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Guest
क्या ये सही कह रहा है कि उसकी जिंदगी में कोई है, या फिर ये भी खुद ही एज्यूम कर लिया है, कोई फैक्ट है या नही इस बात के पीछे?"
सुभद्रा देवी सोच में डूबी नीचे उतर आई और डायनिंग टेबल के सामने चेयर पर बैठ गयी, राज किचन में लगा हुआ था, सुभद्रा देवी उसे देखते हुए सोचने लगी, " मैं गलत नही हो सकती! ये माने या न माने पर राज में बदलाव तो आ रहे हैं, उस लड़की का असर इस पर हो रहा है!"
राज नूडल्स बनाकर ले आया और दादी के आगे बाउल रखते हुए बोला, " खाइए अपने पोते के हाथ का गरमा गरम नूडल।"
दादी औऱ राज दोनो खाने लगे तो राज खत्म करते हुए बोला, " अब निकल रहा हूँ, एक बिजनेस मीटिंग है , शायद रात में ही आऊं!"
सुभद्रा देवी मुस्कुरा दी औऱ बोली, " ऐसे ही तरक्की करो!"
राज तैयार होने चला गया।
उधर आज डॉली अपने वादे के मुताबिक विनाश को लेकर
होटल पहुँची, कुछ दूरी पर ही एक गुब्बारे वाला नजर आ गया तो डॉली ने विनाश की ललचाई नजरों को देखते हुए एक गुब्बारा दिलाने का फैसला किया!
वह विनाश को लेकर आगे बढ़ गयी और गुब्बारा दिलाने के लिए पैसे निकालने लगी, विनाश का हाथ उसने छोड़ दिया था।
तभी विनाश के हाथ से गुब्बारा छूट गया तो वह डॉली से कहे बिना ही उसे पकड़ने को दौड़ गया। डॉली पैसे देकर मुड़ी तो विनाश को वहाँ न देखकर जी सन्न रह गया, उसने इधर उधर देखा तो आँख में आँसू भरे विनाश नजर आया लेकिन उसकी तरफ एक आवारा साँड़ बढ़ रहा था।
डॉली बिना कुछ सोचे समझे उसकी तरफ दौड़ गयी और साथ ही चिल्लाई, " बेबी मेरी तरफ आओ, भागों वहाँ से..!"
विनाश को दूर होने की वजह से कुछ समझ नही आया, उसकी नजर अभी भी आसमान की तरफ चली गयी।
राज की मीटिंग होटल रेजिडेंशियल में ही थी, उसने बाहर रोड के दूसरी साइड कार खड़ी की और बाहर निकलकर रोड क्रॉस करने लगा तभी कुछ लोगो को चीखते सुना, "अरे रोको उस लड़की को...!!"
राज ने उनकी नजरो का अनुसरण करते हुए उसी तरफ देखा तो बच्चे की तरफ बढ़ते साँड़ और भागती हुई डॉली पर नजर पड़ी!
तब तक विनाश भी अब साँड़ को देख चुका था और उसके दिमाग ने काम नही किया तो डर के मारे वह घुटनों में चेहरा छिपाकर बैठ गया!!
ये सब देखकर राज के कदमों की गति बढ़ गयी, डॉली भी भागते हुए विनाश तक पहुंची और उसे आगोश में समेटते हुए बैठ गयी क्योंकि भागने का वक़्त नही था, साँड़ अब विनाश पर हमला करने ही वाला था औऱ उसे बचाने का एक ही रास्ता था कि वार को अपने ऊपर ले ले!
जब कुछ पल बीतने पर भी उसे चोट नही आई तो उसने विनाश को सीने में चिपकाए हुए ही पीछे सिर घुमाया तो राज ने साँड़ की सींग को पकड़ रखा था।
"जाओ यहाँ से..!!" राज ने बिना उसकी तरफ देखे ही तेज आवाज में कहा।
डॉली उठी और विनाश को लेकर होटल की तरफ चली
गयी क्योंकि वहाँ श्रेया औऱ विशाल भी आये हुए थे! डॉली ने जाकर होटल मैनेजमेंट से हेल्प की डिमांड की और उन्हें सारा माजरा बताते हुए विनाश को विशाल के पास छोड दिया फिर खुद बाहर निकल आयी। होटल से बाकी लोग भी बाहर निकल आये औऱ राज को साँड़ के साथ फाइट करते हुए देखने लगे।
राज को साँड़ ने उठाकर दूसरी तरफ पटक दिया लेकिन सींग नीचे करते ही राज ने उतनी ही फुर्ती से वापस उसकी सींगों को पकड़ लिया और उठ खड़ा हुआ, कोहनी से उसकी दोनो आंखों के बीच के हिस्से पर वार किया तो सांड और खूंखार हो उठा, दोनो को लड़ते देख लोग वीडियो बनाने लगे तो डॉली नाराज हो गयी और चीख उठी,, " तमाशा चल रहा है यहाँ पर..! मदद को आगे नही जा सकते और वीडियो बनाये जा रहे हो, एंटरटेनमेंट चाहिए तो घर जाकर टीवी देखो, इमोशनलेस पीपल्स!"
