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धर्मयुद्ध (विजय विकास अंलफासे सीरीज)

कईं क्षणों के लिए खामोश-सा बैठा रहा वह, फिर. बोला-" उल्टी-सीधी बातें गढकर मेरे दिमाग में इबलीस सरकार के खिलाफ जहर भरने के पीछे तुम्हारी क्या चाल है ?"

एकाएक हाशमी आगे आया, मुमताज से पहले वह बोला---- "क्या आप मुझे जानते हैं?"

उसे ध्यान से देखते हुए विकास ने कहा-"ओह अभी तक आपको मैंने ध्यान से नहीं देखा था . . .यकीनन आप मेजर हाशमी हैं…राष्ट्रपति सादात के सबसे ज्यादा विश्वसनीय I. आपकाने फोटो दिखाकर मुझें बताया गया था कि आप भी विद्रोह `की रात से ही गधे के सीग बने हुए है !"

“ठीक ही सूना` था आपने-यदि वक्त रहते राष्ट्रपति सादात ने हमें राष्ट्रपति भवन से निकाल न दिया होता तो हमारा हश्र भी वही होता जो खुद उनका हुआ।"

‘ "क्या मतलब?"

"हम नहीं जानते कि आपको. क्या बताया गया हे…राष्ट्रपति सादात' की सबसे पहली भूल इबलीस को जनरल बनाना थी…दूसरी भूल उन्होंने विद्रोहियों को कुलवने के लिए सेमिनार की फौजों को मुल्क में आने का निमंत्रण देकर की…जैसा कि हुई! डर था, विद्रोहियों के नेस्तनाबूद होने के बाद वार-बार अनुरोध के बावजूद भी सेमिनेरियन सेनाएं मजलिस्तान से निकलकर नहीं गई-'सेमिनार की सेनाएं मजलिस्तान कें चप्पे-चप्पे तक बिखर चुकी थीं…सेमिनार ने इस मुल्क से अपनी सेनाएं वापस बुलाने के लिए एक शर्त्तपत्र पेश कर दिया-राष्ट्रपति सादात उनमें से एक शर्त भी मजूर करने के लिए तैयार नहीं थे…उघर, जनरल इबलीस तरह-तरह के प्रलोभन देकर सेना में अपने पिटठू तैयार कर रहा था…उसकी आख' सादात. की गद्दी पर जमी थी गार्जियन, और कर्नल तोम्बो को सेमिनार से किसी ऐसे ही आदमी की तलाश करने कै आदेश मिले थे-इबलीस पर उनकी नज़र पडी, सौदा हो गया-सेमिनार ने उसे राष्ट्रपति बनाने का वचन दिया और इबलीस ने उनका शर्तपत्र मजूर कर लिया ....॥"

"इस कहानी का तुम्हारे पास कोई सबूत है?"

"सबूत है कर्नल तोम्बो और' गार्जियन कै सामने` इबलीस की हैसीयत..........॥सबूत है राजधानी के चप्पे-चप्पे पर तैनात विदेशी सेना, सबूत हे मजलिस्तान की जमीन पर निर्माणाधीन सेमिनेरियन लडाकू. हवाई अड्डा---सबूत है इस मुल्क के अवाम- के दिलों में इबलीस के लिए विचार ।"

"यदि यह सच है तो जो हुआ यह सचमुच गलत था I”

मुमताज जहरीले स्वर में कह उठो-“क्या इतना कहकर विकास का फर्ज पूरा हो गया?"

“क्या मतलब?"

“मजलिस्तान में एक विद्रोही ने अवाम द्वारा चुने गए राष्ट्रपति से 'सत्ता ही नहीं छीनी है बल्कि वेहरमी से उनको हत्या भी की है--यहा जुल्म हुए हैं बिकास---अभी भी हो रहे हैं…मुझे देखो…मेरी आखों के सामने ज़ालिमों की गोली ने मेरी मां के परखच्चे उडा दिए उस रात, नन्हे-मासूम और दुघमुहे बच्चों को मां की गोदों से छीनकर सगीनों' पर लटका दिया गया…गरीबो के जलते हुए झोंपडी में फेंक दिया गया उन्हें-जाने कितनी माताएं अपने बच्चों को बचाने के लिए झुलस गईं…क्या तुम ऐसो किसी मां को देखना चाहोगे-देखो विकास, देखो I" कहने के बाद उसने जोर से किसी क्रो पुकारा ।

दरबाजे पर एक बहुत. ही बुरी तरह जली हुईं औरत प्रकट हुई । सारा जिस्म काला…जला हुआ…चमगादड़ की तरह चुडी हुई खाल, सिर पर एक बाल नही…बडी ही भयानक लग रही थी वह-इत्तनी ज्यादा डराबनी थी कि विकास जैसे -लडके के सारे जिस्म में सिहरन-सी

दौड़ गई !!

"इसका नाम रेहाना. है विकास-आग की लपटों में घिरी अपनी ही झोंपडी में से अपने बच्चे को वचाने के लिए जलकर राख हो गई यह क्या तुम. सोच सकते हो कि जलने से पहले यह कितनी खूबसूरत रही होगीं?"

विकास का चेहरा गंभीर हो गया I

मुमताज चाखती ही चली गई-"उसे देखो बिकास-उसे, जिसका नाम सुल्तान----इसकी एक मासूम बहन थी-अमीना-इसकी आखों के सामने ही उसकी बहन पर विदेशी भेडिए झपट पडे । नग्न कर दिया गया ।भाई के सामने बहन के स्तन काट लिए गए । उसे देखो-- रहीम को --- छोटा-सा परिबार था…एक बीबी, दो बच्चे । दोंनो को इनकी गोद से छीनकर भून दिया गया-पति. के सामने पत्नी की लाज लूटी गई---इस बदनसीब को सव कुछ देखना पडा बिकास I ठीक उसी तरह जैसे करीम चाचा ने अपने बुढापे के सहारे को एक बेहरम की गोली का शिकार होकर गिरते देखा था…इत्तना ही नहीँ-ये तो एक नमूना था डबल एक्स फाइव-रेहाना, सुल्तान, रहीम और करीम जेसे बदनसीबी से यह मुल्क भरा पडा है-रक्त तिलक के हर मेम्बर की अपनी एक अलग कहानी है-उस रात यहा विनाश हुआ था… नरसंहार नगा होकर नाचा था-मौत ने ताण्डव किया था. । बस्तियां जला दी गईं-लोर्गों को भभकती आग में झोंक दिया गया । यह सब उस कुत्ते इबलीस के इशारे पर हुआ था…उसकै इशारे पर जिसके हुक्म पर पाबन्दी से अमल करते तुम यहां आए हो ।"

"यदि यह सब कुछ सच भी तो मैं क्या कर सकता हूं ।"

. "हां कुछ करोगे भी क्यों?" मुमताज जहर में डूबे व्यग्यात्मक स्वर मे चली गई-“यह सब कुछ करने वाला सेमिनार का पिटठू जो है और सेमिनार तुम्हारे मुल्क का दोस्त जो है तो तब कुछ करते, जब यही काम पश्चिमी महाशक्ति ने किया होता -तव करते जब यहां तुम्हारे मुल्क के किसी दुश्मन मुल्क ने कब्जा कर लिया होता !"

"म. . मुमताज ।" बिकास चीख पड़ा ।

"क्यों-तिलमिला उठे न? " मुमताज उसके चीखने से जरा भी प्रभावित हुए बिना कहती चली गई…“सच्चाई सुनकर बड़े-बड़े बौखला जाते है---- दूसरों से अलग नही-वह नहीं हो जैसा खुद को प्रचारित किए हुए . . .हो---हुंह-गरीबों का मसीहा--सच्चाई का साथी…पिसती हुई इसानियत का दोस्त---जालिम का दुश्मन…सब बकबास है…तुम स्वार्थी हो-अपने मुल्क कै लिए तुम खुद भी दूसरों पर जुल्म कर सकते हो I" . , .

"म. . . मेरी बात सूनो l” हाशमी ने कहना चाहा ।

"मुझे छोडो मेजर अंकल…इस स्वार्थी का मुह नोचने दो मुझें-मेंने पहले ही कहा था कि यह भारतीय है…सेमिनार का दोस्त -हमारी कोई मदद नहीं करेगा---सरदार ही नहीं माने थे-वे जोर देकर कहते रहे कि विकास के सीने मे दिल हे…कराहत्ती हुई इंसानियत का मददगार बनकर खडा हो जाता है डबल एक्स फाईव----म. . मगर ये-ये तो दुनिया का सबसे बड़ा स्वार्थी निकला अकल !"

उसे पकडे झझोडता हुआ हाशमी चीख पडा-"होश में आओ मुमताज-होश मे ।"

"अरे जाकर चुल्लू भर पानी में डूब मरो विकास…थू...-मुमताज थूकती है तुम पर l" कहने के साथ ही उसने सचमुच विकास के चेहरे पर थूक दिया…"तुम स्वार्थी हो…तुम्हारे सीने मे दिल नहीँ पत्थर है, पत्थर…भविष्य में कभी खुद क्रो कमजोरों का हिमायती मत कहना । नेकी. और सच्चाई की राह पर चलने वालों के मददगार होने का दम मत भरना-जाओ, मेरे पाक मुल्क से गैरत हो जाओ ।"

लड़का देखता रह गया ।

चेहरे पर थूक पड़ा था, लेकिन उसे जरा भी गुस्सा नहीं आया ।।

मुमताज की चीख-पुकार उसके जेहन में -उतरती चली गई …कुर्सी पर कैद वह अब भी एकदम मुमताज को देख रहा था उसे जो अब भी हिस्टीरियाई अन्दाज़ में पागलों के समान न जाने क्या-क्या चीख रही थी-चीखते-चीखते ही उसके मुह से झाग उबलने लगे मुखड़ा किसी भटटी के समान दहक उठा था ।।

वह वेहोश हो गई ।

जिस्म मेजर हाशमी की बाहों' में झूल गया । कमरे में सन्नाटा छा गया…मोत की-सी खामोशी l

बिकास चाहकर भी कुछ न बोल सका~जाने क्यों क्लेजा. थर्रा रहा था उभका-आखो के सामने इशाक उभर आया--- वे दृश्य चकरा उठे जब उसने इशाक को टॉर्चर किया था-अन्दर से एक हूक…सी उठी-जाने क्यों विकास को खुद से ही घृणा-सी हुईं-लगा कि जो कुछ उसने किया हे ठीक नही किया ।

हाशमी ने मुमताज को धीरे से फर्श पर लिटाया. । खड़ा होता हुआ बोला…“मुमताज ने आपको अपशब्द कहे हैं मिस्टर विकास-आपका अपमान किया है…इसकी आपसे मैं माफी मांगता हूं-मगर मुमताज का कोई दोष नहीं है…वह सच्ची हे…भावुक और नादान हे…नही जानती कि दिल में भभक रहे ज्वालामुखी को किसी के सामने यू नहीं फटने देना चाहिए इस पगली को माफ़ कर देना -इस कम्बख्त ने आप पर थूक. . . ।”

"क्या आप लोग मुझसे कुछ मदद मांगना चाहते थे?"

"हम नहीं इस मुल्क की कराहती हुई मानवता ।”

"म...मगर... I"

"हम आपको मजबूर नहीं करेंगे-किसी भी शख्स को अपने मुल्क के खिलाफ काम करने का हक नहीं है और विशेष रूप से एक जासूस को तो किसी भी कीमत पर नहीं सेमिनार की वजह से आपका मुल्क उसके पक्ष में हे, जो यहा हो रहा हे भारत इबलीस सरकार का

पक्षधर है-इसमें कोई शक नहीं फि आपको भी इबलीस सरकार ही पक्षधर होना चाहिए, मगर. . . ।” . '

"म . . मगर? "

"हम आपसे एक प्रार्थना जरूर करेगे ।"

""क्या?"

"भारतीय वैज्ञानिक डाक्टर भसीन को हमने किसी दुर्भावना के बशीभूत होकर नहीं पकड़ा था-हमारा मकसद सिर्फ' इबलीस सरकार को सकट मे डालना था-डाक्टर भसीन हमारे पास सुरक्षित हे…आप सिर्फ उन्हीं को लेने तों मजलिस्तान आए हैं न…हम उन्हें आपको सौप देगे, सिर्फ एक ही विनती है…आप डॉक्टर भसीन को लेकर तुरन्त अपने मुल्क रवाना हो जाएं I”

"वह ,तो करना ही है-लेकिन यह आप क्यों कर रहे हैं?"

"हमें डर कि वे लोग आपको रक्त तिलक के विरुद्ध इस्तेमाल करेगे-स्पष्ट शब्दों में हम यह स्वीकार करते हैं कि रक्त तिलक आपसे नहीं टकरा सकता…आपसे हमें अपने नेस्तनाबूद हो जाने का खतरा है-इसीलिए प्रार्थना कर रहे हैं कि . . . I"

“मैं वादा करता हू-अगर आप मुझे डाक्टर भसीन दे देंगे तो मैं उन्हें लेकर चुपचाप निकल जाऊंगा-मेरा अभियान सिर्फ.. डाॅक्टर भसीन को सुरक्षित भारत पहुचा देने तक है…इससे आगे नहीं और मेरी इच्छा के विरुद्ध वे मुझे रक्त तिलक के खिलाफ इस्तेमाल नहीँ कर सकेंगे I”

"थैक्यू I” हाशमी का चेहरा चमक उठा-"बहुत बहुत शुक्रिया ।"

विकास को यूं लग रहा था जैसे किसी बहुत बडी ताकत ने उसके दिमाग को .जकड लिया हो…-वह कुछ सोच नहीं पा रहा था-यह निश्चय नहीं कर पा रहा था कि क्या गलत और क्या सही हे-मुमताज का एक-एक शब्द अभी तक उसके जेहन में गूज रहा. था ॥
 
एकाएक मेजर ने कहा-“करीम चाचा I"

"जी I" करीम चाचा का बूढा. जिस्म तन गया ।

"डॉक्टर भसीन को ले आओ ।”

करीम चाचा तुरंत बाहर चले गए . .

मेजर हाशमी पुन: विकास की तरफ़ घुमकर कहा-“सरदार की तरफ से मुमताज वेटी की गेरमौजूदगी में सारे अधिकार मुझे हैं । वेसे भी वे हमे पहले ही यह हुक्म दे चुके हैं कि आपके साथ क्या क्या करना है.-उन्होने कहा था कि पहले हम आपसे कराहती हुई मानवता के हक में और जालिम इबलीस के खिलाफ़ मदद मांगे...........

