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कईं क्षणों के लिए खामोश-सा बैठा रहा वह, फिर. बोला-" उल्टी-सीधी बातें गढकर मेरे दिमाग में इबलीस सरकार के खिलाफ जहर भरने के पीछे तुम्हारी क्या चाल है ?"
एकाएक हाशमी आगे आया, मुमताज से पहले वह बोला---- "क्या आप मुझे जानते हैं?"
उसे ध्यान से देखते हुए विकास ने कहा-"ओह अभी तक आपको मैंने ध्यान से नहीं देखा था . . .यकीनन आप मेजर हाशमी हैं…राष्ट्रपति सादात के सबसे ज्यादा विश्वसनीय I. आपकाने फोटो दिखाकर मुझें बताया गया था कि आप भी विद्रोह `की रात से ही गधे के सीग बने हुए है !"
“ठीक ही सूना` था आपने-यदि वक्त रहते राष्ट्रपति सादात ने हमें राष्ट्रपति भवन से निकाल न दिया होता तो हमारा हश्र भी वही होता जो खुद उनका हुआ।"
‘ "क्या मतलब?"
"हम नहीं जानते कि आपको. क्या बताया गया हे…राष्ट्रपति सादात' की सबसे पहली भूल इबलीस को जनरल बनाना थी…दूसरी भूल उन्होंने विद्रोहियों को कुलवने के लिए सेमिनार की फौजों को मुल्क में आने का निमंत्रण देकर की…जैसा कि हुई! डर था, विद्रोहियों के नेस्तनाबूद होने के बाद वार-बार अनुरोध के बावजूद भी सेमिनेरियन सेनाएं मजलिस्तान से निकलकर नहीं गई-'सेमिनार की सेनाएं मजलिस्तान कें चप्पे-चप्पे तक बिखर चुकी थीं…सेमिनार ने इस मुल्क से अपनी सेनाएं वापस बुलाने के लिए एक शर्त्तपत्र पेश कर दिया-राष्ट्रपति सादात उनमें से एक शर्त भी मजूर करने के लिए तैयार नहीं थे…उघर, जनरल इबलीस तरह-तरह के प्रलोभन देकर सेना में अपने पिटठू तैयार कर रहा था…उसकी आख' सादात. की गद्दी पर जमी थी गार्जियन, और कर्नल तोम्बो को सेमिनार से किसी ऐसे ही आदमी की तलाश करने कै आदेश मिले थे-इबलीस पर उनकी नज़र पडी, सौदा हो गया-सेमिनार ने उसे राष्ट्रपति बनाने का वचन दिया और इबलीस ने उनका शर्तपत्र मजूर कर लिया ....॥"
"इस कहानी का तुम्हारे पास कोई सबूत है?"
"सबूत है कर्नल तोम्बो और' गार्जियन कै सामने` इबलीस की हैसीयत..........॥सबूत है राजधानी के चप्पे-चप्पे पर तैनात विदेशी सेना, सबूत हे मजलिस्तान की जमीन पर निर्माणाधीन सेमिनेरियन लडाकू. हवाई अड्डा---सबूत है इस मुल्क के अवाम- के दिलों में इबलीस के लिए विचार ।"
"यदि यह सच है तो जो हुआ यह सचमुच गलत था I”
मुमताज जहरीले स्वर में कह उठो-“क्या इतना कहकर विकास का फर्ज पूरा हो गया?"
“क्या मतलब?"
