• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मांगलिक बहन

अजय ने गाड़ी चलाते हुए अपने जेब से रुमाल लिया और अपना गाल साफ करने लगा लेकिन लिपिस्टिक उसके मुंह में और ज्यादा फैल गई और सौंदर्या जोर जोर से ठहाके मार मार कर हंसने लगी और अजय को बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी। जितना ज्यादा वो रुमाल मुंह पर रगड़ता उतना ही ज्यादा उसका मुंह लाल होता जा रहा था। उसने अपनी दीदी की तरफ देखा और बोला:"

" दीदी क्यों मजे ले रही हो आप मेरे? प्लीज़ कर दो ना आप साफ मेरा मुंह।

सौंदर्या:" अच्छा बाबा लाओ, एक काम करो पहले कार को साइड में लगा लो।

अजय ने गाड़ी को साइड में किया और सौंदर्या ने अपने पर्स से रुमाल निकाला और और अपनी जीभ पर गीला किया और अजय ने बड़ी हैरानी से उसकी तरफ देखा और सौंदर्या ने अपने मुख रस से भीगे रुमाल को अजय के गाल पर रख दिया और उसके मुंह को साफ करने लगी। जैसे ही सौंदर्या की जीभ का रस उसे अपने गाल पर महसूस हुआ तो उसकी आंखे हल्की सी ज्यादा खुल गई और सौंदर्या अपनी जीभ से रुमाल को भिगो भिगो कर उसका मुंह साफ करने लगी।

सौंदर्या के मुख रस का हल्का गर्म सा एहसास उसे बेहद मस्त किए दिए जा रहा था और सौंदर्या अपनी पूरी जी जान से अपने भाई का मुंह साफ कर रही थी। रुमाल अजय के होंठो पर लग गया था जिससे उसके होंठ भी हल्के से लाल हो गए थे। सौंदर्या ने उसके उसके दोनो गाल साफ कर दिए और रुमाल पर्स में रखते हुए बोली:"

" देखो ना भाई, कुछ काम सिर्फ हम औरतें ही अच्छे कर सकती हैं, देख लो साफ कत दिया ना बिल्कुल तुम्हरा मुंह।

अजय ने अपना मुंह शीशे में देखा और अपने उसे होंठो पर लिपस्टिक लगी दिखाई दी लेकिन अपनी बहन से बोलने की उसकी हिम्मत नहीं हुई और उसकी तरफ मुंह करते हुए बोला:"

" हान दीदी मान गया मैं आपको। सच में आपने साफ कर दिया लेकिन लाल भी तो आपने ही किया था।

तभी सौंदर्या की नजर उसके होंठो पर पड़ी और बोली:"

" अरे रुको भाई, गाल तो साफ हो गए लेकिन आपके होंठो पर रुमाल से शायद लिपस्टिक लग गई है।

इससे पहले कि अजय कुछ बोलता वो अपना रुमाल निकाल चुकी थी और उसके होंठो पर टिका कर साफ करने लगी। अजय को काटो तो खून नहीं, उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि उसकी बहन अपने मुंह रस से भीगा हुआ रुमाल उसके होंठ पर रख सकती हैं।

सौंदर्या:" उफ्फ ये तो साफ ही नहीं हो रहा है। लेकिन मेरा नाम भी सौंदर्या हैं। हार नहीं मानने वाली मैं भीं।

सौंदर्या ने अपने रुमाल को अजय के होंठो पर से हटाया और अपने मुंह में डालकर अच्छे से गीला किया और फिर से अजय के होंठो पर टिका दिया। रुमाल पूरी तरह से भीग गया था और अजय ने होंठो पर लगते ही सौंदर्या के होंठो और जीभ का रस उसके होंठो पर फैल गया और अजय का मुंह अपने आप ही खुलता चला गया और जैसे ही उसकी बहन का रस उसके मुंह में गया तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। अजय ने अपने होंठो को रुमाल पर फेरना शुरू कर दिया और सौंदर्या उसके होंठो को साफ करती रही। अजय के मुंह में रुमाल घुस चुका था और वो मदहोश होकर उसे ऐसे चूस रहा था मानो लिप्स चूस रहा हो।

सौंदर्या को जैसे ही इसका एहसास हुआ कि उसका भाई मस्ती से आंखे बंद करके उसके रुमाल को चूस रहा है तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने एक झटके के साथ रुमाल को बाहर निकाला और अजय की आंखे खुल गई। दोनो ने एक बार एक दूसरे की आंखो में झांका और दोनो के मुंह शर्म से लाल होकर झुक गए।
 
अजय ने चुप चाप बिना कुछ बोले गाड़ी आगे बढ़ा दी और सौंदर्या तो जैसे गूंगी हो गई थीं उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था इसलिए चुप ही बैठी रही। गाड़ी सड़क पर दौड़ती रही और अजय ने एक बार पता नहीं किस भावना में आकर अपनी जीभ को अपने होंठो पर फिराकर अपने मुंह में अन्दर कर लिया और सौंदर्या को ऐसा लगा जैसे उसके भाई ने उसके होंठो को चूम लिया हो, उसका पूरा बदन कांप उठा और तभी गाड़ी शहर के अंदर घुस गई।

सौंदर्या और अजय ने शादी के लिए कपडे लिए और उसके बाद दोनो घर की तरफ चल दिए। पूरे रास्ते दोनो में बहुत ज्यादा बात नहीं हुई और सौंदर्या को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा था कि जाने अनजाने उसने क्या कर दिया है । घर जाने के बाद अजय सीमा के घर की तरफ चला गया और सौंदर्या अपनी मा के साथ शादी के लिए कुछ तैयारी करने लगी।

..............................

अजय सीमा के घर पहुच गया और उसे देखते ही सीमा के पापा बहुत खुश हुए और उसे काम समझाने लगे।

अभी करीब 2 बजे थे और बारात आज ही शाम को सात बजे आनी थी इसलिए करने के लिए काफी काम बाकी था। अजय ने सीमा के ही परिवार और मोहल्ले के कुछ लड़के लिए और उन्हें काम के बारे में समझाने लगा। गांव के लड़के बड़े मेहनती होते हैं और अजय के दोस्त भी काफी मेहनती थे इसलिए थोड़ी देर में सारा उन्होंने सारा काम कर दिया और उसके बाद सभी लोग शहर में हॉल की तरफ जाने लगे तो सीमा के पापा बोले:"

" बेटा अजय तुम अभी रुक जाओ, घर में भी कुछ काम होंगे और अभी सारी लड़कियां घर पर ही हैं और तुम एक बहुत अच्छे लड़के हो इसलिए तुम रुक जाओ।

अजय:" जी ताऊ जी जैसे आपको ठीक लगे।

सीमा के पापा बाकी लोगों को लेकर शहर कि तरफ चल पड़े जबकि अजय अब घर में चला गया। अजय ने अभी एक जीन्स और टी शर्ट पहनी हुई थी और उसके हाथो में पड़े हुए जिम के सुंदर कट अपनी आभा दिखा रहे थे। अजय को देखते ही सपना खुश हो गई और कुछ ऐसा ही हाल राधा का भी था।

सपना:" अरे अजय बहुत लेट आए तुम, कहां रह गए थे भाई ?

अजय:" अरे मैं सौंदर्या दीदी के साथ शहर चला गया था। मुझे भी कुछ काम था और उन्हें भी कपडे लेने थे।

राधा उसके हाथो को ध्यान से देखती हुई बोली:"

" वैसे अजय तुम इन कपड़ो में काफी खूबसूरत लग रहे हो। लगता है आज रात में तुम्हारे आस पास काफी तितलियां मंडराने वाली हैं।

सपना:" हाँ ये बात तो हैं राधा, वैसे अजय तुम ना पूरी बांहों की शर्ट पहना करो, क्या पता किसी कि नजर तुम्हे लग जाए तो।

राधा समझ गई कि सपना उसकी ही तरफ इशारा कर रही हैं तो उसे अच्छा नहीं लगा और वो समझ गई कि सपना कुछ जरुरत से ज्यादा ही चालू बन रही हैं ताकि मुझे अजय कि नजरो में गलत साबित कर सके।

राधा आगे बढ़ी और अजय के हाथ को उसकी कोहनी के उपर से पकड़ती हुई बोली:"

" बहुत बढ़िया मेरे भाई। सच में लगता है काफी पसीना बहाया है तुमने जिम में। और हाँ सपना कुमारी जी बात ध्यान से समझो की भाई को बहनों की नजर नहीं लगती हैं।

अजय अब तक समझ गया था कि है दोनो मिलकर उसके उपर डोरे डालने की कोशिश कर रही हैं । अजय के साथ पहली बार ज़िन्दगी में ये सब हो रहा था और उसे कहीं ना कहीं अच्छा लग रहा था क्योंकि हर मर्द चाहता है कि औरत उसकी ताकत की तारीफ करे और अजय भी इसका अपवाद नहीं था।

तभी सीमा की मम्मी आई और बोली:" अरे अजय बेटा मेरे साथ आओ तो जरा एक काम हैं।

अजय वही गैलरी में उनके साथ गया और सीमा की मम्मी बोली;"