लड़ाई में राज की शर्ट कई जगह से फट गई थी लेकिन वो हार नही मान रहा था और अब तक खुद को साँड़ के सींगों के वार से बचा रखा था।
उसके चेहरे से जाहिर हो रहा था कि वो अब थक रहा था, साँड़ ने उसे फिर पटखनी दी और आखिरकार राज के पलटते पलटते भी उसकी बाँह पर सींग से वार कर ही दिया,
राज के जबड़े दर्द से कस गए और माथे में गर्मी पसर गयी, पसीने से वह पूरी तरह भीग गया था। वह उठा और घायल हाथो के साथ ही फिर साँड़ को पकड़ने की कोशिश की लेकिन उसे सींग पड़ते देखकर डॉली रुक नही पायी थी और वो उसी तरफ दौड़ गयी!
राज एक बार फिर जमीन पर पड़ा था और साँड़ जैसे ही उस पर वार करने को हुआ, डॉली अचानक ही राज के ऊपर आ गयी! राज उसे लेकर पलटी मार गया और दूसरा वार भी खुद की उसी बाँह पर ले लिया!
तब तक विनाश विशाल से हाथ छुड़ाकर दौड़ पड़ा, " मम्मा...!!"
राज ने उस बच्चे की तरफ देखा, इतने में उसकी बाहों में मौजूद डॉली विनाश की तरफ देखते हुए बोली, " बेबी...!! नो..!!"
राज ने अब अपनी आंखें बंद कर ली और डॉली से अपनी पकड़ छोड़ दी, डॉली उठ गई और राज को उठाने लगी तो राज ने अपना हाथ झटक दिया और खुद उठ खड़ा हुआ!
होटल से कुछ शेफ निकल आये थे और उनके हाथ मे कुछ
जलती मशाल थी जिससे वो उस साँड़ को दूर हटा रहे थे।
विनाश आकर डॉली से चिपक चुका था , " मम्मा.! सॉरी मम्मा! ठीक तो हो न आप..?"
"मैं पूरी तरह ठीक हूँ बेबी! डोंट वरी..!!" डॉली ने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए राज की तरफ देखते हुए कहा।
राज की तरफ विशाल ने पानी की बोतल बढ़ाई तो राज ने अपनी शर्ट उतार कर नीचे फेंक दी और बोतल को खोल पानी अपने सिर और चेहरे पर गिरा लिया।
सैंडो पहने थका हुआ राज एक अलग ही आभा फैला रहा था, डॉली की तो नजर ही नही हट पा रही थी! वो घायल था, बाँह जख्मी थी लेकिन इस वक़्त यह कहने में कोई दो राय नही थी कि वो बहुत हॉट लग रहा था।
विनाश डॉली से अलग होकर राज की तरफ बढ़ा और बोला, " मिस्टर हैंडसम! थैंक यू!! आप तो माचो मैन हो..! मुझे बड़े होकर आप जैसा ही बनना है, मैं भी सबसे लड़ जाऊंगा अपनी मम्मा के लिए!"
" अपनी मम्मा के लिए..!" सुनकर राज की लंबी
मुस्कुराहट हल्की हो गयी और उसने विनाश के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, " आई विश आप मेरी तरह बने .... लेकिन आपकी मम्मा शायद ये न चाहे! आप वैसा बनना जैसा वो चाहें, आपसे बहुत प्यार करती हैं!"
राज के साथी बिजनेस मैन भी वहाँ आ चुके थे, राज ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, " घर पर पहुँचे, वहीं करते हैं मीटिंग!"
