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Guest
" अरे तुम खड़े क्यों हो राज बैठो ना।"
" क्या कर रही थी अब तक " अपनी कुर्सी पर बैठते हुए राज ने सवाल किया
,
" कुछ नही ,बस मेन्यू देख रहे थे कि तुम्हारे लायक क्या हेल्दी खाने को मिल सकता है।"
" अरे हमारे चक्कर में ना पड़ो,जो तुम्हें पसंद हो वो मँगा लो।।" राज के ऐसा बोलते ही प्रिया मुस्कुरा पड़ी
" अरे राज अब हमें भी तुम्हारी तरह मूँग और चना ही भाने लगा है,पता है एक दिन तो अम्मा बेचारी रो पड़ी,बुआ से बोलती हैं" लगता है हमार प्रिया को जिन ऊन पकड़ लिया है,आज कल खाने को देखती भी नही,सिर्फ फलाहार करे है छोरी जिज्जी।" मुझे तो ऐसी हँसी आई,मैनें कहा अम्मा उस जिन्न का एक नाम भी है " राज"
प्रिया तो ऐसा बोल कर फिर हंसने लगी पर राज बेचारा शरमा गया।।
" अच्छा राज सुनो तुमसे एक बात पूछना चाहते हैं "
" हाँ पूछो"
" सच तो बोलोगे ना??"
धड़कते दिल से राज ने कहा" बिल्कुल सच बोलेंगे।"
उसे लगा जाने क्या पूछने वाली है।असल में तो राज को खुद ही समझ नही आया था,कि इन कुछ महिनों के साथ में कब प्रिया उसके मन में रात दिन बजने लगी,हर काम उस से पूछ पूछ कर करने की ऐसी आदत हुई कि कई बार जिम के काम से भी कहीं जाना हो तो पहले प्रिया का अप्रूवल लगने लगा।।राज तो नही समझा कि ये क्या है लेकिन उसके आस ,
पास के लोगों जैसे प्रेम रानी यहाँ तक की पिंकी को भी समझ आने लगा कि राज को प्रिया भा गई है।।
" हम कैसे दिखते हैं,देखो एकदम सच बोलना ,तुम्हें तुम्हारे भगवान की कसम।"
भगवान की कसम सुनते ही भैय्या जी को बड़े हनुमान याद आ गये,दोनों हाथ कान से लगा कर मन ही मन भगवान से माफी मांग कर राज ने कहा__
" हम सच बोलें तो तुम बहुत ही प्यारी दिखती हो,मासूम सी ।। और होशियार तो बहुतै दिखती हो।।"
अभी राज अपनी बात पूरा भी नही किया था कि वेटर उनका ऑर्डर ले कर आ गया।।
" अरे कॉफ़ी मंगाए हो राज??"
