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धर्मयुद्ध (विजय विकास अंलफासे सीरीज)

विकास ने सूटकैस खोला…उसमे से एक नक्शा निकाला-नक्शा इसी शहर यानी मजलिस्तान की राजधानी का था…पाच' मिनट तक वह ध्यानपूर्वक नक्शे का अध्ययन. करता रहा…फिर तह करके उसे सूटकैस में रखा…नजरें उस रास्ते पर दौडाई जहा से कार गुजर रही I .

यह सडक सुनसान थी…कोई इक्का-दुक्का वाहन ही गुजर रहा था ।

अचानक ही बडे प्यार से उसने अपने कोट की जैब से रिवॉल्बर निकालकर ड्राइवर की कनपटी पर रखा और बहुत ही सामान्य स्वर में बोला-“गाड्री रोक दो ।"

" ज. . .जी I” ड्राईवर कै होश फाख्ता l

इस बार कुछ कठोर स्वर-" गाडी रोक दो।"

. ड्राइवर के पैर खुद व खुद ही बेकों. पर जा पडे…चरमराती हुई कार कुछ दूर तक फिसली, और फिर जाम हो गर्ह-ड्राईवर. कै चेहरे पर हवाइयां उड रही थीं-कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसके…जिस वक्त वह जीभ से अपने शुष्क हो गए होंठों. को तर करने की असफ़ल कोशिश कर रहा था, उस वक्त. विकास ने पूछा-"शहर कै चप्पे-चप्पे पर सैनिक क्यों तैनात हैं?"

थूक सटककर वह सिर्फ इतना. ही कह सका…“ज . .जी ।”

"जवाब दो वरना गोली मार दूगा ।”

”ज. . ,जी-वो बलबइयों की कार्यवाई रोकने कै लिए I”

विकास ने तुरन्त ही दुसरा सवाल दाग दिया---"क्या बलवाई इत्तने ज्यादा सक्रिय हैं? "

"ज. .जी हा--- रक्त तिलक ने यहा तहलका मचा रखा है I"

"रक्त तिलक?"

"ज. .जी हां…वलवाइयों ने अपने दल का यही नाम रखा है । रक्त तिलक तभी से सक्रिय है, जबसे सैनिक क्रान्ति के बाद जनरल इबलीस राष्ट्रपति वने हैं-इस कम्बख्त रक्त तिलक ने सारे शहर में हंगामा-सा मचा रखा है।"

"कैसा हंगामा?"

"मिस्टर विकास ......!" एकाएक ही कार मे एक गुर्राहटदार आबाज गूंजी---- 'प्लीज आप ड्राइवर से कोई सवाल न कर्रे-शष्ट्रपति' भवन मेँ आपके हर सवाल का जवाब दिया जाएगा ।

कार की छत में लगी एक जाली की तरफ देखते हुए विकास ने पूछा---- "हू आर यू ? "

"प्रेजिडेण्ट इबलीस ॥ जाली से आवाज निकली ॥

“थैक्यू ॥" लडके ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा… " आपको बोलने कै लिए मजबूर करने के लिए ही मैने ड्राइवर से ऐसा व्यवहार . किया था I”

" हम समझे नहीँ l"

. "सीट पर बैठते ही मेरी नज़र इस जाली पर पड गई थी और. यह समझने मे भी मुझे किसी तरह की कोई दिरक्त नहीं हुई कि इसमे माइक्रोफोन फिक्स है-प्रश्न सिर्फ यह जाबनने का था कि इसके जरिए मुझ पर आप. नज़र रख रहे हैं या रक्त तिलक वाले-सो जान चुका हू !"

"वेरी गुड ॥" इबलीस की आवाज-"आपने हमेँ आते ही प्रभावित किया मिस्टर बिकास-यकीनन आपकी नजर तेज है और हम दावे के साथ वह सकते हैं कि आप अपने अभियान मे कामयाब होकर लौटेगे!"

" थेंक्यू लेकिन ...!"

“कहिए" ”

"मैंने यह भी महसूस किया है कि आपके अलावा भी मुझ पर कुछ लोग नजर रखे हुए हैं !"

. "ओह-वे जरूर रक्त तिलक वाले रहे होंगे…आप फिक्र न करे~हम अभी वायरलेस के जरिए सैनिक जीपो क्रो आपके पास भेजते हैं…वे अपने पहरे में आपको सुरक्षित राष्ट्रपति भवन पहुचा देंगे ।"

"उसकी जरूरत ऩही है !"

चौंका हुआ स्वर-“क्या मतलब.?"

"मैँ कुछ करने का मौका देना चाहता हू…-देखना' चाहता हू कि वे क्या करना चाहते हैं !"

"अजीब आदमी हैं आप…आपको खत्म करने की कोशिश के अलावा और वे क्या कर सकते हैं?"

" इसीलिए चाहता हूं किं इस ड्राझ्वर को गाडी से यही उतार दिया जाए।।"

"ज..... .जी I.”

"जी ह्म । " डबल एक्स फाइव धीरे से हसा… "यह बेगुनाह वेचारा मेरे साथ क्यों मरे! "

" म मगर-हम समझे नही-आखिर आप चाहते क्या हैं? ”

"सिर्फ यह कि ड्राइवर को आप यही उतरने का हुक्म दें…गाडी ड्राइव करता हुआ मैं खुद राष्ट्रपति भवन पहुचूगा । यहा से सिर्फ बीस मिनट का रास्ता है यदि रास्ते मे कोई छोटी मोटी गडबड हुई भी तो उससे निपटकर मैँ ज्यादा-से-ज्यादा तीस मिनट मेँ आपके पास पहुच जाऊगा!"

" अजीब आदमी हैं आप…देख रहे हैं कि खतरा है…फिर भी ।"

"मैं यहा खतरों से टकराने के लिए ही आया हू ॥” विकास का स्वर थोडा सख्त हो गया--!उनसे कन्नी काटकर बच निक्लने के लिए नहीं और काम के समय आजादी मुझें सबसे ज्यादा प्रिय है l"

"जैसी आपकी इच्छा ।" विवश-सा स्वर ।

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इबलिस के आदेश पर ड्राइवर गाडी. से बाहर निकला और पैदल ही उस तरफ़ रवाना हो गया, जिधर से गाडी आती थी-हां जाते वक्त उसने अजीब-सी नजरों से विकास को देखा जरूर था…कदाचित वह यह सोच रहा था कि यह लडका किस्री-न-किसी स्तर पर थोडा-बहुत क्रैक है ।

जब उसने बिकास की तरफ देखा था तो जाने क्यों विकास को विजय की याद आ गई और फिर ठीक विजय जेसे अन्दाज में ही उसने सारे जहां की मूर्खता को अपने चेहरे पर प्रक्ट करके आख मार दी ।

उसकी इस हरकत पर तो ड्राइवर बौखला ही गया ।

बिना कुछ कहे तेजी से चला गया वह-शायद सोच रहा था कि भारत से आया यह लडका सिर्फ क्रैक नहीं बल्कि पूरा पागल है । उसने यह भी सोचा था कि यह पागल आखिर यहा आया क्यो है?

विकास उसे तब तक देखता रहा जब तक कि एक मोड पर वह गुम न हो गया ।

फिर-गाडी से बाहर निकला…सतर्क दृष्टि से चारों तरफ देखा उसके बाद गाडी को चैक करने, लगा-चप्पे चप्पे की तलाशी ले रहा था वह-जैसे कुछ तलाश कर रहा हो ।

. पाच मिनट में उसने सारी कार की तलाशी ले डाली…कही कुछ नहीं मिला-अगला दरवाजा खोलकर कार के अन्दर आया…जेब से रिवाॅल्बर निकालकर बेहिचक गोली छत की जाली मे मार दी ।
 
जाली और उसमें छपे माइक्रोफोन के परखच्चे उड गए! ! फायर की आबाज जगल में दूर-दुर तक गूजती चली गई थी-विकास ने बडे आराम से रिवाल्वर की नाल से निकलते धूंए पर फूक मारी । उसे कोट की जेब में डाला और अगले ही पल कार बन्दूक से निकली गोली के समान सडक पर दौडती चली गईं…किसी भी वाहन को वह अपनी जिन्दगी के समान तेज़ रफ्तार. से ड्राइव करता था ।।

हवा की-सी गति से हिचकोले खाती हुई कार सडक पर दौड रही थी!

. . एक स्थान पर…दाई तरफ की झाडियों मेँ उसने हल्की-सी हलचल महसूस की ।

हवा में लहराता एक हाथ देखा और फिर हवा में नाचती एक गेद जेसी बस्तु को देखते ही लडके ने दरवाजा खोलकर तेज दौड रही कार से बाहर ज़म्प लगा दी । अभी वह हवा मेँ ही तैर रहा था. कि....॥

धडाम

एक कर्णभेद्री विस्फोट ।

कार… के परखच्चे उड गए-आग लग गई और जिस वक्त कार का सबसे बडा हिस्सा एक पेड की जड से जाकर टकराया उस समय बिकास बाई तरफ़ की झाडियों. में गिरा और दुर तक घिसटता चला गया ।।

जाने कौन-से पल. उसने अपनी जेब से रिवाल्वर निकालकर अपने ह्यथ मे ली थी।

पेड से टकराई हुई कार. धू-धू करके जल रही थी ।।

विकास का सूट कई जगह से फ़ट गया था और कूल्हे कई जगह से छिल गए थे-उनमें चीस भी थी किन्तु हाथ में रिवाॅल्बर लिए वह जमीन से चिपका… निरन्तर सामने वाली झाडियों को घूर रहा था-तभी धांय.....

एक गोली बाईं तरफ़ से उस पर. झपटी I

मगर निशाना सही न होने के कारण उसके ऊपर से गुजर गई ।

~दूसरा मौका दिए बिना ही विकास ने उस तरफ़ की झाडियो में फायर… -झोंक दिया।

एक चीख उभरी ।।

आहत स्वर में कहा गया…“जासूस अभी जिन्दा है ।"

कदाचित उसने अपने शेष साथियों को सतर्क किया था…सामने की तरफ से बिकास पर एक गोली चली किन्तु. खतरा भापकर विकास एक क्षण पहले ही अपना स्थान छोड चुका था ।

तेजी से रेंगता हुआ वह बाईं तरफ की झाडियों में पहुचा ।

वहा एक युवक की लाश पडी थी-विकास की गोली उसके माथे में लगी थी--युबक का रिवाॅल्बर समीप ही पडा था…क्दाचित यही वह युवक था जिसने मरने से पहले अपने साथियों को विकास के जीवित बच जाने का रहस्य बताया था ।

बिकास ने चारों तरफ छाए सन्नाटे क्रो बडी पेनी नजर से देखा ।।

सामने वाली. झाडियों में भी उसे कोई हलचल नजर न आई ।

एक क्षण विकास ने कछ सोचा…फिर युवक की लाश उठाई और सडक की तरफ उछाल दी…जिस वक्त लाश हवा में लहरा रही थी उस वक्त सामने वाली झाडियों से कई फायर हुए ।

सारी गोलियां लाश में धस गई ।।

मगर विकास अपनी इस तरकीब से यह जान. चुका था कि आसपास सिर्फ एक ही दुश्मन है…सिर्फ वही जो सामने वाली झाडियों में छुपा है और जिसने कार पर दस्ती बम फेका था-यह लाश उसने हवा में उछालकर. सडक पर सिर्फ दुश्मनों के दिमाग. में एक क्षण के लिए भ्रम पैदा करने के लिए फेंकी थी कि हवा में वह लहराया है ।।

. .. विकास, जानता. था कि ऐसा समझते ही छुपे हुए दुश्मन उस पर फायर करेंगे. और उसे पता लग जाएगा कि आसपास कितने दुश्मन कहा छुपे है ।

वही हुआ-एकमात्र दुश्मन ने लाश पर गोलियाँ चला दीं… मगर अगले ही पल कदाचित वह भी जान गया कि वह दुश्मन नही वल्कि उसके साथी की लाश है।

सामने वाली झाडियां धीमें से सरसराइं ।।

गुलाबी हौंठों पर मुस्कान उभरी ।

एकाएक बातावरण में किसी मोटरसाइकिल के इजन की आबाज गूज उठी-विकास पहले से भी ज्यादा सतर्क हो गया-आवाज उसी

दिशा से आ रही थी जिघऱ से खुद विकास आया था ।

फिर सडक पर तेजी से दोडकर आ रही मोटरसाइकल भी चमकी ।।

सामने बाली झाडियों से कोई. चीखा…“नही -इधर मत आ इशाक! !

अभी जासूस जिंदा है !"

धांय .....॥

फिर सडक पर तेजी से दोडकर आ रही मोटरसाइकल भी चमकी ।।

सामने बाली झाडियों से कोई. चीखा…“नही -इधर मत आ इशाक! !

अभी जासूस जिंदा है !"

धांय .....॥

विकास के रिवाॅल्बर से निकलकर बुलेट आवाज़ पर झपटी । एक चीख उभरी .....
 
उधर मोटर साइकिल सवार ने तेजी से ब्रेक लगाने चाहे…"सम्भवत अभी वस्तुस्थिति को ठीक से समझ भी नहीं पाया था कि विकास ने उसकी टाग में गोला मारी ।।

एक चीख के साथ बह मोटरसाइकल की गद्दी से उछलकर सडक पर जागिरा।

मोटरसाइकल कुछ दूर चली --लडखडाई--गिरीं…लुढकी और. . . ' फिर एक-दो पल घिसटने के बाद रुक गईं-इज़न. बन्द हो गया ।

गनीमत थी कि पैट्रोल की टकी नहीं फ़टी और पैट्रोल गर्म इजऩ पर नही गिरा---वर्ना तो अभी तक वह आगकी लपटों में धिर चुकी होती ।

समने वाली झाडियो मे कोई हलचल नहीं थी।

सड़क पर पडा युवक कराह रहा था जिसे विकास ने एयरपोर्ट पर देखा था---रिवाल्बर हाथ में लिए विकास तेजी से उठा और फिर भागता हुआ सड़क पर पहुँचा । वह एक साथ सामने वाली झाडियों और सड़क पर पड़े जख्मी युवक पर नज़र रखे हुए था ।

अचानक जख्मी युवक ने जेब से रिवाॅल्बर निकालकर उस पर ताना ।

उससे पहले ही विकास के रिवाॅल्बर ने खासा --गोली युवक के हाथ मे दवे रिवाॅल्बर से टकराई-रिवाॅल्बर हवा में लहराकर दुर जा गिरा!!

