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Romance सैलाब दर्द का

राघव सुबह-सुबह जिम पहुँच गया। पारुल वहाँ पहले सेमौजूद थीं।मैम आपने कल मुझे नौकरी...,हाँ हाँ आओ.यह मेरा जिम है।

बाप रे इतना बड़ा..!!हम्म और भी दो हैं इतने ही बड़े..। आज से तुम्हें क्या करना है।जैकब समझा देगा, तुम उससे मिल लेना।

जी मैम..!तभी राघव के फोन पर विक्की का फोन आता है। हैलो विक्की.!क्या पार्टी..?कहाँ। और क्यों..?ओह होटल वेलकम में..!

सॉरी यार मैं नहीं आ पाऊँगा.. आज ही नौकरी लगी है।मैम छुट्टी नहीं देंगी.. क्या कहा..! उन्हें भी साथ ले आऊँ।

अरे यार दिमाग खराब है तेरा..?वो मालिक में नौकर..!वो भला मेरे साथ क्यों आने लगी ..?तू कहे तो अलग से इन्वाइट कर देता हूँ।

मेरा आना तो बहुत मुश्किल है...! फिर भी बात करके देखता हूँ, राघव फोन काट देता है।सॉरी मैम..वो मेरे दोस्त विक्की ने वेलकम होटल में पार्टी रखी है।मुझे और आपको इन्वाइट किया है।

पार्टी दोपहर से शुरू हो रही है।हम्म देखती हूँ वैसे मैं यूँ हीं किसी की पार्टी में नहीं जाती। फिर भी कोशिश करूँगी कुछ देर ही सही पर वहाँ पहुँच सकूँ।

तुम्हें आज पूरे दिन की छुट्टी,कल से अपने काम पर ध्यान देना समझ गए..?जी मैम, थैंक यू सो मच।राघव वहाँ से चला जाता है।

पारुल मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। उसने इसी उद्देश्य से राघव को काम देने के बहाने से जिम में बुलाया था।उसको तो विक्की से मेल-जोल का कोई जरिया चाहिए था।

पार्टी में बहुत सारे लड़के-लड़कियाँ थे।लड़कियाँ विक्की के आस-पास मँडरा रही थी।पारुल पार्टी में पहुँच जाती है। उसके हाथों में सफेद फूलों का बहुत सुंदर बुके लिया हुआ था।

हाय विक्की..! अरे राघ.. सॉरी रोहन..! अच्छा लगा तुझे देखकर..यह क्या अभी से नौकरी के चक्कर में पड़ गया तू..?, हीअभी तो हमारे खेलने-खाने के दिन हैं।

तुझे नौकरी की जरूरत नहीं विक्की..पर मुझे है..खैर वो सब छोड़ो.. इनसे मिलो..यह मेरी बॉस हैं। मैम यह मेरा सबसे प्रिय दोस्त विक्की है।

हाय आई एम पारुल.. विक्की को बुके देते हुए पारुल बोली। थैंक्स पर शायद हम पहले भी मिल चुके हैं।ओह याद आया रात की ही तो बात है,आप अपने बायफ्रेंड के साथ थी।

अरे नहीं-नहीं वो मेरा बायफ्रेंड नहीं.. सिर्फ फ्रेंड है पारुल ने सफाई से झूठ बोल दिया। मैं तो अभी तक सिंगल हूँ.. मुझे मेरे टाइप का एटीट्यूड दिखाने वाला अभी तक कोई नहीं मिला।

हम्म बढ़िया..तब तो हमारी खूब जमेगी विक्की पारुल को इंप्रेस करने लगा। मुझे भी एटीट्यूड दिखाने वाले लोग ही भाते हैं।विल यू डांस विथ मी.. विक्की ने पूछा।या श्योर.. पारुल विक्की के साथ डांस करने लगी।

इधर पारुल राघव के बिछाए हुए जाल में फंसती जा रही थी। वहाँ शिल्पा ने पढ़ाई के प्रति गंभीर होती जा रही थी।पर वह मयंक को अभी-भी भुला नहीं पा रही थी।

शिल्पा जब भी अकेली होती मयंक की याद में आँसू बहाने लगती थी पर अपने माँ-बाप के सामने खुश रहने की कोशिश करती थी।

शिल्पा बेटा बहुत रात हो गई.. अब आराम कर ले बच्चा ।कल सुबह जल्दी उठकर पढ़ लेना। नहीं माँ एग्जाम पास में हैं..मुझे पढ़ने दो।पर बेटा.. इस नन्ही जान का भी तो ध्यान रखना है ना..?

अगर कहीं तुझे बीमार पड़ गई तो..? मुझे कुछ नहीं होगा माँ आप चिंता मत करो,..! तब तक जतिन आ जाते हैं। क्यों परेशान कर रही हो मेरी बेटी को..?

पढ़ने दो उसे.. सुबह देर तक सोने देना, जगाना ही मत.. कौन सा उसे कॉलेज जाना है।यह हुई ना बात पापा..! समझाइए माँ को

मुझे भी ऐसी स्कूल में एडमिशन करा दो ना पापा..? जहाँ स्कूल नहीं जाना पड़े। मैं भी मज़े से घर पर बैठ कर पढ़ लिया करूँगा।

यह रोज-रोज स्कूल जाना बहुत बोरिंग है, है ना दीदी..? चिंटू की बात सुनकर सब हंस पड़ते हैं। बेटा जी तुम्हें तो स्कूल जाना ही पड़ेगा। स्कूल क्या तुमको तो कॉलेज भी जाना पड़ेगा।

डॉक्टर जो बनना तुम्हें.. है ना शिल्पा बेटा। चिंटू बनाकर धीरे-धीरे समय बीतता गया मयंक से अलग हुए उसे आज सात महीने होने को आए थे। संध्या की हालत में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं था।

हाँ अब वो उठकर बैठ लेती थी,पर न तो चल पातीं न बोल पाती,बस टूटे-फूटे शब्द मुँह से निकलते थे।

डॉ अंकल अब माँ पहले से काफी ठीक हैं। पर मुझे उनके बोलने और चलने का बेसब्री से इंतजार हैं।

कब माँ फिर से मुझे बेटा कह कर बुलाए..! पता नहीं कितना समय और लगेगा। चिंता मत करो मयंक अभी इतना सुधार हुआ,आगे और होगा। जल्दी संध्या जी बोलेंगी भी और अपने पैरों पर चलेंगी भी।

धन्यवाद अंकल जी..! बस इसी तरह से उनका ध्यान रखो,समय पर दवा देते रहो, और इन्हें ऐसे खुश रखने की कोशिश करते रहो।

संध्या की छोटी बहन विमला पूरे मन से अपनी बहन की सेवा कर रही थी। हल्की-फुल्की हँसी-मजाक कर अपनी बहन को खुश करने की कोशिश करती रहती थी। विमला के आ जाने से संध्या का अकेलापन काफ़ी हद तक दूर हुआ था।

मयंक बेटा अब तो तू जल्दी बहू ले आ, कब-तक यूँ अकेले ज़िंदगी जियेगा..? और फिर अभी तेरी उमर ही क्या है,क्यों दीदी मैं सही कह रही हूँ ना..?

संध्या की आँखों में आँसू आ जाते हैं।देख वह तुझे अकेले देखकर दुखी हो रहीं हैं। तेरी शादी हो जाए.. घर में बहू आ जाए, फिर देखना दीदी कितनी जल्दी ठीक होती है।

हाँ मौसी मैं भी यही सोच रहा हूँ,पर फिर सोचता हूँ, पहले माँ पूरी तरह से ठीक हो जाए.. और वह अपने हाथों से आशीर्वाद दे,मैं अपना घर बसाऊँ..? हैं न माँ।

संध्या भी हाँ मैं गरदन हिला देती हैं।वो भी नहीं चाह रही थीं मयंक सच जानें बग़ैर शादी करे।देखा मौसी माँ मना कर रहीं हैं।

माँ आप चिंता न करो..? जब-तक आप नहीं बोलेंगी मैंनहीं करूँगा।यह सुनकर संध्या गहरी साँस लेकर आँखें बंद कर लेतीं हैं।

जैसी तुम लोगों की मर्जी.. मैं भी चली आराम करने, दीदी को कुछ चाहिए तो मुझे बुला लेना रीता.. जी मैम आप अब आप आराम करिए.. मैं हूँ यहाँ।

मयंक भी ऑफिस के लिए निकल जाता है।अब पारुल मयंक से मिलने कम ही आती थी।

मयंक ही रोज कभी फोन तो कभी डिनर,तो कभी लंच के बहाने पारुल से मिलता और बात करता था।
 
आज़ दोनों शाम के समय इंडिया गेट घूम रहे थे। पारुल बुरा न मानो तो एक बात पूछूँ..? हम्म पूछो न मयंक मैं तुम्हारी बात का क्यों बुरा मानूँगी।

तुम आजकल मुझसे दूर-दूर क्यों रहती हो..? ना तुम पहले की तरह मिलने आती हो..? और जब मिलती भी हो तो पहले जैसा क्रश नहीं दिखाई देता..?

कोई बात खराब लगी है क्या..? किसी बात से नाराज हो..?अरे नहीं नहीं मयंक तुमने ऐसा कैसे सोच लिया। मैं तो बस दिन-रात इसी चिंता में रहती हूँ।कब आँटी ठीक होंगी।

हमारी शादी तो तभी होगी जब वो पूर्णतः स्वस्थ हों बस यही सब बातें परेशान करतीं हैं ।ऊपर से बिजनेस में कितने टेंशन होते हैं, तुम्हें पता ही है।

चिंता मत करो मैं हूँ ना..! पारुल के झूठ में फंसा मयंक पारुल के सच को समझ ही नहीं पा रहा था, मयंक पारुल को अपने गले से लगा लेता है।

तभी पारुल की निगाह सामने से आ रहे विक्की पर पड़ती है।उसे देख पारुल घबरा जाती है,ओ माई गॉड विक्की कहीं मुझे मयंक के साथ न देख ले।

मुझे जल्दी से यहाँ से निकलना पड़ेगा। वरना बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी।

मयंक मेरी मुंबई में एक अर्जेंट मीटिंग है, मुझे दो-तीन दिन के , शादी , है मेरी तो लिए वहाँ जाना है ‌।अब मैं चलती हूँ बाय.. जल्दी ही मिलते हैं, पारुल तेजी से वहाँ से निकल जाती है।

थोड़ी दूर जाकर वो वहाँ से मयंक के जाने का इंतजार करने लगी।जैसे ही मयंक की गाड़ी वहाँ से निकली। वैसे ही पारुल गाड़ी घुमाकर विक्की के पास पहुँच गई।

हाय विक्की यहाँ क्या कर रहे हो..? अरे पारुल तुम यहाँ कैसे..? मैं एक जरूरी काम से जा रही थी तुम्हें देखा तो मिलने आ गई।,आज रात को डिनर पे मिलते हैं..?

हम्म.. ठीक है..! जैसा तुम कहो। ठीक है तो फिर डिनर पक्का,अभी बहुत जल्दी है,चलती हूँ विक्की।

राघव आज पारुल मुझे डिनर पर बुला रही है क्या करना है अब..? आज तू शादी के लिए प्रपोज कर दे..! क्या..? तुझे पता है तू क्या कह रहा है..?