" हाँ प्रिया ऐसे होटल में चाय नही पी जाती, इसिलिए हम कॉफ़ी मँगा लिये,जल्दी से कॉफ़ी पी लो,फिर तुम्हे किसी से मिलवाने ले कर जाना है।।"
दोनो कॉफ़ी पीकर निकलने लगे तब प्रिया ने राज को टेबल पर गलती से भूले हुए गुलाब की याद दिलाई,," किसके लिये लाये हो गुलाब"
" बताते हैं!! पहले हमारे साथ चलो।।"
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प्रिया को सिर्फ एक गुलाब देने की भी हिम्मत राज नही जुटा पाया,दोनो उसकी रॉयल एनफील्ड में बैठ कर बड़े हनुमान मन्दिर को निकल चले।।रास्ते भर इधर उधर की बातें बताती प्रिया ने अपने गणित के प्रोफेसर भास्कर सर की ढ़ेर सारी बातें राज को बताईं,और बताते बताते अंत में धीरे से अपने मन में उपजी प्यार की भावना को भी राज को बता दिया__
" देखो राज जाने अनजाने तुम हमारे बहुत ही ज्यादा अच्छे दोस्त बन गये हो!! निरमा से तो अब मिलना भी कम हो पाता है,उसे बताएंगे भी तो हमारी बात समझेगी नही,और ना ही कोई मदद करेगी,क्योंकि वो हमसे इतना प्यार करती है कि उसे हममे कोई कमी नज़र ही नही आती।। तुम भी हमारे बहुत सच्चे दोस्त बन गये हो,हो ना।।"
बहुत धीरे से राज ने कहा" हाँ हैं,बोलो क्या मदद चाहिये।"
" पहली बार जब भास्कर सर से मिले तभी हमें सर बहुत भा गये थे,,फिर उनका गणित पढ़ाने का स्टायल!!ऐसा पढाते हैं राज की पूछो मत!! नये नये समीकरण खुद तैय्यार कर देते हैं ।।तुम हमारी इतनी मदद बस कर दो कि वो भी हमारी तरफ ध्यान देने लगे,,मतलब समझ रहे हो,हम क्या कर रहे।।
बिल्कुल रुआंसा होकर राज ने कहा" नही समझे"
" अरे बुद्धू!! तुम खुद लड़के हो,तुम हमें बता सकते हो ना कि लड़कों को क्या पसंद होता है,मतलब कैसी लडकियों से बात करना पसंद है . अब और कितना खुल के बताएँ ।।"
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" हम्म समझ गये!! कर देंगे तुम्हारी मदद।।"
" थैंक यू राज ,हमे पता था,तुम बहुत अच्छे हो हमारी मदद ज़रूर करोगे,,अच्छा ये तो बताया ही नही तुमने कि ये गुलाब किसके लिये रखे हो।।"
" हनुमान जी के लिये,,वही चढाना है हमें,सुनो प्रिया तुम्हें घर जाने की देरी हो रही तो तुम्हे घड़ी चौक पे उतार देते हैं!! हमको हनुमान मन्दिर जाना है।।"
" नही ऐसी कोई देर नही हो रही ,तुम्हारे साथ ही तो हैं,आज हमारे पतले होने की पार्टी जो है,पर तुम तो बस कॉफ़ी में निपटा दिये।।"
" अरे तुम वो भास्कर भास्कर किये जा रही थी तो हमे कुछ सूझा ही नही,बस कॉफ़ी मँगा लिये।।
" चलो कोई बात नही!! अभी हमे चार पांच किलो और कम करना है,उसके बाद जी भर के खायेंगे, अच्छा सुनो !! तुम मिलवाने किससे वाले हो।।'
" अरे किसी से नही!! ऐसे ही कह दिये रहे!! हमको मन्दिर जाना था।।हम बचपन से जब भी परेशान होते थे या बहुत खुश होते थे तब बड़े हनुमान मन्दिर ही जाया करते थे,उन्हीं से अपना सारा सुख दुख साझा करते रहे हैं,आज भी तुम्हें वहीं ले जाने की सोचे थे।"
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" अरे वाह!! चलो हम भी मिल लेंगे अपने दोस्त के बाल सखा से।। पर सुनो भूल मत जाना राज, पटला होने में इतनी मदद किये हो अब इस मामले में भी थोड़ी मदद कर दो,और किसी से कहना नही,समझे।।"
" हाँ मेरी माँ किसी से नही कहेंगे। और कल से तुम्हारी एक हफ्ते की एक और ट्रेनिंग शुरु कर देंगे,,उसके बाद वो भास्कर की क्या औकात तुम्हारे सामने।।भास्कर को मारो गोली सलमान खान भी पट जायेगा।।"
" अरे अरे अरे गोली क्यों मार रहे हो भई !! भास्कर सर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ,रही बात सलमान की तो हमें सलमान खान पसंद ही नही .
