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Guest
"अाप विश्वास कीजिए, सच्चाई यही है ।”
"मेरे विश्वास करने से कुछ नहीं होगा ।" शहजाद राय भड़क उठे-"बिश्वास पुलिस को आना चाहिए, अदालत को आना चाहिए और दावा है कि उन्हें इस बेवकूफी भरी कहानी पर विश्वास नहीं जाएगा-लोग इस बात पर हंसेंगे कि आधी रात के वक्त जिस्म पर चौंगा, चेहरे पर नकाब और हाथ में चाकू लिए बेडरूम में तुम अपनी पत्नी को "अप्रैल-फूल' बनाने के मकसद से गये थे----पूरी तरह अविश्वसनीय, असम्भव और बचकाना बयान होगा यह ।"
"तो फिर मैं क्या कंहू, आप ही सलाह दीजिये ।" मैं अधीर होकर कह उठा…"मैं आपको वकील नियुक्त करता हूं । वहीं कंरूगा जो आप कहेंगें ---- 'इस झमेले से निकालने की जिम्मेदारी अाप ले लिजिए !"
शहजाद राय खामोश हो गये ।
मुद्रा बता रही थी कि कुछ सोच रहे हैं ।
लुटा पिटा मैं उम्मीदजनक अवस्था में उनकी तरफ़ देख रहा था ।
वे बड़बड़ाये----“तुम्हें बुन्दू , निक्कू और रधिया ने रंगे हाथों पकड़ा है, तुम केवल एक अवस्था में बच सकते होतब, जबकि अदालत में इन तीनों को अविश्वसनीय साबित कर दिया जाए, और ये तीनों अविश्वसनीय तब साबित हो सकते है जब प्रमाणित किया जाये कि तुम्हें संगीता की हत्या के जुर्म में फंसाने के पीछे इनका स्वार्थ है !"
. मैं चुपचाप उनकी बड़बड़ाहट को सुन रहा था ।
एकाएक उन्होंने मुझसे पूछा --- " नोकर का तुम्हें फंसाने के पीछे क्या स्वार्थ हो सकता है ?"
"उन्होंने मुझे फंसाया ही कब है ?" मैंने मुर्खों की मानिंद कहा !!!
°°°°°°°°°°
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°°°°°°
"फ'साया नहीं है बेवकूफ है" शहजाद राय झुंझला उठे-“बल्कि अदालत में साबित कर रहे हैं कि उन्होंने तुम्हें फंसाया है, सोचना ये है कि वे तुम्हें क्यों फंसायेगे ?"
काठ के उल्लू की तरह मैं उन्हें देखता रहा ।
एकाएक उन्होंने पूछा'----"वह डायमंड नेकलेस कहाँ है जो तुमने अपनी मैरिज एनीवर्सरी पर संगीता को दिया था?"
. "मेरे लॉकर में ।"
"वहां क्या कर रहा है ?"
"अगले ही दिन यानि तीस तारीख को संगीता ने यह कहकर नेक्लेस मुझे दे दिया था कि इतना महंगा नेकलेस 'डेली यूज' के लिए नहीं होता-इसे विशेष अवसरों पर पहना करूंगी, वेसे भी इतना महंगा नेकलेस कोठी में रखना समझदारी नहीं थी ।"
"और तुम---नेकलेस को लॉकर में रख अाये ?"
"हां !"
वे बोले-" यह झूठ है ।"
" ज ..... जी ?" मैं चकराया ।
"यह बात तुम्हें किसी के सामने अपने मुंह से नहीं निकालनी कि नेकेलेस लॉकर में है-इस सच्चाई को भूल जाओ और इस झूठ को याद रखो कि तुमने इन तीन नीकरों में से किसी को संगीता के गले से नेकलेस खींचते देखा है ।"
" ज---जी......मैं कछ समझा नहीं ।"
" सब समझ जाओगे ।" शहजाद राय का दिमाग मानो कम्यूटर की-सी तेजी से काम कर रहा था--- यह बताओ कि क्या तुम्हें इन तीनों नौकरों में से किसी का कोई ऐसा भेद मालूम है जिसके खुलने से वह डरता हो ?"
