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राघव सुबह-सुबह जिम पहुँच गया। पारुल वहाँ पहले सेमौजूद थीं।मैम आपने कल मुझे नौकरी...,हाँ हाँ आओ.यह मेरा जिम है।
बाप रे इतना बड़ा..!!हम्म और भी दो हैं इतने ही बड़े..। आज से तुम्हें क्या करना है।जैकब समझा देगा, तुम उससे मिल लेना।
जी मैम..!तभी राघव के फोन पर विक्की का फोन आता है। हैलो विक्की.!क्या पार्टी..?कहाँ। और क्यों..?ओह होटल वेलकम में..!
सॉरी यार मैं नहीं आ पाऊँगा.. आज ही नौकरी लगी है।मैम छुट्टी नहीं देंगी.. क्या कहा..! उन्हें भी साथ ले आऊँ।
अरे यार दिमाग खराब है तेरा..?वो मालिक में नौकर..!वो भला मेरे साथ क्यों आने लगी ..?तू कहे तो अलग से इन्वाइट कर देता हूँ।
मेरा आना तो बहुत मुश्किल है...! फिर भी बात करके देखता हूँ, राघव फोन काट देता है।सॉरी मैम..वो मेरे दोस्त विक्की ने वेलकम होटल में पार्टी रखी है।मुझे और आपको इन्वाइट किया है।
पार्टी दोपहर से शुरू हो रही है।हम्म देखती हूँ वैसे मैं यूँ हीं किसी की पार्टी में नहीं जाती। फिर भी कोशिश करूँगी कुछ देर ही सही पर वहाँ पहुँच सकूँ।
तुम्हें आज पूरे दिन की छुट्टी,कल से अपने काम पर ध्यान देना समझ गए..?जी मैम, थैंक यू सो मच।राघव वहाँ से चला जाता है।
पारुल मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। उसने इसी उद्देश्य से राघव को काम देने के बहाने से जिम में बुलाया था।उसको तो विक्की से मेल-जोल का कोई जरिया चाहिए था।
पार्टी में बहुत सारे लड़के-लड़कियाँ थे।लड़कियाँ विक्की के आस-पास मँडरा रही थी।पारुल पार्टी में पहुँच जाती है। उसके हाथों में सफेद फूलों का बहुत सुंदर बुके लिया हुआ था।
हाय विक्की..! अरे राघ.. सॉरी रोहन..! अच्छा लगा तुझे देखकर..यह क्या अभी से नौकरी के चक्कर में पड़ गया तू..?, हीअभी तो हमारे खेलने-खाने के दिन हैं।
तुझे नौकरी की जरूरत नहीं विक्की..पर मुझे है..खैर वो सब छोड़ो.. इनसे मिलो..यह मेरी बॉस हैं। मैम यह मेरा सबसे प्रिय दोस्त विक्की है।
हाय आई एम पारुल.. विक्की को बुके देते हुए पारुल बोली। थैंक्स पर शायद हम पहले भी मिल चुके हैं।ओह याद आया रात की ही तो बात है,आप अपने बायफ्रेंड के साथ थी।
अरे नहीं-नहीं वो मेरा बायफ्रेंड नहीं.. सिर्फ फ्रेंड है पारुल ने सफाई से झूठ बोल दिया। मैं तो अभी तक सिंगल हूँ.. मुझे मेरे टाइप का एटीट्यूड दिखाने वाला अभी तक कोई नहीं मिला।
हम्म बढ़िया..तब तो हमारी खूब जमेगी विक्की पारुल को इंप्रेस करने लगा। मुझे भी एटीट्यूड दिखाने वाले लोग ही भाते हैं।विल यू डांस विथ मी.. विक्की ने पूछा।या श्योर.. पारुल विक्की के साथ डांस करने लगी।
इधर पारुल राघव के बिछाए हुए जाल में फंसती जा रही थी। वहाँ शिल्पा ने पढ़ाई के प्रति गंभीर होती जा रही थी।पर वह मयंक को अभी-भी भुला नहीं पा रही थी।
शिल्पा जब भी अकेली होती मयंक की याद में आँसू बहाने लगती थी पर अपने माँ-बाप के सामने खुश रहने की कोशिश करती थी।
शिल्पा बेटा बहुत रात हो गई.. अब आराम कर ले बच्चा ।कल सुबह जल्दी उठकर पढ़ लेना। नहीं माँ एग्जाम पास में हैं..मुझे पढ़ने दो।पर बेटा.. इस नन्ही जान का भी तो ध्यान रखना है ना..?
