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Romance शादी का मन्त्र

जब रूपा ने माँ से रेखा और राज की बात की तो रेखा को वापस "हम आपके हैं कौन "वाले दिन याद आ गये और आज के ज़माने की लैला ने अपने सपनों को नई दिशा में मोड़ लिया . पर बेचारी अपनी सपनों की ज़मीन पे राज के प्यार की फसल बो पाती उसके पहले ही 3 दिन से वैराग्य धारण किये रोहित का उबलता खनकता हुआ मेसेज आ गया .

माँ किसी काम से बुला रही है,बोलकर किसी तरह रेखा ने जान बचाई और इसी सोच में डूब गई कि आगे रोहित को क्या और कैसे बोलना है,ऐसा नही था कि उसे रोहित पसंद ,

नही था,या उसे राज अधिक पसंद था,,असल मे उसे इन दोनो से कही ज्यादा पसंद था शादी का उत्सव उत्साह!!

उसे भी बाकी लडकियों की तरह 3महीने का bridal course करना था,हर मौके के लिये अलग अलग थीम में सजे लहन्गे लेने थे,खूब सारे जेवर लेने थे,कपड़े लेने थे,इतनी महत्वपूर्ण विमर्श वाली चीज़ों के मध्य कोई इनसे कमतर (दूल्हा) के बारे में सोच के क्यों मगजमारी करे।।

इसिलिए अपने मन को समझा कर रेखा अब रोहित को समझाने की तैय्यारी करने लगी।।

राज भैय्या के जिम में उन्होनें पहले महिलाओं और पुरूषों के लिये अलग अलग समय रखा था,परन्तु उनके चेले चपाडों का उन्हे वक्त बेक़क्त घेरे रहना उस मे दिक्कत डालने लगा था इसिलिए सारा कॉमन समय कर दिया,फिर भी अधिकतर घरेलू महिलायें,कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ 9बजे के बाद जब घर के पुरूष ऑफिस और बच्चे स्कूल निकल जाते तभी आती,।।

भैय्या जी ने सारी समय सारिणी प्रिया को बता दी,,अभी कुछ दिनों के लिये कॉलेज की छुट्टियां होने से प्रिया ने भी 9बजे का टाईम स्लॉट चुन लिया।।

भैय्या जी ने जिम में पहनने योग्य कपडों के बारे में उसे उतनी ही जानकारी दी जितनी ना भी देते तो काम चल जाता ।।

पहले दिन एक हाथ में पानी की बड़ी सी बोतल थामे प्रिया ठीक 9 बजे जिम पहुंच गई ।।

उस समय तक एक भी लड़की नही आई थी,पर हाँ मोहल्ले के जाने किस किस कोने से निकल के अर्नोल्ड श्वाज़नेगर के बाप वहाँ आये हुए थे।।कोई पूरी तल्लीनता से

डम्बल कर रहा था,कोई पुश अप्स, कोई बाइसेप्स पे भिड़ा था तो कोई चेस्ट पे काम कर रहा था,,ऐसा लग रहा था अगले मिस्टर इंडिया की तैय्यारी यही लोग कर रहे ,और इन्ही मे से कोई एक मिस्टर इंडिया बनने वाला है।।

"अरे आ गई तुम,बड़ी समय की पाबंद हो,अच्छा है,ये अच्छा की अपना पानी का बोतल भी लाई हो।" भैय्या जी ने आगे बढ़ कर प्रिया का स्वागत किया

"पानी नई ग्लूकोस का बोतल है,हमे लगा पहली बार मेहनत का काम करेंगे ,कहीं चक्कर वक्कर आ गया तो।"

"ठीक बोल रही हो,कमजोर भी तो हो।"लल्लन ऐसे बोल के हंसने लगा,,भैय्या जी ने घूर के उसे देखा और प्रिया को एक ट्रेड मिल पे ले गये,तभी दरवाजा खुला और एक आंटी जी ने अन्दर झाँका

"पुडुषो का भी एही टाईम है क्या??"

"क्या बोल रही हो आंटी??"प्रिन्स ने पूछा

"मैं ए जानना चाहती हूं कि लेडीश लोगों का अलग टाईम है या पुडुषों के साथ ही उनको भी जिम कडणा (करना) है।""

"का बोल रही है यार ये आंटी?"प्रिन्स ने लल्लन से कहा -"अबे चुप रहो तुम ,कलकत्ता की हैं आंटी जी समझे।।"लल्लन ने कहा

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तब तक भैय्या जी चले आये,-"आईये आईये मैडम ,आज आपका पहला दिन है ,आपको एक फॉर्म भरना पड़ेगा, आपका हाईट और वेट चेक कर के आपका बी एम आई निकाले देते हैं,जिससे पता चले कि आपको कितना वजन कम करना है।"

"अडे बाबा हमको बजन कम नही कडणा ,हम तो इहाँ देखने आया था कि हमाडा हश्बैंड भी घड(घर) से जिम बोलके निकलता है,यहाँ आया है कि धेलू के यहाँ बैठ के रोशोगुल्ला खा रहा है।"

"अरे बाप रे आंटी तो करमचंद निकली यार!!"

राज भैय्या ने उन्हें जाकर प्यार से जाने क्या समझाया अगले दिन से खुद ही जिम आने की कसम खा कर घोष आंटी वहाँ से चलती बनी।।

अब हो चुके थे सवा नौ और धीरे धीरे कर के जिम की रौनक बढ़ने लगी,एक एक कर शहर की दुबली पतली लम्बी गोरी छरहरी वामायें धीरे धीरे दरवाजा खोल खोल कर अन्दर आने लगी,ये वही लड़कियाँ थी जिनके इन्तजार में लड़के पुश अप्स कर कर के अपना सीना फुलाए जा रहे थे . इन लडकियों के अन्दर आते ही जिम का माहौल बदलने लगा था,हर लड़का कुछ अधिक ही जोश में वर्क आउट कर रहा था,और मज़े की बात ये थी कि इंस्ट्रक्टर राज भैय्या के अलावा हर लड़का इंस्ट्रक्टर बना बैठा था,,और ये सब एक दूसरे को नही सिर्फ लडकियों को ही ज्ञान दे रहे थे .

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आज प्रिया का पहला दिन था,ऐसी पतली छरहरी लडकियों को देख उस बेचारी को समझ ही नही आ रहा था कि ये यहाँ करने क्या आयी हैं,उन में से कुछ का ये हाल था कि अगर ट्रेड मील पे 5मिनट भी दौड़ ले तो उन्हें फिर सीधे स्ट्रेचर पे डाल कर सीधा एम्स रिफर करना पड़ता वो भी एयर लिफ्ट,,कुछ एक जितना तो वर्क आउट नही कर रही थी ,उतना अपने आप को हर एंगल से पलट पलट के आईने में देख रही थी . एक ने तो गज़ब ही कर दिया ,ट्रेड मील में चढ़ने के पहले जाकर अपनी लिपस्टिक डार्क, की,फिर क्रॉस ट्रेनर पे चढ़ने के पहले भी ,फिर साईकल के भी,इस तरह से हर वर्क आउट सेशन के पहले उसका एक टच'प हो जाता .

प्रिया बेचारी को पहला दिन था इसिलिए 5km/hrs की स्पीड पे 20 मिनट चलने का आदेश हुआ था,वो अपनी मशीन पे चलती इधर उधर देखती जा रही थी . कुछ देर बाद एक बड़ा लॉट आंटियों का अन्दर आया,उन्हें देख प्रिया को कुछ तसल्ली हुई क्योंकि भले ही वो अलग अलग साइज़ ऐंड शेप की थी,पर थी सब की सब मोटी।।
 
अब इतनी सारी महिलायें जहां हो वो जगह गुलजार ना हो ,ऐसा कैसे हो सकता है . पूरे जिम का माहौल कुछ ही देर मे किट्टी पार्टी के माहौल मे तब्दील हो गया।।

इनमें से कुछ एक ही लोकल थी,अधिकतर दिल्ली गुडगाँव से थी।।

"क्यों बेटा जी,आज क्या पहला दिन है आपका??"

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उनमें से एक ने प्रिया से पूछा।

"हाँ!! पर आपको कैसे पता ?"

"हा हा !! अब बोलो पटियाला सलवार पहन के कौन जिम करने आता है।" ये बोल कर वो फिक से हँस दी।।

"और ऐसे स्किन कलर की जेगिंग पहन के कौन आता है आंटी।।"

आंटी वहाँ से उतर के साईकल चलाने चली गई ।।

प्रिया चलती रही अभी भी 20मिनट पूरे होने मे 10मिनट बाकी थे,अभी वो चल ही रही थी कि अचानक से वहाँ रखे साउंड बॉक्स पे किसी लड़के ने गाना बजा दिया

"चदरिया झीनी रे झीनी ,आंखे भीनी ये भीनी ये भीनी, यादें झीनी रे झीनी रे झीनी।।"

प्रिया को वर्क आउट के साथ गाना अच्छा लग ही रहा था कि किसी लड़की ने ट्रैक बदल दिया-

"आजा पिया तोहे प्यार दूँ,गोरी बहियां तो पे वार दूँ ।"

प्रिया को ये भी पसंद आने ही वाला था कि फिर ट्रैक बदला-

"दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है,हम भी पागल हो ,

जायेंगे,ऐसा लगता है।।"

ये भी ठीक लगना शुरु होता उसके पहले फिर ट्रैक बदला-

"लैमबोर्गिनी चलाई जान्दे ओ"

अब ट्रैक बदलता इसके पहले ही भैय्या जी की आवाज़ जिम मे गूँज उठी

"अरे देवदास की छठी औलाद तू यहाँ वर्जिश करने आता है या,मनहूस गाने बजाने . मैडम लोग जो गाना सुनना चाहते हैं वो बजा लेने दो भई,काहे इतना चिरै चिरैय्या लगा रख्खे हो,थोड़ा फास्ट ट्रैक बजाएंगे तो लोगों को भी वर्जिश करने में मज़ा आयेगा ,और तुम झीनी चदरिया बजाये पड़े हो।।

बीच बीच में भैय्या जी आकर प्रिया को कुछ ज़रूरी बातें बता जाते।।अबकी बार प्रिया के दोनो ओर की मशीनों पे आंटी लोगों ने कब्जा जमा लिया और चलते चलते अपनी बातों में भी लग गई ।।

"कल तुम क्लब के "सावन सुन्दरी "में क्यों नही आई,बड़ा गज़ब इन्तेजाम था,इस बार क्लब की लेडिस को अकल आई ,थोड़ा अच्छा खाना पीना था।।

"अरे नाग-पंचमी थी ना कल,,, तो हमारी सासु जी कहा करती हैं,,नाग पंचमी के दिन घर से मत निकला करो,इसिलिए क्लब नही आ पाये,वैसे क्या रखा था खाने में ।"

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(सास सही कहती है,नागिनों को निकलना भी नही चाहिये कोई पिटारा मे बन्द कर लिया तो)प्रिन्स और लल्लन उंन लोगों की बातों में अपनी अलग कॉमेन्ट्री कर रहे थे

"लिट्टी चोखा था,स्वाद अच्छा था . पर घी ज़रा कम शुद्ध लगा मुझे ,अब वैसे भी होटल वाले हमारे जैसा शुद्ध घी कहाँ बना पायेंगे।।"

"बस लिट्टी!! और मीठा में कुछ नही दिये??"आंटी जी की आत्मा कलप गई कि हाय बेचारी लेडिस लोग 2 घन्टे के तपस्या कर के इतना लीप पोत के क्लब पहुंची और इतना सूखा सूखा निपटा दिये।।

"था ना,,मीठा में इमरती खिलाए थे,और चाय कॉफ़ी था,जिसको जो पीना हो,लगभग सभी ने दोनो पिया।।"

"पीना भी चाहिये जी!! महीना का 300रुपया लेते भी तो हैं ये लेडिस क्लब वाले,हम होते तो 2चाय और 2कॉफ़ी पी लेते।।"

(भगवान बचाये!!) फिर प्रिन्स चहका।।

"कहाँ से वजन कम हो,जितनी कंजूसी से पसीना बहाती हैं जिम में ,,उतनी दरियादिली से ठूंसती हैं।।

अब यहीं देख लो,जब से चढ़ी है मशीन मे खाना पीना में ही अटकी हैं "__लल्लन ने अपना ज्ञान दिखाया।।

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"अरे ये तो बताओ बनी कौन इस बार सावन सुन्दरी?"

