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Guest
रुची की आवाज सुनकर सुभम समझ गया कि रुचि को मज़ा आने लगा है और वह अपनी पूरी जीभ डाल डाल कर उसकी रसमलाई को चाटने लगा जितना अंदर तक जीभ रुची की बुर में जाता रुचि को उतना ज्यादा मजा आता वह मदहोश हुए जा रही थी उसका पूरा बदन बिस्तर पर कसमसा रहा था उसकी कसमसाहट से उसके बिस्तर पर बिछी चादर पर सिलवटें पड़ चुकी थी,,, जो कि उसकी मस्ती भरी कहानी कह रही थी,,,, तुझे की पुरका कसैला स्वाद शुभम को स्वर्ग का अमृत समान मधुर लग रहा था रुचि पूरी मस्ती के साथ अपनी कमर को उठा उठा कर शुभम से अपनी बुर चटवा रही थी,,
शुभम से रहा नहीं जा रहा था रुचि की मदमस्त जवानी उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी,, वह अपनी जीभ के साथ-साथ अपनी दो उंगली भी रुचि की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसे चोदना शुरू कर दिया,,, शुभम की हरकत की वजह से रुचि की गरम शिकारियों की आवाज और तेज हो गई लेकिन उसे सुनने वाला पूरे घर में उन दोनों के सिवा कोई नहीं था रुची की गर्म सिसकारियां शुभम के कानों में मधुर संगीत की तरह बज रही थी,,, तकरीबन 35 मिनट तक शुभम रुचि की बुर की सेवा करता रहा उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था अब उसका काम उंगली से नहीं बल्कि उसके लंड से होने वाला था वह पागल हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे अपना सर इधर उधर पटक रही थी,,,
ओहहहह,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब उंगली नहीं तेरा लंड मेरी बुर में चाहिए डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में आज की सुहागरात को सफल कर दे मेरी जिंदगी की यादगार रात बना दे सुभम,,,,आहहहहह,,,
ओ मेरी रानी मेरी रुचि मेरी रंडी आज की रात तेरे लिए यादगार कर दूंगा मेरा मोटा लंड तेरी बुर की ऐसी चुदाई करेगा कि तेरी बुर की धज्जियां उड़ जाएगी,,, मेरी रंडी मेरी रुचि,,,,,
हां हां मैं तेरी रंडी हूं साले हरामजादे मैं तेरी रंडी हूं ,,,मुझे चोद मुझे मस्त कर दे,,,अपना मोटा लौड़ा मेरी बुर में डाल दे,,, मादरचोद,,,,( रुचि बदहवास होकर अब उसे गाली दे रही थी क्योंकि उसे गाली देने में उसे मजा आ रहा था पहली बार जिंदगी में वह किसी को गाली दे रही थी और वह भी इतनी गंदी गंदी,,, लेकिन शुभम को उसकी दी हुई गंदी गंदी गालियां भी आज बहुत ही अच्छी लग रही थी बल्कि वह गालियां उसका जोश बढ़ा रही थी और उसी गांधी के बदौलत वह अपनी पोजीशन बदलते हुए दोनों टांगों के बीच में एकदम बराबर घुटने के बल बैठ गया और रुचि की मदमस्त गांड को अपनी दोनों हथेली नीचे ले जाकर उसकी गांड को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ खींच कर अपनी जांघों पर रख लिया,, शुभम की इस हरकत के चलते हैं रुचि की सांसो की गति धुकनी की तरह चलने लगी,,, क्योंकि उसे पता था कि अब अगले ही पल उसका मोटा लंड उसकी बुर में घुसने वाला है उसका मुंह खुला का खुला था वह अपनी प्यासी आंखों से अपनी टांगों के बीच की स्थिति का जायजा ले रही थी,,,, धीरे-धीरे करके उसे सुभम का मोटा लंड अपनी बुर के अंदर जाता हुआ नजर आ रहा था जैसे-जैसे अंदर जा रहा था वैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी साथ में उसके बदन की मस्ती भी बढ़ती जा रही थी देखते ही देखते शुभम ने अपने पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया,,,
शुभम अब अपना लंड रुचि की बुर में गाड़ दिया था अब वह अपनी हल्के हल्के कमर हिलाना शुरू कर दिया था रूचि की चुदाई उसके कमरे में उसी के पलंग पर हो रही थी,,, रुचि पागलों की तरह शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके हरित धक्के का आनंद लेना चाहती थी इसलिए अपनी दोनों बाहें फैलाकर शुभम को अपनी और आने का इशारा की और शुभम भी रुचि का इशारा पाकर उसके ऊपर पसर गया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम के कमर की रफ्तार बढ़ने लगी,,,
रुचि की गीली बुर में से फच फच की आवाज आ रही थी रुचि मदहोश हुए जा रही थी वह शुभम को अपनी बाहों में कस के दबोचे हुए थी,,,
शुभम अपनी पोजीशन बदले बीना उसी स्थिति में लगभग 30 मिनट तक रुचि की चुदाई करता रहा आखिरकार रूचि हांफने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी,,, शुभम की भी यही स्थिति थी आखिरकार वह काफी देर से अपने लंड के उबलते हुए लावा को रोक कर रखा था दस पंद्रह जबरदस्त धक्को के साथ ही दोनों एक साथ झड़ गए,,,,