हम्म पता है..बस अब जल्दी ही तेरा मेरा काम पूरा होने वाला है।रात को पारुल और विक्की डिनर के लिए मिलते हैं। पारुल ने विक्की को इंप्रेस करने के लिए कैंडल लाइट डिनर का प्लान बनाया था।

वाह नाइस अरेंजमेंट.. थैंक्स पारुल..! खुश कर दिया यार तूने.. कहीं तुम्हें मुझसे प्यार तो नहीं हो गया।

मेरी छोड़ो तुम अपनी कहो विक्की तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो..?बोल दूँ..?हाँ-हाँ बोलो विक्की मैं जानना चाहती हूँ।

विक्की आगे बढ़कर घुटने के बल बैठ गया, और अपना हाथ आगे बढ़ाकर.. विल यू मैरी मी पारुल... पारुल को तो जैसे मुँहमाँगी मुराद मिल गई हो।

पारुल को कुछ क्षण के लिए कुछ बोल न सकी, जैसे शब्द ही नहीं मिल रहे थे।

सॉरी यार लगता है मैं कुछ ज्यादा ही और जल्दी बोल गया..?

तुम्हें बुरा लगा तो माफ़ कर देना।पर सच में पता ही नहीं चला कब.. मुझे तुमसे प्यार हो गया। तुम पहली लड़की हो.. जिसके आने से मेरी ज़िंदगी बदल गई।सच कह रहे हो विक्की..?हाँ पारुल..!!ओह विक्की मैं बता नहीं सकती हूँ कि आज मैं कितनी खुश हूँ। पारुल विक्की के गले लग जाती है।

राघव का निशाना सही लगा।अब पारुल मयंक से पीछा छुड़ाने के बहाने ढूँढने लगी।

इधर शिल्पा कि डिलीवरी का समय नजदीक आ गया था। जैसे-जैसे ड्यु डेट पास आ रही थी। शिल्पा मयंक के लिए दुखी हो रहीं थी।

मयंक बस कुछ दिन बाद हमारा बच्चा इस दुनिया में आने वाला है। काश इस समय तुम मेरे साथ होते।

पर कैसे होते..? तुम पर तो पारुल का जादू छाया हुआ है। तभी तो तुमने वो देखा जो झूठ था।शायद मेरे बच्चे के नसीब में उसके पिता का प्यार नहीं है।

मयंक..! मयंक बेटा देखो दीदी बोलने लगी..! पता नहीं पारुल.. पारुल कर रहीं हैं।समझ नहीं आ रहा वो क्या कहना चाह रही हैं।

क्या सच्ची मौसी माँ ने बात की आपसे..? मयंक दौड़कर माँ के पास आता है।माँ बोलो मैं भी सुनना चाहता हूँ, माँ क्या हुआ..?

रीता माँ..? सब ठीक है सर.. मैंने चैक कर लिया है।मैम कुछ कहने की कोशिश कर रही हैं।यह अच्छा संकेत है कि जल्दी वह बोलने लगेंगी।

बोलो माँ आपको पारुल से मिलना है..?पर संध्या एक-दो बार पारुल बोलकर चुप हो गईं। माँ बस जल्दी ठीक हो जाओ फिर ढेर सारी बातें करेंगे।

संध्या नम आँखें लिए मन मसोस कर रह गई।वो मयंक को शिल्पा की सच्चाई और पारुल का झूठ बताना चाहती थीं।जो वह कहने में असमर्थ हो रही थी।

मयंक ने खुश होकर पारुल को फोन लगाया है।हाय मयंक कैसे फोन किया..? पहले यह बताओ तुम कहाँ हो..? मैं मुंबई में हूँ..कहो न क्या हुआ है।

, पारुल बहुत बड़ी खुशखबरी है..!आज माँ ने कितने दिनों के बाद कुछ शब्द बोले, और पता है वो शब्द क्या थे..? उन्होंने तुम्हारा नाम लिया है।

वाह मयंक यह तो बहुत खुशी की बात है। मैं जल्दी ही वापस आकर तुमसे और आँटी से मिलती हूँ। पारुल झूठ बोल कर फोन काट देती है।

विक्की के यहाँ राघव और विक्की बैठे बात कर रहे थे।यार कब खतम करेगा यह सब..? तुझे पता है अगले हफ्ते मॉम-डैड आ रहे हैं।

वो तो भैया ने एक महीने और रोक लिया था उन्हें, वरना मैं यह सब नहीं कर पाता।अब बात आगे बढ़े, उससे पहले यह सब रोक दे,खतम करदे सब। अगर वो मेरे घर तक आ गई तो बहुत गड़बड़ हो जानी है।

यार बस एक-दो दिन दे.. सिर्फ एक-दो दिन इससे ज्यादा मैं तेरी मदद नहीं कर सकता।

राघव बहुत टेंशन में आ गया था। सुबह इसी उधेड़बुन में वह जिम पहुँच जाता है। पारुल मयंक से बात कर रही होती है।

मयंक बस दो दिन का काम और है मुंबई में, मैं जैसे ही दिल्ली आती हूँ, सीधा तुमसे मिलने आती हूँ।

राघव को देखते ही,अरे रोहन..!रुको तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है। जी मैम..! राघव पारुल के पास जाकर बैठ गया।
 
रोहन तुम विक्की के दोस्त हो.. इसलिए मेरे भी खास हो।

तुम्हें पता है,कल विक्की ने मुझे प्रपोज किया है मुस्कुराते हुए पारुल बोली।

अरे वाह मैम..!यह तो बहुत खुशी की बात है,इस बात पर तो स्पेशल पार्टी होनी चाहिए,क्या ख्याल है मैम..? वाह ख्याल तो अच्छा है।

पार्टी की तैयारी तुम्हारे जिम्मे..पर पार्टी कहाँ रखें यह समझ नहीं आ रहा..?मैम समझना क्या पर्सनल पार्टी है तो आपके घर पर रखिए।

, वाह ग्रेट..!तो तय रहा यह काम तुम्हारे जिम्मे..यह लो मेरे घर की चाबी..आज तुम्हारी छुट्टी,शाम तक सारे अरेंजमेंट हो जाने चाहिए।

जी मैम समझो काम हो गया।रोहन ने सारे अरेंजमेंट कर दिए।शाम को पार्टी अपने शबाब पर थी।रोहन जतिन को फोन करता है।

अंकल मयंक का फोन नंबर होगा आपके पास..? मुझे कुछ काम है.. जतिन से नंबर लेकर राघव ने मयंक को फोन लगा दिया।

हैलो मयंक सक्सेना..?हाँ जी..आप कौन..? आपका एक शुभचिंतक बोल रहा हूँ। जिस पारुल के साथ आप ज़िंदगी के हसीन सपने बुन रहे हो,वो आपको धोखा दे रही है।

क्या मतलब..? कौन हो तुम...? पारुल के बारे में कैसे जानते हो..? मैं कौन हूँ ? इससे आपको मतलब नहीं होना चाहिए ।

आप तो अपनी ज़िंदगी में मतलब रखिए।अगर मेरी गलत लग रही है, तो आज और अभी पारुल के घर जाकर देखिए,सच झूठ आपको पता चल जाएगा।

पारुल मुंबई में नहीं यहीं दिल्ली में है, और अपने नए शिकार के साथ मजे कर रही थी।यह सुनते ही मयंक के तनबदन में आग लग गई।

अनुराधा चौहान,

, ही खराब है।)

, : मयंक उसी समय पारुल के घर के लिए निकल गया। वहाँ जाकर देखता है तो पारुल के घर में पार्टी चल रही थी।

पारुल,विक्की,रोहन और पारुल के कुछ दोस्त डांस करके पार्टी एंजॉय कर रहे थे।

मयंक जाकर म्युजिक सिस्टम बंद कर देता है। यह म्यूजिक किसने बंद किया पारुल गुस्से में चिल्ला कर बोली।

मैंने किया..! मयंक पारुल के सामने जाकर बोला। तुम..! तुम यहाँ कैसे..? तुम तो मुंबई में थी..?दो दिन बाद आने वाली थी।

झूठ बोला मुझसे क्यों..? मैं कई दिनों से महसूस कर रहा था, तुम मुझसे दूर-दूर भाग रही हो।तो यह कारण था।

तब-तक विक्की आ जाता है।

पारुल कोई प्राब्लम है क्या..? अरे यह वही है न जो उस दिन होटल में था..? यह यहाँ इस तरह से पार्टी में आकर हंगामा कर रहा है।

विक्की मैं बात कर रही हूँ ना..प्लीज तुम पार्टी एंजॉय करो।राघव मयंक को देखते ही छुप गया क्यों सुनने दो न उसे भी..तुम्हारी करतूतें तुम्हारे जैसी लड़की से उम्मीद भी क्या की जा सकती है।

पहले मेरी ज़िंदगी में आकर शिल्पा और मेरे संबंध खराब किए।अब किसी और का दामन थाम लिया।

पारुल भी मयंक की बातों से गुस्से में आ गई थी। मेरे जैसी लड़की से क्या मतलब है तुम्हारा..? और हाँ तुमने खुद अपनी ज़िंदगी खराब की है।

तुमसे शादी करके में अपनी ज़िंदगी खराब करूँगी..?यह कैसे सोच लिया..? तुम मेरी झूठी बातों में आकर अपनी पत्नी को छोड़ बैठे।

गलत तुम हो मयंक..! मैं नहीं.. मेरी तो यह आदत है, कोई मुझे नीचा दिखाए तो मैं उसे बर्बाद कर देती हूँ।

तुम्हारी माँ और तुम बहुत तारीफ करते थे न शिल्पा यह शिल्पा वो करते थे। और मुझे इग्नोर..हटा दिया उसे रास्ते से।

अब अगर मैंने विक्की से शादी करके अपनी लाइफ में आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है।तो तुम्हें क्यों बुरा लग रहा है।

तुमने मुझसे शिल्पा के बारे में सब झूठ कहा..! और मैंने तुझे पर विश्वास कर लिया।यह तुमने अच्छा नहीं किया पारुल..! तुमने मेरी ज़िंदगी खराब कर दी।

पारुल यह मयंक क्या कह रहा है..? विक्की बीच में आकर बोला। और यह शिल्पा कौन है..? शिल्पा मयंक की वाइफ का नाम था।

, ।मैं सिर्फ इसकी दोस्ती चाहती थी। और यह जब देखो तब मेरी वाइफ मेरी लाइफ करता रहता था। इसके मॉम-डैड भी मुझे नीचा दिखाने में कसर नहीं छोड़ते थे।

बस मैंने भी उस शिल्पा नाम के काँटे को निकालने के लिए इसके दिमाग में शक के कीड़े डाल दिए। और यह बेवकूफ सब सच मान बैठा।

पारुल मैं तो तुम्हें एक समझदार लड़की समझ कर अपनी लाइफ पार्टनर बनाना चाहता था ‌। तुम इतनी घटिया सोच वाली लड़की निकलोगी यह मैंने नहीं सोचा था मयंक बोला।

मैंने भी नहीं सोचा था,विक्की बीच में आकर बोला। सॉरी पारुल..पर मैं तुम्हें एक अच्छी लड़की समझकर शादी के लिए प्रपोज किया था।

पर जो लड़की अपनी जिद्द में किसी भोले-भाले इंसान की ज़िंदगी तबाह कर सकती है, उसके साथ ज़िंदगी बिताने का फैसला मैं तो नहीं कर सकता।
 
विक्की यह तुम क्या कह रहे हो..? मैं सच में तुमसे प्यार करने लगी हूँ.. और तुम भी तो मुझसे प्यार करते हो।प्यार तो तुम मयंक से भी करती थी ना पारुल..?