उन्होंने आशा व्यक्त की थी कि आप इसके लिए तैयार हो जाएगे, लेकिन यह भी कहा था कि यदि तैयार न हो तो इस प्रार्थना के साथ आपको डाँक्टर भसीन दे दिए जाए-मैँ उसी आदेश का पालन कर रहा हू-उम्मीद हे आप अपना बादा नहीं तोडेगे ।"

विकास कुछ कह नहीं सका…जैसे कहने कै लिए उसके पास शेष कुछ बचा ही न हो ।

फिर दरवाजे पर करीम चाचा के साथ बूढे डाक्टर भसीन भी नज़र आए-विकास ने उन्हें देखते ही पहचान लिया-पहचानता भी क्यों नहीं, फोटो, के जरिए इस अभियान पर निक्लने से पहले ही वह इस सूरत को अपने दिलो-दिमाग मे अच्छी. तरह स्थापित कर चुका

था ।

मेजर विकास की तरफ़ बढा-चेहरे पर मौजूद थूक को पोंछा और अचानक ही मेजर ने उसकी कनपटी की विशिष्ट नस दबा दी ।

विकास का जिस्म ढीला पडता चला गया…गऱ्दन एक तरफ को ढलक गई l

ॐॐॐॐॐ

आंख खुलते विकास ने स्वय को उसी स्थान पर पाया जहा रक्त तिलक सरदार से उसकी भिडन्त हुई थी किन्तु अब सडक पर वह उल्टी पडी कार कहीँ नहीं थी…हा उसके बराबर में ही डॉक्टर भसीन जरूर पडे थे I वे बेहोश थे ।

सबसे पहले बिकास ने यह चैक किया कि कही वह डाॅक्टर भसीन

के मेकअप में कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं है-हर तरह से चेक करने के बाद वह सन्तुष्ट हो गया ।

र्कोंई मेकअप नहीं था ।

अचानक डॉक्टर भसीन के मुह से निक्लने वाली कराह ने उसका ध्यान भग किया -विकास ने उनकी तरफ़ देखा…डॉक्टर मसीन की चेतना बापस लौट रही थी ।

विकास ने पुकारा ।।

भसीन ने आखें खोली--कुछ देर तक चेहरे पर हैरत लिए-इधर उधर देखते रहे फिर एक झटके से. उठकर बैठ गए, बोले-“क्या तुम भारतीय जासूस हो?"

"जी हा…में मजलिस्तान निवासियों कै चंगुल से आप ही को निकालने आया था I"

विकास ने पूछा--"लेकिन आपको कैसे मालूम कि मैं भारतीय जासूस हूं ?"

" मेजर ने बताया I"

"मेजर ने?”

“हां-मेजर हाशमी ने -मगर बेटे मुझे मुनि फरिश्तो के चंगुल से निकालना उतना जरूरी नहीं था, क्योकि उन्होंने मुझें कोई तकलीफ नहीं दी-मुझे एक मेहमान की तरह रखा…वे सभी मेरा बहुत ख्याल रखते थे----अरे सादात. की बह नादान लडकी तो मुझे हणेशा डाक्टर अंकल कहा करती थी।"

“क्या आपको उन्होंने कैद नहीं कर रखा था?"

“नहीँ-वल्कि कैद तो उस गद्दार और खुदगर्ज इबलीस ने इस मुल्क को कर रखा है…कैद तो इस मुल्क की बेगुनाह और वदनसीब अवाम है। मुझे आजाद कराने से कई गुना ज्यादा तो इस मुल्क को इइबलीस के पंगे से आजाद कराना जरूरी था।"

“यह आप क्या कह रहे हैं? "

"सच यही है वेटे ।"

"'ऐसा आप कैसे कह सकते हैं कि सच यही है?"

"लो-कैसो बात कर रहे हो वेटे-सारा मजर हमने अपनी आखों से देखा हे-हम वहशी रात कभी भूल नहीं सकते-मौत का वडा ही भीषण ताण्डव हआ था यहां…सडके लाशो से पट गई थी…एक सेनिक जत्था तो हमे भी मार डालता, किन्तु सिर्फ उनके कमाडर ने कहा कि हम भारतीय वैज्ञानिक हें…वस, इसी बजह से उन जालिमों ने हमे छोड दिया…सादात ने इबलीस को जनरल बनाया-इवलीस ने उसी से गद्दारी की…सेमिनार की सेनाओं से मिलकर I"

डॉक्टर भसीन वही सब कुछ कहते चले गए जो उसे रक्त तिलक कै अड्डे पर पता लगा था---विकास सुनता रहा-एक-एक लफ्ज बहुत

ध्यान से सुना था उसने ।

ॐॐॐॐॐ
 
"अरे-आओ मिस्टर विकास ।" उसे देखते ही तीनों एक साथ खडे हो गए, कर्नल तोम्बो बाकायदा उसका स्वागत-सा करता हुआ बोला…आप कहा गुम हो गए थे? वहां, सडक. पर हमे आपकी उल्टी पडी… हुई कार मिली थी-हम तो आपके लिए चिन्तित थे I"

"मैं अपने साथ डाॅक्टर भसीन को भी लाया हूं ।"

"क . . .क्या? " तीनों उछल पड़े ।

“आइए डॉक्टर ।” विकास ने हाल के दरबाजे की तरफ़ घूमकर कहा-उन तीनों की आखें' हेरत से फैलती चली गई जब उन्होंने अपनी आखो से डॉक्टर भसीन को दरबाजा पार करके हाल के अन्दर प्रविष्ट होते देखा-डाक्टर की बूढी आखें उन्हीं पर केंद्रित थीं ।

"कमाल हो गया आश्चर्यजनक ।" तोम्बो बुदबुदा उठा I

गार्जियन ने पूछा-“इतनी जल्दी डाक्टर भसीन को आप कहा से ले-आए मिस्टर बिकास ?"

"रक्त तिलक के हेडक्वार्टर से I"

"आप इतनी जल्दी उनके हेडक्वार्टर तक भी पहुच गए?”

"मैंने पहले ही कहा था कि मैं हर काम तेज़ रफ्तार से करता हूं ।"

"म. . मगर-आपने तो सचमुच कमाल कर दिया…जिस रक्त तिलक के बारे में हम इतने दिन तक भी सिर खपाने के वावजूद कुछ पता नहीं लगा -आज दूसरे ही दिन आप न सिर्फ उनके हेडक्वार्टर तक ही पहुच गए, बल्कि डॉक्टर को उनके चगुल से निकाल भी लाए अब तो हम उम्मीद करते हे कि आपने उनका हेडक्वार्टर नेस्तनाबूद कर दिया होगा I”

संक्षिप्त…सा उत्तर-“नहीं I"

“न. . .नही…फिर आप डॉक्टर को उनके चगुल' से निकाल कैसे लाए?" इबलीस कह उठा-"यदि ऐसी ही बात है मिस्टर विकास तो आप हेडक्वार्टर का फ्ता हमें बताइए-सिर्फ पाच मिनट के अन्दर हम उन्हें नेस्तनाबूद कर देगे I”

लडके, ने उसे घूरा…बड्री ही कडी, नजर से वोला-“मैं फ्ता नहीं जानता I"

"क. . .क्या मतलब?” इबलीस बौखला गया-"अभी तो आप कह रहे थे कि..... I"

"मुझे वहां बेहोश करके ले जाया गया था I"

कर्नल तोम्बो ने पूछा…“हम समझे नहीं ॥"

उनके इर्द-गिर्द चहलकदमी-सी करते हैं विकास ने गम्भीर स्वर मे गढी…गढाई, कहानी सुनाई…“रक्त तिलक सरदार ने पत्र मे लिखा था कि यदि मै उसे शिकस्त देने मे कामयाब हो गया तो डॉक्टर भसीन को मुझें सौप देगा उसी स्थान पर मेरा. और उसका टकराव हुआ, जहा आप लोगों को मेरी कार मिली होगी-उस टकराव मे वह हार गया…वादे के मुताबिक उसने मुझे डॉक्टर भसीन को सौंपने के लिए कहा, साथ ही यह भी कहा कि हेडक्वार्टर चलने से पहले मुझे बेहोश होना पडेगा_क्योंकि वह मुझे अपना हेडक्वार्टर नही दिखा सकता ।

मुझें सिर्फ डॉक्टर की जरूरत थी-हैडक्वार्टर देखकर मुझे करना भी क्या था, अत: मैं तैयार हो गया---उसने मुझे बेहोश किया--हेडक्वार्टर ले गया ओर फिर दूसरी वार मुझे ओर डॉक्टर को वेहोश किया गया । इस वार हमने होश आने पर खुद को वहीँ पाया…वहा से सीधे चले आ रहे हैं I"

मायूस स्वर-"यानी आप नहीं जानते कि बेहोश करके वह आपको कहा ले गए? "

“नहीं ।" गार्जियन ने डॉकटर से पूछा…“आप कुछ बता सकते हैं डॉक्टर?”

"मैं इसके अलावा क्या बता सकता हूं कि इतने दिन तक किसी सीलनयुक्त तहखाने मे कैद रहा? "

तीनों के चेहरों पर निराशा के भाव छा गए ।

एकाएक विकास ने कहा-"अब आप लोग हमारी भारत यात्रा की तैयारी करें ।"

"आ'…हां...हां…क्यों नहीँ…जरूर, मगर. . . I”

“मगर?"

“आप तो थकते नहीं हैं,' लेकिन डॉक्टर भसीन. तो थके हुए हैँ इन्हें आराम कर लेने दीजिए-हम इन्तजाम कर देते हैं-अव दिक्कत ही क्या हे, आराम से निकल जाना I”

"मैं कल सुबह बिशेष विमान से निकलना पसन्द करूंगा ।"

"ठ . . .ठीक्र है-जैसी आपकी मर्जी-फिलहाल आराम कीजिए ।"

ॐॐॐॐॐ

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ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ

माथे पर हाथ रखते हुए इबलीस ने कहा-"अब क्या होगा?"

"होगा क्या-यह रक्त तिलक नाम की तलवार हमेशा हमारे सिर पर लटकती रहेगी I"

कर्नल तोम्बो बोला…“कमाल ही कर दिया इस लडके ने तो! कल शाम को आया ही था…आज डॉक्टर भसीन को उनके चंगुल से निकाल भी लाया-- कुछ भी कहो-मैंने ऐसा नहीं सोचा था I"

"जो हो गया उसे छोडो. र्कर्नल I" गार्जियन कह उठा…“यह सोचो कि अब क्या करें?"

"हम कर ही क्या सकते हैँ…डॉक्टर भसीन के मिलने के कारण हमारी सारी आशाओं पर पानी फिर गया ।" इबलीस ने कहा…"सोचा था कि डॉक्टर भसीन के चक्क्रर मैं वह रक्त तिलक से टकरा जाएगा ओर तब तक रक्त तिलक के परंखच्चे उड़ा डालेगा लेकिन.........!"

" सब गुड़ गोबर कर दिया !"

कमरे मे सग्नाटा छा गया-तनावपूर्ण सन्नाटा-तीनों चेहरे गहरी चिन्ता में डूबे हुए थे एकाएक ही गार्जियन कह दृढता-“मेरा दिल कहता हे कि रक्त तिलक को यही खत्म कर सकता है।"

“म मगर वह करेगा क्यों?" तोम्बो झुझलाया I

इबलीस बोला…"मेरे दिमाग में एक तरकीब आती है ।”

"क्या?” दोनों की आखें' चमक उठी l

इवलीस की एकमात्र आख …बारी-बारी से उसने अपने दोनों आकाओं को देखा बोला---"क्यों न हम डाक्टर का कत्ल कर दें ?"

" . . .क्या बकते हो?” दोनों के होश उड गए…चेहरे सफेद पड . गए l

वडे ही क्रूर स्वर मे इबलीस ने कहा…“किसी भी ऐसे समय जव विकास उस कमरे में न हो I "

"जुबान को लगाम दो जनरल के बच्चे I" कर्नल तोम्बो दात र्मीचकर . गुर्राया--"उसने सुन लिया तो तेरी जुबान खीच लेगा-काट-पीसकर पखे पर लटका देगा तुझे ।"

"तभी न जब उसे यह पता लगेगा कि कत्ल हमने किया है?"

" हा I”

इबलीस के मोटे…भद्दे और काले होठो पर बडी ही धूर्त…रहस्यमयी और विजयी मुस्कान उभरी…"विकास को यह पता लगेगा कि डॉक्टर भसीन को रक्त तिलक बालों ने मारा है ।"

कर्नल तोम्बो और गार्जियन की आखें मिली-इबलीस की बात में अब उन्हें दम नजर आया

कर्नल तोम्बो बहुत ही धीमे स्वर में बोला-“क्या कहना चाहते हो? "

उसी के साथ इबलीस उनकी तरफ़ झुका रहस्यमय स्वर में बोले----- "उसने कल सुबह जाने का निश्चय किया है । अभी काफी समय है-आज का शेष दिन और सारी रात पडी है । किसी-न-किसी समय तो वह कमरे मे डॉक्टर को अकेला छोडेगा ही-उसी समय का लाभ उठाकर हम डॉक्टर को कत्ल कर देगे-उसे यह पता कैसे लगेगा कि कत्ल रक्त तिलक ने किया है। . ..

उस सबकी योजना हमे मिल-जुलकर बनानी चाहिए ।"

"इसमे तो कोई शक नहीं कि यदि हम उसे यह' यक्रीन दिलाने 'में कामयाब हो गए कि कत्ल उन्होंने किया है तो वह उनका जानी दुश्मन बन जाएगा और तब तक मजलिस्तान से भारत जाने के चारे में भी नहीं कहेगा ,जब तक कि रक्त तिलक का एक भी सदस्य जिन्दा रहेगा ।”

गार्जियन का चिन्तित्त स्वर…“इसमेँ खतरा है !"

“खतरा तो हे, लेकिन इसके अलावा हमारे पास रास्ता भी क्या है?"

“मेरे दिमाग मे एक और बात आ रही है !" कर्नल तोम्बै वोला' I

"क. . .क्या मतलब?" दोनों एक साथ कह उठे ।

"क्यों न हम सीधे रास्ते से चले यानी उसे बिश्वास मेँ लेकर रिक्वेस्ट करें कि वह हमारा यह काम कर जाए…उससे साफ कहें कि रक्त तिलक ऩे हमेँ बहुत परेशान कर रखा है…अत वह हम पर इस सगठन को नेस्तनाबूद करने की कृपा कर जाए !"

" क्या तुम्हें विश्वास है` कि वह हमारी रिक्वेस्ट पर ऐसा करने के लिए तैयार हो जाएगा?"

"हो भी सकता हे ।"

" यानी विश्वासपूर्वक तुम भी नहीं कह सकते?”

“विश्वासपूर्बक कहा ही क्या जा सकता हे-हा अगर सोचा जाए तो दिमाग मे यह बात आती है कि इनकार की वजह ही क्या हे---ऐसा करने पर इस मुल्क में हमारे पाव जम जाएगे और हम उसके देश के मित्र हैँ-हमारी यहा मौजूदगी में एशिया पर भारत का दबाव बढा ही है I"

"गुड I" गार्जियन कह उठा…इससे आगे की एक बात. मेरे दिमाग में आती है ।"

"क्या"

"पहले हम, उससे कहकर देखते हैं और यदि वह इनकार कर देता है तो हम तुरन्त ही सेमिनार से सम्बंध स्थापित करते हैं-उनसे कहेंगे कि वे भारत पर दबाव डाले…जिस भारत ने उसे डॉक्टर भसीन को निकाल लाने का हुक्म टेकर भेजा है उसी तरह ट्रासमीटर पर उसे उसके चीफ की तरफ से यह हुक्म मिलेगा कि वह यहा से रक्त तिलक क्रो खत्म करके ही भारत लोटे ।

"गुड आइडिंया,.…ऐसा हो सकता है ।"

"अब हमारे पास तीनों तरीके हैं-जहां तक उम्मीद हे वह हमारी रिक्वेस्ट पर ही मान जाएगा और नहीं माना तो हम यह आदेश सीधे

उसके चीफ़ द्वारा उसे दिलवाएगे-हालांकि उम्मीद नहीं है, लेकिन यदि भारत ही उसे यह आदेश देने के लिए तैयार न हुआ तो फिर हम इबलीस वाला रास्ता अपनाएंगे-उसमें खतरा जरूर है, मगर हम

सारा काम बडी होशियारी से करेगे-इतना महत्वपूर्ण काम बनाने कै लिए आखिर हमें खतरा तो उठाना ही पडेशा ।"

“ वह बाद की बात है पहले हमें सीधे रास्ते को अजमा लेना चाहिए ।"

ॐॐॐॐॐ
 
हालाकि पहला वाक्य सुनते ही विकास समझ गया था कि वे लोग क्या कहेगे किन्तु उनकी सभी बात उसने बहुत धैर्यंपूर्वक सुनी।

दिल यू कर रहा था कि रिवॉल्वर निकालकर एक ही झटके में तीनों को शूट कर दे, मगर प्रत्यक्ष में वह बिछा सामान्य स्वर में बोला…“कमाल हैं, यदि आप लोग मुझसे यही चाहते थे तो आपने मेरे आते ही अपनी इच्छा प्रकट क्यों नहीं कर दी?"