"म-मैं समझा नहीं कि आप क्या पूछ रहे हैं ।"
"लगभग प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोइं-न-कोई क्षण ऐसा आता है जव उससे कोई ऐसा काम हो जाता है जिसके बारे में वह अपने अलावा किसी को पता नहीं लगने देना चाहता-य-यानि वह उसके जीवन का ऐसा भेद बन जाता है कि जिसके बारे में अगर लोगों को पता लग जाये तो उसके जीवन में तूफान आ सकता है ।"
"एक दिन संगीता कह रही थी कि रधिया गर्भवती है!!"'
शहजाद राय ने उत्सुक स्वर में पूछा…" क्या वह शादीशुदा नहीं है?”
" है मगर…
"मगर?"
"उसका पति गांव में रहता है और वह छः महीने से गांव नहीं गई है ।"
चमचमा रही आँखों के साथ शहजाद राय ने तुरन्त पूछा…“फिर गर्भवती कैसे हो गई वह है ?"
"संगीता ने वताया था कि वुन्दू के साथ उसके सम्बन्ध हैं !”
"वैरी गुड, बुँन्दू शादीशुदा है या कुंवारा ?"
"शादीशुदा है , उसकी पत्नी भी गांव में रहती है !"
" वन गई कहानी!" शहजाद राय चुटकी बजाकर कह उठे और फिर उन्होंने मुझे वह कहानी सुनाई जो मैंने हवालात में इंस्पेक्टर अक्षय को और फिर अदालत में सुनाई थी---शहजाद राय के निर्देश पर मैं इसी कहानी पर डटा रहा, मगर झूठ की यह हांडी चढी नहीं, आपके पापा ने मेरे और शहजाद राय के झूठ की धज्जियां उड़ाकर रख दी--अक्षय ने केस को इतना पुख्ता बनाकर क्रोर्ट में पेश किया कि शहजाद राय की एक नहीं चली ।"
किरन गहरे सोच में डूब गई थी ।
फोटोग्राफ़र और फिंगर प्रिन्टृस विभाग बालों का काम निपटते ही अक्षय और किरन पुनः लाश के इर्दगिर्द का निरीक्षण करते हुए इन्वेस्टीगेशन में जुट गए और कुछ देर बाद किरन ने घोषणा की--" अब मैं एक बहुत ही जबरदस्त और धमाकेदार बात पूरे दावे के साथ कह सकती हूं ।"
".क्या ?" अक्षय ने पूछा ।
जाने कैसी मुस्कुराहट के साथ किरन पलटकर शेखर से बोली--" उस अादमी की लम्बाई क्या थी जिसे तुमने संगीता पर हमला करते देखा था ?"
अक्षय चौका…“इसने संगीता पर किसी को हमला करते देखा था ?"
"प-प्लीज इंस्पेक्टर, मैंने शेखर से सवाल किया है----तुमने जवाब नहीं दिया शेखर, क्या लम्बाई रही होगी उसकी?"
"इ-इस तरह तो उसकी लम्बाई बताना मेरे लिए मुश्किल होगा ।"
"यह तो बता सकते हो कि तुमसे लम्बा था अथवा गुटृटा?"
शेखर ने तुरन्त जवाब दिया--" मुझसे तो लम्बा था ।"
“इधर आओ ।" किरन ने अंगुली के इशारे से उसे नजदीक बुलाया और फिर तहखाने की एक दीवार के नजदीक ले गई ---वहाँ उसने शेखर को दीवार के सहारे लाठी की तरह खड़ा कर दिया और अपने लम्बे बालो से एक शेयर पिन निकालकर उसके सिर के ऊपर दीवार में एक निशान लगाने के बाद बोली----“हट जाओं ।"
असमंजस में फंसा शेखर हट गया ।
अकेला वह क्या ?
