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Romance शादी का मन्त्र

" अरे तुम खड़े क्यों हो राज बैठो ना।"

" क्या कर रही थी अब तक " अपनी कुर्सी पर बैठते हुए राज ने सवाल किया

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" कुछ नही ,बस मेन्यू देख रहे थे कि तुम्हारे लायक क्या हेल्दी खाने को मिल सकता है।"

" अरे हमारे चक्कर में ना पड़ो,जो तुम्हें पसंद हो वो मँगा लो।।" राज के ऐसा बोलते ही प्रिया मुस्कुरा पड़ी

" अरे राज अब हमें भी तुम्हारी तरह मूँग और चना ही भाने लगा है,पता है एक दिन तो अम्मा बेचारी रो पड़ी,बुआ से बोलती हैं" लगता है हमार प्रिया को जिन ऊन पकड़ लिया है,आज कल खाने को देखती भी नही,सिर्फ फलाहार करे है छोरी जिज्जी।" मुझे तो ऐसी हँसी आई,मैनें कहा अम्मा उस जिन्न का एक नाम भी है " राज"

प्रिया तो ऐसा बोल कर फिर हंसने लगी पर राज बेचारा शरमा गया।।

" अच्छा राज सुनो तुमसे एक बात पूछना चाहते हैं "

" हाँ पूछो"

" सच तो बोलोगे ना??"

धड़कते दिल से राज ने कहा" बिल्कुल सच बोलेंगे।"

उसे लगा जाने क्या पूछने वाली है।असल में तो राज को खुद ही समझ नही आया था,कि इन कुछ महिनों के साथ में कब प्रिया उसके मन में रात दिन बजने लगी,हर काम उस से पूछ पूछ कर करने की ऐसी आदत हुई कि कई बार जिम के काम से भी कहीं जाना हो तो पहले प्रिया का अप्रूवल लगने लगा।।राज तो नही समझा कि ये क्या है लेकिन उसके आस ,

पास के लोगों जैसे प्रेम रानी यहाँ तक की पिंकी को भी समझ आने लगा कि राज को प्रिया भा गई है।।

" हम कैसे दिखते हैं,देखो एकदम सच बोलना ,तुम्हें तुम्हारे भगवान की कसम।"

भगवान की कसम सुनते ही भैय्या जी को बड़े हनुमान याद आ गये,दोनों हाथ कान से लगा कर मन ही मन भगवान से माफी मांग कर राज ने कहा__

" हम सच बोलें तो तुम बहुत ही प्यारी दिखती हो,मासूम सी ।। और होशियार तो बहुतै दिखती हो।।"

अभी राज अपनी बात पूरा भी नही किया था कि वेटर उनका ऑर्डर ले कर आ गया।।

" अरे कॉफ़ी मंगाए हो राज??"

" हाँ प्रिया ऐसे होटल में चाय नही पी जाती, इसिलिए हम कॉफ़ी मँगा लिये,जल्दी से कॉफ़ी पी लो,फिर तुम्हे किसी से मिलवाने ले कर जाना है।।"

दोनो कॉफ़ी पीकर निकलने लगे तब प्रिया ने राज को टेबल पर गलती से भूले हुए गुलाब की याद दिलाई,," किसके लिये लाये हो गुलाब"

" बताते हैं!! पहले हमारे साथ चलो।।"

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प्रिया को सिर्फ एक गुलाब देने की भी हिम्मत राज नही जुटा पाया,दोनो उसकी रॉयल एनफील्ड में बैठ कर बड़े हनुमान मन्दिर को निकल चले।।रास्ते भर इधर उधर की बातें बताती प्रिया ने अपने गणित के प्रोफेसर भास्कर सर की ढ़ेर सारी बातें राज को बताईं,और बताते बताते अंत में धीरे से अपने मन में उपजी प्यार की भावना को भी राज को बता दिया__

" देखो राज जाने अनजाने तुम हमारे बहुत ही ज्यादा अच्छे दोस्त बन गये हो!! निरमा से तो अब मिलना भी कम हो पाता है,उसे बताएंगे भी तो हमारी बात समझेगी नही,और ना ही कोई मदद करेगी,क्योंकि वो हमसे इतना प्यार करती है कि उसे हममे कोई कमी नज़र ही नही आती।। तुम भी हमारे बहुत सच्चे दोस्त बन गये हो,हो ना।।"

बहुत धीरे से राज ने कहा" हाँ हैं,बोलो क्या मदद चाहिये।"

" पहली बार जब भास्कर सर से मिले तभी हमें सर बहुत भा गये थे,,फिर उनका गणित पढ़ाने का स्टायल!!ऐसा पढाते हैं राज की पूछो मत!! नये नये समीकरण खुद तैय्यार कर देते हैं ।।तुम हमारी इतनी मदद बस कर दो कि वो भी हमारी तरफ ध्यान देने लगे,,मतलब समझ रहे हो,हम क्या कर रहे।।

बिल्कुल रुआंसा होकर राज ने कहा" नही समझे"

" अरे बुद्धू!! तुम खुद लड़के हो,तुम हमें बता सकते हो ना कि लड़कों को क्या पसंद होता है,मतलब कैसी लडकियों से बात करना पसंद है . अब और कितना खुल के बताएँ ।।"

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" हम्म समझ गये!! कर देंगे तुम्हारी मदद।।"

" थैंक यू राज ,हमे पता था,तुम बहुत अच्छे हो हमारी मदद ज़रूर करोगे,,अच्छा ये तो बताया ही नही तुमने कि ये गुलाब किसके लिये रखे हो।।"

" हनुमान जी के लिये,,वही चढाना है हमें,सुनो प्रिया तुम्हें घर जाने की देरी हो रही तो तुम्हे घड़ी चौक पे उतार देते हैं!! हमको हनुमान मन्दिर जाना है।।"

" नही ऐसी कोई देर नही हो रही ,तुम्हारे साथ ही तो हैं,आज हमारे पतले होने की पार्टी जो है,पर तुम तो बस कॉफ़ी में निपटा दिये।।"

" अरे तुम वो भास्कर भास्कर किये जा रही थी तो हमे कुछ सूझा ही नही,बस कॉफ़ी मँगा लिये।।

" चलो कोई बात नही!! अभी हमे चार पांच किलो और कम करना है,उसके बाद जी भर के खायेंगे, अच्छा सुनो !! तुम मिलवाने किससे वाले हो।।'

" अरे किसी से नही!! ऐसे ही कह दिये रहे!! हमको मन्दिर जाना था।।हम बचपन से जब भी परेशान होते थे या बहुत खुश होते थे तब बड़े हनुमान मन्दिर ही जाया करते थे,उन्हीं से अपना सारा सुख दुख साझा करते रहे हैं,आज भी तुम्हें वहीं ले जाने की सोचे थे।"

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" अरे वाह!! चलो हम भी मिल लेंगे अपने दोस्त के बाल सखा से।। पर सुनो भूल मत जाना राज, पटला होने में इतनी मदद किये हो अब इस मामले में भी थोड़ी मदद कर दो,और किसी से कहना नही,समझे।।"

" हाँ मेरी माँ किसी से नही कहेंगे। और कल से तुम्हारी एक हफ्ते की एक और ट्रेनिंग शुरु कर देंगे,,उसके बाद वो भास्कर की क्या औकात तुम्हारे सामने।।भास्कर को मारो गोली सलमान खान भी पट जायेगा।।"

" अरे अरे अरे गोली क्यों मार रहे हो भई !! भास्कर सर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ,रही बात सलमान की तो हमें सलमान खान पसंद ही नही .

बातों ही बातों में बड़े हनुमान मन्दिर पहुंच कर दोनों ने दर्शन किये,और सेंतराम के यहाँ से आलू टिक्की खा कर और पैक करा कर दोनो अपने अपने घर वापस आ गये।।
 
"पहला पहला प्यार है,,पहली पहली बार है,

जान के भी अनजाना कैसा मेरा यार है।।"

" अबे कौन बजाया बे! बदलो ई पहला पहला प्यार को!!"

" तो का लगायें भैय्या जी।" राज की दहाड़ सुनते ही प्रिंस लपक पड़ा ।।जिम में लोगों का आवागमन शुरु हो चुका था,ऐसे में प्रिंस वर्कआउट के लिये गाने सेलेक्ट कर रहा था।।

" अब ये भी हमी बताएँ!! तुम्हारी अकल में ना बिल्कुले पत्थर पड़े हैं प्रिंस।।यार कैसे बनिये हो तुम ,, हमरी अम्मा तो कहती हैं बनियों से जादा दिमाग किसी के पास नई होता,,पर तुम तो बिल्कुल बमपिलाट हो।।"

प्रिंस सदा से प्रिया का तरफदार था,इसिलिए आजकल प्रिंस और प्रेम में ज़रा तनातनी रहने लगी थी।।राज भैय्या की बात सुन प्रेम चहक उठा __

" भैय्या जी आप हम ठहरे बामण के छोकरे,हमारा तो जन्म ही होता है अपने बाप की चप्पल से पिटने के लिये।।

ऑफ़िस में बाऊजी को उनका बॉस चमकाया आके हमको धुन देंगे,,गांव में पड़ोसी से जमीन का चिल्ला चिल्ली हुआ आके हमको सून्त देंगे,घर में बहन की शादी नही लग रही पिटाई हमारी होगी,और तो और अम्मा ने लौकी बना दी तब भी हमी धरे जातें हैं ।।।

ई तो पुन्यात्मा हैं बनिया घर में पैदा हुआ है, जैसें इनके बाप दादा सोना सहलाते हैं,ऐसे ही फूल की छड़ी से अपना लड़का बच्चा को भी सुधारते हैं, तो भैय्या जी इनको किसी का डर है ये नई,काहे दिमाग दौड़ाएंगे।।"

" अच्छा बे तुमको बहुत बड़ी बड़ी बात सूझ रही हैं,, देख रहें हैं आजकल कुछ ज्यादा ही टर्रा रये हो।"

प्रिंस राज की घुड़की सुन चुपचाप वहाँ से सटक लिया,।। उसे असल में भैय्या जी के दिल का हाल मालूम नही था,उसने जाकर दूसरा रोमैंटिक ट्रैक बजा दिया__

' सदियाँ समा गईं इस एक पल में,दिखने लगा सुकून दुनिया की हलचल में . '

तभी हल्के से दरवाजा खुला,हमेशा सलवार और कुर्ती पे चोटी बना के आने वाली प्रिया के सुर आज कुछ बदले से थे।।

ट्रैक पैंट पे टी शर्ट पहनी प्रिया ने खुले बालों की उँची सी पोनीटेल बना रखी थी।।

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प्रिया के प्रवेश करते ही सब उसकी तरफ देखने लगे . राज भैय्या ने सिर्फ एक उड़ती नज़र डाली और वापस अपने रजिस्टर में मिलाए हुए नामों को वापस मिलाने लगे।।प्रिंस प्रिया के इस परिवर्तन पे अति प्रसन्न हुआ और उसे बधाई देने कूद कर उस तक पहुंच गया,थोड़ी देर के लिये प्रेम भी चकरा गया।।

