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शाजिया उस प्याले को लेने लगी, तो घबराहट में अब्दुल जी ने शाजिया के पैर में पैर मार दिया, जिससे वो उलझ कर गिर गई और उसकी मैक्सी भी ऊपर हो गई. जिसकी वजह से उसकी खुली फुददी के दीदार अब्दुल जी को हो गए.
शाजिया की नज़र अब्दुल जी की नज़र पर गई, जो कहीं और ही टिकी थी. तब उनकी नज़र का पीछा करते हुए शाजिया को अहसास हुआ कि वो उसकी फुददी को घूर रहे हैं, जो रस से भीगी हुई थी और चमक रही थी.
शाजिया ने हालत को समझते हुए जल्दी से कपड़े ठीक किए और झूठ मूट का नाटक करने लग गई.
शाजिया- ओह अम्मी.. मर गई मैं उउउह अब्बू.
अब्दुल- अरे ठीक से चल भी नहीं सकती. अब गिर गई ना.. दिखा कहाँ लगी है.
शाजिया के दिमाग़ में अपनी फुददी को शांत करने का फ़ौरन आइडिया आ गया.
शाजिया- आह.. अब्बू पैर में दर्द हो रहा है और कमर में भी जोर से लगी है.
अब्दुल- अच्छा तू खड़ी हो, मैं देखता हूँ.
शाजिया- आह.. उठा भी नहीं जा रहा.. बहुत दर्द हो रहा है अब्बू.
अब्दुल जी उसके पास बैठ गए और उसके चेहरे को देखने लगे.
अब्दुल- सॉरी बेटा.. मेरी वजह से ही तू गिरी है. अगर मेरा पैर बीच में नहीं आता तो तुझे तकलीफ़ नहीं होती. मगर तू घबरा मत, मैं अभी तुझे उठा कर तेरे कमरे में लेकर जाता हूँ.
शाजिया- ओह हाँ अब्बू आप मुझे ही गोदी में उठा लो.. आह.. मुझसे तो उठा नहीं जाएगा आह.. अब्बू उफ्फ..
अब्दुल जी ने एक हाथ उसकी गांड के नीचे और दूसरा गर्दन के नीचे रखा और उसे उठा कर कमरे में ले गए.
शाजिया- आह.. अब्बू आप बहुत अच्छे हो. अब ये दर्द का कुछ करो आह.. मुझे बहुत दुख रहा है.
अब्दुल- देख मैं तेरी अम्मी के आने के पहले तुझे ठीक कर दूँगा. तू रुक, मैं अभी तेरा इलाज लेकर आता हूँ.
अब्दुल जी बाहर गए, सबसे पहले तो उन्होंने उस प्याले को साफ किया. फिर उसमें सरसों का तेल लेकर उसको गर्म करने लगे.
उधर शाजिया अपने ख्यालों में खोई हुई सोच रही थी ‘ओह अब्बू, आपका लंड तो बहुत बड़ा है. उसको चूसते हुए मेरा मुँह दुखने लगा. काश मैं उसको देख पाती, अपने हाथों से उसे पकड़ कर हिला पाती और आपका रस.. आह कितना आनंद आ रहा था.. काश वो रस आप मुझे पिला देते, तो आनंद आ जाता मगर जो भी हुआ अब आपको उसके आगे लेकर आऊंगी. तभी तो दर्द का नाटक किया मैंने, अब जल्दी से आ जाओ और मेरी फुददी को सुकून दे दो.
अब्दुल- ये देखो में सरसों का तेल लाया हूँ इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा.
शाजिया- लेकिन अब्बू मैं कैसे लगाऊं.. मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा.
अब्दुल- अरे मैं लगा दूँगा ना.. तू टेंशन क्यों ले रही है.
शाजिया- अब्बू व्व..वो आप कैसे लगा सकते हो.. व्व..वो दर्द पीठ पर और पैरों में ऊपर की तरफ़ हो रहा है.
अब्दुल- अरे तो क्या हुआ.. पहले जब तू छोटी थी ना तब तेरे जिस्म की मालिश तेरी अम्मी नहीं, मैं ही किया करता था. समझी अब मुँह से कोई आवाज़ मत निकलना समझी.