" बेटा मैंने सीमा के कुछ नए कपड़े इस संदूक में रख दिए थे लेकिन अब ये मुझसे खुल नहीं रहा हैं। तुम जरा इसको खोल दो। सुबह से सबने कोशिश करी लेकिन कोई खोल नहीं पाया।

अजय ने संदूक को देखा तो उसे पाया कि उसमें जंग लगा हुआ था जिस कारण वो खुल नहीं पा रहा था। अजय ने संदूक को पकड़ लिया और उसके ढक्कन उपर करके खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन संदूक खुल नहीं रहा था। सारी लड़कियां अजय की तरफ ही देख रही थी और अजय समझ गया कि ये सभी लड़कियां उसकी ताकत देखना चाह रही हैं।

सौंदर्या भी घर के अंदर आ गई और अपने भाई को संदूक खोलता हुआ देखा और सभी लड़कीयों में पास चली गई तो देखा कि सभी लड़कियां उसके भाई को ही देख रही थी।

सीमा की मम्मी:" बेटा इसके अंदर कपडे के साथ सीमा की कुछ ज्वेलरी भी हैं जो आज ये पहनने वाली हैं। कुछ भी करके बेटा तुम उसे खोल दो।

अजय ने एक बार फिर से संदूक के दोनो ढक्कन पकड़े और उन्हें उपर उठाने की कोशिश करने लगा। अजय ने अपने दोनो हाथो की उंगलियों को अच्छे से टाइट किया और अपने जिस्म की सारी ताकत समेटकर एक झटका दिया और उसके साथ की संदूक का ढक्कन लॉक से उखड़ गया। इस झटके के साथ ही अजय के साथ जैसे ऊपर उठे उसकी टी शर्ट भी फटती चली गई और नीचे बनियान ना होने के कारण उसकी चौड़ी छाती खुल गई जिस पर काले घने बाल उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। सभी की नजरें अजय पर टिक गई और सपना और राधा तो उसकी छाती को घूर घूर कर देख रही थी मानो उन्होंने ऐसी मांसल और चौड़ी छाती पहली बार देखी हो। सौंदर्या भी अपने भाई की छाती और उसकी ताकत को देखकर खुश हुई। फर्क सिर्फ इतना था कि जहां दूसरी लड़कियां जलन से उसके भाई को देख रही थी वहीं सौंदर्या प्यार और खुशी से गर्व के साथ अपने भाई को निहार रही थी।

सीमा की मम्मी:" अरे जीतो रहो बेटा, लेकिन तुमने तो ढक्कन ही उखाड़ दिया इसका। चलो कोई बात नहीं लेकिन तुम्हारी टी शर्ट भी फट गई अजय बेटा।

अजय ने अपनी टी शर्ट को देखा तो उसे अपनी हालत का एहसास हुआ। उसने एक नजर उठा कर लड़कियो की तरफ देखा और उसे चार पांच लड़कियों के आगे खुद को इस हालत में देखकर शर्म महसूस हुई।

अजय को पसीना आ गया था इसलिए वो दूसरे कमरे में जाकर कूलर के आगे बैठ गया और अपनी दीदी को आवाज लगाई

" सौंदर्या दीदी, मेरे पास आना आप। मुझे कुछ बात करनी है।

सौंदर्या अपने भाई के पास आ गई और बोली:"

" हाँ भाई बोलो, क्या जरूरत थी तुम्हे इतनी ताकत लगाने कि अपने कपड़े ही फाड़ लिए तुमने।

अजय:" अरे दीदी आंटी बोल रही थी कि उसने सीमा दीदी के जरूरी कपडे और ज्वेलरी थी इसलिए खोल रहा था। अच्छा मेरे घर से दूसरे कपडे ले आओगी क्या आप ? मैं इस हालत में घर नहीं जा सकता ना।

सौंदर्या:" भाई मम्मी आ रही होगी। मैं उन्हें कॉल कर देती हु तो वो लेती आएगी। वैसे तुम्हारे शादी वाले कपडे तो मैं लेकर आ गई।

अजय:" ठीक है दीदी। आप कॉल कर दो मम्मी को।

सौंदर्या ने अपनी मम्मी को कॉल किया और उन्हें अजय के लिए एक नई टी शर्ट लाने के लिए बोल दिया और फिर से सीमा और सपना के पास आ गई जो कि अपनी बातो में लगी हुई थी और उसे देखते ही उससे मजाक करने लगी और सपना बोली:"

" क्यों री सौंदर्या ऐसा क्या खिला दिया तुमने अपने भाई को जो उसके मारे ताकत के उसके कपड़े फट रहे हैं।

सौंदर्या हल्की सी मुस्कान करने लगी और बोली:"

" मै क्या अलग खिलाती, बस मम्मी ने उसे दूध पिलाया हैं जब से वो शहर से आया है।

तभी राधा अपने आप ही बोल पड़ी:"

" अरे सौंदर्या यकीन नहीं होता कि इस उम्र में भी आंटी अजय को अपना दूध पिलाती है और सबसे बड़ी कि उनके दूध में इतनी ताकत हैं।

राधा की बात सुनकर सभी लड़कियां जोर जोर से खिल खिला कर हंसने लगी और सौंदर्या को बुरा लग रहा था और वो थोड़ी नाराजगी से बोली:"

" तुम्हे बात करने की तमीज होनी चाहिए राधा। मै बोल थी मम्मी ने भाई को भैंस का दूध पिलाया हैं काफी कल से जब से वो शहर से आया है।

राधा:" ओह अच्छा बाबा सोरी। लेकिन पहले तूने भैंस का नाम नहीं लिया था ना इसलिए धोखा हो गया यार।

सपना:" राधा थोड़ा अपना भी दिमाग लगाया कर तू एक दिन में थोड़े ही कोई पहलवान बन जाता हैं लड़का।
 
इससे पहले कि बात आगे बढ़ती तभी अजय की मम्मी घर के अंदर दाखिल हुई और उन्हें देखते ही सबकी बकबक अपने आप बंद हो गई।

मम्मी को देखते ही सौंदर्या उनकी तरफ आई और बोली जल्दी से बोली:"

" मम्मी आप पहले मुझे भाई की टी शर्ट दे दो। पहले वाली खराब हो गई है।

कमला ने अपने साथ लाई हुई एक टी शर्ट सौंदर्या को दी और बोली:"

" जरा मुझे भी तो बता कहां हो लाट साहब, बचपना में भी कपडे खराब करता था और अब तक उसकी ये आदत नहीं गई है।

सौंदर्या नहीं चाहती थी कि मम्मी अजय को इस हाल में देखे नहीं तो उसे डांट पड़नी तय थी। वहीं अपनी मम्मी की बात सुनकर दूसरे कमरे में बैठा अजय भी थोड़ा सा परेशान हो गया क्योंकि वो अपनी मम्मी के गुस्से को अच्छे से जानता था। सौंदर्या ने सीमा को कुछ इशारा किया और सीमा बोली:'

" आंटी मुझे आपकी कुछ मदद चाहिए। जरा आप मेरे पास आइए ना।

कमला दुल्हन को नाराज नहीं कर सकती थी इसलिए उसकी तरफ चल पड़ी। बस सौंदर्या को सुनहरा मौका मिल गया और वो तेजी से कमरे में घुस गई और कमरे में अपनी बहन को देखकर अजय ने राहत की सांस ली और उसने तेजी से फटी हुई टी शर्ट को अलग किया और उसकी छाती पूरी तरह से नंगी हो गई। सौंदर्या की आंखे अपने भाई की नंगी छाती को देखते ही चौड़ी हो गई। अजय के सीने पर काले घने घुंघराले बाल बहुत सुंदर लग रहे थे और बीच में निकले हुए गुलाबी रंग के निप्पल पर जैसे ही सौंदर्या की नजर पड़ी तो उसे दिमाग ने एक झटका सा खाया। वहीं इस सबसे बेखबर अजय अपनी टी शर्ट पहन चुका था।

सौंदर्या मदहोशी में बढ़ी और अपने भाई के कंधे और छाती पर हाथ रखते हुए बोली:"

" भाई तुम पूरे कपडे पहन कर रखा करो नहीं तो किसी दिन तुम्हे नजर लग जाएगी।

अजय अपने लिए अपनी बहन का प्यार देखकर खुश हुआ और बोला:"

" ठीक हैं दीदी, मैं आपकी बात का ध्यान रखूंगा। आपने आज फिर उन्हें मम्मी के गुस्से से बचा लिया, सच में आप बहुत अच्छी हैं दीदी।

सौंदर्या:" बड़ी बहन का फ़र्ज़ होता हैं कि वो अपने भाई को हर मुसीबत से बचाए। वैसे एक बात कहूं अजय तुम इस काली टी शर्ट में बेहद स्मार्ट लग रहे हो।

अजय:" अच्छा जी, किसी और का तो पता नहीं लेकिन आज लगता हैं मुझे मेरी दीदी की नजर जरूर लग जायेगी।

सौंदर्या प्यार से उसके पकड़कर बोली:" पागल कहीं का, बहनों को कभी भी भाई की नजर नहीं लगती है अजय दादा।

अजय:" वो तो ठीक है लेकिन तुमने अजय दादा क्यों कहा मुझे ?

