा ही लाया तुझे!!"

" आपसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट कुछ नही दादी, इन्हें तो लाना ही था!" राज ने अंदर आते हुए कहा।

डॉली आगे चली गयी और मन ही मन बोली, " तुम्हे अब कोई मौका नही दूँगी खुद से लड़ने का! कोई ताल्लुक नही रखना तुमसे, झगड़े का भी नही..!!"

इधर राज हैरान सा खड़ा एकटक उसी दिशा में देखता रह गया, " सॉरी कहा इसने..? कोई बहस नही बल्कि सॉरी..!! तबियत तो ठीक है न इसकी..??"

( क्रमशः )

" धमकाया तो नही न तुझे.. इस दुष्ट ने!" सुभद्रा देवी ने पूछा

डॉली के कुछ कहने से पहले ही राज बोल उठा, " बकायदा माफी मांग कर लाया हूँ इन्हें...!"

" ये सच बोल रहा है..??"सुभद्रा देवी हैरानी से बोली।

" जी! इन्होंने माफी माँगी मुझसे!" डॉली ने शांति से कहा और उठकर जाते हुए बोली, " सूप बनाकर आती हूँ, आपको कुछ दिन में ही ठीक कर दूंगी!"

राज भी खड़ा होते हुए बोला, " मैं भी चेंज कर लूँ!"

सुभद्रा देवी उनके जाते ही मुस्कुरा उठी, " तरकीब काम कर गयी, माफी भी मांग ली राज ने और डॉली दोबारा आ ही गयी! डॉली के बारे में सब जान लूँ तो इस बार इन दोनों को दूर नही होने दूँगी..!!"

राज जब चेंज करते हुए शीशे के सामने खड़ा हुआ तो उसे विनाश याद आ गया, राज की तरह ही बढ़े हुए बालों वाला वो बच्चा बहुत प्यारा था! उसकी हँसी बहुत दिलकश थी, करीने से सजे छोटे छोटे दाँत उसकी हँसी को और खूबसूरत बना देते! बातें भी उतनी ही मासूमियत भरी!!

डॉली सूप बनाकर मुड़ी तो पानी की बोतल लेकर मुड़ते राज से टकरा गई, उसके कुछ बोलने से पहले ही वह बोल पड़ी, " सॉरी सर..!"

राज अपने कमरे में चला आया और खुद को समझाया, " मत सोचो उसके बारे में कुछ!! कोई नया पैंतरा होगा..! दादी कुछ ज्यादा ही पक्ष लेती हैं न उसका, लेकिन उसका हसबैंड है फिर भी वो सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए इस तरह रहती है जैसे मैरिड ही न हो! अटेंशन चाहिए उसे बस..!!"

डॉली दादी की सेवा में लगी हुई थी, उसने उनके कपडे चेंज कराए और खिचड़ी खिलाकर गेस्ट रूम में चली गयी! वो कुछ देर आराम करने को लेट गयी तो उसे नींद आ गयी!

राज ने उसे नही देखा तो लगा कि वो चली गई, वो कुछ देर बाद

गेस्ट रूम में आया तो डॉली को सोते देखकर जाने को हुआ पर फिर सोचा, " अच्छा मौका है, डाँट सकता हूँ अभी!! देखूं इसका रिएक्शन!'

राज ने उसके सर के नीचे से अचानक तकिया खींच लिया तो डॉली ने हड़बड़ा कर आंख खोल दी, " भूकंप....!!" उसके मुंह से निकला लेकिन सामने राज को देखकर वह बैठी और बोली, " सॉरी सर! आगे से ऐसा नही होगा..!!"

वह जाने को हुई तो राज ने टोक दिया, " ये क्या नया पैंतरा है...?"

" नही सर! गलत थी तो सॉरी कह दिया बस!"

डॉली चली गयी तो राज ने हाथ का तकिया बिस्तर पर फेंक दिया और बोला, " चाह क्या रही है ये अब..? वो और सॉरी...!! पॉसिबल ही नही है! लगता है जैसे कोई और उसकी जगह प्लास्टिक सर्जरी करवाकर चली आयी हो!"

डॉली पूरे दिन शांत रही, दादी भी एक्टिंग पकड़ में नही आने देना चाहती थी इसलिए नोटिस करके भी शांत रही, डॉली से कुछ नही पूछा, काम खत्म करके वह शाम को चली गयी।

डॉली का अब रोज का यही हो गया, वह आती और चुपचाप काम करके चली जाती! राज कुछ भी बोलता तो पलटकर उसका जवाब नही देती और शांत रहती, राज अब और ज्यादा बौखला उठा था, उसे डॉली की चुप्पी और ज्यादा पागल कर रही थी!!

दादी तो धीरे धीरे ठीक हो रही थी , उन्होंने जमालगोटा पीकर जानबूझकर तबियत खराब की थी ताकि एक्टिंग पकड़ में न आये और राज अपने अहसास कबूल कर सके....!! लेकिन इधर डॉली की खामोशी का कोई तोड़ नही मिल रहा था, राज काम मे भी रहता तो डॉली को देख लेने के बाद मन कहीं नही ठहरता!!

राज की हर बात का जवाब 'सॉरी सर!' ही होता!

राज उसे देखकर सोच उठता, " इसके ये खामोश होंठ अब हिलते क्यों नही?? सारी बहस कहाँ चली गयी.....? हो क्या गया है इसे..? ये नयी डॉली जरा भी नही भा रही, इसकी हर बात को काटने की आदत ही तो इसे बाकी लड़कियों से अलग करती थी, ये क्यों ऐसी बन गयी है..?"

एक रोज इसी तरह डॉली काम के लिए निकली थी, आधे रास्ते आयी तब तक ऑटो खराब हो गया तो वो दूसरा ऑटो लेने निकल पड़ी....!!

अभी ऑटो का इंतजार ही कर रही थी कि तभी बलजीत जाने कहाँ से आ गया और डॉली के कुछ समझने से पहले ही उसे गले लगा लिया।

राज की गाड़ी वहाँ से गुजर रही थी, डॉली को जैसे ही बलजीत ने बाँहों में भरा राज का दम घुटने लगा, उसने टाई की नॉट ढीली की जल्दी से ऊपर के दो - तीन बटन खोल दिए, लम्बी लम्बी साँसे भरने लगा और ड्राइवर को गाडी तेज चलाने को कहकर नजर फेर ली!

चेहरा ऐसा बयाँ कर रहा था मानो आंखों ने कोई अनचाही बात देख ली हो...!!

वो ये नही देख पाया कि डॉली ने अगले ही पल बलजीत को खुद से दूर धकेल दिया और नाखून से उसके चेहरे को चीरते हुए कसकर झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया, " डोंट यू डेयर टू टच मी!" वह आंखों से अंगार बरसाते हुए बोली।

बलजीत की आँखों मे हवस को वो साफ देख सकती थी, बलजीत आगे बढ़ते हुए बोला, " इतनी भी क्या ओवर एक्टिंग कर रही हो..? तुम्हे पहले एक बार देख तो चुका हूँ, तुम्हे छू चुका हूं! कैसा पर्दा फिर मुझसे?"

उधर कुछ दूर जाकर राज ने गाड़ी रुकवाई और बाहर निकल आया..., " उसका पति होगा न, करीब तो आएगा ही , हक जो है उसका!! मुझे क्यों इतना बुरा लग रहा है, सहन क्यों नही हो रहा है ये सब देखना...?

अचानक ही राज के फोन की घण्टी बजी तो मन शांत करने के लिए राज ने फोन उठा लिया, " हैलो...!!"

उधर से राज का पर्सनल सेक्रेटरी समीर था, ज्यादातर लेखा जोखा वही देखता था! कुछ रोज से छुट्टी लेकर गया हुआ था और आज ही लौटा था!!

उसने उधर से कुछ कहा तो राज के चेहरे की नसें और ज्यादा तन गयी और वह बोला, " वो मेरी है, ध्यान रखो उसका।"

बलजीत को मारती डॉली अंदर से कमजोर पड़ रही थी कि तभी बलजीत जैसे ही दुपट्टा संभालती डॉली का हाथ पकड़ने को हुआ, किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे पीछे धकेल दिया!

"बीच मे से हटो, ये कौन है जानते भी हो..?" बलजीत कर्कश आवाज में बोला।

" जानना ही नही चाहता, इत्तेफाक ये है कि कोई भी हो लेकिन औरतों संग बद्तमीजी मुझे रास नही आती...!! निकलो यहाँ से...!!" समीर ने दबंग आवाज में कहा।

" बीवी है ये मेरी, होते कौन हो तुम बीच मे आने वाले..?"

"कोई नही है ये मेरा...! कोई रिश्ता नही हमारे बीच...!" डॉली गुस्से और नफरत से बोली, वह बस रोने को एक कोना चाहती थी।

समीर ने गाड़ी का लॉक खोलते हुए कहा, "मैम आप जाकर गाड़ी में बैठिए! प्लीज!! और आप..! अगर उन्हें ये पसन्द नही की आप उन्हें छुए तो इस कदर सरे राह उनके करीब जाने का हक नही है आपको!!"

समीर अच्छा खासा लम्बी कद काठी का नवयुवक था, बलजीत उसके आगे कहीं नही ठहरता था तो वह डॉली को कच्चा खा जाने वाली नजरो से घूरता हुआ चला गया!

डॉली ने समीर को थैंक्स कहा और इधर उधर देखने लगी तो समीर बोला, " गाड़ी में बैठिए प्लीज! शर्मा सर के घर ही जा रहा हूँ कोई शक है तो दादी से बात करा देता हूँ!"

डॉली को गाड़ी में न बैठते देखकर समीर ने सुभद्रा देवी को कॉल लगाया और बोला, " बात कीजिये!!"

डॉली ने उसके हाथ से फोन ले लिया और कान से लगाया तो सुभद्रा देवी की आवाज सुनकर तसल्ली हुई और वह गाड़ी में बैठ गयी।

समीर ने गाड़ी स्टार्ट की तभी उसका फोन फिर बज उठा। उधर से राज था, " बस हाँ या न में जवाब देना!"

" जी !!"

"सब ठीक है न..!"

" हाँ!!"

" उसे चोट तो नही पहुंची??"

" नही!!'

"गाड़ी में है..??"

" जी!!"

"पानी दिया उसे..??"

" नही..!!"

" देना चाहिए था न!"

" जी!"

"घर पहुँचो, मैं भी पहुँचता हूँ!"

" जी!"

" एक मिनट! कौन था वो..?"