मयंक यही कहा था पारुल ने तुमसे..?हाँ चार दिन पहले तक इसे मुझसे शादी करनी थी।अब तुमसे..यह कभी किसी एक की नहीं हो सकती। कहकर मयंक वहाँ से चला गया।

मयंक के जाते ही, राघव,विक्की यह लड़की तेरे लायक नहीं है।यार तू गलत लड़की से दिल लगा बैठा था।

,

अब हमें भी यहाँ चलना चाहिए।यह तुम्हारे लिए ठीक होगा।हाँ रोहन तू सही कह रहा है, मैंने गलत लड़की से प्यार करने की भूल कर दी।

विक्की प्लीज.. तुम तो ऐसा मत कहो। मैं सच में तुमसे बेहद प्यार करती हूँ।रोहन तुम समझाओ विक्की को..? सॉरी पारुल मैं कुछ नहीं कर सकता.. शायद शिल्पा भी कुछ ऐसे ही तड़पी होगी..?

शिल्पा..! तुम शिल्पा को कैसे जानते हो..? पारुल ने चौंककर पूछा। अभी इतनी देर से आप ही शिल्पा शिल्पा बोल रही थी।

विक्की चल अब यहाँ रुकने की कोई वजह नहीं है।हाँ रोहन..! तुम सही कह रहे हो।

रोहन..!यह मत भूलो.. तुम मेरे नौकर हो..! मैं तुम्हें बरबाद कर दूँगी। आप भी मत भूलिए मैम.. मैं पहले विक्की का दोस्त हूँ।

रोहन सही कह रहा है पारुल..अब तुम मुझसे मिलने की कोशिश भी मत करना। और यह बरबाद करने की धमकी किसी और को देना।

वरना तुम्हारी यह जो छोटी-छोटी दुकानें हैं न,इनका नामोनिशान मिट जाएगा। पारुल विक्की को रोकती रह गई,पर विक्की न मिलने की हिदायत देकर वहाँ से चला गया।

पारुल गुस्से से तिलमिला गई। मयंक यह तुमने अच्छा नहीं किया..! मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं। देखो अब मैं क्या करती हूँ..?

इधर मयंक गुस्से में घर चला गया और अपने को बेडरूम करके शिल्पा की तस्वीर हाथ में लेकर रोने लगा मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई ।

मैंने पारुल की बातों में आकर अपने हाथों से अपना घर उजाड़ बैठा। मुझे माफ़ कर देना शिल्पा।

संध्या व्हील चेयर के घर में घूमने लगी उनकी हालत में दिन पर दिन सुधार होता जा रहा था टूटे-फूटे शब्दों में अपनी बात कह देती थी।

विक्की राघव से पूछता है, राघव एक बात बता..?जब पारुल से मयंक का झगड़ा हो रहा था,तो तू कहाँ गायब हो गया था।

मैं वही छुपा था, चुपचाप उनके झगड़े का विडियो बना रहा था।क्यों..? विक्की ने पूछा। अरे यार जब कोई ब्याहता लड़की दो साल में ही घर बैठ जाएं तो लोग उसी पर उँगली उठाते हैं।

ऐसा ही शिल्पा के साथ हो रहा है।जब भी बाहर निकलती है,पड़ोस की रेणुका आँटी कुछ न कुछ ऐसा कह देती हैं, शिल्पा टूटकर रह जाती है।

मेरी आँटी से बात होती रहती है। उन्होंने बताया कि शिल्पा कितने मानसिक तनाव से गुजर रही है।तो तू सामने आकर भी तो मयंक को पारुल का सच बता सकता था..?

नहीं विक्की अगर मैं सामने आता ,तो पारुल तुरंत गेम पलट देती।वो आज के ड्रामे को मेरा झूठ बनाकर मयंक के सामने परोस देती।

और मयंक कान का इतना कच्चा है। वह पारुल की बातों पर , , आसानी से विश्वास कर जाता है और हमारी सारी मेहनत बर्बाद हो जाती है

अभी मुझे पर्दे के पीछे ही रहना है बस आंटी के ठीक होने का इंतजार है जिस दिन वह ठीक होंगी शिल्पा की पूरी सच्चाई मयंक के सामने होगी।

मैंने वीडियो बनाकर रेवती आँटी को भेज दिया है।ताकि वो रेणुका आँटी को दिखा दे,कमी शिल्पा में नहीं उन लोगों की सोच में है।जो उसके बारे में ग़लत सोच ले बैठे हैं।

यह तूने अच्छा किया।अब आगे क्या करना है..? कुछ नहीं अब हमारा काम खतम। मयंक को यह तो पता चला कि पारुल ने शिल्पा को बदनाम करने के लिए कितना बड़ा गेम खेला था।

पर जब आँटी से पता चलेगा शिल्पा माँ बनने वाली है।तब उसे अहसास होगा कि वो ज़िंदगी में क्या खो चुका है। यह पारुल भी चुप बैठने वालों में से नहीं है, राघव बोला।यह खुराफात तो करेगी।

सही बोला राघव..!इतनी आसानी से हार तो नहीं मानेगी। कहीं मेरे घर न पहुँच जाए..? वरना मॉम-डैड तो मुझे हमेशा के लिए बाहर भेज देंगे।

नहीं वो तेरे पीछे नहीं.. मयंक के पीछे जाएगी।अब देखना यह है कि वो करती क्या है। और तू कल जाएगा पारुल के ऑफिस..? नहीं.. अब मेरा वहाँ जाना ठीक नहीं ‌।

मयंक रात देर तक जागता रहा, इस कारण सुबह देर तक सोता रहा था। मयंक उठो बैठा..! आज ऑफिस नहीं जाना है क्या।

, मयंक घड़ी देखता है,बाप रे नौ बज गए। आज़ मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है। मयंक फटाफट तैयार होकर नीचे आता है। मौसी नाश्ता नहीं करूँगा, बहुत लेट हो गया।

रु..रुको..!म मयंकक संध्या अटकते हुए बोली। और जूस के गिलास की और इशारा करते हुए बोली।थथोडड़ा स्ससा, ओके माँ तू कह रही है तो पी लेता हूँ।

मयंक जूस पीने लगा तो देखकर संध्या मुस्करा उठी।अब तो खुश माँ..! मयंक संध्या के पैर छूकर ऑफिस निकल गया। रीता संध्या को चलाने की प्रेक्टिस कराने लगी।

संध्या जी आप ने चुप नहीं रहा कीजिए। आज़ से बल्कि अभी से बोलने की प्रेक्टिस शुरू कर दीजिए।

आप कई दिनों से बोली नहीं,बस इसी कारण आपकी जुबान उठ नहीं पा रही है।

मौसी जी आप संध्या जी के साथ ज्यादा से ज्यादा बात कीजिए और इन्हें बोलने के लिए प्रेरित कीजिए। फिर देखिए यह हम लोगों को चुप कराने लगेंगी। रीता की बात पर सब हँस पड़े।
 
मयंक मुझे तुमसे मिलना है..? पारुल फोन करके मयंक से कहती है।पर मुझे तुमसे नहीं मिलना.. मयंक फोन काट देता है।

पारुल फिर से फोन करती है। मयंक मैं रिक्वेस्ट नहीं कर रही..या तो तुम मिलने आओ, वरना मैं ही तुम्हारे ऑफिस आ रही हूँ।

तुम्हें यहाँ आने की जरूरत नहीं है। बताओ कहाँ मिलनामेरे घर आ जाओ। सॉरी कहीं और मिल सकती हो तो मिलो वरना फिर मिलने की बात भूल जाओ।

ठीक है तो होटल में मिलो..।हम्म ठीक है, वहीं मिलो जहाँ मिलते थे। मयंक मीटिंग में इतना व्यस्त हो गया और पारुल इंतज़ार कर रही है..भूल गया।

रेवती जतिन को विडियो दिखाती है। जतिन यह देखिए तो कैसे इस लड़की के कहने में मयंक ने मेरी बेटी की ज़िंदगी खराब कर दी।

छोड़ो रेवती..!"रात गई बात गई" वैसे भी अब सब बदल गया है।हाँ यह इससे यह तसल्ली रहेगी कि मयंक की नजरों में मेरी बेटी निर्दोष साबित हो जाएगी।

फिर मयंक को उसकी गलती का अहसास होगा। जैसे आज मेरी बेटी तड़प रही है,वो भी वैसे ही तड़पेगा।तब इस बाप के कलेजे को ठंडक मिलेगी.. जतिन बोले।

किस बात की ठंडक पापा..? शिल्पा ने कमरे में आते हुए पूछा। अरे कुछ नहीं बेटा.. एक प्रोजेक्ट को लेकर परेशान हूँ,पूरा हो तो दिल को ठंडक मिलेगी।

हो जाएगा पापा..आप तो बड़ी-बड़ी मुश्किलों को चुटकियों में पूरे कर देते हो..आहहहह माँ..!!क्या हुआ बेटा...? अचानक से शिल्पा के मुँह से कराह निकल गई।

माँ पता नही..?पर अचानक दर्द होने लगा। अरे बाप रे.. गाड़ी निकालिए जतिन अभी तो आठवां महीना चल रहा है.. कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए।

, हैं..? ,

शिल्पा को आनन-फानन में हॉस्पिटल ले जाया गया।जहाँ डॉक्टर बताती है,शिल्पा को लेवरपेन शुरू हो गए हैं। शिल्पा और बच्चा दोनों ही कमजोर हैं।

हम नार्मल डिलीवरी के लिए इंतजार नहीं कर सकते हैं। तुरंत ऑपरेशन नहीं किया तो दोनों की जान को खतरा हो सकता है।

आप फौरन इनके पति को बुला लीजिए। पेपर्स साइन करने होंगे। नर्स इन्हें तुरंत ओटी में शिफ्ट करो। शिल्पा के जाते ही..कहाँ साइन करने हैं..?