सभी असमंजस में फंसे हुए थे ।
औरों की तो बात ही दूर, स्वयं अक्षय नहीं समझ पा रहा था कि वह कर क्या कर रही है----सबकी नजरें किरन पर इस तरह केद्रित थी जैसे वह कोई जादूगर हो और हैरत में डाल देने वाला कोई जादु दिखाने जा रही हो--- कुछ देर तक ध्यान से दीवार को घूरती रही और फिर अचानक अक्षय की तरउ पलटकर बोली--"' मैं रधिया की हत्या का कारण बता सकती हूं !"
"दीवार पर कारण लिखा है क्या ?"
"ऐसा ही समझो ।" किरन के पतले होंठों पर बेहद प्यारी मुस्कान उभरी ।
“तो बताइये, वहाँ आपने क्या पढा ?"
"दीवार पर 'कोडवर्ड' में लिखा है कि रधिया संगीता के हत्यारे से मिली हुई थी ।"
"संगीता का हत्यारा ?" अक्षय उछल संगीता का हत्यारा तो शेखर मल्होत्रा है ।"
"नहीं ।" पूरी सख्ती और मुकम्मल दृढता के साथ कहा किरन ने---“संगीता का हत्यारा वह है जिसने रधिया की हत्या की है ।"'
"प-पता नहीं आप कौन-सी बात किस आधार पर कह रही हैं ?"
"मेरे 'एक्टिव' होते ही हत्यारा इसलिए बौखला गया क्योकि वह समझ चुका था कि मैं एक सवाल .................सिर्फ एक सवाल करके रधिया को 'तोड' सकती हू और अगर वह टूट गई तो उसके चेहरे से नकाब खुद नुंच जाएगा---ऐसा वक्त आने से पहले ही उसने रधिया हत्या कर दी ।"
“मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप क्या कह रही हैं ?"
एकाएक किरन ने वुन्दू से सवाल किया----तुम बोलो बुन्दू तुम्हें उस रात थाने का फोन नम्बर मालूम था जिस रात संगीता का कत्ल हुआ ?”
"नहीं, मुझे तो अाज भी मालूम नहीं है ।"
"और तुम्हें निक्कू ?"
निवकू ने कहा…"थाने के नम्बर की मुझे भला जरूरत ही क्या पड़ती जो मालूम होगा ?"
"तो रधिया को कैसे मालूम था ?"
दोनों सकपका गये, एक साथ बोले…“ह-हमेँ क्या पता? "'
“क्या उसने नम्बर डायरेक्टरी या कहीं अन्य से देखा था ?"
"नहीं ।" निक्कू बोला---"नम्बर उसने तुरन्त, इस तरह मिला दिया था जैसे उसे याद हो ।"
“आप बताइये इंस्पेक्टर साहब, अच्छी तरह दिमाग लड़ाने के बाद बताइए कि रधिया को थाने का नम्बर इस कदर रटा हुआ कैसे था कि फर्राटे के साथ अापसे सम्बन्थ स्थापित कर लिया !"
"कमाल की बात है ।" अक्षय बड़बड़ाया ।
' "इससे ज्यादा कमाल की बात ये है कि यह सवाल इन्वेस्टीगेशन के दरम्यान न आपने रधिया से पूछा और न ही कोर्ट में जिरह के वक्त शहजाद राय ने जबकि यह सवाल................यह एक मात्र सवाल रधिया को बोखलाकर रख देता-उसे बताना पड़ता कि एक अनपढ नौकरानी को अगर थाने का नम्बर मालूम था तो क्यों-यह नम्बर उसे किसने और किस मकसद से रटाया था-क्या इसलिए कि शेखर के पकडे जाते ही वह पुलिस को सूचित कर दे ?"
" म---मगर आप यह कैसे कह सकती हैं कि संगीता का हत्यारा ही रधिया का हत्यारा है ?"
