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विजय- विकास के साथ उसने अलफांसे का नाम भी सुन रखा था ।
ऐसा दुनिया में भला कौन हो सकता था जिसने विजय-विकास का नाम सुना हो मगर अलफांसे का नाम न सुना हो ।
वह तो बस यह देख रही थी यह कि यह है वह अंतरांषट्रीय मुजरिम दुनिया के हर देश की पुलिस को जिसकी तलाश है----अलफांसे को सामने पाकर नजमा अपने सम्पूर्ण जिस्म में अजीब-सा रोमांच महसूस कर रही थी । उसी वक्त कानो में विजय की आवाज पडी । वह अलफांसे से पूछ रहा था-----" तुम यहां बेमौसम के आम की तरह कहाँ से टपक पड़े लूमड़ मियां?"
"मैँ कब कहाँ टपक पडूं खुद नहीँ जानता ।"
“बात तो ठीक है प्यारे.......!
मगर विजय का वाक्य अधूरा रह गया । विकास ने आगे बढकर पूरी श्रद्घा के साथ अलफांसे के चरण स्पर्श किए थे ।
अलफांसे ने उसका कान पकड़कर ऊपर उठाते हुए कहा----"जीते रहो !"
" जीत तो गए ही है लूमड़ । तुम बताओ-यहाँ गीत गाते कहां घूम रहे हो?"
" मदद करने आया था तुम्हारी मगर, सही समय पर खिड़की के नीचे न बैठ गया होता तो ये मोहतरमा मेरा ही बैंड बजा चुकी थी ।" कहने के साथ उसकी आखे नजमा पर जम गई ।
"व.... वे क्षण ऐसे थे जिनसे 'तुरंत' दोस्त और दुश्मन की पहचान नहीं की जा सकती यी ।" थोडी हड़बड़ाहट के बाद नजमा कहती चली गई…"उस वक्त मुझे लगा--खिड़की पर शायद असलम का ही कोई साथी है ।"
"बावजूद इसके कि मेरी गोली इसे लगी थी । कहने के साथ वह असलम की लाश की तरफ बढता हुआ बोला…“यह शख्स तुम लोगों के पास मानव बम बनकर आया था ।
उटूदेश्य था-एक ही धमाके में अपने साथ तुम तीनों को भी खत्म कर देना । खासतौर पर तुम दोनो को !" लाश के नजदीक बैठकर उसने विजय-विकास की तरफ़ इशारा किया और फिर लाश के जिस्म पर मौजूद पठानी सूट की शर्ट ऊपर उठाता बोला…“ये देखो।"
तीनो ने असलम के पेट पर मोजूद वेल्ट और बेल्ट के अंदर घुमड़ रहे आर.डी.एक्स को देखा । कुछ देर शांत रहने के बाद विलय ने कहा…"वह हम पहले ही जान चूके हैं प्यारे ।"'
"वह तो 'ऐन वक्त' पर तुम्हारे द्वारा इस पर फायर करने से ही जाहिर है।” लाश के नजदीक से उठकर उनकी तरफ आते हुये अलफांसे ने कहा----“मगर सवाल ये हे--तुमने इसका इरादा कब कैसे भांपा?"
" पहले इसका नजमा के सामने अड़ना । फिर हमारे आने पर दिलजले के बोरे में पुछना और दिलजले के सामने आते ही हमने जो चमक इसकी आंखों देखी वह, वह चमक थी जो इंसान को आंखों में अपने जीवन का सबसे अहम मकसद पाते वक्त उभरती है । केवल एक पल पूर्व, तब...... जब दिलजला कमरे में नही था…इसकी आंखों में निराशा और मायुसी के साए मंडरा रहे थे । एक ही पल बाद दिलजले को देखते ही वे ' जगमगा उठी । उसकी तरफ वढ़ते वक्त इसका हाथ अपने पेट की तरफ बढा था । हमारी छठी इंर्दिय ने कहा…"खतरा ।' और. . उसके बाद तो वह करना ही था जो किया ।"'
"ठीक कह रहे हो जासूस प्यारे । यह तुम्हारे विकास को भी खत्म करने के लालचवश नाकाम हो गया । इस लालच में न पड़ता तो इस वक्त यहां तुम्हारे जिस्म के पुर्जे अलग-अलग बिखरे पड़े होते ।"'
"ऐसा नहीं हो सकता था ।"
" क्यो?"