अगर कहीं तुझे बीमार पड़ गई तो..? मुझे कुछ नहीं होगा माँ आप चिंता मत करो,..! तब तक जतिन आ जाते हैं। क्यों परेशान कर रही हो मेरी बेटी को..?
पढ़ने दो उसे.. सुबह देर तक सोने देना, जगाना ही मत.. कौन सा उसे कॉलेज जाना है।यह हुई ना बात पापा..! समझाइए माँ को
मुझे भी ऐसी स्कूल में एडमिशन करा दो ना पापा..? जहाँ स्कूल नहीं जाना पड़े। मैं भी मज़े से घर पर बैठ कर पढ़ लिया करूँगा।
यह रोज-रोज स्कूल जाना बहुत बोरिंग है, है ना दीदी..? चिंटू की बात सुनकर सब हंस पड़ते हैं। बेटा जी तुम्हें तो स्कूल जाना ही पड़ेगा। स्कूल क्या तुमको तो कॉलेज भी जाना पड़ेगा।
डॉक्टर जो बनना तुम्हें.. है ना शिल्पा बेटा। चिंटू बनाकर धीरे-धीरे समय बीतता गया मयंक से अलग हुए उसे आज सात महीने होने को आए थे। संध्या की हालत में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं था।
हाँ अब वो उठकर बैठ लेती थी,पर न तो चल पातीं न बोल पाती,बस टूटे-फूटे शब्द मुँह से निकलते थे।
डॉ अंकल अब माँ पहले से काफी ठीक हैं। पर मुझे उनके बोलने और चलने का बेसब्री से इंतजार हैं।
कब माँ फिर से मुझे बेटा कह कर बुलाए..! पता नहीं कितना समय और लगेगा। चिंता मत करो मयंक अभी इतना सुधार हुआ,आगे और होगा। जल्दी संध्या जी बोलेंगी भी और अपने पैरों पर चलेंगी भी।
धन्यवाद अंकल जी..! बस इसी तरह से उनका ध्यान रखो,समय पर दवा देते रहो, और इन्हें ऐसे खुश रखने की कोशिश करते रहो।
संध्या की छोटी बहन विमला पूरे मन से अपनी बहन की सेवा कर रही थी। हल्की-फुल्की हँसी-मजाक कर अपनी बहन को खुश करने की कोशिश करती रहती थी। विमला के आ जाने से संध्या का अकेलापन काफ़ी हद तक दूर हुआ था।
मयंक बेटा अब तो तू जल्दी बहू ले आ, कब-तक यूँ अकेले ज़िंदगी जियेगा..? और फिर अभी तेरी उमर ही क्या है,क्यों दीदी मैं सही कह रही हूँ ना..?
संध्या की आँखों में आँसू आ जाते हैं।देख वह तुझे अकेले देखकर दुखी हो रहीं हैं। तेरी शादी हो जाए.. घर में बहू आ जाए, फिर देखना दीदी कितनी जल्दी ठीक होती है।
हाँ मौसी मैं भी यही सोच रहा हूँ,पर फिर सोचता हूँ, पहले माँ पूरी तरह से ठीक हो जाए.. और वह अपने हाथों से आशीर्वाद दे,मैं अपना घर बसाऊँ..? हैं न माँ।
संध्या भी हाँ मैं गरदन हिला देती हैं।वो भी नहीं चाह रही थीं मयंक सच जानें बग़ैर शादी करे।देखा मौसी माँ मना कर रहीं हैं।
माँ आप चिंता न करो..? जब-तक आप नहीं बोलेंगी मैंनहीं करूँगा।यह सुनकर संध्या गहरी साँस लेकर आँखें बंद कर लेतीं हैं।
जैसी तुम लोगों की मर्जी.. मैं भी चली आराम करने, दीदी को कुछ चाहिए तो मुझे बुला लेना रीता.. जी मैम आप अब आप आराम करिए.. मैं हूँ यहाँ।
मयंक भी ऑफिस के लिए निकल जाता है।अब पारुल मयंक से मिलने कम ही आती थी।
मयंक ही रोज कभी फोन तो कभी डिनर,तो कभी लंच के बहाने पारुल से मिलता और बात करता था।
बाप रे इतना बड़ा..!!हम्म और भी दो हैं इतने ही बड़े..। आज से तुम्हें क्या करना है।जैकब समझा देगा, तुम उससे मिल लेना।
जी मैम..!तभी राघव के फोन पर विक्की का फोन आता है। हैलो विक्की.!क्या पार्टी..?कहाँ। और क्यों..?ओह होटल वेलकम में..!