"शेखर के बयान के मुताबिक हत्यारे का कद इससे ज्यादा था और मजे की बात तो ये है इंस्पेक्टर साहब कि रधिया का कत्ल उसी ने किया है जिसका कद शेखर के कद से ज्यादा है ।”
"मेरे विश्वास करने से कुछ नहीं होगा ।" शहजाद राय भड़क उठे-"बिश्वास पुलिस को आना चाहिए, अदालत को आना चाहिए और दावा है कि उन्हें इस बेवकूफी भरी कहानी पर विश्वास नहीं जाएगा-लोग इस बात पर हंसेंगे कि आधी रात के वक्त जिस्म पर चौंगा, चेहरे पर नकाब और हाथ में चाकू लिए बेडरूम में तुम अपनी पत्नी को "अप्रैल-फूल' बनाने के मकसद से गये थे----पूरी तरह अविश्वसनीय, असम्भव और बचकाना बयान होगा यह ।"
"तो फिर मैं क्या कंहू, आप ही सलाह दीजिये ।" मैं अधीर होकर कह उठा…"मैं आपको वकील नियुक्त करता हूं । वहीं कंरूगा जो आप कहेंगें ---- 'इस झमेले से निकालने की जिम्मेदारी अाप ले लिजिए !"
शहजाद राय खामोश हो गये ।
मुद्रा बता रही थी कि कुछ सोच रहे हैं ।
लुटा पिटा मैं उम्मीदजनक अवस्था में उनकी तरफ़ देख रहा था ।
वे बड़बड़ाये----“तुम्हें बुन्दू , निक्कू और रधिया ने रंगे हाथों पकड़ा है, तुम केवल एक अवस्था में बच सकते होतब, जबकि अदालत में इन तीनों को अविश्वसनीय साबित कर दिया जाए, और ये तीनों अविश्वसनीय तब साबित हो सकते है जब प्रमाणित किया जाये कि तुम्हें संगीता की हत्या के जुर्म में फंसाने के पीछे इनका स्वार्थ है !"
. मैं चुपचाप उनकी बड़बड़ाहट को सुन रहा था ।
एकाएक उन्होंने मुझसे पूछा --- " नोकर का तुम्हें फंसाने के पीछे क्या स्वार्थ हो सकता है ?"
"उन्होंने मुझे फंसाया ही कब है ?" मैंने मुर्खों की मानिंद कहा !!!
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"फ'साया नहीं है बेवकूफ है" शहजाद राय झुंझला उठे-“बल्कि अदालत में साबित कर रहे हैं कि उन्होंने तुम्हें फंसाया है, सोचना ये है कि वे तुम्हें क्यों फंसायेगे ?"
काठ के उल्लू की तरह मैं उन्हें देखता रहा ।
एकाएक उन्होंने पूछा'----"वह डायमंड नेकलेस कहाँ है जो तुमने अपनी मैरिज एनीवर्सरी पर संगीता को दिया था?"
. "मेरे लॉकर में ।"
"वहां क्या कर रहा है ?"
"अगले ही दिन यानि तीस तारीख को संगीता ने यह कहकर नेक्लेस मुझे दे दिया था कि इतना महंगा नेकलेस 'डेली यूज' के लिए नहीं होता-इसे विशेष अवसरों पर पहना करूंगी, वेसे भी इतना महंगा नेकलेस कोठी में रखना समझदारी नहीं थी ।"
"और तुम---नेकलेस को लॉकर में रख अाये ?"
"हां !"
वे बोले-" यह झूठ है ।"
" ज ..... जी ?" मैं चकराया ।
"यह बात तुम्हें किसी के सामने अपने मुंह से नहीं निकालनी कि नेकेलेस लॉकर में है-इस सच्चाई को भूल जाओ और इस झूठ को याद रखो कि तुमने इन तीन नीकरों में से किसी को संगीता के गले से नेकलेस खींचते देखा है ।"
" ज---जी......मैं कछ समझा नहीं ।"
" सब समझ जाओगे ।" शहजाद राय का दिमाग मानो कम्यूटर की-सी तेजी से काम कर रहा था--- यह बताओ कि क्या तुम्हें इन तीनों नौकरों में से किसी का कोई ऐसा भेद मालूम है जिसके खुलने से वह डरता हो ?"