" तुम जो खिडकी के उस तरफ़ घात लगाए बैठे थे । क्या तुम ऐसा हो जाने देते !"
बड़ी ही आकर्षक मुस्कान उभरी अलफांसे के होंठो पर । बोला'-""कह तो तुम ठीक रहे हो ।"
"अब ! " विजय ने इस तरह कहा जैसे एक चेप्टर पूरा होने पर दुसैरा चैप्टर शुरू किया हो…"सवाल ये उठता है…खिड़की के पीछे घात लगाए तुम बैठे क्यों थे । तुम्हें कैसे पता कि हम यहाँ हैं और ये महाशय हमारा बेड़ा-गर्क ठंडी सड़क करने यहां पहुच रहे हैं?"
"कई लाख रुपए का सवाल है ये ।"’
“हमारे सवाल की कीमत की बघिया मत बैठाओ लूमड़ ! जमाना लाखों का नहीं करोडों का है ।"'
" संभलकर बोलो झकझकिये ।" अलफांसे के होंठो पर बडी ही रहस्यमय मुस्कान उभरी----" तुम्हारे सवाल का जवाब देने की कीमत मांगने बाला हूं ! खुद ही करोंड़ो का कहोगे तो कीमत करोंड़ो में देनी पड़ेगी !"
"मतलब क्या हुआ इस लॉफ्फाजी का?"
“तुम्हें मालूम है, मैं फ्री फंड में कोई काम नहीं किया करता ।"
"मालूम है ।”
"इस वक्त तुम्हें मोहम्मद इकराम की तलाश है ।"
"कैसे जानते हो?"
"उसे छोड़ो । दिमाग केवल इस सच्चाई पर अटकाए रखो कि उस तक पहुंचने का तुम्हारे पास एक और केवल एक ही जरिया था । वह जो इस वक्त लाश में तब्दील हुआ इस कमरे में पड़ा है । इसकी मौत के साथ रास्ता ब्लॉक हो चुका है तुम्हारा । अर्थात मोहम्मद इकराम तक पहुंचने का तुम्हारे पास कोई जरिया नहीं क्या है ।"
"जिंदगी में पहली बार दुरुस्त फरमा रहे हो तूमड़ मियां ।"
"में बता सकता है इस वक्त वह कहाँ है?"
"बता दो । तुम्हारे बच्चे जिएं, बड़े होकर तुम्हारा खून. . . ।"
"वही कह रहा हूं ।” विजय की बात काटकर अलफांसे कहता चला गया----"उसका पता बताने की कीमत देनी होगी । केवल तुम्हारी दुआओं के बदले या की फ्री फडं में मैं उसका पता बताने वाला नहीं हूं !
" यानी यहां तुम हमसे सौदा करने के लिए पधारे हो ।"
"ठीक समझे ।" कहने के साथ उसने आराम से सोफे पर बैठकर पैर सेंटर टेबल पर फैला दिए थे----“अब यह तुम्हें तय करना है कि तुम्हारा सवाल लाखों का था या करोडों का ।"
"अजी हमारे सवाल का क्या है, दो कौडी का भी नहीं था साला ।"
“मुझें मालूम है, पैतरा बदलने में तुम माहिर हो ।" अलफांसे ने पूरे इत्मीनान के साथ कहा-“कानों में घासलेट डालकर सुनो----" मेरे द्वारा मोहम्मद इकराम का पता बताने की कीमत एक लाख अमेरिकी डालर होगी । अर्थात सैंतालीस लाख रुपए। बोलो । मंजूर हो तो उगलूं पता?"
"य. . तो आप क्या बात कर रहे है क्राइमर अंकल?" बहुत देर से खामोश विकास अंतत: बोल ही पड़ा-“आप हमसे सोदेबाजी करेगे? हमसे ।"
"बात जब बडों में चल रही हो तो बच्चों को बीच में नहीं बोलना चाहिए ।"
" क. . किसी बात कर रहे हैं आप । कम से कम हमसे आपने कभी कोई सौदेबाजी नहीं की ।"
"जीवन चक्र का ऐसा कोई नियम नहीं है विकास कि जो पहले नहीं हुआ वह आज नहीं हो सकता । मेरा तो काम ही इन्फॉरमेशंस बेचना है । किसी और को बेचूं या झकझरिय को ।"
"म.. मगर मदद आपने हमारी पहले भी कई बार की है । इस तरह कीमत कभी नहीं मांगी ।"