युवक का हाथ बुरी तरह झनझना उठा था l

विकास युवक के संमीप पहुंचा ।

एक क्षण भी खोए बिना उसने बूट की ठोकर उसकी कनपटी पर मौजुद एक एसी विशिष्ट नस पर मारी जिस पर लगते ही एक चीख के बाद युवक बेहोश हो गया ।

रिवाॅल्बर संभाले दौडता हुआ बिकास सामने वाली झाडियों में पहुंचा-वहा एक अन्य युवक निश्चल पडा था-गोली उसके सिर में लगी थी ।।

विकास ने नब्ज-देखीं ।

बह मर चुका था ।।

रिवाॅल्बर जेब में रखता हुआ विकास वापस सडक पर आया I

मोटरसाइकल सीधी की…स्टैण्ड पर खडी करके वह किक मारते ही स्टार्ट हो गई ।

उसे स्टार्ट छोडकर विकास दौडा…-बेहोश युवक को उठाकर कंधे पर लादा ।

ओर फिर मोटरसाइकल पर उसने अपनी.. आगे की यात्रा . इस तरह जारी कर दी जैसे कुछ हुआ ही न हो…वह जो बेहद लम्बा था-सीटी बजाता चला जा रहा था---सीटी से निकल रही धी शकीला की धून ।।

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इबलीस बॉंयरलेस्र पर चीख रहा था…“कहां गया वह…उसे तलाश करो I"

"हम तलाश कर रहे हैं सर .।" दूसरी तरफ से आवाज उभरी ।

"खाक तलाश कर रहे हो-तुम लोग अभी तक उसका पता नही लगा सके । पाच मिनट के अन्दर रिपोर्ट दो, वरना एक-एक की खाल 'खींच लूगा I” कहने के साथ ही गुस्से में भुनभुनाते हुए इबलीस ने बॉंयरलैस आँफ कर दिया l

“क्या हुंआ इबलीस?" एक विदेशी ने कमरे में प्रविष्ट होते हुए पूछा ।

इबलीस घूमा उसकाका चौडा चेहरा अत्यधिक गुस्से के कारण तमतमा रहा था-किन्तु विदेशी को देखते ही अंगारो के समान दहकती उसकी एकमात्र आख बुझती चली गई…'यह विदेशी उन दो में से एक था जो कि उस _वक्त भी इबलीस के साथ थे, जव उसने सादात को शूट किया था ।

इबलीस थोड़ा संभलकर.. बोला…“कुछ नहीं सर I"

"कुछ तो है ।" सेमिनेरियन मुस्कराया ।

" पता नहीँ विकास नाम का वह भारतीय जासूस रास्ते ही में से कहां गायब हो गया?"

"क्या मतलब?"

"आप जानते ही हैं कि मैंने एक ड्राइवर को उसे लेने भेजा था l" इबलीस एक सांस में सब कुछ बताता चला गया, वह कह रहा था----"'उसकी इच्छा पर मैंने ड्राइवर को उससे अलग का दिया-मैँ यहां कार में लगे माईक्रोफोन से सम्बन्धित हेडफोन कान से लगाए बैठा था कि अचानक ही हेडफोन पर इतना जोरदार धमाका गूजा कि मेरे कानों कै पर्दे हिल गए-शायद उसने रिवॉल्बर की गोली से कार में लगे माइक्रोफोन को नष्ट कर दिया था, क्योंकि उसके बाद हेडफोन पर , कोई आवाज सुनाई नहीँ दी…कार के इजन की आवाज भी नहीं….मैंने उसी. समय बहुत-सी सैनिक जीपों को उसे तलाश करने का हुक्म दे दिया था I"

"क्या फ्ता लगा? "

"रास्ते में एक स्थान पर पेड से टकराई कार की राख और घटनास्थल पर दो बलवाइयों की लाश मिली है…विकास का अभी तक पता नहीं हैं-आखिर वह कहा गुम हो गया?”

सेमिनेरियन ने हल्की-सी मुस्कान के साथ कहा-"तुम्हें उसकी चिन्ता करने की जरूरत नहीं है---कुछ ही देर बाद वह यहां पहुच जाएगा ।"

"क्या मतलब....?" ईबलीस चौंक पड़ा l

. सेमिनेरियन ने अपने कोट की जेब से एक सिगार निकालकर सुलगाया और चहलकदमी-सी करता हुआ बोला…“सेमिनार से इस लडके. के बारे में मैंने सारी रिपोर्ट मगा ली हे…बडी खतरनाक रिपोर्ट हे…यदि वह सच है तो यकीनन यह लडका, दुनिया का अजूबा है ।”

"मैं समझा नही I"

"रिपोर्ट में जो बताया गया है उसके मुताबिक अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की सरकारे इस अकेले लडके से कापती' हैं…किसी देश मेँ यह हवा उडते ही कि वहां डबल एक्स फाइव पहुच गया है-वहां के मुजरिमो की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है I"

“वह लडका, है या शैतान?"

"शेतान ही समझो I”

इबलीस अपने विदेशी आका का चेहरा देखता रह गया ।

जबकि सिगार मे लम्बे-लम्बे कश लगाते हुए सेमिनेरियन ने कहा.......... “हमारी मदद के लिए भारतीय सरकार ने सचमुच ऐसी हस्ती को भेज दिया हे जो न सिर्फ रक्त तिलक के पजे से डाॅक्टर भसीन को निकालकर ले जाएगा, बल्कि हमारी. सारी प्रॉब्लम्स हल कर देगा I"

"कैसी प्राॅब्ल्लम्स?"

"हमारे लिए सबसे बडी. प्रॉब्लम्म रक्त तिलक है-डाक्टर भसीन के लिए इस्री से उसे टकराना है-जो उसके बारे में सुना है, उसके बूते पर मैं दावा पेश कर सकता हूं कि डॉक्टर भसीन तक पहुचते वह सारे रक्त तिलक को नेस्तनाबूद कर देगा ।"

"म. . मगर-आखिर वह गायब क्यों और कहा हो गया?"

"वह आजादी पसन्द लडका. हैं-यह बात उसे कतई पसन्द नहीं कि कोई उसकी कार्यप्रणाली पर नजर रखे-'चाहे नजर रखने वाला वहीँ हो, जिसकी मदद के लिए वह आया है I”

"क--- -कमाल का लडका है . . .उसे... "

कमरे में रखे टेलीफोन की घण्टी बज उठी…इबलीस का वाक्य अधूरा रह क्या जबकि सेमिनेरियन ने आगे बढकर रिसीवर उठा लिया बोला…"गार्जियन हीयर ।"

" स सर…वह जासूस एक मोटरसाइकल पर सवार होकर शहर की सडकों से गुजर रहा है…सभी लोग उसे हैरत से देख रहे हैं क्योंकि उसके कंधे पर एक बेहोश या मृत व्यक्ति पडा हे ।"

" उसका रुख किधर है?" .

"राष्ट्रपति महल की तरफ I,”
 
"आने दो !! कोई भी रोकने की कोशिश न करे ।" कहने के बाद उसने रिसीवर रख दिया…अभी गार्जियन इबलीस को सब कुछ बताने के लिए मुडा ही था कि बाहर से मोटरसाइकल के इजन की आवाज सुनाई दी ।

गार्जियन ने तीव्र स्वर में कहा---"वह आ गया है I"

कहने कै साथ ही वह एक खिडकी की तरफ़ भागा था I

ईबलीस भी लपका-राष्ट्रपत्ति भवन का वह दूसरी मजिल पर स्थित कमरा था....जिसकी खिडकी से दोनों ने नीचे, भवन के लॉन में झांका---सैनिकों के पहरे के बीच पोर्च में मोटरसाईकिल रुकी…इबलीस ने उस पर से उतरते लडके को ध्यान से देखा…वह आकर्षक था-बेहद सुन्दर था किन्तु चेहरे पर ऐसी मासुंमियत थी कि इबलीस को गार्जियन द्वारा . उसके लिए कहा गया एक-एक शब्द कोरी गप्प लगा ।

ॐॐॐॐॐ

गार्जियन नामक. सेमिनेरियन ने यह आदेश प्रसारित कर दिया कि मोटरसाईकल पर आए हुए लडके को कोई भी न रोके बल्कि पूरे सम्मान के साथ उसे इबलीस के पास लाया जाए उसे लाया गया ।

बेहोश युवक. विकास के कंधे पर ही था, जिसे कमरे मे प्रविष्ट होते ही उसने फर्श पर पटक दिया…वे उसे ध्यान से देख रहे थे जबकि विकास सिर्फ इबलीस की ही भौगोलिक स्थिति का अध्ययन का रहा था ।।

. कई क्षण तक. हाँल जैसे कमरे मेँ सन्नाटा व्याप्त रहा ।

एकाएक स्वय को सभालकर सबसे पहले गार्जियन ने कहा---"क्या आप ही इण्डियन एजेण्ट स्क्वायर डबल एक्स फाइव हैँ? "

" बेशक ।"

"वेलकम मिस्टर विकास I" कहने कै साथ ही वह आगे बढा ।

बिकास उससे हाथ मिलाता हुआ बोला... "हैलो-आप शायद सैमिनेरियन. जासूस......॥"

“मिस्टर गार्जियन I” उसने अपना नाम बताया ।

बिकास ने बताया…“अपने देश मे ही आपका, माननीय राष्ट्रपति का और सेमिनेरियन कर्नल मिस्टर तोम्बो का फोटो देख चुका दूं। फोटो दिखाते हुए मेरे चीफ ने कहा था कि राष्ट्रपति भवन में मेरी मुलाकात इन्हीं तीन हस्तियों… से होगी ।"

" थैक्यू !"

"कर्नल तोम्बो नजर नही आ रहे है।”

“वे अभी आते ही होंगे।”

"ओह ।” कहने के बाद बिकास एकाएक ही इबलीस की तरफ मुखातिब हुआ-"क्या बात है सर-आप चुप क्यों हैं?"

"आं ।” इबलीस चौंका, फिर जल्दी से सभलकर बोला-"क . . कुछ नही-हम आपके बारे मे ही सोच रहे थे-यह कि हमारे मुल्क में कदम रखते ही कम्बख्त बलवाइयों ने आप पर हमला. . . ।"

“ओह-इसकी परवाह मत कीजिए-मैं तेजी से काम करने का आदी हूं बल्कि मुझे तो खुशी है कि मजलिस्तान की जमीन पर कदम रखते ही मेरा स्वागत इस तरह किया गया…इस स्वागत से जाहिर है कि वे लोग भी एक्टिव हैं और इसीलिए विश्वासपूर्ण कहा जा सकता है कि मैँ. बहुत जल्दी डॉक्टर भसीन तक पहुच जाऊंगा…यदि दोनों पार्टियां अखाडे उतर जाएं तो फैसला जल्दी हो सकता है ।"

बेहोश युवक की तरफ इशारा करकै इबलीस ने पूछा…"यह कौन है?"

“आपके रक्त तिलक का एक सदस्य!"

"ओह…मगर ये आपके हाथ कहा से लग गया?"

विकास ने बिना किसी किस्म की लाग लपेट के पूरी बात बता दी दी…।

सुनकर इबलिस ने पूछां-"लेकिन आपने कार मे लगा माईक्रोफोन क्यों नष्ट कर दिया था?"

"इसलिए कि मुझे किसी के द्वारा भी अपनी निगरानी र्किया जाना पसन्द नहीं है I" सपाट स्वर में बिकास कहता ही चला गया…" कृप्या भविष्य मे भी इस बात का ध्यान रखें I."

"मगर वह प्रबन्ध तो आपकी सुरक्षा के लिए किया गया था…यह सोचकर कि यदि रास्ते में बलवाई आपके साथ कुछ गडबड करने की. चेष्टा करे तो फोरन ही सही मोके पर यहां से मदद भेजी जा सके ।"

“हालाकि अपने काम में मुझे किसी किस्म की मदद की जरूरत नहीं पडेगी और यदि कही विशेष परिस्थितियों मेँ पडी तो मैँ माग कर लूगा ।"

“जैसी आपकी मर्जी! "

" थैक्यू ॥"

एकाएक गार्जियन बोला…“क्या आप मेरे एक सवाल का जवाब , देंगे मिस्टर डबल एक्स फाइव?"

" . . जरूर पेछिए I"

" आपने बताया कि इस युवक को आपने एयरपोर्ट पर ही सदिग्ध अवस्था में देख लिया था और आप समझ गए थे कि रास्ते में जरूर कछ बखेडा होने वाला हे-फिर भी आप जानबूझकर उसी दिशा मे बढे जिधर आपकी समझ में खतरा था । ऐसा आपने क्यों किया?”

हल्की सी मुस्कान के साथ बिकास ने कहा…"इस सवाल का जवाब मैं माननीय राष्ट्रपति को दे चुका हूं।"

" ~ . . कब?”

"माइक्रोफोन पर बात करते समय ।"

" क्या?"

