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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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शाजिया उस प्याले को लेने लगी, तो घबराहट में अब्दुल जी ने शाजिया के पैर में पैर मार दिया, जिससे वो उलझ कर गिर गई और उसकी मैक्सी भी ऊपर हो गई. जिसकी वजह से उसकी खुली फुददी के दीदार अब्दुल जी को हो गए.

शाजिया की नज़र अब्दुल जी की नज़र पर गई, जो कहीं और ही टिकी थी. तब उनकी नज़र का पीछा करते हुए शाजिया को अहसास हुआ कि वो उसकी फुददी को घूर रहे हैं, जो रस से भीगी हुई थी और चमक रही थी.

शाजिया ने हालत को समझते हुए जल्दी से कपड़े ठीक किए और झूठ मूट का नाटक करने लग गई.

शाजिया- ओह अम्मी.. मर गई मैं उउउह अब्बू.

अब्दुल- अरे ठीक से चल भी नहीं सकती. अब गिर गई ना.. दिखा कहाँ लगी है.

शाजिया के दिमाग़ में अपनी फुददी को शांत करने का फ़ौरन आइडिया आ गया.

शाजिया- आह.. अब्बू पैर में दर्द हो रहा है और कमर में भी जोर से लगी है.

अब्दुल- अच्छा तू खड़ी हो, मैं देखता हूँ.

शाजिया- आह.. उठा भी नहीं जा रहा.. बहुत दर्द हो रहा है अब्बू.

अब्दुल जी उसके पास बैठ गए और उसके चेहरे को देखने लगे.

अब्दुल- सॉरी बेटा.. मेरी वजह से ही तू गिरी है. अगर मेरा पैर बीच में नहीं आता तो तुझे तकलीफ़ नहीं होती. मगर तू घबरा मत, मैं अभी तुझे उठा कर तेरे कमरे में लेकर जाता हूँ.

शाजिया- ओह हाँ अब्बू आप मुझे ही गोदी में उठा लो.. आह.. मुझसे तो उठा नहीं जाएगा आह.. अब्बू उफ्फ..

अब्दुल जी ने एक हाथ उसकी गांड के नीचे और दूसरा गर्दन के नीचे रखा और उसे उठा कर कमरे में ले गए.

शाजिया- आह.. अब्बू आप बहुत अच्छे हो. अब ये दर्द का कुछ करो आह.. मुझे बहुत दुख रहा है.

अब्दुल- देख मैं तेरी अम्मी के आने के पहले तुझे ठीक कर दूँगा. तू रुक, मैं अभी तेरा इलाज लेकर आता हूँ.

अब्दुल जी बाहर गए, सबसे पहले तो उन्होंने उस प्याले को साफ किया. फिर उसमें सरसों का तेल लेकर उसको गर्म करने लगे.

उधर शाजिया अपने ख्यालों में खोई हुई सोच रही थी ‘ओह अब्बू, आपका लंड तो बहुत बड़ा है. उसको चूसते हुए मेरा मुँह दुखने लगा. काश मैं उसको देख पाती, अपने हाथों से उसे पकड़ कर हिला पाती और आपका रस.. आह कितना आनंद आ रहा था.. काश वो रस आप मुझे पिला देते, तो आनंद आ जाता मगर जो भी हुआ अब आपको उसके आगे लेकर आऊंगी. तभी तो दर्द का नाटक किया मैंने, अब जल्दी से आ जाओ और मेरी फुददी को सुकून दे दो.

अब्दुल- ये देखो में सरसों का तेल लाया हूँ इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा.

शाजिया- लेकिन अब्बू मैं कैसे लगाऊं.. मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा.

अब्दुल- अरे मैं लगा दूँगा ना.. तू टेंशन क्यों ले रही है.

शाजिया- अब्बू व्व..वो आप कैसे लगा सकते हो.. व्व..वो दर्द पीठ पर और पैरों में ऊपर की तरफ़ हो रहा है.

अब्दुल- अरे तो क्या हुआ.. पहले जब तू छोटी थी ना तब तेरे जिस्म की मालिश तेरी अम्मी नहीं, मैं ही किया करता था. समझी अब मुँह से कोई आवाज़ मत निकलना समझी.

शाजिया- ल्ल..लेकिन अब्बू वो तो एमेम.. मैंने नीचे कुछ न..नहीं पहना है..!

अब्दुल- मैंने कहा ना चुप, अब मैं जो करता हूँ, करने दे.. इससे तुझे आराम मिलेगा, तब बोलना.. समझी..!

शाजिया की बात का अब्दुल जी पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो बस जल्दी से उसकी मालिश करना चाह रहे थे.

शाजिया- ठीक है अब्बू आप जो चाहे करो.

अब्दुल जी ने मैक्सी थोड़ी ऊपर की और घुटनों की मालिश करने लगे.. फिर धीमे-धीमे हाथ को ऊपर जाँघों पे ले गए.

अपने अब्बू के हाथ जाँघों पे लगते ही शाजिया के जिस्म ने झटका खाया. उसकी काम भरी सिसकी निकल गई और फुददी में एक करंट सा दौड़ गया. अब्दुल जी ने शाजिया की तरफ़ देखा तो उसकी आँखें बंद थीं और वो अपने होंठों को दांतों में दबा कर काट रही थी.

अब्दुल जी अब सिर्फ़ जाँघों की मालिश कर रहे थे और एक-दो बार उनकी उंगली फुददी से टच भी हुई, जिसका असर शाजिया की कामुक सिसकी से पता लग रहा था कि वो कितनी उत्तेजित हो गई है.

अब्बू को भी अपनी कमसिन बेटी की मालिश करने में आनंद आ रहा था और उनका लंड फिर उठाव लेने लगा था. शाजिया की फुददी रिसने लगी थी, इस बात का अहसास अब्दुल जी को तब हुआ, जब दोबारा उनकी उंगली फुददी से टकराई.

अब्दुल जी मन में ‘लगता है शाजिया उत्तेजित हो गई है, तभी उसकी फुददी गीली हो गई. अब इसे शांत करना जरूरी है.. नहीं तो ये परेशान रहेगी.’

शाजिया की आँखें अब भी बंद थीं.. वो बस घुटी-घुटी आवाज़ में मादकता से सिसक रही थी.

अब्दुल जी मन में ‘मेरी शाजिया, तू तो बड़ी हो गई है.. देख तेरी फुददी कैसे पानी छोड़ रही है, बस ऐसे ही आँखें बंद रखना. मैं तेरे कामरस को चख कर देखूं कि कैसा स्वाद है मेरी बेटी की फुददी के रस का!’

अब्दुल जी ने अब सीधे उंगली फुददी पे लगा दी और उसके सहलाने लगे, फिर उसपे जो रस लगा उसे वो चाट गए. उनका लंड एकदम टाइट हो गया था और वो भी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गए थे.

अब्दुल- शाजिया बेटा तू पेट के बल लेट जा, तेरी पीठ पे भी तेल लगा देता हूँ.. जिससे तुझे आराम मिल जाएगा.

शाजिया तो इतनी ज़्यादा उत्तेजित थी कि वो सब भूल गई कि उसके अब्बू कैसे उसका फायदा उठा रहे हैं. वो बिना कुछ बोले उल्टी लेट गई. अब्दुल जी ने उसकी मैक्सी ऊपर कर दी, अब नीचे का पूरा हिस्सा नंगा उनके सामने था. शाजिया की भरी हुई गांड देख कर अब्दुल जी ने मन में सोचा कि अभी इसमें लंड घुसा दूँ तो आनंद आ जाए. मगर एक अब्बू और बेटी के बीच की शर्म उनको रोके हुए थी.

अब उन्होंने पीठ की मालिश शुरू कर दी. वो शाजिया की गोरी गांड पर भी हाथ घुमा रहे थे. फिर उन्होंने सोचा शाजिया तो कुछ बोल भी नहीं रही, तो क्यों न कुछ आनंद ले लिया जाए. अब्दुल जी ने लंड को बाहर निकाला और शाजिया के ऊपर दोनों तरफ़ अपने पैर निकाल कर बैठ गए और लंड को फुददी पे सैट करके ऊपर-नीचे रगड़ने लगे.

शाजिया को जब लंड का अहसास सीधे फुददी पे हुआ तो उसका पसीना छूट गया. शाजिया मन में- हाई अल्लाह, ये अब्बू को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही क्या.. कैसे फुददी पे लंड घिस रहे हैं. कहीं ये लंड को फुददी के अन्दर ही ना पेल दें.

अब्दुल जी तो बस मज़े लेने में लगे हुए थे और शाजिया की उत्तेजना अब चरम पर पहुँच गई थी- आह.. ससस्स अब्बू उफ़फ्फ़ आह…. ऐसे ही करो.. आह.. यहीं दर्द ज़्यादा है आह.. ऐसे ही जोर से रगड़ो आह…

अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया की फुददी का बाँध टूटने वाला है, उन्होंने जोर-जोर से लंड को रगड़ना शुरू कर दिया और तभी शाजिया की फुददी से रस की फुहार निकलने लगी.

अब्दुल जी जल्दी से अलग हुए और हाथ से फुददी के रस को साफ किया, फिर उसको चाटने लगे. अब शाजिया शांत हो गई थी मगर ये अहसास कि उसके अब्बू उसका रस चाट रहे हैं, उसको और अधिक रोमांचित कर रहा था.

शाजिया- आह.. ससस्स बस अब्बू अब ठीक है आह.. आपने मेरा सारा दर्द निकाल दिया है.

अब्दुल- अच्छा अब तू थोड़ी देर आराम कर.. मैं ये तेल रख कर आता हूँ.

अब्दुल जी वहां से चले गए और शाजिया वैसे ही लेटी रही और बड़बड़ाने लगी ‘उफ्फ ये सब क्या हो रहा है.. मैं सोच भी नहीं सकती कि इतनी जल्दी अब्बू मेरी फुददी तक पहुँच जाएँगे. उफ्फ क्या आग लगा दी अब्बू ने, अब जो होगा देखा जाएगा.. बस मैं अब्बू को इतना वेबकूफ़ बना दूँगी कि वो खुद फुददी माँगने लगेंगे.’

उधर अब्दुल जी अपने कमरे में चले गए उनका लंड अभी भी तना हुआ था. उन्होंने लंड बाहर निकाला और सहलाते हुए बिस्तर पे बैठ गए- ओह अल्लाह.. ये क्या पाप कर दिया.. मैंने अपनी सग़ी बेटी उफ्फ उसी की फुददी का रस चाट कर आ रहा हूँ. उसी को लंड चुसा दिया मैंने.. छी: ये कैसे कर दिया मैंने.

फ्रेंड्स अक्सर इंसान अकेले में बात करता है तो उसके सामने उसका दूसरा रूप आ जाता है यानि कुछ आत्मा टाइप.. समझ रहे हो ना आप, तो बस वैसे ही अब्दुल जी की अंतरात्मा भी बाहर आकर उनसे बात कर रही है.

आत्मा- अच्छा अब बुरा लग रहा है और रात को जब उसके मज़े लिए, तब बुरा नहीं लगा? उसके नाम की मुठ मारी तब बुरा नहीं लगा और फरज़ाना के साथ किया तब नहीं सोचा.. वो भी तो तेरी ही बेटी थी?

अब्दुल- फरज़ाना की बात अलग है, वो मेरी सग़ी बेटी नहीं है. मगर शाजिया तो मेरा खून है.. मैं उसके साथ कैसे सब कर सकता हूँ.

आत्मा- लंड और फुददी किसी रिश्ते को नहीं देखता.. और वैसे भी शुरूआत शाजिया ने की है. वो तेरे लंड पे बैठ गई, अजीब तरह से तुझे किस करती है.. और आज तो उसने मैक्सी के अन्दर कुछ नहीं पहना यानि वो खुद तुझे आनंद देना चाहती है.

अब्दुल- नहीं नहीं वो नादान है.. अब्बू के प्यार में गोदी में बैठी थी और आज क्या.. वो तो अक्सर ही घर में अंडरगार्मेंट्स नहीं पहनती है.

आत्मा- अच्छा तुझे बड़ा पता है.. क्यों तू उसकी फुददी रोज देखता है क्या?

अब्दुल- मुझे लगा ऐसा तो बोल दिया.

आत्मा- देख तू सच से भाग नहीं सकता, आज वो जिस तरह तेरे लंड को चूस रही थी, उससे तुझे लगता है वो चीज को पहचानने की कोशिश कर रही थी और तो और वो गिरी घुटनों तक थी तो जाँघ और कमर पर कहाँ चोट लग गई..? बोलो और उसकी फुददी क्यों गीली हुई.. बताओ कोई जवाब है इसका?

अब्दुल- शायद तुम सही कह रहे हो. मैंने उसकी फुददी को छुआ, वो मना कर सकती थी, गुस्सा भी हो सकती थी मगर उसने तो मज़े लिए और वो झड़ी भी.

आत्मा- सही समझा तू.. अब उसको लंड की जरूरत है, बाहर किसी से चुदवाए, इससे अच्छा तू उसकी प्यास बुझा दे.

अब्दुल- मगर कैसे वो मेरी बेटी है और मैं ये सब उससे कैसे कहूँ?

आत्मा- यही वो भी सोच रही होगी कि तुझे कैसे कहें कि अब्बू मुझे चोदो.. मगर तुम दोनों ही एक-दूसरे की प्यास मिटा सकते हो.

अब्दुल- ठीक है आज से मैं खुलकर उसके मज़े लूँगा. उसको इतना तड़पाऊंगा कि वो खुद कहेगी कि अब्बू मुझे आपका लंड चाहिए, तब मैं उसे चोदूँगा.

अब्दुल जी ने पक्का सोच लिया था कि वो शाजिया को चोदेंगे और अब आत्मा भी गायब हो गई थी. इसी सोच के चलते उनका लंड अब और ज़्यादा अकड़ गया था. मगर उन्होंने खुद को समझाया कि जल्दबाज़ी में काम बिगड़ सकता है और वैसे भी अभी शाजिया ठंडी हुई है तो उसके पास जाने का फायद नहीं.