" वो..! वो..!!" समीर बोल नही पा रहा था

"पति था न....??" राज ने खुद ही कहा।

" जी कहा तो था उसने..!! पर इसे तो फौरन रिजेक्ट कर दिया गया न..!!"

" मतलब...!!"

" अब कैसे बताऊँ, ये सब सूचना सबके सामने नही दे सकता!!"

" हम्म! ठीक है!"

राज ने फोन काट दिया तो समीर ने भी घर के बाहर आकर गाड़ी रोक दी! डॉली उतरकर अंदर चली गयी! किचन में काम करते हुए बार बार उसकी आंखें धुंधली हुई जा रही थी,, " सिर्फ इसलिए कि एक बार वो मेरे साथ रात बिता चुका है....! वो भी मुझे धोखे से रिश्ते में बांधकर, उसे बेशर्म होने का हक मिल गया है! प्यार शब्द के बारे में तो जानती तक नही हूँ, लेकिन एक बच्चे की माँ हूँ...!! सिर्फ किसी के तन छू लेने को प्यार कहते है क्या....? आखिर किस बात का हक जताने की कोशिश करता है बलजीत...? कितनी भी हिम्मत जुटाऊँ, कितनी भी बहादुर बनूँ, लेकिन डर तो है ही कि अगर विनाश का सच उसे पता चल गया और विनाश को मुझसे दूर कर दिया तो मेरे जीने की वजह ही खत्म हो जाएगी! वो तो जानता तक नही की मैं मां बनी थी और मेरे पास विनाश है।"

डॉली दादी के पास चली गयी और खामोश बैठ गयी तो सुभद्रा देवी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा और बोली, " कुछ परेशानी है, बताना चाहो तो बता दो! मन हल्का हो जाएगा!!"

डॉली ने बस उनकी गोद मे सिर रख दिया और रोने लगी, " मैं बिल्कुल भी बहादुर नही हूँ! बहुत कमजोर हूँ मैं भी बाकी लड़कियों की तरह...!! मेरा भी रोने को मन करता है!"

सुभद्रा देवी ने उसके सिर पर हाथ रख दिया और बोली, "हंसना - रोना तो स्वभाविक सी बात है बच्चे! कमजोरी की निशानी नही...!! रोने का मन हो तो रो लेना चाहिए!!"

डॉली कुछ देर तक रोती रही फिर उठकर बोली, " आप मेरे बारे में कुछ नही जानती न! पर मैं समझ नही पाती की कैसे बताऊँ आपको?"

"रहने दो, जिस दिन दिल राजी हो बता देना...!!" सुभद्रा देवी अपनेपन से कहा।

डॉली को कदमो की आहट आने लगी तो वो उठकर झट से बाहर निकल गयी, फोन दादी के कमरे में ही छूट गया।

डॉली शाम को दादी के लिए फूड तैयार करने लगी तो राज भी किचन में चला आया!!

वह जानबूझकर उसका रास्ता ब्लॉक करने लगा, जिधर जाती उधर ही वो भी बहाने से हो जाता तो आखिरकर डॉली बोली, " सर साइड होंगे प्लीज!!"

राज एक तरफ को हो गया लेकिन जान बूझकर जरा सा पानी फर्श पर चुपके से गिरा दिया, डॉली आज अनमनी थी और इसी वजह से उसका ध्यान नही गया और कदम बढ़ाते ही वो फिसल गई तो दिल बेकाबू हो गया , बचने के लिए उसने पास खड़े राज की मजबूत बाँह और नाभि के पास से उसकी शर्ट को थाम लिया!!"

राज ने उसे पकड़कर बचाने की कोशिश तक नही की, डॉली ने सीधे होने की कोशिश की तो संभालते संभालते भी दुपट्टा जमीन पर

गिर पड़ा और वी भी गिर पड़ती लेकिन ऐन वक्त पर राज ने उसे अपनी तरफ खींच लिया।

राज अब उसे टकटकी लगाकर देखते हुए बोला, " ध्यान खींचने का अच्छा तरीका है......! या यूं कहूँ की उकसाने का अच्छा तरीका है!!"

उसकी बात से डॉली ने बहुत अपमानित महसूस किया , उसकी गर्म साँस डॉली के चेहरे से टकराई तो सिगरेट की गन्ध महसूस करते ही डॉली ने नजर फेर ली , उसका दम घुटने लगा और राज को खुद से दूर धकेलने की कोशिश की!! हालांकि राज की मजबूत बाँह उस पर से नही हटी और वह उसके बालो को गर्दन पर से एक तरफ हटाते हुए बोला, " कामयाबी को एन्जॉय नही करना चाहोगी...?"

" प्लीज सर...! अपनी हद में रहें!!" डॉली उससे दूर हटते हुए बोली।

"अब भी सर...!! मुझे तो लगा था ये फिर पुरानी डॉली की तरह बिहेव करेगी...!!" राज ने मन ही मन कहा और वापस उसकी कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए बोला, " जब ध्यान खींच ही रही हो तो बता दूँ प्यास यूँ दूर से देखने से नही मिटती, गले से उतारा और होठो से छुआ भी जाता है!!"
 
" बस...!! बस हो गया...!!" डॉली ने अब बेहद गुस्से में उसे धकेलते हुए हाथ मे चाकू उठा लिया और बोली, "आप जो दिखते हो वो हो नही! आप जो ये सफेदी पहन कर घूमते हो, इसके पीछे का इंसान गंदे ख्यालो के कीचड़ में सना है।"

राज हल्की हँसी हँसते हुए बोला, " अरे!! ऐसा भी क्या हो गया, इंसान है तो अरमान तो जागेंगे ही! आप भी कोई अपवाद नही..!! सब प्राकृतिक चीज है, अरमान कभी सूखते नही! उन्हें दबा दिया जाए ये अलग बात है!!"

" शट अप...!!" डॉली उसकी निग़ाहों में देखते हुए दांत जमाकर बोली, " लोगो को तालाब के शांत पानी मे कंकड़ मार कर उठती लहरों को देखने का बहुत शौक होता है, वही काम आप कर रहे हैं , जब मैं शांत हूँ तो बेमतलब मुझे परेशान करके आप चाहते क्या है....?

जिस दिन से आई हूं उस दिन से नोटिस कर रही हूं आपकी हरकतों को, इन्फेक्ट बर्दाश्त कर रही हूँ...!! लेकिन अब चुप रहकर अपने जमीर को और नही मार सकती मैं....! मुझे कोई बात गलत लगती है तो मैं मुँह पर कहती हूँ, अगर ये ऐब है तो मुझे इस ऐब के साथ ही जीना है! नही बनना मुझे लोगो की नजर में अच्छा!! करीब आने की कोशिश भी की तो चाकू चल जाएगा!!

आपके घर मैं अपना काम करने आती हूँ, इसलिए नही की आपकी नजरो में आ सकूँ! आपकी नजरो पर आपका अख्तियार नही तो मैं क्या करूँ.....? आपके जहन पर आपका अख्तियार नहीं तो मैं दोषी क्यों बनूँ....? खुद की बेसब्री के लिए आप मेरे साथ बेअदबी नही कर सकते! समझे आप......!!"

" ए...!! इश्क नही, न सही।

तौहीन करने का भी हक़ नहीं फिर।" राज कर्कश आवाज में बोला।

डॉली भी तल्खी से बोली, "...और आपको मुझे जलील करने का

लाइसेंस मिला हुआ है, है न..??"

राज चुपचाप उसकी आँखों मे देखता रहा तो कुछ देर बाद डॉली ने नजर हटा ली और मुड़ने को हुई तो राज झपट कर उसके हाथ से चाकू छीनने को हुआ लेकिन डॉली सतर्क थी, उसने चाकू खींच लिया और इसी दौरान राज की हथेली पर कट लग गया!

डॉली ने अब चाकू रख दिया और राज को घूरने लगी, राज भी उसकी आँखों मे देखता रहा! डॉली ज्यादा देर उसकी निग़ाहों में नही देख पायी और नजर हटा ली तो भी राज उसे देखता रहा, डॉली उसकी नजर अब बर्दाश्त नही कर पा रही थी और वो वहाँ से भागकर पर्स उठाकर चली गयी!!

राज ने अपने हाथों पर पट्टी की और डॉली की कही बातों के बारे में सोचने लगा...! बलजीत का उसे गले लगाना दोबारा याद आया तो राज के जबड़े कस गए....!

वो नाराजगी से बोला, "सब बिगड़ गया, न चाहते हुए भी सब बिगड़ गया...!! मोहब्बत की आग में जलने वालो में मैं था ही नही लेकिन ये जुनून मुझमे तुमने भरा है। तुम्हारी मोहब्बत के अंगारों में मेरा वजूद झुलस कर रह गया है।

बहुत गुस्सा आ रहा है...! बहुत...!! लेकिन उससे ज्यादा खुद पर, मैं हर वक़्त उसे खुद से दूर करने में लगा रहता हूँ लेकिन उससे करीब अब शायद ही कोई है मेरी जिंदगी में.....!! तुमसे इश्क हो गया इस बात की वजह से मुझे मुझसे से ही बेहद शिकायत है, तुम्हारा नम्बर तो बाद में आता है डॉली ...!!

बंद

नाईट मोड

80 %

दुनिया भर की लड़कियों को छोड़कर क्यों तुम पर ही ये दिल हार गया मैं...! तुम्हारा पति है, बच्चा है और मैं ...! मैं कोई नही....! तुम्हे कोई फर्क नही पड़ता मेरे होने न होने से.......!! कैसे हो गयी ये गलती? कब हो गयी....? नही गलती भी नही गुनाह है किसी और की पत्नी को चाहना , मैं ऐसा कर ही नही सकता........! फिर क्यों हो गया ये.......??"

उधर परेशान डॉली पार्क चली गयी थी और एक कोने में मैगजीन खोलकर बैठी चुपचाप रोती रही...! एक तरफ राज का करीब आना और उसके हाथ पर किया वार याद आता रहा तो दूसरी ओर उसका साँड़ से लड़ना भी....!!

क्या हो तुम ऐसे, इतने दुष्वार क्यों हो समझने में...? एक पल कुछ और...! अगले पल कुछ और....!! मैं समझ नही पा रही कुछ..! मेरी जिंदगी में अगले पल क्या मोड़ आये खुद नही जानती...! बहुत सी बातों से निपटना है और कोई आसरा नही दिखता, तुम्हारे साथ लड़ती भले थी लेकिन सुरक्षित महसूस होता था पर अब तो आज की बातों और हरकतों के बाद ये भरोसा भी उठ गया! सब मर्द एक जैसे ही हैं...! तुम्हे जुल्म करने की जिद हैं और मुझे जीने की जिद्द है! हर सांस पर समझौता करूँ, ऐसी जिंदगी मंजूर नही मुझे! अगर मंजूर होता तो आज भी मैं बलजीत के साथ होती.....!!"