"हर अभियान पर मैँ सिर्फ खतरों से टकराने के जिए निकलता हूं उनसे कन्नी काटने के लिए नहीँ…क्योंकि खतरों से बचने की कोशिश करता रहने वाला मेरे पेशे का कोई भी व्यक्ति कामयाब नहीं . हो सकता-एयस्पोर्ट पर ही इस युबक की संदिग्ध हरकतो से में भांप गया था कि दुश्मन की तरफ़ से स्वागत की तैयारी हैं प्रबन्ध है-उसी तरह कार मे बैठते ही मेरी नजर जाली पर टिक थी-मैं यह तो समझ गया था कि खतरा है लेकिन यह नहीं… समझ सका था कि क्या खतरा है -…माइक्रोफोन पर जो कुछ मैने कहा वह सब तो आप जानते ही हैं…हा माइक्रोफोन को नष्ट करने से पहले मेंने कार की अंदर-बाहर से अच्छी तरह तलाशी ती थी !!"

"मुझें किसी टाईम बम की तलाश थी l I"

" टाइम बम !"

" कह चुका हूं…यह नहीं भाप सका था कि खतरा क्या है सोचा कि मुमकिन दुश्मनों ने इस कार को ही टाइम बम से उडाने का प्रबन्ध कर रखा हो परन्तु तलाशी के बाद मेरी वह धारणा निर्मूल निकली । फिर भी हर कदम पर सतर्कता मेरे पेशे की पहली जरूरत है । इसीलिए मैं समय रहते कार पर दस्ती बम फेकने वाले हाथ को देख सका ।"

"उफ…उन्होंने अपनी तरफ से आपको खत्म करने मे कोई कसर नहीं रखी थी I” …

"मुझे खुशी है कि दुश्मन टक्कर चाहता है ।“ उसकी इस बात पर इक्लीस और गार्जियन ने एक-दूसरे की तरफ देखा…तीन आखों में विकास के लिए हल्की-सी प्रशंसा के भाव थे…फिर इबलीस. ने कहा-"आप हमारे मेहमान हैं, अभी आए हैं, लम्बे सफर की थकान होगी…फिलहाल नहा लीजिए-बल्की बाते नाश्ते की टेबल पर होंगी I"

“फिलहाल न मुझे नहाने की जरूरत है न नाश्ते की ।"

" जी !"

.. बेहोश युवक की तरफ़ इशारा करके विकास ने कहा-"सबसे पहले मैं इससे अपने कुछ सवालों का जवाब चाहूगा और उसके लिए मै आपसे यह चाहूंगा कि इसे किसी कमरे मे मेरे साथ अकेला छोड दे l . बस, नहाने…आराम या नाश्ते की बात उसके बाद ही सोच सकूगा।”

इबलीस और गार्जियन हैरत में डूब गए ।

~ कंधे उचकाकर इबलीस ने कहा-"जैसी आपकी सर्जी ।"

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"ओफ्फो ।” विकास के बारे मे सुनता…सुनता कर्नल तोम्बा झुझला उठा…“तुमने तो हव्वा बना दिया उसे-आखिर है तो लडका. ही । कोई भूत-प्रेत तो नही है?"

"हा r” गार्जियन मुस्कराया…“हैँ तो लडका. ही I"

“सच" ।" इबलीस कह उठा…"शक्ल-सूरत से बिल्कुल नहीं लगता कि वह इतना खतरनाक होंगा-गोरा-चिट्य, ह्रष्ट-पुष्ट और खूबसूरत चेहरे और अर्द्ध घूंघराले बालों वाला बहुत ही आकर्षक लडका. है…चेहरे पर गज़ब की मासूमियत हे-ऐसी कि जैसे कुछ जानता ही न हो, लेकिन आते ही उसने जिस तरह बाते की…जिस तरह बेधडक. होकर खतरे से टकराने के लिए निकल पड़ा और जिस तरह आराम और नाश्ते से पहले आते ही अपने, काम में जुट गया, उससे लगता है कि वह सब सच है, जो मिस्टर गार्जियन उसके बारे में कह रहे है ।"

"तुम दोनों ने मुझे उसे देखने के लिए बेचैन कर दिया है ।"

"तभी देख सकोगे जब वह उस सामने वाले कमरे से बाहर निक्लेगा।"

"वहां क्या कर रहा है वह?"

"कहकर गया है कि कमरे के अन्दर से चाहे जैसी आवाजे आती रहें, लेकिन जव तक वह. खुद बाहर न निकल आए तब तक उसे डिस्टर्ब न किया जाए-उसी कमरे में वह बागी भी है, जिसे पकडकर लाया था…मेरा ख्याल है कि वह उसे टॉर्चर करेगा ।"

"हम आज़मा चुके हैं टॉर्चर से रक्त तिलक के सदस्य नहीं टूटते !"

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"बोल I” उसके समीप घुटनों पर बैठे विकास ने बाल पकडकर झझोडते हुए कहा…"सबसे पहले अपना नाम बता-क्या नाम है तेरा?"

“प. . .परमाल I” युवक ने हाफ्ते हुए कहा ।

“झूठ ।" गुर्राने के साथ ही विकास ने उसकी नाक पर इतनी जोर से टक्कर मारी कि वह मुह से एक चीख निकालता हुआ दुर जा गिरा…विकास खड़ा हुआ-उसकी तरफ बढा ।

एक ही टक्कर में युवक की नाक पिचक गई थी…चेहरा लहुलुहान ।

विकास ने झुककर उसका गिरेबान पकडा…जबरदस्ती अपने सामने खडा. करके गुर्राया-"तुम झूठ बोल रहे हो-तुम्हारा नाम परमाल नहीं है-असली नाम बोलो I"

"म.....मेरा नाम परमाल ही है।" ~

लडके का दायां घुटना फडाक से उसकी टार्गों कै जोड, पर पड़ा । कठ से मर्मान्तक चीख उबली । दर्द के कारण बिलबिलाता हुआ वह दुहरा हुआ जा रहा था, जबकि विकास ने दोनों हाथों से उसे, झझोडकर पूरी बेरहमी के साथ कहा-“बोल क्या नाम हैं तेरा?”

"प...परमा...।"

इस बार जो उसने कहना चाहा तो विकास जैसे पागल ही हो गया-युवक के सारे जिस्म पर वह दनादन घूसे बरसाता ही चला गया…-फिर टक्करे, ठोकरे--क्रोहनियों और घुटनों से विकास उस पर इस कदर पिल पड़ा, जैसे वह किसी इंसानी जिस्म पर नहीं; बल्कि रुई की गठरी पर वार कर रहा हो । कमरे में युवक की चीख ही गूज रही थी ।

"ठ. . .ठहरो-ब. . .बताता हूं I" एकाएक चीख पड़ा ।

उसके बाल जकड़े विकास ने पूछा--"नाम I"

"इ. . इशाक I"

"हुं-अब आया लाइन पर-तू सोचता था कि. तेरा नाम मालूम नहीं था-शायद तू भूल गया था कि झाडियों. मे तेरे साथी ने......

तेरा नाम लेकर रुकने के लिए कहा था-उस वक्त मैँ भी वहीँ था । नाम सिर्फ यह जानने के लिए पूछ रहा था कि तू झूठ बोल रहा है या सच?"

बुरी तरह लहूलुहान और जख्मी युवक हाफता रहा ।

विकासं ने पूछा--"तुम्हारे दल का नाम रक्त तिलक है न? "

उसने हा मे गरदन हिलाई ।

"मुझें मारने की योजना थी न? "

इशाक ने पुन गरदन हिलाई ।

" क्या योजना थी?"

" म मैंने तुम्हें एयरपोर्ट पर उतरते ही पहचान लिया था । हमारे सरदार ने तुम्हारा फोटो मुझें दिखाया था और यह भी कहा था कि उस फ्लाइट से उतरने वाला सबसे लम्बा और खूबसूरत युवक बिकास हीँ होगा ।"

" फिर ?”

"सरदार ने पहले ही हम तीनो को अपना-अपना काम समझा दिया था-प्रोग्राम कै मुताबिक वूथ से मैंने सरदार को तुम्हारे आगमन की सूचना दे दी काली कार में बैठकर उसी रास्ते पर चल दिए जिस पर पहले ही वे दोनों कार को दस्तीबम से उडाने के लिए बैठे थे…मुझे सरदार की तरफ से जो आदेश थे वही किया-एयरपोर्ट से तुम्हारे रवाना होने के पाच मिनट बाद मैंने मोटरसाइकल उठाई और उसी रास्ते पर रवाना हो गया-योजना के मुताबिक मेरे वहा पहुचने तक उन दोनों को कार सहित तुम्हें खत्म करना था-मेरा काम सिर्फ अपने दोनों साथियों. को लेकर ठिकाने की तरफ कूच कर जाना था ।

"रास्ते में तुम्हें ड्राइवर मिला था?"

" हां !"

"उसे देखकर तुमने क्या सोचा?” '

" कछ समझ नहीं सका…यही अनुमान लगा पाया कि किसी कारणवश तुमने उसे कार से बाहर निकाल दिया है…जिस वक्त मैँ घटनास्थल पर पहुचा उस वक्त मैं यह नहीं सोच पाया कि हालात पर -उल्टे तुम ही हावी हो गए हो…तुम्हारी कार एक पेड से टकराई हुई जल रही थी-सडक पर पडी लाश को दूर से मैं तुम्हारी समझा-मैं समझा कि मेरे साथी अपने क्राम में सफ़ल हो गए हैं तभी तो मोटरसाइकल चलाता हुआ वहा; पहुच गया…अपने साथी की आवाज सुनकर सतर्क भी हुआ लेकिन तब तक देर हो चुकी थी !"

" तुम्हारा अडडा कहा 'है?"

इस प्रश्व पर इशाक चुप रह गया ।

उसे झझोडकर विकास गुर्राया-“जवाब दो ।"

"मै इस सवाल का जवाब नही दे सकता।"

" रक्त तिलक के सरदार का नाम?"

सहमे हुए इशाक ने कहा… " रक्त तिलक में विश्वास रखने वाला चिडिया का एक बच्चा भी इन दो सवालों में से किसी एक का भी ज़वाब नहीं दे सकता ।"

“तुम्हें मेरे हर सबाल का जवाब देना होगा इशाक ।"

"किसी भी कीमत पर नहीं ।" इशाक का स्वर दृढ हो गया…"तुम जान से मार डालने से ज्यादा मेरा कुछ नहीं बिगाड सकते-हम मरने में नहीं डरते-बेशक मार डालो लेकिन सरदार का नाम या अड्डे का पता मैं किसी भी कीमत पर नहीं बता सकता I”

“तुम्हें बताना होगा ।"

"नहीं ।"

अचानक ही इशाक के इस अडिंयलपन ने विकास के चेहरे को भभका दिय-लडके के जबडे कस गए-मुह से किसी भडिए की-सी गुर्राहट निकली-" जवाब दो ।"

"न नहीं-आह-आह ।"

एक बार फिर सारा 'कमरा इशाक की चीखों' से झनझना उठा ।

विकास ने गोली से उसकी टाग मे बने जख्स में अपनी उगली धुसेड दी-इशाक हलाल होते बकरे की तरह मिमिया उठा I

जख्म से तेज बहाव के साथ गाढा खून बहने लगा । इशाक का सारा चेहरा पसीने-पसीने हो गया…दात भीचे असहनीय पीडा को पीने. की चेष्टा कर रहा था वह जबकि विकास पूरी बेरहमी के साथ उसके जख्म में अपनी उगली घूसेडडता ही चला गया…यहा तक कि पूरी उगली ज़ख्म के अन्दर धुस गई। बिलबिलाता हुआ इशाक दात भीचे-नहीँ नही कहता रहा ।

बिकास ने उगली बाहर खींची-न सिर्फ उगली बल्कि सारा हाथ ही खून से लथपथ हो गया था और ठीक वेसा ही सुर्ख पड गया था लडके का चेहरा-बिलबिलाते हुए इशाक के मुह से चीखें निकल रही थी…विकास ने झपटकर उसका गिरेबान पकडा और फिर जैसे कोई जगली भेडिया गुर्राया…"बोलो l"

"न . . .नहीं I” इसके बाद तो लडका जैसे पागल ही हो उठा-एक ही झटके में इशाक की कमीज़ तार-त्तार हो गई…विकास सिर्फ उसकी कमीज ही फाडकर नहीँ रह गया, बल्कि किसी वहशी के समान उसके जिस्म पर मौजूद सभी कपडे तार-तार कर दिए-जिस्म पर एक रेशा भी नही ।

इशाक नग्न हो गया…जन्मजात ।

विकास ने झटके के साथ अपनी जेब से ताजा ब्लेड निकाला । ब्लेड की पैकिग खोलते हुए लडके, ने कहा…“एक बार जो मेरे हाथे चढ जाता है इशाक-या तो. उसे जुबान खोलनी पडत्ती है या मैं हमेशा के लिए उसे खामोश कर देता हूं-इस ब्लेड से मैं तुम्हारी चमडी उधेड़ दूगा और यह सिलसिला या तो तुम्हारी जुबान खुलने पर ही रुकेगा या तुम्हारी मौत पर. I"

. . इशाक रोता-तडपता ओर चीखता रहा । ताजा ब्लेड का एक धारदार सिरा विकास ने उसकी छाती पर रखा, गुर्राया-"मुझें तीन सवालों का ज़वाब चाहिए-सरदार का नाम, अड्डे का पता औंर डॉक्टर भसीन के बारे में पूरी जानकारी-बोलो I"

“न. . . ।"

और…ब्लेड को खाल में गडाकर नीचे की तरफ एक रेखा-सी खीचता ही चला गया जालिम । . .

जैसे यह रेखा उसने किसी इंसानी जिस्म पर नहीं, बल्कि कागज पर खींची हो…इशाक हलाल होते बकरे की तरह बिलबिलाता ही रह गया…सीने से पेट तक खूनी रेखा खिचती चली गई…विकास ने बाएं हाथ की दो उगलियों' और अनूठे की ,मदद से कटी खाल का सिरा पकड़ा ।

एक झटका दिया ।

इशाक हलक फाड उठा…प्याज के छिलके की तरह खाल जिस्म से अलग हो गई ।

फिर एक और रेखा…खाल उतार लेने का वही क्रम । इशाक चीखता रहा-रोता रहा-मगर लडका नहीं रुका-उस कम्बख्त के जिस्म में रहम कहां…यदी रहम होता तो दुनिया उसे बेरहम क्यों कहा कहती?