सौंदर्या:" दादा तो तुम हो ही, जो गुण्डो को मार पीट सके वो दादा ही हुआ ना भाई।

अजय के होंठो पर स्माइल आ गई और बोला:" लगता हैं आप मुझे मम्मी से पिटवाकर ही दम लेगी दीदी।

सौंदर्या:" अच्छा ठीक है दादा नहीं, लेकिन अज्जू भाई तो चलेगा ना, सबके सामने भी कह सकती हूं।

अजय और उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया और सौंदर्या भी हंस पड़ी और उसके बाद दोनो बाहर को तरफ आ गए। सभी लोग काम में लग गए और थोड़ी देर बाद जैसे ही चार बजे तो सभी नहा धोकर कपडे पहन कर तैयार हो गए। अजय को सीमा को ब्यूटी पार्लर लेकर जाना था इसलिए सभी लड़कियां उसके साथ ही गाड़ी में बैठ गई और अजय उन्हें लेकर चल पड़ा।
 
अजय ने एक नेवी ब्लू रंग का कोट पैंट पहना हुआ था उसके एक साथ एक पिंक रंग की शर्ट थी जिसमे वो काफी जंच रहा था।

वहीं दूसरी तरफ सौंदर्या ने एक काले रंग की साडी पहनी थी और बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके खुले हुए काले बाल उसे और सुंदर बना रहे थे। थोड़ी देर में ही वो ब्यूटी पार्लर पहुंच गए और सारी लड़कियां अंदर घुस गई जबकि अजय बाहर बैठा हुआ उनका इंतजार करता। करीब आधे घंटे के बाद सारी लड़कियां बाहर आ गई और ऐसा लग रहा था मानो राजकुमारियां बाहर आ रही हो। सभी एक से बढ़कर एक सुंदर लग रही थी लेकिन सौंदर्या की तो बात ही अलग ही थी।

हल्के काले रंग की साडी जिसमे से चमकता से उसका सुंदर पेट और गहरी नाभि, ऊपर गहरे लाल रंग का ब्लाउस, उसके खुले हुए काले बाल जो अब पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रहे थे और उसके पैरो में ऊंची ऐड़ी की सैंडिल उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी।

एक एक करके सभी लड़कियां नीचे आई और गाड़ी में बैठ गई। अजय गाड़ी लेकर हॉल में पहुंच गया और तब तक काफी मेहमान आ चुके थे। बारात भी आ चुकी थी और सभी की नजरे दुल्हन वाली गाड़ी पर थी। एक एक करके लड़कियां गाड़ी से उतरने लगीं और सौंदर्या जैसे ही गाड़ी से उतरी सभी की नजरें उस पर ही टिक गई। हालाकि दुल्हन सीमा थी और उसका सबसे अच्छा मेकअप हुआ था लेकिन सब पर बिजलियां सौंदर्या का हुस्न, उसकी जवानी गिरा रही थी। सौंदर्या के साथ में चल रही सपना और राधा भी कहीं ना कहीं उससे जल रही थी लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी।

वो सभी चलती हुई अंदर हॉल में आ गई और सीमा दूल्हे के पास लगी हुई कुर्सी पर बैठ गई। सौंदर्या उसके पास ही खड़ी हुई थी और सीमा मन ही मन उसे गालियां दे रही थी कि इस कमीनी की वजह से कोई मेरी तरफ नहीं देख रहा है। सौंदर्या को जैसे ही ये सब महसूस हुआ तो वो खुद ही हालत समझते हुए नीचे उतर गई। सौंदर्या जैसे ही नीचे उतरी दूल्हे के पास बैठा हुआ उसका एक दोस्त खड़ा हुआ और सौंदर्या के पीछे पीछे चल पड़ा।

सौंदर्या को इसका एहसास नहीं था और वो राधा के साथ स्टेज से नीचे आ गई और कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए आ गई। वो लड़का भी उसके पीछे पीछे आया और साथ ही खड़ा हो गया।

लड़का:" माफ कीजिएगा मैडम, मेरा नाम अशोक कुमार हैं, क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं ?

सौंदर्या ने पलट कर लड़के की तरफ देखा। लड़के देखने में काफी खूबसूरत लग रहा था और उसकी बातो से काफी सभ्य मालूम पड़ रहा था। सौंदर्या उसकी तरफ देखते हुए बोली:"

" माफ कीजिए भाई साहब। आप अशोक कुमार हो या धर्मेन्द्र मुझसे इससे कोई लेना देना नहीं हैं समझे आप।

अशोक:" देखिए आप मुझे गलत समझ रही हैं। मैं आपको यहां दोस्ती या प्यार के लिए प्रपोज करने नहीं आया हूं। क्या आप मुझसे शादी करोगी ?

सौंदर्या की सांसे उसके हलक में रुक सी गई अशोक की बाते सुनकर। उसका मुंह शर्म से लाल हो गया और पूरा जिस्म कांप उठा उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। वोह वहीं खड़ी हुई थर थर कांपने लगी।

राधा:" देखिए मिस्टर अशोक जी, हम एक अच्छे और सभ्य परिवार से हैं और हमारे यहां शादी की बात घर में बड़े बुजुर्ग करते हैं। बेहतर होगा आप कल घर आ जाएं।

सौंदर्या की मासूमियत देखकर अशोक पूरी तरह से उसका दीवाना हो गया और बोला:"

" देखिए अगर आपको कोई ऐतराज़ नहीं हो तो मैं कल आपके घर आ जाऊंगा।

सौंदर्या पत्थर की बुत बनी खड़ी रही और राधा ही बोल उठी:'

" ठीक है आप आ जाना, ये इसके घर का पता है। और हाँ एक बात का ध्यान रखना कि साथ में अपने मा बाप को जरूर लेकर आना आप अशोक कुमार जी।

अशोक:"जी मैडम। मेरे घर में भी रिश्ते की बात हमारे बड़े ही करते हैं। वो तो आपकी सहेली को देखकर मैं अपने होश खो बैठा और ये गलती कर बैठा। वैसे अब तो आप नाम बता ही सकती हैं।

सौंदर्या के अंदर मुंह उठाने की हिम्मत नहीं थी नाम तो बहुत दूर की बात थी। इसलिए राधा ही पहल करते हुए बोली:"

"जी इनका नाम सौंदर्या हैं। और मेरा नाम राधा हैं कैसा लगा आपको ?

अशोक:" सच में ये बिल्कुल अपने नाम की तरह सुंदर हैं। इनका इससे अच्छा नाम कुछ हो ही नहीं सकता था। आपका नाम तो बहुत प्यारा हैं राधा जी।

तभी अशोक का फोन आ गया और बात करने लगा तो सौंदर्या और राधा वहां से खिसक लिए और सौंदर्या राधा पर बरस पड़ी

" कमीनी तू क्या किसी को भी ऐसे ही मेरा नाम बता देगी क्या ? कुछ अक्ल हैं या नहीं तुझे ?

राधा:" बस कर तू। जब तो तेरे मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी और अभी कैसे जोर जोर से बोल रही है।

सौंदर्या:" मेरा मुंह मैं चाहे बोलु या चुप रहूं तुझे क्या। लेकिन तुमने मेरा नाम क्यों बताया ?

राधा भी हल्का सा गुस्से में आ गई और बोली:"

" मुंह बंद रख अपना समझी। मैंने उसे सिर्फ तेरा नाम ही तो बताया हैं कौन सा फिगर बता दिया जो इतना गुस्सा कर रही है।

सौंदर्या:" कुछ तो शर्म कर तू जो मन में आए बोल देती हैं। किसी सुन लिया तो गजब हो जाएगा।
 
तभी हॉल में लगे हुए स्पीकर से आवाज उभरने लगी और म्यूजिक शुरू हो गया। एक एक करके सभी लोग दूल्हा दुल्हन के सामने लगी हुई स्टेज की तरफ चले पड़े। सभी लोग एक एक करके बैठ गए और बीच में एक डांस के लिए स्टेज लग चुकी थी।

माइक पर एक आवाज उभरी:"

" देखिए मेरी आप सबसे निवेदन है कि दूल्हा और दुल्हन पक्ष के लोग अलग अलग हो जाए और फिर आज डांस का प्रोग्राम होगा और एक पक्ष को विजेता घोषित किया जाएगा।

सौंदर्या अपने भाई अजय के साथ कुर्सी पर बैठी हुई थी और उसके ठीक सामने दूल्हा पक्ष के लोग बैठे हुए थे और अशोक बार बार हसरत भरी निगाहों से उसे निहार रहा था। सौंदर्या को कहीं ना कहीं ये सब बड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि अशोक कि नजरो में उसके लिए प्यार के साथ इज्जत भी थी।

तभी दूल्हे पक्ष से लोग आए और नाचने लगे और उसके बाद दुल्हन की तरफ से भी डांस हुआ। एक से बढ़कर एक डांस हुआ और अभी तक सब कुछ बराबरी पर चल रहा था तभी दूल्हे पक्ष से एक बड़ी खूबसूरत सी लड़की आई और उसने शाकि शाकि गाने पर बहुत ही जबरदस्त नाच किया और उसके नाच पर जोरदार तालियां बज उठी। दूल्हा पक्ष लगभग जीत के करीब था क्योंकि दुल्हन पक्ष से राधा सपना एक एक करके सब नाच चुकी थी।

अजय:" लगता है दीदी आज की रात तो दूल्हा पक्ष के ही नाम होने वाली हैं। अब तो बस आप ही कुछ कर सकती हो।

सौंदर्या:" भाई मैं कुछ नहीं कर सकती, इतनी भीड़ में मेरी हिम्मत नहीं होती और दूसरी बात मैं एक टीचर हूं तो कहीं ना कहीं शर्म तो आती हैं। उपर से अगर मा को पता चल गया तो मुझे जान से मार देगी।

अजय:" आपकी बात हो एकदम ठीक है दीदी, लेकिन अब बात गांव की इज्जत पर आ गई है और इसे अब आप ही बचा सकती हो।

सौंदर्या:" लेकिन भाई मैं नहीं कर सकती। मा मुझे नहीं छोड़ेगी।

अजय:" दीदी एक तरीका है जिससे काम बन सकता है।

सौंदर्या:" हो क्या बताओ मुझे भी तुम भाई ?