उधर जैस्मिन ने फोन किया तो डॉली का फोन सुभद्रा देवी के पास था! एक बार उन्होंने नही उठाया तो जैस्मिन ने दोबारा कॉल किया..!

इस बार सुभद्रा देवी ने उठा लिया और जैस्मिन से बात की तो जैस्मिन बोली, "फोन छूट गया लेकिन डॉली तो अब तक घर भी नही आई

है..!"

सुभद्रा देवी घबरा गई और राज को आवाज दी....! खुद से जूझता राज बाहर नही आया तो दादी ही चली आयी, " आपको बुला रही हूँ तो समझ नही आता..!"

" क्या हुआ दादी..? तबियत अच्छी नही लग रही इसलिए नही आ रहा था!"

" डॉली घर नही पहुंची अब तक..!"

" तो क्या हो गया..? होगी कहीं, फोन कर लीजिए!"

" फोन यहीं है, जैस्मिन का कॉल आया तो वो परेशान है! पास ही बच्चा रो रहा है!"

राज ये सुनते ही तुरंत उठ खड़ा हुआ और फोन और रिवॉल्वर जेब मे रखते हुए समीर को भी गेस्ट रूम से उठा लाया और बोला " जा घर जा उसके, फोन देने के बहाने ही...! संभालना उनको तब तक मैं ढूंढ लूँगा उसे! विशाल से बात कर लेना, रास्ता बता देगा और उस लड़की जैस्मिन का फोन आये तो पूछना की परेशान होने पर वो कहाँ जाती है....?"

" दादी टेंशन मत लो! तबियत खराब हो जाएगी आपकी, मैं पता लगाता हूँ न!!"

" वो रो रही थी आज आयी तो...! परेशान थी बच्ची!!" दादी चिंतित सी बोली।

" तो आप क्यों परेशान हो...? जानती हो न कह दिया है तो कहीं से भी ढूंढ निकालूँगा....!!"

राज गाड़ी में बैठा, डॉली की याद आयी तो उसने स्ट्रेस दूर करने के लिए सॉन्ग ऑन कर दिया---

कहता है पल पल तुमसे, होके दिल ये दीवाना

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एक पल भी जाने जाना , मुझसे दूर नही जाना

प्यार किया तो निभाना, प्यार किया तो निभाना

............... ..............

राज के निकलते ही दादी ने फोन निकाला और जैस्मिन का नम्बर डायल किया, दादी की मेमोरी बहुत शॉर्प थी और वो नम्बर बहुत जल्दी याद कर लेती थी।

जैस्मिन ने उठाया और बोली, "डॉली ...!!"

" मैं सुभद्रा देवी..!!"

" जी!"

" मुझे जानना था की डॉली परेशान होने पर कहाँ जाती है, कोई अनुमान है! राज गया तो है लेकिन कहाँ ढूंढेगा..? कुछ अंदाजा मिलता तो थोड़ा आसान हो जाता!!"

" जी वो पिछली बार एक्सिडेंट के वक़्त वहीं किसी पास के पार्क में गयी थी, क्या पता इस बार भी वही गयी हो??"

" ठीक है! आना कभी घर...!! अब रखती हूं, राज को बता दूं!!"

"ठीक है!!"

सुभद्रा देवी ने अब राज को कॉल करके बताया तो राज थोड़ा आगे निकल गया था अब उसने गाड़ी उसी तरफ मोड़ ली!!

इधर डॉली बलजीत और राज के बारे में सोचकर प्रेशर नही झेल पायी थी और न ही उसने कुछ खाया पीया था तो रोते रोते जाने कब बेहोश हो गयी थी!

जब पार्क खाली कराने का वक़्त हुआ तो कुछ लड़कों की नजर उस पर पड़ गयी और गार्ड से उसे बीमार बताकर और साथ होने का दावा करके वे लोग अपने साथ ले जाकर गाड़ी में डाल ही रहे थे कि तभी राज की गाड़ी वहाँ रुकी!!

राज तेजी से आगे निकला लेकिन फिर दिमाग मे जब सारा सीन घूमकर आया तो उतनी ही तेज वो पीछे पलटकर आया और गाड़ी में बैठकर दरवाजा बंद करते लड़के के हाथ समेत गाड़ी का दरवाजा पकड़ लिया।

" सब ठीक है न..??" राज ने उसकी निग़ाहों में देखते हुए पूछा।

"हाँ..! पर आप क्यों पूछ रहे हो..? हम तो जानते नही आपको!!" वो लड़का अपना हाथ और दरवाजा खींचने की कोशिश करते हुए बोला।

राज मुस्कुराया खतरनाक तरीके से हल्का सा मुस्कुराया और बोला, "औकात भी नही जानने की...!! और पूछ इसलिए रहा था क्योंकि अब कुछ ठीक नही रहेगा!! मुझे चीजों को बिगाड़ने में बहुत मजा आता है!"

पीछे बैठे लड़को ने फौरन आगे वाले से कहा, " अबे गाड़ी चला न!! खुद ही इससे पीछा छूट जाएगा, इंतज़ार किस बात का कर रहा है..?"

राज ने अब एक तीखी नजर उस पीछे वाले लड़के पर डाली और ठंडे लहजे में बोला, " तुम्हे सचमुच लगता है कि तुम मेरे होते हुए उसे ले जा सकते हो, जो मेरी है!!"

" लगता नही है, बल्कि ले जाएंगे..! देखना...!" वह लड़का बोला और दो अँगुलियों से अपनी आंखों की तरफ इशारा करके राज की तरफ कर दिया तो राज मुँह फेरते हुए व्यंग्य से मुस्कुरा दिया।

ड्राइविंग सीट पर बैठे लड़के ने अब गाड़ी की चाभी घुमा दी लेकिन उसी पल "बैंग..!" " बैंग..!!" की आवाज हुई और टायर का काम तमाम हो गया।

राज ने रिवॉल्वर निकालकर गाड़ी के पहियों पर फायर कर दिया था।

डॉली के कान में जब तेज आवाज गयी तो उसकी बेहोशी टूटी और उसने आँख खोली!!

तब तक उन लड़को के कुछ समझने से पहले ही राज आगे बढ़ा और पीछे का दरवाजा खोलते हुए उस लड़के को कॉलर से पकड़कर गाड़ी से घसीटकर उतार लिया और जमीन पर पटकते हुए उसकी बाँह पर अपना पैर रखते हुए, रिवॉल्वर उसकी तरफ पॉइंट कर लिया!!

" अब बोल!! जो अभी कुछ देर पहले कहा था..!" राज ने कठोर अभिव्यक्ति के साथ कहा।

आगे के दोनो लड़के निकलकर बाहर खड़े थे तो वही एक के साथ डॉली जूझ रही थी! वह डॉली को होश में आया देखकर उसका मुंह दबाना चाहता था लेकिन डॉली ने उसे लात मारकर खुद से दूर कर दिया तो उसने लात चलाती डॉली के घुटनों पर कोहनी से वार कर दिया , डॉली को लगा जैसे उसका घुटना टूट गया हो और फिर जैसे ही वह दोबारा आगे बढ़ा, गुस्से में डॉली की लात उसे ऐसी जगह पड़ी की वह वहीं औंधे मुंह हो गया!!

डॉली किसी तरह बाहर निकल आयी और राज को उस लड़के पर गन पॉइंट किये हुए देखकर स्तब्ध रह गयी...!

"नही.! पागल हो गए हो आप..??" डॉली चीखी लेकिन राज ने न तो पलटकर पीछे देखा और न ही गन नीचे की, मानो उसके कानों में कोई आवाज ही न पड़ी हो!!

जमीन पर पड़ा वो लड़का कुछ नही बोल पाया तो राज उसके माथे पर गन पॉइंट किये हुए ही झुका और उसकी उन दोनों अँगुलियों को

पकड़कर पीछे की तरफ निर्दयता से मोड़ दिया!

"कड़ाक..!!" की आवाज के साथ उसकी वो दोनो अँगुली झूल गयी जिसे उसने राज की तरफ पॉइंट किया था। वह दर्द से बिलबिला उठा तो वही डॉली का जी कसैला हो गया और उसने बढ़ती धड़कनों के साथ आंखे मींच ली।

राज पीछे हटते हुए बोला, "वैसे तो पहली मुलाकात थी लेकिन उम्मीद करता हूँ कि यही आखिरी भी होगी!!"

" हम...! हम कभी....!कभी... नही आएंगे आपके सामने! छोड़ दीजिए!" वह दर्द से कराहते हुए गिड़गिड़ा उठा तो राज ने अपनी गन हटा ली और उधर बढ़ गया जिधर डॉली थी!! उसके हटते ही वो लड़के गाड़ी छोड़कर एक तरफ को भाग गए।

" ठीक है आप..??" राज ने निगाह उठाते हुए कहा तो डॉली ने बिना उसकी तरफ देखे गर्दन हिला दी।

" आइये मेरे पीछे..!!" राज आगे बढ़ते हुए बोला तो डॉली ने कदम बढ़ाया लेकिन चल न सकी! " आह्ह....!!" जोड़ में ऐसा दर्द उठा कि वो घुटना पकड़कर वहीं बैठ गयी!

राज तुरन्त पीछे पलटा तो डॉली ने जल्दी से खड़े होने की कोशिश की लेकिन राज देख चुका था, " पैरों में कोई परेशानी है?"

" नही..!! ठीक हूँ मैं!!"

" ऐसा है क्या..??"

" हां..!!"

" तो चलिए आगे..!!" राज ने सहजता से कहा।

" आप चलिए न.!!" डॉली ने कहा लेकिन राज की घूरती नजरों को देखकर नजर हटाते हुए बोली, " ऐसे क्या देख रहे हो आप? मैं क्या चल नही सकती?? खड़े रहिए, मैं ही चलती हूँ आगे..!"

उसकी बात को सुनकर राज ने उसे घूरने लगा और अपने होठ पर जीभ फिराते हुए निचले होठ को दांत में दबा लिया, मतलब साफ था कि उसे गुस्सा आने लगा था।

डॉली ने जैसे ही कदम बढ़ाया, जमीन पर कदम रखने से पहले ही एकाएक राज आगे बढ़ा और अपनी ताकतवर बाँहों में उसे उठा लिया!

