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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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वीना मेरे शरीर की कसावट और सिक्स पॅक देख कर प्रभावित हुए बिना रह ना सकी…

मे जाकर टेबल पर लेट गया…, वो मेरे बगल में खड़ी हो गयी.. और बोली – अब बताइए.. एग्ज़ॅक्ट्ली कहाँ पर होता है पेन… मेने कहा कि मेरे नबल से कोई एक इंच नीचे से शुरू होता है…

उसने मेरी जीन्स का बटन खोलने को कहा.. तो मेने वो भी खोल दिया… अब वो अपनी नरम-2 नाज़ुक पतली-पतली उंगलियों से मेरी नाभि के इर्द-गिर्द हल्के-2, दबा-2 कर देखने लगी…

फिर वो थोड़ा नीचे को जाने लगी.. और जहाँ से झान्ट के बाल शुरू होते हैं.. जो फिलहाल तो सॉफ मैदान था.. लेकिन कुछ दिन पहले ही सॉफ किया था.. तो उनके ठूंठ निकल आए थे…

वहाँ तक वो अपनी उंगलियों से दबाते हुए मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन नोट करती जा रही थी.., उसकी उंगलियों के इशारे से मेरी जीन्स की ज़िप काफ़ी नीचे तक खुल चुकी थी…

उसके दबाते ही मे दर्द में होने का नाटक करने लगता… लेकिन जैसे-2 उसकी उंगलियाँ नीचे को बढ़ रही थी… मेरे फ्रेंची में कसाब भी बढ़ता जा रहा था…जिसे उसने भी नोट किया…

वो अपनी उंगलियों का दबाब डालते हुए नीचे की तरफ बढ़ती जा रही थी, और मुझे पुछ भी लेती कि यहाँ दर्द है.. मे कह देता की, हां यहीं.. हां यहीं…

बीच बीच में वो उस जगह को सहला भी देती, ऐसा करते -2 आख़िरकार उसकी उंगलियाँ मेरे लौडे को छु गयीं.. जो काफ़ी कुछ अपने असली रूप में आ चुका था…

जीन्स की जिप तो कभी की नीचे हो चुकी थी, सो डॉक्टर वीना मेरे फ्रेंची में बने तंबू को बड़ी चाहत भरी नज़रों से देख रही थी…

तंबू पर नज़र गढ़ाए हुए ही उसने अपने लिपीसटिक से पुते होंठों पर जीभ की नोक फिराई….

एक बार उसने एक नशीली सी स्माइल करते हुए मेरी तरफ देखा, और अपनी उंगलियों को मेरे फ्रेंची में सरका कर, ऐन लंड की जड़ में दबाब डालते हुए बोली…

क्या यहाँ भी दर्द होता है…?

मेने आअहह भरते हुए कहा.. आअहह…डॉक्टर ज़ोर से नही, प्लीज़ बहुत दर्द है….

लौडे की जड़ पर उसकी मुलायम पतली-पतली उंगलियों के स्पर्श ने उसके लिए किसी टॉनिक का काम कर दिया, और वो फुल मस्ती में खड़ा हो गया…

अंडरवेर के ऊपर से ही उसके आकर को देखकर डॉक्टर. वीना की आँखों में वासना तैरने लगी, जो धीरे-2 उसके सर पर पहुँच रही थी…

स्वतः ही उसका हाथ मेरे लंड की तरफ जाने लगा, और उसने मेरे लंड को अंडरवेर के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में भर लिया और बोली – क्या यहाँ भी दर्द होता है…

मेने नाटक करते हुए अपना एक हाथ झटके से उसके कूल्हे पर मारा और लगभग अपनी जगह से उठते हुए दूसरे हाथ से उसकी बाजू पकड़ कर कराहते हुए बोला…

आअहह…डॉक्टर… यहाँ ज़्यादा होता है….…..

वो मेरी आँखों में देखकर शरारत से मुस्कराते हुए बोली – नॉटी बॉय… !

और उसने अपने दूसरे हाथ को मेरे सीने पर रख कर दबाब डालकर मुझे लेटे रहने का इशारा किया.. और वो मेरे बालों भरे सीने को सहलाने लगी…

मेरा एक हाथ अभी भी पीछे से उसकी मस्त गद्देदार गान्ड पर रखा हुआ था… जो अब धीरे-2 उसे सहलाने भी लगा था…

वीना का धीरे-2 कंट्रोल छूटता जा रहा था.. वो मेरे फ्रेंची को नीचे सरकाने लगी… और आखिकार उसने मेरे लंड को नंगा कर ही लिया…

मेरे साडे 8” लंबे और मस्त सोट जैसे मोटे, और गोरे लंड की सुंदरता देख कर बुद-बुदाने लगी…

आहह… क्या मस्त है ये…

मेने कहा – क्या..?

वो – यही तुम्हारा हथियार…

मे – आपको अच्छा लगा…?

वो – हां ! बहुत…

मे – तो इसे प्यार करिए ना..डॉक्टर ! अच्छी चीज़ को ज़्यादा देर खुला छोड़ना अच्छी बात नही…वरना किसी और की नज़र में आ गया तो……

नॉटी स्माइल देते हुए, उसने अपने नीचे के होंठ को किनारे पर दाँतों से काटा, फिर वो उसके ऊपर झुकने लगी,

छन-प्रतिक्षण मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, मे नज़र टिकाते उसके चेहरे को ही देख रहा था,

इतने सुंदर और रसीले होंठों को अपने लंड की तरफ बढ़ते हुए देखकर मेरी सारी उत्तेजना सिमट कर लंड में आ गयी…और उसने एक जोरदार झटका मारा…

तभी वीना के होंठ भी वहाँ तक पहुँच चुके थे, सो वो ठुमक कर उसके होंठों पर फिट हो गया…

मुस्काराकार उसने पहले मेरे लंड को चूमा… और फिर उसे मुट्ठी में लेकर आगे-पीछे करने लगी…

मेरे लाल सेब जैसे सुपाडे को देख कर वो बाबली हो गयी और उसने उसे अपने पतले रसीले गुलाबी होंठों में क़ैद कर लिया…

मेने उसकी गान्ड को ज़ोर से मसल दिया… वो मेरी आँखों में देखकर मुस्कराते हुए मेरा लंड चूसने लगी…

मे उठ कर बैठ गया और उसकी 34” की मस्त गोल-गोल मक्खन जैसी मुलायम चुचियों को उसके कसे हुए ब्लाउज और ब्रा से बाहर निकालकर ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा…

कुछ देर वो पूरे मन से मेरा लंड चुस्ती रही…, मेरा हाथ उसकी गान्ड को सहलाते हुए उसकी दरार में भी घूमने लगा…

जब मुझे लगने लगा.. कि इसे अब रोका ना गया.. तो कभी भी मेरा पानी निकल सकता है…, मेने अपने माल को यौंही बर्बाद कभी नही किया था…

सो मेने उसके सर को पकड़ कर अपने लंड से हटाया… वो थोड़ा नाखुशी वाले अंदाज में मेरी तरफ देखने लगी…

मेने उसके होंठ चूमते हुए कहा – बस इतना सा ट्रेलर ही काफ़ी है डॉक्टर अभी के लिए…पूरी फिल्म फिर कभी तसल्ली से देखना…

अभी इसका समय नही है… क्योंकि मुझे ऐसे जल्दबाज़ी में सेक्स करने में मज़ा नही आता..

 
उसकी आस अधूरी रह गयी… चूत पानी छोड़ने लगी थी… सो अपने हाथ से टाँगें चौड़ी कर के चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए बोली – कब..दिखाओगे पूरी फिल्म..?

मे – जब आप कहो.. अभी मे थोड़ा अर्जेंट काम से यहाँ आया था… दरअसल मेरा एक फ्रेंड यहाँ अड्मिट है.. मे उसे ही मिलने आया था.. तो सोचा अपनी प्राब्लम भी दिखा डून..

वो मुस्कुराकर अपनी नसीली आँखों को नचाते हुए बोली – लेकिन तुम्हारी प्राब्लम तो मिली ही नही अभी तक..?

मे – कोई बात नही फिर कभी देख लेना.. अभी मुझे आपकी थोड़ी हेल्प चाहिए..

वो – हां ! बोलो ना, तुम्हारी हेल्प कर के मुझे बड़ी खुशी होगी…

फिर मेने उसको भानु के बारे में बताया.. तो वो बोली – कि वो तो वैसे ही यहाँ टाइम पास कर रहा है.. वो तो कब का ठीक हो चुका है…

मेने चोन्कंने की आक्टिंग करते हुए कहा – क्या कह रही हो…? उसके पिताजी बेचारे कितने परेशान हो रहे हैं.. उसकी इस बीमारी को लेकर.. सारा बिज़्नेस चौपट पड़ा है…, क्या आप उसकी रिपोर्ट दे सकती हैं मुझे….?

वो कुछ देर सोचती रही फिर बोली – एक शर्त पर..!

मे – बोलिए.. क्या शर्त है आपकी… हालाँकि मे उसकी शर्त जानता था..