अजय:" अगर आप मुंह पर अज्जू भाई का मास्क लगा लो तो कोई आपको पहचान नहीं पाएगा।

सौंदर्या:" बात में तो दम है अज्जू भाई, लेकिन कपडे भी तो चाहिए होंगे मुझे दूसरे।

अजय:" आप उसकी चिंता मत करो, सब मैं इंतजाम कर दूंगा क्योंकि हॉल वालो के पास सब कुछ होता है।

सौंदर्या:" ठीक है भाई, लेकिन एक बात ध्यान रखना कि ये बात सिर्फ हम दोनों के ही बीच रहेगी कि स्टेज पर मैं नाच रही हूं।

अजय:" दीदी आप मुझ पर यकीन कर सकती हैं। और ये मेरा ही तो आइडिया हैं इसलिए मैं खुद आपसे पहले फंस जाऊंगा।

सौंदर्या और अजय खड़े हुए और बाहर की तरफ चल पड़े। अजय के पूछने पर सौंदर्या ने बताया कि एक हाय गर्मी वाले गाने पर सबसे अच्छा नाच सकती हैं। अजय अंदर गया और उसके लिए गाने के हिसाब से बनाई गई ड्रेस लेकर आ गया।

सौंदर्या कपड़ों को देखते ही शर्म से लाल हो गई और बोली:"

" भाई ये कपडे तो कुछ ज्यादा ही छोटे हैं, क्या इन्हे पहन लेना ठीक होगा ? कोई दिक्कत हो गई तो ?

अजय:' कुछ नहीं होगा दीदी, देखो ना मैं आपके साथ हूं और मास्क के साथ साथ आपको ये नूरा फतोही का मास्क भी मिल रहा है देखो आप बिल्कुल उसकी तरह से ही लगोगी, अगर गलती से नूरा का मास्क हट भी गया तो अज्जु भाई का मास्क होगा आपकी पहचान छुपाने के लिए।

अजय ने जब अच्छे से समझाया तो आखिरकार सौंदर्या मान गई क्योंकि उसकी गांव की इज्जत का सवाल था और सीमा को उसके ससुराल वाले ज़िन्दगी भर ताना देते रहते।

सौंदर्या ने अंदर कमरे में जाकर अपने कपड़े बदलने शुरू कर दिए और उसकी हालत खराब होने लगी। उसकी सांसे अपने आप ही तेज रफ्तार से चलने लगी क्योंकि उसने कभी ऐसे कपडे नहीं पहने थे। एक तो कपडे छोटे थे और उपर से इतने ज्यादा टाईट कि सौंदर्या की गोल गोल ठोस चूचियां और उभरे हुए चूतड़ उनमें ठीक से समा नहीं पा रहे थे। ये सब देखकर सौंदर्या को शर्म आ रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा रहा था कि इतने छोटे कपड़ों में अपने भाई के सामने कैसे जाए। बाहर स्टेज पर बार बार लड़की पक्ष की तरफ से डांस के लिए आवाज लगाई जा रही थी जिससे सौंदर्या को हिम्मत मिली और वो कमरे से बाहर निकल गई।

अजय को अपने सामने देखकर सौंदर्या शर्म से मरी जा रही थी। अजय अपनी बहन के इस रूप सौंदर्य और उसके शरीर के हर एक कटाव को ध्यान से देख रहा था जिससे सौंदर्या की धड़कन और तेज हो रही थी।

सौंदर्या:" भाई कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना ?

अजय: कुछ नहीं होगा दीदी। आप आओ आराम से और पीछे की तरफ से स्टेज पर आना। ऑल द बेस्ट दीदी।
 
अजय बाहर हाल में आ गया और सौंदर्या पीछे की तरफ चल पड़ी। बाहर बार बार स्टेज पर लड़की की तरफ से डांस के किए आवाज लगाई जा रही थी लेकिन लड़के पक्ष की शानदार प्रदर्शन के आगे किसी को स्टेज पर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थीं। ये सब देख देख कर बेचारी सीमा उदास होती जा रही थी वहीं दूल्हे और और उसके दोस्त मस्ती किए जा रहे थे।

एंकर:" लड़की पक्ष की तरफ से कोई नहीं आ रहा है इसलिए आज का विजेता दूल्हा...

इससे पहले कि उसकी बात पूरी होती सौंदर्या स्टेज पर आ चुकी थी और उसे देखते ही चारो तरफ सीटी गूंज उठी। सीमा के चेहरे पर एक खुशी की लहर दौड़ गई। भीड़ में ऐसा उत्साह देखकर सौंदर्या की हालत और खराब हो गई और जिससे उसकी धड़कन किसी धौंकनी की तरह चलने लगी और सफेद रंग की एक छोटी सी ब्रा में थी उसकी चूचियां ऐसे उछलने लगी मानो ब्रा को फाड़कर बाहर आना चाहती हो। ये सीन देखकर हॉल में बैठे हुए मर्दों के दिल उनके हलक में अटक गए।

तभी हाय गर्मी का गाना शुरू हो गया और सौंदर्या ने नाचना शुरु कर दिया

सौंदर्या की हर एक अदा जानलेवा साबित हो रही थी। उसकी छातियां हिलने से लोगो के लंड हिल रहे थे। नाचते हुए जैसे ही उसने टांगे चौड़ी करी तो उसकी लुंगी से उसकी काले रंग की पेंटी की नजर आ गई जिससे लोगो में हाहाकार मच गया और नशे में डूबा हुआ एक बाराती जो कि अजय के पास ही बैठा हुआ था बोल उठा:"

" हाय मेरी जान, थोड़ी और खोल दे टांगे, आह तेरी पेंटी दिख जाने दे पूरी।

अजय को बुरा तो बहुत लगा लेकिन वो चुप रहा क्योंकि ये बात उसने धीमे से बोली थी और किसी को नहीं सुनाई दी।

सौंदर्या अब पूरी तरह से अपने डांस में खो चुकी थी और वो जानती थी कि किसी को उसका पता नहीं चलने वाला हैं इसलिए वो पूरी तरह से मस्त होकर नाच रहे थी क्योंकि बजती हुई सीटियां उसका उत्साह बढ़ा रही थी। सौंदर्या ने अपनी कमर को जमीन पर टिका दिया और अपने दोनो पैर उपर हवा में उठा कर अलग अलग दिशा में फैला दिए।

उसकी दोनो टांगे चौड़ी हो गई और उसकी लुंगी हट जाने की वजह से उसकी जीन्स की कच्छी साफ नजर आई और हॉल जैसे पूरी तरह से बेकाबू हो गया और जोर जोर से मस्ती से चिल्ला रहे थे और अजय के पास बैठा लड़का फिर से बोल उठा

" हाय तेरी चिकनी टांगें, और फैलाई तो फट जायेगी और तेरी चूत सबको दिख जाएगी। क्या कमाल हैं तू।

अजय अपनी बहन के बारे में इतनी गंदी बातें सुनकर गुस्सा होने की बजाय शांत था क्योंकि उसका खुद का लंड खड़ा हो गया था और खड़ा लंड दिमाग को खत्म कर देता हैं और कुछ ऐसा ही उसके साथ हो रहा था।

तभी सौंदर्या फर्श पर पेट के बल लेट गई और उसने अपनी गांड़ को हवा में उठा उठा कर हिलाना शुरू कर दिया।

सौंदर्या की गांड़ ऐसे मटक रही थी मानो कोई उसे पकड़ पकड़ कर हिला रहा हो और उसकी टांगे फर्श से टकरा रही थी मानो वो जमीन पर धक्के लगा रही थी। ये बस लोगो के सब्र की इंतहा थी और लोग अपनी सीटों पर खड़े हो गए और कुछ तो स्टेज पर ही चढ़ गए और नाचने लगे।

सौंदर्या की इस जानलेवा हरकत से बेकाबू अजय का हाथ कब उसके लंड पर पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला। जैसे ही गाना खत्म हुआ तो अजय को एहसास हुआ कि वो पेंट के उपर से ही अपना लंड सहला रहा था अपनी बहन को देखकर।

उसे शर्म महसूस हुई और उसने हाथ हटा लिया और उधर स्टेज पर सौंदर्या जैसे ही खड़ी हुई तो उसका नूरा वाला मास्क नीचे गिर गया और अज्जु भाई का मास्क सामने आ गया।

सौंदर्या तो एक पल के लिए डर गई लेकिन फिर वो पीछे की तरफ़ से बाहर निकल गई लेकिन अज्जु भाई का मास्क देखते ही शादी में आए हुए मनोज के साथ बैठे हुए गुंडे की आंखे हैरत से फैलती चली गई और ये सब मनोज देख चुका था।

......................
 