" वाह प्रिया तुम तो बहुत-बहुत बहुत इस्मार्ट लग रही हो,।"

प्रिया मुस्कुरा कर राज की तरफ देखने लगी,इस उम्मीद से कि राज भी शायद उसके नवेले रूप पे कोई टिप्पणी देगा,पर राज ने सर उठा कर भी नही देखा।।प्रिया चुपचाप अपने ट्रेड मिल पे चली गई ।

लगभग 10 मिनट बीत जाने पर भी जब राज एक बार भी प्रिया का हाल चाल पूछने नही आया तो प्रिया ने वहीं से हांक लगाई__

" आज क्या स्पीड रखना है हमें,,कुछ बताओगे भी या ऐसे ही बस भागते रहें ।"

6km/hrs पे आकर राज ने ट्रेड मिल सेट किया और वापस जाने लगा।।उसे ऐसे वापस जाते देख प्रिया ने प्रिंस से इशारे से पूछा कि ' आज क्या हो गया राज को?"जैसे इशारे मे उसने पूछा वैसे कंधे ऊपर कर प्रिंस ने जवाब दे दिया कि हमे नही पता।

" कब तक चुप बैठें अब तो कुछ है बोलना,

कुछ तुम बोलो कुछ हम बोलें ओ ढोलना।।"

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जैसे ही गाने के बोल जिम में गूंजे राज ने सर उठा के प्रिंस को देखा,और बस उतने ही मे__" बदल रहें हैं भैय्या जी,बस अभी बदले।।"

राज की घूरती आंखों को देख प्रिंस हडबडी में म्युसिक सिस्टम तक भागा,पर तभी प्रिया के बोल गूंजे__

" ए प्रिंस रुको!! काहे बदल रहे,हमें अच्छा लगता है ये गाना।।"

" ऊ भैय्या जी को नही ना पसंद इसिलिए बदले दे रहे।"

" अबे हम कब बोले तुमको बदलने।" राज की घुड़की से घबराया प्रिंस, मुहँ लटकाये बाहर निकल गया,प्रिया राज के पास आ कर बैठ गई ।।

" क्या हुआ राज?? कुछ मूड ऑफ़ लग रहा तुम्हारा, घर पे कुछ हुआ क्या।।"

" इस बार भैय्या जी के बाऊ जी ने कसम ले ली है कि अबकी बार अगर राज भैय्या पास नही हुए तो इनकी हत्या कर देंगे या खुद चूहा मार दवा पी के आत्महत्या कर लेंगे।।"लल्लन बोला

प्रिया ने आंखे तरेर के लल्लन को देखा फिर पूरी सहानुभूति से राज को निहारने लगी।।

" अरे इसमें इत्ता परेशान होने की क्या बात,इस बार राज सिर्फ पास नही होंगे बल्कि बोर्ड एग्ज़ाम टॉप भी करेंगे,,हम ,

पर भरोसा रखो।।"

प्रिया के ऐसा बोलते ही प्रेम भी उछल पड़ा

" हम भी यही कह रहे,भैय्या जी क्यों परेशान हो रहे, अरे पास हो गये तो ठीक वर्ना हम पूरे शहर से चूहा मार दवा खरीद कर यहाँ से बहुत दूर ले जाकर फेंक आयेंगे।।जब बाऊजी को दवा मिलेगा ही नही तो का खा कर मरेंगे।।

राज ने खा जाने वाली नजरों से प्रेम को देखा और उठ कर अपने में ऑफिस में चल दिया,उसके पीछे पीछे प्रिया भी भागी,जाते जाते प्रिंस को दो कप चाय लाने कहती गई ।।

" हमें तो बताओ हुआ क्या है राज?? कल तो बड़े खुश लग रहे थे, हनुमान जी ने ऐसा क्या मन्त्र फूंक दिया कान मे जो उदासे बैठे हो।"

" काहे परेशान कर रही हो,हमने कहा ना कोई बात नही।।"

" जब कोई बात नही ,तो हमें देखा क्यों नही,?? , हमारी नई ड्रेस पे कोई टीका टिप्पणी नही,,देखो तुम्हारे जैसे हमने भी रीबॉक के जूते पहने हैं, सुबह से तुम्हारे आगे पीछे घूम रहे,पर तुम तो जैसे इस दुनिया में हो ही नही,जाने कहाँ विचर रहे हो।।"

" थोड़ा सर मे दर्द था,और कुछ नही!! बस इसिलिए थोड़े चुप चाप बैठे थे।वैसे अच्छी लग रही हो तुम।।

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" थैंक यू!! अब बताओ कि हमारी ट्रेनिंग कबसे शुरु कर रहे,,भास्कर सर के बारे में बताया था ना तुम्हें ।।"

" देखो ट्रेनिंग का जहां तक बात है,हमने लड़की पटाने में कोई पी एच डी तो की नही है,जो हम तुम्हें कुछ सीखा सके बता सकें।।तुम तो हमसे जादा समझदार हो।"

" अरे बाबा कम से कम यही बता दो कि तुम किसी लड़की में क्या देख कर इंप्रेस होते हो।।"

" अब देखो ,जहां तक हमारा सवाल है,हमें ना सभ्य संस्कारी लड़कियाँ अच्छी लगती हैं,सीधी साधी, भोली सी,,अपने बड़ों का बात मानने वाली,कम बोलने वाली,झगड़ा फसाद ना करने वाली।।"

" बस बस हम समझ गये,,मतलब बिल्कुल हमारे अपोजिट लड़की तुम्हें पसंद है,है ना??"

" अरे नही बाबा!! वो मतलब नही है हमारा,,पर देखो एक बात सच्ची बताएँ,लड़कों को ना बहुत ही जादा ज्ञानी लड़की नही पसंद आती,उन्हें वही भाती है जिसके सामने वो जादा ज्ञानी दिखे,,वो लड़को की इस आदत को का कहते हैं . अरे वो बोलते हैं ना का .

" ईगो . मेल ईगो!! यही कहते हैं,यही बताना चाह रहे ना।।"

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" अब देखो सच्ची बात बताये तो तुम बुरा मान गई,अब यही थोड़ा घुमा फिरा के बोलते तो खुश हो जातीं।।अच्छा सुनो तुम कुछ बातों का ध्यान रखना अपने सर के सामने फिर देखना कैसे तुम्हारा जादू चलता है,,, पहला तो उनकी क्लास मे कभी उचक उचक के जवाब मत बताना , नही उन्हें लगेगा इसे पढ़ाने का कोनो ज़रूरत ही नही,,दूसरा जो सवाल बन रहा उसे भी उनसे पूछना क्योंकि इससे उन्हे अन्दर से खुशी मिलेगी कि तुम उनसे कम हो,और वो तुमसे कहीं जादा बुद्धिमान हैं।।

धीरे से दोस्ती हो जाये,तब उनका हर बात का ध्यान रखना,जैसे हमारा रखती थी,कि कौन सी आंटी फीस भरी है कौन सी नही।"

ये बोल कर राज हंसने लगा,प्रिया भी।।
 
" हर छोटी छोटी बात उनसे पूछ कर करना ,भले तुम करो अपने मन की पर सामने वाले को ये लगे कि तुम उनके हिसाब से सब कर रही हो,,बस यही दो चार बातें आजमा लो,तुम्हारा काम हो जायेगा।"

" काम हो जायेगा तो ऐसे बोल रहे जैसे तुम कोई गुरू घंटाल हो,,एक घन्टे में मोहिनी,सौतन से छुटकारा,प्रेमी को वश मे करें,वाले विज्ञापन के बाबा जी की तरह।।"

प्रिया की खिलखिलाने की आवाज़ सुन कर निश्चिंत हो प्रिंस चाय लिये अन्दर आया।।

" बताओ अब आये हो चाय लेकर,अब तो हमारा जाने का समय हो गया।।" प्रिया के ऐसा बोलते ही राज ने भी ,

खबर ली

"ये पहले गौ माता के पास जाकर दूध निकलवातें हैं,उसके बाद ऊ दूध लिये चमन के पास लाते हैं तब जाके कहीं चाय बनती है,,क्यों हो प्रभु,सही बोले ना हम।।"

" अरे का भईया जी,कतना तारीफ करेंगे हमारा, लिजिये चाय लिजिये आप दुनो,हम अपनी भी यहीं ले आये।।

अभी तीनों ने अपनी अपनी चाय पीनी शुरु की थी कि जिम में बाहर से किसी ने राज भैय्या के नाम की पुकार लगा दी,प्रिंस हम देखते हैं बोलकर बाहर दौड़ा, जितनी द्रुत गति से बाहर गया था वैसी ही त्वरित गति से अन्दर भागा__

" भैय्या जी ऊ भौजाई आई हैं ।।"

" हमरी तो शादी ही नही हुई,कहाँ से तुम्हारी भौजाई पैदा हो गई बे!! कुछ भी बकते हो।

" अरे भैय्या जी बड़की भौजाई आई हैं,उनके साथ एक और कोनो लड़की है।।"

राज भैय्या ने अपना एक हाथ हल्के से अपने माथे पर मारा_ " अरे यार !! हम भूल गये रहे,,आज भाभी की बहन को स्टेशन लेने जाना था . राज भैय्या की बात पूरी भी नही हो पाई थी कि दरवाज़ा खोल रुपा भाभी कमर पर हाथ टिकाये खड़ी हो गई।

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" काहे लल्ला जी,जब जाना ही नही रहा तो हमे पहले काहे नई बता दिये,,बेचारी रेखा स्टेसन में खड़े खड़े आधा घंटा बेट करी,तब बिचारी हमें फ़ोन करी और हम इसे लेने गये।।"

" काहे इत्ती अनपढ़ है कि अकेले रिक्सा में घर नही आ सकती।।" प्रेम ने धीरे से फुलजड़ी छोड़ी और प्रेम प्रिंस प्रिया खिलखिला पड़े

" का बोले तुम प्रेम" ।

" कुछ नही भौजी!! हम बोले तनिक बैठ जाओ,हम समोसा मँगा देते हैं,ए प्रिंस लगाओ यार लल्लन को फ़ोन लगाओ , कहाँ है आजकल??"