"सोनी बनी है इस बार की सावन सुन्दरी।"

"हैं . ऐसा तो कोई खास चेहरा मोहरा है नही,मैनें तो कल तुम्हारे फोटो देखे थे फेसबुक पे,तुम ज्यादा सुन्दर लग रही थी।।"

"अरे चेहरा देख के नही दिया ना !!वो तो जो जितना ज्यादा हरा पहन के आयेगा उसपे जोड़ घटाव किया,मेरा तो साड़ी ब्लाऊस,चूड़ी बिन्दी,कान का गले का ,नेल पोलिश ,हेयर क्लिप,रुमाल सब हरा था,बल्कि सैंडल और पर्स भी।।

"तो फिर सोनी कैसे जीत गई जी।"??

"ये दुसरी वाली आंटी ना बस मजे ले रही है,इसे कोई सहानुभूति नही है,की वो हरा रुमाल वाली आंटी इत्ता कर के भी नही जीती,बल्कि हमको लगता है दिल ही दिल में खुस हो रई है कि हाँ बेटा देखा !! ससूरी खुद को ऐस्वर्या राय समझती है।"

प्रिन्स ने लल्लन के कान मे फुसफुसाया

"अर्र्रे क्या बताऊँ,वो सोनी ने बाल भी हरे रंग से हाईलाईट, करा लिया था,अब देखो मैनें इतना किया ,सब फेल हो गया . आँख के ऊपर हरा रंग का शेडो लगाये थे,उसी को थोड़ा गाल पे भी मार लिये थे,लिपस्टिक तक हरा था हमारा ,,अब सोचो।।

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"हे भगवान . इसके पति का हार्ट फेल कैसे नही हुआ इसको देख के,,ये तो पूरी दमदमी माई लग रही होगी।""लल्लन बोला।

"तुम दोनो यहाँ का कर रहे हो बे!! जाओ उधर वो योगा मैट बिछाओ ,,हम योग शुरु करेंगे अब।।"

राज भैय्या के फटकार लगाते ही दोनो लोग मशीन से कूद कर दूसरी तरफ भाग गये।।

राज भैय्या के योग सेशन के बाद सभी महिलायें बड़ी आत्मीयता से अपनी अपनी परेशानियां राज भैय्या को बताने लगी,जिस सब का सार यही था कि इतनी मेहनत कर के भी वजन का कांटा 10grm भी इधर से उधर नही हिलता जबकि खाने में पूरा परहेज बरता जा रहा है,राज भैय्या ने रोज की तरह उन्हें दो चार पते की बातें बताईं ,जैसे दिन भर पानी पीना,सुबह खाली पेट में गर्म पानी में शहद मिला के लेना वगैरह वगैरह,,पर उस पे भी अधिकतर महिलाओं का तुर्रा यही था कि,हम तो 10-12ग्लास पानी पी जातें हैं,फिर भी यही हाल .

खैर किसी तरह भैय्या जी का सेशन समाप्त हुआ और एक एक कर सारी महिलायें जिम से निकल गई ।।

"तुम तो बहुतै सहनशील हो राज।"प्रिया के ऐसा बोलने पर राज ने पूछा

"काहे?? ऐसा काहे बोल रहीं।"

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"तो और क्या?? सब को इत्ता प्यार से समझा रहे हो ,और सब समझने की जगह उल्टा ' हम तो यही करते हैं ' की रट लगाये बैठी हैं,अरे अगर यही करती हो,तो दुबला काहे नही जाती,हम तो सच्ची कहें राज !! अगर तुम जो जो बताये हो वो वो हम रोज करें तो हम पक्का पतले हो जायेंगे।।"

प्रिया और राज के चेहरों पे मुस्कान आ गई ।।

तभी भैय्या जी का फ़ोन रिंग हुआ ,और प्रिन्स फ़ोन लिये भागता आया "भैय्या जी बाबूजी का फ़ोन है।"

"कहाँ हैं लाट साहब??"

"जिम में हैं बाबूजी कहिये क्या काम है।"

"काम तो ऐसा कुच्छो नई है,पर शाम को इहाँ उहाँ घूमने ना चले जाना,आज शाम को तुम्हारी भाभी के फादर आ रहें हैं,तो तुम्हारा भी घर पे रहना ज़रूरी है,समझे।।"

"भाभी के बाऊजी आ रहें,उसमें हमारा रहना नई रहना से का होगा,सामान सब्जी मिठाई उठाई हम अभी पहुंचा देते हैं,जो आप बोलो।"

"अरे जब हम बोल रहे कि तुम्हारा रहना ज़रूरी है तो है,ऊ अपनी रेखा के बारे में कुछ बात चीत करना चाहते हैं,समझे . तो समय पे घर आ जाना,और बाकी सब तो हम ले आये हैं तुम आते समय गर्मा गर्म जलेबी लेते आना।"

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"ठीक है हम आ जायेंगे बाबूजी,और कुछ?"

"और कुछ तो ऐसा पूछ रहे जैसे बहुत काम के हो,सारा जमाना का फाल्तू काम बस करा लो इनसे, भूलना मत ,हम दुबारा फ़ोन नई करेंगे,ठीक है!!"

"ठीक बात"

तभी लल्लन का फ़ोन बजने लगा, प्रिन्स ने फ़ोन उठाया ,उधर से एक मधुर सी आवाज़ आई- "हेलो रोहित??"

"नही ,यहाँ तो कोई रोहित नई है बहन जी" प्रिंस ने जवाब दिया।।

"अरे ऐसे कैसे,इसी नम्बर पे तो सुबह रोहित से मेरी बात हुई थी,एक मिनट रुको8 Full stopउधर से उस लड़की ने फ़ोन में चैट खोल के नम्बर एक बार और चेक किया "हाँ जी मैने सही नम्बर लगाया है,अभी कुछ देर पहले ही इसी नम्बर से रोहित ने एक साई बाबा वाला मेसेज मुझे भेजा था जिसके बाद हमारा झगड़ा हो गया था,तो बस उतनी ही बात से गुस्सा होकर उसने नम्बर बदल दिया??"

"नही दीदी नम्बर तो किसी ने नही बदला ,वैसे ऐसा क्या मेसेज था कि झगड़ा हो गया आपका?"

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"वेट वेट!! तुम मुझे दीदी क्यों बोल रहे हो,, i m not a दीदी type material और दुसरी चीज़ उस बुद्धू राम ने मुझे मेसेज किया कि ये साई बाबा की असली फोटो है,पन्द्रह लोगो को भेजो तो गुड न्यूज़ मिलेगी,,whatever!! इसी लिये झगड़ा हो गया मेरा ,पर यार मैं तुम्हे क्यों ये सब बता रही हूं,तुम फ़ोन रखो।।
 
अभी वो मोहतरमा फ़ोन काटने ही वाली थी कि, लल्लन गिरता पड़ता भागता हुआ आया और प्रिंस से फ़ोन छीन लिया

"हेलो ,हेलो बेबी !! मैं आ गया,सॉरी वो वॉश रुम में था ,तभी फ़ोन नही उठा पाया,बेबी सॉरी।।"

प्रिया राज भैय्या प्रिंस सभी लल्लन को आंखे फाड़ फाड़ के देखने लगे

"अबे तुम्हारा नाम रोहित कब से हो गया बे??"

लल्लन के फ़ोन रखते ही राज भैय्या ने सवाल किया।।

"भैय्या जी हमारा स्कूल में नाम रोहित ही था,वो तो घर पे अम्मा लोग फिर आप लोग सब लल्लन ही कहने लगे तो वही चल पड़ा।।"

"बड़ा फैंसी नाम रखे हो रोहित बबुआ " प्रेम ने कहा

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"तुम भी तो बड़ा फिल्मी नाम रखे हो प्रेम बाबु।"

"हां वो हमारी अम्मा मैनें प्यार किया देख के आई और उसी रात हम पैदा हो गये,तो बस हमारा नाम प्रेम पड़ गया।।।"

"वाह बहुत बढ़िया . हमारी सहेली निरमा की अम्मा को निरमा के पैकेट पे बनी लड़की इतनी सुहाई की वो अपनी बिटिया का नाम निरमा रख दी।।

प्रिया के ऐसा बोलते ही सब हंसने लगे--"तुम, हमेशा बोलती रहती हो इसिलिए तुम्हारी अम्मा तुम्हारा नाम प्रिया रख दी।।है ना।"प्रिंस ने बोला

"हां और ये बिल्कुल साक्षात कहीं के राजकुमार दिखते हैं,इसलिए इनका नाम राजकुमार पड़ा ,है ना राज??"

प्रिया के ऐसा कहते ही राज भैय्या का चेहरा गुलाबी हो गया और बेचारे शरमा के रह गये।।।

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1 . तो यहाँ लल्लन बाबु ही थे जो रेखा से जुदाई के गम में जिम में सुबह जुदाई वाले गानों की बहार सजाये हुए थे . अभी कोई उनसे उनके फ़ोन के बारे में पूछता ,उसके पहले ही उन्होनें वहाँ से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी,वो निकल ही रहे थे कि प्रिंस ने पूछ ही लिया- "अरे लल्लन तुम बताये नई,वो लेडिस कौन थी जिसका फ़ोन ,

आया था तुम्हारे लिये??"

"तुम गधे के गधे ही रहोगे प्रिंस,लेडिस नही एकवचन के लिये लेडी कहा जाता है,तुमको पूछना चाहिये कि वो लेडी कौन थी जिसका फ़ोन आया था।।"प्रिया के ऐसा बोलते ही प्रिंस बिखर गया

"यार तुम ना भैय्या जी को पढ़ाने आई हो,उन्हें ही पढ़ाओ,हमे ना समझाओ सिखाओ ,समझी।।"

अभी प्रिंस और प्रिया का फसाद चल ही रहा था की लल्लन सबकी नज़र बचा कर वहाँ से निकल लिया।।।

राधेश्याम अपना सर पकड़ कर वहीं सोफे पर निढ़ाल हो गये,युवराज और राज दौडे चले आये ,,तुरंत पानी मँगा कर उन्हें पिलाया गया,, श्रीमती जी ने पूछा __"किसका फ़ोन था ,क्या हो गया,,सब ठीक तो है ना??"

"लड़के वाले अभी नही आ पायेंगे,उन्हें कुछ आवश्यक काम आ पड़ा है,,इसीसे सगाई टालने की बात कह रहे हैं ।।"

जितने धीमे शब्दों में राधेश्याम जी

ने कहा,उतने ही तेज़ आवाज़ में एक ज़ोर की हाय बोल कर श्रीमती जी भी दूसरे सोफे पर निढ़ाल हो गई ।।

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राज गहन आश्चर्य से अपने पिता को देखने लगा
 
भाग 5

प्रिया के प्लान के मुताबिक राज ने प्रेम के घर पे और प्रिया ने निरमा के घर पे जाकर बात की,पर उम्म्मीद के विपरीत दोनों ही घर की अम्मा लोंगो ने और बड़ी बड़ी कसमें किरिया उठा ली कि,"हमरे जीते जी ई ब्याह ना हो सकब,हमरी ठठरी उठ जाये के बाद अपन अपन मर्ज़ी से निबटा लो जो करना धरना है,एक बार सादी हुई जाये फिर आटे दाल का भाव पता चल जई ।।"

निरमा के घर से बाहर निकलने पे पूरी तरह से रोक लगा दिया गया,अब बेचारी कॉलेज भी जाती तो उसका एक नकारा मामा उसे लेने और छोड़ने जाता और बेचारी जब तक कॉलेज में रहती वो गेट के बाहर की गुमटी में अपना अड्डा जमाये रहता, उसके इस मामा के पास कोई विशेष कार्य भी नही था,जुआ खेल खेल के अपने बाप को पैसों को स्वाहा कर रहा था,जब उसके बाप यानी निरमा के नाना को इस बात का पता चला तो लात घुन्सों से अच्छी तरह आरती उतार कर उसे घर से निकाल दिया ,और वो अपने में झूमता बीड़ी पीता अपनी जिज्जी के घर आ गया,जिज्जी ने रो धोकर जीजा को उसके यहाँ रहने के लिये मना लिया,तब से मामा जी का

निवास यही था,अपने जीजा को भरोसे में लेने के लिये आये दिन कोई ना कोई जुगाड भिड़ाता फिरता और आखिर वो मौका मिल ही गया ,जब प्रिया ने निरमा की प्रेम कहानी के बारे में उसकी अम्मा को बताया तब सबसे ज्यादा उछल उछल कर घर की बदनामी की फिकर करने वाले मामा ने अपनी बडी बहन को भड़का भड़का कर भांजी का कॉलेज बन्द करा दिया,,बाद में चुपके से भांजी से पैसे वसूल कर उसे कॉलेज जाने की अनुमती दिला दी और जिज्जी से भांजी को रोज कॉलेज छोड़ने लाने के बदले मेहनताना वसूला जाने लगा।।

इस पूरे प्रकरण को लगभग 40-45दिन बीत गये,प्रिया का जिम यथावत चलता रहा ।।

कि तभी एक दिन सुबह जिम के समय पर अचानक पिंकी फिर जिम पहुंच गई 3 Underscore

"प्रिंस . भैय्या जी कहाँ है?? जल्दी बुलाओ!!"