"हमने तो यह सोचा था कि डॉक्टर भसीन तक पहुचते-पहुचते ही तुम रक्त तिलक को खत्म कर दोगे।"

"ओह-हां, आपका यह सोचना भी ठीक ही था I"

उत्साहित-से इबलीस ने पूछा…" तो क्या हम यह समझे कि आपने हमारी प्रार्थना स्वीकार कर ली है?”

"इसमें प्रार्थना जैसी क्या बात हे…"यह तो मेरा फ़र्ज है I"

“ज. . .जी?" तीनों चेहरे चमक उठे I

"आप मेरे देश कै मित्र देश हैं-यदि एक-दूसरे की मुसीबत में काम न आए तो मित्र ही काहे के?"

"ज . . .जी हां…जी हा-मित्र ही काहे के? " वे जल्दी से बोल उठे ।

बिकास ने कहा-"लेकिन होशियारी की बात यह हे कि उससे पहले एक काम हो जाना चाहिए I”

“क्या?"

"डॉक्टर भसीन को भारत कै लिए रवाऩा करने के बाद यदि मै रक्त तिलक के खिलाफ डका बजाऊं तो ज्यादा बेहत्तर होगा I"

" क्यो ??”

"डॉक्टर भसीन हमारी एक कमजोर नस है-बडी मुश्किल से तो अब उन्हे रक्त तिलक. कै चगुल से निकाला गया है-कहीं मुझसे दुश्मनी ठनती देखकर उन्होंने फिर डॉक्टर को कब्जे में कर लिया तो बडी मुसीबत हो जाएगी-डाक्टर को कब्जे मैं करके वे हमे ब्लैकमेल कर सकते है !"

गार्जियन कह उठा-"कह तो आप ठीक रहे है l"

"मै शाम तक ही डॉक्टर की भारत रवानगी का इन्तजाम कर सकता हूं I" खुशी के कारण झूमता हुआ-सा इवलीमा वोला-“आप हुक्म करके तो देखिए?"

"इन्तजाम कर दो-ट्रासमीटर पर अपने चाफ से मै खुद बात कर लूगा I"

“अभी लीजिए ।”कहने के बाद नाचता हुआ-सा इवलीस कमरे से बाहर निकल गया…कमरे में बिकास. के पास सिर्फ गार्जियन और कर्नल तोम्बो रह गए ।" . .

एकाएक विकास ने आदेश-सा दिया-"कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द कर लो I”

"क . . .क्यों?" एक साथ दोनों उछल पड़े ।

"मुझे आप दोनों से अकले में कुछ बाते करनी हैं l"

उलझन मे फसे दोनों के मुह से निकला-"जा . .जी?"

"मैं कल ही से किसी ऐसे मोके की तलाश में था, जव कि जनरल इबलीस की गैरमौजूदगी में आप लोगों से चन्द बातें कर सकू । मगर कम्बख्त ने मौका ही नहीं दिया…मेरे चीफ ने मुझे आप लोर्गो से कुछ खास बातें करने का आदेश दिया था…वे ही करनी. हैं-प्लीज दरवाजा बन्दकर दाजिए I"

कर्नल-तोम्बो ने गार्जियन को सकैत किया ।

गार्जियन तेजी के साथ. दरवाजे तक पहुंचा-वन्द किया, बोल्ट करके उसी तेजी के साथ वापस भी आ गया-उसकै अत्यन्त समीप खडे दोनों उसी की तरफ. देख रहे थे, सारे जहा की गम्भीरता मानो इस वक्त सिर्फ विकास, के चेहरे पर ही सिमट आई थी ।।

"आप क्या बाते करना चाहते थे?” कर्नल तोम्बो ने धीरे से पूछा ।।

विकास उनपर झुका और फिर बडे ही रहस्यमय स्वर में बोला---

" आप लोग इस गद्दार इबलीस की यूं ही मदद कर रहे हैं या इस मदद का कोई फायदा भी उठा रहे हैं?" . .

'"क . . .क्या मतलब? " दोनों एक साथ चौंककर पीछे हट गए ।

हालाँकि विकास के चेहरे पर ज़हरीली मुस्कराहट ने उभरना चाहा था, किन्तु लडके ने उसे सख्ती से रोका-गम्भीरता कै अलावा -अन्य किसी भाव को अपने चेहरे पर नहीं उभरने दिया, बोला-" अगर आप इवलीस से कोई लाभ नहीं उठा रहे हैं तो बेकार ही यहाँ इतना सव कुछ किया जा रहा है !"

गार्जियन ने तोम्बो के चेहरों पर उलझन के भाव उभरे…नजरे मिली---जेसे एक दूसरे से पूछ रहे हो कि बिकास को बताएं या नहीं, तभी बिकास ने चोट की…“ रक्त तिलक को खत्म करने का सवाल भी तभी है, जव हमें किसी तरह. का बिशेष लाभ… हो रहा हो, वर्ना अंपनी ताकत जाया करने से क्या लाभ?"

"न. . नहीं -नही ।" तोम्बो जल्दी से कह उठा…"हम पूरा लाभ उठा रहे हैं ।"

" इबलीस आपके सामने इतना बोल केसे लेता है?”

" हूं... साला इबलीस ।" गार्जियन शोखी पे हसा बोला…" इबलीस की बिसात ही. क्या है तुम बोलने की बात कर रहे हों…हमारी इजाजत' के बिना वह एक सास भी नहीं ले सकता…मजलिस्तान के असली राष्ट्रपति तो हम हैं-उसे तो सिर्फ कहा जाता है, हम कहलवात्ते हैं । सिर्फ इसलिए कि इस मुल्क का अवाम खुद को गुलाम न समझे-यह न समझें कि उनके मुल्क पर विदेशियो का कब्जा हे ।"

“यही होना चाहिए-तभी तो एशिया में हमारी ताकत बढेगी. I”

" बढेगी?"--" आप कैसी` बात कर रहे हैँ-" यूं कहिए, कि बढ चुकी है…मज़लिस्तान का चप्पा-चप्पा इस वक्त हमारे कब्जे में है…ठीक उसी तरह यहा भी हमारा शासन है, जिस तरह सेमिनार में हे मजलिस्तान की धरती पर वही होता है, जो हम. चाहते ‘ हैं---- हमारी यहां मौजदूगी से इस क्षेत्र में आपके मुल्क का दबाव बढा है…आपका पडोसी. दुश्मन और उसका पड़ोसी आका बौखलाए हुए है-वे उसे हथियार सप्लाई कर रहे हैं ।”

"यहां कुछ महत्वपूर्ण अड्डे भी स्थापित किए हैं कि नहीं?"

"आप फिक्र न करे--मजलिस्तान के चप्पे-चप्पे पर थल सेना पडी हे…हबाई अड्डे और समुद्र में नौसैनिक अड्डे का निर्माण कार्य शुरू हो गया हे-पश्चिमी देश भले ही आपके पडोसी, क्रो चाहे जितने हथियार दे दें, वह कुछ नहीं कर सकेगा -जिस क्षण उसने भारत पर हमला करने की जुर्रत की उसके सिर्फ एक घण्टे बाद दुनिया के नक्शे से उसका नामो-निशान उड जाएगा…उस तरफ़ से आप और इस तरफ से पश्चिमी देश' के उस पिट्ठू देश में हम धुस जाएगे' I"

"गुड!"

विकास अभी कुछ कहना ही चाहता था कि-कमरे के बन्द दरबाजे पर दस्तक हुई-तीनों चौके और छिटककर इस तरह एक दुसरे से दूर हो गए जैसे ऐसा किसी अदृय शक्ति ने किया हो, कर्नल तोम्बो फुसफसा उठा-“इबलीस आ गया लगता हे ।" गार्जियन बोला…"आप दरवाजा खोलिए-बाकी बातें बाद मे होंगी मिस्टर विकास I"

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शाम के वक्त सैनिक पहरे में एक विशेष बिमान डाक्टर भसीन 'को लेकर भारत की तरफ रवाना हुआ…डाक्टर भसीन के अतिरिक्त विमान में उनकी सुरक्षा हेतु सेनिक भी थे…बिमान का काम डाक्टर भसीन को भारत छोडकर तुरन्त ही वापस लोट आना… था ।।

विमान के रवाना होने के तीस मिनट बाद-----विकास ने लाकेट रूपी ट्रासमीटर पर ब्लेक` व्वाय से सम्बाघ स्थापित किया…बताया कि वह अपने अभियान में कामयाब हो गया है…डाक्टर भसीन को लेकर एक विमान भारत के लिए रवाना हो है ।।

ब्लेक व्वाय ने पूछा कि वह उस विमान से भारत क्यों नहीं आ रहा है-इस सबाल का कोई ज़बाब दिए बिना विकास ने यह कहकर संबंध विच्छेद कर दिया क्रि डाक्टर भसीन के सूरक्षित भारत पहुचते ही उसे ट्रांसमीटर' पर सूचना दी जाए ।

डिंनर पर ।।

इबलीस, तोम्बो और गार्जियन ने उससे अगला प्रोग्राम पूछा I‘ उसने कहा कि वह सोचा नहीं करता-- शुरू हो जाता हे.-फिर यह पूछा गया कि वह कब शुरू हो रहा है बता दिया कि ट्रस्समीटर' पर डाक्टर भसीन के भारत पहुचते ही उसे सूचना मिल जाएगी-बस ठीक उसी क्षण से वह डका बजा देगा l

तीनों खुश... ।।

तब तक के लिए विकास ने आराम करने की इच्छा जाहिर की । वह अपने कमरे में पहुच गया…कुछ देर तक बिस्तर पर लेटा छत को घूरता रहा……जाने क्या-क्या विचार उसके दिमाग… में आ रहे थे…वह जानता था कि अगले ही कुछ घटो वाद उसे बुरी तरह व्यस्त हो जाना. है, अत: सचमुच आराम करने के लिए अपने दिमाग को सभी विचारों से मुक्त किया । आखे बन्द कर ली I नीद आ गई उसे-चलचित्र के समान, वह कुछ दृश्य देखने लगा ।

गडगडाते… टेक…गर्जती तोपे टी.बी . के मरीज की तरह लगातार खांसत्ती गनै…चीखते इसान---चीख-पुकार-धमाके---

आग लपलपाती लौ मे घिर गई बस्तिया--जान बचाने के लिए निरीह जानवरों की तरह इधर-उधर भागते इसान--उनके कलेजो क्रो रौंद रहे सैनिकों के भारी भारी बूट ।

नरसंहार-विनाश-त्राहि-त्राहि और हाहाकार । सिसकती मानवता और अट्टहास लगाता शैतान ।

बहन-बेटियों की लुटती इज्जत-मांओं के कटते स्तन-सगीनों . . पर लटके बच्चे-उन सबके ऊपर जिस्म में झुरझुरी पैदा कर देने वाले तीन चेहरे-जहा बुझे उनके कर्णभेदी कहकहे । बुरी तरह जली हुई भयानक रेहाना-कापते करीम चाचा सिसकते रहीम और सुल्तान---तडपता मेजर हाशमी--बिलबिलाते हुए बच्चे उसके कदमों मे गिर गए सभी कह उहे… हमें बचा लो विकास तुममेँ ताकत हे-शक्ति है-हमे गद्दार इबलीस से बचा लो ।

फिर मुमताज चीख पडी I एक-एक शब्द विकास के कानों में पिघला हुआ शीशा बनकर गिरा…एक-एक गाली और मुमताज की घृणा विकास के दिलो दिमाग में उतरती चली गईं-मुमताज ने थूक दिया उस पर ।

" न नहीं l” एक जबरदस्त चीख के साथ विकास बिस्तर से उछल पडा…उसका हाथ अपने चेहरे पर था-वहा जहा मुमताज ने थूका था----चेहरा ही नहीं बल्कि उसका सारा शरीर पसीने से नहाया हुआ था-जिस्म के सभी मसामों ने एक साथ ढेर सारा पसीना उगल दिया था-सास धोंकनी के समान चल रही थी…जैसे वह वहुत दूर से दौड़कर आया हो । सामन लगे शीशे मे उसकी नजर अपने अक्स पर पडी. l उसे देखकर लडका. खुद ही काप उठा-शीशे मेँ अपने ही चेहरे को पहचान नहीं सका वह…उसे लगा कि शीशे मे किसी खूनी दरिन्दे . का अंक्स है-अचानक ही सारे कमरे में पिंक -पिक की हल्की-सी , आवाज गूज उठी -लाकेट रूपी ट्रासमीटर से छोटी-सा सुई निकलकर रह-रहकर उसे चुभने लगी ।

उसने जल्दी से ट्रांसमीटर आन किया | दूसरी तरफ से बिजय की आवाज उभ रही थी…"हैलो-हैलो प्यारे दिलजले । सुन रहा हूं अक्ल I" गम्भीर स्वर ।

" डाॅक्टर भसीन यहा पहुँच गये हैं प्यारे I”

यु कहा बिकास ने… "एजेण्ट स्क्वायर डबल एक्स फाइव का अभियान पूरा हो गया गुरू !"

"क्या पूरा हो गया प्यारे, लेकिन अब तुम वहां क्या कर रहे हो?"

"इसी क्षण से अब विकास का अभियान शुरू होता है ।”

"व. . बिकास का अभियान-हम समझे नहीं प्यारे. . . "

"वहुत जल्द ही सब कुछ पता लग जाएगा गुरु !" कहने के साथ ही बिकास ने सम्बन्ध विछेद किया और लॉक्रिट रूमी ट्रान्सनीटर अपने गले मे डाल लिया…बिस्तर छोड दिया था उसने ।

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“जबाब दो मुमताज़ I" सरदार, का सख्त स्वर… "' तुमने विकास से वे सव बातें क्यों नहीं कहीं जो हमने तुम्हें समझाई औंर तुम्हारे बेहोश होने के वाद मेजऱ हाशमी को कहनी पडी…हमने तुम्हें वह कहने या करने के लिए नहीँ कहा था, वह जो तुमने कहा और किया ।। अपनी तरफ़ से जाने क्या-क्या कहती गईं तुम…जबाव दो _ मुमताज-क्यों?”

मुमताज ने अफ़सोस भरे स्वर मे कहर-"जाने मुझे क्या हो गया था सरदार! ”

"साफ क्यों नहीं कहती कि तुम जज्वाती हो गई थ्री?"

"जी ।”

"क्यों-हम पूछते हैं कि हमारे समझाने के बाद आखिर तुम जज्वाती क्यों हो गई थीं?"