फ्रेंड्स उम्मीद है कि आपको आनंद आ रहा होगा. अब शाजिया के रांड़ बनने की घड़ी नज़दीक आ रही है और आपके कुछ सवालों के जवाब भी आपको मिल गए होंगे, तो चलो इन अब्बू-बेटी को आराम करने दो. हम वापस फवाद के पास जाते हैं, आज वहां भी बहुत कुछ मसालेदार होने वाला है.

 
राबिया और जाहिरा बाजार से वापस घर आ गई थीं और दोनों ने मिलकर दोपहर का खाना भी बना लिया था.

उधर फवाद के साथ राबिया ने जाहिरा को लेकर जो खेल खेला था अब उसी खेल को देखते हैं. आज वहां भी बहुत कुछ मसालेदार होने वाला है.

राबिया और जाहिरा बाजार से वापस घर आ गई थीं और दोनों ने मिलकर दोपहर का खाना भी बना लिया था.

इधर घर पर फवाद मज़े की नींद सो रहा था मगर ये दोनों अब फ्री हो गई थीं, तो राबिया ने सोचा क्यों ना जाहिरा को कुछ तैयार किया जाए ताकि आज ही कुछ मजेदार हो जाए.

राबिया- तुझे पता है जाहिरा अगर तू जीजू की लुल्ली दबाएगी ना… तो वो बहुत खुश होंगे और तुझे आईसक्रीम लाकर देंगे.

जाहिरा- सच आपा, आईसक्रीम तो मुझे बहुत अच्छी लगती है मगर अम्मी मुझे खाने नहीं देतीं, कहती हैं पैसे नहीं हैं.

राबिया- अब तू यहाँ आ गई है ना… तुझे रोज आईसक्रीम मिलेगी और जो तुझे पसंद है, वो सब कुछ मिलेगा. बस तू मन से सब करना और एक बात का ध्यान रखना कि जीजू को हमारी बातें बिल्कुल मत बताना.

जाहिरा- ठीक है आपा मैं उनको कुछ भी नहीं बताऊंगी और आप भी मेरी अम्मी को मत बताना कि आप मुझे रोज आईसक्रीम देती हो.

राबिया- पक्का नहीं बोलूँगी. अब मेरी बात सुन… जीजू के पास जाकर धीमे-धीमे उनके पैर दबा और वो मेरे बारे में पूछें तो कहना मैं बाहर किसी काम से गई हुई हूँ.

जाहिरा- मगर आप तो यहीं हो आपा… फिर मैं झूठ क्यों बोलूं??

राबिया- अरे झूठ कहाँ… मैं सच में बाहर जा रही हूँ और ये देख मेरे पास चाभी है, तो मैं लॉक लगा दूँगी… ठीक है, तू जा जीजू को उठा, फिर खाने के बारे में पूछ लेना.

जाहिरा- ठीक है आपा आप जाओ… मैं सब देख लेती हूँ… मैं जीजू को खाना भी दे दूँगी.

राबिया उसको दिखाने के लिए बाहर निकाल गई और जैसे ही जाहिरा कमरे में गई, वो चुपके से वापस अन्दर आ गई.

फवाद सोया हुआ था और जाहिरा बिस्तर पर जाकर फवाद की जाँघों को धीमे-धीमे दबाने लगी और साथ ही आवाज़ भी देने लगी- जीजू उठ जाओ, दोपहर हो गई है… क्या आपको खाना नहीं खाना है?

फवाद की आँख खुल गई… वो तो पहले ही भरा हुआ था और जाहिरा के मुलायम हाथ जाँघों पर लगते ही उसका लंड फिर से अकड़ने लगा.

फवाद- तुझे और कोई काम नहीं है क्या… जो सीधे पैर दबाने लग जाती है?

जाहिरा- सॉरी जीजू… वो उस टाइम मैं आपके पैर ठीक से नहीं दबा पाई थी. मगर अब आपा नहीं हैं तो जब तक वो नहीं आतीं, मैं ठीक से आपके पैर दबा दूँगी. फिर मुझे आपको खाना भी खिलाना है.

फवाद- क्या कहा… राबिया बाहर गई है? मगर इस टाइम वो कहाँ गई है?

जाहिरा- मुझे नहीं पता… अब आप कुछ न कहो, मुझे आईसक्रीम खानी है तो आप मुझे ठीक से दबाने दो बस!

फवाद- क्या? कैसी आईसक्रीम… किसने कहा?

जाहिरा- व्व…वो आपसे लेनी है… आपा ने कहा था. मुझे कुछ भी चाहिए हो तो आपसे माँग लूँ.

फवाद- अच्छा ये बात है… तो चल अबकी बार अच्छे से दबा… और जहाँ मैं कहूँ, तुम वहीं दबाना… ठीक है!

जाहिरा- ठीक है जीजू… आप बताओ कहाँ दबाऊं?

फवाद ने अपने ऊपर चादर डाल ली और जाहिरा को कहा कि हाथ अन्दर डालो और जैसे मैं कहूँ वैसे दबाती जा.

जाहिरा- आपने चादर क्यों डाली… मैं ऐसे ही दबा देती हूँ ना.

फवाद- नहीं… मैंने कहा ना… ऐसे ही दबाओ.

जाहिरा मान गई और चादर में हाथ डालकर फिर से जाँघ दबाने लगी.

फवाद- गुड… ऐसे ही… बस सीधे ऊपर की तरफ़ हाथ लेकर आओ और वहां दबाओ.

जाहिरा ने धीमे-धीमे हाथ ऊपर की तरफ़ किया और अब उसका हाथ फवाद के लंड पर था. एक बार तो जाहिरा घबरा गई क्योंकि लंड बहुत गर्म और सख़्त था मगर पैसे और आईसक्रीम के लालच में वो लंड को दबाने लग गई. थोड़ी देर में उसको लंड को दबाना अच्छा भी लगने लगा था.

फवाद- बहुत अच्छे आह… ऐसे ही उफ्फ… अब इसे पकड़ कर ऊपर-नीचे भी कर… अह…

फवाद ने जाहिरा का हाथ पकड़ा और उसे समझाया कि लंड की मुठ कैसे मारनी है. जाहिरा भी बिल्कुल फवाद के बताए अनुसार कर रही थी, अब उसको भी लंड पकड़ना अच्छा लग रहा था और उसमें कुछ उत्सुकता भी थी क्योंकि उसकी बस्ती की लड़कियां उसके सामने बहुत कुछ बातें करती थीं जो उसने राबिया को नहीं बताई थीं.

फवाद- आह… बहुत अच्छे… हाँ ऐसे ही करो… आह… ओह जाहिरा तुम सच में बहुत अच्छी हो… तुम्हें एक नहीं… दो आईसक्रीम लेकर दूँगा.

जाहिरा- ओह सच जीजू… फिर तो आनंद आएगा.

फवाद- एक मिनट रुक जाहिरा… अपना हाथ नीचे लेकर जा और वहां भी दबा.

जाहिरा को कुछ समझ नहीं आया तो वो नीचे दबाने लगी मगर फवाद ने ये इसलिए किया ताकि वो लंड को बाहर निकाल सके.

अब फवाद ने पजामा नीचे किया और लंड को बाहर निकाल लिया.

फवाद- आह… अब वापस ऊपर आ जा और पहले की तरह दबाना… ठीक है.

जाहिरा- ठीक है जीजू अभी दबाती हूँ.

जाहिरा ने जैसे ही हाथ ऊपर किया, उसका हाथ सीधे खड़े लंड से टच हुआ और उसने जल्दी से हाथ बाहर खींच लिया.

फवाद- अरे क्या हुआ जाहिरा दबाओ ना…!

जाहिरा- जीजू व…वो आपके वो… नहीं.

फवाद- अरे क्या वो वो कर रही है… जल्दी कर… फिर तेरे लिए आईसक्रीम भी लानी है.

जाहिरा एकदम से लंड को टच करने से घबरा गई थी मगर फवाद पर तो वासना सवार हो गई थी, उसने जाहिरा का हाथ पकड़ लिया.

फवाद- अरे क्या हुआ… तूने ही तो कहा था कि मेरी सारी बात मानेगी. अब मना क्यों कर रही है… फिर तेरी आपा आ जाएगी, तो तू फिर उसके पास भाग जाएगी.

राबिया का नाम सुनकर जाहिरा को याद आया कि उन्होंने कहा था कि जैसे जीजू कहे वैसे ही करना… नहीं वो नाराज़ हो जाएँगे.

जाहिरा- अच्छा जीजू मैं करती हूँ… मगर आप मुझे गुस्सा नहीं करोगे ना…!

फवाद- अरे मैं क्यों गुस्सा करूँगा… चल अब जल्दी से कर.

फवाद ने फिर जाहिरा का हाथ अन्दर कर लिया और अपने खड़े लंड पर रखवा लिया.

अब जाहिरा फवाद के लंड को सहला रही थी. शुरू में तो उसके दिल में घबराहट थी मगर धीमे-धीमे वो अच्छी तरह उसकी मुठ मारने लग गई और फवाद भी मज़े में आहें भरने लग गया, मगर ये दोनों नहीं जानते थे कि राबिया छुपकर ये सब देख रही थी.

राबिया मन में सोच रही थी- वाह फवाद तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी होगी. पहले ही दिन अपना लंड जाहिरा को पकड़ा दिया. ऐसे तो बहुत जल्दी तुम इसकी चुदाई भी कर दोगे, मुझे बहुत चौकन्ना रहना होगा. कहीं तुम इसको चोद कर मेरे किये-कराये पर पानी ना फेर दो.

फवाद- आह… जाहिरा बहुत अच्छे… आह… ऐसे ही कर… तू बहुत अच्छी है, हाथ को जोर-जोर से ऊपर-नीचे कर.

जाहिरा को अब आनंद आने लगा था, वो भी लंड की मुठ मारने में लगी हुई थी और थोड़ी देर बाद फवाद के लंड की नसें फूल गईं, वो रोकना चाहता था मगर उससे कंट्रोल नहीं हुआ और उसके लंड से एक के बाद एक पिचकारी निकलने लगीं, जिससे चादर भी खराब हो गई और जाहिरा का हाथ भी वीर्य से सन गया.

उसने जल्दी से हाथ बाहर निकाला- छी:… जीजू ये क्या है अपने मेरे हाथ पर ये क्या कर दिया.

फवाद- अरे कुछ नहीं… साफ कर ले और सुन, ये बात अपनी आपा को मत बताना. मैं तुम्हें 100 रुपये दूँगा और आईसक्रीम भी लाकर दूँगा.

जाहिरा- ठीक है जीजू… अब आप उठ जाओ, मैं हाथ धोकर आपके लिए खाना लगा देती हूँ.

राबिया समझ गई कि अब खेल खत्म हो गया… तो वो बाहर मेन गेट के पास गई और जाहिरा को आवाज़ लगाने लगी.

राबिया- जाहिरा कहाँ हो तुम… मैं आ गई हूँ… तुम्हारे जीजू अभी तक उठे या नहीं?

फवाद- अरे ये राबिया को भी अभी आना था क्या… जाहिरा तुम जाओ और कहो मैं सो रहा हूँ… समझी और कुछ मत बताना.

जाहिरा ने ‘हाँ’ कहा और जल्दी से हाथ साफ करके कमरे के बाहर निकल गई. उस टाइम राबिया उधर ही आ रही थी.

जाहिरा- हाँ आपा, मैं जीजू को उठाने गई थी… वो सो रहे हैं.

राबिया- अच्छा तू किचन में जाकर खाना गर्म कर… मैं उसे उठा देती हूँ.

राबिया कमरे में आई और सीधे बेड पर फवाद के पास लेट गई. तब तक फवाद ने लंड को अन्दर कर लिया था और जो चादर पर वीर्य लगा था, उसको छुपा लिया था.

राबिया ने चादर हटाई और फवाद को किस करने लगी, जिससे फवाद ने झूठ-मूट में उठने का नाटक किया.

फवाद- उहह सोने दो ना डार्लिंग… क्या है?

राबिया- बहुत देर हो गई है फवाद… कितना सोना है तुम्हें… चलो आज तुम्हें खाने के पहले थोड़ा आनंद दे देती हूँ.

फवाद कुछ समझ पाता तब तक राबिया ने उसके पजामे को नीचे किया और मुरझाए हुए लंड को मुँह में ले लिया.

फवाद- ये तुम क्या कर रही हो राबिया… रूको तो एक मिनट…!

फवाद की बात पूरी होती, उसके पहले राबिया ने लंड को मुँह से निकाला और गुस्से में फवाद की तरफ़ देखने लगी.

राबिया- ये क्या है फवाद तुम्हारे लंड पर ये चिपचिपा क्या है… और वीर्य की महक भी आ रही है… जैसे अभी-अभी तुमने पानी निकाला हो… बोलो?

फवाद- व्व…वो तुम स…सुन ही नहीं रही मेरी बात को. अभी स…सपने मैं तुम्हें चोद रहा था तो पानी निकल गया, इतने में तत… तुम आ गईं… तो मैंने सोचा तुम नाराज़ हो जाओगी… इसलिए मैंने साफ कर दिया और ऐसे ही सो गया. एमेम मगर तुम्हें पता चल गया.

राबिया- क्या यार तुमने मूड खराब कर दिया. मैंने सोचा था आज जमकर चुदाई का मजा करूँगी मगर तुम पहले ही सपने देख कर ठंडे हो गए.

फवाद- अरे जान… नाराज़ क्यों होती हो, अभी खाना खाने के बाद चुदाई करेंगे ना.

राबिया- नहीं, अब मेरा मूड नहीं है… चलो फ्रेश हो जाओ… फिर देखेंगे.

लो यहाँ भी खेल खत्म… मगर टेंशन नॉट… आनंद वैसे ही बना रहेगा. अभी अपनी शाजिया रानी की फुददी बाकी है ना… तो वहां चलते हैं.