दरिंन्दा और वहशी क्यों कहा करती?

कोई कसाई भी उतनी बेरहमी से बकरे कै साथ पेश नहीँ आ सकता....

जितनी बेरहमी से वह अपने दुश्मनों के साथ पेश आता था ।चारों तरफ खून-ही-खून बिखर गया खाल के चीथडे बिखर गए उस जालिम ने इशाक के जिस्म के हर हिस्से से खाल नोच' ली तव एक वार फिर पूछा-" बोलल-जवाब दे।"

रक्त तिलक के उस सदस्य का जवाब था…“न नही ।"

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कमरे के अन्दर से कुछ इस किस्म की आबाजे आ रही थी कि इबलीस के साथ-साथ गार्जियन और कर्नल तोंम्बो तक के रोंगटे खडे हो गए…उनमैं से कभी किसी ने किसी इसान को इस कदर मिमियाते नहीं सुना था-यू लग रहा था जैसे कोइ कसाई,` किसी आरी से धीरे धार जीवित बकरे की गर्दन रेत रहा हो । क्लेजो को दहला देने वाली चीखें…बिलबिलाहटे । वे कमरे के समीप सरक आए-चेहरे पीले-जर्द पढ़ गए । फिर अचानक ही-कमरे. के अन्दर से किसी भी किस्म की आवाज आनी बन्द हो गई-

झटके से दरबाजा खुला-दरवाजे के बीचो बीच एक हिस्सा पशु खडा नजर आया ।

हा…वह लडका नहीं था ।

वह नहीं था जिसे इबलीस और गार्जियन ने इशाक को लेकर इस कमरे में दाखिल होते देखा था-शक्ल सूरत में दो टार्गों पर खडा आदमखोर भेडिया लग रहा था…चेहरे पर हर तरफ पशुता थी--जिसे उन्होने अन्दर जाते देखा था उसके चेहरे पर तो मासूमियत थी भोलापन था I

मगर इस वक्त तो मानो ....हा कोई दरिन्दा खंडा था I खून से लथपथ ।

स्कवायर डबल एक्स फाइव को देखते ही उनके जिस्मो में झुरझुरी-सी दौड गई…बह आगे बढा-इबलीस तोम्बो और गार्जियन जैसे फर्श से चिपककर रह गए थे।

उनके नजदीक पहुचकर विकास गम्भीर स्वर में बोला…"इशाक मर गया है ।

" क कछ बताया?" गार्जियन ने साहस किया ।

"नही-और इतने सख्त व्यक्ति मेरी जिन्दगी मे कम ही आए । जाने क्या बात थी कि उनमें से कोई भी आता सवाल करने का साहस न जुटा सका ।"

विकास ने कहा… "मेरा कमरा दिखाया जाए…नहाने के बाद मुझे आप लोगों से कुछ बात करनी हे l”

“आओ I" सूखे हलक से कहकर गार्जियन एक तरफ़ को बढ गया ।डबल एक्स फाइव उसके पीछे हो लिया जबकि कर्नल तोम्बो की आखें उस पर चिपककर रह गई थीं ।

वह एक मोड पर गुम हो गया I

"आओ ।" इबलीस ने कहा-“देखें तो सही कि उसने कमरे में क्या किया था?”

र्क्नल ने कुछ बोलना चाहा परतु उसके मुह से कोई आवाज न निकल सकी…जुडा को मार क्या था I

यत्रचलित-सा वह स्वय ही इबलीस के साथ कमरे की तरफ़ बढ गया ।

दरवाजे पर पहुचते ही दोनों के हलक से जबरदस्त चीख उबल पडी-दहलकर दो क्या, पीछे हट गए थे वे-जैसे कमरे में किसी साप क्रो देख लिया हो ।

आखे फट पडी-चेहरे सूत गए ।

दृश्य ही ऐसा था ।

मौत को भी थरथरा देने वाला I

कमरे के फ़र्श पर खून बह रहा था I क्या…बहां उघडी हुई खाल ~ पडी थी-क्रिसी आदमखोर जानबर की खोह सा लगा वह कमरा ।

ऐसा जहा जानवर ने अभी अभी अपने शिकार का भक्षण किया हो ।

सारे कमरे में खून की वर्षा हो रही थी-सीलिग फैन चल रहा था I उस

पर लटक रहा था-इसानी आकार के गोश्त का लोथडा-नग्न खाल रहित ।

उसी कै खून के दीवारों पर छींटे पड रहे थे ।

"उफ्फ! ” कर्नल तोम्बो बडबडा उठा… भरत्तीय सरकार ने जासूस

भेजा हे या दरिन्दा? "

"ये लडका तो सचमुच उससे भी कई गुना आगे है गार्जियन जितना तुमने बताया था ।" क्रर्नल तोम्बो ने अपनी अन्तरात्मा से निकलने वाले विचारों को रोका नहीँ-“मेरी आखों के सामने अभी तक उस कमरे का दृश्य नाच रहा हे-उफ्फ्-वह कमरा था या किसी आदमखोर शेर की गाद I "

"हमे ऐसे ही आदमी की जरूरत थी I" इबदीस ने कहा I .

"क्या मतलव?”

"इन कम्बख्त 'रक्त तिलक' वालों ने नाक मे दम कर रखा है । संभाले नहीँ संभल रहे-सोते-जागते यही डर लगा रहता है कि जाने कब-रक्त तिलक की बुलेट हमारे परखच्चे उडा- दे ।"

“इनमें सबसे बडी. बिशेफ्ता तो ये है कि यदि एक पकड़ा जाए तो दूसरे का पता नहीं बताता I"

"अब वह विशेषता ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी ।"

“कैसे?"

इबलीस बोला-"इस थोडी-सी देर में ही मैंने जो कुछ देखा हे, उससे मुझें चेन मिला हे…मैं दावे के साथ कह सकता' हू कि वह लडका. हफ्ता-दस दिन में ही ऐसी हालाता कर देगाकि सारे मुल्क में रक्त तिलक का नामलेवा…पानीदेवा नहीं होगा I”

"सचमुच स्क्वायल एक्स फाइव . ।"

अभी गार्जियन कुछ कहने ही जा रहा था कि रुक गया…इबलीस और तोम्बो के पीछे देख रहा था वह्र-नजर चिपककर रह गई थी…त्तोम्बो ने कहा-"हां-हां-तुम चुप क्यों हो गए गार्जियन?"

"वे आ गए हैं ।" वह बडबडा-सा उठा ।

इबलीस. और तोम्बो ने कुर्सी पर बेठे-ही-बेठे एक साथ घूमकर पीछे देखा-गार्जियन'की तरह उनकी दृष्टि भी चिपक कर रह गई । वह आ रहा था-वह्र जो खूब लम्बा था ।

. वह, वह नहीं था जिसे कर्नल तोम्बो ने उस कमरे से निकलते देखा था । वह कामदेव-सा था-खूब सुन्दर ।

भोला-भाला-मासूम-सा।

गुलाबी होंठों पर बडी, ही प्यारी मुस्कान लिए लम्बे लम्बे कदमों कै साथ चला आ रहा था वह्र-उसक्री आखों में चमक थी…जिस्म पर हस के रग जेसी बेलबॉटम और उस पर छाती और बाजुओं पर कसा हुआ काले रग का जालीदार बनियान-पैरो में चमकदार जूते ।

"हेलो ।" उसने डायनिग टेबल के नजदीक पहुचकर कहा ।

तीनों एक साथ, मानो स्वप्न से जागे सब कह उठे-"हैलो ।"

वह खड़ा रहा । . . गार्जियन ने शीघ्र ही स्वयं को संभालकर एक खाली कुर्सी की तरफ इशारा किया-"बैठिए ।"

विकास बैठ गया ।

राष्ट्रपति, इबलीस के आदेश पर नाश्ता, लगाया जाने लगा ।

..........................

एकदम ही किसी को ऐसा कोई विषय न सूझा जिस पर वार्ता की जा सकती अजीव-सा तनाव छा गया-गार्जियन ने एक सिगार सुलगाने का उपक्रम करके खुद को उस तनाव से मुक्त किया-उसने सिगार विकास को भी पेश किया था, किंतु विकास ने-बड़े शालीनतापूर्वक कहा कि वह सिगार नहीं पीता-क्रर्नल तोम्बो ने भी एक सिंगार सुलगाया I विकास ने कहा-“क्षमा करे-मैँ शाकाहारी हूं।"

"हम जानते हैं ।" गार्जियन बोला-“आपके लिए शाकाहारी नाश्ते का ही इन्तजाम किया गया और यह भी पता है कि आप शराब नहीं पीते--आपके लिए कांफी बनाई गई है I"

“थैक्यू-वेसे आपको शायद कर्नल तोम्बो कहते हैं I"

"ज़. . .जी हा I" कर्नल तोम्बो ने हाथ बढा दिया । मेज-के ऊपर हाथ मिले…जाने क्यों कर्नल तोम्बो की रीढ की हड्डी में एक सिहरन-सी दौड गई…बोला-"आपने कमाल कर दिया I"

"कमाल-ऐसा क्या कमाल किया है मैँने?"

"रक्त तिलक के हमले को नाकाम करके और उनके एक सदस्य को पकडकर ।"

"ओह-आप उसे कमाल समझ रहे हैं! जी नहीँ-उसमेँ कमाल जैसी कोई बात नहीं है-वहतो मेरे पेशे का रुटीन हैँ-मगर सच्चाई तो ये हे कि मैं इशाक नामक उस आदमी से प्रभावित हुआ-ऐसे लोगों को मैँ उगलिर्यो पर गिन सकता हू जिन्होने मेरी गिरफ्त में फसने के बावजूद भी जुबान नहीं खोली…इशाक भी उनमे से एक रहा-वह मर गया, लेकिन किसी भी _ऐसे सवाल का जवाब नहीं दिया, जिससे दल या साथियों को कोई नुकसान होता I”

"यही तो हमारे लिए सबसे बडी दिक्कत है ।”

"मै समझा नहीं I”

"अकेला इशाक ही ऐसा नहीं था, बल्कि अभी तक रक्त तिलक के जितने भी सदस्य पक्रड़े गए हैं उन सभी ने इशाक की तरह जुबान वन्द रखी । हर तरह से टॉर्चर किया गया, वे अडिग रहे…रक्त तिलक कै सदस्यों में यह विशेषता हे-हम जानकारी के लिए बता दे कि हमारे ख्याल से भविष्य में भी आप टॉर्चर के द्वारा रक्त तिलक के किसी सदस्य से कुछ नहीँ उगलवा सकेंगे I"

"हालाकि मुझें आपके ख्याल की सच्चाई पे शक है, लेकिन यदि ऐसा है तो मै न सिर्फ इशाक ही से प्रभावित हूं बल्कि 'रक्त तिलक‘ नामक पूरे दल से प्रभावित हूं I"

"ज..... जी?"

लडके ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा-"मेरे गुरुओं ने हमेशा मुझे अपने दुश्मनों की खूबियों को स्वीकार करने और उनका खुल दिले तारीफ करने की तालीम दी है !"

" अ आपके गुरु---क्या आपके कोई गुरु भी हैं?"

" एक या दो नही , बल्कि मेरे चार गुरु हें`-विजय…अंलफासे…… जैकी और जैक्सन ।"

"जी हम समझे नहीं !"

"छोडिए-लम्बा किस्सा है-मैं नाश्ते की इसी मेज पर आपसे कुछ सवाल का जवाब चाहूगा ।"

" जरूर !"

नाश्ता शुरू हो चुका था…पनीर के पकोडे का एक पीस उठाकर मुह में रखते हुए विकास ने पूछ-- "मैंने राजधानी में हर स्थान पर एक तनाव-सा महसूस किया है…चप्पे-चप्पे पर तैनात सेनिक देखे हैं । सबसे पहले मै इस सबका कारण जानना चाहूगा ।"

" यह सब सिर्फ रक्त तिलक के कारण ही है l"

"क्या रक्त तिलक इतना ज्यादा शक्तिशाली कि उससे हमेशा खतरा बना रहता है ? "

"जीहा I"

"लेकिन-विश्व कै अखबारों में तो ऐसा कुछ नहीं छपता-कई ब्रार मैंने खुद मजलिस्तान रेडियो भी सुना हे…हर बार यहा कहा गया पूर्ण शांति है…कही तनाव नहीं है और फिर, रक्त तिलक किसी दल का तो कहीँ रचमात्र भी जिक्र नहीं किया, गया ।"

"हम भला देश विदेश मेँ इस किस्म की खबरे कैसे प्रसारित कर सकते हैं?”

"क्यों नहीं कर सकते? "

“इस किस्म की खबरों से मुल्क में तनाव का वातावरण बनता है, अफबाहे फैलाने वालों को. मदद मिलती है और फिर रक्त तिलक के पीछे पश्चिमी मुल्क की ताकत हे--मजलिस्तान पर हमारी हकूमत उसकी आखों की किरकिरीं बनी हुई है वह तो उस मोके की तलाश में हे जबकि यहा खुद कब्जा कर सके !"

"ओह-सीधे यू कहिए न कि प्रेस सेंसरशिप लागू है !"