"मैं उससे नफरत करती थी सरदार-आज भी मैं उस आदमखोर दरिन्दे से सख्त नफरत करती हूं किन्तु उस वक्त जव वह सामने था-उसे देखकर जाने क्या हो गया मुझे…वे सभी बाते मुझे याद आती चली गईं, जो उसके बारे में आपने कही थीं…जाने क्यों उस वक्त मुझे ऐसा लगा कि अगर वह चाहे तो सचमुच इस मुल्क से गद्दार इबलीस और उसके' विदेशी आकाओं को उखाडकल-. फेंक सकता हे-मुझे यह सोचकर गुस्सा आ गया था कि सक्षम होते हुए भी वह चुप है…शान्त है !"

कई क्षण के लिए उस कमरे में सन्नाटा छा गया…॥

मुमताज के अलावा मेज़ को धेरै मेजर हाशमी इ सुल्तान और करीम चाचा वैठे थे-नकाबपोश सरदार कमरे मे चहलकदमी कर रहा था--सवकी सासे रूकी हुई थी--नजर सरदार पर केन्दित्त । "

"तुमने हुक्मउदूली जरूर की है, लकिन. . . ।”

“लेकिन....॥" मुमताज का कम्पित स्वर l

“अनजाने में ही तुम वह कर बैठी हो जो हम सोच भी नहीं सकै थे । हम दावे के साथ कह सकते है कि जो कि तुमने कहा उसका उसके दिमाग पर उतना असर होगा जितना वह सब कुछ कहने का नही होता । जो कुछ हमने समझाया था और बिशेष रूप से तुम्हारे कहने का अन्दाज सराहनीय हे।"

"ज जी ।" मुमताज के अतिरिक्त दूसरों के मुह से भी चकित स्वर निक्ल पडा ।

" "अव वह हमारी मदद ज़रूर करेगा-तुमने उसके जमीर को ललकार दिया हे ।"

अचाक--से सभी सरदार की लाल आखों को देखते रह गए फिर मेजर हाशमी ने कहा…" मगर…-सूचना के मुताबिक उसने अकेले डाक्टर भसीन को भारत भेज दिया हे सरदार ।"

" तुम्हारे ख्याल से ऐसा उसने क्यों किया हे?”

"यह सुचना भी मिली हे कि उसने इबलीस आदि से रक्त तिलक को ध्वस्त करने वादा किया है I"

सरदार ठहाका लगाकर हस पडा-हसता ही चला गया-कुछ ऐसे अन्दाज मेँ जैसे मेजर हाशमी ने कोई जबरदस्त चुटकला सुना दिया. हो-मुमत्ताज आदि चक्ति दृष्टि से उसे देखते रहे ।

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सुबह के पाच बजे थे-सूर्य अभी नजर नहीं आ रहा था परन्तु पूर्वी गगन पर सिंन्दूर बिखर चुका था जो इस बात का प्रतीक था कि कुछ ही देर बाद आकाश पर उसका कब्जा होने वाला हे-जिस वातावरण में इस वक्त शीतलता…ठडक है-प्यारी लगने वाली हवा बह रहा है वही कुछ देर बाद गर्मी होगी ।"

" जव सूरज आसमान पर पहुच जाएगा तो…आग बरसेगी । लू चलेगी । वन्द कमरे मे अभी तक जनरल इबलीस के खर्राटे गूंज रहे थै । अपने शानदार और गद्देदार बिस्तर पर गहरी निद्रो को दबोचे पड़ा था वह…चैन की नींद ।

अचानक जनाब की नींद टूटी ।

उसने महसूस किया कि कोई तरल पदार्थ चेहरे पर "टप्प-टप्प" करके गिर रहा है ।

पहले आखें वन्द किए ही वह कुनमुनाया -अलसाए-से अदाज में जम्हाई ली-मुह खुलते ही एक बूद 'टप्प' से उसके हलक मेँ गिर पडी …उसने मुह चलाया-करवट ले ली I

अभी एक पल भी नहीँ गुजरा था कि बूद' 'टप्प' से उसके कान मे गिरी ।

. झुझलाकर इवलीस सीधा हो गया…एक बूद फिर उसके गाल पर

आ पडी…इस बार अर्ख-निद्रा में ही अपना हाथ चेहरे पर ले गया । किसी चिपचिपे तरल पदार्थ का अहसास किया उसने और पट

से अपनी एकमात्र आख खोल दी।

हलक से खुद ही बडी भयावह चीख उबली-बिस्तर से वह ऐसे उछल पड़ा जेसे अचानक ही वह गर्मं तबे में बदल गया हों…खुन से पुते चेहरे पर खौफ उत्तर आया…आईं कैप उसकी फूटी हुई आख से चिपक गया था…एकमात्र आख' कमरे की छत पर लटकी जन्मजात नंगी' लाश पर चिपकी रह गई…मलेरिया कै मरीज़ की तरह कांप रहा था वह ।

मुह से आवाज न निकली-घिन्धी बघ' गई ।

बेड के ठीक ऊपर-छत में फिक्स एक कुन्दे में रस्सी लटक रही थी…रस्सी पर लटक रही थी-समिरियन की एक लाश । नंगी…उल्टी.....पैर बधे हुए थे, सिर नीचे ।

मस्तक जख्मी था…जख्म से गाड़े खून की मोटी-मोटी बूदै टपक रही थीं ।

इवलीस की आख ने एक बूद का पीछा किया…उफ्फ-बेड के उस हिस्से पर खुन का एक बहुत बड़ा धब्बा था…सैनिक के बाल बेड की तरफ झूल रहे थे…बड्री ही डरावनी लाश थी ।

अचानक इबलीस धबराकर उछल पड़ा ।

किसी ने बहुत जोर-जोर से कमरे के बन्द दरबाजे पर दस्तक' दी थी-इवलीस ने खुद को सभाला', फिर पागलों. की तरह चीख पडा… “क. . .कोई हे…गार्ड. . गार्ड? "

किसी ने बाहर से कहा-"दावाजा खोलिए माननीय राष्ट्रपति I"

वह झपटा-कापते' हाथो से दरवाजा खोल दिया ।

एक साथ ढेर सारी चीखे गूज' गई ।

वे सभी जो दरवाजे के उस तरफ खडे, थे, इबलीस का लहुलहान चेहरा देखते ही चीख पडे…भयभीत होकर पीछे हट गए वे-इबलीस हलकफाड़ उठा…"क्यों चीख रहे हो?"

“स. . सर-आपका चेहरा ।"

"घबराकर इबलीस ने अपने चेहरे पर जो हाथ रखे तो खून में सन गए…घबराकर वह चीखा: खून…खून लाश-लाश कमरे में लाश है । पागलों की तरह चीखता हुआ वह हॉल में पंहुचा अभी _ वहा पहुचा ही था कि दो तरफ से उसी तरह लाश-लाश चीखत हुए कर्नल तोम्बो और गार्जियन भी वहा पहुचे-एकदूसरे का खून से पुता चेहरा देखकर तीनों ही चीख पडे ।

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सारे राष्ट्रपति भवन में अजीब हुडदग मच गया-हर व्यक्ति चीखता.-चिल्लाता इधर-उधर भाग रहा था…किसी की समझ में नहीं आया था कि माजरा क्या है7

हर तरफ आतक दहशत औंर भयभीत वातावरण । बहुत देर तक किसी' की समझ में बात नहीं आई कि यह सब क्या हुआ हे-क्यों हुआ है और किसने किया है…चारों तरफ हगामा, हाहाकार और खौफ ।।

तीनों के कमरे की एक ही अवस्था ।

बेड के ठीक ऊपर…उल्टी-नगी' लाश-मस्तक से टपकता खून l

सबसे पहले खुद को गार्जियन ने संभाला-सैनिकों के लिए आदेश जारी करने शुरू कर दिए उसने-लाशें उतारी गईं…मस्तक साफ किए गए ।

ब्लेड से मस्तक पर लिखा गया था…'विकास-विकास-विकास ।

इस नाम क्रो पढत्ते ही तीनों के होश उड गए…काप तो वे रहे ही थे जुबान तालू में जा चिपकी-जब कर्ता-धर्ता ही काप रहे थे तो सैनिकों की क्या हालत होनी थी?

तोम्बो ने आवाज निकालने का साहस किया-"इनकै माथे पर . तो "बिकास लिखा हे ।"

"हां I" गार्जियन बोला l

इबलीस कह उठा-"क्या क्या मतलब?”

"ल. . .लफ्ता है कि यह सब कुछ विकास ने ही किया है I"

"व विकास ने?” इबलीस के होश उड गए-“लेकिन वह भला . . ऐसा क्यों करेगा? "

गार्जियन ने कहा…" पता नहीँ लेकिन मैंने सुना है कि वह अपने शिकार के माथे पर ब्लेड से नाम लिखकर दुश्मनो की लाशें ऐसी हो अवस्था मे लटका देता है I"
 
“म . . मगर--ये तो हमारे सैनिक है दुश्मन तो रक्त तिलक बाले है !"

" यही वात तो समझ में नहीं आ रही है । व..... बिकास है कहा? "

इस बात का ध्यान आते ही तीनों एक साथ विकास के कमरे की तरफ़ दौड पडे…बन्द दरवाजे में घक्का मारा तो दरबाजा भडाक से खुल गया-तानों के मुँह से एक साथ चीख निक्ली ।

दो कदम पीछे हटे।।

पखा चल रहा था…उस पर लटकी एक लाश घूम रही थी-सारे कमरे में खून की वर्षा…स्री हो रही थी और बिस्तर पर बैठा एक काला ओर आबारा कुत्ता उन्हें घूर रहा था । वह जीभ निकालकर गुर्राया…जोर से भौंका और फिर दरवाजे पर झपट पडा । चीखत्ते हुए तीनों भागे…कुत्ते ने गार्जियन' की पैंट मुह में दबा ली-पैट फटती चली गई-गार्जियन की हालत बैरग-'वह मुह कै बल फर्श पर गिरा । कुत्ता उस पर झपटा

मगर तभी… धाय I

सारा भवन एक गोली की आवाज से गूज उठा…गोली कर्नल तोम्बो के हाथ में दवे रिवॉल्वर से निकली थी-कुत्ते के सिर मे धस गई-एक तेज गुर्राहट के साथ कुत्ता हवा ने लहराया-फर्श पर गिरा तडपा और ढीला पड गया ।

कर्नल ने अपने रिवॉल्वर से निकलते हुए धुएँ में फूँक मारी मानो फ़तह कर लिया हो ।

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पन्द्रह मिनट गुजर गए-हालाकि समझ में अभी तक किसी कै कुछ नहीं आया था किन्तु स्थिति पर काफी हद तक नियत्रण पा लिया गया । वे समझ नहीं पा रहे थे कि यदि वह सब कुछ बिकास ने किया … हे…तों क्यों? सबसे पहले बाथरूम मे मुंह धोने कर्नल तोम्बो पहुचा-उसने नल खोला -दोनों हाथ खोंच शक्ल में जोडकर नल के नीचे लगा दिए परन्तु अगले ही पल वह चीख पड़ा I उछल कऱ नल से दूर हो गया । खोंच मे गाढे काले रग का पानी आया था…उसी पानी को वह अब भी देख रहा था…र्टोंटी से निरंतर काला पानी निकल रहा था.

संगमरमर की सफेद वाश प्लेट रग से पुत गई ।

दरवाजा पीटा गया…" क्या हुआ कर्नल?”

उसने दरवाजा खोला । बदहबास से इबलीस और गार्जियन अंदर आए I

“न . . . नल से काला पानी निकल निकल रहा है । " कर्नल ने कहा ।

दोनों ने उस तरफ़ देखा…आखे हेरत से फेल गई-इबलीस नल की तरफ बढा…अभी समीप पहुचा ही था कि पानी के साथ ही प्लेट मे एक छोटा-सा साप का बच्चा गिरा । एक चीख के साथ इवलीस उछलकर दुर ।

काले रग में पडा. जाने. किस रग का साप का बच्चा पटट से जमीन पर कूदा…बिजली की-सी गति से दौड़ा-कर्नल ने झपटकर अपना भारी बूट उसके फ़न पर रख दिया ।

साप का बच्चा मचला-कर्नल ने उसका फ़न कुचल दिया । वे बाहर निकले-जिन टंकियों से पानी आ रहा था उन्है चैक करने का आदेश दिया…कुछ देर बाद सैनिकों ने रिपोर्ट दी कि टकियों . कै पानी में ढेर सारा काला रग मिलाया गया है । किं अचानक ही हाल में विकास की आवाज़ गूजी--"अभी तक तुमने कुछ नहीं देखा हे-पाच बजकर पैंतालीस मिनट होने दो हरामजादो!

इस सबसे भयानक तमाशा देखने को मिलेगा ।"

बस-आवाज बन्द । सनसनी सी दौड गई ।

चेहरे पर हवाईया लिए इबलीस कह उठा…“यह आवाज तो विकास की थी ।"

"ह्म ।"

" मगर वह बोला कहा से?"

"'वहा से ।" कहने के साथ ही गार्जियन ने एक फायर किया ।

टेवल के नीचे रखे एक छोटे-से टेपरिकांर्डर के परखच्चे उड गए I

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राष्ट्रपति भवन में मोजूद हर व्यक्ति पर एक-एक क्षण भारी गुजर रहा था-पाच बजते ही शुरू होने वाली घटनाओँ ने कम दहशत नहीं फैलाई थी…बडी ही अजीब और भयानक घटनाए इस तेजी कै साथ घटीं कि किसी को कुछ सोचने-समझने का मोका ही नहीं मिला । फिर उस टेप ने तो कमाल ही कर दिया l

हर दिमाग में एक ही सबाल--पौने छ: बजे क्या होने जा रहा हे?

दिल घक-धक कर रहे थे…धडी की सुइयां सरकती गई स्पष्ट कहा गया था कि पौने छ: बजे कुछ इतना भयानक होगा, जितना अब तक नहीं हुआ है I

राष्ट्रपति भवन के बाहर से पानी लाया गया ।

तीनों ने चेहरे धोए ।

पौने छ: बजने से पाच मिनट पहले ही सब सैनिकों को हॉल मे बुला लिया गया…सभी को एक पंक्ति' में खड़ा कर दिया गया…पक्ति से कोई पाच गज दूर तीनों बेचैनी से टहल रहे थे ।

हाथों में रिवॉल्वर ।

सव यह जानते थे कि कुछ होने वाला है ।

लेकिन क्या?