 
एक घंटे तक दोनों अब्बू-बेटी अपने-अपने कमरे में रहे. मगर शाजिया ने तो ठान लिया था कि जब-जब उसको मौका मिलेगा, वो अपने अब्बू को सिड्यूस करती रहेगी.

शाजिया कमरे से बाहर निकली और अब्बू को आवाज़ लगाई- अब्बू, लगता है अम्मी को आने में टाइम लगेगा. मैं लंच बना रही हूँ आपको क्या खाना है, मुझे बता दो.

शाजिया ने एक पतली टी-शर्ट और पजामा पहन लिया था, उसका मन अब कुछ और करने का था.

अब्दुल जी बाहर आए और शाजिया को ऊपर से नीचे तक गंदी नज़रों से देखते हुए शाजिया के खाना बनाने के सवाल पर बोले- अपने अब्बू का बड़ा ख्याल है तुझे.. आज तो तू परांठे बना.. एकदम कड़क और मसालेदार.. तब आनंद आएगा.

शाजिया- ठीक है अब्बू बना देती हूँ. तब तक आप बाहर बैठ कर इंतजार करो.

अब्दुल- अरे बाहर क्यों? हम दोनों साथ मिलकर बनाते हैं ना, बात भी होती रहेगी और परांठे भी बन जाएँगे.

शाजिया समझ गई कि उसकी तरह उसके अब्बू भी उसके मज़े लेने के चक्कर में हैं. अब वो भी कहाँ पीछे रहने वाली थी उसकी शराफत तो कब की हवा हो गई थी. अब तो शाजिया बस लंड और फुददी के खेल को आगे ले जाना चाहती थी.

शाजिया- ठीक है अब्बू, जैसा आपको अच्छा लगे. चलो आप आलू उबालो, मैं तब तक आटा गूँथ लेती हूँ.

अब्दुल जी ने अपना काम निपटा दिया और शाजिया खड़ी हुई आटा गूँथ रही थी. उसकी गांड थोड़ी बाहर को निकली हुई थी, जिसे देख कर अब्दुल जी का मन डोलने लगा. वो शाजिया के ठीक पीछे जाकर खड़े हो गए और लंड को शाजिया की गांड से टच कर दिया.

शाजिया- क्या कर रहे हो अब्बू.. मुझे काम करने दो ना.

अब्दुल- अरे देख रहा हूँ ना कैसे तुम आटा गूँथ रही हो.

शाजिया अपने मन में- अच्छा ये बात है.. देख रहे हो या आप लंड को गांड से सटा कर आनंद ले रहे हो.

शाजिया ने कुछ बोला नहीं और गांड को थोड़ा और पीछे कर दिया और आटा गूँथने लगी, जैसे वो हिलती, उसकी गांड ऊपर-नीचे होती, जिससे लंड की अच्छी- ख़ासी घिसाई होने लगी.

थोड़ी देर ये खेल चलता रहा, फिर शाजिया ने अपने अब्बू को एक्सट्रा आनंद देने की एक तरकीब लगाई. वो कोहनी से अपने पेट पर खुजलाने लगी, जिससे अब्दुल जी को भी एक्सट्रा आनंद लेने का मौका मिल गया.

अब्दुल- अरे क्या हुआ है तुम्हें?

शाजिया- वो पेट के ऊपर खुजली हो रही है.. अब हाथ आते में सने हैं तो कोहनी से करूँगी ना.

अब्दुल- अरे अब्बू के होते तुम परेशान क्यों होती हो. लाओ मैं कर देता हूँ.. बताओ कहाँ करूं?

शाजिया- नहीं अब्बू रहने दो.. मैं अपने आप कर लूँगी ना!

अब्दुल- अरे ऐसे कैसे.. बताओ मुझे, मैं कर दूँगा.. नहीं तो ऐसे ही परेशान रहोगी.

इतना कहकर अब्दुल जी ने पीछे से ही शाजिया के पेट के ऊपर हाथ रख दिया.

शाजिया- अब्बू व्व..वो थोड़ा ऊपर करो.

अब्दुल जी ने धीमे-धीमे हाथ को ऊपर करना शुरू किया. अब वो शाजिया के चुचों से बस एक इंच की दूरी पर थे.

शाजिया- आह…. नहीं.. रहने दो सस्स.. मैं खुद कर लूँगी ना अब्बू.

अब्दुल- अरे मैं तेरा अब्बू हूँ, ऐसे क्यों बर्ताव कर रही हो.. यहीं करूं क्या?

शाजिया- व्व..वो अब्बू आपको कैसे बताऊं व्व..वो मेरे कहाँ खुजली हो रही है?

अब्दुल जी भी समझदार थे, उन्हें इतना इशारा काफ़ी था. उन्होंने शर्म को साइड में रखा और हाथ सीधे शाजिया के चुचों पे रख दिया और धीमे-धीमे सहलाने लगे.

शाजिया- सस्स आह.. अब्बू.. यहीं हो रही है मगर नहीं रहने दो ना.. नहीं प्लीज़ अब्बू.

अब्दुल- चुप कर तू.. ऐसे खुजली ज़्यादा होगी.. मैं कर रहा हूँ ना.

अब्दुल जी ऐसे बर्ताव कर रहे थे, जैसे ये एक नॉर्मल बात है. फिर शाजिया ने भी आगे कुछ नहीं कहा, बस वैसे ही खड़ी अपने चुचों को दबवाती रही. वैसे तो अब्दुल जी कपड़ों के ऊपर से आनंद ले रहे थे, मगर उनका मन था कि वो सीधे शाजिया के नंगे चूचों को मसल कर मजा लें और शाजिया भी यही चाहती थी. मगर वो मर्यादा में रहकर सब करना चाहती थी यानि सब कुछ हो भी जाए और अब्दुल जी की नज़र में वो सीधी भी बनी रहे.

शाजिया- बस बस अब्बू हो गया.. अब सही है. अब आप रहने दो.

अब्दुल जी ने हाथ हटा लिया मगर वो वैसे ही खड़े रहे और लंड को गांड पर दबाते रहे और जैसे शाजिया का मन था कि अब्बू डायरेक्ट चुचों को छुएँ.. अन्दर उसने कुछ पहना भी नहीं था तो वो फिर कोहनी से खुजलाने लगी.

शाजिया- ओफफो.. ये आज क्या हो रहा है बार-बार खुजली क्यों हो रही है?

अब्दुल- फिर से हो गई.. ला मैं करता हूँ.

शाजिया- नहीं अब्बू रहने दो, ऐसे ही शायद पसीने से हो रहा होगा.

अब्दुल- अरे कोई चींटी होगी जो काट रही होगी.. मुझे देखने दे, नहीं तो तुझे और ज़्यादा परेशानी होगी.

शाजिया कुछ कहती, उससे पहले ही अब्दुल जी ने हाथ टी-शर्ट में डाल दिया और सीधे शाजिया के नंगे चुचों पे लगा दिया.

शाजिया- ससस्स.. प्प..अब्बू ये आप क्या..

शाजिया आगे कुछ बोलती तब तक अब्दुल जी ने उसके चुचों को अच्छे से दबा दिया और उसके निप्पलों को भी मरोड़ दिया. फिर जल्दी से हाथ बाहर निकाल लिया.

अब्दुल- त्त.. तुमने अन्दर कुछ नहीं पहना.. मुझे पहले क्यों नहीं बोली.

शाजिया- सॉरी अब्बू व्व..वो मैं बताना चाहती थी मगर आपने मेरी बात सुनी ही नहीं.

अब्दुल जी ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे ये अंजाने में हुआ हो.

अब्दुल- अरे वो उस दिन तुझे कपड़े दिलाए थे.. उसमें वो अन्दर की भी थी ना.. उसे पहना कर.

शाजिया- व्व..वो अब्बू घर में मुझे अच्छा नहीं लगता इसलिए.

अब्दुल- अच्छा अच्छा समझ गया.. जाने दे वैसे वो नए कपड़े क्यों नहीं पहनती. वो बहुत अच्छे हैं, तुझपे जमेंगे भी.

शाजिया- बाद में पहन लूँगी अब्बू.. अभी नहीं.. पहले मैं थोड़ी एड्जस्टमेंट कर लूँ उसके बाद पहनूंगी.

अब्दुल- अच्छा ठीक है, जब मर्ज़ी हो पहन लेना.. अच्छा बेटी तुझे बुरा तो नहीं लगा ना.. अभी जो मैंने किया?

शाजिया- नहीं अब्बू आपने जानबूझ के थोड़े किया.. वो तो ग़लती से हो गया इट्स ओके.

अब्दुल- अच्छा बेटी वो तेल मालिश और ये बात अपनी अम्मी को मत बताना. ऐसे उन्हें पता लगेगा तो अच्छा नहीं लगेगा ना.

शाजिया ने बहुत ही सेक्सी अंदाज में मुस्कान दी.

शाजिया- आप भी ना अब्बू.. ये बात कोई बताने की थोड़ी है और वैसे भी अपने ऐसा कुछ गलत भी नहीं किया. मेरे दर्द को ठीक किया और अभी खुजली की.. बस यही ना..!

शाजिया की बात सुनकर अब्दुल जी खुश हो गए, उनको लगा शाजिया भी यही चाहती है कि उसके अब्बू उसको आनंद दें.

शाजिया- क्या हुआ अब्बू क्या सोच रहे..?

बोलते-बोलते वो जोर से उछली जैसे उसको किसी जानवर ने काट लिया हो.

शाजिया- ओह अम्मी उफ़फ्फ़ अब्बू आह..

अब्दुल- अरे क्या हुआ.. ऐसे क्यों उछल रही हो.. क्या हो गया है?

शाजिया- व्व..वो अब्बू टी-शर्ट में कोई कीड़ा है.. मुझे जोर से काट लिया.. उफ़फ्फ़..

अब्दुल- मैंने पहले ही कहा था.. ला इधर आ.. देखने दे मुझे.

अब्दुल जी ने मौके का फायदा उठाया और शाजिया की टी-शर्ट में हाथ डाल कर अबकी बार बारी-बारी दोनों चुचों को अच्छे से दबाया और मसला.

शाजिया- उफ़फ्फ़ सस्स क्या हुआ अब्बू.. कुछ मिला क्या?

अब्दुल- नहीं कुछ नहीं मिला.. मुझे ठीक से देखने दे.. शायद चिंटी होगी.

इतना कहकर अब्दुल जी ने टी-शर्ट ऊपर कर दी. अब शाजिया के नंगे मम्मे उनके सामने थे और शाजिया आँखें बंद किए बस दर्द का नाटक कर रही थी.

अब्दुल जी ने एक बार शाजिया को देखा फिर अच्छे से पूरे चुचों पर दोबारा हाथ घुमाया और मौका देख कर जल्दी से एक निप्पल को चूस भी लिया.

शाजिया इस हरकत से एकदम सिहर गई और जल्दी से पीछे हो गई, उसने अपनी टी-शर्ट ठीक की और अब्दुल जी से नज़रें चुराने लगी.

अब्दुल- क्या हुआ शाजिया.. देखने तो दे.

शाजिया- नहीं अब्बू निकल गया शायद.. अब आप बाहर जाओ, मुझे काम करने दो.

दरअसल शाजिया उत्तेजित हो गई थी और वो नहीं चाहती थी कि वो अब्बू को इससे ज़्यादा मौका दे, वरना कुछ भी हो सकता था.

अब्दुल जी भी समझ गए कि शायद उन्होंने कुछ ज़्यादा कर दिया, तो वो चुपचाप बाहर निकल गए और अपने कमरे में चले गए.

शाजिया ने परांठे बना लिए, तब तक अंजुम भी आ गई. सबने खाना खाया और रोज की तरह आराम करने लगे.

उधर राबिया ने भी चाल खेली और फवाद को सूखा ही रहने दिया ताकि उसकी तड़फ बढ़ जाए और वो जाहिरा को चोदने का पक्का मन बना सके.

फ्रेंड्स शाजिया और राबिया की कहानी को थोड़ा ब्रेक लगाओ और बाकी सब की भी खैर-खबर ले लो ताकि आप किसी को भूल ना जाओ.

 
शाहिद और शबनम का तो आपको पता ही है. अब शबनम के अब्बू आ गए तो उसका यहाँ सोने का प्रोग्राम बंद हो गया. मगर दोपहर को एक बार तो वो शाहिद से चुदवा ही लेती है. बाकी शाहिद के दोस्त.. तो उनका अभी कोई खास काम है नहीं.. तो उनको जाने दो. उधर रूबी की कहानी आपको पता ही है, बस उसका एक राज बाकी है, वो भी आपको जल्दी ही बता दूँगी.

अब शाजिया की कहानी शुरू हो गई है तो इन सबका धीमे-धीमे काम ख़त्म ही समझो. बस मैं कोई खास मौके पर इनसे आपको मिलवा दूँगी और रज़िया तो टाइम-टाइम पे शाजिया से मिलती ही है, तो आप उसका टेंशन मत लो.

आज सनडे था.. तो रज़िया अपने भाई को बाहर घुमाने ले गई. शाम तक दोनों ने खूब एंजाय किया और घर आ गए.

शाम को शाजिया उठी और फ्रेश होकर रज़िया से मिलने चली गई.

रज़िया- अरे शाजिया आज सनडे था और तू आई ही नहीं.. मैंने सोचा बाहर जाएँगे.. घूमेंगे, मस्ती करेंगे.

शाजिया- नहीं आपा आज घर पर थोड़ा काम था इसलिए नहीं आई.

रज़िया- मैंने सोचा आज तू अपने अब्बू के साथ कोई गेम खेलेगी, ये सोचकर मैं तेरे घर नहीं आई. वैसे बता ना.. कोई काम बना या नहीं?

शाजिया- कोशिश तो बहुत की, मगर कुछ हुआ नहीं आपा. अब आप कोई नया आइडिया दो, जिससे मैं अब्बू को तड़पा सकूं.

शाजिया ने एकदम झूठ कहा और सारी बातें छुपा लीं. अब ये अदा उसमें कैसे आई, ये तो आप अच्छी तरह जानते हो. रज़िया ने उसे रांड़ बनाने के लिए फास्ट बनाया और शाजिया अब आधी रांड़ तो बन ही गई थी. अब तो शाजिया रज़िया के साथ ही गेम खेल रही है.. उसने अपनी कहानी रज़िया से छुपा ली.