"हम उसके कारण बता रहे थे I”

"खैर-मुझे इस मुल्क कै भीतरी हालात या इससे सावन्धित अन्तर्राष्ट्रिय पॉलिटिक्स से, कुछ नहीं लेना है-मैं सिर्फ र्डोंक्टर भसीन के लिए यहां आया हू…डॉक्टर भसीन रक्त तिलक के कब्जे में है। मेरा आपसे एकमात्र सवाल यह है कि रक्त तिलक के बारे में आप जो कुछ जानते हों बता र्दे।"

"मुसीबत तो यही है कि हम खुद भी रक्त तिलक के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते I"

"जितनां भी जानते हैँ I"
 
"सिर्फ इतना ही कि यह पश्चिमी धन और ताकत से चलने बाला एक ऐसा दल है, जिसने हमारे मुल्क के लोगों को गुमराह करके अपना सदस्य बना लिया है I" इबलीस ने बताया-"उनका मकसद मेरी सरकार का तख्ता पलट देना है । सिर्फ इसलिए, क्योंकि मैं सेमिनार और भारत का दोस्त हू…वे इस मुल्क पर अपने किसी पिट्ठू का कब्जा चाहते हैताकि इस क्षेत्र में उनकी ताकत बढ, सके I"

"क्या आपको हल्का-सा भी यह इल्म है कि उन्होने डॉक्टर भसीन

को कहां रखा होगा?”

" बदनसीबी से नहीं।"

“ मतलब यह कि फिलहाल मेरे काम की आपके मास कोई जानकारी नहीं हे?"

"ऐसा हीँ लगता है I"

“कोई बात नहीँ…मैँ खुद ही पता निकाल लूंगा लेकिन. . . l"

"लेक्लि क्या?”

" उफ्फ l" एकाएक ही विकास ने परेशानी के-से अन्दाज में माथे परं हाथ मारा -ओर बोला-"विजय गुरु ने तो कहा था कि मैं पायजामे में रहकर काम करू…यहां पायजामे से बाहर निकले बिना काम होता नजर नहीं आ रहा हे-वाह गुरु…तुमने भी कहा लाकर मारा हे?"

विकास स्वयं ही बडबडाए.. जा रहा था ।

तीनों ही चकित भाव से विकास को देखने लगे--एक पल के लिए तो उन्हें यूं लगा कि कहीं यह लडका सचमुच थोड़ा क्रैक तो नहीं -उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बडबडा.. रहा है और...

एकाएक. कर्नल तोम्बो ने कहा-"क्या हुआ मिस्टर विकास?"

"कुछ नहीं I"

“कुछ तो हे…अचानक ही आप यह क्या बडवडाने.. लगे हैं?"

“ दरअसल बात यह है कि मेरा काम करने का तरीका दुनिया के शायद सभी जासूसो से अलग हे-मुसीबत यह है कि मेरा वह तरीका मेरे गुरुओं तक भी पसन्द नही-विशेष रूप से नंबर एक गुरु तो बिल्कुल पसन्द नहीं करते-उन्होंने विशेष रूप से मुझे यहां भेजते समय कहा था कि वह तरीका इस्तेमाल न करू ।”

“अखिर-ऐसा वह कैसा तरीका है?"

“उसे छोडिये-जब साला इस्तेमाल ही नहीं करना तो उसे याद करने से ही क्या लाभ…मगर 'मुसीबत' तो ये है कि उसके आलावा मुझें दूसरा कोई तरीका आता भी नही हे-अगर मुझ पर पायजामे में रहने की बन्दिश ऩ लगी होती तो दो-चार घटे. में ही डाक्टर भसीन तक पहुच जाता…-लेकिन अब…अब क्या करूं…कहां से लाऊ जादु का वह डडा जो बता दे कि डाक्टर भसीन कहा है?"

"जाने आप क्या कह रहे हैं?”

"मेरे कहने को छोडिए-दरअसल मुझे बडवडाने… की बीमारी है !"

“ जी ।"

"जी हां-नाश्ता करते-करते जब मेरा पेट ज्यादा भर जाता है तो मै बडबडाने लगता हूं ।"

अर्थ समझने बाद-अचानक ही तीनों के मुह से एक साथ जबरदस्त ठहाका निकल गया--.राष्ट्रपति भवन का वह लम्बा-चौड़ा ड्यानिग हाँल ठहाकों से गूंज उठा।

विकास बिल्कुल नहीं हस रहा था ।

वे लोग बिकास कै यह बताने कें अंदाज पऱ हस रहे थे कि अब उसका पेट भर चुका है ।

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सारी बात सुनने के बाद अठारह वर्षीय खूबसूरत मुमताज का सिन्दूरी चेहरा पत्थर के कोयले की तरह काला-खुरदरा और सख्त पड़ गया-एक जबरदस्त घूसा उसने सामने पडी मेज पर मारा और झटके के साथ खडी. हो गई - ऊँचे स्वर में कह उठी…"हम उस भारतीय जासूस. को जिन्दा नहीं छोडेंगे. मेजर अकल-उसकी बोटी-बोटी काटकर इस मुल्क के चील…कौओं के सामने डाल देगे हम ।"

वे सभी काप उठे जो इस वक्त उसे देख रहे थे ।

मेजर हाशमी के अलावा उस बडी-सी मेज के चारों तरफ सुल्तान, रहीम और करीम चाचा बेठे थे-मेज के ठीक ऊपर एक फोकस लटक रहा था-वल्ब की रोशनी के एक बहुत बडे दायरे ने मेज को घेर रखा था । चेहरा स्पष्ट चमक रहा था…-सभी की आखें मुमताज पर स्थिर थीं । मुफ्ताज के जिस्म पर काली पतलून-बैसी हों कमीज और हाथों में सफेद दस्ताने थे , पैरों में भारी बूट पहनं हुए थी वह-सिर के वाल सख्ती के साथ जूडे की शक्ल में बधे हुए थे । एकाएक मेजर हाशमी ने कहा…“खुद को सभालो वेटा ।"

"क कैसे अकल-आप ही बोलिए कि हम खुद को कैसे संभाले? कब तक इस दिल में भभक रहे ज्वालामुखी को फ़टने से रोके…आपने भी तो देखा है-कितना जुल्म हो रहा है हम पर?”

"फिर भी बेटी....॥"

"नहीं मेज़र अक्ल…अव नहीं सहा जाता---"'उफ्फ' उस दरिन्दे ने इशाक के जिस्म की खाल नोंच ली-टाँर्चर करते-करते मार डाला उसे-लाश पखे पर लटका दी-हम इशाक पर हुए जुल्म का बदला लेंगे…इशाक के खून की एक-एक बूद की कीमत. बसूल की जाएगी मेजर साहब ।"

"ऐसा जरूर होगा बेटी-लेकिन I”

"ल लेकिन?” मुमताज गुर्रा-सी उठी ।

" हमे जोश से नहीँ-होश से काम लेना चाहिए… I"

"होश !" मुमताज का भभकता स्वर… " उन्हे होश कहा अकल जिनका आशिया जल रहा हे-वे होश में रहें तो कैसे जिनकी आखों के सामने गुलिस्ता की लाज लूटी जा रही है? उस हरामखोर इबलीस ने

पहले विदेशियों की मदद से सारे मुल्कुल पर कब्जा किया-हम आजादी के लिए लड रहे हैं और अब हमे कुचलने के लिए भारतीय जासूस बुलाया हे-बडा आकर्षक नम्बर है उसका-डबल एक्स पाइब-हम उसके जिस्म के पाच ही टुकडे करेगे अक्ल-ह्म बिकास को उसो ॰

तरह मारेंगे जैसे उसने इशाक को...!"

" खुद को संभालो मुमताज !"

आखों में आसू लिए-दात भीचकर मुमताज कह उठी-"अब तो सभलने का भी मन नहीं है अकल-जुल्म की हद हो चुकी है ! पिता मारे गए-हमारी-मा उस वक्त जालिमों की गोलियो का शिकार हो गई जब आप हमें राष्ट्रपति भवन से निकालकर ला रहे थे…कब तक सब्र करें अकल आज़ हमारे पास सेकडो देशभक्त युवक है-जी तो ये चाहता है कि सबको हुक्म दे दे…कह, दें कि राष्ट्रपति भवन में मौजूद एक-एक जालिम के परखच्चे उडा दे-मार दे या मंर जाए ।"

“अभी वह वक्त नहीं आया मुमताजI"

“वह वक्त कब आएगा अंकल ...कब आएगा?”

"खुदा ने चाहा तो जल्दी ही ।"

"वह वक्त न सही…-लेकिन हम विकास को बहुत देर तक जिन्दा नहीं देख सकते अंकल---हम यह सहन नही कर सकत्ते कि डबल एक्स फाईब राजधानी की सडकों पर दनदनाता रहे…इशाक के हत्यारे के खून से अपने हाथ रगने के लिए हमारा दिल मचल रहा है ।"

"ऐसा करना गलत होगा मुमताज ।" एकाएक वहा छठी आबाज गूजी-मुमताज और हाशमी सहित एक झटके से सबकी नज़र आवाज की दिशा मे घूम गई ।

" सरदार ।" एक साथ सभी. बडबड़ा उठे।

कमरे के अंधेरे कोने, में एक लम्बा. इसानी साया लहराता नजर आया… बडी अजीब-सी भराई आवाज निकली थी उसके मुह से । इस विशेष आबाज के जरिए ही अपने सरदार को पहचान लेते थे…वह मेज की तरफ़ बढा-स्याह कपडे और. नकाब रोशनी में नहा उठे l

लाल आखें उन सभी कौ घूर रही थ्री I साहस करके मुमताज ने कहा…"सरदार उसने.....॥"

"हम जानते हैं ।"

"फिर भी आप कहरहे हैँ कि बदला न लिया जाए ।"

गम्भीर स्वर-- "क्योंकि उससे बदला लिया ही नहीं जा सकता ।"

" . क्या मतलब?" हाशमी. ने पूछा ॥

"गजब की ताकत-वुस्ती' फुर्ती-बुद्धिमानी और मक्कारियों के एक पुतले को भारतीय सीकेट सर्विस ने नम्बर डबल एक्स फाइट नाम दिया है-यदि हम उसे खत्म करने के चक्कर में पडे तो यकीनन वह सारे रक्त तिलक. क्रो नेस्तनाबूद कर सकता है ।"

" य यह आप कह रहे हैं सरदार…आप-जौ हमेशा खुद को अजेय कहा करते हैं?”

"उस लडके में चंद खासियतें ही ऐसी हैं ।"

"हुंह !" एकाएक मुमताज घृणात्मक स्वर मे कह उठी- 'खासीयते' ॥ माफ करना सरदार-मे नहीँ जानती कि आप उसकी कौन-सी खासियत का जिक्र कर रहे हैं-जो सुना है उससे लगता तो यह है कि उसके सीने मे दिल नही हे-वह जानवर हे…आदमखोर जानवर-उसे और कहा भी क्या जा सकता. है सरदार जो प्याज के छिलके की तरह... इंसानी जिस्म से खाल नोंच डाले. ।"
 
"अपने दुश्मनों कै लिए वह हमेशा आदमखोर ही बना रहता है l"

"और हम भी उसके दुश्मन हैं।”

" पासे पलट भी सकते हैं, यानी वह हमारा दोस्त भी बन सकता !"

" दोस्त?" मेजर हाशमी का चकित स्वर ।

"हां-और विकास नाम है दोस्तों कै दोस्त का-यारों के यार, का…यदि एक वार वह हमारा दोस्त बन जाए तो फिर रक्त तिलक के लिए वह अपनी जान की बाजी लगा सकता है I"

'"म. . .मगर~एक भारतीय जासूस हमारा-दोस्त बन ही कैसे सकता है सरदार…इबलीस अपने जिन आकाओं की मदद से गद्दी पर बैठा है, उनकी भारत से मित्रता है और एक भारतीय. जासूस किसी भी कीमत पर सेमिनार कै खिलाफ हमारा दोस्त कैसे बन सकता है?"

~ "विकास बन सकता है-हमारे पास एक तरक्रीब है ।"

एकाएक मुमताज कह उठी…"हमें उसे हरगिज भी अपना दोस्त नहीं बनाना हे I"

"क्यो?" सरदार ने पूछा। . .

"हमें उससे नफ़रत हे I"

"मुमताज ।" सरदार का गम्भीर स्वर-"हममें से कोई व्यक्ति बडा,है या मुल्क...?" …

" मुल्क !"

" फिर मुल्क की बेहतरी के लिए हमेँ यह भूल जाना चाहिए कि व्यक्तिगत स्तर पर हम किससे नफरत्त और किससे मोहब्बत करते हैं-यदि वह भी हमारे मुल्क कै लिए कुछ कर सकता है, जिससे हमें सख्त घृणा है तो हमे उसकी मदद लेने मे हिचकना नहीं चाहिए ।"

"म. . मगर हमारे तीन साथियों को मारा है सरदार ।”

"यदि वह हमारा दोस्त बन जाए तों इसी तरह हमारे दुश्मनों को मारेगा I”

~ "ऐसा आखिर वह क्या है, जिससे आप इतने प्रभावित हैं?"

"-यह तुमने वहुत अच्छा सवाल किया है मुमताज, लेकिन हृमैं अफसोस है कि इसका जवाब अल्फाज में नहीं दिया जा सकता हैं---वह क्या है~यह बताने के लिए दरअसल अभी किसी शब्दकोष में सही अल्फाज ही नहीं बने हैँ…वत्त तुम्हें. उसका परिचय खुद दे देगा !"

" हमने आज तक आपकै मुंह से किसी की इतनी तारीफ़ नहीं सुनी !"

"वेसा कोई दुनिया में है भी तो नहीं।"

"वह कर ही क्या सकता है?"

"ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वह न कर सकै-यदि विकास~उनकै साथ रहा तो यकीनन रक्त तिलक को नेस्तनाबूद कर देगा…यदि हम उसे अपना दोस्त बनाने में कामयाब हो गए तो कामयाबी हमारो झोली मे होगी…कामयाबी का दूसरा चाम डबल एक्स फाइव है ।"

मुमताज चुप रह गई किंन्तु मुखडे पर अब भी ऐसे ही भाव थे जैसे सरदार की बात से बिल्कुल सहमत न हो…विकास से दोस्ती की बात वह सोच भी नहीं सकत्ती थी । एक पल के सन्नाटे के बाद सरदार ने कहा…"शायद तुम खुद को उसकी मदद लेने के लिए तैयार नहीँ कर पा रही हो?”