सौंदर्या तेजी से चलती हुई पीछे के रास्ते से बाहर निकल गई और अजय भी वहां पहुंच चुका था। मास्क गिरने और तेजी से चलने के कारण सौंदर्या की चूचियां उछल उछल पड़ रही थी। अजय की नजर अपने आप ही उसकी चुचियों पर टिक गई और सौंदर्या को जैसे ही एहसास हुआ कि उसका भाई उसकी चूचियों को ललचाई नज़रों से देख रहा है वो उसे बहुत ज्यादा शर्म आई और एक पल के लिए तो जैसे उसे यकीन ही नहीं हुआ।

तभी बाहर स्पीकर पर आवाज उभरी:"

" दुल्हन पक्ष की और से किए गए इस शानदार प्रदर्शन के आगे सब बेकार हैं इसलिए आज दुल्हन पक्ष की जीत हुई।

ये आवाज कानो में पड़ते ही सौंदर्या के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई और वो तेजी से साथ खुशी से उछलती हुई आगे बढ़ी और अपने भाई के गले लग गई और बोली:"

" भाई देखो मैं जीत गई। हमने हर दिया हैं दूल्हे पक्ष को आज।

सौंदर्या जैसे ही अजय के गले से लगी तो अजय के हाथ अपने आप ही उसकी नंगी कमर पर कसते चले गए। सौंदर्या के जिस्म से उठती हुई मादक परफ्यूम की खुशबू ने अजय को मदहोश कर दिया और वो उसकी आंखो में देखते हुए बोला:"

" हाँ दीदी सचमुच कमाल कर दिया आपने। क्या गजब का डांस किया आपने बिल्कुल रबड़ की गुड़िया की तरह आपका जिस्म मटक रहा था।

सौंदर्या अपने भाई के मुंह से अपने तारीफ सुनकर और ज्यादा खुश हो गई और उससे पूरी तरह से कसकर लिपट गई जिससे अजय का तना हुआ लंड उसकी जांघो में टकराया और सौंदर्या एक पल के लिए कांप उठी और बोली:'

" भाई ये सब तुम्हारी वजह से हुआ। ना तुम मुझे कपडे और मास्क देते और ना ही डांस होता।

सौंदर्या के कसकर लिपटने की वजह से उसकी ठोस पुष्ट गोल गोल चूचियां अजय में सीने में धंस सी गई और अजय बेचैन सा हो गया और उसकी उंगलियां अपने आप ही सौंदर्या की चिकनी कमर पर फिरने लगी और अजय बोला:"

" फिर मेरे लिए इनाम तो बनता है ना दीदी। क्या मुझे मेरी प्यारी दीदी एक किस देगी ?

सौंदर्या लंड के एहसास से मचल उठी थी और उपर से उसकी कमर पर घूमती हुई अजय की उंगलियां उसे बेचैन कर रही थी और वो अदा के साथ बोली:"

" किस की तो बात ही मत करो तुम। पहले किस करो और फिर तुम्हारा मुंह भी मुझे भी साफ करना पड़ता है बच्चे। जाओ अपना काम करो।

इतना कहकर एक झटके के साथ सौंदर्या उसकी पकड़ से निकल गई और अंदर कमरे में अपने कपड़े बदलने के लिए घुस गई।

कपडे बदलने के बाद सौंदर्या बाहर आ गई और दोनो एक बार फिर से शादी के हॉल में आ गए। राधा और सपना दोनो सीमा के पास बैठी हुई थी जबकि अशोक कुमार की बेचैन निगाहें सौंदर्या को देखते ही थोड़ा शांत हो गई।

धीरे धीरे एक एक करके शादी कि रस्म पूरी होने लगी और देर रात तक फेरे होते रहे। सौंदर्या जब भी नजर उठाती तो अक्सर उसने अशोक को अपनी तरफ देखते हुए पाया और कहीं ना कहीं उसे उसकी निगाहें बेचैन कर रही थी।

सारी की सारी रस्में पूरी होते होते रात के दो बज गए और अब हॉल के अंदर कुछ खास लोग ही बचे हुए थे। अशोक दूल्हे रमेश का खास दोस्त था और एक बहुत ही बड़ी कंपनी का मालिक था।

वो रमेश के बार बार बोलने के बाद शादी में आया हुआ था और उसने सौंदर्या को देखा तो उसके मन में लडू फूट पड़े थे और वो बार बार बस सौंदर्या को ही निहार रहा था।

अजय शादी के कामो में लगा रहा और उसकी सौंदर्या से कोई बात नहीं हुई। अंत में विदाई का समय नजदीक आ गया और माहौल काफी गंभीर नजर आ रहा था।

सीमा के पापा:" बेटी तुमने हमेशा मेरा सिर गर्व से ऊंचा रखा हैं और आगे भी रखोगी।

सीमा की आंखे भर आई और अपने पापा के गले लग गई। एक एक करके वो भारी मन से सबसे मिली और अंत में वो गाड़ी में बैठ गई। सौंदर्या भी वहीं खड़ी हुई थी और काफी भावुक हो गई थी ये सब देख कर।

तभी सपना और राधा गाड़ी के पास पहुंच गई और सपना अंदर मुंह करके सीमा के कान में कुछ बोली तो सीमा के होंठो पर स्माइल आ गई और उसने सपना को थप्पड़ जैसा इशारा किया तो सपना और राधा खिलखिला कर हंस पड़ी। राधा ने सीमा को अपने हाथ की सात उंगलियां दिखाई और ये इशारा सौंदर्या समझ गई कि ये उसे रात को होने वाली चुदाई के लिए बोल रही है।

सौंदर्या के होंठो पर भी स्माइल आ गई और फिर अंदर ही अंदर ही सीमा के लिए फिक्रमंद भी हुई कि आज रात बेचारी का क्या हाल होने वाला हैं।

सीमा की गाड़ी निकल गई और पीछे पीछे सभी गाडियां चली गई। उसके बाद सभी लोग अपने घर कि तरफ चल पड़े। अजय बुरी तरह से थक गया था इसलिए घर आते ही सो गया। सौंदर्या और कमला भी थके होने के कारण नींद के आगोश में चले गए।

अगले दिन सुबह सभी देर तक सोते रहे और करीब 10 बजे के आस पास कमला की आवाज गाड़ी का हॉर्न सुनकर खुली तो उसने देखा कि 10 बज गए हैं और दिन पूरी तरह से हो गया था और सूरज भी सिर पा धीरे धीरे आ रहा था तो उसे हैरानी हुई कि वो कैसे इतनी देर तक सोती रही। वो उठकर बाथरूम की तरफ जा ही रही थी कि तभी घर की कॉल बैल बज उठी।

कमला आगे बढ़ी और दरवाजा खोल दिया और उसे गेट पर राधा के साथ एक बहुत ही सुन्दर नौजवान दिखाई दिया और अपने घर के बाहर सड़क पर उसने तीन महंगी कारे देखी।

राधा:" चाची जी नमस्ते, ये अशोक कुमार जी हैं और आपसे मिलने के लिए आए हैं।

अशोक कुमार ने आगे बढ़कर कमला के पैर छुए और कमला रास्ते से हट गई और बोली:"

" आइए साहब अंदर आ जाएए आप।

अशोक घर के अंदर घुसते हुए बोला:" साहब मत बोलिए मा जी आप। मैं तो आपके बेटे जैसा हूं।

अशोक कुमार के साथ साथ ही उसके मम्मी पापा और बहन घर के अंदर आ हुए। कमला को समझ नहीं आ रहा था कि ये सब कौन हैं और अचानक से कैसे आ गए। अशोक और मम्मी पापा घर के अंदर पड़े हुए बेड पर बैठ गए और कमला अंदर कमरे में घुस गई और अजय को उठाने लगी।

कमला:" अरे अजय बेटा उठो तो 10 बज गए हैं।

अजय हल्की नींद में बोला:" अरे मम्मी सोने दो ना आप मुझे। नींद आ रही हैं अभी बहुत।

कमला:" देखो सुबह ही मेहमान आ गए हैं घर। जल्दी उठो तुम।है भगवान ये मेरी बेटी के रिश्ते के लिए आए हो।

अजय अपनी मा की बाते सुनकर जल्दी से उठा और अपने आप को एक बार शीशे में देखा और फिर बोला:"

" क्या हुआ मम्मी, कौन आया है ? क्या दीदी के रिश्ते के लिए आए हैं क्या?

