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धर्मयुद्ध (विजय विकास अंलफासे सीरीज)

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"ऐसे गद्दार क्रो तो सचमुच जिदा रहने का कोई हक नहीं है ।"

"हम चाहते हैं कि गार्जियन क्रो यह सजा तुम्हारे हाथों से मिले ।"

"ज जो?"

"ताकि मरने से एक क्षण पहले उसे यह पता लग सकै कि वफादार होने के लिए उस देश का नागरिक होना ही काफा नहीं है-तुम्हें देखकर वह समझ सकै कि वफादारी किस चीज़ को कहते हैं ।"

"व वह तो ठीक है सर…लेकिन....!!"

" 'हम समझते हैं कि तुम क्या सोच रहे हो-यहीँ न कि जब तुम्हारे अलावा किसी को उसके गद्दार हो जाने का राज पता नहीं है तो जब तुम उसे सजा दोगे तो कर्नल तोम्बो और दूसरे सेमिनेरियन तुम पर झपट सकते हैं ।"

"जी...हा ।"

"उसे मारने से पहले कर्नल तोम्बो से उसकी तलाशी के लिए कहोगे-तलाशी में उसको एक ऐसा पत्र मिलेगा जिससे वह भी जान जाएगा कि गार्जियन गद्दार हे-तब तुम कर्नल को बता दोगे कि हमने तुम्हें ट्रांसमीटर पर क्या आदेश दिया हे-वस उसके बाद सारी स्थिति कर्नल खुद संभाल लेगा ।"

"फिर भी सर. . ।”

"ये हमारा हुक्स है इबलीस-गार्जियन नाम के गद्दार को सजा तुम ही दोगे-उसकी जेब मे उसका गद्दारी का सबूत है जो तुम्हारी स्थिति स्पष्ट कर देगा और फिर-हम स्वय ट्रासमीटर पर कर्नल से कहेंगे कि ऐसा करने का हुक्म तुम्हें हमने दिया था ।।"

"ओ के सर…आपके आर्दश का पालन करने से बढकर मेरे लिए दुनिया मे कुछ भी नहीँ है ।"

"हमें उम्मीद हे कि पद्रह मिनट से ज्यादा गद्दार गार्जियन जिदा' नही रहेगा-ओवर एड आॅल ।" इन शब्दों कै साथ ही दूसरी तरफ से संबध विच्छेद कर दिया गया ।।

अंगूर रूपी ट्रासमीटर को आँफ़ करते काणे इबलीस की एकमात्र आख किसी छोटे…से लाल बल्ब की तरह टिमटिमा रही थी ।

♣★♣★♣

♣★♣★
 
जिस वक्त इबलीस क्मरे में दाखिल हुआ उस वक्त उसका चेहरा… पत्थर की तरह सख्त था-तोम्बो और गार्जियन बिचार-विमर्श में व्यस्त थे।

उस की तरफ़ ध्यान भी नहीं दिया उन्होंने, जबकि इवलिस `ने भडाक मे दरवाजा बद करके अदर से बोल्ट कर दिया ।

दरवाजा बंद होने की आवाज ने गार्जियन और कर्नल को चौकाया--उंसकी तरफ गर्दन धुमाकर तोम्बो ने रौब भरे स्वर में पूछा…" ये क्या बदतभीजी है इबलीस !"

बोल्ट करने के बाद उनकी तरफ घुमते समय ही इवलीस अपनी जेव से रिवाॅल्बर निकाल चुका था-इबलीस के हाथ मे दबे रिवॉल्वर को अपनी तरफ तना देखत ही तोम्बो और गाजियन की खोपडी भिन्ना गई--- जबकि इबलीस दात भीचकर गुर्राया-"हाथ ऊपर उठा ले गद्दार गार्जियन-वर्ना खुदा कसम-तेरे जिस्म में इतने छेद कर दूंगा कि गिने भी नही जाएगे I"

लहजा ऐसा था कि वे दोनों क्राप गए ।।

एक झटके कै साथ कुर्सियों से उठकर तो वे पहले ही खडे हो गए थे---- गार्जीयन चीख सा पडा-------" ये क्या बदतमीजी है इवलीस पागल हो गए क्या?"

" हैंडस अप !" इबलीस गुर्राया----"आई से हेडस अप ।" …

काणे इबलीस का अदाज ही इतना खतरनाक था कि उनके हाथ ऊपर उठते चले गए---हक्के-बक्के-से रह गए थे वे , चेहरों पर सफेदी और हबाईया ।।

इबलीस ने कहा--" आप नहीं कर्नल साहव-" ये हुक्म मैंने सिर्फ इस गद्दार को दिया हे-आप हाथ नीचे कर सकते है ।।"

ॐॐॐॐॐ

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"क क्या मतलब?" कर्नल तोम्बो के लिए चौकने की बात थी ।

"ये गद्दार हे कर्नल साहब-दोलत के लालच में यह रक्त तिलक से मिल गया है!!"

'"क्या बकता है हरामजादे ॥"

गार्जियन चीख पडा---"तेरा दिमाग खराब हो गया हे क्या ॥"

बडी ही कटु-विजयी और ज़हर में बुझी सी मुस्कान इबलीस के भद्दे होंठों पर उभरी बोला…"मैँ सब जान गया हू कमीने-ट्रासमीटर पर तेरे चीफ ने मुझे सब कुछ बता दिया हे।"

हतवुद्धि-से खडे तोम्बा ने पूछा-----"मगर हुआ क्या है?

"कछ नहीं हुआ कर्नल ।" गार्जियन चीख पडा इस काणे के पख निकल आए हैं I"

बडे ही प्रेम से बोला इबलीस अभी पता लग जाएगा कि पख किसके निकले हैं-इसकी तलाशी लीजिए कर्नल साहब-इसकी करतूतों का सबूत इसकी. जेब मेँ है !"

. "म मेरी जेब में…क्या है मेरी जेब में?"

"अभी पता जाएगा I"

"ल लेकिन....॥"

क्रर्नल तोम्बो ने कुछ कहना चाहा उससे पहले ही इबलीस बोला…" ये हम सबको डबल क्रॉस कर रहा है कर्नल साहव-यह सूचना सेमिनार से खुद इसके चीफ़ ने मुझे मैरे पर्सनल ट्रांसमीटर पर दी है-यह भी बताया है कि सबूत इसकी जेब में हे…प्लीज मेरे कहने से आप इसकी तलाशी लीजिए ।”

"मेरे चीफ तुझसे सबध क्यों स्थापित करेंगे?"

" क्योंकि यह इनफॉरमेशन यदि वे बडे ट्रांसमीटर पर देते तो तू सतर्क हो जाता-खैर अभी दूध और पानी अलग हुआ जाता है-यदि तुम्हारी जेब मे कुछ है नहीं तो तलाशी से क्यों डरते हो…क्यों नहीं कर्नल साहब को तलाशी लेने देते?"

" तलाशी से कौन डरता हे…लीजिए कर्नल साहब-तलाशी लीजिए-पता नहीं' ये उल्लू का पटठा कहा की हाक रहा है-यदि मेरी जेब से कुछ नहीं मिला तो मैं इसकी बोटी-बोटी करके कुत्तो के सामने डाल दूंगा !"