वो मुस्कराते हुए बोली – मुझे वो पूरी फिल्म देखनी है.. जो तुम दिखाने वाले थे…

मे – ऑफ कोर्स ! समय और जगह बता दीजिए.. मे पहुँच जाउन्गा.. आप जैसी हसीना के साथ पूरी फिल्म शूट करने में मुझे भी बहुत खुशी होगी…

फिर वो हँसते हुए अपने कॅबिन से बाहर चली गयी… और 10 मिनिट के बाद जब वापस आई तो उसके हाथ में भानु की फिटनेस रिपोर्ट थी..

मेने वो रिपोर्ट लेकर उसे थॅंक्स बोला… उसने अपना कार्ड मुझे दिया.. और बोली – दो दिन बाद इस नंबर पर कॉल करना.. इंतेज़ार करूँगी…

मेने उसके होंठों पर एक जोरदार किस किया और उसे बाइ बोलकर उसके कॅबिन से बाहर आ गया…

आज तो ऊपरवाला मेरे ऊपर अपनी मेहरवानियों की जैसे बारिश करने पर तुला हुआ था………….

डॉक्टर वीना के रूम से निकल कर मे जैसे ही गलेरी में आया… सामने से मुझे मालती आती नज़र आई… मे थोड़ा इधर – उधर देखते हुए उसकी तरफ बढ़ता रहा…

जैसे ही वो मेरे नज़दीक आई… मेने चहकते हुए कहा… ओह्ह…हाई.. मालती…! व्हाट आ प्रेज़ेंट सर्प्राइज़… तुम यहाँ कैसे…?

वो मुझे एकदम से अपने सामने देख कर हड़बड़ा गयी…. फिर कुछ संभालते हुए बोली – बस ऐसे ही कुछ काम था.. आप यहाँ कैसे..?

मे – तुम्हें तो पता ही होगा… मे अब गाँव में तो रहता नही हूँ, देल्ही में मेने अपना बिज़्नेस सेटप कर लिया है..

उसी सिलसिले में यहाँ आया था.. कि अचानक से कुछ प्राब्लम हो गयी.. तो यहाँ चेक-अप कराने चला आया…

खैर छोड़ो ये सब बातें ! तुम बताओ.. शादी-वादी की या नही…?

वो अपने मन में सोचने लगी.., लगता है इसको गाँव की परिस्थितियो के बारे में कुछ पता नही है…,

सो फटाक से बोली – हां मेरी तो शादी हो गयी.. आप बताओ.. निशा से कब शादी करने वाले हो..?

मेने उपेक्षा भरे लहजे में कहा – ओह .. कम ऑन डार्लिंग… किस बहनजी टाइप लड़की की बात छेड़ दी तुमने…!

मे उसे कब का भूल चुका हूँ.. मेरी अपनी भी लाइफ है यार !… घरवालों के सिद्धांतों से मेरा फ्यूचर थोड़ी ना बनने वाला है..

इसलिए बहुत पहले ही मे सब कुछ छोड़-छाड़ कर देल्ही सेट हो गया हूँ, … अब मुझे उसके बारे में कुछ पता नही है…

और बताओ.. अपनी वो मुलाकात याद आती है तुम्हें या भूल गयी…?

वो – आपने ही तो याद रखने को मना किया था… वैसे वो लम्हे तो मे चाह कर भी नही भूल सकती…

मे – तो फिरसे जीना चाहोगी उन लम्हों को…?

वो मेरी बात सुनकर खुश होते हुए बोली … क्या सच में ऐसा हो सकता है.. ?

मेने कहा – अगर तुम चाहो तो, ज़रूर हो सकता है…

वो एक्शिटेड होते हुए बोली - कब..?... कहाँ…?

मे – अगर समय हो तो आज ही 9 बजे होटेल आशियाना, रूम नंबर. 321 में आ जाओ.. रात भर एंजाय करेंगे..

वो तो जैसे तैयार ही बैठी थी, सो फ़ौरन आने को तैयार हो गयी, और इसी खुशी में झूमती हुई भानु के रूम की तरफ चली गयी…, मे अपनी कामयाबी की खुशी में हॉस्पिटल से बाहर की तरफ चल दिया…

मेने होटेल में ये कमरा सुबह ही बुक करा दिया था…

शहर के चक्कर लगाते – 2 शाम हो गयी… इस बीच मेने ये भी पता लगा लिया.. कि राजेश का केस कोन्सि अदालत और किस मॅजिस्ट्रेट के अंडर में है.

मेने अपने गुरु प्रोफ़ेसर. राम नारायण जी को फोन लगा कर सारा वृतांत कह सुनाया… उन्होने कहा..

चलो अच्छा है.. आगे बढ़ो मेरी शुभ कामनाएँ तुम्हारे साथ हैं..

अपनी जिंदगी के पहले इनडिपेंडेंट केस में तुम सफल रहो, यही कामना है मेरी..

मे – सर मेरी सफलता आपके सहयोग पर डिपेंड करती है.. फिर मेने उन्हें उस जज का नाम बताया जिसके यहाँ इस केस की सुनवाई होनी थी…

उसका नाम सुनकर वो बोले – अरे ये तो अपना लन्गोटिया यार रहा है.. तुम चिंता मत करो.. मे उससे बात कर लूँगा.. वो हर संभव तुम्हारी हेल्प करेगा…

वैसे केस की सफलता या असफलता तुम्हारी अपनी काबिलियत पर ही डिपेंड करेगी..

मे – सर आपका शिष्य हूँ, निराश नही करूँगा.. बस थोड़ी सी इतनी हेल्प मिल जाए की वो मेरे मन मुताविक सुनवाई की डेट दे दे..

वो – वो तो तुम्हें मिल ही जाएगी.. उससे मिल लेना… बेस्ट ऑफ लक…

मेने उन्हें थॅंक्स बोलकर फोन डिसकनेक्ट कर दिया…

 
रात 8 बजे से ही में अपनी तैयारियों में जुट गया… कमरे में मेने कुछ कैमरे इस तरह से फिट किए कि उनमें मेरी कोई इमेज ना आए और मेरे सेक्स पार्ट्नर को पूरा दिखाया जा सके…

फिर मेने कुछ बीयर मॅंगा कर फ्रीज़र में रखवा दी.. और मालती का वेट करने लगा.. अभी 9 बजे भी नही थे कि डोरबेल बज उठी…

मेने उठ कर डोर खोला… आशानुकूल सामने मालती ही खड़ी थी.. जो इस समय एक वन पीस ड्रेस में थी.. ग्रीन कलर की ड्रेस जिसका एक शोल्डर तो था ही नही..

मालती पहले से भी ज़्यादा सेक्सी हो गयी थी… लंड की मार सहते-2 उसका बदन और ज़्यादा भर गया था, लेकिन सिर्फ़ उन जगहों पर जहाँ एक औरत को ज़रूरत होती है…

36 की बड़ी बड़ी चुचियाँ और 38 की गान्ड इस कसी हुई ड्रेस में मानो उबल ही पड़ रही थी…

मे उसे देखता ही रह गया… मेने एक तरफ को होकर उसे अंदर आने का रास्ता दिया…

डोर बोल्ट कर के उसकी गान्ड पर हाथ रख कर उसे अंदर सोफे तक लाया.. और खड़े-2 एक किस लेकर हम सोफे पर बैठ गये…

मेने उसकी मखमली जाँघ सहलाते हुए कहा - आज तो कुछ ज़्यादा ही हॉट लग रही हो जानेमन… सच कहूँ तो मेरी कामना तुम जैसी हॉट आंड बोल्ड लड़की की थी….मेने उसे चढ़ाते हुए कहा

वो – क्या सच में…! मे आपको बोल्ड और हॉट लगती हूँ..

मे – बहुत…! , अच्छा ये बताओ क्या लेना चाहोगी… कुछ हॉट, या कोल्ड या फिर और कुछ…

वो – आप प्यार से जो भी पिलाएँगे, पी लेंगे जनाब…

मे – तो फिर एक-एक बीयर हो जाए…

वो तपाक से बोली – मुझे कोई प्राब्लम नही है…

उसकी बोल्डनेस देख कर मे हैरान था.. और सोचने लगा कि ये वही मालती है.. गाँव की भोली-भाली… लड़की.

मेने फ़्रीज़ से दो चिल बीयर टीन निकाली, एक उसे ओपन कर के दी, और दूसरी मेने अपने होंठों से लगा कर सीप करने लगा…

मेने दो-चार सीप लेकर, उसे दिखाने के लिए एक सिगरेट सुलगा ली.. और फिर उसे भी ऑफर की…

ये तो कमाल ही हो गया… उसने पॅक से एक सिगरेट निकली जिसे मेने लाइटर से जला दिया..

मेने चुटकी लेते हुए कहा – काफ़ी मॉर्डन हो गयी हो… क्या बात है.. वैसे तुम्हारे पति देव का नाम क्या है.. और वो करते क्या हैं…?

वो मेरा सवाल सुन कर कुछ हड़बड़ा गयी … फिर संभाल कर स्माइल करती हुई बोली – क्या करेंगे जान कर…? आपको मेरे पति से क्या लेना देना… मे हूँ तो सही आपके सामने..