प्रेम की इस बात का सभी ने एक स्वर में समर्थन किया।।

रेखा राज में अपने होने वाले पति को देख रही थी, इसलिये उसके चेहरे पर लज्जा का अभिनय था, शर्म की लुनायी थी।।

राज अपने मन में त्रस्त था,उसके मन में कुछ समय पहले खिला प्रेम का फूल हवा पानी के अभाव में अकेला इधर उधर डोल रहा था,उसे जिस माली के स्नेह सिंचन की आवश्यकता थी,वो माली अवकाश ग्रहण कर दूसरे की बगिया संवारने में खुद को व्यस्त किये था।।

प्रिया रेखा को देख रही थी जो लगातार राज को ताड़ रही थी,,प्रिया राज भैय्या के चार्म से अपरिचित थी,ऐसा ,

नही था।।वो आये दिन ही जिम में आने वाली अनोखी अलबेली वारान्गनाओं के लटकों झटकों का कारण भली प्रकार समझती थी,पर रेखा की दृष्टी उसे चुभ गई ।।

"कहाँ है भई तुम्हारा समोसा?? इत्ती देर लगा दी,ए प्रेम ऊ लल्लन को फोन घुमाओ की तली मिर्ची भी हमारे लिये अलग से लेता आयेगा।।"

रूपा की इस बात पे राज ने फ़ोन लगाया__" भाभी औ कुछ मँगा दें,,जलेबी खाओगी??"

" जो मँगाना है जल्दी मँगा दो,,हम तो रेखा को लेके घर जा रहे थे,यही बोली कि राज हमे लेने कैसे नही आया,चलो दीदी देखे क्या कर रहा ,इसिलिए आ गये,बस चाय पी के निकल जायेंगे हम,,पूरा काम बिखरा पड़ा है,,हम ना करें तो इस घर का एक पत्ता ना हिले,,बहू नही नौकरानी हैं हम .

" अरे का भौजी,नौकरानी नही आप रानी हैं रानी!! कभी रूप देखी हैं अपना,,एकदम किसी रियासत की महारानी सी लगती हैं ।"प्रिंस की बात पर रूपा का बिगड़ा मूड संभल गया

" ऊ तो हम खानदानी रईस जो ठहरे।"भाभी की इस बात को सुन राज को हँसी आ गई,,वो कई बार अपनी माँ की बड़बड़ इस बाबत सुन चुका था,जब कभी घर पे सास बहु की महाभारत छिड़ती और रूपा अपने कोप भवन में प्रस्थान कर जाती तब पीछे से सासु माँ का रूपा के खानदान का जो ,

बखान शुरु होता " हूंह बड़ी आई रईस !! जैसे हम नई जानती कि इनके बाप मिट्टी का तेल ( क्रूड ऑयल) प्लाण्ट से चुरा चुरा के बेच बाच के तो रुपया जोड़े,किसके किसके हाथ पांव जोड़ के बकालत का डिग्री खरीदे,अब चार पैसा घर में आ गया तो बडे जमींदार बन रहे।" अम्मा की ये बात याद करके राज मुस्कुरा रहा था कि रेखा ने उससे सवाल कर दिया_

" ये लड़की कौन है राज?? जो आपके साथ खड़ी है?" किसी को ऐसे रूखे सवाल की अपेक्षा नही थी

" मैं प्रिया हूँ,यहाँ राज का जिम जॉइन किया हुआ है।।" प्रिया को पता था कि राज अपने पढ़ने वाली बात किसी को नही बताना चाहता था।।

" और हमारी टीचर जी भी,क्यों ठीक है ना प्रिया ।"

राज मुस्कुरा कर प्रिया को देखने लगा,,पर उसका इस तरह किसी और लड़की को देख कर मुस्कुराना दोनो बहनों को अन्दर तक भस्म कर गया।।अभी रूपा कुछ कहने ही जा रही थी कि दरवाजा खोल कर लल्लन समोसों की खुशबू से हवा को महकाते अन्दर आया।।

अन्दर आते ही सारा सामान सामने रखे टेबल पर रख उसने जैसे ही सर ऊपर किया उसकी नज़र रेखा पर पड़ी __" अरे शोना तुम?"

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" रोहित तुम?? तुम यहाँ कैसे?? रेखा ने लल्लन से सवाल किया,दोनो के सवाल सुन रूपा ने रेखा को घूर के देखा__" तुम दोनो एक दूजे को कैसे जानते हो,और ये तुम्हारा शोना नाम कब से पड़ गया रेखा।"

रूपा भाभी के अलावा वहाँ बैठे सभी लोगों को सब समझ आ चुका था,,प्रिंस ने धीरे से चुटकी ली__

" तो ई हैं हमरे लल्लन की शोना बाबु।""प्रिंस चुटकी ले और प्रेम चुप बैठा रहे,ये असम्भव था,अगला वार उसका हुआ_

" जी हाँ और दढ़ियल लल्लन हैं इनके बेबी।।।"

" तुम दोनो का खुसर फुसर कर रहे हो हैं??" हम देख रहे ,लल्ला जी के जिम में आजकल यारी दोस्ती की महफिल जादा सज रही,,ए रेखा जल्दी जल्दी ई समोसा ठूसो और घर चलो,घर पहुंच के जानेंगे तुमसे सब ।।"

प्रिया सर झुकाये अपनी हँसी रोकने के प्रयास में थी,कि राज ने सबसे पहले उसी के सामने समोसे बढ़ा दिये।

" पक्का बताओ हम खा लें,जब से तुमने मना किया , तबसे कचौड़ी और समोसा छुआ तक नही,, तीन महीने हो गये।।" हँसते हुए प्रिया ने कहा।।

" बहुत कहा मानती हो लल्ला जी का,,ऐसा भी क्या हो गया।" रूपा के इस सवाल का जवाब दिया प्रिंस ने

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" अरे भौजी ,,प्रिया तो कम ही बात मानती है भैय्या जी की। पर भैय्या जी तो हर काम प्रिया के मन का ही करते हैं, हम पे भरोसा ना हो तो पूछ लो भैय्या जी से।।" प्रिंस के बौड़मपने पे प्रेम ज़ोर से हंसने लगा और उसने आगे बढ़ कर बात संभाल ली__

" अरे आप लोग पहिले समोसा तो खाईये,ऊ भी चीख चीख कर कह रहा,हमरे ठन्डे होने से पहले हमे खा लो।"
 
रूपा रेखा को लेकर जब जिम की सीढिय़ां उतरने लगी,तब उसे कार में बैठा कर रेखा दो मिनट में आई कह कर वापस जिम में घुस गई __

" रोहित सुनो!! तुम से कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी है,घर से फ़ोन नही कर पायेंगे,दीदी हमारे सर पे सवार रहेगी,,, तुम शाम को यहीं जिम मे हमसे मिलना,,हम किसी बहाने यहाँ आ जायेंगे,समझे।।"

" हाँ हम आ जायेंगे,शाम को 5 बजे जिम खुलेगा, आज प्रिंस से चाबी हम ले जायेंगे,तुम समय से आ जाना बस।।"

रेखा लल्लन को बाय बोल कर बाहर निकल गई, हल्की सी मुस्कान के साथ जैसे ही लल्लन पलटा सांमने राज और बाकी लोगों को खड़ा देख हडबडा गया।।

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" तो ई है तुम्हरी नैकी जिसके लिये ' चदरिया झिनी रे झिनी ' सुना सुना के हमारे कान फाड़ दिये तुम?"

लल्लन नीचे सिर किये अपने बालों पे हाथ फिराता शर्माता खड़ा रहा।।

सभी मुस्कुराने हंसने खिलखिलाने लगे तभी राज को जैसे कुछ याद आया_ " अबे लल्लन तुम तो सूर्यवंसी लिखते हो ना।।अबे गज़ब कर दिये गुरू,,अब फिर पिंकी औ रतन वाला किस्सा दोहराना पड़ेगा।।"

" तो क्या हुआ,तुम हो ना सबके तारणहार!! तुम्हारे रहते किसी का बुरा हो सकता है,,,कभी कभी तो हमे लगता है,अगर तुम नही होते तो इन सब का क्या होता।।" प्रिया की बात सुन राज के मुहँ से निकल गया__" और तुम्हारा??"

" हाँ सही कह रहे,हमारा भी!! हम भी तो तुम्हारे कारण ही ऐसे दिखने लगे।।प्रिया खिल्खिलाती हुई वहाँ से बाहर चली गई,और बाकी सारे के सारे लल्लन को घसीटते हुए उसपे लात घूंसे चलाते हुए उसकी राम कथा सुनने लगे।।
 
रूपा की बहन रेखा को आये पूरे दो दिन बीत गये, अपनी बड़ी बहन की चाक चौबंद चौकीदारी में रेखा दुबारा राज की जिम का रुख नही कर पाई।।

मिलने की आस जगा कर भी जब रेखा मिलने नही आई तो लल्लन की बेचैनी घड़ी की हर टिक टिक के साथ बढ़ती चली गई,अब तो राज प्रिंस और प्रेम सभी को उसके बारे में पता था,सभी उसके लटके हुए चेहरे का कारण जानते थे,इसलिये उसे उस समय किसी ने नही छेड़ा ।।

राज ने घर जाते समय उसे साथ चलने की पेशकश भी की जिसे ठुकरा कर सबसे अंत मे जिम का ताला लगा कर बेचारा अपने घर को चल दिया।।

लल्लन को नही पता था कि घर पे एक सरप्राइज़ उसका इन्तजार कर रहा था।।

लल्लन के पिता और भाई की अफसरी ने उसके घर को एक अलग अदब और शिष्टाचार में रंग दिया था, घर पे सभी के लिये पढ़ना लिखना सांस लेने जितना महत्वपूर्ण था,इसिलिए लल्लन भले ही राज की चंडाल चौकड़ी का हिस्सा था पर उन के साथ घूमते फिरते भी उसने अपनी पढ़ाई का हरजा नही होने दिया था,,वो दिल्ली भी किसी सरकारी नौकरी के सिलसिले में ही गया था।।

थके हुए तन और बुझे हुए मन से जब लल्लन ने घर में प्रवेश किया,तो लगा जैसे सभी उसी का इन्तजार कर रहे थे।।उसके घर मे घुसते ही आगे बढ़कर उसकी दीदी ने उसके मुहँ में कलाकन्द ठूंस दिया,,बेचारा इस हमले के लिये तैयार नही था,इतने बड़े टुकड़े को जब तक गालों के दोनों तरफ सेट करता तब तक माँ हाथ में गुलाब जामुन की कटोरी लिये खड़ी हो गई ।।

मुहँ में गुलाब जामुन की जगह बनाते हुए सर ऊपर नीचे 'रुको माँ जरा सबर करो'की मुद्रा में हिलाते हुए लल्लन ने पुछा __" आखिर हुआ क्या है?? काहे की मिठाई खवा रहे।"

" रेल्वे का जो एग्ज़ाम तुम दिये रहे,उसका रिजल्ट आ गया है,,तुम पास हो गये हो।"

लल्लन के बड़े भाई ने आगे बढ़ उसकी पीठ थपथपा के कहा।।

" बस हमारी आखिरी चिंता भी दूर हुई,क्यों लता देखी खुश हो अब,,तुम्हारे तीनो बच्चे सरकारी अफसर बन गये,,भई जब सरकार हमें मौका दे रही तो हम काहे लाभ ना उठायें,,बहुत बढ़िया लल्लन,आज हमारा सब चिंता दूर हो गया,,बस अब तुम्हारे दीदी और भैय्या का शादी हो जाये तो एक बार तुम्हारी अम्मा को बद्रीनाथ ले जायेंगे।।"

लल्लन का लटका चेहरा खिल उठा,आखिर उसे भी अपने बड़े भाई और दीदी जैसे नौकरी मिल ही गई,, उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई जिसका परिणाम ये हुआ कि बिना ,

किसी डर के लल्लन ने रेखा को ये खुशखबरी देने फोन लगा दिया__

" हेलो शो . ,रेखा!!"