“मजलिस्तान में एक विद्रोही ने अवाम द्वारा चुने गए राष्ट्रपति से 'सत्ता ही नहीं छीनी है बल्कि वेहरमी से उनको हत्या भी की है--यहा जुल्म हुए हैं बिकास---अभी भी हो रहे हैं…मुझे देखो…मेरी आखों के सामने ज़ालिमों की गोली ने मेरी मां के परखच्चे उडा दिए उस रात, नन्हे-मासूम और दुघमुहे बच्चों को मां की गोदों से छीनकर सगीनों' पर लटका दिया गया…गरीबो के जलते हुए झोंपडी में फेंक दिया गया उन्हें-जाने कितनी माताएं अपने बच्चों को बचाने के लिए झुलस गईं…क्या तुम ऐसो किसी मां को देखना चाहोगे-देखो विकास, देखो I" कहने के बाद उसने जोर से किसी क्रो पुकारा ।
दरबाजे पर एक बहुत. ही बुरी तरह जली हुईं औरत प्रकट हुई । सारा जिस्म काला…जला हुआ…चमगादड़ की तरह चुडी हुई खाल, सिर पर एक बाल नही…बडी ही भयानक लग रही थी वह-इत्तनी ज्यादा डराबनी थी कि विकास जैसे -लडके के सारे जिस्म में सिहरन-सी
दौड़ गई !!
"इसका नाम रेहाना. है विकास-आग की लपटों में घिरी अपनी ही झोंपडी में से अपने बच्चे को वचाने के लिए जलकर राख हो गई यह क्या तुम. सोच सकते हो कि जलने से पहले यह कितनी खूबसूरत रही होगीं?"
विकास का चेहरा गंभीर हो गया I
मुमताज चाखती ही चली गई-"उसे देखो बिकास-उसे, जिसका नाम सुल्तान----इसकी एक मासूम बहन थी-अमीना-इसकी आखों के सामने ही उसकी बहन पर विदेशी भेडिए झपट पडे । नग्न कर दिया गया ।भाई के सामने बहन के स्तन काट लिए गए । उसे देखो-- रहीम को --- छोटा-सा परिबार था…एक बीबी, दो बच्चे । दोंनो को इनकी गोद से छीनकर भून दिया गया-पति. के सामने पत्नी की लाज लूटी गई---इस बदनसीब को सव कुछ देखना पडा बिकास I ठीक उसी तरह जैसे करीम चाचा ने अपने बुढापे के सहारे को एक बेहरम की गोली का शिकार होकर गिरते देखा था…इत्तना ही नहीँ-ये तो एक नमूना था डबल एक्स फाइव-रेहाना, सुल्तान, रहीम और करीम जेसे बदनसीबी से यह मुल्क भरा पडा है-रक्त तिलक के हर मेम्बर की अपनी एक अलग कहानी है-उस रात यहा विनाश हुआ था… नरसंहार नगा होकर नाचा था-मौत ने ताण्डव किया था. । बस्तियां जला दी गईं-लोर्गों को भभकती आग में झोंक दिया गया । यह सब उस कुत्ते इबलीस के इशारे पर हुआ था…उसकै इशारे पर जिसके हुक्म पर पाबन्दी से अमल करते तुम यहां आए हो ।"
"यदि यह सब कुछ सच भी तो मैं क्या कर सकता हूं ।"
. "हां कुछ करोगे भी क्यों?" मुमताज जहर में डूबे व्यग्यात्मक स्वर मे चली गई-“यह सब कुछ करने वाला सेमिनार का पिटठू जो है और सेमिनार तुम्हारे मुल्क का दोस्त जो है तो तब कुछ करते, जब यही काम पश्चिमी महाशक्ति ने किया होता -तव करते जब यहां तुम्हारे मुल्क के किसी दुश्मन मुल्क ने कब्जा कर लिया होता !"
"म. . मुमताज ।" बिकास चीख पड़ा ।
"क्यों-तिलमिला उठे न? " मुमताज उसके चीखने से जरा भी प्रभावित हुए बिना कहती चली गई…“सच्चाई सुनकर बड़े-बड़े बौखला जाते है---- दूसरों से अलग नही-वह नहीं हो जैसा खुद को प्रचारित किए हुए . . .हो---हुंह-गरीबों का मसीहा--सच्चाई का साथी…पिसती हुई इसानियत का दोस्त---जालिम का दुश्मन…सब बकबास है…तुम स्वार्थी हो-अपने मुल्क कै लिए तुम खुद भी दूसरों पर जुल्म कर सकते हो I" . , .