मे सोचने लगा… मछलि काफ़ी होशियार हो गयी है.. कोई नही थोड़ा और रुकते है.. और मे फिर से बीयर सीप करने लगा..

धीरे-2 कर के हम दोनो ने एक-एक तीन ख़तम कर दी.. फिर मेने खाना ऑर्डर कर दिया… खाने के साथ-2 एक- एक बीयर और ख़तम कर दी…

अब वो कुछ नशे में दिखने लगी थी…

हम दोनो अब बेड पर पहुँच गये थे… मेने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को चूमते हुए बोला –

वैसे मालती तुम हॉस्पिटल में भानु के कमरे में क्यों गयी थी…?

वो नशे और मदहोशी के आलम में एकदम से बोल पड़ी… वो मेरा पति है.. इसलिए उसके पास तो जाना ही था ना…!

मेने चोन्कने का नाटक करते हुए कहा – क्या..? वो साला गुंडा तुम्हारा पति..है..

वो नशे से बोझिल आँखें तरेर कर बोली– आए मिसटर … ज़ुबान संभाल कर बात करो ! वो मेरा पति है… फिर हहेहहे.. कर के हँसते हुए बोली – वैसे आपने सही कहा.. है तो साला वो गुंडा ही है…

मेने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – लेकिन तुम्हें उससे शादी करने की क्या ज़रूरत पड़ गयी…

इसस्शह….आहह… अंकुसजी…. आपको क्या पता मेने किन मजबूरियों में उस साले हरामी से शादी की…

वो नशे की झोंक में अनाप सनाप गाली बकते हुए बोली

अरे उस मादरचोद के हरामी बाप ने मेरे दादाजी को धमकाया था… कि अगर उन्होने अपनी पोती का व्याह उसके बेटे से नही किया तो वो उनका जीना मुश्किल कर देंगे..

अब वो बेचारे बड़े-बूढ़े आदमी वो भी अकेले… डर गये..और मेरी शादी उस गुंडे से हो गयी… हहेहहे…!

मे – तो इन सब आदतों को भी उसने ही सिखाया होगा तुम्हें…

वो – हां ! वरना मुझे इन सब का क्या पता था, … वो अब नशे में झूमने लगी थी, … उसकी आँखें नशे के कारण बंद होने लगी...,

इससे पहले कि वो अपने होश खोए, मेने उसका ड्रेस निकाल कर उसे सेक्स की तरफ लेजाने की कोशिश शुरू कर दी…….

उसकी ड्रेस निकालते ही बिना ब्रा के उसकी बड़ी-2 चुचियाँ थिरकति हुई मेरे सामने लहरा उठी…

मालती वाकई में पहले से ज़्यादा हॉट हो गयी थी,

उसके दशहरी आमों से खेलते हुए मेने पूछा – अब तुम्हारे दादा-दादी कहाँ रहते हैं…?

आह्ह्ह्ह… वो तो अभी भी गाँव में ही हैं…, थोड़ा और ज़ोर से दबाओ ना …सस्स्सिईइ…हाआंणन्न्, आआयययययीीई….ईीसस्शह…!

मेने उसके कड़क हो चुके निपल मरोड़कर कहा – वो अकेले ही गाँव में हैं…

मेरे निपल मरोडने से वो बिलबिला उठी – आआययययीीई…ज़ोर से नही…हां अब वो बेचारे अकेले ही हैं वहाँ…और कॉन रहेगा…

फिर मेने उसकी पेंटी भी निकाल दी, और उसकी गरम चूत को सहलाते हुए.. अपनी दो उंगलिया उसकी चाशनी से भरी चूत में डाल कर पूछा – तुम तो उनसे मिलने जाती रहती होगी ना…

आहह…………जीजू….क्या बताऊ… उस हरामी ने वहाँ जाने लायक रहने ही नही दिया मुझे.…सीईईईईईई….. हइई…..जल्दी कुछ कारूव….नाआ…बातें बाद में आआययईीीई…..कर लेना…आआ….

 


मेने अपनी उंगलियों की रफ़्तार थोड़ी बढ़ते हुए पूछा – क्यों ? ऐसा क्या किया उसने…? सवाल दागते हुए मे उसकी चूत में उंगलियाँ अंदर- बाहर करने लगा…

उफफफफ्फ़……..हइईई…. उसने मेरी बेस्ट फ्रेंड निशा के साथ जबर्जस्ती बलात्कार करने की कोशिश की….हाईए… बहुत जालिम है वो हरामी…सआलाआ…आआ…

अब मुझे उससे फाइनल जबाब चाहिए थे… सो उसकी रसीली चूत पर हाथ फेरा और अपने मूसल को उसकी गीली चूत के मुँह पर रख कर रगड़ते हुए बोला…

तो क्या वो उसका बलात्कार कर पाया…?

आहह……….जिजुउुउ थोड़ा अंदर तो करो ईसीए….…. जल्दी…. उईईई…मेरी चुउउउत में चिंतियाँ सी काट रही हैं… प्लीज़….. जल्दी करूऊओ…वाकई बातें बाद मेंन्न…..

मेने अपने सुपाडे को थोड़ा सा उसके छेद के मुँह पर अड़ा कर कहा – करता हूँ… पहले बताओ तो सही, फिर क्या हुआ…?

सस्सिईईई…... नही कर पाया सालाअ…! इससे पहले कि वो कुछ कर पाता…, निशा का भाई वहाँ आ गया… और उसने उसे बचा लिया….!

मेने अपना आधा लंड उसकी चूत में डाल दिया.. और वहीं रुक कर बोला – तो अब वो हॉस्पिटल में क्या कर रहा है..?

वो – सीईईईईईईईईईई… उऊहह….बहुत बड़े जालिम हो जीजू… भेन्चोद.. चोद ना मुझे…. सीईईई.… आअहह….रोक क्यों लियाआअ….पूरा तो डालूओ…

मेने अपना लंड पूरा डालने की वजाय, उल्टा सुपाडे तक बाहर खींच लिया और उतना ही डाले हुए बोला – आगे बता ना साली रंडी… बोल ना वो मादरचोद अब भी हॉस्पिटल में क्या कर रहा है..?

मालती की चूत में आग लगी हुई थी, उसे एक-एक क्षण भारी लग रहा था, सो जल्दी से बातों का सिलसिला ख़तम करना चाहती थी…

अब जल्दी से जल्दी मेरे सवाल ख़तम हों इसलिए वो बिना हिचकिचाए बोली -

आहह…. उन दोनो की हाथापाई में उसका खुद का चाकू उसको लग गया और वो घायल हो गयाआ…आआईयईई…..धीरे…. झटके से लंड अंदर जाते ही वो बिलबिलाई…

मेने उसे दो चार तगड़े से धक्के मार कर फिर पूछा… तो क्या वो अब तक घायल ही है… ठीक नही हो पाया…इतने दिनो में ?

आहह… अब तो नाटक कर रहा है… मदर्चोद..ऊद्द्द….सीईईईई….… भोसड़ी का बहुत हर्राामी हाीइ….सीईईई…डालो ना….

मेने धक्के लगाते हुए पूछा – क्यों..? अब नाटक क्यों कर रहा है..?

वो – सस्सिईईई….आअहह… ताकि निशा के भाई को जमानत ना मिले….उफफफ्फ़ माआ…. हाइईईई…ज़ोर से कारूव….उूउउ…आययईीीई…

अब मुझे लगभग मेरे सवालों के जबाब मिल चुके थे…

सो मेने उसको अच्छी तरह से जमकर चोदा… वो भी किसी चुदाई मशीन की तरह कमर धकेल-धकेल कर जबरदस्त तरीक़े से चुदाई और बीयर की मस्ती में चूर चुदने लगी…

30 मिनिट तक धमाल चुदाई के बाद मेने उसकी चूत को अपने लंड के पानी से भर दिया…इतनी देर में मालती दो बार झड़कर मस्त हो गयी थी…

कुछ देर बाद फ्रेश होकर वापस हम पलंग पर आ गये… वो मेरी गोद में ही बैठी थी… मेने उसके बड़े-2 कलमी आमों से खेलते हुए पूछा-

मालती मुझे अब सारी बातें डीटेल में बताओ, तुम्हारी शादी भानु से किन हालातों में हुई, उसने ये हरकत निशा के साथ क्यों की… और ये भी की तुमने उसका साथ क्यों दिया…

वो – आप ये सब क्यों जानना चाहते हो… आपको तो उन लोगों से अब कोई मतलव नही है ना.. ! फिर !

मे – अगर मत्लव होता तो नही बताती…? इसका मतलब तुम मुझसे बस सेक्स तक का ही रिश्ता मानती हो…!

देखो मालती मे जानता हूँ.. ये सब तुमने अपनी मर्ज़ी से नही किया है, .. मे बस ये जानना चाहता हूँ.. कि ऐसी क्या बात थी जो ये सब हुआ…!