"भैय्या जी तो प्रोटीन पाउडर खरीदने गये हैं,दीदी आप ऑफिस में बैठिए भैय्या जी आते ही होंगे।।"

पिंकी ऑफिस पहुंची तो अन्दर प्रिया बैठी कुछ लिख रही थी,पूरी तन्मयता से__

"क्या लिख रही हो प्रिया?? इतना खो कर??"

"अरे दीदी आप !! आप कब आई? ? मैं राज के लिये कठिन सवालों को अलग छान्ट कर उनके जवाब तैय्यार कर ,

रही हूं,बस ये याद कर लेने से पेपर पास करने में दिक्कत नही होगी।।"

"Very good प्रिया . तुम पहले से थोड़ी दुबली भी लग रही हो,कुछ वजन तो कम हो ही गया है तुम्हारा।"

" हाँ लगभग साढे तीन से चार किलो कम कर लिया है इन्होनें ।।"राज ने दरवाजा खोल ऑफिस में प्रवेश करते हुए जवाब दिया,

प्रिया ने पलट के राज को सवालिया नजरों से देखा "पर हमने तो नापा ही नही,तुम्हें कैसे पता चला।।

"भैय्या जी की आंखो मे एक्स रे मशीन फिट है,किस लड़की का कितना वजन बढा कितना घटा सिर्फ देख कर ही बता लेते हैं भैय्या जी"प्रिंस अनजाने में कुछ भी मूर्खता पूर्ण अतिशयोक्ति कर जाता था

"अबे बौरा गये हो का बे!! कुछो भी बकते हो! पिंकी तुम अभी कैसे यहाँ आई,,घर में सब ठीक है ना??"

"कहाँ ठीक है भैय्या . वही तो बताने आये हैं,अभी सबेरे भाभी के पापा का फ़ोन आया था,वो लोग हमारी सगाई की तारीख पक्की कर दिये हैं,आज से ठीक पन्द्रह दिन बाद हमारी सगाई है,,,और आप अभी तक बड़े भैय्या से भी बात नही कर पाये।।"

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"अरे ई तो नया काण्ड हुई गया!! तुम तो जानती हो पहले ऊ प्रेम के चक्कर में बिज़ी रहे उसके बाद ई जिम का सामान खरीदने दिल्ली चले गये इसी सब में बड़का भैय्या से बात करना रह गया ,अब रुको आजे कुछ जुगाड़ जमाते हैं भैय्या से बात करने का।"

"हम बताएँ राज ,ऐसा करो ,कोरा बात करने से अच्छा ये है कि किसी तरह भैय्या से रतन की मुलाकात करवा दो,,मुलाकात ऐसी की भैय्या खुद प्रभावित हो जायें,और उसके बाद का प्लान हम बाद मे बताएँगे ।।"

प्रिया के ऐसा बोलते ही राज ने सवाल किया

"अब ऐसी कैसी मुलाकात करायें की भैय्या परभावित होई जाये,तुमही आइडिया देई दो।।"

"देखो सुनने में थोड़ा फिल्मी लगता है ,पर काम का आइडिया है . अभी प्रिया बोल ही रही थी कि बीच में प्रेम कूद पड़ा

"भगवान बचाये भैय्या जी इ मुटकि के आइडिया से,हमरे लिये ऐसन खतरू आइडिया दी कि निरमा के दरसन भी दुरलभ हो गये,पहले कम से कम मिल जुल तो पाते थे,अब तो साला घर के अन्दर अम्मा ताने मार मार के जीना मुहाल की है और बाहर ऊ कनफड़े के गुंडे हमार रस्ता ताकते हैं कि कब हम उनके हाथ लगे औ ऊ हमार हड्डी मांस नोच नोच खा जायें ।।

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"प्रेम तुम चुप रहो!! इस बार हमारा आइडिया फेल नही होगा,,तुम्हारा और निरमा का भी ब्याह करायेंगे भाई चिंता ना करो।।"

"अरे काहे ना करे चिंता!! जिसके पास तुम जैसा दोस्त हो जो घरफुक्का राय दे बात बात पे, उसको चिंता छोड़, डायरेक्ट चिता मा चढ़ जाना चाही।।"

"कन्ट्रोल करो यार प्रेम !! तुम्हारा समय आयेगा ,तुम्हारा भी ब्याह हो जायेगा यार अभी प्रिया का आइडिया सुनो!! हाँ बोलो प्रिया तुम का बोल रही थी,कुछ फिल्मी उल्मी सा!!"

" हाँ सुनो!! भैय्या जब अपनी गैस एजेन्सी में बैठे होंगे,,दोपहर को जब सब लंच के लिये जायेंगे और भैय्या अकेले होंगे उसी समय चेहरे पे नकाब बांध के दो नकाबपोश उन्हें लूटने जायेंगे,,सीधे जाकर उनकी कनपटी पे बन्दूक तान देंगे और तभी रतन आयेगा और उन दोनो से लड़ के भैय्या की जान बचा लेगा।।।और जब भैय्या उसको धन्यवाद देकर नाम पूछेंगे तब रतन अपना पूरा हिस्ट्री जॉग्रफ़ी उन्हें बता देगा बस अपना पूरा नाम नही बतायेगा,, बिल्कुल ऐसा माहौल जम जाना चाहिये की भैय्या को लगे काश ये लड़का पहले मिलता तो पिंकी की शादी इसीसे तय करते।।।

"बहुत फिल्मी है प्रिया!! पता नही रतन मानेगा या नही।"पिंकी ने कहा

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"धमल्लो जी ये भी बता दीजिये की ये गुंडे कहाँ से किराया मा लाने वाली है आप"प्रेम ने सवाल किया

"कही से लाने की का ज़रूरत,हमारे पास आलरेडी हैं गुंडे!! तुम और प्रिंस!!"

"पर प्रिया तुमको लग रहा ये आइडिया काम करेगा??"भैय्या जी इतनी देर में पहली बार बोले

"भैय्या जी पगलाए गये हो का,ई मोटकी कुच्छो भी बकवास कर रही और आप इसका बात सुन रहे।"प्रेम बौखला गया

"हां तो तुम ही सूझा दो प्रेम बाबु कोई आइडिया है तुम्हरे दिमाग में,,देखो हमारा आइडिया फिल्मी है पर काम ज़रूर करेगा,,पिंकी दीदी रतन को आप मना लेना ,आज ठीक डेढ़ से 2बजे के बीच उसको एजेन्सी में भेज देना कैसे भी कर के,, आगे का सब राज संभाल लेगा,।"

"हम कैसे प्रिया??"

राज भैय्या के इस सवाल पर प्रिया ने उसे घूरा और __"यार हर बात तुम को समझानी पड़ती है,खाना लेकर तुम्ही जाते हो ना ,जब कभी ड्राईवर छुट्टी पर होता है,तो आज भी चले जाना और जब रतन और भैय्या जी की बात होने लगे तब तुम वहाँ पहुंच के ऐसी ऐक्टिंग करना जैसे रतन तुम्हे बड़ा पसंद आ गया ,,अब रतन वहाँ क्या करने जा रहा ,ये बताने की ज़रूरत तो नही है ना,फिर भी आप सबके लिये बता देते ,

हैं,रतन वहाँ नया गैस कनेक्शन लेने जायेगा।।

"अब इसके आगे का प्लान भी सुन लो,राज तुम अपनी तरफ से सिर्फ रतन की तारीफ करोगे पर पिंकी दीदी के लिये कुछ नही कहोगे उल्टा बढ़ चढ़ के सगाई की तैय्यारी मे लगे रहना, और रतन बड़के भैय्या से धीरे धीरे दोस्ती बढा लेगा।।

जब सगाई को सिर्फ एक दिन बचेगा उस दिन तुम अपनी इस टोली के साथ चुपके से लड़के को किडनैप कर लेना,,जब सगाई के दिन भी लड़का अपने घर नही पहुंचेगा तो उसके घर वाले तुम्हारे घर फ़ोन करेंगे और माफी मांगेंगे ,तब तुम्हारे बाबूजी अपना सर पकड़ के बैठ जायेंगे क्योंकि सगाई के लिये हाल बुक हो गया है,सारे मेहमान आ गये हैं ,अब क्या किया जाये ,,तभी तुम बड़के भैय्या से कहना कि भैय्या आपका वो दोस्त जो अभी अभी आई ए एस का इंटरव्यू पास किया है उसिसे पिंकी की सगाई करा दो,,तब भैय्या बड़ी लाचारी से कहेंगे कि ऊ हमरे जात का नही है छोटे नही हम अभी इ सगाई कर देते ,लोग कहेंगे अपनी सगी बहन होती तो का ऐसे दुसरी जात में ब्याह देते तब पिंकी दीदी आयेगी और रोते हुए कहेगी भैय्या आपको जो सही लगे मैं करने को तैय्यार हूँ,आज जमाना इन्सान के काम से उसे पहचान रहा ना कि उसकी जात से,आपका दोस्त किसी भी जात का हो ,मैं तैय्यार हूँ,बस आपकी और बडे पापा की नाक नही कटनी चाहिये।।दीदी की ये बात सुनकर बड़के भैय्या खुश हो जायेंगे और जाकर आपके बाऊजी को मनाएंगे समझायेंगे और ये सगाई हो जायेगी।।"

"अरे वाह सुनने में तो अच्छा लग रहा है,पर क्या सच मे ये ,

आइडिया काम करेगा??"

"अरे पिंकी तुमहू इसकी बतकही में आ गई,ये जैसन हमार कोल्हू पिराई है ना ,ऐसने तुम्हे भी पेर के मानेगी ,काहे इसकी बात सुनते हो यार तुम लोग।।"

"प्रेम चुप रहो अम्मा कसम नही धर देंगे तुमको!! अबे सही लग रहा हमको ई आइडिया,क्यों पिंकी?? लगाओ जरा रतन गुरू को फ़ोन और समझाए बुझाये दो ,हम इन दोनो लामलेट को तैय्यार करते हैं ।

इस पूरे प्लान में बिल्कुल अनिच्छा से प्रेम को भाग लेना ही पड़ा ,पर जाने क्यों अन्दर ही अन्दर उसे किसी अनिष्ट की आशंका कंपकंपा रही थी,,खैर राज भैय्या की खातिर नकाब चेहरे पे बांध अपनी हीरो होंडा मे प्रिंस को पीछे बैठाए प्रेम निकला, निरमा की गली से निकलते हुए बड़ी हसरत भरी निगाहों से उसने छत की ओर देखा पर वहाँ खड़ी निरमा ने प्रेम को देख कर भी अनदेखा कर दिया__

"देखा प्रिंस उस कजरौटी की ऐसी काली नज़र लगी है की हमरी निरमा भी हमारी तरफ देख नही रही।।"

"अबे प्रेम तुम भी पूरे उल्लू हो यार!! पहला तो चेहरे पे गमछा बांधे हो,और दूसरा उसके ऊपर हेल्मेट चढाये हो ,गाड़ी का नम्बर प्लेट भी बदल दिये हो तो भाभी चिन्हेंगी भी कैसे बे??"