ॐॐॐॐॐ

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"हां-हां-क्यों नहीँ-तलाशी लीजिए कर्नल साहब ।"

कर्नल तोम्बो किंक्रर्तव्यविमूढ सा रह गया था-ज़ब उसने गार्जियन की तलाशी ली तों रिवाॅल्बर-- कुछ पेसे सिगार की डिब्बी और लाइटर के अलावा एक कागज भी मिला…इबलीस ने चटखारा-सा लेकर कहा…" जरा उसे पढिए. कर्नल साहब I"

तोम्बो ने तह खोली…हाथ उठाए गार्जियन खुद हक्का-बक्का-सा . उस कागज़ की तरफ़ देख रहा था-क्रर्नल तोम्बो ने कागज खोलकर पढा, उसमें लिखा था ----

~ प्यारे गार्जियन,,

" तुम्हारा पत्र मिला…पढकर खुशी हुई कि तुम हमारे लिए काम करने को तैयार हो-तुम्हारी स्वीकृति का पत्र मिलते ही हमने पचास हजार रूबल सेमिनार की राजधानी में तुम्हारे बीबी…बच्चों को पहुचा' दिए हैं…किसी भी माध्यम से तुम इसकी पुष्टि कर सकते हो…जल्दी-से-जल्दी पुष्टि करने के बाद हमे अपनी पहली रिपोर्ट भेजो…हम अपने वादे पर आज़ भी कायम हैं--तुम्हारी हर इनफारमेशन पर पचास हजार रूबल तुम्हारे परिवार को मिलते रहेगे…पहली सूचना कै रुप में बताना है कि…समुद्र में नौसैनिक अड्डा कहां बन रहा हे,और उसकी सुरक्षा के क्या-क्या प्रबंध किए गए हैँ…बस, प्रत्यक्ष में तुम तोम्बो और इबलीस के साथ हमारे खिलाफ इस्री तरह जेहाद छेड़े रखो…तुम पर. किसी को शक नहीं होगा-सूचना के इतजार' में I तुम्हारा...

हस्ताक्षर के स्थान पर रक्त तिलक बना हुआ था ।

पूरा पत्र पढने. तक कर्नल तोम्बो की _आखे' हैरत से फैल गई-उसने महान' आश्चयं के साथ नजरें उठाकर गार्जियन की तरफ़ देखा, बोला--" 'ये क्या हे गार्जियन?"

"मुझे क्या पता…क्या है यह?"

"ओह !" तोम्बो का लहजा व्यग्य' में डूब, गया…!तो तुम्हें यह नहीं पता कि तुम्हारी जेब में क्या है?"

" क . . .क्या मतलब-मुझें सचमुच कुछ नहीं पता कर्नल I”

ॐॐॐॐॐ

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"बस ।" इबलीस गुर्रा उठा--"समय खत्म हो गया है…तुम्हारे चीफ ने मुझसे कहा था कि तुम्हें पद्रह मिनट से ज्यादा जीवित नहीं रहना चाहिए----समय खत्म हो चुका है !"

" म......मगर !"

"धाय-धाय-धाय ।"

इबलीस के रिवॉल्वर को खासी का दौरा पड गया ।

♣★♣★♣

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तीन घटै की लबी बोरियत के बाद अलफासे के दाए हाथ में दबी एक छोटी…सी डिबिया-रूपी टॉर्च में लगा लाल रग का नन्हा-सा बल्ब

ज़ला-अलफासे उसे ध्यान से देखने लगा…एक बार जलने के बाद बुझ गया था-फिर जला ।

अलफासे बुदबुदाया "दो ।"

बल्ब बुझने के बाद फिर जला-इस तरह लाल बल्ब कई बार लपलपाया-अलफासे ध्यानपूर्वक उसकी लपलपाहट गिन रहा था…बल्ब को उसने पाच बार जलते-बुझते देखा और गिना था ।

जब काफी देर तक निरतर देखने के बाद भी बल्ब छठी बार नहीं जला तो अलफासे बुदबुदा उठा…"पाच-देखा जासूस प्यारे-ये पश्चिमी देश वाले साले कितने बदमाश हैं…मेने सिर्फ दो बुलाए थे…वे पूरे पाच आ रहे हैं…समझते हैं कि अलफासे इनके चक्कर में आ जाएगा।"

" मान गए लूमड मिया कि तुम भी गुरुओं के गुरु हो ।"

"यदि इतना सतर्क रहना ना सीखा होता तो जाने कब की राम-नाम ~ सत्य हो लेती जासूस प्यारे-आज सारी दुनिया की पुलिस क्रो अंलफासे अपनी उगलियों. पर न नचा रहा होता ।"

"म मगर गुरु-मैं इस डिबिया जैसी टॉर्च का मतलब नहीं समझा ।"

अलफासे ने बताया… "इसका बल्ब एक माइक्रोफोन से सबधित है और वह माइक्रोफोन अपने सामने से गुजरने वाले व्यक्तियों को गिन लेता है उसी के मुताबिक इस टॉर्च में लगा बल्ब जलता है…इस वक्त वह माइक्रोफोन यहा तक पहुचने के एकमात्र दरवाजें यानी अधेरी सुरंग के पहले. दरवाजे पर तैनात है , उसी ने हमें बता दिया है कि इस वक्त सुरग पार करका यहा पाच आदमी आ रहे हैं ।"

" ओँह !"

फिर-कुछ देर बाद अधेरी सुरग से कदमों की चाप सुनाई दी--उनकी सख्या तीन थी जो दरवाजा पार करके हॉल में दाखिल हुए

ॐॐॐॐॐ
 
…उनमेँ से एक के हाथ में भारी अटैची थी…दूसरे के हाथ में रिवाॅल्बर और अधेड आयु का व्यक्ति खाली हाथ ही था ।

"हैलो !" कहने के साथ ही अलफासे उनकी तरफ़ बढा ।

हाथ मिले…रिवाॅल्बर वाले युवक ने सब कुछ ठीक देखकर रिवाल्वर अपनी जेब में रख लिया…अनजान बनते अलफासे ने सबसे पहला सवाल किया…"मेने केवल दो आदमी के लिए कहा था…एक रकम लाने वाला-दूसरा मेकअप स्पेशलिस्ट लेकिन देख रहा हू किं आप तीन व्यक्ति आए हैँ…क्या मैं जान सकता हू कि दो की जगह तीन क्यू ?"

"रकम ज्यादा थी-सिर्फ इसकी हिफाजत के लिए । "

"ओह-खैर कोइ वात नही !" अलफासे ने मुस्कान के साथ कहा…"कहिए-राष्ट्रपति भवन में इबलीस के हाथो गार्जियन की हत्या हुई या नहीं?"

"हम वादे के मुताबिक उसके बाद ही चले हैं ।"

"ओह-इसका मतलब गार्जीयन को मरे तीन धंटे हो चुके है --- अब तक तो इबलीस भी मर गया होगा-खैर वे सामने विजय-बिकास खड़े हैं… आपमेँ से जो भी मेकअप स्पेशलिस्ट हो…आगे बढकर उन्हें चैक. कर ले-तब तक मैं अटैची में भरी इस दौलत को चैक करूंगा ।"

" ओ के !" कहते हुए युवक ने भारी अटैची अलफासे को पकडा दी---

अंलफासे चबूतरे की तरफ़ बढ गया जबकि अधेड आयु का व्यक्ति विजय' ओर विकास की तरफ ।

स्पेशलिस्ट के सतुष्ट होने तक अंलफासे भी विजयी मुस्कान के साथ अटैची वद कर चुका था-अटैची को वहीं यानी चबूतरे पर रखी छोडकर अलफासे दानों विदेशियों के समीप पहुचा । स्पेशलिस्ट भी वहा पहुच गया था ।

" ठीक हे…कोई मेकआ तो नही है?" अलफासे ने पूछा ।

" नो !"

"ओ के……तो अब मै आपकी आखों के सामने उन्हें शूट करता हूं लेकिन....॥"

"लेकिन क्या?"