कमला:" पता नहीं बेटा, लेकिन कोई बड़े लोग हैं और काफी भले भी लग रहे हैं मुझे तो।

अजय बाहर निकल गया और अशोक को देखते ही उसने उसे प्रणाम किया और अशोक उसे पहचान गया। रात उसे देख कर अशोक को जहां अजय पर गुस्सा आ रहा था वहीं अब जैसे ही उसे पता चला कि वो सौंदर्या का भाई हैं तो उसे प्यार से मुस्करा कर देखा।

अजय आगे बढ़ा और अशोक के मम्मी पापा के पैर छुए और फिर घर से बाहर चला गया। अजय दुकान पर गया और नाश्ते और खाने का सामान खरीदने लगा। वहीं दूसरी तरफ राधा सौंदर्या के कमरे में गई और देखा कि वो सो रही है तो उसे उठा दिया और बोली:"

"पागल लड़की उठ जा जल्दी से, अब मत देख अब तो तेरी किस्मत भी जाग गई है।

सौंदर्या ने नींद से भरी हुई आंखो से राधा की तरफ देखा और अंगड़ाई लेते हुए बोली:

" क्या बकवास कर रहीं हैं तू सुबह सुबह ? ऐसा क्या हो गया ?

राधा:" हाय मेरी बन्नो, अशोक कुमार जो रात मिला था शादी में अपने मा बाप को लेकर आ गया है तेरा हाथ मांगने के लिए। लगता है अब तेरी सारी अंगड़ाई खत्म हो जाएगी।

सौंदर्या को जैसे उसकी बात पर यकीन ही नहीं हुआ और उसने धीरे से बाहर कि तरफ देखा तो उसे यकीन हो गया और उसकी चेहरा शर्म से लाल पड़ गया।

राधा:" अब शर्मा मत, जा जल्दी से नहाकर आ जा, मैं चाय बना देती हूं और तुझे लेकर जाना होगा उनके बीच।

सौंदर्या धीरे से बाथरूम में घुस गई और जल्दी ही नहाकर आ गई और बिल्कुल एक ताजे खुले हुए गुलाब की तरह लग रही थी। उसने एक पीले रंग का सुंदर सा सूट पहना और अपने बालो को कंघा किया और उसके बाद अपनी मा के पास रसोई में चली गई जो कि चाई बना चुकी थी।

अजय दुंकान से सामान लेकर आ गया था और बाहर अशोक के पास बैठा हुआ था जो बार बार उधर इधर अपनी नजरे दौड़ा रहा था। तभी कमला सौंदर्या के साथ आई जिसके हाथ में चाय की ट्रे थी और वो शर्माती हुई मंद मंद मुस्कुराती हुई आगे बढ़ गई। सौंदर्या को देखते ही अशोक की बहन और उसके मा बाप की आंखे खुली की खुली रह गई। सच में ऐसी अद्भुत सुन्दरता उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी।

अशोक की बहन ने उसके हाथ से ट्रे ले ली और सौंदर्या को बैठने का इशारा किया और सौंदर्या उसके पास धीरे से बैठ गई।

अशोक की मम्मी:" देखो कमला बहन हम बिल्कुल साफ बोलने वाले हैं और सीधी बात हमे आपकी लड़की बेहद पसंद हैं। आप ये लड़की हमारी झोली में डाल दीजिए।
 
अशोक की मम्मी ने चाय पीते हुए ये बात कही और कमला को सुनकर सुकून मिला और सौंदर्या को भी राहत मिली कि उससे ज्यादा पूछताछ नहीं हुई नहीं तो आज कल तो लड़के वाले हर तरह के सवाल जवाब करते हैं।

अशोक के पापा:" देखिए कमला बहन भगवान कि दया से घर में सब कुछ हैं, किसी चीज की कमी नहीं हैं बस मेरे बेटे के लिए एक बहु की कमी थी और वो भी आज पूरी हो गई। अपनी बेटी हमे दे दीजिए आप।

इतना कहते हुए उन्होंने अपने दोनो हाथ कमला और अजय के आगे जोड़ दिए। कमला तो खुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी। घर बैठे बैठे ही इतना बढ़िया रिश्ता मिलना सच में बड़ी किस्मत की बात थी।

कमला: जी भाई साहब हाथ मत जोड़िए आप। हर मा की इच्छा होती है कि उसकी बेटी को एक अच्छा वर और प्यार करने वाला परिवार मिले। सच में आपकी बाते दिल को छू रही हैं। मेरी बेटी आज से आपकी हुए।

अशोक की मम्मी ने इतना सुनते ही बैग से मिठाई निकाली और कमला के साथ साथ सभी का मुंह मीठा कराया। अशोक के पापा अशोक से बोले:"

" अरे बेटा गाड़ी में पंडित जी बैठे हुए है। आज ही कुंडली भी मिला जाएगी और अच्छा मुहूर्त देखकर सगाई और फिर एक महीने के अंदर ही शादी कर लेंगे।

अशोक उठकर बाहर की तरफ चला गया जबकि पंडित और कुंडली मिलान की बाते सुनकर अनजाने भय से कमला और सौंदर्या दोनो परेशान हो गईं। कमला का दिल तेजी से धड़कने लगा और वो मन ही मन भगवान को याद करने लगी। वहीं सौंदर्या को हल्का पसीना आ गया और उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।

अशोक की मम्मी:" कमला बहन आप सौंदर्या की कुंडली के आइए। आज की ये रस्म पूरी हो जाए तो अच्छा रहेगा।

कमला ना चाहते हुए भी उठ गई और घर के अंदर की तरफ चल पड़ी। उसने सौंदर्या की कुंडली को देखा और उसे हाथ में लेते ही कांप उठी और डर के मारे उसका पसीना छूट गया। उसे ऐसा लग रहा था मानो उसने भूत देख लिया हो।

भारी क़दमों से चलती हुई वो बाहर की तरफ आई और देखा कि पंडित जी आ चुके थे और कमला ने उदास मन से अपनी बेटी की कुंडली उनकी तरफ बढ़ा दी। पंडित जी ने कुंडली हाथ में लेने के बाद अपना चश्मा ठीक किया और कुंडली को ध्यान से देखने लगे। अशोक के होंठो पर मुस्कान थी। उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि सौंदर्या उसकी बन जाएगी।

कुंडली पढ़ रहे पंडित जी के आंखे हैरानी से फैल गई। उन्होंने फिर से अपना चश्मा ठीक किया और एक बार फिर से पढ़ा। ये सब देख कर कमला और सौंदर्या की सिट्टी पित्ती गुम हो गई।

पंडित:' माफ कीजिए आप सभी मुझे। लेकिन लड़की की कुंडली से साफ महसूस हो रहा था कि ये मांगलिक हैं और इसकी शादी अशोक से करना ठीक नहीं होगा।

अशोक को जैसे बिजली का झटका सा लगा और वो पंडित जी से बोला:_

" एक बार फिर से देख लीजिए आप। कहीं कोई गलती से नहीं हो गई आपसे ।

पंडित जी अपनी जगह ठीक थे लेकिन फिर भी मन रखने के लिए दोबारा देखा और बोले:"

" अशोक बेटे मैं सच कह रहा हूं ये देवी सच में मांगलिक ही है।

सौंदर्या का मन किया कि वो रो पड़े। उसके चेहरे बिल्कुल रोने जैसा हो गया और कमला की हालत उससे भी ज्यादा खराब थी। अजय अपनी मा और बहन का ऐसा हाल देखकर परेशान हो गया।

अशोक के पापा:" आप इतने बड़े और माने हुए पंडित हैं,आखिर कोई तो उपाय होगा जिससे इनकी शादी हो सकें।

पंडित:' क्षमा प्रार्थी हूं आपसे। लेकिन अगर कोई उपाय होता तो मैं आपको पहले ही बता देता, ये लड़की जिसकी भी संगिनी बनेगी उसके साथ कोई ना कोई अनहोनी जरूर होगी।

इतना सुनते ही सौंदर्या बेहोश हो गई। कमला और अजय उसकी तरफ झपटे और उसके हाथ पैर रगड़ने लगे।

अशोक को काटो तो खून नहीं। उसके मम्मी पापा को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। अशोक बोला:"

" पापा अब वो पहले वाला जमाना नहीं रहा और मैं ये कुंडली जैसी बातों में यकीन नहीं करता। आप और मा अपनी आज्ञा दीजिए, मैं अपनी सौंदर्या से शादी करना चाहता हूं।

कमला और अजय को जैसे उसकी बात सुनकर यकीन नहीं हुआ और अशोक की मा एक झटके के साथ खड़ी हो गई और बोली:"

" तुम अभी बच्चे हो अशोक, बुरा भला कुछ नहीं समझते। हम क्या तुम्हारा बुरा चाहते हैं ? तुम्हारे लिए हमने एक दम हाँ कर दी बिना कुछ भी सोचे समझे। लेकिन अब तुम्हे मेरी बात माननी ही होगी। अच्छा कमला बहन आप मुझे माफ़ करना। हम चलते है अब।

इतना कहकर वो खड़ी हो गई और बिना पीछे की तरफ देखे बाहर निकल गई। अशोक के पापा भी उसके पीछे ही निकल गए और अशोक कुमार कमला के पास पहुंच गया। सौंदर्या को होश आ गया था लेकिन उसकी दोनो आंखें अभी ही बंद थी।

अशोक ने अपने दोनो हाथ कमला के आगे जोड़ दिए और भारी गले से बोला:"

" मुझे माफ़ करना आप। मैं ये सब बाते नहीं मानता हूं लेकिन मैं अपने मा बाप का दिल नहीं दुखा सकता। इसलिए मैं चलता हूं।

उसके बाद अशोक ने एक आखिरी नजर सौंदर्या के चेहरे पर डाली और बाहर की तरफ निकल गया। सौंदर्या ने अपनी आंखे बंद ही रखी और उसके आंखो से आंसू कि बूंदे टपक पड़ी।

..........................
 