मैं उसका पिता हूँ,उसका पति अब इस दुनिया में नहीं है। आप उसके सामने उसके पति का जिक्र मत कीजिए.. प्लीज..हाथ जोड़कर बोले जतिन।

ओह सॉरी..आप काउंटर पर जाकर फार्म भर दीजिए। जतिन फार्म भरने चले गए। डॉक्टर ऑपरेशन शुरू कर देते हैं।

थोड़ी देर में.. बधाई हो बेटा हुआ है..आप नाना बन गए हैं। सुनते ही रेवती खुशी के मारे रो पड़ी।

मन ही मन, भगवान इतनी खुशी का दिन है, फिर भी मेरी बेटी दिल से उदास रहेगी।उस मासूम को क्यों यह दिन दिखा दिया आपने।

मयंक प्रोजेक्ट के काम में व्यस्त होने के कारण पारूल से मिलना भूल जाता है। जिसकी वजह से पारुल और भी ज्यादा क्रोधित हो जाती है।

मयंक मुझसे पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं, जितना तुम समझ रहे हो।

तुमने मेरी खुशियों को बरबाद किया है। मैं भी तुम्हें खुश नहीं रहने दूँगीं। देखती हूँ अब मेरी अगली चाल से तुम कैसे बचोगे।

तुम्हारे कारण विक्की मेरे जाल में फसने से बच गया,वो मुझसे शादी करने वाला था। पारुल खन्ना दिल्ली की नामी हस्तियों में शुमार हो जाती।

मयंक तुमने एन वक्त पर सारा खेल बिगाड़ दिया..वो रोहन का बच्चा..वो भी नौकरी छोड़कर भाग गया।अब विक्की से मिलने के रास्ते बंद हो गए।

शिल्पा को भी होश आ जाता है।उसे पता चलता है कि उसने एक खूबसूरत बेटे को जन्म दिया है, तो उसकी आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे

अपने बेटे को गोद में लेकर वह उसमें मयंक का छवि देखने लगी।यह बिल्कुल तेरे जैसा है बेटा.. अच्छा हुआ अपने बाप पर नहीं गया।

माँ की कही बात दिल पर काँटे की चुभी शिल्पा को।पर फिर उसने खुद को संभाल लिया।

माँ सही तो कह रही हैं। मयंक ने मुझे छोड़ दिया,पर मेरे वो तो अब पारुल के साथ खुश होगा, अब-तक घर भी बसा चुका होगा। शिल्पा अपनी मां को सामने देखकर वह खुश होने की कोशिश करती है।

माँ..! एक बात कहूँ मानोगी..? क्या बोलो..?अब यह मत कहना यह खुशखबरी मयंक को भी दे दो। नहीं माँ मयंक को नहीं पर माँ को..? उन्हें तो सब पता है ना।

उनकी इसमें क्या गलती,उन्होंने तो हमेशा मुझे माँ जैसा प्यार किया। अगर वह ठीक होती तो शायद ऐसा कभी नहीं होने देती।

ठीक है मैं जतिन से बात करूँगी। उनसे पूछे बिना मैं कुछ नहीं कर सकती।पर एक बात ध्यान हमेशा ध्यान रखना कि अब हमारा उनसे कोई रिश्ता नहीं है।

जी माँ बस यह पहली और आखरी बार.. फिर कभी भी कुछ नहीं कहूँगी..प्लीज माँ..प्लीज पापा..!

शिल्पा के कहने पर जतिन मान जाते हैं। बस पहली और आखिरी बार बेटा.. फिर कभी मत कहना फोन करने के लिए..? जी पापा।

मैं अभी संध्या जी को फोन करता हूंँ। इतना कहकर जतिन संध्या जी को फोन लगाते हैं। फोन मयंक की मौसी उठाती हैं।हैलो क्या संध्या जी से बात हो सकती है।
 
मौसी जतिन से शादी के समय ही मिली थी तो फोन पर उन्हें पहचान नहीं पाईं थी। क्या दीदी से बात..? वो तो नहीं हो सकती, शायद आपको पता नहीं दीदी की तबीयत खराब है।

जी मुझे उनकी हालत के बारे में सब पता है। संध्या जी बीमार है पर वह सुन तो सकती हैं..? आप सिर्फ उन्हें फोन दे दीजिए।

जी मैं उन्हें फोन देती हूँ। दीदी कोई आपसे बात करना चाहता है, नाम नहीं बताया। लीजिए फोन और सुन लीजिए।

संध्या जी टूटे-फूटे शब्दों में..हहहलो.हैलो मैं जतिन बोला रहा हूँ, शिल्पा का पापा आपने पहचान तो लिया होगा..?व्यंग्य भरी भाषा बोले जतिन।

माफ़ कीजिए संध्या जी अगर आपको परेशान किया तो चाहूँगा।शिल्पा आपसे बात करना चाहती है..आप उसकी बात सुन लीजिए। जतिन शिल्पा को फोन दे देते हैं। माँ आप मेरी आवाज़ सुन रही हैं।

"माँ ..!!आप दादी बन गई हैं...सुना माँ आपने आप दादी बन.. क्या... संध्या के मुँह से बिना अटके एकदम से साफ़ स्वर निकला।"

"हाँ माँ..!अच्छा होता कि आप आज मेरे पास होती..? आपके पोते को आपकी गोद मिल जाती।मेरा पोता..सुन छोटी..! मैं दादी बन गई।

मौसी और रीता आश्चर्य से संध्या को देखने लगे।यह कैसा करिश्मा हो गया।जो इतने प्रयासों के बावजूद नहीं बोल पा रही थी,वो अचानक साफ-साफ बोल गई।

अच्छा रखती हूँ माँ..अपना ध्यान रखना। थोड़ी-सी बात करके शिल्पा फोन काट देती है।बस अब खुश..?अब मत कहना बात करनी है..जतिन बोले।

संध्या जी बोल लेती है तो मयंक को अभी तक सच क्यों नहीं बताया उन्होंने.. जतिन क्रोध में बोले। शिल्पा यह सुनकर रुआंसी हो गई।

बस-बस रोना नहीं.. बहुत रो चुकी हो..अब खुशियाँ आईं हैं,उनका स्वागत करो।

शिल्पा की आँखों में आँसू देख जतिन प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरने लगे। बेटा तू बहुत भोली है, संध्या जी अपने बेटे की खुशी ही पहले देखेंगी।

तू जितनी जल्दी इन सब यादों से निकलेगी,उतनी जल्दी अपनी ज़िंदगी को नये नजरिए से देखेगी।अब तू माँ बन गई है।अपने बेटे को खुशियाँ देने के लिए तेरा खुश होकर ज़िंदगी जीना जरूरी है।

आप सही कह रहे हैं पापा.. मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगी ,मेरे बेटे पर मेरे गमों की परछाई भी नहीं पड़े।मुझे मयंक की यादों से बाहर निकलना होगा।

, , -हम्म यह हुई न बहादुरी बच्चों वाली बात.. अच्छा सुन एक गुड न्यूज़ है।क्या पापा..? मैंने तेरे चाचा से बात की, और तेरे बारे में सब बता दिया।

नितिन बहुत गुस्सा हो रहा था।वो कह रहा है अब शिल्पा को इंडिया नही रहने देगा, वो अपने पास अमेरिका ले जाएगा। मैंने भी हाँ करदी है।

अगले महीने आ रहा है..तेरा क्या कहना है..? मैं भी यहाँ नहीं रहना चाहती हूँ पापा.. शिल्पा बोली।यहाँ रहूँगी तो वही बातें मेरे इर्द-गिर्द घूमती रहेंगी।

पारुल मयंक को बार-बार फोन करके परेशान कर रही होती है। तुम पागल हो गई हो क्या पारुल..? बोला न फ्री होकर तुमसे मिलता हूँ।

मयंक ऐसा मत करो.. वरना मैं अपनी जान दे दूँगी। तुम तो मुझसे शादी करना चाहते थे ।पर आँटी तो मुझसे नफ़रत करती हैं। क्या करती,कब तक तुम्हारा इंतज़ार करती।

मुझे लगा विक्की मेरा अच्छा जीवनसाथी बन सकता है।पर तुम्हारे कारण वो भी मुझे छोड़ गया।अब मैं क्या करूँ..?कहाँ जाऊँ..? पारुल फोन पे रोने लगी।

मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मयंक..! प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो। पारुल ने नया दाँव खेलना शुरू कर दिया। मयंक मैंने हमेशा तुम्हारी खुशियाँ चाही हैं।

कल गुस्से में तुम्हें न जाने क्या-क्या कह गई मयंक सॉरी यार...गलती हो गई। अच्छा-अच्छा रोना बंद करो।

पहले तुम चुप हो जाओ पारुल। हम इस बारे में मिलकर बात करते हैं मयंक नरम सुर में बोला।ओह मयंक..! मेरी बात समझने के लिए थैंक्स।

मयंक काम अधिक होने के कारण रात ऑफिस में ही रुक जाता है।प्रोजेक्ट का काम आज ही खतम करना है,तो मौसी जी मैं घर नहीं आऊँगा।

संध्या बोलने लगी यह बात मयंक को बताने के लिए संध्कर देती हैं। दीदी आपने मयंक को क्यों नहीं बताने दिया..? अरे छोटी जरा सोच वो अचानक मुझे बोलते देखेगा तो कितना खुश हो जाएगा।

हाँ यह बात तो सही कही दीदी..! संध्या अपनी बहन को पारुल की सब सच्चाई बता देती हैं। ओह दीदी यह पारुल तो बड़ी चालाक निकली।

हाँ छोटी..! उस लड़की मेरी भोली-भाली बहू शिल्पा की हँसती-खेलती ज़िंदगी में आग लगा दी। मैं लाचार पड़ी सब देखती रही, मुझे भी तभी अपाहिज होना था।

काश मयंक ने पहले ही मेरी बात मान ली होती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

पर अब बहुत हुआ..अब मयंक को उसकी गलती बतानी होगी। शिल्पा को फिर से उसकी जगह, उसका खोया सम्मान वापस दिलाना होगा। मुझे मेरी बहू और पोता दोनों वापस चाहिए।

रीता को दवा लेकर आती देख,संध्या चुप हो जाती है।अब आप आराम करिए,आपने आज बहुत बात कर ली। आज खुशी के मारे चलने की प्रेक्टिस करना भूल गई।

थैंक्स रीता बेटा..! आपने मेरे लिए बहुत मेहनत की, एक बेटी की तरह देखभाल की।बेटी भी कहतीं हैं और "आप" भी..? मुझे "तुम" कहिए आँटी बड़ी है आप।

बस अब सो जाइए सुबह बात करेंगे.."गुड नाईट"रीता संध्या को दवा देकर सुला देती है। मौसी जी चलती हूँ सुबह आऊँगी.. कहकर रीता घर चली गई।

, मना , में घर बना लिया।), : मयंक और उसकी टीम देर रात तक प्रोजेक्ट पर काम करती रही‌। आखिरकार काम खत्म हो ही गया।

"पहले पापा फिर माँ की तबियत के कारण इस प्रोजेक्ट पूरा होने में इतना समय लग गया।"

" आशुतोष जी अगर यह आज खतम नहीं होता तो यह डील कैंसल हो जाती।"

"यह पापा का ड्रीम प्रोजेक्ट था।इस पर उन्होंने बहुत मेहनत की थी। चलिए.. आप सभी आराम कर लीजिए। मैं भी थोड़ा सो लेता हूँ।

मयंक की परेशानी दूर हुई तो दूसरी पैर पसारे खड़ी थी। दूसरे भी मयंक पारुल से नहीं मिल पाया।

प्रोजेक्ट के सिलसिले में, मयंक मुंबई की पार्टी के साथ मीटिंग में व्यस्त रहा।

पारुल के बार-बार फोन करके मयंक को मिलने के लिए तंग कर रही थी।इस वजह से मयंक ने मोबाइल फ्लाइट मोड पर कर देता है।

शाम को घर लौटते वक़्त..आज पारुल से मिल ही लेता हूँ।वो पारुल को फोन उठाता है,पर उधर से जो कुछ सुना,वो सुनकर उसके होश उड़ गए।

हेलो आप कौन..? यह तो पारुल का नंबर है ना..? हाँ जी यह पारुल का ही नंबर है।मैं डॉक्टर आनंद बोल रहा हूँ।पारुल मेरे हॉस्पिटलअभी तो फिलहाल ठीक है उन्होनें स्लीपिंग पिल्स खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था।

क्या..?पर क्यों..? वह आप उनसे ही पूछ लीजिए। मयंक सीधा हॉस्पिटल पहुँच गया। पारुल तुम ठीक तो हो ना..? ये आत्महत्या, स्लीपिंग पिल्स यह सब क्या है..?