रुचि के शादी की सालगिरह वाली रात को सुभम सुबह के 5:00 बजे तक उसकी जबरदस्त हर आसन में चुदाई किया रुचि एकदम मस्त हो गई बहुत थक कर चूर हो गई और सुबह 5:00 बजे उसकी आंख लग गई उसके सोते ही सुबह मुझे कमरे से बाहर निकल कर अपने घर में चला गया,,,।
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शुभम से रहा नहीं जा रहा था रुचि की मदमस्त जवानी उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी,, वह अपनी जीभ के साथ-साथ अपनी दो उंगली भी रुचि की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसे चोदना शुरू कर दिया,,, शुभम की हरकत की वजह से रुचि की गरम शिकारियों की आवाज और तेज हो गई लेकिन उसे सुनने वाला पूरे घर में उन दोनों के सिवा कोई नहीं था रुची की गर्म सिसकारियां शुभम के कानों में मधुर संगीत की तरह बज रही थी,,, तकरीबन 35 मिनट तक शुभम रुचि की बुर की सेवा करता रहा उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था अब उसका काम उंगली से नहीं बल्कि उसके लंड से होने वाला था वह पागल हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे अपना सर इधर उधर पटक रही थी,,,
ओहहहह,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब उंगली नहीं तेरा लंड मेरी बुर में चाहिए डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में आज की सुहागरात को सफल कर दे मेरी जिंदगी की यादगार रात बना दे सुभम,,,,आहहहहह,,,
ओ मेरी रानी मेरी रुचि मेरी रंडी आज की रात तेरे लिए यादगार कर दूंगा मेरा मोटा लंड तेरी बुर की ऐसी चुदाई करेगा कि तेरी बुर की धज्जियां उड़ जाएगी,,, मेरी रंडी मेरी रुचि,,,,,
हां हां मैं तेरी रंडी हूं साले हरामजादे मैं तेरी रंडी हूं ,,,मुझे चोद मुझे मस्त कर दे,,,अपना मोटा लौड़ा मेरी बुर में डाल दे,,, मादरचोद,,,,( रुचि बदहवास होकर अब उसे गाली दे रही थी क्योंकि उसे गाली देने में उसे मजा आ रहा था पहली बार जिंदगी में वह किसी को गाली दे रही थी और वह भी इतनी गंदी गंदी,,, लेकिन शुभम को उसकी दी हुई गंदी गंदी गालियां भी आज बहुत ही अच्छी लग रही थी बल्कि वह गालियां उसका जोश बढ़ा रही थी और उसी गांधी के बदौलत वह अपनी पोजीशन बदलते हुए दोनों टांगों के बीच में एकदम बराबर घुटने के बल बैठ गया और रुचि की मदमस्त गांड को अपनी दोनों हथेली नीचे ले जाकर उसकी गांड को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ खींच कर अपनी जांघों पर रख लिया,, शुभम की इस हरकत के चलते हैं रुचि की सांसो की गति धुकनी की तरह चलने लगी,,, क्योंकि उसे पता था कि अब अगले ही पल उसका मोटा लंड उसकी बुर में घुसने वाला है उसका मुंह खुला का खुला था वह अपनी प्यासी आंखों से अपनी टांगों के बीच की स्थिति का जायजा ले रही थी,,,, धीरे-धीरे करके उसे सुभम का मोटा लंड अपनी बुर के अंदर जाता हुआ नजर आ रहा था जैसे-जैसे अंदर जा रहा था वैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी साथ में उसके बदन की मस्ती भी बढ़ती जा रही थी देखते ही देखते शुभम ने अपने पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया,,,
शुभम अब अपना लंड रुचि की बुर में गाड़ दिया था अब वह अपनी हल्के हल्के कमर हिलाना शुरू कर दिया था रूचि की चुदाई उसके कमरे में उसी के पलंग पर हो रही थी,,, रुचि पागलों की तरह शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके हरित धक्के का आनंद लेना चाहती थी इसलिए अपनी दोनों बाहें फैलाकर शुभम को अपनी और आने का इशारा की और शुभम भी रुचि का इशारा पाकर उसके ऊपर पसर गया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम के कमर की रफ्तार बढ़ने लगी,,,
रुचि की गीली बुर में से फच फच की आवाज आ रही थी रुचि मदहोश हुए जा रही थी वह शुभम को अपनी बाहों में कस के दबोचे हुए थी,,,
शुभम अपनी पोजीशन बदले बीना उसी स्थिति में लगभग 30 मिनट तक रुचि की चुदाई करता रहा आखिरकार रूचि हांफने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी,,, शुभम की भी यही स्थिति थी आखिरकार वह काफी देर से अपने लंड के उबलते हुए लावा को रोक कर रखा था दस पंद्रह जबरदस्त धक्को के साथ ही दोनों एक साथ झड़ गए,,,,
रुचि के शादी की सालगिरह वाली रात को सुभम सुबह के 5:00 बजे तक उसकी जबरदस्त हर आसन में चुदाई किया रुचि एकदम मस्त हो गई बहुत थक कर चूर हो गई और सुबह 5:00 बजे उसकी आंख लग गई उसके सोते ही सुबह मुझे कमरे से बाहर निकल कर अपने घर में चला गया,,,।
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