"म. . . मेरी बात सूनो l” हाशमी ने कहना चाहा ।
"मुझे छोडो मेजर अंकल…इस स्वार्थी का मुह नोचने दो मुझें-मेंने पहले ही कहा था कि यह भारतीय है…सेमिनार का दोस्त -हमारी कोई मदद नहीं करेगा---सरदार ही नहीं माने थे-वे जोर देकर कहते रहे कि विकास के सीने मे दिल हे…कराहत्ती हुई इंसानियत का मददगार बनकर खडा हो जाता है डबल एक्स फाईव----म. . मगर ये-ये तो दुनिया का सबसे बड़ा स्वार्थी निकला अकल !"
उसे पकडे झझोडता हुआ हाशमी चीख पडा-"होश में आओ मुमताज-होश मे ।"
"अरे जाकर चुल्लू भर पानी में डूब मरो विकास…थू...-मुमताज थूकती है तुम पर l" कहने के साथ ही उसने सचमुच विकास के चेहरे पर थूक दिया…"तुम स्वार्थी हो…तुम्हारे सीने मे दिल नहीँ पत्थर है, पत्थर…भविष्य में कभी खुद क्रो कमजोरों का हिमायती मत कहना । नेकी. और सच्चाई की राह पर चलने वालों के मददगार होने का दम मत भरना-जाओ, मेरे पाक मुल्क से गैरत हो जाओ ।"
लड़का देखता रह गया ।
चेहरे पर थूक पड़ा था, लेकिन उसे जरा भी गुस्सा नहीं आया ।।
मुमताज की चीख-पुकार उसके जेहन में -उतरती चली गई …कुर्सी पर कैद वह अब भी एकदम मुमताज को देख रहा था उसे जो अब भी हिस्टीरियाई अन्दाज़ में पागलों के समान न जाने क्या-क्या चीख रही थी-चीखते-चीखते ही उसके मुह से झाग उबलने लगे मुखड़ा किसी भटटी के समान दहक उठा था ।।
वह वेहोश हो गई ।
जिस्म मेजर हाशमी की बाहों' में झूल गया । कमरे में सन्नाटा छा गया…मोत की-सी खामोशी l
बिकास चाहकर भी कुछ न बोल सका~जाने क्यों क्लेजा. थर्रा रहा था उभका-आखो के सामने इशाक उभर आया--- वे दृश्य चकरा उठे जब उसने इशाक को टॉर्चर किया था-अन्दर से एक हूक…सी उठी-जाने क्यों विकास को खुद से ही घृणा-सी हुईं-लगा कि जो कुछ उसने किया हे ठीक नही किया ।
हाशमी ने मुमताज को धीरे से फर्श पर लिटाया. । खड़ा होता हुआ बोला…“मुमताज ने आपको अपशब्द कहे हैं मिस्टर विकास-आपका अपमान किया है…इसकी आपसे मैं माफी मांगता हूं-मगर मुमताज का कोई दोष नहीं है…वह सच्ची हे…भावुक और नादान हे…नही जानती कि दिल में भभक रहे ज्वालामुखी को किसी के सामने यू नहीं फटने देना चाहिए इस पगली को माफ़ कर देना -इस कम्बख्त ने आप पर थूक. . . ।”
"क्या आप लोग मुझसे कुछ मदद मांगना चाहते थे?"
"हम नहीं इस मुल्क की कराहती हुई मानवता ।”
"म...मगर... I"
"हम आपको मजबूर नहीं करेंगे-किसी भी शख्स को अपने मुल्क के खिलाफ काम करने का हक नहीं है और विशेष रूप से एक जासूस को तो किसी भी कीमत पर नहीं सेमिनार की वजह से आपका मुल्क उसके पक्ष में हे, जो यहा हो रहा हे भारत इबलीस सरकार का
पक्षधर है-इसमें कोई शक नहीं फि आपको भी इबलीस सरकार ही पक्षधर होना चाहिए, मगर. . . ।” . '
"म . . मगर? "
"हम आपसे एक प्रार्थना जरूर करेगे ।"
""क्या?"