प्लान के मुताबिक प्रिंस और प्रेम नकाब पहन कर युवराज के ऑफिस मे दाखिल हुए ,अभी उन्होनें गन निकाल के युवराज की तरफ मोड़ी ही थी की रतन वहाँ पहुंच गया__

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"आप बिल्कुल मत घबराइये ,मैं आपको बचा लूंगा ।"रतन की बात पूरी होने के पहले एक ज़ोर का चाँटा गन तानने वाले प्रेम के चेहरे पे पड़ा _"अरे मर गया रे ,मार डाला रे मार डाला . "

चिल्लाते हुए प्रेम अपना नकाब संभाले वहाँ से भागने को हुआ पर जाते जाते भी युवराज का ज़ोर का घूंसा उसकी और प्रिंस की पीठ पर पड़ ही गया, दोनों सर पे पैर रख कर वहाँ से भागे ।।।
 
रतन घबराया सा कभी युवराज को कभी जान बचा कर भागते प्रेम और प्रिंस को देख रहा था,,जब दोनो आंखों से ओझल हो गये तब युवराज का दहाड़ना बन्द हुआ,तब तक वो उन दोनो को पानी पी पी कर गालियाँ देता रहा,अब उसने रतन की तरफ देखा !! तब तक रतन यही सोचता रहा कि उसे वहाँ खड़ा रहना चाहिये या भाग जाना चाहिये।।अभी रतन कुछ कहता उसके पहले ही युवराज ने उससे उसका परिचय जानना चाहा लेकिन तभी अचानक उसे तबीयत खराब सी लगने लगी,,सीने में उठने वाले दर्द और घबराहट से वो दिवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया,,युवराज का चेहरा पसीने से भीग गया और कलेक्टर साहब को "जी के "में पढ़े स्ट्रोक के सिम्पटम याद आ गये,,उसने फौरन युवराज को कुर्सी पर आराम से बैठाया और युवराज की बाई गरदन पर हलके हाथों से मसाज करते हुए उसे गहरी सांसे लेने के लिये कहने लगा और फिर धीरे से उसकी रीवोल्विंग चेयर को हल्के हाथों से खींचते हुए गाड़ी तक ले गया,,,युवराज को अपनी गाड़ी में बैठा वो तुरंत अस्पताल की ओर भागा।।

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जब रतन की स्विफ्ट एजेन्सी के गेट से निकल रही थी,उसी समय राज भैय्या अपनी एक्स यू वी में अन्दर दाखिल हो रहे थे,रतन का भैय्या को गाड़ी मे ले कर कहीं जाना तो प्लान का हिस्सा था नही,उन्होनें अपने छोटे से दिमाग पर बहुत ज़ोर दिया पर उन्हें प्रिया का बताया ऐसा कोई प्लान याद नही आया . अभी राज सोच में डूबा खड़ा था की कान्खते कराहते प्रिंस और प्रेम नकाब हटा कर वहाँ चले आये।।

"हम कहे रहे ,,ई सनिचर हमरी जान की दुसमन है भैय्या जी!! हमको तो लगता है निरमा की अम्मा हमारी सुपारी दे रखी है ई बंसुरीया को,,जब देखो तब हमे मारे का प्लान बनाती रहती है।।आज तो बड़का भैय्या का हाथ से हमारा हत्या हो जाना था, ऊ तो सुबह सुबह चौकी के बजरंग बली का आसिर्वाद ले आये थे ,वर्ना अभी आप हमरी अर्थी सजाते होते।।

प्रेम अपना दुखड़ा रो रहा था की भैय्या जी का फ़ोन बजा__' जय हो जय हो शंकरा .

"हेलो!! राज बोल रहे हैं ।"

"राज भैय्या हम रतन बोल रहे हैं,बडे भैय्या को हार्ट अटेक आया है,आप जल्दी से जल्दी सिटी हॉस्पिटल पहुंच जाइये,हम बस अभी पार्किंग मे गाड़ी डाल रहे हैं,,पहले चला रहे थे,इसलिए फ़ोन नही कर पाये,,,जल्दी आ जाईये आप !!"

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"हे शिव शंकर ये क्या हो गया,चलो बैठो दोनो,अभी के अभी अस्पताल जाना है,भैय्या का तबीयत बिगड़ गया है,,,साला ई कलेक्टर उलेक्तर से रिस्ता जोडना भी रिस्की है,अब देखो ससुर गाड़ी चला रहा तो फ़ोन नई किया,हमको देरी से खबर मिली,,चलो यार प्रिंस कहाँ अटक गये तुम??"

"ऊ भैय्या जी घर मा फ़ोन करने लग गये थे।"

"किसके घर मे बे??"

"आपके औ किसके,आपकी अम्मा बाऊजी को बता रहे थे ,भैय्या को हार्ट फेल हुआ है।।"

"अबे तुम ना गधे हो एक नम्बर के,,का जरुरत रही अभी से अम्मा को बताने की ,अब ऊ वहाँ रो रो के जो रामायण गायेगी,,तुम्हरी ना ये हडबड़ी की आदत से बहुते परेसान हो गये हैं ।।"

हैरान परेशान राज प्रिंस और प्रेम जब तक हॉस्पिटल पहुँचे तब तक में वहाँ रतन के फ़ोन से पिंकी और प्रिया भी पहुंच चुके थे।।

रतन ने उन्हें बताया की बड़े भैय्या को इमरजेन्सी में भर्ती करा दिया गया है,डॉक्टरों की टीम सारी जांच मे लगी हुई है,अभी किसी को भी अन्दर जाने की इजाज़त नही है।।राज को बहुत ज्यादा परेशान देख प्रिया उसके पास पानी की ,

बोतल लिये आई__"पानी पी लो राज!! और ज्यादा परेशान मत हो!! देखो भैय्या को समय पे अस्पताल तो ले आये ना ,तो अब कुछ भी बुरा तो होगा नही ।।और दुसरी बात तुम चिंता कर कर के अपनी तबीयत बिगाड़ लोगे,जबकि अभी यहाँ सारी भागदौड तुम्हें करनी है।।"अभी प्रिया राज से बात कर ही रही थी कि ओब्सर्वेशन रुम का दरवाजा खुला और एक जूनियर डॉक्टर बाहर निकल कर आई__

"आप में से युवराज शर्मा के साथ कौन है"

रतन पिंकी और राज दौड़ पड़े "हम हैं ।"

"लिजिये ये कुछ दवाएं और इन्जेक्शन ले आईये , नीचे फार्मेसी है" उस लेडी डॉक्टर ने पर्ची रतन को पकड़ा दी और फिर राज की तरफ बड़ी गहरी नजरों से देखने लगी__"सुनो तुम राज हो ना !! राज शर्मा!!"

प्रेम और प्रिंस के साथ साथ पिंकी और प्रिया की भी आंखे फट गई,ये इतनी सुन्दर डॉक्टरनी राज को कैसे जानती है।।

"हां हम राज ही है!! अरे !! तुम ,,तुम तो रानी हो ना ,,अरे यहाँ कैसे ,,और हमारे भैय्या कैसे हैं,पहले ऊ बताओ।।"

"तुम्हारे भैय्या बिल्कुल ठीक है,उन्हे हाइपर ऐसिडिटी हुई थी,,जलन कुछ ज्यादा बढ़ने के कारण और गर्मी से डिहाइड्रेशन से बेहोश हो गये थे,,अब वो ठीक हैं ।।

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"का मतलब भैय्या को हार्ट उर्ट अटेक नई आया।"

राज की बात पर डॉक्टर हँस पड़ी "नही कोई हार्ट अटैक नही आया,,उनका ई सी जी और बाकी सारे टेस्ट नॉर्मल आये हैं ,,घबराने की कोई बात नही है।।

"तुम यहाँ कैसे रानी ?? तुम तो बाहर गांव चली गई रही पढ़ने"?? राज के सवाल पर रानी मुस्कुरा दी।।

"हां पढ़ाई पूरी हो गई,अभी हमे इंटर्नशिप करना था,तो हमने सोचा अपने शहर से ही किया जाये ,इसलिए हम यहीं आ गये।।और बताओ तुम क्या कर रहे अभी।।"

रानी को देख पहले ही गुलाबी हो रहे राज भैय्या उसके सवाल पे पूरे लाल हो गये,,अब उस डॉक्टरनी के सामने क्या बोलते कि पांच साल में भी स्कूल का साथ नही छूटा ,बेचारे जवाब सोचने में व्यस्त हो गये।।

अभी वो दोनो बात कर ही रहे थे कि पूरा का पूरा शर्मा खानदान वहाँ पहुंच गया,,रूपा और उसकी सास एक दूसरे से होड़ लगाती तार सप्तक में लयबद्धता के साथ रो रही थी,,पिंकी ने रूपा को और प्रिया ने रूपा की सास को सम्भाला, सब कुछ बता देने पर भी दोनो में से कोई चुप होने को राज़ी ना था ,तब प्रिया ने धीरे से रूपा के कान मे कहा__

"भाभी ,भैय्या एकदम ठीक है अब आप भी शान्त हो जाइये,वैसे भी रोने से आपका काजल फैल के पूरा चेहरा को काला काला कर दिया है,, आप तो हमसे भी अधिक कलूटी लग रही है।।"

रूपा काली और भयानक दिखने के डर से एकदम से चुप हो गई,और उसकी हालत देख उसकी सास को हँसी आ गई,और वो भी अपना रोना भूल गई ।।

कुछ देर पहले के चिंता के बादल छंट गये और शीतल मन्द समीर बहने लगी,,डॉक्टर ने बाहर आकर सबको मरीज से मिलने की इजाज़त दे दी।।

राधेश्याम जी युवराज के पैरों की तरफ बैठे और माताजी बेटे के सिरहाने बैठी,धीरे धीरे सर सहलाने लगी__"ये सब हुआ कैसे युव ?? पर अच्छा हुआ तुम समय पे अस्पताल पहुंच गये,अरे पर तुम यहां पहुँचे कैसे ,,मतलब राज तो हमसे कुछ मिनट पहले ही यहाँ पहुंचा था ना,तो तुम्हे यहाँ लेकर कौन आया??"

"जी बाबूजी !! एक लड़का आया था एजेन्सी में शायद कनेक्शन के लिये आया होगा,वही हमारी तबीयत बिगड़ते देखा तो फौरन अपनी गाड़ी में हमे डाल यहाँ ले आया,,हो सकता है बाहर हो,देखो तो राज कोई दुबला पतला सा लड़का खड़ा है क्या बाहर,बुला लाओ भीतर,आँख पे चश्मा लगा था,पढा लिखा टाईप का दिख रहा था।।"

अभी युवराज ने अपनी बात पूरी भी नही की थी कि डॉक्टर रानी ने कहा__पढा लिखा टाईप का दिख नही रहा था,वो बहुत पढा लिखा है,,जी आपको अस्पताल लेकर आने वाला कोई और नही अभी अभी आई ए एस का इंटरव्यू अच्छी रैंक से पास करने वाले भावी कलेक्टर रत्नप्रकाश हैं,आप लोग मिल कर जल्दी से धन्यवाद दे दीजिये वर्ना आपके धन्यवाद ,

देने के पहले ही कही मसूरी ना उड़ जाएँ ।।""

तब तक राज रतन को अन्दर लेकर आ गया ,, राधेश्याम ने उठ कर रतन के दोनो हाथ पकड़ लिये __"बेटा कैसे धन्यवाद कहूँ आपको ,,आपने जो किया है उसके लिये धन्यवाद बहुत छोटा शब्द है,,वैसे बेटा कौन गांव के हो ,,किसके घर के हो,,हियाँ तो हम लगभग सभी को भले से जानते हैं ।।"

"अंकल जी धन्यवाद की ज़रूरत नही है,,ये तो मेरा फर्ज था,मै नही होता तो कोई और होता जो इन्हें सही समय पर अस्पताल ले आता।।""

"नही दोस्त !! तुमने वाकई बहुत उपकार किया,,कुछ समय के लिये मुझे भी लगा की मुझे हार्ट अटैक आ गया है,,अच्छा डॉक्टरनी साहिबा कह रही थी ,,तुमने आई ए एस निकाल लिया है, ये तो बहुत खुशी की बात है,ये हमारी छोटी बहन है पिंकी . इसका भी इंटरव्यू में हो गया है सेलेक्शन !!अच्छा है हम लोग भी सोच में थे इतनी दूर मसूरी अकेले कैसे भेजेंगे ,अब कम से कम कोई जान पहचान का तो रहेगा।।"

युवराज के ऐसा बोल के चुप होते ही राज जो अब तक सबसे पीछे चुपचाप खड़ा था ने अचानक अपना मुहँ खोला__" रतन गुरू !! तुम्हें तो ट्रेनिन्ग में जाने मे अभी टाईम है ना।""

"बस पन्द्रह दिन में जाना है मसूरी।।"

,

"हां तो हमारी बहन की सगाई तक रुक जाओ गुरू,,उसके बाद चले जाना।।"राज की इस बात का वहाँ सभी ने समर्थन किया,कुछ देर युवराज के साथ बैठ कर घर के लोग वापस चले गये,,जब कमरे में अकेले युवराज और राज थे,राज बडे भैय्या के लिये जूस लेकर आया __"राज पता है हम हमेशा से एक बात सोचते थे"

"क्या भैय्या??"