शाजिया- ल्ल..लेकिन अब्बू वो तो एमेम.. मैंने नीचे कुछ न..नहीं पहना है..!
अब्दुल- मैंने कहा ना चुप, अब मैं जो करता हूँ, करने दे.. इससे तुझे आराम मिलेगा, तब बोलना.. समझी..!
शाजिया की बात का अब्दुल जी पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो बस जल्दी से उसकी मालिश करना चाह रहे थे.
शाजिया- ठीक है अब्बू आप जो चाहे करो.
अब्दुल जी ने मैक्सी थोड़ी ऊपर की और घुटनों की मालिश करने लगे.. फिर धीमे-धीमे हाथ को ऊपर जाँघों पे ले गए.
अपने अब्बू के हाथ जाँघों पे लगते ही शाजिया के जिस्म ने झटका खाया. उसकी काम भरी सिसकी निकल गई और फुददी में एक करंट सा दौड़ गया. अब्दुल जी ने शाजिया की तरफ़ देखा तो उसकी आँखें बंद थीं और वो अपने होंठों को दांतों में दबा कर काट रही थी.
अब्दुल जी अब सिर्फ़ जाँघों की मालिश कर रहे थे और एक-दो बार उनकी उंगली फुददी से टच भी हुई, जिसका असर शाजिया की कामुक सिसकी से पता लग रहा था कि वो कितनी उत्तेजित हो गई है.
अब्बू को भी अपनी कमसिन बेटी की मालिश करने में आनंद आ रहा था और उनका लंड फिर उठाव लेने लगा था. शाजिया की फुददी रिसने लगी थी, इस बात का अहसास अब्दुल जी को तब हुआ, जब दोबारा उनकी उंगली फुददी से टकराई.
अब्दुल जी मन में ‘लगता है शाजिया उत्तेजित हो गई है, तभी उसकी फुददी गीली हो गई. अब इसे शांत करना जरूरी है.. नहीं तो ये परेशान रहेगी.’
शाजिया की आँखें अब भी बंद थीं.. वो बस घुटी-घुटी आवाज़ में मादकता से सिसक रही थी.
अब्दुल जी मन में ‘मेरी शाजिया, तू तो बड़ी हो गई है.. देख तेरी फुददी कैसे पानी छोड़ रही है, बस ऐसे ही आँखें बंद रखना. मैं तेरे कामरस को चख कर देखूं कि कैसा स्वाद है मेरी बेटी की फुददी के रस का!’
अब्दुल जी ने अब सीधे उंगली फुददी पे लगा दी और उसके सहलाने लगे, फिर उसपे जो रस लगा उसे वो चाट गए. उनका लंड एकदम टाइट हो गया था और वो भी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गए थे.
अब्दुल- शाजिया बेटा तू पेट के बल लेट जा, तेरी पीठ पे भी तेल लगा देता हूँ.. जिससे तुझे आराम मिल जाएगा.
शाजिया तो इतनी ज़्यादा उत्तेजित थी कि वो सब भूल गई कि उसके अब्बू कैसे उसका फायदा उठा रहे हैं. वो बिना कुछ बोले उल्टी लेट गई. अब्दुल जी ने उसकी मैक्सी ऊपर कर दी, अब नीचे का पूरा हिस्सा नंगा उनके सामने था. शाजिया की भरी हुई गांड देख कर अब्दुल जी ने मन में सोचा कि अभी इसमें लंड घुसा दूँ तो आनंद आ जाए. मगर एक अब्बू और बेटी के बीच की शर्म उनको रोके हुए थी.
अब उन्होंने पीठ की मालिश शुरू कर दी. वो शाजिया की गोरी गांड पर भी हाथ घुमा रहे थे. फिर उन्होंने सोचा शाजिया तो कुछ बोल भी नहीं रही, तो क्यों न कुछ आनंद ले लिया जाए. अब्दुल जी ने लंड को बाहर निकाला और शाजिया के ऊपर दोनों तरफ़ अपने पैर निकाल कर बैठ गए और लंड को फुददी पे सैट करके ऊपर-नीचे रगड़ने लगे.