सॉरी यार मैं नहीं आ पाऊँगा.. आज ही नौकरी लगी है।मैम छुट्टी नहीं देंगी.. क्या कहा..! उन्हें भी साथ ले आऊँ।
अरे यार दिमाग खराब है तेरा..?वो मालिक में नौकर..!वो भला मेरे साथ क्यों आने लगी ..?तू कहे तो अलग से इन्वाइट कर देता हूँ।
मेरा आना तो बहुत मुश्किल है...! फिर भी बात करके देखता हूँ, राघव फोन काट देता है।सॉरी मैम..वो मेरे दोस्त विक्की ने वेलकम होटल में पार्टी रखी है।मुझे और आपको इन्वाइट किया है।
पार्टी दोपहर से शुरू हो रही है।हम्म देखती हूँ वैसे मैं यूँ हीं किसी की पार्टी में नहीं जाती। फिर भी कोशिश करूँगी कुछ देर ही सही पर वहाँ पहुँच सकूँ।
तुम्हें आज पूरे दिन की छुट्टी,कल से अपने काम पर ध्यान देना समझ गए..?जी मैम, थैंक यू सो मच।राघव वहाँ से चला जाता है।
पारुल मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। उसने इसी उद्देश्य से राघव को काम देने के बहाने से जिम में बुलाया था।उसको तो विक्की से मेल-जोल का कोई जरिया चाहिए था।
पार्टी में बहुत सारे लड़के-लड़कियाँ थे।लड़कियाँ विक्की के आस-पास मँडरा रही थी।पारुल पार्टी में पहुँच जाती है। उसके हाथों में सफेद फूलों का बहुत सुंदर बुके लिया हुआ था।
हाय विक्की..! अरे राघ.. सॉरी रोहन..! अच्छा लगा तुझे देखकर..यह क्या अभी से नौकरी के चक्कर में पड़ गया तू..?, हीअभी तो हमारे खेलने-खाने के दिन हैं।
तुझे नौकरी की जरूरत नहीं विक्की..पर मुझे है..खैर वो सब छोड़ो.. इनसे मिलो..यह मेरी बॉस हैं। मैम यह मेरा सबसे प्रिय दोस्त विक्की है।
हाय आई एम पारुल.. विक्की को बुके देते हुए पारुल बोली। थैंक्स पर शायद हम पहले भी मिल चुके हैं।ओह याद आया रात की ही तो बात है,आप अपने बायफ्रेंड के साथ थी।
अरे नहीं-नहीं वो मेरा बायफ्रेंड नहीं.. सिर्फ फ्रेंड है पारुल ने सफाई से झूठ बोल दिया। मैं तो अभी तक सिंगल हूँ.. मुझे मेरे टाइप का एटीट्यूड दिखाने वाला अभी तक कोई नहीं मिला।
हम्म बढ़िया..तब तो हमारी खूब जमेगी विक्की पारुल को इंप्रेस करने लगा। मुझे भी एटीट्यूड दिखाने वाले लोग ही भाते हैं।विल यू डांस विथ मी.. विक्की ने पूछा।या श्योर.. पारुल विक्की के साथ डांस करने लगी।
इधर पारुल राघव के बिछाए हुए जाल में फंसती जा रही थी। वहाँ शिल्पा ने पढ़ाई के प्रति गंभीर होती जा रही थी।पर वह मयंक को अभी-भी भुला नहीं पा रही थी।
शिल्पा जब भी अकेली होती मयंक की याद में आँसू बहाने लगती थी पर अपने माँ-बाप के सामने खुश रहने की कोशिश करती थी।
शिल्पा बेटा बहुत रात हो गई.. अब आराम कर ले बच्चा ।कल सुबह जल्दी उठकर पढ़ लेना। नहीं माँ एग्जाम पास में हैं..मुझे पढ़ने दो।पर बेटा.. इस नन्ही जान का भी तो ध्यान रखना है ना..?