"जी ।"

" व्यक्तिगत जज्जातों क्रो दिल से निकाल दो मुमताज-मुत्क की बेहतरी के लिए यह हमारा हुक्म है कि तुम उसके साथ वेसा ही व्यवहार करोगी जैसा हम कहेगे I”

! आपके हुक्म कै बाद तो सब कुछ खत्म हो ही जाता है ।"

"गुड ।" सरदार ने कहा---"अड तुम लोग हमारी योजना सुनो ।"

वे सभी खामोश रहे…जैसे गूगे हो -सरदार उन्हें योजना बताने लगा । .

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रात कै करीब ग्यारह बजे तक बिकास एक कार लिए राजधानी की सडकों पर घूमता रह्य-इबलीस ने कहा था कि अपनी मदद के लिए वह कुछ सेनिक साथ ले ले क्योंकि रक्त तिलक की तरफ से पुन प्राणघातक हमला हो सकता हे-विकास ने कोई भी सैनिक लेने से इनकार करते हुए कहा था कि वह रक्त तिलक की तरफ़ से होने वाले किसी हमले का ही इतजार कर रहा हे ।

सच था भी यही ।

वह अकेला ही निकला था-इसी उम्मीद में कि शायद उस पर पुन हमला हो…पीछा किया जाए या अन्य. किसी माध्यम से उस पर नजर रखी जाए, परंतु ऐसा कछ नहीं हुआ ।

रात ग्यारह बजे तक निरुद्देश्य घूमता रहा वह ।

कार खडी करके सार्वजनिक स्थलों पर पैदल भी टहला-होटलों मे भी गया…

कई बार तो उसने ऐनी. 'ऊटपटाग हरकते भी की जिनसे लोर्गों का ध्यान उसपर केन्द्रित हो ।

~ हुआ भी ।

क्रिन्तु लाभ कुछ नहीं ।

साढे ग्यारह बजे वह राष्ट्रपति भवन में आया…इबलीस के अंगरक्षों ने उसे उस कमरे में पहुचा दिया जिसमें उसके ठहरने का प्रबध किया गया था ।

बिल्कुल राज़क्रीय प्रबंध किया गया था । वह विस्तर पर लेटा-बहुत देर तक नीद नहीं आई । सोचता रहा कि क्या करे…कैसे डॉक्टर भसीन तक पहुचे …रक्त तिलक वाले तो एकाएक खामोश पड गए-काफी सोचने बाद भी उसे कोई तकरीब नहीं सूझी--लगा कि इस तरह काम नहीं चलेगा । यदि विजय ने उस पर बन्दिश न लगाई होती तो अभी तक वह निश्चित रूप से कोई-न-क्रोई बखेडा खडा कर चुका होता-अन्त में यह निश्चय करके सो गया कि कल और रक्त तिलक की तरफ़ से' होने वाली किसी कार्यवाही की प्रतिक्षा करेगा-यदि कल भी कोई परिणाम न निकला तो परसोई सुबह से ही वह अपने ढग से काम शुरू कर देगा।

सुबह ।

वह उठा-नित्यकर्मो से फारिग होकर डायनिंग हॉल में पहुचा । नाश्ते की मेज पर इबलीस-गार्जियन और कर्नल तोम्बो भी मौजूद थे ।

नाश्ता हुआ ।

कर्नल तोम्बो ने पूछा…" क्या आपने आगे की कार्यवाही के बारे मे कुछ सोचा है मिस्टर बिकास?”

"मैं सोचा नहीं करता सिर्फ किया करता हूं…या अगर आप यू . कह लें कि मुझमें सोचने का माद्दा ही नहीं है तब भी मैं बुरा नहीं मानूगा ।"

कर्नल तोम्बो चुप रह गया…दरअसल कहने के लिए उसे कुछ सूझा ही नहीं ।

हाल में राजकीय 'मोज-सा हो रहा था-मेज से दुर चारों तरफ सावधान की मुद्रा में फौजी खडे थे-थोडे समीप शानदार वर्दी में सादर मुद्रायुक्त वेटर्स'!

अभी कर्नल तोन्दो अपना अगला सवाल दागने के बारे मैं सोच ही रहा था कि .......

'खनाक l '

कोई शीशा टूटने की जोरदार आबाज ।

सभी चौके और इससे पहले कि कुछ समझ पाए बहा मे सनसनाक्रर . आने वाला एक चाकू खट से डायनिंग टेबल के बीच आ पड़ा ।

इबलीस आदि अभी कछ समझ भी नहीं पाए थे कि…विकास का जिस्म हवा में लहराया-इस बार ढेर सारा शीशा टूटने और फर्श पर बिखर जाने की आवाज ।

जिस बन्द खिडकी के थोडे-से हिस्से को तोडकर चाकू अन्दर प्रविष्ट हुआ था उसी खिडकी के समूचे शीशे क्रो शहीद. करता हुआ बिकास बाहर ।

~ . .मगर व्यर्था ।

गेलरी बिल्कुल सुनसान पडी थी-जैसे वहा कभी कोई था ही नहीं--रिवॉत्वर हाथ मे लिए उसने तेजी से दोनों तरफ देखा-एकदम रिक्त ।

वह घूमा ।

खिडकी के पार हॉल कै दृश्य को वहा से स्पष्ट देखा जा सकता था…इस वक्त बिकास गेलरी के फर्श पर बिखरे हुए काच पा खडा था…हाल में खडे सभी हतप्रभ एव भौचक्कै-से उसकी तरफ देख रहे थे-ज्यादातर चेहरों पर सफेदी पुती हुई थी ।

विकास ने मेज में गडे चाकू को देखा…चाकू की मूठ आवेग के कारण अभी तक झनझना रही थी…विकास ने वहीँ से चाकू पर लिपटा हुआ एक कागज देख लिया ।

बिकास ने रिवॉल्वर जेब मेँ रखा…कदम बढाकर खिडकी का चौखटा पार किया…हाँल में पहुचकर जिस समय पह मेज की तरफ़ बढ रहा था कर्नल तोम्बो ने पूछा-“कौन था? "

"क्रोई नहीँ !"

“म. . मगर आप तो बिजली की-सी तेजी से गेलरी में पहुच' गए थे ।"

"वह शायद मुझसे भी कहीं ज्यादा फुर्तीला था…जब तक मैं गेलरी में पहुचा तव तक वह अपना काम करके इस तरह गायब हो चुका था जिस तरह गधे के सिर से सीग ।"

"~ अपना काम करके?”

"हां-शायद वह हमे यह सन्देश पहुचाने से ज्यादा कुछ भी करना नही चाहता था ।" कहते हुए विकास ने जब मेज में गडे चाकू की तरफ इशारा किया ।

तो प्रत्येक दृष्टि चाकू पर गढ़ गई, अब चाकू झनझना नहीं रहा था…सनमाइका की वेहद चिकनी और चमदार मेज में चाकू का आधा फल धसा' हुआ था…सनमाइक्रा. इतनी. चमकदार थी कि…चाकू के शेष 'फ़ल और मूठ का अक्स मेज मे साफ चमक रहा… था

हाल में अजीब-सा तनाव छा गया ।

~ बिकास ने आगे बढकर चाकू की मूठ पकडी-एकं झटके से चाकू खींचा…लकड्री की छीलन उघडी-चाकू की मूठ पर कागज_रबर के दो-त्तीन छल्लो में रोका गया था ।

विकास ने कागज निकाला l

बोला-“आराम से नाश्ता लीजिए-अब कुछ नहीं होगा I”

कोई अन्य तो हिल तक नहीं सका, जबकि विकास अपनी कुर्सी पर बैठ गया-कागज की तह खोली…एक हाथ में कागज़ लिया_ दूसरे से कप उठाकरर कांफी का घूट लिया ।

कागज़ में लिखा था… . मिस्टर इंडियन एजेण्ट स्कवायर, डबल एक्स फाइव । . . यह फरमान सिर्फ तुम्हारे लिए हे-जो नायाब तरीका इसे तुम तक तक पहुचाने के लिए इस्तेमाल किया क्या है…"हम इसे इससे भी ज्यादा नायाब तरीके से तुम तक पहुचा सकत्ते थे, जबकि तुम कल रात तुम करीब ग्यारह बजे तक राजधानी की सडकों. पर भटकते रहे-हम जानते हैं कि क्यो, इसलिए कि हमारी तरफ़ से तुम पर कोई हमला हो…सचपुच तुम बहादुर हो…जो दुश्मन को हमले को मौका दे, उसे बहादुर ही कहा जाएगा ।

उस वक्त तुम हर पल हमारी नजरों में रहे, लेकिन हमने कोई हमला नहीं किया…हमला उस कमरे पे भी हो सकता था जिसमे तुम सोए, किंन्तु नहीं किया गया, क्योंकि बहादुर दुश्मन पर धोखे से हमला करना कायरता हे और हम कायर नहीं हैं-उस सारे समय में यह सन्देश भी तुम तक नहीं पहुचाया गया, क्योंकि इस काम के लिए हम तुम्हारे सुबह के नाश्ते का समय तय कर चुके थेI जिन्होंने तुम्हें बुलाया है।

गद्दार इवलीस-कर्नल तोम्बो और गार्जियन ।

ये तुम्हारे आका हैं और विशेष रूप से इनके सामने यह सन्देश तुम तक इसलिए पहुचाया जा रहा है कि ये भी देख ले हम डरते नहों हैँ ।
 
तुमने हमारे' तीन साथियों, को मारा है डबल एक्स फाइव इशाक के जिस्म से तो तुमने इस कदर खाल नोची है, जैसे कसाई बकरे के जिस्म से नोंचता है, किंन्तु वह बहादुरी नहीं थी चगुल में फसे दुश्मन के साथ ऐसा व्यवहार, किसी भी स्तर पर बहादुरी नहीं कहलाएगा ।

मगर हम चुनौती देकर तुम पर हमला करेगे ---ठीक तीस मिनट बाद तुम राष्ट्रपति भवन से बाहर' निकलो…वही कार लेकर जिसमे रात तुम घूम रहे थे…किसी भी तरफ को निकल जाओ-- उपयुक्त स्थान पर हम तुमसे मिलेंगे-ऐसे स्थान पर जहां सिर्फ मेरे तुम्हारे ब्रीच टकराव हो सके! सिर्फ मेरे और तुम्हारे बीच ।

बहा अन्य कोई नहीँ होगा-तुम्हारे बारे में काफी सुना है… . देखना हे कि वह कितना सच है, यानी तुम अकेले ही निकलते हो या किसी दूसरी ताकत को साथ लेकर…वादा करते हैं कि यदि तुम हमें शिकस्त देने मेँ कामयाब हो गए तो डॉक्टर भसीन को तुम्हें सौंप दिया जाएगा।।

-सरदार ।।

पत्र में हस्ताक्षर के स्थान पर एक 'तिलक' का निशान था-वेसे ही तिलक का निशान जैसा रक्षाबन्धन के दिन बहन भाई के मस्तक पर लगाती हे-थोड़ा फर्क था, सिर्फ इतना ही कि वह तिलक रोली का होता हे और यह तिलक रक्त का था ।

♣♣♣♣♣

गार्जियन, कर्नल तोम्बो के हाथों से गुज़रने कै बाद पत्र सबसे अन्त में इबलीस के हाथ मे पहुचा-इसी किस्म की ढेर सारी बातों से बिकास अनुमान लगा चुका था कि राष्ट्रपति भवन में इबलीस की हैसियत क्या हे-पत्र पढकर झ्वलीस के चेहरे पर भी चिता. की बेसी ही लकीरें खिच गई जेसी कर्नल तोम्बो और गार्जियन के चेहरों पर पहले से ही मौजूद थीं । अंत मे उन तीनों की नजरे मिली!

फिर वे नजरे बिकास पर _रिथर हो गई-जौ कि अपनी कुर्सी पर बैठा ठीक इस तरह नाश्ता करने मे व्यस्त था जैसे उसे पत्रादि विषय मे कोई जानकारी ही न हो!

एकाएक इबलीस ने पुकारा-"मिस्टर बिकासा "

“यस I" विकास ने चेहरा उठाया I

"इस पत्र के बारे में आपने क्या सोचा?"

"पहले ही कह चुका हूं कि मैं सोचा नहीं करता I”

"फिर भी ।” तोम्बो बोला--"क्या आप इस पत्र में लिखे पर अमल करेंगे!"

रिस्टवाच पर नजर डालते हुए विकास ने कहा-"दिए गए समय में सिर्फ पन्द्रह मिनट बाकी हैं।"

"यानी आप जा रहे हैं?"

“आपको शक क्यों है?"

"हमारे ख्याल से आपका अकेले जाना ठीक नहीं है I"

"क्षमा करें I” कुर्सी से खडे होकर लडके. ने टॉवल से हाथ और मुंह पोंछा, बोला…“मैने आपसे आपका ख्याल नहीं पूछा था-वेसे भी सिर्फ अपने ख्यालों पर चलता हूं किसी दूसरे के नहीं-आप लोगों से सिर्फ इतना ही कहना काफी समझता हूं कि मेरी सुरक्षा कै लिए आपके द्धारा किया क्या कोई भी इन्तजाम मुझे सहन नहीं होगा…यानी आप भूल कर भी, किसी भी माध्यम से मुझ पर नजर न रखें…बस ।”

“ ले....लेकिन !"

"इस बारे में मै बाते भी नही करना चाहूगा ।”

कईं क्षण के लिए वहां सन्नाटा छा गया…इस सन्नाटे को चहलकदमी सी करते हुए विकास ने ही तोडा…“इस पत्र ने मेरी तबीयत खुश कर दी है I”

"ज. . .जी?”