यह किसी को नहीं मालूम था ।

आखें हाल की एक दीवार पर नियुक्त घण्टे पर टिक गईं…पोने छ: बजने का इन्तजार करने के अलावा कर भी क्या सकत्ते थे ।मगर घडी. की सुईया थीं कि आगे बढ़ ही नही रही थी ।

हर प्रश्नवाचक चिहन बन गया था

ठीक पौने छ: बजे…"घडाम्-धडाम् ।

एक साथ दो कर्णभेदी विस्फोट ।

चीखें निक्ल गईं…पक्ति मे खड़े दो सैनिको` के जिस्मो के परखच्चे उड गए-उनफे दाएं-बाएं खडे चार सैनिक इस वक्त जख्मी अवस्था में फर्श पर पड़े तडप रहे थे ।

हाँल के संमपूर्ण फ़र्श पर खून, गोश्त के लोथड़े और हड्डियां बिखर गईं…उनकै बीच बारूद के सुगलते हुए कण भी थे…यह नहीं पहचाना जा सकता था कि वहां पड़ा गोश्त का कौन-सा लोथड़ा या हड्डी उनमें से कौन-से सेनिक की हे-सपूर्ण जिस्म चीथडों, की शक्ल में बिखर गए ।

बडा ही खौफनाक दृश्य था…भयावह वातावरण ,

अचानक दीवार पर नियूक्त घण्टे से विकास की आवाज आई. . "मुझे अफसोस है कि दूसरे की जेब में रखने के लिए मेरे पास दो से ज्यादा टाइम बम नहीँ थे, लेकिन आज कै सूरज के साथ ही मैं गद्दार इबलीस की सरकार के खिलाफ जग का ऐलान करता हूं और कसम खाता हूं कि यह जग तब तक जारी रहेगी-जब तक क्रि ये मुल्कुल विदेशियों के कब्जे मे हे-इस मुल्क को मैं आजादी दिलाकर रहूगा ।" . वस--आबाज बन्द l

चेहरे सुत गए…जिरम ठडे-हाथ पैर काप रहे थे…काटो तो खून… की एक वूद न निकले l

ॐॐॐॐॐ

वह लम्बा-चौड़ा हाँल ढेर-सारी ट्यूबलाइट्स के कारण चकाचौंध

था, हाल में करीब-सौ कुर्सियां पडी थीं--हरेक पर एक युवक-आखें मंच पर जमी र्थी-मंच पर चहलकदमी मस्ती हुई मुमताज स्पष्ट चमक रही थी -उसका चेहरा इस वक्त खिला हुआ था l सारे हॉल में उसकी आवाज गूंज रही थी…"न . . .नहीं-चिकास को कोई नहीं मारेगा…यह सन्देश रक्त तिलक के उन सदस्यों को भी पंहुचा दिया जाए, जो इस वक्त यहा नहीं हे…इडियन एजेण्ट स्क्वयार डबल एक्स फाइव वही कर रहा है, जो हम चाहते हैं…बल्कि यदि किसी को भी वह किसी किस्म के खतरे में घिरा महसूस हो तो उसकी भरपूर मदद. की जाए I" मुमताज के लहजे में जोश था…स्फूर्ती _थी और प्रसन्नता के भाव छुपा नही पा रही थी वह I
 
उसने पुन: कहा-“आज सुरज निक्लने से पहले ही राष्ट्रपति भवन में जो कुछ हुआ है उससे लगता है कि बहुत जल्दी ही हमारा पाक मुल्क जालिम इबलीस और विदेशियो के शिकजे से आजाद हो जाएगा… हमें एजेण्ट डबल एक्स फाइव का शुक्रिया अदा करना चाहिए I”

एक नही-मुमताज ने ऐसे अनेक वाक्य कहे ।

फिर उसने यह कहकर सभा खत्म कर दी कि चार-चार, पाच…पाच के जत्थे बनाकर युवक यहां से निकल जाएं-मच के क्रोने में मौजूद एक दरवाजा. पार करके वह कमरे में पहुची-तेज कदमों के साथ उस कमरे को पार करके एक अन्य कमरे में । यह वहीँ कमरा था, जहां लाकर विकास को कुर्सी पर बांधा गया था…

कमरे में दो दरबाजे थे…

एक वह जिससे मुमताज प्रविष्ट हुई थी, दुसरा दाई तरफ । अचानक दाईं तरफ से चीख की आबाज उभरी ।

बिजली को तरह उस तरफ़ घुमती` हुई मुमताज ने जेब से रिवाॅल्बर भी निकाल लिया…एक इन्सानी जिस्म लडखडाकल.. मुह' के बल फ़र्श पर गिरा ।

दरवाजे` के बीच हाथ में रिवाॅल्बर लिए मेजर हाशमी खडा था ।

फर्श पर गिरा व्यक्ति फुर्ती के साथ खडा हो गया ।

"तुम? " मुमताज आश्चर्य से उछल पडी ।

अपने गुलाबी होंठों पर मुस्कान बिखेरते हुए लम्बे लडके. ने कहा…“हां!"

'"त. . .तुम यहां कैसे?” मुमताज का चेहरा कठोर होता चला गया ।

एक कदम आगे बढकर मेजर हाशमी बोला…""गेलरी की ताफ़ पीठ किए मेंने इसे दरवाजे फे माध्यम से इस 'कमरे' में झाकत्ते देखा । एक ठोकर मे यह... ।"

"ये में क्या सुन रही हू?" मुमताज ने कठोर स्वर में पूछा ।

_ हल्की-सी मुस्कान कै साथ बिकास वोला…"ठीक सुन रही हैं ।"

"तुम कमरे झाक रहे थे?"

"बेशक ।"

" क्यों?"

"आपको देख रहा था I" लडके ने शरारत की…“बड्री सुन्दर लग रही थीं आप ।"

सुनकर मुमताज का चेहरा पहले से भी ज्यादा कठोर हो गया, बड़े ही सख्त लहजे में बोली…"मुझे इस किस्म की बातें बिल्कुल पसद नहीं हैँ मिस्टर डबल एक्स फाइव ।"

“मेरा नाम सिर्फ विकास है और इस वक्त मैं सिर्फ विकास हूं ।"'

"इस बात का मुझ पर कोई फर्क नहीं पडता. कि तुम्हारा नाम क्या है और तुम क्या हो…कान खोलकर सुन लो, यदि दूसरी वार तुमने बदतमीजी से भरा एक भी शब्द कहा तो गोली मारने में नहीं हिंचकुंगी l ये मत समझना. कि राष्ट्रपति भवन में आतक फैलाकर तुम हमारी हमदर्दी लूट लोगे ।"

"ओह-तो उस सबकी खबर यहा तक पहुच गई है?”

"सवाल यह है कि तुम यहां तक कैसे पहुचे? "

"बिल्कुल इजी…ज़ब मेजर साहब ने यह सोचा. कि कुर्सी पर कैद वे मुझे बेहोश कर चुके हैं तब मैं बेहोश नही हुआ था…वेहोश डॉक्टर के साथ मुझें भी कार में डालकर कर ले जाया गया, जहां तुम्हारे सरदार से हमारी टक्कर हुई थी-वहा से यहां तक का रास्ता मैंने देख लिया था I”

“ओह ।” मुमताज के मुंह से निकला।

उसने मेजर हाशमी की तरफ़ देखा…

मेजर के चेहरे पर हैरानी के भाव-कुछ और आगे बढ़कर उसने सवाल किया---" उस वक्त तुम लग तो बेहोश ही रहे. थे !"

विकास ने मुमताज पर कटाक्ष किया-""मेरे बारे में लोग अक्सर धोखा खा जाते है l"

मुमताज सकपका गई ।

बिकास की मुस्कराहट गहरी हुई l

"इस वक्त तुम यहा कैसे, आये?” सबाल करके मुमताज अपने मनोभाव छुपा गई ।

" यह तो आप जान चुकी है कि मानवता की मदद कै लिए मैं जगं का डंका वजा चुका हूं-- इस वक्त राजधानी की सडको पर सेमिनेरियन सैनिक पागल और नरभक्षी कुत्तो की तरह मझे तलाश कर रहे है-- फिलहाल उनसे बचने के लिए मुझे इससे बेहतर जगह नही सूझी ।"

" हूं !" व्यंग भरा स्वर---" सीधे और साफ शब्दों में यूं क्यों नही कहते कि पनाह मांगने आए हो ?"

इस बार विकास- के चेहरे पर कडबहाट उभर आई बोला-----…"'तुमने अभी मेरा नाम ही सुना है---ये नही जानतीं कि विकास चीज क्या है । पनाह देने बाली चीज को विकास कहते है । लेने वाली को नही…हां, यह सोचकर जरूर आया था कि शायद यहा इस्रानों से मुलाकात हो ।"

" मिस्टर विकास । "

"चीखो मत…गला खराब हो जाएगा राष्ट्रपति भवन मे सुरज निक्लने से पहले वाला हंगामा तुम्हारी.. उन गालियों का ज़वाब हे जो तुमने मुझे दी थी ---- इंसानियत नेकी और सच्चाई को जिंदा रखने के लिए लडने निकला हूं …डका बजाने के बद अब खुलेआम जग का एलान करने की तमन्ना है ।”

"हम समझे नही !”

" तुम्हें समझाने की जरूरत भी महसूस नहीं करता मै I"

मुमताज चुप रह गई…चाह कर भी कुछ बोल नही सकी वह--- गोल एव गोरे चेहरे पर उतेजना के कुछ ऐसे भाव थे कि उसकी जुबान तालु से चिपककर रह गई…न सिफ उसने पहली बार खुदको इस लडके से प्रभावित होते महसूस किये बल्कि यह भी महसूस किया कि इस बक्त उसके साथ उसने उचित व्यवहार नही किया । अचानक ही मेजर हाशमी ने कहा -"'अरे--अरे-आप तो नाराज हो गए मिस्टर विकास-मुमताज की तो आदत है चुहलबाजी करने की ---- इसकी तरफ से मैं माफी मागता हूं--आप बैठिए !"

" मै यहां बैठने नही आया हूं I"

"जी?"

"अगर आप चाहते हैँ कि आपकी आवाज़ सारी दुनिया में गूज उठे तो मुझे सिर्फ चार साथी दीजिए-याद रहे, विकास इस वक्त भी मदद माग नहीँ रहा, बल्कि दे रहा है I”

“जी हां-हम स्वीकार करते हैं, लेकिन अपना प्रोग्राम तो बताइए ।”

"मेरा सिद्घान्त बाते कम, काम ज्यादा हे…जों करना है सोच चुका हू…-यदि दे सकत्ते हैं तो हां कीजिए-चार ऐसे साथी जिनका निशाना अच्छा हो…मरने से डरते न हों I"

"रक्त तिलक का एक भी सदस्य मरने से नहीं डरता ।"

“नाम बताइए ।"

एक पल सोचने के बाद मेजर हाशमी ने कहा---" मै खुद, मुमताज , रहीम और सुल्तान l" . .

“मैंने युवती नहीँ युवक मागे हैं ।” विकास ने सपाट स्वर में कहा ।

मुमताज गुर्रा-सी उठी…“मैँ किसी युवक से कम नहीं हू I"

विकास मुस्करा दिया ।

ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ

"तुम ठीक सामने वाले पेड़ पर गन लिए बैठी रहोगी ॥" बिकास सबसे अन्त में मुमताज को समझाता हुआ बोला…“मै लगातार दस मिनट तक बोलता रहूंगा और तुम्हें उस वक्त तक किसी को भी अन्दर. . नहीं आने देना है, जब तक कि _ तुम्हें ग्रीन सिग्नल न दू।”

“ओ.के. ।" मुमताज़ बोली ।

बिकास ने उसके चेहरे से नजर हटाकर वारी-बारी से हाशमी, रहीम और सुल्तान को दैखकर…बोला.-“मेरे ख्याल से आप लोग' भी अपना काम बखूबी समझ गए होंगे?"

हाश्मी ने सबका प्रतिनिधित्व किया-"हम समझ गए हैं I"

“किसी को मेरी प्लानिग में कहीं कोई गडबडी… नज़र आ रही हो तो बोले I"

"नहीँ-सव ठीक हे-हम.तैयार हैँ!”

, विकास ने इजाजत सी ली -"तौ चले है ।"

"चलो l”

एक साथ सभी उठ लिए, अभी उठे ही थे कि कमरे में आबाज गूंजी --"रूको I"

विकास सहित समी ठिठक गए I

"स. . .सरदार. I" चारों कै मुह से एक साथ निकला l
 
बिकास की दृष्टि भी कमरे कै एक अंधेरे कोने मेँ लहरा रहे साए पर चिपक गइ…वह उसे वहुत ध्यान से देख रहा था, बिशेष रूप से इसलिए क्योंक्रि इसी रहस्यमय शख्स ने चैलेज देकर उसे परास्त कर दिया. था…दिल स्वय ही उसके लिए इज्जत और सम्मान से भर गया ।

वह प्रकाश में आया . . जिस्म पर वैसा ही लिबास था जैसा विकास ने पहली मुलाकात में देखा था…नकाब से झाककर आखों में वही सुर्खी, बिकास के ठीक सामने पहुचकर उसने कहा---"सबसे पहले हम तुम्हें मुबारकबाद देना चाहते हैं मिस्टर विकास ।"

“किस बात की?"

"रक्त तिलक का सदस्य बनने की ।"

"क्षमा करें-मैं रक्त तिलक का सदस्य नहीं हू और न ही बनना चाहता हू।"

"क्या मतलब?" सरदार जैसे चौंका हो ।

विकास ने पूरी गम्भीरता. कै साथ कहा-"मैं यहां सिर्फ इसानियत के नाते…रूका हू…आपफे या आपके आदमियों के कहने से नहीं, बल्कि… तब जब खुद मैंने महसूस किया कि मजलिस्तान में सचमुच इसानियत सिसक-सिसकर दम तोड रही है…यहां के पिसते हुए अवाम के लिए रूका हू मैं…और रूका हूं उन्हें समझाने के लिए, जिन्होंने बेगुनाह और भोली जनता पर जुल्म किए हैं I”

"रक्त तिलक का भी तो सिर्फ यही मकसद हैI"

"मकसद एक हो जाने से में रक्त तिलक का सदस्य नहीं बन गया I" विकास ने सपाट स्वर मेँ कहा…“तब आप पूछेंगे कि मैं यहा क्या कर रहा हुँ-मेरा ,जवाब सिर्फ ये है कि एक ही मजिल के राही यदि थोडी दुर साथ चल ले तो कोई बुराई. नही हे-मेरे दिमाग में कोई ऐसा काम करने की योजना वनी, जिसके लिए कम-से-कम पाच आदमियों .की जरूरत थी, सो यह सोचकर चला आया कि शायद एक ही मजिल कै राही होने के कारण हम यह काम मिलकर कर सकै ।"

"चलो-इसी बात की मुवारकबाद सही कि तुमने भी अपनी मजिल उसे ही वना लिया, जो हमारी हे-तुम भले ही न समझो, लेकिन हम तुम्हें अपना ही साथी समझते हैं ।”

"यह आपका अपना मसला है ।"

" तुम्हारी स्पष्टवादिता ने हमे प्रभावित किया ।"

" शायद आप कुछ कहने कै लिए उपस्थित हुए थे?"

" हां , उससे पहले हम तुमसे सिर्फ एक सबाल का जबाब चाहेगे ।"

“जरूर l”

"जो कुछ तुमने पिछली रात किया, उसका असर तव शुरू हुआ, जव सूरज निकलने ही वाला था और वह सब कुछ इतना असरदार... था कि सता अभी तक बौखलाइं हुई हे…हम तुमसे यह पूछना` चाहते बै क्रि जब तुम उन तीनों के ठीक ऊपर तीन लाशें टागकर आ सकते थे तो क्या तुम एक ही रात में उन तीनों का कत्ल नहीं कर सकत्ते थे?"