शाजिया को जब लंड का अहसास सीधे फुददी पे हुआ तो उसका पसीना छूट गया. शाजिया मन में- हाई अल्लाह, ये अब्बू को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही क्या.. कैसे फुददी पे लंड घिस रहे हैं. कहीं ये लंड को फुददी के अन्दर ही ना पेल दें.
अब्दुल जी तो बस मज़े लेने में लगे हुए थे और शाजिया की उत्तेजना अब चरम पर पहुँच गई थी- आह.. ससस्स अब्बू उफ़फ्फ़ आह…. ऐसे ही करो.. आह.. यहीं दर्द ज़्यादा है आह.. ऐसे ही जोर से रगड़ो आह…
अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया की फुददी का बाँध टूटने वाला है, उन्होंने जोर-जोर से लंड को रगड़ना शुरू कर दिया और तभी शाजिया की फुददी से रस की फुहार निकलने लगी.
अब्दुल जी जल्दी से अलग हुए और हाथ से फुददी के रस को साफ किया, फिर उसको चाटने लगे. अब शाजिया शांत हो गई थी मगर ये अहसास कि उसके अब्बू उसका रस चाट रहे हैं, उसको और अधिक रोमांचित कर रहा था.
शाजिया- आह.. ससस्स बस अब्बू अब ठीक है आह.. आपने मेरा सारा दर्द निकाल दिया है.
अब्दुल- अच्छा अब तू थोड़ी देर आराम कर.. मैं ये तेल रख कर आता हूँ.
अब्दुल जी वहां से चले गए और शाजिया वैसे ही लेटी रही और बड़बड़ाने लगी ‘उफ्फ ये सब क्या हो रहा है.. मैं सोच भी नहीं सकती कि इतनी जल्दी अब्बू मेरी फुददी तक पहुँच जाएँगे. उफ्फ क्या आग लगा दी अब्बू ने, अब जो होगा देखा जाएगा.. बस मैं अब्बू को इतना वेबकूफ़ बना दूँगी कि वो खुद फुददी माँगने लगेंगे.’
उधर अब्दुल जी अपने कमरे में चले गए उनका लंड अभी भी तना हुआ था. उन्होंने लंड बाहर निकाला और सहलाते हुए बिस्तर पे बैठ गए- ओह अल्लाह.. ये क्या पाप कर दिया.. मैंने अपनी सग़ी बेटी उफ्फ उसी की फुददी का रस चाट कर आ रहा हूँ. उसी को लंड चुसा दिया मैंने.. छी: ये कैसे कर दिया मैंने.
फ्रेंड्स अक्सर इंसान अकेले में बात करता है तो उसके सामने उसका दूसरा रूप आ जाता है यानि कुछ आत्मा टाइप.. समझ रहे हो ना आप, तो बस वैसे ही अब्दुल जी की अंतरात्मा भी बाहर आकर उनसे बात कर रही है.
आत्मा- अच्छा अब बुरा लग रहा है और रात को जब उसके मज़े लिए, तब बुरा नहीं लगा? उसके नाम की मुठ मारी तब बुरा नहीं लगा और फरज़ाना के साथ किया तब नहीं सोचा.. वो भी तो तेरी ही बेटी थी?
अब्दुल- फरज़ाना की बात अलग है, वो मेरी सग़ी बेटी नहीं है. मगर शाजिया तो मेरा खून है.. मैं उसके साथ कैसे सब कर सकता हूँ.
आत्मा- लंड और फुददी किसी रिश्ते को नहीं देखता.. और वैसे भी शुरूआत शाजिया ने की है. वो तेरे लंड पे बैठ गई, अजीब तरह से तुझे किस करती है.. और आज तो उसने मैक्सी के अन्दर कुछ नहीं पहना यानि वो खुद तुझे आनंद देना चाहती है.
अब्दुल- नहीं नहीं वो नादान है.. अब्बू के प्यार में गोदी में बैठी थी और आज क्या.. वो तो अक्सर ही घर में अंडरगार्मेंट्स नहीं पहनती है.
आत्मा- अच्छा तुझे बड़ा पता है.. क्यों तू उसकी फुददी रोज देखता है क्या?
अब्दुल- मुझे लगा ऐसा तो बोल दिया.