बस फ्रेंड्स अब शाजिया पर जवानी का रंग चढ़ गया है. अब आगे देखो क्या होता है.

रज़िया ने थोड़ी देर तक कुछ सोचा फिर वो शाजिया को गौर से देखने लगी.

शाजिया- क्या हुआ आपा, आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो?

रज़िया- आज पहली बार तू कुछ और बोल रही है और तेरी आँखें कुछ और कह रही हैं.

रज़िया भी कम नहीं थी, उसने शाजिया की आँखों में एक नशा देखा, जिससे उसको लगा कि कुछ तो गड़बड़ है.

शाजिया- नहीं आपा ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपसे झूठ क्यों बोलूँगी.

रज़िया- अच्छा.. मतलब कुछ भी नहीं हुआ?

शाजिया- नहीं आपा मैंने ऐसा कब कहा.. थोड़ा तो हुआ है.. मैं उनकी गोदी में बैठी, उनका लंड फिर से खड़ा हुआ और हाँ जब मैं कपड़े बदल रही थी तो मैंने अब्बू को अपने बूब्स दिखाने की कोशिश की, मगर वो रूम में आए ही नहीं.

रज़िया- ऐसा बोल ना कुछ हुआ है. तूने तो पहले साफ मना कर दिया था. अच्छा ठीक से बता कि कैसे और क्या हुआ था?

शाजिया ने थोड़ी बहुत बातें बताईं, जो रात को हुई थीं. बाकी लंड चूसना, खेल खेलना, सुबह की बात.. वो सब कुछ छुपा लिया.

रज़िया- गुड.. इतना हुआ ये काफ़ी है. अब बस एक काम ऐसा हो जाए कि तेरे अब्बू रात को तेरे साथ सोएं, तब तो तू उनको ज़्यादा तड़पा सकती है.

शाजिया- लेकिन ये कैसे होगा? मेरी अम्मी भी तो हैं. उनके रहते मैं अब्बू के साथ कैसे सो सकती हूँ?

रज़िया- तूने कभी अपने ननिहाल के बारे में नहीं बताया.. क्या तेरी अम्मी वहां नहीं जातीं?

शाजिया- ऐसा बताने को कुछ खास है भी नहीं आपा. मेरे नाना तो रहे नहीं, एक मामू हैं और उनकी वाइफ, वे नानी के साथ रहते हैं. पहले तो गाँव में रहते थे मगर अब मामू का काम जयपुर में चलता है, तो वे वहां रहने लगे और मेरी अम्मी की मामी से बिल्कुल भी नहीं बनती, तो बस काफ़ी टाइम से हम वहां नहीं गए.

रज़िया- अच्छा ये बात है, वैसे उनसे फ़ोन पर तो बात होती होगी ना?

शाजिया- आपा सच बताऊं तो बहुत साल पहले मैं अम्मी के साथ गई थी. तब अम्मी का मामी से झगड़ा हुआ था और मामू और नानी भी अम्मी के खिलाफ थे, बस तब से आज तक ना कोई फ़ोन, ना आना-जाना.. कुछ नहीं होता.

रज़िया- शिट.. ये गड़बड़ है काश ऐसा नहीं होता तो तेरी अम्मी को वहां भेज देते. फिर तेरे पास अच्छा मौका हो सकता था.

शाजिया- कुछ और सोचो ना आपा, जिससे काम बन जाए.

रज़िया- देख अभी तो दिमाग़ में कुछ नहीं आ रहा. तू अगर चाहे तो मेरे साथ चल सकती है. मेरे पास रूबी का फ़ोन आया था. उसके मॉम-अब्बू कहीं बाहर गए हैं, तो रात को वो अकेली रहने वाली है. बस इसी लिए उसने रात को अपने घर में छोटी सी पार्टी रखी है. बाकी सब भी आने वाले हैं. बोल क्या वहां चलती है?

शाजिया- आपा मन तो बहुत है, मगर अब्बू नहीं मानेंगे और वैसे भी सब वहां होंगे तो फिर मैं वहां क्या करूँगी?

रज़िया- अरे क्यों.. सब होंगे तो तुझे क्या प्राब्लम है.. एंजाय करना.

शाजिया- नहीं आपा आपकी पार्टी में तो सब कुछ होता है ना.. तो नहीं. आप जानती हो ना मैं सिर्फ़ आपके सामने फास्ट हूँ.. बाकी ये चुदाई मुझे पसंद नहीं है. आप समझ रही हो ना.. मैं क्या कहना चाहती हूँ.

रज़िया- अच्छा तो ये बात है. तेरा मतलब वहां चुदाई भी होगी तो तेरा क्या काम?

शाजिया- हाँ आपा यही कहना चाहती हूँ.

रज़िया- वेबकूफ़ रूबी भी तो होगी वहां तो कैसी चुदाई.. हाँ? और जरूरी नहीं हर बार चुदाई ही हो.

शाजिया- नहीं आपा मुझे पता है.. रूबी भी करती है और उस रात भी कुछ हुआ था, तभी सलमान और आज़म बोल रहे थे मगर शाहिद ने उन्हें रोक दिया था.

रज़िया- क्या..? तुझे ये सब किसने कहा?

शाजिया- कहने की क्या जरूरत है. इतनी भी नादान नहीं हूँ. हाँ ये सही है कि पहले मैं कुछ नहीं समझती थी, मगर अब सब कुछ समझ आने लगा है.. और वैसे भी रूबी को देख कर साफ पता लगता है कि उसने चुदाई जरूर की है.

शाजिया की बात सुनकर रज़िया तो चक्कर में पड़ गई, उसे यकीन भी नहीं हुआ कि ये लौंडिया कल तक इतनी नादान थी और आज कैसे इतनी बातें समझने लग गई है.

शाजिया- क्या हुआ आपा क्या सोच रही हो? आप मैंने कुछ ग़लत कहा क्या?

रज़िया- नहीं.. तू सच में फास्ट हो गई है और तूने जो कहा, वो भी सच है.

शाजिया- तो फिर इसका मतलब शाहिद मुझे भी चोदना चाहता है.. क्यों सही ना?

रज़िया- हाँ सही है.. मगर ज़बरदस्ती नहीं.. अगर तुम खुद चाहो तभी, उस दिन रूबी ने भी खुद कहा था.. तब ही उसकी चुदाई हुई थी.

शाजिया- अच्छा मगर बाकी सब भी तो वहां थे.. फिर कैसे शाहिद ने किया?

रज़िया- तुझे शायद पता नहीं, मगर रूबी पहले से चुदी हुई थी और उस दिन सबके साथ उसने आनंद किया था. उसे ग्रुप सेक्स कहते हैं.. समझी मेरी जान!

शाजिया- ओह अम्मी… सबके साथ कैसे? नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. उसको दर्द नहीं हुआ?

रज़िया- बस यही तो बात है मेरी जान.. तू अभी इतनी भी तेज नहीं हुई.. जो ये सब समझ सके. तू अभी बच्ची है समझी!

रज़िया ने ये बात कुछ ऐसे अंदाज में कही, जैसे वो चुदाई की बहुत बड़ी ज्ञानी पंडित हो और अपने शिष्या को ज्ञान दे रही हो.

शाजिया- तो आपा आप कब काम आओगी.. प्लीज़ मुझे इसके बारे में बताओ ना.

रज़िया- अच्छा सुन.. ये जो फुददी होती है ना.. ये बड़ी अजीब चीज है. शुरू में तो उंगली भी डालो तो दर्द होता है, मगर एक बार ये लौड़ा खा ले ना.. उसके बाद इसकी भूख बढ़ जाती है. फिर एक नहीं दो लंड भी कम लगते हैं.. और ऐसे ही धीमे-धीमे ये एक बार में ही अनगिनत लंड खाने में पक जाती है. तब जाकर इसकी भूख या यूं कहें कि चुदास खत्म होती है.

शाजिया- ओह माय गॉड.. ये चुदाई तो बहुत ख़तरनाक खेल है. ना बाबा.. मैं तो इससे दूर ही रहूंगी.

रज़िया- मेरी जान तू चाहे कितना भी मना कर.. मगर एक ना एक दिन तू खुद लंड के लिए मुझे कहेगी.. देख लेना.

शाजिया- अच्छा आपा वो दिन जब आएगा तब की तब देखेंगे, अभी तो आप आज की बात करो.

रज़िया- ठीक है आज की कर लो.. बोलो तुम क्या कहना चाहती हो?

शाजिया- याक़ूब कहाँ हैं आपा.. मुझे वो दिखाई नहीं दे रहा?

रज़िया- तू मेरे भाई के पीछे क्यों पड़ी है.. अगर लंड चूसने का इतना ही मन है तो आ जा ना पार्टी में.. बहुत सारे लंड मिलेंगे.

शाजिया- नहीं आपा आप भी ना.. मैं तो बस ऐसे ही पूछ रही हूँ.

रज़िया- हा हा हा… मैं अच्छे से जानती हूँ. अच्छा सुन आज तुझे एक और मजेदार खेल बताती हूँ.

शाजिया- वो क्या है आपा.. बताओ तो मुझे!

रज़िया- देख रूबी के घर पर सब लोग रात को आएँगे, अभी उसमें बहुत टाइम बाकी है. तुम मेरे साथ अभी चलो हम तीनों ही वहां होंगी तो तुझे सब अच्छे से समझ आ जाएगा.

शाजिया- नहीं आपा अब्बू गुस्सा करेंगे और वहां कोई आ गया तो?

रज़िया- तू एकदम बुद्धू है. अरे अभी शाम हुई है.. और रात होने में बहुत टाइम बाकी है. वहां कोई नहीं आएगा.. और रही बात चाचा की, तो उनको तो यही लगेगा कि तू यहाँ मेरे पास है. वैसे भी एक घंटे में तू वापस आ जाना.. कोई प्राब्लम ही नहीं होनी है.

शाजिया ने थोड़ी देर सोचा फिर ‘हाँ’ कह दी और दोनों सीधे रूबी के यहाँ चले गए.
 


रूबी ने नीले रंग की नाईटी पहनी हुई थी, जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी. इन दोनों को देख कर वो बहुत खुश हुई.

रूबी- वाउ यार रज़िया, तुम तो शाजिया को भी साथ लेकर आई हो.. गुड ये अच्छा किया एंड सॉरी शाजिया मेरे पास तुम्हारा कोई नंबर नहीं था, वरना मैं खुद तुम्हें फ़ोन करती.

शाजिया- अरे इसमें सॉरी की क्या बात है.. और वैसे भी मेरे पास फ़ोन नहीं है. अब्बू फ़ोन रखना एलाऊ नहीं करते.. और मैं पार्टी में शामिल नहीं हो सकती. अभी वापस जाना पड़ेगा.. नहीं तो अब्बू गुस्सा करेंगे. मैं तो बस ऐसे ही आपसे मिलने आ गई थी.

रूबी- यार आजकल तो सबके पास मोबाइल है.. इसमें क्या है? कसम से तू ना बहुत सीधी है.. नहीं तो आजकल अब्बू की सुनता कौन है.. और तुझे यहाँ रुकना होगा यार.. कम से कम खाना तो खाकर जा ही सकती है.

शाजिया- नहीं प्लीज़.. आप बात को समझो. मैं बिना बताए यहाँ आई हूँ.. फिर कभी जरूर खाना खा लूँगी, पक्का.

रूबी- यार शाजिया तू किस दुनिया से आई है. आजकल ये सब नॉर्मल है यार.. एंजाय कर.. ऐसे अपनी लाइफ को वेस्ट मत कर!

रज़िया- अच्छा बस बस.. ये ज्ञान बाद में देना. जो काम करना था तूने वो किया कि नहीं.. या तू बस ऐसे ही पार्टी बनाने चली है?

रूबी- टेंशन मत ले यार.. मैंने शाहिद को सब बता दिया है. वो बियर और नमकीन लेकर आ जाएगा और बाकी खाने का सलमान और अमन देख लेंगे. बस अब तो रात होने का इंतजार है, फिर आनंद ही आनंद आएगा.

रज़िया- तूने फुददी को चमका लिया ना.. या अभी बाकी है?

रज़िया ने ये बात एकदम से कही, जिससे रूबी और शाजिया दोनों चौंक गईं क्योंकि इन दोनों का ऐसी बातों को लेकर कभी सामना नहीं हुआ था और दूसरी बात रूबी के हिसाब से तो शाजिया बस कुछ देर बाद चली जाने वाली थी.

रूबी- त्त..तू ये क्या बोल रही है यार.

रज़िया- बस नाटक मत कर शाजिया को हमारे बारे में सब पता है और वैसे भी शाजिया और मेरे बीच कोई परदा नहीं है. बस तेरे सामने कभी मौका नहीं मिला तो मैंने सोचा आज तीनों ही खुलकर बातें करेंगे.. आनंद आएगा.

रज़िया की बात सुनकर शाजिया बस मुस्कुरा दी और रूबी को देखने लगी.

रूबी- वाउ यार फिर तो कोई टेंशन ही नहीं है.. आज तीनों मिलकर उन सबके लंड निचोड़ देंगे.. बहुत आनंद आएगा.

रज़िया- नहीं यार, शाजिया एकदम कुँवारी है. वो ऐसे ग्रुप सेक्स के लिए ठीक नहीं है.

रूबी- वाउ सो स्वीट यार.. इसकी फुददी का मुहूर्त भी हो जाएगा और आनंद भी आएगा.. क्यों शाजिया क्या कहती हो तुम?

शाजिया- नहीं.. मुझे अभी ये सब नहीं करना है.. आपा आप बताओ ना प्लीज़!

रज़िया- रूबी अभी शाजिया रेडी नहीं है, जब इसका मन होगा.. तब की तब देखेंगे.