मे चाहता हूँ, कि फ्यूचर में भानु तुम्हें इस तरह से इस्तेमाल ना करे, और एक अच्छे पति की तरह ही बर्ताव रखे, इसके लिए मेरा सच जानना ज़रूरी है,

मेरी बात से वो कुछ देर सोच में पड़ गयी, लेकिन फिर कुछ सोच कर कहने लगी

– वैसे भानु अब मेरा पति है.. चाहे जैसा भी हो…, लेकिन सच कहूँ तो मे आपसे कोई बात चाह कर भी छुपा नही सकती..,

क्योंकि जो सुख आपने मुझे दिया है, वो मेरा पति शायद ही अपने जीवन में कभी दे पाए, इसलिए मे आपको सब कुछ सच-सच बताती हूँ…

बात आज से एक साल पहले की है… एक दिन मेरे दादा के पास ठाकुर सुर्य प्रताप आए.. और उन्होने अपने बेटे के लिए मेरा हाथ माँगा…,

दादाजी जानते थे कि उनका बेटा कैसा है.. और वो खुद भी कोई अच्छी छवि नही रखते थे.. सो उन्होने शादी करने से मना कर दिया…

उनकी ना सुनकर सूर्य प्रताप भड़क गये.. और उन्होने दादाजी को ताबड करने की धमकी दे डाली, और कहा – कि अगर तुम्हारी पोती की शादी मेरे बेटे से नही हुई.. तो वो किसी और से भी नही होने देगा…

दादा जी ने हथियार डाल दिए और हमारी शादी हो गयी… कुछ दिन तो हसी खुशी से निकल गये, लेकिन कुछ ही महीनों बाद भानु अपना रंग दिखाने लगा.. मेरे साथ मनमानियाँ करने लगा…

धीरे-2 कर के उसने मुझे भी नशे की आदत लगा दी.. फिर एक दिन हम दादा-दादी से मिलने गाँव आए हुए थे…

निशा मुझसे मिलने आई हुई थी… उसके बाद एक दिन उसने मुझे कहा कि तुम अपनी सहेली निशा से मेरे संबंध कर्वाओ.. मेने ना-नुकुर की, तो वो मुझे मारने पीटने लगा…

धमकी दी कि अगर मेने उसकी बात नही मानी तो वो मुझे तलाक़ देकर किसी कोठे पर बिठा देगा..

मेने जब ये कहा कि मे उससे ये सबके लिए नही बोल सकती.. तो फिर उसने ये प्लान बनाया, कि तुम उसे चाइ में नशा मिलकर पिला देना, और कुछ देर के लिए घर से गायब हो जाना, वाकी मे देख लूँगा…

मे – लेकिन वो ये सब करना क्यों चाहता था… निशा ही क्यों…?

वो – मुझे भी शक़ हुआ और मेने उसे पूछा भी… तो उसने मुझसे बस इतना ही कहा.. कि ऐसा करने से उसको बहुत बड़ा फ़ायदा होने वाला है.. लेकिन क्या ये नही बताया...

लेकिन जीजू…प्लीज़ ये बातें भानु को पता ना चले, वरना वो मुझे कहीं का नही छोड़ेगा…

मेने उसके होंठ चूमकर कहा – मेरा विश्वास करो मालती, आइन्दा भानु तुम्हें एक पत्नी का सम्मान ही देगा…

फिर मेने टॉपिक चेंज कर दिया और उसको सेक्स की तरफ मोड़ कर उसके साथ जम कर सुबह तक मस्ती की, उसकी अच्छी तरह से भूख शांत कर के, सुवह उसको घर विदा कर दिया….!

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आज सनडे था, कोर्ट की तो छुट्टी थी, सुवह होटेल में फ्रेश हुआ.. चाय नाश्ता कर के… 10 बजे जस्टीस ढीनगरा जो राजेश का केस देख रहे थे.. उनके बंगले पर पहुँचा….

गेट पर प्रोफ़ेसर. राम नारायण जी का रेफरेन्स देकर अपना कार्ड दिया…

वो उनसे बात कर चुके थे, सो मेरा कार्ड देखते ही उन्होने मुझे अंदर बुलवा लिया…

मेने उन्हें सारी बातें डीटेल में बताई… उन्होने मुझे दो दिन बाद की बेल की सुनवाई की डेट देने का प्रॉमिस कर दिया….!

जस्टीस ढीनगरा के यहाँ से निकल कर, मेने एक वकालत नामा तैयार किया और चल दिया सेंट्रल जैल की तरफ…

जेलर को अपना परिचय दिया और उससे राजेश से मिलने का समय माँगा…

जैसे ही राजेश भाई मेरे सामने आए… मे उन्हें देखता ही रह गया…

क्या हालत हो गयी थी बेचारे की… आँखें सूजी हुई थी… उनके नीचे काले-2 निशान बनने लगे थे.. और वो गड्ढे से में धँस चुकी थीं…

राजेश मुझे अपने सामने देख कर भावुक हो गया… मेने उसके कंधे पर हाथ रखकर हौसला बनाए रखने के लिए कहा….

मेने वकालत नामे को उसके सामने रखते हुए कहा – राजेश भाई… आप इस पर साइन कर दीजिए…

राजेश – ये क्या है… अंकुश जी…?

मे – ये मेरा वकालत नामा है… आज से मे आपका केस लड़ रहा हूँ.. ?

वो – आप ! आप मेरा केस लड़ेंगे…?

मे – क्यों..? मेने भी वकालत की है…! क्या आपको मेरे ऊपर भरोसा नही है…?

वो – ऐसी बात नही है.. अंकुश जी, असल में मुझे अब आशा की कोई किरण ही नज़र आती दिखाई नही दे रही थी… सो इसलिए पुच्छ लिया… सॉरी !

मे – अब आप सारी चिंताएँ मुझ पर छोड़ दीजिए… बस दो दिन और.. उसके बाद आप खुली हवा में साँस ले रहे होंगे…

वो अविश्वसनीय नज़रों से मुझे देखने लगे… मेने कहा – मे सही कह रहा हूँ…, दो दिन बाद हम सभी एक साथ बैठे होंगे… विश्वास कीजिए मेरा..

वो – मुझे तो ये सपना सा ही लग रहा है… क्या सच में मे दो दिन बाद आज़ाद हो जाउन्गा…?

मे – पूरी आज़ादी मिलने में कुछ वक़्त ज़रूर लग सकता है… लेकिन दो दिन बाद आप जैल में तो नही होंगे… ये पक्का है.

उनको हौसला देकर मे अपने घर लौट आया…

शाम को हम सब एक साथ बैठे हुए थे… अभी तक घर में किसी को कुछ पता नही था कि बीते दो-तीन दिन में मे कहाँ और क्या कर रहा था…

बस उनको ये भरोसा ज़रूर था कि मे जो भी कर रहा हूँ.. वो राजेश की रिहाई से संबंधित ही होगा…

मेने बात शुरू की – भैया ! दो दिन बाद राजेश भाई की बैल की हियरिंग है… मे चाहता हूँ.. आप सब लोग उस समय अदालत में उपस्थित हों…

भैया – क्या..? इतनी जल्दी डेट भी मिल गयी..?

मे – हां ! मेने आप लोगों को एक हफ्ते का समय दिया था, तो ये सब करना तो ज़रूरी ही था !

भैया – लेकिन वो जड्ज तो बहुत नलायक था, हमें तो उसने मिलने तक का समय नही दिया था…!

मे – भैया ! कुछ चीज़ें क़ानूनी दाव पेंच से ही संभव हो पाती हैं..!

पिताजी – तुम्हें क्या लगता बेटा ! राजेश को बैल मिल जाएगी…?

मे – अपने बेटे पर भरोसा रखिए बाबूजी..! दुनिया का कोई क़ानून अब उन्हें जैल में नही रख पाएगा…!

मेने ऐसे – 2 एविडॅन्स इकट्ठा कर लिए हैं.. कि अगर अदालती प्रक्रिया अपने सिस्टम के हिसाब से ना चलती होती तो सीधे केस ही ख़तम हो जाता…इसी डेट को.

भाभी अपना आपा खो बैठी… उन्होने मेरे पास आकर मेरा माथा चूम लिया... और रोते हुए बोली – मुझे तुम पर नाज़ है लल्ला… माँ जी की आत्मा तुम्हें देख कर आज कितनी खुश हो रही होगी..

मेने उनके आँसू पोन्छते हुए कहा – नाज़ दो दिन बाद करना भाभी… जब आपके भाई आपके साथ होंगे…

रात को भाभी मेरे लिए दूध लेकर कमरे मैं आईं…साथ में निशा भी थी.

भाभी मेरे पास बिस्तर पर बैठ गयी… निशा उनके बाजू में खड़ी रही…

मेने भाभी के हाथ से दूध का ग्लास लेकर निशा से सवाल किया – निशा ! तुम्हें ठीक से याद है वो वाक़या…?

वो नज़र नीची किए हुए बोली – हां मुझे आज भी अच्छे से याद है,… उन मनहूस पलों को भला कैसे भूल सकती हूँ मे.. !

मे – तो एक बार याद कर के बताना… जब राजेश भाई और भानु के बीच हाथापाई हो रही थी,… तो क्या कभी भी ऐसा मौका आया था जब चाकू उनके हाथ लगा हो…?