सब उसकी तारीफ करते हुए अपनी अपनी गाड़ियों में बैठ गए तो राज ने एक बोतल को होठो से लगा लिया और पानी पीने लगा इतने में डॉली ने आगे बढ़कर अपना स्कार्फ उसके घाव पर बांध दिया तो राज ने अपना हाथ खींच लिया और विशाल की तरफ देखकर बोला, " विशाल पहुंच कर उन्हें अटेंड करो तब तक मैं ड्रेसिंग कराके आता हूँ!"
डॉली ने स्कार्फ ढंग से बांधने के लिए फिर भी उसकी बाँह पकड़ ली तो राज ने भी उसका हाथ कसकर पकड़ते हुए अपनी कलाई से उसका हाथ हटाते हुए धीरे से कहा, " ऐसे काम नही करने चाहिए जिनसे दर्द मिले!! मुझे भी कन्सर्न की आदत नही!! और जहां तक मुझे लगता है आपको सुर्खियों में आने की आदत नही होगी, ऐसी हरकतों से सुर्खियों में आ जाएंगी और सफाई मुझे पेश करनी
पड़ेगी....!! मेरा तो सुर्खी से कुछ नही बिगड़ेगा लेकिन आप पर भारी पड़ जाएगी ऐसी सुर्खियां....!! मुझसे करीबी मत बढ़ाना, दूर रहती आयी हो तो दूर ही रहो मुझसे!!"
राज के भावों और नजरो में एक ठंडक भरी चुभन थी, उसने अपने निचले होठ के कोर को एक तरफ से दबाया हुआ था , जिससे साफ जाहिर था कि वो बेहद गुस्से में है।
उसने डॉली के हाथ को अपनी मजबूत मुट्ठी से आजाद कर दिया और अपनी कार की तरफ बढ़ गया।
डॉली अपनी कलाई को सहलाने लगी, राज ने आज कुछ ज्यादा ही कठोरता से उसकी कलाई को पकड़ा था, पल भर को लगा कि वो स्थान सुन्न हो गया है।
राज हॉस्पिटल चला गया और उस रखे हुए स्कार्फ को घूरने लगा, " मम्मा..!" उसके कानों में इस शब्द से चुभन हो रही थी, वो अपने दांत जमाये हुए घर के लिए निकल गया!!
सुभद्रा देवी सोच में डूबी नीचे उतर आई और डायनिंग टेबल के सामने चेयर पर बैठ गयी, राज किचन में लगा हुआ था, सुभद्रा देवी उसे देखते हुए सोचने लगी, " मैं गलत नही हो सकती! ये माने या न माने पर राज में बदलाव तो आ रहे हैं, उस लड़की का असर इस पर हो रहा है!"
राज नूडल्स बनाकर ले आया और दादी के आगे बाउल रखते हुए बोला, " खाइए अपने पोते के हाथ का गरमा गरम नूडल।"
दादी औऱ राज दोनो खाने लगे तो राज खत्म करते हुए बोला, " अब निकल रहा हूँ, एक बिजनेस मीटिंग है , शायद रात में ही आऊं!"
सुभद्रा देवी मुस्कुरा दी औऱ बोली, " ऐसे ही तरक्की करो!"
राज तैयार होने चला गया।
उधर आज डॉली अपने वादे के मुताबिक विनाश को लेकर
होटल पहुँची, कुछ दूरी पर ही एक गुब्बारे वाला नजर आ गया तो डॉली ने विनाश की ललचाई नजरों को देखते हुए एक गुब्बारा दिलाने का फैसला किया!
वह विनाश को लेकर आगे बढ़ गयी और गुब्बारा दिलाने के लिए पैसे निकालने लगी, विनाश का हाथ उसने छोड़ दिया था।
तभी विनाश के हाथ से गुब्बारा छूट गया तो वह डॉली से कहे बिना ही उसे पकड़ने को दौड़ गया। डॉली पैसे देकर मुड़ी तो विनाश को वहाँ न देखकर जी सन्न रह गया, उसने इधर उधर देखा तो आँख में आँसू भरे विनाश नजर आया लेकिन उसकी तरफ एक आवारा साँड़ बढ़ रहा था।
डॉली बिना कुछ सोचे समझे उसकी तरफ दौड़ गयी और साथ ही चिल्लाई, " बेबी मेरी तरफ आओ, भागों वहाँ से..!"
