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पूरी तरह खामोश था यह ।
चेहरा पत्थर की तरह सख्त और भावहीन नजर आ रहा था । काच की गोलियों की तरह चमकीली मगर बेजान आंखें सिर्फ और सिर्फ कुंती देबी की आंखों में झांक रहीं थी । जब वह कुंती द्वारा बार-बार झंझोड़े जाने के बाबजूद 'सोया' सा रहा तो
गोडास्कर बोला-----" हजूर शायद अभी भी यह सोच रहे हैं---- ये नहीं बताएंगे तो गोडास्कर को पता नहीं लगेगा कि हत्या वाली रात ये कहाँ थे जबकि गोडास्कर इस सवाल का जबाब पहले पा चुका है पाने के बाद ही यहाँ "धमका" है ।।
"तो तुम्ही बता दो कहां थे भैया? " कुंती देवी उसकी तरफ घूमी ।।
"ओबराय होटल के रूम नम्बर सेविन जीरी थर्टी थ्री में।" विस्कुट खाते गोडास्कऱ ने कहा----"आपकी जानकारी के लिए बता दूं--यह रूम उस सुईट के ठीक सामने है जहाँ विनम्र बिंदू से मिला था जहाँ बिदूं की हत्या हुई ।। यह कमरा मिस्टर चक्रधर चौबे ने अपने असली नाम से नहीं बल्कि किशोर साहनी के नाम से लिया था । क्यों चौबे जी, गलत तो नहीं कहा गौडास्कर ने?"
चक्रधर चौबे को लगा-अब कुछ भी कहने से कोई फायदा नहीं है ।।
बिस्कुट चबाता पुन: गोडास्कर ही बोला---" गेडास्कर गलत हो ही नहीं सकता क्योंकि यह बात मुह से निकालने से पहले चौबे जी का फोटो होटल के स्टाफ को दिखा चुका है । तस्दीक कर चुका है ।। किशोर साहनी की सुरत यही है ।"
"तुम बोलते क्यों नहीं भैेया ।" कुंती एक बार फिर चीखी----"कहते क्यो नहीं यह सब बकवास है?"
"दुनिया का नियम है-माताजी, आदमी की चुप्पी उसकी स्वीकृति होती है । अब एक ही जगह "अटके" रहने की जगह चौबे जी से यह पूछा जाना चाहिए ---इन्होंने किशोर साहनी के नाम से सुईट के ठीक सामने वाला रूम क्यों लिया ?"
"क्यों लिया?" पहली बीर बिनम्र के मुंह से निकला ।
"गोडास्कर से पूछ रहे हो तो बताए देता हूं ।" उसने एक और बिस्कुट मुह में डालने के साथ कहा'---" इन जनाब को पहले ही मालूम था तुम नौ बजे सुईट में बिदू से मिलने वाले हो । इन्होंने शाम के पांच बजे से अपने कमरे मे डेरा डाल दिया ।
जब तुंम वहाँ पहुंचे ये हुजूर "की होल' से गैलरी का सारा दृश्य देख थे । तुमने खुद बताया-तुम वहाँ ज्यादा देर नहीं रहे । विंदू कै समर्पण को ठूकराकर बापस अा गए । तुम्हारे निकलते ही मामा अपने कमरे से बाहर आये सुईट की बैल बजाई । बिंदू ने दरवाजा खोला । इन्होंने उसे कुछ भी-समझने का मौका दिए वगैर गर्दन दबा ली । यह मर गई । मगर इस बीच उसकी माला टूट चुकी थी । कार्पेट पर मोती बिखर गए । तभी किसी तरह इन्हें पता चला कमरे में एक शख्स और है । वह बिज्जूथा । उसके पास मोजूद कैमरा देखते ही ये समझ गए-उसने बिंदू की हत्या के फोटो खींचे लिए हैं । अब, इनके पास विज्जू की भी ईह लीला समाप्त कर देने के अलावा कोई चारा नहीं था ।
विज्जू को निपटा देना इनके लिए बिंदू को निपटा देने से भी आसान था ।।वही किया । कैमरे की रील निकालकर अपनी जेब में डाल ली ।। और उसकी लाश को लिफ्ट के कुए मे फेक दिया।।