"भारतीय वैज्ञानिक डाक्टर भसीन को हमने किसी दुर्भावना के बशीभूत होकर नहीं पकड़ा था-हमारा मकसद सिर्फ' इबलीस सरकार को सकट मे डालना था-डाक्टर भसीन हमारे पास सुरक्षित हे…आप सिर्फ उन्हीं को लेने तों मजलिस्तान आए हैं न…हम उन्हें आपको सौप देगे, सिर्फ एक ही विनती है…आप डॉक्टर भसीन को लेकर तुरन्त अपने मुल्क रवाना हो जाएं I”
"वह ,तो करना ही है-लेकिन यह आप क्यों कर रहे हैं?"
"हमें डर कि वे लोग आपको रक्त तिलक के विरुद्ध इस्तेमाल करेगे-स्पष्ट शब्दों में हम यह स्वीकार करते हैं कि रक्त तिलक आपसे नहीं टकरा सकता…आपसे हमें अपने नेस्तनाबूद हो जाने का खतरा है-इसीलिए प्रार्थना कर रहे हैं कि . . . I"
“मैं वादा करता हू-अगर आप मुझे डाक्टर भसीन दे देंगे तो मैं उन्हें लेकर चुपचाप निकल जाऊंगा-मेरा अभियान सिर्फ.. डाॅक्टर भसीन को सुरक्षित भारत पहुचा देने तक है…इससे आगे नहीं और मेरी इच्छा के विरुद्ध वे मुझे रक्त तिलक के खिलाफ इस्तेमाल नहीँ कर सकेंगे I”
"थैक्यू I” हाशमी का चेहरा चमक उठा-"बहुत बहुत शुक्रिया ।"
विकास को यूं लग रहा था जैसे किसी बहुत बडी ताकत ने उसके दिमाग को .जकड लिया हो…-वह कुछ सोच नहीं पा रहा था-यह निश्चय नहीं कर पा रहा था कि क्या गलत और क्या सही हे-मुमताज का एक-एक शब्द अभी तक उसके जेहन में गूज रहा. था ॥
एकाएक हाशमी आगे आया, मुमताज से पहले वह बोला---- "क्या आप मुझे जानते हैं?"
उसे ध्यान से देखते हुए विकास ने कहा-"ओह अभी तक आपको मैंने ध्यान से नहीं देखा था . . .यकीनन आप मेजर हाशमी हैं…राष्ट्रपति सादात के सबसे ज्यादा विश्वसनीय I. आपकाने फोटो दिखाकर मुझें बताया गया था कि आप भी विद्रोह `की रात से ही गधे के सीग बने हुए है !"
“ठीक ही सूना` था आपने-यदि वक्त रहते राष्ट्रपति सादात ने हमें राष्ट्रपति भवन से निकाल न दिया होता तो हमारा हश्र भी वही होता जो खुद उनका हुआ।"
‘ "क्या मतलब?"
"हम नहीं जानते कि आपको. क्या बताया गया हे…राष्ट्रपति सादात' की सबसे पहली भूल इबलीस को जनरल बनाना थी…दूसरी भूल उन्होंने विद्रोहियों को कुलवने के लिए सेमिनार की फौजों को मुल्क में आने का निमंत्रण देकर की…जैसा कि हुई! डर था, विद्रोहियों के नेस्तनाबूद होने के बाद वार-बार अनुरोध के बावजूद भी सेमिनेरियन सेनाएं मजलिस्तान से निकलकर नहीं गई-'सेमिनार की सेनाएं मजलिस्तान कें चप्पे-चप्पे तक बिखर चुकी थीं…सेमिनार ने इस मुल्क से अपनी सेनाएं वापस बुलाने के लिए एक शर्त्तपत्र पेश कर दिया-राष्ट्रपति सादात उनमें से एक शर्त भी मजूर करने के लिए तैयार नहीं थे…उघर, जनरल इबलीस तरह-तरह के प्रलोभन देकर सेना में अपने पिटठू तैयार कर रहा था…उसकी आख' सादात. की गद्दी पर जमी थी गार्जियन, और कर्नल तोम्बो को सेमिनार से किसी ऐसे ही आदमी की तलाश करने कै आदेश मिले थे-इबलीस पर उनकी नज़र पडी, सौदा हो गया-सेमिनार ने उसे राष्ट्रपति बनाने का वचन दिया और इबलीस ने उनका शर्तपत्र मजूर कर लिया ....॥"
"इस कहानी का तुम्हारे पास कोई सबूत है?"