डॉली की तो घबराहट से साँस ही थम गयी, ये उसका सपना था की उसका पति उसे बाँहों में उठाये जो कि पूरा नही हो पाया था, विनाश उस पर ही तो गया था, उस पर भी टीवी का बहुत असर होता था..!!

वो भी जवानी की दहलीज पर जब थी और शादी के सपने बुनने शुरू किए थे तो अक्सर टीवी देखकर सोचती की जैसे हीरो अपनी हीरोइन को उठा लेते है वैसे ही उसका पति भी उसे उठाएगा एक दिन...!!

सपना पूरा नही हो सका और अब तो वह पहले की तरह जीरो फिगर वाली भी नही रह गयी थी, विनाश के होने के बाद वह पंजाबन सी

हल्के गदराए जिस्म की लड़की थी!

आज भी जब टीवी में ऐसा सीन देखती तो अक्सर शीशे के सामने खुद को देख कर सोच उठती की पतली थी तब तो किसी ने उठाया नही, अब कौन बाहों में उठाने आ रहा है? लेकिन आज अचानक राज के ऐसा करने से वह कुछ समझ ही नही पायी और अनायास ही एक बाँह राज की गर्दन पर लिपट गयी और दूसरी उसके सीने के पास शर्ट के बटनों पर!

उसकी अंगुलियाँ राज के सीने को छू रही थी तो राज को कुछ अलग सा ही महसूस हो रहा था, अंदर जाने कैसी सुलगती आग का अहसास हो रहा था!

उसे गाड़ी में बैठाकर राज आगे आ गया और ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए मन ही मन खुद पर झुँझलाया, " ये सारे अहसास गलत है, क्योंकि उसके लिए है जिसके लिए नही होने चाहिए...!!"

राज गाड़ी स्टार्ट करते हुए सामने देखते हुए ही बोला, "आराम से पैर फैला लीजिये, समेटकर रखेंगी तो दर्द होगा!!"

डॉली ने पैर को फैला लिया तभी वह फिर बोला, " आपके घर ले चलूँ या अपने..?? दादी परेशान है.!!"

" मेरे घर!! बाबू परेशान होगा...!! मैं कल मिल लूँगी उनसे..!!" डॉली ने शांति से कहा!

" आगे भी शाम ढले पार्क जाने का इरादा है क्या आपका...?" राज

ने सहजता से कहा लेकिन उसमें छिपे सख्ती के भाव को डॉली महसूस कर सकती थी।

"मैं बहुत परेशान थी आपकी कही बातों की वजह से..... और मुझे ऐसे में एकांत चाहिए होता है!"

" ऐसा है क्या...??"

" हां..!! ऐसा ही है!!"

" हम्म तो बस इतना की बदले में मुझे परेशान करती! न कि सबको..!!"

" मैं किसी को परेशान नही करना चाहती थी!"

" लेकिन किया न...!! और खुद परेशान हो वो अलग..! छुआ न उन लड़कों ने इस एक बेवकूफी की वजह से...!!" कहते हुए राज के जबड़े कस गए।

" मैं बेहोश थी तो मुझे....!" कहते कहते वो रुकी और बोली, " कुछ भी हो , मैं आपकी कोई सफाई क्यों दूँ..?"
 
"हम्म..!! सही है, चाहिए भी नही किसी गैर की सफाई...!!" राज नाराजगी से बोला।

उसने दिमाग भटकाने के लिए सॉन्ग ऑन कर दिया ---

[पहले कभी हाँ हाँ पहले कभी

ना मेरा हाल ऐसा हुआ

मेरी नींद गयी, चैन खोने लगा

कुछ तो होने लगा हाँ

कुछ तो होने लगा ] x २

पहली मोहब्बत का एहसास है ये ×2

कैसे बताऊँ की क्या प्यास है ये

क्यों तड़पने लगा, क्यों धड़कने लगा

कोई सपना मेरा दिल संजोने लगा

कुछ तो होने लगा हाँ हाँ

कुछ तो होने लगा

........... .........

राज गाने के बोल में डूब गया तो डॉली भी गाने को सुनने लगी वो अक्सर गाने सुनकर स्ट्रेस दूर किया करती थी!

उधर जैस्मिन समीर जो देखकर होश खो चुकी थी, वह मन ही मन बोली " हाय! क्या गबरू मुंडा है..? मेरा दिल तो गया इस पहली मुलाकात में..!!" दिल पर हथौड़े नही हथगोले चल रहे थे पर सामने से अंजान बनते हुए सहजता से बात करती रही थी।

समीर भी जैस्मिन के आकर्षण में बंध गया लेकिन जाहिर नही होने दिया, आखिर था तो राज का ही खास आदमी..!

दोनो ने मिलकर विनाश को उलझा रखा था लेकिन वो सोने का नाम नही के रहा था, बार बार दरवाजे की तरफ देखता।

राज की गाड़ी बाहर आकर रुकी तो सब झट से दरवाजे की तरफ भागे! राज ने उतरकर दरवाजा खोलना चाहा तब तक डॉली ने खुद ही दरवाजा खोल दिया!!

राज ने अपना हाथ आगे बढ़ाया लेकिन डॉली ने एक नजर हथेली की तरफ देखकर नजर हटा ली और बोली, " अब तक कि हेल्प के लिए धन्यवाद लेकिन रहने दीजिए! बाबू पर अच्छा असर नही होगा!! मैं खुद धीरे धीरे चली जाऊँगी..!!"

"ऐसा है..??"

"हां..!!"

" तो ठीक है बेबी से ही पूछ लेता हूँ..!!"

डॉली के कुछ बोलने से पहले ही राज विनाश की तरफ देखकर बोला, " विनाश आपकी मम्मा को पैर में चोट आई है, मैं उन्हें उठाकर घर के अंदर ला सकता हूँ..??"

विनाश तुरंत चिंतित सा बोला, "हां!! क्यों नही..? मम्मा कैसे चलेंगी..? अभी तो मैं सहारा भी नही दे सकता न!!"

डॉली उसे गुस्से से घूरने लगी लेकिन उसकी नजरो से बेअसर राज ने झुककर उसे अपनी बाँहों में संभालते हुए बाहर निकाल लिया तो जस्सी आंखे गोल करते हुए एक तरफ को लुढ़कने को हुई , समीर ने बाँह थामते हुए कहा, "आर यू ओके..??"

जैस्मिन उसका हाथ हटाते हुए बोली, " अब ओके नही रहूँगी तो कब रहूँगी..!!"

" मतलब..?" समीर ने हैरानी से कहा।

"छोड़ो न मतलब!! आपके मतलब की बात नही..!" जैस्मिन ने उसे झिड़क दिया और राज - डॉली को देखने लगी, राज उसे उठाकर घर के अंदर बढ़ रहा था तो जैस्मिन का दिल झूम उठा था, वह चुपके से एक तरफ को हुई और दूर से ही दोनो हाथो को उन पर वारकर कनपटी के पास लगाते हुए बोली, "हाय! मैं वारी जावां, किन्नी सोनी जोड़ी है, नजर न लगे!!"

उसके नजर हटाते ही समीर की नजर चुपके से उस पर ही थी और उसकी इस हरकत पर वह मुस्कुरा उठा, "झल्ली लड़की!!"

राज खुद की गर्दन में लिपटी डॉली की बाँह और उसकी पकड़ देखकर मन ही मन खुश था और जबरदस्ती अपनी मुस्कुराहट रोके हुए था!

डॉली विनाश के सामने राज की इस हरकत से नाराज थी और गुस्से में जानबूझकर उसकी गर्दन पर नाखून चुभाये हुए थी।

राज ने उसे बिस्तर पर रख दिया और पीठ के पीछे तकिया लगाने के हुआ तो अनायास ही वो करीब आया और उसकी इस करीबी से पल भर को डॉली के दिल के कोरे कैनवास पर जाने कौन कौन से अहसासों के रंग लहरा उठे...!!

राज उसी पल तकिया रखते हुए धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, " ये गर्दन पर नाखून का निशान याद रखना, मदद का मतलब ये नही की आपकी फिक्र है मुझे...!! बदला मैं भी नही भूलता..!!"

डॉली ने थूक निगल लिया और पलके झपकने लगी तो राज उससे दूर हट गया।

समीर डॉली के मिलने की बात दादी को फोन करके बता चुका था।

सबके हटते ही विनाश डॉली के पास आकर उसकी हथेली को

तकिया बनाकर लेटते ही सो गया! राज और समीर बाहर खड़े डॉक्टर का इंतज़ार कर रहे थे, तो वहीं जैस्मिन अपने मन की खुशी पचाने के लिए दूसरी तरफ कमरे में जाकर खुशी से "यस..!" "यस..!!" कर रही थी।

डॉली को अब अचानक ही ठंड लगने लगी और उसने खुद ही अपनी बाहों को घेरा बनाते हुए दोनो हथेलियों को बाँह पर रगड़ना शुरू किया तो राज की नजर उस पर चली गयी!

वह अंदर चला आया और उसकी बन्द आंखों और खुद को खुद की ही आगोश में समेटने की कोशिश देखकर मन उसको आलिंगन में भर लेने को बहक उठा लेकिन आलिंगन से पूर्व ही दादी के कदमो की आहट आ गयी और वह पीछे हट गया।

सुभद्रा देवी डॉली के पास बैठ गयी और राज बाहर निकल कर अपने बालों में हाथ फेरते हुए चेहरा पर आया पसीना पोंछते हुए बोला, " क्या करने जा रहा था मैं...? करना तो दूर सोच भी कैसे सकता हूँ ऐसा....? शुक्र है, बचा लिया दादी ने..!!"

दादी के साथ विशाल और डॉक्टर भी थे, डॉक्टर डॉली का चेकअप करने को हुआ तो जैस्मिन ने आकर विनाश को गोद मे उठाना चाहा लेकिन राज ने तुरंत टोक दिया, " रहने दीजिए! उसे अलग मत कीजिये इनसे, बहुत इंतज़ार किया है उसने इनका!"

फिर डॉक्टर से बोला, " डॉक्टर साहब आप इस तरफ से आकर देख लीजिए इन्हें..!"

डॉक्टर ने डॉली के पैरों को झटका और दर्द के साथ बुखार की भी दवाइयाँ दी क्योंकि डॉली को अब अचानक तेज बुखार चढ़ आया था! राज ने एक बार डॉली की तरफ देखा औऱ मन ही मन कहा , " तो इसलिए ठंड लग रही थी इसे,, कहा तो बहुत कुछ मैंने, पर मैं तो हमेशा ही सुनाता हूँ न, फिर इतना क्या सोचना...? कहीं ये भी मेरी तरह अजीब से अहसासों से तो नही जूझ रही..?? पर नही ये पॉसिबल ही नही..! वो ऐसा सोच ही नही सकती मेरे बारे में..! उससे

बस काम से मतलब है , मुझसे नही..!!"