रज़िया की बात सुनकर रूबी ने कुछ सोचा, फिर बोली- यार तू मेरी बात सुन.. देख उन सबमें फैजान का लंड सबसे छोटा है तो शाजिया की सील वो तोड़ेगा.. तो ज़्यादा दर्द नहीं होगा. बाकी 2 लंड तू खा लियो और 2 लौड़े में संभाल लूँगी.

शाजिया- नहीं प्लीज़ आप बात को समझो.. अभी मेरा मन बिल्कुल भी नहीं है. जब होगा तो मैं आपको बता दूँगी.

रज़िया- तू भी क्या इसके पीछे लंड लेकर पड़ गई.. इसने ना कहा ना.. तो जाने दे. अब बस इस बारे में तुम आगे कोई बहस मत करना.

रूबी- अच्छा ठीक है.. नहीं बोलती, बस वैसे मैं तो आज मज़े लेकर चुदाई करूँगी ही.

रज़िया- हाँ चुद लेना.. किसने रोका. अच्छा शाजिया एक बात बता.. लड़कों के साथ तुझे प्राब्लम है.. मगर हम दोनों के साथ तो तू मज़े ले सकती है ना?

शाजिया- वो कैसे आपा.. मैं आपकी बात को कुछ समझी नहीं?

रज़िया- जिस खेल के बारे में मैंने घर पर कहा था ना.. वही खेल हमारे साथ खेल ले, बहुत आनंद आएगा.

रूबी- तुम्हारा मतलब लेस्बो.. वाऊ यार, ये तो बहुत मस्त आइडिया है.

शाजिया की कुछ समझ में नहीं आया, वो बस दोनों को देखने लगी.

रज़िया- अरे ऐसे मुँह क्यों बना रही है? याद है मैंने कहा था पीरियड खत्म होने के बाद तुझे एक नया खेल बताऊंगी.

शाजिया- नहीं आपा, मुझे तो याद नहीं.

रज़िया- बताया होगा यार शायद तुझे याद नहीं.. या मैं ही भूल गई होऊंगी.

रूबी- अरे दोनों क्या बहस में लगी हो.. बताया होगा ये जरूरी नहीं है. अभी आनंद करना है या नहीं.. ये बोलो?

शाजिया- मुझे कुछ बताओ तो क्या करना है.. कैसे करना है?

रज़िया ने आंख मारते हुए- एक काम करो रूबी, तुम कोई कोल्ड ड्रिंक का इंतजाम करो. मैं शाजिया को समझाती हूँ.

रूबी उठ कर चली गई तो रज़िया ने शाजिया को एक वीडियो दिखाया, जिसमें दो लड़कियां आपस में फुददी रगड़वाने का आनंद ले रही थीं, जिसे देख कर शाजिया की फुददी में पानी आ गया.

शाजिया- वाउ आपा.. ये भी मस्त है अगर कोई ना मिले, तो हम दोनों आपस में भी फुददी रगड़वाने का आनंद ले सकते हैं.

रूबी- दोनों नहीं.. तीनों. आज हम तीनों एक-दूसरे की फुददी को चाट कर ठंडा करेंगे.

शाजिया- नहीं आपा, मुझसे नहीं होगा रूबी के सामने मैं कैसे?

रज़िया- चुप कर.. याक़ूब के सामने नंगी होने में शर्म नहीं आई और रूबी के सामने आ रही है. अरे ये लड़की है, कोई लड़का नहीं.. जो तेरी फुददी में लंड घुसा देगा.

रूबी- ये याक़ूब कौन है यार..? मुझे भी बताओ आख़िर शाजिया कुँवारी है या नहीं?

याक़ूब का नाम सुनकर शाजिया के पसीने निकल गए.. मगर रज़िया ने जल्दी से बात को संभाल लिया.

रज़िया- अरे वो तो मैंने ऐसे ही बोला. अब टाइम खराब मत करो, चलो जल्दी से कपड़े निकाल दो ताकि कुछ एंजाय किया जाए.

शाजिया- ठीक है आपा, पहले आप दोनों शुरू करो. फिर मैं आप दोनों के साथ आनंद करने आ जाऊंगी.

रूबी और रज़िया तो बेशर्म थीं.. एक झटके में नंगी हो गईं और उन दोनों के जिस्म देख कर शाजिया तो बस देखती रह गई. वैसे तो रज़िया को वो एक बार देख चुकी है.. मगर रूबी आज पहली बार उसके सामने नंगी हुई थी. उसके बड़े-बड़े मम्मे देख कर शाजिया ना चाहते हुए भी अपने चुचों को दबा कर देखने लगी.

रज़िया ने रूबी को बेड पर लेटा दिया और उसके निप्पलों को चूसना शुरू किया.

रूबी- आह.. रज़िया.. उफ्फ.. तू तो किसी लड़के की तरह चूस रही है.. आह.. आनंद आ रहा है.

रज़िया तो उसके निप्पल ऐसे चूस रही थी जैसे आज वो सारा रस निचोड़ कर ही रुकेगी.. और ये सब देख कर शाजिया की फुददी भी फड़कने लगी, वो उत्तेजित हो गई थी. मगर अभी भी उसके मन में थोड़ी झिझक थी.

रज़िया और रूबी अब 69 के पोज़ में आ गईं और दोनों एक-दूसरे की फुददी को कुरेदने लगीं. थोड़ी देर तो शाजिया ने ये देखा फिर उसका सब्र खत्म हो गया और वो भी नंगी हो कर दोनों के पास आ गई.

शाजिया उनके पास लेट गई और रज़िया की गांड पर हाथ घुमाने लगी.

बस उसी पल दोनों अलग हुईं और शाजिया की जवानी पर टूट पड़ीं. रूबी ने शाजिया के चुचों को सहलाना शुरू किया और रज़िया उसकी फुददी को जीभ से कुरेदने में लग गई.
 


रूबी- वाउ सो स्वीट शाजिया.. तेरे मम्मे तो बहुत कड़क हैं. जब इनपे असली मर्द के हाथ लगेंगे ना.. तब देखना तू कैसे खुद लंड माँगने लगेगी.

शाजिया- आह.. आपा.. आराम से.. उफ्फ.. मेरी फुददी नहीं चूसो रूबी.. आह.. मेरे निपल्स को चूस लो.. आह.. दोनों निप्पलों को चूसो ना आह.. ऐसे ही हाँ.. आनंद आ रहा है उफ्फ.. आपा.. नहीं आह.. फुददी को काटो नहीं.. प्लीज़ आह.. सस्स उफ्फ…

रूबी और रज़िया ने शाजिया को चूस-चूस कर वेबकूफ़ बना दिया. वो बहुत जल्दी अपने चरम पर पहुँच गई- आह.. इसस्स आपा.. मैं गई.. उफ्फ.. नहीं आह.. प्लीज़.. उफ्फ.. मेरा पानी आह.. नहीं..

शाजिया की फुददी से रस की धारा बहने लगी और रज़िया अपनी जीभ से उस रस को चाटने लगी. तभी रूबी ने रज़िया को हटाया और बाकी का रस वो जीभ से चाट कर साफ करने लगी. शाजिया तो मज़े में अपनी आँखें बंद किए पड़ी हुई थी.

जब उसकी फुददी के पानी की आख़िरी बूँद भी रूबी ने चूस ली, तब उसने आँखें खोलीं- ओह आपा थैंक्स.. ऐसा आनंद देने के लिए.. उफ्फ.. आप दोनों ने तो आज मुझे वेबकूफ़ ही बना दिया.

रज़िया- अभी कहाँ मेरी जान.. अब तेरी बारी है.. तू हम दोनों की फुददी को चाट कर उसका सारा रस गटक जा.. फिर आएगा असली आनंद.

शाजिया ने पहले कभी फुददी नहीं चाटी थी.. इसलिए उसे थोड़ा अजीब लगा. मगर उन दोनों ने उसको जो आनंद दिया था, वो भी उनका बदला उतारना चाहती थी. इसलिए उसने पहले रज़िया की फुददी से शुरुआत की. शुरू में उसको अजीब सा लगा, बाद में तो वो मज़े से फुददी चूसने लगी.

रूबी और रज़िया पास में एक साथ बेड पर लेटी हुई थीं और शाजिया उनके बीच में बैठ कर दोनों की फुददी को बारी-बारी से चाट रही थी. वो दोनों एक-दूसरे के होंठ चूस रही थीं.

शाजिया कभी रूबी की फुददी को होंठों में दबा कर चूसती, तो कभी रज़िया की फुददी को जीभ से कुरेदती. बस ऐसे ही वो उन दोनों को उत्तेजना के चरम पर ले आई. पहले रूबी की फुददी ने रस छोड़ा, जिसे शाजिया गटक गई. उसके बाद रज़िया माल निकालने को हुई तो उसने शाजिया के सर को पकड़ा और जोर-जोर से फुददी को उसके मुँह पे रगड़ने लगी.

रज़िया- आह.. ससस्स चूस मेरी जान आह.. पी जा साली.. मेरी फुददी का पूरा रस.. उफ्फ.. आह.. आह..

रज़िया का बाँध भी टूट गया और शाजिया ने उसका भी रस गटक लिया, मगर जब आखिरी बार उसने फुददी को चूसा तो रूबी ने जल्दी से शाजिया को अलग किया और उसको किस करने लगी. उसने अपनी जीभ शाजिया के मुँह में घुसा दी और रज़िया का रस निकालने लगी. शाजिया भी रूबी का इशारा समझ गई. उसने मुँह में जो रस था, वो रूबी की जीभ पे लगा दिया, जिससे उसको भी रज़िया का रस चखने को मिल गया.

थोड़ी देर वो तीनों ऐसे ही पड़ी रहीं. फिर सबने कोल्ड ड्रिंक पी और हँसी-मज़ाक भी किया.

शाजिया- ओके आपा.. अब मुझे जाना होगा.. नहीं तो अब्बू को शक हो जाएगा.

रूबी- यार शाजिया रुक जा ना.. बहुत आनंद आएगा. तुम अगर चुदवाना नहीं चाहती तो कोई बात नहीं, मगर हम दोनों की चुदाई देख तो सकती हो ना.. बहुत आनंद आएगा.

शाजिया- नहीं रूबी.. आप समझ नहीं रही हो, अभी मेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं है और वैसे भी आज नहीं तो फिर कभी मैं आप लोगों के साथ एंजाय जरूर करूँगी.

रज़िया- हाँ रूबी इसे जाने दे. ये अभी तैयार नहीं है. कुछ दिनों बाद फिर प्रोग्राम बनाएंगे, तब इसे भी साथ लेकर आएंगे. उस दिन इसे अपनी चुदाई दिखा भी देना और हो सके तो कुछ सिखा भी देना.

शाजिया- आपा आपसे एक बात करनी थी.

रज़िया- हाँ बोल.. क्या बात है मेरी जान?

शाजिया- व्व..वो आपा एक मिनट इधर आओ ना!

रूबी- अरे यार मैं कोई दुश्मन हूँ क्या.. जो मेरे से छुपा कर बात करोगी?

रज़िया- तू रुक ना यार.. ऐसी कोई बात नहीं है. मैं तुझे बाद में बता दूँगी. शायद शाजिया को तेरे सामने कहने में शर्म आ रही होगी.

रूबी- अच्छा खुद मेरे सामने नंगी है. अभी फुददी चटवा रही थी, फिर खुद भी फुददी चाटी.. तब शर्म नहीं आई.. और अब आ रही है. ये क्या चक्कर है भाई.. जरा बताओ तो?

शाजिया- प्लीज़ आप बुरा मत मानो.. आपा आपको बाद में बता देंगी ना!

रज़िया- अच्छा, अब तू चल और बता क्या है?

दोनों वहां से कुछ दूर जाकर खड़ी हो गईं और शाजिया ने रज़िया से अपने अब्बू के बारे में बात की.

शाजिया- आपा अब्बू उत्तेजित हो रहे हैं. आप जल्दी कोई लड़की तो देख कर रखो ताकि सही टाइम पर हम उसको अब्बू के पास लेकर जा सकें.

रज़िया- यार ये बात तो तू कल भी बोल सकती थी.. अभी तुझे क्या सूझी?

शाजिया- व्व..वो आपा रूबी बहुत सुन्दर है.. और इसका जिस्म भी बहुत सेक्सी है. अगर ये मान जाए तो शायद अब्बू भी मान जाएँगे.

रज़िया- वाह यार.. तेरा दिमाग़ तो बहुत फास्ट चलने लगा है. ये बात तो मैंने सोची भी नहीं थी. गुड यार अब तू निकल.. मैं अपने हिसाब से रूबी से बात करती हूँ.

शाजिया ने कपड़े पहने और अपना हुलिया ठीक किया और वहां से निकल गई. उसके जाने के बाद रूबी ने रज़िया से पूछा कि क्या प्राइवेट बातें हो रही थीं.. तब रज़िया ने उसको शाजिया के अब्बू की कहानी सुनाई और उसका ऑफर भी बताया.

रूबी- नहीं यार ये कैसे हो सकता है.. मैं कैसे उसके अब्बू से चुदवा सकती हूँ.. नहीं नहीं.. ये सही नहीं होगा.

रज़िया- मानती हूँ यार.. इतनी उम्र के आदमी के साथ चुदाई करने में तुझे क्या, किसी को इंटरेस्ट नहीं

होगा मगर तू यकीन कर, इस उम्र के आदमी फुददी को बहुत आनंद देते हैं.

रूबी- अच्छा तुझे कैसे पता.. तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने ऐसे किसी के लंड के साथ मजा किया हो?

रज़िया- हाँ यार.. मैंने तुझे बताया था ना.. मेरी पहली चुदाई मेरे चाचा ने की थी. जब मैं छोटी थी और चुदाई का ‘चु’ भी मुझे पता नहीं था.

रूबी- हाँ याद है.. मगर तुमने डिटेल में बात नहीं बताई थी.. चल आज बता दे.

रज़िया ने रूबी को मुस्कुरा कर देखा और फिर अपने कपड़े उठाने लगी.