"म-मैं समझा नहीं कि आप क्या पूछ रहे हैं ।"
"लगभग प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोइं-न-कोई क्षण ऐसा आता है जव उससे कोई ऐसा काम हो जाता है जिसके बारे में वह अपने अलावा किसी को पता नहीं लगने देना चाहता-य-यानि वह उसके जीवन का ऐसा भेद बन जाता है कि जिसके बारे में अगर लोगों को पता लग जाये तो उसके जीवन में तूफान आ सकता है ।"
"एक दिन संगीता कह रही थी कि रधिया गर्भवती है!!"'
शहजाद राय ने उत्सुक स्वर में पूछा…" क्या वह शादीशुदा नहीं है?”
" है मगर…
"मगर?"
"उसका पति गांव में रहता है और वह छः महीने से गांव नहीं गई है ।"
चमचमा रही आँखों के साथ शहजाद राय ने तुरन्त पूछा…“फिर गर्भवती कैसे हो गई वह है ?"
"संगीता ने वताया था कि वुन्दू के साथ उसके सम्बन्ध हैं !”
"वैरी गुड, बुँन्दू शादीशुदा है या कुंवारा ?"
"शादीशुदा है , उसकी पत्नी भी गांव में रहती है !"
" वन गई कहानी!" शहजाद राय चुटकी बजाकर कह उठे और फिर उन्होंने मुझे वह कहानी सुनाई जो मैंने हवालात में इंस्पेक्टर अक्षय को और फिर अदालत में सुनाई थी---शहजाद राय के निर्देश पर मैं इसी कहानी पर डटा रहा, मगर झूठ की यह हांडी चढी नहीं, आपके पापा ने मेरे और शहजाद राय के झूठ की धज्जियां उड़ाकर रख दी--अक्षय ने केस को इतना पुख्ता बनाकर क्रोर्ट में पेश किया कि शहजाद राय की एक नहीं चली ।"
किरन गहरे सोच में डूब गई थी ।
फोटोग्राफ़र और फिंगर प्रिन्टृस विभाग बालों का काम निपटते ही अक्षय और किरन पुनः लाश के इर्दगिर्द का निरीक्षण करते हुए इन्वेस्टीगेशन में जुट गए और कुछ देर बाद किरन ने घोषणा की--" अब मैं एक बहुत ही जबरदस्त और धमाकेदार बात पूरे दावे के साथ कह सकती हूं ।"
".क्या ?" अक्षय ने पूछा ।
जाने कैसी मुस्कुराहट के साथ किरन पलटकर शेखर से बोली--" उस अादमी की लम्बाई क्या थी जिसे तुमने संगीता पर हमला करते देखा था ?"
अक्षय चौका…“इसने संगीता पर किसी को हमला करते देखा था ?"
"प-प्लीज इंस्पेक्टर, मैंने शेखर से सवाल किया है----तुमने जवाब नहीं दिया शेखर, क्या लम्बाई रही होगी उसकी?"
"इ-इस तरह तो उसकी लम्बाई बताना मेरे लिए मुश्किल होगा ।"
"यह तो बता सकते हो कि तुमसे लम्बा था अथवा गुटृटा?"
शेखर ने तुरन्त जवाब दिया--" मुझसे तो लम्बा था ।"
“इधर आओ ।" किरन ने अंगुली के इशारे से उसे नजदीक बुलाया और फिर तहखाने की एक दीवार के नजदीक ले गई ---वहाँ उसने शेखर को दीवार के सहारे लाठी की तरह खड़ा कर दिया और अपने लम्बे बालो से एक शेयर पिन निकालकर उसके सिर के ऊपर दीवार में एक निशान लगाने के बाद बोली----“हट जाओं ।"
असमंजस में फंसा शेखर हट गया ।
अकेला वह क्या ?