डॉक्टर ने चेकअप कर लिया तब डॉली ने जैस्मिन को इशारे से कहा कि विनाश को अपने साथ सुला ले!

जैस्मिन ने उसे लेना चाहा तभी समीर चला आया और बोला, " दवा वक़्त पर दे दीजिएगा इन्हें..!" फिर डॉली की तरफ मुड़ते हुए बोला, " आप कल काम पर मत आना, सर ने आपको एक दिन की छुट्टी दी है।"

समीर बाहर चला गया, दादी, राज और डॉक्टर पहले ही बाहर निकल चुके थे! जैस्मिन ने झट से दरवाजा बंद किया औऱ कूदकर डॉली के बिस्तर पर आकर उसे कसकर गले लगाते हुए बोली, " मरजानी! बहुत बुरी है तू..! परेशान थी तो घर आती न, फोन छोड़कर कौन कहीं जाता है...?"

" मैं नही समझ पा रही थी कुछ..! मन बहुत अशांत था.!"

" अच्छा , क्या बात हुई थी बता..?"

" सुबह ही बलजीत मिला था, मुझे गले लगा लिया पता नही कहाँ से आकर! मन कड़वाहट से भर उठा था और चलती सड़क पर ये सब मुझे बहुत नीचा महसूस हो रहा था।"

" तो तू सुबह से ही पार्क में जाकर बैठ गयी थी..??"

" नही यार..! कितने दिन से चुप हूँ, कोई जबाब नही देती नागफनी

को, तो मन मे गुबार भरा ही हुआ था और फिर उसने भी बद्तमीजी से वाहियात बात कह दी, मुझसे अब और बर्दाश्त नही हो पाया!! पता नही उसे परेशानी क्या है, चुप हूँ तो हर वक्त परेशान करता रहता है, चैन से चुप भी नही रहने देता...!!

मैं नही सह सकती हूं इससे ज्यादा, मेरे आत्मसम्मान को कुचलता जा रहा था वो, तो मैंने भी आज बातें सुना दी! चाकू भी उठा लिया गुस्से में और उसके हाथ पर कट लग गया, मुझे नही समझ आया कि फिर क्या हो गया उस पल, लेकिन मैं नही रुक पायी वहाँ!! मुझे वो जख्म देखकर बहुत अजीब लग रहा था! मुझसे..! मुझसे खड़ा नही रहा जा रहा था वहाँ पर..! इसलिए भाग गई थी पार्क में..!!"

जैस्मिन मन ही मन मुस्कुरा उठी, " बेटा समझ कैसे आएगा, प्यार की तरफ पहला कदम है!!"

जैस्मिन ने अब उसके आगे घुटनो पर बैठते हुए कहा, " एक बात सच सच बता..! उसने तुझे उठाया तो तुझे कैसा लगा...?"

" मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगा..!"

" ऐई, झूठ नही...! तेरा तो ये ख्वाब था न , बता न कैसा अहसास हुआ..?"

डॉली झेंपती हुई बोली, " दिमाग मत खराब कर जस्सी!"

" नही...! नही..! बता न टॉल एंड हैंडसम स्टोन मैन की बाँहों में अच्छा लगा न!"

"चुप कर जस्सी , मैं मार दूँगी बता रही हूं..!!" डॉली झेंपी औऱ चिढ़ी हुई सी बोली, " मुझे नही मालूम था कि वो ऐसा कर देगा, अचानक ही बिना कुछ कहे उठा लिया तो मैं क्या करूँ...? चला नही जा रहा था मुझसे..!!"

जस्सी अब दोनो भौंहे उछालती हुई बोली, " हाय..! सो स्वीट..! कितनी परवाह है उसे तेरी..! बाहों के दरम्यां , दो प्यार मिल रहे है....!"

डॉली उसे घूरते हुए बोली, " जस्सी..! चुप हो रही है की नही तू..?? बस कर अब..! कोई प्यार व्यार नही , बस तकरार ही हो सकती है उसके औऱ मेरे बीच! देखना अब अगली मुलाकात में ऐसी ऐसी सड़ी हुई बाते बोलेगा न कि उसकी सारी अभी की गई परवाह उन बातों के पीछे दब कर रह जाएंगी..! कभी फरिश्ता बन जाता है और कभी इंसान भी नही रहता...!! और वैसे भी उसे कोई लड़कियों की कमी नही है कि एक बच्चे की माँ से प्यार करेगा, सारी फालतू बातें दिमाग से निकाल दे!!"
 
जैस्मिन विनाश के पास बिस्तर पर जाते हुए बोली, " मैं नही निकालने वाली , तू भी सोचना शुरू कर दे..!"

" मुमकिन ही नही! वो तो पहले ही इसी गुमान में बैठा है कि उसकी हैसियत की वजह से लड़कियाँ पीछे पड़ी हुई है, मेरी तो हालत भी अब वो जान चुका है, तो यही बात खत्म कर दे..! आगे बढ़ने लायक कोई बात ही नही मेरे उसके बीच! वो हमेशा यही कहेगा की गरीब हूँ

तो पैसों के लिए उसके पीछे पड़ी हूँ!"

" उसकी छोड़ और अपनी बता, तुझे उससे प्यार हो गया तो..!"

" नही होगा, शक्ल ही अच्छी है बस, जबान बहुत कड़वी है! उससे प्यार करने से अच्छा नीम और करेले से प्यार न कर लूँ!!"

"मुझे तो लग रहा है कि होने लगा है!"

"तू पागल हो गयी है..!! मैंने आज उसे चाकू से जख्म दिया , उसका हाल तक नही पूछा और तू कह रही है कि प्यार होने लगा है..!"

" हां कह रही हूँ! तू अंदर ही अंदर जूझ रही है, तू महसूस करना नही चाहती इसलिए महसूस हो नही रहा! वरना उसकी चोट देखकर तू भागी न, तू इसीलिए भागी क्योंकि तुझे अच्छा नही लगा उसे दर्द देकर! तूझे तकलीफ हुई उस चोट से..!!"

"जस्सी एक और शब्द नही! उस जैसे आदमी से मैं प्यार कर ही नही सकती! मुझे कोई फर्क नही पड़ता उसकी चोट से!! सोने दे मुझे, सर दुख रहा है!"

डॉली ने अपना चेहरा चादर में ढक लिया तो जस्सी भी विनाश के साथ लेटते हुए मन ही मन बोली, " हुआ हो या न हुआ हो, लेकिन होने की पूरी संभावना दिख रही है तो मैं हार क्यों मानूँ...? राज शर्मा तुझे चाहता है, मान नही रहा वो अलग बात है! कम से कम तू भी उसे उस नजरिये से देख तो सही....!! जानती हूँ कि अभी तेरे मन

मे कुछ नही..! लेकिन उसका चोट देखकर आज जो तुझे अजीब लगा, तू वहाँ रुक नही पायी वो उसी कुछ की शुरूआत है! और मैं तुझे इस अजीब अहसास से दूर नही भागने दूँगी!! बलजीत से अकेले नही निपट सकती, वो वाहियात आदमी गाहे बगाहे अपनी सड़ी हुई थूथ दिखाता ही रहेगा और राज शर्मा का प्यार तेरे लिए ढाल बनेगा...!!

उसका प्यार उतना ही मजबूत होगा जितना तू उससे दूर भागेगी...! वो घमंडी है इसलिए मान नही रहा और खुद के अहसासों से बचने के लिए तुझे बातों से घायल करके खुद से दूर रखना चाहता है, बेचारा जानता नही की जो मन मे अहसास जगा सकती है वो दूर होकर भी दूर नही हो सकती!!"

जस्सी को सोचते सोचते ही नींद आ गयी!!

उधर राज और समीर छत पर बैठे थे! राज अब तक यही सोचकर परेशान था कि उसे गले लगाने को कदम कैसे बढ़ा दिए उसने..?

समीर ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,

" एक दिन इस तरह होश खो जाएंगे,

पास आये तो मदहोश हो जाएंगे,

मैंने सोचा न था।

राज ने सवालिया निगाह समीर की तरफ उठा दी तो समीर मुस्कान बिखेरते हुए कहा, "क्या..? सटीक लाइंस है न आपकी सिचुएशन पर!!"

" पागल मत बनो..!"

"हम्म! पागल न बनूँ , मेरे ख्याल से सुबह किसी ने कहा था मुझसे, वो मेरी है , ध्यान रखो उसका..!!"

" ऐसा है क्या..??"

" हां! ऐसा ही है!!"

" तो बस इतना कि मेरा मतलब था कि मेरी केयरटेकर है, इतना इश्यू मत बनाओ!"

" सच मे!! तो फिर आप उसके केयरटेकर कैसे बन गए..?"

" समीर..!!"

" हम्म! सुन रहा हूँ, बताइये!!"

"क्या बताऊँ..? खुद अपनी आंखों से देखा है न तुमने उसके पति को.?"

"उसने नकार भी तो दिया था न..!!"

" सो व्हाट? हो जाती है पति पत्नी में अनबन, हुई होगी लड़ाई इसलिए कह दिया होगा उसने इस तरह...!!"

" एज्यूम करने से अच्छा पहलू का पता लगाओ, आप सिर्फ अपने आधार पर डिसीजन लेना बंद करो! नही करना चाहते खुद तो मुझे बोलो, सारी डिटेल निकलवा लूँगा!"

"नही!! बिल्कुल नही!! किसी की डिटेल नही निकलवानी मुझे..!"

" आपको अजीब नही लगा की कल इतना सब हुआ लेकिन उसका पति वहाँ नही था!"

"हो सकता है न कि नाइट ड्यूटी करता हो..?"

"हद होती है एज्यूम करने की भी...!!" समीर नाराजगी से बोला, " दिक्कत क्या है आखिर ? क्यों पता नही करते कुछ..?"

" क्यों पता करूँ? नही है उसकी कोई इम्पोर्टेंस मेरी लाइफ में..!"

" ऐसा है क्या...?" समीर ने कहा तो राज ने उसकी तरफ घूरकर देखा।

"देखिए मत!! सिर्फ आप ही नही पूछ सकते, साथ रहते रहते मुझ पर भी असर हो गया है..!"

" हां ऐसा ही है..!!" राज ने नजर हटाते हुए कहा।

"तो बस इतना कि नजर मिलाकर जवाब से कब से कतराने लगा राज शर्मा ..?"

" समीर..!!"

" क्या समीर..?"