"बेशक कर सकता था ।"

“फिर किया क्यो नहीं? ”

"कोई लाभ नहीं था--जो प्राब्लम है, उसका हल उनके कत्ल नहीं हैं-र्क्नल तोम्बो और गार्जियन की जगह सेमिनार उनसे भी सख्त और समझदार लोग भेज सकता है…किसी भी मुल्क में गद्दारों की कमी नहीं होती…वे किसी दूसरे इबलीस को गद्दनशीं कर देत्ते-समस्या का हल तो सेमिनार को इस हद तक विवश कर देना है कि वह यहां से अपनी सेनाएं बापस बुलाए I"

“गुड-वेरी गुड…मुझे खुशी है कि तुम वस्तुस्थिति को समझते हो विकास-जोश में भरकर कई वार कर्नल हाशमी और मुमताज ने उन्हें कत्ल करने की बात कही, हमने हर बार इन्हें वही समझाया, जो तुमने कहा-आप लोगों को मिस्टर विकास से शिक्षा लेनी चाहिए ।"

अतिंम शब्द उसने अपने. साथियों से कहे थे I

वे चुप रहे-सन्नाटा छा गया ।

"शायद आपको आपके सबाल का जवाब मिल गया है? " विकास ने कहा ।

“बेशक-अव सवाल यह उठता है कि हमने ठीक उस समय ठहरने के लिए क्यों कहा, जब तुम लोग एक बडत महत्वपूर्ण अभियान पर जाने के लिए उठे थे…उसका जवाब भी लगभग वैसा ही है, जैसा तुमने हमारे पहले सवाल का दिया ।

"यदि उचित या सम्भव होता तो वह काम रक्त तिलक बहुत पहले ही कर चुका होता, जिसे करने के लिए तुम सिर्फ चार आदमियों के बूते पर निकल पडने के लिए तैयार हो…सच, तुम्हारे हौंसले और बहादुरी की दाद देनी होगी…उस काम को अजाम देने का सीधा अर्थ है सैनिकं की पूरी सेना से टकराना और पाच आदमियों के बूते पर इसके लिए तैयार होकर निकलना वाकई दिलेरी हे I"

"आप कहना क्या चाहते हैं?"

"सिर्फ यह कि यदि यह काम इतना ही होता तो अब तक हो चुका होता ।"

विकास ने कहा-"मैं आपकी वात में तब दम समझता जब आपने यह बात मेरी स्कीम सुनने के बाद कही होती ।"

“हम उसी समय पूरी स्कीम सुन चुके हैं, जब आप इन्हें समझा रहे थे ।"

"उसमे कहां कमी हे? "

“स्कीम में कहीं कमी नहीं है, बल्कि तुमने दुश्मन की ताकत को कम आका है ।"

"क्या मतलब? "

"दुश्मन के पास ऐसी ताकत है, जिसकी तुम्हें कोई जानकारी नहीं हे।"

"उस ताकत का नाम?"

"एक वख्तरबन्द गाडी I"

"आप कैसी बख्तरबन्द गाडी की बात कर रहे हैं?"

"डेढ़ इच मोटी स्टील की चादर वाली बाडी की चारों तरफ़ से वन्द एक गाडी विद्रोह की रात से पहले ही सेमिनार से मजलिस्तान आ चुकी थी…उस रात हुए नरसहार में इस गाडी ने भी भरपूर योगदान दिया था-यह बख्तरबन्द गाड़ी किसी भी ऐसे अक्सर के लिए लाई गई है, जबकि अन्य किसी भी तरीके से दुश्मन को काबू में न किया जा सके !!

"मैं उस ,बख्तरबन्द गाडी के बारे में विस्तार से जानना चाहूगा I"विकास वोला । ~

"वह किसी 'जोगे' के आकार की गाडी है…चारों तरफ से बन्द । पहले ही बता चुका हूं कि यह मजबूत स्टील की डेढ़ इच मोटी चादर की वनी हुई है-सारी चादर बुलेट प्रूफ है…जिसके कारण दस्ती बम तक उसे नहीं उडा सकते-उसमे कोई खिडकी नहीं है--चारों टायरों के साथ स्टील के ऐसे कबर हैं कि किसी भी कोण से फायर आदि करके किसी टायर को पक्चर नहीँ किया जा सकता-टायरों का सिर्फ वही हिस्सा कवर्स से बाहर रहता है, जो सडक पर होता है I"

"विकास ने पूछा…“ड्राइवर के लिए विण्ड स्कीन तो है?”

"नहीं I"

"फिर ड्राइवर गाडी… चलाता किस तरह हे?"

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"बिण्ड स्क्रीन के स्थान पर बुलेट प्रूफ लोहे की ऐसी जाली प्रयुक्त की गई है, जिसके माध्यम से गाडी के अन्दर बैठा ड्राइवर अपने सामने सडक या पूरी नजर रखता है किंतु बाहर से ड्राइवर को या ड्राइविंग कक्ष को नहीं देखा जा सकता जाली में कुछ कटाव ही ऐसे हैँ…मेरे ख्याल से तुमने ऐसे कटाव वाली साधारण जालिया तो देखी ही होंगी जिनके एक तरफ़… से दूसरो तरफ आसानी से देखा जा सकता है मगर दूसारी तरफ़ से पहली तंरफ बिल्कुल नही l"

"देखी हे ।"

" बस-विण्ड स्कीन के स्थान पर वैसी ही जाली लगी है ।"

" ओह !"

"अन्दर से गाडी दो हिस्सों में बटी हुई है…ठीक वैसे ही अन्दाज में जैसे पुलिस वेन आदि बटी होती हैँ…एक बहुत छोटा हिस्सा दूसरा बडा हिस्से को हम ड्राविग कक्ष भी कह सकत्ते हैं-ये पार्टिशन भी स्टील की चादर से ही किया गया है ।"

"और दूसरा हिस्सा? "

" बह बडा है-स्टील की आठ कुर्सिंया गाडी के साथ फिक्स हैं ,तीन दाईं दीवार की तरफ-तीन वाई…एक पीछे की तरफ और एक बीच में कुर्सिंयों का रुख वेन की दीवारों की तरफ़ है यानी कुर्सी पर बेठे व्यक्ति का चेहरा वेन की दीवार की तरफ़ होता है-सबसे ज्यादा कमाल की बात यह है कि वेन के दरबाजों को सिर्फ अन्दर से खोला जा सकता है, बाहर से नहीं i"

"इसका क्या मतलब? "

“दोनों हिस्सों में प्रविष्ट होने के लिए वेन मेँ दो दरवाजे हैं… दरवाजे में नम्बर लॉक लगे होते हैं और लॉक को खोलने या वन्द करने का सिस्टम सिर्फ अन्दर की तरफ से हे…अन्दर से भी लांक्स को सिर्फ वे ही खोल सकता हैं जो लॉक नम्बर जानते हैं-ड्राइविंग कक्ष के दरवाजे का लॉक नम्बर अलग है और दूसरे हिस्से का अलग-दूसरे हिस्से का लॉक नम्बर सब जानते हें जबकि ड्राइविंग कक्ष का सिर्फ ड्राइवर । "

“वेन का इस्तेमाल वे किस समय पर किस रूप में करते हैं?"

"यदि अपने कक्ष में बैठा ड्राइवर डैशबोर्ड पर मोजूद एक लाल रग का बटन दबा दे तो वेन के अगले हिस्से में से एक साथ चार गनों की नाले बाहर आ जाती हे…ये चारों ही मशीनगने आटोमेटिक हैं जो बटन दवाकर बाहर निकलते ही अन्धाधुन्ध फायरिंग शुरू कर देती है!"

" ओह ।"

"दूसरे हिस्से मेँ प्रत्येक कुर्सी के हत्थे पर ऐसा ही लाल बटन है, जिसके दबते ही आठ आटोमेटिक गने एकदम बाहर निकलकर फायरिंग शुरू कर देती हैं…तीन गने बाई तरफ़ निकलती .. हैं-तीन दाई तरफ, एक पीछे और एक छत में ।”

"छत में . . .?”

" किसी हैलीकॉप्टर आदि क्रो मार गिराने के लिए। ।"

" ओह। "

"इस तरह जब यह बख्तरबन्द, गाडी निकलती है तो अपने चारो तरफ़ साक्षात मौत बरसाया करती है…तुम समझ ही सकते हो कि अवसर पडने. पर वेन पूरी-की-पूरी सेना के बीच घुकसर तहलका मचा सकती है और सेना इसका, बाल भी बांका' नहीं कर सकती-वेन के दोनों हिस्सों मे कुल मिलाकर नौ आदमी अन्दर होते हैँ…ड्राइवर का काम तो ड्राविंग है ही, शेष आठ आदमियों का काम अपनी-अपनी. मशीनगनों को फूल रखना है ।"

"क्या वेन के बड़े हिस्से मे बैठा व्यक्ति बाहर देख सकता है?"

"सिर्फ तब जबकि गनों की नाले… बाहर निकली हुईं हों ।"

"इसका क्या मतलब?"

“गनों की नालों में कही मिनी पेरिस्कोप लगे हुए हैं…उनका सम्बन्ध अन्दर मौजूद एक बहुत बडी स्कीन से है-एक ही स्कीन पर अलग-अलग आठ दृश्य चमकते हैं ।"

"जो लोग अन्दर बद होते हैं वे आक्सीजन कहा से लेते हैं?”

"यह बात हम आज तक पता नहीं लगा पाए हे I"
 
कई पल तक सन्नाटा छाया रहा', जेसे अचानक ही सब उस वेन के बारे में सोचने लगे हों…फिर एकाएक विकास ने ही पूछा-"हमारे उस काम से इस वेन का क्या सम्बन्ध?"

"जैसाकि हम पहले ही बता चुके हैं कि इस वेन का इस्तेमाल वे साधारण स्थिति में नहीं करते हैं, परन्तु एक तो ये लोग पहले ही तुमसे बुरी तरह खौफ़ खाए हैं, दुसरे` तुम काम भी कुछ ऐसा करने जा रहे हो, उन्हें बुरी तरह बौखला देगा…अतः तुम्हें समाप्त करने के लिए बहा वैन पहुँच जाएगी-उसकै बाद की कलप्ना तुम खुद कर सकते हो… जरा सोचो ? क्या तुम्हारी वह मोर्चाबन्दी कुछ कर सकेगी, जो तुम सोच रहे हो !"

"इसका मतलब तो यह हुआ कि यह बख्ताबन्द गाडी. आगे भी हमें परेशान करती रहेगी !"

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“सिर्फ परेशान ही नहीं करती रहेगी, बल्कि नगी तलवार की तरह हमारी गर्दन पर लटकती रहेगी I"

"तो फिर क्यों न सबसे पहले उस बेन को नष्ट करें? "

सरदार ने कहा…"यदि हम -वेन को नष्ट करने के स्थान. पर उसे अपने कब्जे में लेने की कोशिश करे तो क्या बुराई है?"

विकास की आखें चमक उठी--यह सोचकर एक पल के लिए उसे अफसोस-सा हुआ कि यह विचार पहले ही उसके दिमाग में क्यो नहीं आया…अभी वह विचारों के सागरों में ही था कि सरदार ने कहा-“उसे कब्जे में करने के बाद हम न सिर्फ वही काम बडी आसानी से कर सकते हैं, जो तुम करने जा रहे थे, बल्कि उसके बाद के भी बहुत-से काम कर सकते हैँ…सेमिनेरियन सेनाओं से हम एक प्रकार का युद्ध. का सकते हैं ।"

"वेन कहां है? " विकास ने पूछा ।

विकास का प्रश्न सुनकर सरदार समझ गया कि विकास ने फैसला कर लिया हे…कदाचित्त इसी वज़ह से सरदार. की आखें' चमकने लगीं । जैसे वह ये मानता हो कि जिस काम का संकल्प विकास ले लेता हैं, उसके कामयाब होने में कोई सन्देह नहीँ रहता I

उसे सोच मेँ ही देखकर विकास ने एक बार फिर सवाल किया ।

"इतना तो तुम समझ ही सकते हो कि ऐसी नायाब वेन को वे बड़े सुरक्षा प्रबंधों में रखते होंगे ।” सरदार ने कहने के लिए भुमिका तैयार करनी शुरू की ही थी कि बिकास बोला…“आप जो भी कोई हैं, क्षमा करे…मैं लम्बी बातचीत पसन्द नहीं करता-कृप्या संक्षेप में उसके सुरक्षा प्रबन्ध बताए ।”

सरदार की आखें कुछ इस तरह चमकी, जैसे नकाब के पीछे छुपे होंठ मुस्कराए हौं और फिर वह सचमुच सक्षेप में बिना किसी प्रकार की भूमिका बांधे बताने लगा…"जिस स्थान पर बैन को रखा गया है, उस स्थान का नाम है-"इमामुद्दीन का किला'-जैसा कि नाम से ही जाहिर . है, वह एक किला हे-आज से तीन सो साल पहले यहां इमामूद्दीन नाम का बादशाह हुआ…यह किला उसी ने बनवाया था, और चूकि' वह' स्वय अपने परिवार के साथ इस किले में रहता था, इसलिए उसे …अत्यधिक सुरक्षित बनाया गया…इत्तना ज्यादा कि गार्जियन और कर्नल तोम्बो ने वेन जैसी खतरनाक चीज को उसी में रखना ज्यादा मुनासिब समझा ।"

“किले की स्थिति? ”

"मजबूत लाल पत्थरो का बना किला पाच' मजिल' ऊचा' है हालाकि किले की दीवारों में वहुत-सी खिडकिया.' है, किंन्तु किसी भी खिडकी के ऊपर कोई 'छजली' नही हे, अत: सभी दीवारे अपने शीर्ष तक बिल्कुल सीधी और सपाट चली गई हैं, यानी किसी भी ढग' से उस पर चढने. की बात सोचकर हमें समय नष्ट नहीं करना हे-क्रिले के चारों तरफ दीवारों के सहारे-सहारे बाहर की तरफ एक तीस गज गहरी और दस गज चौडी. खाईं है…खाई में आज भी पानी भरा है । उस पानी में मगरमच्छ जैसे अनेक समुद्री जीव हैं, जो इसान क्रो देखते ही चट कर जाते हैँ…किले की सभी दीवारों में कुल मिलाकर सैकडों. खिडक्रिया हैं-आजकल प्रत्येक खिडकी. पर एक सशस्त्र सेनिक तैनात है-किले की तीसरी, चौथी और पाचवी' पजिल' पर मौजूद कई सैनिकों के पास दूरबीन भी हैं, जिनकी मदद से किले के चारों तरफ दूर-दूर तक नजर रखी जाती है I"

"दरबाजा . . . ?"

"सिर्फ एक दरबाजा हे…लोहे की एक बारह गज लम्बी…पाच' गज चौडी और तीन इच' मोटी चादर क्रो ही हम दरवाजा कह सकते. हैँ…दीवार में इस्री माप का एक गैप है…-ज्यादातर लोहे की यह चादर उसी मेप पर फिक्स रहती है, यानी दरबाजा बन्द रहता है ।"

"दरवाजे और खाई के इस पार तक कोई पुल बना होगा?"