"कम-से…कम पत्र से यही लगता है कि इसे लिखने वाला मुझसे बिल्कुल, नहीं डरता और वे दुश्मन मुझे अच्छे लगते हैं जो मुझसे डरते न हों…जिस ढंग से वह चाकू फेंककर गायब हो गया, उससे भी जाहिर हे कि वह कोई जाबांज हे…बहादुर है और किसी कायर को दो बहादुरों के बीच होने वाली टक्कर को देखने तक का हक नहीँ है I" कहने के बाद वह लम्बे-लम्बे कदमों के साथ हाँल से बाहर निकल गया । इबलीस तोम्बो और गार्जियन एक-दूसरे का चेहरा देखते रह गए ।

♣★♣★♣

राजधानी की सडकों. पर चक्कर काटते विकास की कार क्रो पूरे चालीस मिनट. हो चुके थे । वह पूरी तरह सतर्क था-अच्छी तरह नोट कर चुका था कि किसी भी माध्यम से उस पर किसी के द्वारा नजर नहीं रखी जा रही ।

जानबूझकर वह ऐसी सुनसान सडकों पर घूम रहा था जिन पर आवाजाही तो कम थी ही…शहरभर मे तैनात फौजी भी नहीं थे ।

अब उसे सिर्फ रक्त तिलक वालों की तरफ से हरकत का इंतजार था l

. आदत के मुताबिक कार काफी तेज चला रहा था वह-इस वक्त राजधानी से बाहर जाने वाली भडक पर बढ रहा था…जहा यह सडक जाती थी वहा जाने के लिए एक अन्य रास्ता भी था और वह रास्ता काफी शॉर्टक्ट भी था-उसके मुकाबले. इस रास्ते से जाने मे कम-से कम दस किलोमीटर का लोंग रन पडता था इसलिए वाहनादि इस रास्ते का प्रयोग नहीं करते थे ।

सडक दुर-दूर तक सुनसान पडी थी ।

विकास जान-बूझकर इस रास्ते पर निकल आया यह सोचकर कि रक्त तिलक के सरदार को टकराव के लिए किसी ही सुनसान स्थान की तलाश होगी ।

उसका अनुमान सही निकला ।

अचानक ही सडक के दोनों तरफ फैले जगल में दुर-दूर तक फायर की आवाज गूज गई ।

फायर की आवाज़ कै फौरन बाद सडक पर तेजी से दौड रही कार लडखडा गई ।

अगले पल विकास समझ गया कि कार का अगला दाईं तरफ का टायर बर्स्ट हो गया हे ।

उसने जल्दी से स्टेयरिंग संभाला-बडी तेजी से दाए बाए फैले जगल में नजर मारी-शायदृ उसकी तलाश में जिसने गोली से टायर बर्स्ट किया था l

अभी वह लडखड़ाती कार को ठीक से सभाल भी नहीं पाया था फिर दूसरा फायर।।

बाई तरफ का अगला टायर भी बैठ गया ।

अब…गाड्री उसके काबू से एकदम बाहर हों गई… विकास के दिमाग में बडी तेजी से यह विचार कौध गया कि हो-न-हो-टायरों पर फायर करने वाला उसकी गाडी कै नीचे ही छुपा है । . .

यह विचार दिमाग में आते ही उसने पूरी ताकत से बेक लगाए । दरवाजा खोला और बाहर जम्प लगा दी…जिस वक्त वह फुटपाथ पर लुढकता चला जा रहा था उस वक्त सडक पर गाडी उलट गई और दूर तक धिसटती चली गई । "

बिकास उछलकर खडा हुआ ।

तभी उसने गाडी के निचले भाग की एक राड से चिपके स्याह नकाबपोश क्रो देखा--देख इसलिए पाया, क्योंकि कार की छत सडक पर थी-छत्त ही सड़क पर घिसटती चली जा रही थी--निचला भाग ऊपर था और रांड, के साथ चिपके नकाबपोश को वह स्पष्ट देख सकता था-विकास ने रिवाल्बर निकाल लिया ।

किन्तु शिकार पर फायर नहीं किया।

कार के रुकने से पहले ही नकाबपोश रांड छोडकर हवा में लहराया I

विकास के देखते-ही देखते उसने हवा में दो कलाबाजियां खाई और अगले ही पल सडक पर बिल्कुल सीधा यानी अपने पैरो पर खडा नजर आया ।

विकास उसकी चुस्ती-फुर्ती से प्रभावित हुए बिना न रह सका ।

कुछ देर तक घिसटने के बाद कार खुद रुक गई । वे आमने-सामने खड़े थे…करीब पन्द्रह गज दूर…फिर एक . साथ दोनों ही एक-दूसरे की तरफ बढे । सतर्क-हर पल चौकस । तब जबकि दोनों के बीच सिर्फ एक गज का फासला रह गया…दोनों रूक गए बिकास उसकी आखों में झाक रहा था, जबकि नकाब में से झाकती लाल आखें विकास को ऊपर से नीचे तक निहार रही थी… नि:सन्देह, बिकास उससे लम्बा था ।

"तो तुम हो रक्त तिलक के सरदार?” विकास के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान उभरी I

"कोई शक हे तुम्हें? " भर्राई हुई विशिष्ट आवाज ।

विकास ने पुन: कहा-“वह चाकू तुम्ही ने फैंका था न?"

"वह सन्देश भी मेरा ही था I”

"डॉक्टर भसीन कहा हैं?"

"भूल गए…पत्र में लिखा था कि मुझे शिकस्त देने के बाद ही तुम डाँक्टर भसीन से मिल सकते हो, बल्कि डॉक्टर. भसीन तुम्हारा हो जाएगा-फिलहाल मैं तुम्हारी. सामने खडा. हू I”

"तो तुम टकराना चाहते हो?"

"इशाक के खून की एक-एक बूद का हिसाब जो लेना है । "

लड़के के होठो पर बडी ही प्यारी मुस्कान उभरी l

"किस तरीके से टकरा सकते हो मुझसे-हाथ में कोई हथियार लेकर या निहत्थे?"

"रिवॉल्वर तुम्हारे हाथ में है ।" जैसे नकाब के पीछे छुपे होठ भी मुस्कराये हो ।

“ ओह ! ” बिकास को सचमुच ,ध्यान नही रहा था कि उसके हाथ में रिवाॅल्बर है । एक नज़र उसने अपने रिवाल्वर पर डाली, फिर बोला-"चलो ये ही सही-हम दोनों यहां एक…दूसरे से पीठ जोड़कर खडे हो जाऐगे ।-वन-टू-थ्री पर अपनी-अपनी दिशा में बढेगे-दोनो को एक-दूसरे से विपरीत दिशा मे दस-दस कदम `चलना है…दसवें कदम पर पलटकर एक-दूमरे पर फायर करेगे-किसी एक की बुलेट हार-जीत का फैसला करेगी I"

"मंजूर ।" कहने के साथ सरदार ने भी रिवाॅल्बर निकाल लिया l

"गुड I" विकास ने घूमकर उसकी तरफ़ अपनी पीठकर दी ।

सरदार ने चेहरा विपरीत दिशा में घुमाया-एक… कदम पीछे हटकर

पीठ विकास की पीठ से सटा दी-बोला-“गिनतियां बोलो I"

"तुम I"

~ "वन !" सरदार बोला-" टू-थ्री ।”

दोनो ही तेजी से अपनी-अपनी दिशा में, एक-दूसरे से दुर लगभग दौडे-दसवा कदम समाप्त होते ही विकास बिजली की-सी तेजी से घूमा ।।

" 'धाय--धांय ।' "

एक साथ दो धमाके ।

बीस कदम दूर खडे सरदार के हाथ से रिवॉल्वर निकलकर हवा में लहरा उठा…सरदार का दस्तानेयुक्त हाथ बुरी तरह झनझना रहा था-यह कमाल विकास के रिवॉल्वर से निक्ली गोली ने किया था ।

विकास ने बडी फुर्ती से दुबारा ट्रैगर दवाया, किन्तु 'क्लिक' की हल्की…सी आवाज उभरकर रह गई…गोली नहीं चली…विकास ने चोंककर रिवॉल्बर की तरफ़ देखा ।

नाल में धस्री हुई एक बुलेट को द्रेखते ही उसकी आखें फेल गई । यह वह बुलेट थी, सरदार हाथ से रिवाॅल्बर निकलने से पहले दाग चुका था…गोली बिकास के रिवाल्वर की नाल में उसके द्वारा पहला फायर किए जाने के बाद धसी । एकाएक सरदार खिलखिलाकर हस पड़ा और फिर उसकी हसी एक ज़बरदस्त कहकहे में बदलती चली गई-लडके ने चकित भाव से उसकी तरफ देखा…नकाबपोश ने उसे हैरान कर दिया था । इतनी फुर्ती से, इतना सटीक निशाना आम आदमी नहीं लगा सकता था ।

“ये बुलेट हमारा फैसला नहीं कर सकी डबल एक्स फाइव । " हसते हुए सरदार ने कहा-“तुमने मेरा रिवॉल्वर दूर फेक दिया है तो मैंने भी तुम्हारा रिवॉल्वर बेकार का दिया हे ।"

विकास ने एक…दो वार ज़ल्दी-जल्दी ट्रेगर दबाया । सिर्फ क्लिक-क्लिक होकर रहगई ।
 
नकाबपोश ने सडक पर पडे अपने रिवाॅल्बर पर जम्प लगाई । खतरा भापते ही बिकास ने उस पर रिवॉल्वर खींच मारा…रिवॉल्बर फ़डाक से उसके सिर पर आ लगा । सरदार लडखडा-सा गया । सभला और अभी रिवाॅल्बर पर झफ्टने ही वाला था कि लम्बा जिस्म किसी तीर के समान हवा मे सनसनाकर उसके नजदीक पहुचा… . बिकास के सिर की टक्कर सीधी उसके नकाब पऱ पडी-सरदार उछलकर दुर जा गिरा I बिकास समझ चुका था कि सरदार…

ऐसा व्यक्ति बिल्कुल नहीं है जिसपर आसानी से या बिना सभी प्रकार के हथकडो का उपयोग किए काबू।पाया जा सकै अत उसे मौका देने की कोई कोशिश किए बिना बिकास ने जम्प लगा दी । परंतु सरदार उससे पहले ही दो-तीन करवटें ले चुका था । बिकास मुह के वल सडक पर गिरा-

अभी उठने की चेष्टा कर ही रहा था कि सरदार ने उसे दबोच लिया…यह पहला अवसर था जबकि विकास को उसकी शारीरिक शक्ति का अहसास हुआ-उसे लगा कि वह जो भी कोई है उससे किसी मामले में कमजोर नहीं है । सरदार ने एक पैर सडक पर पडे विकास की कमर के बीचो बीच रखा था…उसकी दोनों क्लाईया सरदार के हाथों में थी और उन्हें ऊपर की तरफ करके सरदार तेज झटके दें रहा था-हर झटके पर ऐसा लग रहा था जैसे कलाइया कधे से उखड जाएगी । विकास कै कठ से चीखें निकल रही थीं I रीढ की हड्डी मुडी जा रही थी ।

डबल एक्स फाइव को लगा कि यदि उसने जल्दी ही कोई दाब न मारा तो यह व्यक्ति उसकी हड्डी-पसली तोडकर रख देगा-झटके सहते हुए उसने अपने दाए हाथ की उगलिर्यो से उसी हाथ की उगलियों के नाखूनों के बीच से ब्लेड के वे नन्हे-नन्हे टुकडे निकाले जिन्हें वह किसी रस्सी आदि कै बन्धनों से छुटकारे के लिए रखता था ।

एक ब्लेड का टुकडा उसने सरदार के हाथ के पृष्ठ भाग पर रगडा । सरदार एकदम उछल पङा-मुह से सिसकारी-सी निकली I

इस बीच वह लापरवाह हुआ था और कुछ क्षणों में बिकास के दोनों बूट उसके नकाबयुक्त चेहरे पर टकराए…एक चीख के साथ वह पीछे की तरफ लहराया । . .

विकास ने उछलकर उसके सीने पर घूसा रसीद कर दिया I फिर लडके ने सभलने का अवसर नहीं दिया उसे-लात घूसे, . ठोकरें और टक्कर मारता ही चला गया--अब सरदार आक्रमण नही कर रहा था…उसका सारा ध्यान अपना बचाव करने की तरफ़ ही था…

एक अवसर पर जब उसने अपनी लम्बी टाग चलाई तो सरदार ने झपटकर उसकी टाग पकड ली I

एक झटका दिया…हवा में झन्नाकर विकास सडक पर गिरा । इसके बाद युद्ध कुछ इस स्तर पर चलता रहा कि कोई भी यह फैसला नहीं कर सकता था कि दोनों में से बीस कौन है और उन्नीस कौन ।

कभी विकास का पलडा भारी नजर आता तो कभी सरदार का I कभी सरदार हावी नजर आता था तो कभी विकास I

यदि उन्नीस-बीस का ही फैसला करना पड़े तो हम यह कहेंगे कि सरदार बीस था, क्योंकि यह युद्ध उसी के पक्ष में खत्म हुआ-उस अन्तिम कराटे के साथ जो बिकास की कनपटी पर मारा था वह कराट लगते ही बिकास के कठ से बीख निकली और लंबा लडका सडक पर बिछ गया ।

सरदार भी किसी शराबी के समान लडखडा रहा था । वह विकास के नजदीक बैठा था l दोनों ही लहूलहान हो चुके थे I सरदार ने बिकास को अच्छी तरह चेक किया और जब उठा तब आश्वस्त हो चुका था I एकाएक ही उसने अपनी विशिष्ट आवाज में कहा---"सब लोग सामने आ जाए ।"

. . सडक के दोनों तरफ खडे पेडों पर से एक साथ मुमताज-मेजर हाशमी.--रहीँम…सुल्तान और करीम चाचा कूद पड़े-उन सभी के हाथों मे रिवॉल्वर थे ।

"कार ले आओ । सरदार का दुसरा आदेश ॥॥

रहीम और सुल्तान तेजी के साथ दोडकर उस तरफ़ चले गए जिस तरफ. बहुत ही लम्बी और घनी झाडिया थीं-शेष तीनो की नज़रें अपने जख्मी सरदार पर स्थिर थी ।

"स . . सरदार I” मुमताज़ ने धीरे से पुकारा ।

सरदार का सयत स्वर…"क्या बात है?"