आत्मा- देख तू सच से भाग नहीं सकता, आज वो जिस तरह तेरे लंड को चूस रही थी, उससे तुझे लगता है वो चीज को पहचानने की कोशिश कर रही थी और तो और वो गिरी घुटनों तक थी तो जाँघ और कमर पर कहाँ चोट लग गई..? बोलो और उसकी फुददी क्यों गीली हुई.. बताओ कोई जवाब है इसका?
अब्दुल- शायद तुम सही कह रहे हो. मैंने उसकी फुददी को छुआ, वो मना कर सकती थी, गुस्सा भी हो सकती थी मगर उसने तो मज़े लिए और वो झड़ी भी.
आत्मा- सही समझा तू.. अब उसको लंड की जरूरत है, बाहर किसी से चुदवाए, इससे अच्छा तू उसकी प्यास बुझा दे.
अब्दुल- मगर कैसे वो मेरी बेटी है और मैं ये सब उससे कैसे कहूँ?
आत्मा- यही वो भी सोच रही होगी कि तुझे कैसे कहें कि अब्बू मुझे चोदो.. मगर तुम दोनों ही एक-दूसरे की प्यास मिटा सकते हो.
अब्दुल- ठीक है आज से मैं खुलकर उसके मज़े लूँगा. उसको इतना तड़पाऊंगा कि वो खुद कहेगी कि अब्बू मुझे आपका लंड चाहिए, तब मैं उसे चोदूँगा.
अब्दुल जी ने पक्का सोच लिया था कि वो शाजिया को चोदेंगे और अब आत्मा भी गायब हो गई थी. इसी सोच के चलते उनका लंड अब और ज़्यादा अकड़ गया था. मगर उन्होंने खुद को समझाया कि जल्दबाज़ी में काम बिगड़ सकता है और वैसे भी अभी शाजिया ठंडी हुई है तो उसके पास जाने का फायद नहीं.
फ्रेंड्स उम्मीद है कि आपको आनंद आ रहा होगा. अब शाजिया के रांड़ बनने की घड़ी नज़दीक आ रही है और आपके कुछ सवालों के जवाब भी आपको मिल गए होंगे, तो चलो इन अब्बू-बेटी को आराम करने दो. हम वापस फवाद के पास जाते हैं, आज वहां भी बहुत कुछ मसालेदार होने वाला है.
शाजिया की नज़र अब्दुल जी की नज़र पर गई, जो कहीं और ही टिकी थी. तब उनकी नज़र का पीछा करते हुए शाजिया को अहसास हुआ कि वो उसकी फुददी को घूर रहे हैं, जो रस से भीगी हुई थी और चमक रही थी.
शाजिया ने हालत को समझते हुए जल्दी से कपड़े ठीक किए और झूठ मूट का नाटक करने लग गई.
शाजिया- ओह अम्मी.. मर गई मैं उउउह अब्बू.
अब्दुल- अरे ठीक से चल भी नहीं सकती. अब गिर गई ना.. दिखा कहाँ लगी है.
शाजिया के दिमाग़ में अपनी फुददी को शांत करने का फ़ौरन आइडिया आ गया.
शाजिया- आह.. अब्बू पैर में दर्द हो रहा है और कमर में भी जोर से लगी है.
अब्दुल- अच्छा तू खड़ी हो, मैं देखता हूँ.
शाजिया- आह.. उठा भी नहीं जा रहा.. बहुत दर्द हो रहा है अब्बू.
अब्दुल जी उसके पास बैठ गए और उसके चेहरे को देखने लगे.
अब्दुल- सॉरी बेटा.. मेरी वजह से ही तू गिरी है. अगर मेरा पैर बीच में नहीं आता तो तुझे तकलीफ़ नहीं होती. मगर तू घबरा मत, मैं अभी तुझे उठा कर तेरे कमरे में लेकर जाता हूँ.
शाजिया- ओह हाँ अब्बू आप मुझे ही गोदी में उठा लो.. आह.. मुझसे तो उठा नहीं जाएगा आह.. अब्बू उफ्फ..
अब्दुल जी ने एक हाथ उसकी गांड के नीचे और दूसरा गर्दन के नीचे रखा और उसे उठा कर कमरे में ले गए.