"सबूत है कर्नल तोम्बो और' गार्जियन कै सामने` इबलीस की हैसीयत..........॥सबूत है राजधानी के चप्पे-चप्पे पर तैनात विदेशी सेना, सबूत हे मजलिस्तान की जमीन पर निर्माणाधीन सेमिनेरियन लडाकू. हवाई अड्डा---सबूत है इस मुल्क के अवाम- के दिलों में इबलीस के लिए विचार ।"
"यदि यह सच है तो जो हुआ यह सचमुच गलत था I”
मुमताज जहरीले स्वर में कह उठो-“क्या इतना कहकर विकास का फर्ज पूरा हो गया?"
“क्या मतलब?"
“मजलिस्तान में एक विद्रोही ने अवाम द्वारा चुने गए राष्ट्रपति से 'सत्ता ही नहीं छीनी है बल्कि वेहरमी से उनको हत्या भी की है--यहा जुल्म हुए हैं बिकास---अभी भी हो रहे हैं…मुझे देखो…मेरी आखों के सामने ज़ालिमों की गोली ने मेरी मां के परखच्चे उडा दिए उस रात, नन्हे-मासूम और दुघमुहे बच्चों को मां की गोदों से छीनकर सगीनों' पर लटका दिया गया…गरीबो के जलते हुए झोंपडी में फेंक दिया गया उन्हें-जाने कितनी माताएं अपने बच्चों को बचाने के लिए झुलस गईं…क्या तुम ऐसो किसी मां को देखना चाहोगे-देखो विकास, देखो I" कहने के बाद उसने जोर से किसी क्रो पुकारा ।
दरबाजे पर एक बहुत. ही बुरी तरह जली हुईं औरत प्रकट हुई । सारा जिस्म काला…जला हुआ…चमगादड़ की तरह चुडी हुई खाल, सिर पर एक बाल नही…बडी ही भयानक लग रही थी वह-इत्तनी ज्यादा डराबनी थी कि विकास जैसे -लडके के सारे जिस्म में सिहरन-सी
दौड़ गई !!
"इसका नाम रेहाना. है विकास-आग की लपटों में घिरी अपनी ही झोंपडी में से अपने बच्चे को वचाने के लिए जलकर राख हो गई यह क्या तुम. सोच सकते हो कि जलने से पहले यह कितनी खूबसूरत रही होगीं?"