"गोडास्कर । " बिनम्र ने कहा---"यह तुम किस वेस पर कह रहे हो ? "
"गोडास्कर ने अगले लफ्ज नहीं उगले थे ।" कहने के बाद 'गेप’ देने केलिए उसने बिस्कुट मुह में सरकाया और बोलना शुरू किया-----" कत्ल के बाद इन्होंने अपने एक चेले को फोन किया ।। जिसका पेशा ही ऐसे कामों को अंजाम देने का है जैसा ये उससे कराना चाहते थे ।। उसका नाम मनसब है ।। "
" मनसव !" विनम्र ने नाम दोहराया ।
" जी हां ।। मनसब के मोबाइल पर अपने मोबाइल से फोन किया था इन्होंने ।। बेस नः पहला यह ही है दोनों के मोबाइल और कंट्रोल रूम का रिकार्ड बता देगा इन्होने किस वक्त मनसब को फोन करके कितनी देर क्या बात की ? उस रिकार्ड के मुताबिक मनसब को सुईट से बिंदू की लाश हटाने का काम सौंपा था ।
इस काम को मनसब आसानी से कर सके, इस कारण उसके लिए रूम नम्बर सेविन जीरो सेबिन्टीन बुक कराया । यह काम करते वक्त इन्होंने इतनी सावधानी जरूर वरती कि कमरे की बुकिंग अपने मोबाईल से न कराकर पी . सी. ओं. के फोन से कराई । उस पी. सी. ओ से जो ओबराय के ठीक सामने सडक के उस पार है । ऐसा इसलिए किया ताकि होटल के रिकार्ड में इनके मोबाईल का नम्बर दर्ज न हो सके ।। ये…खुद किशोर साहनी के नाम से रुम नम्बर सेवन जीरो थर्टी में ठहरे हैं, यह बात मनसव को भी नहीं बताई । पी. सी . ओ. से फोन करने के बाद उजरत बापस कमरे में आ गए । हालस्कि जिक्र कर चुका हूं फिर भी एक बार पुन: बता देना मुनासिब होगा-------मनसब का कमरा अमरसिंह के नाम से ठीक दस पैंतीस पर कराया गया । मनसव ग्यारह बजे होटल पहुचा।। बारह बजकर तीस मिनट पर चॉक आऊट कर गया । बेस नम्बर टू---"गोडास्कर की इस बात की तस्दीक खुद होटल का रिकार्ड बनेगा ।। मनसब बहां एक अटैची के साथ पहुंचा था । ऐसी अटैची के साथ जिसमें बिंदू जैसी लड़की की लाश मोड़ तोड़कर रखा जा सकै । होटल का एक कर्मचारी गवाह है-अटैची जब लाई गई तो खाली थी लेकिन जब ले जाई गई तो भरी हुई थी । कहने का मतलब---डेढ़ धंटा मनसव ने विंदूकी लाश को अटैची में पैक करने, कार्पेट पर बिखरे मोती चुनने और कमरे की स्फाई करने में खर्च किया क्योंकि चौवे जी ने उससे कहा था…-किसी को सुईट में वारदात का पता न लग सके । मनसव अपना काम करके आराम से निकल गया । उस वक्त होटल का स्टाफ कल्पना तक नहीं कर पाया कि अटैची में लाश है ।। और फिर जो होटल में हुआ सब वताता चला गया गोडास्कर ।।
अमर सिंह को उन्होने मनसब के रूप में पहचाना था । इससे आगे गोडास्कर की जानकारी काम आई।।
गोडास्कर जानता था --- छटे हुए बदमाश मनसब का ना कोइ घर बार है , ना फैमली ।। यह परमानेट रूप से होटल अजंता के रूम नः आठ में रहता है ।
और दोलत राम को निगरानी का काम दिया । जैसे ही सुचना मिली मनसब को घेर लिया गया । बिंदू की लाश ही नहीं , उसका मोबाईल और माला के मोती भी मिल गये हैं ।।
वातावरण मे तनाब पूर्ण खामोशी छा गई ।
सचमुच गोडस्कर ने सबका मुहं बंद कर दिया था ।।
एकाएक चक्रधर चौबे ने पूछा ---" क्या मनसब इस वक्त तुम्हारी हवालात में है ?"