शाजिया- आह.. अब्बू आप बहुत अच्छे हो. अब ये दर्द का कुछ करो आह.. मुझे बहुत दुख रहा है.
अब्दुल- देख मैं तेरी अम्मी के आने के पहले तुझे ठीक कर दूँगा. तू रुक, मैं अभी तेरा इलाज लेकर आता हूँ.
अब्दुल जी बाहर गए, सबसे पहले तो उन्होंने उस प्याले को साफ किया. फिर उसमें सरसों का तेल लेकर उसको गर्म करने लगे.
उधर शाजिया अपने ख्यालों में खोई हुई सोच रही थी ‘ओह अब्बू, आपका लंड तो बहुत बड़ा है. उसको चूसते हुए मेरा मुँह दुखने लगा. काश मैं उसको देख पाती, अपने हाथों से उसे पकड़ कर हिला पाती और आपका रस.. आह कितना आनंद आ रहा था.. काश वो रस आप मुझे पिला देते, तो आनंद आ जाता मगर जो भी हुआ अब आपको उसके आगे लेकर आऊंगी. तभी तो दर्द का नाटक किया मैंने, अब जल्दी से आ जाओ और मेरी फुददी को सुकून दे दो.
अब्दुल- ये देखो में सरसों का तेल लाया हूँ इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा.
शाजिया- लेकिन अब्बू मैं कैसे लगाऊं.. मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा.
अब्दुल- अरे मैं लगा दूँगा ना.. तू टेंशन क्यों ले रही है.
शाजिया- अब्बू व्व..वो आप कैसे लगा सकते हो.. व्व..वो दर्द पीठ पर और पैरों में ऊपर की तरफ़ हो रहा है.
अब्दुल- अरे तो क्या हुआ.. पहले जब तू छोटी थी ना तब तेरे जिस्म की मालिश तेरी अम्मी नहीं, मैं ही किया करता था. समझी अब मुँह से कोई आवाज़ मत निकलना समझी.
शाजिया- ल्ल..लेकिन अब्बू वो तो एमेम.. मैंने नीचे कुछ न..नहीं पहना है..!
अब्दुल- मैंने कहा ना चुप, अब मैं जो करता हूँ, करने दे.. इससे तुझे आराम मिलेगा, तब बोलना.. समझी..!
शाजिया की बात का अब्दुल जी पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो बस जल्दी से उसकी मालिश करना चाह रहे थे.
शाजिया- ठीक है अब्बू आप जो चाहे करो.
अब्दुल जी ने मैक्सी थोड़ी ऊपर की और घुटनों की मालिश करने लगे.. फिर धीमे-धीमे हाथ को ऊपर जाँघों पे ले गए.
अपने अब्बू के हाथ जाँघों पे लगते ही शाजिया के जिस्म ने झटका खाया. उसकी काम भरी सिसकी निकल गई और फुददी में एक करंट सा दौड़ गया. अब्दुल जी ने शाजिया की तरफ़ देखा तो उसकी आँखें बंद थीं और वो अपने होंठों को दांतों में दबा कर काट रही थी.
अब्दुल जी अब सिर्फ़ जाँघों की मालिश कर रहे थे और एक-दो बार उनकी उंगली फुददी से टच भी हुई, जिसका असर शाजिया की कामुक सिसकी से पता लग रहा था कि वो कितनी उत्तेजित हो गई है.
अब्बू को भी अपनी कमसिन बेटी की मालिश करने में आनंद आ रहा था और उनका लंड फिर उठाव लेने लगा था. शाजिया की फुददी रिसने लगी थी, इस बात का अहसास अब्दुल जी को तब हुआ, जब दोबारा उनकी उंगली फुददी से टकराई.
अब्दुल जी मन में ‘लगता है शाजिया उत्तेजित हो गई है, तभी उसकी फुददी गीली हो गई. अब इसे शांत करना जरूरी है.. नहीं तो ये परेशान रहेगी.’
शाजिया की आँखें अब भी बंद थीं.. वो बस घुटी-घुटी आवाज़ में मादकता से सिसक रही थी.