अलफासे ने बडी ही गहरी मुस्कान कै साथ कहा-“ आप यहा तीन नहीं बल्कि पाच आदमी आए हैँ--दो को आपने अंधेरी सुंरग में कही छुपा दिया है ।”

" व. . व्हाट?" तानों उछल पडे-चेहरे सफेद पड गए थे l

"जो हां ।" वही मुस्कान… "सौदे में मैं किसी किस्म की धोखाधडी. नहीं चाहता…इसलिए आप अपने उन दोनों साथियों को भी यहां बुला लें I”

"ओह-सॉरी मिस्टर अलफासे ।" उनका नेतृत्व करने वाले युवक ने शर्मिन्दगी भरे स्वर मे कहा…" व वो बात यह थी कि हमने सोचा कही आप बिना विजय विकास को मारे ही दौलत.....॥"

"मैं समझता हू…लेकिन यकीन रखिए-ऐसा नहीं होगा…उन्हें बुला लीजिए ।"

बेचारे विवश हो गए ।

शेष दोनों को भी हाॅल में बुला लिया गया -वे दोनों शक्ल-सुरत से ही खतरनाक नजर आत थे…हाथो में स्टेनगने थीं…-अलफासे` ने उनसे कहा--" आप दोनों अपनी स्टेनगने लिए उधर खडे हो जाए-यदि मैं अपना काम किए बिना उस अटैची को हाथ लगाने की कोशिश करू तो मुझे भून दीजिएगा ।"

" सारी ।" उनका सरगना कह उठा-"ऐसा मत कहिए मिस्टर अंलफासे -हम सचमुच शर्मिंदा हैं ।"

अलफासे सिर्फ अर्थपूर्ण ढग से मुस्कराकर रह गया बोला--- "अव ~ मै आप लोगों के सामने अपना रिवाल्वर निकालकर विजय-विकास को शूट करता हूं।"

रिवाल्वर हाथ में आ गया । जव अलफासे ने रिवॉल्वर ताना तो विकास का चेहरा भभक उठा…सारे जिस्म में एक अनोखा-सा तनाव उत्पन्न हो गया, जबकि , विजय कापने सा लगा-हनूमान चालीसा का पाठ करने लगा था वह-फिर अंलफासे कै रिवाॅल्बर का रुख बदला-एक साथ पाच धमाके ।

धाय-धाय-धाय…घाय-धाय

पाच चीखे ।।

पहली दो गोलिया. दोनों स्टेनगनधारियों का कलेजा चीर गई थीं ।।

बाद की तीन पश्चिमी देश के अन्य तीन एजेंटों का-अलफासे ने इतनी तेजी से हरकत की थी कि कोई भी समझ नहीं सका, पाचो' में से एक को भी पलक झपकने, तक का अबसर नहीं मिला ।

गोलिया ऐसे मर्मस्थलों पर लगी थीं कि बिना तडपे. ही. वे ठडे पड गए।।

एक बार पलक झपकने के बाद जब विजय-विकास और गद्दाफी ने आखें' खोली तो हाँल में पाच लाशें पडी. थीं और अपने स्थान पर खड़ा अलफासे रिवॉल्वर की नाल से निक्लने वाले धुएं पर फूक मार रहा था-इस दृश्य क्रो देखकर जहां कर्नल गद्दाफी के रोएं खड़े हो गए, वहीं विकास की गर्दन गर्व से अकड गई और बिजय तो नारा ही लगा उठा…"वाह-क्या चुस्ती-फुर्ती हे-कमाल कर दिया लुमड़ मियां…रूमाल को फाडकर धोती कर दिया…ओह, हमारा मतलब यदि' हम खुले होते तुम्हारा हाथ चूम लेते…गाल चूम लेते-क्या निशाना हे-- फैन्टास्टिक !"

" शुक्र करो कि ये गोलिया' तुम्हें नहीं लगीं ।"

" 'हमें कैसे लग सकती थीं…हम जानते हैं प्यारे कि हम तुम्हारे पेंटिया यार है' और दिलजला तुम्हारा प्यारा चेला-भला हमेँ तुम कैसे मार..सकते थे?"

" इस भ्रम मेँ न रहना जासूस प्यारे ।" अलफासे चबूतरे पर रखी अटैची की तरफ बढता. हुआ बोला-"आज़ चूकि बिना तुम्हें मारे ही मैं यह दौलत प्राप्त कर सकता था, इसलिए बच गए-तुम्हें सचमुच मारकर किसी ऐसे ही समय पर दौलत प्राप्त करूगा', जबकि मारे बिना दौलत तक पहुच ही न सकता होऊ…'तुम दोनों तो मेरे ब्लैंक चेक हो !"

" मुझे खोल तो दो गुरू !"

अटैची सभालते हुए अलफासे ने पूछा-" "किस खुशी में?"

"अब आपका मकसद पूरा हो गया है-मुझें इस कैद में रखने का क्या लाभ?"

अटैची लेकर हाल के दरवाजे की तरफ बढते. हुए अलफासे ने कहा-"बेशक मेरा काम खत्म हो गया है बेटे…तुम्हारी तरह नि:स्वार्थ 'भाव से किसी के लिए खुद क्रो खतरे. मे डालने वाले मुर्खों में से नहीं हू-मैं जा रहा हूं मजलिस्तान से बाहर ---दुनिया के किसी कोने में कमाई गई इस दोलत के बूते पर मौजमस्ती मनाने-अब न मुझें इस बात से कोई मतलब है कि मजलिस्तान में क्या होता है और न ही इस बात से कि इस दौलत को कमाने के लिए मैंने किससे क्या वादे किए थे ।"

"अमा-अमां-रूको लूमड़ भाई-जाते-जातें हमारा काम भी कर जाओ॥"

अलफासे दरवाजे के समीप पहुच चुका था…विजय कीं आवाज सुनकर ठिठका-घूमा और बोला-" "मैं तुम्हारा क्या काम कर सकता हूं !"

! हमें खोल जाओ ताकि हम साले इस दिलजले को भारत ले जा सकें ।"

"मुझे नहीँ मरना है-तुममे से किसी एक को आजाद करने का अर्थ यह होगा कि मै अपने ही पैर में खुद कल्हाडी मार लू-तुम दोनो कम-से-कम उस समय तक यही रहोगे जब तक कि मैं मजलिस्तान से निकल न जाऊ…मुझे इस बात में भी कोई दिलचस्पी नहीं है कि तुम्हारे

धर्मयुद्ध का परिणाम क्या होता हे…उम्मीद है कि किसी-न-किसी तरह तुम दोनों आजाद हो ही जाओगे ।"

कहने के बाद अलफासे वहा एक क्षण भी नहीं रुका…दरवाजा पार करके अधेरी सुरग में गुम हो गया विकास का चेहरा कठोर हो गया था विजय अपने अटपटे ढग से चीखता ही रह गया…"अवे ओं लूमड मिया…अबे भाई बे-सुनो-हमे यू छोडकर न जाओं-बलम तोरे पैया पडू ।"

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समाचार ही ऐसा था कि पैट्रोल पर दौडने वाली आग के समान हर तरफ फैल गया…जिसने भी सुना उसी की खोपडी झन्नाकर रह गई…सेमिनेरियन सैनिकों में खलबली-सी मच गई ।

. . राष्ट्रपति भवन में सन्नाटा छा गया ।

सारे मुल्क मे सनसनी-सी दौड गई ।

समाचार था कि इबलीस ने गार्जियन की हत्या कर दी है…इबलीस कै समर्थकों ने सुना तो उन्हें लगा कि इबलीस पागल हो गया है-सेमिनेरियन सेना किसी भी क्षण इबलीस और उसके समर्थको को भून डालने के लिए तैयार हो गई--यदि उन्हें इतजार' था तो सिर्फ कर्नल तोम्बो के आदेश का…मगर कर्नल तोम्बो की तरफ से कोई ,आदेश नहीं मिल रहा था---