अशोक अपने मा बाप के पीछे पीछे चला गया और उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो पीछे मुड़कर सौंदर्या को एक झलक और देख सके।

वहीं अजय तो अपने बेटे के साथ ये सब होते देख कर जैसे पत्थर के बुत की तरह बैठा का बैठा रह गया और उसके पैरो में खड़े होने की भी हिम्मत नहीं बची थी। कमला सौंदर्या को तसल्ली देने में लगी हुई थी

" बेटी चुप हो जाओ। वो लड़का तुम्हारे लायक नहीं था, अरे आज कल मांगलिक जैसी बातो में कोई विश्वास नहीं करता। वो अपने मा बाप का गुलाम निकला, अच्छा हुआ पहले ही पता चल गया नहीं तो तुम्हे शादी के बाद समस्या होती।

सौंदर्या अपनी मा की बातो को सुनकर थोड़ा सा सहज हुई और उसके आंसू हल्के से कम हुए और वो सुबकते बोली:"

" मम्मी मेरी ही किस्मत खराब हैं किसी को क्या दोष दू मैं। ना मैं मांगलिक होती और ना ये सब होता मेरे साथ।

कमला ने अपनी बेटी का हाथ अपने हाथ में लिया और प्यार से सहलाते हुए बोली:"

" नहीं बेटी तेरी किस्मत खराब नहीं हैं बस तेरी परीक्षा ले रही हैं, अशोक भी पुराने जमाने की सोच का ही लड़का निकला।

सौंदर्या ने अपनी दोनो आंखे खोल दी और बोली:'

" मम्मी कोई भी लड़का अपने मा बाप के खिलाफ जाकर शादी नहीं कर सकता, हम चाहे कितने भी आधुनिक क्यों ना बन जाए लेकिन अपनी रीति रिवाज और परम्परा को नहीं भूलते। क्या आप एक मांगलिक लड़की से अजय की शादी कर सकती हैं ?

सौंदर्या के सवाल को सुनते ही कमला के दिमाग में धमाका सा हुआ और उसे एक पल के लिए समझ नहीं आया कि वो क्या जवाब दे। अजय अपनी बहन की बात सुनकर जैसे नींद से जागा और बोला:"

" सौंदर्या दीदी आज मैंने आपके दुख को सही से समझा हैं और महसूस कर सकता हूं कि ये ही समस्या हर मांगलिक लड़की के साथ आती होगी। इसलिए मैं आपकी कसम खाता हूं कि अगर कोई मांगलिक लड़की मुझे पसंद आई तो शादी जरूर करूंगा।

कमला ने एक बार अजय की तरफ देखा और खामोश हो गई वहीं सौंदर्या उठ खड़ी हुई और तेजी से उपर की तरफ चल पड़ी।

सौंदर्या तेजी से जीने की सीढ़ियां चढ़ रही थी जिससे उसकी भारी भरकम चूचियां उपर नीचे हो रही थी।

अजय की नज़रे अपने आप ही फिर से अपनी बहन की उछलती हुई चूचियों पर चली गई। अजय को खुद पर शर्म आ रही थी कि मैं ये सब क्यों देख रहा हूं।

अजय ने अपनी मम्मी की तरफ देखा और बोला:"

" मम्मी क्या हर बार इसकी साथ ऐसा ही होता है ?

कमला:" बेटा ये बहुत कुछ झेल चुकी हैं बेचारी। हर बार जब कोई रिश्ता आता हैं तो हमेशा इसका दिल टूट जाता हैं। अब खड़े खड़े तुम मेरे क्या मुंह देख रहे हो ? जाओ और जाकर अपनी बहन को मनाओ।

अजय ऊपर की तरफ चल पड़ा और सौंदर्या के दरवाजे को नॉक किया तो पता चला कि वो अंदर से बंद था।

अजय:" दीदी क्या कर रही हो आप ? दरवाजा खोलो ना प्लीज़

सौंदर्या गुस्से में बोली:" भाई मेरा मन ठीक नहीं है। तुम जाओ मैं बाद में बात करूंगी।

अजय:" मेरी प्यारी दीदी दरवाजा खोलो ना आप। मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है।

सौंदर्या:" बाहर से ही बोल दे क्या बात है ? मैं नहीं खोलती।

अजय:" दीदी आप मुझसे क्यों गुस्सा हो ? मेरी क्या गलती हैं इसमें ? आप कहो तो अभी जाकर उस अशोक के बच्चे के हाथ पैर तोड़ दू।

सौंदर्या:" नहीं अजय। ये तुम क्या पागलों जैसी बाते कर रहे हो ? अच्छा रुको मैं दरवाजा खोलती हूं।

सौंदर्या ने आगे बढ़कर दरवाजा खोल दिया और अजय अंदर कमरे में आ गया और बोला:"

" दीदी मैं आपका दर्द समझ सकता हूं। लेकिन आप फिक्र मत करो। अपने भाई पर भरोसा करो मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा।

सौंदर्या बिना कुछ बोले आगे बढ़ी और अजय के गले से लग गई। अजय ने भी अपनी दीदी को अपने गले लगा लिया। बाहर दरवाजे पर राधा भी आ गई थी और उसे खुशी हुई कि अब उसकी सहेली काफी हद तक सामान्य हो गई थी।

राधा अंदर घुस गई और बोली:"

" क्या बात हैं बड़ा प्यार आ रहा है अपने भाई पर सौंदर्या ?

सौंदर्या:" भाई पर तो सबको ही प्यार आता हैं राधा। क्या तू नहीं करती अपने भाई से प्यार ?

राधा:" करती हूं बाबा। अच्छा बात सुन, मैं अब घर जा रही हूं। सारा काम ऐसे ही पड़ा हुआ हैं।

कमला उपर आ गई थी और बोली:" पहले सब नीचे चलो नाश्ता तैयार हैं। उसके बाद जाना जिसे जहां जाना हैं।

सारे नीचे आ गए और नाश्ता करने लग गए। सबने पेट भर कर खाया और उसके बाद राधा अपने घर की तरफ निकल गई और अजय और सौंदर्या रात के थके होने के कारण फिर से गहरी नींद में डूब गए जबकि कमला अपने घर के काम में लग गई।

मनोज अपने अड्डे पर बैठा हुआ था और अपने गुंडों से बात कर रहा था।

गुंडा:" मैं सच कह रहा हूं भाई। रात नाचने वाली लड़की ने हो मास्क पहना था ये वही मास्क हैं जो उस दिन उस लड़के ने पहना हुआ था।

मनोज:" अगर तेरी बात सच है तो उस मास्क का जरूर मेरे गांव से कोई सम्बन्ध हैं। मुझे हर हाल में पता करना होगा कि वो लड़की कौन हैं ताकि मैं उस लड़के तक पहुंच जाऊं। अच्छा शेरा को बुला कर लाओ, पता नहीं कहां रह गया है वो ? पिंकी का भी आज मुझे काम तमाम करना ही हैं।

गुंडा:" जी साहब मैं जा रहा हूं।

इतना बोलकर वो आदमी बाहर निकल गया और मनोज अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा रहा था लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे लड़की का पता किया जाए।

थोड़ी देर बाद ही शेरा आ गया और देखते ही देखते सारे लोग कुछ गाड़ियों में भर कर शहर की तरफ चल पड़े।

पिंकी बेचारी कल उस दिन वाले हादसे के बाद आज पहली बार घर से निकली थी और सड़क पर जा रही थी तभी पीछे से एक खुली हुई जीप आई और देखते ही देखते गुंडों ने उसे उठाकर गाड़ी में पटक दिया और अगले ही पल उसके मुंह पर क्लोरोफॉर्म लग गई थी और पिंकी बेहोश हो गई।

मुंह पर पानी के छींटे पड़े तो पिंकी की आंखे खुली तो उसने आपको एक पुराने से कमरे में बंद पाया। सामने ही कुर्सी पर कुछ लोग बैठे हुए थे जिन्हें देखकर वो डर गई।

तभी अंदर कुछ लोग और आ गए और मनोज भी अंदर आ गया और पिंकी की तरफ देखते हुए बोला:"तो ये हैं वो पिंकी जिसने मेरी बहन को थप्पड़ मारा था।

साली की चूचियां तो कमाल की लग रही है शेरा।

मनोज की बात सुनकर पिंकी की नजर अपनी चूचियों पर गई तो उसके मुंह से एक चींखं निकल पड़ी क्योंकि वो पूरी तरह से नंगी पड़ी हुई थी। पिंकी ने अपने दोनो हाथो से अपनी चुचियों को ढक लिया और अपनी टांगो को कस लिया और बोली:"

" भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा ?