वो – नही ! मुझे तो एक बार भी नही दिखा कि भैया का हाथ कभी भी उसके चाकू पर गया हो… वो तो उसकी कलाई ही पकड़ कर उसके हाथ को अपनी तरफ आने से रोकते रहे थे…

मे सोच में पड़ गया… की पोलीस का ध्यान इस तरफ क्यों नही गया…? चलो मान लिया कि पोलीस ठाकुर के दबाब में आ गयी… लेकिन भैया तो एसपी हैं.. उन्होने इस तरफ ध्यान क्यों नही दिया..?

मुझे सोच में डूबे हुए देख कर भाभी बोली – किस सोच में डूब गये लल्ला..?

मे – अच्छा भाभी ! एक बात बताइए… उस हादसे के बाद कृष्णा भैया यहाँ आए थे…?

भाभी – एक बार आए थे… तुम्हारे भैया के बुलाने पर…

मे – तो उनका व्यवहार इस केस को लेकर कैसा लगा…? आइ मीन वो मदद करना चाहते थे या कुछ और..? क्योंकि आप तो लोगों की साइकोलजी अच्छे से जान लेती हैं…

भाभी – शुरू में तो लगा कि वो इस मामले में मदद करना चाहते हैं… थोड़ी बहुत भाग दौड़ भी की थी, … कुछ उनकी बातों से लगा भी कि बात बन रही है…फिर…

मे – फिर..! फिर क्या हुआ भाभी…?

भाभी – शाम को जब यहाँ उस विषय पर बातें हो रही थी.. कि आगे क्या और कैसे करना है कि तभी उनको एक फोन आया… बातों से लगा कि शायद कामिनी का ही था…

वो हमारे पास से उठ कर फोन पर बात करते हुए बाहर निकल गये… जब वापस अंदर आए… तो उनका रुख़ बदला हुआ सा था…!

मे – तो क्या उन्होने आगे मदद करने के लिए मना कर दिया था…?

भाभी – सीधे -2 तो नही.. पर घुमा फिरा कर उन्होने जता दिया की अब बहुत देर हो चुकी है…, मामला अदालत में पहुँच चुका है, पोलीस अब इस मामले में कुछ नही कर सकती…!

 
फिर थोड़ा और कुछ इधर उधर की बात कर के भाभी उठ खड़ी हुई और बोली – तुम दोनो बात करो.. मे चलती हूँ… तुम्हारे भैया राह देख रहे होंगे…

मे मज़ाक करते हुए बोला – हां भाभी ! जल्दी जाओ, भैया बेचारे बैचैन हो रहे होंगे.., पता नही उनकी खूबसूरत बीवी कहाँ चली गयी…?

भाभी ने हँसते हुए मेरे गाल पर चिकोटी ली और बोली – शैतान… ! कितने बेशर्म हो गये हो.. अपने भैया के लिए ऐसा बोलते हो…?

मेने हँसते हुए कहा – इसमें मेने कुछ ग़लत कहा…? आप सुन्दर नही हो…?

कहो तो मे भैया को बोलकर आपसे शादी कर लेता हूँ.. क्यों निशा तुम्हें कोई प्राब्लम तो नही है ना..?

निशा नज़र झुकाए, मंद-मंद मुस्कराते हुए बोली – देवेर भाभी के बीच, मे कुछ नही बोलने वाली…

मेरी बात सुनकर भाभी बुरी तरह शर्मा गयी… और हँसते हुए कमरे से बाहर चली गयीं……

भाभी के जाते ही मेने निशा का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया… वो झटके से मेरी गोद में आ गिरी…

मेने उसके रसीले होंठों को चूमते हुए कहा – कितनी कमजोर हो गयी हो जान ! मुझे माफ़ कर देना… तुम इतना दुख झेलती रही और मुझे पता तक नही चलने दिया…!

वो – आप आ गये… अब मुझे कोई दुख नही है…! जो आप हमारे लिए कर रहे हैं… उसका एहसान कैसे चुका पाएँगे हम लोग…?

मे – एक थप्पड़ लगाउन्गा अगर एहसान-वहसान की बात की तो… क्या मुझे अपने से अलग समझती हो…?

भैया तो कितना भाग दौड़ कर रहे हैं.. तो क्या वो कोई एहसान कर रहे हैं किसी पर ?

वो रुआंसी सी होकर बोली – सॉरी जानू… मुझे माफ़ करदो… प्लीज़ … मुझे पता नही था की आप हम लोगों से इतना प्यार करते हैं…!

मेने उसके गाल पर अपनी नाक रगड़ते हुए कहा – हम सब तुमसे बहुत प्यार करते हैं.. ऐसा नही होता तो आज राजेश भाई जैल में क्यों होते…?

क्या उन्होने कोई एहसान किया तुम्हारे ऊपर.. ये एक प्यार ही तो था…उनका बेहन – भाई वाला प्यार, और मेरा अपनी जानेबहार वाला… !

खैर अब तुम बिल्कुल फिकर मत करो…मे सब कुछ ठीक कर दूँगा… और उन लोगों को भी अच्छा सबक सिखा दूँगा… जिन्होने मेरे अपनों को इतने दुख दिए हैं…!

मेने निशा को और ज़ोर से कसते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए… उसने अपनी आँखे बंद कर ली थी…

एक बात करनी थी तुमसे जान ! मेने उसको बोला, तो वो अपनी आँखें खोलकर मेरी ओर देखते हुए बोली… क्या..?

मे – मानलो अगर कल को तुम्हें ये पता चले, कि मेरे शारीरिक संबंध किसी और के साथ भी हैं तो तुम कैसे रिक्ट करोगी…?

वो मेरे सीने के बालों में अपनी उंगलियाँ घूमाते हुए बोली – मुझे सब पता है… !

सच कहूँ तो आपने वो संबंध अपनी भूख मिटाने के लिए नही बनाए हैं, … बल्कि उनकी ज़रूरत पूरी करने के लिए बनाए हैं…मे सही कह रही हूँ ना..!

मेने आश्चर्य से उसे देखते हुए पूछा – तुम्हें कैसे पता…?

वो मेरी आँखों में शरारत से देखते हुए बोली– आप क्या समझते हैं… भाभी देवर ही आपस में घुल-मिल सकते हैं…? बहनें नही..?

दीदी ने मुझे आपकी सारी बातें बता दी हैं.. !

उनका मानना हैं कि रिश्तों में सच्चाई बनाए रखना उनकी मजबूती की नीव होती है,…आप बेफ़िक्रा रहिए, मुझे आपकी पर्सनल लाइफ से कोई प्राब्लम नही..बस मुझे मेरे हिस्से का प्यार देते रहना…

इतना कहकर उसने मेरे चुचकों को सहला दिया…

मे मुँह फाडे उसकी बातें सुनता रहा… जब वो चुप हुई तो मेने उसे अपने सीने से लगाकर बोला…

ओह..निशु… इतना भरोसा करती हो मुझ पर…! सच में तुम दोनो ही बहनें महान हो… हम लोग कितने भाग्यशाली हैं.. जो तुम हमें मिली हो…

बातों के दौरान मे उसके पेट को सहला रहा था, जो अब धीरे-धीरे ऊपर को बढ़ता जा रहा था…

निशा भी मेरी छाती, और गले पर सहला रही थी…

फिर जैसे ही मेरे हाथ उसके संतरों पर पहुँचे, उसने झट से मेरे हाथों को रोक दिया, और एक नसीली मुस्कान के साथ बोली…

जानू ! एक रिक्वेस्ट हैं, अगर मानो तो,

मे उसकी तरफ सवालिया नज़रों से देखने लगा तो वो बोली – अब इतने दिन इंतेज़ार किया है, तो कुछ दिन और सही…

मे शरीर की सारी ज़रूरतों का अनुभव उस रात को ही पाना चाहती हूँ….!

उसकी मासूमियत भरी बात सुनकर मुझे उसपर इतना प्यार उमड़ा की मेने उसे कसकर अपने आलिंगन में भर लिया, और एक प्यार भरा चुंबन लेकर कहा –

अपनी जानेमन की हर इक्षा का सम्मान करना मेरा फ़र्ज़ है, ये कहकर मेने उसे अपनी गोद से उतारते हुए कहा – अब तुम जाओ और जाकर निश्चिंत होकर सो जाओ...

बस दो दिन और, उसके बाद अब हम एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंधने के बाद ही मिलेंगे…

…………………………………………………………………..