विकास का चेहरा गंभीर हो गया I
मुमताज चाखती ही चली गई-"उसे देखो बिकास-उसे, जिसका नाम सुल्तान----इसकी एक मासूम बहन थी-अमीना-इसकी आखों के सामने ही उसकी बहन पर विदेशी भेडिए झपट पडे । नग्न कर दिया गया ।भाई के सामने बहन के स्तन काट लिए गए । उसे देखो-- रहीम को --- छोटा-सा परिबार था…एक बीबी, दो बच्चे । दोंनो को इनकी गोद से छीनकर भून दिया गया-पति. के सामने पत्नी की लाज लूटी गई---इस बदनसीब को सव कुछ देखना पडा बिकास I ठीक उसी तरह जैसे करीम चाचा ने अपने बुढापे के सहारे को एक बेहरम की गोली का शिकार होकर गिरते देखा था…इत्तना ही नहीँ-ये तो एक नमूना था डबल एक्स फाइव-रेहाना, सुल्तान, रहीम और करीम जेसे बदनसीबी से यह मुल्क भरा पडा है-रक्त तिलक के हर मेम्बर की अपनी एक अलग कहानी है-उस रात यहा विनाश हुआ था… नरसंहार नगा होकर नाचा था-मौत ने ताण्डव किया था. । बस्तियां जला दी गईं-लोर्गों को भभकती आग में झोंक दिया गया । यह सब उस कुत्ते इबलीस के इशारे पर हुआ था…उसकै इशारे पर जिसके हुक्म पर पाबन्दी से अमल करते तुम यहां आए हो ।"
"यदि यह सब कुछ सच भी तो मैं क्या कर सकता हूं ।"
. "हां कुछ करोगे भी क्यों?" मुमताज जहर में डूबे व्यग्यात्मक स्वर मे चली गई-“यह सब कुछ करने वाला सेमिनार का पिटठू जो है और सेमिनार तुम्हारे मुल्क का दोस्त जो है तो तब कुछ करते, जब यही काम पश्चिमी महाशक्ति ने किया होता -तव करते जब यहां तुम्हारे मुल्क के किसी दुश्मन मुल्क ने कब्जा कर लिया होता !"
"म. . मुमताज ।" बिकास चीख पड़ा ।
"क्यों-तिलमिला उठे न? " मुमताज उसके चीखने से जरा भी प्रभावित हुए बिना कहती चली गई…“सच्चाई सुनकर बड़े-बड़े बौखला जाते है---- दूसरों से अलग नही-वह नहीं हो जैसा खुद को प्रचारित किए हुए . . .हो---हुंह-गरीबों का मसीहा--सच्चाई का साथी…पिसती हुई इसानियत का दोस्त---जालिम का दुश्मन…सब बकबास है…तुम स्वार्थी हो-अपने मुल्क कै लिए तुम खुद भी दूसरों पर जुल्म कर सकते हो I" . , .
"म. . . मेरी बात सूनो l” हाशमी ने कहना चाहा ।
"मुझे छोडो मेजर अंकल…इस स्वार्थी का मुह नोचने दो मुझें-मेंने पहले ही कहा था कि यह भारतीय है…सेमिनार का दोस्त -हमारी कोई मदद नहीं करेगा---सरदार ही नहीं माने थे-वे जोर देकर कहते रहे कि विकास के सीने मे दिल हे…कराहत्ती हुई इंसानियत का मददगार बनकर खडा हो जाता है डबल एक्स फाईव----म. . मगर ये-ये तो दुनिया का सबसे बड़ा स्वार्थी निकला अकल !"
उसे पकडे झझोडता हुआ हाशमी चीख पडा-"होश में आओ मुमताज-होश मे ।"
"अरे जाकर चुल्लू भर पानी में डूब मरो विकास…थू...-मुमताज थूकती है तुम पर l" कहने के साथ ही उसने सचमुच विकास के चेहरे पर थूक दिया…"तुम स्वार्थी हो…तुम्हारे सीने मे दिल नहीँ पत्थर है, पत्थर…भविष्य में कभी खुद क्रो कमजोरों का हिमायती मत कहना । नेकी. और सच्चाई की राह पर चलने वालों के मददगार होने का दम मत भरना-जाओ, मेरे पाक मुल्क से गैरत हो जाओ ।"
लड़का देखता रह गया ।
चेहरे पर थूक पड़ा था, लेकिन उसे जरा भी गुस्सा नहीं आया ।।
मुमताज की चीख-पुकार उसके जेहन में -उतरती चली गई …कुर्सी पर कैद वह अब भी एकदम मुमताज को देख रहा था उसे जो अब भी हिस्टीरियाई अन्दाज़ में पागलों के समान न जाने क्या-क्या चीख रही थी-चीखते-चीखते ही उसके मुह से झाग उबलने लगे मुखड़ा किसी भटटी के समान दहक उठा था ।।
वह वेहोश हो गई ।
जिस्म मेजर हाशमी की बाहों' में झूल गया । कमरे में सन्नाटा छा गया…मोत की-सी खामोशी l
बिकास चाहकर भी कुछ न बोल सका~जाने क्यों क्लेजा. थर्रा रहा था उभका-आखो के सामने इशाक उभर आया--- वे दृश्य चकरा उठे जब उसने इशाक को टॉर्चर किया था-अन्दर से एक हूक…सी उठी-जाने क्यों विकास को खुद से ही घृणा-सी हुईं-लगा कि जो कुछ उसने किया हे ठीक नही किया ।
हाशमी ने मुमताज को धीरे से फर्श पर लिटाया. । खड़ा होता हुआ बोला…“मुमताज ने आपको अपशब्द कहे हैं मिस्टर विकास-आपका अपमान किया है…इसकी आपसे मैं माफी मांगता हूं-मगर मुमताज का कोई दोष नहीं है…वह सच्ची हे…भावुक और नादान हे…नही जानती कि दिल में भभक रहे ज्वालामुखी को किसी के सामने यू नहीं फटने देना चाहिए इस पगली को माफ़ कर देना -इस कम्बख्त ने आप पर थूक. . . ।”
"क्या आप लोग मुझसे कुछ मदद मांगना चाहते थे?"