विनाश को दूर होने की वजह से कुछ समझ नही आया, उसकी नजर अभी भी आसमान की तरफ चली गयी।
राज की मीटिंग होटल रेजिडेंशियल में ही थी, उसने बाहर रोड के दूसरी साइड कार खड़ी की और बाहर निकलकर रोड क्रॉस करने लगा तभी कुछ लोगो को चीखते सुना, "अरे रोको उस लड़की को...!!"
राज ने उनकी नजरो का अनुसरण करते हुए उसी तरफ देखा तो बच्चे की तरफ बढ़ते साँड़ और भागती हुई डॉली पर नजर पड़ी!
तब तक विनाश भी अब साँड़ को देख चुका था और उसके दिमाग ने काम नही किया तो डर के मारे वह घुटनों में चेहरा छिपाकर बैठ गया!!
ये सब देखकर राज के कदमों की गति बढ़ गयी, डॉली भी भागते हुए विनाश तक पहुंची और उसे आगोश में समेटते हुए बैठ गयी क्योंकि भागने का वक़्त नही था, साँड़ अब विनाश पर हमला करने ही वाला था औऱ उसे बचाने का एक ही रास्ता था कि वार को अपने ऊपर ले ले!
जब कुछ पल बीतने पर भी उसे चोट नही आई तो उसने विनाश को सीने में चिपकाए हुए ही पीछे सिर घुमाया तो राज ने साँड़ की सींग को पकड़ रखा था।
"जाओ यहाँ से..!!" राज ने बिना उसकी तरफ देखे ही तेज आवाज में कहा।
डॉली उठी और विनाश को लेकर होटल की तरफ चली
गयी क्योंकि वहाँ श्रेया औऱ विशाल भी आये हुए थे! डॉली ने जाकर होटल मैनेजमेंट से हेल्प की डिमांड की और उन्हें सारा माजरा बताते हुए विनाश को विशाल के पास छोड दिया फिर खुद बाहर निकल आयी। होटल से बाकी लोग भी बाहर निकल आये औऱ राज को साँड़ के साथ फाइट करते हुए देखने लगे।
राज को साँड़ ने उठाकर दूसरी तरफ पटक दिया लेकिन सींग नीचे करते ही राज ने उतनी ही फुर्ती से वापस उसकी सींगों को पकड़ लिया और उठ खड़ा हुआ, कोहनी से उसकी दोनो आंखों के बीच के हिस्से पर वार किया तो सांड और खूंखार हो उठा, दोनो को लड़ते देख लोग वीडियो बनाने लगे तो डॉली नाराज हो गयी और चीख उठी,, " तमाशा चल रहा है यहाँ पर..! मदद को आगे नही जा सकते और वीडियो बनाये जा रहे हो, एंटरटेनमेंट चाहिए तो घर जाकर टीवी देखो, इमोशनलेस पीपल्स!"
लड़ाई में राज की शर्ट कई जगह से फट गई थी लेकिन वो हार नही मान रहा था और अब तक खुद को साँड़ के सींगों के वार से बचा रखा था।
उसके चेहरे से जाहिर हो रहा था कि वो अब थक रहा था, साँड़ ने उसे फिर पटखनी दी और आखिरकार राज के पलटते पलटते भी उसकी बाँह पर सींग से वार कर ही दिया,
राज के जबड़े दर्द से कस गए और माथे में गर्मी पसर गयी, पसीने से वह पूरी तरह भीग गया था। वह उठा और घायल हाथो के साथ ही फिर साँड़ को पकड़ने की कोशिश की लेकिन उसे सींग पड़ते देखकर डॉली रुक नही पायी थी और वो उसी तरफ दौड़ गयी!
राज एक बार फिर जमीन पर पड़ा था और साँड़ जैसे ही उस पर वार करने को हुआ, डॉली अचानक ही राज के ऊपर आ गयी! राज उसे लेकर पलटी मार गया और दूसरा वार भी खुद की उसी बाँह पर ले लिया!
तब तक विनाश विशाल से हाथ छुड़ाकर दौड़ पड़ा, " मम्मा...!!"
राज ने उस बच्चे की तरफ देखा, इतने में उसकी बाहों में मौजूद डॉली विनाश की तरफ देखते हुए बोली, " बेबी...!! नो..!!"