" मत करो ऐसी कोशिश , जानते हो कि सफल नही हो पाओगे!"

" अच्छा!! नही करता कोशिश पर एक सवाल का जवाब चाहिए!! एक केयरटेकर अगर गायब हो गयी तो होठ क्यों सूख गए थे आपके? जो राज शर्मा कभी किसी गिरे हुए को उठाने के लिए हाथ आगे नही करता, वो राज शर्मा एक मामूली सी केयरटेकर को अपनी बाँहों में उठाकर क्यों लाया..?"

" क्योंकि परिस्थिति ऐसी ही थी!"

"परिस्थिति का बहाना बनाकर अहसासों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं आप..!!"

"ऐसा है क्या..??"

" हां ऐसा ही है!!"

"तो बस इतना की मुझमे कोई अहसास नही किसी के लिए!"

" तो पता करने दो मुझे उसके बारे में सब कुछ!"

" नही!!"

"क्यों नही!!"

" क्योंकि मैं नही चाहता..!!"

"क्यों नही चाहते..?"

राज चुप रह गया तो समीर बोला, " मैं बताऊँ कि क्यों नही चाहते?"

"हां जरूर सुनना चाहूँगा मैं..!"

"ठीक है ! तो सुनिए! आप इसलिए नही चाहते क्योंकि अभी तो आप अपनी भावनाओं को ये समझा कर रोक लेते हैं कि वो किसी की पत्नी, किसी की माँ है..!! लेकिन अगर सच्चाई पता लग गयी तो आप खुद पर नियंत्रण खो देंगे! आप स्वभाविक रूप से उसके करीब जाना चाहेंगे..! और ये बात आपकी ईगो को मंजूर नही की आप उसके पीछे जाएं! आप अहसासों पर भी अपना नियंत्रण बनाये रखना चाहते हैं..!!"

" तो क्या गलत है इसमें..?"

" सही भी क्या है इसमें...?"

"सब सही है, जो जैसे था वैसा चल रहा है!"

" कुछ वैसा नही है! आप उसे बातों से चोट दे रहें है! अगर यही करते रहे तो आप उसे खुद से इतना दूर कर देंगे की वो चाहकर भी आपके करीब नही आ पाएगी..!!"

" मैं चाहता भी यही हूँ कि वो मेरे करीब न आये!"

"और जब आप करीब जाना चाहेंगे तब....??"

" ऐसा कभी नही होगा..!"

" ऐसा आज ही होने वाला था, मेरी नजर आप पर ही थी, दादी नही आई होती तो....!!"

" तो भी कुछ नही होता, मैं बस उस पर चादर डालने जा रहा था, उसे खुद की बाँहों में भरने का मैं कभी सोच भी नही सकता!"

" अब मैं भी कहीं नही जा रहा हूँ, यहीं हूँ और देखता हूँ कि कब तक आप अहसासों को झुठलाते हैं..?" फिर मन ही मन बोला, " उसका तो समझ आता है कि जिम्मेदारी की वजह से शायद मानकर भी न माने लेकिन आपको कौन सा कीड़ा काटे बैठा है..?"

समीर चल दिया और जाते जाते बोला, " मैं जा रहा हूँ गेस्ट रूम में सोने! क्योंकि आपके कमरे में सोया तो रात भर मैं बहस ही करूँगा! जानते ही हो कि वकील का बेटा हूँ, जिरह करना जेनेटिक है मुझमे..!!"

" हम्म!" राज ने कहा औऱ चुपचाप बैठा रहा।

समीर चला गया लेकिन राज मन ही मन बोला, " शायद यही वो जवाब है जो मुझे नही मिल रहा था! क्या सच मे मैं इसीलिए कुछ नही जानना चाहता ताकि मैं अपने अहसासों पर अपना कब्जा बनाये रख सकूँ!! उसकी तरफ अपने कदम बढ़ने से रोक सकूँ!!"
 
राज भी अब अपने कमरे में चला गया और लेटा तो डॉली का ख्याल आ गया, उसका वो कदम बढ़ाना याद आते ही राज ने तकिया में मुँह छिपा लिया और मन ही मन बोला, " कितनी अकड़ है इसमें? चल नही सकती लेकिन मुँह खोलकर मदद नही मांग सकती...!! मैं क्यों करूँ ऐसी मगरूर लड़की से इश्क...? दूर रहूँगा तो खुद ही कुछ दिनों में ये सब अहसास खत्म हो जाएंगे! मेरी बातों की वजह से अगर दूर भागती है तो भागे,, लेकिन खुशी है कि आज उसने वापस पहले की तरह जवाब दिया! वो चुप्पी बहुत बुरी लग रही थी, मैं चाहता हूं वो ऐसी ही मजबूत बनकर रहे, कमजोर नही!!"

राज भी आखिरकार सो गया!

अगले दिन डॉली नही आई तो राज को आज पहली बार घर खाली खाली महसूस हुआ...! वो इन सब बातों से बचने के लिए ऑफिस चला गया, समीर उसकी बेचैनी को देख रहा था लेकिन वो कुछ बोल नही रहा था, काम की ही बाते कर रहे थे दोनो...!!

किसी तरह वो दिन गुजरा तो अगले दिन राज जानबूझकर लेट ही

उठा ताकि ऑफिस जाने से पहले डॉली को देख सके!

डॉली दादी के कमरे से निकल रही थी तभी राज उसके आने की बात से अंजान सुभद्रा देवी के कमरे में जा रहा था। दोनो एक दूसरे से टकराते टकराते बचे लेकिन डॉली के हाथ से बर्तन छूट कर गिर पड़े तो वह झुककर बर्तन उठाते हुए बोली, " भूकंप से कम नही हो आप..!"

राज ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और मन ही मन कहा, " आज सॉरी सर नही...!!"

वो कदम पीछे लेते हुए बोला, " ऐसा है क्या..??"

" हां, ऐसा ही है!!" डॉली निगाह उठाकर बोली।

"हम्म! तो बस इतना कि आप भी प्रलय ही हैं!!"

राज आगे बढ़ गया तो डॉली भी बर्तन उठाकर किचन में चली गयी, राज मुस्कुराते हुए दादी के पास बैठ गया,," कैसी हो दादी अब..?"

" मेरी छोड़ो, तुम तो ठीक हो अब..?"

" अब..?? मैं खराब ही कब था..?"

"नही! मतलब मुस्कान बिखरी हुई है चेहरे पर, आमतौर पर उससे

झगड़ने के बाद आप बिफरते थे!"

"दादी...!! ऐसा तो कुछ नही है! मैं तो खुश हूँ क्योंकि आप अब पहले से बेहतर नजर आ रही हैं!"

" अभी नही!! अभी भी कमजोरी बनी हुई है!"

"ठीक हो जाएंगी, आपकी खास जो आ गयी है!"

"आप भी बना लीजिए अपनी खास, अच्छा लगेगा!!"

"उफ्फ.!! दादी..! सुबह ही सुबह नही...!!"

" मुझे जरा भी अच्छा नही लगेगा मिसेज शर्मा ..!!" डॉली अंदर आते हुए बोली।

" वाह..!! क्या बात कह दी आपने..? पर लगता नही की आप अपनी पंक्तियों से इत्तेफाक रखती हैं!

"आपके लगने , न लगने से मुझे कोई मतलब नही है..!!"

" ऐसा है क्या..??"

" हां, बिल्कुल ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि मैं शांत पृथ्वी हूँ तो दादी माँ वो ओजोन परत

जिसमें सुराख है और तुम......! तुम वो uv किरण हो , जो उस सुराख के रास्ते मुझ तक पहुँचकर मुझे नष्ट करना चाहती हो।"

डॉली अब जोर जोर से हँस पड़ी, " सीरियसली दादी! मैं समझ नही पाती की मिस्टर शर्मा ऐसी बाते लाते कहाँ से है, उफ्फ!! उफ्फ!! उफ्फ!! मिस्टर शर्मा उदाहरण बहुत अच्छा है लेकिन एक चीज गलत हो गयी आप शांत पृथ्वी नही हैं , वो तो मैं हूँ , दरअसल आप हो uv किरण , जो हमेशा सब तहस नहस करने की नीयत रखते हो!!"

राज ने भी अपने होठ एक तरफ से हल्के से ऊपर किये और बोला, "शांत पृथ्वी...!! हँसी आ रही है मुझे तो..! उल्कापिंड खुद को शांत पृथ्वी कह रही है!"

" मुझे उल्कापिंड कहा आपने...??"

" नही तो क्या खुद को कहूंगा..?"

" तो आप भी सुन लीजिए, आप नागफनी है मेरी नजर में, कांटो सी चुभती बातें......! और कांटो सी ही शख्सियत...!!"

राज की मुस्कुराहट ही रुक गयी और वह उसे घूरने लगा तो डॉली मुस्कुरा उठी, " पसंद नही आया क्या नाम...? उफ्फ ये आपका गुस्से भरा लहजा....!! अफसोस कि मुझ पर इसका कोई असर नही होता!"

"ऐसा है क्या..??"

"अन्फॉर्चुनेटली ऐसा ही है.!!"

" तो बस इतना कि दादी के सामने बैठकर बहस कर रही हो और मैं उनके लिहाज की वजह से चुप हूँ!!"

" च्च! च्च..!! इतने मासूम है क्या आप? मुझे तो नही लगता!! दादी आपको लगता है क्या..?"

सुभद्रा देवी चुपचाप मुस्कुराती रही, इतने दिनों बाद डॉली पहले की तरह बहस कर रही थी और दादी बहुत खुश थी उसकी खामोशी टूटने से!

" आपके लगने से मेरा कुछ नही जाता..!!" कहकर राज वहाँ से निकल गया!

कुछ दिन बाद , एक रात-----

राज और डॉली एक दूसरे के अगल बगल हॉल में खड़े थे, डॉली चुप थी तो राज चुप्पी तोड़ते हुए बोला, "आपके खामोश लब और झुकी पलकें मुझे नही पसंद!!"

" ऐसा है क्या..?" डॉली ने दूसरी ओर देखते हुए पूछा!!

" हम्म! ऐसा ही है!" राज गम्भीरता से बोला।

" तो बस इतना कि आप इस तरह से मुझे मत देखिए..!"

" इस तरह से मतलब किस तरह से...??"

" मिस्टर शर्मा ...!!"

" मैं सुन ही रहा हूँ , बताईये न...!!"