रूबी- क्या हुआ… बता ना अपनी कहानी और तुझे तो बड़े आदमी के साथ करने का एक्सपीरियेन्स है, तो तू खुद क्यों नहीं शाजिया के अब्बू के साथ चुदाई करवा लेती?

रज़िया- नहीं यार.. मैं तेरी जैसी सुन्दर नहीं हूँ.. और दूसरी बात उसके अब्बू ने आज तक किसी बाहर की औरत के साथ सेक्स नहीं किया है. वो मेरे लिए तो कभी ‘हाँ’ नहीं करेंगे.. समझी!

रूबी- चल इस बारे में हम बाद में बात करेंगे.. तू पहले मुझे अपनी सील टूटने वाली कहानी तो सुना.

रज़िया- अच्छा मेरी कहानी में तुझे बड़ा इंटरेस्ट हो रहा है. तुझे भी तो तेरे किसी करीबी ने चोदा था ना.. पहले तू भी मुझे अपनी कहानी बता, फिर मैं बताऊंगी.

रूबी- मेरी कहानी लंबी है.. पहले आप ही बता दो ना.

रज़िया- अरे कहानी तो मेरी भी बड़ी है. ऐसे तो हम दोनों ही एक-दूसरे को नहीं बता पाएंगे. अब इसका कोई रास्ता निकालना होगा.

रूबी- एक काम करते हैं.. हम टॉस कर लेते हैं, जो हारेगा वो पहले बताएगा.

रज़िया कुछ बोलती तभी घर की डोर बेल बज गई और इस वक्त दोनों एकदम नंगी थीं, तो घबरा गईं- ओह गॉड कौन आ गया.. और हम अभी भी ऐसे ही नंगी बैठी हैं.

रूबी ने जल्दी से अपने कपड़े पहने तब तक रज़िया भी रेडी हो गई थी. दोनों एक साथ ही दरवाजे के पास गईं. जब दरवाजा खोला तो सामने एक लड़का और लड़की खड़े थे, जो दिखने में बहुत अच्छे घर के लग रहे थे. उनके हाथ में एक बैग था और वो दोनों बहुत घबराए हुए लग रहे थे.

रूबी उनसे कुछ पूछती, तब तक वो जल्दी से अन्दर आ गए और उस लड़के ने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया.

 
फ्रेंड्स, बीच में आने के लिए सॉरी.. ये दो किरदार गेस्ट अपीयरेन्स हैं, तो बस एक दिन के लिए इन्हें आपके सामने लाया हूँ. मगर आप टेंशन मत लो.. आपका आनंद वैसा ही बना रहेगा.

ये दोनों एक प्रेमी जोड़ा है. लड़के का नाम राज है उम्र 25 साल, दिखने में स्मार्ट है और लड़की का नाम अमीना है और इसकी उम्र 22 साल है. ये बहुत ज़्यादा सुन्दर है.. किसी कश्मीरी लड़की की तरह एकदम खिला हुआ गुलाब जैसा चेहरा.. तीखे नयन.. और पतले रसीले होंठ.. सेब जैसे लाल-लाल गाल, रंग एकदम चाँदनी जैसा चमकता हुआ.. फिगर 34-30-34 का.. लंबाई भी दीपिका पादुकोण के जैसी.. और सबसे मस्त बात कि इसके होंठों के ऊपर एक काला तिल था, जो इस अप्सरा की सुन्दरता को और ज़्यादा बढ़ा रहा था.

रज़िया- ओ हैलो.. कौन हो आप लोग..? ऐसे कैसे अन्दर आ गए आप?

राज- प्लीज़ आप गुस्सा मत करो.. पहले हमारी बात सुन लो, उसके बाद आप चाहो तो हमें बाहर निकाल देना.

रूबी- रज़िया, पुलिस को फ़ोन करो.. ऐसे-कैसे ये अन्दर आ गए.. और सुनो हमें तुम्हारी कोई बात नहीं सुननी है.. जाओ यहाँ से.. नहीं तो मैं अभी पुलिस को बुला लेती हूँ.

अमीना- नहीं नहीं.. प्लीज़ मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूँ, पुलिस को मत बुलाओ. हम चले जाएँगे, बस थोड़ी देर हमें रहने दो.. हमारी जान को ख़तरा है.. प्लीज़ प्लीज़..!

रूबी- बोला ना अभी के अभी निकल जाओ.

रज़िया- अरे रुक तो यार.. इनकी प्राब्लम क्या है.. पहले वो तो पता लगे?

रूबी- नहीं रज़िया आजकल लोगों का कोई भरोसा नहीं.. क्या पता ये घर लूटने आए हों?

राज- हैलो मिस.. जो भी आपका नाम है.. हम आपको चोर नज़र आ रहे है क्या? ये तो मजबूरी में हम यहाँ आ गए.

रज़िया- रूको यार रूबी तुम मुझे बात करने दोगी या नहीं.. और तेरे पास ऐसा कौन सा कुबेर का खजाना पड़ा है, जो ये चुरा कर भाग जाएँगे.

अमीना- थैंक्स रज़िया.. आपने हमें मौका दिया. हम दोनों एक-दूसरे को दिलो-जान से चाहते हैं.. मगर घर वाले हमारे प्यार के खिलाफ हैं. इसलिए हम दोनों घर से भाग कर अपनी अलग दुनिया बसाना चाहते हैं.

रूबी- ओह सॉरी यार.. मुझे नहीं पता था कि ये प्यार का मामला है. मगर आप दोनों यहाँ कैसे आ गए?

राज- मेरे अब्बू बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं.. उनकी पहचान गुंडों से भी है. वो नहीं चाहते कि हम दोनों एक हों, इसलिए उन्होंने हमारे पीछे गुंडे लगा दिए. हम उन गुंडों से से बचकर भाग रहे थे. जब थक गए तो आपका घर दिखा और बस यहाँ आ गए.

रज़िया- ओह गॉड.. ये तो ग़लत है मगर ऐसे तुम कब तक उनसे छुपते रहोगे? वो तुम दोनों को कभी भी पकड़ लेंगे?

राज- नहीं.. मैंने सारा इंतजाम कर दिया है. मेरा एक दोस्त दुबई में है, कल सुबह की हमारी फ्लाइट है. उसके बाद हम दोनों इन सबसे बहुत दूर निकल जाएँगे. बस आज की रात हमें आसरा दे दो प्लीज़.. आपकी हम पर बहुत बड़ी मेहरबानी होगी.

रूबी- ओके गाइज.. डोंट वरी आप आराम से यहाँ रह सकते हो. वो सामने वाला कमरा खाली है. जाओ वहां जाकर रेस्ट करो.

रज़िया- अरे यार रूको ऐसे कैसे काम चलेगा.. अपना इंट्रो तो दे दो, पता तो चले कि हमारे मेहमान कौन हैं?

सबने एक-दूसरे को अपना नाम बताया और थोड़ी हल्की हँसी-मज़ाक भी की. उसके बाद राज और अमीना कमरे में चले गए और रज़िया ने उनको कोल्ड ड्रिंक भी दी.

जब रज़िया बाहर आई तो रूबी कुछ टेंशन में इधर-उधर घूम रही थी.

रज़िया- तुझे क्या हुआ है यार ऐसे चक्कर क्यों काट रही है?

रूबी- यार एक गड़बड़ हो गई है, हमने उन्हें रोक तो लिया.. मगर हमारी रात वाली पार्टी का क्या होगा?

रज़िया कुछ जवाब देती तभी अमीना उनके पास आ गई, उसने रूबी की बात सुन ली थी.

अमीना- सॉरी रूबी मैंने तुम्हारी बात सुन ली, मगर आप टेंशन मत लो. हम दोनों अन्दर से बाहर नहीं आएँगे. आपके मेहमान आएँगे, उनको पता भी नहीं चलेगा.

रज़िया- अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. कोई खास मेहमान नहीं आने वाले.. बस कुछ कॉलेज के दोस्त हैं.. वही आएँगे. अगर तुम दोनों चाहो तो पार्टी में शामिल हो सकते हो.

अमीना- ओह थैंक्स रज़िया.. ये तो बहुत अच्छी बात है. फ्रेंड्स पार्टी है, इसमें तो आनंद आएगा.

रूबी- रज़िया लेकिन व्व..वो कैसे.. हम सब..

रूबी की ज़ुबान कहते हुए लड़खड़ा रही थी. उसके दिमाग़ में चुदाई का चक्कर चल रहा था और रज़िया इनको पार्टी का हिस्सा बनाने में लगी हुई थी.

रज़िया- क्या वो..? मुझे पता है तू क्या कहना चाहती है.. यार ये कोई ओल्ड उम्र नहीं हैं.. ये भी हमारी तरह जवान हैं और साथ में ब्वॉयफ्रेंड भी है. पार्टी साथ में करते हैं, उसके बाद ये अपने कमरे में आनंद करेंगे.. हम दूसरे कमरे में मजा करेंगे.

रज़िया तो एकदम बिंदास लड़की थी. उसने इशारे में सब कुछ बोल दिया और अमीना भी बहुत समझदार थी. वो एक ही बार में सब कुछ समझ गई.

अमीना- ओह तो ये बात है.. तभी रूबी टेंशन में थी. ब्वॉयफ्रेंड आने वाले है ना..!

रूबी- नहीं, वो ऐसी बात नहीं है.

रज़िया- अरे बस यार.. इस जवानी में आनंद नहीं करेंगे तो क्या बुढ़ापे में जाकर आनंद करेंगे.. कूल यार.

अमीना- हाँ रूबी.. आजकल ये नॉर्मल बात है.. शादी का वेट कोई नहीं करता. सब पहले ही आनंद ले लेते हैं. मैंने और राज ने भी खूब एंजाय किया है.

रज़िया- बस सुन लिया ना.. ऐसे ही टेंशन में आ गई थी.. चल अब कुछ खाने के लिए बनाते हैं.

अमीना- मैं भी आप लोगों के साथ चलती हूँ. राज बहुत थक गया है, तो वो सो गया है. इसी बहाने आप दोनों से बात भी हो जाएगी और आपके ब्वॉयफ्रेंड के बारे में भी मुझे पता लग जाएगा.

रूबी- अब बात यहाँ तक आ ही गई है.. तो मैं बता देती हूँ. ये कोई ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वाला मामला नहीं है. हम सब कॉलेज फ्रेंड्स हैं और ऐसे ही साथ मिलकर ग्रुप सेक्स की मस्ती करते हैं.

अमीना- ओह गॉड ग्रुप सेक्स की मस्ती!

रज़िया- हाँ सही समझी.. अकेले चुदाई करवाने में वो आनंद कहाँ यार.. जो ग्रुप सेक्स में मजा आता है. वैसे तुमने ऐसे सेक्स को कभी ट्राई किया है?

अमीना- नहीं यार कभी नहीं.. और वैसे भी राज के रहते मुझे कभी ऐसी जरूरत पड़ी ही नहीं.. क्योंकि वहीं मुझे थका देता है तो दूसरे की जरूरत ही नहीं पड़ी.

रूबी- अच्छा इतना पावरफुल है वो?

अमीना- हाँ यार.. ही इज ए स्ट्रॉंग मैन.. पहली बार तो मैं बेहोश ही हो गई थी.

रज़िया- अच्छा कितना बड़ा लंड है तेरे राज का.. ज़रा बता तो मुझे?

अमीना- यार तुम भी एकदम बिंदास लंड बोल रही हो.. वैसे मैं भी ऐसे ही तुम्हारी तरह हूँ. मेरे राज का लंड 7.5″ लम्बा है और मोटा भी अच्छा ख़ासा है.

रज़िया- वाउ वैसे एक बात बताऊं मेरे ब्वॉयफ्रेंड शाहिद का 8″ का लंड है.. और वो भी काफ़ी मोटा है. अगर शाहिद ज़िद पर आ जाए ना.. तो 40 मिनट तक ऐसी चुदाई करता है कि बस पूछो मत.

अमीना- वॉट..! इतना बड़ा लंड.. वाउ यार फिर तेरे तो मज़े हैं.

रूबी- इसके नहीं.. हमारे मज़े हैं. मैंने बताया ना.. हम सब मिलकर चुदाई का मजा करते हैं और वैसे अमन सलमान और आज़म इनके भी लंड ऐसे ही हैं. बस फैजान का छोटा लंड है, मगर चुदाई सब अच्छी तरह करते हैं.

अमीना- ओह गॉड.. 5 लड़के आएँगे.. यार तुम दोनों कैसे संभाल पाओगी?

रज़िया- हा हा हा हा दोनों..? यार पिछली बार तो रूबी ने सबके साथ अकेले ही चुदाई की थी.

अमीना- वाउ यार, तुम तो बहुत हिम्मत वाली हो.. सबको एक साथ संभाल लिया.

रूबी- नहीं यार कैसी हिम्मत.. पिछली बार सबने मेरी हालत बिगाड़ दी थी, इसीलिए आज हम दोनों मिलकर मस्ती करेंगे.. ताकि पाँच लौड़ों को अच्छी तरह संभाल सकें.

 
अमीना- यार बस करो तुम्हारी बातों से मेरी तो फुददी गीली हो गई. लगता है राज को जगाना ही पड़ेगा.. नहीं तो रात तक ये ऐसे ही टपकती रहेगी और मैं परेशान रहूंगी.

रज़िया- अगर बात सुनकर ये हाल है.. तो तुम भी रात को हमें ज्वाइन करो ना.. कसम से बहुत आनंद आएगा.

अमीना- नहीं यार.. मैं किसी को जानती भी नहीं.. और ऐसे किसी अंजान के साथ.. ना, मेरे से तो नहीं होगा. फिर राज भी तो है.

अमीना की बात सुनकर रज़िया और रूबी ने एक-दूसरे को देखा फिर आँखों ही आँखों में इशारा किया.

रज़िया ने रूबी को इशारे से समझा दिया कि क्या कहना है.

रूबी- अरे अनजान का क्या.. फुददी और लंड का तो जन्मों का नाता है यार.. बस एक बार शुरू हुए नहीं कि फिर सब जान-पहचान हो जाएगी और राज की टेंशन मत लो, उसको भी साथ ही लेंगे यार.. इसी बहाने उसको भी चोदने को आज नई फुददी मिल जाएगी.