" तुम कौन बोल रहे??"

" भाभी जी चरण स्पर्श!! हम लल्लन बोल रहे।"

" बोलो"

रूपा की आवाज़ सुन लल्लन के प्यार का भूत भाग कर वापस बरगद पर लटक गया,वो जब तक हिन्दी वर्णमाला का जाप करना शुरु करता' अ ओ . ' तब तक में रेखा ने आकर अपना फ़ोन जिज्जी के हाथ से झपट लिया_ तुमको किचन में तुम्हारी मदर इन लॉ बुला रही हैं "

और कमरे में भागी" हाँ!! बोलो हम हैं।"

" थैंक गॉड!! तुम्हारी आवाज़ तो सुनने को मिली।। दो दिन से तुम्हारे बताये टाईम पर रस्ता देख रहे,जिम काहे नही आई।।"

" अरे क्या बताऊँ,मेरी दीदी के अन्दर हिटलर की आत्मा आ गई है,दिन भर तानाशाही,,मेरा फोन भी उन्हीं की निगरानी में रहता है,,कैसे करती फोन??

रेखा अभी भी धर्मसंकट में थी,,लुक्स और घर बार के हिसाब से राज का पलड़ा ही भारी पड़ रहा था, पर वो जैसी अन्ग्रेज ,

तबीयत की थी उसपे उसे रोहित का साथ भी भा जाता था।।।उसे इस बात पर भगवान से थोड़ी रुष्टता थी,कि क्यों भोले भंडारी उसे सही राह नही दिखा देते।।इसिलिए उसने अपने स्वयं के विवाह के लिये सोलह सोमवार व्रत करने का आज सुबह ही निश्चय किया था।।

" अच्छा शोना!! तुम्हे पता है हमारे लिये कितनी लकी हो तुम! देखो तुम हमारे शहर आई,और हमारा रेल्वे का जोइनींग लेटर भी आ गया,,हमारी नौकरी लग गई बाबु।""

सोलह सोमवार करने का संकल्प फलीभूत हुआ, रेखा को अपनी डगर दिख गयी,अपनी मंजिल मिल गई,अपना शुद्ध सात्विक प्रेम उसने चुन लिया।।

" हाय सच्ची!! मजाक तो नही कर रहे?? लव यू बाबु,,तुम्हें पता है तुम्हारी नौकरी के लिये भी व्रत करने का सोच रही थी मैं,अच्छा सुनो,अभी फोन रखती हूँ,कल कैसे भी कर के जिम आ जाऊंगी ,फिर बात करते हैं ।"

रेखा ने हमेशा जागती आंखों से एक सुन्दर सपना देखा था,कि एक सजीले नौकरी पेशा लड़के से उसका ब्याह हो जाये,और वो अपने पति के साथ उसकी नौकरी वाले शहर में अपना छोटा सा घोंसला सजाये,जहां ना सास की चिकचिक हो,ना ससुर का दबदबा,,ना ननंद के तेवर हों ना जेठानी के नखरे।।।

अब लल्लन की नौकरी लग जाने से रेखा को उसका सलोना सपना पूरा होता दिख रहा था,,भले ही राज हैंड्सम ,

था,खानदानी रईस था,पर था तो सयुंक्त परिवार की कड़ी,,जो कभी किसी जनम में अपनी अम्मा का आंचल छोड़ कर बीवी को ले अलग घर नही बसा सकता था,,बस रेखा ने चुन, लिया . रोहित ही है जो उसका जीवनसाथी बनने के सर्वथा उपयुक्त है!!

अगले दिन सुबह रसोई का चाय नाश्ता निपटा के रूपा जब अपने कमरे में बैठी फेस बुक पे सुबह के नाश्ते आलू पूरी की फोटो अपलोड कर रही थी, तब चुपके से रेखा अपना फोन लिये निकल पड़ीं ।।

जिम में लल्लन सभी का मुहँ मीठा करा रहा था।।

रेखा को बाहर दरवाजे के पास ही प्रिंस और प्रेम मिल गये__" हाय डॉग्स!! वेयर इस रोहित??"

" अन्दर है।" गुस्से मे तमक के प्रेम ने जवाब दिया।

अपनी सैंडल चटकाती रेखा भीतर चली गई

" इतना गुस्सा मे काहे जवाब दिये,कित्ता प्यार से पुछि रही बेचारी।।"

" इत्ता प्यार से शराफत से हम दोनों को कुत्ता बोली रही समझे!!"प्रेम के जवाब को सुन कर भी प्रिंस को भरोसा ना हुआ__" जो भी बोलो पर अन्ग्रेजी मे गाली भी बड़ी सुहानी लगती है,,नई??"

रेखा के अन्दर बचपन से फिल्मी कीड़ा था,,वो भीतर जाते ,

ही लल्लन के गले से लग गई,जिम में उपस्थित सभी की आंखें चौडी हो गई ।।

" आई रे आई रे,ले मै आई हूँ तेरे लिये,तोड़ा रे छोड़ा रे हर बंधन वो प्यार के लिये"

जिम में बजने वाला गाना अचानक नायक और नायिका के लिये बैकग्राउंड म्युसिक बन गया .

प्रिया ने धीमे से जाकर दोनो को आवाज़ दी और उन्हे अन्दर ऑफिस में चलने को कहा

ऑफिस के अन्दर राज प्रिया,प्रेम प्रिंस लल्लन और रेखा आगे क्या करना है पर सोच विचार में डूबे थे।।

" रोहित लिसन!! मेरे घर वाले कभी तुमसे शादी के लिये राज़ी नही होंगे,हमें कुछ और सोचना पड़ेगा।।"

" हाँ वैसे रेखा ठीके कह रही,हम भी तो जानते हैं,भाभी के बाऊजी बड़े जब्बर हैं,कभी ई सादी ना होने देंगे।।"

" तो अब क्या करना है शोना,,तुम जो बोलोगी हम सब मानने को तैयार हैं,वैसे हमारे घर में कोई दिक्कत नही होगी,बस एक ही छोटी सी परेशानी है,अभी तक हमारे बड़े भाई और दीदी की भी शादी नही हुई,तो बस ये हो सकता की अम्मा बाबूजी कम से कम दीदी की शादी तक हमको रुकने बोले।"

,

" पर हमारे पापा उतना नही रुकेंगे,,वो तो अभी पिंकी की इन्गेजमेंट रतन से हो गई,तो थोड़ा चुप बैठे हैं,पर ज्यादा से ज्यादा एक महीना ,उसके बाद हमारी शादी कर ही देंगे।।"

"तो बताओ क्या करें फिर।।"

" हमें मन्दिर में शादी करनी पड़ेगी रोहित,बाद में घर जाकर घर वालों का आशीर्वाद ले लेंगे, लेकिन अगर अभी जब तक हम दीदी के घर पे हैं हमारी शादी नही हुई तो समझ लेना कि हम तुम्हारा ब्यूटीफुल पास्ट बन जायेंगे,,फिर आ जाना हमारी शादी की दावत खाने।।"
 
लल्लन से ज्यादा हडबडी इस शादी की राज को थी,क्योंकि उसे भी पता था अगर रेखा की लल्लन से शादी नही हुई तो ये ढोल उसके गले ही बन्धेगा ।।

" हाँ रेखा एकदम ठीक कह रही,हम तो कहतें हैं कल ही शादी कर लो,हम सब तैयारी कर लेंगे,तुम दोनो बस समय से आ जाना।" राज की बात सुन प्रिंस ने अपनी बात रखी__

" भैय्या जी ठीके कह रहे,कल हम कोर्ट पहुंच जायेंगे,वहीं बकील साहब के सामने साईन उन करके माला बदल लेना।"

" काहे प्रिंस!! क्राईम पैट्रोल बिल्कुल नही देखते हो क्या?? ऐसे कोर्ट में शादी के लिये ,एक महीना पहले अर्जी देना पड़ता है,वो अर्जी का आवेदन का फोटो अखबार में छपता ,

है,अगर कोई दावा आपत्ति करना चाहे तो कोर्ट जा कर कर सकता है,फिर एक महीना बाद शादी की डेट मिलती है जिसमे शादी होती है।।"

" बन्सी हम भी देखते थे पहले,,हमको तो एकदम झन्नाट लत लग गया था क्राईम पैट्रोल का, हम भी वैसे ' सहाय' जैसे खुदरे पुलिस बनने का सपना भी देखे लगे थे,,पर हमारे साथ का होता था जानती हो,घर पे कूकर का सिटी भी बजता था तो हम चौंक जाते थे,घर पे किसी काम के लिये कोई मिस्त्री मास्टर आया तो हम उसको अपनी पैनी नज़र से घूरते रहते थे,,हमारे बाऊजी की सुनारी है,बेचारे जब चावड़ी निकलते हम रोज पीछे से टोकते ' बाऊजी सतर्क रहना,सुरक्षित रहना।'

हमको तो सपने भी क्राईम पैट्रोले के आने लगे, छत पे खड़े हों और कहीं आजू बाजू की छत पर एक तरफ शुक्लाईन भाभी खड़ी हो,और दुसरी छत पे तिवारी भैय्या तो हमको लगता ज़रूर ई दोनों का कोई चक्कर चल रहा है,हमारे दिमाग में जासूसी घुस गया,अम्मा अलग चिल्लाती की उनका ये रिस्ता का कहलाता है छूटा जा रहा है,पूरा एक महीना निकल गया,उसके बाद एक दिन अम्मा हमारे हाथ से रिमोटवा को छीन डारी,और अपना सीरियल लगा ली,पर अम्मा के साथ गज़ब हो गया,उनको बेचारी को एक ही एपिसोड पूरा एक महीना झेलने का आदत था,पर उसी एक महीना में जाने का उलट फेर हुआ कि 'ई रिस्ता का कहलाता है' के सारे किरदार ही बदल गये,असली हीरोइन छोड़ दी रही सीरियल, और उसके लड़िका बच्चा बड़े हुई गये,,अम्मा अपन सिर धुन ली,बोली ' अब हमको नई देखना ई ,

सीरियल,ये कोई तरीका होता है ?? इत्ता फास्ट भगायेंगे तो सिरियल नही ये लोग फिलिम बनायेंगे। और उसके बाद अम्मा ओ सीरियले देखना बन्द कर दी।।"

" फिर अब?? अब तुम्हारी अम्मा टी वी नही देखती?" प्रिया के सवाल पर प्रिंस ने जवाब दिया

" देखती है ना!! पर अब अम्मा रिस्ता उस्ता नही देखती अब अम्मा ' सावधान इंडिया ' देखती है।"

" ये तुम दोनो का अति महत्वपूर्ण टी वी परिचर्चा समाप्त हो गया हो,तो लल्लन और बहन जी का शादी डॉट कॉम पे विचार किया जाये।" प्रेम की इस बात पे राज ने भी जल्दबाजी दिखानी शुरु की, उसे भी रेखा के साथ सम्भावित विवाह से बचने का यही एकमात्र उपाय दिखा ।।

" आई एम नॉट ए बहन जी,,कॉल मी रेखा ओनली, बोलो रोहित क्या करना है आगे।"

" करना क्या है,शादी करना है और क्या?? ऐसा करते हैं,लल्लन कल सुबह 9 बजे तुम गौरी शंकर मन्दिर पहुंच जाना, प्रिंस तुम बड़े तिवारी पण्डित को लेकर पहुंचना,और प्रेम फूल माला और बाकी पूजन सामग्री ले आयेगा,हम रेखा को लेकर आ जायेंगे, जितनी जल्दी सब निपट जाये उतना अच्छा।।

' प्रिया कल तुम कॉलेज मत जाना,हम रेखा को लेकर ,

तुम्हारे घर ही आयेंगे,तुम्हारे यहाँ ये शादी के लिये तैयार हो जायेगी और फिर वहाँ से तुम दोनो को लेकर हम मन्दिर चले जायेंगे।क्यों ठीक है ना??"