अब्दुल जी मन में ‘मेरी शाजिया, तू तो बड़ी हो गई है.. देख तेरी फुददी कैसे पानी छोड़ रही है, बस ऐसे ही आँखें बंद रखना. मैं तेरे कामरस को चख कर देखूं कि कैसा स्वाद है मेरी बेटी की फुददी के रस का!’
अब्दुल जी ने अब सीधे उंगली फुददी पे लगा दी और उसके सहलाने लगे, फिर उसपे जो रस लगा उसे वो चाट गए. उनका लंड एकदम टाइट हो गया था और वो भी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गए थे.
अब्दुल- शाजिया बेटा तू पेट के बल लेट जा, तेरी पीठ पे भी तेल लगा देता हूँ.. जिससे तुझे आराम मिल जाएगा.
शाजिया तो इतनी ज़्यादा उत्तेजित थी कि वो सब भूल गई कि उसके अब्बू कैसे उसका फायदा उठा रहे हैं. वो बिना कुछ बोले उल्टी लेट गई. अब्दुल जी ने उसकी मैक्सी ऊपर कर दी, अब नीचे का पूरा हिस्सा नंगा उनके सामने था. शाजिया की भरी हुई गांड देख कर अब्दुल जी ने मन में सोचा कि अभी इसमें लंड घुसा दूँ तो आनंद आ जाए. मगर एक अब्बू और बेटी के बीच की शर्म उनको रोके हुए थी.
अब उन्होंने पीठ की मालिश शुरू कर दी. वो शाजिया की गोरी गांड पर भी हाथ घुमा रहे थे. फिर उन्होंने सोचा शाजिया तो कुछ बोल भी नहीं रही, तो क्यों न कुछ आनंद ले लिया जाए. अब्दुल जी ने लंड को बाहर निकाला और शाजिया के ऊपर दोनों तरफ़ अपने पैर निकाल कर बैठ गए और लंड को फुददी पे सैट करके ऊपर-नीचे रगड़ने लगे.
शाजिया को जब लंड का अहसास सीधे फुददी पे हुआ तो उसका पसीना छूट गया. शाजिया मन में- हाई अल्लाह, ये अब्बू को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही क्या.. कैसे फुददी पे लंड घिस रहे हैं. कहीं ये लंड को फुददी के अन्दर ही ना पेल दें.
अब्दुल जी तो बस मज़े लेने में लगे हुए थे और शाजिया की उत्तेजना अब चरम पर पहुँच गई थी- आह.. ससस्स अब्बू उफ़फ्फ़ आह…. ऐसे ही करो.. आह.. यहीं दर्द ज़्यादा है आह.. ऐसे ही जोर से रगड़ो आह…
अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया की फुददी का बाँध टूटने वाला है, उन्होंने जोर-जोर से लंड को रगड़ना शुरू कर दिया और तभी शाजिया की फुददी से रस की फुहार निकलने लगी.
अब्दुल जी जल्दी से अलग हुए और हाथ से फुददी के रस को साफ किया, फिर उसको चाटने लगे. अब शाजिया शांत हो गई थी मगर ये अहसास कि उसके अब्बू उसका रस चाट रहे हैं, उसको और अधिक रोमांचित कर रहा था.
शाजिया- आह.. ससस्स बस अब्बू अब ठीक है आह.. आपने मेरा सारा दर्द निकाल दिया है.
अब्दुल- अच्छा अब तू थोड़ी देर आराम कर.. मैं ये तेल रख कर आता हूँ.
अब्दुल जी वहां से चले गए और शाजिया वैसे ही लेटी रही और बड़बड़ाने लगी ‘उफ्फ ये सब क्या हो रहा है.. मैं सोच भी नहीं सकती कि इतनी जल्दी अब्बू मेरी फुददी तक पहुँच जाएँगे. उफ्फ क्या आग लगा दी अब्बू ने, अब जो होगा देखा जाएगा.. बस मैं अब्बू को इतना वेबकूफ़ बना दूँगी कि वो खुद फुददी माँगने लगेंगे.’
उधर अब्दुल जी अपने कमरे में चले गए उनका लंड अभी भी तना हुआ था. उन्होंने लंड बाहर निकाला और सहलाते हुए बिस्तर पे बैठ गए- ओह अल्लाह.. ये क्या पाप कर दिया.. मैंने अपनी सग़ी बेटी उफ्फ उसी की फुददी का रस चाट कर आ रहा हूँ. उसी को लंड चुसा दिया मैंने.. छी: ये कैसे कर दिया मैंने.