अमीना- नहीं यार, ये ग़लत होगा.

रज़िया- क्या ग़लत होगा? अरे आज तुम्हारी आज़ादी की आख़िरी रात है.. उसके बाद कल वहां जाकर शादी कर लोगी, फिर कहाँ ऐसा मौका मिलेगा.

रूबी- हाँ यार अमीना ज़रा सोचो.. तुम आज ही यहाँ क्यों आई हो.. अल्लाह खुद यही चाहता है कि आज तुम खुलकर जी लो ताकि फिर कभी पछतावा ना हो कि ग्रुप सेक्स का मौका मिला था मगर मैंने गंवा दिया.

अमीना- बस यार बस मेरी फुददी का हाल बुरा हो गया है. मैं तो मान जाऊंगी मगर राज को कैसे मनाऊंगी.. वो मुझसे बहुत प्यार करता है. किसी और के साथ मेरी चुदाई को वो कभी नहीं मानेगा.

रज़िया- वो तुम मुझपे छोड़ दो, दुनिया का कोई मर्द ऐसा नहीं होगा, जिसको एक साथ दो फुददी फ्री में मिलें और वो ना कह दे. तुम बस एक काम करो.. बाकी मैं संभाल लूँगी.

रज़िया ने अमीना को कुछ बताया कि कैसे वो राज को मनाएगी. उसके बाद तीनों खिलखिला कर हंसने लगीं.. क्योंकि रज़िया की स्कीम इतनी ज़बरदस्त थी कि अमीना को भी यकीन हो गया कि अब राज नहीं बचेगा.

तीनों ने पार्टी के लिए कुछ नाश्ता बनाया. फिर उसके साथ कॉफी बना कर अमीना राज को उठाने कमरे में चली गई.

राज उठा फ्रेश हुआ और उसने अपने बैग में से एक टी-शर्ट और लोवर निकाल कर पहन लिया. उसके बाद बाहर आ गया.

सब एक साथ बैठ कर नाश्ता कर रहे थे रूबी ने जालीदार नाईटी पहनी हुई थी और अन्दर कुछ भी नहीं था. उसके मम्मे साफ नज़र आ रहे थे और वो जानबूझ कर राज के ठीक सामने बैठी थी.

राज बार-बार चोरी से उसके चुचों की झलक देख रहा था. रज़िया और अमीना यही दिखाने की कोशिश कर रही थीं जैसे उनको कुछ पता नहीं, मगर राज की इस हालत का आनंद वो भी ले रही थीं.

रूबी जैसी सेक्स बम्ब सामने हो तो लंड सलामी ना दे, ये हो ही नहीं सकता था. बेचारे राज का भी वही हाल था, उसका लंड भी लोवर में फुंफकारने लगा.

थोड़ी देर ये दूरदर्शन चलता रहा, फिर रज़िया ने एक पासा फेंका- यार अमीना तुम बहुत लकी हो.. तुम्हें राज जैसा प्यार करने वाला मिला ये दिखने में भी कितना हैंडसम है यार.

अमीना- ओ हैलो.. ऐसी नज़रों से मत देखो.. ये तुम्हारे जीजू है समझी!

रूबी- अच्छा जीजू हैं तो भाई फिर हम साली बन गई ना.. तो साली का मतलब होता है आधी घर वाली.. हा हा हा हा.

रज़िया- हाँ सही है, अब साली तो मस्ती-मज़ाक भी करेगी.. क्यों राज क्या कहते हो?

राज- तुम लड़कियों का कुछ पता नहीं.. कब कहाँ क्या सोचती हैं.

रूबी उठी और राज की गोद में जाकर बैठ गई. इस अचानक हमले से राज घबरा गया. एक तो उसका लंड पहले ही खड़ा था और अब रूबी की गांड उसपे थी. वो तो बस ऐसे अकड़ रहा था, जैसे कोई अप्सरा उसके पास हो. राज बस रूबी के बालों की महक में खो गया.

रूबी- लो भाई, मैं तो अपने जीजू के पास बैठ गई. अब बोलो क्या कहती हो?

रज़िया- जीजू ज़रा संभालना.. आपकी ये साली बहुत शैतान है.. कहीं आपका पोपट ना बना दे.

राज- इतना भी आसान नहीं है रज़िया.. मुझे क्या समझा है, अगर मैं शुरू हो गया ना.. तो साली साहिबा भागती नज़र आएंगी.

रूबी- अच्छा ये बात है तो मुझे भी देखना है.. ऐसा क्या करोगे तुम?

राज- जाने दो नहीं तो बुरा मान जाओगी और वैसे भी बीवी के सामने साली को छेड़ना अच्छी बात नहीं है.

अमीना- मेरी टेंशन मत लो राज.. जो करना है करो, आज दिखा दो कि तुम कमजोर नहीं हो.

अमीना के कहने के फ़ौरन बाद रूबी उठी और घूम कर वापस बैठ गई. अब उसके मम्मे राज के सीने से लगने लगे थे.. जिससे रूबी की साँसें राज को वेबकूफ़ बना रही थीं. तभी रूबी आगे झुकी और राज के कान में बोली- जीजू, आपका गन्ना बहुत गर्म हो गया है.. कहीं जूस ना निकल जाए.

राज- घबराओ मत साली जी.. ये ऐसा वैसा गन्ना नहीं है.. इसको तो रस के लिए अच्छे से चूसना और निचोड़ना पड़ता है.

रूबी की बात का जवाब राज ने भी धीमे से ही दिया था मगर ये डबल मीनिंग बातें दोनों अच्छे से समझ रहे थे. उधर रज़िया और अमीना भी समझ गई थीं कि अब लोहा गर्म है तो हथौड़ा मार देना चाहिए.

रज़िया- अमीना, इन दोनों को जाने दे.. ये रूबी तो ऐसे ही नाटक करती है. तू मेरे साथ आ तुझे कुछ दिखना है.

अमीना ने भी कुछ नहीं कहा और रज़िया के साथ सामने के कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया.

रूबी- लो जीजू, आपकी होने वाली वाइफ तो गई.. अब दिखाओ अपना मजबूत गन्ना कैसे रस निकालना है, देखती हूँ.

रूबी ने ये बात राज के लंड को टच करके कही थी.

राज- वेबकूफ़ मत बनो रूबी.. मज़ाक की एक हद होती है. उठो ये क्या बचकानी हरकत है.

रूबी- ये मज़ाक नहीं है राज.. तुम सच में बहुत हैंडसम हो और तुम्हारे लंड की गर्मी सीधे मैं अपनी फुददी पर महसूस कर रही हूँ. जैसे मैंने ब्रा नहीं पहनी उसी तरह पेंटी भी नहीं है.. क्या तुम्हें मेरी फुददी की गर्मी महसूस नहीं हो रही?

रूबी के खुले शब्दों को सुनकर राज एकदम से घबरा गया और उसकी बातों से उसका लंड और अकड़ने लगा. साथ ही उसके दिमाग़ में सीधे रूबी की फुददी की फोटो घूमने लगी.

राज- ये तुम क्या बोल रही हो.. नहीं प्लीज़ हटो ये ग़लत है.. अमीना आ जाएगी.

रूबी- कूल बेबी घबराओ मत.. अमीना नहीं आएगी रज़िया उसको आने नहीं देगी. मैंने ही उसको इशारा किया था.

राज- त्त..तुम मुझसे चाहती क्या हो? प्लीज़ मैं अमीना से बहुत प्यार करता हूँ.

रूबी- यार मैंने कब मना किया, जितना चाहे उसको प्यार करो. बस एक बार प्लीज़ मेरी रिक्वेस्ट है.. मुझे तुम्हारा लंड चूस लेने दो प्लीज़.

इतना कहकर रूबी अलग हुई और राज के लोवर से लंड को बाहर निकालने लगी. बेचारा राज तो इस अप्सरा के जाल में ऐसा फँसा कि ना रोकते बना, ना हाँ कहते बना.

रूबी ने उसका तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया और अपने होंठों में दबा कर ऐसी चुसाई शुरू की कि राज वेबकूफ़ हो गया- सस्स नहीं.. रूबी आह.. नहीं ये ग़लत है.. आह.. उफ्फ.. अमीना आ जाएगी.

 


रूबी ने अब चूसना बंद किया और लंड को हाथ से ऊपर-नीचे करने लगी- क्या भाव खा रहे हो यार.. इतनी सुन्दर लड़की तुम्हारे लंड को चूस रही है और तुम मना कर रहे हो.

राज- ऐसी बात नहीं है रूबी.. ये जगह और हालत सही नहीं है वरना मैं तुम्हारी सारी गर्मी अभी निकाल देता.

रूबी- सिर्फ़ मेरी ही? रज़िया की गर्मी कौन निकालेगा?

राज- क्या मतलब है तुम्हारा?

रूबी- वो भी तुम्हें देख कर फिदा हो गई है. उसको भी तुमसे चुदाई करानी है.

राज- रियली..! लेकिन ये होगा कैसे.. क्या तुम दोनों ने कोई प्लान बनाया है?

रूबी खड़ी हुई और अपनी नाईटी उतार फेंकी. उसका सांचे में ढला हुआ जिस्म देख कर राज की वासना जाग गई.

राज- आह.. तुम इतनी बिंदास.. कि नंगी हो गईं.. इसका मतलब तुम दोनों ने कोई तगड़ा प्लान बनाया है.

रूबी- हाँ मेरे स्मार्ट जीजू डरो मत.. आ जाओ चूस लो मेरे चुचों का रस.. कर दो मेरी फुददी की चुसाई.. अब तुम्हें अमीना से डरने की कोई जरूरत नहीं है.

राज समझ गया कि अमीना नहीं आएगी. इन दोनों ने कुछ स्कीम लगाई होगी. वो फ़ौरन रूबी पर टूट पड़ा, उसके चुचों को चूसने लगा. वहीं पास पड़े सोफे पर उसने रूबी को लेटा दिया और पागलों की तरह उसकी फुददी चाटने लगा.

रज़िया और अमीना शुरू से सब देख रही थीं. जब राज पूरी मस्ती में आ गया, तब रज़िया भी नंगी हुई और बाहर आ गई- जीजू मेरा नंबर कब आएगा? देखो ना मेरी फुददी भी कैसी गीली हो गई है.

रज़िया को नंगी देख कर राज के होश उड़ गए. एक बार तो उसने ऊपर से नीचे तक अच्छी तरह रज़िया को देखा, मगर जल्दी ही उसे ख़तरे का अहसास हो गया.

राज- त्ता..तुम यहाँ ऐसे त्त..तो अमीना कहाँ है.. उसके साथ तुमने क्या किया?

अमीना- मैं यहाँ हूँ राज मेरी जान..!

अमीना को देख कर राज की हालत पतली हो गई, मगर वो कुछ कहता या सोचता तब तक तीनों जोर-जोर से हंसने लगी थीं.

रज़िया- हा हा हा मैंने कहा था ना.. ये मर्द जात ऐसी ही होती है. बस फुददी की झलक दिखा दो, फिर अपने आप जीभ लपलपाए पीछे-पीछे आ जाता है.

रूबी- हा हा हा इसकी शक्ल तो देखो हा हा हा कैसे 12 बज गए हैं.

अमीना- बस भी करो यार, तुम दोनों मेरे जानू को ऐसे मत तड़पाओ.

राज- यार ये क्या है अमीना.. और तुम भी इनका साथ दे रही हो?

अमीना- सॉरी राज, मगर इसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है.. ये सब हमने प्लान किया था.

राज- मगर क्यों अमीना? तुम कैसे मुझे किसी के साथ ऐसा करने के लिए सोच सकती हो?

अमीना- तुम्हारी ख़ुशी के लिए कुछ भी.. अब सच सच बताओ तुम्हें आनंद आया ना?

राज- आनंद कैसे नहीं आएगा ऐसी हसीना नंगी सामने हो तो.. वैसे जो बात तुम्हारे अन्दर है ना.. इसमें नहीं है.

अमीना- बस बस मस्का मत लगाओ.. मैंने शुरू से सब देखा है. कैसे वेबकूफ़ हुए जा रहे थे और ये भी देखा कि तुमने मेरी फुददी तो कभी ऐसे नहीं चाटी.

राज- नहीं अमीना.. सच्ची मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगा.. तुम तो मेरी जान हो.

अमीना- अच्छा मान लेती हूँ, अब ये बताओ इन दोनों की चुदाई करना चाहते हो या नहीं?

राज- तुम्हें अगर प्राब्लम नहीं.. तो मैं जरूर करना चाहूँगा.

अमीना- मुझे कोई प्राब्लम नहीं है, आज की रात जो चाहो करो, मगर शादी के बाद नहीं.

अमीना की बात सुनकर राज बहुत खुश हो गया और तभी रज़िया उसके पास आ गई. रज़िया ने उसकी टी-शर्ट निकाल दी और रूबी ने उसका लोवर खीच लिया. अब राज एकदम नंगा हो गया था.

रज़िया ने झट से नीचे बैठ कर राज के लंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

राज- आह.. वाउ रज़िया.. तेरे होंठ तो फुददी की तरह गर्म हैं आह..

रज़िया ने थोड़ी देर लंड चूसा, फिर अलग हो गई.

राज- क्या हुआ साली जी.. लंड चूसो ना.. यार सच में बहुत आनंद आ रहा था.

रज़िया- एक बात बताओ राज, अमीना ने तुम्हें आज पूरी आज़ादी दे दी है, अगर यही बात अमीना चाहे कि आज वो भी किसी और से चुदाई करे तो क्या तुम्हें मंजूर होगा.

राज अब उनके वश में आ गया था और उत्तेजित इंसान दिमाग़ या दिल से नहीं.. लंड से सोचता है. यही हाल राज का हो गया था.

राज- इसमें क्या है यार.. अगर मेरी जान का दिल है तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी. वो एक से क्यों.. दो से चुदाई कर सकती है.