"हमे ना हमेशा से पिंकी के लिये ऐसे ही लड़के की तलाश थी।।"

"कैसे लड़के की भैय्या??"

"अरे रतन जैसे लड़के की यार!! कितना सोच सोच के बात करता है,,हर शब्द नाप तौल के बोलता है, बिल्कुल सुलझा हुआ समझदार सा लड़का है,,हमारी पिंकी के जैसा ,है ना राज . और देखो पिंकी जैसे ही प्रशासनिक सेवा में भी जा रहा है!! कितना ही अच्छा होता अगर ये लड़का पहले मिल गया होता ,,है ना??"

"तो अभी भी का बिगाड़ होई भईया,,अगर आप चाहो तो सब कर सकते हो,""

"अरे कैसी बात कर रहे हो राज !! अब तो शादी तय हो गई है पिंकी की ,अब कुछो नई हो सकता भाई।।

वर्ना हमारा ससुर हमारा गला पकड़ लेगा।।"

,

दोनो भाई साथ साथ हंसने लगे।।।
 
युवराज के सकुशल घर वापसी से घर पे फिर एक बार उत्सव सा माहौल बन गया।।वैसे भी शादी ब्याह का घर त्योहारों का घर लगता है,,पन्द्रह दिन बाद होने वाली सगाई की तैय्यारियों में पूरा शर्मा परिवार डूब गया,माहौल बिल्कुल दशहरा दिवाली जैसा हो गया।।

हर कोई किसी ना किसी काम मे व्यस्त था,प्रेम प्रिंस जैसे लोग सिर्फ व्यस्तता का दिखावा भी कर रहे थे।।घर की औरतें रोज किसी ना किसी वस्तु को खरीदने बाज़ार जा रही थी,फिर भी ज़रूरी सामान की सूची में कोई ना कोई कमी रह ही जाती थी।।।सगाई के तुरंत बाद ही वर को तिलक चढाना था ,उसकी भी तैय्यारियाँ साथ ही चल रही थी, कहीं नारियल पे सोने का पत्तर चढ़ाया जा रहा था कही,छोटी छोटी सोने और चांदी की सुपारियां बनवाई जा रही थी,,चांदी के पान के पत्तों पर शर्मा सरनेम उकेरा जा रहा था।।

राधेश्याम अपने छोटे भाई के साथ बैठे 500,100और 50के अलग अलग लिफाफे तैयार करा रहे थे,अरे भैय्या सभी को समधि के बराबर का लिफाफा थोड़े ही पकड़ा देंगे।।

उनकी श्रीमती जी के तो काम की फेहरिस्त कम ही

नही पड़ रही थी,,बेचारी रसोइये को देने के लिये रसद निकालने भण्डार में जाती ,और वहाँ फैले आलू प्याज को देख उन्हे याद आ जाता कि आलू तो अभी और दस बारह किलो मंगाने पड़ेंगे,मिज़ाज़ ये हो गया था कि बेचारी एक काम हाथ मे लेती उसे पूरा किये बिना ही दूसरे में भिड़ जाती,,आखिर घर भर की इकलौती बिटिया की सगाई थी,, अच्छा हुआ समय रहते ही उन्होनें बडियां तोड़ ली थी ,और पापड़ अचार बना कर रख छोड़े थे,क्योंकि जैसे समधि हडबडी मचा रहे थे,उससे उन्हें लग रहा था कहीं तिलक के दिन ही शादी की तारीख भी ना निकाल दें।।

रूपा को जितना काम करना आता था,उससे अधिक दिखाना आता था,,वो किसी भी बड़े बुज़ुर्ग के आते ही अपने पल्लू को कमर पे कस कर इधर से उधर दौड़ चुटकियों में ऐसा माहौल बना जाती जैसे अब तक वही काम में जुटी थी।।रसोइये की तरफ वैसे तो उसका ध्यान ना रहता पर जब देखती सास आस पास से गुज़र रही तो हाथ हिला हिला कर उसे उपदेश देना शुरु कर देती "क्यों जी महाराज किलो भर घी का तो आपने मोमन ही डाल दिया,,अब आपकी कचौड़ियां खस्ता होंगी कद्दू,,ज़रा और मैदा गून्थिये,हमारी मम्मी हमको सिखाई थी कि मोमन इतना पड़े जे हाथ से लड्डू बंध जाये,,पर आपका तो यहाँ मैदा कम घी घी बस हुआ पड़ा है,,और बालूशाही के लिये मैदा अलग गुन्थीयो उसके लिये हम दही भिजा देंगे,,और एक बात सुन लो बूंदी मोटी ना छान देना,,कोई नही खाता यहाँ सब को मोतीचूर ही भावे है।।"

कनखियों से जब देख लेती की सासु जी निकल गई हैं तो वापस अपने साज शृँगार में लग जाती, सगाई से ठीक 2दिन ,

पहले उसकी फुलझडी सी बहन भी आने वाली थी,इसिलिए रूपा का उत्साह अपने चरम पे था।।

पुरूष बाहर के कामों में व्यस्त थे,,इस सब के बीच प्रिया की तरकीब के अनुसार रतन को युवराज भैय्या के साथ कर दिया गया था।।

युवराज जिस किसी काम से बाहर जाता ,रतन को भी साथ ले जाता।।स्वभाव से अन्तर्मुखी रतन अधिकतर चुप ही रहता,जहां आवश्यकता हो वहाँ कम बोलता और जहां आवश्यकता ना हो बिल्कुल ही नही बोलता,,पर हाँ जब बोलता तो अपनी बुद्धिदीप्त बातों से युवराज को प्रभावित कर जाता।।

रतन असल मे बुद्धिमान था उसके स्वभाव में छल कपट जैसी बातों का सर्वथा अभाव था,सब कुछ जानते हुए भी उसने एक बार भी युवराज को जान बूझ कर प्रभावित करने का कोई प्रयास नही किया,,,लेकिन सरस्वती के भक्त बुद्धि के अनन्य उपासक युवराज ने असली हीरा पहचान ही लिया।।

एक एक कर दिन बीतते गये, सगाई के ठीक 2दिन पहले युवराज राज और रतन अँगूठी खरीदने गये,,दुकान पर बैठे तीनो अलग अलग तरह की अँगूठीयाँ देख रहे थे तभी युवराज ने कहा__

"मैं सोचता हूँ हीरे की अँगूठी लेना सही रहेगा,, आजकल तो हीरे का ही चलन है,लोग पसंद भी करते हैं,क्यों राज ठीक है।।

"बिल्कुल सही बात भैय्या ,,आपको जो सही लगे,हमरा तो ,

ई सबमें दिमाग कम चलता है।।"

"दिमाग तो चलता है भाई,तुम चलाना नही चाहते हो,,बस अपनी पहलवानी मे खुश रहते हो,,बात ये है।।।पर हम ये भी सोच रहे कि कहीं लड़का और उसके घर वालों को पसंद नही आयी तो।।"

राज ने पूछा"काहे पसंद नही आयेगी भैय्या,आखिर आप पसंद किये हैं,,पसंद तो आबे पड़ी ।"

"अरे मेरे छोटे . तुम हमे इतना मानते हो कि हम जो कह दे तुम्हारे लिये पत्थर की लकीर है,पर वो लोग हमारे होने वाले समधि हैं,बेटा हो सकता है उनको हीरा ना पसंद आये,हो सकता है वो लोग ये सोचे कि सोने के जितनी हीरे की रीसेल वैल्यू नही है।।मतलब दुबारा बेचने पर कम कीमत मिलेगी, क्यों रतन सही कहा ना हमने।।"

"भैय्या अगर लड़का और उसके घर वाले सगाई की अँगूठी का मोल देखने लगे और ये देखने लगे की उसकी रीसेल वैल्यू क्या है,तो फिर ऐसे लोगों को देने के पहले आपको कुछ भी सोचने की क्या ज़रूरत,4 Question mark,मेरे खयाल से कुछ चीज़ों की कीमत नही आंकी जा सकती है,,वो कोई मूर्ख ही होगा जो अपनी सगाई की अँगूठी को बेचेगा ,तो रीसेल का सवाल ही नही उठता,वैसे मेरा भी इन सब बातों में दिमाग कम चलता है,,जैसा आपको सही लगे ,वही कीजिए।।"

"लाख रुपये की बात कही मित्र,,बस यही सोच होनी ,

चाहिये,,अच्छा ज़रा इसे पहन के देखो,,क्योंकि लड़का तुम्हारे डील डौल का ही है,,अगर तुम्हे सही आई अँगूठी तो उसे भी आ ही जायेगी।।"

ऐसा कह कर युवराज ने अँगूठी रतन को पहना दी ,अँगूठी बिल्कुल सही नाप की आई,,रतन और राज को वहीं छोड़ युवराज लेड़ीस काऊंटर की ओर चला गया।।

सारा सामान लिये तीनो घर निकल गये,,घर की औरतों के लिये भी कुछ नये गहने युवराज ने ले लिये थे,पिंकी के लिये कुछ लेना हो तो रूपा के लिये उससे डबल नही भी लिया तो उतना तो लेना ज़रूरी ही था,वर्ना वो एक अलग बवाल मचा देती।।

सगाई के एक दिन पहले शाम के समय शर्मा जी सारी तैय्यारियों का जायजा ले रहे थे।।

पूरे घर को गेंदें की फूल मालाओं से सजा दिया गया था,,छत पर और बाहर बगीचे में चमकीला शामियाना टांग दिया गया था,,बिजली के छोटे छोटे लट्टू और रंगीन रोशनियों से घर जगमगा गया था, सब तरफ लोंगो की आवाजाही थी,,मेहमानों से घर पटा पड़ा था,मऊ वाली बुआ जी सपरिवार पधार चुकी थी,,खंडवा वाले मामाजी रात तक पहुंचने वाले थे,,किसी की खातिर में कोई कमी ना रह जाये यही विचार करते राधेश्याम ऊपर नीचे सब जगह का जायजा ले रहे थे,,तभी प्रेम वहाँ से जल्दी जल्दी बाहर की ओर जाता दिखा ,जिसे रोक के उन्होनें एक नये काम का ऑर्डर थमा दिया ,,बेचारा अंकल जी की बात मान उनका काम करने निकल चला,,काम निपटा के वापसी में उसे दो घन्टे से ,

अधिक हो गया,,तभी उसका फ़ोन बजा__

"कहाँ??"भैय्या जी के इस सवाल पर प्रेम हडबडाते हुए बोला "बस भैय्या जी निकल रहे।"

"अबे ऊ जब पत्ता गोदाम से निकल घर पहुंच जायेगा तब जायोगे उठाने ,याद तो है ना का करना है।।"

"हाँ भैय्या जी !! हम बस प्रिंस को लिये निकल ही रहे,,आप निश्चिंत रहे,आज कोनो गड़बड़ नही होने देंगे।।"