राष्ट्रपति भवन में तैनात जिन अति उत्साही सेमिनेरियन सेनिक अफसरों ने इबलीस पर झपटना चाहा, उन्हें कर्नल तोम्बो ने रोक

दिया…गार्जियन की जेब से निकला पत्र दिखाया उन्हें ।

पत्र को देखकर हरेक की आखें' फट पडती ।

घीरे-धीरे यह समाचार भी फैलने लगा कि गार्जियन गद्दार था…पैसौं के लालच में रक्त तिलक से मिल गया था वह…

उघर राष्ट्रपति भवन के एक कमरे में कर्नल तोम्बो अभी तक मुह लटकाए बैठा था-उसी के सामने बैठा था इबलीस ।

तोम्बो के हाथ में वह पत्र था, जो गार्जियन की जेब से निकला था-इस पत्र को वह अनेक बार पढ़ चुका था, फिर भी यकीन नहीं कर पा रहा था कि जो उसमे लिखा है…वह सच है ।गार्जियन की मृत्यु के दो घटे बाद-अचानक ट्रासमीटंर ने स्पार्क किया ।

कर्नल झपट पडा-इबलीस भी उसके साथ ही था…सबघ स्थापित होते ही दूसरी तरफ से पूछा गया…" 'कौन बोल रहा है?"

"कर्नल तोम्बो हीयर सर ।"

" ये हम क्या सुन रहे हैं कर्नल-क्या यह सच है कि इबलीस ने गार्जियन को मार डाला है?"

"यस सर I"

" क्यों?" दूसरी तरफ से बोलने वाला दहाड उठा---"हम पूछते है ये क्या बकबास हे?"

"स सर आप ही ने तो आदेश दिया था-उसके पर्सनल ट्रांसमीटर पर यह बताया था कि गार्जियन रक्त तिलक से मिल गया है ।"

"यह सब क्या बकवास है…हमने उससे बाते कब की?"

" आपने नहीं की…लेकिन गार्जियन की जेब से तो रक्त तिलक का एक पत्र भी मिला था !"

"सब बकवास हे…हमे इसमें उस हरामजादे. इबलिस का कोई चाल नजर आती है-उसे एकाएक ही माउथपीस कै पास मुह ले जाकर इबलीस पागलों की तरह चीख पडा-"ये आप क्या कह रहे हैं पर्सनल ट्रांसमीटर पर मुझें आप ही ने तो आदेश दिया था कि...!"

"हट जा कमीने I " गुर्राने के साथ ही कर्नल तोम्बो ने उसे इतना तेज धक्का दिया कि इबलीस लडखडाकर दूर जा गिरा I

ट्रांसमीटर पर दूसरी तरफ से कहा जा रहा था---"उसे मार डालो कर्नल-इबलीस नाम का कुत्ता पागल हो गया है…हमने उसे काई आदेश नहीं दिया. ।"

इधर-कर्नल तोम्बो की समझ में सारी स्थिति आई, उधर फर्श पर पड़े इबलीस को यकीन हो गया कि वह किसी भी हालत में तोम्बो के हाथों से ना बच सकेगा !

.....

.....

271

-भले ही वह यह न समझा हो कि यह सब कुछ हुआ क्या हे, परंतु इतना तो समझ ही गया कि कोइ'-न-कोई गडबड… हो गई है-बोखलाहट में उसने जल्दी से रिवाल्बर निकाला ।

ट्रांसमीटर के करीव खडा कर्नल तोम्बो उसका कत्ल करने के इरादे से घूमा ही था कि बिना सोचे.-समझें ही इबलीस अपने हाथ मे दवे रिवॉल्वर का ट्रगेर दबाता ही चला गया ।

"धाय-धाय-धांय ।"

जैसे पागल हो गया था इबलीस-उसने कुछ नहीं देखा…कुछ नही सुना । ~

न कर्नल तोम्बो की चीख…न उसे खून में डूबते और न ही उसे फ़र्श पर गिरते-उसे तो यह इल्म भी नहीं रहा कि रिवॉल्वर में भरी गोलिया' कव खत्म हो गईं-गोलिया' खत्म होने के बाद भी वह वहशियो के समान ट्रेगर दबाता रहा ।

गोलियों की आवाज ने राष्ट्रपति भवन में सनसनी फैला दी ।।

जाने कितने सैनिक उस कमरे के बद दरबाजे को तोड़ डालने के से अदाज मे पीटने लगे…तब कही जाकर इबलीस चौका-रूका-फ़र्श

पर पडी कर्नल तोम्बो की लाश पर नज़रे टिक गई उसकी ।

इबलीस हसा…खिलखिलाया-फिर बड़ा ही जबादस्त अट्टहास लगाया उसने-ऐसा कि वह सारा कमरा झनझना उठा…रिवॉल्बर दूर फेंक दिया 'उसने-सारे कमरे में कहकहे लगाता हुआ घूमने तगा-एकाएक ही नजर ट्रासमीटर सैट पर पडी ।

दूसरी तरफ से कोई अभी तक हेलो…हेलो कर रहा था ।

इबलीस ने माऊथपीस में कहा.--“हां हिल रहा हू ।।”

"कोन-कर्नल तोम्बो?".उस तरफ से पूछा गया ।

“हा. . .हा. . .हा-कर्नल तोम्बो--वह तो. साला मरा पडा हे, हा. . .हा. ..हा. . .मैं इबलीस हू…दुनिया के सबसे महान मुल्क मजलिस्तान का राष्ट्रपति-हा...हा.. .हा…तुम मुझे कुत्ता कहते थे-हरामजादे कुत्ते तुम हो-हा.. .हा.. .हा-तुम कुत्ते -दूससे के देश में दखल देते हो…वहां अपने सैनिक अड्डे बनाते हो । हा . . .हा. . .हा…अब मे किसी का गुलाम नहीं हू…तुम्हारे दोनों कुत्तो को मार डाला है मैने…हा. . .हा. . .हा ।।"

इवलीस सचमुच पागल हो गया था ।
 
दूसरी तरफ से किसी के बोलने, न बोलने का इतजार किए बिना जाने वह क्या-क्या बकता ही चला गया…यहां तक कि कमरे का बद

दरवाजा भडाक से टूटा, ढेर सारे सेमिनेरियन सैनिक कमरे में दाखिल होगये-एक साथ बीसियों गने गरज उठी--इबलीस के जिस्म में सैकडों

धस गईं-वह गिरा…गोलियों ने ट्रासमीटर सैट तक कै परखच्चे उड़ा दिए थे ।

♣★♣★♣

♣★♣★

अलफासे को वहा से गए करीब एक घटा बीत चुका था और इस एक घटे में विजय ने इतनी बकवास की कि विकास का दिमाग फ़टने को तैयार हो गया…तीसरे थम्ब से बधा गद्दाफी तो यह सोच रहा था कि विजय नामक वह व्यक्ति निश्चित रूप से पागल हे ।

. अचानक ही पहले, उन्हें अधेरी सुरग में गूजती पदचाप सुनाई दी…टोर्च का प्रकाश चमका और फिर हाँल मे हाशमी दाखिल हुआ-उसे देखते हो विकास और गद्दाफी चीख पडे---" हाशमी ॥ "

जबकि हाशमी इस हॉल कै दृश्य को देखकर स्वय बुरी तरह चौक पडा-जडवत्त-सा खडा रह गया था !! वह-ऐसे मानो बिल्कुल अविश्वसनीय दृश्य देख लिया हो ।

मुह से निकला…" अ. . .आप यहां कर्नल साहब-इस हालत में?" ~

" हमें खोलो हाशमी-सब कुछ बताते हैं ।'"

"म मगर.....!"