" प्लीज!! इस तरह एकटक मत देखा कीजिये..!! आपकी ये नजर ऐसा हाल करती है कि मैं साँस नही ले पाती हूँ!!" वह आहिस्ते से बोली।

" हम्म! फिर तो तुम्हे बताना जरूरी है कि साँसे वाकई कैसे रुकती है.....!!" राज ने कहा और एकाएक उसकी तरफ घूम कर हल्का सा झुकते हुए उसकी गर्दन को होठो से छूने को हुआ तो डॉली ने झट से उसके होठ पर अपनी हथेली रख दी! राज की साँसों की टकराहट से ही उसकी सांस थम गई!

अचानक होठो पर हथेली पाकर राज की बन्द आंखे खुल गयी और वह इधर उधर देखने लगा, " दिमाग खराब हो गया है राज शर्मा ...!! पागल हो गया है तू..!! उफ्फ...!! कैसे ऐसा सपना देख लिया..!! सब समीर का किया धरा है! मैं खुद को रोक रहा हूँ और वो मुझे उकसाने की कोशिश कर रहा है...!! ऐसे सपने मेरी इमेज को सूट नही करते!! इस सपने की भनक हो गयी किसी को तो इज्जत की धज्जियां उड़ जाएगी! डॉली को इग्नोर करना जरूरी है अब..!!

इधर सुबह तैयार होती डॉली जैस्मिन के साथ नाश्ता करती हुई बैठी हँस रही थी, " जस्ट इमैजिन यार! नागफनी और शांत पृथ्वी..!!"

" उसका छोड़ तेरा नाम बढ़िया है, uv किरण..!! मस्त है मस्त..!! और तेरी दादी सास भी.....!!"

"जैस्मिन..!! थप्पड़ पड़ेगा मुँह पर..!!"

" यार..!! सीरियस क्यों हो जाती है..? कितनी मस्त हैं उसकी दादी!!"

" हम्म, बहुत अच्छी हैं वो, लेकिन ऐसे मजाक नही!!"

" मजाक नही करूँगी तो तू माहौल बीमार कर देगी!"

" मैं बस सुकून की जिंदगी चाहती हूँ, ऐसी कोई भी बात कोई सुन लेगा तो समझेगा की उसकी हैसियत की वजह से उस पर लट्टू हुई जा रहीं हूँ जबकि ऐसा कुछ नही है दूर दूर तक!!"

" चल जा अब! इंतज़ार हो रहा होगा वहाँ...!!" जैस्मिन ने आँख मारते हुए कहा!

डॉली मुस्कुराते हुए बोली, " तू नही सुधरेगी न..?"

" नही! मैं तो तुझे सुधरा देखकर ही आधी पागल हुई रहती हूं, खुद सुधर गयी न तो आगरे में ही मिलूंगी!!"

" चल मिलती हूँ रात में..!" डॉली निकलते हुए बोली।

आज घर पहुँची तो देखा की डॉक्टर आये हुए थे,

" सब ठीक तो है न..??" डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा।

" नही!! फिर तबियत खराब हो गयी आज..!" राज की जगह समीर ने जवाब दिया।

" अचानक कैसे..?"

" मालूम नही..!!"

डॉली वहाँ से एक तरफ को हट गयी और दरवाजे के पास खड़ी हो गयी!!

डॉक्टर बाहर निकले तो राज भी साथ ही बाहर आया!

" क्या परेशानी है डॉक्टर..?" राज ने पूछा

डॉक्टर साहब सहजता से बोले, " देखिए इन्हें कहीं आउटिंग पर ले जाइए!! हवा का बदलना जरूरी होता है कभी कभी!! ये काफी दिनों से बीमार हैं, एक ही जगह बन्द रहकर इनकी हालत में सुधार मुमकिन नही!!"
 
इधर दादी मुस्कुरा उठी तो समीर भी मुंह फेरकर मुस्कुरा उठा और मन ही मन बोला, " क्या बात है दादी मान गया कि आप हो तो राज की दादी ही..!! वो भागने में कसर नही छोड़ रहा और आप करीब लाने में कसर नही छोड़ रही! वो अहसास से खेल रहा है तो आप स्वास्थ्य से खेल रही हैं..!! दोनो ही खतरनाक खेल खेल रहे हो..!"

राज अंदर आया तो सुभद्रा देवी कराहते हुए बोली, " क्या हुआ?

" चलिए!"

विनाश जैस्मिन का हाथ पकड़े इधर उधर देख रहा था, " वाओ! कितना बड़ा और सुंदर घर है!!"

जैस्मिन दादी को नमस्ते करते हुए बोली, " क्या हाल हैं आपके?"

" बीमारी पीछा ही नही छोड़ रही!!" सुभद्रा देवी बोली तो जैस्मिन उनके पास बैठते हुए बोली, " मैं आ गयी हूँ न , आप ठीक हो जाएंगी! मेरी बकबक से अच्छे अच्छे उठकर भाग खड़े होते हैं!"

समीर ने दूसरी तरफ को मुंह घुमा लिया और मुस्कुरा उठा, फिर विनाश का हाथ पकड़ते हुए बोला, " घर देखना है, आइये मैं दिखाता हूँ!"

जैस्मिन ने फौरन हाथ बढ़ाकर समीर का दूसरा हाथ पकड़ लिया तो वह मुड़ा, उसकी हैरानी से भरी निगाहे अपने ऊपर देखकर जैस्मिन ने भौंहे उछाली और बोली, " ले जा रहे हो तो ध्यान रखना, जरा भी चोट या खरोच आयी तो ठीक नही होगा!"

" मैं घर दिखाने ले जा रहा हूँ, कुश्ती लड़ने नही!!" समीर ने सहजता से कहा।

"ठीक है! ठीक है, जाओ..!!" जैस्मिन ने कहा

समीर फिर भी खड़ा रहा तो जैस्मिन बोली, " क्या, अब जाओ न!!"

"मासी पहले इनका हाथ तो छोड़िए!!" विनाश बोला तो जैस्मिन ने झट से हाथ छोड़ दिया, समीर विनाश के साथ चला गया।

जैस्मिन दादी की तरफ मुड़ी और बोली, " कुछ खास काम था आपको मुझसे! बहुत दिन से आप यहाँ बुला रही हैं!"

" हां!! डॉली के बारे में जानना हैं मुझे....!!"

" आपको बताऊँगी तो आप राज शर्मा को भी बताएंगी न, और डॉली ऐसा नही चाहती , उसका कहना है कि कोई दिल से स्वीकार करे तो मंजूर है रिश्ता लेकिन किसी वजह से जबरन कोई कबूल करें ऐसा रिश्ता मुझे नही चाहिए!!"

" मुझे बस इतना जानना है कि डॉली का पति कहाँ है?"

" इसी शहर में है वो, लेकिन डॉली उसके साथ नही!!"

" तलाक हो गया..??"

" हां!!"

" क्यों..?"

" वो पहले से शादीशुदा था, डॉली मिडल क्लास फैमिली से है, उसके पापा पहले ही नही थे औऱ उसकी माँ भी तब अंतिम चरण में

थी! जाने से पहले डॉली की शादी करना चाहती थी ताकि भाई भाभी पर बोझ न बने!! डॉली ने न चाहते हुए भी माँ की खातिर मजबूर होकर शादी की।

ज्यादा जाँच पड़ताल नही की क्योंकि आँटी पर ही सबका ज्यादा ध्यान था! बस ये था कि इकलौता लड़का है और कहीं कम्पनी में नौकरी करता है, डॉली का गुजर बसर हो जाएगा!!

शादी की रात डॉली तो टूटी हुई थी, क्योंकि विदाई के साथ ही साथ मां की हालत और बिगड़ गयी थी! लेकिन पति को उससे क्या...? उसे विदा करा ले गया..! और उसकी टूटी हालत की परवाह न करते हुए अपनी मनमानी की!!

सुबह डॉली जल्दी उठ गई और बाहर निकलने को हुई तभी टांड़ पर से एक तस्वीर फ्रेम गिर पड़ी! डॉली ने जब उसे उठाया और सीधा किया तो होश उड़ गए..! उसमें उसका पति किसी और के साथ था, गोद मे दो बच्चे भी थे..!!

डॉली ये देखकर और भी टूट गयी, इतना बड़े धोखे के साथ जीना उसे मंजूर नही था, हर कदम पर समझौता उसे मंजूर नही था! वो उसी मुँह अंधेरे वहाँ से निकलकर घर आ गयी..!

यहाँ मां की अंतिम दर्शन का कार्यक्रम जारी था, सब होने के बाद डॉली ने सारी बात भाई को बताई तो वो डॉली को रखने को राजी हो गया लेकिन भाभी का रुख कुछ खास अच्छा नही लगा तो भी डॉली ने धोखे से शादी का केस फाइल किया और तलाक की अर्जी लगा दी! उसी दौरान एक रोज पता चला की वो प्रेग्नेंट है तो उसने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया, भाई इस फैसले के खिलाफ था आखिर वो एक रात ही तो ससुराल में रही थी और फिर ये सब...! समाज क्या कहेगा...? शादी के वक्त बाइस साल की थी वो, अब अठाइस की है...!!

डॉली किसी भी सूरत में एबॉर्शन को राजी नही थी इसलिए वो भाई के खिलाफ हो गयी और शहर से बाहर चली गयी! ताकि वो लोग समाज मे अपनी नाक ऊंची रख सके..! और फिर बलजीत से भी बचाना था बच्चे को, वरना बच्चे के बहाने वो डॉली को कमजोर करने की कोशिश करता या बच्चे को उससे दूर कर देता! डॉली ने अपने जीने का रास्ता बच्चे में ढूंढ लिया और उसे जन्म देकर पाला पोसा!! मेरे मम्मी पापा ने इस दौरान पूरी मदद की, हम बचपन से दोस्त हैं और मेरे परिवार को पता था कि वो कुछ गलत नही कर सकती लेकिन हम भी इतने अमीर नही है! मैं यहाँ ओपन से पढ़ने आयी तो मैंने डॉली को बुलवा लिया और वो वापस इस शहर लौटी लेकिन बलजीत फिर उससे टकरा गया, गनीमत बस इतना है कि जब जब भी वो टकराया है विनाश साथ नही रहा! डॉली किसी से नही डरती, बस विनाश के छीन जाने की वजह से बलजीत से डरती है! वो इस सच को छिपाए रखना चाहती है!

बलजीत बहुत घटिया आदमी है, उसकी पहली बीवी जुड़वा बच्चे होने के बाद उसे समय नही दे पाती थी और इसलिए उसने गरीब डॉली से शादी की उसे लगा था कि डॉली जिंदगी भर दबी हुई रह जायेगी , गरीब लड़की है केस क्या लड़ेगी, अलग क्या होगी..? वो घर भी गया था उसके भाई भाभी को कन्विंस करने लेकिन डॉली जरा भी नही झुकी , न ही डरी! उससे तलाक लेकर ही मानी! वो वकील भी बहुत नेकदिल थे, बिना पेमेंट के केस लड़ा था उन्होंने..! मिहिर सिंह नाम था उनका!!"