सर मुझे लगा मैम सो रही है। मैं अपना काम ख़त्म करके मैम को जाने की परमीशन लेने के लिए आई।

मैम कुछ बोली नहीं तो मैंने मैम को छुआ,मैम बेहोशी की हालत में नीचे गिर गई। मैंने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया उनको हॉस्पिटल ले आई।

यहाँ आकर पता चला कि उन्होंने नींद की गोलियां खा ली थी।पारुल की मेड लीला ने मयंक से कहा,मैम किसी बात को लेकर बहुत दुखी थी।अब मैं चलती हूँ मैम,कल रात से यहीं हूँ।

दोनों ने आँखों ही आँखों में कुछ इशारा किया। मयंक सर मैं जाना तो नहीं चाहती,पर मेरी बेटी को बुखार आ गया है तो दो-तीन दिन नहीं आ पाऊँगी।

आप मैम को संभाल लेंगे सर..?हाँ मैं सब सँभाल लूँगा तुम जाओ अपनी बच्ची को देखो। धन्यवाद सर.. लीला वहाँ से चली गई।

यह सब क्या है पारुल..? मयंक मैं बहुत अकेली हो गई हूँ। कोई नहीं है मेरा..अब मैं जीना नहीं चाहती।

पर फिर भी तुम मुझे अनदेखा कर रहे हो। मैंने तुमसे अपनी गलती की माफ़ी भी माँग ली..पर कोई फायदा नहीं हुआ। कहते हुए पारुल रोने लगी।

तुम तो न मिलना चाहते हो ,ना ही मुझसे शादी करना चाहते हो। तुम्हारे कारण विक्की मुझे छोड़ गया। मैं बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ।

ऐसी ज़िंदगी जीने से तो मरना बेहतर है।अब बस भी करो पारुल,जो हुआ उसे बुरा सपना समझकर भूल जाओ।हम इस बारे में बातनहीं मयंक अब बात करने का समय निकल गया।अब तो मुझे हाँ,ना में जवाब चाहिए।तुम मुझसे शादी करोगे या नहीं...?

पारुल मैंने कहा न हम इस बारे में बात करेंगें..पर अभी तुम आराम करो।तभी डॉक्टर आकर कहता है,अब पारुल ठीक है,आप उन्हें घर ले जाइए।

जी धन्यवाद डॉ आनंद.. पारुल मैं डिस्चार्ज के पेपर तैयार करवाता हूँ। मयंक डॉ आनंद को पारुल के पास छोड़कर चला गया।

धन्यवाद आनंद तुमने मेरी एक मदद तो कर दी मुस्कुराते हुए पारुल बोली।बस एक और करदो..उस बेवकूफ से यह और कहदो कि मुझे अकेला न छोड़े।

वो तो मैं कह दूँगा..पर मेरी फीस बेशर्मी से हँसते हुए डॉक्टर ने कहा। पारुल ने तकिए के नीचे से दो नोटों की गड्डिया आनंद को पकड़ा दी।

पारुल यह इतना बड़ा इमोशनल फूल है, तुमने आत्महत्या का बहाना क्यों चुना..? कोई और भी तरीका आजमा सकती थी।

हम्म आजमा सकती थी,पर इसके घर तक पहुँचने का यह आसान तरीका है।अब यह शादी करे न करे पर मुझे घर जरूर ले जाएगा।

तब-तक मयंक भी आ जाता है। चलें पारुल..? हम्म चलो।

मिस्टर मयंक पारुल का विशेष ध्यान रखना। इन्हें अकेला मत छोड़ना, वरना डिप्रेशन में जा सकती हैं।

जी डॉक्टर मैं पारुल का अच्छे से ध्यान रखूँगा। मयंक पारुल को उसके घर ले आया।कब कौनसी दवा लेनी है वो पारुल को समझाने लगा।

छोड़ो मयंक..! मुझे कोई दवा नहीं लेना। कैसी बात कर रही हो पारुल..? क्यों नहीं दवा लेना..? ठीक कैसे होगी तुम..? बच्चों जैसी बातें मत करो।

मयंक तुम भी यहीं रुक जाओ ना..? या मुझे अपने घर ले चलो। मैं कभी नहीं रहना चाहती।पारुल तुम चिंता मत करो। मैं जल्द ही तुम्हें अपने घर ले जाने की व्यवस्था करता हूँ पर पहले मां से एक बार बात तो कर लूँ..?अब गुड गर्ल की तरह आराम करो।

मयंक पारुल को समझा-बुझाकर घर छोड़कर, अपने घर के लिए निकल गया।
 
यह मयंक हमेशा आँटी का चिपकू बना रहेगा। पहले मेरी शिल्पा,मेरी शिल्पा करता था, अब माँ-माँ करता है,सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

मयंक को घर पहुँचने में देर हो गई थी। संध्या और मौसी सो चुके थे। मयंक को बहुत भूख लग रही थी। उसने फ्रिज खोली तो उसमें रसमलाई रखी थी।

वाह रसमलाई..! जरूर शिल्पा लाई होगी..? जाकर देखता हूँ। थोड़ा आगे बढ़ा ही था कि ठिठक कर रुक गया।

शिल्पा को तो मैंने ही अपनी ज़िंदगी से निकाल फैंका। तो अब क्यों उसके बारे में इतना सोच रहा हूँ।

मयंक की भूख मर गई,फ्रिज से पानी की बोतल लेकर वो कमरे में सोने चला गया।

प्रोजेक्ट और पारुल ने मयंक को बहुत थका दिया था। सुबह संध्या मयंक को जगाने के लिए उनके कमरे में आती हैं।

कमरे की हालत देखकर उन्हें रोना आ जाता है। मयंक शिल्पा के जाने के बाद किसी को भी अपने कमरे में नहीं जाने देता था।

क्या हालत हो गई कमरे की, और मेरे बेटे मयंक की संध्या मन ही मन सोचने लगी।

मयंक उठ जा बेटा..! ऑफिस के लिए देर हो रही है।मयंक के बालों में उंगलियां घुमाते हुए संध्या बोली।

हम्म् माँ सोने दो ना.. बहुत नींद आ रही है। फिर अचानक से चौंक कर उठता है।माँ..!! मुझे अभी ऐसा लगा जैसे आपने कुछ कहा..? मयंक आश्चर्य से बोला।

हाँ तूने सही सुना है बेटा..! मैंने ही तुझे आवाज दी थी।माँ आप बोलने लगी..? ओह माँ !!यमें सिर रखकर लेट गया मयंक।

माँ आज कितने दिनों के बाद मेरे दिल को सुकून मिला। आपकी आवाज सुनने को तरह गया था।

पर यह अचानक कैसे..? तेरे पापा बनने की खुशी में मयंक.. संध्या बोली।

मैं पापा!! मैं कुछ समझा नहीं माँ..? साफ-साफ कहिए।तू पापा बन गया है, और मैं दादी..पर मेरी बदनसीबी देखो.. मैं अपने पोते को देख भी नहीं सकती।

संध्या बताती है शिल्पा ने बेटे को जन्म दिया है।माँ मुझे उसके विषय में कोई बात नहीं सुननी है।

सुननी पड़ेगी बेटा!! अगर आज तूने मेरी बात नहीं सुनी तो सारी ज़िंदगी पछताएगा।

माँ आपको अभी भी शिल्पा की इतनी फिक्र है..? उसने एक बार भी आपके या मेरे बारे में सोचा।उसे तो बस माँ के घर जाने का बहाना चाहिए था।

शादी मुझसे की,पर प्यार तो वह सिर्फ राघव से ही करती थी।माँ वो उससे ही मिलने वहाँ जाती थी। मैंने उसे मना किया था।वो माँ के यहाँ नहीं जाएगी।

मेरे मुंबई जाते ही उसे मौका मिल गया।माँ आप बहुत भोली हो.. "मयंक मेरी बात सुन पहले" नहीं माँ आप पहले मेरी बात सुनो।

मैं मुंबई से लौटा.. सीधे गाजियाबाद पहुँचा।वो वहाँ माँ से नहीं राघव से मिलने गई थी। शिल्पा को मैंने राघव के कमरे में देखा।

और तो और वो उसे यहाँ तक साथ ले आई। मुझे तो घिन आती है शिल्पा से,आप कहती हो मैं पापा बन गया। नहीं मैं नहीं मानता, मुझे शिल्पा पर कतई भरोसा नहीं।

मयंक..!!!बस कर अब शिल्पा के बारे में एक और शब्द कहाँ,तो तू मेरा मरा मुंँह देखेगा।माँ इतना सब सुनकर आप मुझ पर गुस्सा हो रही हैं।

हाँ हो रही हूँ गुस्सा..! तुझे कहा था मैंने पारुल से दूर रह।पर तूने मेरी एक नहीं सुनी।तू शिल्पा पर आरोप लगा रहा है।उस मासूम , बच्ची के बारे में कुछ बोल रहा है।

तो सुन उस दिन क्या हुआ था। संध्या मयंक को सारी बातें बता देती है। क्या...? तुम सच कह रही हो माँ..?

हाँ सच कह रही हूँ.. पारुल जिस दिन इस घर में आई थी। मैंने तुझे आगाह किया था, इससे दूर रह पर तूने मेरी एक नहीं सुनी। तेरे पिता भी दिन-रात इसी चिंता में डूबे रहते थे।

पारुल ने मेरा घर बर्बाद कर दिया मयंक। मैं उसकी शक्ल भी नहीं देखना चाहती हूँ।

मयंक सारी सच्चाई सुनकर सदमे में आ गया।यह मैंने क्या कर दिया माँ..!! बिलखते हुए मयंक बोला। मेरी मति मारी गई थी माँ, मुझे शिल्पा कर ऐसे अविश्वास नहीं करना चाहिए था।

यह क्या हो गया मुझसे..? मैंने उस मासूम को कितना भला-बुरा कह डाला। मैंने खुद इन हाथों से अपना घर जला डाला।

पर माँ..? शिल्पा ने मुझे क्यों नहीं बताया कि वो माँ बनने वाली है..?

कैसे बताती..तू उसका विश्वास करता..?कभी नहीं करता। तू तो इस कदर पारुल के रंग में रंगा हुआ था। शिल्पा तुझे यह सच बताती तो तू अपने बच्चे को ही नाजायज ठहरा देता था।

शायद यही वजह रही होगी,जो उसने तुझे यह सच नहीं बताया।कितनी खुश थी वो, इसलिए माँ के पास रुकी नहीं।

वो तुझे यह खबर सुनाने के लिए बेताब थी। इसलिए सुबह-सुबह जतिन जी और राघव हमें यहाँ छोड़ने चले आए थे।

पर अब तो कुछ बचा ही नहीं।सब खत्म हो गया। मयंक तूने सही नहीं किया।वो पारुल सिर्फ और सिर्फ तेरे पैसों से प्यार करती है, तुझसे नही।

मयंक शिल्पा का सच सुनकर होश खो बैठा। और संध्या की गोद में सिर रखकर रोने लगा।

माँ अब क्या होगा। मैं अपने बच्चे को देखना चाहता हूँ।उसे गोद में लेना चाहता हूँ।पर कैसे..?किस मुँह से शिल्पा के सामने जाऊँ।अब तो हमारे बीच कोई रिश्ता भी नहीं रह गया है।, वह ठीक तो है ना..? जी , please read next part),e : पारुल ने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।यह जो कुछ भी हुआ माँ, इसमें मेरी ही गलती थी।

मैं शिल्पा को बहुत अच्छे से समझता था। पारुल के कहे में आकर भोली-भाली शिल्पा पर शक कर बैठा।

मैंने ही पारुल को बहुत ज्यादा छूट दे दी थी। तभी उसकी हिम्मत बढ़ी कि वह मुझसे ही मेरी शिल्पा की बुराई कर सके। सही कहती है पारुल..मेरा घर मेरे कारण टूटा,मैं ही जिम्मेदार हूँ।

बस कर, शांत हो जा बेटा..अब जो हो गया उसे कैसे ठीक करें,यह सोचो..?