प्रेम का आज एक बार फिर उस दिन जैसे ही जी घबड़ाने लगा,फिर प्रिंस के समझाईश से और थम्स अप पी कर उसको थोड़ा राहत हुआ और वो अपनी हीरो हौंडा में प्रिंस को बैठाए बीड़ी पत्ता गोदाम की ओर निकल लिया।।
 
इधर रतन और युवराज कुछ विशेष तैय्यारियाँ करने के बाद युवराज के कमरे में बैठे चाय पी रहे थे।।

रतन को जाने क्यों इस तरह छल कपट से पिंकी का हाथ पाना शुरु से ही रूच नही रहा था,पर सहज में ही किसी की अवज्ञा करने का स्वभाव ना होने के कारण वो इतने दिनो तटस्थ बना रहा,पर आज जब इस सारे नाटक का अन्तिम सीन फिल्माया जाना था,अपनी पूरी ताकत और हिम्मत सहेज के उसने युवराज के सामने अपना मन खोल कर रख दिया, शुरु से लेकर अंत तक का सारा किस्सा उसने युवराज को कह सुनाया,इसी सब में अपनी जाति और कुल को भी बताना वो नही भूला,सारी बातें बताते अंत मे उसकी आंखों में ,

अपने होने वाले अपमान और पिंकी का हाथ ना मिल पाने की असमर्थता से आंसू छलक आये,जिन्हें उसने युवराज से छिपाकर पोंछ लिया लेकिन इतना छिपाने पर भी युवराज ने वो देख लिया जो उससे छिपाने की कोशिश की गई थी,,रतन सब बता चुका तब धीरे से उठ के वहाँ से जाने को हुआ,पर तभी युवराज की कड़कती आवाज़ उसके कानों में पड़ी ।।

"ये अच्छा न्याय है आपका कलेक्टर महोदय . खुद गलती की ,गलती मान भी ली और बिना सज़ा सुने ही चल दिये ।।"

"अरे नही भैय्या ऐसी कोई बात नही,,आप जो सज़ा देंगे मंजूर है।।"

राज भैय्या इन सब बातों से अंजान कुछ गुनगुनाते हुए वहाँ पहुँचे और रतन को कंधो से पकड़ कर झिंझोड दिया"का हो कलेक्टर साहब आज बड़े चिंतित नज़र आ रहे,,का बात है।"

युवराज राज को गहरी नजरों से घूर रहा था इस बात पे राज का कोई ध्यान नही गया,उसका पूरा ध्यान अपने फ़ोन पे था,,क्योंकि जैसे ही प्रिंस और प्रेम का फ़ोन आयेगा कि लड़के को उठा लिया गया है,वैसे ही राज को घर से निकलना था,पर तय समय से लगभग बीस मिनट ऊपर हो चुका था और प्रेम का कोई फ़ोन नही आया था,,आखिर थक हार के राज ने खुद ही फ़ोन लगाने की सोची__

"का हुआ राज?? किसी के फ़ोन का इन्तजार कर रहे हो ,लगता है।।"

,

"नही भैय्या,ऐसा तो कोई बात नही।।"

"तो फ़ोन को काहे घूर रहे बार बार,,,दीपिका पादुकोण का स्क्रीन सेवर रखे हो का।"युवराज के ऐसा कहते ही लजा के राज ने फ़ोन नीचे रख दिया तभी राज का फ़ोन बज उठा__

"हाँ बोलो" राज के फ़ोन उठाने से पहले युवराज ने फ़ोन लपक लिया

"भैय्या जी ऊ लफंडर तो वहाँ मिला नही,अब का करे,कहाँ जाये उसे उठाने।।"

"कौन नही मिला बे ??"युवराज की ललकार सुन के प्रेम घबरा गया और फ़ोन प्रिंस को पकड़ा दिया ,,प्रिंस ने सोचा प्रेम राज भैय्या से डर गया,उसने सोचा कौन सा इतने दूर से चपत लगा पायेंगे तो बिना डरे सविस्तार सारा प्रकरण कह सुनाया__"भैय्या जी हम लोग टाईम से पहुंच गये थे पर ऊ ससुर हमरे पहुँचने के पहले ही खिसक लिया ,,अब का करे भैय्या जी,,जैसन आपकी आज्ञा हो।।"

"दोनो के दोनो इसी वक्त घर आ जाओ,हम दंडा लेकर तैय्यार खड़े हैं तुम दोनो की पूजा करने।" फ़ोन काट कर युवराज राज की तरफ मुखातिब हुआ।।

"ये का बचपना लगा रखे हो राज?? तुमको का लगता है,ये सब कर के कोई फायदा होना है, और तुम्हारे वो जाहिल ,

पण्टर किसी काम के हैं भी,अरे इतना सब नाटक करने की जगह एक बार हम से कहना तो था,,अब जब दोनों परिवार का सब ठीक ठाक हो गया तब तुम लोगों ने ये पर्पंच लगा दिया, अब जो होगा कल देखा जायेगा,अभी तुम जाओ रतन को उसके घर छोड़ आओ,,पर रतन कल बिना भूले सबेरे से चले आना,रातों रात कहीं भागने की जुर्रत की तो फेर हम दिखा देंगे की इस शहर का असल कलेक्टर कौन है।।"

राज को अचानक से इतनी जटिल बात पल्ले नही पड़ी,उसे तब तक पता भी नही था कि रतन सब कुछ भईया को बता चुका है,,वो चुपचाप सर झुकाये रतन के साथ बाहर निकल गया।।

वो रात सभी की आंखों ही आंखों में कट गई,राधेश्याम जी और उनकी धर्मपत्नी को अति उत्साह के कारण नींद नही थी,तो वही राज और प्रिया को प्लान फेल होने के कारण,,दुसरी तरफ पिंकी और रतन ने अपने दुर्भाग्यपूर्ण भविश्य के खाके को सोच सोच कर अपनी नींद को अपना दुश्मन बना लिया था,,,घर भर में कोई था जो चैन से सो रहा था ,तो वो था युवराज हालांकी रूपा अपनी बहन के ना आ पाने के कारण जली कटी काफी देर तक जागती रही पर जागरण के कारण सुबह चेहरे पर दिखने वाले आलस्य को दूर भगाने वो सो गई ।।

28 Asterisk

सुबह से तो किसी को सांस लेने की भी फुरसत नही ,

थी ,पन्द्रह दिन की तैयारियों के परीक्षाफल का समय था,लड़के वाले सगाई के लिये ठीक 11बजे घर आने वाले थे,,सगाई का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भोजन था और उसके बाद वर पक्ष की विदाई . उसके बाद शाम को वधु पक्ष को तिलक चढ़ाने जाना था शाम लगभग आठ बजे।।

पूरे दिन का कार्यक्रम पूर्वनियोजित था,इसमे किसी प्रकार की कोई शंका शुबहा नही था।।

सब यंत्रवत अपने अपने कार्य में जुटे थे कि राधेश्याम जी का फ़ोन घनघना उठा__

"जी नमस्कार!! हाँ हाँ!! जी सब तैयार है,बस आप लोगों की प्रतीक्षा है,,क्या 3 Question mark ऐसा कैसे हो सकता है?? नही नही आप . अभी राधेश्याम अपनी बात पूरी भी नही कर पाये कि दुसरी तरफ से फ़ोन कट गया।।

राधेश्याम अपना सर पकड़ कर वहीं सोफे पर निढ़ाल हो गये,युवराज और राज दौडे चले आये ,,तुरंत पानी मँगा कर उन्हें पिलाया गया,, श्रीमती जी ने पूछा __"किसका फ़ोन था ,क्या हो गया,,सब ठीक तो है ना??"

"लड़के वाले अभी नही आ पायेंगे,उन्हें कुछ आवश्यक काम आ पड़ा है,,इसीसे सगाई टालने की बात कह रहे हैं ।।"

जितने धीमे शब्दों में राधेश्याम जी ने कहा,उतने ही तेज़ आवाज़ में एक ज़ोर की हाय बोल कर श्रीमती जी भी दूसरे सोफे पर निढ़ाल हो गई ।।

,

राज गहन आश्चर्य से अपने पिता को देखने लगा

"क्या कहा बाऊजी,ऊ लोग सगाई तोड़ रहे।"

"पगला गये हो का राज?? सगाई तोड़ नही रहे ,बाद में करने बोल रहे,,पर हम ई सोच रहे कि अब सब नातेदारों को का मुहँ दिखाएँगे ,सब तो सगाईये के नाम पे इकट्ठा हुए हैं,,हे भगवान का परीक्षा ले रहे हो हमारी।।"

"बाऊजी हम कुछ कहना चाहतें हैं आपसे।"युवराज ने इशारे से सब को बाहर जाने कहा और कमरे के किवाड़ बन्द कर दिये।।

कमरे के भीतर युवराज अपने पिता और चाचा से कुछ गहरी परिचर्चा में लग गया।।
 
इधर पूरे घर में सन्नाटा छाया था,,सुबह से शुभ अवसरों पर जो एक मीठी तान सी गूंजती है,बिना किसी शहनाई के भी ,वो अचानक एक नीरव स्तब्धता में बदल गई ।।घर में कुहासा छा गया,,अब तक घर का हर एक सदस्य एक विशिष्टता अनुभव करता अपने अलग अलग नखरों में डूबा था,चाहे वो घर की बहू हो चाहे रसोईया अब सभी एक गूढ़ मण्डप में छिपे छिपे से फिर रहे थे,सभी कछुए से अपने अपने खोल में दुबक गये थे ,,इतनी तैयारी इतनी रंगीनियाँ इतने मेहमान ,सब का क्या किया जाये,,कैसी शर्मनाक स्थिति से अवगत होना पड़ रहा था।।हर किसी के मन, मे अलग अलग सवाल दौड़ रहे थे।।इस परिस्थिति से दो चार होने के ,

बाद राज को परिस्थिति की विकटता का एहसास हुआ था,,अब जाकर उसे असल में समझ में आया था कि किसी मंगल उत्सव का होते होते रुक जाना कैसा दुखद और कैसा मार्मिक होता है,,अब उसे उस परिवार और लड़के पे क्रोध आ रहा था।।

उसने अपने दिमाग पर एक बार भी ज़ोर डाल कर ये सोचने का कष्ट नही उठाया कि अन्दर बडे भैय्या किस जोड़ घटाव में लगे हैं।।

अन्दर युवराज अपने पिता से जो भी आग्रह या परामर्श में लगा हो पर बाहर राज प्रेम और प्रिंस की खबर ले रहा था कि __"जब तुम दोनो नहीं उठाये तो फिर लड़का वाले अचानक सगाई को टाले कैसे बे हमको लड़का वालोँ पर गुस्सा आ रहा है,ई का बात हुआ ,का हमरा कोनो इज्जत नही है,,ऐसन अपन मर्ज़ी से जब मन किया रिस्ता जोड़ दिया जब मन किया तोड़ दिया,,,चलो गुरू ज़रा खबर लेकर आये कि आखिर माजरा क्या है।।"

राज अपने चेलों को लेकर निकलने ही वाला था कि दरवाजा खोल कर युवराज बाहर निकल आया

"राज रुको . किसी को कहीं जाने की ज़रूरत नही है,,पिंकी का सगाई आज ,अभी के मुहूर्त में ही होगा ,,वो भी रतन से।।रतन तुम से बिना पुछे हम ये तय कर दिये,,अगर तुम्हें कोई आपत्ति हो तो अभी बता दो।"

रतन की आंखों में आंसू छलक आये ,वो आगे बढ़ कर ,

युवराज के पैर छूने झुका कि उसे युवराज ने अपने गले से लगा लिया,और राज की तरफ घूम कर कहा__"राज तुम फौरन गाड़ी निकालो और रतन के घर वालों को लेकर आ जाओ,रतन घर पर बोल दो किसी तरह की तैयारी की उन्हे ज़रूरत नही ,बस फौरन चले आयें,हमनें उसी दिन तुम्हरी तरफ से भी पिंकी के लिये अँगूठी खरीद ली थी।।।"

घर पे फिर एक बार अनदेखी शहनाई की मीठी करुण स्वर लहरी गूँज उठी,,घर की औरतों ने ज़रा ना नुकुर करना चाहा पर राधेश्याम जी के अटल आदेश पर सभी झट तैयार हो गये।।