"मिहिर....!! अपने समीर के पापा हैं वो तो..!!"

" ओह!! ये उनका ही बेटा है! उन्होंने ही केस लड़ा था डॉली का!"

" बहुत गलत हुआ है बच्ची के साथ..!" वो बोली फिर मन ही मन कहा, "भगवान कभी कभी निर्दयी तो हो जाते हैं....!! पर भगवान जो करते हैं अच्छा ही करते हैं! ये सब न होता तो वो हमसे कभी नही मिलती..! राज की जिंदगी में कभी नही आती!!"

डॉली खाना बनाकर ऊपर आने को हुई तभी विनाश को वहाँ देखकर चौंक गई, " आप यहाँ कैसे बेबी..?"

" मासी के साथ, वो ऊपर उन दादी अम्मा के साथ है!"

डॉली जल्दी से ऊपर आयी तो जैस्मिन ने बातचीत का टॉपिक बदलते हुए कहा, " आप जल्दी ठीक हो जाओ फिर हम दोनों मिलकर खूब डाँस करेंगे! और गाना पता है कौन सा होगा,,, चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी.......... हाय रामा!"

सुभद्रा देवी हँसने लगी तो डॉली अंदर आते हुए बोली, " तू यहाँ दादी को पका रही है..! उनके सर में दर्द हो जाएगा..!!"

"नही! नही!! ठीक लग रहा है इससे बात करके इसलिए तो मैंने फोन करके बुलवाया!" सुभद्रा देवी बोली।

" ठीक है फिर, मैं आती हूँ जरा सी देर में..!" डॉली नीचे विनाश के पास चली गयी।

डॉली के जाते ही जैस्मिन बोली, "एक बात तो बताइए, आपका

अकड़ू पोता सच मे डॉली को पसन्द करता है या मुझे ही ऐसा लगता है??"

" मुझे भी ऐसा ही लगता है! कब से लगी हुई हूँ जुगाड़ भिड़ाने में कई दोनो को साथ कर सकूँ..?"

" ओह्ह! ये बात है फिर तो आप मेरी पार्टनर हुई, मैं भी अपनी तरफ से लगी हई हूँ! लेकिन एक बात बताईये कैसी दादी सास हैं आप..? पहली बार उस दिन घर आई तो पोता बहु को कुछ देकर भी नही गयी!"

" मैं परेशान थी उसके गायब होने की वजह से..! फिर वो बीमार ही पड़ गयी, ध्यान ही हट गया था खुराफात वाली बातों से, सीरियस माहौल जो था!"

" हां, ये तो है! दादी आगे का क्या प्लान है..?"

" दोनो को साथ बाहर ले जाने का प्लान तैयार किया है आज लेकिन मेरा राज है न सारे प्लान ओर झाड़ू मारने की सोच रहा है, कहता है मैं और आप चलेंगे!! एक बात बता ये उम्र मुझ बुढ़िया को घुमाने की है या अपनी पत्नी को कहीं के जाने की..!!"

जैस्मिन हँस पड़ी औए सुभद्रा देवी को ताली देते हुए बोली, " ये तो सही कहा, तीनो चले जाइये! मैं विनाश को रख लूँगी!"

" नही! विनाश साथ ही जाएगा! तुम लोग भी चलो..!!"

" लोग कौन..? मैं ही तो हूँ..!!" जैस्मिन आंखे गोल करते हुए बोली।

" मतलब समीर और तुम भी चलो! विनाश की देख रेख के लिए तुम्हारा होना जरूरी है लेकिन तुम्हारी देख रेख को भी तो कोई चाहिए न!! डॉली तो मेरी ही सेवा में रहेगी और फिर कुछ पल राज और डॉली को भी देने हैं!"

" हां ! ये भी ठीक है! अब आप खाओ वरना डॉली आकर मुझे डाँटेगी!"

जैस्मिन नीचे उतरी तो समीर को कॉरीडोर में देखकर बोली, " ज्यादा खुश मत होना, गलती से पकड़ लिया था हाथ मैंने..! ऐसा वैसा कुछ मत सोचने लगना!!"

" मैंने कुछ कहा आपको..?"

"नही!! लेकिन...!"

" तो फिर सफाई क्यों दे रही है?"

जैस्मिन चुप हो गयी लेकिन दूसरे ही पल बोली, " ये मत सोचना की चुप करा दिया , मेरा बोलने का मन नही इसलिए चुप हो गयी!"

"ठीक है न, मै कुछ कह नही रहा हूँ..!"

" यही तो प्रॉब्लम है की कुछ कह नही रहे हो? जब कुछ कह नही रहे हो तो जरूर कुछ सोच रहे होंगे..!!"

" अरे..!! अजीब पागल लड़की हो..!!"

" ओए!! पागल हूँ नही, पागल करती हूँ...!!"

" हम्म! ये भी सही कहा लेकिन कहीं पासा पलट न जाये, मैं ही पागल न कर दूं आपको...??" समीर ने कहा और बिना रुके ऊपर चला गया।

जैस्मिन होठ गोल करते हुए बोली, " पागल तो कर ही दिया है, बताओ मैं भी हाथ पकड़कर हाथ छोड़ना भूल गयी! तभी इतराकर इतना बड़ा डायलॉग मार कर गया है!समीर दादी के पास बैठते हुए बोला, " तबियत बेहतर लग रही होगी न अब....!!"

" क्यों..?"

" डॉली के बारे में सब जान जो लिया!!" समीर मुस्कराते हुए बोला।

दादी मुस्कान बिखेरते हुए बोली, " हाँ! जानकर तसल्ली हो गयी, राज को उसके अतीत से कोई परेशानी न हो तो डॉली बहुत अच्छी लड़की है! मुझे अब भी कोई परेशानी नही उसे अपनी पोता बहु बनाने में!!"
 
समीर उनके पास बैठते हुए बोला, " ये जो आपका पोता है न, सब एहसास होते हुए भी जल्दी मानने नही वाला!! बहाने ढूंढता है दूर भागने के!"

"सब सुन लिया क्या तुमने भी..?" दादी ने पूछा तो समीर हंसते हुए बोला, " मैं इसीलिए तो विनाश को यहाँ से हटा लें गया था ताकि आप लोग बात कर सके! औऱ जानना तो मुझे भी था ही इसलिए विनाश को लुका छिपी के खेल में उलझाकर मैं यहाँ छिप गया और सब सुना भी! राज को कुछ दिनों से मना मनाकर थक गया कि मुझे पता लगाने दे, लेकिन वो मानता ही नही!! पता नही लगाया लेकिन सुन लिया , उसकी बात से बाहर गए बिना ही मेरा काम हो गया!

समीर चेहरे पर अंगुलियाँ फिराते हुए बोला, " राज को उसकी तरफ झुकाना आसान काम नही है, हमारे किये के बदले वो जाकर उस पर भड़केगा!!"

समीर हल्का सा करीब होते हुए बोला, "एक राज की बात बताऊँ दादी! राज को झुकाना इसलिए आसान नही है क्योंकि ऑलरेडी वो उसकी तरफ झुक चुका है! खुद को रोक रहा है क्योंकि एक तो उसे मैरिड जानता है....... और दूसरा उसकी बड़ी सी ईगो..!"

"पक्का मेरी बुराई में ही मशगूल हो आप दोनो...!!" राज अंदर आते हुए बोला।

समीर ने हटते हुए कहा, " नही! हम यूँ ही कुछ जरूरी बातें कर रहे थे!"

" ऐसा है क्या..??"

" हां! ऐसा ही है!"

"हम्म, तो बस इतना कि मैं जानता हूँ कि आजकल आपके प्रेक्टिकल का विषय मैं हूँ, और शोध का विषय डॉली !!"

सुभद्रा देवी और समीर ठहाका लगाकर हँस पड़े, तभी विनाश छत पर से घूमकर आया था और हँसने की आवाज सुनकर अंदर आते हुए बोला, " हैलो, मिस्टर हैंडसम!! आपको कबसे ढूंढ रहा था, आप तो दिख ही नही रहे थे, पूरे घर मे घूम आया मैं..!!"

" ओह्ह..!! चलिए इसी बहाने आपने घर तो देख लिया...! कैसा लगा घर..?" राज उसकी तरफ पलटकर प्यार से मुस्कुराते हुए बोला।

"बहुत सुंदर! महल जैसा , मैं भी ऐसा ही घर सोचता हूँ , मम्मा के लिए बनवाने का..!!"

" बहुत अच्छी बात है ये तो....! सपने देखेंगे तभी तो एक दिन उन्हें पूरा करेंगे..! और आपने बताया ही नही था कि आप आ रहे हैं, पता होता तो घर पर रहता मैं.!"

" सच्ची..!"

" हां!!"

" आपके बॉस आपको नही डाँटते छुट्टी करने पर?"

" नही! क्योंकि मैं खुद ही बॉस हूँ!"

विनाश अब कुछ नही बोला, सिर्फ मुस्कुराते हुए उसे देखता रहा तो राज उसके पास हनुमान जी वाली मुद्रा में एक घुटना जमीन पर टिकाकर बैठते हुए बोला, " ऐसे क्या देख रहे हो..?"

"आपकी दुनिया तो जादू की दुनिया है एकदम, सब कुछ है आपके पास!"

राज ने एक हल्की साँस बाहर छोड़ते हुए कहा, " नही! सब कुछ नही है मेरे पास!!"

"जैसे...??" विनाश ने पूछा।

"आपकी मम्मा.!!" राज उसके गाल छूते हुए बहुत धीमे से बोला।

" आपको मेरी मम्मा चाहिए..??" विनाश हैरानी से तेज बोल गया तो दादी , समीर समेत दरवाजे पर खड़ी डॉली और जैस्मिन भी राज की तरफ देखने लगी!

सबकी नजर अपनी तरफ देखकर बेहद सहजता से राज खड़े होते हुए बात संभालकर बोला, " नही..!!" आपने पूछा कि क्या नही मेरे पास..? तो मैंने कहा, आपकी तरह मेरे पास मेरी मम्मा नही है!"

विनाश मुस्कुराते हुए बोला, " ओह! अब समझ आया, वैसे मेरी मम्मा बहुत अच्छी है, आपको पसन्द है तो हम साथ मे रहते हैं, मम्मा आपका भी ख्याल रखेंगी मेरी तरह!!"
 
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