मनोज:" कैसे छोड़ दे तुझे भगवान के लिए जबकि तुम्हें भगवान ने ही हमारे लिए बनाया हैं। सुन जिस रोशनी को तूने थप्पड़ मारा था मैं उसका भाई हूं। सब समझ गई होगी अब तू।

पिंकी की आंखो के आगे एक के बाद एक नज़ारे घूमने लगे और उसे याद आया कि उसने अभी कुछ दिन पहले एक लड़की को थप्पड़ मार दिया था क्योंकि उसने लिफ्ट में सबके सामने उसकी चूचियां दबा दी थी।

पिंकी:" मुझे माफ़ कर दो, मैं जानती हूं मेरी गलती हैं लेकिन तुम्हारी बहन ने भी तो मेरे साथ गलत किया था।

मनोज:" गलत कुछ नहीं किया वो शर्ट हार गई थी और उसकी सहेली ने उसे करने के लिए ये ही टास्क दिया था कि लिफ्ट में जो लड़की सबसे पहले दिखे उसकी चूचियां दबानी हैं। बस ये सारी बात थी और तुम बन गई झांसी की रानी।

पिंकी समझ गई थी कि वो बुरी तरह से फंस गई है इसलिए उसने डर के मारे दोनो हाथ जोड़ दिए और बोली:"

" मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हू मुझे माफ कर दो तुम।

एक बार फिर से उसकी चूचियां नंगी हो गई और सभी गुण्डो के मुंह से एक आह निकल पड़ी।

मनोज:" उफ्फ हाथ जोड़ने के बहाने फिर से अपनी चूचियां दिखा रही है कमीनी।

पिंकी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसके हाथ अपने आप फिर से उसकी चूचियों पर चले गए। मनोज ने इशारा किया और दो लोग आगे बढ़े और पिंकी के दोनो हाथो को पकड़ कर पीछे फैला दिया जिससे उसकी चूचियां फिर से हवा में लहरा गई। पिंकी उनकी पकड़ में तड़प उठी और दर्द भरी आह के साथ बोली:"

" आह मुझे छोड़ दो प्लीज। मत करो मेरे साथ ऐसा।

मनोज ने हाथ आगे बढाया और उसकी चूचियों को अपने हाथो में भर लिया और जोर से मसल दिया तो पिंकी एक बार फिर से दर्द से कराह उठी। मनोज पूरी ताकत से उसकी चूचियों को मसलने लगा और पिंकी की दर्द भरी आह निकल रही थी। उसके बाद मनोज ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी और पिंकी दर्द से तड़पती रही।
 
" आह मुझे छोड़ दो प्लीज। मत करो मेरे साथ ऐसा।

मनोज ने हाथ आगे बढाया और उसकी चूचियों को अपने हाथो में भर लिया और जोर से मसल दिया तो पिंकी एक बार फिर से दर्द से कराह उठी। मनोज पूरी ताकत से उसकी चूचियों को मसलने लगा और पिंकी की दर्द भरी आह निकल रही थी। उसके बाद मनोज ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी और पिंकी दर्द से तड़पती रही।

अगले दिन सुबह पिंकी की लाश शहर के बाहर पड़ी हुई मिली और देखते ही देखते ये बात जंगल में आग की तरह फ़ैल गई और सौंदर्या ने जैसे ही टीवी में सुबह सुबह उस लड़की की फोटो देखी तो उसकी हालत डर के मारे खराब हो गई।

........................

सौंदर्या अपने कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगी जबकि अजय अभी तक सोया हुआ था। सौंदर्या के मन में पूरी तरह से उथल पुथल मची हुई थी और एक अनजाना सा भय उसके दिमाग पर छा गया था।

ना चाहते हुए भी उसकी आंखो के आगे बार बार पिंकी का चेहरा घूम रहा था, कितनी मासूम थी वो बेचारी पिंकी, उसने किसी का क्या बिगाड़ा होगा। है भगवान पिंकी को तो मैंने भी बचाने की कोशिश करी थी तो क्या वो अब मुझसे भी बदला ले सकते हैं ?

ये विचार मन में आते ही उसके शरीर में तेज कंपकपी सी दौड़ गई और उसकी आत्मा तक सिहर उठी। नहीं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। तभी उसके मन में दूसरा विचार आया कि जो गुंडे बीच बाजार लड़की के कपड़े फाड़ सकते हैं वो कुछ भी कर सकते हैं।

है भगवान मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या जरू। क्या गुण्डो से डरकर घर बैठ जाऊं। नहीं ये तो कायरता होगी और मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए। वो इसी उधेड़ बुन में लगी हुई थी कि कॉलेज जाए या नहीं इसी बीच सीमा के पापा घर के अंदर दाखिल हुए।

सौंदर्या ने उन्हें देखते ही नमस्ते करी तो उसके पापा खुश हो गए और बोले:"

" अरे बेटी सौंदर्या मैंने तो ये बताने के लिए आया था कि आज सीमा ससुराल से मिलने के लिए वापिस आ रही हैं। घर में काम होगा बहुत इसलिए आज कॉलेेज मत जाना तुम, सीमा से भी मिल लेना क्या पता अगली बेचारी कब आएगी घर।

सौंदर्या को जैसे आज सुबह से ही कॉलेज ना जाने के लिए ही सोच रही थी और अब तो उसे बहाना भी मिल गया। उसने तुरंत हामी भर दी।

तभी कमला भी अंदर से आ गई और बोली:" भाई साहब ये तो बहुत खुशी की बात है कि सौंदर्या वापिस आ रही है। सौंदर्या आज नहीं जायेगी कॉलेज।

सौंदर्या:हाँ मा मैं सीमा से मिल लूंगी, शादी के बाद भी घर में बहुत काम होते हैं।

सीमा के पापा:" अरे सौंदर्या बेटी तेरी चाची बता रही थी कि शादी से पहले दिन तू टंकी से अनाज लेने गई थी और तूने टंकी खुली छोड़ दी और सारा अनाज कमरे में फैल गया। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि क्या सच में तुझसे ऐसा हुआ है ?

सौंदर्या की आंखो के आगे सारी कहानी घूम गई कि सीमा, सपना और राधा की बातो को सुनकर वो बहक गई थी और अनाज की टंकी सच में खुली रह गई थी। वो हल्का सा झेंप गई और बोली:"

" जी चाचा जी, मुझसे गलती तो हुई हैं लेकिन मुझे चाची ने जल्दी जल्दी दूसरे काम के लिए बुला लिया था जिससे ये सब हुआ। आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा।

कमला:" बेटी सौंदर्या मुझे तुम पर पूरा यकीन है। आखिर मेरी बेटी गांव में सबसे ज्यादा समझदार लड़की जो हैं।

सीमा के पापा:" अच्छा बेटी मैं चलता हूं। कुछ और काम भी देखने हैं तुम जल्दी से आ जाना।

इतना कहकर सीमा के पापा चले गए और कमला बोली:"

" अरे देखना ये अजय उठा हैं या नहीं अभी तक ? पता नहीं कितना सोता हैं ये लड़का।

सौंदर्या:" मम्मी भाई शहर से थका हुआ आया और आते ही शादी के काम में लग गया था शायद इसलिए सो रहा होगा।

कमला:" अच्छा बहुत पक्ष ले रही हैं अपनी लाडले भाई तू, देख 9 बंजने वाले हैं। तू जल्दी से उसे उठा दे मैं तब तक कुछ बना लेती हूं तुम दोनो के लिए।

सौंदर्या अपने भाई को उठाने के लिए उसके कमरे में पहुंच गई और देखा कि अजय आराम से पीठ के बल सोया हुआ पड़ा था। नींद में उसके जिस्म पर से चादर सरक गई और अजय ने उपर के हिस्से में कुछ नहीं पहना हुआ था जिससे उसका सपाट पेट और चौड़ी छाती पूरी तरह से खुले हुए थे। अजय के सांस लेने के कारण उसकी छाती और पेट हल्के से उपर नीचे हो रहे थे जिससे उसके जिस्म में बने हुए सिक्स पैक बहुत खूबसूरत लग रहे थे।

सौंदर्या ये सब देखकर बहुत अच्छा महसूस कर रही थी कि उसका भाई सच में बहुत आकर्षक लगता है। अजय शायद गहरी नींद में सोया था इसलिए उसे बिल्कुल भी नहीं था उसकी बहन उसके पास बैठी हुई है।सौंदर्या ने एक हल्के गुलाबी रंग की साड़ी और उसी रंग का ब्लाउस पहना था खुले बालो में बेहद खूबसूरत लग रही थी। अजय के पास बैठी सौंदर्या अपने भाई को देखते हुए धीरे धीरे स्माइल कर रही थी और उसके बालो में बेहद प्यार से उंगलियां घुमा रही थी।
 
Back
Top