" ठीक है राज,तो ऐसा करते हैं,हम अभी रेखा को साथ लिये बाज़ार निकल जाते हैं,कल पहनने के लिये रेखा को कुछ शॉपिंग भी तो करना होगा।"

हाय रि किस्मत . कहाँ 3 महीने की ब्राइडल सिटिंग,कहाँ हर एक फंक्शन में पहने जाने वाली अलग ड्रेस से मैचींग सैंडल और ज्वेलरी और कहाँ ये धूम फटाक शादी .

पर इसका भी मज़ा है,,थोड़ा एडवेंचर तो इसमें भी है,रेखा ने अपने मन को समझा लिया,अरे हम आपके हैं कौन की माधुरी नही बन पाये तो क्या,दिल की माधुरी तो बन ही सकते हैं,उसमें भी तो आमिर खान के साथ भागना ही पड़ता है आखिर।।
 
राज के साथ प्रिया और रेखा ज़रूरी सामान खरीदने चली गई,प्रिंस और प्रेम तिवारी पण्डित को खोजने निकले और लल्लन अपनी तैयारी में लग गया।।

अगले दिन सुबह राज और रेखा निकलने ही वाले थे कि रेखा के बाबूजी का आगमन हो गया,वो जिस किसी काम से आये थे,उससे कहीं अधिक आवश्यक कार्य अपनी पुत्री को वापस लेकर जाना था,,इसीसे सुबह सुबह जल्दी जल्दी सारे काम निपटा के सीधे बिटिया की ससुराल पहुंच गये।।

रूपा जहां पिता को देख कर प्रसन्न हुई वहीं रेखा का चेहरा ,

लटक गया।।

' ए रेखा ठहरो!! सुबेरे सुबेरे लल्ला जी के साथ कहाँ चल दी तुम??' और सुनो भले बाऊजी लेने आ गये तो क्या,हम इत्ता जल्दी तुमको जाने नई देंगे समझीं, एक तो पिंकी की सगाई में आई नई,और अब भागे की तैयारी।।"

" अरे जिज्जी हम कहाँ भाग रहे,यू डोंट वरी!! हम अभी रहेंगे तुम्हारे पास।।" दीदी से अपने मन का कहने के बाद रेखा अपने बाऊजी से मुखातिब हुई

" पापा हम बस यूँ गये और यूँ आये,राज की बेस्ट फ्रेंड है प्रिया,उस दिन मिली थी ना जिज्जी तुम ,आज उसके कॉलेज में कुछ फंक्शन है,तो हमें बुलाई है ,मेक'प में हैल्प करने,बस हम उसे रेडी कर के अभी आये,,चले राज?'"

बड़ी मुश्किल से सबसे जान बचा के दोनों वहाँ से निकले और प्रिया के घर पहुंच गये,प्रिया पहले ही सारी तैयारी पूरी किये बैठी उन्हीं दोनों का रास्ता देख रही थी।।

" नमस्ते चाची जी!! हम राज हैं, शर्मा जी के लड़के,अगले मोहल्ले रहते हैं,प्रिया कहाँ हैं??"

"ऊपर आ जाओ राज ,,हम यहाँ अपने कमरे में ही हैं

" अच्छा अच्छा!! ऊ गैस वाले शर्मा के लड़के हो?" बुआ जी के इस सवाल पे राज ने सर ऊपर नीचे कर हाँ में जवाब ,

दे दिया,बुआ जी ने बहुत इसरार कर राज को वहीं बैठा लिया,प्रिया नीचे आकर रेखा को अपने साथ ले गई ।।

" करते का हो बिटवा?? सादी ब्याह भया की नाही, हम बन्सी की बड़ी बुआ है,कोई अच्छा लड़का नजर में हो तो बताना,वैसे बच्चे कितने तुम्हारे?"

"बुआजी अभी हमारी शादी नही हुई।"

राज के माथे पर लिखी उसकी जन्म कुंडली का ऐक्सरे निकालती बुआ जी ने अपनी आंखे छोटी छोटी कर बड़े आश्चर्य से कहा__" हैं अब तक ब्याह नही हुआ,,क्यों बेटा दिखने में तो अच्छे खासे हो।।"

" अब ये क्या बतायेंगे जिज्जी!! आप भी ना,लो बेटा चाय पियो,हम ऊपर प्रिया को भी चाय दे आते हैं,अरे ये तो दोनो लड़कियाँ नीचे ही उतर आईं।"

मैरून और गहरे हरे रंग के कॉम्बिनेशन लहन्गे में रेखा जितनी खिल रही थी,उतनी ही पीले सलेटी लहरिया लहन्गे में बालों को खुला छोड़ी सांवली सलोनी प्रिया भी दमक रही थी।।राज ने प्रिया को देखा,प्रिया ने इशारे में उससे पुछा की " मैं कैसी लग रही" आंखों से ही " बहुत सुन्दर" बोल कर राज ने शरमा कर चेहरा नीचे झुका लिया।।

तीनों साथ साथ घर से निकल गये।।पर राज और प्रिया की इस आँख मिचौली को वहाँ और भी किसी ने देख लिया था।।

,

" अरे बसुरीया कहाँ चली तू?? इत्ता सज धज कर तो कभी ना निकली घर से,ई छोरी जा कहाँ रई, ।"

" इनकी शादी कराने जा रही बुआ" रेखा का हाथ अपने हाथ मे ले प्रिया ने हँस के कहा और तीनो वहाँ से निकल गये।।

मन्दिर में पण्डित प्रिंस प्रेम और पूजन सामग्री सब पहुंच चुकी थी,बस कमी थी दूल्हा और दुल्हन की,।।

राज रेखा और प्रिया के पहुंचते ही पण्डित जी अपनी तैयारियों मे लग गये,सब आस पास बैठ कर लल्लन का रास्ता देख रहे थे कि पण्डित जी ने राज भईया के गले में पड़े स्टायलिश स्टोल को प्रिया की चुन्नी से बांधा और आचमन कर मन्त्र पढ़ते हुए उन दोनो पर जल सिंचन किया ही था कि रेखा चीख पड़ी __ ओह माय गॉड!! पण्डित जी ये दोनो दूल्हा दुल्हन नही है!! दुल्हन मैं हूँ ।।

ये सब इतनी हडबडी मे हुआ की प्रिया या राज कुछ बोल या समझ पाते कि जो घटना था घट गया, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थे कि रेखा ने झट प्रिया की चुन्नी खोल दोनो को अलग किया,उतनी देर में लल्लन भी पहुंच गया।।

" कहाँ रह गये थे लल्लन!! अभी तुम्हारी जगह पण्डित जी भैय्या जी और बन्सी के फेरे फिराये दे रहे थे,,बच गये गुरू!! "प्रिंस की बात पे लल्लन ने माथे का पसीना पोछा और बोला_

,

" घर से निकल रहे थे कि अम्मा पीछे लपक ली, सत्ती माई में रोट चढाये गई,उनको वापस घर उतार के निकले कि गाड़ी का तेल खतम हो गया।।"

" वॉट तेल रोहित!! इट्स फ्युल!! चलो आ तो गये,अब आओ जल्दी यहाँ बैठो,फेरों का भी तो मुहूर्त होगा।।"

" यस ऑफ़कोर्स ! फेरों का भी मुहूर्त है,पण्डित जी अब असली दूल्हा दुल्हन आ गये,शुरु कीजिए।।"

प्रिया ने रेखा और लल्लन का गठजोड़ किया और मुस्कुराते हुए राज की बाजू मे खड़ी हो गई ।।शुभ मुहूर्त और मंगल

फेरे पड़ गये,,भान्वर हो गई . वर वधु ने पण्डित जी का आशीर्वाद लिया और अपने गृहस्थ जीवन के शुरुवाती सोपान पर कदम रख दिया।।

ब्याह निपटने के बाद मन्दिर से नीचे उतर के सभी विमर्श में जुटे कि अब आगे क्या किया जाये।।

लड़कों का कहना था कि लल्लन के घर जाया जाये,परन्तु अब तक अँग्रेजो के खिलाफ लड़ने वाले क्रान्तिकारियों सी धमक दिखाने वाला लल्लन अब एकदम ही सहमी भीगी बिल्ली बना बैठा था,अब रह रह के उसको गुस्से में चीखते हाँफते अपने बाऊजी और रोती मिमियाती अपनी माँ का करुण चेहरा दिख रहा था,उसकी घर जाने की बिल्कुल हिम्मत नही हो रही थी,उसने प्रस्ताव रखा __

" हम सोच रहे लखनऊ निकल जाते हैं,दो दिन बाद वैसे भी हमारी जॉईनिन्ग है,अम्मा को कह देंगे प्रिंस के साथ कमरा खोजने और बाकी काम निपटाने आये हैं,और अब जॉईनिंग के बाद ही वापस आयेंगे।"

" और बाद में का कहोगे लल्लन?"

" बाद में कह देंगे काम बहुते जादा है अम्मा,कुछ समय बाद ही घर आ पाएँगे।।"

" कानपुर लखनऊ में दूरी ही कित्ता है,जैसे मथुरा की लड़की वृंदावन ब्याही,बस वैसा ही।।।तुम नही गये तो तुम्हारी अम्मा आ जायेगी तो,तब का करोगे??"