राज ने अब अपनी आंखें बंद कर ली और डॉली से अपनी पकड़ छोड़ दी, डॉली उठ गई और राज को उठाने लगी तो राज ने अपना हाथ झटक दिया और खुद उठ खड़ा हुआ!
होटल से कुछ शेफ निकल आये थे और उनके हाथ मे कुछ
जलती मशाल थी जिससे वो उस साँड़ को दूर हटा रहे थे।
विनाश आकर डॉली से चिपक चुका था , " मम्मा.! सॉरी मम्मा! ठीक तो हो न आप..?"
"मैं पूरी तरह ठीक हूँ बेबी! डोंट वरी..!!" डॉली ने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए राज की तरफ देखते हुए कहा।
राज की तरफ विशाल ने पानी की बोतल बढ़ाई तो राज ने अपनी शर्ट उतार कर नीचे फेंक दी और बोतल को खोल पानी अपने सिर और चेहरे पर गिरा लिया।
सैंडो पहने थका हुआ राज एक अलग ही आभा फैला रहा था, डॉली की तो नजर ही नही हट पा रही थी! वो घायल था, बाँह जख्मी थी लेकिन इस वक़्त यह कहने में कोई दो राय नही थी कि वो बहुत हॉट लग रहा था।
विनाश डॉली से अलग होकर राज की तरफ बढ़ा और बोला, " मिस्टर हैंडसम! थैंक यू!! आप तो माचो मैन हो..! मुझे बड़े होकर आप जैसा ही बनना है, मैं भी सबसे लड़ जाऊंगा अपनी मम्मा के लिए!"
" अपनी मम्मा के लिए..!" सुनकर राज की लंबी
मुस्कुराहट हल्की हो गयी और उसने विनाश के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, " आई विश आप मेरी तरह बने .... लेकिन आपकी मम्मा शायद ये न चाहे! आप वैसा बनना जैसा वो चाहें, आपसे बहुत प्यार करती हैं!"
राज के साथी बिजनेस मैन भी वहाँ आ चुके थे, राज ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, " घर पर पहुँचे, वहीं करते हैं मीटिंग!"
सब उसकी तारीफ करते हुए अपनी अपनी गाड़ियों में बैठ गए तो राज ने एक बोतल को होठो से लगा लिया और पानी पीने लगा इतने में डॉली ने आगे बढ़कर अपना स्कार्फ उसके घाव पर बांध दिया तो राज ने अपना हाथ खींच लिया और विशाल की तरफ देखकर बोला, " विशाल पहुंच कर उन्हें अटेंड करो तब तक मैं ड्रेसिंग कराके आता हूँ!"
डॉली ने स्कार्फ ढंग से बांधने के लिए फिर भी उसकी बाँह पकड़ ली तो राज ने भी उसका हाथ कसकर पकड़ते हुए अपनी कलाई से उसका हाथ हटाते हुए धीरे से कहा, " ऐसे काम नही करने चाहिए जिनसे दर्द मिले!! मुझे भी कन्सर्न की आदत नही!! और जहां तक मुझे लगता है आपको सुर्खियों में आने की आदत नही होगी, ऐसी हरकतों से सुर्खियों में आ जाएंगी और सफाई मुझे पेश करनी
पड़ेगी....!! मेरा तो सुर्खी से कुछ नही बिगड़ेगा लेकिन आप पर भारी पड़ जाएगी ऐसी सुर्खियां....!! मुझसे करीबी मत बढ़ाना, दूर रहती आयी हो तो दूर ही रहो मुझसे!!"
राज के भावों और नजरो में एक ठंडक भरी चुभन थी, उसने अपने निचले होठ के कोर को एक तरफ से दबाया हुआ था , जिससे साफ जाहिर था कि वो बेहद गुस्से में है।
उसने डॉली के हाथ को अपनी मजबूत मुट्ठी से आजाद कर दिया और अपनी कार की तरफ बढ़ गया।
डॉली अपनी कलाई को सहलाने लगी, राज ने आज कुछ ज्यादा ही कठोरता से उसकी कलाई को पकड़ा था, पल भर को लगा कि वो स्थान सुन्न हो गया है।
राज हॉस्पिटल चला गया और उस रखे हुए स्कार्फ को घूरने लगा, " मम्मा..!" उसके कानों में इस शब्द से चुभन हो रही थी, वो अपने दांत जमाये हुए घर के लिए निकल गया!!