अगर कहीं तुझे बीमार पड़ गई तो..? मुझे कुछ नहीं होगा माँ आप चिंता मत करो,..! तब तक जतिन आ जाते हैं। क्यों परेशान कर रही हो मेरी बेटी को..?
पढ़ने दो उसे.. सुबह देर तक सोने देना, जगाना ही मत.. कौन सा उसे कॉलेज जाना है।यह हुई ना बात पापा..! समझाइए माँ को
मुझे भी ऐसी स्कूल में एडमिशन करा दो ना पापा..? जहाँ स्कूल नहीं जाना पड़े। मैं भी मज़े से घर पर बैठ कर पढ़ लिया करूँगा।
यह रोज-रोज स्कूल जाना बहुत बोरिंग है, है ना दीदी..? चिंटू की बात सुनकर सब हंस पड़ते हैं। बेटा जी तुम्हें तो स्कूल जाना ही पड़ेगा। स्कूल क्या तुमको तो कॉलेज भी जाना पड़ेगा।
डॉक्टर जो बनना तुम्हें.. है ना शिल्पा बेटा। चिंटू बनाकर धीरे-धीरे समय बीतता गया मयंक से अलग हुए उसे आज सात महीने होने को आए थे। संध्या की हालत में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं था।
हाँ अब वो उठकर बैठ लेती थी,पर न तो चल पातीं न बोल पाती,बस टूटे-फूटे शब्द मुँह से निकलते थे।
डॉ अंकल अब माँ पहले से काफी ठीक हैं। पर मुझे उनके बोलने और चलने का बेसब्री से इंतजार हैं।
कब माँ फिर से मुझे बेटा कह कर बुलाए..! पता नहीं कितना समय और लगेगा। चिंता मत करो मयंक अभी इतना सुधार हुआ,आगे और होगा। जल्दी संध्या जी बोलेंगी भी और अपने पैरों पर चलेंगी भी।
धन्यवाद अंकल जी..! बस इसी तरह से उनका ध्यान रखो,समय पर दवा देते रहो, और इन्हें ऐसे खुश रखने की कोशिश करते रहो।
संध्या की छोटी बहन विमला पूरे मन से अपनी बहन की सेवा कर रही थी। हल्की-फुल्की हँसी-मजाक कर अपनी बहन को खुश करने की कोशिश करती रहती थी। विमला के आ जाने से संध्या का अकेलापन काफ़ी हद तक दूर हुआ था।
मयंक बेटा अब तो तू जल्दी बहू ले आ, कब-तक यूँ अकेले ज़िंदगी जियेगा..? और फिर अभी तेरी उमर ही क्या है,क्यों दीदी मैं सही कह रही हूँ ना..?
संध्या की आँखों में आँसू आ जाते हैं।देख वह तुझे अकेले देखकर दुखी हो रहीं हैं। तेरी शादी हो जाए.. घर में बहू आ जाए, फिर देखना दीदी कितनी जल्दी ठीक होती है।
हाँ मौसी मैं भी यही सोच रहा हूँ,पर फिर सोचता हूँ, पहले माँ पूरी तरह से ठीक हो जाए.. और वह अपने हाथों से आशीर्वाद दे,मैं अपना घर बसाऊँ..? हैं न माँ।
संध्या भी हाँ मैं गरदन हिला देती हैं।वो भी नहीं चाह रही थीं मयंक सच जानें बग़ैर शादी करे।देखा मौसी माँ मना कर रहीं हैं।
माँ आप चिंता न करो..? जब-तक आप नहीं बोलेंगी मैंनहीं करूँगा।यह सुनकर संध्या गहरी साँस लेकर आँखें बंद कर लेतीं हैं।
जैसी तुम लोगों की मर्जी.. मैं भी चली आराम करने, दीदी को कुछ चाहिए तो मुझे बुला लेना रीता.. जी मैम आप अब आप आराम करिए.. मैं हूँ यहाँ।
मयंक भी ऑफिस के लिए निकल जाता है।अब पारुल मयंक से मिलने कम ही आती थी।
मयंक ही रोज कभी फोन तो कभी डिनर,तो कभी लंच के बहाने पारुल से मिलता और बात करता था।