प्रिंस के इस विचारणीय प्रश्न पर सभी सोच में पड़ गये।।

" हमें तो लगता है,लल्लन और रेखा तुम लोग पहले जाओ राज के घर ,वहाँ सब का आशीर्वाद लो और वहाँ से युवराज भैय्या को साथ लेकर लल्लन के घर जाना,,बड़े भैय्या को सभी मानते हैं,वो जायेंगे तो लल्लन के घर भी कोई परेशानी नही होगी,क्यों ठीक बोले ना राज।।"

प्रिया के इस आइडिया पर राज ने भी हामी भर दी

" ई पनौती फिर बोली,,ई जब जब अपना आइडिया देती है तब तब कोनो का बंटाधार होता है,लिखवा लो हमसे प्रिंस।" प्रेम फुसफुसाया

" अबकी ना होगा,,सही बोल रई प्रिया!! लल्लन राज भईया के साथ निकल लो गुरू,अब जादा सोच बिचार में ना पड़ो ।।"

,

बहुत सारी हिम्मत जुटा के लल्लन रेखा के साथ राज के घर को निकला,राज ने प्रिया को भी साथ ले लिया,प्रिंस और प्रेम पीछे अपनी फटफटी फटफटाते चले आये।।

घर पे पहले ही रूपा के बाऊजी पधारे हुए थे,उनकी अगुआनी में रूपा ऊपर नीचे हो रही थी,तभी दरवाजा खोल के राज अन्दर आया,आते ही दुबारा उसने भाभी के पिता को चरण स्पर्श किया,और एक कोने में खड़ा हो गया।।

" काहे लल्ला जी,रेखा कहाँ रह गई,आई नई आपके साथ।" रूपा की बात खत्म होते होते बन्सी भी अन्दर आ कर खड़ी हो गई

" अरे इसे ही तो सजाने गई रही,ये यहाँ खड़ी है तो रेखा कहाँ है भई ।।"

रूपा की पृश्नवाचक निगाहों को प्रिया ने दरवाजे की तरफ घुमवा दिया,दरवाजे से बहुत धीमे से रेखा और उसके पीछे लल्लन आकर अन्दर खड़े हो गये।।

कई सारे टी वी सीरियल और फिल्मों में नायक नायिका के भाग के शादी करने वाले सीन देख चुकी रुपा ने जब रेखा को फूलों की लम्बी वरमाला पहने और माथे पे पीला सिन्दूर लगाये देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।।।आज तक अपनी सास के सामने अपने खानदानी होने और संस्कारी होने की बड़ी बड़ी डीँगे हाँकने वाली रूपा का मुहँ रुआंसा हो गया।।

,

" रेखा " बस इतना बोल कर अपने सर को पकड़े रूपा धम्म से नीचे गिर पड़ी,हालांकि इस गिरने में बराबर चोट ना लगे इस बात का ध्यान रखा गया, सोफे पर पसरने के बाद रूपा ने आंखे पलट दी,, आसपास के सभी लोग दौड़ पड़े,राज की दादी जिनका दीवान खाने में एक ओर पर्मानेंट अड्डा था, घबरा कर चीखी__ " अरे दांत ना जुड़ जई,देखो रे "

राज की अम्मा और शन्नो मौसी पानी की कटोरी लिये दौडे ,जल्दी जल्दी रूपा की तीमारदारी मे लगी, घर की मुहँ लगी नौकरानी अपने राग मे थी __ " अम्मा जी जूता सूंघा दौ,अब्भी उठ बैठेगी बहुरिया।"

" अरे मुह्नजली!! इन्ने मिर्गी ना आई है जो जूतो सूंघाने बोल रई,चकरा गई है तनिक, अभी पानी का छींटा से ठीक हो जायेगी।"
 
बेहोश पड़ी रूपा के कानों में जब जूता सून्घाने की बात पड़ी तो वो घबरा के थोड़ा कसमसाई पर दादी की बात कान में पड़ते ही उसे संतोष हुआ कि जूता नही सुन्घाया जायेगा,और वो फिर चित पड़ी रही।

इधर रूपा के पिता का बी पी रेखा के नये नवेले दूल्हे को देख बढ़ ही रहा था कि रूपा अचानक चक्कर खा गई,वो बेचारे जब तक कुछ समझ पाते ,समधन अपनी पायल चूड़ी बजाती दौड़ी चली आई और वो बेचारे रिश्ते के सम्मान के मारे एक ,

किनारे खड़े रह गये,उतनी ही देर में घर के बड़े लड़के युवराज का पदार्पण हुआ।।

अपने कमरे में आये दिन रूपा की ऐसी नौटंकी से परिचित युवराज ने आगे बढ़ कर रूपा की नब्ज थाम ली __

" अरे नब्ज तो बड़ी धीमी हो गई है,राज वो क्या नाम है तुम्हारी डॉक्टर सहेली का?? हाँ रानी,ज़रा फ़ोन घुमाओ उसे,कहना बड़ा वाला विटामिन का इन्जेक्शन लेती आये,,इन्हें सुई ही लगवानी पड़ेगी।"

राज को बड़े भैय्या की बात समझ नही आई,वो तुरंत अपनी जीन्स से मोबाइल निकालने लगा, उसका हाथ पकड़ बन्सी ने इशारे से उसे फोन करने से मना कर दिया,अपने पति की सुई वाली बात सुन रूपा को भी होश आने लगा,उसने धीरे से अपनी आंखें खोल दी__" कहाँ हैं हम?" हमेशा फिल्मों में होश मे आने के बाद नायिका द्वारा बोला जाने वाला पहला डायलॉग बोल कर आंखे फाड़ रूपा युवराज को देखने लगी,तभी उसे रेखा और लल्लन याद आ गये,और वो अपने पूरे फेफड़े फाड़ के दम लगा के चिल्ला के रो पड़ी ।।

पूरे घर मे हाहाकार मच गया,ये ऐसा समय था जब लल्लन को अपने किये पे दिल से अफसोस होने लगा,उसे वहाँ से निकल भागने की राह नही सूझ रही थी,जो महिला जैसे सुना सकती थी,वैसे सुना रही थी,चाहे राज की दादी हो या रूपा,यहां तक की शन्नो मौसी को भी मौका मिल गया था,वो भी पानी पी पीकर आज के नौ जवान छोकरे छोकरियों की विवाह प्रगती पे अपने विचार प्रकट कर रही थी,

,

" एक हमारा समय था,शकल सूरत तक ना देखी शादी होने तक,और एक आजकल के लड़के लड़कियाँ हैं,हद बद्तमीज़ी है।।"

" ठीके रहा तुम्हरे समय सकल ना देखे बनी ,नही तुम्हे कौन ब्याह ले जाता सन्नो??" राज की दादी के कथन पर शन्नो मौसी का पारा और चढ़ गया,सब नाराज थे,पर एक कोई ऐसी भी थी वहाँ जिसके मन में लड्डू फूट रहे थे .

राज की अम्मा थी जो बार बार रूपा को ना रोने और जो हुआ उससे समझौता करने की सीख दे रही थी,आखिर थक कर वो वहाँ से उठी और चुपके से अन्दर खिसक गई,दस मिनट बाद एक हाथ में पूजा की थाली और दूसरे हाथ में मिठाई का थाल उठाये राज की अम्मा वापस आयी।।प्रिया ने आगे बढ़कर उनके हाथ से एक थाल ले लिया।।

रेखा रूपा के पैरों के पास उसे मनाने मे लगी थी,युवराज और राज वकील बाबु को समझा रहे थे, दादी और शन्नो मौसी अपने राग दरबारी मे व्यस्त थे, वहीं प्रिंस और प्रेम में से एक दादी का तो एक मौसी का पक्ष ले आग मे घी डालने का काम कर रहे थे, इस पूरे सीन से विलग लल्लन एक किनारे खड़े खड़े अपने घर पे मिलने वाले सत्कार के बारे मे सोच सोच परेशान हुआ जा रहा था,,,उसे आज तक का अपना पूरा जीवन अपने सामने रील सा चलता दिख रहा था, बचपन में माँ को सताना,बाऊजी का मार मार के गिनती पहाड़ा रट्वाना,बड़े भईया की जेब से चुराये पैसों से पहली सिगरेट खरीद कर पीना,हर राखी पे दीदी के लिये कैसे भी कर के गिफ्ट खरीदना,इत्ती सारी खुशनुमा यादों को उसने खुद अपने ,

हाथों कुएं में बहा दिया था,एकाएक उसे अपना निर्णय जल्दबाजी में किया गया फैसला लगने लगा था, पर अब समय उसके हाथ से रेत सा फिसल चुका था,वो अभी अपनी उधेड़बुन मे था कि राज की अम्मा पूजा की थाली लिये आई ।।

प्रिया ने आगे बढ़ दीवार से लग कर खड़े लल्लन को हाथ पकड़ कर आगे खींच लिया और रेखा के बाजू में बिठा दिया,अम्मा ने आगे बढ कर नवयुगल का तिलक किया और आरती उतारी,मुहँ मीठा करा दिया।।

गुस्से मे बडबड करती रूपा रोती धोती अपने कमरे में चली गई,,युवराज ने लल्लन को बैठा कर उसके घर परिवार नौकरी चाकरी का हिसाब लेना शुरु किया,पढ़ाई लिखाई बताने के बाद जैसे ही लल्लन ने अपनी ताजा ताजा लगी सरकारी नौकरी का जिक्र किया,वहाँ उपस्थित सभी के चेहरों पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दिखने लगी,औरतों की खुसफुसाहत कुछ और मुखर हुई,वकील बाबु के चेहरे पर भी सन्तोष की झलक आ ही रही थी कि राज के बाऊजी भी पिछले दालान से निकल बाहर आये,और आते ही उन्होनें अपना सबसे प्रिय सवाल छेड़ दिया__

" किसके लड़के हो वैसे तुम,हमार मतलब कौन जात हो??"