विकास ने पूछा… "आपको तो यहा का रास्ता नहीं मालूम था न हाशमी अकल-फिर आप यहा ।'"

" मुझें तो यहा पहुचने के लिए सरदार ने ही कहा था लेकिन सरदार तो खुद यहा हैं?"

"ओह...॥" विकास सब कुछ समझता हुआ बोला-“क्या तुम्हे सरदार मिले थे,,उन्होंने ही तुम्हें यहा का पता बताकर कहा था कि यहा पहुचो'?"

"हा…उस वक्त उनके हाथ मे एक अटैची थी ।'"

"न न-नही-तुम धोखा खाते रहे हो हाशमी ।’" गद्दाफी चीख पडा…"मैं तो पिछले एक महीने से उसकी कैद में पडा हू-व... वह अंलफासे नामक बदमाश था-मेरा फेसमास्क लगाकर वह तुम्हे धोखा देता रहा…नकाव पहनकर सबको ठगता रहा ।"

"क्या मतलब?"

स्पष्ट शब्दों में उसे सब कुछ समझाया. गया…सुनने के बाद वह चकिंत रह गया…पहले उसने गद्दाफी को खोला उसके बाद विकास को--हाशमी ने गद्दाफी क्रो बता दिया कि विकास ने उनके लिए क्या क्या किया है इसलिए उसने विकास के आजाद होने तक कुछ नही कहा-इतना समझदार हाशमी स्वय भी था कि उसने विजय को नही खोला ।

बिजय मूखों की तरह पलके झपकाता हुआ उन्हें देख रहा था ।

आजाद होते ही विकास ने सवाल किया…"बाहर की क्या स्थिति है हाशमी अक्ल'?"

"बडी ही सनसनीखेज़…पता नहीं क्या हो रहा है-सारी राजधानी में हगामा-स्रा मचा हुआ है-राष्ट्रपति भवृन मे पहले इबलीस ने गार्जियन क्रो मारा…फिर तोम्बो. को…उसके बाद सेमिनेरियन सैनिकों ने इबलीस को भून डाला ।"

"गुड ।" विकास के मुह से अनायास ही यह शब्द निकल पडा फिर सभलकर बोला-." इसका मतलब यह कि इस वक्त राष्ट्रपति ~ भवन पर किसी का कब्जा नहीं है !"

"हां विकास-यही बात मैंने उस कथित अलफासे को सरदार समझकर कही थी-उसी के जबाब में उसने मुझे यहां का पता बताया था और कहा था कि यहा हम लोग बैठकर आगे के कार्यक्रम पर विचार करेंगे-मगर यहा आया तो...?? ।"

"हमें बातों मे समय गवाने के स्थान पर चलना चाहिए ।'" गद्दाफी ने कहा-"इस वक्त कम-से-कम राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लेना हमारे लिए मुश्किल नही होगा ।"

"बात ठीक है ।" विकास ने फ़र्श पर पडी एक स्टेनगन उठाते कहा-"'नि सदेह राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने का इससे बेहत्तर मौका नही मिलेगा और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा किया भी जाएगा लेकिन तुम नही गद्दाफी…तुम नहीं हाशमी अंकल ।"

एक साथ दोनों चौंक पडे क्योंकि विकास ने स्टेननं उन पर तान दी थी l

"क क्या मतलब....॥ " कर्नल गद्दाफी उछल पडा ।

हाशमी ने पूछा-"क्या कहना, चाहते हो बिकास बेटे ।”

ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ
 
"मुझे वेटा मत कहो हाशमी ।" एकाएक ही विकास का लहजा कटु एव उनके प्रति नफरत से भर गया-"यदि मुझें पहले पता होता कि आपकी चरित्र ऐसा है तो मै जाने कब का आपको गोली से उडा ~ चुका होता…हाथ ऊपर कर लो-आईं से हैंडस अप ।"

गद्दाफी की खोपडी घूम गई।।

जबकि हाशमी ने पूछा-"ऐसी हमसे क्या गलती हो गई है विकास बैटे !"

‘ "खामोश ॥" लडक दहाड उठा…"यदि एक बार फिर मुझे बेटा कहा मेजर तो मा कसम वक्त से पहले ही परखच्चे उडा दूगा…-बिकास सब कुछ हो सकता हे लेकिन किसी वतनफरोश का बेटा नहीं हो सकता ।"

"म.... मैँ वतनफरोश हू?"

"हा तुम…-ठीक इबलीस की तरह ही तुम भी अपने देश को बेचने वाले हो. मेजर-औंर तुम भी गद्दाफी-तुम टोनों को भी वही सजा मिलनी चाहिए जो इबलीस को मिली ।”

"ये तुम क्या कह रहे हो?"

"अपने शासन को स्थायी रखने के लिए इबलीस सेमिनार के हाथों देश को बेच रहा था और अपनी कथित क्राति को चलाए रखने _ के लिए तुम पश्चिमी देश के हाथों ।"

" क्या तुम ऐसा इसलिए कह रहे हो क्योंकि हम उनसे मदद ले रहे थे?"

" इबलीस भी इससे ज्यादा क्या कर रहा था? "

"वह हमारी मजबूरी थी विकास-बिना उनसे आर्थिक और हथियारों की मदद लिए हम कर भी क्या सकते थे~संगठन चल कैसे सकता था?"

"मर सकते थे…ऐसा संगठन चलाने की कोई जरूरत नहीं थी !!"

"ओंह-बिकास तुम . . . ।"

"वह क्राति' नहीं होती मेजर, जो विदेशी पैसे पर सवार होकर आए-वह इंकलाब नहीं होता, जिसकी दास्तानं विदेशी हथियार लिखें…रक्त तिलक का सरदार बनने से पहले तुम्हें यह पाठ पढना चाहिए था गद्दाफी-----तुम्हें यह जानना चाहिए था मिस्टर हाशमी-कि क्रांति का नारा देशभक्त अपने लहू से लिखते हैँ…तुम्हें यह मालूम होना चाहिए, था गद्दाफी…कि इकलाबियों के हथियार, उनके हौसले होते हैँ…विदशी मदद पर क्राति लाने वाले मुल्क को कभी आजाद नहीं करा सकते-----एक से मुक्त कराकर देश को दूसरे का गुलाम बना देते हे…तुम यह सब कुछ नहीं जानते इसलिए तुम्हें क्राती की मशाल का नेतृत्व करने का क्रोई हक नही-राष्ट्रपति भवन का सर्वोच्च पद संभालने की योग्यता तुममें से किसी मेँ नही-यदि तुम गद्दी पर बैठ गए तो इबलीस की तरह तुम भी इस मुल्क क्रो गिरवी रख दोगे-सेमिनार के हाथों नहीं तो पश्चिमी देश के हाथों ।"

" म. . ..मगर. . . I"

"इस देश की बागडोर वे संभालेगे जो इसे सच्चे मायनों में आजाद रखे…जो इसकी सप्रभुता बनाए रखें--मजमजलिस्तान पर ऐसे शासक का शासन होगा हाशमी, जिसका झुकाव किसी महाशक्ति की तरफ न हो-सिर्फ अपने मुल्क की तरफ हो--मजलिस्तान के अवाम की तरफ हो…यह जानकर मुझे बहुत खुशी हई थी कि सिर्फ तुम दोनों. ही पश्चिमी मदद ले रहे थे-रक्त तिलक का तुमसे नीचे का तबका अनजान था-यानी वे सच्चे इंकलाबी हैँ…इस मुल्क पर उन्ही में से किसी की हुकूमत होगी ।"

" श. ..शायद तुम्हारा इशारा मुम. . . ।"

'धांय-धांय ।" विकास के हाथ में दबी स्टेनगन दो बार गर्जी-पहले गद्दाफी और फिर हाशमी चीखकर वही ढेर हो गए-इतने लवे समय तक सब कुछ खामोशी के साथ देखते हुए बिजय के भी रोंगटे खडे हो गए…जब नहीं रहा गया तो बोला…"क्या तुम पागल हो गए हो दिरजले?"