सगाई का कार्यक्रम शुरु हो गया,,पिंकी और रतन प्रसन्न मन प्रसन्न तन एक दूसरे को अपनाने की प्रक्रिया में आगे बढ़े,दोनो ने एक दूसरे को अँगूठी पहना दी।।

सभी प्रसन्न थे बस एक तरफ राज ज़रा गुस्से में खड़ा था तभी युवराज आकर उसके पास खड़ा हो गया।।

"का बात है आज तो भीम बड़ा गुस्से में नज़र आ रहा,अरे जो तुम सब चाहते थे वही तो हुआ,अब काहे मुहँ फुलाए खड़े हो।।"

"कुछ नही भैय्या,लड़के वाले अपना मर्ज़ी से सगाई से मुहँ फेर लिये इसिलिए थोड़ा दिमाग खराब है, बाकी तो सब ठीके हुआ।।"

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"अरे दिमाग है भी तुम्हारा?? अब सुनो हमारा बात।

हम जिस दिन पहली बार रतन से मिले उसी दिन हमे लड़का पसंद आ गया था,,हम उसी समय वो पप्पु के बारे में भी पता करा रहे थे,हमारे गुप्तचरों ने उसका अच्छा रीपोर्ट नही दिया था,हमें पता चल गया था कि लड़का खाता पीता सब है।।

जिस दिन तुम्हारे ये दोनों घोन्चू हमारे ऊपर हमला किये थे उसी दिन हम ये दोनो को पहचान लिये थे,,बेटा . बड़े भाई हैं तुम्हारे,हम धीरे से गौर किये तो हमे समझ आने लगा कि गुरू तुम रतन के लिये फील्डिंग कर रहे हो।।

बस हम भी मजे ले रहे थे,,पर एक बात थी रतन वाकई खरा सोना निकला ,हमसे झूठ नही बोल पाया और आखिर सब कुछ हमे सच सच बता दिया और बस हमारा दिल जीत लिया।।

जिस दिन तुम्हारे ये पण्टर दूल्हे को अगवा करने गये उसके पहले ही उसको हमारे अनुचर लेकर निकल गये,,दूल्हा एक नम्बर का बेवडा था,बस उसे इतनी पिलाई की वो दूसरे दिन सुबह 11तक सोता ही रहा,उसकी हालत सगाई के लिये अवस्थियों के घर आने की थी ही नही,बस शर्मिंदगी से उसके बाप ने बाऊजी को तिथी टालने का फ़ोन घुमा दिया।।

मौके का फायदा उठा कर हमने बाऊजी और चाचा को रतन के उजले पक्ष से परिचित करा दिया,हालांकी जात पात तो उनके अन्दर इतना घुसी है कि उसकी जड़ें खोदना मुश्किल था पर चाचा ने हमें उबार लिया,,सबसे पहले चाचा ही तैयार हुए अपनी पिंकी के आई ए एस दूल्हे के लिये।।

फिर चाचा और हमने बाऊजी को हाथ पैर जोड़ कर मना ही लिया,बस एक छोटी सी शर्त बाऊ जी ने तब भी रख दी कि शादी के कार्ड मे रतन अपना सरनेम नही डालेगा,अभी ,

तो हमनें हाँ कर दिया,,फिर देखते हैं क्योंकि अभी तो सगाई के बाद दोनो को ट्रेनिंग के लिये निकलना है,,बाद की बाद में देखेंगे।।

राज की खुशी का ठिकाना नही रहा,पर वहीं उसे अपनी बेवकूफी पे झेंप भी लगी ,वो अपने बडे भाई के पैरों में झुक गया,युवराज ने उसे उठा कर अपने सीने से लगा लिया।।

मनभावन समय में उचित मुहूर्त में सगाई हसीं खुशी के माहौल में संपन्न हो गई ।।।,
 
पिंकी और रतन की सगाई संपन्न हुई।।।सारे लोगों को व्यस्तता का जो बहाना मिला था चूक गया,, सारे रस भरे दिन चूक गये,रसोइये ने अपने साजो सामान को समेटा ,तगडा नेग लिया और चलता बना,एक एक कर मेहमानो ने भी जाना शुरु कर दिया।।

पर ऐसे मौकों पे कुछ ऐसे मेहमान भी आते हैं,जो आते ही लम्बा टिकने के लिये हैं,,ऐसी ही एक मेहमान थी राज की अम्मा की चचेरी बहन शन्नो मौसी।।।

शन्नो मौसी का वहाँ टिकने का मुख्य उददेश्य था,राज भैय्या की शादी।। एक तो कान्यकुब्ज ब्राम्हण परिवारों में मिलने वाला ऊँचा दहेज उसपे उनकी सहेली की ननंद की भतीजी जिसके फूफा स्वयं जज महोदय . अब ऐसा जानदार रिश्ता कोई हाथ से निकलने दे सकता है क्या,,कम से कम शन्नो मौसी जैसी व्यवहार कुशला और सामाजिक महिला तो बिल्कुल नही।।

राज की अम्मा पहले ही रूपा की बहन रेखा को लेकर परेशान थी,अब शन्नो जिज्जी एक नया फसाद लिये खड़ी थी,,पर इन सबसे बेखबर राज भैय्या अपने में मगन थे।।।

राज भईया का सारा दिन जिम मे पसीना बहाने बहवाने मेंनिकल जाता और रात थोड़ा बहुत किताबें खोलने में ।।

राज भैय्या ऐसे जीव थे जिन्हें ज्यादा सोचने की आदत नही थी,जो बात उन्हें एक बार में समझ नही आती,उसे वो दुबारा पलट के भी नही देखते।। ऐसा नही था कि वो दिमाग से पैदल थे,पर बात ये थी कि उन्होनें आज तक ये नही जाना था कि दिमाग संभाल कर तिजोरी में रखने की वस्तु नही बल्कि दिल खोल कर खर्च करने की चीज़ है,और जितना ही उसे खर्चोगे उतनी ही बढेगी।।पर उनकी इस खूबी को प्रिया ने पकड़ लिया।।।

प्रिया इतने दिनों की राज की संगत में ये बात समझ गई कि राज को पढ़ाई बोल कर पढ़ाने पर उसका डब्बा गोल ही होना है,इसिलिए उसने राज को अलग ढंग से पढ़ाना शुरु कर दिया,,इतिहास में उसने सिलसिलेवार सन लिख कर उन उन काल में हुई घटनाओं दुर्घटनाओं की कहानी सी तैयार की और जिम में वर्क आउट करते हुए वो राज को सतत उन कहानियों का स्मरण और पाठ कराती,जल्दी ही राज को सारा सब कुछ कंठस्थ होने लगा,कब प्रथम महायुद्ध हुआ,किसके बीच हुआ,,पहली सभ्यता का नाम,गान्धी जी का कब स्वदेश आगमन हुआ से लेकर कब गोलमेज सम्मेलन हुआ,और कब हमे आज़ादी मिली,कब हमारा संविधान तैयार हुआ।।

जब एक बार किसी इन्सान को दिमागी मेहनत करने की आदत हो जाती है तो इससे इतर अन्य कोई कार्य रुचिकर नही लगता।।ये सब पढ़ते हुए राज को ऐसी रूचि उत्पन्न हुई कि अब उसकी दिमागी खुराक के लिये बारहवीं के सिलेबस की रसद कम पड़ने लगी,अब राज खोज खोज कर पढ़ने योग्य अयोग्य सभी कुछ पढ़ने लगा।।।

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" हमको तो लगने लगा है,हम इत्ता पढ़ डाले हैं कि अगर हम कौन बनेगा करोड़पति खेलने गये तो हम पूरा एक करोड़ एके बार में जीत डालेंगे ऊ भी बिना लाईफ लाइन के,,क्यों गुरू जी।।"

राज ने प्रिया से हँसके पूछा,पर जवाब मिला प्रेम से .

" बिल्कुल सही बोले भईया जी,औ ई बसुरीया इत्ता बजन कम कर डाली है की अगर मिस इंडिया बनने गई तो अकेली ही सब जीत डालेगी,ऊ का का होता है ना मिस वर्ड,मिस ब्रम्हाण्ड औ जाने का का।।"

" हमारे लिये काहे इतना कड़वे हो प्रेम,,हमने सुना था लड़के लड़कों से जलतें हैं,लड़कियाँ लड़कियों से,पर तुम तो हमी से जले कटे बैठे रहते हो,,दिमाग को थोड़ा ठंडा रखा करो।।"

प्रिया ऐसा बोल कर वहाँ से उठ गई,और दिनों की तरह उसके चेहरे पे वो उल्लास नही दिखा राज को, जिसके कारण राज भी उठ कर उसके पीछे पीछे चला आया।।

" क्या हुआ प्रिया? कोई परेसानी है?? आज तुम थोड़ा चिंतित दुखी परेसान लग रही हो।।"

" समझ गये कि हम परेशान लग रहे पर तुमको तीन पर्यायवाची बोलने की क्या ज़रूरत??आजकल हर जगह अपनी परीक्षा की तैयारी में ही भिडे रहते हो।।" ऐसा बोल ,

कर प्रिया मुस्कुरा पड़ी और राज शरमा के नीचे देखने लगा।।

" प्रिया हम बहुत दिनों से एक बात सोच रहे थे,तुम हमारी सबसे करीबी दोस्त बन गई हो,तुमने हमें इतना अच्छे से पढ़ाया है कि हमको अब पढ़ाई लिखाई अच्छी लगने लगी है।" प्रिया खड़ी मुस्कुराती रही

" हम और कुछ तो दे नही सकते,,आज तुमको एक छोटा सा पार्टी देना चाहतें हैं ।""

" अरे अभी पास तो हो जाओ,,फिर हम तुमसे पार्टी भी ले लेंगे।।"

" हमारे पास होने की पार्टी तो तुम दोगी हमे,देखो ई दू तीन महीना में तुम भी दुबला गई और हम भी पढ़ लिख लिये तो अब हमको लगता है पार्टी तो देना ही पड़ेगा।।"

प्रिया के मन की उदासी राज के पकड़ में नही आई, अभी वो दोनो खड़े बात कर ही रहे थे कि डॉ रानी वहाँ चली आई ।।

" कैसे हो राज,क्या चल रहा आजकल!! बहुत दिन से तुम दिखे नही तो हमनें सोचा हम ही मिल आते हैं तुमसे ।।"

उन दोनों को बातों में उलझा छोड़ प्रिया वहां से निकल गई ,,रानी और राज भईया वहीं जिम की सीढियों पर बैठ गये,,रानी दुनिया भर की तमाम, बातें राज को बताती रही,बीच बीच में " सुन रहे हो ना" " अच्छा बताओ मैने ,

अभी अभी क्या कहा था" जैसे क़्विज़ कॉंटेस्ट भी खेलती रही पर प्रिया का इस तरह चुपचाप चले जाना राज को बुरी तरह खलने लगा,वो दूर तक प्रिया को जाते हुए देखता रहा,, बार बार राज का मन हुआ कि जाकर प्रिया को रोक ले और पूछ ले कि ऐसे बिना कुछ बोले कैसे चली गई ,पर वक्त की नजाकत देखते हुए वो चुप चाप बैठा रानी की बातों को सुनता रहा।।

लोग कहतें हैं पहला प्यार कभी नही भूलता,अब लोग कहतें हैं तो ऐसा होता ही होगा पर लोगों के साथ ही,, क्योंकि राज के साथ ऐसा कुछ नही हुआ।।

राज ने जितनी शिद्दत से रानी से अपनी अल्हड़ सी उम्र में प्यार किया था,उतनी ही शिद्दत से आज वो उस प्यार को भूल बैठा।।रानी में आज भी कोई कमी नही थी,खूबसूरत तो पहले ही थी अब डॉक्टरी की पढाई के आत्मविश्वास ने चेहरे को एक अलग लुनायी से रंग दिया था,बावजूद इसके अब राज को रानी में सिर्फ एक अच्छी सच्ची दोस्त ही नज़र आ रही थी।।