मुमताज ने सडक पर वेहोश पड़े विकास पर एक नफ़रत भरी दृष्टि डालते हुए कहा-" हमारे सामने किसी एक व्यक्ति को कब्जे में करने के लिय.. आपको पहली बार इतना सघर्ष करना पडा. है I"

"लोग इसे शेर. का बच्चा कहते हैं मुमताज और आज टकराव के बाद मैने जाना कि डबल एक्स फाइव वाकई शेर के बच्चे का नाम है ।”

सरदार की लिली आखें भी विकास पर टिक गई थीं, किन्तु मुमताज. की ~ आखों के ठीक विपरीत इन आखों में विकास के लिए प्रशंसा के भाव थे-दीवाना होकर वह कहताशा ही चदे गया-"सच्चाई ये हे मुमताज कि यह लडका. किसी भी तरह किसी भी फन मे हमसे कमजोर नहीं है…यह मोके की बात थी कि हम जीत गए I"

मुमताज के चेहरे से ही जाहिर था कि उसे सरदार की यह बात बिल्कुल पसन्द नही आई है-एकाएक ही सरदार ने सख्त स्वर मेँ कहि-“अपने चेहरे, पर उभरने वाले भावों पर काबू रखो मुमताज । यदि इसे यह मालूम हो गया कि हममे से कोई इससे नफ़रत करता है तो सारी योजना पर पानी।फिर।जाएगा I"

.'"यस सर ।"मुमताज ने पूरी मुस्तैदी केस्राथ क्रहा।

रहीम और सुल्तान झाडियों से निकालकर सडक. पर दो कारे ले आए…आगे बढ़कर उनमें से एक कार की ड्राइविग सीट पर स्वय सरदार बैठ गया…उसकै अतिरिक्त उस कार मे अन्य कोई नहीं बैठा था, गाडी को गेयर में डालकर सरदार ने हुकम दिया…“इसे ले जाओं ।"

बस-सरदार की कार आगे बढ़ गई I

ॐॐॐॐॐ

बिकास ने महसूस किया कि उसकी चेतना लोट रही हे…अपना सारा चेहरा और जिस्म का अगला भाग उसने बुरी तरह भीगा हुआ महसूस किया…यह भी कि शायद किसी कुर्सी के साथ वह बंधंनो मैं जकडा… हुआ है---धीरे-धीरे आखे खोली I

पहले उसे- धुंधली-सी मानवकृतियां दिखाई दी फिर दृश्य साफ होता चला गया--- स्याह नकाबपोश घूमता चला गया…सरदार जिसने उसे बेहोश किया था ।

एकाएक ही उसने सवाल क्रिया……"वह कहां है?"

“कौन ??" मेजर हाशमी ने पूछा l

"तुम्हारा सरदार I" मुमताज़ आगे बढी उसके ननदीक पहुचकर बोली…"मैँ हू सरदार ...॥"

"त तुम?" एकाएक ही बिकास के मस्तक पर बल पड गए फिर बोला-" तुम तो शायद मुफ्ताज हो…राष्ट्रपति सादात की बेटी ।

मुमताज चौक पडी…“त तुम मुझे कैसे जानते हो?"

“राष्ट्रपति के साथ ही भारत से चलते वक्त मैंने तुम्हारा और तुम्हारी मा…क्या, नाम था उनका-हां मिसेज मुर्त्तजा का भी फोटो देखा था…मुझे बताया गया था कि तुम दोनों उसी दिन से गायब हो जिस दिन सैनिक विद्रोह के बाद इबलीस ने गद्दी सभाली ।"

मुमताज की आखों के सामने उस खूनी रात के दृश्य चकरा उठे ।

" म मगर तुम यहा-ओह समझा-यानी तुम्हारा सबध भी रक्त तिलक से.....॥"

" मै रक्त तिलक की सरदार हू । लडका हसा बोला---"मुझे यह नहीं बताया गया था कि मुमताज झूठ भी बोलती है l "

"क्या मतलब? ? “

" रक्त तिलक के सरदार से ही टकराने का यह परिणाम है कि . इस वक्त में इस कुर्सी पंर बंधा पडा हुं-उससे जमकर युद्ध हुआ है मेरा-यकीनन उसने मुझे हरा दिया तुम…कसम, से तुम मेरा एक हाथ भी नही सह सकोगी।"

न चाहते हुए भी मुमताज का सारा चेहरा तमतमा उठा I .

"क्यो...॥" लडका मुस्कराया---"हकीकत सुनकर गुस्सा आ गया गया??? ”

. मुमताज. ने खुद को सभाला बोली--"रक्त तिलक की प्रत्यक्ष सरदार मै ही हू ।"

"क्या क्या मतलब-क्या दो सरदार हैं…एक प्रत्यक्ष दूसरा अप्रत्यक्ष?"

"ऐसा ही समझो I . ..

"में अब भी नहीं समझा !"

"टॉर्चर रूम में जिस पर अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करके पूछ रहे हो कि उसका सरदार कौन है-यदि वह मुह खोलता तो मेरा ही नाम लेता-यदि उसने तुम्हारे दुसरे सवाल का भी ज़वाब दिया होता तो उसने यही का पता बताया होता जहा तुम इस वक्त हो..॥"

' “ यानी ?”

"रक्त तिलक इशाक जैसे सैकर्डों देशभक्त का दल है और वे सैकडों युवक अपने सरदार कै रूप मे सिर्फ नाप जानते हैं । सिर्फ मेरा....॥"

" असल सरदार तुम नहीं हो।"

"उनकी सरदार मैं ही हूं और वे नहीं जानते कि रक्त तिलक मे मुझसे ऊटर भी कोई सरदार है ।। "

" ओह !"

“जो तुमसे टकराए उनका सम्बन्ध सिर्फ हमसे हैं ,सिर्फ ये चारों ही जानते हैँ कि रक्त तिलक का मुझसे ऊपर भी कोई सरदार हे…तुप

पाचवें हो लेकिन यह आजतक कोई नहीं जान सका कि उस नकाब के

पीछे किसका चेहरा हे…यह भी कोई नहीं जानता कि रक्त तिलक के उस सरदार के ऊपर भी कोई सरदार है या नहीँ-यदि होगा तो उसका...!॥"

"यानी सिलसिला लम्बा है? "

" इत्तनी गहराई तक कि तुम रक्त तिलक की जड में कभी नहीं पहुच सकोगे I"

“मुझे पहुचकर करना भी क्या हे…मै यहा सिर्फ डॉक्टर भसीन के लिए आया हूं-मुझें तुम्हारे मुल्क की आतरिक स्थितियों मे कोई मतलब नहीं I "

" यहा तुम्हें डॉक्टर भसीन के सम्बन्ध में बातचीत करने के लिए ही लाया गया है !"

"मगर उससे पहले पै तुम्हारे सरदार से चन्द बातें करना चाहूंगा ।"

" वे किसी से कोई बात नहीं करते और फिर उनके लिए मात्र तुम ही एक मसला नहीं हो-करने के लिए उनके पास बहु -से काम होते हैं और समय कम…वे सिर्फ वह काम करत्ते हैं, हम नहीं कर पाते…जैसे समय निकालकर उन्डोने तुम्हें शिकस्त देने का काम किया हे…उनका काम खत्म…अब रक्त तिलक से तुम्हें जो भी बाते करनी हैं-हमसे करो ।"

"मै उस बहादुर आदमी से मिलना चाहता था ।”

"उनका ठिकाना किसी को मालूम नही हे-यदि वे जरूरत समझेंगे तो

..... तो खुद ही तुमसे मिल लेगे' "

बिकास ने कुछ सोचकर कहा-“खैर-तुम डॉक्टर भसीन के बारे में क्या बात करना चाहती थीं?”

"क्या आप सिर्फ डाक्टर भसीन को हमारे चगुल से निकालने आए थै?"

"बेशक I "

"यदि हम तुम्हें डाक्टर भसीन को सौप' दें तो क्या तत्काल भारत लोट जाओगे?"

"यकीनन !"

‘ उसका आखों मे आखे डालकर मुमताज ने पूछा…"तों क्या तुम्हारे

बारे में हमने गलत सुना था?”

"मैं नहीं जानता कि मेरे बारे में तुमने क्या सुना था ।"

" यही कि तुम सच्चाई और नेकी की राह पर चलने वालों के दोस्त हौ-यह कि तुम जालिर्मों के दुश्मन हो…तुम्हारे बारे में हमने यह सुना था मिस्टर विकास कि इंडियन एजेण्ट स्कवायर डबल एक्स फाइव _ नेकी की राह पर चलने वाले कमजोरो का खुदा है-यारों का यार है । उनके लिए अपना खून वहा देता है जिन जिन पर जुल्म हुआ हो-उनके लिए अपनी जान की बाजीं लगा देता है किसी जालिम के खिलाफ़ जेहाद छेडी हो-जिन्होंने देश के गद्दारों से लोहा लेने क्री सोची हो I”

"तुमने ठीक ही सुना है I"

"गलत सुना है हमने ।" एकाएक ही मुमताज हिस्टीरियाई अंदाज में चीख पडी--""यदि यह सच होता तो आज़ तुम इस कुर्सी पर बधे न होते…यदि यह सच होता विकास तो नेकी की राह पर चलने वाले एक फरिश्ते` की खाल न नोंची होती तुमने-एक जालिम और तानाशाह के बुलाने पर रक्त तिलक के खिलाफ न आते-उनका खून न बहाते. जिन्होंने मस्तक पर रक्त तिलक लगाकर मुल्क को आजाद कराने की कसम खाई है ।"

" शायद तुम खुद को क्रांतिकारी समझ रही हो?”

" यदि तुम्हारे मुल्क के आजाद और भगतसिह क्रान्तिकारी थे तो हम भी क्रान्तिकारी हैं I”

विकास ने नफ़रत भरे स्वर में कहा---- "उनकेसाथ अपना नाम जोकडकर उनके नाम को बदनाम न करो-अपने मुल्क को आजाद कराने के नाम पर वे किसी दूसरे मुल्क का गुलाम बनाने की योजना नहीँ बनाते थे ।"

"हमने ऐसी क्रोइ योजना नहीं बनाई I”

"मैं सब जानता हू ।"

मुमताज झपटी--उसने कुर्सी पर बेठे विकास का गिरेबान दोनों हाथों से पकडा और चीख पडी-"क्या जानते हैं आप…बोलिए, हमारे बारे मे क्या सुना हैं आपने… रक्त तिलक के बारे में आप क्या सोचते हैं?आपको मा कसम मिस्टर विकास…बोलिए ।"

""तुम्हारे रक्त तिलक को पश्चिमी मुल्क से मदद मिलती है न ।”

"उफ्फ-ये आपसे किसने कहा-बोलिए, ऐसा किसने कहा आपसे?”

"उसे छोडी, मेरे सबाल का ज़वाब दो ।”

" गलत सुना है आपने… इसमें कोई सच्चाई नहीं ,मिस्टर विकास-कुरान की पाक आयतों की कसम-हम गद्दार इबलीस की तरह किसी विदेशी के _ पिटठू नहीं हैं-एक ऐसी बात आपके दिमाग में ठूंसी गई है जिसका कहीँ वजूद ही नहीँ है I"

कुर्सी पर बंधा विकास देखता रह गया उसे-मुमताज का खूबसूरत और मासूम चेहरा भभक रहा था-सुर्ख आखों' में उसे दूर तक सिर्फ सच्चाई ही नजर आई, बोला…“क्या तुम यह कहना चाहती हो कि राष्ट्रपति इबलीस गद्दार और देशद्रोही हे और तुम-तुम्हारा रक्त तिलक आजाद हिन्द फौज जैसा दल?"

“जो अवाम के द्वारा चुना न गया हो-जिसने विदेशियों की मदद से अवाम द्वारा चुने गए राष्ट्रपति की हत्या करके गद्दी कब्जाई हो उसे आप क्या कहेंगे?"

“राष्ट्रपति सादात के खिलाफ सिर्फ सैना ने ही विद्रोह नही किया, यहां की अवाम ने भी किया था।"

"बगावत मजलिस्तान की आवाम ने नही की मिस्टर बिकास, बगावत मजलिसातान की सेनाओं ने भी, नहीं की-बगावत सिर्फ गद्दार ,इबलीस ने की है । सेना मेँ मोजूद उसके चन्द पिट्ठूओ ने की है… उसकी मदद करने वाली है सेमिनार की फौज-उसक्री सरकार ।"

"सेमिनार तो सादात का दोस्त था…सादात के निमत्रण पर ही उसकी फौजें मजलिस्तान में आईथी-फिर उसी फौज ने सादात के खिलाफ इबलीस की मदद क्यों की?"

"क्योंकि इबलीस ने सेमिनार की वे शर्ते मान ली, जिन्है मानने के लिए राष्ट्रपति सादात ने इनकार कर दिया था ।"

"कैसी शर्तें?"

"मजलिस्तान की धरती पर सेमिनेरियन लडाकू हबाईं अड्डा स्थापित करने और मजलिस्तान` की समुद्री सीमा में सेमिनेरियन नौसैनिक` अड्डे स्थापित करने जैसी शर्तें I”

विकास की आखें सिकुड गई !!
 
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