"नहीं I"

"क्या मतलब? "

"दरवाजा खुलने का मतलब ही खाईं के इस पार से किले तक पुल बन जाना है ।"

"मै समझा नहीं ।"

"लोहे की उस चादर को हम किले के दरवाजे का बहुत बड़ा किबाड़ कह सकत्ते हैं…इस किंवाड़ के कब्जे दरवाजे के फर्श में हैं और अन्दर की तरफ़ से एक… 'चक्री' घुमाने पर दरवाजे के शीर्ष से. लोहे का यह भारी और विशाल किवाड़ खाई की तरफ़ खुलने लगता है । चक्री घुमाए जाने के अनुपात में ही किबाड नीचे की तरफ झुकने लगता है । किवाड़ के शीर्ष वाले दोनों सिरे दो मोटी-मोटीं जजीरों से सम्बद्ध हैं । इन जजोरों' का सम्बन्ध चक्री से है, यदि चक्री को दाईं तरफ घुमाया जाए तो दो बहुत बड़े-बड़े वेलनों में लिपटी जजीर' उधडने लगती हे, उसी अनुपात जजीरों पर झूलता हुआ किवाड़ खाई की तरफ़ बढता है----

उधर, वेलनों में लिपटी ज़जीर' खत्म हुई और' इधर किवाड़ का शीर्ष खाई के इस तरफ़ आ टिकता हे-अब यही किवाढ़ खाई कै ऊपर एक मजबूत पुल का काम करता हे-यानी कोई भी वस्तु इधर से किचाड़ पर गुजरते. हुए किले के अन्दर ले जाई जा सकती हे या किले से खाई के पास लाई जा सकती हे…चक्री को बाई तरफ़ घुमाने पर जंजीरे वापस बेलन में लिपटने लगती हैं और पुल बनी लोहे की चादर ऊपर उठती हुई अन्त में एक किवाड़ का रूप धारण करके किले के दरवाजे को बन्द कर देती है "

"यानी लोहे की यह चादर ही, जो किले का दरवाजा बन्द होने पर किवाड़ है, खुलने पर पुल बन जाती है--- दरबाजा बन्द रहेगा तो पुल भी नहीं होगा , दरवाजा खुलेगा तो पुल खुद ही बन जाएगा ।"

"तुम सही सिच्युएशन समझ गए हो I"

"लोह की इस चादर से सम्बन्धित चक्री क्रो क्या एक ही व्यक्ति दाएं…बाएं घुमा देता है?"

. "नहीँ… दो व्यक्तियों को लगना पडता हे…चक्री का आकार ठीक वेसा ही है जैसा कुट्टी काटने वाली… मशीन का होता है-चक्री में एक हत्था है-एक व्यक्ति हत्थे कै इस तरफ़ रहता है दूसरा, उस तरफ । यानी जब वे चक्री घुमाते हैं तो उनके चेहरे एक-के सामने होते है I”

“आपने कहा कि किले का दरवाजा ज्यादातर बन्द रहता है---इसका क्या मतलब-क्या किले के अन्दर. मोजूद सैनिको और बाहर के सैनिकों. के साथ.. आवाजाही नही लगी रहती?”

"नहीं ।”

"क्या मतलब-ऐसो स्थिति में किले के अन्दर मोजूद सैनिकों की स्थिति क्या कैदियों जैसी नहीं हो गई?"

“बेशक-उनकी स्थिति कैदियों जेसी ही है, लेकिन ऐसा बे महसूस नहीं कस्ते, क्योंकि किले के अन्दर पूरा एक कस्वा-सा बना हुआ है…प्रत्येक सैनिक के रहने. के लिए अलग इन्तजाम है-प्रत्येक आठ घण्टे मे ढाई सो सेनिक किले के अंदर पहरे पर रहते हैँ-और किले में मौजूद सैनिकों की कुल सख्या आठ सौ के करीब है-अतः एक सेनिक क्रो सिर्फ आठ घण्टे डयूटी पर रहना पडता, है ll”

“उनका खाना आदि?”

"सभी के लिए एक बहुत बडा. 'मैंस' है l”

“रसद आदि तो अन्दर जाती ही होगी?"

उधर, वेलनों में लिपटी ज़जीर' खत्म हुई और' इधर किवाड़ का शीर्ष खाई के इस तरफ़ आ टिकता हे-अब यही किवाढ़ खाई कै ऊपर एक मजबूत पुल का काम करता हे-यानी कोई भी वस्तु इधर से किचाड़ पर गुजरते. हुए किले के अन्दर ले जाई जा सकती हे या किले से खाई के पास लाई जा सकती हे…चक्री को बाई तरफ़ घुमाने पर जंजीरे वापस बेलन में लिपटने लगती हैं और पुल बनी लोहे की चादर ऊपर उठती हुई अन्त में एक किवाड़ का रूप धारण करके किले के दरवाजे को बन्द कर देती है "

"यानी लोहे की यह चादर ही, जो किले का दरवाजा बन्द होने पर किवाड़ है, खुलने पर पुल बन जाती है--- दरबाजा बन्द रहेगा तो पुल भी नहीं होगा , दरवाजा खुलेगा तो पुल खुद ही बन जाएगा ।"

"तुम सही सिच्युएशन समझ गए हो I"

"लोह की इस चादर से सम्बन्धित चक्री क्रो क्या एक ही व्यक्ति दाएं…बाएं घुमा देता है?"

. "नहीँ… दो व्यक्तियों को लगना पडता हे…चक्री का आकार ठीक वेसा ही है जैसा कुट्टी काटने वाली… मशीन का होता है-चक्री में एक हत्था है-एक व्यक्ति हत्थे कै इस तरफ़ रहता है दूसरा, उस तरफ । यानी जब वे चक्री घुमाते हैं तो उनके चेहरे एक-के सामने होते है I”

“आपने कहा कि किले का दरवाजा ज्यादातर बन्द रहता है---इसका क्या मतलब-क्या किले के अन्दर. मोजूद सैनिको और बाहर के सैनिकों. के साथ.. आवाजाही नही लगी रहती?”

"नहीं ।”

"क्या मतलब-ऐसो स्थिति में किले के अन्दर मोजूद सैनिकों की स्थिति क्या कैदियों जैसी नहीं हो गई?"

“बेशक-उनकी स्थिति कैदियों जेसी ही है, लेकिन ऐसा बे महसूस नहीं कस्ते, क्योंकि किले के अन्दर पूरा एक कस्वा-सा बना हुआ है…प्रत्येक सैनिक के रहने. के लिए अलग इन्तजाम है-प्रत्येक आठ घण्टे मे ढाई सो सेनिक किले के अंदर पहरे पर रहते हैँ-और किले में मौजूद सैनिकों की कुल सख्या आठ सौ के करीब है-अतः एक सेनिक क्रो सिर्फ आठ घण्टे डयूटी पर रहना पडता, है ll”

“उनका खाना आदि?”

"सभी के लिए एक बहुत बडा. 'मैंस' है l”

“रसद आदि तो अन्दर जाती ही होगी?"

“क्या? "

" बाद में बताऊंगा…आप आगे कहिए-किले के अन्दर क्या स्थिति है !"

सरदार कै अतिरिक्त बिकास की तरफ देखती हुई हर आख' में आश्चर्य के भाव उभर आए…

नकाब में छुपे सरदार के होंठ मानो एक बार फिर मुस्कराने के अन्दाज मे फैले, बोला-" किले के अदर चप्पे-चप्पे पर सैनिक तैनात रहते हैं…वेन एक हाल में खडी रहती है और वह हाँल किसी जमाने में बादशाह इमामुद्दीन का दीवान-ए-खास था ।। दीवान-ए-खास के बाहर गैलरी में हमेशा दो बटालियनें पडी, रहती हैं, जो किसी अन्य सेनिक को दीवान-ए-खास में नहीं जाने देतीं-वैन दीवान-ए…खास के बीचो वीच खडी रहती हे-हॉल के अन्दर ही उसके चारों तरफ़ बीस सैनिक चौबीस घण्टे तैनात रहत्ते हैँ-उनका मुह वैन की तरफ ही होता हे-इत्तने इन्तजाम के बाद भी यदि कोई वेन तक पहुच जाए, , तब भी वैन क्रो वहां से हिलाया तक नहीं जा सकता I"

" क्यों ?"

"क्योकि वेन का ड्राइवर हमेशा वेन के अन्दर ही रहता है ।"

“क्या मतलब ?”

“ड्राइविग कक्ष ही तुम उसका 'रेजिडेंशल रूम' समझ सकते हो, दरवाजे के अन्दर से लॉक करके वह हमेशा उसी में पडा रहता हे ।"

"कमाल है !”

"जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है, दरवाजे को बाहर से नहीं खोला जा सकता-अत: उसे खोलना ड्राइवर की इच्छा पर निभर है I”

"क्या वे अन्य आठ व्यक्ति भी वेन के दूसरे हिस्से में ही रहते है ?"

“नहीं I"

"क्यो-मेरा मतलब फिर ड्राइवर ही क्यों रहता है ?"

"सुरक्षा की खातिर-जरा सोचो…ड्राइविंग कक्ष में ड्राइवर की मौजूदगी से समस्या कितनी जटिल हो गई है I हालाकि ऐसा कोई रास्ता ही सुझाई नहीँ देता, जिसे अपनाकर बिना शोर शराबे के वेन तक पहुचा जा सके-किले में घुसने से दिवान-ए-खास. तक पहुचने में ही सैकडों जगह गढबड होने की सभावना हे…गडबड़ होते ही ड्राइवर न सिर्फ दरवाजा न खोलंने का पक्का निश्चय कर लेगा, बल्कि अगले हिस्से से चार गनें भी बाहर निकाल देगा इतना सब कुछ होने के बावजूद भी यदि इस अंसम्भव वात को मान लिया जाए कि हम वैन तक निशब्द पहुच गए फिर भी जब तक दरवाजा लाक किए अन्दर पडा. है हम ड्राईविग कक्ष पर कब्जा नही कर सकत्ते और.......

जब तक ड्राइविंग कक्ष पर कब्जा नहीं होगा, तब तक हमारी इच्छा से बैन एक इच नहीं हिंलेगी।"

“सचमुच-समस्या जटिल हो गई है I" ~

"अब यदि हम यह भी मान ले कि ड्राइविंग कक्ष में हममे से कोई पहुच जाता है; तब भी हम ज्यादा-से-ज्यादा यह कर सकेंगे कि बैन को किले के अन्दर दोड़ा सके…किले के अन्दर मार-काट भी मचा सकते हैं, किंतु वेन को किले से बाहर नहीँ निकाल सकते ।”

“किले के दरवाजे पर तैनात सैनिकों को यह आदेश दिया गया है कि यदि वे दीवाने-खास की तरफ़ से फायरिंग की आवाज सुने या अन्य कोई ऐसी गडबड… महसूस करे, जिससे कि वेन को खतरा महसूस हो, तो वे सबसे पहला काम दस्ती बमों से किले के दरवाजे को उडा कर करेगे-लोहे की चादर के उडत्ते ही पुल खत्म और वेन खाई को पार नहीं कर सकेगी-यानी वेन किले में कैद…अब वेन पर. कब्जा… करने कै बाद हम भले ही किले के अन्दर कुछ भी कर दे, किन्तु बाहर नहीँ निकल सकते ।”

“गुड !"

"दीवान-ए-खास की तरफ कम…से-कम उस वक्त भी सन्नाटा नहीं छाया रह सकता, जबकि हममें से कोई वैन स्टार्ट करके आगे भी बढा दे…उसके स्टार्ट होते ही सैकडों गने गरज उठेगी I"

"क्या वह कम्बख्त ड्राझ्वर-खाना-पीना और नित्यकर्मो से फारिग होने का काम भी उसी कक्ष मेँ करता है?"

"नहीं I"

"फिर....?" विकास की आखों में चमक उत्पन्न हुई ।

"खाना तो खैर उसका वेन में ही पहुंच जाता है, लेकिन हां चौबीस घण्टे में एक बार नित्यकर्मों से फारिग के लिए वह वेन से बाहर जरूर निकलता है-दीवान-ए-खास में ही एक तरफ़ उसके नित्यकर्मों से फारिग होने के इन्तजाम किए गए हैं…सारे कार्यों में उसे तीस मिनट लगते हैं-इन तीस मिनटों के लिए एक सेनिक ड्राइविंग कक्ष में चला जाता है, मगर वेन का दरवाजा खोले रहता हे-क्योंकि दरवाजा बन्द होते ही आँटोमेटिक लॉंक को बन्द हो जाना है और कम-से-कम वह सेनिक लॉक नम्बर नहीं जानता है …उसे निर्देश है कि यदि उन तीस

मिनटों में यानी उसके अन्दर रहते कोई गडबड हो तो वह बेहिचक दरवाजा वन्द कर ले…स्थिति वही हो गई.........

यानी ड्राईविंग कक्ष का दरवाजा नहीं खुल सकता…अन्दर से सेनिक भी नहीं खोल सकता, क्योंकि स्वयं उसी को लाक नम्बर नहीं मालूम. है…वह तभी खुलेगा जव ड्राइवर बाहर से उसे नम्बर बताए और ऐसा तव होगा, जब स्थिति उनके नियत्रण में होगी I”

"बडे .कडे इन्तजाम हैं I” मेजर हाशमी कह उठा ।

मुमताज बोली.."ऐसा लगता हे…जेसे इस वेन` को अपने कब्जे में कभी किया ही नहीं जा सकता ।”

"फिर भी-यह काम हमें करना ही है ।" विकास ने कहा ।।

" काम नामुमकिन की हद तक मुश्किल है ।" सरदार चहलकदमी करने लगा-"मगर इस` वेन का हमारे कब्जे में आने का सीधा अर्थ हमारी जीत है-वेन का खासियत से ही 'जाहिर है कि फिर हम इस सरकार के बूते की चीज़ नहीं रहेंगे. हमारा बाल भी बांका नहीं होगा, जबकि हम सारे मुल्क में तहलका मचा सकते हैं-वेन पर कब्जा होने का मतलब ही मुल्क का आजाद होना है I”

"वेन पर कब्जा होगा I" विकास का दृढ स्वर I

“लेकिन कैसे? "

“अच्छा एक बात बताइए, जब अचानक वेन` की जरूरत पडती है तो. किले के अन्दर. और वाहर आसपास क्या होता है?”

“हम समझें नहीं_।"

"माना कि हम वही काम करते हैं, जो करने जा रहे थे…आपने बताया कि दस मिनट से पहले वहा' वैन पहुच' जाएगी-मेँ` यह पूछना चाहता हूं कि कैसे?"

“स्टेशन पर तुम्हारा कब्जा होते ही खबर राष्ट्रपति भवन में पहुच जाएगी-वहां से वायरलेस द्वारा, एक ही क्षण में किले के अन्दर मेजर, मुकाम्बो के पास…मुकाम्बो तुरंत बैन के रवाना होने का हुक्म जारी करेगा-कक्ष में बैठा ड्राइवर बैन स्टार्ट कर देगा-वेन के वड़े हिस्से का पिछला दरवाजा खुला ही रहता. वे आठों सैनिक, जिनकी डयूटी वेन के चड़े हिस्से में रहती है, चलती हुई वेन मे चढने के अभ्यस्त हैं…वेन कै दरवाजे, तक पहुचते-पहुचते सभी वेन के अदर होंगे और वेन वख्तरबन्द गाडी. में बदल चुकी होगी-उधर जब तक वैन किले के दरवाजे तक पहुचेगी, तब तक चक्री पर तैनात सेनिक खाईं पर पुल वना चूकेंगे-किले से स्टेशन तक का रास्ता पाच मिनट से ज्यादा का नही.है…मगर. . . I"

"मगर क्या?"

"कल तुम बाहर कोई. उद्दम मचाकर वेन क्रो किले से बाहर निकालने की सोच रहे हो-मेरा मतलब यदि तुम यह सोच रहे हो कि वेन पर किले से बाहर कब्जा किया जाए तो मैं उसे मूर्खतापूर्ण बिचार कहूंगा क्योकि वेन के बख्तरबंद हो जाने के बाद उस पर कब्जा करने की बात सोचना ही मूर्खता है ।"
 
~ "नही…वैन पर कब्जा उसी समय किया जाएगा जब वह दीवान-ए-खास में खडी होगी ॥"

मुमताज के मुह से स्वय ही शब्द निकले-“मगर कैसे?"