 
आज राजेश भाई की बैल की सुनवाई थी,… जस्टीस ढीनगरा के कोर्ट ने नोटीस जारी कर के पोलीस और दोनो पक्षों को बता दिया था…

पोलीस और ठाकुर को अचानक से इतनी जल्दी डेट मिलने की अपेक्षा नही थी.. लेकिन कोर्ट के आदेश को टालना किसी के बस में नही था.. सो उन्हें राजेश को कोर्ट में हाज़िर करना ही पड़ा…

सरकारी वकील ने वही रटी रटाई दलीलें पेश की जो पहले ही पोलीस ने दे रखी थी…

मेने अपना वकालत नामा कोर्ट के सामने पेश करते हुए अपने आप को राजेश का वकील के तौर पर परिचय दिया,

मेरी उम्र देखकर सरकारी वकील के चेहरे पर उपेक्षित सी स्माइल आ गयी…

मेने सरकारी वकील से सवाल पुछ्ने के उद्देश्य से कहा – मी लॉर्ड ! मे सरकारी वकील से कुछ सवाल करना चाहूँगा…

जड्ज साब की पर्मिशन ग्रांट होते ही मेने पूछा - आपके पास ऐसा कोई सबूत है जो ये साबित कर सके कि भानु प्रताप को चाकू मेरे मुवक्किल राजेश ने ही मारा था…

वो (सरकारी.वकील.) – ये कैसा सवाल हैं मी लॉर्ड ! जबकि पोलीस रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है.. , अभी इस सवाल का कोई मतलव नही है मी लॉर्ड !

मे – मी लॉर्ड ! रिपोर्ट में कहीं ये नही लिखा है कि राजेश ने चाकू से भानु प्रताप पर वार किया था…!

सरकारी.वकील. – मी लॉर्ड ! मौकाए वारदात पर अपराधी की बेहन मौजूद थी, और भानु प्रताप की पत्नी ने उन्हें घायल अवस्था में पाया, तभी तो उन्होने शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया..

मे – मी लॉर्ड ! मे सरकारी वकील की बात से इतेफ़ाक़ रखता हूँ, चस्म्दीद के तौर पर केवल मेरे मुवक्किल की बेहन ही मजूद थी…

लेकिन उन्होने अपने बयान में ये कहीं नही कहा है, कि राजेश ने ही भानु प्रताप पर वार किया था.…

ये भी तो हो सकता है कि चाकू से भानु ने मेरे मुवक्किल पर वार किया हो और उन्होने सिर्फ़ अपना बचाव किया हो, जैसा कि मिस निशा अपने बयान में कह चुकी हैं…

इसी हाथापाई में भानु का चाकू खुद उसके पेट में घुस गया हो…!

सरकारी वजिल – मी लॉर्ड ! मेरे फाज़िल दोस्त अब एक नयी कहानी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वो शायद ये नही जानते कि अदालत के फ़ैसले कहनियों से नही सबूतों के आधार पर दिए जाते हैं…

मेने तुरंत कहा - मे भी यही कहना चाहता हूँ मी लॉर्ड ! पोलीस द्वारा बनाई गयी कहानी को सच साबित करने के लिए कुछ सबूतों की ज़रूरत पड़ेगी, जो मुझे अभी तक देखने को नही मिले…

अतः मे कोर्ट का ध्यान उन्हीं सबूतों की तरफ ले जाना चाहता हूँ,

इसलिए अब मे कोर्ट से दरखास्त करूँगा कि उस दौरान की मेडिकल रिपोर्ट, मौकाए वारदात पर लिए गये फोटोस और चाकू पर मिले फिंगर प्रिंट्स अदालत में पेश किए जाएँ…!

मेरी बात सुनकर कोर्ट रूम में ख़ुसर-पुसर होने लगी…

जड्ज साब ने ऑर्डर ! ऑर्डर बोल कर सबको शांत किया… और सरकारी वकील से बोला – यस मिस्टर. सरकारी वकील.. ये सारे सबूत अभी तक कोर्ट में पेश क्यों नही हुए..?

अभी इसी वक़्त ये सारे सबूत अदालत में पेश किए जाएँ…

सरकारी वकील ने पोलीस इनस्पेक्टर की तरफ देखा.. तो वो बग्लें झाँकने लगा.. आख़िरकार कोई जबाब नही मिला तो वो बोला…

मे लॉर्ड… दुर्भाग्य वश.. पोलीस उस समय चाकू से फिंगर प्रिंट्स तो नही ले पाई..

लेकिन ये कुछ मौकाए वारदात के फोटोस और मेडिकल रिपोर्ट है.. जिसे उसने जड्ज के सामने पेश कर दिया…

मेने जड्ज साब से वो दोनो चीज़ देखने के रिक्वेस्ट की तो उन्होने अपने अरदली के हाथों मुझ तक भिजवाई…

मेने वो रिपोर्ट और फोटो को गौर से देखा… उसे देख कर मेरे चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी…

मेने फोटो से नज़र हटाकर जड्ज साब से कहा - मी लॉर्ड ! कैसी हास्यास्पद बात है…….

हम यहाँ एक संगीन जुर्म, अटेंप्ट तो मर्डर के ऊपर बहस कर रहे हैं.. जिसमें एक व्यक्ति के दोषी या निर्दोष साबित होने पर उसकी पूरी जिंदगी निर्भर करती है…

इतना संगीन जुर्म होने के बावजूद भी, पर्याप्त सबूत इकट्ठे करने चाहिए थे

वो भी पोलीस द्वारा नही किए गये…

इस्तेमाल में लिए गये वेपन से फिंगर प्रिंट्स नही लिए गये…इसको आप क्या कहेंगे…? पोलीस की काम करने की क्षमता या उदासीनता…या फरीक से मिली भगत…?

ऐसा लगता है, जैसे सारी बातों को दरकिनार करते हुए, पोलीस का ध्यान सिर्फ़ मेरे मुवक्किल को सज़ा दिलाना ही था…

मेरी बात सुनकर सरकारी वकील और पोलीस इनस्पेक्टर नज़रें चुराने लगे…! अपनी झेंप मिटाने के लिए वो जड्ज साब से बोला –

ऑब्जेक्षन मी लॉर्ड, मेरे काबिल दोस्त बिना वजह पोलीस की कार गुजारी पर शक़ कर रहे हैं…!

जड्ज साब को मेरी दलील सही लगी, इसलिए उन्होने कहा – ऑब्जेक्षन ओवर-रूल्ड…

सरकारी वकील, खिसियानी शकल लेकर अपनी सीट पर बैठ गया…

मेने आगे कहा - खैर मी लॉर्ड ! अब जो बात हुई ही नही उस विषय पर मे समय बरवाद नही करूँगा, पर जो मौजूद है उसी से मे कोर्ट का ध्यान इस फोटो पर आकर्षित करना चाहता हूँ…

फिर मेने उस फोटो को एक प्रोजेक्टर के ज़रिए कोर्ट रूम की बड़ी सी स्क्रीन पर लगाया जिससे वहाँ मौजूद सभी लोग देख सकें…

मी लॉर्ड ! गौर कीजिए.. ! भानु के पेट मे जो चाकू घुसा हुआ है.. उसका डाइरेक्षन ऊपर से नीचे की तरफ है… जबकि आम तौर पर जब कोई सामने से वार करता है तो वो कभी भी ऊपर से पेट पर वार नही कर सकता,

 
पेट पर वार वो अपने सामने से ही कर पाएगा, और उस स्थिति में चाकू या और कोई हथियार एग्ज़ॅक्ट्ली हॉरिज़ॉंटल स्थिति में ही हो सकता है…

क्या मेरे काबिल दोस्त ने कभी किसी पर इस तरह से वार किया है…?

मेरी बात सुनकर दर्शक दीर्घा में हँसी फैल गयी… और सरकारी वकील झेंप कर रह गया…

मेने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा - इससे सॉफ जाहिर होता है मी लॉर्ड !.. कि वार सामने से नही बल्कि घायल की खुद की बॉडी की तरफ से यानी ऊपर से हुआ है..

जो एक ही सूरत में संभव है.. कि घायल के खुद के हाथ में वो वेपन रहा होगा…

और सामने वाले व्यक्ति ने उसकी कल्लाई थामकर अपना बचाव किया हो, उसी कसम कश में भानु का हाथ नीचे आया होगा और खुद को घायल कर लिया…

मेरी दलील सुनकर सरकारी वकील और इंस्प्रेक्टोर के तोते उड़ गये.. वहीं पब्लिक दीर्घा में तालियाँ बजने लगी…

मेने आगे कहा – मी लॉर्ड… रिपोर्ट में किसी भी चस्म्दीद के बयान में ये नही है कि चाकू किसने मारा सिवाय भानु के,

जो अभी भी घायल होने का नाटक कर के हॉस्पिटल में पड़ा है.. जिससे मेरे मुवक्किल को बैल ना मिल सके..

सरकारी.वकील – ये आप किस बिना पर कह सकते हैं कि वो घायल नही है और नाटक कर रहा है…?

अब मेने फाइनल हथौड़ा मारते हुए कहा - ये मे नही कह रहा हूँ मी लॉर्ड ! ये उस हॉस्पिटल की रिपोर्ट बता रही है..

फिर मेने डॉक्टर. वीना से प्राप्त की हुई रिपोर्ट को हवा में लहराते हुए कहा – इस रिपोर्ट के मुताविक.. वो घटना के 15 दिन बाद ही पूरी तरह से ठीक हो चुका था..

और वैसे भी इस फोटो में चाकू की स्थिति साफ-साफ बता रही है, कि जख्म ज़्यादा गहरा नही होना चाहिए…

मेने वो फिटनेस रिपोर्ट कोर्ट को सममित कर दी… मेने फिर कहा – मी लॉर्ड ! इस केस में पोलीस की मिली भगत साफ-2 दिखाई दे रही है..