"नहीं गुरु-अभी होश मे हूं…यदि पागल हुआ होता तो इन गद्दारों कै सीने में सिर्फ एक-एक गोली उतारकर ही नहीं रुक जाता, बल्कि इबलीस की तरह इनका जिस्म छलनी कर देता-आखिर इन्होंने, भी तो बही गुनाह किया था न, जो इबलीस ने किया ।"

"इस दुनिया में तुम किस-किसको गुनाहों की सजा देते फिरोगे ?"

"आपका आशीर्वाद रहा गुरु तो आपका ये बेटा अपने सामने पडने वाले हर गुनाहगार को सजा देगा-मैं जा रहा हूं…आखिर में आपको केवल इतना यकीन दिला सकता हूं कि मजलिस्तान सचमुच आजाद होगा…अगला राष्ट्रपति सिर्फ वह बनेगा, जो किसी भी महाशक्ति के प्रभाव मे न हो।"

"तुम्हें क्या पडी… है दिलजले-तुम वापस चलो ।"

"आप जानते हैं अंकल कि ऐसा नहीं हो सकता ।"

.....

.....
 
" उफ ।" बिजय जेसा व्यक्ति झुझला उठा-"तुम समझते.. क्यों नहीँ विकास-मजलिस्तान दो महाशक्तियों की पालिटिक्स का केंद्र बना हुआ है--इनकै बीच मे पडना हमारे मुल्क के हक में नही…तुम्हारी हरकतोकी वजह से भारत की बदनामी हो-रही है…लौट चलो ।"

"ये खूब रही अंकल-पालिटिक्स महाशक्तियां करें और पिसे मजलिस्तान छोटे देशो की बेगुनाह जनता-नही गुरु…यह अन्याय है-ऐसा नहीं चलेगा-ऐसी जनता का. प्रतिनिधित्व' बिकास जरुर करेगा अंकल मै यहां किसी महाशक्ति की प्रालिटिक्स नहीं होने दूंगा ।"

"रुक जाओ विक्रास-रूक जाओ I”

लडका जंजीरों में जकड़े बिजय के सामने पहुचा…जिस वक्त वह विजय की आखों मे झाक' रहा था, उस वक्त विजय ने उसकी आखों मे आंसू देखे-उसके बाद अचानक ही वह विजय के चरणों में झुक गया -पूरी श्रद्घा के साथ चरण स्पर्श किए, वोला…"माफ करना अंकल…आपका बेटा आपकी तरह पत्थरदिल नही बन सका-आपको बहुत परेशान करता_ हूं न मैं-आपकै जज्वातों को चोट भी पहुचाता हूं-सजा के लिए तैयार रहूगा गुरु ।"

कहने के बाद वह तेजी से उठा-बिजय से नजरे मिलाए बिना फुर्ती मे घूमा और लंबे-लबे' कदमों. के साथ हाँल पार कर गया-बिजय को लगा कि यहां जाते वक्त वह रो रहा था…"फिर अंधेरी सुरग में से उसे अपने र्जिगर के टुकड़े की फूट-फूटकर रोने की आवाज आई ।

♣★♣★♣

♣★♣★

"ये तुम क्या कह रहे हो विकास?" मुमताज बिस्तर से उछल पड़ी ।

"यह सच हैं मुमताज-अपने हाथों से मैँने हाशमी और गद्दाफी को मार डाला…कह चुका हू कि क्यों…'उनकी यही सजा' थी…आने वाले कल में वे मजलिस्तान को पश्चिम का गुलाम बना डालते !"

"'ल..लेकिन... ।"

"लेकिन क्या-क्या तुम्हारे.. विचार से मैंने यह गलत किया?"

"नहीं I” मुमजात बेहिचक बोली-"यद्रि वे ऐसे थे तो नि:सदेह इसी सजा के हकदार थे, किंतु जिन मेजर हाशमी की मैं इतने दिन तक इज्जत करती रही…उनके बारे में अचानक ही यह सव कुछ सुनकर_ शाॅक-सा लगा है और यह भी सोच रही हुं कि . . ।"

" क्या ?"

"कि अब आगे क्या होगा?"

"रक्त तिलक की प्रत्यक्ष सरदार तुम हो मुमताज---हजारो युवा तुम्हारे एक इशारे पर अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार हे…वे नहीं जानते किं रक्त तिलक का तुमसे ऊपर भी कोई सरदार. था…-तुम भी भूल जाओ-सोचो कि वे कभी रहे ही नहीं थे, क्योंकि उनका नाम रक्त तिलक के साथ जुडकर रक्त तिलक जैसा पाक-साफ सगठन भी दागदार-सा लगता हैं I"

" म.....मगर मै अकेली इतने बड़े दल को संभाल सकूंगी ??"

" क्यों नही--- तुममे हिम्मत है--ताकत और बुद्धि है-- तुम तो इस देश को संभाल सकती हो l"

" विकास !"

"मेरे दिमाग में एक स्कीम है मुमताज !"

" कैसी स्कीम? "

" इस मुल्क को आजाद कराने की स्कीम ?"

" क्या ?"

" इस वक्त मजलिस्तान में किसी का शासन नहीं है…राष्ट्रपति . भवन बिल्कुल खाली पड़ा हे ---हां फिलहाल उस पर सेमिनेरियन सेनाओं का कब्जा जरूर है ---- बैसे भी सेमिनेरियन सैनाए सारे मजलिस्तान में फैली हुई 'किंतु` बिना अफसर के सेनाएं बहुत कमजोर होती हे !"

" सेमिनार शीघ्र ही गार्जियन और तोम्बो की जगह किन्हीं अन्य अफसरौं र्कों वहा भेज देगा।" ~

" हा- वह ऐसी कोशिश जरूर करेगा, किंतु पश्चिमी देश उसे आसानी से कामयाब नहीँ होने देगा I"

"क्या मतलब ।"

"मतलब यह कि मज़लिस्तानं पर कब्जा करने के लिए वे आपस में टकराएगे उनके टकराव में समय लगेगा…और हमे उसी समय का लाभ उठाकर इस मुल्क की बागडोर संभाल लेनी हे I”

" कैसे ?"

"उसके लिए जख्मी होने के बावजूद तुम्हें चद काम करने होंगे ।"

" मै जख्मी हू कहां? " मुमजात्त कह उठी… "वह तो तुमने जबरदस्ती इस बिस्तर से चिपकाकर मुझे जख्मी बना दिया हे-मुझे बिल्कुल स्वस्थ समझो विकास---हर काम करने, के लिए तैयार ॥॥"

एक बार को तो विकास का भी दिल चाहा क्रि वह खुलकर इस लडकी की प्रशंसा करे किंतु अपने इस बिचार क्रो मजबूती के साथ दिल ही मे दबाकर बोला…"परसो-या ज्यादा-से-ज्यादा उससे अगले दिन तक तुम रक्त तिलक की देशभर की शाखाओं तक यह पैगाम पहुचा दो कि एक ही समय पूरे देश में वे सेमिनंरियन सेना के खिलाफ खुली जग शुरू कर दें ।"

"यह काम तो हो जाएगा-मगर 'पूरे देश में हमारे पास इतने युवक हैं कहा जो सेना से टक्कर ले सकें…वेसे भी रक्त तिलक कै पास हथियार आदि नहीं हैं ।"

" क्रांतिकारियों का सबसे बडा हथियार उनके हौंसले हैं मुमताज-और फिर जिन्हें तुम हथियार कह रही हो वे कम-से-कम मजलिस्तानी फौज पर तो हैं ही ।"

"क्या मतलब?"