बातों ही बातों में बड़े हनुमान मन्दिर पहुंच कर दोनों ने दर्शन किये,और सेंतराम के यहाँ से आलू टिक्की खा कर और पैक करा कर दोनो अपने अपने घर वापस आ गये।।
" क्या कर रही थी अब तक " अपनी कुर्सी पर बैठते हुए राज ने सवाल किया
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" कुछ नही ,बस मेन्यू देख रहे थे कि तुम्हारे लायक क्या हेल्दी खाने को मिल सकता है।"
" अरे हमारे चक्कर में ना पड़ो,जो तुम्हें पसंद हो वो मँगा लो।।" राज के ऐसा बोलते ही प्रिया मुस्कुरा पड़ी
" अरे राज अब हमें भी तुम्हारी तरह मूँग और चना ही भाने लगा है,पता है एक दिन तो अम्मा बेचारी रो पड़ी,बुआ से बोलती हैं" लगता है हमार प्रिया को जिन ऊन पकड़ लिया है,आज कल खाने को देखती भी नही,सिर्फ फलाहार करे है छोरी जिज्जी।" मुझे तो ऐसी हँसी आई,मैनें कहा अम्मा उस जिन्न का एक नाम भी है " राज"
प्रिया तो ऐसा बोल कर फिर हंसने लगी पर राज बेचारा शरमा गया।।
" अच्छा राज सुनो तुमसे एक बात पूछना चाहते हैं "
" हाँ पूछो"
" सच तो बोलोगे ना??"
धड़कते दिल से राज ने कहा" बिल्कुल सच बोलेंगे।"
उसे लगा जाने क्या पूछने वाली है।असल में तो राज को खुद ही समझ नही आया था,कि इन कुछ महिनों के साथ में कब प्रिया उसके मन में रात दिन बजने लगी,हर काम उस से पूछ पूछ कर करने की ऐसी आदत हुई कि कई बार जिम के काम से भी कहीं जाना हो तो पहले प्रिया का अप्रूवल लगने लगा।।राज तो नही समझा कि ये क्या है लेकिन उसके आस ,
पास के लोगों जैसे प्रेम रानी यहाँ तक की पिंकी को भी समझ आने लगा कि राज को प्रिया भा गई है।।
" हम कैसे दिखते हैं,देखो एकदम सच बोलना ,तुम्हें तुम्हारे भगवान की कसम।"
भगवान की कसम सुनते ही भैय्या जी को बड़े हनुमान याद आ गये,दोनों हाथ कान से लगा कर मन ही मन भगवान से माफी मांग कर राज ने कहा__
" हम सच बोलें तो तुम बहुत ही प्यारी दिखती हो,मासूम सी ।। और होशियार तो बहुतै दिखती हो।।"
अभी राज अपनी बात पूरा भी नही किया था कि वेटर उनका ऑर्डर ले कर आ गया।।
" अरे कॉफ़ी मंगाए हो राज??"
" हाँ प्रिया ऐसे होटल में चाय नही पी जाती, इसिलिए हम कॉफ़ी मँगा लिये,जल्दी से कॉफ़ी पी लो,फिर तुम्हे किसी से मिलवाने ले कर जाना है।।"
दोनो कॉफ़ी पीकर निकलने लगे तब प्रिया ने राज को टेबल पर गलती से भूले हुए गुलाब की याद दिलाई,," किसके लिये लाये हो गुलाब"
" बताते हैं!! पहले हमारे साथ चलो।।"
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प्रिया को सिर्फ एक गुलाब देने की भी हिम्मत राज नही जुटा पाया,दोनो उसकी रॉयल एनफील्ड में बैठ कर बड़े हनुमान मन्दिर को निकल चले।।रास्ते भर इधर उधर की बातें बताती प्रिया ने अपने गणित के प्रोफेसर भास्कर सर की ढ़ेर सारी बातें राज को बताईं,और बताते बताते अंत में धीरे से अपने मन में उपजी प्यार की भावना को भी राज को बता दिया__