" उसके लिए सोचना होगा ।" सरदार ने कहा--" योजना बनानी होगीं और यह सबसे कठिन काम हम तुम्ही को सौपते हैं विकास, योजना तुम्ही को बनानी हैं। "

"मैं सोच चुका हूं ।"

"क..... क्या? " एक साथ सभी के मुह से हैरत मे भरा स्वर निकला ।

" हा ।" लडके के गुलाबी होंठों पर बडी ही प्यारी मुस्कान उभरी---"सिर्फ सोच ही नहीँ चुका हूं बल्कि अपने दिमाग में सारी स्कीम भी बना… चुका हू ।"

सरदार का चक्रित स्वर…"इतनी जल्दी…सुरक्षा व्यवस्थाए सुनते ही सुनते?”

"यदि मेरे दिमाग मे कोई तरकीब आती है तो एकदम आ जाती है और यदि नहीं आती है तो बिल्कुल आती ही नहीँ हे…फिर भले ही मैं लाख दिमाग दोडाता रहू…इसलिए तो मेरे नम्बर एक गुरु मुझे दिमाग से पैदल कहते.. हैं ।"

"नम्बर एक गुरु' ”

"भारतीय सीफेट सर्विस का तुरुप का इक्का-यानी विजय दी ग्रेट । ”

" ल लेकिन अपनी योजना हमे भी तो बताओ ।"

विकास ने बिना किसी भूमिका के योजना बतानी शुरू कर दी ।वे ध्यानपूर्वक सुनते रहे-विकास उन्हें ज्यों-ज्यों सुनाता रहा । त्यों-त्यों उनकी आखें हैरतवश फैलती चली गई-सरदार की आखों मे उसके लिए प्रशंसा के भाव थे…योजना का अन्त सुनते सुनते मुमताज उसके कामदेव जैसे चेहरे को यू देखने लगी जैसे उससे कभी नजर हटाएगी ही नही I . .

ॐॐॐॐॐ

सूरज निकलने मे पहले ही शुरू होने वाली घटनाओँ के कारण राष्ट्रपति भवन में जो अफ़रा-तफरी-बौखलाहट-भय एव दहशत का वातावरण बना था, उस पर काफी जल्द ही काबू पा लिया गया I इसके पीछे टाइम बम के जरिए दो सैनिक्रो के परखच्चे उडाने के वाद अन्य ,किसी किस्म की घटना न घटना भी काफी हद तक एक वज़ह थी ।

हालाकि आतंक अभी तक भी लगभग हर चेहरे पर व्याप्त था ।

स्वयं इबलीस, तोम्बो और गार्जियन भी खुद को तनाव से मुक्त नहीँ कर पा रहे थे-रह-रहकर उनकी आखों के सामने नगी लाश से टकपता खून नाच उठता तो कभी भौंकता झपटता हुआ कुता । कभी काला रंग तो कभी दो सैनिकों के उडते. परखच्चे । फिर भी-वे तीनों सुरक्षा व्यवस्थाएं कडी करने में जुट गए । राजधानी से बाहर जाने बाली हर सडक ब्लाक कर दी गई । रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर इतना कडा. पहरा था कि जिस पर भी हल्का…सा सदेह होता उसे. ही गिरफ्तार कर लिया. जाता…राजधानी के चप्पे-चप्पे पर तैनात सैनिकों को सतर्क कर दिया गया । गश्त बढा दी गई । पहले जहां पहरा नहीं था, वहां भी लगा दिया गया ।

प्रत्येक सैनिक को अदेश थे कि वे विकास को देखते ही गोली से उडा दें-ऐसा वातावरण था कि जैसे बहुत सारे जगली भेडिए. ज़ंगल मेँ आदमी को महसूस करके आदमी की तलाश में निक्ल पड़े हों ।

किले में सूचना पहुचा दी गई थी ।

बख्तरबन्द गाडी को हर पल तैयार रहने के लिए कहा गया था ।

… अपने-अपने हिस्से में आए कामों क्रो निपटाकर जब वे तीनों एक कमरे मे इकट्ठे हुए तो दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया गया ।

दरवाजा. गार्जियन ने बन्द किया था…उसकै घूमते ही कर्नल तोम्बो ने

पूछा…“कहां से_आ रहे हो?"

“टेलीफोन एक्सचेंज से I"

"क्या रहा?"

~ "समी लाइने टेप करा दी गई हैं…जैसे ही किसी कॉल पर हमारे काम की कोई बात शुरू होगी-वार्ता टेप कर ली जाएगी-टेप तुरन्त ही मेरे पास पहुच जाएगी ।"

कुर्सीं पर बैठते हुए गार्जियन ने, पूछा-"तुम्हारे काम का क्या रहा? "

"अपनी तरफ से सबको अलर्ट कर आया हूं ।"

“हद ही हो गई…समझ में नहीं आता कि आखिर उसे क्या हुआ कल रात वह बिल्कुल हमारे पक्ष… में ही नजर आ रहा था I”

“स....साला-धोखा दे रहा था हमे ।”

" क्या मतलब? "

" उसके दिमाग मेँ पहले से ही वह सब कुछ करने की योजना थी-तभी तो उसने हरकत में आने से पहले डाक्टर को न सिर्फ यहा से निकाल दिया बल्कि तब हरकत में आया जबकि उसे डॉक्टर के सुरक्षित भारत पहुचने की खबर मिल गई!"

"वह तो ठीक हे-मगर समझ में नहीं आता कि उसने ऐसा किया क्यों?"

"इसी सवाल ने मेरे दिमाग को भी जकड रखा है ।"

"मुझें एक सम्भावना लगती है ।"

"क्या?” इबलीस ने पूछा ।

"कल जब वह अचानक ही डाक्टर को लिए हमारे सामने प्रकट हुआ तो हैरत हम सभी को हुई थी-इत्तनी जल्दी न सिर्फ रक्त तिलक हेडक्वार्टर में पहुचना', बल्कि डॉक्टर को निकालकर भी लाना, निश्चय ही नामुमकिन था…हम सबने यह समझा कि वह चमत्कारी लडका है और इस बार भी चमत्कार दिखा गया-मेरे दिमाग के किसी कोने में उसी समय हल्का-सा खटका हुआ था…वेसे भी जो कहानी उसने सुनाई थी वह स्वाभाविक नही थी-ऐसा भला कैसे हो सकता है कि रक्त तिलक वाले ही डॉक्टर को उसे सौंप दें?"

" अब उन बातों याद करके तुम क्या कहना चाहते हो?”

"ऐसा लगता है कि उसमें और रक्त तिलक वालों में कोई सौदा होगया था I”

“कैसा सौदा? "

" मुमकिन है कि उसने डॉक्टर के बदले में उनका काम करना स्वीकार कर लिया हो ।"

"कैसी बहकी हुई बात कर रहे हो?” कर्नल तोम्बो ने बुरा-सा मुह बनाया---"आग और पानी में भी भला कहीँ दोस्ती हो सकती है, पहली बात तो यही कि विकास एक देशभक्त लडका हे और उसके देश का फायदा मजलिस्तान में हमारी सरकार बनी रहने से ही है, जबकि रक्त तिलक का मकसद इसके बिल्कुल विपरीत हे-----

उसके लिए हमारे विरुद्ध रक्त तिलक की मदद करने का अर्थ अपने मुल्क के विरुद्ध जाना है । दूसरी तरफ रक्त तिलक वाले तो कभी वह सोच भी नहीं सकते कि इण्डियन एजेण्ट डबल एक्स फाइव उनका साथ. दे सकता है I"

"तो फिर तुम उसकी हरकत का क्या मतलब निकालते हो?"

"कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर. . . I” कर्नल तोम्बो का वाक्य पूरा होने से पहले ही कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई…वे चौंके-कर्नल के सकेत पर गार्जियन ने कुर्सी से उठकर दरवाजा खोला-सामने ही एक… छोटा-सा टेप लिए सेना का लासनायक खडा था । …

“कहो ।”

“य. . .ये टेप सर…मेरे ख्याल से इसमें महत्वपूर्ण वार्ता भरी हुइं है I”

“ओह-आओ ।” गार्जियन ने उसे जल्दी से अन्दर प्रविष्ट होने का रास्ता दिया-वह टेप लेकर मेज की तरफ बढा जबकि गार्जियन दरवाजा बोल्ट करके फुर्ती से घूमा-क्रर्नल और इवलीस भी उत्सुक निगाहों से लासनायक और उसके हाथ में दबे टेप को देख रहे थे । टेप मेज पर रख दिया गया…ओँन करते ही फोन पर होने बाली दो व्यक्तियों की आवाज कमरे में गूजने लगी-"हा…मैं नम्बर फाइव बोल रहा हू !"

"मुझे तुम्ही से बात करनी थी ।" एक थर्राई. हुई-सी आवाज ।

“अ. . .अरे…सरदार आप? "

"हां-हम ही हे-सुनो नम्बर फाइव-इण्डियन एजेण्ट डबल एक्स फाझ्व ने आज़ सुबह राष्ट्रपति भवन में जो किया, उसकी जानकारी तो तुम्हें होगी ही?"

"जी-किंतु मैं चकित हूं कि इण्डियन एजेण्ट ने ऐसा क्यों किया है?"

"इस सवाल का जवाब तुम्हें बाद में मिलेगा…फिलहाल काम की बात सुनो I"

"जी-'हुक्म कीजिए I"

"विकास हमारे पास आ गया है-उसके साथ मिलकर हमने आज रात किले से बख्तरबन्द गाडी उडाने की पूरी योजना तैयार कर ली है ।”

"व. . .बख्तरबन्द गाड्री ।"

"बात को दोहराओ मत । खतरा है I" कठोर स्वर-"एक ही बार मे ध्यान से सुनते रहो--- वे इस वक्त सतर्क है…चप्पे-चप्पे पर पहरा हे~कम्बख्तो ने सडक पर निकलना दुश्वार कर दिया हे । इसी वज़ह से तुम्हारे पास किसी को भेज नहीं सके…फोन भी नहीं करना चाहते थे, क्योंकि मुमकिन है ।उन्होंने काॅल को सुनने के इन्तजाम कर लिए हों…फिर भी एक काम. ऐसा था, जिसे सिर्फ तुम ही कर सकते हो…किसी और के बस का नहीं है, इसलिए-फोन करने का रिस्क लेना पडा. I"

"काम बोलिए सरदार ।"

“तुम दुनिया के किसी भी नम्बर लाॅक को देखकर समझने का दावा किया करते थे न? "

"आज भी करता हूं।"

“उसी विशेषता के कारण वैन को उडाने मेँ तुम्हारी सख्त जरूरत हे…तुम जानते ही हो कि वैन के डोर लॉक नम्बर सिस्टम से हैं-वेन हमारे लिए तभी कुछ लाभप्रद सिद्ध हो सकती है, जबकि तुम उस लाॅक को समझ जाओ ।"

"आप फिक्र न करे सर थोडी मेहनत के बाद मैं उम्हें समझ जाऊंगा।"

“ओके ऐसा करना-आज रात दस बजे किले की दक्षिणी दीवार से चार फर्लांग दूर झाडियों मे पहुच जाना…हमारा आदमी तुम्हें वहीँ से ले लेगा I”

… " ठीक है सरदार--प्लीज कोड?"

"वह तुमसे मिलते ही कहेगा…मिशन आँफ फोर्ट'…जवाब में तुम कहना--"राग…नाट मिशन आफ़ फोर्ट बट मिशन आँफ वैन' ।”

ॐॐॐॐॐ

जवाव में नम्बर फाइव 'थैक्यू' भी नही कह पाया था कि सम्बन्ध बिच्छद की आवाज-सुनने वाले समझ चुके थे कि सम्बन्ध विच्छेद सरदार की तरफ से किया गया था-लाॅसनायक ने हाथ आगे बढाकर, टेप आँफ कर दिया…हर चेहरे पर दहशत-हैरत एवं जोश के दवे-दबे-सै भाव थे । लगातार कई क्षणों के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया ।

कदाचित उनके चेहरों पर दशहत यह खबर सुनकर उभरी थी कि विकास, रक्त तिलक के साथ सचमुच है…हैरत, बख्तरबन्द गाडी को किडनैप करने के होसले के कारण और जोश का कारण इस वार्ता का इस मेज तक पहुच जाना था ।।

"हरामजादे वेन किडनैप करने की योजना बना रहे हे ।" बडबडाकर इबलीस ने मानो खुद से ही कहा किन्तु गार्जियन ने सुन लिया तभी तो तपाक' से बोला----"देखा-मैंने क्या कहा था…अब तो आप लोग मानेंगे कि उनके बीच जरूर कोई सौदा हुआ है !"

“अजीब बात है ॥" कर्नल बडबडाया ।।

इस बीच गार्जियन ने लासनायक से पूछा…" क्या तुमने पता लगाया. कि ये दोनो कहा-कहा से बोल रहे थे?"

" जी !"

"कहा से?"

"सरदार पब्लिक टेलीफोन बूथ नम्बर सेवन से बात कर रहा था और नम्बर फाइव जिस फोन पर था उसका नम्बर है…252359 ।"

"यह नम्बर कहा का है?"

"होटल जन्नत के रूम नम्बर सेवन्टी नाइन का ।"

गार्जियन ने जल्दी से पूछा…" तुमने वहा किसी को भेजा?”

" यस सर मैंने एक जासूस को यह निर्देश देकर भेजा है कि वह सिर्फ यह मालूम… करे कि रूम में कौन रह रहा है और उस पर इस तरह से नजर रखू कि उसे शक न हो सके-वह ट्रांसमीटर पर आपसे सम्बन्ध स्थापित करके रिपोर्ट देगा और नए आर्दश लेगा I"

"वेरी गुड ।"

. गार्जियन के वाक्य को काटती हई उसकी तर्जनी में फसी चौडे नगवाली अंगीठी हल्की-सी पिक-पिक की ध्वनि के साथ स्पार्क करने लगी…गार्जियन ने जल्दी से ट्रांसमीटर ओँन किया और बोला…"हैलो हेलो गार्जियन हीयर गार्जियन हीयर ओवर l”

" एजेट ट्रपल क्रास हीयर सर

।"

"रिपोर्ट ।"

"जन्नत्त होटल के रूम नम्बर सेवन्टी नाइन में रह रहे युवक का नाम महताब है बॉस-होटल रजिस्टर के मुताबिक वह पिछले बीस दिन से इसी कमरे मेँ रह रहा है।"

"क्या इस वक्त वह्र कमरे मे है !"

“नो सर !"

"क्यों--कहां गया ?"

"रिसेप्शनिस्ट का कहना है कि वह मेरे यहा पहुचने से पाच मिनट पहले ही गया है----कुछ बताकर नही गया कि कहा जा रहा हे-कहोती है कि सामान्य स्थिति में था ।”

"उसके वारे में कोई और जानकारी ली?"

“यस सर… रिसेप्शनिस्ट को वह कई बार बता चुका है क्रि विद्रोह की रात को उसका घर जल गया, सारे रिश्तेदार उसी मे जल मरे-वह अक्सर रिसेप्शनिस्ट से कहता रहा है कि वह कहीँ उसकी नौकरी लगवा दे-रिसेप्शनिस्ट ने उससे कई बार पूछा कि वह क्या काम कर सकता है…उसने हर बार एक ही बात कही यह कि वह स्वयं लॉक मास्टर है और उसकी उगलिया मास्टर की-सुनकर हर बार रिसप्शनिस्ट ने हंसकर उससे कहा कि वह किसी चोर गिरोह क्रो नहीं जानती ।"

“गुड--वह सही आदमी हे ट्रपल क्रास ।" ~

"आगे के लिए क्या आर्डर है सर?"
 
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