" इरिगेशन में हमारे बाऊजी आफीसर है,बाबुलाल सूर्यवंशी।।"

,

लल्लन का ये वाक्य वकील बाबू के सीने मे घूंसे के समान लगा,उस समय उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने हाथ अन्दर डाल उनके फेफडों को जोर से मसल दिया हो,ऐसी प्राणान्तक पीड़ा मिली वो भी समधि के घर जहां ना वो खुल कर बोल पा रहे थे,और ना चिल्ला पा रहे थे।।आज तक वकील बाबू के लिये उनकी वकालत सबसे ऊपर थी,पर अदृश्य और अपरोक्ष रूप से उनकी वकालत के उपर था उनका ' ब्राम्हणत्व '।

उन्हें सदा ही लगता आया था कि वो स्वयं ब्रम्हा की संतान हैं,इसीसे और कोई माने ना माने उन्होनें खुद को समाज में सबसे ऊपर स्थापित कर रखा था, उनके अनुसार उनके नीचे आने वाली हर जाति के लिये विभिन्न कार्य बनाये गये थे,और वो बने थे सबसे ऊपर बैठ कर सबके कार्यों का निर्धारण करने के लिये।।
 
हालांकि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनकी सोच और उनका स्थान बिल्कुल उलट हो चुका था,पर इसके बावजूद वो तन मन से इस नई व्यवस्था के खिलाफ थे,वो खिलाफ थे अन्तर्जातीय विवाह के।।उन्होनें अपने बच्चों के मन की मिट्टी को भी सदा से जाति पाति के जटिल खाद और पानी से ही सींचा था,पर जाने कैसे ये कुलबोरनी अपने सारे संस्कार गंगा जी में बहाये आयी।अभी उनके हाथ में दुनाली होती तो ये नये नवेले जोड़े को सीधा परलोक पहुंचा देते पर एक तो समधि का घर दुजा वो मन ही मन युवराज का भी थोड़ा अधिक ही लिहाज करते थे,उनकी नज़र में उनकी जिंदगी भर की असली कमाई उनका दामाद युवराज ही था,लड़के तो शादी के बाद अपनी अपनी घर गिरस्ती में लीन थे,बस यही एक हीरा था जिसकी चमक से उन्होनें अपने तन मन को ,

रोशन कर रखा था।।

अपनी मर्मांतक पीड़ा को दबाते हुए उन्होनें बड़े कष्ट से युवराज को अपने पास बुलाया और तुरंत घर निकलने की इच्छा जाहिर की।।

अपने श्वसुर के कट्टर स्वभाव से परिचित युवराज ने उनकी मंशा जानते ही राज को गाड़ी निकालने का आदेश दिया और बैठ कर उन्हें सरकारी नौकरी के फायदे गिनाने लगा।।पर पल पल बदलते ससुर के चेहरे के रंगों का कुछ असाधारण होना युवराज को खटक रहा था कि वकील बाबू ने अपना सीना अपने हाथों सा पकड़ लिया__" क्या हुआ बाऊजी,कुछ तकलीफ है क्या??"

" हाँ,,कुंवर जी,लग रहा जैसे कोई कलेजा मरोडे दे रहा।।"

बोलते बोलते ही वकील बाबू दर्द से कुम्हला कर एक ओर को झटक गये।

युवराज और राज ने आनन फानन उन्हें उठाया और बाहर गाड़ी में डाल तुरंत अस्पताल को दौड़ चले।। रूपा ने जैसे ही सुना की उसके बाऊजी को अस्पताल ले जाना पड़ा वो और हाथ नचा नचा के रेखा को सुनाने लगी_

" और कर लो लब मैरिज,अब पड़ गई कलेजे को ठंडक!! इत्ते में मत रुकना,बाऊजी को मार के ही दम लेना तुम,,कहे दे रहे रेखा ,आज के बाद हमे अपनी सकल ना दिखाना ,समझी।"

,

बहुत देर से चुप चाप खड़ी रेखा के लिये भी अब सब कुछ असहनीय हो गया,आखिर वो भी बिफर पड़ी

" अरे शादी ही तो किये हैं,अपनी मर्ज़ी से कर लिये तो इतनी हाय तौबा काहे मचा रहे सब,और सुन लो दीदी बाऊजी भी अच्छे हो जायेंगे,तुम्हे ज्यादा चिंता करने की ज़रूरत नही है।" रेखा वहाँ से लल्लन का हाथ पकड़े बाहर निकली ही थी कि रूपा ने उसे रोक दिया__" कोई ज़रूरत नही तुम्हे अस्पताल जाने की।

" अरे अभी बखत नही है तुम दोनो का बिल्ली बन लड़ने का ,जल्दी अस्पताल चलो!! देखें वहाँ बकील बाबू को हुआ का है,भोले भंडारी रक्षा करे उनकी, समधन को भी खबर करना होगा।।"

सबके सब बाहर निकले,प्रिंस और प्रेम अपनी बाईक में पहले ही राज भईया की गाड़ी के पीछे निकल चुके थे,राज के बाऊजी राज लोगों के साथ निकल चुके थे,,अब बची थी घर की औरतें,प्रिया और लल्लन . और बाहर खड़ी थी राज की एस यू वी।।रेखा ने लल्लन को देखा __" हमें चलानी नही आती रेखा,हम बस आज तक वैगनार चलायें हैं,हम रोड पे एस यू वी नही उतार पायेंगे।"

अभी लल्लन अपनी गाड़ी चलाने की योग्यता बता ही रहा था कि प्रिया गाड़ी स्टार्ट कर गियर में डाल हॉर्न देने लगी,,

" चला तो लोगी ना,,बोज तो ना दोगी कहीं नाले वाले में " रूपा के सवाल पर प्रिया ने मुस्कुरा कर नही में सर हिला ,

दिया __" राज सिखाये हैं हमें गाड़ी चलाना,बहुत सेफ ड्राइव करते हैं हम,,आप सब लोग निश्चिंत होकर बैठिए।।

सभी को लिये प्रिया जब तक अस्पताल पहुंची तब तक वकील बाबू को इमरजेन्सी में भर्ती कर लिया गया था,कॉरिडोर में ही युवराज और राज मिल गये,अभी सब मिल कर विचार विमर्श कर ही रहे थे कि डॉक्टर ने बाहर आकर एक परचा राज को थमाया,और सारी दवाइयां जल्दी से जल्दी लाने की ताकीद की।।

राज के फोन पर रानी भी वहाँ पहुंच चुकी थी, वो भी अन्दर डॉक्टरों की टीम के साथ लगी हुई थी।।

डॉक्टर और नर्सों की टीम भाग भाग कर अपने काम को अंजाम देने में लगी थी,लगभग दो ढाई घन्टे की मशक्कत के बाद एक सीनियर डॉक्टर बाहर आये __

" मरीज के साथ कौन है" युवराज के आगे बढ़ते ही उन्होनें वकील बाबू के कमजोर हृदय का लेखा जोखा युवराज को थमा दिया

" देखिए इन्हें अटैक आया है,अभी तो हमने इमरजेन्सी दवाईयां दे दी हैं,पर आप लोग इनका एन्जियोग्राफ करवा लिजिये,जिससे ब्लॉकेज का परसेंटेज पता चल सके, अभी 4 दिन अस्पताल में ही रहना होगा,उसके बाद आप इन्हे लखनऊ मेडीकल कॉलेज ले जा सकते हैं ।"

इतना सुनते ही रूपा का पूर्वाभ्यासित रोने का कार्यक्रम शुरु हो गया,युवराज के बार बार समझाने पर भी उसने अपने राग तार सप्तक में ही छेड़े हुए थे, तभी वहाँ रानी आई__" अरे ,

भाभी आप इतना परेशान मत होईये।।अभी अंकल ठीक है,आराम है उन्हें ।।लेकिन आगे चलकर कहीं वापस दुबारा अटैक आ गया तो बड़ी मुसीबत होगी इसिलिए डॉक्टर कह रहे कि एन्जियोग्राफी करवा लिजिये,उसमें अगर ज्यादा ब्लॉकेज आता है,तो आप एंजियोप्लास्टी करवा लीजियेगा,उसके बाद अंकल बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित रहेंगे।।"

" ये सब का कारन ई कलमुही है,ना ये ऐसा भाग भगा के सादी करती ,और ना बाऊजी को हार्ट अटैक आता।"

" ऐसा नही होता भाभी,अंकल को शुरु से ब्लॉकेज रहा होगा,जो आज वेन्स को चोक कर गया और अटैक आ गया,आप बेवजह किसी को ब्लेम ना करें।"

" काहे ना करें,हमार बहिनी है,तुम्हारे पेट में काहे दरद हो रहा,ए लल्ला जी समझाओ अपनी डाक्टर्नी को,जादा चपर चपर ना करे,हम भी सब समझते हैं।।

बड़ी आई हमे समझाने वाली।"

कुछ ही देर में रूपा की माँ और भाई भी दौड़ा चला आया,अपनी माँ को देखते ही रूपा ने फिर एक बार रूदाली रूप धर लिया और आंखे और हाथ नचा नचा के रेखा के सर मत्थे सारा ठीकरा फोड़ दिया।।

पर रूपा की माँ रूपा सी गंवार ना थी,समय की नज़ाकत को भांपते हुए उसने रूपा को समझा बुझा के शांत कराया और रेखा के पास जाकर उसे अपने सीने से लगा लिया।।

,

दुख की इस घड़ी मे,ऐसी अपार विपदा में जहां पति जीवन मृत्यु के बीच पीन्गे भर रहा था,बेटी का जात से बाहर जाकर शादी करना माताजी को कमतर दुखी कर पाया।।और शायद इसिलिए अपने दुख को दूर करने उन्होनें आगे बढ कर बच्चों को माफ कर दिया।।

औरत ही औरत की पीड़ा समझती है,राज की अम्मा ने आगे बढ़ कर समधन को गले से लगा लिया,दोनो औरतें साथ बैठी घंटों टन्सुये बहाती रहीं, अंत में रो धो कर फुर्सत पाई तो पति से मिलने की इच्छा जाहिर की,जिसे उस वक्त डॉक्टरों ने ठुकरा दिया।।

शाम चार पांच बजे तक में मरीज की हालत स्थिर हुई,और सभी को उनके कक्ष में उनसे मिलने की इजाज़त मिल गई।।

इतनी देर में राज ने फ़ोन पे लल्लन के बड़े भाई को सारी जानकारी दे दी थी,राज के फोन के बाद घर पे सोच विचार कर लल्लन का भाई,उसके बाबूजी और अम्मा भी अस्पताल चले आये।।

आते ही लल्लन की अम्मा ने राज की अम्मा से दुआ सलाम की और रेखा की अम्मा से मरीज का हाल पानी जानने लगी,वहीं लल्लन के पिता और भाई भी युवराज और बाकी पुरूषों से बाकी का हाल समाचार लेने लगे।।लल्लन को अपने पिता और भाई का तो उतना डर नही था जितना उसे अपनी अम्मा का डर सता रहा था,उसने आगे बढ़ कर पहले बाऊजी,भैय्या और फिर अम्मा के पैर छू लिये।।

बाऊजी ने उसके सर पर हाथ फेरा तो लल्लन की आंखों ,

की कोर भीग गई पर अम्मा ने आशीर्वाद की जगह दुसरी ओर मुहँ फेर लिया,और तो किसी को कुछ समझा नही पर कोखजाये ने अपनी जननी का दर्द उसकी पीड़ा समझ ली,पर अब क्या हो सकता था?? चुपचाप उठ कर लल्लन ने इशारे से रेखा को भी पैर छूने को कहा और एक तरफ खड़ा हो गया, रेखा ऐसी बातों को समझ कर भी कई बार नासमझ बन जाती थी,प्रिया ने रेखा से मुहँ खोल कर कहा

" अपने सास ससुर की चरण धूलि तो ले लो रेखा, बड़ों का आशीर्वाद तुम्हारे भविष्य को सफल बनाएगा,,चिंता ना करो सब ठीक हो जायेगा।।"
 
शाम ढलते ढलते सभी के चेहरों से चिंता की लकीरें भी छंट गई,रो के हँस के जैसे भी हो पर लल्लन और रेखा के विवाह को आखिर दोनो परिवारों की सहमती मिल ही गई।।