क्योंकि जो एविडेन्स इकट्ठा करने चाहिए थे वो कोर्ट को नही दिए गये.. और वहीं फरीक और पोलीस ने मिलकर मेरे मुवक्किल को चीट कर के उसकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है…

कोई भी भाई अपनी बेहन की इज़्ज़त की रक्षा के लिए जो कर सकता है मेरे मुवक्किल ने वही किया,… मेरी नज़र में अपराधी राजेश नही भानु है…

अतः.. मेरी कोर्ट से द्रखास्त है.. कि मेरे मुवक्किल को शीघ्र से शीघ्र बैल देकर जमानत पर रिहा किया जाए..

और पोलीस के खिलाफ मेरे मुवक्किल के साथ जानबूझकर नाइंसाफी करने के कारण मान हानि का केस दर्ज किया जाए..

जिसकी वजह से या मे तो कहूँगा, भानु का साथ देने के कारण मेरे मुवक्किल को इतने महीने जैल में काटने पड़े..

कोर्ट रूम में कुछ देर सन्नाटा पसरा रहा.. जस्टीस ढीनगरा कुछ लिखते रहे फिर उन्होने राजेश को बैल पर रिहा करने का आदेश पारित कर दिया.. और पोलीस को आगे के लिए उचित सबूत मुहैया करने की हिदायत दी.

मेरे और निशा के घरवालों के चेहरे खुशी से चमक रहे थे, खुशी से सबकी आँखें छलक आईं…

कोर्ट रूम से बाहर आकर सबने मुझे गले से लगाकर आशीर्वाद दिया…बाबूजी मेरी पहली कामयाबी से बहुत खुश थे…

मुझे अपने गले लगा कर बोले – तूने मेरी ज़िम्मेदारियों को आज पूरा कर दिया… मुझे नही पता था, मेरा बेटा इतना काबिल है…!

भैया ने भी मेरी बहुत तारीफ़ की… भाभी की खुशी की तो कोई सीमा ही नही थी… उन्होने अपनी बरसती आँखों से मेरे माथे को चूम कर अपना प्यार जताया.

राजेश और उनके माता-पिता की आँखो में मेरे प्रति कृताग्यता के भाव साफ-साफ दिखाई दे रहे थे…

फिर खुशी – 2 हम सब अपने घर की ओर लौट लिए…. …………….

 
आज हमारे घर पर भाभी के माता-पिता और राजेश सहित सभी लोग मौजूद थे, इसी मौके पर बाबूजी ने जिकर चलाते हुए कहा….

समधी जी… अंकुश के आने के बाद हमने उससे शादी की बात चलाई थी, तो उसने कहा था.. कि निशा का भाई जब तक अपनी बेहन को विदा नही करेगा वो शादी नही करेगा…

अब राजेश को जैल से बाहर निकाल कर उसने तो अपना वादा पूरा कर दिया है,.. तो अब क्यों ना हम भी अपना वादा पूरा करदें..!

निशा के पापा – समधी साब ! इसके लिए हमें पूछ कर आप शर्मिंदा मत करिए…

निशा अब आपकी बेटी, बहू जो भी आप समझें आपकी अमानत है… आप जब, जिस तरह से आदेश देंगे हम दोनो उसका कन्यादान कर देंगे…!

बाबूजी – तो फिर शुभ काम में देरी नही करनी चाहिए… क्यों ना आज ही पंडितजी को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवा लिया जाए…

वो –बहुत ही नेक विचार है आपका…!

तभी भाभी ने निशा की तरफ देखते हुए कहा, लेकिन बाबूजी, इसकी शक्ल देख कर तो लगता नही कि ये इस शादी से खुश है…!

भाभी के मुँह से ये शब्द सुनते ही, वो तुरंत बोल पड़ी, नही.. नही दीदी, मे बहुत खुश हूँ…, उसकी बात सुनते ही सभी ठहाके लगाकर हँसने लगे…

वो बेचारी बुरी तरह झेंप गयी, और भागकर कमरे में चली गयी…

मुस्कराते हुए भाभी ने मुझे इशारा किया, तो मे वहाँ से उठाकर उसके पीछे-2 चला गया, वो दरवाजे की तरफ पीठ कर के खड़ी थर-थर काँप रही थी,

मेने पीछे से उसे बाहों में भर लिया, वो और ज़्यादा काँपने लगी, फिर मेने जैसे ही अपने तपते होंठ उसकी गर्दन पर रखे…

वो बुरी तरह से सिहरकर पलटी और मेरे शरीर से लिपट गयी, उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया…!

मेने बड़े प्यार से उसके चेहरे को उठाया, वो पलकें झुकाए खड़ी रही..

जब मेने उसके कान की लौ को चूमते हुए हौले से कहा – निशा क्या तुम सच में इस शादी से खुश नही हो…!

उसने झट से अपनी पलकें खोल दी, और मेरे होंठों को चूम लिया, फिर मेरी आँखों में झाँक कर बोली – क्या आप मुझे अपने काबिल समझते हैं..?

मेने शरारत से कहा – अगर तुम खुश हो तो मे भी काम चला लूँगा.., वैसे इतनी शर्मीली लड़की को झेलना थोड़ा मुश्किल तो होगा…

वो बुरी तरह से लिपट गयी, और मेरे चेहरे को अपने चुंबनों से भर दिया और उसी एग्ज़ाइट्मेंट में बोली – थॅंक यू जानू, आप बहुत अच्छे हैं,

अब किसी ने आपको मुझसे छीनने की कोशिश भी की तो मे उसका खून कर दूँगी..

मे – अच्छा ! सबके सामने तो भीगी बिल्ली बन जाती हो, और यहाँ बड़ी शेरनी बन रही हो…

अब चलो बाहर सबके साथ बैठते हैं, देखें तो सही क्या बातें हो रही हैं, ये कहकर हम बाहर आ गये…

मुझे देखते ही बाबूजी ने पंडित जी को बुलाने के लिए कहा … मे खुश होता हुआ पंडित जी के घर पहुँचा… वो मुझे अपने घर के बाहर ही मिल गये…

मेने उन्हें बाबूजी के पास भेजा और खुद उनके घर के अंदर चला गया…

अंदर उनकी बहू अपने बच्चे के साथ खेल रही थी, जो अब बड़ा हो गया था..

मुझे देखते ही वो मेरे गले से लिपट गयी… और अपने बेटे से बोली – पिंटू.. बेटा देख तेरे पापा आए हैं… चल इनके पाँव छुकर आशीर्वाद ले…

बच्चा बड़ा अग्यकारी था, उसने फ़ौरन मेरे पैर छुये.. मेने उसे गोद में उठा लिया.. और उसके गाल पर किस कर के प्यार करने लगा…

मे – कितना प्यारा बच्चा है आपका भौजी… बड़ा होकर एकदम हीरो लगेगा…

वो – खून तो आपका ही है ना.. ! गौर से देखो… बिल्कुल आपका दूसरा रूप लगता है…

मेने उसका माथा चूमकर कहा – कोई शक़ तो नही करता.. कि ये ऐसा क्यों दिखता है…

वो – करने दो मुझे किसी का डर नही है… इसके दादा- दादी और वो सो कॉल्ड बाप तो घर में बच्चे के होने से ही खुश हैं… बाहरवालों की परवाह कॉन करता है…!

आप सूनाओ, बड़े दिनो बाद दिखाई दिए हो.. कहाँ थे अब तक.. फिर मेने उसे सारी बातें कही… और बोला – मेरी शादी हो रही है.. आओगी ना !

वो खुश होते हुए बोली… अच्छा ! कब..? किसके साथ..?

मे – मेरी भाभी की बेहन निशा के साथ… पंडित जी को इसलिए बुलाया है बाबूजी ने, तारीख पक्का करने के लिए…!

वो – ये तो बड़ी खुशी की बात बताई है आपने, सच में निशा बहुत खुश किस्मत है, जिसे आप जैसा पूर्ण पुरुष जीवन साथी के रूप में मिल रहा है..

चाहे कोई कुछ भी कहे मे तो आपकी शादी में खूब नाचूंगी… लेकिन देवर जी.. मुझे आपकी बहुत याद आती है… क्या आपको कभी मेरी याद नही आई..?

मे – आती तो है भौजी… पर पढ़ाई भी तो ज़रूरी थी.. अब शायद मे यहीं रहूँगा.. तो कभी-2 चान्स मिल सकता है…

वो – अभी मारलो ना चान्स… जल्दी से वैसे इसकी दादी पड़ोस में ही गयी है.. आती ही होगी.. तब तक…??

मे – नही ऐसे नही.. कभी फ़ुर्सत से…चिंता मत करो.. मौका मिलेगा.. और उसके होंठों को चूमकर मे वहाँ से निकल आया.. वाहहन से सीधा छोटी चाची के घर पहुँचा….!

चाची किसी काम में लगी थी… उनका बेटा वहीं आँगन में खेल रहा था… मेने उसे कहा.. अरे अंश बेटा.. मम्मी कहाँ हैं…?

वो मुझे देखते ही चिल्लाया… मम्मी … देखो कोई आया है….!