फ्रेंड्स अक्सर इंसान अकेले में बात करता है तो उसके सामने उसका दूसरा रूप आ जाता है यानि कुछ आत्मा टाइप.. समझ रहे हो ना आप, तो बस वैसे ही अब्दुल जी की अंतरात्मा भी बाहर आकर उनसे बात कर रही है.
आत्मा- अच्छा अब बुरा लग रहा है और रात को जब उसके मज़े लिए, तब बुरा नहीं लगा? उसके नाम की मुठ मारी तब बुरा नहीं लगा और फरज़ाना के साथ किया तब नहीं सोचा.. वो भी तो तेरी ही बेटी थी?
अब्दुल- फरज़ाना की बात अलग है, वो मेरी सग़ी बेटी नहीं है. मगर शाजिया तो मेरा खून है.. मैं उसके साथ कैसे सब कर सकता हूँ.
आत्मा- लंड और फुददी किसी रिश्ते को नहीं देखता.. और वैसे भी शुरूआत शाजिया ने की है. वो तेरे लंड पे बैठ गई, अजीब तरह से तुझे किस करती है.. और आज तो उसने मैक्सी के अन्दर कुछ नहीं पहना यानि वो खुद तुझे आनंद देना चाहती है.
अब्दुल- नहीं नहीं वो नादान है.. अब्बू के प्यार में गोदी में बैठी थी और आज क्या.. वो तो अक्सर ही घर में अंडरगार्मेंट्स नहीं पहनती है.
आत्मा- अच्छा तुझे बड़ा पता है.. क्यों तू उसकी फुददी रोज देखता है क्या?
अब्दुल- मुझे लगा ऐसा तो बोल दिया.
आत्मा- देख तू सच से भाग नहीं सकता, आज वो जिस तरह तेरे लंड को चूस रही थी, उससे तुझे लगता है वो चीज को पहचानने की कोशिश कर रही थी और तो और वो गिरी घुटनों तक थी तो जाँघ और कमर पर कहाँ चोट लग गई..? बोलो और उसकी फुददी क्यों गीली हुई.. बताओ कोई जवाब है इसका?
अब्दुल- शायद तुम सही कह रहे हो. मैंने उसकी फुददी को छुआ, वो मना कर सकती थी, गुस्सा भी हो सकती थी मगर उसने तो मज़े लिए और वो झड़ी भी.
आत्मा- सही समझा तू.. अब उसको लंड की जरूरत है, बाहर किसी से चुदवाए, इससे अच्छा तू उसकी प्यास बुझा दे.
अब्दुल- मगर कैसे वो मेरी बेटी है और मैं ये सब उससे कैसे कहूँ?
आत्मा- यही वो भी सोच रही होगी कि तुझे कैसे कहें कि अब्बू मुझे चोदो.. मगर तुम दोनों ही एक-दूसरे की प्यास मिटा सकते हो.
अब्दुल- ठीक है आज से मैं खुलकर उसके मज़े लूँगा. उसको इतना तड़पाऊंगा कि वो खुद कहेगी कि अब्बू मुझे आपका लंड चाहिए, तब मैं उसे चोदूँगा.
अब्दुल जी ने पक्का सोच लिया था कि वो शाजिया को चोदेंगे और अब आत्मा भी गायब हो गई थी. इसी सोच के चलते उनका लंड अब और ज़्यादा अकड़ गया था. मगर उन्होंने खुद को समझाया कि जल्दबाज़ी में काम बिगड़ सकता है और वैसे भी अभी शाजिया ठंडी हुई है तो उसके पास जाने का फायद नहीं.
फ्रेंड्स उम्मीद है कि आपको आनंद आ रहा होगा. अब शाजिया के रांड़ बनने की घड़ी नज़दीक आ रही है और आपके कुछ सवालों के जवाब भी आपको मिल गए होंगे, तो चलो इन अब्बू-बेटी को आराम करने दो. हम वापस फवाद के पास जाते हैं, आज वहां भी बहुत कुछ मसालेदार होने वाला है.