मुझे मेरी बहू और पोता दोनों चाहिए।हम वहाँ जाएंगे,उन लोगों से मुझे भी माफी मांगनी पड़ी तो मैं माँग लूँगी। पर मैं अब शिल्पा के बगैर नहीं रह सकती।

क्या मुँह लेकर वहाँ जाऊँगा माँ..!वो लोग मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे। मैं शिल्पा का सामना नहीं कर सकता।

तो मुझे ले चल, मैं बात करूँगी। कोशिश तो करनी पड़ेगी, फिर ऊपर वाले की मर्जी।

ठीक है माँ जैसी तेरी मर्जी..अभी दो-तीन ऑफिस में बहुत काम है, काम खतम होते मैं आपको वहाँ जरूर ले चलूँगा।

जैसी तेरी मर्जी बेटा..दो दिन बाद तो तेरा जन्मदिन भी आ रहा है।संध्या उठकर अपने कमरे में आराम करने चली जाती हैं।

मयंक सोच में डूबा हुआ था। कैसे वो और शिल्पा बच्चों को लेकर आपस में लड़ जाते थे।

मयंक जब हमारे शिल्पा आज़ तुम यह कैसी बातें लेकर बैठ गई.?

बोलो न मयंक..?

अच्छा जरा सोचने तो दो..?हम्म हाँ मैं अपनी बेटी का नाम

वंशिका रखूँगा। और बेटे का..? उसके लिए कोई नाम नहीं सोचा।

देखो शिल्पा जब बच्चे होंगे तो नाम भी रख लेंगे। बेटी होगी तो मुझे तुम्हारे साथ-साथ उसका भी प्यार मिलेगा। बेटियाँ पापा की जान होती है।

बेटा तो माँ का लाडला होता है।तब तुम मुझसे ज्यादा उससे प्यार करोगी। ओह यह बात..?आप अभी से मेरे बेटे से जलने लगे।

देखो चिढ़ गई..? मैं सच ही तो कह रहा था। मयंक!! बेटा चल नाश्ता करले। मौसी की बात सुनकर मयंक चौंक गया।
 
शिल्पा कितने दूर हो गए हैं हम, जब बच्चे नहीं थे..?तब तुम उनके नाम के लिए इतना सोचती थी। बच्चों की तरह रूठ जाती थीं।

आज़ जब हमारा बेटा इस दुनिया में आ चुका है।तो हमारे बीच इतनी दूरियाँ आ गई कि मैं उसका नाम रखना तो दूर उसका चेहरा भी न देख सका।

उफ़ यह मैं क्या कर बैठा। पारुल मेरा घर तोड़कर तुमने अच्छा नहीं किया।

पारुल ने एक बड़े रिसॉर्ट में मयंक की बर्थ डे पार्टी रखती है। उसने वहाँ अपने सभी कॉलेज फ्रेंड और अपने पापा को भी बुलाया था।

मयंक तुम मुझसे कितना भी दूर भागते रहे हो।पर इस पार्टी में तुम्हें मुझ से सगाई करनी पड़ेगी।

मैंने पापा को इसीलिए बुलाया है। वो हमारी चट मंगनी पट शादी कर देंगे। फिर देखती हूँ तुम्हारी अकड़।

मयंक भी बर्थ डे पार्टी में शामिल होने के लिए निकल जाता है। पारुल यह तुम्हारे साथ मेरी ज़िंदगी की अंतिम पार्टी होगी।आज , तुम्हें पता चलेगा किसी की ज़िंदगी तबाह करने की सजा क्या है।

मयंक बर्थ डे पार्टी में पारुल को खूब खरी-खोटी सुनाता है। तुम्हारे झूठ में फसकर,तुम्हारी बात सच मानकर शिल्पा के साथ बहुत ग़लत किया। मुझे तुम पर भरोसा नहीं करना चाहिए था।

यह क्या कह रहे हो मयंक तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है मैं तुम्हारा बुरा चाहूँगी..? तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो..? अरे आँटी कुछ भी कह रही हैं।

तुम उनकी किसी बात का भरोसा मत करो..?वह सिर्फ शिल्पा के बेटे को अपना पोता समझ बैठी हैं और कोई बात नहीं है।

उन्हें सिर्फ पोते का लालच में है।इसके उन्होंने शिल्पा को लेकर चाल चलनी शुरू कर दी। शिल्पा तुम्हारे लायक नहीं थी मयंक!!यह आँटी की चाल है।

"माँ के लिए कुछ मत बोलो पारुल" कमाल है यार.. कोई माँ को लेकर इतना अँधा हो सकता है।तुम्हारी माँ अपने मतलब के लिए इतना नीचे कैसे गिर सकती है..?

पारुल.!!तडाक.. पारुल के गाल पर एक जोर का थप्पड़ पड़ा। मैं माँ के खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकता।

दूर हो जाओ मेरी ज़िंदगी से, फिर कभी-भी अपनी शक्ल नहीं दिखाना।

मुझ पर हाथ उठाने तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई।आप कुछ नहीं बोलेंगे पापा..?इस दो कोड़ी के इंसान ने आपकी बेटी पर हाथ उठाया।

जय,नेहा,राहुल तुम सब भी चुपचाप खड़े तमाशा देख रहे हो।

हम क्या बोले पारुल..?तू आज हम सबकी नजरों से गिर चुकी है।हँसी-मजाक एक अलग बात है,पर किसी की जिंदगी तबाह करने में हम तेरे साथ नहीं।

सॉरी मयंक पिछली पार्टी में जो कुछ भी हुआ था।वो हमने इसके कहने पर मजाक किया था।आज जब हमें यह पता चला,तेरा घर टूटने का कारण यह पारुल है।तो इसके इस कृत्य में हम भी खुद को कहीं न कहीं दोषी समझ रहे हैं। हमें माफ कर देना मयंक.. मयंक के कॉलेज के सभी दोस्त वहाँ से चले गए।

पारुल के पापा भी अपनी बेटी की करतूतों के लिए मयंक से माफी माँगने लगे।

पारुल अब अपना सामान समेटो, और मुंबई चलने की तैयारी करो।यह मेरे ही गलत लाड़-प्यार का नतीजा है जो आज तुम इस कदर गिर चुकी हो।

एक बिन माँ की बच्ची को मैंने दुनिया की हर ख़ुशी दी, सिवाए संस्कारों के,अब तुम वही करोगी जो मैं चाहूँगा समझी।

मैं मुंबई नहीं जाऊँगी पापा..आप जो चाहें कर लो।हाँ वही तो करने जा रहा हूँ।अब यहाँ का कारोबार तुम्हारे चाचा संभालेंगे।

तुम्हें यहाँ रहना है रहो..?पर तुम्हें घर से एक फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी यह बात गाँठ बाँध लेना।

पारुल समझ गई,अब यहाँ उसकी दाल नहीं गलने वाली। मयंक को भी सारी सच्चाई पता चल चुकी है।

अब यहाँ समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं, वह गुस्से में पैर पटकती हुई वहाँ से चली गई।

शिल्पा अस्पताल से घर आ गई थी।समय अपनी रफ्तार से चल रहा था। मयंक शिल्पा के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

शिल्पा के चाचा भी अमेरिका से आ जाते हैं। सुबह-सुबह डोरबेल की आवाज से शिल्पा आकर दरवाज़ा खोलती है। अरे चाचू आप..!आप तो अगले हफ्ते आने वाले थे।

हम्म झूठ बोला था मैंने.. नितिन मुस्कुराते हुए बोला। मैं तो अपने नाती से मिलने के लिए इतना बेताब था। मैंने अपनी छुट्टियों की डेट बदलवा ली।

कहाँ है छोटू..? चाचू अंदर झूले में है,जाग रहा है। तभी माँ की आवाज आती है। शिल्पा इतनी सुबह-सुबह किससे बात कर रमाँ आप आकर देख लो.. कोई आपसे और पापा से मिलने आया है। चाचू मैं आपके लिए चाय बनाती हूँ..आप पापा और माँ को सरप्राइज देते रहो.. शिल्पा मुस्कुराते हुए चाय बनाने चली गई।

नितिन पीठ करके खड़ा हो जाता है।जी कहिए क्या काम है..?इतनी सुबह-सुबह आने की वजह..? जतिन ने पूछा। जी आपसे मिलना चाहता था.. नितिन ने पलटते हुए कहा।

नितिन..!! जी भैया मैं.. नितिन भाई-भाभी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है।पर तुम्हें तो दस दिन बाद आना था..?इतनी जल्दी क्यों..?

भैया वो सुनयना के पापा की तबियत ठीक नहीं थी।तो सोचा अभी चलते हैं, सुनयना भी अपने पापा से मिल लेंगी।

शिल्पा को भी ट्रैवलिंग के समय बच्चे को साथ ले जाने में आसानी होगी। वाह चाची भी आईं हैं.. शिल्पा चाय लेकर आ जाती है।

हाँ परसों यहाँ आ जाएगी। फिर हम शिल्पा को लेकर यहाँ से चले जाएंगे।

पर अभी जाना बहुत जल्दी नहीं हो जाएगा नितिन..?बच्चा बहुत छोटा है अभी.. रेवती चिंता करने लगी। भाभी आप खामखां चिंता कर रही हो।

बच्चों की डॉक्टर साथ में जा रही है फिर कैसी चिंता..?हाँ रेवती.. नितिन सही तो कह रहा है। सुनयना के होते हुए हमें कैसी चिंता..?सब अच्छा होगा।

शिल्पा बेटा क्या-क्या सामान चाहिए लिस्ट तैयार करलो।हम तुम्हारे जाने की तैयारियाँ करते हैं।

उसकी कोई जरूरत नही है भैया.. मेरे होते हुए शिल्पा को कभी कोई कमी नहीं होगी। आप तो जानते ही हो सुनयना शिल्पा से कितना प्यार करती है।

जानते हैं नितिन इसलिए तो शिल्पा को तुम्हारे साथ भेजने को तैयार हैं। सुनयना ने हमेशा एक बेटी की तरह शिल्पा से प्यार , किया।

भगवान भी अच्छे लोगों को दुख देता है। इतने ममता भरे हृदय वाली सुनयना.. ममता के सुख से वंचित रह गई।

छोड़ो भैया मैंने तो इस विषय में सोचना ही बंद कर दिया। मैं नहीं चाहता.. मेरे कारण कभी सुनयना को अपनी कमी का अहसास हो।

मयंक अपनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, इसमें और तीन-चार दिन निकल गए। और कितने दिन हमें इंतज़ार करना पड़ेगा।

मैं अपने पोते और शिल्पा से मिलने के लिए बहुत बैचेन हो रही हूँ । तुझे समय नहीं है तो छोटी को लेकर चली जाऊँ।

नहीं माँ..!बस दो-तीन और फिर हम चलेंगे और मौसी को भी साथ ले चलेंगे।

जैसी तेरी मर्जी..तू कभी मेरी बात नहीं सुनता। हमेशा ही अपने मन की करता है इसलिए तो दुखी रहता है।

माँ आप ऐसा क्यों कह रही हो..? ठीक है बाबा..कल सुबह चलते हैं।अब खुश..आप भी न मुझे परेशान करने के बहाने ढूँढती रहती हो।

सुबह मयंक माँ और मौसी को लेकर गाजियाबाद पहुँच गया। जतिन और रेवती इन लोगों को देखकर चौंक जाते हैं।

आप लोग यहाँ..?यूँ अचानक आने का क्या मतलब है..?