" देखो राज जाने अनजाने तुम हमारे बहुत ही ज्यादा अच्छे दोस्त बन गये हो!! निरमा से तो अब मिलना भी कम हो पाता है,उसे बताएंगे भी तो हमारी बात समझेगी नही,और ना ही कोई मदद करेगी,क्योंकि वो हमसे इतना प्यार करती है कि उसे हममे कोई कमी नज़र ही नही आती।। तुम भी हमारे बहुत सच्चे दोस्त बन गये हो,हो ना।।"
बहुत धीरे से राज ने कहा" हाँ हैं,बोलो क्या मदद चाहिये।"
" पहली बार जब भास्कर सर से मिले तभी हमें सर बहुत भा गये थे,,फिर उनका गणित पढ़ाने का स्टायल!!ऐसा पढाते हैं राज की पूछो मत!! नये नये समीकरण खुद तैय्यार कर देते हैं ।।तुम हमारी इतनी मदद बस कर दो कि वो भी हमारी तरफ ध्यान देने लगे,,मतलब समझ रहे हो,हम क्या कर रहे।।
बिल्कुल रुआंसा होकर राज ने कहा" नही समझे"
" अरे बुद्धू!! तुम खुद लड़के हो,तुम हमें बता सकते हो ना कि लड़कों को क्या पसंद होता है,मतलब कैसी लडकियों से बात करना पसंद है . अब और कितना खुल के बताएँ ।।"
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" हम्म समझ गये!! कर देंगे तुम्हारी मदद।।"
" थैंक यू राज ,हमे पता था,तुम बहुत अच्छे हो हमारी मदद ज़रूर करोगे,,अच्छा ये तो बताया ही नही तुमने कि ये गुलाब किसके लिये रखे हो।।"
" हनुमान जी के लिये,,वही चढाना है हमें,सुनो प्रिया तुम्हें घर जाने की देरी हो रही तो तुम्हे घड़ी चौक पे उतार देते हैं!! हमको हनुमान मन्दिर जाना है।।"
" नही ऐसी कोई देर नही हो रही ,तुम्हारे साथ ही तो हैं,आज हमारे पतले होने की पार्टी जो है,पर तुम तो बस कॉफ़ी में निपटा दिये।।"
" अरे तुम वो भास्कर भास्कर किये जा रही थी तो हमे कुछ सूझा ही नही,बस कॉफ़ी मँगा लिये।।
" चलो कोई बात नही!! अभी हमे चार पांच किलो और कम करना है,उसके बाद जी भर के खायेंगे, अच्छा सुनो !! तुम मिलवाने किससे वाले हो।।'
" अरे किसी से नही!! ऐसे ही कह दिये रहे!! हमको मन्दिर जाना था।।हम बचपन से जब भी परेशान होते थे या बहुत खुश होते थे तब बड़े हनुमान मन्दिर ही जाया करते थे,उन्हीं से अपना सारा सुख दुख साझा करते रहे हैं,आज भी तुम्हें वहीं ले जाने की सोचे थे।"
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" अरे वाह!! चलो हम भी मिल लेंगे अपने दोस्त के बाल सखा से।। पर सुनो भूल मत जाना राज, पटला होने में इतनी मदद किये हो अब इस मामले में भी थोड़ी मदद कर दो,और किसी से कहना नही,समझे।।"
" हाँ मेरी माँ किसी से नही कहेंगे। और कल से तुम्हारी एक हफ्ते की एक और ट्रेनिंग शुरु कर देंगे,,उसके बाद वो भास्कर की क्या औकात तुम्हारे सामने।।भास्कर को मारो गोली सलमान खान भी पट जायेगा।।"
" अरे अरे अरे गोली क्यों मार रहे हो भई !! भास्कर सर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ,रही बात सलमान की तो हमें सलमान खान पसंद ही नही .
बातों ही बातों में बड़े हनुमान मन्दिर पहुंच कर दोनों ने दर्शन किये,और सेंतराम के यहाँ से आलू टिक्की खा कर और पैक करा कर दोनो अपने अपने घर वापस आ गये।।