रूबी- वाउ यार.. राज मान गया यानि आज ग्रुप चुदाई में बहुत आनंद आने वाला है.. पूरी रात हम सभी के लंड फुददी एंजाय करेंगे.

राज- ग्रुप चुदाई? मैं कुछ समझा नहीं.. मुझे कोई ठीक से बताएगा?

अमीना- रज़िया अब तुम ही इसे विस्तार से बताओ.

रज़िया ने शुरू से आख़िर तक सारी बात बताई और ये सब उनका प्लान था.. उसने राज को सब समझा दिया.

राज- ओह यार तुम लड़कियां भी ना इतनी सी बात को कितना लंबा कर देती हो. ऐसे सीधे भी अगर मुझसे पूछती, तो मैं ‘हाँ’ कह देता क्योंकि मेरा खुद का बड़ा मन करता है कि कभी ऐसा मौका मिले कि ग्रुप चुदाई हो. खास कर मेरी जान अमीना को भी ये पसंद है तो मैं कभी ना कर ही नहीं सकता बल्कि ये तो बहुत अच्छी बात है. आज मैं मेरी जान को किसी और से चुदता देखूँगा, ये सोच कर ही मेरे लंड में एक्सट्रा तनाव आ गया.

रज़िया- तो ठीक है बस.. अब रात को खूब आनंद करेंगे. चलो अमीना कुछ तैयारी करनी है.

राज- अरे अरे ये क्या मुझे ऐसे ही अधूरा छोड़कर जाओगी क्या? मुझ पर नहीं तो कम से कम मेरे लंड पर तो रहम करो यार.

रज़िया- अब जो करना है रात को करना.

राज- नहीं यार ये ग़लत है.. रात तक तो मेरा ये लंड अकड़ कर दर्द करने लगेगा.

अमीना- प्लीज़ यार मेरे राज को मत तड़पाओ.. तुम अभी चुदवा नहीं सकती तो कम से चूस कर ही इसके लंड का पानी निकाल दो ना.

रूबी- हाँ ये सही है.. चलो तुम दोनों जाओ, मैं राज के लंड को ठंडा कर देती हूँ.

रूबी तो लंड चूसने में एक्सपर्ट थी. उसने राज के लंड को ऐसा चूसा कि वो मज़े की दुनिया में गोते खाने लगा और आख़िरकार लंबी लंड चुसाई के बाद उसके मूसल का लावा बाहर निकल आया.

रज़िया ने अमीना की फुददी को एकदम क्लीन कर दिया, साथ ही उसने अपनी फुददी भी चमका ली थी. लंड का पानी निकलने के बाद राज शांत हो गया तो रूबी भी उन दोनों के साथ फुददी की झांटें साफ करने चली गई. इधर राज टीवी देखने बैठ गया.

फ्रेंड्स अब यहाँ से जाना पड़ेगा क्योंकि यहाँ जो भी खेल होने वाला है, वो रात को होगा. तब तक हम कहीं और घूम कर आ जाते हैं.

 
फ्रेंड्स अब यहाँ से जाना पड़ेगा क्योंकि यहाँ जो भी खेल होने वाला है, वो रात को होगा. तब तक हम कहीं और घूम कर आ जाते हैं.

शाजिया जब घर गई तो उसका खिला-खिला चेहरा देख कर अब्बू जी ने उसे रोक लिया- आ गई मेरी प्रिंसेज़.. बहुत टाइम लगा दिया ना बेटा.. और तेरे चेहरे पर इतनी ख़ुशी किस बात की है बेटा?

अब शाजिया कैसे बताए वो अपनी फुददी चुसवा कर आई है, इसलिए वो खुश है.

शाजिया- कुछ नहीं अब्बू ऐसे ही फ्रेंड से मिलकर आई हूँ तो आपको ऐसा लग रहा है.

अब्बू- अच्छा अच्छा ऐसे ही खुश रहा कर तू.. तुझसे एक बात करनी थी.

शाजिया- हाँ अब्बू बोलो ना क्या बात है?

अब्बू- रात को तेरी अम्मी तो जल्दी सो जाती है और मुझे नींद नहीं आती तो क्या मैं तेरे पास आ जाऊं, अगर तुझे कोई दिक्कत ना हो तो?

शाजिया- अरे इसमें पूछना क्या अब्बू.. मैंने तो रात को ही कहा था कि आप मुझे रोज ऐसे ही मालिश करके सुलाना. सच में आपके हाथों में जादू है, आप सर को एकदम हल्का कर देते हो, उससे नींद अच्छी आती है.

इतना कह कर शाजिया अन्दर चली गई और अपनी अम्मी की काम में मदद करने लगी.

शाजिया का जवाब सुनकर अब्दुल जी की आँखों में चमक आ गई, अब उनके इरादे क्या थे.. वो तो रात को ही पता चलेगा. अभी यहाँ भी हमारे काम का कुछ नहीं बचा, तो चलो अब राबिया और जाहिरा के पास जाकर थोड़ा झाँक लेते हैं कि वहां क्या हो रहा है.

फवाद ने जाहिरा को पैसे भी दिए और अच्छी वाली आईसक्रीम भी लेकर दी. उसके बाद वो अपने काम पे चला गया और अब राबिया और जाहिरा घर में अकेली थी.

राबिया- क्या बात है जाहिरा.. एक ही दिन में तूने अपने जीजू को पटा लिया, आईसक्रीम मंगवा ही ली तूने.. वैसे ये हुआ कैसे?

जाहिरा- कुछ नहीं आपा मैंने उनके पैर दबाए थे ना.. बस इसी लिए.

राबिया- अच्छा ये बता मेरे जाने के बाद तुमने कुछ किया था क्या?

जाहिरा- नहीं तो आपा व्व..वो जीजू तो सो रहे थे ना.

राबिया- अच्छा बच्ची मेरी बिल्ली मुझी से म्याऊं.. वाह.. मैंने तुझे फवाद को बताने से मना किया है और तू मुझसे ही बात छुपा रही है.

जाहिरा- नहीं आपा सॉरी.. मैं आपसे छुपाना नहीं चाहती मगर वो जीजू ने ना मुझे वो..

राबिया- क्या वो वो.. लगा रखी है सीधे बोल ना लंड पकड़वाया था..!

राबिया के मुँह से लंड सुन कर जाहिरा के चेहरे का रंग फीका पड़ गया वो बस राबिया की तरफ़ देखने लगी.

राबिया- ज़्यादा सोच मत.. मैं कही नहीं गई थी.. समझी! यहीं छुप कर सब देख रही थी और अब मुझे ऐसा लगता है तू जितनी नादान बन रही है, उतनी है नहीं.. सच सच बता.. तुझे इस खेल के बारे में क्या-क्या पता है?

जाहिरा- नहीं आपा मुझे कुछ नहीं पता.. वो तो जीजू ने ऐसा करने को कहा था बस.

राबिया- अरे तो घबरा मत.. मैं तुझसे गुस्सा नहीं हूँ. मैं तो खुद यही चाहती थी कि तू जीजू का लंड मसले.. उनका पानी निकाल दे ताकि वो खुश हो जाएं.

जाहिरा- मगर क्यों आपा.. आप ऐसा क्यों चाहती हो.. ये तो गलत है ना?

राबिया- नहीं जाहिरा, तेरे जीजू का पानी नहीं निकलता तो वो मुझे चोदते और मेरा अभी चुदाई करने का मन नहीं था.

राबिया की चुदाई जैसी खुली बातें सुनकर जाहिरा हंसने लगी.

राबिया- तू हंस क्यों रही है हाँ बोल?

जाहिरा- आपा आपको भी दर्द होता है क्या.. जो आप नहीं करना चाहती हो?

राबिया- तुझे ये कैसे पता? देख जाहिरा मैं जानती हूँ तुझे फुददी और लंड के इस खेल की जानकारी है, मगर तू नादान बन रही है. अब सच बता दे नहीं तो मैं सच में तुझसे नाराज़ हो जाऊंगी और तुझे काम से भी निकाल दूँगी.. फिर चली जाना अपनी उसी गंदी बस्ती में.. और सुनती रहना उन बड़ी लड़कियों की कहानी.

जाहिरा- नहीं आपा, अल्लाह के लिए आप गुस्सा मत हो. मैं सब बताती हूँ, पहले मुझे पता नहीं था मगर कुछ दिन पहले एक लड़की की शादी हुई और जब वो वापस आई तब सारी लड़कियां उससे पूछने लगीं. तब मैं भी वहीं थी और वो लड़की सबको बता रही थी कि उसका शौहर उससे लंड पकड़वाता है. चूसने को बोलता है, फिर उसको चोदता है.. तो बहुत दर्द होता है.. बस मुझे यही पता है.

राबिया- गुड और बता.. कुछ और भी पता होगा ना तुझे?

जाहिरा- वो कह रही थी.. लंड को चूसने से या हाथ से हिलाने से उसमें से सफेद पानी निकलता है, जो चिपचिपा होता है.

राबिया- अच्छा यानि तूने सब सुना हुआ है. चल ये बता तेरी फुददी को मैंने टच किया था, तब तू सिहर गई थी. सच बता तूने कभी अपनी फुददी का पानी निकाला है क्या?

जाहिरा- नहीं आपा कसम से मैंने कभी नहीं निकाला.. हाँ एक-दो बार मैंने कोशिश की थी, मगर दर्द होता है.

राबिया को अब बात समझ आ गई थी कि ये नादान तो नहीं है मगर इतनी फास्ट भी नहीं है. बस सुन कर ही सीखी हुई है. अब इसको फवाद से चुदाई के लिए आसानी से तैयार किया जा सकता है. साथ ही उसके लिए आज ही उसे कुछ सोचना पड़ेगा ताकि ये काम जल्दी पूरा हो जाए और ये कच्ची कली फवाद से चुदने को मान जाए.

राबिया को सोच में पड़ी देख जाहिरा ने उससे पूछा- क्या हुआ आपा?

राबिया- कुछ नहीं हुआ.. कल तो तू लुल्ली बोल रही थी और अब बड़े आराम से लंड बोल रही है, इसका मतलब तुझे पहले से पता था इसको लंड कहते हैं क्यों?

जाहिरा ने शर्माते हुए कहा- हाँ आपा, मगर सच्ची मैंने बस सुना था और एक-दो बार दूर से देखा भी था.

राबिया- इसका मतलब आज पहली बार तूने लंड को पकड़ा है और उसका पानी निकाला है?

जाहिरा- हाँ आपा.. इसी लिए तो जीजू के लंड को छूते ही मैं डर गई थी. जीजू का लंड बहुत गर्म था.

राबिया- अच्छा ये बात है चल ये बता तुझे अपने जीजू का लंड पकड़ने में आनंद आया कि नहीं?

जाहिरा- आपा सही कहूँ.. शुरू में थोड़ा डर लगा था, मगर बाद में अच्छा लगा.

राबिया- पकड़ने से ज़्यादा चूसने में आनंद आता है.. बोल लंड चूसना चाहेगी क्या?

जाहिरा- नहीं आपा मुझे सुनकर ही घिन आती है.. नहीं मुझे लंड नहीं चूसना.

राबिया- अरे वेबकूफ़ इसमें घिन कैसी? सच में लंड चूसने में बड़ा आनंद आता है. तू ये आईसक्रीम चूसती है ना.. इससे भी ज़्यादा आनंद आता है और उसका रस बहुत स्वादिष्ट होता है.

जाहिरा- नहीं आपा मुझे तो सुनकर ही अजीब लग रहा है.

राबिया- अच्छा चल जाने दे.. अभी तुझे ये बात समझ नहीं आएगी. रात को आज तुझे एक ऐसा आनंद दूँगी कि तू याद रखेगी. फिर तुझे इस अमृत रस की अहमियत का पता लगेगा. चल अब मेरे लिए कड़क सी कॉफी बना ला.

जाहिरा कॉफी बनाने चली गई और राबिया मन ही मन खुश होने लगी कि उसको अब ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. ये जाहिरा बहुत जल्द उसके जाल में फँस जाएगी.

अब यहाँ क्या आपको भी कॉफी पीनी है. चलो यहाँ से अपना ध्यान हटाओ जी, अब जो होगा वो रात को ही होगा, तभी आकर देख लेना.

उफ़फ्फ़ ये क्या यहाँ भी रात को प्रोग्राम होगा और वहां शाजिया के अब्बू भी रात को कुछ करेंगे. और हाँ वो वहां रूबी के घर पर ग्रुप सेक्स अब तीन जगह एक साथ आप कैसे देख पाओगे, यही सोच रहे हो ना..! तो फ्रेंड्स मैं किस लिए हूँ सबका आनंद मिलेगा बारी-बारी से मगर रात तो होने दो यार.

रज़िया ने शाहिद को फ़ोन कर दिया कि 2 और मेहमान आ गए हैं तो खाना ज़्यादा लाना और बियर भी ज़्यादा लाना. जब शाहिद ने पूछा तो रज़िया ने शॉर्ट में कहानी सुना दी और नई फुददी की बधाई भी दे दी.

शाहिद और बाकी सब लौंडे रात होते-होते सब सामान के साथ रूबी के घर पहुँच गए.

जब ये लोग पहुँचे तब राज और अमीना रूबी के साथ कमरे में थे और रज़िया बाहर हॉल में अकेली थी.

रज़िया- आ गए मेरे फुददी खोर दोस्त, सब ठीक सामान लाए हो ना?

फैजान- रज़िया मेरी जान सामान को मार गोली.. वो नई फुददी दिखा, कहाँ है. जबसे शाहिद ने बताया है ना.. मेरा तो लौड़ा बैठ ही नहीं रहा है.

रज़िया- अच्छा साले, आज तेरी मूँगफली में उफान आ गया है.. मगर सुन कुत्ते तुझे वो नहीं मिलेगी, उसके लिए तो ये चारों ही लंड तोड़ लड़ाई लड़ेंगे.

आज़म- क्यों यार.. ऐसा क्या बहुत मस्त आइटम है?

रज़िया- देखोगे ना भोसड़ी के.. तो तेरा लौड़ा टपकने लगेगा.
 
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