सभी असमंजस में फंसे हुए थे ।
औरों की तो बात ही दूर, स्वयं अक्षय नहीं समझ पा रहा था कि वह कर क्या कर रही है----सबकी नजरें किरन पर इस तरह केद्रित थी जैसे वह कोई जादूगर हो और हैरत में डाल देने वाला कोई जादु दिखाने जा रही हो--- कुछ देर तक ध्यान से दीवार को घूरती रही और फिर अचानक अक्षय की तरउ पलटकर बोली--"' मैं रधिया की हत्या का कारण बता सकती हूं !"
"दीवार पर कारण लिखा है क्या ?"
"ऐसा ही समझो ।" किरन के पतले होंठों पर बेहद प्यारी मुस्कान उभरी ।
“तो बताइये, वहाँ आपने क्या पढा ?"
"दीवार पर 'कोडवर्ड' में लिखा है कि रधिया संगीता के हत्यारे से मिली हुई थी ।"
"संगीता का हत्यारा ?" अक्षय उछल संगीता का हत्यारा तो शेखर मल्होत्रा है ।"
"नहीं ।" पूरी सख्ती और मुकम्मल दृढता के साथ कहा किरन ने---“संगीता का हत्यारा वह है जिसने रधिया की हत्या की है ।"'
"प-पता नहीं आप कौन-सी बात किस आधार पर कह रही हैं ?"
"मेरे 'एक्टिव' होते ही हत्यारा इसलिए बौखला गया क्योकि वह समझ चुका था कि मैं एक सवाल .................सिर्फ एक सवाल करके रधिया को 'तोड' सकती हू और अगर वह टूट गई तो उसके चेहरे से नकाब खुद नुंच जाएगा---ऐसा वक्त आने से पहले ही उसने रधिया हत्या कर दी ।"
“मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप क्या कह रही हैं ?"
एकाएक किरन ने वुन्दू से सवाल किया----तुम बोलो बुन्दू तुम्हें उस रात थाने का फोन नम्बर मालूम था जिस रात संगीता का कत्ल हुआ ?”
"नहीं, मुझे तो अाज भी मालूम नहीं है ।"
"और तुम्हें निक्कू ?"
निवकू ने कहा…"थाने के नम्बर की मुझे भला जरूरत ही क्या पड़ती जो मालूम होगा ?"
"तो रधिया को कैसे मालूम था ?"
दोनों सकपका गये, एक साथ बोले…“ह-हमेँ क्या पता? "'
“क्या उसने नम्बर डायरेक्टरी या कहीं अन्य से देखा था ?"
"नहीं ।" निक्कू बोला---"नम्बर उसने तुरन्त, इस तरह मिला दिया था जैसे उसे याद हो ।"
“आप बताइये इंस्पेक्टर साहब, अच्छी तरह दिमाग लड़ाने के बाद बताइए कि रधिया को थाने का नम्बर इस कदर रटा हुआ कैसे था कि फर्राटे के साथ अापसे सम्बन्थ स्थापित कर लिया !"
"कमाल की बात है ।" अक्षय बड़बड़ाया ।
' "इससे ज्यादा कमाल की बात ये है कि यह सवाल इन्वेस्टीगेशन के दरम्यान न आपने रधिया से पूछा और न ही कोर्ट में जिरह के वक्त शहजाद राय ने जबकि यह सवाल................यह एक मात्र सवाल रधिया को बोखलाकर रख देता-उसे बताना पड़ता कि एक अनपढ नौकरानी को अगर थाने का नम्बर मालूम था तो क्यों-यह नम्बर उसे किसने और किस मकसद से रटाया था-क्या इसलिए कि शेखर के पकडे जाते ही वह पुलिस को सूचित कर दे ?"
" म---मगर आप यह कैसे कह सकती हैं कि संगीता का हत्यारा ही रधिया का हत्यारा है ?"
"शेखर के बयान के मुताबिक हत्यारे का कद इससे ज्यादा था और मजे की बात तो ये है इंस्पेक्टर साहब कि रधिया का कत्ल उसी ने किया है जिसका कद शेखर के कद से ज्यादा है ।”