वकील बाबू को भी हृदय मे उठी मर्मांतक पीड़ा में जीवनरक्षक औषधियों ने ऐसा चमत्कार किया कि अपने कष्ट से मुक्ति पाने के बाद वो यथासम्भव विनम्र होते चले गये,उन्होनें अपने मन की भावनाओं को समेट कर अपने नये जमाता को गले से लगा लिया।।

वैसे भी मृत्यु के मुख से लौटे इन्सान को अपना जीवन और अधिक मूल्यवान लगने लगता है,वैसा ही कुछ वकील बाबू के साथ हुआ,और उन्होने हृदय से सबकी गलतियों को क्षमा कर दिया ।।

रात मे अस्पताल में रूपा का भाई रुका,माँ को समझा ,

बुझा कर रूपा अपने साथ, ले गई,,शादी ऐसी जल्दी मे हुई परन्तु विदाई बिना परछन कैसे कर दे,ऐसा बोल रेखा को भी उसकी माँ अपने साथ ले गई,इधर लल्लन को उसके दोस्त बिना गाजे बाजे ही बाराती बने,, राज भैय्या की गाड़ी में हँसी ठिठोली करते बिना दुल्हन ही उसके घर पहुँचा आये।।

प्रेम प्रिंस और राज भैय्या के साथ जैसे ही लल्लन अपने घर की चौखट लान्घने जा रहा था कि उसकी अम्मा की आवाज़ ने उसे वहीं रोक दिया, वो जल भरा कलश और आरती की थाल लिये चौखट पे आई,और पानी भरे कलसे को सात बार लल्लन के चारों ओर घुमा कर,बाहर निकल उस पानी को बहा आई__

" सादी बिना पूछे कर आये तो अब का हर जगह मनमानी चलेगी तुम्हारी,,अरे हल्दी नई चढ़ी तो का भवा,दूल्हा तो बनी गये,अब नैके दूल्हा का नज़र उतारे बिना,उसकी आरती उतारे बिना अन्दर कैसे ले लें,बोलो।।"

नज़र उतार ,आरती कर,अम्मा ने लल्लन के मुहँ मे शगुन का गुड़ डाला और उसे अपने आंचल तले ढांप के घर के मन्दिर में ले चली।।

कुल देवी के आगे प्रणाम कर लल्लन ने अपनी अम्मा के पांव छुए और अम्मा के आंसू लल्लन के चेहरे को भिगोते चले गये__" एक बार पूछने की ज़रूरत भी ना समझी लल्ला,आज तक किस बात के लिये रोका तुझे जो आज रोक लेती।।"

" गलती हो गई अम्मा!! माफ कर दे।।" लल्लन अपनी अम्मा के गले से लगा रो पड़ा,,माँ बेटे के इस पावन मिलन के बीच ,

घर के किसी सदस्य ने आने की जुर्रत नही की,राज इसी बीच जाकर अपनी गाड़ी में बैठा प्रिंस और प्रेम का रास्ता देख रहा था,कि प्रिया का मेसेज आ गया " वहाँ लल्लन के घर पे सब ठीक है ना??" जवाब में राज ने भी लिख दिया _" हाँ सब ठीक!!"

" क्या भाई,चाय पीकर ही टरोगे तुम दोनो??" लल्लन की दीदी के सवाल पर प्रिंस हड़बड़ा गया

" नहीं दीदी!! बस जाते हैं हम दोनो।।" दोनो बाहर को भागे,देखा राज भैय्या ड्राइविंग सीट पर अपना मोबाइल पकड़े मुस्कुरा रहें हैं ।।

" का बात है भैय्या जी,बड़ा मुस्कुरा रहे हैं,किसका मेसेज आ गया ??"

" अबे किसी का नही बे!! जल्दी चलो ,,घर जाये कुछु खाये पिये,,आज तो लल्लन की शादी के चक्कर में पानी तक नसीब नही हुआ,फिर भाभी के बाऊजी की तबीयत बिगड़ गई,,अब तो पेट मे चूहे रेस लगा रहे हैं,अम्म्मा जाते जाते इशारा कर गई थी कि आज हमारी पसंद की प्याज की कचौड़ी बना रही हैं,तो चलो जल्दी से चले और खाये पियें।"

" चलिये भैय्या जी फिर भगा लिजिये गाड़ी,किसका इन्तजार है।।"

तीनों साथ बैठे राज के घर को निकल चले।।

shaadi.com भाग 8

" शाही जोड़ा पहन के आई जो बन ठन के वही तो

मेरी स्वीटहार्ट है, शरमाई सी बगल में जो बैठी है दुल्हन के

जिम में मस्ती के मूड़ में गाना बज रहा था,सभी अपने अपने क्रिया-कलापों में व्यस्त थे,राज कभी किसी को कुछ बताता,कभी किसी को।।कभी किसी की स्पीड सही करता,कभी किसी के वेट सही करता इधर से उधर चक्कर लगा रहा था,साथ ही घड़ी पर भी नज़र डाल लेता,,आज 9.30 हो चुके थे पर समय की पाबंद प्रिया अब तक जिम नही पहुंची थी।।

ऐसा तो वो कभी नही करती थी,इन चार पांच महिनों में राज इतना तो बन्सी को जान ही गया था, अगर कभी उसे ना आना हो,या कोई काम हो तो वो बाकायदे राज को मेसेज कर के बता देती थी, पर आज बिना कुछ बोले बताये ही गायब थी।।

एक एक कर पूरे दो घन्टे बीत गये,पर प्रिया नही आई।।

अब राज सोच मे पड़ गया,कुछ तो बात है।।

वो पूरा दिन सिर्फ सोचने सोचने में ही बीत गया।

जब कभी दोस्ती प्यार में बदल जाती है तब दिल तो मजबूर होता है पर दिमाग कुछ अधिक कार्य करने लगता है,दिमाग का ध्यान सारा समय इसी बात पे रहता है कि दिल की कमजोरी किसी के पकड़ मे ना आ जाये,और इसी अतिरिक्त सतर्कता के कारण जो बात किसी ने सोची भी ना हो सब के सामने आ जाती है।।

ऐसे किसी भी बात पे चट से प्रिया को फ़ोन करके पूछने वाले राज भैय्या ने उस दिन बार बार चाहते हुए भी प्रिया को फ़ोन नही लगाया।।

" का हुआ भैय्या जी आज प्रियाया नही आई।" प्रेम के पूछते ही राज भड़क गया

" अबे हमे का पता बे,तुम तो ऐसे पूछ रहे जैसे वो हमे सब बता के ही करती है,,कॉलेज वॉलेज में काम होगा,नई आ पाई,इतना काहे बखेड़ा बना रहे।"

" हमने कहाँ बखेड़ा बनाया,हम तो पूछ रहे बस।आज तो कॉलेज भी नही गई रही।"

" तो हम का करे,नही गयी तो नही गयी।।तुम हमारा सर काहे खा रहे।।"

" नै भैय्या जी हम बता रहे बस,,आपने कहा ना कॉलेज ,

वॉलेज में काम होगा,इसिलिए बता रहे कॉलेज तो गई ही नही।"

" प्रेम तुम्हें कैसे पता।" प्रिंस को राज की हालत का कुछ कुछ आभास हो चला था

" अरे हम अपनी वाली के चक्कर में जाते तो हैं ही ना,तो आज वहीं कॉलेज में निरमा अकेली ही दिखी हमे,,प्रिया कॉलेज गयी होती तो दोनो जनी साथ ही होतीं ।"

भैय्या जी ने सामने तो बिल्कुल यही दिखाया की उन्हें कोई विशेष फर्क नही पड़ा इस जानकारी से,पर मन ही मन में उथल पुथल मच गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो प्रिया ना ही जिम आयी और ना कॉलेज गई ।।

इसी उधेड़बुन में वो दिन बीत गया,उसके बाद के दो और दिन बीत गये,पर इन कुल जमा तीन ही दिनों में राज को ये समझ आ गया कि प्रिया अब सिर्फ एक दोस्त,एक गाइड या एक जिम स्टूडेंट भर नही है, बल्कि वो उससे कहीं अधिक विशिष्ट स्थान रखती है।।जाने अनजाने राज को पता ही नही चला कि कब सांवली सलोनी प्रिया उसके हृदय आसन पर अपने समस्त आयुधों के साथ विराजमान हो गयी।

बहुत कठिनाई से खुद को समझा बुझा कर राज ने रात मे निश्चित किया कि कल सुबह किसी बहाने से प्रिया के घर जाना ही पड़ेगा,ऐसा सोचते ही एक सुखद अनुभूति के साथ राज के चेहरे पे मुस्कान बिखर गयी और वो उसे याद करते ,

करते सो गया।।

जो काम दोस्ती के समय बहुत आसान होते हैं वही प्रेम का आभास होते ही अति दुष्कर होने लगते हैं ।

जो राज कभी किसी भी समय प्रिया को फ़ोन कर लेता था,कभी भी मुहँ उठाये उसके घर पहुंच जाता था,वो आज ना तो उतनी आसानी से फ़ोन कर पा रहा था,और ना ही उसके घर जा पा रहा था।।

प्रिंस जो सदा राज के साथ छाया सा लगा डोलता था,उसे राज की अवस्था समझने में बिल्कुल भी देर नही लगी,वो अपनी बुद्धि अनुसार सब सही करने की कोशिश करने लगा।।

" भैय्या जी हमको लगता है बन्सी की तबीयत सही नही है,आपको क्या लगता है??"

" अरे हमे क्या मालूम,हम कोई ज्योतिष हैं जो बिना बताये सब जान ले।"

" नही भैय्या जी हमारे कहने का मतलब था कि एक बार क्यों ना प्रिया के कॉलेज चल के उससे मिल लिया जाये,क्या है ना हम घर भी जा सकते हैं,पर प्रिया की बुआ आपपे कुछ जादा ही फिदा है,इसिलिए हम कह रहे कॉलेज चलने की,हो सकता है थोड़ी बहुत बीमार हो ,जैसे सर्दी वर्दी तो उसमे कॉलेज जा रही हो,पर जिम नही आ रही।।"

" तुम्हें बड़ी चिंता हो रही मुटल्लो की,हैं काहे भई ?"

प्रेम के कटाक्ष पे प्रिंस भड़क उठा _ " काहे नही होगी बे !! बहन मानते हैं उसको।।इत्ती अच्छी लड़की से बिना मतलब जले भुने बैठे हो, चले भैय्या जी।"

" अब तुम इत्ता जिद कर रहे हो प्रिंस तो चलो !! पर हमें काम बहुत सारा है,चलो कोई बात नही,अब तुम्हे चिंता हो रही तो देख ही आते हैं ।।"

रॉयल एनफील्ड में पीछे बमुश्किल प्रिंस और प्रेम को ऐडजस्ट कर राज ने राजकीय कॉलेज की तरफ बुलेट भगा दी।।
 
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