" इबलीस की मौत से पहले मज़लिस्तान की सेना दो गुटों में बटी हुई है…सादात यानी तुम्हारे डैडी और इबलीस के पक्ष मे…इबलीस के साथ भी वही हुआ जो सादात के साथ हुआ था-अतः अब यानी इबलीस की मौत के बाद हर सैनिक के मन मेँ सेमिनेरियनो के खिलाफ जहर भरा होगा ।"

मुमताज को बात जची बोली-"इबलीस की मोत को मैंने इस कोण से नहीं लिया था…दरअसल इतनी दुर तक सोच ही नहीं सकी थी मैं ।"

"सभी के मन में आग होगी…सिर्फ चिगारीभर दिखाने की देर है l"

"मगर-वह चिंगारी लगे कैसे?"

" एक आइडिया है I”

" क्या ? "

"कुछ पपलेट छपवाए जाए--लाखो की तादाद मेँ-उन पपलेटों के जरिए मज़लिस्तान के हर नागरिक क्रो सबोधित किया जाए-भले ही वह क्रोई भी हो…सेनिक-असेनिक-क्लर्क अफसर-बूढा जवान-बच्चा या औरत-सभी को सबोधित करके लिखा जाए कि फला समय-समय निर्धारित कर दिया जाए…मजलिस्तान कै हर नागरिक को अपने घर से निकलकर सडकों पर आ जाना है-भूखे भेडियों की तरह सेमिनेरियन सैनिकों पर झपट पडना है I"

"क्या ऐसा सभव है?"

" क्यों नहीं?" उत्साहित-से विकास ने कहा…"किसी भी मुल्क का अवाम जव घरो से निकलकर सडकों पर आ जाए तो तोपों तक के मुहे बद हो जाते हैँ-उन्हें तो सिर्फ सेमिनेरियन फौज से टकराना हे-ऐसी' फौज से, जिसे ठीक से क्रट्रोल करने वाला कोई भी अफसर इस वक्त मजलिस्तान मेँ नहीं है ।"

"लेकिन बिकास. . . ।"

"जरा सोचो मुमताज-जब एक निर्धारित समय पर मजलिस्तान की जनता शहर से लेकर गाव तक के स्तर. पर घर से बाहर निकलकर सडक_ पर आ जाएगी तो सेमिनेरियन सेना कर ही क्या सकेगी-रक्त तिलक. वाले अपने ढग से झपट पडेगे.-मजलिस्तान- सेना हथियार उठा लेगी-ज्यादा बडा हथियार न सही, किंतु मजलिस्तान ,के हर घर में कम-से-कम एक लाठी तो जरूर होगी-जरा कल्पना करो-यदि मजलिस्तान के हर घर का मर्द सडक. पर आ जाए…महिलाएं चिमटे लेकर निकल पड़े-बच्चे अपने घरों की छत पर चढकर ईटे ही बरसाने लगें तो क्या होगा…सेमिनेरियन सैनिक एकदम से बौखला नहीं जाएगे-क्या उनके पाव नहीं उखड-जाएगे?"

"कलपना तो तुम्हारी ठीक, हे विकास, लेकिन. . . ।'"

"रूक क्यों गई…बोलो?"

" 'क्या जरूरी हे कि हमारे पपलेट से हर मजलिस्तानी सडक पर आ ही जाए?"

"यह पपलेट के मेटर पर निर्भर है…उसमें लिखा मेटर ही ऐसा होना चाहिए कि यदि उसे बूढा. पढ़ ले तो उसकी रगे फ़डक. उठे-कायर भी पढे. तो जोश से भर जाए…ऐसे पंपलेटों' का उपयोग कई बार ऐसी फौजों पर किया जाता है, जो निरुत्साहित हो गई हों-जिनका मनोबल टूट गया हो…जोशीले भाषण और पपलेट उन्हें जान पर खेलने के लिए उत्साहित करते हैं--हमे वही प्रयोग मज़लिस्तानी जनता पर करना है-पंपलेट में हम ऐसा समा बांध देगे कि बिना अवाम के सडक, पर आए यह मुल्क आजाद नहीं. हो सकेगा और अवाम के निकल पडते_ ही . मुल्क आजाद हो जाएगा-पपलेट' में हम यह साफ शब्दों में लिख देंगे कि-जो निर्धारित समय पर सडक पर नहीं आ गया, वह कायर है-डरपोक है…अपने मुल्क का दुश्मन हे-गुलामी की जिदगी- से बहादुरी की मोत कई गुना अच्छी है…यह आहवान-यह पुकार रक्त तिलक की तरफ़ से हीगी । "

"ऐसा पंपलेट बनाएगा कौन?"

"म.......मैँ ।"

"त तुम…कब?"

" अभी इसी वक्त ॥" विकास ने कहा…"उसे लाखों की तादाद में छपवाना तुम्हारा काम है मुमताज-उसके बाद पपलेट को मजलिस्तान

के हर नागरिक तक पहुचाना रक्त तिलक के युवकों का काम है ।"

"म मगर-उन पपलेटों की जानकारी समय से पहले ही सेमिनेरियनों को भी तो हो जाएगी?"

" हो जाए, कोई फर्क नही पडेगा।" बिकास ने कहा ~ "सेमिनेरियनों की कोंशश यह होगी कि जो समय पपलेटों मेँ लिखा होगा, उससे पहले ही वे मजलिस्तानी जनता को इस हद तक आतककित करें कि योजना के मुताबिक जनता घरो से निकलकर सडक पर न आ सकै…उस वातावरण में जनता हिचक भी सकती है…तब शुरूआत रक्त तिलक को करनी होगी----मजलिस्तानी फौज को करनी होगी----- ऐसे अभियानों की शुरूआत भर होने की देर हाती है…एक बार शरू हुआ नहीं कि काम खत्म ।"
 
"तुम पंपलेट बनाओ-उससे आगे का सारा काम मैं सभाल लूगी !"

बिजय क्रो लग रहा था कि वह दुनिया का सबसे बडा… मूर्ख है-हालात ही ऐसे थे कि उसे वह सोचना पड़ रहा था-उसे अपनी बातों के जाल में फसाकर अलफासे यहां ले आया था…वह

विकास और गद्दाफी के साथ उसे भी इसी अवस्था मे छोडकर निकल गया …फिर हाशमी आया…उसने गद्दाफी और` विकास' को आजादकर दिया…विकास उन दोनों फो मारकर निक्ल गया ।

वह उसी स्थिति में खडा रहा…क्रछ भी तो नहीँ कर सका…आगे भी कछ नहीं कर सकेगा-वह जानता था कि यहा ऐसा कोई. शख्स नही आने वाला है जो उसे इन जजोरों से मुक्त कराने का कष्ट करे ।

वह यहा यू ही जक्रडा पडा रहेगा उधर बिकास वह सव कुछ कर चुकेगा जिससे भारत की प्रतिष्ठा धूल मे मिल जाए ।

" नही !" विजय के दिमाग ने सरगोशी की-" वह बिकास को ऐसा नहा करने देगा ।

दिमाग कै दुसरे कोने ने व्यग्य किया तुम कर ही क्या सकोगे-यहा कैद पडे हो ??