प्यार मोहब्बत ऐसा एहसास होता है कि जो करता है और जिससे करता है,उसे बताने और जताने की ज़रूरत नही रह जाती,,और जब वही प्यार करने वाला प्यार नही करता है,तब तो लगता है जैसे सारा संसार चीख चीख कर आपको ये बताने पे अमादा है कि ' अब ये तुझसे प्यार नही करता'।।

रानी भी राज की भावनाओं को समझ चुकी थी,पर उसे कोई शिकायत ना थी,या शिकायत करने कि अवधि वो पार कर चुकी थी।।अपने मन की दुविधा को खुद में ही समेटे उसने बहुत सारी बातें राज से करी,ये जानते हुए भी कि राज ,

उसके पास बैठा हो कर भी प्रिया के साथ उसके घर तक चला गया है।

" राज एक बात पूछें तुमसे?अरे हमे सुन भी रहे हो या नही?? माना की बहुत पतली हो गई है तुम्हारी मुटकि पर अभी भी हमसे तो मोटी ही है।" रानी अपनी ही बात पर हंसने लगी,राज चौंक कर उसे देखने लगा__ " क्या कहा तुमने रानी,अच्छा सुनो हमे कुछ काम से घर जाना है,चलो तुम्हें तुम्हारे घर उतार देंगे।।"

" जी मेहरबानी आप मुझे मेरे घर तक लिफ्ट देंगे,,एक बात पूछना चाहतें हैं आपसे राज बाबु।"

" हाँ पूछो।" अपनी गाड़ी स्टार्ट करते हुए राज ने कहा

" बुरा मत मान जाना,,हम कुछ दिन से जो नोटिस किये वही पूछ रहे हैं,,तुम्हें प्रिया कैसी लगती है।।"

" कैसी लगती है मतलब?? ठीके है,मेहनती है,होशियार है,जो ठान लेती है कर के रहती है,,अब देखो ,,जब जिम मे आई रही 68 किलो की रही ,और अभी 60 की हुई गई,,बहुत मेहनती है,एकदम जी जान से जुट जाती है,,पढ़ाई में तो पुछो मत,हमें सोचो हमार जैसे लठ को आदमी बना डाली( राज भैय्या की नजरों में जिसे शिक्षा का मह्त्व पता हो और जो शिक्षित हो वही असली पुरूष संज्ञा है)

राज भैय्या की बात को बीच में ही काट कर रानी ने कहना शुरु किया__

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" हाँ समझ गये!! बस करो अब तारीफ ,,तो मतलब हम जो सोच रहे वो सच है।"

" अब हमे क्या पता तुम क्या सोच रही??"

" ये कि तुम्हें प्रिया अच्छी लगने लगी है।।है ना?"

" अच्छी है तो अच्छी लगेगी ही??"

रानी मुस्कुराने लगी " हम्म अच्छी तो है,पर तुम्हें कुछ ज्यादा ही अच्छी लगने लगी है।।"
 
जब किसी की चोरी पकड़ी जाती है तो उस वक्त उस इन्सान का सारा प्रयास इसी ओर रहता है कि किसी तरह उसकी बेगुनाही साबित हो जाये,ऐसा ही कुछ राज के साथ हुआ . अभी वो बेचारे स्वयं अपने मन की थाह नही पा पाये थे उन्हें स्वयं अपने हृदय के अन्दर बहने वाले इस प्रेमझरने का स्त्रोत पता नही था कि उस झरने को पहचान कर लोग बाग उसका रसास्वादन करने लगे।।।राज भैय्या सोच में पड़ गये कि शाम को प्रिया से मिलने जाना चाहिये या नही, उन्हें उस समय यही उचित लगा कि मिलने नही जाना ही ठीक रहेगा।।वो बार बार अपने मन को तरह तरह से यही समझाने में लगे रहे कि रानी को कुछ गलतफहमी हुई है,और उनके मन में प्रिया को लेकर कोई विकार नही है।।

वो पूरा दिन बस यही सोचते निकल गया कि अगर मिलने ,

चला गया तो सब क्या सोचेंगे,और अगर मिलने नही गया तो प्रिया क्या सोचेगी!! आखिर प्रिया सब पर भारी पड़ी ।।

तरह तरह के विचारों को सोचते सोचते अंतत: राज ने यही सोचा कि जब उनका मन साफ है स्वच्छ है प्रिया से मिलने जाने मे कोई परहेज नही।।ऐसा सोचने के बाद मन फूल सा हल्का हो गया,सुबह से सोच सोच के जो पीड़ा के बादल राज ने अपने दिमाग मे जमा कर लिये थे,सब एकाएक बरस गये,और उजली चांदनी छिटक गई ।।

अपने आप को भली तरह से सजा संवार कर राज बाबु प्रिया से मिलने जाने निकले,ये प्रथम अनुभव था जब राज अपनी किसी महिला मित्र से मिलने जा रहा था,इसके पहले तो हमेशा अपने चेलों के साथ घूमने के लिये कभी कोई तैयारी नही लगी पर आज कुछ विशेष यत्न से सारी साज संवार की गई थी,,मन ही मन अपने आप पे खुश होते राज भईया निकल ही रहे थे कि भाभी जी का स्वर सुनाई पड़ा

" किधर को चली सवारी लल्ला जी?? बड़े बन ठन के निकल रहे हैं ।"

'काली बिल्ली रास्ता काट गई ' वैसे भैय्या जी ये सब बातों को नही मानते थे,उन्हें अपनी भाभी पर स्नेह भी था पर उनकी इस कदर की टॉन्ट वाली बातों पे अरुचि भी थी।।

" कुछ नही भाभी बस मन्दिर तक जा रहे थे।।"

" आज कौन से मन्दिर जा रहे लल्ला जी??"

भाभी तो एकदम ही पीछे पड गई,अब बेचारे राज भैय्या क्या ,

बोलते

" बड़े हनुमान जा रहे,,आप चलेंगी??" आप चलेंगी कुछ इस ढंग से पूछा गया कि इस सवाल का जवाब आपको ना में ही देना है कहीं गलती से हाँ कह दिया तो भईया जी कहीं गाड़ी सहित आपको गंगा जी में ना डूबा आयें।।

" ना ना आप ही जाओ,,बस आते बखत उधर जो सेंतराम हलवाई है ना उसकी चाट हमारे लिये लेते आना,और उसे बोलना छोले कम डालेगा,ज्यादा गीला ना करे,टिकिया को अलग से बाँधेगा नही क्या होता है ना टिकिया गल जाती है सारी की सारी।"

" और कुछ भाभी।।"

" नही बस इत्ता ही याद से ले आना,बहुत है।"

अब राज बाबु को जाना था रॉयल पैलेस होटल और बड़े हनुमान पड़ते थे घड़ी चौक से दाहिना जाकर,बेचारे झूठ बोल कर बुरा फंसे।।चाट तो वो अपने अनुचरों से भी मँगा लेते पर हनुमान जी का नाम ले दिया,अब मन्दिर नही गये तो भगवान नाराज और होटल टाईम से नही पहुँचे तो प्रिया ।।

उन्होनें प्रिया को फ़ोन लगाया,,रिंग बजने पे फ़ोन उठाया उधर से प्रिया की अम्मा ने__ " हेलो कौन बोल रा।"

बेचारे राज भईया पहली बार किसी लड़की के नम्बर पे फ़ोन ,

किये वो भी उसकी माँ उठा ली,अब का करे का ना करें की स्थिति थी।।

" नमस्ते !! प्रिया है क्या?"

" ऊ तो अभिचे कहीं निकल गई!! बोल के गई है आने में थोड़ा देरी हो जायेगा।।तुम कौन बोल रये बेटा . इतने में फ़ोन कट गया,राज भईया को बड़ा गुस्सा आया,अरे इतनी भी क्या हड़बड़ी,,थोड़ा देर में नही निकल सकती थी।।

हर बात पे प्रिया की राय लेने की ऐसी आदत हो गई की अब इस आड़े वक्त में क्या करें,राज भैय्या को सूझ ही नही रहा था।।उन्होनें अपनी गाड़ी उठाई और चल दिये।।

कुछ 20 मिनट बाद राज भैय्या रॉयल पैलेस होटल की पार्किंग में थे।।गाड़ी खड़े करते हुए जाने क्यों एक अजीब सी बेचैनी उन्हें घेरने लगी।।आज तक किसी काम को करने के पहले दुबारा ना सोचने वाले राज की हालत खराब थी,इतना तो उसने अपने सारे जीवन मे नही सोचा जितना आज अकेले एक दिन मे सोच लिया।खैर अपने आप को मजबूत कर अन्दर बढ़ ही रहे थे कि__" सर क्या आप अपनी पहली डेट पर आये हैं,अगर हाँ तो हमारे पास आपके लिये कुछ है"

अचानक से दरबान के साथ खड़े होटल मैनेजर के इस सवाल पर राज भईया घबड़ा गये,एकाएक उनसे बोल ना फूटा__"सर अगर ये आपकी फ़र्स्ट डेट है तो ये रहा आपके लिये एक गुलाब !! हमारी ओर से!! आप अपनी गर्लफ्रैंड को ये दीजिये।।

,

" पर भैय्या तुम काहे दे रहे फ़्री में गुलाब??"

" सर पॉलिसी है हमारी,आज की तारीख पे हमारे साहब की शादी हुई थी तो आज के दिन जो कपल डेट पे आते हैं उन्हें हम गुलाब और कोम्प्लिमेन्ट्री ड्रिंक और स्टार्टर खिलाते हैं ।"

राज का ये प्रथम अनुभव था,आज तक अपने चेलों के साथ सेंतराम की कचौड़ियाँ पेली थी या टिक्की।। पीने पिलाने का ऐसा था कि कभी एक बार प्रेम कहीं से पी पिला के लौटा तो उसकी लटपटाती जिव्हा और उठने वाली कड़वी गन्ध से भी राज नही समझ पाया तब प्रिंस ने ही सहायता की" अरे ई प्रेम कहीं से पी के आ रहा है भैय्या जी" बस इतना सुनना था कि राज ने उसे 2 थप्पड़ लगा दिये__

" अरे बस बियरे तो पिये हैं,ऊ हार्ड ड्रिंक थोड़ी होता है भैय्या जी,,पुराने सब दोस्त मिल गये रहे जबरिया पिला दिये,औ जो थोड़ी बहुत चढ़ी रही ऊ आपका थप्पड़ उतार दिया।।"

हालाँकि बाद में राज ने प्रेम को ताकीद करी की जिम में जहां महिलायें भी आती हैं,वहाँ इस तरह पी कर आना वर्जित है,माफ कर दिया।।

अब आज इस तरह मैनेजर से डाइरेक्ट फ़्री ड्रिंक की बात सुन भैय्या जी ज़रा झेंप गये और सिर्फ गुलाब लिये अन्दर चल दिये।।

अन्दर बड़े से हॉल में हल्की-सी रोशनी में हल्का धीमा सा कर्णप्रिय संगीत गूँज रहा था।।रूम फ्रेशनर की खुशबू सारे ,

माहौल को खुशनुमा कर रही थी, ऐसे में भईया जी चारों तरफ नज़र दौड़ाते प्रिया को ढूँढ रहे थे।।

राज को प्रिया दिख गई,,,वो एक बार फिर अजीब सी परेशानी में घिरने लगा,आज सुबह तक जिसे सिर्फ एक छोटी सी पार्टी समझ कर देना चाहता था, वो रानी से बात होने के बाद से एक छोटी सी डेट में बदल गई ।।कितना भी नादान हो पर राज डेट का मतलब तो समझता ही था।।

" कब आईं प्रिया?? हमको थोड़ा ट्रैफिक के कारण देर हो गया।"

आज सब कुछ बदला सा लग रहा था राज को।।

रानी की बातों का असर था या मैनेजर की बातों का, या उस रोमैंटिक माहौल का असर आज प्रिया वाकई बाकी दिनों से अलग लग रही थी।।

बहुत सुन्दर तो प्रिया को नही कहा जा सकता था पर वो स्मार्ट थी,अपने आप को सलीके से रखना उसे आता था,अब आठ किलो वजन कम करने के बाद उसका आत्मविश्वास और चमक गया था।।

कुल मिलाकर आज के ज़माने में कही जाने वाली स्मार्ट प्रेजेंटेबल लड़की थी।।
 
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