उसकी आवाज़ सुनकर चाची बाहर आई.. और मुझे देखते ही दौड़ कर मेरे सीने से लिपट गयी…

फिर अपने बेटे से बोली.. अंश बेटा इनके पाँव तो छुओ.. ये तुम्हारे बड़े भाई हैं… रूचि के पापा की तरह…

उसने भी मेरे पैर छुये… मेने उसे गोद में उठा लिया और गाल चूम कर उसे प्यार करने लगा… फिर चाची के कान में कहा… सिर्फ़ भाई…!

वो शरमा कर बोली – पापा भी… लेकिन इसको नही बता सकती ना ! फिर मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोली -

लल्ला ! बहुत याद आती है तुम्हारी… कितनी ही रातें तुम्हें याद कर-कर के काटी हैं मेने… इस शरीर को तो जैसे तुम्हारी ही आदत लग गयी थी…..

मे – अब क्या करूँ चाची… मुझे भी तो अपना भविश्य बनाना था…!

वो – हां ! सच कहा तुमने, यहाँ देखो क्या मुसीबत आन पड़ी है.., बेचारे राम और मोहिनी अपने भाई को लेकर कितने परेशान हैं…

मे – अब सारी परेशानी दूर हो गयी चाची… राजेश घर आ गया है.. कभी बाहर निकल कर भी देख लिया करो…

वो – क्या कह रहे हो ! सच में..! कहाँ है.. वो ?

मे – हमारे घर पर ही हैं सब लोग… निशा के मम्मी-पापा भी आए हुए हैं..

 
फिर बातों – 2 में मेने अपनी और निशा की शादी की बात बताई तो वो एकदम से भड़क गयी.. और अपने बेटे और मुझे साथ लेकर हमारे घर की तरफ लपक ली…!

घर में घुसते ही चाची पैर पटकते हुए बोली – जेठ जी आपने हमें बिल्कुल ही पराया कर दिया…? इतनी बड़ी खुशी और हमें बताया तक नही…!

भैया – अरे चाची.. अभी खुशी के लिए बैठे ही हैं.. अभी कुछ तय नही हुया…

बहू तो आपने देखी ही है.. और बताइए आपकी क्या इच्छा है.. वो भी रख देते हैं इनके सामने…

चाची – बड़े लल्ला जी मेरी क्या इच्छा होगी,.. इस घर की खुशी से बढ़कर मेरी और कोई इच्छा नही है.. मे तो बस इतना कह रही थी.. कि हमें भी इस खुशी में शामिल कर लेते तो मुझे अच्छा लगता…

भाभी – सॉरी चाची… हम आपको खबर करने ही वाले थे.. लल्ला जी के आने के बाद उन्हें आपके पास ही भेजते.., पर वो देखो हमारे कहने से पहले ही आपको ले आए… अब बताइए क्या ग़लत हुआ…!

चाची चुप रह गयी.. फिर बाबूजी ने कहा.. अंकुश ! बेटा जा अपने दोनो चाचा – चाची को भी खबर कर्दे.. सब मिल बैठ कर बात करते हैं.. वरना रश्मि की तरह वो लोग भी नाराज़ होंगे..

चाची – जेठ जी ! मे तो बस… ऐसे ही…

बाबूजी – मे जानता हूँ रश्मि .. तुम हम लोगों से कितना हित रखती हो.. इसलिए तुमने अपना हक़ जताया है,…

हम सच में माफी माँगते हैं तुमसे कि हमने पहले तुम्हें नही बुलाया…

इतने में और लोग भी आ गये.. और सबके सामने मेरी शादी की बात तय हुई…

मेरे कहने पर शादी को बड़े सादगी ढंग से करने का निर्णय लिया गया.. कोई ज़्यादा शोर-शराबा या हंगामा नही करना था..

बस अपने घरवालों की मौजूदगी में ही सात फेरे लेने थे.. और सबका आशीर्वाद लेकर अपना घर संसार बसा लेना था..

वाकी लोगों की मनसा थी कि सारे रिस्ते-नातेदारो को बुलाया जाए.. लेकिन मेने मना कर दिया.. जिसे भैया और भाभी ने भी उचित ठहराया,…इसके पीछे मेरा आगे का मक़सद जुड़ा हुआ था…

किसी और सगे संबंधी को ना बुलाना पड़े, इस वजह से हमने रामा दीदी को भी खबर नही की, वरना चाचा की बेटियों को भी बुलाना पड़ता…

मे नही चाहता था कि मेरी शादी की बात ज़यादा लोगों को पता लगे…

और एक दिन सभी घर परिवार की मौजूदगी में हम दोनो एक हो गये.. हमने गाँव के अन्य लोगों को भी शामिल नही किया था…

आज निशा मेरी थी.. मे निशा का था…, दोनो ने बंधन में बँधने के बाद सभी बड़ों का आशीर्वाद लिया…

भाभी के पैर लगते हुए मे उनके कान में फुसफुसाया…

भाभी , आख़िर तोता – मैना एक हो ही गये,… उन्होने मुस्करा कर आशीर्वाद देते हुए कहा…ये जोड़ी सदा यौंही बनी रहे.. एश्वर से बस यही प्रार्थना है मेरी..

आज मेरी तपस्या का फल मुझे मिल गया है,… फिर वो आँसुओं भरे चेहरे को ऊपर उठा कर बोली – माजी मेरी ज़िम्मेदारियों में कोई कमी रह गयी हो तो अपनी बेटी समझ कर मुझे माफ़ कर देना…

बाबूजी भी अपनी भावनाओं को काबू में नही रख पाए,.. रोते हुए उन्होने

भाभी को अपने गले से लगा लिया.. और रुँधे स्वर में बोले…

नही मेरी बच्ची… तूने अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी श्रद्धा और लगान से निभाईं हैं… शायद इतनी अच्छी तरह से विमला भी ना निभा पाती…!

ये देख कर वहाँ मौजूद सभी की आँखें भी नम हो गयी…… !

सारे रीति-रिवाजों को संपन्न करने के बाद, निशा के मम्मी पापा और भैया कुछ घंटे रुक कर दोपहर ढलते ही अपने घर लौट गये…

भाभी ने मुझे कहा… लल्ला जी आज तुम दोनो के मिलन की पहली रात है, तो सगुण के तौर पर निशा को ऐसा कुछ देना जो उसे पसंद आए…

मेने कहा – सब तरह के गहने-जेवर तो आपने उसे दे ही दिए हैं… अब मे ऐसा क्या दूँ.. आप ही कुछ बता दो…

भाभी – एक लड़की गहने-जेवर से बढ़कर अपने पति द्वारा प्यार से दिया हुआ तोहफा ज़्यादा पसंद करती है…, तो जो भी तुम्हें पसंद हो वो दे देना…

मे सोच में पड़ गया… मेने कभी अपनी पसंद-नापसंद के बारे में सोचा ही नही था… सारी इक्षाएँ तो भाभी ही पूरा करती आईं थीं…तो ऐसा क्या दूँ, जो उसे भी पसंद आए…

क्या इसके बारे में निशा को ही पूछा जाए…? लेकिन वो तो कहेगी कि उसे और कुछ नही चाहिए… तो फिर क्या दिया जाए…?

फिर मेरे दिमाग़ में आया… क्यों ना उसे ऐसा कुछ दिया जाए… जिसकी वजह से वो हर समय मेरे करीब ही रहे…तो मेरे दिमाग़ ने कहा “मोबाइल” .

हां यही ठीक रहेगा, एक स्मार्ट फोन उसे देता हूँ, जिससे हम चाहे पास हों या दूर, जब मन करे, एकदुसरे से बात कर के करीब ही रह सकते हैं…

ये सोच कर मेने गाड़ी उठाई और शहर की तरफ चल दिया…

शहर जाकर मेने एक अच्छी सी कंपनी का स्मार्ट फोन खरीदा और चल पड़ा अपने घर की ओर… अपने प्रथम मिलन की कल्पना करते हुए…

अभी मे शहर से कोई 10 किमी ही निकला था कि, बीच रास्ते में मुझे एक जीप खड़ी दिखाई दी…

सिंगल रोड होने के कारण उसके साइड से बचा कर बयके निकलने के लिए मुझे अपनी स्पीड कुछ ज़्यादा ही कम करनी पड़ी…

मे अभी उस जीप के बगल से निकल ही रहा था कि, जीप में बैठे लोगों मे से एक ने मेरे ऊपर हॉकी से वार किया…

हॉकी के वार को तो में झुकाई देकर बचा गया, लेकिन मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया और मे बाइक समेत रोड के साइड को लुढ़कता चला गया…

मेरा बदन कयि जगह से छिल गया, जिसमें से तेज टीस सी उठने लगी…

ख़तरे का आभास होते ही मेरी सभी इंद्रिया सजग हो उठी…मे अपने दर्द की परवाह किए वगैर उठ खड़ा हुआ…

लेकिन इससे पहले कि मे ठीक से खड़ा हो पता, उनमें से दो लोगों ने मुझे दोनो तरफ से मेरे बाजुओं से जकड लिया…!

 
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