जतिन थोड़ा रूखी आवाज में बोले।

जतिन जी हमें मालूम है आप हमसे बहुत नाराज़ हैं। मैं भी क्या करती, मेरी लाचारी के कारण, सब-कुछ आपस ऐसे उलझा.. सुलझाने का मौका ही नहीं मिला।

मुझे शिल्पा से मिलकर माफी माँगनी है।अगर मैं बोलने में असमर्थ नहीं होती तो आज मेरी बहू और पोते मेरे पास मेरे घर में होता।

ओह समझा...आप लोग शिल्पा से नहीं.. उसके बच्चे के लिए यहाँ आए हो।

नहीं पापा आप ग़लत समझ रहे हो..? मैं शिल्पा से माफी माँगने , हो..?आया हूँ।

पापा नहीं.. अब हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है।यह बिना मतलब के रिश्तों में हमें मत बाँधिए।

रेवती बहन आप तो समझिए इस बात को..जो हुआ भूलकर आगे बढ़ने में भलाई है।

आपने सही कहा संध्या बहन..आगे तो बढ़ना है पर उस सफर में हमें आपके परिवार का साथ नहीं चाहिए।

और किस पोते की बात करने आए हैं आप लोग। मेरी इन आँखों के सामने,आपके बेटे ने, मेरी बेटी के दामन पर अपनी गंदी सोच का कीचड़ उड़ेला था।

यह बात न तो मैं कभी भूलूँगा..न ही किसी को भूलने दूँगा।रही बात मिलने की,तो शिल्पा आप लोगों की पहुँच से दूर जा चुकी है।

चलो माँ.. मैंने तो पहले ही कहा था।यह लोग मुझे कभी भी माफ़ नहीं करेंगे। संध्या मयंक से लिपटकर रोने लगी। तो रेवती की आँखें भर आईं। : माफ करें वो भी तुम्हें मयंक...?तुमने माफी के लायक कोई काम नहीं किया है मयंक। तुमने तो गुनाह किया है और गुनाह की कोई माफी नहीं होती।

आप सच कह रहे जतिन जी...संध्या बोली।मयंक ने गलती नहीं गुनाह किया है।पर एक बार मुझे मेरे पोते से मिल लेने दो।

मैंने कहा न आप लोगों से शिल्पा यहाँ से जा चुकी है। कहाँ गई है..? वह मैं आपको नहीं बताऊँगा।

जिस दिन मुझे लगेगा अब मयंक को सच में पछतावा है ।उस दिन मैं इस बारे में कुछ सोचूँगा।

पर अभी आप लोग फिलहाल के लिए हमें अकेला छोड़ दें.. जतिन ने कहा।

चलो माँ..! मैंने तो पहले ही कहा था। मैंने काम ही ऐसा किया है, मुझे माफी कहाँ से मिलेगी।
 
सही कहा मयंक तुमने तुम बार-बार वही काम करते रहे।जो नहीं करना चाहिए था। जब तुम्हें पहले ही पारुल से मिलने से रोका गया था।

तो तुम नही माने, यशवंत जी ने मना किया, संध्या जी ने मना किया। शिल्पा बार-बार इसी बात पर टूटकर बिखरती रही कि पारुल से मत मिलो, पर तुम नहीं माने।

तुम्हारे सामने पारुल की सच्चाई तक आ गई,फिर भी तुम नहीं माने। उसने सुसाइड का झूठा नाटक किया, तो फिर दौड़ कर उसके पास पहुँच गए।

हम कैसे विश्वास गलती का पछतावा है।क्या पता कल पारुल फिर कुछ ऐसा करे और तुम फिर उसके पास लौट जाओ।

शिल्पा फिर से उसी दर्द में घिर जाए। जिस दिन हमें विश्वास होगा कि तुम सच में सुधर गए हो..? तब हम सोचेंगे तुम्हें शिल्पा से मिलने दे या नहीं.?

तुम्हें आश्चर्य हो रहा होगा कि मैं तुम्हारे और पारुल के बारे में इतना सब-कुछ कैसे जानता हूँ।

हाँ मुझे भी जानना है। आप पारुल के बारे में इतना सब कैसे जानते हो...? आपको कैसे पता मुझे पारुल की सच्चाई पता चल गई थी।

हमें सब पता है मयंक।अगर पहले से ही हमने अपने कान और आँख खुले रखे होते तो आज शिल्पा की यह हालत ना होती।

तुम्हें क्या लगता है मयंक.?पारुल ने सच में सुसाइड करने की कोशिश की थी..? नहीं.. यह वीडियो देखो..? कैसे डील कर रही है पारुल।

अब समझ में आया पारुल किस कदर तुम्हें बेवकूफ बना रही थी।

यह विडियो राघव ने भेजा था।उसे पता था पारुल आसानी से चुप नहीं बैठेगी। कुछ न कुछ खुराफात तो करेगी।

इसी कारण वह और विक्की पारुल की हरकतों पर नजर रखे थे।पर जतिन, राघव के विषय में कुछ नहीं कहते हैं

यहाँ सबसे बड़ी गलती तो मेरी रही, जो मैंने शिल्पा की पढ़ाई पूरी नहीं होने दी।और जल्दी ही उसकी शादी कर दी।

काश मैंने इतनी जल्दबाजी नहीं होती, शिल्पा को तुमसे बेहतर जीवन साथी मिला होता।

चले जाओ यहाँ से मयंक.. संध्या जी आपसे हाथ विनती है। कृपया कर दुबारा यहाँ नहीं आइएगा। मुझे इस तरह आपको मना करना अच्छा नहीं लग रहा।

आपको अपने पोते का मोह यहाँ खींच लाया है।पता तो आपको बहुत दिन पहले ही चल गया था।पर एक बार भी फोन कर शिल्पा का हाल जानने की कोशिश नहीं की।

आज फुर्सत मिली आपको.. फिर कितना भी हो आप माँ है तो अपने बेटे का भला सोचेंगी।

आप सही कह रहे हैं जतिन जी। हमसे गलती तो हुई है। और यह गलती कोई छोटी गलती नहीं है। मयंक को उसकी गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए।

शिल्पा जहाँ भी रहे खुश रहे ।उसको और उसके बच्चे को मेरा दिल से आशीर्वाद है चलती हूं बहन जी संध्या जी रेवती से बोली।

संध्या और मयंक वापस लौट जाते हैं। संध्या के आँसू रुक नहीं रहे थे।चुप हो जाओ दीदी..बीमार हो जाओगी।

हो जाने दे छोटी..कभी सपने में भी नहीं सोचा था। अपने बेटे का घर टूटते देखूँगी। कितने चाव से शिल्पा को बहू बनाकर लाई थी।क्या पता था। ‌‌‌‌ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा।

शिल्पा अपनी चाची के साथ अपने बेटे वंश को टीका लगवाने गई थी। सुनयना बच्चों की डॉक्टर थी।तो बच्चे के लिए कुछ आवश्यक दवाएं ले आई थी।

यह इतनी सारी दवाएं..? शिल्पा वंश ठीक तो है।हाँ दीदी वंश ठीक है सुनयना बोली। पर बच्चे के लिए सफर लंबा है।वंश को कोई दिक्कत न हो तो कुछ जरूरी दवाएं ले ली हैं बस।

तब ठीक है.. मैं तो घबरा गई.. रेवती बोली।माँ!! कुछ हुआ है क्या..? शिल्पा ने पूछा।

"कहाँ..? रेवती बोली" वो पापा पता नहीं किस सोच में बैठे हैं..? उन्होंने अभी तक हम लोगों को देखा भी नहीं..? नहीं तो तुरंत वंश को ले जाते।

अरे वो..वो ऑफिस का कोई फोन आया था। तबसे ही कुछ , , लें..?कि सोच रहे हैं।सब बढ़िया है बेटा तू चिंता मत कर रेवती हड़बड़ाकर बोली।

सुनयना ने रेवती के चेहरे के भाव पढ़ लिए। दीदी सिरदर्द हो रहा है, मैं चाय बनाने जा रही हूँ आप पियोगी..? अरे तू बैठ मैं बनाकर लाई.. रेवती रसोई में चली गई।

पीछे-पीछे सुनयना भी रसोईघर में पहुँच गई। दीदी सच-सच बताइए,क्या हुआ..?आप भी परेशान दिख रही हो..! कुछ तो हुआ है।

रेवती सुनयना को सब बता देती है।आप चिंता मत करो दीदी,सब अच्छा होगा।कर सुबह ही हम लोग यहाँ से चले जाएंगे।

शिल्पा के सब दुःख यहीं रह जाएंगे। शिल्पा अब एक नयी दुनिया में कदम रखने जा रही है।

अब जो वापस आएगी तो एक नयी शिल्पा,जो ज़िंदगी की चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने की हिम्मत रखती होगी।

जानती हूँ सुनयना, मैंने शिल्पा को जन्म दिया है।पर प्यार तुमने मुझसे कहीं ज्यादा उसको दिया है।

रात को सब खाना खाकर सोने चले गए। जतिन एक बात पूछूँ...?" हाँ रेवती पूछो ना..?" आपने संध्या बहन को शिल्पा से मिलने मना क्यों नहीं दिया।

आपने क्यों झूठ बोला कि शिल्पा कहीं दूर चली गई है..?बेचारी कितनी आस लेकर आईं थी।

शिल्पा की भलाई के लिए झूठ बोला था। रेवती अगर आज शिल्पा, मयंक और संध्या जी से मिल लेती तो शायद उसका यहाँ से जाना मुश्किल होता।

वह यहाँ से नहीं जा पाती। क्योंकि वह मयंक से अभी भी बहुत प्यार करती है। मयंक भी उससे प्यार करता है। पर वह अभी तक उसके प्यार की सच्चाई को समझ नहीं पाया।

इसलिए अभी उनका नहीं मिलना ही बेहतर है। मयंक को फील होना चाहिए कि शिल्पा उसकी जिंदगी में क्या जगह रखती हैऔर फिर शिल्पा हमेशा के लिए तो जा नहीं रही है। कुछ दिनों की तो बात है। नई जिंदगी में रहकर, नई नई चीजें सीखेगी मेरी बेटी।

जिंदगी को नई तरीके से जीना सीखेगी।जो उसके आगे के लिए बेहतर होगा। मैं उसका बाप उसका बुरा नहीं चाहता। मैं भी चाहता हूँ शिल्पा का प्यार मिले।

उसकी ज़िंदगी में ठहराव आए।पर सबसे पहले वो कुछ बन जाए। मैं जानता हूँ, उसकी जिंदगी,उसकी खुशियाँ मयंक है।

पर वह अभी मयंक से मिल नहीं सकती। मयंक को अभी इंतजार करना होगा।यह दिखाना होगा कि वाकई में वह शिल्पा को अपनाना चाहता है।

शिल्पा को भी मजबूत बनना होगा।रो-रोकर ज़िंदगी में कुछ हासिल नहीं होता।

यह तो आपने सही कहा जतिन।अगर शिल्पा नादान नहीं होती। तो आज यह नौबत नहीं आती।

दीदी चलिए खाना खा लीजिए। तू खा ले छोटी! मुझे भूख नहीं है.. ऐसे कैसे भूख नहीं है दीदी..? आपको अभी अपनी दवा भी तो लेनी है..?