"हम नहीं इस मुल्क की कराहती हुई मानवता ।”
"म...मगर... I"
"हम आपको मजबूर नहीं करेंगे-किसी भी शख्स को अपने मुल्क के खिलाफ काम करने का हक नहीं है और विशेष रूप से एक जासूस को तो किसी भी कीमत पर नहीं सेमिनार की वजह से आपका मुल्क उसके पक्ष में हे, जो यहा हो रहा हे भारत इबलीस सरकार का
पक्षधर है-इसमें कोई शक नहीं फि आपको भी इबलीस सरकार ही पक्षधर होना चाहिए, मगर. . . ।” . '
"म . . मगर? "
"हम आपसे एक प्रार्थना जरूर करेगे ।"
""क्या?"
"भारतीय वैज्ञानिक डाक्टर भसीन को हमने किसी दुर्भावना के बशीभूत होकर नहीं पकड़ा था-हमारा मकसद सिर्फ' इबलीस सरकार को सकट मे डालना था-डाक्टर भसीन हमारे पास सुरक्षित हे…आप सिर्फ उन्हीं को लेने तों मजलिस्तान आए हैं न…हम उन्हें आपको सौप देगे, सिर्फ एक ही विनती है…आप डॉक्टर भसीन को लेकर तुरन्त अपने मुल्क रवाना हो जाएं I”
"वह ,तो करना ही है-लेकिन यह आप क्यों कर रहे हैं?"
"हमें डर कि वे लोग आपको रक्त तिलक के विरुद्ध इस्तेमाल करेगे-स्पष्ट शब्दों में हम यह स्वीकार करते हैं कि रक्त तिलक आपसे नहीं टकरा सकता…आपसे हमें अपने नेस्तनाबूद हो जाने का खतरा है-इसीलिए प्रार्थना कर रहे हैं कि . . . I"
“मैं वादा करता हू-अगर आप मुझे डाक्टर भसीन दे देंगे तो मैं उन्हें लेकर चुपचाप निकल जाऊंगा-मेरा अभियान सिर्फ.. डाॅक्टर भसीन को सुरक्षित भारत पहुचा देने तक है…इससे आगे नहीं और मेरी इच्छा के विरुद्ध वे मुझे रक्त तिलक के खिलाफ इस्तेमाल नहीँ कर सकेंगे I”
"थैक्यू I” हाशमी का चेहरा चमक उठा-"बहुत बहुत शुक्रिया ।"
विकास को यूं लग रहा था जैसे किसी बहुत बडी ताकत ने उसके दिमाग को .जकड लिया हो…-वह कुछ सोच नहीं पा रहा था-यह निश्चय नहीं कर पा रहा था कि क्या गलत और क्या सही हे-मुमताज का एक-एक शब्द अभी तक उसके जेहन में गूज रहा. था ॥