" शुक्र है ऊपर बाले का । आपने अपने गूंगे ना होने का सबूत तो दिया ।"
चक्रधर एक बार फिर चुप कर गया ।
इस बार गोडस्कर ने दौलतराम से कहा --" देख क्या रहा है दौलतराम । हजुर को ले जाकर बाहर खड़ी सरकारी जीप में बैठा ।"
पुलिस टीम चक्रधर चौबे को लेकर लॉबी के दरबाजे की तरफ बढ़ चुकी थी । गोडस्कर भी उनके साथ था ।।।।
रात के दस वजें।
विनम्र की टेक्सी सुनसान इलाके में एक मकान के बाहर रुकी । मकान करीब दो सौ गज में वना हुआ था दु मंजिला । ब्लैक मेलर के रूप में इस बार एक नई लड़की ने फोन किया था । उसने यहीं कहा था-उस मकान के चारों तरफ दूर-दूर तक खाली जगह पडी है ।। दूसरा कोई मकान नहीं है । मकान-दु-मंजिला है और वाहर लगी नेम प्लेट पर 'बसेरा' लिखा है ।
विनम्र ने टैक्सी मे बैठे ही बेठे नेम प्लेट पर नजर डाली ।
ग्रेनाईट पत्थर पर ब्रास के वड़े-वड़े अक्षरों में लिखा "वेसरा' बहां मौजूद अॉन बल्ब के कारण साफ नजर आया ।
विनम्र को कोई शक नहीं रह गया --वह वहां पहुंच चुका है, जहां बुलाया गया था ।
टैक्सी से बाहर निकला ।
ड्राईवर की मदद से खिडकी से अटैची निकलवाई । इस बार उसमें दो करोड़ थे ।।
फोनपर ब्लैक मेलर लड़की ने कहा था---" इस बार दो करोड़ लाने होगे तुम्हें। करोड़ फोटुओं की कीमत । एक करोड पहली बार की गई चालाकी का जुर्माना ।। साथ ही चेतावनी दी गई थी--" उम्मीद है समझ गये होंगे । तुम्हारी कोई भी चालाकी हमारी नजरों से छूप नहीं सकेगी । इस बार अगर कोई हरकत की गई तो अगली बार तीन करोड लाने होंगे ।"
विनंम्र ने कोई सफाई नही दी थी ।
नहीं कहा कि दाढी वाले से उसका कोई सम्बन्थ नहीं था ।
उन सब बातो का अंब कोई मतलब भी नही रह गया था । विनम्र को फोटुओं की जरूरत थी और उसके लिये दो करोड़ तो क्या, इससे कई गुना ज्यादा भी खर्च कर सकता था।। हां एक बात जरुर बार-बाऱ _ उसके मस्तिस्कै में गूंज रहीं थी । वह बात जो चक्रधर चौबे को ब्लैक मेल कर रहे पवन प्रघानं ने कही थी्--" हर ब्लेक मेलर एक जौक होता है ।वह सोने के अंड़े देने वाली मुर्गी को एक ही झटके से हलाल कर देने की बेवकूफी कभी नहीं करता बल्कि जौक बंनकर सारा खून पीने में विश्वास रखता है ।" यही है बात वाद में चक्रधर चौबे ने भी कही थी ।
विनम्र निश्चय कर चुका था…वह अपने साथ ऐसी कोई भी हरकत नहीं होने देगा ।। दो करोड मे सभी फोटो और
नेगेटिव उसे देगा तो ठीक वर्ना सख्ती से पेशं आएगा । अंटेची में विनम्र दो
करोड रुंपये लाया था तो जेब में रिवॉल्बर पडा था ।
दुढ़ निश्चय करके आया था वह--रिवींल्बर का भी इस्तेमाल करना पड़ा तो चूकैगा नहीं ।। निश्चय करते वक्त वह कांप-सा उठा था परन्तु सोचा था---जिस झमेले में फ'स गया है उससे निकलने के लिए हिम्मत तो दिखानी ही पडेगी । मजबूरी है । न तो फोटुओं को कोर्ट तक पहुचने देगा, न ही ब्लेक मेलर जौक बनने देगा ।
इनमे से किसी भी बात क्रो वह अफोर्ड नहीं कर सकता था । टैक्सी बाले को विदा करने के बाद विनम्र बसेरा के गेट की तरक बड़ा।।
अपने पहियों पर चलती अटैची उसके पीछे थी । डोरी विनम्र के हाथ मे ।
फौन पर कह दिया गया था------"बैल बजाने की कोई जरूरत नहीं है दरबाजा खोलकर सीधा अंदर चले आना ।"
विनम्र ने बैसा ही किया।।
लोहे वाला गेट खोलकर छोटी सी गैलरी मे पहुंचा ।। वहां खटारा भी नजर आने वाली मारूति वेन खड्डी थी ।
गैलरी में इमारत के अदर जाने के लिए लकडी का एक दरवाजा था ।
वह खुला हुआ था ।
विनम्र समझ गया---उसी के लिए खुला रखा गया है ।। अटैची को घसीटता वह अंदर दाखिल हो गया । मुश्किल से चार-पाच कदम चलने के बाद खुद को लाबी मे पाया । बहुत कम रोशनी थी वहां । अभी चारों तरफ का निरीक्षण कर ही रहा था कि वातावरण में फोन वाली लड़की की ख़नखनाती सी आबाज गूंजी-"उस कमरे में चले आओं मिस्टर विनम्र जिसकी लाईट आंन है ।।"
विनम्र ने चारों तरफ नजर दौड़ाई ।।।
लाबी में चार कमरों के दरबाजे थे ।।
चारों बंद । केवल एक रोशनदान के कांच पर रोशनी नजर अा रही थी, बाकी तीन एक लाबी में रोशन बल्ब के कारण चमक रहे थे ।।
विनम्र का दिल धाड़-धाड़ कर के बजने लगा था ।।