आप इतनी जल्दी हार मान गई.. आपने अनजाने में किसी का दिल नहीं दुखाया है।तो भगवान आपको इतनी बड़ी सजा कैसे दे सकते हैं।

आप चिंता मत करो, मेरा दिल कहता है कि जल्दी ही आपको बहू और पोते दोनों का सुख मिलेगा। फिर हम सब साथ रहेंगे

और आप यह चाहती हैं जब आपकी बहू आए तो हम सबकी डाँट लगाए। हमने आपका ख्याल नहीं रखा, है न दीदी..?

चलो अब जल्दी से खाना खाकर दवा खालो। मेरा मन नहीं है छोटी.. बेकार की जिद मत कर।

मौसी उदास होकर वहाँ से चली जाती है। मयंक देखो दीदी खाना नहीं खा रही है। अगर उन्होंने समय पर दवा नहीं ली तो फिर से वही प्रॉब्लम हो सकती है।

, ।अब तुम ही चलकर समझाओ दीदी को.. अब रीता भी नहीं आती है। कोई प्रॉब्लम हुई तो मैं अकेली कैसे संभाल पाऊँगी।

मौसी आप चलिए मैं आता हूँ.. मयंक भी अनमना अपने रूम में लेटा हुआ था।

माँ क्या हुआ..? आप खाना क्यों नहीं खा रही.? आप मेरी गलती की सजा खुद को क्यों दे रही हो।

मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूँ माँ।पर मैं तुझसे वादा करता हूँ.. मैं जल्दी तेरे पोते और तेरी बहू को वापस लेकर आऊँगा।

अब मैं कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिससे तुम्हारा सिर नीचा हो। चलो अब कुछ खालो,आप नहीं खाएंगी, तो मैं भी नहीं कुछ नहीं खाऊँगा।

संध्या की आँखों से आँसू गिरने लगते हैं। वह कोई जवाब नहीं देती। चुपचाप खाना खा लेती है,और दवा खाकर सोने चली जाती हैं।

अब मयंक एक धीर-गंभीर इंसान बन गया था। दिन-रात सिर्फ काम ही काम मैं लगा रहता।

सक्सैना ग्रुप अब इंडिया के बाहर भी अपनी जड़ें जमाने लगा था।

शिल्पा भी पढ़ाई पूरी करके जॉब करने लगी थी।वंश चार साल का हो गया था। मयंक की कार्बन कॉपी वंश बहुत शरारती बच्चा था।

शिल्पा टेक्सास की जिस कम्पनी में जॉब करती थी।उसी कम्पनी में मयंक को भी किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में जाना था।

हैलो एक्सक्यूज मी.. मिस्टर रोबिन के साथ आज मेरी मीटिंग फिक्स है।क्या आप बता सकती है, उनका केबिन किधर है।

यस सर..!सेवन्टींथ फ्लोर पर सीधे जाकर लेफ्ट में रूम नंबर "वन वन जीरो" सर इस समय मीटिंग रूम में आपका ही इंतज़ार कर रहे हैं।

मयंक मीटिंग के लिए पहुँच जाता है।वहाँ मिस्टर रोबिन अपने स्टॉफ के साथ पहले से ही कुछ डिस्कशन में लगे हुए थे। हैलो मिस्टर रोबिन..! ओह मिस्टर मयंक!मयंक मीटिंग के लिए पहुँच जाता है।वहाँ मिस्टर रोबिन अपने स्टॉफ के साथ पहले से ही कुछ डिस्कशन में लगे हुए थे।
 
हैलो मिस्टर रोबिन..! ओह मिस्टर मयंक!! वेलकम.. हम आपका ही वेट कर रहे थे।सब लोग अपनी-अपनी चेयर पर बैठ जाते हैं।

एक चेयर खाली थी।मिस रोजी..?

यस सर..

यह शिल्पा क्यों नहीं आई अभी तक। मयंक शिल्पा के नाम से चौंक गया। फिर खुद को सयंत कर लेता है।

मैं भी पागल हूँ.. शिल्पा यहाँ अमेरिका में क्या करेगी।सर अचानक शिल्पा के घर में इमरजेंसी आ गई।तो वो मुझे प्रजेंटेशन देने के लिए कहकर घर चली गई।

ओके नो प्राब्लम.. चलो फिर मीटिंग शुरू करते हैं।रोजी पहले आप प्रजेंटेशन देगी.. फिर आगे की कार्रवाई शुरू करें। मीटिंग करीब घंटे तक चली।

मयंक जब मीटिंग में जाने के लिए लिफ्ट के पास पहुँचा। तो शिल्पा पहले से ही लिफ्ट के पास मौजूद थीं।

उसने आँखों पर चौड़े फ्रेम का धूप का चश्मा लगा रखा था। बाल खुले हुए थे। हल्के ब्लू कलर का ब्लेजर पहन रखा था।

जो शिल्पा की पुरानी छवि "सलवार सूट, साड़ी" के विपरीत था। मयंक की ओर उसकी पीठ थी। इसलिए मयंक उसे देख नहीं पाया।

लिफ्ट में लगे आईने में शिल्पा ने मयंक को देख लिया था। इसलिए वह दसवीं मंजिल पर लिफ्ट से बाहर निकलकर रोजी , Pके केबिन में चली गई।

रोजी को प्रजेंटेशन की फाइल सौंपकर, शिल्पा घर वापस निकल गई। ओह मयंक तुमने सामने आकर आज फिर मेरे दर्द को हरा कर दिया।

क्यों नहीं भूलने देते मुझे..? शिल्पा सीधे घर न जाकर एक कॉफी शॉप में बैठ जाती है। अपने और मयंक के साथ बिताए पलों को याद करने लगी।

काश पारुल हमारे बीच नहीं आई होती तो आज हम साथ होते।आज ज़िंदगी ने हमें अजनबी बना दिया मयंक।

कॉफी शॉप से निकल कर शिल्पा पैदल ही घर के लिए चल दी। मयंक ऑफिस से निकलकर टैक्सी कर होटल के लिए निकल गया ‌।

रेड सिग्नल पर गाड़ियाँ खड़ी हो गई थी। मयंक आसपासके नजारे को देख रहा था,तभी उसकी नज़र सड़क किनारे फुटपाथ पर चल रही शिल्पा पड़ी।

मयंक उसे भी अपना ख्याल समझता है। शिल्पा तुम आज भी मेरे दिल में इस कदर बसी हो।हर जगह तुम ही नज़र आती हो।

यह क्या हो जाता है मुझे..? शिल्पा यहाँ क्यों और कैसे आई होगी।यह मेरा भ्रम है।ग्रीन सिग्नल होते ही टैक्सी चल पड़ी।

तभी अचानक मयंक को कुछ याद आता है। अरे मैं इतनी बड़ी बात कैसे भूल गया।वो शिल्पा ही थी..हाँ शिल्पा यहाँ हो सकती है।

यह मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आया।ड्रायवर गाड़ी वापस लेलो। और वहाँ चलो ,जहाँ रेड सिग्नल हुआ था। चलो जल्दी..!

यस सर..ड्रायवर गाड़ी घुमा लेता है। मैं इतना भुलक्कड़ कैसे हो गया। शिल्पा ने बताया था, उसके नितिन चाचा अमेरिका में रहते हैं।

शिल्पा यही आई है,यही अपने चाचा-चाची के पास।अब तो मैं अपने बेटे से मिले बिना नहीं जाऊँगा‌।

सर हम वहीं आ गए... मयंक वहाँ चारों ओर शिल्पा कोहै। शिल्पा कहीं नहीं दिखाई देती।

शिल्पा को उसकी चाची मिल गईं थीं। अरे शिल्पा..? चाची शिल्पा को आवाज लगातीं है।

शिल्पा कहाँ जा रही हो..? चाची आप..?हाँ मैं..बैठो गाड़ी में..क्या हुआ तुम तो ऑफिस के लिए निकलीं थीं..?

कुछ नहीं चाची.. थोड़ा सिरदर्द महसूस हो रहा था। मैं घर वापस जा रही थी।"ऐसे पैदल..?" घर कहाँ है पता है ना..?अभी भी एक घंटा लगेगा।

बताओ क्या हुआ..? चाची की प्यार भरी झिड़की सुनकर शिल्पा रुआँसी हो उठी। अरे अरे यह क्या..?यह आँसू..?सब ठीक तो है ना।

चाची वो मयंक...!क्या हुआ फिर कोई कारनामा किया उसने..? नहीं चाची..वो यहाँ आया हुआ है।आज मीटिंग में वो भी था ‌।

तू मिली..? नहीं मैंने पहले ही उसको देख लिया था।तो वहाँ से निकल आई। अच्छा किया तूने..अब उसके विषय में ज्यादा सोच मत।

हम्म शिल्पा सीट से टिककर आँखें बंद कर लेती है। मयंक निराश होकर होटल पहुँच जाता है।

अब इतने बड़े शहर में कैसे पता चलेगा..?वो लोग कहाँ रहते हैं।

मयंक ने कम्पनी में जाकर शिल्पा के बारे में जानने की कोशिश की मगर सब बेकार।

कम्पनी ने अपने कर्मचारियों की डिटेल देने से मना कर दिया।

मयंक निराश होकर इंडिया लौट आता है। वापस आकर वो संध्या को सारी बातें बता देता है।

सुबह-सुबह जतिन अपने छोटे से गार्डन में पौधे में पानी दे रहे थे।

नमस्ते अंकल जी..! अरे राघव..! अरे आओ-आओ रेवती, चिंटू देखो कौन आया है।

अरे राघव भैया कहाँ थे आप.. चिंटू दौड़कर राघव के गले लग गया। नमस्ते आँटी राघव रेवती के पैर छूकर बोला।

, वेलकम.. चिंटू तू तो मुझ से लंबा हो गया ‌। क्या सोचा कैरियर के बारे में..? भैया मुझे डॉक्टर बनना है। चाचाजी के पास जा रहा हूँ।वहाँ डॉक्टरी की पढ़ाई करने जा रहा हूँ ।

वाह बहुत बढ़िया। रेवती चाय-नाश्ता ले आई‌। अंकल में आपको एक खुशखबरी देने आया हूँ... मैं शादी कर रहा हूँ।

शादी वाह गुड न्यूज़... लड़की कौन है..?क्या करती है,कहाँ की रहने वाली है, एक साथ कई सवाल कर डाले रेवती ने।

आप लोग उससे मिल चुके हैं.. मुस्कुराते हुए राघव बोला। अंशुss जतिन और रेवती एक साथ बोले। अरे उसे कैसे भूल सकते हैं।

शिल्पा के अकेलेपन में एक वही थी, जिसके साथ शिल्पा अपना दुःख हल्का कर लेती थी।

आँटी अंशु का कहना है,शादी एक ही शर्त पर होगी..जब शिल्पा आकर हमारा गठबंधन करेगी। वरना मैं शादी की बात भूल जाऊँ।

अंकल अब तो आपको शिल्पा को बुलाना होगा। नहीं तो मेरे संन्यासी बनने के दिन आ गए।आप चाहते हैं मैं शादी करूँ तो कृपया उसे बुला लीजिए।

राघव ने इतनी मनुहार करते हुए कहा कि जतिन मना नहीं कर पाए थे। ठीक है बाबा जैसा तुम चाहो, तुमने शिल्पा के लिए बहुत कुछ किया है।

हमें तो तुम्हारी इच्छा पूरी करनी होगी।हम आज ही शिल्पा से बात करते हैं।
 
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