इस कैद से छटकारा पाकर रहूगा ।

कैसे…हा...हा...हा...कैसे-तुम हार गए हो विजय-

तुम्हारे ही शिष्य' ने आज तुम्हें हरा दिया है…तुम भारत की प्रतिष्ठा नहीँ बचा सकोगे ।

घबराकर बिजय चारों तरफ देखने लगा-सारे हाल में लाशें बिखरी पडी थीं…सात. लाशें…जब वह उन्हें देख रहा था तो जाने उसके कान में किसने सरगोशी की…सब कुछ खत्म हो चुका है विजय-इस वक्त हालात ऐसे हैं कि रक्त तिलक आसानी से राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर सकता है और यदि विकास के इस देश मे रहते ऐसा हो गया तो…सेमिनार से भारत के सबंध बिगड जाऐगे-जल्दी करो विजय-कुछ ऐसा कि रक्त तिलक की जीत से पहले ही विकास को यहा से निकाल क भारत ले जाओ-तभी भारत का मान-सम्मान बचा रह सकता है…तुम जीत सकते… हो ॥

बौखलाए-से विजय ने उन ज़जीरों क्रो देखा जिनमे उसके ह्यथ-पैर बंधे हुए थे…जजीरें बहुत मोटी थी -उन्हें तोड डलने की कल्पना करना ही बेवकूफी थी…हाशमी की लाश मुह के बल बिजय कं पैरो में पडी थी-उस लाश को देखकर विजय के दिमाग. में बिजली की तरह एक बिचार कोंधा I

बड़ी फुर्ती से उसने दाया पैर आगे बढाया ।

जर्जीर खडकी.-बूट क्री नोक लाश को छू रही थी ।

विजय ने जोर लगाकर लाश को पलट दिया-फिर जूते से उसकी जेब टटोली…विजय की आखे चमक उठी…अब उसने पैर ही से दोनों पैरों कै जूते निकालकर दूर फेंक दिए…पैर ही से जुराब भी उतारी-दोनों पैरों से लाश को खींचकर और नजदीक किंया ।

वह परिश्रम कर रहा था-जजीरे निरंतर ख़डखडा रही थीं-अब वह दोनों पैर हाशमी की लाश पर रख खडा था-फिर उसका एक पैर हाशमी की जब के अदर सरका-जब वापस आया तो पैर के अंगूठे और उगली के बीच रिवालंबर दवा हुआ था-पैर ही से उसने रिवॉल्वर का सेफ्टी लॉक खोला ।

रिवाल्वर की नाल बाए पैर के टखने में पडे कडे पर रखी और दाए पैर के अनूठे से ट्रेगर दबा दिया-फायर की एक जोरदार आवाज के साथ कडे ने मुह फाड दिया ।

♣★♣★♣

♣★♣★
 
बिकास द्वारा तैयार-किए गए पपलेट' का अतिंम पैरा पढते-पढते. मुमताज का चेहरा भभकने लगा-जबड़े भिच' गए-अनजाने में ही उसके हाथ की मुट्ठी कसती चली गइं-नंसों में दौड़ने वाले खून का प्रवाह तेज हो गया…रोयां -रोयां खड़ा हो गया था-उसे ऐसी मुद्रा में देखकर विकास धीमे से मुस्कराया ।

पूरा पढने, के बाद मुमताज कह उठी…" 'बडरफुल' विक्की-बहुत अच्छे-जब तुमने पंपलेट की बात कही थी तब मुझे उतनी नहीं ज़मी थी…लेकिन इसे पढने के बाद मैं दावे के साथ कह हूं कि मजलिस्तान की जनता रणहुकार' कर उठेगी-बूढे, बच्चों और रित्रयों की तो बात ही दूर-यदि इस पपलेट को कब्र मेँ सोए मुर्दे पढ ले तो वे भी भूखे शेरों की तरह सेमिनेरियनों पर झपट.. पडे ।"

' "ब . . .बस…बस…बहुत तारीफ़ हो ली ।" विकास ने कहा--"अब यह पपलेटं' रग' तब लाएगा, ज़बकि लाखों की तादाद में छपकर मजलिस्तान के घर-घर में पहुच जाए और वह काम आसान नहीं होगा मुमताज-इसके लिए तुम्हें पूरी योजना बनानी होगी ।"

"मुझ पर यकीन करो विक्की-मैं ऐसा कर सकती हू ।"

" अच्छा-अब यह बताओ कि क्या इसके अलावा तुम्हारे पास कोई अन्य सुरक्षित जगह है?"

"किसलिए?"

"जहां रहकर हम इस कामको अजाम दे सकें ।"

'"यहीं क्या दिक्कत है?" ~

" भूल गई-मैंने तुम्हें बताया था कि जहां विजय गुरु जजीरों मे कैद हैं, वहां तक पहूच के लिए इसी इमारत के तहखाने से एक सुरग जाती हे…इसी वजह से अब मैं इस इमारत को सुरक्षित्त नही समझता ।"

'

"म. . मगर-तुम्हारे गुरु तो ज़जीरों मे हैं…वे कर… ही क्या सकते हैं?"

मुमताज की इस नादानी भरी बात पर विकास मुस्कराया, बोला… "तुम अभी उन्हें जानती नही मुमताज -वे जो ,कर जाएं कम होता हे-ऐसे चमत्कार, दिखाना उनके लिए आम बात नहीं जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैँ…उनके लिए कोई तिकडम लडाकर जजीरों से मुक्त हो जाना हैरत की बात नहीं है…और यदि वे आजाद हो गए तो. हमारे सारे मसूबो पर पानी फेर देगे ।"

"इसीलिए ये पूछा था कि क्या तुम्हारे पास इसके अलावा कोई

दुसरी सुरक्षित जगह. . . ।"

"बहुत सी जगहें हैं ।"

"तो फिर चलो…हम' इसी वक्त यह जगह छोड रहे हे ।"

"चलो ।" कहती हुई मुमताज ने बिकास द्धारा लिखे हुए कागज की तह बनाई और अनजाने मेँ ही उसे अपने वक्षस्थल मेँ छुपा लिया…विकास ने उसे उठाने के लिए हाथ बढाए. ही थे कि-" अरे-अरे क्या करते हो?" मुमताज चीख पडी ।

विकासने ठिठककर कहा…"तुम्हें उठा रहा हू-बाहर खडी जीप तक ले चलना है ना !"

"मैं चल सकती हूं सिर्फ तुम्हारे सहारे की ज़रूस्त पडेगी. l”

इस तरह विकास. कां सहारा लेकर मुमताज फर्श पर खडी, हो . गई-उसे लेकर विकास कमरे से बाहर की तरफ वढ़ गया-गैलरी में से गुजरते वक्त वह एक बद कमरे के सामने ठिठका, बोला-"क्या तुम थोडी देर यहां बिना सहारे के खडी रह सकती हो?"

"बिना तुम्हारे सहारे के मैं चल भी सकती हूं ।"

" लेकिन फिलहाल ज़रूरत क्या है?"

"इस कमरे में स्पर्श सुरगे बिछाने का सामान हे…उसे लेना चाहता हूं ।" ,

"उसका क्या करोगे?"

"आज रात मैं सेमिनार का नौसैनिक अड्डा. तबाह करने वाला हूं !"

"ओह हां…ये पंपलेट बाटने' से पहले यह अड्डा भी तबाह होना बहुत जरूरी हे…इसकी मौजूदगी में सेमिनेरियन काफी ताकतवर हैं ।"

"सभलो ।" कहने के साथ ही बिकास ने उसे छोड़ दिया वह खडी रही…दरवाजे के समीप' पहुचने तक विकास ने जेब से रिबॉंल्बर निकाल लिया था…सारी इमारत एक फायर की आवाज से गूज' उठी~ गोली दरवाजे पर लटके ताले पे लगी ।

ताला मूह चिढाने लगा ।

विकास ने उसे कुदे से निकालकर फर्श पर डाला-साकल खोलकर अदर दाखिल हो गया-सारा सामान उसी स्थिति में रखा हुआ था, जिसमे सरदार के रूप में अलफासे ने उसे दिखाया था-कमरे के एक कोने मे गोताखोरी की पोशाकें पडी थी ।
 
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